व्यक्ति कब कैसे इतना इतना स्वार्थी बन जाता है पता ही नहीं चलता।पर ये उस व्यक्ति की गलती नहीं ...
मेरे विचार बड़े अजीब से है ना, न इनमें कोई तुक है न ताव यानि सारे विचार बास की ...