Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
mohansharma
ये मानकर चलना तुम बहुत अच्छे जब तक लगोगे..
तब तक मोहन अगले का मक़सद ना पूरा हो जाए..
Avinash
हेलो दोस्तो,
मेरी फर्स्ट किताब कल 10 मार्च को आ रही है । किताब का नाम "अधूरी धुन" है
कृपया करके आप यह किताब पढ़े और आपके विचार प्रस्तुत करे।
धन्यवाद 💫❤️
kattupaya s
Time for short Nap..😴
Dr.Namrata Dharaviya
"જીત નક્કી હોય તો અર્જુન કોઈ પણ બની શકે,
પણ જ્યારે મૃત્યુ નક્કી હોય ત્યારે અભિમન્યુ બનવું પડે." 🏹🔥
કલમના સથવારે ✍️
- Dr.Namrata Dharaviya
Kaushik Dave
"धरती कहे पुकार के", को प्रतिलिपि पर पढ़ें :,
https://pratilipi.app.link/RJ37fWNvm1b
भारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क!
Kaushik Dave
પ્રતિલિપિ પર વાંચો - ""બારી પર ટપકતું લોહી", ને પ્રતિલિપિ પર વાંચો :"
"બારી પર ટપકતું લોહી", ને પ્રતિલિપિ પર વાંચો :,
https://pratilipi.app.link/Ca59x8Pvm1b
વાંચો, લખો અને સાંભળો અગણિત રચનાઓ ભારતીય ભાષાઓમાં, તદ્દન નિઃશુલ્ક!
Shailesh Joshi
અમુક કામો થશે, કે નહીં થાય ?
એ વિચારવામાં
આપણો જેટલો સમય જાય છે,
એના કરતાં અજમાવી લેવામાં,
આપણા ઘણા બધા કામો થઈ જાય છે,
અને બાકી વધેલા કામો,
કેટલા, અને કેમ રહી જાય છે ?
એની પણ આપણને ખબર પડી જાય છે, બાકી તો,
જે વિચારવામાં જ રહી જાય છે,
એ રહી જ જાય છે.
Kaushik Dave
हां, मैं ही झूठी हूं
नहीं, तुम जैसी सच्ची कोई नहीं।
हां, मैंने आज कुछ खास नहीं किया
नहीं, तुम जैसा कोई काम करता नहीं।
हां, आप तो वो हो
नहीं, तेरे सामने मैं कुछ नहीं।
हां, मैं जिद पर अड़ी हूं
नहीं, तेरी सादगी का जवाब नहीं।
हां, मैं राहें भटक जाती हूं अक्सर
नहीं, तू चले तो फिर कोई खोता नहीं।
हां, मुझमें हजार कमियां होंगी
नहीं, तुझ बिन मेरा वजूद मुकम्मल नहीं।
हां, मैं बस एक आम सी कहानी हूं
नहीं, तू वो किताब है जिसका अंत नहीं।
A singh
लिखने बैठी थी दिल का हाल, पर कलम ही रुक गई, ✨
शायद मेरे ज़ख्मों की गहराई देखकर स्याही भी झुक गई।
वो जो कहते थे कि हम साया बनकर साथ चलेंगे, 👣
आज उन्हीं की यादों में मेरी हर मुस्कान कहीं खो गई।
जिसे अपना समझा था, वही दूरियों का कारण बन गया,
और मेरी खामोशियों में छुपा हर दर्द मेरा हमसफ़र बन
गया।
— A Singh
Sunita bhardwaj
"उसकी अच्छाई"
-------------------
वो बहुत अच्छा इन्सान हैं,
शायद इसलिए मैं भी अपनी अच्छाई बचाए रख सकी
जब भी रास्ते धुंधले हुए,
और मन थोड़ा भटकने लगा,
पर उसकी बातों ने संभाल लिया।
उसने मुझे बदला नहीं,
बस याद दिलाया
कि मैं कैसी थी
और कैसी रह सकती हूं
उसने कभी मुझे रोका नहीं
बस इतना कहा......
"तुम जैसी हो,वैसी ही अच्छी हो,
खुद को मत बदलना।"
और शायद वही शब्द थे
जिन्होंने मुझे बिगड़ने नहीं दिया।
दुनिया में लोग अक्सर एक दूसरे को बदल देते हैं,
पर कुछ ऐसे भी लोग होते हैं
जो हमारी अच्छाई को बचाए रखते हैं।
अगर मैं आज भी
वैसी ही हू जैसी पहले थी,
तो उसमें मेरी कोशिश कम
और उसकी सीख ज्यादा है।
क्योंकि कुछ लोग
हमारी जिंदगी में आकर हमे बदलते नहीं....
बस हमे बेहतर इंसान बने रहने
कि वजह दे जाते है।
_Sunita
Awantika Palewale
એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે,
નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે.
તારી નજર પડે તો વસંત ખીલી ઉઠે છે,
નહિતર દરેક ઋતુમાં અજબ શીત થાય છે.
તારા શબ્દોથી દિલને અજબ શાંતિ મળે છે
નહિતર મનમાં કેટલી અનકહી પ્રીત થાય છે.
તું નજીક હોય ત્યારે સમય પણ થંભી જાય છે
પળ પળ જાણે પ્રેમની નવી જીત થાય છે.
તું દૂર હોવા છતાં મારાં અહેસાસમા સાથે છે.
એટલે જ આ દિલને થોડી રાહત મળી જાય છે.
તારી યાદ આવે તો રાત ચાંદની બની જાય છે
નહિતર આ આંખોમાં અંધકારનો વસવાટ થાય છે.
તું મળ્યો ત્યારથી મને જીવનનો અર્થ મળ્યો છે,
નહિતર આ સફર બસ એક અજાણી રીત થાય છે.
તારા સાથમાં પીડા પણ સંગીત બની જાય છે,
તારાં વિના ખુશી પણ ક્યારેક હાર બની જાય છે.
દિલમાં હવે તો એક જ દુનિયા બનાવી છે,
જ્યાં તારાં જ અહેસાસનો દરબાર ભરાય છે.
મારા દિલની વાત કલમથી લખી દઉં છું,
એક તારાં જ નામથી દરેક પ્રીત થાય છે.
એક તારાં જ સાથથી જીવન વ્યતીત થાય છે,
નહિતર આ દુનિયા સાથે ફક્ત એક રીત થાય છે.
મોરલો
#INTERNATIONAL WOMAN'S DAY #2K26
Shailesh Joshi
ઉચ્ચ વિચારો, ઊંચું ધ્યેય,
કંઈક વિશેષ કરવાની લગન,
સતત કાર્યશીલતા,
પ્રામાણિકતાની સાથે-સાથે
પરોપકારની ભાવના,
આ બધાજ.....
આપણી જીંદગીની છબીને એડિટ કરી ચમકાવવા માટેના ટુલ્સ છે.
Dada Bhagwan
જે માણસ પારકાંને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી, તે પોતાની જાતને ‘સિન્સિયર’ રહેતો નથી! - દાદા ભગવાન
વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: www.dadabhagwan.in
#quoteoftheday #quote #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation
Imaran
अपना चाँद सा चेहरा देखने की इजाज़त दे दो,
इस खूबसूरत शाम को और सजाने की इजाज़त दे दो
✨imran ✨
Imaran
कशिश हो शायरी की तुम,
गजल की जान लगती हो,
खुदा के नूर जैसी हो,
नजर की शान लगती हो,
मेरे अल्फाज में तुम हो,
मेरे अंदाज में तुम हो,
मेरे हर खूबसूरत नज्म की,
पहचान लगती हो,
🫶imran 🫶
Viru
poem
" spellbound ”
ये कमल से मुख पे कैश तेरे, भांति भांति के भेष तेरे।
जे होजा तू आज मेरी, तो करवादूं में ऐश तेरे।
तेरी आंखों का नूर,दे जाता है संदेश तेरे।
तेरी यादों की छांव तले, कट जाए दिन शेष मेरे।
मैं छीन लूं रातें सारी, नाम करू सवेरे तेरे।
इतने दिन हम आधे थे, अब हो गये अवशेष तेरे।
ये कमल से मुख पे केश तेरे, भांति भांति के भेष तेरे।
तेरी चाल पे दिल हार गया,
लबों ने नरसंहार किया,
आंखों ने लूटा आधा था,
अब शेष भी तुझपे हार गया।
मैं भवसागर भी पार गया,
जैसे मीरा ने प्यार किया,
आंखों ने लूटा आधा था,
अब शेष भी तुझपे हार गया।
हां मैने तुझसे प्यार किया,
शब्दों से ना इजहार किया,
अब शेष भी तुझपे हार गया,
अब शेष भी तुझपे हार गया।
हां इतने दिन हम आधे थे,
अब हो गए अवशेष तेरे।
ये कमल से मुख पे केश तेरे,
भांति भांति के भेष तेरे,
जे होजा तू आज मेरी,
तो करवा दूं मैं ऐश तेरे।
Hetu P
જે વ્યક્તિ એક દિવસ એવું કહેતો હોય કે,
નથી જોવાતું તારૂ દુઃખ હું તને રડતા નથી જોઈ શકતો,
પછી એજ વ્યક્તિ ..
આપણને રડાવે છે !... આજ સત્ય છે.💔😊
Dr.Namrata Dharaviya
જિંદગીની નવી શરૂઆત માટે કોઈ મુહૂર્ત નથી હોતું,
બસ, મન મનાવી લો તો એ જ શ્રેષ્ઠ ક્ષણ છે."
-કલમ ના સથવારે ✍️
- Dr.Namrata Dharaviya
Std Maurya
मैं आपके लिए क्या लिखूँ, लिखता हूँ जब आपके लिए।
शब्दों में रंगत कम पड़ जाती, सोचता हूँ फिर क्या लिखूँ आपके लिए।
आप तो बागों के माली हैं, फूलों में महक भर देते हैं।
क्यों न मैं खुद महक बन जाऊँ, जब आप जीवन महका देते हैं।
आप बागों की चहल-पहल हैं, क्यों न मैं खुद फूल बन जाऊँ आपके लिए।
मुरझाए फूल भी खिल उठते, जब आप मुस्काते फूलों के लिए।
आपके शब्दों में रंगत है, मेरा शब्द अभी अधूरा है।
जब आप मिलते फूलों से, हर फूल भी तब पूरा है।
एसटीडी कलम से लिखा ये पैगाम है,
"बालकवि बैरागी" नाम तो दिया आपने ही इनाम है।
लेखक /कवि - एसटीडी मौर्य ✍️
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
शत्रु उसी को कहे जग, जो करता नुकसान। अवसर पाते ही तुरत, करता वह अपमान।।
दोहा--444
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
महानगर
महानगर ने चुरा ली है जिंदगी मेरी l
यहाँ किसीने न देखी है बेबसी मेरी ll
नया मिला तो पुराना हुआ है याराना ll
चुराके दिल अब ठुकराई दोस्ती मेरी ll
जला दिया आशियाँ अपने हाथों से हमने l
खुदी को मार दिया देख सादगी मेरी ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
kattupaya s
It's Monday again.. start with the great energy Indian cricket team proved their strength once again.
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति--(३३) की व्याख्या
"विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि"
भावार्थ --हे प्रभु! सारी विद्याओं का आदि मूल तू ही है।
मंत्र —
विश्वेषामिज्जनिता ब्रह्मणामसि--2.23.2
पदच्छेद-
विश्वेषाम् + इत् + जनिता + ब्रह्मणाम् + असि
शब्दार्थ--
विश्वेषाम् — सबका, समस्त का
इद् — ही, निश्चय ही
जनिता — उत्पन्न करने वाला, जन्मदाता
ब्रह्मणाम् — ब्रह्म (ज्ञान, मन्त्र, विद्या) का
असि — तुम हो
भावार्थ--
हे प्रभु! आप ही समस्त ब्रह्म (ज्ञान, मन्त्र और विद्याओं) के उत्पन्न करने वाले हैं। संसार में जो भी विद्या, ज्ञान या सत्य का प्रकाश है, उसका मूल स्रोत आप ही हैं।
अर्थात् — सभी विद्याओं का आदि मूल परमात्मा ही है।
व्याख्या--
इस मंत्र में यह सिद्ध किया गया है कि ज्ञान स्वतः नहीं उत्पन्न होता, बल्कि उसका परम स्रोत परमात्मा है। वही परम चेतना ऋषियों के हृदय में ज्ञान का प्रकाश करती है, जिससे वेद, मंत्र और समस्त विद्याएँ प्रकट होती हैं।
इस प्रकार यह मंत्र बताता है कि परमात्मा ही समस्त ज्ञान का मूल कारण और प्रेरक है।
वेदों में प्रमाण --
1. ऋग्वेद-- 10.71.1
बृहस्पते प्रथमं वाचो अग्रं
यत्प्रैरत नामधेयं दधानाः।
अर्थ :
हे बृहस्पति (परमेश्वर)! आपने ही प्रारम्भ में वाणी और ज्ञान को प्रकट किया और वस्तुओं के नाम तथा विद्या का ज्ञान दिया।
भाव :
ज्ञान और वाणी का मूल स्रोत परमात्मा है।
2. यजुर्वेद-- 40.8
स पर्यगाच्छुक्रमकायमव्रणम्
अस्नाविरं शुद्धमपापविद्धम्।
कविर्मनीषी परिभूः स्वयम्भूः
याथातथ्यतोऽर्थान्व्यदधाच्छाश्वतीभ्यः समाभ्यः॥
अर्थ :
वह परमेश्वर सर्वज्ञ, सर्वव्यापक और स्वयम्भू है; वही यथार्थ रूप से सब पदार्थों का ज्ञान मनुष्यों को देता है।
भाव :
सभी ज्ञान का विधान और व्यवस्था परमात्मा ही करता है।
3. ऋग्वेद-- 10.129.6
यो अस्याध्यक्षः परमे व्योमन्
सो अङ्ग वेद यदि वा न वेद।
अर्थ :
इस सृष्टि का जो परम अधीक्षक परम आकाश में स्थित है, वही वास्तव में सबको जानता है।
भाव :
सर्वज्ञ परमात्मा ही ज्ञान का परम आधार है।
4. अथर्ववेद --10.8.32
येन ऋचः साम यजूंषि निर्मितानि।
अर्थ :
जिस परमात्मा से ऋग्वेद, सामवेद और यजुर्वेद के मंत्र प्रकट हुए हैं।
भाव :
वेद और समस्त विद्या का मूल परमात्मा है।
निष्कर्ष :
वेदों में अनेक स्थानों पर यह सिद्ध किया गया है कि समस्त ज्ञान, वाणी, वेद और विद्याओं का मूल स्रोत परमात्मा ही है।
उपनिषदों में प्रमाण---
1. मुण्डकोपनिषद --1.1.1
श्लोक :
ब्रह्मा देवानां प्रथमः सम्बभूव
विश्वस्य कर्ता भुवनस्य गोप्ता।
स ब्रह्मविद्यां सर्वविद्याप्रतिष्ठाम्
अथर्वाय ज्येष्ठपुत्राय प्राह॥
अर्थ :
सृष्टि के कर्ता ब्रह्मा ने सबसे पहले ब्रह्मविद्या, जो सभी विद्याओं की आधार है, अपने ज्येष्ठ पुत्र अथर्वा को बताई।
भाव :
यह बताता है कि सभी विद्याओं का मूल आधार परमात्मा से प्राप्त ब्रह्मविद्या है।
2--कठ उपनिषद् --2.2.15
न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं
नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः।
तमेव भान्तमनुभाति सर्वं
तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥
अर्थ :
जहाँ परमात्मा का प्रकाश है वहाँ सूर्य, चन्द्र और अग्नि भी प्रकाश नहीं देते; उसी के प्रकाश से सब कुछ प्रकाशित होता है।
भाव :
सारा ज्ञान और प्रकाश उसी परमात्मा से प्राप्त होता है।
3. श्वेताश्वतर उपनिषद-- 6.18
यो ब्रह्माणं विदधाति पूर्वं
यो वै वेदांश्च प्रहिणोति तस्मै।
तं ह देवमात्मबुद्धिप्रकाशं
मुमुक्षुर्वै शरणमहं प्रपद्ये॥
अर्थ :
जो परमात्मा पहले ब्रह्मा को उत्पन्न करता है और वही उन्हें वेदों का ज्ञान देता है — उस आत्मबुद्धि को प्रकाशित करने वाले देव की मैं शरण लेता हूँ।
भाव :
वेदों और ज्ञान का उपदेश भी परमात्मा ही करता है।
4.तैत्तिरीय उपनिषद--2.1
सत्यं ज्ञानमनन्तं ब्रह्म।
अर्थ :
ब्रह्म (परमात्मा) सत्यस्वरूप, ज्ञानस्वरूप और अनन्त है।
भाव :
ज्ञान स्वयं परमात्मा का स्वरूप है, इसलिए सारी विद्या का मूल भी वही है।
5. बृहदारण्यक उपनिषद्-- 2.4.10
अस्य महतो भूतस्य निःश्वसितमेतद्यदृग्वेदो
यजुर्वेदः सामवेदोऽथर्वाङ्गिरसः।
अर्थ :
यह ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद उस महान् परमात्मा के निःश्वास (श्वास) के समान हैं।
भाव :
वेद और ज्ञान का उद्गम परमात्मा से ही है।
6. छान्दोग्य उपनिषद्-- 6.1.3
येनाश्रुतं श्रुतं भवति
अमतं मतम् अविज्ञातं विज्ञातम्।
अर्थ :
जिस ज्ञान को जान लेने से अश्रुत भी श्रुत हो जाता है, और अज्ञात भी ज्ञात हो जाता है।
भाव :
परमात्मा का ज्ञान ही सभी ज्ञानों का मूल है।
7-- प्रश्न उपनिषद् --6.3
स प्राणमसृजत।
अर्थ :
परमात्मा ने ही प्राण आदि की रचना की।
भाव :
सृष्टि और जीवन के साथ-साथ ज्ञान का मूल कारण भी वही परमात्मा है।
8. एतरेय उपनिषद् --3.3
प्रज्ञानं ब्रह्म।
अर्थ :
प्रज्ञान (परम ज्ञान) ही ब्रह्म है।
भाव :
परमात्मा ही परम ज्ञानस्वरूप है, इसलिए सभी विद्याओं का मूल वही है।
पुराणों में प्रमाण---
1. विष्णु पुराण --1.2.10
ज्ञानस्वरूपो भगवान् विष्णुः।
अर्थ :
भगवान विष्णु स्वयं ज्ञानस्वरूप हैं।
भाव :
समस्त ज्ञान और विद्या का मूल भगवान ही हैं।
2. भागवत पुराण-- 1.1.1
श्लोक :
तेने ब्रह्म हृदा या आदिकवये।
अर्थ :
भगवान ने सृष्टि के आदि में ब्रह्मा के हृदय में वेदज्ञान का प्रकाश किया।
भाव :
वेद और समस्त विद्या का ज्ञान परमात्मा से ही प्राप्त होता है।
3. शिव पुराण --(विद्येश्वर संहिता)
ज्ञानं महेश्वरादेव सर्वविद्या प्रवर्तते।
अर्थ :
समस्त विद्या और ज्ञान महेश्वर से ही प्रवाहित होते हैं।
भाव :
सभी विद्याओं का मूल परमेश्वर है।
4 --ब्रह्म पुराण--
ईश्वरः सर्वविद्यानां मूलभूतः सनातनः।
अर्थ :
सनातन ईश्वर ही सभी विद्याओं का मूल कारण है।
5--पद्म पुराण --
सर्वज्ञानमयो देवः सर्वविद्याप्रवर्तकः।
अर्थ :
परमेश्वर सर्वज्ञानमय हैं और वही सभी विद्याओं को प्रवर्तित करने वाले हैं।
भाव :
समस्त ज्ञान और विद्या का मूल परमात्मा ही है।
6 स्कंद पुराण--
ज्ञानं विज्ञानसहितं देवात् सर्वं प्रवर्तते।
अर्थ :
ज्ञान और विज्ञान सहित सभी विद्याएँ परम देव से ही उत्पन्न होती हैं।
7.नारद पुराण--
सर्वविद्यानां प्रभुः देवो ज्ञानप्रदः सनातनः।
अर्थ :
सनातन परमेश्वर ही सभी विद्याओं के स्वामी और ज्ञान देने वाले हैं।
4. गरुड़ पूराण-
ईश्वरात् सर्वविद्यानां उत्पत्तिः परिकीर्तिता।
अर्थ :
सभी विद्याओं की उत्पत्ति ईश्वर से ही बताई गई है।
निष्कर्ष :
पुराणों में भी यही सिद्ध किया गया है कि ज्ञान, वेद, विद्या और विज्ञान का मूल कारण परमात्मा ही है।
1.(क) भगवद्गीता-- 15.15
सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो
मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च।
अर्थ :
मैं सबके हृदय में स्थित हूँ और मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और बुद्धि उत्पन्न होती है।
भाव :
सभी प्रकार का ज्ञान परमात्मा से ही प्राप्त होता है।
1(ख) भगवद्गीता- 10.32
अध्यात्मविद्या विद्यानां।
अर्थ :
विद्याओं में मैं अध्यात्मविद्या हूँ।
भाव :
समस्त विद्याओं का मूल परमात्मा से संबंधित अध्यात्म ज्ञान है।
1(ग). भगवद्गीता-- 10.8
अहं सर्वस्य प्रभवो
मत्तः सर्वं प्रवर्तते।
अर्थ :
मैं ही सबका मूल कारण हूँ और सब कुछ मुझसे ही प्रवर्तित होता है।
भाव :
ज्ञान, विद्या और सृष्टि सबका मूल परमात्मा है।
1(घ). भगवद्गीता-- 7.10
बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि।
अर्थ :
मैं बुद्धिमानों की बुद्धि हूँ।
भाव :
सभी बुद्धि और ज्ञान का आधार परमात्मा ही है।
निष्कर्ष :
गीता में भी स्पष्ट कहा गया है कि ज्ञान, स्मृति, बुद्धि और समस्त विद्याओं का मूल परमात्मा ही है।
महाभारत में प्रमाण -
1- (शान्ति पर्व)
ज्ञानं हि परमं ब्रह्म।
अर्थ :
ज्ञान ही परम ब्रह्म का स्वरूप है।
भाव :
परमात्मा ही ज्ञानस्वरूप है, इसलिए समस्त विद्या का मूल वही है।
2. (शान्ति पर्व)
न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।
अर्थ :
इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है।
भाव :
ज्ञान सर्वोच्च है और उसका मूल परमात्मा है।
3. (अनुशासन पर्व)
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशे तिष्ठति।
अर्थ :
ईश्वर सभी प्राणियों के हृदय में स्थित है।
भाव :
हृदय में स्थित परमात्मा ही मनुष्य को ज्ञान और बुद्धि प्रदान करता है।
4. (शान्ति पर्व)
सर्वविद्यानां प्रभुः देवः।
अर्थ :
परम देव ही सभी विद्याओं के स्वामी हैं।
निष्कर्ष :
महाभारत में भी यह सिद्ध किया गया है कि ज्ञान, बुद्धि और सभी विद्याओं का मूल स्रोत परमात्मा ही है।
स्मृति ग्रन्थों में प्रमाण--
1(क). मनु स्मृति--1.21
सर्वेषां तु स नामानि कर्माणि च पृथक् पृथक्।
वेदशब्देभ्य एवेदौ पृथक् संस्थाश्च निर्ममे॥
अर्थ :
परमात्मा ने वेदों के शब्दों से ही सब वस्तुओं के नाम, कर्म और व्यवस्थाएँ स्थापित कीं।
भाव :
सारी व्यवस्था और ज्ञान का मूल वेद है, और वेद परमात्मा से प्रकट हुए हैं।
1(ख)-मनु स्मृति-- 2.6
वेदोऽखिलो धर्ममूलम्।
अर्थ :
सम्पूर्ण वेद ही धर्म का मूल है।
भाव :
वेदों में ही सभी ज्ञान और धर्म का आधार है।
2. याज्ञवल्क्य स्मृति-- 1.3
वेदो धर्ममूलं स्मृतिशीले च तद्विदाम्।
अर्थ :
वेद धर्म का मूल हैं और स्मृतियाँ तथा श्रेष्ठ आचरण उसी के आधार पर हैं।
भाव :
सभी ज्ञान और नियमों का मूल वेद है।
3--पराशर स्मृति--
वेदप्रणिहितो धर्मः।
अर्थ :
धर्म वेदों में स्थापित किया गया है।
भाव :
वेदों में ही जीवन का ज्ञान और मार्ग बताया गया है।
निष्कर्ष :
स्मृति ग्रन्थों में भी स्पष्ट कहा गया है कि वेद ही ज्ञान और धर्म का मूल हैं, और वेद परमात्मा से प्रकट हुए हैं। इसलिए समस्त विद्याओं का मूल परमात्मा है।
1.चाणक्य नीति--1-3
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्।
विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः॥
अर्थ :
विद्या मनुष्य का श्रेष्ठ रूप है और छिपा हुआ धन है। वही सुख, यश और सम्मान देने वाली है तथा गुरुओं की भी गुरु है।
भृतहरि नीति शतक-- 20
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्।
विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः॥
अर्थ :
विद्या मनुष्य का सर्वोत्तम रूप और छिपा हुआ धन है; वही सुख, यश और प्रतिष्ठा देने वाली है।
भाव :
विद्या ही मनुष्य की सबसे बड़ी शक्ति है।
3. विदुर नीति (महाभारत, उद्योगपर्व 33.37)
नास्ति विद्यासमं चक्षुः
नास्ति सत्यसमं तपः।
अर्थ :
विद्या के समान कोई नेत्र नहीं और सत्य के समान कोई तप नहीं है।
भाव :
विद्या मनुष्य को सही मार्ग दिखाने वाली है।
4-भृतहरि नीति शतक - 16
विद्या मित्रं प्रवासेषु
भार्या मित्रं गृहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्रं
धर्मो मित्रं मृतस्य च॥
अर्थ :
विदेश में विद्या मित्र होती है, घर में पत्नी मित्र होती है, रोगी का मित्र औषधि होती है और मरने के बाद धर्म मित्र होता है।
भाव :
विद्या जीवन के हर स्थान पर सहायक है।
निष्कर्ष :
चाणक्य नीति, भृतहरि नीति शतक-- और विदुर नीति जैसे नीति ग्रन्थों में भी विद्या को मनुष्य का सर्वोच्च धन और मार्गदर्शक बताया गया है। यह सिद्ध करता है कि ज्ञान और विद्या का महत्व सर्वोपरि है।
1. हितोपदेश-- 1.3
विद्या ददाति विनयं
विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति
धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
अर्थ :
विद्या से विनय (नम्रता) आती है, विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख प्राप्त होता है।
भाव :
विद्या ही जीवन के सभी गुणों और सुखों का मूल है।
2. पन्चतन्त--
विद्या मित्रं प्रवासेषु
भार्या मित्रं गृहेषु च।
व्याधितस्यौषधं मित्रं
धर्मो मित्रं मृतस्य च॥
अर्थ :
विदेश में विद्या मित्र होती है, घर में पत्नी मित्र होती है, रोगी का मित्र औषधि होती है और मृत्यु के बाद धर्म ही मित्र होता है।
भाव :
विद्या जीवन में हर स्थान पर सहायक होती है।
3. शुभाषित रत्न भण्डार-86
न चोरहार्यं न च राजहार्यं
न भ्रातृभाज्यं न च भारकारी।
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं
विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥
अर्थ :
विद्या का धन ऐसा है जिसे न चोर चुरा सकते हैं, न राजा छीन सकता है, न भाई बाँट सकते हैं और न यह बोझ बनता है; खर्च करने पर भी यह बढ़ता ही है।
भाव :
विद्या सभी धनों में श्रेष्ठ है।
4. चाणक्य नीति-- 4.14
विद्याविहीनः पशुः।
अर्थ :
विद्या के बिना मनुष्य पशु के समान है।
भाव :
विद्या मनुष्य को वास्तविक मनुष्य बनाती है।
1. वाल्मीकि रामायण(बालकाण्ड 1.1.18)
वेदवेदाङ्गतत्त्वज्ञो धनुर्वेदे च निष्ठितः।
अर्थ :
श्रीराम वेद और वेदांगों के तत्त्व को जानने वाले तथा धनुर्वेद में भी पूर्ण निपुण थे।
भाव :
वेद और उनकी विद्या को परम और दिव्य ज्ञान माना गया है।
2. वाल्मीकि रामायण (बालकाण्ड 1.1.20)
श्लोक :
सर्वशास्त्रार्थतत्त्वज्ञः स्मृतिमान् प्रतिभानवान्।
अर्थ :
वे सभी शास्त्रों के तत्त्व को जानने वाले, स्मरणशक्ति वाले और प्रतिभाशाली थे।
भाव :
सभी शास्त्रों का ज्ञान दिव्य ज्ञान माना गया है।
3. गर्ग संहिता (ज्ञान-महिमा प्रसंग)
ज्ञानं परं ब्रह्म सर्वविद्याप्रकाशकम्।
अर्थ :
परम ज्ञान ही ब्रह्म है और वही सभी विद्याओं को प्रकाशित करता है।
भाव :
सभी विद्याओं का मूल ब्रह्म (परमात्मा) है।
4. गर्ग संहिता --
ईश्वरः सर्वविद्यानां मूलं ज्ञानप्रदायकः।
अर्थ :
ईश्वर ही सभी विद्याओं का मूल और ज्ञान देने वाला है।
निष्कर्ष :
दोनों में यह बताया गया है कि वेद, शास्त्र और समस्त विद्या का आधार दिव्य ज्ञान है, और उसका अंतिम स्रोत परमात्मा ही है।
---+-----+-----+-------+-----+
Rinki Singh
वे स्त्रियाँ...
जो रह गईं बस इतनी-सी आकांक्षा में
कि कभी रोटी की भाप के साथ
उनकी मेहनत की भी कोई गर्म-सी प्रशंसा उठे..
उन्हें कोई प्रशस्ति-पत्र नहीं मिला |
जो स्त्रियाँ...
आजीवन सजाती-सँवारती रहीं
घर के कोने,
धूप की तरह फैलती रहीं आँगन-आँगन..
उनके लिए कभी कोई महफ़िल नहीं सजी |
जिन स्त्रियों ने...
सुबह की पहली किरण से
शाम की बुझती लौ तक
अपनों के पीछे भागते हुए
अपने बदन को पसीने से चमकाया
उनकी हथेलियों तक
कभी तमगों की चमक नहीं पहुँची |
जिनका अस्तित्व धीरे-धीरे डूब गया
किसी और के नाम के पीछे
जैसे नदी...
समुद्र में अपना नाम खो देती है..
उनका नाम..
कभी किसी पोस्टर की शोभा नहीं बना |
जिन्होंने...
जरा सी अहमियत को ही
उपलब्धि मान लिया
वे रह गईं एक विकल्प की तरह,
कभी किसी की अनिवार्य आवश्यकता नहीं बनीं
क्योकि...
उनके हिस्से नहीं आए
कोई उपलब्धि, कोई तमगा,
कोई महफ़िल, कोई किताब, कोई ख़िताब
इसलिए उनके हिस्से नहीं आया
कोई दिवस, कोई उत्सव
वे बस कहलाती रहीं..
नाकारा, कामचोर, असफल स्त्रियाँ
उनके हिस्से आए...
कुछ तिरछे वाक्य...
“तुमने किया ही क्या?”
“तुम करती ही क्या हो?”
“तुम कुछ नहीं जानती…”
तो प्यारी स्त्री ..!
अगर तुम नहीं कहलाई
कामकाजी और सफल स्त्री
एक दिन अपनों से ही
हर जगह दुत्कार पाओगी |
सच कहती हूँ, सखी!
मरने से पहले ही
मार दी जाओगी |
~रिंकी सिंह
#poetry
#matrubharti
Rashmi Dwivedi
🙏गीता में श्री कृष्ण कहते हैं.....
⚡कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
हिंदी अर्थ:
तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में कभी नहीं। इसलिए तुम कर्मों के फल की इच्छा करने वाले मत बनो और न ही कर्म न करने में तुम्हारी आसक्ति हो।
अर्थात् कर्म करो परिणाम ईश्वर अवश्य देंगे। हर हर महादेव ❤️
kattupaya s
Good morning friends.. have a great week
Soni shakya
सुप्रभात 🙏
ओम् नमः शिवाय 🙏🌹🙏
Firoz Khan
tere sath mujhe zindagi bitani hai
to mera budhpa to hi jawani hai
agar to mil gaya to mil jayega jaha
na mila to tu phir khatam zindagani hai
MASHAALLHA KHAN
गर ना बदला है कोई, ना फिर बदलेगा कोई,
ये सफर आम सा नही, ना फिर आये कभी,
लोग यू तो ठुकरा देते है मंजिले चांद की,
फिर चन्द रास्तो से आगे ना बड़ पाया है कोई .
-MASHAALLHA....
Mamta Trivedi
https://youtube.com/shorts/Y4lpXyIu0C4?si=9wlN7cgxckwDtrL2
બદનામ રાજા
સારા અનુભવથી ખરાબ
માણસો બદલાય કે ના બદલાય,
પરંતુ ખરાબ અનુભવથી સારા માણસો
ચોક્કસ બદલાય જાય છે...
🌸
simran kumari
mai or meri jindgi ka ahsas💓💓💓💓
''meri koi jajbat nahi hai,
meri kahani ka har panna khali hai !!
har panne par dard ki syahi lagi hai,
or kya bataun tumhe.....
meri koi kahani nahi hai!"
bas kuch tute khwab hai,
jo dil me Aaj vi adhure pade hai!"
♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️
Nothing
"किसीने मेरे साथ किए बर्ताव के लिये माफी नहीं मांगी,उन्होंने बस मेरे रिएक्शन के लिए मुझे ही दोषी ठहराया।"
rima
निभाना ही तो मुश्किल है, चाहना तो हर किसी को आता है। (✿♥‿♥)
Nothing
"તન થાકી ગયું હોય તો ઊંઘ કે આરામ થી ફરક પડે બાકી મન થાકી ગયું હોય તો ઊંઘ કે આરામ થી કોઈ ફરક પડતો નથી..અમુક વાર મન હારતું નથી પણ થાકી જાય છે.ક્યારેક પોતાની માનેલ વ્યક્તિના વ્યવહાર, વર્તનથી તો ક્યારેક પોતાની અપરિપૂર્ણ અપેક્ષાઓથી..તેમ છતાં એડજસ્ટમેન્ટ અને કોમ્પ્રો..કરવું પડે છે.જિંદગી છે તો જીવવું જ પડે છે..!"
rima
हम बुरे नहीं थे मगर तुमने बुरा कर दिया, पर अब हम बुरे बन गए हैं। ताकि तुम्हें कोई झूठा ना कह दे।🥰🥰
putti
ದಾರಿ ತಪ್ಪಿದ ಹಕ್ಕಿಗೆ, ಗೂಡು ತಲುಪುವ ಕನಸು ; ಮುಗಿಯದ ಹೆಜ್ಜೆಗೆ, ಊರ ಸೇರುವ ಕನಸು😐
Ruchi Dixit
प्रेम का वास्तविक अर्थ समानता है
एक तरफा केवल कामनाएं होती है जो
एक पूर्वप्रतीक्षित संसार का निर्माण करती है ।
- Ruchi Dixit
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1DM3zVESY5/
સંપૂર્ણ રચના વાંચો મારા ફેસબુક પેજ પર.
જય ખોડિયાર 🙏
Raju kumar Chaudhary
“मेरी कीमत 10 लाख क्यों थी?”एक रात की तीव्र इच्छा और भावनाओं के बाद, एक उद्योगपति ने एक गरीब छात्रा को एक मिलियन रुपये देकर छोड़ दिया और बिना कोई निशान छोड़े गायब हो गया। सात साल बाद उसे पता चला कि आखिर उसकी “कीमत” इतनी क्यों थी।
उस रात, शराब की गर्मी और नई दिल्ली के पॉश इलाके चाणक्यपुरी की चमकती रोशनी के बाद, वह एक होटल के कमरे में जागी जिसकी खिड़की से भव्य राजपथ मार्ग का दृश्य दिखाई दे रहा था। सुबह की पहली किरणें इमारतों को हल्का सुनहरा रंग दे रही थीं, और उसी क्षण उसे हकीकत का भार महसूस हुआ।
उसका नाम काव्या शर्मा था, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र संकाय में तीसरे वर्ष की छात्रा थी। वह राजस्थान के एक छोटे से गाँव से आई थी। उसके माता-पिता किसान थे; उनके हाथों पर मिट्टी और मेहनत के निशान थे। वे जो भी रुपये उसे भेजते थे, वह एक मौन बलिदान था—अपनी बेटी के भविष्य पर लगाया गया विश्वास।
बिस्तर के पास की मेज पर एक मोटा लिफाफा रखा था। उसे खोलते समय उसके हाथ कांप रहे थे। अंदर एक मिलियन रुपये थे। और एक छोटा सा नोट:
“इसे किस्मत समझ लो। मुझे ढूँढने की कोशिश मत करना।”
वह आदमी गायब हो चुका था।
कुछ दिनों तक काव्या शर्म और जरूरत के बीच झूलती रही। उसे ऐसा लगा जैसे किसी ने उसकी गरिमा की कीमत तय कर दी हो। लेकिन किराया बकाया था। विश्वविद्यालय की फीस दो हफ्तों में जमा करनी थी। उसके छोटे भाई को स्कूल के लिए किताबों की जरूरत थी। हकीकत किसी का इंतजार नहीं करती।
बहुत आँसू बहाने के बाद उसने एक फैसला किया: वह उस पैसे को अपनी पहचान तय नहीं करने देगी। वह इसे एक पुल बनाएगी, बेड़ी नहीं।
उसने विश्वविद्यालय के अपने सारे कर्ज चुका दिए। अपने माता-पिता को बड़ी रकम भेजी ताकि वे घर की छत ठीक कर सकें और खेती बेहतर कर सकें। बाकी पैसे उसने एक निवेश खाते में रख दिए। धीरे-धीरे वह भावना कि यह एक अपमान था, मिटने लगी—और उसकी जगह एक अवसर ने ले ली।
साल बीत गए।
काव्या ने सम्मान के साथ स्नातक की डिग्री प्राप्त की। उसकी प्रतिभा और अनुशासन ने एक प्रतिष्ठित वित्तीय कंपनी के दरवाजे खोल दिए। उसने नीचे से शुरुआत की—बैलेंस शीट का विश्लेषण करना और अंतहीन रिपोर्ट लिखना—लेकिन जल्द ही उसके वरिष्ठों ने उसकी रणनीतिक सोच को पहचान लिया। वह पद दर पद ऊपर बढ़ती गई। उसने एक छोटा सा अपार्टमेंट खरीदा। उसने अपने माता-पिता को पहली बार राजधानी देखने के लिए बुलाया। उसका भाई भी विश्वविद्यालय में दाखिल हो गया।
बाहर से उसका जीवन सफलता की कहानी लग रहा था। लेकिन भीतर अब भी एक सवाल अनुत्तरित था।
वह आदमी कौन था? उसने ऐसा क्यों किया?
सात साल बाद, किस्मत ने उन्हें फिर से आमने-सामने ला खड़ा किया।
अक्टूबर की एक दोपहर, उसकी कंपनी ने उसे एक वित्तीय सम्मेलन में भेजा—एक शानदार होटल में, ठीक उसी राजपथ क्षेत्र के पास। जैसे ही वह लॉबी में दाखिल हुई, उसकी रीढ़ में एक सिहरन दौड़ गई। यादें कभी खत्म नहीं होतीं; वे बस सो जाती हैं।
जब वह अपना पहचान पत्र देख रही थी, पीछे से एक गहरी आवाज आई:
—काव्या शर्मा?
वह धीरे-धीरे मुड़ी। जैसे समय थम गया हो। सामने खड़े आदमी के बालों में अब हल्की सफेदी थी, लेकिन उसकी शांत आँखें वही थीं।
वही आदमी था।
काव्या ने गहरी सांस ली। अब वह उस सुबह की डरी हुई लड़की नहीं थी। अब वह एक आत्मविश्वासी महिला थी।
—मुझे जवाब चाहिए —उसने सीधे कहा।
वे दोनों हॉल के एक शांत कोने में बैठ गए। कार्यक्रम का शोर दूर-सा लग रहा था।
आदमी ने कहना शुरू किया:
—उस रात… तुम बहुत थकी हुई थीं और तुमने अपने शरीर की क्षमता से ज्यादा पी ली थी। तुमने मुझे अपने माता-पिता के बारे में बताया, अपने भाई के बारे में, और इस डर के बारे में कि कहीं तुम्हें विश्वविद्यालय छोड़ना न पड़ जाए। तुमने मुझे कई दशक पहले का अपना ही अतीत याद दिला दिया।
काव्या ने भौंहें सिकोड़ लीं
Ruchi Dixit
किसी के लिए यह गर्व होगा कि कोई उसके बिना नहीं रह सकता किसी के लिए अहं होगा
एक शब्द दो अर्थ दो भाव ।।
- Ruchi Dixit
Raju kumar Chaudhary
गरीब माँ को देखकर लोग हँसे… लेकिन बेटे ने स्टेज पर ऐसा सच बताया कि सबकी आँखें भर आईं“जिस माँ की बदबू से पूरी क्लास नाक ढकती थी… उसी माँ ने ग्रेजुएशन के दिन ऐसा सच दिखाया कि पूरा हॉल रो पड़ा!”
उस दिन सुबह अर्जुन की माँ सरिता ने अपनी सबसे अच्छी साड़ी निकाली।
वह साड़ी नई नहीं थी।
असल में बहुत पुरानी थी।
उसका रंग कई जगहों से फीका पड़ चुका था, और किनारों पर छोटे-छोटे टांके लगे हुए थे जहाँ वह फट गई थी।
लेकिन सरिता के लिए वही उनकी सबसे कीमती साड़ी थी।
उन्होंने सावधानी से अपने हाथ धोए।
नाखून साफ किए।
बालों में तेल लगाया और उन्हें ठीक से बाँधा।
फिर धीरे से अर्जुन के पास आकर बोलीं—
“बेटा… आज तुम्हारा ग्रेजुएशन है न?”
अर्जुन ने सिर हिलाया।
माँ कुछ पल चुप रहीं, जैसे हिम्मत जुटा रही हों।
फिर धीमी आवाज़ में बोलीं—
“क्या… क्या मैं तुम्हारे साथ स्टेज पर आ सकती हूँ? बस तुम्हें मेडल पहनाना चाहती हूँ। यह मौका सिर्फ एक बार आता है।”
अर्जुन के दिल की धड़कन तेज़ हो गई।
उसे तुरंत याद आ गया—
वही बच्चे…
वही हँसी…
वही ताने…
अगर माँ स्टेज पर जाएँगी… तो क्या होगा?
लेकिन जब उसने माँ के चेहरे की तरफ देखा, तो उसकी आँखों में एक ऐसी चमक थी जो अर्जुन ने पहले कभी नहीं देखी थी।
वह गर्व था।
वह उम्मीद थी।
और शायद… एक सपना भी।
अर्जुन ने हल्की मुस्कान के साथ कहा—
“हाँ माँ, बिल्कुल। तुम ही कारण हो कि मैं आज यहाँ हूँ।”
कुछ देर बाद वे दोनों ग्रेजुएशन समारोह के लिए स्कूल पहुँचे।
जैसे ही वे जिम के अंदर दाखिल हुए, अर्जुन को तुरंत महसूस हुआ कि कुछ बदल गया है।
लोगों की नज़रें उनकी तरफ उठने लगीं।
सभी माता-पिता महंगे सूट और चमकदार साड़ियों में थे।
उनके शरीर से महंगे परफ्यूम की खुशबू आ रही थी।
और उनके बीच…
सरिता अपनी फीकी साड़ी में खड़ी थीं।
जैसे ही वह आगे बढ़ीं, अर्जुन ने देखा—
कुछ लोगों ने धीरे से अपनी नाक ढक ली।
किसी ने फुसफुसाकर कहा—
“वह यहाँ क्यों आई है?”
“पूरा माहौल खराब कर दिया।”
सरिता का चेहरा तुरंत झुक गया।
उन्होंने अर्जुन से धीमी आवाज़ में कहा—
“बेटा… मैं पीछे खड़ी रहती हूँ। मुझे शर्म आ रही है… कहीं लोग तुम्हारा मज़ाक न उड़ाएँ।”
अर्जुन ने उनका खुरदुरा हाथ कसकर पकड़ लिया।
लेकिन उसे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि आज मंच पर वह कुछ ऐसा कहने वाला है…
जो पूरे हॉल की सोच बदल देगा।
👇👇पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Mrudhula
Sometimes I feel that loneliness is not a punishment, but a path that life gives to shape me into something stronger. There are days when the world feels dark and uncertain, yet a quiet voice inside reminds me to keep shining. I believe that somewhere in the future, destiny holds a moment of love and meaning waiting for me. Until then, I try to blossom in my own way, because someone out there may need the hope and light I carry. And in the end, I know every question life asks will find its answer, just as every life eventually finds its peaceful end.
kattupaya s
256 is the target for Newzealand..
Ruchi Dixit
स्त्री को स्त्री बनकर ही समझा जा
सकता है दूसरा अन्य कोई रास्ता नहीं ।
- Ruchi Dixit
kattupaya s
Hardik pandya the over ambitious guy
kattupaya s
Sanju samson on fire...
Mare DoAlfaz
हर एक हंसी में छुपी
खौफ की उदासी है..
Piyush Goel
https://www.piyushgoel.in
kattupaya s
Newzealand struggling with their bowling.. India looking 250
Armin Dutia Motashaw
HAPPY WOMEN'S DAY
Women don't need to be wished only on this special day
There's an absolute need to respect them everyday
A smile genuine, a kiss small or a hug big, will go a long way
Let's remember to celebrate daily Women's day, in this way.
Armin Dutia Motashaw
kattupaya s
After powerplay 92 for no loss India
Kajal Rathod...RV
Happiest women's day 🎊
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1Ao2ozFW4p/
🎊Happy Women's Day🎊
માણો સુંદર મજાની વાર્તા
kattupaya s
India batting... NewZealand won the toss
kattupaya s
it's a good batting track abhishek must come back to his form. 250 score will be minimum
Mahesh
લાગે છે મને એવું કે હું બસ ફોર્મલિટી પૂરી કરવા આવિયો છું...
બાકી કોને જરૂર છે મારી તે તો મને પણ નથી ખબર...!!!!!
- Mahesh
kattupaya s
Toss is the key today. if India won the toss then the game is ours
kattupaya s
I hope India will win the world Cup and the history rewriting will happen
kattupaya s
Too excited to watch India vs Newzealand final T20 cricket match.
Ravi Lakhtariya
થોડા સા વક્ત કયા લે લિયા
ઉન કે શબ્ર ને દમ તોડ દીયા.
વક્ત પે હી આયે થે હમ,
એસા જમાના કહ ગયા,
પર ઉસ વક્ત કો હી ઉન્હોંને કાફી સમજ લિયા
Ravi Lakhtariya
ના કુછ કહ સકતે હૈ ના કુછ લિખ સકતે હૈં,
બસ અંદર હી અંદર રો રહે હૈં,
જો ચાહિયે વો ખોવત હૈ
જો મિલત હૈ વો કિસકો ચાહત હૈ
kattupaya s
Good evening friends.. have a great evening
Paagla
https://youtube.com/shorts/txq4JAmjkS8?si=fZ8BI7_qfXaYIihA
pink lotus
isse pdhe 👍❣️ye mene new likhi he sayd aapko pasand aaye or sikhne bhi mile
agr koi he jo problms me fssa he to zarur pdhe sayd help ho jayegi 🌸❣️👍
Raju kumar Chaudhary
“कलंकित लड़की की विरासत”मैं कक्षा 10 में पढ़ते समय ही गर्भवती हो गई थी।
मेरे माता-पिता ने मुझे ठंडी निगाहों से देखा और कहा,
“तुमने इस परिवार को कलंकित किया है। अब से तुम हमारे बच्चे नहीं हो।”
उसके बाद उन्होंने मुझे घर से बाहर निकाल दिया…
जब मैं कक्षा 10 में थी, तब मुझे पता चला कि मैं गर्भवती हूं।
जब प्रेगनेंसी टेस्ट पर दो लाइनें दिखाई दीं, तो मैं डर से कांप उठी, लगभग खड़ी भी नहीं हो पा रही थी। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करूं, तभी तो खबर फैल चुकी थी।
मेरे माता-पिता मुझे ऐसे देखते थे मानो मैं कोई गंदी चीज हूँ।
“तुमने इस परिवार को कलंकित किया है। अब से तुम हमारे बच्चे नहीं हो।”
मेरे पिता के कहे हर शब्द मुझे चेहरे पर थप्पड़ की तरह महसूस हुए।
रात हो चुकी थी और बारिश हो रही थी। मेरी माँ ने मेरा फटा हुआ थैला आँगन में फेंक दिया और मुझे घर से बाहर निकाल दिया। मेरे पास एक पैसा भी नहीं था। मेरे पास जाने के लिए कोई जगह नहीं थी।
पेट पकड़े हुए, मैं उस घर से दूर चली गई जो कभी मेरे जीवन का सबसे सुरक्षित स्थान हुआ करता था।
और मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
मैंने किराए के एक कमरे में बच्चे को जन्म दिया, जिसका आकार मुश्किल से आठ वर्ग मीटर था।
यह मुश्किल था।
दर्दनाक।
लोगों की गपशप और आलोचनाओं से भरा हुआ।
लेकिन मैंने अपनी बेटी का पालन-पोषण अपनी पूरी ताकत से किया।
जब वह दो साल की हुई, तो हम शहर चले गए। मैं पढ़ाई के साथ-साथ वेट्रेस का काम भी करती थी।
और अंततः, भाग्य ने मुझ पर कृपा की।
मैंने एक ऑनलाइन व्यवसाय शुरू किया।
बाद में, मैंने अपनी खुद की कंपनी खोली।
छह साल बाद मैंने एक घर खरीदा।
दस साल बाद, मैं दुकानों की एक श्रृंखला का मालिक बन गया।
बीस साल बाद…
मेरी संपत्ति 200 अरब से अधिक थी।
मुझे पता था कि मैं सफल हो गया हूँ।
लेकिन मेरे दिल में चुभने वाला कांटा—
अपने ही माता-पिता द्वारा त्याग दिए जाने का दर्द—
कभी गायब नहीं हुआ।
एक दिन मैंने वापस लौटने का फैसला किया।
उन्हें माफ नहीं करना,
लेकिन उन्हें यह दिखाने के लिए कि उन्होंने क्या खोया है।
अपनी नई मर्सिडीज में सवार होकर मैं अपने गृहनगर वापस गया। पुराना घर अभी भी वहीं था—लगभग बीस साल पहले जैसा था, बल्कि पहले से भी ज्यादा जर्जर हालत में।
लोहे का गेट जंग खा चुका था।
दीवारें ढह रही थीं।
आंगन में खरपतवार बहुत ज्यादा उग आए थे।
मैं दरवाजे के सामने खड़ा हुआ, एक गहरी सांस ली और तीन बार जोर से खटखटाया।
लगभग अठारह वर्ष की एक युवती ने दरवाजा खोला।
मैं जम गया।
वह बिल्कुल मेरे जैसी दिखती थी। उसकी आंखें, नाक से लेकर उसके भौंहें सिकोड़ने का तरीका तक—
ऐसा लग रहा था मानो मैं अपने बचपन के रूप को देख रहा हूँ।
“आप किसे ढूंढ रहे हैं?” उसने विनम्रता से पूछा।
इससे पहले कि मैं जवाब दे पाती, मेरे माता-पिता बाहर आ गए।
जब उन्होंने मुझे देखा, तो वे दोनों जम गए। मेरी माँ ने अपना मुँह ढक लिया, उनकी आँखें लाल हो गईं।
मैंने ठंडी मुस्कान दी।
"अब तुम्हें पछतावा हो रहा है, है ना?"
लेकिन अचानक, वह लड़की मेरी माँ के पास दौड़ी, उनका हाथ पकड़ा और कुछ ऐसा कहा जिसने मुझे पूरी तरह झकझोर दिया...
कहानी के बारे में और अधिक जानने के लिए कमेंट सेक्शन देखें। 👇👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
Raju kumar Chaudhary
“एक जुनून से भरी रात के बाद, एक युवा छात्रा को एक मिलियन रुपये मिले और उसे छोड़ दिया गया… सात साल बाद, उस ‘कीमत’ के पीछे की सच्चाई ने उसकी सांसें रोक दीं।”
उस रात, शराब की गर्मी और नई दिल्ली के पॉश इलाके चाणक्यपुरी की चमकती रोशनियों के बाद, वह एक शानदार होटल के कमरे में जागी, जिसकी खिड़की से भव्य राजपथ दिखाई दे रहा था। सुबह की पहली किरणें अभी-अभी इमारतों को सुनहरा बना रही थीं, जब उसे अचानक वास्तविकता का भार महसूस हुआ।
उसका नाम कामिला मार्तिनेज़ नहीं, बल्कि काव्या मिश्रा था—दिल्ली विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्र विभाग की तीसरे वर्ष की छात्रा। वह वाराणसी के पास एक छोटे से गाँव से आई थी। उसके माता-पिता किसान थे; उनके हाथों में मिट्टी और मेहनत के निशान थे। हर रुपया जो वे भेजते थे, एक खामोश बलिदान था—अपनी बेटी के भविष्य पर लगाया गया दांव।
बिस्तर के पास मेज पर एक मोटा सा लिफाफा रखा था। उसे खोलते समय उसके हाथ कांप रहे थे।
अंदर एक मिलियन रुपये नकद थे। और एक छोटा सा नोट:
“इसे किस्मत समझो।
मुझे मत ढूंढना।”
वह आदमी जा चुका था।
अगले कुछ दिनों तक काव्या शर्म और जरूरत के बीच झूलती रही। उसे लगता था जैसे किसी ने उसकी इज्जत की कीमत लगा दी हो। लेकिन हकीकत बेरहम थी। कमरे का किराया बाकी था। दो हफ्तों में कॉलेज की फीस देनी थी। उसके छोटे भाई को सीनियर सेकेंडरी के लिए किताबें चाहिए थीं। वास्तविकता किसी को सांस लेने की मोहलत नहीं देती।
बहुत आँसू बहाने के बाद उसने फैसला किया—वह उस पैसे को अपनी पहचान तय नहीं करने देगी। वह उसे जंजीर नहीं, एक पुल बनाएगी।
उसने अपनी यूनिवर्सिटी की सारी फीस चुका दी। अपने माता-पिता को बड़ी रकम भेजी ताकि घर की छत ठीक हो सके और खेत की पैदावार बेहतर हो सके। बाकी पैसे उसने एक निवेश खाते में डाल दिए। हर नोट जो कभी अपमान जैसा लगा था, अब एक अवसर बन गया।
साल गुजरते गए।
काव्या ने उत्कृष्ट अंकों के साथ पढ़ाई पूरी की। उसकी बुद्धिमत्ता और अनुशासन ने उसे एक बड़ी फाइनेंशियल कंपनी में नौकरी दिला दी। उसने सबसे नीचे से शुरुआत की—बैलेंस शीट का विश्लेषण करना और अंतहीन रिपोर्ट बनाना—लेकिन जल्दी ही उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने उसकी रणनीतिक सोच को पहचान लिया। वह लगातार आगे बढ़ती गई।
उसने एक छोटा सा अपार्टमेंट खरीदा। अपने माता-पिता को पहली बार दिल्ली घुमाने बुलाया। उसका भाई भी विश्वविद्यालय में दाखिल हो गया।
बाहर से उसकी जिंदगी सफलता की कहानी थी।
लेकिन भीतर एक सवाल अब भी अनुत्तरित था।
वह आदमी कौन था?
और उसने ऐसा क्यों किया?
सात साल बाद, किस्मत ने फिर से उनके रास्ते मिला दिए।
अक्टूबर की एक दोपहर, उसकी कंपनी ने उसे एक बड़े फाइनेंशियल कॉन्ग्रेस में भेजा, जो एक शानदार होटल में हो रहा था—ठीक उसी राजपथ के पास। जैसे ही वह लॉबी में दाखिल हुई, उसकी रीढ़ में सिहरन दौड़ गई। यादें कभी गायब नहीं होतीं; वे सिर्फ सो जाती हैं।
जब वह अपना बैज ले रही थी, पीछे से एक गहरी आवाज आई:
—काव्या मिश्रा?
वह धीरे-धीरे मुड़ी। जैसे समय रुक गया हो। सामने खड़ा आदमी थोड़ा सफेद बालों वाला था, लेकिन उसकी शांत आँखें वही थीं।
वही आदमी।
काव्या ने गहरी सांस ली। वह अब वह डरी हुई लड़की नहीं थी जो उस सुबह जागी थी। अब वह एक मजबूत और आत्मविश्वासी महिला थी।
—मुझे जवाब चाहिए —उसने सीधे कहा।
वे दोनों हॉल के एक शांत कोने में बैठ गए। इवेंट में मौजूद लोगों की हल्की-सी फुसफुसाहट अब सिर्फ पृष्ठभूमि का शोर रह गई।
—उस रात...
पूरी कहानी कमेंट में 👇👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
Raju kumar Chaudhary
“फटे कपड़ों वाला प्रतिभाशाली“फटे-पुराने कपड़ों में एक युवक नौकरी के लिए आवेदन करने आया… और जब कंपनी के अध्यक्ष की बेटी ने उसे अपने कार्यालय में बुलाया, तो पूरी इमारत हैरान रह गई।
उस सुबह Arya Solutions India की इमारत महँगे सूट और गहरी बेचैनी से भरे एक मधुमक्खी के छत्ते जैसी लग रही थी। अभी सुबह ही थी, लेकिन लॉबी पहले से ही चमकते काँच, प्रीमियम कॉफी की खुशबू और महत्वपूर्ण बैठकों की गूँज से भर चुकी थी।
उस दिन अंतरराष्ट्रीय ग्राहक आने वाले थे, और रिसेप्शन पर नैना शर्मा किसी कस्टम अधिकारी की तरह खड़ी थी—हर आने वाले को सिर से पाँव तक देखती हुई, होंठों पर नियंत्रित मुस्कान के साथ, तय करती हुई कि किसे अंदर जाने देना है और किसे नहीं।
ठीक सुबह 9:17 पर घूमने वाला काँच का दरवाज़ा धीरे-धीरे घूमा।
एक युवक अंदर आया—लगभग पच्चीस साल का, दुबला-पतला, बिखरे बाल, और उसने एक ऐसी शर्ट पहनी हुई थी जिसकी बाँह पर छोटा-सा चीरा था। उसके जूते इतने घिस चुके थे कि लगता था चमड़ा अब हार मानने वाला है।
उसके हाथ में एक पुरानी फाइल थी—वैसी फाइल जिसके कोने इतने मुड़े हुए थे कि लगता था जैसे किसी युद्ध से बचकर आई हो।
उसे देखते ही नैना के होंठ तिरछे हो गए।
— “ये क्या है?” उसने ऐसे स्वर में पूछा जो केवल आदत की वजह से विनम्र लगता था।
युवक ने हल्का-सा घूंट भरा, फिर आदर से मुस्कुराया।
— “नमस्ते मैडम। मैं इंटरव्यू के लिए आया हूँ। मैंने ऑनलाइन आवेदन किया था। आज बुलाया गया था।”
नैना ने कंप्यूटर पर टाइप किया। सूची में एक नाम था:
आदित्य मेहरा
उसने नाम दो बार पढ़ा, जैसे स्क्रीन दया करके गलती कर सकती हो।
— “तुम… इंटरव्यू देने आए हो?” उसने प्रोटोकॉल के पीछे छिपी हैरानी के साथ दोहराया।
— “जी, मैडम।”
नैना ने बिना उसकी ओर देखे कोने में रखी कुर्सियों की कतार की ओर इशारा किया।
— “वहाँ बैठो। मैं एचआर को अपडेट करती हूँ।”
वहाँ पहले से दो पुरुष और एक महिला बैठे थे—साफ-सुथरे कपड़े, नई फाइलें, महँगा इत्र, और वह आत्मविश्वास जो आलीशान जिंदगी में पले लोगों के पास होता है।
जैसे ही आदित्य किनारे बैठा, नीले ब्लेज़र वाले आदमी ने अपने दोस्त से धीरे से कहा—
— “क्या ये भी इंटरव्यू देगा?”
— “यार, लगता है गलत बिल्डिंग में आ गया है,”
दोनों धीमे से हँस पड़े।
आदित्य ने सब सुन लिया। लेकिन उसने सिर नहीं उठाया।
वह दीवार पर लगी एक बड़ी तस्वीर को देखता रहा—कंपनी की मालिक की तस्वीर, जो एक पुरस्कार ले रही थीं:
काव्या मल्होत्रा
सिर्फ 27 साल की उम्र में वह कॉरपोरेट दुनिया में एक किंवदंती बन चुकी थीं। उन्होंने अपने पिता की लगभग टूट चुकी कंपनी को संभाला और अनुशासन और दिल के अनोखे मिश्रण से उसे फिर खड़ा किया।
“ठंडी,” कुछ लोग कहते थे।
“न्यायपूर्ण,” दूसरे कहते थे।
ऊपर तीसरी मंज़िल पर, बोर्डरूम में काव्या रिपोर्ट देख रही थीं जब एचआर डायरेक्टर रोहित कपूर एक फाइल लेकर अंदर आए।
— “मैडम, आज डेवलपर पद के लिए अंतिम इंटरव्यू हैं।”
— “उन्हें भेज दीजिए,” काव्या ने ऊपर देखे बिना कहा।
नीचे बीस मिनट बीत गए।
एक-एक करके दो “परफेक्ट” उम्मीदवारों को बुलाया गया। लॉबी में अब भी हल्का संगीत बज रहा था और महत्वपूर्ण दिन की तनावपूर्ण ऊर्जा फैली हुई थी।
अब केवल आदित्य बचा था।
नैना ने झिझकते हुए तीसरी मंज़िल पर फोन किया।
— “मैडम… एक उम्मीदवार बाकी है, लेकिन…” उसकी आवाज़ धीमी हो गई — “वह… प्रोफेशनल नहीं लगता।”
दूसरी तरफ कुछ सेकंड की चुप्पी रही।
फिर काव्या की शांत और सीधी आवाज़ आई—
— “नाम?”
— “आदित्य मेहरा।”
फिर एक क्षण की खामोशी।
— “उसे ऊपर भेजो। अभी।”
नैना चौंक गई।
— “अभी?”
— “अभी,” काव्या ने दोहराया।
नैना ने फोन रखा और उलझन व झुंझलाहट से आदित्य को देखा।
— “तुम्हें… ऊपर बुलाया है।”
बाकी उम्मीदवार ऐसे देखने लगे जैसे उन्होंने भूत देख लिया हो।
आदित्य धीरे-धीरे खड़ा हुआ, अपनी फाइल सीने से लगाई, और लिफ्ट की ओर चला—मानो उसे विश्वास ही न हो कि वह उस मंज़िल तक जाने लायक है।
तीसरी मंज़िल पर लिफ्ट का दरवाज़ा खुला। सामने शांत गलियारा था और काँच का एक केबिन, जिस पर चाँदी के अक्षरों में लिखा था:
CEO — काव्या मल्होत्रा
एक सहायक ने इशारा किया।
— “अंदर जाइए। मैडम आपका इंतज़ार कर रही हैं।”
आदित्य ने धीरे से दरवाज़ा खटखटाया।
— “अंदर आ सकता हूँ?”
— “आइए,” अंदर से शांत आवाज़ आई।
ऑफिस बड़ा था, लेकिन सादा—लकड़ी की सजावट, प्राकृतिक रोशनी, और सुव्यवस्थित माहौल।
काव्या मेज़ के पास खड़ी थीं, लैपटॉप खुला था। उनका सूट बिल्कुल व्यवस्थित था, मुद्रा मजबूत, और नज़र… न तो अपमान करने वाली, न ही मुफ्त में दया देने वाली।
उन्होंने उसे सिर से पाँव तक देखा।
न कोई मज़ाक।
न कोई दया।
बस ध्यान से देखना।
— “बैठिए, आदित्य।”
वह वहीं ठिठक गया।
— “मैडम… मेरे कपड़े—”
— “मैंने कहा, बैठिए।”
उनकी दृढ़ता कठोर नहीं थी।
जैसे कह रही हो: “यहाँ अपने होने के लिए माफी मत माँगो।”
आदित्य बैठ गया, घबराहट दबाते हुए।
काव्या ने लैपटॉप उसकी ओर घुमा दिया।
— “आपने डेवलपर के लिए आवेदन किया है। मैंने आपके प्रोजेक्ट देखे हैं। आप किसी प्रसिद्ध विश्वविद्यालय से नहीं हैं… लेकिन आपका कोड…”
उन्होंने उसकी आँखों में देखा।
— “आपका कोड आपके लिए बोलता है।”
आदित्य ने सिर झुका लिया।
— “मैंने सिर्फ ऑनलाइन सीखा है, मैडम। थोड़े-बहुत फ्रीलांस काम किए… जो भी मिला।”
काव्या ने सिर हिलाया।
— “मैं आपको एक असली समस्या दूँगी। मेरी टीम तीन दिनों से इसमें फँसी हुई है। अगर चाहें… तो कोशिश कीजिए। अभी।”
आदित्य की आँखें बदल गईं।
पहली बार डर गायब हो गया—और उसकी जगह कुछ और आ गया: खुद को साबित करने की भूख।
— “अभी?” उसने धीरे से पूछा।
— “अभी।”
अगले पंद्रह मिनट तक ऑफिस में सिर्फ तीन आवाज़ें थीं—कीबोर्ड की टक-टक, साँसों की लय, और माउस की क्लिक।
काव्या कुछ नहीं बोलीं।
वह सिर्फ उसे देखती रहीं।
आदित्य की उँगलियाँ जैसे उड़ रही थीं… और उसके चेहरे पर ऐसी एकाग्रता थी मानो पूरी दुनिया सिमटकर सिर्फ उस स्क्रीन में रह गई हो…
पूरी कहानी कमेंट में…👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
Krupali Kapadiya
#womensday
#womenempowerment
#Dedicated To All Sahid's "वीर वधू"🙏🏼
#जय हिंद
#भारत माता की जय
SAYRI K I N G
"मुझे किसी ने मारा नहीं...
"पर सबने धीरे-धीरे जीने की
"वजहें छीन ली!
Raju kumar Chaudhary
Follow the Raju Kumar Chaudhary official channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Vb6nSzoDOQIXdQiMVl1U
Raju kumar Chaudhary
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Raju kumar Chaudhary
https://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kz
Raju kumar Chaudhary
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Raju kumar Chaudhary
62 साल की उम्र में, मैंने अपने पहले प्यार से दोबारा शादी की: हमारी शादी की रात, जैसे ही मैंने अपनी पत्नी के कपड़े उतारे, मैं यह देखकर हैरान और टूट गया
61 साल की उम्र में, मैंने अपने पहले प्यार से दोबारा शादी की: हमारी शादी की रात, जैसे ही मैंने उसकी ड्रेस उतारी, मैं यह देखकर हैरान और टूटा हुआ था...
इस साल मैं 61 साल का हो गया हूँ। मेरी पहली पत्नी का आठ साल पहले एक गंभीर बीमारी से निधन हो गया था। तब से, मैं एक शांत, एकाकी जीवन जी रहा हूँ। मेरे सभी बच्चे शादीशुदा हैं। हर महीने वे मुझे कुछ पैसे देने, मेरी दवाइयाँ छोड़ने और फिर जल्दी से चले जाने के लिए आते हैं।
मैं उन्हें दोष नहीं देता। वे व्यस्त हैं - मैं समझता हूँ। लेकिन तूफ़ानी रातों में, बिस्तर पर लेटे हुए, टिन की छत पर बारिश की तेज़ आवाज़ सुनते हुए, मैं खुद को बहुत छोटा और दिल तोड़ने वाला अकेला महसूस करता हूँ।
पिछले साल, मैं फ़ेसबुक ब्राउज़ कर रहा था जब मुझे हाई स्कूल का अपना पहला प्यार अचानक मिल गया। उस समय मुझे उस पर बहुत क्रश था - उसके लंबे, लहराते बाल, चमकदार आँखें और एक ऐसी मुस्कान थी जो पूरी कक्षा को रोशन कर देती थी। लेकिन जब मैं अभी भी कॉलेज की प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, तब उसके परिवार ने उसकी शादी दक्षिण में मुझसे दस साल बड़े एक आदमी से तय कर दी।
उसके बाद हमारा संपर्क टूट गया। अब, चालीस साल बाद, हम फिर से एक-दूसरे से मिले। वह विधवा हो गई थी - उसके पति का पाँच साल पहले देहांत हो गया था। वह अपने सबसे छोटे बेटे के साथ रह रही थी, जो घर से दूर काम करता था और बहुत कम ही घर आता था।
पहले तो हम बस हालचाल जानने के लिए मैसेज करते थे। फिर हम फ़ोन करने लगे। फिर कॉफ़ी के लिए मिलने लगे। और पता ही नहीं चला, हर कुछ दिनों में मैं खुद को स्कूटर पर फलों का एक थैला, पेस्ट्री का एक डिब्बा और कुछ जॉइंट सप्लीमेंट्स लेकर उसके घर जाते हुए पाता।
एक दिन, मज़ाक में, मैंने कहा:
– "हम दोनों बुज़ुर्ग शादी क्यों नहीं कर लेते और एक-दूसरे का साथ देते रहते हैं?"
अचानक, उसकी आँखों में आँसू आ गए। मैं घबरा गया और उसे समझाने की कोशिश की कि यह मज़ाक है, लेकिन वह हँस पड़ी और हल्के से सिर हिला दिया।
और इस तरह, 61 साल की उम्र में, मैंने दोबारा शादी कर ली - अपने पहले प्यार से।
हमारी शादी के दिन, मैंने गहरे भूरे रंग का ब्रोकेड का लंबा ट्यूनिक पहना था। उसने एक सादा सफ़ेद रेशमी आओ दाई पहना था, उसके बालों को एक छोटे से मोती के क्लिप से बड़े करीने से पिन किया हुआ था। दोस्त और पड़ोसी जश्न मनाने आए थे। सबने कहा, "तुम दोनों फिर से टीनएजर्स लग रही हो।"
और सच कहूँ तो, मैं फिर से जवान महसूस कर रही थी। उस रात, शादी की दावत की सफ़ाई करने के बाद, रात के 10 बजने वाले थे। मैंने उसके लिए एक कप गर्म दूध बनाया, फिर गेट बंद करने और लाइट बंद करने के लिए बाहर गई।
हमारी शादी की रात — एक ऐसी रात जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं अपने बुढ़ापे में दोबारा अनुभव करूँगी — आखिरकार आ ही https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu
DrAnamika
भेड़ चाल से सिर्फ मूर्ख ही अपनी शोभा बढा़ते है दम है तो अकेले चलकर दिखाओ
#डॉ_अनामिका #हिंदी_का_विस्तार
#हिंदी_का_विकास #गद्यकृति #गद्य_साहित्य #बज्म़
समस्त देशवासियों को रंग पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ
A singh
विचार
जो समय बीत गया
वह फिर कभी लौटकर नहीं आता।
उस पर अफसोस करने से
सिर्फ दिल ही भारी होता है।
इसलिए बीते हुए कल में नहीं,
आने वाले कल में उम्मीद रखिए।
क्योंकि ज़िंदगी हर सुबह
एक नया मौका देती है।
जो पल आज हमारे पास है
उसे मुस्कुराकर जी लीजिए,
क्योंकि कल शायद
ये पल भी याद बन जाएगा।
ना बीते हुए कल का पछतावा,
ना आने वाले कल का डर —
बस आज को
खुशी और उम्मीद के साथ जिएं।
हर हर महादेव। 🕉️
— A Singh ✨
A singh
ज़िंदगी का सच
बचपन हँसते-खेलते बीत गया,
और हम जवानी की दहलीज़ पर आ खड़े हुए।
पर अजीब बात है कि
जैसे ही जवानी आई,
बचपन याद आने लगा।
बचपन को याद करते-करते
जवानी भी धीरे-धीरे बीत जाएगी,
फिर बुढ़ापा आएगा
और बुढ़ापे में फिर वही जवानी याद आएगी।
और एक दिन ऐसा भी आएगा
जब बुढ़ापा भी बीत जाएगा,
और हम इस दुनिया को
चुपचाप अलविदा कह देंगे।
इसलिए समझदारी इसी में है
कि जो पल अभी हमारे पास है
उसे मुस्कुराकर जिएं।
खुद भी खुश रहें
और दूसरों को भी खुशियां दें।
क्योंकि क्या पता
जो आज हमारा दोस्त है
वो कल दुश्मन बन जाए।
लेकिन ये क्यों सोचें?
ये भी तो हो सकता है
कि जो आज हमारा दुश्मन है
वो कल हमारा सबसे अच्छा दोस्त बन जाए।
क्या पता आज जिनसे हम
लड़ रहे हैं या नाराज़ हैं,
कल वही इस दुनिया में ना हों
और बस उनकी यादें रह जाएं।
ज़िंदगी बहुत छोटी है,
इसे नफ़रत में क्यों गंवाना?
ना किसी से नफ़रत करो,
ना किसी से द्वेष रखो।
बस दिल में प्रेम रखो,
क्योंकि आखिर में
यादें भी वही रह जाती हैं
जहाँ प्रेम होता है।
हर हर महादेव। 🕉️
_ A singh
वात्सल्य
કાશ.....!
હજુ ૨૧ વર્ષ અહીં કાઢી નાખતે!!!!
કાશ !! પાટણ શહેરમાં કેટલાયે કાળી મજૂરી કરી પોતાના સપનાનું મંદિર (ઘર )બનાવે છે...!!
અને એ ઘરને છોડતાં દીપક જલતો રાખી,એ ઘરને વંદન કરી ખુલ્લા બારણે પાછા પગે પ્રયાણ થયું હોત !!! અને પછી એ કમાડની કુંચી કોઈ વિશ્વાસને સોંપી હોત !
જે ઘરમાં....... ટાઢ,તડકો,વરસાદ,આબરૂ,રક્ષણ,સુખ,સંપત્તિ,સંતતિ,સમાજ,સંસાર,સત્તા,સમય,સમાધાન,સ્નેહ,સુવિચાર,શણગાર,સગાઇ જેવા અનેક પરિબળે એ પવિત્ર જગ્યામાં જન્મ લઈ પાંગરવા દીધાં!!
કાશ ! એ મંદિરને તમે ક્ષણમાં છોડી દેતાં કાળજું મારું કંપ્યું !!! કેમ સમજાવું...!!!! "વાત્સલ્ય"!! તારા ઘરની વેદના !!!
કોઇ હરખાતું'તું જોઈ દૂર દૂર શું !! એ સુંદર મુખના હાવભાવ......... !!!!!!
Nisha Jitesh Palan
Kisi ne poocha – Housewife karti hi kya hai?
Jawab simple hai…
Wo ghar nahi, poori zindagi sambhalti hai.
Uski koi salary nahi hoti,
par uski value priceless hoti hai.
Happy Women’s Day ❤️
- Nisha Jitesh Palan
A singh
नारी कोई कहानी नहीं,
एक पूरी किताब होती है।
दर्द भी सहती है चुपचाप,
फिर भी सबके लिए खुशियों का ख्वाब होती है।
महिला दिवस की शुभकामनाएं।
_ A singh
A singh
माँ भी है, बेटी भी है, बहन भी है,
हर रिश्ते में प्यार बसाती है।
नारी ही इस दुनिया की असली ताकत है,
जो हर घर को स्वर्ग बनाती है।
Happy Women’s Day
A singh
दर्द इतना मिला है ज़िंदगी से,
कि अब शिकायत भी नहीं होती,
लोग बदल जाते हैं यहाँ,
और हमें हैरानी भी नहीं होती।
_ A singh
Avinash
#KeralaVibes
Resting with the Jatayu: Embracing epic moments in Kerala's history and natural beauty.
Thakor Pushpaben Sorabji
હા હું સ્ત્રી છું
સર્જન કર્યું પરમાત્માએ મારું
સક્ષમ બનાવી પરિસ્થિતિઓ સહેવાને
હા,હું સ્ત્રી છું!...................
અવતાર મારો એક સ્ત્રીનો ને
ઉપમા સ્ત્રી તરીકે મારી ઝાઝેરી
હા,હું સ્ત્રી છું!..................
ખુદનુ દર્દ હું ભૂલી જાઉં
પરિવારનું ધ્યાન,સારસંભાળ હું રાખું
હા, હું સ્ત્રી છું!................
કોમળ હૃદયી બનાવી પ્રભુ તે
અડગ બનાવી મુશ્કેલીથી લડતા શીખવી તે
હા, હું સ્ત્રી છું!...............
ખુશ રાખી,ખુશ રહું પરિવાર સાથે
ભૂલી જાઉં ખુદને હું સમર્પિત પરિવારને
હા,હું સ્ત્રી છું!................
પુષ્પા.એસ.ઠાકોર "પુષ્પ" # ઉંદરા#
જય શ્રી કૃષ્ણ
Bk swan and lotus translators
పనసకాయ (Jackfruit) టేస్టీగా ఉండటమే కాకుండా ఆరోగ్యానికి కూడా చాలా మంచిది. పనసకాయతో చేసుకోగలిగే కొన్ని ముఖ్యమైన మరియు రుచికరమైన వంటకాలు ఇక్కడ ఉన్నాయి:
1. పనసపొట్టు కూర (Jackfruit Shredded Curry)
ఇది ఆంధ్ర స్టైల్లో చాలా ఫేమస్. పనసపొట్టును ఉడికించి, ఆవపిండి పెట్టి చేసే ఈ కూర అద్భుతంగా ఉంటుంది.
* చిట్కా: దీనికి చింతపండు పులుపు మరియు ఆవపిండి ఘాటు తోడైతే రుచి అదిరిపోతుంది.
2. పనసకాయ బిర్యానీ (Jackfruit Biryani / Kathal Biryani)
శాకాహారులకు ఇది "వెజ్ మటన్ బిర్యానీ" అని చెప్పవచ్చు. పనస ముక్కలు మసాలాలను బాగా పీల్చుకుని, బిర్యానీలో మాంసం ముక్కల్లాంటి అనుభూతిని ఇస్తాయి.
3. పనసకాయ ఇగురు (Jackfruit Masala Gravy)
పనస ముక్కలను అల్లం వెల్లుల్లి పేస్ట్, ఉల్లిపాయలు మరియు గరం మసాలాతో కలిపి గ్రేవీలా వండుతారు. ఇది అన్నంలోకి మరియు చపాతీలోకి చాలా బాగుంటుంది.
4. పనసకాయ వేపుడు (Jackfruit Fry)
పనస ముక్కలను చిన్నగా కోసి, ఉప్పు, కారం, పసుపు వేసి నూనెలో డీప్ ఫ్రై లేదా షాలో ఫ్రై చేస్తారు. ఇది సాంబార్ లేదా పప్పు చారులోకి సైడ్ డిష్గా సూపర్ ఉంటుంది.
5. పనస గింజల కూర (Jackfruit Seeds Curry)
పనస పండు తిన్న తర్వాత గింజలను పారేయకుండా, వాటి పైన ఉండే పొట్టు తీసి కూర వండుకోవచ్చు.
* కాంబినేషన్: పనస గింజలను వంకాయతో కలిపి వండితే ఆ రుచే వేరు.
6. తీపి వంటకాలు (Sweet Dishes)
పనస పండు (ముగ్గినది) తో చేసే వంటకాలు:
* పనస పండు పాయసం: కొబ్బరి పాలు, బెల్లం ఉపయోగించి చేస్తారు.
* పనస తొనల గారెలు: పనస ముక్కలను పేస్ట్ చేసి, బియ్యం పిండి లేదా రవ్వ కలిపి గారెల్లా వేస్తారు.
ముఖ్య గమనిక: పనసకాయను కట్ చేసేటప్పుడు చేతులకు మరియు కత్తికి కొద్దిగా నువ్వుల నూనె లేదా వంట నూనె రాసుకుంటే, ఆ జిగురు అంటుకోకుండా ఉంటుంది.
1. పనసకాయ పకోడి (Jackfruit Pakora)
పనస ముక్కలను ఉడికించి, శనగపిండి, బియ్యం పిండి, మసాలాలు కలిపి నూనెలో వేయిస్తారు. ఇది వర్షం పడేటప్పుడు వేడివేడిగా తింటే చాలా బాగుంటుంది.
2. పనసకాయ ఆవకాయ (Jackfruit Pickle)
మామిడికాయ ముక్కల్లాగే పనస ముక్కలతో కూడా పచ్చడి పెడతారు. పనస ముక్కలను ఆవపిండి, మెంతిపిండి, నూనెతో కలిపి పచ్చడి చేస్తే అది నెలల తరబడి నిల్వ ఉంటుంది.
3. పనస గింజల వేపుడు (Roasted Jackfruit Seeds)
పనస గింజలను కేవలం కూరలోనే కాకుండా, ఉడకబెట్టి లేదా నిప్పుల మీద కాల్చి కొంచెం ఉప్పు, కారం చల్లుకుని తింటే మంచి ప్రోటీన్ స్నాక్ లాగా ఉంటుంది.
4. పనస పండు హల్వా (Jackfruit Halwa)
బాగా పండిన పనస తొనలను పేస్ట్లా చేసి, నెయ్యి, బెల్లం మరియు జీడిపప్పు వేసి దగ్గరకు ఉడికిస్తే రుచికరమైన హల్వా తయారవుతుంది. ఇది కేరళలో 'చక్క వరట్టి' (Chakka Varatti) అని పిలుస్తారు.
5. పనసకాయ కట్లెట్స్ (Jackfruit Cutlets)
ఉడికించిన పనస ముక్కలను మెదిపి (mash చేసి), అందులో ఉడికించిన ఆలుగడ్డ, ఉల్లిపాయలు, పచ్చిమిర్చి, గరం మసాలా కలిపి కట్లెట్స్ లాగా చేసుకుని తవా మీద కాల్చుకోవచ్చు.
6. పనస పొట్టు పులిహోర (Jackfruit Shredded Pulihora)
సాధారణ పులిహోరలాగే ఉంటుంది కానీ, ఇందులో పనస పొట్టును ఉడికించి పోపులో కలిపి చేస్తారు. ఇది అన్నంతో పనిలేకుండా విడిగా కూడా చాలా రుచిగా ఉంటుంది.
ముఖ్యమైన చిట్కాలు:
* లేత పనసకాయ: బిర్యానీ, కూరలు, వేపుళ్లకు 'లేత పనసకాయ' (Raw/Tender Jackfruit) వాడితేనే రుచి బాగుంటుంది.
* పండు పనస: పాయసం, హల్వా వంటి తీపి వంటకాలకు బాగా పండిన తొనలు వాడాలి.
Sonu Kumar
भारत के मीडिया को नियंत्रित करने वाली शक्तियों का एजेंडा क्या है ?
.
मीडिया घाटे का कारोबार है। मीडिया का घाटा पूरा करने या इन्हें भुगतान करने वाले समूहों के आधार पर भारत में मीडिया के 2 वर्ग है :
चूंकि दूरदर्शन के कर्मचारियों को वेतन नागरिको द्वारा वसूल किये गए टेक्स से चुकाया जाता है, अत: सरकार द्वारा नियंत्रित मीडिया सिटिजन पेड मीडिया है।
प्राइवेट मीडिया का घाटा निजी कम्पनियों के मालिक पूरा करते है, और वे ही सूचनाएं देने के लिए मीडियाकर्मीयों को भुगतान करते है।
.
लोकतंत्र आने के बाद से मीडिया समूह दुसरे नंबर की सबसे ताकतवर कम्पनियां बन गयी है। पहला नंबर हथियार बनाने वाली कम्पनियों का है। पिछले 200 वर्षो से वैश्विक राजनीती पर हथियार निर्माताओ का कब्जा है, और दुनिया में सबसे बेहतर हथियार बनाने वाली कम्पनियां अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिको के पास है।
.
जो भी देश अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों को टक्कर देने वाले हथियार नहीं बना पा रहा है, उन देशो के मीडिया को अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक नियंत्रित करते है। भारत भी हथियार निर्माण में काफी पिछड़ा हुआ है, अत: भारत के मीडिया को भी अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक नियंत्रित करते है।
.
इन कम्पनियों का मुख्य एजेंडा वैश्विक भारत पर आर्थिक-सामरिक-धार्मिक नियंत्रण बनाना है। पेड मीडिया के माध्यम से वे भारत की मुख्यधारा की सभी राजनैतिक पार्टियों एवं नेताओं को नियंत्रित करते है, ताकि इनका इस्तेमाल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में किया जा सके।
.
[ इस जवाब में 3 खंड है। पहले खंड में उन कम्पनियों के बारे में कुछ विवरण है जिनका वैश्विक एवं भारतीय मीडिया में सबसे प्रभावी दखल है। खंड (2) में पेड मीडिया के प्रायोजको के वैश्विक एजेंडे को भारत के सन्दर्भ में बताया है। खंड (3) में उन कदमों का विवरण है, जिन्हें उठाकर आप उनके एजेंडे को ज्यादा अच्छे से समझ सकते है। मूल जवाब दुसरे खंड में है, अत: आप सीधे खंड (2) को पढ़ सकते है। ]
.
खंड 1 ; पेड मीडिया को नियंत्रित करने वाली शक्तियां कौन है ?
.
राजतन्त्र में गेजेट छापने की शक्ति राजा के पास थी। राजा के पास सेना होती थी, और इसीलिए राजा ताकतवर था। 12 वीं सदी में युरोप में जूरी सिस्टम आया और ब्रिटेन-फ़्रांस ने तेजी से तकनिकी विकास करना शुरू किया। चूंकि निर्णायक हथियारो पर नियंत्रण से वास्तविक ताकत आती है, अत: जब भी किसी राज्य में तकनिकी विकास होता है तो अंततोगत्वा यह विकास हथियार निर्माण की दिशा में मुड़ जाता है।
.
17 वीं सदी में ब्रिटेन में निजी कम्पनियां बड़े पैमाने पर हथियार बनाने लगी थी, और 18 वीं सदी तक आते आते उन्होंने ऐसे निर्णायक हथियार बना लिए थे कि जिस सेना के पास ये हथियार होते थे वह सेना जीतना शुरू कर देती थी।
.
उदाहरण के लिए 1805 से 1815 के बीच सिर्फ बर्मिघम के कारखानों ने ही लगभग 40,00,000 बन्दूको का उत्पादन किया था। ईस्ट इण्डिया कम्पनी इन्ही बन्दूको की सहायता से विभिन्न राजाओ की सेनाओं को हराकर अपने उपनिवेश स्थापित कर रही थी। बन्दूको निर्माण की दूसरी कॉटेज इंडस्ट्री लन्दन में थी। लन्दन एवं बर्मिंघम में बंदूक बनाने के इन कारखानों के मालिको ने ही पूरी दुनिया में ईस्ट इण्डिया कम्पनी एवं ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार को सुनिश्चित किया।
Brief History
.
उस समय बंदूक निर्णायक हथियार थी, और इसके उत्पादन पर नियंत्रण रखने वालो की ताकत को आप इस तरह समझ सकते है कि, यदि 1 लाख बन्दूको एवं कारतूस की पेटियों से भरा जहाज सिराजुद्दौला को सप्लाई कर दिया जाता तो क्लाइव लॉयड न तो प्लासी का युद्ध जीतता था और न ब्रिटिश भारत में घुस पाते थे।
.
सिराजुद्दौला के पास यह अस्लहा आ जाता तो वह पूरे भारत को भी टेक ओवर कर लेता। लेकिन पूरे भारत का बादशाह बनने के बाद भी क्या सिराजुद्दौला बर्मिंघम के फैक्ट्री मालिक से टकराव ले सकता था ? नहीं !! क्योंकि वे सिराजुद्दौला के प्रतिद्वंदियों को 4 जहाज भरकर बंदूक भेज देते है, और सिराजुद्दौला के कारतूसो की सप्लाई रोक देते !! और इस तरह नवाब फिर से पिट जाता !! क्योंकि असली ताकत तब आती है जब आप अपने हथियार खुद बनाते हो।
.
मतलब, 200 साल पहले ही राजा वगेरह नाम के राजा रह गए थे, और असली ताकत हथियार निर्माताओं के पास आ चुकी थी। पेड इतिहासकार इन तथ्यों को दर्ज नहीं करते, क्योंकि उन्हें यह जानकारी छिपाने के लिए पेमेंट की जाती है।
.
बहरहाल, सिराजुद्दौला और भारत के अन्य राजाओं को हथियार बनाने वाली कंपनियों ने हथियार नहीं दिए, और वे हारते चले गए !! शिवाजी के पास पुर्तगाली तोपे थी, और यह एक बड़ी वजह थी कि वे मुकाबला कर पा रहे थे। बाजीराव को फ्रेंच तोपे सप्लाई कर रहे थे, और अहमद शाह अब्दाली के पास रशियन तोपखाना था।
.
1962 में चीन ने जब भारत पर हमला किया तो जवाहर लाल ने अमेरिका-रूस को हथियार भेजने के लिए चिट्ठियां लिखी थी। और जब चीन को लगा कि भारत को हथियारों की सप्लाई आ सकती है, तो चीन ने बढ़ना रोक दिया।
.
1965 में भारत पाकिस्तान में अन्दर तक चला गया था, लेकिन अमेरिका यानी हथियार बनाने वाली कपनियों के हस्तक्षेप के कारण हमें रुकना पड़ा। 1971 में फिर से यही हुआ। अमेरिका ने अपना नौ सेना बेड़ा पाकिस्तान की मदद के लिए रवाना कर दिया, और हमें फिर पीछे हटना पड़ा !! रूस के बीच में आने की वजह से हम बच गए वर्ना अमेरिकी धनिक भारत को 1971 में ही टेक ओवर कर लेते थे। और रूस अमेरिका को इसीलिए रोक पाया क्योंकि उस समय अमेरिका के साथ साथ रूस के पास भी निर्णायक हथियार थे।
.
आप पिछले 200 सालो में हुए दुनिया के सभी युद्धों का अध्ययन करके देख सकते हो। जिस देश को निर्णायक हथियार बनाने वाली कम्पनियों का सहयोग मिला हुआ है, वे देश युद्ध जीत जाते है, वर्ना हार जाते है !! 16 वीं सदी से पहले तक बड़ी सेना का महत्त्व होता था, लेकिन बाद में जैसे जैसे हथियारों की तकनीक उन्नत होती गयी वैसे वैसे युद्ध में निर्णायक भूमिका हथियारों की हो गयी। द्वितीय विश्व युद्ध 6 साल तक चलता रहा लेकिन अमेरिका के फाइटर प्लेन ने 2 बम गिराकर युद्ध का फैसला कर दिया था।
.
तब से आज हथियारों की तकनीक इतनी आगे जा चुकी है कि निर्णायक हथियारों से लैस 5 हजार का दस्ता 50 लाख की सेना को ख़त्म कर सकता है। वो भी परमाणु बमों का इस्तेमाल किये बिना।
.
मेरा बिंदु यह है कि पिछले 200 वर्षो से इस धरती पर सबसे ताकतवर समूह हथियार कम्पनियां है, और अमेरिकी कम्पनियों के मालिक सबसे बेहतर एवं सबसे मारक हथियार बना रहे है। और इस वजह से अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक वास्तविक अर्थो में वैश्विक राजनीती को प्रभावित एवं नियंत्रित करते है।
.
हथियार कम्पनियों के मालिको को सस्ते में माल बनाने के लिए मुफ्त का कच्चा माल यानी खनिज चाहिए। तो वे हथियारों का इस्तेमाल करके राजा को नियंत्रित (उपनिवेश की स्थापना) करते थे, और फिर खनिज लूटते थे। डेमोक्रेसी आने के बाद राजा की जगह पीएम ने ले ली, अत: उन्होंने लूट चलाने के लिए पीएम को कंट्रोल करना शुरू किया।
.
पीएम को कंट्रोल करने के 2 तरीके है
या तो आपको पीएम को युद्ध में हराने की क्षमता जुटानी होगी,
या फिर चुनाव में।
.
युद्ध में खून खराबा होता है, और लागत भी काफी ज्यादा आती है। अत: हथियार कम्पनियों के मालिको ने मतदाताओं को चाबी देने के लिए पेड मीडिया पर कंट्रोल लेना शुरू किया। पेड मीडिया द्वारा वे मतदाता को नियंत्रित करते है, और मतदाता के माध्यम से पीएम एवं राज नेताओं को। यदि किसी देश का पीएम मीडिया पर अपना कंट्रोल लेने की कोशिश करेगा तो उसे युद्ध में जाना पड़ेगा।
.
निर्णायक हथियारों के अलावा ये कम्पनियां और भी ऐसी ढेर सारी तकनिकी वस्तुएं बनाती है जो दुनिया के ज्यादातर देशो को बनानी नहीं आती। और इन वस्तुओ के बिना न तो देश चलाया जा सकता है, और न ही बचाया जा सकता है।
.
इसमें मुख्य रूप से हथियार, इंधन, दवाइयाँ, चिकित्सीय उपकरण एवं माइनिंग मशीनरी शामिल है। किन्तु निर्णायक बढ़त फिर भी इन्हें हथियारों से ही मिलती है। क्योंकि किसी भी प्रकार के टकराव का अंतिम पड़ाव हमेशा युद्ध ही होता है।
.
निचे मैंने कुछ ताकतवर कम्पनियों के बारे में सांकेतिक जानकारी दी है। अन्य विवरण के लिए कृपया गूगल करें।
Infographic: The World's Biggest Arms-Producing Companies
.
Lockheed Martin, USA ($40.83 billion)
Boeing , USA ($29.51 billion)
Raytheon , USA ($22.95 billion)
BAE Systems , USA ($22.79 billion)
General Dynamics , USA ( $19.23 billion)
Airbus group, Trans-European : ($11.2 billion)
.
और ऐसी 15 से 20 कम्पनियां है जो अपना समूह (लॉबी) बनाकर काम करती है। इन कंपनियों के कुल एसेट्स को आप जोड़ ले तो योगफल भारत के कुल विदेशी मुद्रा कोष से कहीं ज्यादा निकल जाएगा, और जहाँ तक ताकत की बात है इनमे से प्रत्येक कम्पनी की ताकत पूरे भारत देश से ज्यादा है। मतलब यदि ऊपर दी गयी किसी भी कम्पनी या इस कम्पनी समूह से भारत का युद्ध हो जाता है तो ये कम्पनियां भारत को उधेड़ कर रख देगी !! क्योंकि ये कम्पनियां ऐसी चीजे बनाती है, जो दुनिया के ज्यादातर देश नहीं बना पाते !!
.
लॉकहिड मार्टिन पर गूगल करें कि ये कम्पनी किस तरह के सामान बनाती है ; Lockheed Martin - Wikipedia
.
यदि ये कम्पनियां भारत पर हमला करने के लिए अपने उन्नत हथियार बांग्लादेश या पाकिस्तान को डिस्काउंट / मुफ्त में देना शुरू करें (जैसा कि उन्होंने कारगिल में किया था) और हमारी सप्लाई लाइन काट दे तो हमारे पास क्या विकल्प है !! सिर्फ रूस ही ऐसे हथियार बनाता है जो इनके हथियारों का मुकाबला कर सके। लेकिन 1971 की बात और थी। आज रूस इन कम्पनियों के खिलाफ जाकर भारत को मदद देने का जोखिम नहीं उठा सकता। कारगिल युद्ध में भी रूस पीछे हट गया था और उसने हमें लेसर गाइडेड बम नहीं भेजे थे।
.
और फिर ये कोई देश नहीं है कि हम इनसे कोई वार्ता कर सके। ये निजी कम्पनियां है, और सिस्टम से बाहर काम करती है। ये बोल देंगे ये सामान बनाकर बेचना हमारा धंधा है। आपसे पूछकर बनायेंगे और बेचेंगे क्या !! तुम्हारी हैसियत है तो तुम भी बना लो, कौन रोक रहा है !!
.
मिसाल के लिए, जब भारत का कारगिल युद्ध हुआ तो हमें लेसर गाइडेड बमों की जरूरत थी, और ये बम सिर्फ इन्ही कंपनियों को बनाने आते है। यदि हमें ये बम नहीं मिलते तो हम कारगिल नहीं जीत सकते थे !! यह एक तथ्य है !! और अभी जब हमें एयर स्ट्राइक करनी थी तो फिर से हमें लेसर गाइडेड बमों की जरूरत थी, और फिर से हमें इनसे विनती करनी पड़ी कि वे हमें लेसर गाईडेड बम उपलब्ध कराए !! यदि ये कम्पनियां हमें बम न भेजती तो स्ट्राइक न होती थी !! यह एक तथ्य है !!
.
कारगिल में जब हमारी यह कमजोरी खुलकर नागरिको के सामने आ गयी थी तो वाजपेयी ने लेसर गाईडेड बम (सुदर्शन) बनाने का प्रोजेक्ट शुरू किया था। लेकिन तमाम कोशिशो के बावजूद हम काम आने लायक लेसर गाइडेड बम नहीं बना सके !! यह भी एक तथ्य है !!
.
अभी ये सिर्फ हथियार कम्पनियां है। इसके बाद तेल निकालने वाली कम्पनियां आती है। भारत के पास तेल के कुँए तो है लेकिन तेल निकालने की तकनीक नहीं है। दुनिया में तेल निकालने की तकनीक भी लगभग दर्जन भर कंपनियों के पास ही है। अब भारत अपना 80% तेल भी आयात करता है, और हम अपने 80% हथियार भी विदेशियों से लेते है !!
.
हथियार कम्पनियों के मालिको ने पहले सत्ताओ को कंट्रोल किया, और फिर इकॉनोमी को कंट्रोल करने के लिए उन्होंने बैंक खोले। अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक ( जो डॉलर छापता है ) पर गूगल करिए। इसकी होल्डिंग प्राइवेट बैंको के पास है। इसके बाद इन्होने तेल निकालने की तकनीक जुटाई और इस पर एकाधिकार बनाया।
.
इसके बाद चिकित्सीय उपकरण जैसे MRI, अल्ट्रा साउंड, हार्ट सिटी स्कैनर एवं आवश्यक दवाइयाँ बनाने वाली कम्पनियां। और ये जो मशीने बनाते है उनकी तकनीक भी कुछ गिनी चुनी कंपनियों के पास है। और फिर इन ताकतवर कंपनियों के पीछे अमेरिका की अन्य मल्टीनेशनल कम्पनियां जैसे बैंक, खनन, बीमा, संचार, कम्प्यूटर आदि।
.
कुल मिलाकर कुछ 100 बहुराष्ट्रीय कंपनियों का एक समूह है, जिनके पास ऐसी तकनीक है जो दुनिया के 190 देशो के पास नहीं है। और कुछ 30-40 अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच घराने है, जो पिछले 150 वर्षो से इन कम्पनियों को चला रहे है। यही अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिक पेड मीडिया के प्रायोजक है !!
.
इन कम्पनियों की बढ़त तकनीक की वजह से है। पिछली 2 सदियों से इन्होने इस तकनीक पर एकाधिकार बनाकर रखा है। अन्य देश यदि यह तकनीक जुटा लेते है तो इनकी ताकत खत्म हो जायेगी। अत: इन कम्पनियों के मालिक पिछले 200 वर्षो से बराबर इस मद में निवेश कर रहे है कि अन्य देश यह तकनीक न जुटाएं।
.
यदि पीएम ऐसे क़ानून छापने लगता है जिससे अमुक देश में तकनिकी उत्पादन होने लगे तो ये कम्पनियां अपना बाजार खोने लगेगी। अत: अपने कारोबारी हितो को बचाने और अतिरिक्त मुनाफा बनाने के लिए उन्हें पीएम को कंट्रोल की जरूरत होती है। और पीएम को कंट्रोल करने के लिए इन्हें मीडिया पर कंट्रोल चाहिए !!
.
पेड मीडिया के अंग : पेड मीडिया सिर्फ न्यूज चेनल एवं अखबार नहीं है। इसका फैलाव इससे कहीं विस्तृत एवं गहरा है।
मुख्य धारा के सभी न्यूज चैनल एवं सभी मनोरंजन चैनल
मुख्य धारा के सभी अख़बार
सोशल मीडिया कम्पनियां
गणित-विज्ञान-एकाउंट्स को छोड़कर सभी विषयों की पाठ्यपुस्तकें एवं साहित्य
मुख्यधारा की सभी खबरिया एवं मनोरंजन मैगजीने
मुख्यधारा की सभी फ़िल्में
.
जब पेड मीडिया के प्रायोजको का नियंत्रण नेताओं पर कमजोर हो जाता है, तो उनके एजेंडा भी धीमा हो जाता है, और जब उनका नियंत्रण बढ़ता है तो उनके एजेंडे की रफ़्तार भी बढ़ जाती है। इस तरह पिछले 74 सालों में नियंत्रण घटने-बढ़ने के कारण उनके एजेंडे की रफ़्तार भी घटती-बढती रहती है। किन्तु 2001 के बाद से उनका नियंत्रण लगातार बढ़ता जा रहा है, और आज यह इतना बढ़ चुका है कि पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में भारत से भी ज्यादा ताकतवर हो चुके है।
.
1947 से 1990 तक भारत में पेड मीडिया के प्रायोजको का नियंत्रण कब बढ़ा / घटा, जानने के लिए यह जवाब पढ़ें : क्या इंदिरा गांधी वाक़ई सबसे ताक़तवर भारतीय प्रधानमंत्री थीं -- https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1047932098913200/
.
——————-
.
खंड 2 ; पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा क्या है ?
.
उनका मुख्य एजेंडा अपने कारोबारी हितो की रक्षा करना है। चूंकि उनकी शक्ति का स्त्रोत हथियारों की तकनीक पर टिका हुआ है, अत: किसी देश के नेताओं को नियंत्रण में लेने के बाद वे उन्हें बाध्य करके ऐसे क़ानून छपवाते है जिससे देश तकनिकी वस्तुओं का उत्पादन न कर सके। इसके लिए वे गेजेट एवं पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है।
गेजेट में वे ऐसी इबारते छपवाते है जिससे उनकी शक्ति बढे
और नागरिको को भ्रमित करने के लिए वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है
.
जवाब के इस भाग में मैंने उन कानूनों एवं लाक्षणिक बिन्दुओ के बारे में जानकारी दी है जिनका अवलोकन करके आप यह जान सकते है कि भारत में अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक अपना एजेंडा किस गति से लागू कर रहे है।
.
अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों का एजेंडा :
.
(1) आर्थिक नियंत्रण बनाने के लिए
.
(1.1) भारत के प्राकृतिक संसाधन एवं खनिज लूटने के लिए उनका अधिग्रहण करना।
.
(1.2) आवश्यक सेवाओं जैसे मीडिया, पॉवर, बैंकिंग, माइनिंग, रेलवे, एविएशन, ऑटो मोबाइल, निर्माण, कृषि, दवाइयाँ आदि के कारोबार पर एकाधिकार बनाना।
.
वे पेड मीडिया पार्टियों एवं उनके नेताओं का इस्तेमाल करके गेजेट में लगातार ऐसी इबारतें छपवायेंगे जिससे देश की राष्ट्रिय संपत्तियां, प्राकृतिक संसाधन, सार्वजनिक उपक्रम आदि बिक जायेंगे और ये संपत्तियां अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों के स्वामित्व में चली जाएगी।
पेड मीडिया में इस बेचान को एक सधी हुयी आर्थिक नीति एवं साहसिक फैसले के रूप में बताया जाएगा। नागरिको का ध्यान बंटाने के लिए वे अस्पष्ट आर्थिक शब्दावली जैसे विनिवेश, विदेशी निवेश, आर्थिक सुधार, निजीकरण, पीपीपी मोड़, उदारीकरण, भूमंडलीकरण, पूंजीवाद, समाजवाद, साम्यवाद, नव उदारवाद आदि का इस्तेमाल करते है।
.
[ उदारहण के लिए, अभी टाटा झारखंड में 1 रू सालाना की दर पर कोयला खोद रहा है, जबकि बाजार भाव 2,000 रू टन का है। और यह जानकारी भी सामने इसीलिए आ पाई क्योंकि जियो के कारण डोकोमो का धंधा सिकुड़ने लगा और टाटा ने जियो के रास्ते में सरकारी अडंगे लगाने शुरू किये। और फिर रिलायंस ने टाटा की घड़ी दबाने के लिए फर्स्ट पोस्ट को यह खबर लगाने के लिए पेमेंट की !! ऐसी सैंकड़ो खदाने है जहाँ से इसी तरह से खनिज लूटे जा रहे है।
.
पेड मीडिया इन्हें रिपोर्ट नहीं करता इसीलिए हमें यह मालूम नहीं होता। टाटा 1947 से ही 1 रू में यह कोयला खोद रहा है, लेकिन 74 साल में किसी ने भी इस खबर को रिपोर्ट नहीं किया। टाटा अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों की शेल कम्पनी है। जब ब्रिटिश गए थे इन्हें इस तरह के कई माइनिंग राइट्स मुफ्त में दे गए थे। आज भी इनके सभी धंधे अमेरिकन एवं ब्रिटिश धनिकों की मशीनों पर चल रहे है। 1990 के बाद से अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने सीधे भारत में आना शुरू किया और अब वे बेहद तेजी से भारत के संसाधनों का अधिग्रहण कर रहे है। ]
.
(1.3) भारत में तकनिकी उत्पादन करने वाली छोटी स्वदेशी इकाइयों को बाजार से बाहर करना।
.
तकनिकी उत्पादन करने वाले स्थानीय छोटे कारखानों को बाजार से बाहर करना उनका मुख्य एजेंडा है। जिस देश में छोटे कारखानों का आधार टूट जाता है, वह देश हमेशा के लिए तकनीकी वस्तुओ के लिए परजीवी हो जाता है। अत: अमेरिकी-ब्रिटिश बहुराष्ट्रीय कम्पनियां जहाँ भी जाती है वहां के तकनिकी उत्पादन करने वाले स्थानीय कारखानों को गायब करने में काफी संजीदगी से काम करती है। तकनिकी आधार टूटने के बाद अमुक देश हर क्षेत्र में तकनीक के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों का ग्राहक बन जाता है।
.
बॉटम 80% का गणित-विज्ञान का आधार तोड़ना।
अनुत्पादक नस्ल का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने के लिए प्रतिभाशाली छात्रों को इतिहास, राजनीती विज्ञान, मनोरंजन, खेलकूद आदि जैसे क्षेत्रो में जाने के लिए प्रेरित करना।
रेग्रेसिव टेक्स सिस्टम में छोटे कारोबारीयों का कारोबार बड़ी फैक्ट्रियो के पास चला जाता है। अत: वे रिग्रेसिव टेक्स प्रणाली के समर्थन, एवं प्रोग्रेसिव टेक्स के सख्त खिलाफ है। सेल्स टेक्स, एक्साइज टेक्स, वैट एवं जीएसटी आदि सभी रिग्रेसिव टेक्स प्रणालियाँ है।
वे गेजेट में ऐसी इबारतें छापेंगे जिससे शहरी क्षेत्र की जमीन महंगी बनी रहे। जमीन की कीमतें ऊँची रहने से कारखाने लगाना मुश्किल हो जाता है।
तकनिकी उत्पादन तोड़ने के लिए उन्हें अदालतों एवं पुलिस का ऐसा स्ट्रक्चर चाहिए कि पैसा फेंकने वाले का काम हो सके। यदि किसी देश में अदालतें एवं पुलिस ईमानदार है तो तकनिकी विकास में विस्फोटक विकास होने लगता है। अत: वे अदालतों को किसी भी कीमत पर केंद्रीकृत बनाये रखना चाहते है।
.
(2) सैन्य नियंत्रण बनाने के लिए
.
आर्थिक नियंत्रण बढ़ने के साथ ही अगले चरण में वे सैन्य नियंत्रण बनाना शुरू करते है। यदि कोई देश अपने आर्थिक क्षेत्र अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों को देने से इनकार करता है तो फिर कोई न कोई बहाना से सेना भेजकर पहले सैन्य नियंत्रण बनाया जाता है, और फिर वे अर्थव्यवस्था का अधिग्रहण करना शुरू करते है। ईराक इसी मॉडल का शिकार हुआ था, और अब ईरान का नंबर है। भारत ने आर्थिक नियंत्रण देना स्वीकार कर लिया अत: हम युद्ध से बच गए। और अब वे सैन्य नियंत्रण बढ़ाने की इबारतें गेजेट में छपवा रहे है।
.
(2.1) भारत की सेना पर नियंत्रण बनाने के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियों के हथियार इंस्टाल करना।
अगस्तावेस्ट लेंड, रफाल आदि के बाद अभी जब ट्रंप ने भारत की विजिट की तो फिर से भारत को 3 बिलियन डॉलर के ब्लेक हॉक हेलीकोप्टर लेने के लिए बाध्य किया। इन सभी जटिल हथियारों को खरीदते समय निर्माता से End Use Monitoring Agreement करना होता है। EUMA और स्पेयर पार्ट्स की निर्भरता के कारण सेना हथियार का इस्तेमाल करने के लिए अमुक निर्माता पर हमेशा निर्भर बनी रहती है।
भारत ने इंसास राइफलो में सुधार एवं उत्पादन को बेहद धीमा कर दिया है, और अमेरिका भारतीय सेना में अपनी राइफले इंस्टाल कर रहा है। पिछले वर्ष ही सेना ने इंसास का ऑर्डर केंसिल करके 6 लाख रायफल का कोंट्रेक्ट अमेरिकी कम्पनी को दिया है।
.
(2.2) भारत के सैन्य परमाणु कार्यक्रम को फिर से शुरू न होने देना।
.
पाकिस्तान के पास सामरिक बम है और वह आज भी अपनी परमाणु क्षमता निरंतर बढ़ा रहा है। भारत के पास सामरिक परमाणु बम नहीं है, और अमेरिका 123 एग्रीमेंट करके 2008 में ही हमारा परमाणु कार्यक्रम बंद करवा चुका है। 2010 में पोकरण-2 के मुख्य वैज्ञानिक ने ( रिटायर होने के बाद ) सार्वजनिक रूप से यह बात कही थी कि भारत का हाइड्रोजन बम का टेस्ट असफल रहा था। फिशन ब्लास्ट का परिक्षण सफल था, किन्तु हम फिशन और लोइल्ड डिवाइस का परिक्षण तो 1974 में ही सफलतापूर्वक कर चुके थे। बाद में इसकी पुष्टि परिक्षण में शामिल अन्य वैज्ञानिक ने भी की। इसके अलावा भारत ने आज तक कभी भी वातावरणीय परिक्षण भी नहीं किया है। और फिर भी हम अपना सैन्य परमाणु कार्यक्रम बंद कर चुके है।
.
(2.3) भारत एवं विशेष रूप से कश्मीर में अपने सैन्य अड्डे बनाना।
.
अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक ईरान+चीन के खिलाफ भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहते है, और इसके लिए उन्हें भारत की जमीन-सेना पर पूर्ण नियंत्रण चाहिए। अभी आप भारत में जो हिन्दू-मुस्लिम तनाव देख रहे है, यह इसी नीति का हिस्सा है। भारत में हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ने के बाद जब अमेरिका भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करेगा तो एंटी-मुस्लिम सेंटिमेंट की लहर की चपेट में आकर भारतीय हिन्दू ईरान में सेना भेजने का विरोध नहीं करेंगे।
.
(2.4) नागरिको को हथियार विहीन बनाये रखना।
.
यह सब तभी तक चलता है, जब तक नागरिको को इस बारे में पता नहीं रहे कि उनका पीएम अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के नियंत्रण में जा चुका है। यदि राजनैतिक कार्यकर्ता एवं नागरिक पेड मीडिया की चपेट से बाहर आ जाते है, या कोई नेता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको के खिलाफ हो जाता है तो अमेरिकी-ब्रिटिश कम्पनियों को निष्कासित करने और सेना को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वदेशी हथियारों के निर्माण के लिए आवश्यक कानूनों की मांग को लेकर जन आन्दोलन खड़ा हो सकता है।
.
और तब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के पास भारत को काबू करने का एक मात्र विकल्प यह होगा कि वह सीधे सेना का इस्तेमाल करे। किन्तु जिस देश के नागरिको के पास हथियार होते है उस देश की सेना को तो हराया जा सकता है, किन्तु टेरेटरी को टेकओवर नहीं किया जा सकता। अत: अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों नागरिको को हथियार रखने की अनुमति देने के सख्त खिलाफ है।
उन्होंने पेड मीडिया का इस्तेमाल करके भारतीयों के दिमाग में हथियारों के प्रति इतनी नफरत भर दी है कि यदि आप घर घर जाकर फ्री में बंदूके बाँटोगे तब भी अधिकांश नागरिक इन्हें लेने से इनकार कर देंगे। उन्होंने प्रत्येक भारतीय के दिमाग में यह वाक्य नट बोल्ट से अच्छी तरह से कस दिया है कि – यदि भारतियों को को बंदूक रखने की अनुमति दे दी गयी तो वे एक दुसरे मार देंगे !!
.
(3) धार्मिक नियंत्रण बनाने के लिए :
.
अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का गठजोड़ मिशनरीज के साथ है। अत: जब किसी देश पर उनका आर्थिक-सैन्य नियंत्रण बढ़ता है, तो अगले चरण में वे स्थानीय धर्मो को आपस में लड़वाकर कन्वर्जन के प्रयास शुरू करते है। पिछले 400 सालो से अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच धनिकों का यही ट्रेक रहा है।
.
(3.1) भारत में सांप्रदायिक आधार पर अलगाववादी हिंसक गृह युद्ध की जमीन तैयार करना।
.
(3.2) भारतीय मुस्लिमों को अलग देश की मांग करने के लिए तैयार करना
.
(3.3) भारत को 3 हिस्सों में विभाजित करना ( कश्मीर एवं पूर्वोत्तर )।
वे शुरू से ही भारत में जनसँख्या नियंत्रण क़ानून डालने के खिलाफ रहे है। इससे धार्मिक जनसँख्या का संतुलन बिगड़ता है, और अलगाव की जमीन तैयार होती है।
इसके अलावा वे भारत में रह रहे 2 करोड़ अवैध विदेशी निवासियों को खदेडने के भी खिलाफ है, ताकि जरूरत पड़ने पर इन्हें किसी भी समय हथियार भेजकर गृह युद्ध ट्रिगर किया जा सके।
हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ाने के लिए वे गाय का भी कई तरीको से इस्तेमाल करते है। आजादी से पहले भी उन्होंने गाय का इस्तेमाल हिन्दू-मुस्लिम को लड़ाने में किया था।
.
(3.4) सरकारी नियंत्रण में लेकर मंदिरों की संपत्तियां लूटना एवं उत्सवों में होने वाले धार्मिक जमाव को तोडना।
वे मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने के भी खिलाफ है, ताकि मंत्रियो एवं जजों का इस्तेमाल करके मंदिर की जमीनो को बेचा जा सके।
उत्सवो में धार्मिक जमाव तोड़ने के लिए वे भ्रष्ट जजों एवं पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है।
.
(3.5) देशी गाय की प्रजाति को लुप्त प्राय करके इसके उत्पादों पर एकाधिकार बनाना।
.
(3.6) भारत में बड़े पैमाने पर कन्वर्जन करना।
.
(4) सामाजिक एवं सांस्कृतिक एजेंडा
.
सामाजिक-पारिवारिक कलेश, जातीय-क्षेत्रीय अलगाव से उत्पादक व्यक्तियों को मानसिक एवं आर्थिक हानि होती है, और समग्र देश की उत्पादकता गिर जाती है। साथ ही इसमें कारोबार एवं धर्मांतरण भी है। संस्कृति का रूपांतरण करने के बाद कन्वर्जन करना आसान हो जाता है।
.
(4.1) जाति एवं नस्ल के आधार पर हिंसक अलगाव खड़ा करना।
.
(4.2) लैंगिक आधार पर आपसी घर्षण बढ़ाकर परिवार एवं विवाह नामक संस्थाए ध्वस्त करना।
पहले 498A का इस्तेमाल करके उन्होंने परिवारों को तोड़ा, और फिर लिव इन को कानूनी करके लिव इन संतानों को कानूनी मान्यता दी।
उन्होंने 2012 में यह क़ानून छापा कि, पुरुष पर यौन उत्पीड़न साबित करने के लिए लड़की का सिर्फ बयान ही पर्याप्त होगा। इन सभी क़ानूनो के समग्र प्रभाव से स्त्री-पुरुष के बीच सामाजिक संघर्ष बढ़ गया, और यह आगे भी बढ़ता जाएगा।
.
(4.3) फूहड़ता, अश्लीलता एवं नग्नता को सार्वजनिक स्वीकार्यता दिलाना।
उन्होंने सेल्फ सेंसरशिप का क़ानून छापा ताकि वेब सीरिज, इंटरनेट आदि में गाली गलौज और यौन विकृतियों की सामग्री को बढ़ावा दिया जा सके।
पारिवारिक स्तर पर अश्लीलता एवं फूहड़ता को स्वीकार्यता दिलाने के लिए वे मनोरंजन चेनल्स का इस्तेमाल करते है।
.
(4.4) दवाईयों पर निर्भरता बढ़ाने के लिए खाद्य पदार्थो में मिलावट को बढ़ावा देना।
.
(4.5) अफीम एवं भांग पर प्रतिबंधो को कठोर करना।
इन प्रतिबंधो से एक तरफ दवाईयों की बिक्री बढ़ती है, और दूसरी तरफ युवाओं को शराब, ड्रग आदि नशो की और धकेलना आसान हो जाता है। मिशनरीज कन्वर्जन में नशे का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर करती है। अभी पंजाब में इस मॉडल पर काम चल रहा है। आगे अन्य राज्यों का भी नम्बर आएगा।
.
(5) राजनैतिक एजेंडा
.
वे राजनीति में केंद्रीकृत व्यवस्था चाहते है ताकि बड़ी पार्टियों में पेड मीडिया का इस्तेमाल करके नेताओं को प्लांट किया जा सके। यदि पार्टियाँ एवं नेता उनके कंट्रोल से निकल गए तो वे गेजेट में इबारतें छपवाने की क्षमता खो देंगे।
.
(5.1) EVM जारी रखना।
evm उन व्यक्तियों के निर्देश पर परिणाम दिखाती है जो व्यक्ति इसका प्रोग्राम लिखते है। नेताओ को कंट्रोल करने के लिए evm उनका सबसे प्रभावी टूल है। पेड मीडिया का इस्तेमाल करके वे इस तरह की गलतफहमी फैलाते है तो अमुक राजनीतिक दल या पीएम evm द्वारा वोटो की हेरा फेरी कर रहा है। जबकि केंचुआ और evm पर पीएम का कोई कंट्रोल नहीं होता है।
.
(5.2) छोटी पार्टियों को कमजोर करना।
वे निरंतर ऐसे क़ानून छापते है जिससे छोटी पार्टियों के लिए चुनाव लड़ना मुश्किल होता जाए और सिर्फ बड़ी पार्टियाँ मैदान में रहे।
.
(5.3) बड़ी पार्टियों का केन्द्रीयकरण करना।
वे राजनैतिक पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र यानी कि पार्टी मेम्बर्स को वोटिंग राइट्स देने के खिलाफ है। इससे वे भारत की बड़ी पार्टियों में ऐसे नेताओं को आगे बढ़ा पाते है जो उनके एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहे है।
.
(5.4) युवाओं को राजनीती से दूर रहने के लिए प्रेरित करना
ऐसा करने के लिए पेड मीडिया का इस्तेमाल किया जाता है।
.
(5.5) नागरिको के मतदान एवं चुनावी अधिकारों में कटौती करना
उन्हें इस तरह का सिस्टम चाहिए कि एक बार वोट देने के बाद अगले 5 वर्ष तक मतदाताओ की प्रशासनिक-राजनैतिक प्रक्रियाओ में कोई भूमिका न रहे, ताकि वे पीएम एवं मंत्रियो को घूस देकर या उनका हाथ मरोड़ कर मनमर्जी की इबारतें गेजेट में निकलवा सके। वोट वापसी, जनमत संग्रह प्रक्रियाएं इस मेकेनिज्म को पूरी तरह से तोड़ देती है। अत: वे इन दोनों प्रक्रियाओ को गेजेट में छापने के सख्त खिलाफ है।
.
(6) प्रशासनिक एजेंडा :
.
पुलिस एवं अदालतों की सरंचना इस तरह रखना कि पैसा फेंककर अपना काम करवाया जा सके
.
पुलिस एवं अदालतें सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। जो आदमी पुलिस एवं जजों को नियंत्रित करता है, उस पर कोई भी क़ानून लागू नहीं होता। क्योंकि जब भी कोई क़ानून तोड़ा जाता है अपराधी को पकड़ने का काम पुलिस, और दंड देने का काम जज करता है।
.
वे इतने बड़े भारत में अपने एजेंडे को इसीलिए आगे बढ़ा पा रहे है, क्योंकि भारत में जज सिस्टम है। जज सिस्टम का डिजाइन इस तरह का होता है कि इसमें चयनात्मक न्याय दिया जा सकता है। मतलब, जब पैसे वाला आदमी फंसता है तो वह जज को पैसा देकर अपने पक्ष में फैसला निकलवा लेगा। इसी तरह जिसके पास पैसा है वह अपने प्रतिद्वंदियों को भी उल्टे सीधे मुकदमों में फंसा कर अंदर करवा सकता है।
.
अदालतों एवं पुलिस को अपनी पकड़ में रखने के लिए वे भारत में जज सिस्टम जारी रखना चाहते है, एवं जूरी सिस्टम से अत्यंत घृणा करते है। वे जूरी सिस्टम से इतनी घृणा करते है कि उन्होंने भारत की सभी पाठ्यपुस्तको में से इस लफ़्ज को निकाल दिया है। आपको भारत की किसी भी अखबार, साहित्य, पाठ्यपुस्तक और यहाँ तक की क़ानून की किताबों तक में जूरी सिस्टम के बारे में जानकारी नहीं मिलेगी !!
.
उल्लेखनीय है कि अमेरिका एवं ब्रिटेन की अदालतों में जूरी सिस्टम है, जज सिस्टम नहीं। और जूरी सिस्टम होना सबसे बड़ी वजह रही कि अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस जैसे देश भारत जैसे देशो से तकनीक के क्षेत्र में आगे, काफी आगे निकल गए। जूरी मंडल ने वहां के छोटे-मझौले कारोबारियों की जज-पुलिस-नेताओं के भ्रष्टाचार से रक्षा की और वे तकनिकी रूप से उन्नत विशालकाय बहुराष्ट्रीय कम्पनियां खड़ी कर पाए !!
.
—————
.
खंड 3 ; पेड मीडिया का एजेंडा आगे बढ़ाने वाले लोगो को चिन्हित करना :
.
अपने ताकतवर हथियारों का इस्तेमाल करके वे पेड मीडिया पर कंट्रोल लेते है और फिर पेड मीडिया की सहायता से नेता खड़े करते है। नागरिक एवं कार्यकर्ता इसे देख न सके इसके लिए वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करते है। जो नेता उनके एजेंडे के खिलाफ जाता है उसका प्लग निकाल दिया जाता है, और नया नेता प्लांट कर दिया जाता है।
.
आप पिछले 20 वर्षो का अवलोकन करें तो देखेंगे कि तमाम सत्ता परिवर्तनों के बावजूद गाड़ी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है, और आगे भी गाड़ी इसी दिशा में जायेगी। पेड मीडिया में जितने भी चेहरे आप देखते है, वे पेड मीडिया के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करते है। जो व्यक्ति या नेता या संस्था या पार्टी या बुद्धिजीवी ऊपर दिए गए एजेंडे के किसी भी बिंदु के खिलाफ जायेगा उसे मुख्य धारा के पेड मीडिया में आप फिर नहीं देखेंगे।
.
बहरहाल, पेड मीडिया की भारत पर पकड़
Ghanshyam Patel
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
કુદરત નુ અનમોલ સર્જન ,
એટલે ……….
મા ,
બહેન ,
દિકરી ,
ભાર્યા ,
સખી ,
માસી ,
દાદી ,
મામી ,
કાકી ,
ફોઈ ,
શિક્ષિકા ……….
આવા , તો કેટલાય રુપ ને સજાવતી...સંભારતી
સ્નેહ ,
પ્રેમ ,
લાગણી ,
સહનશીલતા ,
લજજા ,
સહિષણુતા ,
ગમતુ છોડી દેવાની ભાવના
અને વખત આવે ,
માં કાલીકા નુ રુપ ધરવાની શકિત ધરાવનારી અસંખ્ય મેધધનુષી રંગો નુ મિશ્રણ અને પ્રભુ ની ઉત્તમ રચના એટલે જ ,
એક માત્ર
સ્ત્રી ____સન્નારી .
જગતની તમામ નારીઓને હૃદયથી ,
🙏🏻 HAPPY WOMEN'S DAY 🙏🏻
yeash shah
How to Interpret Tarot Cards? (For Beginners)
-------------------
Each Tarot Card, Represents 5 Elements.
----------------------
(1) Numbers
(2) Colour
(3) Symbol
(4) Picture
(5) Entire Story or Theme of the card.
There are Two segments of 78 tarot Cards
(1)Major Arcana
(2) Minor Arcana
Major Cards :
---------------
These 22 Cards From ""The Fool"" to ""The World "" Represents the Major Secrets of life, Big Events, Important Insights. It Represents The important Persons in our life.
Minor Cards
--------------
There are 4 types of Minor Cards
(1) Swards ( Thoughts)
(2) Cups
( Emotions)
(3) Wands
(Actions)
(4) Pantacles
(Prosperity)
There are in total 56 Minor Cards.
What 5 elements of Cards Represents
(1) Numbers -
-------------
Number Represents The life order. Also Connected With Numerology and Planets.
(2) Colour - Colours like Yellow, Red, Grey ,Blue Represents Mood and the Temperament of cards.
(3) Symbols - Symbols like Infinity, Wheel, Books Angels tells about The Hidden Knowledge or philosophy of Life. It Reveals Hidden msgs also.
(4) Picture - Picture Represents The Core State or Condition of Life. Like 5 of Cups Represents sadness or disappointments
(5) Entire Story or Theme - The sum of all 4 Elements Above , In total Can give Deeper Insights about any Questions.
#Apart from this Basic Readings
You can think about the Phycological And Spiritual Meanings of the card driven and can give Guidence according to the Context of the question asked by the Client.
Saroj Prajapati
ह्रदय में ममता का सागर
आंखों में अंगार
मैं ही कष्टनिवारणी
मैं ही काली का अवतार ।।
@sarojप्रजापति
🌸..महिला दिवस विशेष ..🌸
- Saroj Prajapati
Bhatt Bhavin
इश्क था नहीं........ભટ્ટસાહેબ.
इश्क था नहीं तो जताया क्यूं,
टूटे दिल को फिर सजाया क्यूं।
जो वादे करके निभाने नहीं थे,
तो फिर वादों को बनाया क्यूं।
रात को बात करना अच्छा लगा,
तो फिर सपनो को ठुकराया क्यूं।
बोला था साथमे चलेंगे साथ-साथ,
ये सफर में अकेले तरसोदा क्यूं।
मालूम था कि साथ चलना नहीं है,
" साहेब " फिर सपनो को सिंचोया क्यूं।
sahitya
प्रेम!!
हमेशा जिज्ञासा थी इस भाव को लेकर....
सोचा करती थी...
आखि़र कितना महत्व है इस भाव का?
क्यों ईश्वर ने भी चुना इसे?
वियोग और कष्ट के मूल्य पर भी।।
कुछ तो होगा ना?
हासिल तो होता ही होगा?
तभी तो यह जग पूजता है...
उन प्रेम के प्रतिरूप को।।
हर भाव से सर्वोपरि होगा ना यह भाव?
शायद?
या निश्चित ही!!
तभी तो जग ढूंढता है....
इस 'संसार-सागर' में प्रेम की एक 'बूंद'...
मैंने जितना सुना...
उतना अधिक जानना चाहा।
जितना पढ़ा...
उतना ही अधिक जानना चाहा।।
मगर फिर एक दिन विराम लगा....
सुना...
पहले एक से....
फिर किसी और दिन किसी और से....
"प्रेम करने वाली लड़कियां 'अच्छी' नहीं होती"
सच में??
'प्रेम' करने वाली लड़कियां 'अच्छी' नहीं होती?
Tr. Mrs. Snehal Jani
જે ઘરમાં સ્ત્રીઓને યોગ્ય સન્માન મળે છે, એ ઘરની સ્ત્રીઓને બહારથી મળતાં સન્માનની કોઈ લાલસા હોતી નથી. અને જો આ સ્ત્રીઓની કોઈ વિશેષ ઉપલબ્ધિ માટે કોઈ સંસ્થા દ્વારા સન્માન કરવામાં આવે તો એમાં એનાં પરિવારનો સંપૂર્ણ સહયોગ મળતો હોય છે.
આ મંચની તમામ મહિલાઓને 'આંતરરાષ્ટ્રીય મહિલા દિન'ની શુભેચ્છાઓ💐
Raju kumar Chaudhary
🎵 गीत: “आमाको सपना अब पूरा हुँदैछ”
Verse 1
सानो झुपडीको ढोकाबाट
टाढा आकाश हेर्दै
आमाले एक दिन भनिन्
“देश कहिले उज्यालो हुन्छ?”
भोकले सपना चुँडिने
दिनहरू धेरै देख्यौँ
तर मनको विश्वास
कहिल्यै हामीले छोडेनौँ।
Pre-Chorus
अन्धकार लामो भए पनि
बिहान अवश्य आउँछ
आमाले रोपेको आशा
आज फूल बनेर फुल्छ।
Chorus
आमा, तिम्रो सपना
अब पूरा हुँदैछ
हामी युवाको आवाज
आकाशमा गुन्जिँदैछ।
डरका सबै साङ्ला
आज टुट्दैछन्
नयाँ नेपालको बिहान
अब उदाउँदैछ।
Verse 2
सडकहरूमा युवाहरू
आँधी बनेर उठेका
अन्यायको अगाडि
अब हामी नझुकेका।
भित्ताभरि लेखिएका
क्रान्तिका ती शब्द
नयाँ इतिहासको
बन्दैछन् आज अध्याय।
Pre-Chorus
आमाको आँसुहरू
आज शक्तिमा बदलियो
सपना देख्ने आँखा
आज उज्यालोमा बदलियो।
Chorus
आमा, तिम्रो सपना
अब पूरा हुँदैछ
हामी युवाको आवाज
आकाशमा गुन्जिँदैछ।
डरका सबै साङ्ला
आज टुट्दैछन्
नयाँ नेपालको बिहान
अब उदाउँदैछ।
Bridge
हामी नै भविष्य हौँ
हामी नै उज्यालो
तिम्रो विश्वासको बाटो
अब बन्यो हाम्रो बाटो।
Final Chorus
आमा, तिम्रो सपना
अब पूरा हुँदैछ
नयाँ नेपालको सूर्योदय
आज देखिँदैछ।
तिमी मुस्कुराऊ आमा
समय बदलिँदैछ
हामी उठेका छौँ
र तिम्रो सपना
अब पूरा हुँदैछ… 🌅
video link
https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
Sonam Brijwasi
radhe shyam guys...
kaise ho sab
Alok Mishra
जो ये राहें बोलती राज़ खोलती ।
हर राहगीर को रोज तोलती ।
हो जाता कहर इस जमानें में
जो राहें भी अपनी रज़ा बोलती ।
- Alok Mishra
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
“પરીવર્તન કદી કષ્ટદાયક નથી હોતું ,
કષ્ટદાયક તો “પરીવર્તન“લાવવાની પ્રક્રિયા હોય છે...!!
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
jighnasa solanki
દરેકને વાંચવુ ગમે,
હું એવુ રસપ્રદ પુસ્તક છુ.
છતા મને વાંચવુ સરળ નથી.
કારણ કે
હું શબ્દોથી નહી,
લાગણીઓથી આલેખાયેલુ પુસ્તક છુ.
💐HAPPY WOMAN'S DAY 💐
kajal jha
नज़र ने नज़रों से मिला तो यह ख्याल आया,
ये मेरा दिल कहाँ से कहाँ आ गया।
एक पल में अजनबी से रिश्ता बन गया,
और मुझे खुद से ही प्यार हो गया। ❤️
- kajal jha
Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status