Jyoti Prajapati stories download free PDF

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 26

by Jyoti Prajapati
  • 243

वंशिका जानती थी कि लोग कहेंगे—"मर्द तो मासूम होता है, वह तो फिसल गया, औरत ने ही उसे संभाला ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 25

by Jyoti Prajapati
  • 795

वंशिका अपने अंधेरे कमरे में अकेले बैठी थी। पंखे की आवाज़ उसे किसी पुराने जख्म को कुरेदने जैसी लग ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 24

by Jyoti Prajapati
  • 637

शाम ढलते ही जब भूपेंद्र और काया घर लौटे, तो घर की हवा में एक अजीब सी भारीपन थी। ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 23

by Jyoti Prajapati
  • (0/5)
  • 591

आधी रात के उस सन्नाटे में, जब भूपेंद्र और काया एक-दूसरे के वजूद में खोए हुए थे, अचानक पास ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 22

by Jyoti Prajapati
  • (0/5)
  • 789

शाम का धुंधलका गहराने लगा था। आसमान में नारंगी और बैंगनी रंग की लकीरें उभर आई थीं। घर में ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 21

by Jyoti Prajapati
  • (5/5)
  • 993

अगली सुबह जब घर के सदस्य डाइनिंग टेबल पर नाश्ते के लिए इकट्ठा हुए, तो सबकी आँखें फटी की ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 20

by Jyoti Prajapati
  • (3.9/5)
  • 1.2k

बाजार से लौटते वक्त काया के कदम हवा में थे, लेकिन दिमाग सचेत था। उसे पता था कि अगर ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 19

by Jyoti Prajapati
  • (5/5)
  • 957

अगले कुछ दिन घर के भीतर एक अजीब से भारीपन में बीते। ऊपर से सब कुछ शांत दिखता था—वही ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 18

by Jyoti Prajapati
  • (0/5)
  • 1k

जिम में सुबह की गहमागहमी अपने चरम पर थी। ट्रेडमिल के चलने की आवाज़ें और भारी संगीत के बीच ...

डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी - 17

by Jyoti Prajapati
  • 867

अगली सुबह घर में सूरज की रोशनी के साथ एक नया तनाव भी उतरा। ऊपरी तौर पर सब सामान्य ...