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DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 5 Scene 1

by Akamist
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गहरे सन्नाटे के गुज़र जाने के बाद आज फिर मीरास महल में हुल्लड़ शुरू हो गई। मंत्रियों का आना ...

DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 7

by Akamist
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पुराने ज़ख्म ताजा होकर तकलीफ़देह बन जाते है। अम्मा साहब भी इस वक़्त उसी तकलीफ़ में थीं, लेकिन उनके ...

DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 6

by Akamist
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शाम ग़मग़ीन थी। महल में उदासी का सन्नाटा फैला हुआ था। बादलों की गरज की गूंज चारो तरफ़ चक्कर ...

DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 5

by Akamist
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SCENE 5.आसीगाह के कैदियों के बीच डॉक्टर हम्ज़ा का नया वजूद आ गया। वो किनारे बैठा हुआ शायद अपनी ...

DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 4

by Akamist
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"शेख़ बाबा हम्ज़ा की बहन आरामगाह में लाईं जा चुकीं है।" रुक्मणि ने उनके कमरे के दरवाज़े पर से ...

DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 3

by Akamist
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SCENE 3."इसमें मेरी बेटी की तज़लील क्यों हुई, उसकी क्या ग़लती थी?" रेड कोर्ट पर बैठे हुए कम रंगत ...

DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 2.

by Akamist
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अम्हेल को आवाज़ देते देते मैथिली उसके कमरे की छत पर पहुंच गई "तुम्हें सर्दियों में क्यूं इस क़दर ...

DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 4 Scene 1.

by Akamist
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रात कितनी ही घनी और गहरी हो, सुबह का सूरज तो निकलना ही है। हर रोज़ की तरह आज ...

DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 3 Scene 5.

by Akamist
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शहर में चारो तरफ़ ठंड का सन्नाटा छाने लगा, सड़को पर गहरे अंधेरे ठंडे माहौल को और ठंडा करने ...

DASTAN-E-KARB - भ्रम से परे क्या है? - Chapter 3 Scene 4.

by Akamist
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महल में, जहां कई राज़ को राज़ रखने का ज़िक्र था, वहीं अम्हेल भी राज़ बनकर महल आई थी, ...