भगवान महावीर स्वामी की वाणी“अहिंसा परमो धर्मः।सव्वे जीवा वि इच्छंति, जीविउं न मरिज्जिउं।।”(अहिंसा ही सबसे बड़ा धर्म है। महावीर ...
महाराज भर्तृहरि की वाणीमहाराज भर्तृहरि उज्जैन के महान राजा थे, जिन्होंने वैराग्य होने पर राजपाठ त्याग दिया और परम ...
“प्रभु भल कीन्ह मोहि सिख दीन्हीं। मरजादा पुनि तुम्हरी कीन्हीं॥ढोल गवाँर सूद्र पसु नारी। सकल ताड़ना के अधिकारी॥”गहरे अर्थ ...
“दादू इस संसार में, दोई रत्न अमोल।एक साईं एक संत है, जे कोई जानै तोल॥”गहरे अर्थ की व्याख्यासंत दादू ...
“संसार की चिंता छोड़ो और यह खोजो कि यह चिंता करने वाला ‘मैं’ कौन हूँ? जब तक अहंकार जीवित ...
मक्खी बैठे शहद पर, पंख रहे लपटाए।रज्जब विकल होय धुने सिर, हाथ मले पछताए॥संत रज्जब जी समझाते हैं कि ...
“भीखा बात अगम की, कहन सुनन की नाहिं।जो जाने सो कहे नहीं, कहे सो जाने नाहिं॥”संत भीखा साहब कहते ...
“रे बंदे तू काहे के तोत दिवाना।काल अचाका पकरिहै तोहीं, जैहैं प्रान पराना॥”संत धरणीदास जी जीव को सचेत करते ...
गुजरात के राजकोट जिले के वीरपुर गाँव के परम सिद्ध, त्यागी और साक्षात् अन्नपूर्णा के परम भक्त संत जलाराम ...
भारत के महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के एक और परम सिद्ध, निश्छल और विट्ठल भगवान के अनन्य भक्त संत ...