Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Dinesh Patel
જતાવી પેરવી ને હાજરી પુરાય છે,
મીલાવી આંખો પ્રેમ ગહેરી પુછાય છે.
દિનેશ પોકાર
Dinesh Patel
તરફદારી ની પણ કેવી કિંમત છે,
પ્રેમ થયો કહેવા જેવી હિમ્મત છે.
દિનેશ પોકાર
Dinesh Patel
ભાવના ભીત જેવી હોય છે,
ચાહના પ્રીત જેવી હોય છે.
દિનેશ પોકાર
Dinesh Patel
મન માનતું નથી હજુ કચાસ છે,
તું સમજ હું સમજું ઉજાસ છે.
દિનેશ પોકાર
Dinesh Patel
ખબર પડતી નથી કેમ વૈભવ ની લાલી છે,
જીવન નથી સદા તોય કેમ આ લાચારી છે.
દિનેશ પોકાર
Dinesh Patel
કથા હતી અને કથા રહેવાની છે,
જીંદગી રાજા થઇ રાખ થવાની છે.
દિનેશ પોકાર
shivani singh
मनुष्य का मनुष्य बने रहने के लिए, ईश्वर की मृत्यु बेहद ही अनिवार्य है।
AbhiNisha
जिंदगी क्यों दूसरा किनारा
एक सपना
जिंदगी के पार जिंदगी
कहते हैं जिंदगी एक रहस्य से भरा हुआ है
एक पजल की तरह
जिंदगी की हर मोड़ हर रास्ता है
जिसे सुलझाना आसान नहीं
और जिंदगी की कहानी एक पजल है
हमें नहीं पता कि किन्हे जिंदगी सौगात में क्या देता है
पर जिंदगी सौगात मै एक चीज देती है
जो शगुन से भरी होती है
एक लंबी नींद एक लंबा सपना
पर सपना क्या है
और उसके रहस्य क्या है ज
दुनिया में आप तरह तरह की सवाल है
कहते हैं सपना अपने दिमाग की उलझन से पैदा होते हैं
और दिमाग तो उलझने के लिए ही होते हैं ना
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
मनात एकदा डोकावून...
Pragna Ruparel
શબ્દો
જ્યાં સુધી તમો મુખ માંથી શબ્દો નથી બોલ્યા.ત્યાં સુધી એ તમારા ગુલામ અને નીકળી ગયા પછી, તમે એના ગુલામ.માટે શબ્દો બોલતા પહેલા વિચારો.
જય સ્વામીનારાયણ
kunal kumar
मुस्कुराहट
_____________
कुछ आकृतियाँ
इरादे से बनती हैं,
कुछ भूख से,
कुछ अभ्यास से।
और कुछ
बिना सिद्ध किए
अचानक घट जाती हैं।
तुम्हारी मुस्कान
उसी श्रेणी में आती है।
जब तुम मुस्कुराती हो
तो होठों के बीच
बहुत कुछ ठहरता है—
और उस ठहराव में
संरचना
बनती भी है
और बिगड़ती भी।
हुसैन होता तो इसे
निर्भीक कहकर रह जाता,
रविदास
प्रेम कहकर
उसे मनुष्यता में लौटा देता।
और पिकासो
अप्रत्याशित घटना कहकर
खुद को बचा लेता।
खैर,
इन सभी से इतर
मैं कहूँगा इसे
सबसे सुंदर संग्रहालय,
जहाँ चित्र
स्वेच्छा से उभरते,
जीते
और साँस लेते हैं।
शायद इसलिए
मैं घंटों पेंसिल चलाकर भी
नहीं बना पाया
वो चित्र
जो तुम सिर्फ़ हँसकर
बना गई।
@ कुणाल कुमार
kunal kumar
जंगली फूल
___________________
पुरुष जब अपने से आगे
चलती चीज़ों से डरा तो
डर में
उसने न रोना चुना,
न काँपना, न कोई कंधा
बल्कि
उसने मरा जाना चुना।
लेकिन मरने से पहले
बहुत पहले
एक काम किया—
उसने नियम बनाया।
नियम से ,
परिभाषा निकली।
परिभाषा से
केंद्र।
केंद्र पर वह रहा
बाक़ी घूमते रहे लोग
किसी ग्रह की तरह ।
और यहीं से
व्यवस्था शुरु हुई।
जो पास थे
वे पवित्र हुए
जो दूर थे
वे बाग़ी।
स्त्री दोनों में नहीं थी
वह पहले असुविधा बनी,
फिर सवाल।
और जब सवाल
टिके रहे—
तो उन्हें क्रांति कहा गया।
शायद इसलिए
मैं
जब तुम्हें देखता हूँ—
तो मेरा पुरुष होना
काम नहीं आता।
और
धीरे धीरे केंद्र से उतर कर
मैं स्त्री हो जाता हू।
स्त्री जो उल्ट है डर के
जो उल्ट है ईर्ष्या के
जो उल्ट है असहिष्णुता के।
और इस तरह तुम्हें देखते हुए
मुझमें बची रह जाती है
"संभावना"।
संभावना पर्वत , पहाड़
और केंद्र से इतर
जंगली फूल होने की ।
@ कुणाल कुमार
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
तुम छत से चले मत जाना,
मेरा चांद चल गया तो
अमावस हो जाएगी।
- स्पंदन
Bhavesh Tejani
નાદાન એને કોઈના પગરવ ન માનજે
કે કાનમાં અમસ્તાય ભણકાર હોય છે
-મરીઝ
Jyoti Gupta
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વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
हमें होश कहा रहता है?
हम आपके सुरूर मै खोए है इस तरह,
आपकी एक मुस्कुराहट से घायल रहते है।
- स्पंदन
Raju kumar Chaudhary
🌸 स्वर्ग की अप्सरा 🌸
स्वर्ग की अप्सरा तुम, दिव्य रूप धारी ✨
नृत्य करतीं स्वर्ग में, अद्भुत सौंदर्य तुम्हारी 💫
गंधर्वों के सुरों में, झूमे हर लहर 🌊
तुम्हारे नृत्य में बसी, स्वर्ग की हर खबर 🌟
बालों में फूलों की माला, चेहरे पर मुस्कान की धारा 🌺
तुम्हारी झलक में, खो जाए हर नज़ारा 💖
स्वर्ग की अप्सरा, तुम्हारी कहानी 🕊️
हर शब्द में जादू, हर नृत्य में मधुरता की निशानी 🎶
तुम्हारी सुंदरता, हृदय को मोह ले
तुम्हारा नृत्य, आत्मा को छू ले 💫
👉 इस अद्भुत सौंदर्य को देखें और Feel करें! 🌹
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વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
ગ્રીષ્મના કાળઝાળ તડકામાં
તારૂં વર્ષા બનીને આવવું,
અને મારૂં હૈયું તરબોળ થવું,
એટલી અનંત તરસ છે મારી તારા પ્રેમની.
- સ્પંદન
ek archana arpan tane
મને મારો ગુનો કબૂલ છે કે મેં એક તો પ્રેમ કર્યો બીજું તારાથી કર્યો ને ત્રીજું એ કે બેપનાહ કર્યો.
- ek archana arpan tane
Nirmal Tadvi
એમની આંખોમાં નજર અટકી ગઈ
નજરે જ સપનાનો રસ્તો ખૂલી ગયા
થોડી વાતોમાં ભાન વિખેરાઈ ગયું
જીવનમાં અચાનક અંધારું ઊતર્યું
પ્રયત્ન કરીશ તને પામવાનો મારી .
જો ભાગ્ય સાથ આપે તોહ પાછા મળીશું.
- Nirmal Tadvi
Falguni Dost
અચાનક શબ્દ સ્તબ્ધ થયા,
અલ્પવિરામ પુર્ણવિરામ બન્યું,
અવિરત વહેતું ઝરણું અટક્યું,
સૂર્યાસ્ત થતા અજવાળું છૂટ્યું,
સમયનું ચક્ર એકાએક અટક્યું,
સુંદર ખીલેલું ફૂલ ડાળીએથી ખર્યું,
અનેક નિરાશામાં મન અટક્યું...
ત્યાં જ સ્મરણ કૃષ્ણનામનું થયું
રૂંધાયેલ શબ્દને પણ વાચા મળી,
એક અંત બાદ નવી શરૂઆત મળી,
ખળખળતી નદીને નવી રાહ મળી,
સૂર્યોદય સંગ ઉજાસની રોશની મળી,
અટકેલ સમયને નવી ગતિ મળી,
બંજર ભૂમિમાં ઊગતી નવી કુંપળ મળી,
આશમાં ફરી નવી જીવંતતા મળી.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻
Sudhir Srivastava
फायकू -महाशिवरात्रि
********
इस बार की महाशिवरात्रि
बहुत खासमखास है
तुम्हारे लिए।
प्रतीक्षा में बेचैन हैं
औघड़ दानी भोलेनाथ
तुम्हारे लिए।
एक लोटा जल चढ़ाना
कितना मुश्किल है
तुम्हारे लिए।
शिव मंदिर में भीड़
लगती भारी है
तुम्हारे लिए।
बेलपत्र, भाँग, धतूरा, बेर
संग लेकर आए
तुम्हारे लिए।
भोले भाले शिव शंकर
आसन छोड़ आए
तुम्हारे लिए।
भूख प्यास से व्याकुल
अपने भोले भंडारी
तुम्हारे लिए।
शिवरात्रि का व्रत-पूजन
खोलेगा शिवलोक द्वार
तुम्हारे लिए।
नीलकंठ बन गये शिव
जब विषपान कर
तुम्हारे लिए।
शिव ने विष पिया
संसार के बहाने
तुम्हारे लिए।
चलो हम चलते हैं
शिव पूजन को
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
संत रविदास जयंती
गोवर्धनपुर, वाराणसी में जन्मे
भक्ति आंदोलन के संत रैदास,
पिता संतोख दास, माता कर्मा देवी की संतान,
चर्मकार परिवार में जन्म लिए
महान कवि, समाज सुधारक
जाति-पाति, छुआछूत के विरोधी रहे।
निर्गुण ईश्वर भक्ति संदेश फैलाया
उनके आदर्श वाक्य-भाव
'मन चंगा तो कठौती में गंगा' को
आज भी सम्मान दिया जाता है।
बाल्यावस्था से ही भावुक और ईश्वर भक्त रैदास
अपने पुश्तैनी चमड़े के कर्म में रमे रहे,
संत रामानंद के शिष्य, कबीर के समकक्ष थे।
जीवन भर समाज को मानवता,
एकता का पाठ पढ़ाते रहे,
'गुरु ग्रंथ साहिब' में शामिल उनके रचित पद
आज भी अमर हो दिल को छूते आ रहे,
मीराबाई के गुरु रैदास ने कर्म को प्रधान माना
दलित समाज में चेतना ज्योति जगाते रहे।
अपना जीवन समाज की सेवा के नाम किया,
और अंत में भी ईश्वर का नाम जाप करते हुए
भौतिक शरीर का परित्याग किया।
कबीर, सूर, तुलसी की परंपरा के संत कवि
रैदास जी को आज भी हम श्रद्धा भाव से याद कर रहे हैं
उनके विचारों, संदेशों का अनुसरण कर रहे हैं
महान संत, कवि को बारंबार नमन वंदन कर
अपने श्रद्धा पुष्प अर्पित कर रहे हैं।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
चौपाई - जीवन
********
जीवन है अनमोल खजाना।
जिसने इसे नहीं पहचाना।।
जिसने मर्म नहीं पाया है।
उस पर अंधकार छाया है।।
इसको पढ़ना बड़ा सरल है।
समझ सको तो सुधा गरल है।।
जीवन में सुख दुख का मेला।
समझो नाटक है या खेला।।
जीवन की है अजब कहानी।
प्रेम सुधा रस गरल निशानी।।
कभी हँसाती, कभी रुलाती।
जमकर खिल्ली कभी उड़ाती।।
जीवन का आशय तुम जानो।
तभी भाव इसका तुम मानो।।
नहीं उपेक्षा इसकी करिए।
प्रेम भाव रस पावन भरिए।।
जीवन का आयाम बड़ा है।
कहाँ आपसे दूर खड़ा है।।
बस इसका सम्मान कीजिए।
सुधा-सिक्त आनंद पीजिए।।
जीवन में अनमोल मिला है।
फिर भी शिकवा और गिला है।।
यही भूल पड़ती है भारी।
धोखा देती हर तैयारी।।
कल की चिंता आज न करिए।
वर्तमान में हँसकर रहिए।।
जीवन सूत्र पकड़ कर रहिए।
निज सौभाग्य मानकर चलिए।।
जीवन कठिन परीक्षा लेता।
यह परिणाम समय पर देता।।
इसका आना उसका जाना।
जीवन तो बस एक बहाना।।
नहीं एक रस जीवन होता।
कोई हँसता कोई रोता।।
धैर्य सदा सुख का पथ दाता।
चंचलता दुख राह दिखाता।।
जीवन अपना आप सुधारो।
खोया पाया सदा विचारो।
जीवन दोष कभी मत देना।
यह सतरंगी साबुन फेना।।
जल जीवन का गहरा नाता।
इक दूजे का भाग्य विधाता।।
जल बिन नहीं रहेगा जीवन।
जल ही है असली संजीवन।।
सुधीर श्रीवास्तव
Roshan baiplawat
barbad।......
उषा जरवाल
पल - पल जिया जिस पल के लिए,
वो पल भी आया कुछ पल के लिए ।
सोचा कि ठहर जाए वो पल, हर पल के लिए
पर वो पल भी रहा कुछ पल के लिए
पल - पल जिस पल का सपना सँजोया मैंने
वो पल भी न रुका पलभर के लिए ।
उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’
Ajay Solanki
એક પ્રવાસ પ્રેમ અને લાગણીની દુનિયા તરફ....
by... Ajay Solanki
Kirti kashyap
“एक रात की दास्तां”
शब भर खनकती रही चूड़ियाँ कलाई की,
रक़्स में ढलती गई हर अदा अंगड़ाई की।
चाँद का करम भी कुछ इस कद्र बरसता रहा,
सिलवटों में उतरती रही इनायत रोशनाई की।
सुबह हुई तो फैल गई हर बात शनासाई की,
निशां-ए-उल्फत ने बयां की गुस्ताखियाँ हरजाई की।
Kirti Kashyap"एक शायरा"✍️
रक़्स = नृत्य, नाच
शनासाई = पहचान, जान-पहचान
निशां-ए-उल्फत = मोहब्बत की निशानी
Paagla
https://youtube.com/shorts/m136-GCkduI?si=oZ4txHRpBnS5KieJ
simpal gupta
माँ की ओर से बच्चे के लिए
तू जब मेरे हाथों में आया, नन्हा सा एक सपना बनकर,
मैं खुद को ही भूल गई, बस तुझमें ही सिमटकर।
अपना दर्द, अपनी खुशियाँ, सब तुझ पर वार दीं,
तेरी एक मुस्कान के लिए, मैंने हर खुशी हार दी।
जब तू थोड़ा सा बड़ा हुआ, तेरी हँसी ने मुझे हँसना सिखाया,
तू मेरे सिवा किसी की गोद में न गया, ये देख मन भर आया।
सब कहते थे, मैं तुझसे ज़्यादा प्यार करती हूँ, तुझे रोने नहीं देती,
पर क्या करूँ, माँ हूँ मैं, तेरी आँखों में आँसू देख नहीं सह पाती।
सबकी माँ अपने बच्चों को गलती पर डाँटती है,
पर मुझे तुझ पर भरोसा था, कि तू कभी राह नहीं भटकता है।
ज़रा सा दर्द हो जाए तुझे, तो दिन-रात तेरे पास बैठी रहती,
माँ हूँ न, अपने हिस्से का दर्द मैं कैसे देख पाती।
पर आज जब तू मेरे कंधों से ऊँचा हो गया,
तो मन में एक अनजाना सा डर भी आ गया।
तेरी ज़िंदगी में दोस्ती और दुनिया समा गई,
डर बस यही रहा, कहीं तू गलत राह न चुन जाए।
डर ये भी है कि कहीं तू खुद को न खो दे,
भीड़ में अपनी पहचान कहीं भूल न दे।
जब तेरी आवाज़ तेज़ हुई, तो मन घबरा गया,
सोचा—अब तुझे समझाऊँ कैसे, ये समय बदल गया।
पर हर माँ का डर उसकी ममता से जुड़ा होता है,
बेटा, मेरा हर डर बस तेरी खुशियों के लिए होता है
Abhishek Chaturvedi
सत्य का उद्घोष: निर्भय वाणी ( कविता )
© _कवि:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि_
सत्य कहो, पर डरो नहीं तुम,
अभि कायरता में मरो नहीं तुम।
भीतर की उस दिव्य ज्योति को,
मौन की ओट से हरो नहीं तुम।
सत्य सूर्य है, प्रखर, तपस्वी,
अंधकार का काल बड़ा है।
झूठ भले ही स्वर्ण जड़ित हो,
अंततः वो जंजाल बड़ा है
जब अंतस में द्वंद्व मचा हो,
भय के बादल छाए हों।
जब स्वार्थों की बेड़ियाँ पैरों,
में अपनी जकड़न लाए हों।
तब याद करो उस निज शक्ति को,
जो सत्य मार्ग दिखलाती है।
डर की छोटी दीवारों को,
क्षण भर में ढहलाती है।
सत्य बोलना कठिन तपस्या,
वीरों का यह आभूषण है।
असत्य तो है मलिन वासना,
आत्मा का ये प्रदूषण है।
भय कहता है—'मौन रहो तुम',
हित अपना पहचानो तुम।
पर आत्मा कहती—'अटल रहो',
सत्य को ही ईश्वर मानो तुम।
क्या डरना उन तुच्छ शक्ति से,
जो नश्वर और क्षणभंगुर हैं?
सत्य के सम्मुख झुक जाते वे,
जो अहंकारी और क्रूरक हैं।
इतिहास गवाह है उन लोगों का,
जो फाँसी पर भी मुस्काए थे।
सत्य की खातिर हलाहल पीकर,
लोक अमृत्व में आए थे
हरिश्चंद्र की निष्ठा देखो,
प्रहलाद का विश्वास पढ़ो।
सत्य की ऊँची मीनारों पर,
निडर भाव से आज चढ़ो।
वाणी में हो धार सत्य की,
अभि आँखों में हो तेज नया।
डर के साये छँट जाएँगे,
जब जागेगा विवेक नया।
© _कवि:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि_
simpal gupta
माँ की ओर से बच्चे के लिए
तू जब मेरे हाथों में आया, नन्हा सा एक सपना बनकर,
मैं खुद को ही भूल गई, बस तुझमें ही सिमटकर।
अपना दर्द, अपनी खुशियाँ, सब तुझ पर वार दीं,
तेरी एक मुस्कान के लिए, मैंने हर खुशी हार दी।
जब तू थोड़ा सा बड़ा हुआ, तेरी हँसी ने मुझे हँसना सिखाया,
तू मेरे सिवा किसी की गोद में न गया, ये देख मन भर आया।
सब कहते थे, मैं तुझसे ज़्यादा प्यार करती हूँ, तुझे रोने नहीं देती,
पर क्या करूँ, माँ हूँ मैं, तेरी आँखों में आँसू देख नहीं सह पाती।
सबकी माँ अपने बच्चों को गलती पर डाँटती है,
पर मुझे तुझ पर भरोसा था, कि तू कभी राह नहीं भटकता है।
ज़रा सा दर्द हो जाए तुझे, तो दिन-रात तेरे पास बैठी रहती,
माँ हूँ न, अपने हिस्से का दर्द मैं कैसे देख पाती।
पर आज जब तू मेरे कंधों से ऊँचा हो गया,
तो मन में एक अनजाना सा डर भी आ गया।
तेरी ज़िंदगी में दोस्ती और दुनिया समा गई,
डर बस यही रहा, कहीं तू गलत राह न चुन जाए।
डर ये भी है कि कहीं तू खुद को न खो दे,
भीड़ में अपनी पहचान कहीं भूल न दे।
जब तेरी आवाज़ तेज़ हुई, तो मन घबरा गया,
सोचा—अब तुझे समझाऊँ कैसे, ये समय बदल गया।
पर हर माँ का डर उसकी ममता से जुड़ा होता है,
बेटा, मेरा हर डर बस तेरी खुशियों के लिए होता है
Simpal
माँ की ओर से बच्चे के लिए
तू जब मेरे हाथों में आया, नन्हा सा एक सपना बनकर,
मैं खुद को ही भूल गई, बस तुझमें ही सिमटकर।
अपना दर्द, अपनी खुशियाँ, सब तुझ पर वार दीं,
तेरी एक मुस्कान के लिए, मैंने हर खुशी हार दी।
जब तू थोड़ा सा बड़ा हुआ, तेरी हँसी ने मुझे हँसना सिखाया,
तू मेरे सिवा किसी की गोद में न गया, ये देख मन भर आया।
सब कहते थे, मैं तुझसे ज़्यादा प्यार करती हूँ, तुझे रोने नहीं देती,
पर क्या करूँ, माँ हूँ मैं, तेरी आँखों में आँसू देख नहीं सह पाती।
सबकी माँ अपने बच्चों को गलती पर डाँटती है,
पर मुझे तुझ पर भरोसा था, कि तू कभी राह नहीं भटकता है।
ज़रा सा दर्द हो जाए तुझे, तो दिन-रात तेरे पास बैठी रहती,
माँ हूँ न, अपने हिस्से का दर्द मैं कैसे देख पाती।
पर आज जब तू मेरे कंधों से ऊँचा हो गया,
तो मन में एक अनजाना सा डर भी आ गया।
तेरी ज़िंदगी में दोस्ती और दुनिया समा गई,
डर बस यही रहा, कहीं तू गलत राह न चुन जाए।
डर ये भी है कि कहीं तू खुद को न खो दे,
भीड़ में अपनी पहचान कहीं भूल न दे।
जब तेरी आवाज़ तेज़ हुई, तो मन घबरा गया,
सोचा—अब तुझे समझाऊँ कैसे, ये समय बदल गया।
पर हर माँ का डर उसकी ममता से जुड़ा होता है,
बेटा, मेरा हर डर बस तेरी खुशियों के लिए होता है
Mrugzal
કોઈ માટે આ સસ્તી છે.
પણ મારા માટે હસ્તી છે.
#TeaLover
#Mrugzal
Nadwika
Beyond the Shadow......
If you love the bloom,
then why must you tear it?
If the past is a ghost,
then why must you wear it?
Let the blossoms unfold,
let the spring take its part,
Untie every memory that
weighs down your heart.
For the road to your
glory is wide and is new,
Stop chasing the shadows
that don't belong to you.
ARTI MEENA
कला में चेहरों की सुंदरता नहीं,
आत्मा की छाप मायने रखती है।
कला वो है
जो हाथों की रेखाओं से निकलकर
समय पर अपनी कहानी लिखती है।
कला वो है
जो नयनों की खामोशी में छिपकर
अनकहे भावों को जन्म देती है।
कला वो है
जो चलती हुई हवा बनकर
रूह को छू जाती है
बिना दिखाई दिए।
कला को किसी माप,
किसी सीमा,
किसी परिभाषा में कैद नहीं किया जा सकता,
क्योंकि एक समय के बाद
ज़िंदगी खुद
कला की सबसे गहरी अभिव्यक्ति बन जाती है। ....ARTI MEENA
avani Shri Muktha
ఓ మగువ.. ఏది నీ స్థానం..
తల్లి పెంపకంలోనా.. తండ్రి బాధ్యతలోనా..
మౌనపు కోరికల మధ్యనా..
ఓ మగువ..
అత్తగారి సాధింపుల్లోనా..ఆడపడుచు ఆరాటాల్లోనా..
మగని మనసులోనా..కన్న బిడ్డ ఎదురు చూపుల్లోనా..
ఓ మగువ..
ఆగిపోయిన నడకల్లోనా..చెరబడిన గమ్యాల్లోనా..
కరిగిపోయిన కలల్లోనా.. విరిగిపోయిన నవ్వుల్లోనా..
బానిసైన వంట గదిలోనా..
ఓ మగువ..
అడిగే ప్రతి ప్రశ్నలోనా..చేజారే ప్రతి నిశ్శబ్దంలోనా..
కన్నీళ్లలో కొట్టుమిట్టాడే.. జీవితంలోనా..
ఓ మగువ
అధికారం లేని నిర్ణయాల్లోనా..సర్దుకున్న మనసులోనా..
వదులుకున్న ఆశల్లోనా.. మిగిలిపోయిన ఊపిరిలోనా…
ఏదురు చూసే కాలంలోనా..
ఓ మగువ.. ఎక్కడ నీ ఉనికి..
prit tembhe
सखे,राहतो मी तुझ्याच अंतरी, नको शोधूस वाट माझी....
नसलो जरी जवळी तुझ्या, पण आस मात्र नेहमी तुला भेटायची.......
पाहताना दुरून तुला, मन माझं फुलून येतं....
जसा एकदा पुन्हा नव्याने बहरला श्रावण मासं.....
सौंदर्य तुझे जरा ठेव आटोक्यातं,
कारण रूपाने तुझ्या, प्रेमाची वाट बहरते माझ्या मनातं.....
कसा आवरू ग सखे,माझ्या हृदयाला मी,
समोर येताच तुझे स्वप्न याला दिसतं....
म्हणून लागली जरी सवय भेटायची,
पण वाट मात्र हा विसरतं......
Kamini Shah
શબ્દોની જરૂર જ ન પડી
નજરથી નજર જો મળી…
-કામિની
वात्सल्य
*તમારા મોબાઈલ ઉપર કોઇ જ મેસેજ ના આવે કે કૉલ ના આવે તો તમને ખુદને અકળામણ થશે.મોબાઈલને આપણે દોસ્ત સમજી બેઠાં છીએ.અને આ દોસ્ત છૂપો હિતશત્રુ છે,તે બઉ ઓછા લોકોને ખબર છે.ઘણા દોસ્ત મોઢે મીઠા બોલા હોય પણ અંદરથી શત્રુ હોય.તેવા મિત્રોને ઓળખી લો.મોબાઈલ રિચાર્જ કરીને તમે તમારા મનની વાત મિત્રને ના કહી શકતા હો તો તમે ખૂબ દુઃખી છો.* - વાત્સલ્ય
avani Shri Muktha
చంద్రకాంతి నిండిన అడవిలో చల్లని సెలయేటి ఒడ్డున
కడివెడు కుండను నెత్తిన పెట్టిన ఓ పడతి......
అది కేవలం నీ రూపం కాదు…
ఒక జీవంతమైన వయ్యారం.....
నెత్తిన కుండలో నీరు కాదు నెత్తిన మోస్తున్న బరువేమో
ఆమె నడకలో నిండింది ఓ సహనం
చేతుల వలయాల్లో మెరిసేది వెండి కాదు
కాలాల్ని మోయగల ఓ నిశ్శబ్ద బలం....
నీలాకాశం కళ్ళలోకి దిగివచ్చినట్టు చంద్రుడు ఆమె లలాటాన తిలకమై కూర్చున్నట్టు పల్లవి పాడే గాలికి కూడా ఆమె పాదాల దగ్గర నిశ్శబ్దం నేర్పే వయ్యారం...
చీర మడతల్లో దాగుంది నీలి వయ్యారం
నెత్తి మీద మోస్తున్న కుండ నీటి బరువుకన్నా
బాధ్యత బరువు ఎక్కువైనా పెదవుల మీద చిరునవ్వు మాత్రం తరుగని అందం.....
చంద్రుని వెలుగు నెమ్మదిగా జారుతున్న వేళ అడవి ఊపిరి ఆపుకుని చూసిన దృశ్యం ఆమె సౌందర్యం అన్నట్టుగా ఉంది...
Soni shakya
मुस्कुराना भी सीख लिया है मैंने-- तेरे बिना पर,
खुश होना आज भी नहीं आता मुझे-- तेरे बिना
- Soni shakya
Rajkumari Yadav
हर हर महादेव 🙏🙏
Mrudhula
This is my new own writing ☺️
Please Support me
"Time's boat chained me down—lost everything, past gone forever, faith vanished into the endless road ahead. That suffocating journey ends with my final breath. Heartbreak feels this real. 💔"
Bhavesh Tejani
આપીને વચન ના આવો તમે એ તો તમારી રસમ છે,
મીંચી દેશો આંખ છતાં દેખાઈશ હું આ મારું વચન છે.
Pragna Ruparel
પીડા
તમારી પીડા બીજા પાસે વ્યક્ત કરશો તો તમારી કમજોરી ગણાશે.પરંતુ અમારી પાસે વ્યક્ત કરશો તો આપણે સાથે મળીને સોલ્વ કરવાની કોશિશ કરશું.તમારી પીડા દબાવી રાખશો.તો તમારો સ્ટ્રેસ વધારેને આત્મ વિશ્વાસ ઘટશે.સંબંધોમાં અંતર વધે.આવા બધા નકારાત્મક પાસા જોર કરશે.એના કરતાં સારું છે.કોઈ એવી વ્યક્તિ ને મળો જે તમને સમજે.
જય સ્વામીનારાયણ
mentor n Author pranga ruparel.
Raju kumar Chaudhary
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📘 Tree Mindset (एक वृक्ष की सोच से जीवन बदलें) 📘 Tree Mindset
एक वृक्ष की सोच से जीवन बदलें
📘 Tree Mindset
एक वृक्ष की सोच से जीवन बदलें
हर वृक्ष एक छोटे से बीज से शुरू होता है। उसकी राह में बाधाएँ, तूफ़ान, सूखा, और कीट आते हैं फिर भी वह ऊपर बढ़ता है। Tree Mindset हमें सिखाता है कि जीवन में भी इसी तरह मजबूती, धैर्य और अनुकूलन से हम अपनी सर्वोच्च संभावनाएँ प्राप्त कर सकते हैं।
अध्याय 1 बीज का दर्शन
हर वृक्ष सबसे पहले एक छोटा सा बीज होता है। उस बीज में:
संभावनाएँ
जीवन की शक्ति
भविष्य के सपने
बिना मिट्टी में डाले, बिना पानी और धूप मिले, वह जीवन नहीं पा सकता। इसी तरह हमारा mindset भी ‘भूमि’ है अगर हम सकारात्मक सोच, सीखने की भूख और लक्ष्य की चाह को अपने भीतर बोएँ, तो हम जीवन में फल सकते हैं।
Key Insight: खुद को एक बीज मानो जिसमें हर चीज़ बनने की क्षमता है।
अध्याय 2 जड़ें गहरी करें
वृक्ष अपने वातावरण से पानी और पोषक तत्व लेने के लिए गहरी जड़ें फैलाता है।
इंसान के लिए:
आत्मिक जड़ें = आत्मविश्वास
सांस्कृतिक जड़ें = परंपरा और शिक्षा
मानव संबंधों की जड़ें = परिवार और दोस्त
अगर जड़ें मजबूत हैं, तो तूफान भी हिला नहीं सकता।
Daily Habit: हर दिन 10 मिनट अपने लक्ष्य के बारे में सोचें।
अध्याय 3 धैर्य से बढ़ना
वृक्ष रातों रात नहीं बढ़ता। वह हर मौसम में: ☀️ धूप सहता
🌧️ बारिश सहता
❄️ ठंड सहता
और फिर भी बढ़ता है।
इंसान को रोज़ थोड़ा सीखना और अभ्यास करना चाहिए। धैर्य ही सफलता का मूल मंत्र है।
अध्याय 4 तूफानों का स्वागत
जो पेड़ बहुत स्थिर जड़ें नहीं बनाता, वह छोटा ही रह जाता है। लेकिन जिनकी जड़े मजबूत होती हैं वे ही तूफान में भी डटते हैं।
💡 जीवन के तूफ़ान:
असफलताएँ
आलोचना
बदलती परिस्थितियाँ
चुनौतियाँ दर्द देती हैं, लेकिन अनुभव देती हैं।
अध्याय 5 प्रकाश की ओर
वृक्ष हमेशा सूर्य की दिशा की ओर बढ़ता है।
इंसान भी: 🌟 सकारात्मक सोच अपनाएँ
🌟 प्रेरणादायक लोगों के साथ रहें
🌟 लक्ष्य की ओर स्पष्ट दृष्टि रखें
जैसे प्रकाश वृक्ष को ऊँचाई देता है, वैसे सकारात्मकता इंसान को उन्नति देती है।
अध्याय 6 पतों की तरह शाखाएँ फैलाएँ
वृक्ष की शाखाएँ जितनी फैलती हैं, उतना ही वह अधिक सूरज की रोशनी पकड़ सकता है।
इंसान के जीवन में शाखाएँ हैं रिश्ते, दोस्त, सहकर्मी और नेटवर्क।
कहानी: राहुल नाम का लड़का अकेले काम करता था। उसने अपने आस-पास के लोगों की मदद की और उनसे सीखने की कोशिश की। कुछ सालों में वही अकेला लड़का एक बड़े उद्यमी बन गया।
अभ्यास: हर दिन कम से कम एक व्यक्ति से सीखें या मदद करें।
अध्याय 7 फल और फूल
वृक्ष का सबसे सुंदर हिस्सा उसके फल और फूल हैं।
फूल = छोटी उपलब्धियाँ
फल = बड़े लक्ष्य
कहानी: सीमा हर दिन 2 घंटे पढ़ाई करती थी। शुरुआत में नतीजा नहीं दिखा, लेकिन उसने धैर्य रखा। 6 महीने बाद वह स्कूल टॉपर बन गई।
अभ्यास: अपनी छोटी उपलब्धियों को नोट करें और सप्ताह में एक बार खुद को पुरस्कृत करें।
अध्याय 8 मूल्य का सृजन
जैसे वृक्ष अपने फल दूसरों को देता है, वैसे ही इंसान को भी समाज और लोगों को योगदान देना चाहिए।
कहानी: अजय अपनी सफलता के बाद गाँव के बच्चों को पढ़ाने लगा। कुछ सालों में बच्चे बड़े होकर समाज में योगदान देने लगे।
अभ्यास: हर महीने कम से कम एक व्यक्ति की मदद करें और जो आपने सीखा है, किसी को सिखाएँ।
अध्याय 9 प्रकृति से सीख
वृक्ष हर मौसम में संतुलन बनाए रखता है।
इंसान भी:
भावनाओं में संतुलन रखें
मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बनाएँ
बदलावों को स्वीकारें
कहानी: नेहा अपने काम और परिवार के बीच संतुलन नहीं बना पा रही थी। उसने योग, ध्यान और टाइम मैनेजमेंट अपनाया। कुछ महीनों में उसका जीवन शांति और सफलता दोनों से भर गया।
अभ्यास: रोज़ 10 मिनट ध्यान या योग करें।
अध्याय 10 Tree Mindset का अभ्यास
रोज़ाना 3 स्टेप अभ्यास: 1️⃣ सोच का बीज बोना सुबह उठकर कहें: “मैं आज सीखूँगा, बढ़ूँगा और सकारात्मक रहूँगा।”. 2️⃣ जड़ों को मजबूत करना ध्यान, योग, आत्म-निरीक्षण। 3️⃣ शाखाएँ फैलाना और फल देना दूसरों की मदद करें, ज्ञान साझा करें।
Weekly Reflection: इस हफ्ते मैंने क्या नया सीखा? कौन सी चुनौती ने मुझे मजबूत बनाया? अगले हफ्ते मैं किस पर काम करूँगा?
सारांश
Tree Mindset सिखाता है:
सोच को मजबूत बनाना 🌱
धैर्य रखना 🌳
चुनौतियों को अवसर समझना 🍂
सकारात्मकता अपनाना 🌞
रिश्तों को मजबूत करना 🤝
उपलब्धियों का आनंद लेना 🎯
सेवा और समाज में योगदान देना 💖
संतुलन बनाए रखना ⚖️
“एक मजबूत जड़ वाला वृक्ष ही तूफानों में भी ऊँचा खड़ा रहता है।”
प्रेरक उद्धरण
1. “हर बड़ा वृक्ष पहले एक छोटा बीज था।”
2. “चुनौतियाँ ही आपकी जड़ें मजबूत करती हैं।”
3. “सकारात्मक सोच सूर्य की तरह है।”
4. “अपने ज्ञान और अनुभव का फल दूसरों को दें।”
5. “जड़ें मजबूत, शाखाएँ फैली, फल मीठे — यही है Tree Mindset।”
writer by Raju kumar chaudhary
Sahil Patel
matrubharti I've seen that you particularly targeted me and not publishing my novels and stories, you said that it was technical error, the error is for whole platform not for particularly me , you are not publishing my stories but other writers can publish it. I have proof that today one writer published his story , but you particularly targeted me not to publish my stories why ?
@matrubharti321 ?
give me answer
i have proof in photo too
see that person's story was been published today but mine is still under process since 15 days
Jyoti Gupta
#TempleVibes
#BhaktiShorts
#SpiritualReels
#ViralBhakti
#SherawaliMaa
Shruti Maurya
https://youtube.com/shorts/Fnv1ZZ_W4wg?feature=share
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Nisha Jitesh Palan
ज़्यादा बोलता है, वह कम करता है…
और जो ज़्यादा करता है, वह कम बोलता है”
👉 वहीं जो लोग सच में मेहनत करते हैं, वे चुपचाप अपना काम करते रहते हैं।
उन्हें अपनी तारीफ़ करने की ज़रूरत नहीं होती, क्योंकि उनका काम ही उनकी पहचान बन जाता है।
- Nisha Jitesh Palan
BHAVIN TRIVEDI
જીંદગી ને ઉસ મકામ કે પાસ લાકર છોડા હે,
જહા પસંદ તો બહુત કુછ હે,
લેકીન ચાહીયે કુછ ભી નહી.
Manish Patel
રૂપિયાના ઢગલા પર ઊંઘની હડતાલ છે,
પણ માટીના ઓટલા પર નીંદર મહેરબાન છે !! Good morning radhe radhe 🙏
Dada Bhagwan
Thane came alive with devotion and celebration during the grand Pran Pratishtha of a new Trimandir, in the esteemed presence of Pujyashree Deepakbhai.
Take a look at some beautiful moments from the event. Visit: https://dbf.adalaj.org/jsXDF7fv
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Imaran
Tirchi nigaahon se na dekh aashiq-e-dilgir ko ... kaise teerandaz ho tum, zara seedha toh karlo teer ko
✍️imran ✍️
S K I N G
जिंदगी में दो ही दिन 24 घंटे के नहीं होते
एक पैदाइश का दिन
एक मौत का दिन
Shailesh Joshi
આજકાલ ભેગા થવામાં
કે છૂટા પડવામાં વાર નથી લાગતી,
એમાંય એનાં ફાયદા ઓછા
ને નુકશાન ઝાઝું, છતાંય સમજણ
નથી જાગતી ???
- Shailesh Joshi
Shailesh Joshi
સમય⏰️અને સંબંધ🤝
આ બંનેની
શરણે થવાથી
ભવસાગર
તરી જવાય છે
અને
એની સામે પડવાથી તો
જીવનની
પથારી ફરી જાય છે.
😀😀😀😀😀😀
રોનક જોષી. રાહગીર
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Abhishek Chaturvedi
*रात - दिन और सुकून*
_© अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'_
ऐ मालिक,
अभि न ऐसी रात दे जिसका कभी सवेरा न हो,
ॲंधेरा भी ज़रूरी हैं, उजाले की क़दर के लिए।
न ऐसी सुबह दे जिसकी कभी रात ही न आए,
थकान न हो तो सुकून का मतलब क्या बचे।
ख़ुशियाँ भी अगर बिना विराम मिलें,
तो दिल उन्हें पहचानना भूल जाता है।
बस इतनी सी दुआ है
रात भी मिले, सुबह भी आए,
इनके बीच जीने का हुनर भी आए.....
✍️अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि'.....✍️
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
इश्क़ भी पाक बंदगी
इश्क़ भी पाक बंदगी हैं l
सच्चा इश्क़ दिवानगी हैं ll
गर इश्क़ रुह से है तो l
मोहब्बत में सादगी हैं ll
इन्द्रधनुष के जैसा ही l
दिल ए हुस्न बरगी हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Meghna Sanghvi
મને મન થાય ને ત્યારે,
તારા અવાજ સાંભળવો કદાચ અશક્ય છે.
પણ, તારા શબ્દોને વાંચીને તારી લાગણી ને અનુભવી એ મારો હક છે.
meghu
meghna sanghvi
Bhupendra Kuldeep
https://youtube.com/shorts/JdfdSDeesSw?si=UTOOI-Bn3MrZ34YR
Raju kumar Chaudhary
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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
दुनिया है इतनी बड़ी, नहीं एक भी मित्र। जीवन भर बेकार में, रहा लुटाता इत्र।।
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
यह प्रसिद्ध वैदिक मंत्र है—सामूहिकता और एकता का घोष 🌿
मंत्र (ऋग्वेद 10.191.2)
सं गच्छध्वं सं वदध्वं
सं वो मनांसि जानताम्।
शब्दार्थ
सं — साथ-साथ, मिलकर
गच्छध्वम् — चलो
वदध्वम् — बोलो, परामर्श करो
मनांसि — मन
जानताम् — एक-दूसरे के अनुरूप हों / एक हों
सरल अर्थ:
“तुम सब साथ-साथ चलो, साथ-साथ बोलो, और तुम्हारे मन एक-दूसरे के साथ एकरूप हों।”
भावार्थ
यह मंत्र सामाजिक, आध्यात्मिक और राष्ट्रीय जीवन—तीनों में एकता, संवाद और सामंजस्य का आदर्श रखता है। केवल साथ रहने की नहीं, बल्कि मन-विचार की एकता की प्रेरणा देता है। जहाँ विचार एक हों, वहाँ संघर्ष नहीं, सहयोग होता है।
समान भाव के अन्य प्रमाण
यजुर्वेद (40.7)
यस्मिन्सर्वाणि भूतानि आत्मैवाभूद्विजानतः
— जहाँ सब प्राणियों में आत्मभाव हो जाता है, वहाँ भेद नहीं रहता।
भगवद्गीता (6.32)
आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन
— जो सबको अपने समान देखता है, वही श्रेष्ठ है।
उपनिषद (ईशावास्य)
ईशावास्यमिदं सर्वम्
— सब में एक ही सत्ता का वास है।
“सं गच्छध्वं सं वदध्वं” के भाव (एकता, सामंजस्य, सामूहिक चेतना) के अन्य उपनिषदों से प्रमाण क्रमबद्ध रूप में देखिए—
1. बृहदारण्यक उपनिषद् (1.4.10)
मंत्र:
अहं ब्रह्मास्मि।
भावार्थ:
जब सबमें एक ही ब्रह्म का बोध हो जाता है, तब भेद, विरोध और वैमनस्य नहीं रहता।
यही “सं गच्छध्वम्” का दार्शनिक आधार है—एक आत्मा का अनुभव।
2. छान्दोग्य उपनिषद् (6.8.7)
मंत्र:
तत्त्वमसि श्वेतकेतो।
भावार्थ:
तू वही ब्रह्म है जो सबमें व्याप्त है।
जब यह बोध होता है, तब मन स्वतः एक-दूसरे से जुड़ते हैं—
“सं वो मनांसि जानताम्”।
3. ईशोपनिषद् (6)
मंत्र:
यस्तु सर्वाणि भूतानि आत्मन्येवानुपश्यति।
सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते॥
भावार्थ:
जो सब प्राणियों को अपने ही आत्मा में देखता है, वह किसी से द्वेष नहीं करता।
यह सामूहिक सद्भाव और अहिंसक सह-अस्तित्व का उपनिषदिक प्रमाण है।
4. कठोपनिषद् (2.1.1)
मंत्र:
पराञ्चि खानि व्यतृणत् स्वयम्भूः।
भावार्थ--
:जब मन बाह्य भेदों से हटकर अंतर्मुख होता है, तब एकत्व का अनुभव होता है।
वहीं से सच्चा सामूहिक संवाद जन्म लेता है।
5. मुण्डकोपनिषद् (2.2.5)
मंत्र:
यस्मिन्सर्वाणि भूतानि आत्मैवाभूद्विजानतः।
भावार्थ:
ज्ञानी के लिए सब प्राणी आत्मस्वरूप हो जाते हैं।
यह श्लोक सीधे बताता है कि एकता बोध ही सामाजिक समरसता का मूल है।
6. मैत्रायणी उपनिषद् (6.30)
मंत्र:
एकं ह्येव सद् बहुधा कल्पयन्ति।
भावार्थ:
सत्य एक है, उसे लोग अनेक रूपों में देखते हैं।
यह मंत्र विचारों की विविधता में भी मूल एकता को स्वीकार करता है—
यही “सं वदध्वम्” की आत्मा है।
“सं गच्छध्वं सं
वदध्वं” (एकता–सामंजस्य–सहयोग) के भाव के महाभारत, हितोपदेश, भर्तृहरि और चाणक्य से प्रमाण क्रमशः प्रस्तुत हैं—
1. महाभारत से प्रमाण
(क) उद्योगपर्व
श्लोक:
सहयोगेन सर्वार्थाः सिद्ध्यन्ति न हि केवलम्।
भावार्थ:
सब कार्य सहयोग से ही सिद्ध होते हैं, अकेले प्रयत्न से नहीं।
→ यह सीधे “सं गच्छध्वम्” का व्यवहारिक रूप है।
(ख) शान्तिपर्व
श्लोक:
एकचक्रं न वर्तेत जातु लोकस्य संस्थितिः।
भावार्थ:
एक व्यक्ति या एक विचार से समाज नहीं चलता।
समाज की स्थिरता सामूहिक समन्वय से ही संभव है।
(ग) वनपर्व
श्लोक:
भेदो विनाशकारणम्।
भावार्थ:
फूट और वैमनस्य विनाश का कारण होते हैं।
→ यही कारण है कि वेद संयुक्त चलने और बोलने का उपदेश देता है।
2. हितोपदेश से प्रमाण
(क) मित्रलाभ प्रकरण
श्लोक:
सहायः साधनं कार्यं न तु केवलमात्मनः।
भावार्थ:
कार्य की सिद्धि के लिए सहायता आवश्यक है, अकेले से नहीं।
(ख) प्रसिद्ध सूत्र
श्लोक:
एकेनापि सुवृक्षेण दह्यमानेन वानराः।
दह्यन्ते सर्व एवात्र न गुणो वृक्षसंश्रयः॥
भावार्थ:
एक की भूल से सब संकट में पड़ जाते हैं—
इसलिए सामूहिक विवेक और संवाद आवश्यक है।
3. भर्तृहरि (नीतिशतकम्) से प्रमाण-
(क) सत्सङ्गत्वे निस्सङ्गत्वं निस्सङ्गत्वे निर्मोहत्वम्।
भावार्थ:
सज्जनों का संग मन को शुद्ध करता है।
जब मन शुद्ध और एकरूप हो, तभी सं वो मनांसि जानताम् साकार होता है।
(ख) परस्परं भावयन्तः श्रेयः परमवाप्स्यथ।
(गीता में भी समान भाव)
भावार्थ:
परस्पर सहयोग से ही परम कल्याण प्राप्त होता है।
4. चाणक्य (चाणक्यनीति) से प्रमाण
(क) सुखस्य मूलं धर्मः धर्मस्य मूलं अर्थः।
अर्थस्य मूलं राज्यं राज्यस्य मूलं इन्द्रियजयः॥
भावार्थ:
राज्य और समाज की नींव नियंत्रित, संगठित और समन्वित जीवन है।
(ख) एकः शत्रुर्न हन्तव्यः सहस्रैः सह योद्धुकामः।
भावार्थ:
एक संगठित समूह अकेले शक्तिशाली व्यक्ति से भी बलवान होता है।
यह सामूहिक शक्ति का स्पष्ट प्रमाण है।
(ग) प्रसिद्ध नीति-वाक्य:
संघशक्तौ कलियुगे।
भावार्थ:
कलियुग में शक्ति का आधार संघ और एकता है।
समग्र निष्कर्ष
वेद → उपनिषद → महाभारत → नीति-ग्रंथ
सब एक स्वर में कहते हैं—
विचार में एकता,
वाणी में समन्वय,
और कर्म में सहयोग —
अब पुराणों से प्रमाण प्रस्तुत है, जो सीधे “सं गच्छध्वं सं वदध्वं” (एकता, सामूहिकता, परस्पर-सहयोग) के भाव को पुष्ट करते हैं।
1. भागवत पुराण से प्रमाण
(क) स्कन्ध -4
श्लोक:
परस्परानुभावेन भवत्यैक्यमनोरथः।
भावार्थ:
परस्पर सहयोग और समझ से ही मन की एकता उत्पन्न होती है।
→ यह स्पष्ट रूप से “सं वो मनांसि जानताम्” का पुराणीय प्रमाण है।
(ख) स्कन्ध- 11 (उद्धव गीता)
सङ्गो हि धर्मसम्पत्तेः कारणं परमं स्मृतम्।
भावार्थ:
सज्जनों का संग ही धर्म और उन्नति का मूल कारण है।
→ संग = साथ चलना, साथ बोलना।
2. विष्णु पुराण से प्रमाण
(क) समाजो हि महाबाहो धर्मस्यायतनं स्मृतम्।
भावार्थ: धर्म का वास्तविक आधार संगठित समाज है, अकेला व्यक्ति नहीं।
(ख) परस्परहितं कर्म लोकस्य स्थैर्यकारणम्।
भावार्थ:
परस्पर हित का आचरण ही समाज की स्थिरता का कारण है।
3. मार्कण्डेय पुराण से प्रमाण
एकभावसमायुक्ता जयन्ते सर्वकर्मसु।
भावार्थ:
जो लोग एक भाव से युक्त होते हैं, वे हर कार्य में विजय पाते हैं।
4. पद्म पुराण से प्रमाण:
नैकस्य तपसा सिद्धिर्नैकस्य ज्ञानतो जयः।
सङ्घेनैव महत्कर्म साध्यते नात्र संशयः॥
भावार्थ:
न केवल तप से, न केवल ज्ञान से
महान कार्य संघ (एकता) से ही सिद्ध होते हैं।
5. अग्नि पुराण से प्रमाण:
भेदो नाशाय विज्ञेयः सङ्घो रक्षाय कीर्तितः।
भावार्थ:
फूट विनाश का कारण है, और संघ रक्षा तथा उन्नति का।
6. ब्रह्म पुराण से प्रमाण
एकचित्ताः समायुक्ता लोकान् धारयन्ति ते।
भावार्थ:
एक चित्त से युक्त लोग ही लोक (समाज) को संभालते हैं।
निष्कर्ष (पुराणीय दृष्टि)
पुराण स्पष्ट कहते हैं—
संघ = शक्ति
भेद = विनाश
एकचित्तता = धर्म, विजय और लोक-कल्याण
यही वैदिक मंत्र “सं गच्छध्वं सं वदध्वं” का
पुराणों में विकसित सामाजिक रूप है।
-----+------+------+-----+------+
Akash Pal
"प्यार वही होता है जो तुम्हारे चले जाने के बाद भी तुम्हारा इंतज़ार करता रहे. वो पन्ना उसने अपने सीने के पास रखा.ओर आँखेंमंद लीं उसकी साँसों में भी शायद किसी प़राने प्यार की कहानी बाकी थीं.. कोई अधरा नाम.. कोई अधरी मोहब्बत..
Akash Pal
"प्यार वही होता है जो तुम्हारे चले जाने के बाद भी तुम्हारा इंतज़ार करता रहे. वो पन्ना उसने अपने सीने के पास रखा.ओर आँखेंमंद लीं उसकी साँसों में भी शायद किसी प़राने प्यार की कहानी बाकी थीं.. कोई अधरा नाम.. कोई अधरी मोहब्बत..
rakhi
लंबे दर्द से ज्यादा , कुछ पल की झूठी परवाह ज्यादा पीड़ा देती है
- rakhi
Jeetendra
अगर एक लड़का कहे कि "मैं हर रोज़ झूठ बोलता हूँ", तो क्या आज उसने सच बोला या झूठ?
फ्रेंड्स, इसका आंसर कमेंट में दीजिए।
Jeetendra
तुम मुझसे रूठी हो,
पर मेरी खामोशी में भी तुम्हारा नाम है।
हर पल तुम्हारी हँसी की आवाज़ मेरी सांसों में गूंजती है,
और हर खामोश लम्हा तुम्हारी याद से भर जाता है।
मैं जानता हूँ, मेरी बातों में कभी-कभी तूफ़ान आ जाते हैं,
पर मेरे दिल के कोने में सिर्फ़ तुम्हारी जगह है।
तुम्हारे बिना हर रंग फीका लगता है,
और हर गीत अधूरा सा लगता है।
अगर मैं कहूँ कि तुम्हारे बिना दुनिया बेरंग है,
तो क्या तुम मुझे माफ़ कर दोगी?
अगर मैं हाथ बढ़ाऊँ और कहूँ,
“चलो फिर से हँसें, साथ में,”
क्या तुम उस पल को फिर से मेरे साथ जीओगी?
मैं वादा करता हूँ,
ना कोई बड़ी बात होगी, ना कोई झगड़ा याद रहेगा।
सिर्फ़ तुम और मैं,
और वो नन्ही-सी मुस्कान जो तुम्हारे होंठों पर लौट आए।
तो क्या तुम मेरी दुनिया में फिर से लौटोगी,
और मेरे हर एक दिन को रोशनी से भर दोगी?
Nitesh pratap singh
है एक दोस्त मेरी
की है एक दोस्त मेरी II
वो कहती सबसे
कि, वो कहती सबसे की दोस्त है अच्छा मेरा II
लेकिन दोस्तो बाली बात कहा I
दोस्तो बाली सारी बात किसी और के साथ
कि, दोस्तो बाली सारी बात किसी और के साथ II
और दोस्त हमें अपना बताती है
और दोस्त वो हमे बताती II
नितेश प्रताप सिंह ❤️🩹
Jeetendra
नाम: खामोशी में तेरी
तुम पास हो, फिर भी दूर हो,
हर नजर मिलती है, पर हाथ नहीं मिलता।
कदम तेरे मेरे पास आते हैं,
पर राहें अचानक किसी अजनबी की तरह मोड़ लेती हैं।
तुम हंसते हो, और मेरी धड़कनें बढ़ जाती हैं,
शब्दों में कहीं दबा सा,
कोई सवाल उठता है—
क्यों हमारी बातें अधूरी रह जाती हैं?
हवा में तेरी खुशबू आती है,
और मैं खुद को रोकता हूँ,
ना छू लूँ, ना बोल दूँ,
पर दिल की ख्वाहिश, हर पल बढ़ती है।
तेरी आँखों में जो झलक है,
वो कहती है—“आओ।”
और आवाज़ मेरी,
सिर्फ़ खामोशी में फँस जाती है।
हर रात यही सोचता हूँ,
क्या मैं सही समय पर पहुँचूँगा?
या हमेशा इस खामोशी में,
तेरे करीब रहकर दूर ही रह जाऊँगा?
Anil singh
"रिश्तों की नुमाइश में, रूह का सौदा कर आई,
वो बेटी आज अपनी ही नज़र में, अजनबी बन घर आई।
माथे का सिंदूर गवाह था उस मजबूरी का,
जो माँ की दुआ बन कर, उसकी पलकों पर उतर आई।"
Anil singh
"हाथों में कंगन भारी हैं, पर रूह आज भी खाली है,
माँ की जान बचाने को, उसने अपनी हस्ती वार डाली है।
जो कल तक नंगे पाँव थी, आज महलों की रानी है,
पर इस चमक के पीछे छुपी, एक दर्द भरी कहानी है।"
Alfha production house
why? INDIA why?
S K I N G
इज़हार की जल्दी नहीं थी हमें,
मोहब्बत हो रही थी, होने दी हमने..
- S K I N G
S K I N G
उसके मीठे होठ हाय
और हम शुगर के मरीज़
हाय
अब प्यार करे या परेज
हाय हाय हाय
- S K I N G
S K I N G
गलती सिर्फ एक पन्ना है
और
रिश्ता एक किताब
अगर गलती है तो माफ़ी मांग लेना ही बेहतर है
- S K I N G
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
तुझ्या प्रेमाने दिला..
Adarsh Pal Adarsh
अज्ञानता से हमें बचाती है पुस्तक,
अकेलेपन में मित्र बन जाती है, पुस्तक।
श्वेत पन्नों पर
काले अक्षरों से सज जाती है, पुस्तक।
चुप रहकर भी
सम्पूर्ण गाथा सुनाती है, पुस्तक।
कवियों की कविता,
लेखकों की कहानी,
दार्शनिकों के दर्शन की सरिता,
बहाती है पुस्तक।
कुरीतियाँ-अंधविश्वास मिटा,
नया युग-नये विचार बनाती है, पुस्तक।
दमनकारियों के सच दिखाकर
शोषितों की आवाज़ बनती है, पुस्तक।
जाति-धर्म का भेद मिटा,
सबको साथ लाने का फरमान है, पुस्तक।
ज्ञान का सागर संग्रहित कर
स्वयं सरस्वती माँ का वरदान है, पुस्तक।
दिनांक: 3-FEB-2026
Raju kumar Chaudhary
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✦ My Contract Marriage ✦
शहर की रौशनी में चमकती ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच, इंसानों की कहानियाँ भी अक्सर अनकही रह जाती हैं। कुछ रिश्ते किस्मत से मिलते हैं, कुछ समझौते से। और कुछ… एक ऐसे कॉन्ट्रैक्ट से शुरू होते हैं, जो बाद में ज़िंदगी की सबसे सच्ची दास्तां बन जाते हैं।
अध्याय 1 – सौदा
आरव मेहरा, 28 वर्षीय नामचीन बिज़नेसमैन, शहर के सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक था। हर चीज़ उसके पास थी – पैसा, शान-ओ-शौकत, पहचान – बस कमी थी तो एक रिश्ते की। रिश्तों पर उसका भरोसा टूटा हुआ था। उसके माता-पिता का तलाक, दोस्तों के धोखे और एक पुरानी अधूरी मोहब्बत ने उसे अंदर से कड़वा बना दिया था।
उसकी दादी, समायरा मेहरा, अब बीमार थीं। उनका सपना बस इतना था कि वे अपने पोते की शादी देख लें।
एक शाम दादी ने साफ़ शब्दों में कहा –
“आरव, मेरी आखिरी ख्वाहिश है… मैं तुम्हें दुल्हे के रूप में देखना चाहती हूँ। उसके बाद चाहे मैं रहूँ या न रहूँ।”
आरव के पास कोई विकल्प नहीं था। लेकिन वह शादी में भरोसा नहीं करता था। तभी उसकी ज़िंदगी में आई… कियारा शर्मा।
कियारा, 24 साल की, महत्वाकांक्षी लेकिन मुश्किलों से जूझती लड़की थी। उसके पिता नहीं थे, माँ की मौत पहले ही हो चुकी थी, और अब वह अपने छोटे भाई विवेक की पढ़ाई और भविष्य के लिए संघर्ष कर रही थी।
आरव ने उसे एक प्रस्ताव दिया –
“मुझसे शादी करो। एक साल के लिए। कॉन्ट्रैक्ट पर। तुम्हें और तुम्हारे भाई को हर तरह की सुरक्षा और आर्थिक मदद मिलेगी। और दादी खुश हो जाएँगी।”
कियारा के पास हज़ार सवाल थे। लेकिन विवेक की फीस और घर का बोझ देखकर उसने हामी भर दी।
अध्याय 2 – समझौते की शुरुआत
शादी धूमधाम से हुई। मीडिया ने इसे “लव मैरिज” कहा, लेकिन हक़ीक़त सिर्फ दोनों जानते थे – यह बस एक सौदा था।
दादी बेहद खुश थीं।
“मेरे पोते और बहू को साथ देखकर जीने की वजह मिल गई,” उन्होंने कहा।
शादी के बाद दोनों का रिश्ता अजनबी जैसा था।
आरव काम में व्यस्त रहता।
कियारा अपने भाई और घर की ज़िम्मेदारियों में।
दोनों एक ही छत के नीचे रहते लेकिन बीच में अदृश्य दीवार थी।
अक्सर छोटी-छोटी बातों पर झगड़े हो जाते।
“तुम्हें हमेशा टाइम पर घर क्यों चाहिए?” कियारा गुस्से से पूछती।
“क्योंकि ये मेरा घर है, और यहाँ मेरी मरज़ी चलेगी,” आरव ठंडे स्वर में जवाब देता।
लेकिन इन बहसों के बीच कहीं न कहीं दोनों एक-दूसरे को समझने भी लगे।
अध्याय 3 – बदलते रिश्ते
धीरे-धीरे कियारा ने आरव की दुनिया को करीब से देखना शुरू किया।
वो जानती थी कि उसके अंदर का गुस्सा सिर्फ बाहरी मुखौटा है। असल में वह अकेला है।
एक रात जब आरव काम से लौटकर थका हुआ सोफ़े पर बैठा, तो कियारा ने अनायास कहा –
“तुम इतनी बड़ी कंपनी चलाते हो, लेकिन अपनी ज़िंदगी नहीं। कभी खुद को वक्त दिया है?”
आरव चौंक गया। पहली बार किसी ने उसकी कमजोरी पर हाथ रखा था।
इधर, आरव भी कियारा की मेहनत और त्याग देखकर प्रभावित होने लगा।
वो जान गया कि कियारा ने शादी पैसे के लिए नहीं, बल्कि अपने भाई के भविष्य के लिए की है।
अध्याय 4 – दिल की धड़कनें
समय बीतता गया। दोनों के बीच छोटे-छोटे लम्हे जुड़ने लगे।
एक दिन कियारा बीमार पड़ी, तो आरव पूरी रात उसके पास बैठा रहा।
दूसरी बार आरव बिज़नेस प्रेज़ेंटेशन में असफल हुआ, तो कियारा ने उसे हिम्मत दी।
अब उनकी नज़रों में एक-दूसरे के लिए नफ़रत नहीं, बल्कि एक अजीब सा खिंचाव था।
दादी भी सब भाँप गई थीं।
“ये कॉन्ट्रैक्ट-वॉन्ट्रैक्ट सब बेकार है,” उन्होंने मुस्कुराकर कहा। “प्यार जब दिल से होता है, तो किसी काग़ज़ की ज़रूरत नहीं होती।”
अध्याय 5 – तूफ़ान
लेकिन हर कहानी में एक मोड़ आता है।
आरव का पुराना बिज़नेस राइवल, विक्रम मल्होत्रा, कियारा की ज़िंदगी में ज़हर घोल देता है।
वह आरव को समझाता है कि कियारा ने उससे शादी सिर्फ पैसों के लिए की है और गुपचुप विक्रम से मिल रही है।
दूसरी तरफ़, कियारा को पता चलता है कि कॉन्ट्रैक्ट की अवधि लगभग खत्म होने वाली है।
वह सोचती है – क्या आरव उसे रोक पाएगा? या यह रिश्ता यहीं खत्म हो जाएगा?
गलतफहमियों ने दोनों के बीच दीवार खड़ी कर दी।
“तुम्हारे लिए मैं बस एक सौदा थी, है न?” कियारा ने आँसुओं से भरी आँखों से कहा।
आरव ने गुस्से में जवाब दिया – “हाँ, और तुमने भी ये सौदा अपने फायदे के लिए ही किया!”
दोनों अलग हो गए।
अध्याय 6 – सच्चाई
कुछ दिन बाद सच सामने आया। विक्रम की चाल बेनक़ाब हुई।
आरव को एहसास हुआ कि कियारा ने कभी उसका साथ नहीं छोड़ा।
वह दौड़ता हुआ उसके पास गया।
“कियारा, मुझे माफ़ कर दो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ… कॉन्ट्रैक्ट से नहीं, दिल से।”
कियारा ने भी रोते हुए कहा –
“मैंने भी तुम्हें कभी सौदे की नज़र से नहीं देखा। लेकिन डर था कि तुम मुझे कभी अपना नहीं मानोगे।”
अध्याय 7 – नया सफ़र
दादी ने दोनों को आशीर्वाद दिया।
“अब मेरा सपना पूरा हुआ,” उन्होंने कहा।
आरव और कियारा ने कॉन्ट्रैक्ट को फाड़ दिया।
अब उनका रिश्ता किसी काग़ज़ पर नहीं, बल्कि विश्वास और प्यार पर टिका था।
विवेक ने पढ़ाई पूरी की, दादी की तबियत भी सुधरी, और आरव ने पहली बार अपने दिल के दरवाज़े खोले।
उपसंहार
कभी-कभी रिश्ते मजबूरी में शुरू होते हैं, लेकिन किस्मत उन्हें मोहब्बत में बदल देती है।
आरव और कियारा की “कॉन्ट्रैक्ट मैरिज” अब एक “फ़ॉरएवर लव स्टोरी” बन चुकी थी
Adarsh Pal Adarsh
उठो वीर संग्राम करो
यह विश्व स्वयं कुछ न देगा
मांझी बन पहाड़ तोड़
बन राम सिंधु पर बाण छोड़
तपस्या-विनति से यह सिंधु
स्वयं सेतु न बना देगा
उठो वीर संग्राम करो
यह विश्व स्वयं कुछ न देगा
भट्टी में जलना सीख लो
अकेले चलना सीख लो
कलि के युग में
कोई किसी का साथ न देगा
उठो वीर संग्राम करो
यह विश्व स्वयं कुछ न देगा
कोई तुम्हारा हितैषी नहीं
न कोई विरोधी है
तो उठो और छिन्न-भिन्न कर डालो
आखिर कौन तुम्हें रोक सकेगा
उठो वीर संग्राम करो
यह विश्व स्वयं कुछ न देगा
5-FEB-2026
Jyoti Gupta
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Shailesh Joshi
રઘવાયો ન થઈશ
મનને કાબુમાં રાખ
લેટ થશે પણ લેટેસ્ટ થશે
હજી થોડી ધીરજ રાખ
- Shailesh Joshi
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