SHREYA INDUSHREE stories download free PDF

जिस जीवन में तुम थे - 4

by Indushree
  • 1k

कुछ दिनों बाद समर को एक और पत्र मिला।इस बार कागज़ के साथ एक पुरानी तस्वीर थी।लेकिन तस्वीर में ...

सफ़ेद शॉल - 1

by Indushree
  • 1.3k

तुम्हारे हिस्से का मौन मेरे हिस्से में आया.... और तेरा मन मेरे मन को भाया.....यामिनी की मृत्यु के सातवें ...

जिस जीवन में तुम थे - 3

by Indushree
  • 1.4k

अप्रैल की शुरुआत में शहर पर एक अजीब-सी धूप उतरती है।न वह सर्दियों की कोमल धूप होती है, न ...

जिस जीवन में तुम थे - 2

by Indushree
  • 1.4k

किसी-किसी रात समय सो जाता है।घड़ी चलती रहती है, रात आगे बढ़ती रहती है, लेकिन भीतर कहीं सब कुछ ...

जिस जीवन में तुम थे - 1

by Indushree
  • 2.7k

कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँगलियों को नहीं छूते, ...

क़िस्से ज़िंदगी के - 2

by Indushree
  • 1.7k

चंडीगढ़ की हल्की बारिश में सुखना झील के किनारे नायरा अपने कैमरे और नोटबुक के साथ खड़ी थी। वह ...

ख़ामोशी के उस पार

by Indushree
  • (4.1/5)
  • 1.5k

खामोशी के उस पार......देहरादून की सर्द हवाएँ हर शाम को थोड़ा और सुस्त बना देती थीं।शहर का आसमान यहाँ ...

क़िस्से ज़िंदगी के - 1

by Indushree
  • (0/5)
  • 2.6k

प्राग की सर्द रात थी।व्लतावा नदी के किनारे हवा में नमी थी, और शहर की रोशनी पानी पर सुनहरी ...