Deepti Gurjar stories download free PDF

इश्क और इंतकाम - 1

by Deepti Gurjar
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Chapter 1 नफ़रत कि पहली चिंगारी"कार्यालय की इन ...

समय का कैदी

by Deepti Gurjar
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शहर के किनारे एक पुराना, वीरान इलाका था, जहाँ सूरज ढलते ही सन्नाटा अपनी चादर बिछा देता था। इसी ...

इश्क और इस्तीफा - 10

by Deepti Gurjar
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हाथ में थमी वह पुरानी, पीली पड़ चुकी चाबी काव्या को बेहद भारी महसूस हो रही थी। यह सिर्फ ...

इश्क और इस्तीफा - 9

by Deepti Gurjar
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काव्या की बातों ने विराज के भीतर सुलगती आत्म-ग्लाानि की आग पर जैसे ठंडे पानी के छींटे डाल दिए ...

इश्क और इस्तीफा - 8

by Deepti Gurjar
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विराज के 'इस्तीफे' शब्द ने कमरे में जैसे समय को रोक दिया था। काव्या की आँखों में आँसू थे, ...

इश्क और इस्तीफा - 7

by Deepti Gurjar
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कमरे के अंदर की हवा में बरसों से कैद सन्नाटा अब काव्या की सिसकियों और विराज की भारी सांसों ...

इश्क और इस्तीफा - 6

by Deepti Gurjar
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कमरे के भीतर का दृश्य देखकर काव्या सुन्न खड़ी थी। वह चीख जो उसके मुँह से निकली थी, अब ...

आखरी घंटी - 1

by Deepti Gurjar
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पहाड़ियों की चोटी पर स्थित उस विशाल और जर्जर हवेली को लोग 'चीखती हवेली' कहते थे। लोगों का मानना ...

इश्क और इस्तीफा - 5

by Deepti Gurjar
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Chapter 5रात के सन्नाटे में काव्या की आँखों से नींद कोसों दूर थी। वह फोटो रह-रहकर उसके सामने आ ...

इश्क और इस्तीफा - 4

by Deepti Gurjar
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विराज मल्होत्रा के चले जाने के बाद भी काव्या वहीं हॉल में खामोश खड़ी रही। उसके दिल की धड़कनें ...