Chapter 1 नफ़रत कि पहली चिंगारी"कार्यालय की इन ...
शहर के किनारे एक पुराना, वीरान इलाका था, जहाँ सूरज ढलते ही सन्नाटा अपनी चादर बिछा देता था। इसी ...
हाथ में थमी वह पुरानी, पीली पड़ चुकी चाबी काव्या को बेहद भारी महसूस हो रही थी। यह सिर्फ ...
काव्या की बातों ने विराज के भीतर सुलगती आत्म-ग्लाानि की आग पर जैसे ठंडे पानी के छींटे डाल दिए ...
विराज के 'इस्तीफे' शब्द ने कमरे में जैसे समय को रोक दिया था। काव्या की आँखों में आँसू थे, ...
कमरे के अंदर की हवा में बरसों से कैद सन्नाटा अब काव्या की सिसकियों और विराज की भारी सांसों ...
कमरे के भीतर का दृश्य देखकर काव्या सुन्न खड़ी थी। वह चीख जो उसके मुँह से निकली थी, अब ...
पहाड़ियों की चोटी पर स्थित उस विशाल और जर्जर हवेली को लोग 'चीखती हवेली' कहते थे। लोगों का मानना ...
Chapter 5रात के सन्नाटे में काव्या की आँखों से नींद कोसों दूर थी। वह फोटो रह-रहकर उसके सामने आ ...
विराज मल्होत्रा के चले जाने के बाद भी काव्या वहीं हॉल में खामोश खड़ी रही। उसके दिल की धड़कनें ...