उषा जरवाल stories download free PDF

शिक्षा या सुव्यवस्थित व्यवसाय ?

by उषा जरवाल
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“बच्चा वही, स्कूल वही… फिर हर साल ‘एडमिशन फीस’ क्यों?” “जब मैंने अपने बच्चे का पहली बार स्कूल में ...

मूक वेदना की पुकार

by उषा जरवाल
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ईश्वर की इस सृष्टि में मनुष्य को केवल बुद्धि और वाणी ही नहीं मिली, उसे एक और अमूल्य उपहार ...

जीवन : एक अनमोल अवसर

by उषा जरवाल
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यह विराट सृष्टि अनंत रूपों, रंगों और जीवों से परिपूर्ण है। कहीं नभ में उड़ते पक्षी हैं, कहीं धरती ...

संघर्ष और पहचान : एक शिक्षिका की कहानी

by उषा जरवाल
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खिड़की के उस पार आसमान में बादल घिर आए थे। सीमा जी किताबों से भरी अलमारी के सामने खड़ी ...

रोबोट माँ

by उषा जरवाल
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सुबह के चार बजे थे। घर गहरी नींद में डूबा हुआ था, पर उसके भीतर की चेतना पहले ही ...

दशानन की पीड़ा

by उषा जरवाल
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लंका का आकाश धुएँ से भर चुका था। अशोक वाटिका जलकर राख हो रही थी, और हवाओं में जलते ...

पीहर

by उषा जरवाल
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माँ से मायका .... पिता से पीहर, और भी न जाने कितने ही नाम हैं – बाबुल के आँगन ...

विचित्र संख्या

by उषा जरवाल
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भारत विश्वगुरु कहलाता था | आध्यात्म, शिक्षा, चिकित्सा, विज्ञान कोई भी क्षेत्र हो भारत हर क्षेत्र में अग्रणी ही ...

स्वप्न बसेरा ... हुआ मेरा

by उषा जरवाल
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दो साल पहले की बात है, जब हमने गुरुग्राम में अपना नया घर लिया था | हमारा बजट अधिकतम ...

मैं तुलसी तेरे आँगन की

by उषा जरवाल
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कुछ दिन पहले मुझे 10 – 15 दिनों के लिए मुझे अपने घर से कहीं बाहर जाना पड़ा | ...