Vrajesh Shashikant Dave stories download free PDF

अन्तर्निहित - 42

by Vrajesh Shashikant Dave

[42]“कपिल महोदय, क्या प्रमाण लेकर आज ऊपस्थित हुए हो?” न्यायाधीश ने पूछा।“महाशय, कभी कभी व्यक्ति का चरित्र ही स्वयं ...

अन्तर्निहित - 41

by Vrajesh Shashikant Dave
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[41]राहुल, नदीम, सोनिया, कपिल, सपन, निहारिका। सभी एक कक्ष में बैठकर न्यायालय द्वारा दिए गए तीन दिनों के समय ...

अन्तर्निहित - 40

by Vrajesh Shashikant Dave
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[40]अभीतक शांति से सब कुछ सुन रहे येला और वत्सर के अधिवक्ता श्री हरीश ने खड़े होकर कहा, “चलो, ...

अन्तर्निहित - 39

by Vrajesh Shashikant Dave
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[39]न्यायालय से ही येला को वीडियो कॉल किया गया। येला ने उसे लिया।“येला जी, फिरोजपुर न्यायालय के न्यायाधीश आपसे ...

अन्तर्निहित - 38

by Vrajesh Shashikant Dave
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[38]“क्या तुमने मीरा की हत्या की है?” न्यायाधिस ने पूछा।“जी नहीं।” वत्सर ने कहा।“क्या तुम मीरा को जानते हो?”“नहीं।”“कपिल ...

अन्तर्निहित - 37

by Vrajesh Shashikant Dave
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[37]“राहुल, तुमने वत्सर को छोड़ दिया? हमें अपने साथ लेकर चलना था।”“सोनिया, तुम जानती हो कि वहाँ सारा गाँव ...

अन्तर्निहित - 36

by Vrajesh Shashikant Dave
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[36]“प्रात: काल की नूतन ऊर्जा और गुरुजी के आशीष से मैं अपने मार्ग पर चलने को सज्ज हूँ। तुम ...

अन्तर्निहित - 35

by Vrajesh Shashikant Dave
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[35]वत्सर ने संध्या आरती सम्पन्न की। कृष्ण के अधरों पर स्थित बाँसुरी को उठाया और शीला पर बैठकर नित्यक्रम ...

अन्तर्निहित - 34

by Vrajesh Shashikant Dave
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[34]शैल ने सारा के साथ आश्रम में प्रवेश किया। संध्या हो चुकी थी। आश्रम में विशेष गतिविधियां नहीं दिख ...

अन्तर्निहित - 33

by Vrajesh Shashikant Dave
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[33]गहन सांस लेकर वह बोली, “यह गांधी का देश है। मेरी बात सुनकर तुम्हें बूरा लग सकता है। संभव ...