ऋग्वेद सू्क्ति(55) की व्याख्याशतं इन्नु शरदो अन्ति देवाऋग्वेद --1/89/9भावार्थ--हे ईश्वर ! हम सौ वर्ष जिएँ।ऋग्वेद के इस मंत्र का ...
भस्मोपनिषद--यह उपनिषद के क्रम में 96 वें स्थान पर आया है।भस्मोपनिषद् एक लघु शैव उपनिषद् है, जिसमें भस्म (विभूति) ...
मुक्तिकोपनिषद--नीचे मुक्तिकोपनिषद् का पूरा उपलब्ध संस्कृत पाठ क्रम से दिया जा रहा है और प्रत्येक मंत्र/श्लोक के बाद सरल ...
हयग्रीव उपनिषद--हयग्रीव उपनिषद वैष्णव परम्परा का एक लघु उपनिषद है, जिसमें भगवान हयग्रीव को परम ज्ञान, विद्या और ब्रह्मविद्या ...
मुक्तिकोपनिषद--नीचे मुक्तिकोपनिषद् का पूरा उपलब्ध संस्कृत पाठ क्रम से दिया जा रहा है और प्रत्येक मंत्र/श्लोक के बाद सरल ...
कुण्डिकोपनिषद--कुण्डिकोपनिषद् सामवेद की संन्यास-उपनिषदों में गिनी जाती है और इसमें 28 मन्त्र/श्लोक हैं। इसका मुख्य विषय संन्यास-विधि, वैराग्य, आत्मचिन्तन ...
सावित्री उपनिषद --सावित्री उपनिषद् सामवेद से सम्बद्ध लघु उपनिषद् है और उपलब्ध पाठ में मुख्यतः १५ मन्त्र/खंड हैं। इसका ...
आत्मोपनिषद--आत्मोपनिषद् का सम्बन्धअथर्ववेद से माना जाता है।आत्मोपनिषद का मुख्य विषय: आत्मा का स्वरूप, आत्मज्ञान, ब्रह्मज्ञान और मुक्तिमुख्य शिक्षा: मनुष्य ...
पाशुपतोपनिषद--यह उपनिषद अथर्ववेद सेसम्बद्ध माना जाता है।यह मुख्यतः भगवान शिव के पाशुपत स्वरूप, शिव-तत्त्व और साधना से संबंधित है।पाशुपतब्रह्मोपनिषद् ...
अवधूतोपनिषद--अवधूतोपनिषद् का मूल संस्कृत पाठ अपेक्षाकृत संक्षिप्त है और इसमें भगवान् दत्तात्रेय तथा सांकृति का संवाद है। उपलब्ध संस्कृत ...