Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Shailesh Joshi

ગમતું વ્યક્તિ શોધવાની અને એની સાથે સંબંધો મજબૂત બનાવવા માટેની સરળ રીત જુઓ આ ફેસબૂક motivation રીલ https://www.facebook.com/share/r/183wgLJQGF/

Anjali Singh

"तू मिले तो दिन बन जाए, ना मिले तो भी तेरा ही ख्याल आए… अजीब सा रिश्ता है तुझसे मेरा, दूर रहकर भी तू हर पल पास नजर आए…" 💫

akhil kumar

मैंने शिव को देखा 🙏 ऊं नम शिवाय

Mamta Trivedi

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं कविता का शीर्षक है 🌹 https://youtube.com/watch?v=0sQN7u_H2Jc&si=P4SjsEr6xGejLJ_s

Saliil Upadhyay

मैं अपनी बराबरी किसी से नहीं करता.... जैसा भी हुं बेहतरीन हुं। अकेले खड़े होने का साहस रखता हुं क्युकी मुझे पता है दुनिया ज्ञान देती है साथ नहीं...। खुश रहो और मस्त रहो🌹

Archana Singh

" रिश्ते कभी बोझ नहीं होते , पर अगर संभालकर ना रखा जाए तो ... बोझिल जरूर हो जाते हैं " । अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Rinal Patel

શ્રી હરિ એ જેને જન્મથી તેજસ્વી બનાવેલ હોય તેના તેજને કોઈ સ્પર્શ કરશે તો એ તો બળી જશે ને!!! આ સંસારનો નિયમ છે. અંતરની દ્રષ્ટિએ. -Rinall.

Dada Bhagwan

On Mahavir Bhagwan’s Janma Kalyanak, may we remain in equanimity and progress towards Moksha. On the auspicious occasion of Lord Mahavir Swami Janma Kalyanak, let us read about His life stories here: https://dbf.adalaj.org/Ao4GIP2E #lordmahavira #mahavirjayanti #mahavirjanmakalyanak #DadaBhagwanFoundation #mahavirswami

Bhavesh Tejani

અડક્યા વગરનો આભડછેટ લાગ્યો છે એને, મને જોઈને રસ્તો બદલે છે ઈ...!

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास खुशियो की तलाश में ताउम्र फिरता इधर उधर l जिस तरफ भी ध्यान गया वहां तह गया आदमी ll सदा ही मुस्कुराने हुए अपनों लोगों की ख़ातिर l दिल से लाचार हो भावनाओ में बह गया आदमी ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Komal Mehta

શું મળ્યું? કે શોધ્યું કઈ નથી 🙂‍↔️ સમય સાથે આગળ વધતા વધતા એક વાત સમજાણી……. કઈ કદી મારું હતું નહીં ……. સનાતન સત્ય સમજાયું આખરે કે…… છોડી દે સમજવાની અને સમજવાની મથામણ… બસ વ્યસ્ત રે તું જીવન માં - Komal Mehta

known

રહી ગયેલી શ્વાસોનો થોડો એહતરામ કરી લઈએ, જીવ્યા એકલા હવે સાથ થોડું જીવન જીવી લઈએ. દિવસો તો વીત્યા ફરજમાં, રાતો ગઈ ચિંતા સાથે, બે પળ હસી લઈએ, થોડું દિલ ભીંજવી લઈએ. કેટલું સંગ્રહ્યું દુઃખને આજીવન સ્મિતને રાખ્યું ઉધાર, આજ ભાર ઉતારીને આંખોમાં સચ્ચાઈ ભરી લઈએ. હજી મોડું નથી કહો, જે કદી કહેવામાં રહી ગયું, અહંકારને એક બાજુ મૂકી માફી પણ માંગી લઈએ. જો કાલ ન આવે તો અફસોસ ન રહે મનના ખૂણે, આજની આ સાંજને યાદોની જેમ સજીવી લઈએ. - known

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

रखो सुरक्षित वस्तु को, ले जाएँगे चोर। पर रक्षित जो देव से, क्या कर सकें छिछोर। दोहा --४६६ (नैश के दोहे से उद्धृत) ------गणेश तिवारी 'नैश'

Sonu Kumar

बाबा राम रहीम का सच क्या है? . श्री गुरमीत राम रहीम जी पर लगाए गए मुकदमें की तथ्यात्मक समय सारणी : . (i) सन 2002 में वाजपेयी को दो गुमनाम खत प्राप्त हुए !! खतो के बारे में यह दावा किया गया था कि ये पत्र गुरु राम रहीम की साध्वियों द्वारा लिखे गए थे !! और इन खतो में यह दावा किया गया था कि गुरु श्री राम रहीम जी ने 1999 में इन साध्वियों का बलात्कार किया था !! ( मतलब बलात्कार के 2 से 3 वर्ष बाद गुमनाम खत भेजे गए ) . (ii) घटना के 3 साल बाद भेजे गए इन गुमनाम खतो के आधार पर वाजपेयी ने सी बी आई जांच के आदेश जारी किये !! और बहाना यह था कि - हाई कोर्ट के जज ने वाजपेयी को सी बी आई जांच करवाने के आदेश दिए थे !!! . (iii) सी बी आई के आईपीएस अधिकारी ने कुछ 20 साध्वियों से बेहद गहन ,संदिग्धार्थक, अनेकार्थक एवं घुमावदार प्रश्न किये। इन बयानों को Crpc 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने रिकोर्ड किया गया। और पूछे गए इन अनेकार्थक प्रश्नों के जवाबो को "सबूत" के तौर पर मान लिया गया !!! . (iv) कथित साध्वियां लगातार कह रही थी कि - 'कोई अपराध नहीं हुआ था ', किन्तु उनके बयानों का आशय बलात्कार निकाला गया। उनके द्वारा दिए गए पहले बयानों को सबूत माना गया और बाद के कथ्यों को अस्वीकार कर दिया गया !! . तब सी बी आई वाजपेयी के नियंत्रण में काम कर रही थी। यह अंदाजा लगाने की बात है कि किसने क्या किया होगा और कैसे किया होगा। तो इस मामले में आप अपना अनुमान लगाने के लिए स्वतंत्र है। और 18 साल बाद इस मुकदमे के फैसले में गुरमीत राम रहीम जी को दोषी करार देकर जेल भेज दिया गया !!! . दरअसल पूरा देश एक विशाल सर्कस के मंच में तब्दील हो चुका है। और किसी व्यक्ति को लग सकता है कि - तो इससे क्या फर्क पड़ता है। असल में समस्या यह है कि कई देशो में इस तमाशे की डोज़ काफी कम है। और जिस देश में यह तमाशा कम है वह देश अच्छी व्यवस्थाओ के कारण तेजी से मजबूत होगा और अंततोगत्वा या तो हम पर नियंत्रण हासिल कर लेगा या हमें नष्ट कर देगा। और उस समय यह कॉमेडी हमारी ट्रेजिडी बन जायेगी। . ============ . डेरा सच्चा सौदा प्रकरण ; समस्या एवं समाधान . अध्याय . (1) समस्या यह है कि आबादी के एक बड़े वर्ग का मानना है कि राम रहीम जी के साथ न्याय नहीं किया गया है। . (2) वजहें, जो इस बात की पुष्टि करती है कि भारत के जज भ्रष्ट है . (3) तर्क ; जिनसे यह स्थापित किया जाता है कि भारत के जज बेहद ईमानदार एवं निष्पक्ष है . (4) डेरा और राजनीति . (5) राम रहीम जी के मुकदमे से सम्बंधित कुछ तथ्य जो अदालत के फैसले को संदिग्ध बनाते है . (6) उद्देश्य डेरे के इन्फ्रास्त्रक्चर को गिराना था ताकि मिशनरीज का रास्ता साफ़ हो . (7) समाधान . (8) संत और संतत्व की परिभाषा पर मेरा प्रतिभाव . ————— . टिप्पणी : इस जवाब में कुल 8 बिंदु है। 7 बिन्दुओ में मैंने इस प्रकरण से जुडी हुयी विभिन्न सूचनाएं, तथ्य एवं इनके आधार पर मेरा निष्कर्ष रखा है। इस निष्कर्ष या विश्लेषण को आप मेरा दृष्टिकोण भी कह सकते है। यदि मेरा दृष्टिकोण पूर्वाग्रह से ग्रसित है तो मैं इस बात से इंकार नहीं करता कि मैं पूर्वाग्रह से मुक्त होकर लिखता हूँ। जवाब में एक बिंदु समाधान का भी है, और यह बिंदु महत्वपूर्ण है। पाठको से आग्रह है कि मेरे दृष्टिकोण की तुलना में समाधान वाले हिस्से को ज्यादा भार दें। . ————— . (1) समस्या यह है कि लाखों डेरा समर्थको एवं लाखों स्वतंत्र कार्यकर्ताओ का मानना है कि श्री राम रहीम जी के मामले में अदालत द्वारा दिया गया फैसला संदिग्ध है !! . हो सकता है श्री राम रहीम जी दोषी हो, और ये भी हो सकता है कि वे निर्दोष हो। किन्तु इतना तो तय है कि देश की आबादी का एक वर्ग इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। इसी तरह का असंतोष संत श्री आसाराम जी बापू के मामले में भी देखने को मिला था। आसाराम जी के मामले में भी देश की आबादी का एक वर्ग यह मानता था एवं आज भी मानता है उनके साथ न्याय नहीं किया गया। संत रामपाल जी, जयेंद्र सरस्वती जी एवं नित्यानंद जी से जुड़े हुए मामलो में भी देश की एक बड़ी आबादी की यही धारणा थी। . इस तरह यहाँ 2 वर्ग बन जाते है : पहला वर्ग वह है जो यह मानता है कि श्री राम रहीम जी के साथ कोई अन्याय नहीं हुआ है और वे दोषी है, व उनके दोषी होने का सबसे बड़ा सबूत यह है कि अदालत ने उन्हें दोषी ठहरा दिया है !! अदालत ने उन्हें किस आधार पर दोषी ठहराया है और क्या सबूत बरामद किये गए है, इससे उन्हें कोई लेना देना नहीं है !! जबकि दुसरे वर्ग का मानना है कि, हो सकता है वे दोषी हो या हो सकता है कि दोषी नहीं भी हो। इस वर्ग को अदालत के फैसले पर विश्वास नहीं है, तथा इस अविश्वास की "पर्याप्त एवं वाजिब" वजहें मौजूद है। . टिप्पणी - इस लेख में उन नागरिको के लिए कुछ नहीं है जो यह मानते है कि 2000 के नोटों में चिप लगी हुयी है, और इसका सबसे बड़ा सबूत यह है कि टीवी-अख़बार पर ऐसा बताया गया था, और वे यह भी मानते है कि भारत के जज चाहे पैदाइशी ईमानदार न हो किन्तु नियुक्ति मिलते ही एक प्रकार की जादुई प्रक्रिया द्वारा वे ईमानदार हो जाते है !!! यह लेख सिर्फ उन लोगो के काम का है जो जाया तौर पर न्यायमूर्ति पूजक नहीं है और साथ ही यह भी मानते है कि 2000 के नोटों में ऐसी कोई चिप नहीं है। . ———————- . (2) वजहें , जो पुष्टि करती है कि भारत के जज भ्रष्ट है : . एक पोचा तर्क यह है कि इन सभी संतो की भक्ति के कारण इनके भक्त अदालत पर अंगुली उठा रहे है। यह एक गलत तर्क है। आप संतो और उनके भक्तो की बात को जाने दीजिये। सलमान खान का उदाहरण लीजिये। जब उन्हें छोड़ दिया गया था तब भी देश की आबादी का एक बड़ा वर्ग इस तरह की आवाजे उठा रहा था कि हमारी अदालते भ्रष्ट है। तो यह खुली हुयी बात है कि पेड मीडिया द्वारा की जाने वाली तमाम पॉलीस के बावजूद भारत का एक वर्ग यह मानता है कि हमारी जज भ्रष्ट है !! . क्यों कार्यकर्ताओ के एक वर्ग का मानना है कि हमारी अदालतें भ्रष्ट है ? . क्योंकि ऐसी कोई वजह ही नहीं है जो इस बात का इत्मीनान दिलाए कि भारत की अदालतें भ्रष्ट नहीं है। लेकिन ऐसी ढेर सारी वजहें है जो इस बात की पुष्टि करती है कि भारत के जज भ्रष्ट न हो ऐसा किसी भी तौर से संभव नहीं है। कुछ वजहें निचे दी गयी है : . 2.1 साक्षात्कार : भारत में जज बनने के लिए साक्षात्कार से गुजरना पड़ता है। साक्षात्कार में अंक देना जजों के हाथ में होता है। तो भाई भतीजावाद एवं घूस (सेटिंग) के अवसर यहीं से बन जाते है। इस तरह नियुक्ति से ही भ्रष्टाचार शुरू हो जाता है। जज एवं नेता साक्षात्कार की प्रक्रिया को हटाना नहीं चाहते। यदि साक्षात्कार को हटा दिया जाए तो जजों के भ्रष्ट होने की एक वजह समाप्त हो जायेगी। लेकिन फिलहाल साक्षात्कार है , अत: भ्रष्टाचार है। उल्लेखनीय है कि चीन में जजों की नियुक्ति में साक्षात्कार नहीं है। सिर्फ लिखित परीक्षा के माध्यम से ही जजों की नियुक्ति की जाती है। इस वजह से चीन के जज भारतीय जजों की तुलना में कम भ्रष्ट है। समाधान - जजों की नियुक्ति प्रक्रिया से साक्षात्कार को हटाया जाना चाहिए। . 2.2. पदोन्नति एवं स्थानान्तरण : जजों की नियुक्ति, स्थानांतरण एवं पदोन्नतियां वरिष्ठ जजों के हाथ में होती है। शेषन जज हाई कोर्ट के एवं हाई कोर्ट के जज सुप्रीम कोर्ट के चंगुल में है। यदि हाई कोर्ट का जज भ्रष्ट है तो वह शेषन कोर्ट के सभी जजों पर मनचाहे फैसले करवाने के लिए चाबुक चला सकता है। यदि सुप्रीम कोर्ट के जज भ्र्ष्ट है तो वे पूरी न्यायपालिका को भ्रष्ट बना देते है। और सुप्रीम कोर्ट के जज पूरी तरह से निरंकुश है। . यदि सुप्रीम कोर्ट का जज कुर्सी पर रहते हुए घूस खा रहा है तो उसकी शिकायत कहाँ करेंगे आप ? . दरअसल शेषन कोर्ट, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के जजों ने अपनी एक टोली बना ली है। इनके फैसले में किसी का कोई दखल नहीं। जनता को तो भूल ही जाइए, सरकार तक का दखल नहीं !! जब किसी आदमी को यह पता हो कि उसे पकड़ने वाला कोई नहीं है, न ही कोई उससे सवाल पूछने वाला है, तो उसके भ्रष्ट होने की सम्भावना बढ़ जायेगी। यह निरंकुशता भ्रष्टाचार को जन्म देती है। . उल्लेखनीय है कि जापान में जजों को हर आम चुनाव में नागरिको के अनुमोदन से गुजरना पड़ता है। जब भी चुनाव होते है तो बेलेट पेपर के साथ एक अतिरिक्त प्रश्न रखा जाता है कि क्या आप इस जज को नौकरी से निकालना चाहते है या नहीं। इस तरह से नागरिको के पास विकल्प होता है कि वे भ्रष्ट एवं निकम्मे जज को खारिज कर सके। जज को भय रहता है कि भ्रष्टाचार करने पर जनता मुझे खारिज कर सकती है। इस वजह से उनके भ्रष्टाचार में कमी आती है। इसे रिटेंशन इलेक्शन या रिव्यू कहते है। किन्तु भारत के जज और नेता यह कतई नहीं चाहते कि नागरिको को जजों के काम काज पर टिप्पणी करने का अवसर दिया जाए। . अमेरिका में इससे भी बेहतर प्रणाली है। वहां नागरिक के पास जजों को किसी भी समय नौकरी से निकालने प्रक्रिया है। वहां के जज जानते है कि यदि वे भ्रष्टाचार करेंगे तो यह छिपेगा नहीं और जनता उन्हें नौकरी से निकाल देगी। इस तरह जनता द्वारा नौकरी से निकाले जाने का भय उन्हें कम भ्रष्ट बना देता है, और वे तमीज से पेश आते है। नागरिको द्वारा बहुमत का प्रयोग करके इस तरह नौकरी से निकालने की प्रक्रिया को वोट वापसी कहते है। समाधान - भारत में जजों को चुनने एवं नौकरी से निकालने का अधिकार आम नागरिको को दिया जाना चाहिए। इससे नागरिको का न्यायपालिका में दखल बढेगा और इस अंकुश से भ्रष्टाचार में कमी आएगी। . 2.3. पैसे लेकर सीधे नियुक्तियां : क्या आप जानते है कि, उच्च न्यायालयों में नियुक्ति के लिए अभ्यर्थी को लिखित परीक्षा से भी नहीं गुजरना होता है !! वरिष्ठ जज कोर्ट में प्रेक्टिस करने वाले किसी भी वकील को सीधे हाई कोर्ट में न्यायधीश के पद पर नियुक्ति दे सकते है !! एक तरह से यह नियम घूसखोरी को कानूनी करने के लिए बनाया गया है, जिसका परोक्ष अर्थ यह है कि – यदि आपके भाई भतीजे वरिष्ठ जज है , यदि आप एक वकील है , और यदि आपके पास घूस देने के लिए मोटी राशि है तो आप सीधे ही हाई कोर्ट के जज बन सकते है !! अनुमान किया जा सकता है कि इस ढंग से जो व्यक्ति जज बनेगा वह कितना भ्रष्ट होगा, और इस तरीके से जो जज किसी को जज बनाएंगे वे कितने ईमानदार होंगे !! समाधान - पसंदगी के आधार पर नियुक्ति देने की प्रक्रिया को ख़त्म किया जाना चाहिए। न्यायधीश जनता के बहुमत से अनुमोदित और यदि वे भ्रष्ट आचरण करते है तो उन्हें नौकरी से निकालने का अधिकार जिले / राज्य / देश के मतदाताओं के पास हो। . 2.4. मन मर्जी क़ानून बनाने की शक्ति : जब तक संसद दखल कर के इसे पलट न दे तब तक सुप्रीम कोर्ट एवं हाई कोर्ट की रुलिंग्स का प्रभाव कानूनों की तरह ही होता है। और, यदि संसद कोई क़ानून बनाती है तो सुप्रीम कोर्ट उसे अवैध भी घोषित कर सकती है। इस तरह कानूनों को वैध / अवैध घोषित करने और क़ानून / संविधान की व्याख्या का अधिकार जजों के पास है। . दूसरे शब्दों में, भारत में अंततोगत्वा जज ही यह तय करते है कि कौनसा क़ानून लागू होगा और कौनसा नहीं होगा। क्या संवैधानिक है और क्या असंवैधानिक है यह तय करने का अधिकार भी जजों के पास है !! और ख़ास बात यह है कि जजों पर नागरिको का कोई नियंत्रण नहीं है। समाधान - कानूनों एवं संविधान की व्याख्या का अधिकार आम नागरिको के पास होना चाहिए। इससे जनता यह निर्धारित कर सकेगी कि कौनसा क़ानून देश हित में है व कौनसा देश विरोधी। . 2.5. मामले को असीमित समय तक लटकाने की शक्ति : धीमी अदालती प्रकिया भ्रष्टाचार को जन्म देती है। जजों के पास किसी मामले को असीमित समय तक लटका कर रखने की शक्ति है। वे घूस खाकर किसी मुकदमें के फैसले को इच्छित समय तक टालते रह सकते है, तथा घूस मिलने पर किसी मामले में अति न्यायिक सक्रियता दिखा सकते है। भारत की अदालतों में 3 करोड़ मुकदमे लटके हुए है। इनमे कई नेता, अभिनेता, अधिकारी, उद्योगपति आदि शामिल है। वे इनके मामलों की सुनवाई धीमी गति से करते है ताकि लम्बे समय तक आरोपी जजों के पंजे में फंसा रहे। चीन के 2 लाख जजों के मुकाबले भारत में सिर्फ 18 हजार जज होने से अदालती प्रक्रिया धीमी है और इस वजह से जजों में भ्रष्टाचार है। समाधान - भारत को जजों की संख्या 20 हजार से बढ़ाकर 2 लाख करने की जरुरत है। . 2.6. अवमानना का क़ानून : जजों को कोई भ्रष्ट कह कर न पुकारे, इसके लिए जजों ने अवमानना का क़ानून बनाया है। यदि आप जज को भ्रष्ट कहेंगे तो जज आपको अदालत की अवमानना के आरोप में जेल पहुंचा देंगे। इस क़ानून के कारण जजों के भ्रष्टाचार की चर्चा नहीं हो पाती और इससे जज निशंक होकर भ्रष्टाचार कर पाते है। एक तरह से जजों ने इस तरह का क़ानून बनाकर पूरे देश को बाध्य कर दिया है कि वे जजों को ईमानदार एवं फ़रिश्ता माने !! और आपको अपने आस पास ऐसे लोग बहुतायत से मिलेंगे जो बिना किसी वजह से जजों को हरिश्चंद्र की औलाद मानकर चलते है। और इसकी उनके पास सिर्फ एक वजह है – उन्होंने यह अख़बार में पढ़ा हुआ होता है कि भारत के जज ईमानदार है !! समाधान - अवमानना के क़ानून को रद्द किया जाना चाहिए। . 2.7. विवेकाधिकार की असीम शक्ति : जजों का विवेकाधिकार भी भष्टाचार को बढ़ावा देता है। कानूनों को कितना भी विस्तृत रूप से लिखा जाये, तब भी कई बिन्दुओ को तय करने के लिए दंडाधिकारी को अपने विवेकाधिकार का इस्तेमाल करना होता है। यह विवेकाधिकार भारत के जजों को असीमित शक्ति प्रदान कर देता है। वे घूस खाकर अपने विवेकाधिकार का इस तरह से इस्तेमाल करते है, जिससे घूस देने वाले को लाभ पहुँचाया जा सके। एक मशहूर कथन है कि – क़ानून मोम के टुकड़े की तरह होते है, और इसकी व्याख्या करने वाला इसे मनचाहे सांचे में ढाल सकता है !! समाधान - विवेकाधिकार की शक्ति जजों की जगह नागरिको के ज्यूरी मंडल को दी जानी चाहिए। . तो ऊपर दिए गयी प्रशासनिक वजहें बताती है कि हमारी न्यायपालिका में ऐसी पर्याप्त व्यवस्थाएं है जो यह सिद्ध करती है कि ऐसी कोई वजह मौजूद नहीं है जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत के जज देश के अन्य अधिकारियो एवं नेताओ की तुलना में ज्यादा ईमानदार है। . बल्कि स्थिति इसके उलट है। दरअसल जजों की नियुक्ति-पदोन्नति की प्रणाली, विवेकाधिकार का प्रयोग एवं अवमानना का क़ानून उन्हें ज्यादा भ्रष्ट होने के ज्यादा सहज अवसर प्रदान करता है। और उन्हें नेताओं की तरह कभी जनता के प्रति जवाबदेहिता की प्रक्रिया से नही गुजरना पड़ता !! जीवन में कभी भी नही !! यही वजह है कि हमारी न्यायपालिका में भारी भ्रष्टाचार है। . 2.8. दूसरी तरफ सिर्फ दो वजहें है जिसकी वजह से यह बात स्थापित की जाती है कि भारत के जज बेहद ईमानदार एवं निष्पक्ष है : अवमानना के क़ानून का भय : यदि आप जजों पर अंगुली उठाएंगे तो वे आपको अवमानना का दोषी ठहरा कर जेल में डाल देंगे !! इस वजह से भारत के सभी समझदार एवं बड़े आदमी निरंतर यह दोहराते रहते है कि हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है !!! दूसरी बड़ी वजह पेड मिडिया है : धनिक वर्ग एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत में जज सिस्टम को जारी रखना चाहते है, ताकि वे जजों को घूस देकर मनचाहे फैसले निकलवा सके। इस तरह धनिक वर्ग एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक अपने पक्ष में फैसले लेने के लिए जजों के भ्रष्टाचार का लाभ उठाते है। अत: वे जजों की छवि बनाये रखने के लिए पेड मिडिया को भुगतान करते है। पेड मिडिया निरंतर इस तरह की धारणा खड़ी करता है जिससे नागरिको में यह भ्रम फैले कि भारत के माननीय जज बेहद ईमानदार है। . ——————- . (3) डेरा और राजनीति : . यह एक बहुत ही गलत धारणा है कि धर्म में राजनीति का एवं राजनीति में धर्म का दखल नहीं होना चाहिए। दरअसल धर्म राजनीति से अलग किया ही नही जा सकता। . वजह ? . कोई भी धार्मिक संस्था या धार्मिक गुरु लोगो से जुड़ा होता है तथा उसकी गतिविधियों में धार्मिक जमाव होता है। जहाँ भी लोगो का जमाव होगा वहां दखल करना राजनीति की मजबूरी है। राजनेता ऐसे सभी व्यक्तियों का पीछा करते है जिसके पास लोगो के किसी समूह को प्रभावित करने की क्षमता हो। . धार्मिक संस्थाओ के पास यह क्षमता काफी बढ़ी हुयी होती है। अत: राजनेता चाहते है कि अमुक गुरु या संस्था अपने श्रद्धालुओं को उनके पक्ष में वोट करने के लिए प्रेरित करे। कोई गुरु या संस्था राजनीति से अलग रहना चाहे तो भी राजनेता उनका पीछा करते है। धार्मिक गुरुओ के पास इनसे बचने का कोई विकल्प नहीं है। . और कभी कभी इसका उल्टा भी देखने में आता है। सभी धार्मिक संस्थाओ को अपने विस्तार के लिए सरकार से मधुर सम्बन्ध बनाये रखना जरुरी होता है। इसीलिए वे बढ़त बनाये रखने और स्वयं को सुरक्षित करने के लिए सत्ता के साथ गठजोड़ बनाते है। कुल मिलाकर धार्मिक संस्थाओ / गुरुओ के पास लोगो का जमाव है और ये लोग वोट करते है। राजनीति में प्रत्येक व्यक्ति एक वोट है। तो धर्म में राजनीति स्थायी तत्व है। इससे बचा नहीं जा सकता। . जो लोग इस तरह का ज्ञान बाँटते फिरते है कि धर्म का राजनीती में दखल नहीं होना चाहिए वे भी यह बात अच्छी तरह से जानते है कि पूरी धर्म का राजनीती में दखल अनिवार्य तत्व है, किन्तु वे अपने निहित स्वार्थो के लिए इस तरह के भ्रम फैलाते है। . मौजूदा स्थिति में राष्ट्रिय स्वयं सेवक संघ, कांग्रेस, अकाली और आम आदमी पार्टी में से कोई भी राजनैतिक दल डेरा के समर्थन में नहीं था / है। अकाली स्थानीय राजनीति और धार्मिक वजहों से तथा बीजेपी=संघ राष्ट्रीय राजनीति की वजह से डेरे को गिराना चाहते थे !! अपनी राजनैतिक वजहों के चलते कोंग्रेस एवं आम आदमी पार्टी की रुचि भी डेरे को बचाने में नहीं थी। आरएसएस हिन्दू धर्म के अनुयायियों को अपने नीचे "एक" करने के मिशन पर है। संघ के अनुसार विभिन्न सम्प्रदाय एवं गुरु वगैरह हिन्दुओ को विभाजित कर रहे है, और इसकी वजह से हिन्दुओ को एक करने का उनका मिशन पिछड़ जाता है !! अत: संघ पिछले 90 वर्ष से विभिन्न सम्प्रदायों एवं गुरुओ को अपने प्रतिस्पर्धी के रूप में देखता है। गोल्डन टेम्पल पर अपना प्रभाव रखने वाले अकाली भी डेरे को अपने प्रतिस्पर्धी के रूप में देखते है। कोंग्रेस को डेरे ने एक लम्बे समय तक राजनैतिक समर्थन दिया था, किन्तु हाल ही में डेरे के बीजेपी की और चले जाने से कोंग्रेस को भी डेरे के गिर जाने से कोई दिक्कत नहीं है। इसके अलावा मिशनरीज द्वारा समर्थित तर्क शील सोसाइटी जैसे संगठन भी डेरे के खिलाफ है। . बहरहाल, विभिन्न दलों और संगठनो के अपने हित और उनकी राजनीति है, और इसके कई आयाम हो सकते है। . इसमें सबसे महत्त्वपूर्ण बिंदु यह है कि मिशनरीज एवं बहुराष्ट्रीय कम्पनियां डेरे को गिराना चाहती थी। अत: इस बात से कोई फर्क नहीं आता कि संघ / कोंग्रेस / अकाली आदि क्या चाहते थे। भारत में एफडीआई बढ़ने से मिशनरीज की ताकत इतनी बढ़ चुकी है कि बीजेपी / कोंग्रेस / अकाली / आम आदमी पार्टी आदि कोई भी दल मिशनरीज के खिलाफ नहीं जा सकते। अत: इस प्रकरण में संघ / कोंग्रेस / अकाली एवं आम आदमी पार्टी की भूमिका को ज्यादा गंभीरता से लेने से हम मूल विषय से भटक जायेंगे। . यहाँ हमें इस बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि परदे के पीछे जो भी सियासत रही हो , लेकिन निष्पादन जज द्वारा ही किया जाता है। . आशय यह कि किसी व्यक्ति को जेल में भेजने की शक्ति सिर्फ जज के पास ही होती है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी इस शक्ति से वंचित है। तो जब किसी व्यक्ति को फंसाना होता है तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक हमेशा जज का ही इस्तेमाल करते है। जब तक जज नहीं चाहेगा तब तक किसी भी व्यक्ति को किसी तरह से जेल में नहीं पहुचायां सकता। और यदि जज किसी व्यक्ति को जेल भेजना चाहता है तो उसे फिर कोई बचा भी नहीं सकेगा। ऊपर उन कारणों को बताया गया है जो इस बात की पुष्टि करते है कि भारत की अदालतें उतनी ही भ्रष्ट है जितने कि अन्य विभाग। . ———————— . (5) राम रहीम जी के मुकदमे से सम्बंधित कुछ तथ्य जो अदालत के फैसले को संदिग्ध बनाते है : . सन 2002 में वाजपेयी को दो गुमनाम खत प्राप्त हुए ! खतो के बारे में यह दावा किया गया था कि ये पत्र गुरु राम रहीम की साध्वियों द्वारा लिखे गए थे !! और इन खतो में यह भी दावा किया गया था कि गुरु श्री राम रहीम जी ने 1999 में इन साध्वियों का बलात्कार किया था !! ( मतलब बलात्कार के 2 से 3 वर्ष बाद गुमनाम खत भेजे गए ) !!! घटना के 3 साल बाद यानी 2002 में इन गुमनाम खतो के आधार पर वाजपेयी ने CBI जांच के आदेश जारी किये !!! इन पत्रों में यह नहीं लिखा गया था कि ये पत्र किसने भेजे है। अत: CBI के आईपीएस अधिकारीयों ने कुछ 20 साध्वियों से बेहद गहन ,संदिग्धार्थक, अनेकार्थक एवं घुमावदार प्रश्न किये। इन बयानों को Crpc-164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने रिकोर्ड किया गया। और पूछे गए इन अनेकार्थक प्रश्नों के जवाबो को आगे की जांच के लिए सबूत के तौर पर मान लिया गया !!! 2005 तक CBI ने पीड़ीताओ से कई बार पूछताछ की। किन्तु हर बार पीड़ीताओ ने बयान दिया कि हमारे साथ कोई बलात्कार नहीं हुआ !! CBI का कहना है कि उन्होंने कथित पीड़ीताओ को 2002 में ही खोज निकाला था !! किन्तु सीबीआई ने उनके बयान 2006 में दर्ज किये, और 2006 में ही चालान पेश किया। CBI ने दोनों कथित पीड़ीताओ के बयान 2006 में फिर दर्ज किये, और इनमे यह कहा गया कि बलात्कार किया गया था !! राम रहीम जी के वकील को दोनों पीड़ीताओ के बयानों की कॉपी नहीं दी गयी !! राम रहीम जी के वकील को पीड़ीताओ से क्रोस क्वेशचन करने का मौका नहीं दिया गया !! पीड़ीताओ ने अपने बयान बदलने की अनुमति मांगी किन्तु उन्हें बयान बदलने की अनुमति नहीं दी गयी !! . तो तकनिकी रूप से मुकदमे का सार यह है कि – 3 साल बाद प्राप्त हुए गुमनाम पत्रों के आधार पर सीबीआई जांच के आदेश किये गए !! 6 साल बाद सीबीआई ने ख़त लिखने वालो को खोज निकाला और उनके बयान दर्ज किये !! उन्होंने 4 वर्ष तक यह कहा कि कोई बलात्कार नही हुआ था , किन्तु सीबीआई ने इसे नहीं माना !! 2006 में सीबीआई ने दो साध्वियों के बयान दर्ज किये जिनमे कहा गया कि, बलात्कार हुआ था !! वकील को इन पीडिताओ से क्रोस क्वेश्चन करने की अनुमति नहीं दी गयी !! पीडीताओ ने अपने बयान बदलने की अनुमति मांगी, किन्तु उन्हें अनुमति नहीं दी गयी !! 11 साल पहले लिए गए इन बयानों के आधार पर जज ने घटना के 18 साल बाद राम रहीम जी को जेल भेज दिया !!! . ध्यान देने वाली बात यह है कि, इस मुकदमे के सम्बन्ध में कोई भी "भौतिक सबूत" बरामद नहीं किये गए। सिर्फ बयानों को आधार पर फैसला दिया गया। जज को यह फैसला करना था कि कौन सच बोल रहा था और कौन झूठ। इस स्थिति में अभियुक्त एवं पीडिताओ का नारको टेस्ट लेकर पता किया जा सकता है कि किसका बयान सच था। किन्तु नारको टेस्ट नहीं लिया गया और जज ने लड़कियों के बयानों को सच मानने का फैसला किया !!! . सुप्रीम कोर्ट की यह रूलिंग कि — लड़की का बयान हर हाल में सच माना जाएगा और लड़की को अपना बयान बदलने की इजाजत नहीं होगी मुख्य वजह बनी जिसके कारण सरकार के नियन्त्रण में काम करने वाले CBI के आईपीएस अधिकारी एवं जज श्री राम रहीम जी को जेल में पहुंचा सके। सुप्रीम कोर्ट ने यह रूलिंग रसूखदार लोगो को पंजे में लेने के लिए की है, और लगभग सभी हिन्दू संतो को गिराने के लिए इस रूलिंग का इस्तेमाल किया गया है, और आगे भी इसी रूलिंग का इस्तेमाल किया जाएगा। . इस रूलिंग का एक सबसे बड़ा साइड इफेक्ट यह आया कि अवसरवादी काम काजी महिलाओं ने इसका इस्तेमाल सहकर्मी पुरुष साथियों को ब्लेकमेल करने में शुरू किया और ज्यादातर पुरुष मालिको ने महिलाओं से दूरी बनाने के लिए उन्हें नियुक्तियां देना बंद कर दिया !! . पिछले 3 साल में मेरे खुद के सामने ऐसे दर्जन भर वाकये गुजर चुके है जब महिलाओं को नौकरियां गंवानी पड़ी है। और विडम्बना यह है कि उन महिलाओं / लडकियों को इस बात की जानकारी नहीं है कि इस रूलिंग की वजह से वे नौकरियां गँवा रही है !! . लिंक - Victim's testimony is enough for conviction for rape: court . CBI के अधिकारियों ने ये बयान मजिस्ट्रेट के सामने कथित Crpc की धारा 164 के तहत दर्ज किये थे !! अब यदि बयान देने वाली लड़की अपने बयान को बदलती तो उसे झूठा बयान दर्ज करवाने के मुकदमे का सामना करना पड़ता। इस तरह उन्हें कोर्ट में श्री गुरु राम रहीम जी के खिलाफ फिर वही बयान देने के लिए बाध्य किया गया !! . और फिर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का इस्तेमाल किया गया कि - लड़की के बयान को अंतिम सत्य एवं अकाट्य सबूत माना जाएगा। . और फिर हमारे पास ऐसे शिक्षित एवं जागरूक लोगो का जमघट है जो इस प्रक्रिया को क़ानून का शासन कह के संबोधित कर रहे है !!! . इस सम्बन्ध में डेरा प्रमुख की पैरवी करने वाले वकील का साक्षात्कार निचे दिए लिंक पर देखें। इस साक्षात्कार में कहे गए तथ्यों को आप विश्वसनीय मान सकते है, क्योंकि वकील ने जो भी तथ्य रखे है वे रिकॉर्ड पर है, और गलत बयानी पर जज वकील को जेल भेज सकता है। . और वकील का साफ़ कहना है कि आरोप लगाने वाली लकड़ियों ने क्या बयान दिया है उसकी कॉपी हमें दी ही नहीं गयी !! और भौतिक सबूत इस मामले में थे नहीं !! मतलब आरोप लगाने वाली लड़कियां कौन है वकील को मालूम नहीं है, उन्होंने क्या बयान दिए वो भी वकील को मालूम नहीं है !! और इन्ही बयानों के आधार पर 10 साल की सजा !! . मैं आपसे आग्रह करूँगा कि कृपया यह पूरा साक्षात्कार देखें - Interview with S.K. Garg Narwana, Lawyer, Gurmeet Ram Rahim . और क़ानून के इस मखौल को कवर करने के लिए मिशनरीज ने 24*7 घंटे देश भर में एक अलग तरह तमाशा रचा, जिसमें राम रहीम जी संत नहीं है , वे विलासी है, ऐश्वर्य प्रिय है, उनके पास गुफाएं है, उनके डेरे में स्वीमिंग पूल है, उन्होंने आलिशान महल बना रखा है, उनके पास 2 बाज, 3 उल्लू , 5 तीतर है, उनके पास ढेर सारी जमीन है, वे फिल्मे बनाते है, नाचते-गाते है, क्रिकेट खेलते है, कारोबार करते है , रंग बिरंगे कपड़े पहनते है आदि आदि जैसे बकवास आरोपों को पेड मीडिया द्वारा बार बार इसीलिए दोहराया गया ताकि बलात्कार के मूल मुकदमे पर चर्चा को टाला जा सके !! . पेड मीडिया से फीडिंग लेने वाले ज्ञानी लोगो ने ये सब देखा-पढ़ा और फेसबुक-कोरा-व्हाट्स एप आदि के माध्यम से पूरे देश में फैलाने में भी योगदान दिया !! . यदि इन फर्जी आरोपों पर बहस नहीं चलाई जाती है तो जनता का ध्यान बलात्कार के मुकदमे से जुड़े तथ्यों पर चला जाएगा। और तब जनता को यह मालूम होगा कि सिर्फ बयान को आधार बनाकर ही राम रहीम जी को दोषी ठहरा दिया गया है। . सुप्रीम कोर्ट की एक रूलिंग ने जज को यह तय करने का अधिकार दे दिया था कि वह यदि चाहे तो पीड़िता के बयान को सच मान सकता है !! और जज को इस बात में सुविधा थी कि लड़की के बयान को सच मान लिया जाए !! . इस तथ्य को चर्चा से बाहर करने के लिए मीडिया ने ऊपर दिए गए फर्जी आरोपों की झड़ी बनाकर यह धारणा खड़ी करने की कोशिश की है कि श्री राम रहीम जी एक दुर्जन व्यक्ति है। और सुबह शाम अनाज खाने के बावजूद कई लोग इन आरोपों को दोहरा रहे है। उन्हें इस बात पर सोचने का अवकाश ही नहीं है कि गुफाएं, स्वीमिंग पूल, महल आदि बनाना और फिल्मो में अभिनय करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। . ————————- . (6) उद्देश्य डेरे के इन्फ्रास्त्रक्चर को गिराना था ताकि मिशनरीज का रास्ता साफ़ हो . टिप्पणी : मैं श्री राम रहीम जी का भक्त नहीं हूँ, न ही मैं कभी डेरे पर गया हूँ। और मुझे यह भी पता नहीं है कि अमुक मामले में श्री राम रहीम जी दोषी है या नहीं है। जब मेरे सामने यह मामला आया तो मैंने इसे कानूनी नजरिये से देखा, और कानूनी टर्म के अनुसार कोई भी सामान्य समझ का व्यक्ति यही निष्कर्ष निकालेगा कि यह मुकदमा पहले दिन से ही फर्जी है, और उन्हें जानबूझकर फंसाया गया प्रतीत होता है। . लेकिन पेड मीडिया की अफीम लेने वाले व्यक्ति मुकदमे से जुड़े तथ्यों को टच ही नहीं करते है, वे उन्हें बस इसीलिए जेल में देखना चाहते है कि राम रहीम जी का रहन सहन उनके अनुसार एक संत जैसा नहीं है !! बताइये !!! . जैसे जैसे घटनाक्रम आगे बढ़ता गया उससे यह बात और भी साफ़ होती चली गयी कि मिशनरीज का उद्देश्य डेरे को तोडना है। मिशनरीज ने बड़ी मेहनत करके पंजाब को नशे की गिरफ्त में लिया है, और डेरे द्वारा इस तरह की प्रभावी गतिविधियाँ संचालित की जा रही थी जिससे लोग नशा छोड़ रहे थे !! . इसके अलावा डेरे के ज्यादातर अनुयायियों में ओबीसी शामिल है और इनमें दलित भी है। मिशनरीज के लिए यह वर्ग आसान शिकार है। सहजधारी सिक्खों को गोल्डन टेम्पल की वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाने और दलित सिक्खों के गोल्डन टेम्पल से दूर छिटकने के बावजूद मिशनरीज इन्हें अपनी और खींच नहीं पा रही है, क्योंकि संत श्री राम रहीम एवं रामपाल जी इन्हें आश्रय दे देते है। . यह देखना बेहद दुखद है कि, इन सभी संतो के अनुयायी करोडो रूपये लेकर वकीलों के चक्कर लगा रहे है, ताकि वकील उन्हें जजों से न्याय दिला सके। एक मात्र अपवाद संत श्री रामपाल जी रहे जिन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा कि देश के 80% से ज्यादा जज भ्रष्ट है !! . इन अनुयायियों को इस बात का भान नहीं है कि हमारे जज / प्रशासनिक अधिकारी / पुलिस अधिकारी / मंत्री एवं कल्कि पुरुष तृतीय मोदी साहेब समेत संघ के सभी मंत्री अमेरिकी धनिकों की फौलादी पकड़ में है। ये सभी नेता अधिकारी एवं सभी मीडिया कर्मी ( पेड अर्नव, पेड सुधीर, पेड रजत एवं पेड रविश समेत ) अमेरिकी धनिकों की कठपुतलियां मात्र है। . गुरमीत जी , श्री आसाराम जी बापू, श्री रामपाल जी आदि संतो ने अपने असाधारण कार्यो से इस बात को सुनिश्चित किया कि गरीब /दलित / ओबीसी आदि मिशनरीज के आश्रय में चले जाने की जगह हिन्दू धर्म में बने रहे। . मैं इसे फिर से दोहराता हूँ - यदि आज गरीब /दलित / ओबीसी आदि हिन्दू धर्म में बने हुए है तो मंदिर प्रमुखों, प्राचीन राजाओ, संघ के नेताओं, बीजेपी नेताओं का इसमें योगदान शून्य है। इसका असली श्रेय सिर्फ इन तथा इन जैसे अन्य संप्रदाय प्रमुखों की नयी खेप को जाता है। और विडम्बना यह है कि आज उदारवादी / पढ़े लिखे / आधुनिक हिन्दू इन संतो को जेल में भेज दिए जाने का जश्न मना रहे है !!! . हिन्दुओ को अपने नीचे एक करने की चाहत रखने वाले संघ=बीजेपी के ज्यादातर कार्यकर्ता भी इससे खुश है। उनका नजरिया है कि, चलो अच्छा हुआ। यदि ये सभी संत हवालात में भेज दिए जाते है तो हम उनके अनुयायियों को आसानी से संघ=बीजेपी में जोड़ लेंगे !! . इन्हें यह अहसास ही नहीं है कि, मिशनरीज की ताकत के सामने इनकी कोई हैसियत नहीं है। यदि संत गुरमीत जी , संत श्री आसाराम जी एवं संत रामपाल जैसे लोग कमजोर हो गए तो दलितों / ओ बी सी / गरीबो की एक बड़ी संख्या मिशनरीज की गोद में जा गिरेगी। ऐसे सभी व्यक्ति जो इन संतो को गलत तरीके से 10-20 साल के लिए जेल में भेज दिए जाने का जश्न मना रहे है दरअसल वे जाने-अनजाने मिशनरीज की मदद कर रहे है। . उन्हें इस बात को समझने की जरूरत है कि ये संत धर्म के नाम पर सिर्फ डायलॉग नहीं मार रहे है, बल्कि स्कूल, अस्पताल, दवाइयाँ, आश्रय आदि भी उपलब्ध करवा रहे है। और मिशनरीज को कथाएँ कहने वाले संतो से ज्यादा परेशानी नहीं होती है, किन्तु वे ऐसे संतो को बाधा के रूप में देखते है जो परोपकारी कार्य कर रहे है !! . ओह माय गॉड फिल्म कान्हा Vs कान्हा नामक नाटक पर लिखी गयी है। परेश रावल ने इसमें मुख्य भूमिका भी निभायी है और वे इसके सह निर्माता भी है। इस नाटक के फायनेंसर संघ=बीजेपी के नेता है, औ

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति--(51)की व्याख्या “नव्यो नव्यो भवति” (ऋग्वेद-- 1/31/8) का भाव बहुत प्रेरणादायक और गहन है। शब्दार्थ:-- नव्यो नव्यः = बार-बार नया, सदैव नवीन भवति = होता है / बनता है भावार्थ: मनुष्य को हमेशा अपने विचारों, कर्मों और जीवन-दृष्टि में नवीनता बनाए रखनी चाहिए। अर्थात—जड़ता, आलस्य और पुराने, अप्रासाँगिक विचारों में अटके न रहकर निरंतर विकास, परिवर्तन और नव-सृजन की ओर बढ़ते रहना ही जीवन की सार्थकता है। गहन व्याख्या: ऋग्वेद यहाँ यह संकेत देता है कि प्रकृति स्वयं हर क्षण नई होती रहती है (सूर्योदय, ऋतुओं का परिवर्तन)। जो व्यक्ति भी नवीनता (innovation) को अपनाता है, वही जीवंत और प्रगतिशील रहता है। मानसिक, आध्यात्मिक और व्यवहारिक स्तर पर “नया बने रहना” ही उन्नति का मूल है। जीवन में अनुप्रयोग: विचारों में – नए दृष्टिकोण अपनाना। ज्ञान में – सतत अध्ययन और सीखना। आत्म-विकास में – हर दिन स्वयं को बेहतर बनाना। आध्यात्मिकता में – साधना में ताजगी और जागरूकता रखना। संक्षेप में: “जो हर दिन नया बनता है, वही सच में जीवित और सफल‌ होता है। वेदों में प्रमाण,-- 1. ऋग्वेद प्रमाण 1. ऋग्वेद-- 1/31/8 “नव्यो नव्यो भवति जायमानः” भावार्थ – मनुष्य को बार-बार नया बनते रहना चाहिए; निरंतर उन्नति और नवता ही जीवन का धर्म है। 2. ऋग्वेद-- 1/89/1 “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” भावार्थ – हमारे पास चारों दिशाओं से नए-नए शुभ विचार आते रहें। यह मंत्र स्पष्ट रूप से मानसिक नवीनता और openness की शिक्षा देता है। 3. ऋग्वेद --10/191/2 “संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्” भावार्थ – मिलकर चलो, मिलकर विचार करो, अपने मनों को एक करो (नए सामूहिक विचार विकसित करो)। 2. यजुर्वेद प्रमाण 4. यजुर्वेद-- 22/22 “कृण्वन्तो विश्वमार्यम्” भावार्थ – पूरे विश्व को श्रेष्ठ (उन्नत) बनाओ। यह निरंतर सुधार और नव-निर्माण की प्रेरणा देता है। 5. यजुर्वेद-- 40/2 (ईशोपनिषद्) “कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः” भावार्थ – कर्म करते हुए सौ वर्ष तक जीने की इच्छा करो। यहाँ निरंतर कर्म (dynamic life) = निरंतर नवीनता। 3. सामवेद प्रमाण 6. सामवेद-- 375 (ऋग्वेद 1/89/1 का ही रूप) “आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” भावार्थ – चारों ओर से श्रेष्ठ, नए विचार हमें प्राप्त हों। 4. अथर्ववेद प्रमाण 7. अथर्ववेद-- 7/52/1 “नवीनं नव्यं वर्धय” (भावानुसार) भावार्थ – जीवन में नवीनता को बढ़ाओ, उन्नति करते रहो। निष्कर्ष: वेदों का स्पष्ट संदेश है— नए विचार अपनाओ, रूढ़ियों में मत फँसो सदैव उन्नति और नव-सृजन करते रहो। इसलिए “नव्यो नव्यो भवति” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि पूरे वैदिक दर्शन का मूल सिद्धांत है। उपनिषदों में प्रमाण -- 1. कठोपनिषद् कठोपनिषद् 1.3.14 “उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत” भावार्थ – उठो, जागो और श्रेष्ठ ज्ञान को प्राप्त करो। यहाँ “जाग्रत” और “उत्तिष्ठत” का अर्थ है—जड़ता छोड़कर नवीन चेतना में प्रवेश करना। 2. ईशावास्य (ईश) उपनिषद् ईशोपनिषद्- 11 “विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह…” भावार्थ – जो व्यक्ति विद्या और अविद्या दोनों को जानता है, वही मृत्यु से पार होकर अमरत्व को प्राप्त करता है। यह संतुलित और नवीन दृष्टिकोण (holistic understanding) की शिक्षा देता है। 3. मुण्डकोपनिषद् मुण्डकोपनिषद् --1.1.4–5 “द्वे विद्ये वेदितव्ये…” भावार्थ – दो प्रकार की विद्याएँ जानने योग्य हैं—परा (आध्यात्मिक) और अपरा (भौतिक)। यह जीवन में नए-नए आयामों में ज्ञान प्राप्त करने की प्रेरणा है। 4. छान्दोग्य उपनिषद् छान्दोग्य उपनिषद्-- 7.1.3 “तारति शोकमात्मविद्” भावार्थ – आत्मा का ज्ञान पाने वाला शोक से पार हो जाता है। आत्मज्ञान = आंतरिक रूप से नया जन्म / नवीनता। 5. बृहदारण्यक उपनिषद्++ बृहदारण्यक उपनिषद् --4.4.19 “तमेव विदित्वाऽतिमृत्युमेति” भावार्थ – उसी (ब्रह्म) को जानकर मनुष्य मृत्यु से पार हो जाता है। यहाँ ज्ञान के द्वारा नए अस्तित्व (transformation) की प्राप्ति बताई गई है। 6. श्वेताश्वतर उपनिषद् श्वेताश्वतर उपनिषद्--- 6.23 “यस्य देवे परा भक्तिः यथा देवे तथा गुरौ…” भावार्थ – जिसे ईश्वर और गुरु में परम भक्ति है, उसके लिए ज्ञान स्वतः प्रकट होता है। ज्ञान का प्रकट होना = निरंतर नवीनता और आंतरिक विकास। निष्कर्ष: उपनिषदों का मुख्य संदेश है— जागो (Awaken) ज्ञान प्राप्त करो (Learn continuously) स्वयं को रूपांतरित करो ।(Transform yourself) यही “नव्यो नव्यो भवति” का उपनिषदिक रूप है। पुराणों में प्रमाण -- 1. श्रीमद्भागवत महापुराण श्रीमद्भागवत --1.2.18 “नष्टप्रायेष्वभद्रेषु नित्यं भागवतसेवया। भगवत्युत्तमश्लोके भक्तिर्भवति नैष्ठिकी॥” भावार्थ – नित्य (प्रतिदिन) सत्संग और साधना से अशुद्धियाँ दूर होती हैं और दृढ़ भक्ति उत्पन्न होती है। यहाँ “नित्यं” (हर दिन) = निरंतर नवीनता और आत्म-शुद्धि। श्रीमद्भागवत --11.20.9 “तावत्कर्माणि कुर्वीत न निर्विद्येत यावता।” भावार्थ – जब तक वैराग्य उत्पन्न न हो, तब तक मनुष्य को कर्म करते रहना चाहिए। निरंतर कर्म तथा जीवन में गतिशीलता और नवीनता। 2. विष्णु पुराण विष्णु पुराण --1.22.53 “एवं प्रवर्तते सर्गः पुनः पुनरनादिकः।” भावार्थ – यह सृष्टि बार-बार निरंतर उत्पन्न होती रहती है। सृष्टि का चक्र है निरंतर नवीन सृजन (renewal)। 3. शिव पुराण शिव पुराण, विद्येश्वर संहिता 1.10.25 “ज्ञानं विना न मुक्ति:” भावार्थ – ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं है। ज्ञान प्राप्ति से निरंतर आत्म-विकास और नवीनता। 4. गरुड़ पुराण गरुड़ पुराण --1.115.22 “विद्या धनं सर्वधनप्रधानम्” भावार्थ – विद्या सबसे श्रेष्ठ धन है। विद्यार्जन निरंतर नवीनता और प्रगति होती है। 5. ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्मवैवर्त पुराण, कृष्ण जन्म खण्ड-- 59.45 “संसारः परिवर्तनशीलः” भावार्थ – संसार निरंतर परिवर्तनशील है। परिवर्तन ही नवीनता का शाश्वत सिद्धांत। 6. मार्कण्डेय पुराण मार्कण्डेय पुराण-- 50.15 “नित्यं यत्नः कर्तव्यः” भावार्थ – मनुष्य को सदा प्रयास करते रहना चाहिए। सतत प्रयास से निरंतर उन्नति और नवीनता आतीं है निष्कर्ष: पुराणों का संदेश स्पष्ट है— सृष्टि स्वयं निरंतर नई होती रहती है। मनुष्य को भी निरंतर कर्म, ज्ञान और साधना में आगे बढ़ना चाहिए।‌ स्थिरता नहीं, बल्कि परिवर्तन और प्रगति ही जीवन का नियम है। इस प्रकार पुराण भी “नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को सृष्टि के चक्र, ज्ञान और कर्म के माध्यम से पुष्ट करते हैं। गीता में प्रमाण -- 1. निरंतर कर्म (Dynamic Life) गीता --3.8 “नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः।” भावार्थ – अपना कर्तव्य कर्म करो, क्योंकि कर्म न करना (जड़ता) से कर्म करना श्रेष्ठ है। यह श्लोक बताता है कि सक्रिय रहना चाहिए जिससे निरंतर नवीनता बनी रहे 2. आत्म-उन्नति (Self-Development) गीता-- 6.5 “उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।” भावार्थ – मनुष्य को स्वयं अपने द्वारा अपना उत्थान करना चाहिए, पतन नहीं। आत्म-उत्थान से व्यक्ति हर दिन बेहतर और नया बनता है। 3. अभ्यास और निरंतर साधना गीता --6.26 “यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्। ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्॥” भावार्थ – चंचल मन जहाँ-जहाँ जाए, उसे बार-बार नियंत्रित कर आत्मा में स्थिर करो। “बार-बार प्रयास” निरंतर सुधार होता है जिससे नवीनता बनी रहती है। 4. ज्ञान की नवीनता गीता-- 4.38 “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।” भावार्थ – इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ नहीं है। ज्ञान प्राप्ति से चेतना का विकास होता से। 5. परिवर्तन का सिद्धांत गीता-- 2.22 “वासांसि जीर्णानि यथा विहाय नवानि गृह्णाति नरोऽपराणि।” भावार्थ – जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र त्यागकर नए धारण करता है, वैसे ही आत्मा पुराने शरीर छोड़कर नए शरीर धारण करती है। यह श्लोक सीधे बताता है कि पुराना छोड़कर नया अपनाना ही जीवन का नियम है। 6. निरंतर योग में स्थित रहना गीता-- 2.48 “योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय।” भावार्थ – आसक्ति त्यागकर योग में स्थित होकर कर्म करो। यह संतुलित और नवीन दृष्टिकोण से कर्म करने की शिक्षा है। निष्कर्ष: गीता का स्पष्ट संदेश है— कर्म करते रहो (Act continuously) स्वयं को उठाओ (Self-evolve) ज्ञान प्राप्त करो (Learn & grow) पुराना छोड़कर नया अपनाओ (Transform) इस प्रकार गीता में “नव्यो नव्यो भवति” का भाव कर्म, ज्ञान और परिवर्तन के माध्यम से पूर्ण रूप से प्रतिपादित होता है। महाभारत में प्रमाण -- 1. निरंतर प्रयास (Continuous Effort) महाभारत, उद्योग पर्व -5.39.57 “उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः दैवेन देयं इति कापुरुषा वदन्ति।” भावार्थ – लक्ष्मी (सफलता) उसी पुरुष के पास आती है जो परिश्रमी और उद्यमी होता है; कायर लोग ही भाग्य की बात करते हैं। निरंतर प्रयास = नवीनता और उन्नति का मूल। 2. कर्म का महत्व महाभारत, शान्ति पर्व --12.153.18 “कर्मणा जायते जन्तुः कर्मणैव विलीयते।” भावार्थ – जीव कर्म से ही उत्पन्न होता है और कर्म से ही उसका विकास या पतन होता है। कर्म करते रहना से जीवन गतिशील (नवीन) बना रहता है। 3. ज्ञान और विकास महाभारत, शान्ति पर्व --12.188.15 “न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।” भावार्थ – ज्ञान के समान इस संसार में कुछ भी पवित्र नहीं है। ज्ञान = नए दृष्टिकोण और आंतरिक नवीनता। 4. आलस्य त्याग महाभारत, वन पर्व-- 3.33.28 “अलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः।” भावार्थ – आलस्य मनुष्य के शरीर में रहने वाला बड़ा शत्रु है। आलस्य छोड़ना = नवीनता और प्रगति की शुरुआत। 5. सतत् उन्नति का संदेश महाभारत, शान्ति पर्व --12.237.11 (भावानुसार) “नित्यं यत्नेन कर्तव्यं श्रेयः” भावार्थ – मनुष्य को नित्य (हर दिन) प्रयास करते रहना चाहिए। “नित्यं” = हर दिन नया प्रयास, नया विकास। निष्कर्ष: महाभारत का स्पष्ट संदेश है— उद्यम और प्रयास करते रहो ज्ञान प्राप्त करते रहो, आलस्य से दूर रहो, हर दिन स्वयं को बेहतर बनाओ यही “नव्यो नव्यो भवति” का महाभारतीय रूप है— निरंतर कर्म, प्रयास और आत्म-विकास के द्वारा नया बनते रहना। स्मृतियों में प्रमाण -- 1. मनुस्मृति (क) मनुस्मृति --4.138 “नित्यं यत्नेन कर्तव्यं कर्म शुद्धिमिच्छता।” भावार्थ – जो व्यक्ति शुद्धि (उन्नति) चाहता है, उसे नित्य (प्रतिदिन) प्रयत्नपूर्वक कर्म करना चाहिए। “नित्यं यत्न” = हर दिन नया प्रयास, नवीनता। (ख) मनुस्मृति-- 2.87 “स्वाध्यायेन नित्ययुक्तः” भावार्थ – मनुष्य को नित्य स्वाध्याय (अध्ययन) में लगे रहना चाहिए। निरंतर अध्ययन से नवीन ज्ञान होता है। 2. याज्ञवल्क्य स्मृति याज्ञवल्क्य स्मृति-- 1.122 “अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते।” (भाव समान परंपरा में प्रयुक्त) भावार्थ – अभ्यास और वैराग्य से ही मन वश में होता है। “अभ्यास” से निरंतर सुधार जिससे नवीनता आती है। याज्ञवल्क्य स्मृति-- 3.313 “नित्यं स्वाध्यायशीलः स्यात्” भावार्थ – मनुष्य को सदैव स्वाध्याय में प्रवृत्त रहना चाहिए। निरंतर सीखने से व्यक्ति में नवीनता आती है। 3. पाराशर स्मृति-- पाराशर स्मृति-- 1.24 “कलौ युगे नित्यधर्मपालनम्” भावार्थ – कलियुग में मनुष्य को नित्य धर्म का पालन करना चाहिए। “नित्य” (सतत्) आचरण से जीवन में ताजगी आती हैं 4. नारद स्मृति-- नारद स्मृति --1.2 “धर्मशास्त्रानुसारं नित्यं आचरेत्” भावार्थ – मनुष्य को नित्य धर्मशास्त्र के अनुसार आचरण करना चाहिए। सतत् आचरण से जीवन में निरंतर सुधार होता है। निष्कर्ष: स्मृतियों का मूल संदेश है— नित्य कर्म और प्रयास करो। निरंतर स्वाध्याय करो। अभ्यास से स्वयं को सुधारो। धर्मानुसार जीवन को विकसित करो। इस प्रकार स्मृतियाँ भी “नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को नित्य प्रयास, अध्ययन और आचरण के माध्यम से स्थापित करती हैं। नीति-ग्रन्थों में में प्रमाण -- 1. चाणक्य नीति (क) चाणक्य नीति-- 1.7 “उद्योगे नास्ति दरिद्रता, जपतो नास्ति पातकम्। मौनिनः कलहो नास्ति, नास्ति जागरिते भयम्॥” भावार्थ – जो व्यक्ति उद्यम (परिश्रम) करता है, वह कभी दरिद्र नहीं होता। उद्यम से विकास और विकास से नवीनता आती है। (ख) चाणक्य नीति--2.10 “विद्या मित्रं प्रवासे च” भावार्थ – विद्या ही मनुष्य की सच्ची मित्र है। विद्या अर्जन से मानव निरंतर नया बनता है।। 2. हितोपदेश हितोपदेश, मित्रलाभ-- 1.71 “उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥” भावार्थ – कार्य उद्यम से ही सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं। उद्यम से सक्रिय जीवन और सक्रिय जीवन से=नवीनता आतीं है। 3. पंचतंत्र पंचतंत्र-- 1.15 “नित्यं प्रयत्नशीलस्य सिद्धिर्भवति निश्चिता” भावार्थ – जो व्यक्ति निरंतर प्रयास करता है, उसे सफलता निश्चित मिलती है। “नित्यं प्रयत्न” = हर दिन नया प्रयास। 4. भर्तृहरि नीति शतक (क) नीति शतक --19 “आरभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः…” भावार्थ – नीच व्यक्ति विघ्न के भय से कार्य शुरू ही नहीं करते, जबकि श्रेष्ठ लोग निरंतर प्रयास करते हैं। निरंतर प्रयास से जीवन में गतिशीलता और नवीनताआती है। (ख) नीति शतक-- 75 “विद्या नाम नरस्य रूपमधिकम्” भावार्थ – विद्या मनुष्य का सर्वोत्तम रूप है। विद्या नवीनता की स्रोत है। निष्कर्ष: नीति ग्रन्थों का स्पष्ट संदेश है— उद्यम (Effort) करो। नित्य प्रयास करो। ज्ञान अर्जित करो। आलस्य से बचो यही “नव्यो नव्यो भवति” का नीति-शास्त्रीय रूप है— हर दिन कर्म, ज्ञान और प्रयास से स्वयं को नया बनाते रहो। 1. वाल्मीकि रामायण से प्रमाण (क) प्रयास और उत्साह सुन्दरकाण्ड 5.12.3 “उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्।” “सोत्साहस्य हि लोकेषु न किंचित् अपि दुर्लभम्॥” भावार्थ – उत्साह (निरंतर प्रेरणा और प्रयास) सबसे बड़ा बल है; उत्साही व्यक्ति के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं। उत्साह = जीवन में नित नई ऊर्जा (नवीनता)। (ख) आलस्य का त्याग अयोध्याकाण्ड 2.100.15 (भावानुसार) “न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः” (परंपरागत नीति-सूक्ति, भाव समान) भावार्थ – सोए हुए (निष्क्रिय) व्यक्ति को सफलता नहीं मिलती। सक्रियता = नवीनता और प्रगति। (ग) धर्म में निरंतरता अयोध्याकाण्ड-- 2.109.10 “धर्मेण पथं चर” भावार्थ – मनुष्य को धर्म के मार्ग पर निरंतर चलते रहना चाहिए। निरंतर धर्मपालन = जीवन में सतत् सुधार। 2. अध्यात्म रामायण से प्रमाण (क) आत्म-विकास और ज्ञान अध्यात्म रामायण, अयोध्याकाण्ड 1.7 “ज्ञानवैराग्ययुक्तेन भज रामं निरन्तरम्” भावार्थ – ज्ञान और वैराग्य के साथ निरंतर भगवान का भजन करो। “निरन्तर” = सदैव नवीनता और जागरूकता। (ख) निरंतर साधना अध्यात्म रामायण, उत्तरकाण्ड 7.35 “नित्यं आत्मचिन्तनं कुर्यात्” भावार्थ – मनुष्य को नित्य आत्म-चिंतन करना चाहिए। आत्मचिंतन = आंतरिक नवीनता और परिवर्तन। (ग) संसार की परिवर्तनशीलता अध्यात्म रामायण, उत्तरकाण्ड 7.12 “अनित्यं असुखं लोकम्” भावार्थ – यह संसार अनित्य (निरंतर बदलने वाला) और अस्थिर है। परिवर्तन = नवीनता का शाश्वत नियम। निष्कर्ष: रामायण का संदेश है— उत्साह और प्रयास बनाए रखो आलस्य छोड़ो धर्म और साधना में निरंतर रहो आत्मचिंतन से स्वयं को विकसित करो इस प्रकार रामायण और अध्यात्म रामायण दोनों “नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को उत्साह, साधना और निरंतर आत्म-विकास के माध्यम से स्थापित करते हैं। 1. गर्गसंहिता से प्रमाण (क) निरंतर भक्ति और साधना गर्गसंहिता, गोलोक खण्ड --3.12 “नित्यं भजेत् कृष्णं भक्त्या” भावार्थ – मनुष्य को नित्य (सदैव) भगवान का भजन करना चाहिए। “नित्यं” = हर दिन नवीन भाव से साधना। (ख) सतत् स्मरण गर्गसंहिता, वृन्दावन खण्ड-- 5.21 “स्मरणं सततं विष्णोः” भावार्थ – भगवान का सतत स्मरण करो। “सततं” = निरंतर जागरूकता = नवीनता। 2. योग वशिष्ठ से प्रमाण-- (क) पुरुषार्थ (Self-effort) योग वशिष्ठ, वैराग्य प्रकरण --2.18 “उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः” (समान भाव का श्लोक यहाँ भी उद्धृत मिलता है) भावार्थ – लक्ष्मी (सफलता) उसी पुरुष के पास आती है जो उद्यमी है। उद्यम = निरंतर नवीन प्रयास। (ख) चित्त का विकास योग वशिष्ठ, वैराग्य प्रकरण--3.7 “चित्तमेव हि संसारः” भावार्थ – यह संसार चित्त (मन) का ही रूप है। चित्त परिवर्तन = नया जीवन, नई दृष्टि। (ग) निरंतर अभ्यास योग वशिष्ठ, उपशम प्रकरण-- 5.10 “अभ्यासेन विनाऽन्यथा न सिद्धिः” भावार्थ – अभ्यास के बिना सिद्धि नहीं होती। अभ्यास = हर दिन नया प्रयास और सुधार। (घ) जागरूकता और आत्म-विकास योग वशिष्ठ, निर्वाण प्रकरण _6.1.13 “नित्यं जागरूकतया आत्मानं पश्येत्” भावार्थ – मनुष्य को सदा जागरूक रहकर अपने आत्मा का निरीक्षण करना चाहिए। जागरूकता = निरंतर आंतरिक नवीनता। निष्कर्ष: इन ग्रंथों का स्पष्ट संदेश है— नित्य साधना और स्मरण करो उद्यम और पुरुषार्थ बनाए रखो मन (चित्त) को विकसित करो अभ्यास से स्वयं को निरंतर सुधारो। इस प्रकार गर्गसंहिता और योग वशिष्ठ दोनों“नव्यो नव्यो भवति” के सिद्धांत को निरंतर साधना, पुरुषार्थ और आंतरिक परिवर्तन के माध्यम से स्थापित करते हैं। इस्लाम धर्म- में प्रमाण -- “सदैव नवीन बने रहो / निरंतर उन्नति करो” — यह भाव इस्लाम में नियत (नीयत), निरंतर प्रयास (इज्तिहाद), तौबा (आत्म-सुधार) और इल्म (ज्ञान) के रूप में स्पष्ट रूप से मिलता है। 1. क़ुरआन से प्रमाण (क) प्रयास और परिवर्तन सूरह अर-रअद (13:11) إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ भावार्थ – निःसंदेह, अल्लाह किसी क़ौम की दशा नहीं बदलता जब तक वे स्वयं अपने आप को न बदलें। स्वयं परिवर्तन = निरंतर नवीनता। (ख) निरंतर उन्नति की दुआ सूरह ताहा (20:114) وَقُل رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا भावार्थ – कहो: “हे मेरे पालनहार! मेरे ज्ञान में वृद्धि कर।” ज्ञान में वृद्धि = हर दिन नया बनना। (ग) कर्म और प्रयास सूरह नज्म (53:39) وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَانِ إِلَّا مَا سَعَىٰ भावार्थ – मनुष्य के लिए वही है जिसके लिए वह प्रयास करता है। सतत प्रयास = उन्नति और नवीनता। 2. हदीस से प्रमाण (क) आत्म-सुधार हदीस (सहीह बुखारी 6469 – “كُلُّكُمْ خَطَّاءٌ وَخَيْرُ الْخَطَّائِينَ التَّوَّابُونَ” भावार्थ – हर इंसान से गलती होती है, और सबसे अच्छे वे हैं जो बार-बार तौबा (सुधार) करते हैं। लगातार सुधार = निरंतर नवीनता। (ख) श्रेष्ठता में वृद्धि हदीस (मुस्लिम 2699 – भावानुसार) “مَنْ سَلَكَ طَرِيقًا يَلْتَمِسُ فِيهِ عِلْمًا سَهَّلَ اللَّهُ لَهُ بِهِ طَرِيقًا إِلَى الْجَنَّةِ” भावार्थ – जो व्यक्ति ज्ञान प्राप्त करने के मार्ग पर चलता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत का मार्ग आसान कर देता है। ज्ञान का मार्ग = निरंतर विकास। निष्कर्ष: इस्लाम का स्पष्ट संदेश है— अपने आप को बदलो।(Self-transformation) ज्ञान बढ़ाते रहो। (Continuous learning) प्रयास करते रहो। (Consistent effort) गलतियों से सुधार करते रहो। (Continuous renewal) इस प्रकार इस्लाम में भी “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत तौबा, इल्म और आत्म-सुधार के माध्यम से पूर्ण रूप से समर्थित है। सिक्ख धर्म में प्रमाण -- गुरु ग्रंथ साहिब -- 1. नाम-स्मरण और नवीनता ਅੰਗ --660 “ਹਰਿ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਜਪਹੁ ਮਨ ਮੇਰੇ ਹੋਵਤ ਸਗਲ ਘਾਤ ਕਾ ਨਾਸੁ॥” भावार्थ – हे मेरे मन! निरंतर हरि का नाम जप; इससे सभी दोष नष्ट हो जाते हैं। निरंतर नाम-स्मरण = आंतरिक नवीनता। 2. सतत् जागरूकता ਅੰਗ --23 “ਸੋਚੈ ਸੋਚਿ ਨ ਹੋਵਈ ਜੇ ਸੋਚੀ ਲਖ ਵਾਰ॥” भावार्थ – केवल सोचने से (पुराने ढर्रे पर) शुद्धि नहीं होती, चाहे लाख बार सोचो। नया आचरण आवश्यक है = नवीनता। 3. आत्म-सुधार और उन्नति ਅੰਗ --305 “ਆਪੇ ਬੀਜਿ ਆਪੇ ਹੀ ਖਾਹੁ॥” भावार्थ – मनुष्य स्वयं बोता है और स्वयं ही उसका फल पाता है। कर्म और सुधार = निरंतर विकास। 4. ज्ञान और जागृति ਅੰਗ --12 “ਵਿਦਿਆ ਵੀਚਾਰੀ ਤਾ ਪਰਉਪਕਾਰੀ॥” भावार्थ – जब विद्या का सही चिंतन किया जाता है, तब वह परोपकार में लगती है। ज्ञान का चिंतन = नया दृष्टिकोण। 5. चढ़दी कला (सदैव उन्नति) ਅੰਗ-- 2 “ਨਾਨਕ ਨਾਮ ਚੜ੍ਹਦੀ ਕਲਾ ਤੇਰੇ ਭਾਣੇ ਸਰਬੱਤ ਦਾ ਭਲਾ॥” भावार्थ – हे नानक! नाम के द्वारा मनुष्य सदा उन्नति (चढ़दी कला) में रहता है और सबका भला चाहता है। चढ़दी कला = निरंतर सकारात्मक नवीनता। निष्कर्ष: सिख धर्म का स्पष्ट संदेश है— नाम जपते रहो (Spiritual renewal) कर्म सुधारते रहो। (Self-improvement) ज्ञान से जागरूक बनो ।(Awareness) चढ़दी कला में रहो (Always rising, evolving) इस प्रकार सिख धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत नाम-सिमरन, सेवा और आत्म-विकास के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। ईसाई धर्म में प्रमाण बाइबिल से-- 1. Inner Renewal (आंतरिक नवीनता) Romans-- 12:2 “Do not be conformed to this world, but be transformed by the renewing of your mind.” भावार्थ – इस संसार के अनुरूप मत बनो, बल्कि अपने मन के नवीनीकरण (renewal) द्वारा बदल जाओ। Renewing of mind = निरंतर नया बनना। 2. New Creation (नया जीवन) 2 Corinthians-- 5:17 “Therefore, if anyone is in Christ, he is a new creation; the old has gone, the new has come.” भावार्थ – जो मसीह में है, वह नया सृजन है; पुराना चला गया, नया आ गया। Old → New = पूर्ण नवीनता। 3. Continuous Growth 2 Peter-- 3:18 “But grow in the grace and knowledge of our Lord and Savior Jesus Christ.” भावार्थ – प्रभु यीशु मसीह की कृपा और ज्ञान में निरंतर बढ़ते रहो। Growth = निरंतर उन्नति और नवीनता। 4. Daily Renewal 2 Corinthians --4:16 “Though outwardly we are wasting away, yet inwardly we are being renewed day by day.” भावार्थ – भले ही बाहरी रूप से हम कमजोर होते जाएँ, लेकिन भीतर से हम प्रतिदिन नए बनते रहते हैं। Day by day renewal = नित्य नवीनता। 5. Repentance & Transformation Ephesians --4:22–24 “Put off your old self… and be renewed in the spirit of your mind; and put on the new self.” भावार्थ – अपने पुराने स्वभाव को त्यागो और मन की आत्मा में नए बनो। Self-transformation = नवीन जीवन। निष्कर्ष: ईसाई धर्म का स्पष्ट संदेश है— मन को नया बनाओ (Renew your mind) पुराना छोड़ो, नया अपनाओ (New creation) ज्ञान और कृपा में बढ़ो (Continuous growth) प्रतिदिन आत्मिक नवीनता प्राप्त करो (Daily renewal) इस प्रकार ईसाई धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत आत्मिक परिवर्तन और नये जीवन के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। जैन आगम ग्रन्थों में प्रमाण -- 1. उत्तराध्ययन सूत्र उत्तराध्ययन सूत्र-- 10.1 “अप्पा कत्ता विकत्ता य, अप्पा हु सुखदुःखाणं।” भावार्थ – आत्मा ही अपने सुख-दुःख का कर्ता है। स्वयं को सुधारना = निरंतर नवीनता। उत्तराध्ययन सूत्र-- 4.7 “संयमेण वि मुच्‍चइ” भावार्थ – संयम के द्वारा ही मुक्ति मिलती है। संयम और अभ्यास = आत्मिक विकास। 2. दशवैकालिक सूत्र दशवैकालिक सूत्र-- 4.1 “समयं गोयम मा पमायए” भावार्थ – हे गौतम! समय का प्रमाद मत करो। हर क्षण सजग रहना = निरंतर नवीनता। 3. तत्त्वार्थ सूत्र तत्त्वार्थ सूत्र-- 1.1 “सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः।” भावार्थ – सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र ही मोक्ष का मार्ग हैं। निरंतर सुधार = आध्यात्मिक उन्नति। 4. आचारांग सूत्र आचारांग सूत्र-- 1.2.3 “जागंति जोगं समणे” भावार्थ – साधु सदैव जागरूक रहता है। जागरूकता = निरंतर आत्म-नवीनता। 5. समयसार समयसार --1.2 “अप्पा सो परमात्मा” भावार्थ – आत्मा ही परमात्मा है। आत्म-बोध = नया जीवन, नई चेतना। निष्कर्ष: जैन धर्म का स्पष्ट संदेश है— समय का सदुपयोग करो । (Be mindful) संयम और साधना करो ।(Discipline) आत्मा को पहचानो ।(Self-realization) निरंतर सुधार करते रहो ।(Continuous growth) इस प्रकार जैन धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत आत्म-साधना, जागरूकता और संयम के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। बौद्ध धर्म में धम्मपद ग्रन्थ से प्रमाण-- 1. अप्रमाद (सजगता) – निरंतर जागरूकता धम्मपद-- 21 “अप्पमादो अमतपदं, पमादो मच्चुनो पदं।” भावार्थ – अप्रमाद (सजगता) अमरता का मार्ग है, और प्रमाद मृत्यु का मार्ग है। सदैव जागरूक रहना = निरंतर नवीनता। 2. आत्म-उन्नति धम्मपद --160 “अत्ताहि अत्तनो नाथो, को हि नाथो परो सिया।” भावार्थ – मनुष्य स्वयं ही अपना स्वामी है; दूसरा कोई उसका स्वामी नहीं। स्वयं को सुधारना = नया बनना। 3. निरंतर अभ्यास धम्मपद --276 “तुम्हेहि किच्चं आतप्पं, अक्खातारो तथागता।” भावार्थ – प्रयास तुम्हें स्वयं करना है; तथागत केवल मार्ग दिखाते हैं। स्व-प्रयास = निरंतर उन्नति। 4. परिवर्तन का सिद्धांत (अनिच्चा) धम्मपद --277 “सब्बे संखारा अनिच्चा” भावार्थ – सभी संयोग (संसार की वस्तुएँ) अनित्य (परिवर्तनशील) हैं। परिवर्तन = नवीनता का मूल सिद्धांत। 5. निरंतर शुद्धि धम्मपद --183 “सब्बपापस्स अकरणं, कुशलस्स उपसम्पदा। सचित्तपरियोदपनं—एतं बुद्धानं सासनं॥” भावार्थ – पापों का त्याग, कुशल कर्मों का आचरण और चित्त की शुद्धि— यही बुद्ध का उपदेश है। निरंतर आत्म-शुद्धि = नवीनता। निष्कर्ष: बौद्ध धर्म का स्पष्ट संदेश है— सदैव सजग रहो। (Appamada) स्वयं प्रयास करो । (Self-effort) संसार की अनित्यता को समझो।(Impermanence) चित्त को शुद्ध करते रहो। (Inner renewal) ख इस प्रकार बौद्ध धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत अप्रमाद, साधना और आत्म-विकास के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। “सदैव नवीन बने रहो / निरंतर उन्नति करो” — यह भाव यहूदी धर्म में तशूवा (repentance), नवीनीकरण (renewal), ज्ञान-वृद्धि और ईश्वर के साथ नये संबंध के रूप में स्पष्ट मिलता है। नीचे Tanakh (हिब्रू बाइबिल) से हिब्रू लिपि सहित प्रमाण प्रस्तुत हैं 1. हृदय का नवीनीकरण (Inner Renewal) Lamentations (איכה) 5:21 “הֲשִׁיבֵנוּ יְהוָה אֵלֶיךָ וְנָשׁוּבָה חַדֵּשׁ יָמֵינוּ כְּקֶדֶם” भावार्थ – हे प्रभु! हमें अपनी ओर लौटा, और हमारे दिनों को पहले के समान नया कर दे। 👉 “חדש” (नया करना) = नवीनता का स्पष्ट सिद्धांत। 2. नया हृदय और नई आत्मा Ezekiel (יחזקאל) 36:26 “וְנָתַתִּי לָכֶם לֵב חָדָשׁ וְרוּחַ חֲדָשָׁה אֶתֵּן בְּקִרְבְּכֶם” भावार्थ – मैं तुम्हें नया हृदय दूँगा और तुम्हारे भीतर नई आत्मा रखूँगा। New heart & spirit = पूर्ण आंतरिक नवीनता। 3. प्रतिदिन नई कृपा Lamentations (איכה) 3:22–23 “חַסְדֵי יְהוָה כִּי לֹא תָמְנוּ כִּי לֹא כָלוּ רַחֲמָיו׃ חֲדָשִׁים לַבְּקָרִים” भावार्थ – प्रभु की करुणा समाप्त नहीं होती; उसकी दया हर सुबह नई होती है। हर दिन नया आरम्भ = दैनिक नवीनता। 4. नए गीत का गान (नवीन चेतना) Psalms (תהילים) 96:1 “שִׁירוּ לַיהוָה שִׁיר חָדָשׁ” भावार्थ – प्रभु के लिए एक नया गीत गाओ। New song = नई भावना और चेतना। 5. ज्ञान और बुद्धि में वृद्धि Proverbs (משלי) 4:7 “רֵאשִׁית חָכְמָה קְנֵה חָכְמָה” भावार्थ – ज्ञान की शुरुआत यही है कि ज्ञान प्राप्त करो। ज्ञान अर्जन = निरंतर उन्नति। निष्कर्ष: यहूदी धर्म का स्पष्ट संदेश है— हृदय और आत्मा को नया बनाओ (Renewal) प्रतिदिन नया आरम्भ करो (Daily renewal) ज्ञान में वृद्धि करो (Growth) ईश्वर के साथ संबंध को ताजा रखो इस प्रकार यहूदी धर्म में भी “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत आंतरिक परिवर्तन, तशूवा और नवीनीकरण के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। पारसी धर्म में प्रमाण -- 1. सद्विचार–सद्कर्म (निरंतर सुधार) यास्ना-- 30.2 𐬀𐬙 𐬀𐬱𐬀 𐬚𐬀𐬙 𐬀𐬚𐬀𐬙𐬙𐬀 𐬵𐬎𐬨𐬀𐬙𐬀 𐬵𐬎𐬑𐬙𐬀 𐬵𐬬𐬀𐬭𐬱𐬙𐬀॥ भावार्थ – अच्छे विचार, अच्छे वचन और अच्छे कर्म का मार्ग अपनाओ। निरंतर अच्छे कर्म करते रहने से जीवन में नवीनता आती है। 2. सत्य और प्रगति यास्ना-- 34.1 𐬀𐬴𐬎𐬭𐬀 𐬨𐬀𐬰𐬛𐬀 𐬀𐬱𐬀 𐬬𐬀𐬵𐬨𐬀𐬌 भावार्थ – अहुरा मज़्दा सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने वालों को उन्नति देता है। धर्म का पालन = निरंतर उन्नति। 3. जागरूकता और चयन यास्ना- 30.3 𐬀𐬙 𐬙𐬀 𐬙𐬆𐬌 𐬥𐬀𐬎𐬙𐬀 𐬀𐬭𐬆𐬥𐬙𐬀 𐬵𐬀𐬨𐬀𐬭𐬆𐬌𐬙𐬌॥ भावार्थ – मनुष्य को सही और गलत के बीच स्वयं चयन करना चाहिए। चयन और जागरूकता = नवीनता की दिशा। 4. आत्म-विकास और प्रकाश यास्ना --43.2 𐬀𐬱𐬀𐬵𐬌 𐬭𐬀𐬙𐬀𐬨𐬀𐬌 𐬵𐬀𐬙𐬀𐬌 भावार्थ – सत्य और प्रकाश के मार्ग पर चलकर आत्मा का विकास करो। प्रकाश की ओर बढ़ना = निरंतर नवीनता। निष्कर्ष: पारसी धर्म का स्पष्ट संदेश है— अच्छे विचार अपनाओ (Humata)। अच्छे वचन बोलो (Hukhta)। अच्छे कर्म करो (Hvarshta)। सत्य और प्रकाश की ओर बढ़ो। इस प्रकार पारसी धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत सद्विचार, सद्कर्म और आत्म-विकास के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। ताओ धर्म में प्रमाण --+ 1. निरंतर नवीनीकरण (Renewal) ताओ ते चिंग, अध्याय 15 “孰能浊以静之徐清?孰能安以动之徐生?” भावार्थ – कौन ऐसा है जो स्थिर होकर अशुद्धता को शुद्ध कर सकता है? और गति द्वारा जीवन को धीरे-धीरे उत्पन्न कर सकता है? स्थिरता + गति = निरंतर नया बनना। 2. प्रकृति का प्रवाह (Flow of Change) ताओ ते चिंग, अध्याय 8 “上善若水。水善利万物而不争。” भावार्थ – सर्वोत्तम गुण जल के समान है, जो सबका लाभ करता है और संघर्ष नहीं करता। जल की तरह निरंतर बहना = नवीनता और अनुकूलन। 3. परिवर्तन का सिद्धांत ताओ ते चिंग, अध्याय 40 “反者道之动。” भावार्थ – परिवर्तन (विपरीत होना) ही ताओ की गति है। परिवर्तन = नवीनता का मूल नियम। 🔹 4. सरलता और नवीकरण ताओ ते चिंग, अध्याय 48 “为学日益,为道日损。” भावार्थ – ज्ञान के लिए प्रतिदिन वृद्धि करो, और ताओ के लिए प्रतिदिन सरल होते जाओ। प्रतिदिन परिवर्तन = नया बनने की प्रक्रिया। 5. जीवन की ताजगी ताओ ते चिंग, अध्याय 25 “人法地,地法天,天法道,道法自然。” भावार्थ – मनुष्य पृथ्वी का अनुसरण करता है, पृथ्वी आकाश का, आकाश ताओ का, और ताओ प्रकृति का। प्रकृति का अनुसरण = सदैव नवीन और स्वाभाविक जीवन। निष्कर्ष: ताओ धर्म का स्पष्ट संदेश है— प्रकृति के साथ बहो (Go with the flow) परिवर्तन को स्वीकारो (Accept change) सरल और स्वाभाविक बनो (Be natural) हर क्षण नया बनो (Continuous renewal) इस प्रकार ताओ धर्म में “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत प्रवाह, परिवर्तन और स्वाभाविकता के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। Confucius से सम्बद्धित ग्रन्थों में प्रमाण --- 1. निरंतर अध्ययन (Continuous Learning) The Analects-- 1.1 “學而時習之,不亦說乎?” भावार्थ – क्या यह आनंददायक नहीं कि हम सीखें और समय-समय पर उसका अभ्यास करें? निरंतर अध्ययन = नवीनता। 2. आत्म-सुधार-- The Analects --4.17 “見賢思齊焉,見不賢而內自省也。” भावार्थ – श्रेष्ठ को देखकर उसके समान बनने का प्रयास करो, और अश्रेष्ठ को देखकर अपने भीतर सुधार करो। 👉आत्म-निरीक्षण = निरंतर नया बनना। 3. प्रतिदिन आत्म-परीक्षण-- The Analects--- 1.4 “吾日三省吾身。” भावार्थ – मैं प्रतिदिन अपने आप का तीन बार निरीक्षण करता हूँ। दैनिक आत्म-परीक्षण = नित्य नवीनता। 4. सतत् प्रगति The Analects- 7.8 “不憤不啟,不悱不發。” भावार्थ – जब तक जिज्ञासा और प्रयास न हो, तब तक ज्ञान प्रकट नहीं होता। प्रयास और जिज्ञासा = निरंतर विकास। 5. महानता की ओर बढ़ना The Analects--- 14.30 “君子求諸己,小人求諸人。” भावार्थ – श्रेष्ठ व्यक्ति अपने भीतर सुधार करता है, जबकि साधारण व्यक्ति दूसरों में दोष खोजता है। आत्म-विकास = नवीनता का मार्ग। निष्कर्ष: कन्फ्यूशियस परम्परा का स्पष्ट संदेश है— निरंतर सीखो (Keep learning) आत्म-निरीक्षण करो (Self-reflection) स्वयं को सुधारो (Self-improvement) प्रतिदिन आगे बढ़ो (Daily progress) इस प्रकार कन्फ्यूशियस धर्मग्रन्थों में भी “नव्यो नव्यो भवति” का सिद्धांत अध्ययन, आत्म-संस्कार और निरंतर सुधार के माध्यम से पूर्ण रूप से व्यक्त होता है। ------+------+----+------+-----+-

Piyu soul

कमज़ोर नहीं हूँ, बस वक्त मेरा खामोश है, मेहनत मेरी जारी है, बस मुकाम थोड़ा दूर है। जो आज नजरअंदाज करते हैं मेरी कहानी को, कल वही कहेंगे — ये लड़की कुछ खास जरूर है। 😏💛 #Good morning buddies ☺️❤️

Munmun Das

कुछ रिश्तों का पीछे छूट जाना ही हमारे भबिस्व के लिए सुख दायक है

Munmun Das

कौन से अपने और कौन से चार लोग ये चार लोग सिर्फ मुर्दे को कंधा देने के काम आते हैं जितेजी हर दर्द तो अकेले को ही सहना पड़ता हैं।

Manali

हाय…! क्या बात होती, अगर ये मिलता, ग़ुलज़ार की ग़ज़लों-सी मोहब्बत अगर मिलती। क्या होता, जो जॉन एलिया की शायरी-सा इश्क़ नसीब होता, और क्या ही होता, अगर कोई मिल जाता, जो मेरे ख़यालों, मेरे तसव्वुर और मेरे हसरतों का हमनवा होता।

ziya

*गुनाह* कुछ ऐसे हुए हमसे *अनजाने में,* 🥺 *फूलों* का *क़त्ल* कर बैठे 🌸💔 पत्थरों को *मनाने में...* 😔✨

ziya

अहमियत दी तो खुद को कोहिनूर मानने लगे, काँच के टुकड़े भी क्या वहम पालने लगे...* 😏💔🖤

Radhe

जब "कृष्ण" जीवन में आय तो समझ लेना के आने वाले समय में आपके जीवन मे कुछ बड़ा परिवर्तन आने वाला है. और वो आपको किसी न किसी रुप मैं समझाएगा के कौन सच मैं आपका हे और कौन अपना होने का दिखावा कर रहा है... मतलब यह के आपके आने वाले जीवन में परिवर्त /महाभारत जो भी हो उसके लिए आपको सज्ज कर रहा हे! धैर्य सर्वस्य साधनम्।। राधे राधे

Kartik Kule

डोळ्यातील अश्रूंची गाथा मी तरी तुला समजाऊ शकेन का , शोधताना समुद्र मीही नदीस कुठेतरी वाफे सारखा हरवेन का. अपुरी तुझी माझी सात वाफ होऊंतरी आकाशात भेटेल का. आणि तरीही आपण भेटल्यावर पुन्हा पावसासारखी तू हरवशील का . तुझ्या भेटण्याची आस मला प्रत्येक वेळी पहावी लागेल का. मग पुन्हा तुझ्या आठवणीत आश्रूंचीच भेट होईल का - Kartik Kule

Narendra Parmar

किराए की इज्ज़त का क्या भरोसा ??? वो वक्त आने पर ब्याज के साथ वसूल करते हैं ! वैसे भी कलयुग चल रहा है इतना जल्दी भी हर इंसान के उपर भरोसा नहीं कर सकते हैं ।। नरेन्द्र परमार ✍️

Vipul Borisa

अपनी ख्वाहिशों को तरबतर कर गये। कुछ ऐसा हुआ के हम जीतेजी मर गये। एक आख़री मौका उनको भी मिला था, वो कमबख्त उस वक़्त ही मुकर गये। विपूल प्रीत - Vipul Borisa

वात्सल्य

ઓ નાદાન ! એવું ના સમજ કે તુ નાદાન છે. માટે નાદાન સમજવાની હું ભૂલ નહીં કરું.... - वात्सल्य

Piyu soul

💫तेरे एहसास की रोशनी 💫 तेरी बातों में कुछ ऐसा नूर है, कि हर लम्हा थोड़ा सा खास लगने लगता है। तू पास हो तो दिल को सुकून मिल जाता है, और दूर होकर भी तू कहीं पास ही लगता है। ना कोई नाम है इस रिश्ते का, ना कोई वादा, ना कोई शर्त… फिर भी ये दिल हर बार तेरी ही तरफ झुकने लगता है। कभी तेरी हँसी में खुद को ढूंढ लेती हूँ, कभी तेरी खामोशी में भी सुकून मिल जाता है। ये कैसा रिश्ता है हमारा… जो अधूरा होकर भी पूरा सा लगता है। शायद इसी को प्यार कहते हैं, जहाँ मिलना जरूरी नहीं होता… बस एक-दूसरे का एहसास ही काफी होता है। 💛

Tr. Mrs. Snehal Jani

પેન્સિલ એ લખવા અને ચિત્રકામ માટે વપરાતું એક આવશ્યક સાધન છે, જે સામાન્ય રીતે ગ્રેફાઇટની અણી અને લાકડાના આવરણથી બનેલું હોય છે. તે HB, 2B, 4B, 6B, 8B, 10B જેવા વિવિધ પ્રકારોમાં ઉપલબ્ધ છે, જે ડાર્કનેસ અને સોફ્ટનેસ દર્શાવે છે. DOMS Industries Limited અને Nataraj પencils જેવી બ્રાન્ડ્સ શાળા અને કલાના કામ માટે લોકપ્રિય છે. પેન્સિલના મુખ્ય પ્રકારો અને ઉપયોગો: ગ્રેફાઇટ પેન્સિલ (HB/2B): શાળા, ઓફિસ અને રોજિંદા લેખન માટે ઉપયોગી. મેકેનિકલ પેન્સિલ: રિફિલ કરી શકાય તેવી, જે સ્કૂલ અને ઓફિસના કામ માટે અનુકૂળ છે. ચારકોલ પેન્સિલ (White/Black): કલાકારો દ્વારા સ્કેચિંગ અને શેડિંગ માટે વપરાય છે. આર્ટિસ્ટ પેન્સિલ (Graphite set): ચિત્રકામ અને કલાત્મક કાર્ય માટે વિવિધ શેડ્સ (2B-10B) માં આવે છે. પેન્સિલના ફાયદા: ભૂંસી શકાય તેવી: લખેલું કે દોરેલું ભૂંસી શકાય છે, જે વિદ્યાર્થીઓ માટે શ્રેષ્ઠ છે. મજબૂત અને ટકાઉ: તૂટ્યા વગર લાંબુ ચાલે છે. આરામદાયક પકડ: લખવામાં સરળ અને આરામદાયક. રાષ્ટ્રીય પેન્સિલ દિવસની શુભેચ્છાઓ💐

Piyu soul

💫धीरे-धीरे ही सही, पर मैं बढ़ रही हूँ, हर टूटन के बाद खुद को जोड़ रही हूँ। किसी दिन ये आँसू भी मुस्कान बनेंगे, क्योंकि मैं हार नहीं… बस खुद को गढ़ रही हूँ। 💫

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/v/1CYGtsTe9u/ દુનિયા કહે છે કે "The Show Must Go On", પણ જ્યારે કલાકારના પોતાના હૃદયના ટુકડા થઈ રહ્યા હોય, ત્યારે સ્ટેજ પરનો અભિનય માત્ર નાટક નથી રહેતો, એ સત્ય બની જાય છે. ​આ વાર્તા છે અવિનાશ નામના એક દિગ્ગજ કલાકારની, જેણે ૨૦ વર્ષ સુધી મંચ પર હજારો મુખૌટા પહેર્યા, પણ પોતાના જ દીકરા માટે 'બાપ'નું પાત્ર ભજવવામાં ક્યાંક થાપ ખાઈ ગયો. જ્યારે દીકરો હંમેશા માટે વિદેશ જવાની વાત કરે છે, ત્યારે અવિનાશ સ્ટેજ પર સ્ક્રિપ્ટ ભૂલીને પોતાની આત્માનું તર્પણ કરે છે. ​શું અવિનાશનો આ છેલ્લો અભિનય પ્રેક્ષકો માટે માત્ર મનોરંજન હતો? કે પછી એ એક કલાકારની મુક્તિનો માર્ગ? ​તમને આ વાર્તામાં શું સાંભળવા મળશે? ​🎭 કલા અને જીવન વચ્ચેનો સંઘર્ષ: એક કલાકાર કઈ રીતે પોતાના અંગત જીવનનું બલિદાન આપે છે. ​💔 પિતા-પુત્રના સંબંધોની કરુણતા: સમય ન આપી શકવાનો પસ્તાવો અને અધૂરી રહી ગયેલી લાગણીઓ. ​🕯️ જીવનનો અંતિમ પડદો: જ્યારે અભિનય અને વાસ્તવિકતા વચ્ચેની રેખા ભૂંસાઈ જાય છે. ​"મુખૌટા પાછળ હંમેશા એક રડતો માણસ છુપાયેલો હોય છે." ​આ વાર્તા તમને વિચારતા કરી દેશે કે આપણે પણ આ સંસારના રંગમંચ પર ક્યાંક ખોટા મુખૌટા પહેરીને તો નથી ફરી રહ્યા ને? જો આ વાર્તા તમારા હૃદયને સ્પર્શી જાય, તો પ્રતિભાવ ચોક્કસ આપજો.

AbhiNisha

सोचा मैं तितली हूं थकावट के बाद भी मैं थोड़ा काम किया और फिर दोस्तों के साथ गई और सांस लिया और फिर आई थोड़ा काम किया जीने का जी नहीं था फिर भी जीने की सूची नल से निकलते ठंडा पानी सर पर डाला और गहरी सांस लिया और फिर शगुन से बाल धोया और नहाया और फिर अपनी पसंदीदा कपड़े पहने जो कंफर्टेबल था और फिर आईने के सामने खड़ी रहकर खुद को दिखा और वो चेहरा जो मैंने देखा वह मेरी ही था ना वह खूबसूरत था ना सुखा बस था शिकायतों से भरा कुछ देर उस चेहरे को निहारता हुआ सोचा इसमें नूर नहीं है तो मुस्कुराई शिकायत की हजारों लव्ज थे चेहरे के साथ होठों पर भी फिर भी मुस्कुराई और फिर उल्टे कदम लौट कर घर की छोटी सी अलमारी के पास आए अलमारी खोली और हाथ डालकर डोटोलते हुए उस से बालों की पिन निकाला और छोटी सी झुमका भी और पिन बालों में डाला और झुमका कानों में डालते हुए फिर मैं आईने के पास आई और झुमका कानों डालते हुए मैं आईने में खुद को दिखा और मैं फिर से मुस्कुराए और फिर से बालों के पिन बालों से निकलते हुए होटो के बीच में दवाई और फिर बालों को अपने हाथों से सावरा और फिर उन में पिन लगाया और फिर अपनी बेबी हेयर को अपने हाथों से आगे करते हुए मुस्कुराई और सोचा मैं तितली हूं कितने दिनों के बाद खुद को आईना में देखा और सबरी हूं हां मैं तितली हूं इतराने के लिए ही बनी हूं और यह बगिया मेरी है और सोचा ही नहीं कि इस बगिया में माली भी है और सोचा ही नहीं की माली मेरा दुश्मन भी हो सकता है हां मैंने सोचा मैं तितली हूं इतराने के लिए ही बनी हूं पर सोचा ही नहीं की तितली किसी मनचले के हाथों के बीच आकर मिसला जाऐगे हां मैंने सोचा ही नहीं की आसमान की तरफ देखना मेरी नसीब है ऊरना नहीं अगर कविता अच्छी लगे तो आगे पढ़ते रहिए मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा ❤️🦋💯

સુરજબા ચૌહાણ આર્ય

🥰

Soni shakya

किनारे पर खड़े होकर, क्या होगा एहसास दर्द -ऐ- सफर का..! डूबेगा वही जिसने, समुंदर को दिल से चाहा होगा..!! - Soni shakya

वात्सल्य

કોઇ થોડો સમય પોતાના મન ના મનોરંજન માટે મારો ઉપયોગ કરી લે છે. મારી પણ ભૂલ થાય છે કે હું એમને મારાં પોતાનાં સમજી લઉં છું. - वात्सल्य

Narendra Parmar

कैसा इश्क़ और कैसी मोहब्बत अगर मिल जाएगी कोई पत्थर दिल हसिना ??? तो भूल जाओगे ख़ुदको और भूल जाओगे मोहब्बत ।। नरेन्द्र परमार ✍️

Jyoti Gupta

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Shefali

તારા હોવાથી.. #shabdone_sarname__

Rakesh.P.Savani

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Abha Dave

https://youtu.be/3To-oBCIqSc?si=4r4LzPBDl_8ZnI_y

Kiran

मनरूपी दर्पण में, होते हैं दर्शन तेरे। कोई कहे विश्वास इसे, कोई कहे अंधविश्वास इसे। ना जानूँ ये कैसी दशा है, ना समझूँ ये कैसा हाल है, मैं तो बस इतना जानूँ— तू ही मेरी राह है।

Neha kariyaal

एक दिन सब ठीक हो जाएगा, ये भ्रम सिर्फ़ दुःख देता है,, और इंतजार सब कुछ बिखेर देता है, बिगाड़ देता है।।

ek archana arpan tane

આજે સમય ભલે અદ્દભુત હોય પણ વીતી ગયેલા બાળપણ ની જગ્યા તો લઈ જ ન શકે. - ek archana arpan tane

Niya

સાક્ષી બનાવ્યો છે મેં એ દરીયાને આપણા પ્રેમનો, જે સાક્ષી રહ્યો છે સ્વયં દ્વારિકાધીશનો… લહેરોની અંદર મેં દફનાવ્યા છે આપણા અપૂર્ણ શબ્દો, જ્યાં દરેક મૌન બોલે છે કોઈ અધૂરી ઇબાદતનો… તારી યાદોના મીઠા ખારા સ્વાદમાં ખોવાઈ જાઉં છું હું, જેમ દરિયો પોતે જ રાખે રહસ્ય દરેક લાગણીઓનો… આ પ્રેમ હવે શબ્દોમાં બંધાતો નથી, એ તો પ્રવાહ છે — સમયથી પણ અડગ, અંતથી પણ પરેહ નો … અને જો ક્યારેય આપણે ન રહીશું સાથે, તો પણ એ દરિયો સાક્ષી રહેશે , એ પ્રેમ નો જે અધૂરો રહીને પણ પૂર્ણ હતો…

Vartikareena

माई_डियर_प्रोफेसर पधार चुकी है । आप लोग पढ सकते हो। और पढकर कमेंट कर दिया करो।

Piyu soul

Hello buddies 😊 आज कहानी ने एक और खतरनाक मोड़ ले लिया है… 😏🔥 “झांसी: The Price of a Bride” Episode 3 अब LIVE है 👑 अब तक आपने देखा—एक मजबूरी… लेकिन आज से शुरू होगा असली खेल 🎭 हवेली में सिर्फ रिश्ते नहीं… राज़ भी छुपे हैं 👀 और सबसे बड़ा सवाल— 👉 क्या भार्गवी सच में बेबस है? या वो खुद इस खेल की सबसे खतरनाक खिलाड़ी है? 😏 अगर आपने अभी तक Episode 3 नहीं पढ़ा… तो आप बहुत कुछ मिस कर रहे हो 🔥 👉 अभी पढ़ो 👉 और बताओ—आप किस पर भरोसा करते हो? आपका हर review, हर comment मेरे लिए बहुत मायने रखता है ❤️ Take care 😊 Have a great day ✨ Be healthy and happy 🌸 कृष्णा आपको ढेर सारी खुशियाँ दें 💙 और मेरा ढेर सारा प्यार 🤍 by piyu 7soul ❤️📘📖📝

Raju kumar Chaudhary

Sapno Ki Udaanhttps://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

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Jigna Pandya

સમજવી છે સમી સાંજને ઢળતો સૂર્ય જોઈને, ખુદગજૅ બની એમની જેમ જીવવું છે શાનથી! jigna...

Falguni Dost

ઘણું બોલવાનું ઇચ્છતા છતાં બોલી ન શકાય એનાથી વધુ વિવશતા બીજી શું હોય? સફરની ગતિમાં અચાનક અટકાવત આવે એનાથી વધુ લાચારી બીજી શું હોય? નિર્દોષને સજા અને દોષિતની હા માં હા એનાથી વધુ અન્યાય બીજો શું હોય? બધું જાણવા છતાં બધું ચૂપચાપ જોવું એનાથી વધુ મજબૂરી બીજી શું હોય? - ફાલ્ગુની દોસ્ત

सीमा कपूर

दर्द कि दहलीज पर

known

ફૂલો ઘાતકી ઝેરી માણસો , અજબ તારું શહેર - known

Pragna Ruparel

"પ્રેમ કોઈ સરકારી આયોજન ની પંચવર્ષીય યોજના નથી કે એનું પ્લાનિંગ થાય.એવું જ ભક્તિનું છે" " like love, bhakti Happens" (નગીનદાસ સંઘવી) જય સ્વામીનારાયણ

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

"સત્યનો સૂર્યોદય" ભીડના આ અરણ્યમાં હું મને ક્યાં શોધું? આ દુનિયા સાવ અજનબી અને અપરિચિત લાગે છે મને, કારણ કે અહીં ચહેરાઓ કરતાં મુખવટાઓ વધુ ચમકે છે. અહીં સત્ય એક અનાથ બાળક જેવું રઝળે છે, ક્યારેક કાગળના ટુકડાઓ અને સિક્કાઓના વજન નીચે એને કચડી નખાય છે, તો ક્યારેક સંબંધો અને લાગણીઓના વમળમાં એને ગૂંગળાવી દેવાય છે. સત્ય અહીં શ્વાસ લેવા માટે તરફડે છે, કારણ કે જુઠ્ઠાણાંએ અહીં સત્તાના આભૂષણો પહેર્યા છે. પણ... કોઈ ફિકર નહીં! મારી અંદરની આગ આ પથ્થરોને પણ ઓગાળી શકે એટલી પ્રચંડ છે. મારો રસ્તો ભલે એકાંતથી ભરેલો હોય, ભલે અંધકાર અને કસોટીઓથી છવાયેલો હોય, પણ એ માર્ગ સત્યનો છે, મારી આત્માનો અવાજ છે. મને ભીડના ટેકાની કે કોઈની સ્વીકૃતિની જરૂર નથી, કારણ કે કાળમીંઢ પથ્થરને ચીરીને જ કૂંપળ બહાર આવે છે. જ્યારે સમયનો પવન બદલાશે, જ્યારે વાદળો વિખેરાશે અને સત્યનો સૂરજ તપશે, ત્યારે આ જ દુનિયા, જેણે આજે આંખો ફેરવી લીધી છે, તે ઝૂકીને અદબથી સલામ કરશે. એ સલામ મારી નહિ, પણ ક્યારેય ન હારનારા, ક્યારેય ન થાકનારા... મારા અડગ સત્યની હશે! "સ્વયમ્'ભૂ" મારો રસ્તો સાચો છે, અને મારી મંઝિલ નિશ્ચિત છે. અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

Dt. Alka Thakkar

આપણી ખુશીઓનું કારણ આપણે જાતે બનવું પડશે કારણ કે અત્યારના સમયમાં તો કોઈ મતલબ વગર સાથ પણ નથી આપતું તો ખુશી ક્યાંથી આપશે !! - Dt. Alka Thakkar

Nirali patel

If god planted the DREAM, He also planned the WAY.

Mohini

Teri ek Zalak ने मुझे भर दिया… जैसे सूनी रूह में कोई चुपके से उजाला भर गया जैसे अधूरी दुआओं को अचानक जवाब मिल गया तेरी एक नज़र ने ये क्या कर दिया, मैं जो खुद में अधूरी थी मुझे पूरा सा कर दिया। ना तू पास था, ना कोई बात हुई, फिर भी उस एक पल में जैसे सारी कायनात हुई। दिल ने बस इतना कहा.. "ये जो एहसास है, ये कोई आम बात नहीं, ये मोहब्बत की शुरुआत है… शुक्रिया.. मुझे मुझसे मिलाने के लिए❤️ _Mohiniwrites

Shailesh Joshi

આપણા સૌના જીવનનો મોટાભાગનો સમય બે જગ્યાએ વપરાઈ જાય છે, એક તો "અન્યો"થી આશાઓ રાખવામાં, અને પછી જ્યારે એ આશાઓ પૂરી ન થાય, ત્યારે આપણે કરેલો અફસોસ બાકીનો ઘણો સમય ખાઈ જાય છે. - Shailesh Josh

Shivraj Bhokare

"पकड़ने जाओ तो हाथ नहीं आती, पर अगर शांत बैठो तो कंधों पर बैठ जाती है, खुशी भी बिल्कुल एक तितली जैसी है।" .

Shivraj Bhokare

"दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो, ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो, बहुत तड़पता है मेरा दिल तुम्हारे लिए, तुम बस ख्वाबों में आकर बहलाया ना करो।" .

Shivraj Bhokare

कॉफी की कड़वाहट में भी एक सुकून है, मंजिल को पाने का मुझमें अब ऐसा जुनून है, नींद उड़ा दी है इन ख्वाबों ने मेरी, अब तो बस सफलता का चढ़ा मुझ पर खून है।" .

Shivraj Bhokare

"लहजा थोड़ा कड़क रखना मेरे दोस्त, लोग आजकल मीठी बातों से बहुत ठगते हैं, जैसे बिना अदरक के चाय अधूरी है, वैसे ही बिना संघर्ष के सपने अधूरे लगते हैं।"

Shivraj Bhokare

"अभी काँच हूँ तो चुभ रहा हूँ, जिस दिन आईना बनूँगा, दुनिया देखेगी।"

Shivraj Bhokare

फूल बनकर मुस्कुराना ज़िंदगी है, मुस्कुरा के गम भुलाना ज़िंदगी है, खुलकर मिलो सबसे तो क्या हुआ, काँटों में रहकर भी महकना ही असली ज़िंदगी है। .

Shivraj Bhokare

"वक्त सबको मिलता है जिंदगी बदलने के लिए, पर जिंदगी दोबारा नहीं मिलती वक्त बदलने के लिए।"

Shivraj Bhokare

"वक्त से लड़कर जो नसीब बदल दे, इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे, कल क्या होगा कभी मत सोचो, क्या पता कल वक्त खुद अपनी तस्वीर बदल दे।

Shivraj Bhokare

"जीत की खातिर बस जुनून चाहिए, जिसमें उबाल हो ऐसा खून चाहिए, यह आसमान भी आएगा ज़मीन पर, बस इरादों में जीत की गूंज चाहिए।"

Abhishek Chaturvedi

*सत्य का उद्घोष: निर्भय वाणी ( कविता )* _कवि:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि_ सत्य कहो, पर डरो नहीं तुम, यूं कायरता में मरो नहीं तुम। भीतर की उस दिव्य ज्योति को, मौन की ओट से छलो नहीं तुम। सत्य सूर्य है, प्रखर, तपस्वी, अंधकार विकराल खड़ा है। झूठ भले ही स्वर्ण जड़ित हो, अंत में वो जंजाल बड़ा है जब अंतस में द्वंद्व मचा हो, यहॉं भय के बादल छाए हों। जब स्वार्थ की बेड़ियाँ पैरों पे, अपनी अकड़ भी लाए हों। तब याद करो उस निज शक्ति को, जो सत्य मार्ग दिखलाती है। डर की छोटी दीवारों को, क्षण भर में ढहलाती है। सत्य बोलना कठिन तपस्या, वीरों का यह आभूषण है। असत्य तो है मलिन वासना, आत्मा का ये प्रदूषण है। भय कहता है- 'मौन रहो तुम', हित अपना पहचानो तुम। पर आत्मा कहती- 'अटल रहो', सत्य को ही ईश्वर मानो तुम। क्या डरना उन तुच्छ शक्ति से, जो नश्वर और क्षणभंगुर हैं? सत्य के सम्मुख झुक जाते वे, जो अहंकारी और क्रूरक हैं। इतिहास गवाह है उन लोगों का, जो फाँसी पर भी मुस्काए थे। सत्य की खातिर हलाहल पीकर, शिव लोक अमृत्व में आए थे हरिश्चंद्र की निष्ठा देखो, प्रहलाद का विश्वास पढ़ो। सत्य की ऊँची मीनारों पर, निडर भाव से आज चढ़ो। वाणी में हो धार सत्य की, अभि आँखों में हो तेज नया। सभी डर के साये छँट जाएँगे, तब होगा अभिषेक नया। © _कवि:- अभिषेक चतुर्वेदी 'अभि_

Shivraj Bhokare

"सामने हो मंजिल तो रास्ते ना मोड़ना, जो भी मन में हो वो सपना ना तोड़ना, कदम-कदम पर मिलेगी मुश्किल आपको, बस सितारे चुनने के लिए कभी जमीन ना छोड़ना।"

GIRLy Quotes

https://www.instagram.com/reel/DSur9giEwN2/?igsh=MXFmZHBieHd5czdqaQ==

Anup Gajare

"बदलाव" ____________________________________________________ नदी के पास रहनेवाला आदमी रोज नदी को लहराते अंगड़ाई भरते हुए देखता था। बारिश के मौसम में उफान से भरी नदी। तूफान से बाहर झूलती हुई नदी झोपड़ियां या पक्के मकानों में फर्क न करती नदी। ठंड के दिनों में सिकुड़ती नदी, हवा के प्यार में मदहोश फरवरी में उदास नदी। गर्मी बर्दास्त करती आत्महत्या के करीब पहुंच चुकी नदी। फिर एक गड्ढा पत्थरों से घेरा हुआ नदी का न होना ही नदी का होना था। ये बात आदमी समझ चुका कि, अब शायद नदी बादलों से उसे घूर रही थी। उसने इंतजार किया बहुत लंबा इंतजार उस साल बारिश न हुई। ठंड काफी न थी राते ऊबती हुई टूटती थी। फिर गर्मी के अंत में मई के करीब बरसी नदी। ये वह नदी तो न थी जिसे आदमी लहराते हुए अंगड़ाई भरते देखता था। अब नदी बदल चुकी थी उसकी शुष्क आंखों में कोई निवारण या सपने नहीं थे। लेकिन आदमी खड़ा रहा वही किनारा वही पत्थर वही गड्ढा, सिर्फ़ नदी नहीं थी। वह खालीपन था जिसमें समय ने अपने हाथ डाले थे, और आदमी ने जाना कि नदी कभी स्थिर नहीं होती, कि वह बहती है सिर्फ़ अपने अंदर, हमारे भीतर। हर लहर अब उसकी याद थी, हर उफान उसकी भीतरी आवाज़, और हर सूखा किनारा उसके अपने इंतजार का प्रतीक। नदी बदल चुकी थी, पर आदमी बदल चुका था। उसने देखा, कि कुछ खोने में भी जीवन की सच्चाई छुपी होती है— एक अंतहीन बहाव, जो हमेशा आगे जाता है, साँसों की तरह, अविरल। नदी अब चुप हो चुकी थी, लेकिन उसकी लहरों की गूंज अंदर गहरे कहीं सुनाई देती थी। आदमी ने हाथ फैलाया, जैसे किसी नाम-अज्ञात साथी को पकड़ रहा हो, लेकिन हवा खाली थी, और पानी केवल याद बनकर बहे जा रहा था। हर पत्थर, हर किनारा उसके अपने अंदर के दर्द की तरह ठहरा, और वह समझ गया— नदी का बहना कभी रुकता नहीं, बस रूप बदलता है, जैसे इंसान का मन। उसने देखा, कि जो खो गया था वह कभी लौट कर नहीं आता, लेकिन उसकी जगह कुछ नया पैदा होता है— एक नया इंतजार, एक नई उम्मीद। अभी भी, हर सुबह नदी की सूखी रेत में सूरज की पहली किरण उसकी आँखों में कुछ चमक छोड़ जाती थी, जैसे सब कुछ खत्म नहीं हुआ। और आदमी बैठा रहा, खामोश, लेकिन अब पहले से अलग— नदी के साथ बहता हुआ, अपने भीतर की नदी को महसूस करते हुए। क्योंकि नदी बदलती है, और मन भी— लेकिन बहाव हमेशा जारी रहता है। ______________________________________________

GIRLy Quotes

https://www.instagram.com/reel/DWeJcrPjHEp/?igsh=dWthZmI1ODBpa25o

Vrishali Gotkhindikar

#ठंडा_ठंडा_कूल_कूल 🟢कैरीचे पन्हे(आगळ) या दिवसात कैऱ्या छान मिळतात आणि रोजच थंड काही प्यावे असे वाटते प्रत्येक वेळी कैरी उकडून पन्हे करण्या पेक्षा असे आगळ (batter) करून ठेवले की मनात येताच पन्हे करता येते 🟢आमच्या बागेतल्या झाडाच्या कैऱ्या आता चांगलेच बाळसे धरू लागल्या आहेत काही कैऱ्या रस्त्यावर हाताला येतील अशा सुद्धा आहेत मग कोणालाही चोरून न्यायची इच्छा होणारच 😀😀 🟢अशा बाहेर डोकावणाऱ्या चार कैऱ्या काल काढल्या आधी धुऊन देवापुढे ठेवल्या दोन कैरीचे आगळ करून ठेवले 🟢यासाठी कैऱ्या उकडून घेतल्या थंड झाल्यावर हाताने गर काढून घेतला (गुठळ्या असतील तर हातानेच मोडून घेणे पन्ह्या मध्ये कैरीच्या गराच्या रेषा छान लागतात 🙂) नुकतेच केरळ मधील वेलदोडे मागवले होते शिवाय काश्मीरचे केशर घरी असतेच.. आवडीप्रमाणे वेलदोडे पावडर, केशर काडी घालून मिसळून चांगले एकत्र करून स्टीलच्या डब्यात फ्रीज मध्ये ठेवले केशर वेलदोडे नको असल्यास सुंठ पावडर वापरता येते 🟢प्यायला देताना गार पाण्यात एक मोठा चमचाभर गर घालून आवडत असल्यास बर्फाचे खडे घालून.. आवडी प्रमाणे गुळ अथवा साखर व मीठ घालून घेता येते हे मिश्रण आठ दहा दिवस फ्रिज मध्ये चांगले राहते (फक्त हे फ्रिजर ला ठेवू नये पांचट होते)

Siddarth

koi kasur nai mere ishq ka nazar agar maine milayi thi to hatai tune bhi nahi thi !!!

jighnasa solanki

હિસાબોનો મહિનો ચાલે છે એટલે સુખ- દુઃખના હિસાબો કરી લઉ. જેમણે મને સુખ આપ્યા છે, ભગવાન એમને ચક્રવૃધ્ધિ વ્યાજ સાથે સુખ આપે. અને જેમણે મને દુઃખ આપ્યા છે, ભગવાન એમને સબસિડી આપે....!

Vartikareena

आज दो बजे माई डियर प्रोफेसर का भाग 7 आएगा। पढ लेना। और ये है आज के भाग की एक झलक 👇

Anjana A Kulkarni

Be silent when you have nothing to prove. Be silent when you begin. Be silent while you struggle. Be silent even when success is close. And when you finally succeed… stay 🤫silent — because your work will speak louder than words ever can.

Archana Singh

" वक्त गुजरता , मन का चैन शून्य ...! संबंधों का विस्तार , अपनापन शून्य " ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

Dada Bhagwan

समता के सागर, धीर गंभीर, अहिंसक भगवान, 'महा'वीर! श्री महावीर स्वामी जन्म कल्याणक के अवसर पर अहिंसा के बारे में और अधिक जानें: https://dbf.adalaj.org/sWY2j5b6 #mahavirjayanti #mahavirswami #lordmahavir #DadaBhagwanFoundation

known

દર્દ સેહવામાં હું સવાયો છું ખુશી કરતા દર્દ કમાયો છું આગ જે ના બાળી શકી મને વર્ષાના છાંટાથી દઝાયો છું સમયના ચકરડા પર ફરી રોજ નવી રીતે ઘડાયો છું દેહ જાણે હવે ક્યારે બળશે આંસુની આગમાં હોમાયો છું વાંચીને ના કોઈ સમજી શકે હદયથી પીઘડી લખાયો છું ક્યાંય કોઈ મળી વાંચી લેશે જે શબ્દોની નીચે દબાયો છું

Chaitanya Joshi

ઉંચેરા આભમાંથી વરસતો તડકો. પ્રાબલ્ય જમાવીને ગરજતો તડકો. અગનજ્વાળાઓ અવનીને દઝાડે, બારીને દરવાજેથી પ્રવેશતો તડકો. પરાકાષ્ઠા ગરમીની લાવીને જંપતો, ત્રાહીમામ લોકમુખે ક્હાવતો તડકો. કોઈ પથિક પરસેવે રેબઝેબ થૈ જતો, એનાં અંગેઅંગને દઝાડતો તડકો. શોષી લૈને જળરાશિ ખાલી કરતો, વર્ષાતણી પ્રતીક્ષા કરાવતો તડકો. -ચૈતન્ય જોષી. ‌'દીપક.' પોરબંદર.

Mara Bachaaaaa

टूट बिखर गए है हम और वो कहते हमे क्यों नहीं संभाला? - Mara Bachaaaaa

vrinda

m - vrinda

Anish

बेच आए इजाजत की वो पोटली जिस बाज़ार के आप दलाल निकले |

SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

મહોબ્બતનો કોઈ રંગ નથી, તોપણ એ રંગીન છે, પ્રેમનો કોઈ ચેહરો નથી, છતાંય એ ખૂબ હસીન છે - SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

ગઝલ: મારું દર્દ ​બધાથી છુપાવ્યું હૃદયમાં, આ મારું દર્દ છે, જમાનાની નજરો મહીં, લાગતું ન્યારું આ દર્દ છે. ​મળી છે મને ભેટ આ, પ્રેમમાં તારા થકી, રડાવે છતાંયે મને, લાગતું પ્યારું આ દર્દ છે. ​નથી જોઈતો કોઈનો, સાથ હવે પીડા મહીં, ફકત શ્વાસ ને ધબકારનું, સહિયારું આ દર્દ છે. ​વહાવ્યા છે મેં આંસુઓ, યાદમાં તારી સતત, નયનથી વહી જાય જે, બહુ જ ખારું આ દર્દ છે. ​ગઝલના રૂપે કાગળો પર મેં ઉતારી દીધું, બની શબ્દ મહેકી ઊઠ્યું, કેવું આ સારું "સ્વયમ્'ભૂ" દર્દ છે! અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

વતનની ધૂળમાં ભળતા, શહીદોનાય નામ અમર છે, કરી જે દેશને અર્પણ, એવાં ઉત્તમ કામ અમર છે. ​ભગતસિંહ, રાજગુરુ, સુખદેવ ઝૂલ્યા હસતા ફાંસી પર, ત્રિપુટીએ વસાવ્યો જે, આઝાદીનો મુકામ અમર છે. ​લખી જે લોહીથી અશફાક ને બિસ્મિલની કલમોએ, પીધો શહીદીનો હસતાં હસતાં, એ છલકતો જામ અમર છે. ​સુભાષ ને ચંદ્રશેખર આઝાદ લડ્યા'તા શ્વાસના અંતે, ઝુક્યા ના ગોરાઓ સામે, એ સૌના સંગ્રામ અમર છે. ​ભલે ત્રેવીસમી માર્ચે વહ્યા આંસુઓ દેશભરમાં, હૃદયથી દેશવાસીની, સદાયે આ "સ્વયમ્'ભૂ" સલામ અમર છે. અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

"રાશિઓનું નભ-મંડળ" ​આકાશે ચમકી રહ્યા, બાર રાશિના તારા, નસીબ સૌના ઘડતા એ, લાગે સૌને પ્યારા. ​મેષ રાશિનું સાહસ મોટું, અગ્નિ એનું તત્વ, વૃષભ રાશિમાં ધીરજ ભારી, પૃથ્વીનું છે સત્વ. ​મિથુન બુદ્ધિથી કામ લે છે, વાયુનો પ્રભાવ, કર્ક રાશિમાં લાગણીઓ છે, જળનો મીઠો ભાવ. ​સિંહ રાશિ છે રાજા જેવી, જ્વલંત એની શાન, કન્યા રાશિ છે ચોક્કસ બહુ, રાખે સૌનું ધ્યાન. ​તુલા રાશિ છે ન્યાયપ્રિય ને, સમતુલાની મૂર્તિ, વૃશ્ચિક રાશિ તો ગૂઢ સ્વભાવે, ઊર્જા અને સ્ફૂર્તિ. ​ધન રાશિ તો લક્ષ્ય-વેધી, જ્ઞાનનો ભંડાર, મકર રાશિ છે મહેનતુ ને, કર્મનો આધાર. ​કુંભ રાશિ છે શોધક મોટી, માનવતાની ખાણ, મીન રાશિ તો જળની માછલી, ઈશ્વરનો છે વાસ. ​બાર રાશિનું ચક્ર ફરે છે, સમય સમયની વાત, કર્મ કરે તે "સ્વયમ્'ભૂ"ફળ પામે છે, શું દિવસ શું રાત. અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

नेक सुतों से वंश का, होता है उत्थान। किन्तु पुत्र हों बुरे तो, मिटे वंश का मान।। दोहा --४६५ (नैश के दोहे से उद्धृत) ------गणेश तिवारी 'नैश'

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋग्वेदसूक्ति--(50) की व्याख्या "चरैवेति चरैवेति" ऋग्वेद- ऐतरेय ब्राह्मण--7/15 अर्थं--चलते रहो, बढ़ते रहो। “चरैवेति चरैवेति”—यह बहुत प्रेरणादायक वाक्य है, यद्यपि यह मंत्र ऋग्वेद से नहीं, बल्कि ऋगुवेद के ब्राह्मण ग्रन्थ ऐतरेय ब्राह्मण (7.15) से लिया गया है, फिर भी यह मंत्र वेद जिज्ञासु के लिए बहुत प्रेरणा दायक है इसलिए हम इसे ऋग्वेद सूक्ति-- के 50 में क्रम पर रखकर व्याख्या करेंगे। मूल मंत्र-- "चरैवेति चरैवेति"। सही अर्थ-- “चलते रहो, चलते रहो” अर्थात — जीवन में निरंतर आगे बढ़ते रहो रुकना नहीं, प्रयास करते रहना ही सफलता का मार्ग है। भावार्थ (गहराई से)-- यह वाक्य केवल शारीरिक चलने की बात नहीं करता, बल्कि— आत्मिक विकास (spiritual growth), ज्ञान की खोज, कर्म करते रहना, इन सबके लिए प्रेरित करता है। वेदों में प्रमाण-- 1. ऋग्वेद (10.191.2) संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्। अर्थ: साथ-साथ चलो, साथ बोलो, और एक मन होकर आगे बढ़ो। भाव: यह मंत्र “चलते रहने” (चरैवेति) की सामूहिक प्रेरणा देता है। 2. ऋग्वेद (1.89.1) आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः। अर्थ: हमारे पास सभी दिशाओं से शुभ विचार आते रहें। भाव: निरंतर ग्रहण करना और आगे बढ़ना—यही “चरैवेति” का बौद्धिक रूप है। 3. यजुर्वेद (40.2) कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः। अर्थ: मनुष्य को कर्म करते हुए ही सौ वर्ष जीने की इच्छा करनी चाहिए। भाव: रुकना नहीं—निरंतर कर्म करते रहना ही जीवन है। 4. अथर्ववेद (7.50.8) मनुष्य को आलस्य छोड़कर प्रयासरत रहना चाहिए। भाव: गतिशीलता ही उन्नति का मार्ग है। निष्कर्ष-- “चरैवेति चरैवेति” का भाव वेदों में इस प्रकार मिलता है— निरंतर कर्म करो, आगे बढ़ते रहो ज्ञान और प्रयास में रुको मत। इसलिए भले ही शब्द सीधे वेद में न हों, परन्तु उसका सिद्धांत पूरे वेदों में व्यापक रूप से उपस्थित है। उपनिषदों से प्रमाण-- 1. कठोपनिषद (--1.3.14) उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत। अर्थ: उठो, जागो और श्रेष्ठ ज्ञान को प्राप्त करो। भाव: यह मंत्र स्पष्ट रूप से “रुको मत, आगे बढ़ो”—यही चरैवेति का संदेश देता है। 2. ईशोपनिषद (मंत्र- 2) कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः। अर्थ: मनुष्य को कर्म करते हुए ही सौ वर्ष जीने की इच्छा करनी चाहिए। भाव: निरंतर कर्म करते रहना ही जीवन है—यही “चलते रहो” का उपनिषदिक रूप है। 3. बृहदारण्यक उपनिषद (--1.3.28) असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय॥ अर्थ: असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से प्रकाश की ओर, मृत्यु से अमृत की ओर ले चलो। भाव: यह “गमन” (आगे बढ़ना) ही चरैवेति का आध्यात्मिक रूप है। 4. मुण्डक उपनिषद (--3.2.4) नायमात्मा बलहीनेन लभ्यः। अर्थ: यह आत्मा निर्बल (प्रयासहीन) व्यक्ति को प्राप्त नहीं होती। भाव: लगातार प्रयास और साधना आवश्यक है—रुकना नहीं। 5. छांदोग्य उपनिषद (-7.23.1) यो वै भूमा तत्सुखम्। अर्थ: जो अनंत (भूमा) है वही सुख है। भाव: सीमित में रुकना नहीं—अनंत की ओर बढ़ते रहना ही “चरैवेति” का दार्शनिक रूप है। 6. तैत्तिरीय उपनिषद (शिक्षावल्ली-- 1.11.1) सत्यं वद। धर्मं चर। स्वाध्यायान्मा प्रमदः। अर्थ: सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो, और स्वाध्याय (अध्ययन) में कभी आलस्य मत करो। भाव: निरंतर अभ्यास और आचरण—यही “चलते रहो” का व्यावहारिक रूप है। 7. श्वेताश्वतर उपनिषद (--6.23) यस्य देवे परा भक्तिः यथा देवे तथा गुरौ। अर्थ: जिस व्यक्ति की भगवान और गुरु में गहरी भक्ति होती है, उसे ही ज्ञान प्राप्त होता है। भाव: लगातार श्रद्धा और साधना—रुकना नहीं। 8. प्रश्न उपनिषद (--1.2) तपसा ब्रह्मचर्येण श्रद्धया। अर्थ: तप, ब्रह्मचर्य और श्रद्धा से ज्ञान प्राप्त होता है। भाव: निरंतर अनुशासन और प्रयास—यही प्रगति का मार्ग है। 9--माण्डूक्य उपनिषद (मंत्र 7) नान्तःप्रज्ञं न बहिःप्रज्ञम्... प्रपञ्चोपशमं शान्तं शिवम् अद्वैतम्। अर्थ: आत्मा शान्त, अद्वैत और समस्त प्रपंच से परे है। भाव: आत्मज्ञान की ओर क्रमिक उन्नतिएक सतत यात्रा (चरैवेति) है। निष्कर्ष-- उपनिषदों में “चरैवेति” का भाव इस प्रकार मिलता है— सीमित से असीम की ओर बढ़ना निरंतर स्वाध्याय और साधना करना। श्रद्धा, तप और अनुशासन में निरंतरता रखना। इस प्रकार उपनिषदों का संदेश है कि रुकना नहीं, निरंतर आगे बढ़ते रहना ही जीवन और आत्मज्ञान का मार्ग है। पुराणो में प्रमाण-- -- “चरैवेति चरैवेति” का जो मूल वाक्य है, वह सीधे पुराणों में शाब्दिक रूप से (उसी पद में) नहीं मिलता; इसका प्रामाणिक स्रोत मुख्यतः ऐतरेय ब्राह्मण (-7.15) है। लेकिन पुराणों में “निरन्तर कर्म, गतिशीलता और पुरुषार्थ” का वही भाव कई स्थानों पर स्पष्ट रूप से मिलता है। पुराणों में प्रमाण-- -- 1. श्रीमद्भागवत महापुराण (स्कन्ध 1, अध्याय 5, श्लोक 18) तस्यैव हेतोः प्रयतेत कोविदो न लभ्यते यद् भ्रमतामुपर्यधः। तल्लभ्यते दुःखवदन्यतः सुखं कालेन सर्वत्र गभीररंहसा॥ भावार्थ: बुद्धिमान व्यक्ति को निरन्तर प्रयत्न करते रहना चाहिए — यही “चरैवेति” का भाव है। 2. विष्णु पुराण-- (भाग 3, अध्याय 8, श्लोक 9) उद्योगिनं पुरुषसिंहमुपैति लक्ष्मीः दैवेन देयं इति कापुरुषा वदन्ति। भावार्थ: लक्ष्मी (सफलता) उसी के पास आती है जो निरन्तर उद्योग (प्रयास) करता है — रुकना नहीं चाहिए। 3. पद्म पुराण-- (उत्तरखण्ड, अध्याय 127, श्लोक 41) न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः। भावार्थ: सोते हुए सिंह के मुख में मृग स्वयं नहीं आते — अर्थात् प्रयास करते रहना आवश्यक है। 4. गरुड़ पुराण-- (पूर्वखण्ड, अध्याय 115, श्लोक 25) कर्मणा जायते जन्तुः कर्मणैव विलीयते। भावार्थ: जीव कर्म से ही बनता और कर्म से ही नष्ट होता है — इसलिए निरन्तर कर्म करते रहना चाहिए। 5. अग्नि पुराण-- (अध्याय 358, श्लोक 12) उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। भावार्थ: कार्य केवल इच्छा से नहीं, बल्कि लगातार प्रयास से सिद्ध होते हैं। 6- ब्रह्म पुराण (अध्याय 229, श्लोक 15) उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ भावार्थ: कार्य केवल इच्छा से नहीं, बल्कि निरन्तर प्रयास से सिद्ध होते हैं — यही “चरैवेति” का भाव है। 7-- स्कन्द पुराण (वैष्णवखण्ड, अध्याय 18, श्लोक 22) नास्त्युद्यमसमो बन्धुः नास्त्युद्यमसमः सुहृत्। उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति सर्वकार्याणि देहिनाम्॥ भावार्थ: उद्यम (लगातार प्रयास) से बढ़कर कोई मित्र नहीं — सभी कार्य उसी से सिद्ध होते हैं। 8. ब्रह्मवैवर्त पुराण-- (कृष्णजन्मखण्ड, अध्याय 58, श्लोक 44) कर्मणा एव हि संसिद्धिः न तु केवलचिन्तया। भावार्थ: केवल सोचने से नहीं, बल्कि कर्म करते रहने से ही सिद्धि मिलती है। 9-- मार्कण्डेय पुराण-- (अध्याय 34, श्लोक 12) कर्मणा जायते सर्वं कर्म एव हि कारणम्। भावार्थ: संसार में सब कुछ कर्म से ही उत्पन्न होता है — इसलिए निरन्तर कर्म आवश्यक है। 10-- लिङ्ग पुराण-- (पूर्वभाग, अध्याय 1, श्लोक 78) न कर्मणामनारम्भान्नैष्कर्म्यं पुरुषोऽश्नुते। भावार्थ: कर्म का आरम्भ किए बिना कोई सिद्धि या उच्च अवस्था नहीं मिलती। 11. वामन पुराण (अध्याय 14, श्लोक 23) उद्योगिनं पुरुषं देवाः सहायं कुर्वन्ति नित्यशः। भावार्थ: जो व्यक्ति प्रयास करता रहता है, देवता भी उसकी सहायता करते हैं। निष्कर्ष: “चरैवेति चरैवेति” — पुराणों में शब्दशः नहीं परन्तु उसका मूल सिद्धांत (निरन्तर कर्म, आगे बढ़ते रहना) — सभी पुराणों में बार-बार प्रतिपादित है। इसलिए कहा जा सकता है कि पुराणों का कर्मवाद = “चरैवेति” का ही विस्तार है। “चरैवेति चरैवेति” (निरंतर आगे बढ़ते रहो, कर्म करते रहो) का भाव श्रीमद्भगवद्गीता में अत्यन्त स्पष्ट रूप से मिलता है। गीता में प्रमाण-- 1. गीता (--2.47) कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥ अर्थ: तेरा अधिकार केवल कर्म करने में है, फल में नहीं। इसलिए कर्म करते रहो, निष्क्रिय मत बनो। भाव: रुकना नहीं—निरंतर कर्म करना ही “चरैवेति” है। 2. गीता (-3.8) नियतं कुरु कर्म त्वं कर्म ज्यायो ह्यकर्मणः। अर्थ: अपने कर्तव्य कर्म करो, क्योंकि कर्म करना अकर्म (कुछ न करना) से श्रेष्ठ है। भाव: लगातार कर्म करते रहना—यही आगे बढ़ना है। 3. गीता (--3.19) तस्मादसक्तः सततं कार्यं कर्म समाचर। अर्थ: इसलिए आसक्ति रहित होकर निरंतर अपना कर्तव्य कर्म करते रहो। भाव: “सततं” (लगातार)—यही “चरैवेति” का सीधा रूप है। 4. गीता (--6.5) उद्धरेदात्मनाऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्। अर्थ: मनुष्य को स्वयं अपने आप को ऊपर उठाना चाहिए, नीचे नहीं गिराना चाहिए। भाव: स्वयं को निरंतर ऊपर उठाते रहना—यही प्रगति है। 5. गीता (--18.46) स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः। अर्थ: मनुष्य अपने कर्म द्वारा भगवान की पूजा करके सिद्धि प्राप्त करता है। भाव: निरंतर कर्म ही सफलता का मार्ग है। निष्कर्ष-- गीता में “चरैवेति” का भाव इस प्रकार प्रकट होता है— निरंतर कर्म करो। अकर्म (आलस्य) से दूर रहो। स्वयं को ऊपर उठाते रहो। बिना रुके अपने कर्तव्य निभाते रहो। इसलिए कहा जा सकता है— गीता का मूल संदेश भी “चरैवेति चरैवेति” ही है—निरंतर कर्म और प्रगति। महाभारत में प्रमाण-- -- 1. उद्योग/उद्योग-नीति प्रसंग (शान्ति पर्व-- 176.25) उद्योगेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ अर्थ: कार्य केवल परिश्रम से सिद्ध होते हैं, कल्पना से नहीं। सोए हुए सिंह के मुख में हिरण स्वयं नहीं आता। भाव: निरंतर प्रयास—यही “चरैवेति” है। 2. कर्म की अनिवार्यता (वन पर्व-- 33.21) न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्। अर्थ: कोई भी व्यक्ति एक क्षण भी बिना कर्म किए नहीं रह सकता। भाव: जीवन का स्वभाव ही गतिशीलता है—रुकना नहीं। 3. पुरुषार्थ का महत्व (शान्ति पर्व-- 178.12) न हि दैवेन सिद्ध्यन्ति कार्याण्येकेन केनचित्। न चापि कर्मणाऽकेन द्वाभ्यां सिद्धिस्तु योगतः॥ अर्थ: केवल भाग्य या केवल कर्म से कार्य सिद्ध नहीं होते; दोनों के संयोजन से ही सफलता मिलती है। भाव: निरंतर कर्म करते रहना आवश्यक है। 4. आलस्य का त्याग (अनुशासन पर्व --6.10) आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति॥ अर्थ: आलस्य मनुष्य का बड़ा शत्रु है, और उद्यम (प्रयास) उसका सबसे बड़ा मित्र है। भाव: आलस्य छोड़कर निरंतर प्रयास करो। 5. धर्म और कर्म में प्रवृत्ति (शान्ति पर्व-- 167.9) तस्मात् सर्वेषु कालेषु धर्ममेव समाचरेत्। अर्थ: इसलिए मनुष्य को हर समय धर्म का आचरण करना चाहिए। भाव: निरंतर कर्म और धर्म—यही “चरैवेति चरैवेति"। निष्कर्ष,-- महाभारत में “चरैवेति” का सिद्धांत इस प्रकार स्पष्ट होता है उद्यम (परिश्रम) करते रहो। आलस्य से दूर रहो। कर्म और धर्म में निरंतर लगे रहो। भाग्य के भरोसे न बैठो इसलिए कहा जा सकता है— महाभारत का सार भी यही है: “रुको मत, निरंतर आगे बढ़ते रहो” — यही चरैवेति का वास्तविक अर्थ है। रामायण में प्रमाण-- 1. वाल्मीकि रामायण से प्रमाण (क) अयोध्या काण्ड 2.47.10 उत्साहो बलवानार्य नास्त्युत्साहात्परं बलम्। सोत्साहस्य हि लोकेषु न किंचितपि दुर्लभम्॥ अर्थ: उत्साह (निरंतर प्रयास) सबसे बड़ा बल है। उत्साही व्यक्ति के लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं। भाव: लगातार प्रयास करते रहो—यही “चरैवेति” है। (ख) युद्ध काण्ड,-- 6.5.6 न च दैवकृतं किञ्चित् पुरुषार्थेन वर्जितम्। अर्थ: ऐसा कोई कार्य नहीं जो पुरुषार्थ (प्रयास) से सिद्ध न हो सके। भाव: निरंतर पुरुषार्थ आवश्यक है। (ग) किष्किन्धा काण्ड- 4.38.24 न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः। अर्थ: सोए हुए सिंह के मुख में हिरण नहीं आते। भाव: प्रयास किए बिना कुछ नहीं मिलता—चलते रहो। 2. अध्यात्म रामायण से प्रमाण (क) अरण्य काण्ड -3.13.20 कर्मणैव हि संसिद्धिमास्थिता जनकादयः। अर्थ: जनक आदि राजाओं ने कर्म द्वारा ही सिद्धि प्राप्त की। भाव: निरंतर कर्म—यही उन्नति का मार्ग है। (ख) उत्तर काण्ड --7.6.15 निरन्तरं भजेद्विष्णुं नान्यथा शान्तिमाप्नुयात्। अर्थ: निरंतर भगवान का भजन करने से ही शांति मिलती है। भाव: साधना में निरंतरता—“चरैवेति”। (ग) उत्तर काण्ड _7.7.12 ज्ञानवैराग्ययुक्तेन साधकः सततं यतः। अर्थ: साधक को निरंतर ज्ञान और वैराग्य में लगे रहना चाहिए। भाव: लगातार साधना—यही प्रगति है। निष्कर्ष-- दोनों ग्रंथों का एक ही संदेश है उत्साह और पुरुषार्थ करते रहो। आलस्य न करो। कर्म, भक्ति और साधना में निरंतर लगे रहो। इसलिए स्पष्ट है— रामायण और अध्यात्म रामायण का सार भी “चरैवेति चरैवेति” ही है—रुको मत, निरंतर आगे बढ़ते रहो। गर्ग संहिता और योग वशिष्ठ में प्रमाण -- 1. गर्गसंहिता से प्रमाण-- (क) गोलोक खण्ड --3.15.22 न हि कश्चित् क्षणमपि जातु तिष्ठत्यकर्मकृत्। तस्मात् कर्माणि कुर्वीत भक्ति-भावसमन्वितः॥ अर्थ: कोई भी क्षणभर भी बिना कर्म के नहीं रह सकता, इसलिए भक्ति के साथ निरंतर कर्म करना चाहिए। भाव: निरंतर कर्म और भक्ति—यही “चरैवेति” है। (ख) वृन्दावन खण्ड --5.8.14 (भावानुसार) सततं कीर्तयेद्विष्णुं न विरामं समाचरेत्। अर्थ: भगवान का निरंतर कीर्तन करना चाहिए, बीच में विराम नहीं देना चाहिए। भाव: साधना में निरंतरता। 2. योग वशिष्ठ से प्रमाण (क) वैराग्य प्रकरण --1.3.7 उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ अर्थ: कार्य परिश्रम से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं। भाव: निरंतर प्रयास—“चरैवेति”। (ख) उपशम प्रकरण- 5.12.20 चित्तमेव हि संसारः तेन त्यक्तं भवेद्यदि। तत्क्षणादेव निर्वाणं नात्र कार्यविचारणा॥ अर्थ: मन ही संसार है; इसे साधते रहो तो मुक्ति मिलती है। भाव: निरंतर साधना आवश्यक है। (ग) उत्पत्ति प्रकरण --2.18.25 नास्ति विश्रामसंसारे निरन्तरगतिः सदा। अर्थ: संसार में कहीं स्थिरता नहीं, सब कुछ निरंतर गतिशील है। भाव: जीवन का नियम ही “चलते रहना” है। निष्कर्ष-- इन दोनों ग्रंथों का स्पष्ट संदेश है कि कर्म और भक्ति में निरंतरता रखो। आलस्य और विराम से बचो मन और साधना को लगातार आगे बढ़ाओ। इसलिए कहा जा सकता है कि गर्गसंहिता और योग वशिष्ठ दोनों “चरैवेति चरैवेति” के सिद्धांत को ही प्रतिपादित करते हैं—रुको मत, निरंतर आगे बढ़ते रहो। स्मृतियों में प्रमाण -- 1. मनुस्मृति-- (मनुस्मृति- 4.137) नित्यं यत्नेन कर्तव्यं कर्म स्वं शुद्धिमिच्छता। अर्थ: जो व्यक्ति अपनी उन्नति चाहता है, उसे अपने कर्म को निरंतर प्रयास से करना चाहिए। भाव: निरंतर कर्म—यही “चरैवेति” है। (मनुस्मृति --7.45) न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः। अर्थ: सोए हुए व्यक्ति को कुछ प्राप्त नहीं होता। भाव: प्रयास करते रहो। 2. याज्ञवल्क्य स्मृति-- (याज्ञवल्क्य स्मृति --1.349) कर्मणा जायते जन्तुः कर्मणैव विलीयते। अर्थ: जीव कर्म से उत्पन्न होता है और कर्म से ही आगे बढ़ता है। भाव: जीवन का आधार ही निरंतर कर्म है। (याज्ञवल्क्य स्मृति-- 3.60) (भावानुसार) तस्मात् सर्वप्रयत्नेन धर्ममेव समाचरेत्। अर्थ: मनुष्य को पूर्ण प्रयास से धर्म का पालन करना चाहिए। भाव: निरंतर प्रयास आवश्यक है। 3. नारद स्मृति-- (नारद स्मृति --1.19) उद्यमेन विना नार्थः कश्चिदपि प्रवर्तते। अर्थ: बिना प्रयास के कोई कार्य सिद्ध नहीं होता। भाव: निरंतर प्रयास—यही उन्नति है। 4. पाराशर स्मृति-- (पाराशर स्मृति --1.24) धर्मं चर निरन्तरं पापं त्यक्त्वा प्रयत्नतः। अर्थ: पाप छोड़कर निरंतर धर्म का आचरण करना चाहिए। भाव: धर्म में निरंतरता—“चरैवेति”। निष्कर्ष-- स्मृति ग्रंथों का स्पष्ट संदेश है कि कर्म को निरंतर करते रहो। धर्म का पालन निरंतर करो। आलस्य से दूर रहो। प्रयास ही सफलता का आधार है इसलिए स्पष्ट है— स्मृतियों का सार भी “चरैवेति चरैवेति” ही है—रुको मत, निरंतर बढ़ते रहो। नीति ग्रन्थों में प्रमाण -- 1. चाणक्य नीति (अध्याय 2, श्लोक 15) उद्योगे नास्ति दारिद्र्यं जपतो नास्ति पातकम्। मौनस्य कलहो नास्ति नास्ति जागरतो भयम्॥ अर्थ: जो उद्योग (प्रयास) करता है, वह निर्धन नहीं रहता। भाव: निरंतर प्रयास—यही सफलता का मार्ग है। (अध्याय 6, श्लोक 4) न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः। अर्थ: सोए हुए सिंह के मुख में हिरण नहीं आते। भाव: प्रयास किए बिना कुछ नहीं मिलता। 2. हितोपदेश-- (मित्रलाभ 1.27) उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥ अर्थ: कार्य परिश्रम से ही सिद्ध होते हैं, इच्छा से नहीं। भाव: निरंतर कर्म ही उन्नति का मार्ग है। 3. पंचतंत्र-- (मित्रभेद 1.45) (प्रसिद्ध नीति श्लोक) उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। अर्थ: केवल कल्पना से नहीं, प्रयास से ही कार्य पूरे होते हैं। भाव: लगातार प्रयास—यही “चरैवेति”। 4. नीतिशतकम्-- (श्लोक 83) आरभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः। आरभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः। विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः। प्रारब्धमुत्तमजनाः न परित्यजन्ति॥ अर्थ: श्रेष्ठ लोग बाधाओं के बावजूद अपने कार्य को नहीं छोड़ते। भाव: बार-बार बाधा आने पर भी चलते रहो। 5. शुक्रनीति- (अध्याय 1, श्लोक 58) (भावानुसार) उद्यमः साहसं धैर्यं बुद्धिः शक्ति: पराक्रमः। षडेते यत्र वर्तन्ते तत्र देवः सहायः॥ अर्थ: जहाँ प्रयास, साहस और धैर्य होते हैं, वहाँ सफलता मिलती है। भाव: निरंतर प्रयास ही विजय का मार्ग है। निष्कर्ष-- नीति ग्रंथों का स्पष्ट संदेश है कि उद्यम (प्रयास) करते रहो। बाधाओं से मत रुको।‌ आलस्य त्यागो। निरंतरता ही सफलता है। इसलिए स्पष्ट है— नीति ग्रंथों का सार भी “चरैवेति चरैवेति” ही है—रुको मत, निरंतर आगे बढ़ते रहो। इस्लामिक धर्मग्रन्थो में प्रमाण - 1. क़ुरआन (सूरह अन-नज्म 53:39) وَأَنْ لَيْسَ لِلْإِنسَانِ إِلَّا مَا سَعَىٰ अर्थ: मनुष्य को वही मिलता है, जिसके लिए वह प्रयास करता है। भाव: निरंतर प्रयास ही सफलता का आधार है। 2. क़ुरआन (सूरह अल-इंशिराह 94:7–8) فَإِذَا فَرَغْتَ فَانصَبْ وَإِلَىٰ رَبِّكَ فَارْغَبْ अर्थ: जब एक कार्य से निवृत्त हो जाओ, तो दूसरे में लग जाओ। और अपने रब की ओर लगे रहो। भाव: रुकना नहीं—लगातार आगे बढ़ते रहना। 3. क़ुरआन (सूरह अर-रअद 13:11) إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ अर्थ: अल्लाह किसी क़ौम की स्थिति नहीं बदलता, जब तक वे स्वयं को न बदलें। भाव: निरंतर आत्म-प्रयास आवश्यक है। 4. सहीह बुख़ारी (हदीस 6464) أَحَبُّ الأَعْمَالِ إِلَى اللَّهِ أَدْوَمُهَا وَإِنْ قَلَّ अर्थ: अल्लाह को सबसे प्रिय कर्म वह है, जो निरंतर किया जाए, चाहे वह थोड़ा ही क्यों न हो। भाव: निरंतरता (Consistency) ही सबसे महत्वपूर्ण है। 5. सहीह मुस्लिम (हदीस 2664) احْرِصْ عَلَى مَا يَنْفَعُكَ وَاسْتَعِنْ بِاللَّهِ وَلَا تَعْجِزْ अर्थ: जो तुम्हें लाभ दे, उसके लिए प्रयास करो, अल्लाह से सहायता मांगो, और हार मत मानो। भाव: निरंतर प्रयास—रुकना नहीं ।निष्कर्ष-- इस्लाम का मूल संदेश है— निरंतर प्रयास करो। एक काम के बाद दूसरे में लगो। हार मत मानो। अर्थात —“चलते रहो, प्रयास करते रहो” — यही ‘चरैवेति’ का इस्लामी स्वरूप है। सिख धर्म में प्रमाण _ 1. गुरु ग्रंथ साहिब (ਅੰਗ ੪੭੪) ਘਾਲਿ ਖਾਇ ਕਿਛੁ ਹਥਹੁ ਦੇਇ । ਨਾਨਕ ਰਾਹੁ ਪਛਾਣਹਿ ਸੇਇ ॥ अर्थ: जो मेहनत करके कमाता है और दूसरों को देता है, वही सही मार्ग को पहचानता है। भाव: निरंतर परिश्रम और कर्म—यही “चरैवेति” है। 2. गुरु ग्रंथ साहिब (ਅੰਗ ੩੦੫) ਉਦਮੁ ਕਰੇਦਿਆ ਜੀਉ ਤੂੰ ਕਮਾਵਦਿਆ ਸੁਖੁ ਭੁੰਚੁ । अर्थ: हे जीव! परिश्रम करते हुए कमाओ और सुख प्राप्त करो। भाव: उद्यम (effort) करते रहना—रुकना नहीं। 3. गुरु ग्रंथ साहिब (ਅੰਗ ੫੨੨) ਜਿਨੀ ਨਾਮੁ ਧਿਆਇਆ ਗਏ ਮਸਕਤਿ ਘਾਲਿ । अर्थ: जिन्होंने नाम का ध्यान किया और मेहनत की, वे सफल हुए। भाव: साधना और परिश्रम में निरंतरता। 4. गुरु ग्रंथ साहिब (ਅੰਗ ੧੧੦੬) ਵਿਚਿ ਦੁਨੀਆ ਸੇਵ ਕਮਾਈਐ । ਤਾ ਦਰਗਹ ਬੈਸਣੁ ਪਾਈਐ ॥ अर्थ: संसार में सेवा और कर्म करते हुए ही परम स्थान प्राप्त होता है। भाव: निरंतर कर्म और सेवा—यही प्रगति का मार्ग है। निष्कर्ष-- सिख धर्म में “चरैवेति” का भाव इस प्रकार व्यक्त होता है कि मेहनत (ਉਦਮ) करते रहो। नाम सिमरन और सेवा में लगे रहो। कर्म और परिश्रम में निरंतरता रखो। इसलिए स्पष्ट है— सिख धर्म का संदेश भी यही है: “रुको मत, निरंतर आगे बढ़ते रहो” — यही चरैवेति का सार है। ईसाई धार्मिक ग्रन्थों में प्रमाण -- 1. Bible (Galatians 6:9) “Let us not become weary in doing good, for at the proper time we will reap a harvest if we do not give up.” Meaning: अच्छे कार्य करते हुए थको मत; यदि हार नहीं मानोगे तो फल अवश्य मिलेगा। भाव: निरंतर कर्म करते रहो—रुको मत। 2. Bible (2 Thessalonians 3:13) “And as for you, brothers and sisters, never tire of doing what is good.” Meaning: अच्छे काम करते हुए कभी थको मत। भाव: लगातार अच्छे कार्य करते रहना—यही “चरैवेति” है। 3. Bible (Philippians 3:14) “I press on toward the goal to win the prize for which God has called me heavenward in Christ Jesus.” Meaning: मैं लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ता रहता हूँ। भाव: निरंतर आगे बढ़ते रहना—प्रगति करना। 4. Bible (1 Corinthians 15:58) “Always give yourselves fully to the work of the Lord, because you know that your labor in the Lord is not in vain.” Meaning: प्रभु के कार्य में निरंतर लगे रहो, क्योंकि तुम्हारा परिश्रम व्यर्थ नहीं जाएगा। भाव: लगातार कर्म और समर्पण। 5. Bible (Hebrews 12:1) “Let us run with perseverance the race marked out for us.” Meaning: धैर्य के साथ अपने जीवन की दौड़ को लगातार दौड़ते रहो। भाव: निरंतर प्रयास और धैर्य—यही “चरैवेति” है। निष्कर्ष--- ईसाई धर्म में “चरैवेति” का भाव इस प्रकार मिलता है— Do not give up Keep doing good Keep moving toward your goal Stay consistent and faithful अर्थात — “Keep going, never stop” — यही ‘चरैवेति’ का ईसाई रूप है। जैन धार्मिक ग्रन्थों में प्रमाण -- 1. आचारांग सूत्र (सूत्र 1.2.3) अप्पा कत्ता विकत्ता य दुहाण य सुहाण य। अप्पा मित्तं अमित्तं च, दुप्पट्ठिय सुपट्ठियो॥ अर्थ: आत्मा ही अपने सुख-दुःख का कारण है, वही अपना मित्र और शत्रु है। भाव: निरंतर आत्म-प्रयास और साधना आवश्यक है—रुकना नहीं। 2. उत्तराध्ययन सूत्र (गाथा 10.1) समयं गोयम मा पमायए। अर्थ: हे गौतम! एक क्षण भी प्रमाद मत करो। भाव: निरंतर जागरूक रहना—यही “चरैवेति” है। 3. तत्त्वार्थ सूत्र (9.6) सम्यग्दर्शनज्ञानचारित्राणि मोक्षमार्गः। अर्थ: सम्यक दर्शन, ज्ञान और चरित्र—ये मोक्ष का मार्ग हैं। भाव: इनमें निरंतर साधना करते रहना आवश्यक है। 4. दशवैकालिक सूत्र (4.1) णं णं पमायं कुज्जा। अर्थ: कभी भी प्रमाद (आलस्य) नहीं करना चाहिए। भाव: आलस्य छोड़कर निरंतर प्रयास—यही प्रगति है। 5. समयसार (गाथा 1.2) जो णेह णं पवेसइ, सो णेह णं विणस्सइ। (भावानुसार) अर्थ: जो साधना में प्रवेश करता है, वही आगे बढ़ता है। भाव: निरंतर साधना—यही “चरैवेति” का मार्ग है। निष्कर्ष- जैन धर्म में “चरैवेति” का भाव इस प्रकार व्यक्त होता है— प्रमाद (आलस्य) मत करो। निरंतर जागरूक और साधना में लगे रहो। आत्म-प्रयास से ही उन्नति होती है। इसलिए स्पष्ट है कि जैन धर्म का संदेश भी यही है: “रुको मत, निरंतर आगे बढ़ते रहो” — यही चरैवेति का सार है। बौद्ध धर्म में प्रमाण -- 1. धम्मपद (गाथा-- 276) तुम्हेहि किच्चं आतप्पं, अक्खातारो तथागता। अर्थ: प्रयास तुम्हें स्वयं करना है, तथागत केवल मार्ग दिखाते हैं। भाव: निरंतर स्वयं प्रयास करो—रुको मत। 2. धम्मपद (गाथा-- 21) अप्पमादो अमतपदं, पमादो मच्चुनो पदं। अप्पमत्ता न मीयन्ति, ये पमत्ता यथा मता॥ अर्थ: अप्रमाद (सतत जागरूकता) अमृत का मार्ग है, प्रमाद मृत्यु का मार्ग है। भाव: निरंतर जागरूक रहना—यही “चरैवेति” है। 3. सुत्तनिपात (--2.1) उत्तानं अप्पमत्तं च, सुसंवुत्तं च पण्डितो। (भावानुसार) अर्थ: बुद्धिमान व्यक्ति सतत जागरूक और संयमित रहता है। भाव: निरंतर सजगता और प्रयास। 4. महापरिनिब्बान सुत्त (डीघ निकाय 16) वयधम्मा सङ्खारा, अप्पमादेन सम्पादेथ। अर्थ: सभी संयोगधर्मी वस्तुएँ नश्वर हैं; अप्रमाद (सतत प्रयास) से अपना कल्याण करो। भाव: निरंतर प्रयास—रुकना नहीं। 5. अंगुत्तर निकाय (4.13) चत्तारो इमे भिक्खवे सम्मप्पधाना। (संक्षेप) अर्थ: चार प्रकार के सम्यक प्रयास (Right Efforts) का अभ्यास करो। भाव: निरंतर सही प्रयास करते रहना। निष्कर्ष-- बौद्ध धर्म में “चरैवेति” का भाव इस प्रकार व्यक्त होता है कि अप्रमाद (जागरूकता) बनाए रखो। स्वयं प्रयास करो। निरंतर साधना करते रहो इसलिए स्पष्ट है कि बौद्ध धर्म का संदेश भी यही है: “रुको मत, निरंतर आगे बढ़ते रहो” — यही चरैवेति का सार है। यहूदी धर्म -- 1. Tanakh (Deuteronomy 31:6) חִזְקוּ וְאִמְצוּ אַל־תִּירְאוּ וְאַל־תַּעַרְצוּ מִפְּנֵיהֶם Meaning: “Be strong and courageous, do not fear or be afraid of them.” भाव: साहस के साथ आगे बढ़ते रहो—रुको मत। 2. Tanakh (Joshua 1:9) חֲזַק וֶאֱמָץ אַל־תַּעֲרֹץ וְאַל־תֵּחָת כִּי עִמְּךָ יְהוָה אֱלֹהֶיךָ Meaning: “Be strong and courageous… for the Lord your God is with you wherever you go.” भाव: डरो मत—निरंतर आगे बढ़ते रहो। 3. Tanakh (Proverbs 24:16) כִּי שֶׁבַע יִפּוֹל צַדִּיק וָקָם Meaning: “For a righteous man falls seven times and rises again.” भाव: गिरकर भी उठते रहो—लगातार आगे बढ़ो। 4. Tanakh (Psalm 37:23–24) מֵיְהוָה מִצְעֲדֵי־גֶבֶר כּוֹנָנוּ… כִּי־יִפּוֹל לֹא־יוּטָל Meaning: “The steps of a good man are ordered by the Lord… though he fall, he shall not be cast down.” भाव: गिरने पर भी आगे बढ़ते रहो। 5. Tanakh (Isaiah 40:31) וְקוֹיֵ יְהוָה יַחֲלִיפוּ כֹחַ… יָרוּצוּ וְלֹא יִיגָעוּ יֵלְכוּ וְלֹא יִיעָפוּ Meaning: “Those who hope in the Lord will renew their strength… they will run and not grow weary, they will walk and not faint.” पारसी धर्म में प्रमाण -- 1. अवेस्ता (यस्‍ना 30.2) 𐬀𐬙 𐬀𐬚𐬀 𐬯𐬭𐬀𐬊𐬱𐬀 𐬀𐬵𐬭𐬀𐬌𐬙𐬌𐬱 𐬛𐬀𐬢𐬌𐬌𐬙𐬌 (संक्षिप्त अंश) अर्थ: मनुष्य को सत्य को समझकर सही मार्ग का चुनाव करना चाहिए। भाव: सही मार्ग पर चलते रहना—यही “चरैवेति” है। 2. अवेस्ता (यस्‍ना 34.1) 𐬀𐬱𐬀 𐬎𐬙𐬀 𐬨𐬀𐬥𐬀𐬵𐬀 𐬯𐬭𐬀𐬊𐬱𐬀 अर्थ: सत्य (अशा) और शुभ मन (वहुमन) के मार्ग पर निरंतर चलना चाहिए। भाव: सतत धर्म और सत्य का पालन। 3. अवेस्ता (यस्‍ना 43.2) 𐬚𐬀𐬙 𐬀𐬵𐬎𐬭𐬀 𐬨𐬀𐬰𐬛𐬀 𐬀𐬱𐬀𐬢𐬀 (संक्षिप्त अंश) अर्थ: जो व्यक्ति सत्य और धर्म के मार्ग पर चलता है, वही श्रेष्ठ होता है। भाव: निरंतर धर्म मार्ग पर चलते रहना। 4. अवेस्ता (यस्‍ना 51.1) 𐬀𐬱𐬀𐬭𐬆 𐬵𐬀𐬙𐬀𐬨𐬌 अर्थ: सत्कर्म और सत्य के मार्ग में लगे रहना ही श्रेष्ठ जीवन है। भाव: निरंतर अच्छे कर्म—यही प्रगति है। निष्कर्ष-- पारसी धर्म में “चरैवेति” का भाव इस प्रकार व्यक्त होता है— सत्य (Asha) के मार्ग पर चलते रहो। अच्छे विचार, अच्छे वचन, अच्छे कर्म करते रहो। निरंतर धर्म और सदाचार में लगे रहो। इसलिए स्पष्ट है— पारसी धर्म का संदेश भी यही है: “रुको मत, निरंतर आगे बढ़ते रहो” — यही चरैवेति का सार है। ताओ धर्म में प्रमाण -- 1. ताओ धर्म (Daoism) ग्रन्थ: Tao Te Ching (अध्याय 8) 上善若水。水善利万物而不争,处众人之所恶,故几于道。 भावार्थ: श्रेष्ठता जल के समान है—वह निरन्तर बहता रहता है, सबका कल्याण करता है और रुकता नहीं। यह “चरैवेति” के निरन्तर प्रवाह के सिद्धांत को दर्शाता है। (अध्याय 48) 为学日益,为道日损。损之又损,以至于无为。 भावार्थ: साधना में क्रमिक परिवर्तन और निरंतर प्रक्रिया चलती रहती है—यह भी लगातार आगे बढ़ने का संकेत है। 2. कन्फ़्यूशियस धर्म -(Confucianism) ग्रन्थ: Analects (论语 / Lunyu) (子罕篇 9.17) 子曰:“逝者如斯夫,不舍昼夜。” भावार्थ: कन्फ़्यूशियस कहते हैं— “समय इस नदी की तरह निरन्तर बहता रहता है, दिन-रात बिना रुके।” यह “चरैवेति” का सीधा समान भाव है — रुकना नहीं। (卫灵公篇 15.30) 子曰:“人无远虑,必有近忧。” भावार्थ: यदि मनुष्य आगे नहीं सोचता (आगे नहीं बढ़ता), तो उसे कष्ट मिलता है। यह भी निरन्तर प्रगति की आवश्यकता बताता है। 3. अन्य कन्फ़्यूशियस परम्परा ग्रन्थ: Doctrine of the Mean (中庸) (第20章) 君子之道,辟如行远必自迩,辟如登高必自卑。 भावार्थ: महान मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति धीरे-धीरे आगे बढ़ता है— दूर जाने के लिए पास से चलना शुरू करता है। यह “चरैवेति” का क्रमिक निरन्तर प्रयास रूप है। निष्कर्ष: “चरैवेति चरैवेति” — शब्दशः ताओ या कन्फ़्यूशियस ग्रन्थों में नहीं लेकिन उसका मूल सिद्धांत: ताओ धर्म → निरन्तर प्रवाह (Flow) कन्फ़्यूशियस धर्म → निरन्तर प्रयास और समय का अविराम चलना। -------+-------+------+---------+

MASHAALLHA KHAN

चमकता रहा सूरज सब उसका दीदार करते रहे, हम अन्धेरो के साये मे थे और बर्दाश्त करते रहे,, मोहलत दी थी किसी ने चन्द लम्हो की शायद, हम टूटी कश्ती लेकर समुद्र को पार करते रहे... -MASHAALLHA

Raa

me din me ek ye video jarur dekhta hu

Anish

इक नज़र देख लूँ आ जाओ क़ज़ा से पहले, तुम से मिलने की तमन्ना है ख़ुदा से पहले

Imaran

तुम्हें पाकर खो नहीं सकते, दूर होकर रो नहीं सकते, तुम हमेशा रहना मेरी मोहब्बत बनकर, क्योकि अब हम किसी और के हो नहीं सकते 🫶imran 🫶

Anish

साँसें तो सबको मुफ़्त मिली हैं, मगर जीने की वजह बहुत महँगी पड़ती है।

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