Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
srishti tiwari

महफ़िल में तेरे सोंग न चलेंगे , ग़म तो यही है , ग़म तो यही है । किस्से अरिजीत के फिल्म इंडस्ट्री में, कम तो नहीं है, कम तो नहीं है । कितनी दफा गानों को तेरे सुनके , दिल ने मेरे आराम किया । चन्ना मेरेया Srishti Tiwari Shaan - srishti tiwari

Shailesh Joshi

આ સંસાર ક્યાં જઈને ઊભો રહેશે ? ખબર નથી, સારો માણસ સતત લોકો શું કહેશે ? ની ચિંતામાં રહેશે, ને ખોટા ને એવી કંઈ પડી નથી, આ સંસાર ક્યાં જઈને ઊભો રહેશે ? ખબર નથી પૈસાવાળા લોકો કરકસર, ને અમુક તો એમાં ચિંગુસાઈ પણ કરે છે ને જેની પાસે લગભગ કંઈ નથી તોયે એ હોય એટલો દેખાડો કરે છે, આ સંસાર ક્યાં જઈને ઊભો રહેશે ? ખબર નથી થોડા ઘણા પૈસા પણ જો ક્યાંક અવળા વપરાઈ જાય, તો પૈસાવાળાને રાત્રે ઊંઘ પણ નથી આવતી, અને જેની પાસે કંઈ નથી, એની પાસે જો થોડો ઘણો પણ વધારે પૈસો આવી જાય, તો એ હવામાં ઊડે છે, આ સંસાર ક્યાં જઈને ઊભો રહેશે ? ખબર નથી

Jyoti Gupta

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Dada Bhagwan

થાણેની હવામાં અનેરો ઉમંગ, ભવ્ય ત્રિમંદિર પ્રતિષ્ઠાનો રંગ! ત્રિમંદિર એટલે આધ્યાત્મિક પ્રગતિ માટેનું નિષ્પક્ષપાતી મંદિર! ત્રિમંદિર વિશે વધુ વાંચો અહીં: https://dbf.adalaj.org/haKDYYCK #thane #PranPratishtha #temples #templesofindia #DadaBhagwanFoundation

Falguni Dost

જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻

Manish Patel

अच्छी भूमिका, अच्छे लक्ष्य और अच्छे विचारों वाले लोगों को हमेशा याद किया जाता है मन में भी, शब्दों में भी और जीवन में भी good morning - Manish Patel

Shweta pandey

कभी-कभी कुछ किताबें केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं, और “अंतर्मन” ऐसी ही एक संवेदनशील कृति है जो पाठक को उसके अपने भावों से जोड़ देती है। यह पुस्तक शब्दों से अधिक एहसासों की अभिव्यक्ति है, जहाँ हर कविता आत्मसंवाद बन जाती है और हर पंक्ति दिल की गहराइयों को छूती है। छत्तीसगढ़ की संवेदनशील लेखिका श्वेता पांडेय ने इस काव्य-संग्रह में प्रेम, विरह, माँ-पिता का स्नेह, रिश्तों की जटिलताएँ, समाज की सच्चाइयाँ और आत्मचिंतन जैसे जीवन के विविध रंगों को बड़ी सादगी और गहराई से उकेरा है। “वो पहला इश्क मेरा”, “माँ का प्यार” और “अब खुद से मिलने चली हूँ” जैसी रचनाएँ पाठक को अपने भीतर झाँकने पर मजबूर करती हैं। इससे पूर्व प्रकाशित उनका कविता-संग्रह “सफर कोरे पन्नों की” पाठकों द्वारा सराहा जा चुका है और सोशल मीडिया साहित्यिक मंचों पर उनकी लेखनी को व्यापक पहचान मिली है। Top National Writer Of India 2024 के अंतर्गत Top Epic Pen Star Award सहित अनेक सम्मान प्राप्त कर चुकी श्वेता पांडेय ने 40 से अधिक पुस्तकों में सह-लेखिका के रूप में योगदान दिया है। “अंतर्मन” उन सभी पाठकों के लिए है जो कविता में शोर नहीं, बल्कि संवेदना, सच्चाई और आत्मा की आवाज़ तलाशते हैं - एक ऐसी पुस्तक जो पढ़ते-पढ़ते पाठक को उसके अपने अंतर्मन से जोड़ देती है। https://amzn.in/d/3Wv66DN

Imaran

💔imran 💔

ziya

इंसान न उम्मीद भी उसी से होता है जिससे उसे उम्मीद ज्यादा होती है

ziya

हम तो फ़ना हो गए ग़ालिब उनकी आँखे देख कर पता नहीं वो आईना कैसे देखते होंगे

ziya

अर्ज़ किया है मोहब्बते में कभी कभी वादे टूट जाते है इश्क़ के कच्चे धागे टूट जाते है कभी न कभी तो झूठ बोलता होगा चाँद भी शायद इसलिए रूठ कर तारे टूट जाते है

Deepak Bundela Arymoulik

ये मोहब्बत थी या किसी तन्हा शाम की आदत, जो धीरे-धीरे मेरे कमरे में फैल गई। तुम आईं और शब्दों को कम बोलना सिखा गईं, मैंने ख़ामोशी को तुम्हारा जवाब समझ लिया। मैं हर रोज़ अपने हिस्से का सच तुम्हारे नाम लिखता रहा, तुम हर बार उसे पढ़े बिना मोड़कर रख देती रहीं। कभी-कभी सोचता हूँ— इश्क़ वो नहीं होता जो मिल जाए, इश्क़ शायद वो होता है जो आदमी को थोड़ा और अकेला कर दे। आज भी तुम्हारी याद किसी पुराने खत की तरह है— ना फाड़ सकता हूँ, ना दोबारा पढ़ने की हिम्मत है। आर्यमौलिक

Soni shakya

दुनिया समझेगी ये सिर्फ लफ्जों का खेल है.. पर ये सिर्फ तुम जानोगे कि.. मेरी हर पंक्ति में सिर्फ तुम ही तुम हो.. - Soni shakya

ziya

मीठी मीठी बाते करने वाले ही अक्सर जख्म गहेरा दे जाते है

Parmar Mayur

जिंदगी में मुश्किल समय एक Puzzle की तरह होता है। समाधान भी मिलता है, शांत दिमाग और स्थिर ह्रदय से सोचने पर कोई भी विपरीत परिस्थितियों में भी रास्ता मिलता हैं।

Urvashi Oza

क्यों हर रिश्ता खराब जाता है मुझसे खुद को पूरा पूरा झोंक देने के बाद भी why....

Urvashi Oza

सो काम होते हुए भी मैं ही क्यों एक बेकार हु क्यों भटकती रहती हु किसी की तलाश में

અનિકેત ટાંક

યુદ્ધ તો ઘણા થયા છે, પણ અહીં લડાઈ તલવારની નહીં, વિચાર અને જ્ઞાનની છે. “તક્ષશિલા – સિટી ઓફ નૉલેજ” 27 ભાગ સુધી આવી પહોંચી છે, પણ મૂળ પ્રશ્ન હજી પણ ખુલ્લો છે:જો જ્ઞાનને જ સળગાવી દઈએ, તો બચેલા લોકો ખરેખર જીત્યા ગણાય?જો તમને history + mystery + વિચાર એમ ત્રણેયનો mix ગમતો હોય, તો આ series તમારી માટે છે. 🔗 All parts are here : https://www.matrubharti.com/novels/51360/takshshila-by-n-a

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास ठंडी हवा भीतर से नशीली यादों की ठंडी हवा आती हैं l तभी सर्द रातें तन मन को भड़का जाती हैं ll मुलाकात बहुत छोटी ही सही पर हसीन सी l मुस्कुराहट की लहरे दिल से टकराती हैं ll तेज बयारो ने इस तरह घेरा डाला हुआ कि l रात कंबल के गर्माहट से लिपटकर बीती हैं ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Kartik Kule

की सूखे पत्तोसा में बदल जाऊंगा बातोंसे नहीं में हवाओसेभी टूट जाऊंगा अगर साथ मेरा पाना चाहती हो तो याद रखना में इसेहि बिखर जाऊंगा - Kartik Kule

Kartik Kule

इतनाही रूठे हो हमसे कभी तो हमे रुलाया करो जलती चीतापार हमको लिटाकर फ़िरसे न बुलाया करो - Kartik Kule

Sonu Kumar

#14 भारतीय राष्ट्रिय नागरिकता रजिस्टर NRCI - National Register for Citizenship of India विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अनुसार भारत में 2 करोड़ के लगभग अवैध आर्थिक विदेशी (illegal economic imigrant) रह रहे है। असम, बंगाल, पूर्वोत्तर के अलावा ये पूरे भारत में फैले हुए है। इन अवैध विदेशियों में प्रताड़ित शरणार्थी भी है, और आर्थिक अवसरों की तलाश में आये विदेशी (illegal economic migrant) भी है। इनकी वजह से भारत के संसाधनों पर भार बढ़ रहा है, और ये हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा है। इन अवैध विदेशी निवासीयों में से कई समूह हिंसक अपराधो एवं तस्करी आदि में भी लिप्त है। यदि पाकिस्तान एवं चीन इन्हें बंगलादेशी सीमा के माध्यम से हथियार भेजना शुरु कर देते है तो ये अवैध विदेशी निवासी भारत में एक हिंसक गृह युद्ध शुरू कर सकते है। गृह मंत्री श्री अमित शाह ने सन 2019 में संसद में भरोसा दिलाया था कि जल्दी ही वे देश व्यापी NRC का ड्राफ्ट लायेंगे। किन्तु सरकार ने अभी तक NRC का ड्राफ्ट तक सामने नहीं रखा है। असम में NRC का जो ड्राफ्ट लागू किया गया था, उसमें गंभीर विसंगितियों एवं कमियां थी। उदाहरण के लिए असम का NRC न तो अवैध रूप से रह रहे आर्थिक विदेशियों को चिन्हित करता है, और न ही उन्हें डिपोर्ट करने की कोई व्यवस्था देता है। दुसरे शब्दों में, CAA एवं असम में किये गए NRC ने इस समस्या का समाधान नहीं किया है, बल्कि इस तरह की प्रोपेगेंडा खड़ा कर दिया है कि इस समस्या को सुलझा लिया गया है। हमारे द्वारा प्रस्तावित NRCI में इस तरह के प्रावधान किये गए है कि यह कानून आने के 1 वर्ष के भीतर सभी अवैध आर्थिक विदेशी या तो डिपोर्ट कर दिए जायेंगे या फिर स्वयं ही अपने मुल्कों में लौट जायेंगे। प्रस्तावित NRCI क़ानून में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National Register for Citizens of India) बनाने की प्रक्रिया दी गयी है। गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही नागरिकता रजिस्टर बनने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। इस क़ानून को मनी बिल / धन विधेयक के रूप में लोकसभा से पास करके गेजेट में छापा जा सकता है। नागरिकता रजिस्टर बनाने की पूरी प्रक्रिया देखने के लिए पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें Tinyurl.com/Nrcindia 1. यह क़ानून निम्नलिखित कार्य करेगा : a. अवैध विदेशीयों को (illegal immigrant) भारत से निष्कासित करेगा। b. प्रताड़ित शर्णार्थियो (persecuted refugee) को शरण देगा। c. नागरिकता रजिस्टर (national citizenship register) बनाएगा। 2. प्रस्तावित NRCI क़ानून के अनुसार, ऐसे विवाद की स्थिति में कि कौन अवैध आर्थिक विदेशी है और कौन प्रताड़ित शरणार्थी है, का अंतिम फैसला नागरिको की जूरी करेगी, जज नहीं। 3. प्रधानमंत्री एक राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रार (NCRO) की नियुक्ति करेंगे। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सभी राज्यों में राज्य नागरिकता रजिस्ट्रारों एवं जिला रजिस्ट्रारो की नियुक्ति करेगा। राष्ट्रिय रजिस्ट्रार प्रधानमंत्री की अनुमति से जिला कलेक्टरों को जिला रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त कर सकता है, या इच्छित जिलो में अलग से जिला रजिस्ट्रारो की नियुक्ति भी कर सकता है। 4. राष्ट्रीय रजिस्ट्रार एवं उसका स्टाफ वोट वापसी पासबुक एवं जूरी मंडल के दायरे में रहेगा। ताकि यदि राष्ट्रिय रजिस्ट्रार अपना काम त्वरित एवं निष्पक्ष ढंग से नहीं कर रहा है तो नागरिक वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल करके उसे बदल सके। राजवर्ग प्रजा के अधीन रहना चाहिए, वर्ना वो प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होग

Urvashi Oza

अल्काजी की आवाज पर झूमने वाली मैं , जगजीतजी को सुनकर रिलेट करती रहती हूं

Soni shakya

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏 🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

सदा दूसरे भाग्य पर, जो करता निर्वाह। सदैव रहता दुखी वह, रखता मन में डाह।। दोहा ---४०१ (नैश के दोहे से उद्धृत) -----गणेश तिवारी 'नैश'

Abantika

"कंधों पर बस्ते का बोझ था, तब मन स्थिर था... अब कंधों पर ज़िम्मेदारियां हैं, तो मन विचलित है। ये एडल्टहुड भी अजीब है दोस्त, आज़ादी तो मिली, पर सुकून कहीं खो गया है।" ​"बचपन में माँ की उँगली पकड़ कर चलते थे तो गिरने का डर नहीं था। आज एडल्टहुड में अकेले चल रहे हैं और डर ये नहीं कि हम गिरेंगे, डर ये है कि अगर हम गिर गए तो माँ-बाप का भरोसा टूट जाएगा। ये ज़िम्मेदारी का बोझ ही सबसे बड़ा 'विचलन' पैदा करता है।" "एडल्टहुड एक ऐसी फिल्म है जिसका 'ट्रेलर' तो हमें बड़ा फैंसी दिखाया गया था, लेकिन 'मूवी' शुरू होते ही पता चला कि यहाँ तो हर सीन में सस्पेंस और स्ट्रगल है। पर याद रखना, विचलित वही होता है जो चल रहा है। जो बैठा है, वो तो जड़ है।" ​"अजीब कशमकश है न? कल तक हम अपनी मर्ज़ी के मालिक बनना चाहते थे, और आज जब अपनी मर्ज़ी चलाने का वक्त आया, तो ज़िम्मेदारियों के बोझ ने मन को विचलित कर दिया है। कभी-कभी रात को छत की तरफ देखते हुए ये खयाल आता है कि क्या हम वाकई वही बन रहे हैं जो हम बनना चाहते थे? या फिर सिर्फ 'बड़े' होने की इस भीड़ में शामिल होकर अपनी पहचान कहीं खो दी है। एडल्टहुड की इस दौड़ में हम अक्सर दूसरों को खुश करने के चक्कर में खुद से ही विचलित हो जाते हैं। पर शायद, यही भटकाव हमें ये सिखाने आता है कि दुनिया की भीड़ में सबसे ज़रूरी इंसान, जिसे हमें ढूंढना है, वो हम खुद हैं।" ​"दोस्त, क्या आपको भी कभी लगता है कि एडल्टहुड एक ट्रैप है? अपनी बात कमेंट्स में बताओ।"

softrebel

जीवन: ज़िंदगी का रंगमंच और फिर दीवारों की कैद में रह जाती हैं निशानियाँ सभी, आदमी उड़कर पाताल हो जाता है। जब बनती हैं आपातकालीन स्थितियाँ, साँसें थमते ही धरती आकाश हो जाता है। न प्रेम जीवित रहता है, न प्रेमिका — बस आँखों में आने वाले कल के लिए उजास रह जाता है। टिक-टिक करती निरंतर बजती घड़ियों की सुइयाँ, और देखो — साथ बैठा इंसान कैसे ज़िंदगी के रंगमंच से पास हो जाता है। रोने-बिलखने की आवाज़ें भी उसे सुनाई नहीं देतीं , वह तो बस एक बीता हुआ एहसास हो जाता है। जिंदगी के रंगमंच से मिलती हार भैया– कई बार चलता फिरता इंसान भी जिंदा लाश हो जाता है। _softrebel_ #path #life #journey

Nadwika

विस्मृति...... ​विस्मृत हुए वे दिन, जब स्वप्न देखना निर्भय था, अब स्मृतियाँ केवल पीड़ा का विस्तार करती हैं। इसलिए, लोगों ने अब स्वप्नों से अधिक, विस्मरण को अपना लिया है।

aakanksha

मैंने कभी प्रेम को शब्दों में ढालना नहीं सीखा, बस जब तुम सामने आते हो, दिल खुद बोलने लगता है। न वादों की ज़रूरत लगी, न कसमें याद रहीं, तुम साथ हो… बस यही सच सबसे ख़ास लगता है।

Jayvant Bagadia

🙏 *એ મા - બાપ છે* 🙏 ____________________ વાચા વિના પણ જે ચહેરાથી શબ્દો સમજી શકાય એ *' મા '* છે. ભર બપોરે ચંદ્રમાનો અહેસાસ કરાવે એ શીતળતા *' મા '* છે, જીવનભર ગણતા ગણતા પણ, જે દાખલાનો હિસાબ ન મળે, જવાબ ન મળે તો સમજી લેજો કે એ *' બાપ '* છે, થપ્પડ મારીને પણ છાને ખૂણે રડીલે એ *' મા - બાપ '* છે, ખવડાવીને ખાય, ને સુવડાવીને સુવે એ *' મા - બાપ '* છે. સતયુગ હોય કે કળયુગ, કોઇપણ યુગમાં ના બદલાય , વરસતા વાદળની ભીનાશ, એ *' મા - બાપ '* છે, હજારો દંશ પછી પણ જેના તનથી નીકળે દૂધની ધારા, એ બીજુ કોઇ નહીં *'મા - બાપ'* છે, *' મા - બાપ '* છે. *- જયવંત બગડીયા / કવિરાજ*

Jayvant Bagadia

પુ.પ્રસન્નકિર્તિ મ.સા., ભવ્યકિર્તિ મ.સા. નો ધર્મ રસથાળ __________________________________________ પુ.પ્રસન્ન્ કિર્તિ મ.સા..ભવ્યકિર્તિ મ.સા.નો ઘરુ ધર્મ રસથાળ. બુદ્ધિ સાગર સૂરી , સુબીધ સાગર સૂરી ના છે ધર્મ વારસદાર, સાગર ના એ પાત્ર માં , ગાગર માં ભર્યા મીઠા જળ ભંડાર, સુખ સંપતિ ત્યાગી બધી, પ્રભુ , ફકત માર્ગ એક કરવા ભવ પાર, પુર્વ જન્મ ની સુવાસ , સાથે આ જન્મ ના પુણ્ય નો ભરેલો થાળ , સતાવધાનિ જ્ઞાન ભરી , શિષ્યો ને રાહ ધરનાર........ બાળ સાથે બાળ બની , ધર્મ જ્ઞાન ભંડાર પીરસનાર, મીઠો ટહુકો સૌને ગમે, ન આવે જરીક પણ કંટાળા નો ભાવ. જુગ , જુગ જીવો , ભવો ભવ જીવો જૈન ધર્મ ના અવતાર , પુ. પ્રસન્ન કિર્તિ મ.સા., ભવ્યકિર્તિ મહારાજ સાહેબ.. જયવંતભાઇ બગડીયા / કવિરાજ ,,

Jayvant Bagadia

વર્ષ ૨૦૨૫ ની વિદાય સાથે ૨૦૨૬ નુ આગમન. _____________________________________ વૃક્ષ ના મીઠા ફળો ને , ૨૦૨૫ ની ડાળી થી તોડી લઇએ હવે, શ્વાસ મા ગમતી સુગંધ લઇ , હૃદય નો દરીયો ભરી લઇએ હવે, મીઠા સપના આંખો માં ભરી, ખારા પાણી ને તજી દઇએ હવે, દર્દ બધા ,૨૦૨૫ સાલની વિદાય સાથે ચાલો ભુલી જઇએ હવે, ખારા પાણીની લહેરો ને , સમંદર નાકિનારા ને ધરી દ ઇએ હવે, આવતી પવન ની લહેરખી સાથે,જીવન ની મજા લઇ લઇએ હવે, નવુ આવે ને જૂનૂ જાય એ કુદરત ના ક્રમ ને સ્વીકારી લઇએ હવે, ચાલો ને ૨૦૨૬ના વર્ષ ને , હૈયાના હર્ષ થી વધાવી લઇએ હવે, જયવંતભાઇ બગડીયા / કવિરાજ

Jayvant Bagadia

કાગળ ની હોડી જે આસમાન પર પહોંચી છે્ __________________________________ ગાંધી.,સુભાષ , નહેરૂ , તિલક, જેની બલિદાનો ની ગાથા છે, આજ પ્રજાસતાક દિન નો તિરંગો, જે 'આશિયાના' ની માથે છે, કાગળ ની હોડી માં નીકળી , આજ આસમાન પર પહોચે છે, ચાંદ મંગલ ની ધરતી પર , આજ આપણો તિરંગો ફરકે છે. આત્મા આંબેડકર નો જે આપણા બંધારણ માં બેઠો છે , નરેન્દ્ર શાસન માં આજ , મોદી તણો એ પહેરો છે , નજરો થી નજર મિલાવી છે , ના મસ્તક કદી ઝુકાવ્યુ છે ટ્રમ્પ , U.S.A .ને કહી દેજો , આ સાર્વભોમત્વ અમારૂ છે. જય હિદ - જય હિંદ જય ભારત ્્્્્ જયવંતભાઇ બગડીયા / કવિરાજ

Nisha ankahi

कुछ लोग शोर छोड़ते हैं, कुछ लोग शो छोड़ते हैं, और कुछ… पूरे देश को चुप करा कर चले जाते हैं। समय किसी से ताली नहीं माँगता, बस पर्दा गिरा देता है बिना एनकोर, बिना सवाल। - Nisha ankahi

Niya

હવે મેસેજ કરવો પણ અઘરો લાગે છે, કારણ કે તું ‘મારો’ નથી… પણ મન તો આજે પણ તને જ શોધે છે…

M K

बड़े प्यार से संभाल कर रखी थी मैं उस रिश्ते को, आज उसी के वजह से आंखों में कहानी है..।।😢 - M K

Shraddha Panchal

जब आप किसी की फितरत नहीं बदल सकते तो , बेहतर है की आप , अपना रास्ता बदल ले 🙏🧡🩶

Apurv Adarsh

डूबते देश की कहानी राजा गंवार, मंत्री लुटेरे , प्रजा नपुंसक ।

Shivam Kumar Pandey

उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं क्लेशहारिणीम् । सर्वश्रेयस्करीं सीतां नतोऽहं रामवल्लभाम् ।। शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ): उद्भव – सृष्टि / उत्पत्ति स्थिति – पालन / स्थिति बनाए रखना संहार – संहार / विनाश कारिणीं – करने वाली / क्रियान्वित करने वाली क्लेश – दुःख / पीड़ा हारिणीम् – हरने वाली / समाप्त करने वाली सर्व – सभी / सम्पूर्ण श्रेयः – कल्याण / श्रेष्ठ फल करीं – करने वाली / प्रदान करने वाली सीतां – सीता को / माता सीता नतः – नतमस्तक / झुका हुआ अहम् – मैं रामवल्लभाम् – श्रीराम की प्रिय / श्रीराम की पत्नी --- सरल हिंदी अनुवाद: मैं श्रीराम की प्रिय पत्नी, माता सीता को नमन करता हूँ, जो सृष्टि, पालन और संहार की अधिष्ठात्री हैं, जो समस्त क्लेशों को हरने वाली हैं, और जो सभी प्रकार के कल्याण को प्रदान करने वाली हैं।

M K

लोगों को दर्द देने में मजा आता है... और हमें उस दर्द को जीने में,,,, मुस्कुराहट मेरी छिन कर तुम कब तक खुश रहोगे एक दिन... बेतहाशा आंसू तुम्हारे आंखों से भी गिरेंगे,,, - M K

Bhavna Bhatt

કોઈને ડફોળ નાં સમજવા

InkImagination

good night

bhavesh

પૈસા તો કમાઈ લેવાય, પણ સાચા માણસો મેળવવા અઘરા છે. જેણે તમને શૂન્યમાંથી બેઠા કર્યા હોય એને ક્યારેય ભૂલતા નહીં. ❤️ તે વ્યક્તિને ટેગ કરો અથવા આ રીલ તેમને મોકલો! 📩

Raj Phulware

IshqKeAlfaaz जहां आग लगी हो...

Mohit Nath

!बहुज खुश नसीब है हम जो तुम्हारा साथ मिला है !! - Mohit Nath

રોનક જોષી. રાહગીર

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Akanksha srivastava

फूटपाथ पर बिकती जिदंगी -------------------------- फूटपाथ में ना सिर्फ सामानें बिकती है, बल्कि यहाँ पर बिकती है, किसी की उम्मीदें, किसी के सपनें, किसी बेबस, लाचार पिता के अधूरे ख्वाइशें को पूरा कर पाने की चाहतें। ये उन चेहरे पर खुशियाँ सजाते है, जिनके कदम शायद उन महंगे शोरूमों को कभी पार कर पाते। यहाँ ना सिर्फ हर रोज दुकानें सजती है, हर एक दुकान के साथ सजते हैं कितने सारे ख्वाब वो ख्वाब जिन्हें हकीकत की जमीन मिलना शायद मुकद्दर में ही नहीं। वो जो कांच के ऊँचे ऊँचे दीवारों के पीछे जो ब्रांडेड कपड़ों के पीछे जो मुस्कुराते हुए टैग है, उन्हें निहारती वो बेबस, पथरायी आँखों में चमक दे जाती है वो फूटपाथ पर करीने से सजी दुकानें। जेब में खनकते सिक्के और वो चंद नोटें से भी पूरी हो जाती है वो सारी हसरतें, वो सारे अधूरे ख़्वाब। सड़क पर बिकती वो सारी चीजें ना सिर्फ सामानें है, बल्कि इनसे जुड़ी है किसी का सकून किसी का सम्मान। ये सिर्फ बाजार की रौनक नहीं, उम्मीदों के चमकते सितारे है। ये दुकानें ही तो उन लाचारों के फरिश्तें प्यारे है।

Shivam Kumar Pandey

सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ । वन्दे विशुद्धविज्ञानौ कवीश्वरकपीश्वरौ ।। शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ): सीताराम – सीता और राम (भगवान राम और माता सीता) गुणग्राम – गुणों का समूह / सद्गुणों की भीड़ पुण्यारण्य – पुण्य से पवित्र हुआ वन / पावन वन विहारिणौ – विचरण करने वाले (द्विवचन – दो व्यक्तियों के लिए) वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ विशुद्ध – पूर्णतः शुद्ध / निर्मल विज्ञानौ – ज्ञानस्वरूप दोनों / दिव्य ज्ञान से युक्त (द्विवचन) कवीश्वर – श्रेष्ठ कवियों के ईश्वर / वाणी के अधिपति कपीश्वरौ – वानरों के स्वामी (श्रीराम और हनुमान के रूप में) / वानरराज --- सरल हिंदी अनुवाद: मैं उन सीता और राम की वंदना करता हूँ, जो गुणों के समूह से युक्त हैं, पुण्य से पवित्र वनों में विचरण करते हैं, जो पूर्णतः शुद्ध ज्ञानस्वरूप हैं, श्रेष्ठ कवियों के अधिपति और वानरों के स्वामी हैं।

Saroj Prajapati

जब तक चुपचाप सब सहते रहे दुनिया वाले हमें अच्छा इंसान कहते रहे जब उठाई हमने अपने हक में आवाज़ तबसे दुनिया कहने लगी हमें बुरा इंसान । सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

Suraj Prakash

https://youtube.com/shorts/KidfuDKctw4?si=5-aM-KbVTylB17Qp "गरीब लड़के ने जादुई कुएं से माँगी एक इच्छा, आखिर में जो हुआ... 😱🔥 | Heart Touching Story"

Suraj Prakash

https://youtu.be/v6KSp6cwZ0w?si=BDQTIM12ufnxwQjF

ek archana arpan tane

હું શું કહું કે તારો સાથ કેવો છે આ એક માણસ મારી પુરી કાયનાત જવો છે. - ek archana arpan tane

Imaran

Ek tu teri aawaz yaad aayegi, Teri kahi huwi har baat yaad aayegi, Din dhal jayega raat yaad aayegi, Har lamha pahli mulakat yaad aayegi. 🫶imran 🫶

Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz

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Shivam Kumar Pandey

वन्दे बोधमयं नित्यं गुरुं शङ्कररूपिणम् । यमाश्रितो हि वक्रोऽपि चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते ।। शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ): वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ बोधमयं – ज्ञानस्वरूप / पूर्णतः चेतना से युक्त नित्यं – सदा / हमेशा गुरुं – गुरु को / आध्यात्मिक शिक्षक को शङ्कररूपिणम् – शंकर (भगवान शिव) के स्वरूप वाले यम् – जिसको / जिसे आश्रितः – आश्रय लिया / शरण लिया हि – निश्चय ही / वास्तव में वक्रः – टेढ़ा / टेढ़े स्वभाव वाला अपि – भी चन्द्रः – चंद्रमा सर्वत्र – हर जगह / सर्वत्र वन्द्यते – पूजित होता है / सम्मानित होता है --- सरल हिंदी अनुवाद: मैं उस गुरु की वंदना करता हूँ, जो ज्ञानस्वरूप हैं, सदा विद्यमान हैं, और शंकर (भगवान शिव) के समान हैं। जिनका आश्रय लेकर टेढ़ा (दाग वाला) चंद्रमा भी सर्वत्र पूजनीय बन गया।

Dhamak

मेरा मोबाइल (मेरे लिए खास) मैं और मेरा मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं इस भागती-दौड़ती दुनिया में, वक्त कहाँ अब किसी के पास ये बेजान सा एक खिलौना ही, अब लगता है सबसे खास मैं और मेरा मोबाइल जिंदगी के भंवर में उलझकर, जीना ही हम भूल गए रिश्तों की उस मीठी धूप को, सीना ही हम भूल गए घर में कितने लोग हैं रहते, कौन कहाँ क्या करता है सब याद दिलाना पड़ता है, अब दिल कहाँ कुछ पढ़ता है कभी खेलता हूँ मैं इसके संग, कभी इस पर झुंझलाता हूँ हूँ तन्हा मगर इस महफिल में, अपना हर हाल सुनाता हूँ मशीन नहीं अब ये जैसे, घर का इक सदस्य बन गया मेरे सूनेपन की यादों का, ये पक्का हमदर्द बन गया ढमक और उसका मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं

Shivam Kumar Pandey

भवानिशङ्करौ वन्दे श्रद्धाविश्वासरूपिणौ । याभ्यां विना न पश्यन्ति सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम् ।। शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ): भवानि – पार्वती देवी का नाम शङ्करौ – शिव और पार्वती (द्विवचन में) वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ श्रद्धा – आस्था, समर्पण विश्वास – भरोसा, निष्ठा रूपिणौ – जिनका स्वरूप है / जो रूपधारी हैं (द्विवचन) याभ्यां – जिन दोनों के द्वारा विना – बिना न – नहीं पश्यन्ति – देखते / अनुभव करते सिद्धाः – सिद्ध पुरुष / आत्मसाक्षात्कार प्राप्त योगी स्वान्तःस्थम् – अपने अंतःकरण में स्थित ईश्वरम् – परमात्मा / भगवान --- सरल हिंदी अनुवाद: मैं शिव और पार्वती की वंदना करता हूँ, जो श्रद्धा और विश्वास के रूप में प्रकट होते हैं। जिनके बिना सिद्ध पुरुष भी अपने हृदय में स्थित ईश्वर का दर्शन नहीं कर सकते।

રોનક જોષી. રાહગીર

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Shivam Kumar Pandey

संपूर्ण श्रीरामचरितमानस,भाग 1 वर्णानामर्थसंघानां रसानां छन्दसामपि । मङ्गलानां च कर्त्तारौ वन्दे वाणीविनायकौ ॥ --- एक-एक शब्द का अर्थ (सरल भाषा में) वर्णानाम — वर्णों का, अर्थात् अक्षरों का। अर्थसंघानाम — अर्थों के समूहों का, या अर्थ की रचना का। रसानाम — रसों का, जैसे काव्य के भाव: श्रृंगार, वीर, करुण आदि। छन्दसामपि — छंदों का भी; 'अपि' का अर्थ है 'भी'। मङ्गलानां — शुभ कार्यों का, मंगलमय बातों का। च — और। कर्त्तारौ — कर्ता (रचयिता), यहाँ द्विवचन है — दो रचयिता। वन्दे — मैं वंदना करता हूँ, नमन करता हूँ। वाणीविनायकौ — वाणी अर्थात् देवी सरस्वती, और विनायक अर्थात् भगवान गणेश। --- सरल हिंदी अनुवाद जो अक्षरों, अर्थों, रसों, छंदों और शुभ कार्यों के रचयिता हैं — ऐसे वाणी (सरस्वती) और विनायक (गणेश) को मैं नमस्कार करता हूँ।

Paagla

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Shivam Kumar Pandey

[पृष्ठ 4] भूमिका श्रीरामचरितमानस केवल काव्य रचना नहीं, अपितु मानव जीवन को मर्यादा, भक्ति और धर्म के पथ पर आगे बढ़ाने वाला एक जीवन-दर्शन है। इस महान ग्रंथ में वर्णित आदर्श — मर्यादा, करुणा, संयम, भक्ति और धर्म — मानव के आचरण, विचार और दृष्टि को संतुलित और पवित्र बनाते हैं। इस हिन्दी प्रस्तुति में मूल अवधी पाठ के भाव, आशय और अंतर्निहित संदेश को सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण हिन्दी भाषा में यथासंभव स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है, ताकि पाठक ग्रंथ के भाव से आंतरिक रूप से जुड़ सके। यह प्रयास विशेष रूप से उन पाठकों के लिए है जो अवधी भाषा से पूर्णतः परिचित नहीं हैं, परंतु श्रीरामचरितमानस के आध्यात्मिक, नैतिक और जीवनोपयोगी संदेश को समझना और आत्मसात करना चाहते हैं। --------------------------------------------------

Shivam Kumar Pandey

[पृष्ठ 3] समर्पण यह ग्रंथ श्रीराम के चरणों में तथा सभी रामभक्तों को सादर समर्पित है। --------------------------------------------------

Shivam Kumar Pandey

[पृष्ठ 2] ॥ श्रीरामचरितमानस ॥ मूल पाठ : गोस्वामी तुलसीदास जी सरल हिन्दी अनुवाद : शिवम कुमार पाण्डेय -------------------------------------------------- यह ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के मूल अवधी पाठ के साथ सरल, स्पष्ट एवं भावानुकूल हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करता है। इस अनुवाद का उद्देश्य — • मूल भाव को अक्षुण्ण रखना • आधुनिक पाठक के लिए सरल भाषा देना • अध्यात्म को जनसुलभ बनाना --------------------------------------------------

Sudhir Srivastava

शिक्षा - जीवन का आधार *********** जीवन का मूल आधार है शिक्षा, बेवकूफ हैं वे लोग, जो माने इसे भिक्षा। बुद्धि विवेक भी तभी गतिशील रहेगा, जब शिक्षा का निज आधार भी मजबूत रहेगा। जिसने नहीं दी शिक्षा को अहमियत बेकार होती है उसके जीवन की नियामत। शिक्षा का जिसके मजबूत है आधार सदा दूर रहता है उसके मन का विकार। शिक्षा के प्रचार प्रसार का है मूल सार, जीवन को यही देता है मजबूत आधार। ज़माने से सीखो शिक्षा का है क्या मोल? गाँठ बाँधकर रखिए, यह शिक्षा है अनमोल। जिसे नहीं जाना क्या है इसकी अहमियत, सच मानिए खोखला है उसके जीवन का आधार। सुधीर श्रीवास्तव

Shivam Kumar Pandey

[पृष्ठ 1] इस पुस्तक में मूल पाठ को छोड़कर सभी कुछ, Ai जेनरेटेड है । पुस्तक के अंतमें, लेखक की फोटो, original रहेगी पर Ai की सहायता से, जनरेट की हुई रहेगी । --------------------------------------------------

Sudhir Srivastava

जीवन के आइने में ******** मृत्यु जीवन की एक प्रक्रिया, एक अनुभूति है, जिसका आनंद हम लेना ही नहीं चाहते बस! केवल डरते रहते हैं। जीवन की सबसे बड़ी ग़लती और जानबूझकर अपराध करते हैं। आखिर हम ऐसा क्यों करते हैं? मृत्यु को अपना क्यों नहीं मानते हैं? क्या बिगाड़ा है उसने आपका जो उसे दुश्मन समझते हैं। सच मानिए! बड़ी भूल कर रहे हैं, नाहक ही उससे दो-दो हाथ कर रहे हैं, आखिरकार हार भी हम जा रहे हैं। अपनी उम्र हम सब जीते हैं फिर भी मृत्यु से बचने की लगातार राह खोजते हैं पर सफल भी भला कहाँ होते हैं? जिससे बचने के लिए ताउम्र तमाम इंतजाम और जुगाड़ करते हैं, अंततः थक-हार कर मजबूरी में सही उसके शरणागत ही होते हैं, बड़ा सवाल है कि हम ऐसा क्यों करते हैं? या खुद को मृत्यु से बड़ा मानने की जिद में ही हम यह अपराध कर रहे हैं, मृत्यु के अस्तित्व को स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं इसलिए नकारने का नाहक श्रम कर रहे हैं, और मृत्यु से दूर भागने की जिद में उसके और करीब होते जा रहे हैं, मृत्यु हर पल हमारा उपहास कर रही है जिसे हम वास्तव में देख ही नहीं पा रहे हैं, जीती मछली निगलकर खुश हो रहे हैं। अब सोचना हमें है कि बड़ा तीसमार खाँ बनकर हम कौन सा झँडे गाड़ रहे हैं, जीवन के आइने में मृत्यु को देखकर भी अनदेखा करते जा रहे हैं शायद खुद को खुद का खुदा समझ रहे हैं। सुधीर श्रीवास्तव

Raju kumar Chaudhary

Smart School Nepal मा स्वागत छ 🙏 यो च्यानल विद्यालयस्तरका विद्यार्थीहरूको ज्ञान, प्रतिभा र आत्मविश्वास उजागर गर्ने एक शैक्षिक र प्रेरणादायी प्लेटफर्म हो। यहाँ तपाईंले पाउनुहुनेछ — 🎤 प्रभावशाली वक्तृत्वकला 📚 सजिलो र उपयोगी शैक्षिक भिडियो 🎭 मन छुने सांस्कृतिक कार्यक्रम 🏫 विद्यालयका विभिन्न गतिविधिहरू 🌟 विद्यार्थीहरूको लुकेको प्रतिभा हामी विश्वास गर्छौं — आजका विद्यार्थी नै भोलिको राष्ट्र निर्माता हुन्। त्यसैले शिक्षा, अनुशासन र प्रेरणालाई एकै ठाउँमा प्रस्तुत गर्छौं। 📌 ज्ञान बढाउन 📌 आत्मविश्वास जगाउन 📌 नयाँ कुरा सिक्न अहिल्यै Subscribe गर्नुहोस् र Smart Learning को यात्रामा हामीसँग जोडिनुहोस्। 🔔📺#FutureOfNepal #YoungTalents #StudentMotivation #Inspiration #EducationMotivation

Raju kumar Chaudhary

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Nensi Vithalani

જીવનને કાવ્ય સમજી💫🌸 ક્યારેક ગમતું મૂકવું પડે મૂકેલું છોડવું પડે છોડેલું હળવેથી સ્વીકારવું પડે સમયની સાથે ચાલવું પડે મનની ગતિને શાંતિથી સમજવું પડે નદી જેમ વળાંક લેતા શીખવું પડે થોડું અટકી પોતાને સાંભળવું પડે આશા હાથમાં રાખી રાહ જોવી પડે દરેક દિવસને નવી શરૂઆત માનવી પડે જીવનને કાવ્ય સમજી જીવવું પડે અને જે છે એમાં સૌંદર્ય શોધવું પડે 💫

Atul Bhatti

અરીસામાં જોવા અરીસાયે, સવાલ તરતો મૂક્યો છે, મેં ખુદને ખુદમાં ઉતારી, જવાબ વળતો મૂક્યો છે. ​છે ભેદ-ભ્રમ અહીં સૌના, રૂપે રગે સરખા મૂક્યા છે, વાડા ભલે આદમ કર્યા, રુધિર જ મળતો મૂક્યો છે. ​મૌન રહી સાધી નહિ શકું, અતુલ હવે આ દુનિયાને હું, મારા ભીતર દીવો ખુદ, ખ઼ુદાએ જળહળતો મૂક્યો છે.

Niya

અમે મળ્યા હતા પ્રેમ માટે, પણ રહી ગયા વેદના માટે…

Pallavi Tiwari

चार दीवारी की कहानी घर की चार दीवारी में, एक कहानी है मेरी अपनी रोज एक न‌ई जंग हूं मैं एक गृहणी हूं चूल्हे से लेकर चाबी तक,हर दिन एक नई कहानी पानी भरने से लेकर पोंछा लगाने तक हर काम में हैं मेरी कहानी,हर पल में हैं मेरी जवानी पर रात के अंधेरे बत्ती बुझाती और खुद को ढूंढती हूं और फिर एक पल ऐसा आता, खुद को ही भूल जाती पर अगली सुबह फिर वही गृहस्थी में लग जाती मैं इसलिए गृहणी कहलाती मैं तो कहो ये कहानी किसकी

JIGAR RAMAVAT

સાવ કોરી કિતાબ જેવી આ કહાની લાગે છે, દોસ્ત, તારા વગર જિંદગી અધૂરી લાગે છે. શ્વાસ ચાલે છે ને ધબકાર પણ છે છાતીમાં, પણ તું ના હોય તો હર શ્વાસમાં દૂરી લાગે છે. મહેફિલો ગુંજે છે, લોકો હસે છે ચારે કોર, એક તારી ગેરહાજરીથી સાંજ સુની લાગે છે. સુખ હોય કે દુઃખ, કોની પાસે જઈને ઠાલવું? તારા વિના તો હવે ખુશી પણ મજબૂરી લાગે છે. જગત આખું ભલેને આવીને ઉભું રહે પડખે, તું મળે તો જ મારી દુનિયા પૂરી લાગે છે. -J.A.RAMAVAT

Shraddha Panchal

शिकायतें बहुत है , इंसान की फ़ितरत में ….. कल धूप से परेशान था, तो आज बारिश से ।।।।……😇

Soni shakya

कैसे समझते तुम, तुम्हारे पास चाहतो की भीड़ थी.. और मेरी चाहत..."सिर्फ तुम" - Soni shakya

Kartik Kule

वो पल आखरी था वो दीन आखरी था नाजाने क्या पता वो दोस्त आखरी था समज न पाये हमे अस्केजेसा कोई तुम क्या जानो वो दौर आखरी था - Kartik Kule

Kartik Kule

ज्यांनी पुस्तक वाचल नाही तो पुस्तक लिहू शकतो मग ज्यांनी एवढ आयुष्य जगलं ते आयुष्य का घडवणार नाही अस वाटत - Kartik Kule

Kartik Kule

की श्यामियनेकी महफिलोसे अच्छी मेरे दोस्तीकी कहावतेहि अच्छी है।। अमीरोकी बस्तीमे गरीबोकी दीवानगी ही अच्छी हे।। - Kartik Kule

Urvashi Oza

दिल करता है एक रात मैं सोजाउ और सुबह सबको मेरे लिए रोते देखू ( आसमान से )

Vrishali Gotkhindikar

.........वादळ...! ..छोटी मोठी..वादळे तर खुप आली आयुष्यात..आजपर्यंत.. ..छोट्या वादळातुन..तर सहजच पार पडले ................काही ही न गमावता... .................अगदी सहीसलामत..!!! ..मोठ्या वादळांनी शिकवले.. ....... स्वतःचा बचाव करुन ..परत उभारी धरायला..!! ..पण आता तुझ्या निघून जाण्याने जे वादळ आलय..घोंघावत..! त्यानं मला पार सैरभैर..केलय रे.. "बचाव"..आणी "उभारी".. हे तर सारे दुरच राहिलेय..................... मी स्वतःलाच कोंडुन घेतलय..माझ्या कोशात.. .........पाकळीही न उघडता..!!!! ....................... वृषाली

Priya

मेरी कहानी में हर एक शख्स धोखेबाज निकला हम वजूद उसका पाक समझते रहें जो खुद एक गुनेहगार निकला... Priya kashyap

તેજસ

જરૂરી નથી કે સમયની સમજણ અનુસાર દૃષ્ટિ હોય છે. તારી સાથે મારી દુનિયાથી અલગ સપનાની સૃષ્ટિ હોય છે. આંખોની આંખો સાથે તો કેટલીય વાતો થઈ ચૂકી છે પણ, તારા કીધા વગર કરાયેલા સ્પર્શની અલગ મસ્તી હોય છે. કહે છે દરેક માણસ કોઈક અને કંઈક ખોઈને જ બેઠો છે. પણ હું જ્યારે તારી સાથે હોઉં ત્યારે પૂર્ણ સંતુષ્ટિ હોય છે. લોકો ભલે ને કહેતા હોય કે ગુમ થયેલો માણસ છે પણ, તારાં આલિંગનમાં હોઉં તો મારી અલગ જ હસ્તી હોય છે. – તેજસ - તેજસ

Priya

रात गई बात गई...नहीं महादेव रात गई...बात दिल पर लग गई..।

Priya

हजार गम हैं खुलासा कौन करे मुस्कुरा देते हैं तमाशा कौन करें Priya kashyap...✍️

kajal Thakur

“उसे चाहा भी तो इस तरह चुपचाप,💔 कि मेरी खामोशी ही मेरा इज़हार बन गई। वो किसी और की दुनिया में खुश रहा, और मेरी पूरी दुनिया बस उसी के नाम रह गई।” 🥀 Kajal Thakur 😊

Kamini Shah

એટલું આસાન નથી મંઝિલે પહોંચવું ચિત્તાની ઝડપે છલાંગ મારી લક્ષ્યે પહોંચવું… -કામિની

M K

क्या बात है ...?? मेरे अंदर अब घमंड घर कर लिया है, जबकि पता है मुझे घमंड तो रावण का भी चूर हुआ था, मैं तो बस मामूली सी इंसान हूं ,,, रोते हुए आँखें जुबां को कड़वा कर दिया है मोल भाव की दुनियां में मेरे मासूम दिल का क्या काम?? अपनों के साथ साथ अनजानों को भी गलत लग रहे हैं, मुझे इसकी क्यों परवाह करनी ...??? मैं जैसी थी अब वैसी नजर नहीं आना चाहती, वक्त ने मुझे कुछ सिखाया है.....!!! - M K

Dada Bhagwan

दर्शन से मिले तृप्ति, त्रिमंदिर ये निष्पक्षपाती, जो भी यहाँ आए, पाए शाश्वत शांति! त्रिमंदिर यानी धर्म में निष्पक्ष दृष्टि की शुरुआत! त्रिमंदिर के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ विज़िट करें: https://dbf.adalaj.org/Ta2V8JjO #PranPratishtha #thane #trimandir #celebration #DadaBhagwanFoundation

Jyoti Gupta

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Shailesh Joshi

બાળપણથી લઈને કિશોરાવસ્થા અને કિશોરાવસ્થાથી લઈને યુવાવસ્થા સુધી જો આપણને જે જોઈએ, કે માંગીએ એ મળી જતું હોય, તો કમસેકમ આપણે એટલું તો સમજવું જોઈએ કે, એ ચીજવસ્તુ બજારમાંથી આપણા સુધી કેવી રીતે આવે છે, કે પહોંચે છે ? - Shailesh Joshi

Priya

अफसोस हैं मगर शिकवा नहीं मुझें एक शख्स साथ रहकर भी समझा नहीं मुझें - Priya

bhavesh

2026 માં આગળ વધવા માટે આ આદતો છોડો ✋👉✅

Shailesh Joshi

જ્યાં સુધી વિદ્યાર્થી જીવનથી લઈને ( પૃખ્તવયના ) વ્યવસાયિક જીવનની શરૂઆત ન કરીએ ત્યાં સુધી આ એક વાત યાદ રાખવી કે, હમણાં જો આપણને ઈચ્છા થાય એ પ્રમાણે જીવવાની આદત પડી જશે, તો બાકી જીવનમાં આપણે આપણી ઈચ્છા પ્રમાણેનું જીવન બિલકુલ નહીં જીવી શકીએ. - Shailesh J

Sarika Sangani

जिस आजादी को हमने इतनी जद्दोजहत से हासिल किया है, वही आजादी आज हमें फिर से गुलाम बनने की ओर ले जा रही है। काश इस देश में सख्ती से संविधान का पालन होता तो यह भटके हुए आजाद लोग यूं मनमानी न करते। - Sarika Sangani

Imaran

चाहा है तुम्हें अपने अरमान से भी ज्यादा, लगती हो हसीन तुम मुस्कान से भी ज्यादा, मेरी हर धड़कन हर साँस है तुम्हारे लिए, क्या माँगोगे जान मेरी जान से भी ज्यादा 🫶imran 🫶

Saliil Upadhyay

સ્માર્ટ, હોંશિયાર કે સમજદાર...? ગેરેજવાળો : મેડમ,તમે એક્ટિવા રોક્વા પગ કેમ ઘસો છો..? મેડમ : કારણકે, બ્રેક લાઇનર ૩૫૦ રુપિયાનુ આવે અને ચપ્પલ ૧૦૦ રુપિયાના....!

Ashish jain

लाइफ की करप्ट विंडो मेरे मदरबोर्ड (ईश्वर) ने जब, ये पुर्जा नया बनाया, ठोक-बजाकर हार्ड डिस्क (आत्मा) का, एक पीस लगाया। सन् दो हजार छह की वो, 'विंडो एक्स पी' वाली रात थी, नया सिस्टम, नया जोश, और खुशियों की शुरुआत थी। सीडी-रोम (मम्मी-पापा) ने इसमें, संस्कार का सॉफ्टवेयर भरा, एंटीवायरस बनकर गुरु आए, ताकि सिस्टम रहे खरा। पर हाय रे किस्मत! कुछ गलत दोस्तों के 'वायरस' आ गए, कुछ गर्लफ्रेंड के 'मैलवेयर', मेरा सारा रैम (RAM) खा गए। इंटरनेट से फाइल अटैच हुई, जिसे शादी कहते हैं, अपडेट हुआ एंटीवायरस (नौकरी), अब हम ऑफिस में रहते हैं। कॉपी-पेस्ट के चक्कर में, एक नई फाइल (बच्चा) डाउनलोड हुई, खुशियाँ तो बहुत मिलीं, पर मेमोरी थोड़ी ओवरलोड हुई। अब महँगाई की डायन ने, फाइलें ऐसी करप्ट कीं, सिस्टम होने लगा हैंग, और विंडो ही इरप्ट (Erupt) की। अब दुनिया जब भी पूछती है— "आशीष भाई, क्या हाल है?" तो मेरा सॉफ्टवेयर बस एक ही, एरर कोड (Error Code) उगलता है: "माफ़ करना भाई, 'योर पासवर्ड इज़ इनकरेक्ट',मेरा दिल अब हैग है, और दिमाग डिसकनेक्ट!"

Ashish jain

शीर्षक: बेलन और ब्रह्मांड का युद्ध सुबह सवेरे गरम चाय की, माँग जो मैंने कर दी, पत्नी ने गुस्से की ज्वाला, आँखों में अपनी भर दी। बोली— "चाय चाहिए या फिर, अपना सिर फुड़वाना है? आज सफाई का दिन है, या फिर बहाना बनाना है?" लड़ाई ऐसी छिड़ गई जैसे, सरहद पर घमासान हो, वो थी सुलगती झाँसी की रानी, मैं डरा हुआ इंसान हो। मैंने कहा— "ओ प्रिये! ज़रा तो, रहम इस दिल पर खाओ," वो बोली— "चाय छोड़ो, पहले ये मकड़ी का जाला हटाओ!" वो उठी तो लगा कि कोई, भारी तूफ़ान आएगा, बेलन हाथ में देख लगा, मेरा भूगोल बदल जाएगा। मैंने आवाज़ उठाई तो वो, 'सुनामी' बनकर आई, एक घंटे तक फिर घर में, मेरी 'सर्जिकल स्ट्राइक' हुई। मैदान-ए-जंग में खड़ा मैं, बस आहें भरता रहा, अपनी ही शादी के फैसले पर, मन ही मन मरता रहा। आशीष! अब हालत ऐसी है कि, कोना ढूँढ के बैठा हूँ, शेर था कल तक घर का, आज भीगी बिल्ली बना बैठा हूँ। अब वो उस कमरे में बैठी, 'मौन व्रत' का तीर चलाती है, मैं इस कमरे में बैठा, जैसे सज़ा-ए-मौत काटता हूँ। दोस्ती करने जाऊं तो, वो 'नागपाश' सी डसती है, और मेरी इस हालत पर, मोहल्ले की कामवाली हँसती है! Adv. आशीष जैन 7055301422

Ashish jain

कविता: दरिया का फासला नदी के उस किनारे पर, वो बनकर आस बैठी है, दबाकर दिल में अरमानों की, मीठी प्यास बैठी है। इधर हम हैं कि सूनी रेत पर, चुपचाप बैठे हैं, लगाकर ज़ख्म लहरों का, कोई इतिहास बैठे हैं। हमारी कश्ती तो उस पार, जाने से ही रूठ गई,मझधार में ही किस्मत की, वो डोरी टूट गई।जो लेकर जाती उस साहिल पे, वो कश्ती ही डूब चुकी,मिलन की हर हसीं ख़्वाहिश, दरिया में ही ऊब चुकी। न आवाज़ वहाँ पहुँचे, न कोई राह दिखती है, तड़प ये फासले वाली, न कागज़ पर लिखी जाती है। वो सुध-बुध खोके बैठी है, हम आहें भरके बैठे हैं, दबे अरमान सीने में, कई पत्थर से बैठे हैं। कैसे हो बात अब उनसे, कि दरिया बीच में गहरा,लगा है बेबसी का आज, यादों पर कड़ा पहरा।वो बस एक अक्स जैसी है, जो लहरों पर चमकती है,मगर छूने को बढ़ते हैं, तो ये दुनिया धमकती है। नदी बहती ही जाती है, जुदाई को जताने को, कोई 'आशीष' तो दे दे, इस टूटे आशियाने को। वो उस तट पर, हम इस तट पर, बस निहारा करते हैं, बिना पतवार के हम, उम्र सारा गुजारा करते हैं। Adv.आशीष जैन 7055301422

Ashish jain

गज़ल: आँखों की ज़ुबान हृदय में प्रेम जागा था... मगर इज़हार से डरते, तुम्हें भी प्यार था हमसे... मगर इकरार से डरते। अजब ये कशमकश थी... हम बस आँखों से बात करते रहे, ठंडी आहें भरते रहे... मिलने का इंतज़ार करते रहे। कभी हम चुप रहे... कभी तुम चुप रहे, ख़ामोशी बोलती रही, नज़र से दिल की जो बातें थीं... वो हर पल होती रहीं। मगर जब बात लबों तक आई... तो हम संसार से डरते, तुम्हें भी प्यार था हमसे... मगर इज़हार से डरते। अजब सी प्यास थी आँखों में... अजब सा एक साया था, कि जैसे रूह ने मेरी... तुम्हें अपना बनाया था। मगर खोने के डर से हम... खुद अपनी पुकार से डरते, हृदय में प्रेम जागा था... मगर इकरार से डरते। तड़प दिल की ये 'आशीष'... आँखों ही आँखों में पलती रही, मोहब्बत की ये शमा... बस धड़कनों में जलती रही। ग़ज़ल बन कर जो छलका दर्द... तो हम झंकार से डरते, हृदय में प्रेम जागा था... मगर इज़हार से डरते। adv.आशीष जैन 7055301422

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