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Sonu Kumar
अगर भारत में भी अमेरिका की तरह बिना लाइसेंस बंदूक खरीदने की अनुमति दी जाए तो इसके क्या परिणाम हो सकते हैं?
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पेड मीडिया के प्रायोजक पूरी दुनिया के नागरिको को हथियार विहीन बनाये रखना चाहते है। अत: बंदूक रखने के अधिकार को लेकर पेड मीडिया द्वारा बहुत बड़े पैमाने पर भ्रम फैलाया गया है। जब से पेड मीडिया का प्रादुर्भाव हुआ है तब से उन्होंने जितनी गलत फहमियां Gun Rights के बारे में फैलायी है उतनी किसी और विषय के बारे में नही फैलायी।
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और भारत को Arms Control के कारण जितनी क्षति उठानी पड़ी उतनी क्षति और किसी अन्य वजह से नहीं उठानी पड़ी। और जहाँ तक मैं देखता हूँ, आने वाले समय में भारत को जो सबसे गंभीर नुकसान उठाना पड़ेगा वह भी गन कंट्रोल के कानून के कारण ही उठाना पड़ेगा !!
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[ टिप्पणी : इस जवाब में 3 खंड है -
खंड (अ) में कुछ तर्क एवं सूचनाएं है जो पेड मीडिया द्वारा Gun Rights के बारे में फैलाये गए भ्रम को काटती है।
खंड (ब) में वह प्रकिया है जिसके गेजेट में आने से देश व्यापी जनमत संग्रह प्रक्रिया शुरू होगी ताकि आम भारतीय नागरिक यह तय कर सके कि वे बंदूक रखने का अधिकार चाहते है या नहीं।
खंड (स) में मैंने बताया है कि भारत में प्रस्तावित Gun Law लागू होने से किस तरह के संभावित परिवर्तन आयेंगे।
खंड (ब) महत्वपूर्ण है, और यदि आप इस तथ्य से परिचित है कि हथियार विहीन नागरिक समुदायों का क्या हश्र होता है तो सीधे खंड (ब) पढ़ सकते है। ]
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खंड (अ)
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हालांकि, पेड मीडिया द्वारा Gun Rights के बारे में दिए जाने वाले कई आर्गुमेंट इतने बकवास होते है, है उन्हें उत्तरित ही नहीं किया जाना चाहिए। अत: गन कंट्रोल के पक्ष में दिए जाने वाले निहायत ही स्तरहीन तर्कों को मैंने इसमें शामिल नहीं किया है।
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(1) दरअसल, जब किसी देश का कानून यह कहता है कि आप बंदूक नहीं रख सकते तो इसका परिणाम यह होता है कि :
जो 0.05% व्यक्ति क़ानून में नहीं मानते, वे क़ानून तोड़कर अवैध रूप से बंदूक ले आते है,
और जो क़ानून में मानते है, वे क़ानून की चपेट में आकर बंदूक नहीं ले पाते
हथियारबंद होने के कारण अब ये 0.05% अपराधी शेष Law Abide Citizens पर बढ़त बना लेते है !!
तो अंततोगत्वा बंदूक नहीं रखने का क़ानून बनाकर सरकार समुदाय के 99.95% शरीफ लोगो को हथियारों से वंचित कर देती है, लेकिन उन 0.05% को नहीं रोकती / रोक पाती जो क़ानून को उड़ता हुआ भुनगा समझते है !!
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(2) दरअसल ज्यादातर गन क्राइम अवैध बंदूको से होते है, लाइसेंसी या रजिस्टर्ड बंदूक से अपराध की सम्भावना बेहद कम होती है। वजह ?
लाइसेंस वाली बंदूक को ट्रेक किया जा सकता है। यदि प्रत्येक व्यक्ति को रजिस्टर्ड बंदूक थमा दी जाए तो जब भी गन क्राइम होगा तब व्यक्ति पकड़ा जाएगा। क्योंकि पंजीकृत या लाइसेंस वाली बंदूक को ट्रेक किया जा सकता है।
लेकिन जब सरकार बंदूक रखने का अधिकार नहीं देती तो क़ानून तोड़ने वाले व्यक्ति अवैध बंदूके ले आते है, और वे जानते है कि उन्हें ट्रेक नहीं किया जा सकता, अत: अपराध करने के लिए प्रोत्साहित होते है !!
इस तरह बंदूक न रखने का क़ानून यह सुनिश्चित करता है कि लोग अवैध बंदूके रखेंगे, फिर उनसे वे क्राइम करेंगे और फिर उन्हें पकड़ा भी नहीं जा सकेगा !! अपराधी के पास रजिस्टर्ड / लाइसेंसी बंदूक होगी तो उसका जोखिम बढ़ जायेगा, और उसके अपराध करने की सम्भावना घटेगी।
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(3) वास्तविकता यह है कि बंदूक अच्छी या बुरी नहीं होती। बंदूक से अपराध होगा या रक्षा होगी यह इस बात से तय होता है, कि बंदूक किसके हाथ में है। क़ानून के मानने वाले के हाथ में बंदूक सुरक्षा देती है, लेकिन जब बंदूक अपराधिक प्रवृति के व्यक्ति के हाथ में होती है तो यह हमें नुकसान देने लगती है।
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तो आपके घर परिवार में, मोहल्ले में फेसबुक फ्रेंड्सलिस्ट आदि में ऐसे कितने लोग है जिनके हाथ में बंदूक आने के साथ ही वे लूटपाट करना शुरू कर देंगे !! मेरे अनुमान में किसी भी समाज में इनकी संख्या 0.05% से अधिक नहीं है।
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यह स्थापित तथ्य है कि समुदाय के 99.05% नागरिक क़ानून का पालन करने वाले होते है, अत: जब Mass के पास बंदूक जाती है तो इस वजह से क्राइम रेट कभी नहीं बढती, कि आम नागरिको को बंदूक दे दी गयी है। क्राइम रेट बढ़ने की वजहें भिन्न होती है, किन्तु उन्हें गन क्राइम के खाते में दिखाया जाता है, ताकि नागरिको के दिमाग में बंदूक के प्रति नफरत डाली जा सके।
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जब बंदूक की वजह से किसी की जान जाती है तो इसे बड़े पैमाने पर कवरेज दिया जाता है, किन्तु उन घटनाओ को छिपा लिया जाता है जब बंदूको ने नागरिको की रक्षा की। और इस तरह असंतुलित रिपोर्टिंग करके वे यह सुनिश्चित करते है कि आम नागरिक बंदूक रखने के अधिकार के खिलाफ बने रहे।
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(4) क्या भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार नहीं देंगे ?
यह गलत धारणा ( Height of Misconception ) पेड मीडिया द्वारा खड़ी की गयी है ताकि नागरिको को हथियार विहीन रखने के लिए कन्विंस किया जा सके। वे एक तरफ़ा एवं चयनात्मक सूचनाओ का इस्तेमाल करके यह भ्रम खड़ा करते है। मैं आपको इसका एक जीता जागता व्यवहारिक उदाहरण देता हूँ ।
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भारत के ही कर्नाटक राज्य के कूर्ग जिले में लगभग 70 से 80% नागरिको के पास बंदूके है, किन्तु वहां पर गन क्राइम रेट तुलनात्मक रूप से निम्न है। कर्नाटक भी भारत में ही है, और यदि भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार देंगे तो अब तक कूर्ग में लोगो ने एक दुसरो को मार क्यों नहीं दिया। मतलब यहाँ कोई लॉजिक लगाने की जगह ही नहीं है !! सीधा सबूत सामने है !!
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वहां के प्रत्येक नागरिक को बंदूक रखने की छूट है, और महिला, पुरुष सभी बंदूके रखते है। और अनिवार्य रूप से रखते है। और कई कई बंदूके रखते है !!
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यह एक वास्तविक उदाहरण है जो यह सिद्ध करता है कि - भारतीयों को बंदूक रखने का अधिकार देने से वे एक दुसरे को मार देंगे , नामक धारणा पूरी तरह से झूठ है, और पेड मीडिया द्वारा भारतीयों के दिमाग में डाली गयी है।
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और ज्यादातर भारतीय इस धारणा के शिकार इसीलिए है क्योंकि पेड मीडिया इस सूचना को छिपाता है कि, कूर्ग जिले के 80% नागरिको के पास पंजीकृत बंदूके है !! और इसी तर्ज पर बंदूक के बारे में सही सूचना देने वाली कई खबरें छिपायी जाती है, और भ्रमित करने वाली खबरों को उछाला जाता है !!
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आजादी के बाद कूर्ग जिले के नागरिको से बंदूके छीनने की 2 बार तिकड़म लगायी गयी लेकिन दोनों बार कोई वाजिब वजह नहीं होने के कारण सरकार को पीछे हटना पड़ा। पहली कोशिश (शायद 1972 में) इंदिरा जी ने की थी और दूसरा प्रयास 2013 में चिदम्बरम ने किया।
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तब कूर्ग में चुनाव थे, अत: जिलाधीश ने सरकार को चिट्ठी लिखी कि – शांति पूर्ण ढंग से चुनाव सम्पन्न करवाने के लिए नागरिको के हथियार जब्त करने की अनुमति दी जाए, और चुनाव के बाद इन्हें बंदूके फिर से वितरित कर दी जाएगी !!
DC’s letter on Kodava firearm licence kicks up a row
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जब नागरिको को यह जानकारी हुयी तो उन्होंने कलेक्टर एवं एसपी कार्यालय को घेर लिया। उनका तर्क था कि पिछले 150 वर्षो से हम बंदूके रख रहे है, और आज तक कभी क़ानून व्यवस्था की गड़बड़ी नहीं हुयी है, तो किस आधार पर इस तरह का पत्र लिखा गया है। अंतत सरकार को पीछे हटना पड़ा।
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कूर्ग जिले के नागरिको को बंदूक रखने की छूट ब्रिटिश ने दी थी। और तब से उन्हें लगातार आर्म्स एक्ट में यह छूट दी जाती रही है। कूर्ग के प्रत्येक मूल निवासी को बंदूक रखने और धारण करने की छूट है। और जब वे अपने शहर से बाहर जाते है तब भी उन्हें छूट है कि वे 100 राउंड कारतूस एवं बंदूक साथ में लेकर जा सकते है !! अभी उनकी इस छूट को 2029 तक बढ़ा दिया गया है। और 2029 में इस छूट को फिर से 10 साल आगे बढ़ाना पड़ेगा, क्योंकि वे अपने हथियार किसी भी कीमत पर देने के लिए राजी नहीं है।
Government continues British-era exemption given to Kodavas of Coorg for arms licence
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और वे जब प्रदर्शन करने सड़को पर आते है तो भी उनके हाथो में बंदूक रहती है !! और फिर भी आपको भारत में अपने आस पास हर तरफ ऐसे लोग मिलेंगे जो लगातार यह बात दोहराते है कि भारतीयों को बंदूक देने से वे एक दुसरे को मार देंगे !! क्यों ?
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क्योंकि पेड मीडिया में उन्होंने यही सब देखा पढ़ा सुना है !!! मैं और मेरे जैसे कई कार्यकर्ता पिछले 6-7 साल से विभिन्न मंचो पर कूर्ग के बारे में यह तथ्य रख रहे है, लेकिन आश्चर्य का विषय है कि अभी तक पेड मीडिया के प्रायोजको को अभी तक कूर्ग के बारे में कोई लॉजिक नहीं सूझा है !! बहरहाल, उम्मीद है कि , जल्दी ही वे इस बारे में कोई थ्योरी गढ़ कर लायेंगे ताकि तथ्य होने के बावजूद इसे तर्क से काटा जा सके !!
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तलवार के बारे में यही छूट सिक्खों को 1923 में दी गयी थी। हालांकि सिक्खों को यह छूट ऑफिशियली नहीं है, किन्तु सिक्ख यदि तलवार धारण करता है, तो प्रशासन द्वारा इसकी अवहेलना की जाती है। उल्लेखनीय है कि मास्टर तारा सिंह जी ने कृपाण दा मोर्चा आन्दोलन चलाकर यह छूट देने के लिए गोरो को बाध्य कर दिया था।
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(5) कैसे अमेरिकी नेता अपने नागरिको को बंदूक रखने को प्रोत्साहित करते है ?
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ओबामा का उदाहरण लीजिये। राष्ट्रपति रहते हुए आपने ओबामा को पेड मीडिया में गन कंट्रोल के बारे में काफी रोते धोते हुए देखा होगा। दरअसल वे यह ड्रामा बंदूके बेचने के लिए करते थे। जब भी हथियारों की बिक्री में गिरावट आती है, हथियार कम्पनियाँ नेताओं को बन्दूको पर प्रतिबन्ध लगाने का बयान देने को कहती है। नतीजा — लोग ज्यादा बन्दुके खरीदते है।
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ओबामा कहते है कि मैं बन्दूको पर प्रतिबन्ध लगा दूंगा। पर वे सिर्फ बयान देते है, इसके लिए क़ानून नहीं बनाते !!
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यह इस तरह है कि, यदि सरकार द्वारा टोस्टर पर प्रतिबन्ध लगाने का बयान दिया जाए और आपके पास टोस्टर न हो तो आप सबसे पहले क्या खरीदेंगे ? टोस्टर !! और इस तरह के बयान सुनकर सभी अमेरिकी नागरिक बंदूके खरीदने के लिए दौड़ लगाने लगते है !!
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ऐसा ड्रामा ओबामा दो बार कर चुके है, और दोनों ही बार बन्दूको की बिक्री में जबरदस्तउछाल आया।
Obama gun control push backfires as industry sees unprecedented surge
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इस तरह के बयानों को पूरे विश्व में पेड मिडिया द्वारा इस तरह फैलाया जाता है ताकि हथियार विहीन देशो के भोले जीव इस मुगालते के शिकार हो जाए कि ओबामा नागरिको को हथियार रखने की छूट देने के खिलाफ है, अमेरिका में बन्दूको के कारण गदर मची पड़ी है, अत: हमें भी बन्दूको के खिलाफ और भी सख्त कानून बनाने चाहिए !!
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बयानों को सुनने के जगह यदि आप अमेरिकी नेताओं द्वारा बनाए गए क़ानून देखिये, तो तस्वीर उल्टी नजर आती है। जोर्जिया यह कानून पास करता है, प्रत्येक परिवार को कम से कम एक बंदूक रखना अनिवार्य होगा !!
‘You must own a gun’: Georgia town passes mandatory firearms law
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अगले खंड में मैंने उस इबारत के बारे में बताया है, जिसे गेजेट में छापने से भारत में हथियारबंद नागरिक समाज की रचना की दिशा में काम शुरू होगा।
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खंड (ब)
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बंदूक रखने का अधिकार इस तरह का है कि, इस क़ानून के आने से प्रारंभिक चरण में एक आयाम में नकारत्मक नतीजे भी आयेंगे, और कई आयाम में यह अच्छे परिणाम भी देगा। यदि किसी कानून के आने से किसी आयाम में नुकसान होना संभावित है तो मेरे विचार में ऐसे कानून को सीधे लागू नहीं किया जाना चाहिए बल्कि इस पर जनमत संग्रह करवाया जाना चाहिए, ताकि देश के नागरिक इस बारे में फैसला ले सके। यदि नागरिको का बहुमत ऐसे क़ानून को ख़ारिज कर देता है तो इसे लागू नहीं किया जाना चाहिए।
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वस्तुत: मैंने भारत में Gun Law का जो क़ानून ड्राफ्ट प्रस्तावित किया है, वह सीधे लागू नहीं होगा। पहले इस पर देश व्यापी जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि देश की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता इस पर हाँ दर्ज कर देते है तो हो यह क़ानून पीएम लागू करेंगे अन्यथा नहीं। निचे मैंने इसका प्रस्तावित ड्राफ्ट दिया है :
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—-क़ानून ड्राफ्ट का प्रारम्भ—-
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जनमत संग्रह का प्रस्ताव ; बंदूक रखने का अधिकार
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( Proposal for Referendum ; Right to Bear Gun )
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इस क़ानून का सार : प्रधानमंत्री इस क़ानून को 'सिर्फ तब' लागू करेंगे जब जनमत संग्रह में भारत के कुल मतदाताओं के कम से कम 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने की स्पष्ट सहमती दें। इस क़ानून से सम्बंधित सभी मामलो का निपटान नागरिको की जूरी द्वारा किया जाएगा जज द्वारा नहीं। जूरी किसी नागरिक के बंदूक धारण करने पर प्रतिबन्ध या दंड लगा सकेगी।
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यह क़ानून प्रत्येक भारतीय को बंदूक रखने का अधिकार देता है। साथ ही 10 लाख से अधिक संपत्ति रखने वाले नागरिको के लिए कम से कम 1 बंदूक एवं 100 जिंदा कारतूस रखना अनिवार्य होगा। प्रधानमंत्री किसी राज्य के 55% मतदाताओ की सहमती से यह क़ानून किसी राज्य या किसी जिले में भी लागू कर सकते है। मुख्यमंत्री भी इस क़ानून को अपने राज्य के कुछ जिलो या पूरे राज्य में लागू कर सकते है। #GunLawReferendum
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नागरिको एवं अधिकारियों के लिए निर्देश
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(01) यह क़ानून गेजेट में आने के साथ ही भारत में एक देश व्यापी जनमत संग्रह किया जाएगा। यदि भारत की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओ के 55% मतदाता इस क़ानून को लागू करने के लिए हाँ दर्ज कर देते है, सिर्फ तब ही यह क़ानून लागू होगा, अन्यथा नहीं।
जनमत संग्रह में मतदाता के पास सिर्फ ‘हाँ’ या ‘ना’ दर्ज कराने का विकल्प होगा, और जनमत संग्रह पूर्ण होने से पहले प्रधानमंत्री इस कानून की किसी भी धारा में कोई बदलाव नहीं करेंगे। इस क़ानून के लागू होने के बाद भारत का कोई भी मतदाता यदि इस क़ानून की किसी धारा में कोई आंशिक या पूर्ण परिवर्तन चाहता है, तो वह अमुक बदलाव के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय में एक शपथपत्र प्रस्तुत कर सकता है।
कलेक्टर 20 रू प्रति पृष्ठ की दर से शुल्क लेकर मतदाता का शपथपत्र स्वीकार करेगा, और इसे स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा ताकि अन्य मतदाता अमुक शपथपत्र पर अपनी सहमती दर्ज करवा सके।
यदि देश की मतदाता सूची में दर्ज कुल मतदाताओं के 55% नागरिक अमुक शपथपत्र पर हाँ दर्ज करवा देते है तो प्रधानमंत्री शपथपत्र में दिए गए सुझावों को लागू करने के लिए आदेश जारी कर सकते है।
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(02) इस क़ानून में वयस्क नागरिक से आशय है - ऐसा भारतीय नागरिक जिसकी आयु 22 वर्ष से अधिक हो। यह क़ानून 22 वर्ष से कम उम्र के नागरिको को बंदूक धारण करने की अनुमति नहीं देता है। 22 वर्ष से कम आयु के नागरिक स्पष्ट रूप से इस क़ानून के दायरे से बाहर रहेंगे।
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(03) यह क़ानून लागू होने के बाद भारत का कोई भी वयस्क नागरिक अपने पास छोटी, मध्यम या बड़े आकार की कोई भी पंजीकृत (Registered) बन्दूक रख सकेगा।
बंदूक रखने के लिए नागरिक को जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपनी बंदूक का पंजीयन कराना होगा।
कोई भी नागरिक किसी भी श्रेणी की 2 बंदूके अपने पास रख सकेगा।
दो से अधिक बंदूके रखने के लिए नागरिक को जिला पुलिस प्रमुख से लाइसेंस लेना होगा।
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(04) यदि कोई वयस्क नागरिक 10 लाख से अधिक संपत्ति का मालिक है तो उसे अपने घर में निम्नलिखित संख्या में बंदूक एवं कारतूस रखना अनिवार्य होगा :
10 लाख से अधिक संपत्ति – 1 छोटी बंदूक एवं 100 कारतूस
20 लाख से अधिक संपत्ति – 1 मध्यम आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
30 लाख से अधिक संपत्ति – 1 बड़े आकार की बंदूक एवं 100 कारतूस
संपत्ति में 1 करोड़ के मूल्य तक के 1 घर एवं तथा 10 लाख तक के फर्नीचर को शामिल नहीं किया जाएगा
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(05) इस क़ानून से सम्बंधित सभी विवादों की सुनवाई नागरिको की जूरी करेगी। यदि लॉटरी में आपका नाम निकल आता है तो आपको जूरी ड्यूटी के लिए बुलाया जा सकता है। जूरी में आकर आपको आरोपी, पीड़ित, गवाहों व दोनों पक्षों के वकीलों द्वारा प्रस्तुत सबूत देखकर बहस सुननी होगी और सजा / जुर्माना या रिहाई का फैसला देना होगा।
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अधिकारीयों के लिए निर्देश
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(06) प्रधानमंत्री प्रत्येक जिले में एक जिला शस्त्र अधिकारी (DGO = District Gun Officer) की नियुक्ति करेंगे। जिला शस्त्र अधिकारी एवं उसका स्टाफ वोट वापसी एवं जूरी मंडल के दायरे में होगा। वोट वापसी की के लिए धारा 14 देखें।
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(07) जिला शस्त्र अधिकारी तमंचे, पिस्तौल, राइफल, मशीनगन, कार्बाइन आदि बन्दूको का वर्गीकरण करने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों में बन्दूको की सूची प्रकाशित करेगा :
छोटी बंदूको के प्रकार।
मध्यम आकार की बंदूको के प्रकार।
बड़ी बंदूको के प्रकार।
कारतूस, गोले तथा उनके प्रकार।
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(08) जिला शस्त्र अधिकारी सभी नागरिकों को बंदूक चलाने एवं इसके रख रखाव के लिए अनिवार्य ट्रेनिंग तथा वैकल्पिक ट्रेनिंग के नियम निर्धारित करेगा।
अनिवार्य प्रशिक्षण कार्यक्रम की घोषणा होने पर जिला क्षेत्र में रहने वाले 22 से 50 वर्ष की आयु के सभी नागरिकों के लिए 2 वर्ष के भीतर प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा।
DGO प्रशिक्षण शिविरो के संचालन के लिए आवश्यक निधि रक्षा मंत्री आदि से प्राप्त कर सकता है, या अनुदान, चंदे आदि स्वीकार कर सकता है। प्रशिक्षण शुल्क प्रशिक्षुओं द्वारा देय होगा, तथा प्रशिक्षण शुल्क की दरें जिला शस्त्र अधिकारी द्वारा तय की जाएँगी।
DGO प्रति सप्ताह महा-जूरी मंडल की उपस्थिति में मतदाता सूची से 0.01% वयस्क नागरिको का चयन लॉटरी से करेगा। DGO या उसके द्वारा नियुक्त कर्मचारी लॉटरी द्वारा चुने हुए नागरिकों के यहाँ जाकर ये सुनिश्चित करेगा कि वे नागरिक निर्धारित नियम के अनुसार बन्दूक तथा कारतूस रख रहे है या नहीं।
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(09) भारत सरकार इंसास राइफल, 303, 202, .22 रिवोल्वर और भारतीय पुलिस द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी बंदूकें, जो ‘इंसास से कम’ के स्तर की है, उनके डिजाईन सार्वजनिक करेगी। कोई भी नागरिक इस डिजाईन से बिना किसी लाइसेंस के, सिर्फ पंजीकरण करवाकर बंदूक, बन्दुक के पुर्जे, कारतूस, बुलेट प्रूफ जैकेट बनाने की फैक्ट्री लगा सकता है।
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(10) भारत में यदि कोई भी व्यक्ति बंदूक बनाने की निर्माण इकाई, कारखाना आदि लगाना चाहता है तो वह जिला शस्त्र अधिकारी के पास अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर कारखाना शुरू कर सकेगा। कारखाना शुरू करने के लिए किसी लाइसेंस या किसी भी विभाग से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
यह क़ानून लागू होने के बाद भारत में बंदूक निर्माण में विदेशी निवेश की अनुमति नहीं होगी, और सिर्फ भारतीय नागरिको के सम्पूर्ण स्वामित्व वाली इकाइयां ही बंदूक निर्माण के कारखाने स्थापित कर सकेगी।
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(11) जूरी प्रशासक की नियुक्ति एवं महाजूरी मंडल का गठन
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(11.1) जिला शस्त्र अधिकारी प्रत्येक जिले में 1 जिला जूरी प्रशासक की नियुक्ति करेंगे। यदि नागरिक जूरी प्रशासक के काम-काज से संतुष्ट नही है तो वोट वापसी प्रक्रिया का प्रयोग करके जूरी प्रशासक को बदलने की स्वीकृति दे सकते है।
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(11.2) प्रथम महाजूरी मंडल का गठन : जिला जूरी प्रशासक एक सार्वजनिक बैठक में जिले की मतदाता सूची में से 25 वर्ष से 50 वर्ष की आयुवर्ग के 50 मतदाताओं का चुनाव लॉटरी द्वारा करेगा। इन सदस्यों का साक्षात्कार लेने के बाद जूरी प्रशासक किन्ही 20 सदस्यों को निकाल सकता है। इस तरह 30 महाजूरी सदस्य शेष रह जायेंगे।
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(11.3) अनुगामी महाजूरी मंडल : प्रथम महा जूरी मंडल में से जिला जूरी प्रशासक पहले 10 महाजूरी सदस्यों को हर 10 दिन में सेवानिवृत्त करेगा। पहले महीने के बाद प्रत्येक महाजूरी सदस्य का कार्यकाल 3 महीने का होगा, अत: 10 महाजूरी सदस्य हर महीने सेवानिवृत्त होंगे और 10 नए चुने जाएंगे। नये 10 सदस्य चुनने के लिए जूरी प्रशासक जिला मतदाता सूची में से लॉटरी द्वारा 20 सदस्य चुनेगा और साक्षात्कार द्वारा इनमें से किन्ही 10 की छंटनी कर देगा।
महाजूरी सदस्य हर शनिवार और रविवार को बैठक करेंगे। यदि बैठक होती है तो आरंभ सुबह 11 बजे और समाप्त शाम 4 बजे तक हो जानी चाहिए। जूरी सदस्य को प्रति उपस्थिती 600 रु. एवं यात्रा खर्च मिलेगा।
यदि निजी क्षेत्र के कर्मचारी को जूरी ड्यूटी पर बुलाया गया है तो नियोक्ता उसे आवश्यक दिवसों के लिए अवैतनिक अवकाश प्रदान करेगा। नियोक्ता अवकाश के दिनों का वेतन कर्मचारी के वेतन से काट सकता है।
सभी श्रेणी के सरकारी कर्मचारी स्पष्ट रूप से जूरी ड्यूटी के दायरे से बाहर रहेंगे।
जो नागरिक जूरी ड्यूटी कर चुके है, उन्हें अगले 10 वर्ष तक जूरी में नहीं बुलाया जायेगा।
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(12) जूरी मंडल का न्यायिक क्षेत्राधिकार
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(12.1) जूरी किसी नागरिक को बंदूक रखने से एक निश्चित समयावधि के लिए प्रतिबंधित कर सकेगी। तय अवधि बीत जाने पर अन्य जूरी मंडल यह फैसला करेगा कि आरोपी को हथियार रखने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं।
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(12.2) DGO या कोई भी नागरिक महाजूरी मंडल को उन लोगो की सूची दे सकेंगे जिनको बंदूक रखने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। यदि महाजूरी मंडल इसे अनुमोदित कर देता है, तो एक नए जूरी मंडल का गठन किया जाएगा। यदि जूरी मंडल के 67% सदस्य सहमती दे देते है तो अमुक व्यक्ति को बंदूक रखने से प्रतिबंधित कर दिया जाएगा।
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(12.3) यदि कोई नागरिक निर्धारित नियमों के अनुसार बंदूक या कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो महाजूरी मंडल सदस्य यह फैसला करेंगे कि मामले की सुनवाई की जानी चाहिए या नहीं।
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(12.4) यदि किसी बंदूक निर्माण इकाई के खिलाफ कोई शिकायत आती है, या कारखाने के मालिक के खिलाफ टैक्स वगेरह का कोई भी मामला दायर होता है तो सुनवाई जूरी द्वारा की जायेगी, जज द्वारा नहीं।
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(12.5) जिला जूरी प्रशासक, जिला शस्त्र अधिकारी के खिलाफ आने वाली सभी शिकायतों की सुनवाई भी जूरी करेगी।
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(13) जूरी मंडल द्वारा सुनवाई
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(13.1) यदि धारा (12) में दिए गए मामलो से सम्बंधित कोई भी विवाद है तो वादी अपनी शिकायत महाजूरी मंडल के सदस्यों को लिख कर दे सकते है। यदि महाजूरी मंडल मामले को निराधार पाते है तो शिकायत खारिज कर सकते है, अथवा इस मामले की सुनवाई के लिए एक नए जूरी मंडल के गठन का आदेश दे सकते है।
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(13.2) मामले की जटिलता एवं आरोपी की हैसियत के अनुसार महाजूरी मंडल तय करेगा कि 15-1500 के बीच में कितने सदस्यों की जूरी बुलाई जानी चाहिए। तब जूरी प्रशासक मतदाता सूची से लॉटरी द्वारा सदस्यों का चयन करते हुए एक नए जूरी मंडल का गठन करेगा और मामला इन्हें सौंप देगा।
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(13.3) अब यह जूरी मंडल दोनों पक्षों, गवाहों आदि को सुनकर फैसला देगा। प्रत्येक जूरी सदस्य अपना फैसला बंद लिफ़ाफ़े में लिखकर ट्रायल एडमिनिस्ट्रेटर को देंगे। दो तिहाई सदस्यों द्वारा मंजूर किये गये निर्णय को जूरी का फैसला माना जाएगा। किन्तु नौकरी से निकालने का फैसला लेने के लिए 75% सदस्यों के अनुमोदन की जरूरत होगी। प्रत्येक मामले की सुनवाई के लिए अलग से जूरी मंडल होगा, और फैसला देने के बाद जूरी भंग हो जाएगी। पक्षकार चाहे तो फैसले की अपील उच्च जूरी मंडल में कर सकते है।
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(13.4) यदि यह सिद्ध होता है कि आरोपी निर्धारित नियम के अनुसार बंदूक तथा कारतूस अपने घर पर नहीं रख रहा है, तो जूरी सदस्य उसकी संपत्ति के 5% के अनुपात तक जुर्माना ( इस संपत्ति में 1 करोड़ का 1 घर तथा 10 लाख तक का फर्नीचर शामिल नहीं किया जाएगा ) और / या 2 माह के कारावास की सजा सुना सकेंगे। अपवादित मामलों को छोड़कर, प्रथम अपराध के लिए जुर्माना 2% तक, द्वितीय अपराध के लिए 4% तक तथा तीसरे तथा अन्य अपराधों के लिए यह जुर्माना 5% तक हो सकेगा। प्रथम अपराध कारावास द्वारा दंडनीय नहीं हो सकेगा।
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(14) वोट वापसी ; जिला शस्त्र अधिकारी
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(14.1) 35 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुका कोई भी नागरिक जिला कलेक्टर के सामने स्वयं या किसी वकील के माध्यम से जिला शस्त्र अधिकारी एवं जिला जूरी प्रशासक बनने के लिए ऐफिडेविट प्रस्तुत कर सकेगा। जिला कलेक्टर सांसद के चुनाव में जमा की जाने वाली राशि के बराबर शुल्क लेकर उसका आवेदन स्वीकार कर लेगा, तथा उसे एक विशिष्ट सीरियल नम्बर जारी करेगा। कलेक्टर एफिडेविट को स्कैन करके प्रधानमंत्री की वेबसाईट पर रखेगा।
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(14.2) कोई भी नागरिक किसी भी दिन पटवारी कार्यालय में जाकर जूरी प्रशासक एवं जिला शस्त्र अधिकारी के किसी भी प्रत्याशी के समर्थन में हाँ दर्ज करवा सकेगा। पटवारी अपने कम्प्यूटर में मतदाता की हाँ को दर्ज करके रसीद देगा। पटवारी मतदाताओं की हाँ को प्रत्याशीयों के नाम एवं मतदाता की पहचान-पत्र संख्या के साथ जिले की वेबसाईट पर भी रखेगा। मतदाता किसी पद के प्रत्याशीयों में से अपनी पसंद के अधिकतम 5 व्यक्तियों को स्वीकृत कर सकता है।
स्वीकृति (हाँ) दर्ज करने के लिए मतदाता 3 रूपये फ़ीस देगा। BPL कार्ड धारक के लिए फ़ीस 1 रुपया होगी
यदि कोई मतदाता अपनी स्वीकृती रद्द करवाने आता है तो पटवारी एक या अधिक नामों को बिना कोई फ़ीस लिए रद्द कर देगा।
पटवारी प्रत्येक सोमवार एवं कलेक्टर प्रत्येक 5 तारीख को उम्मीदवारों की स्वीकृतियां सार्वजनिक करेंगे।
[ टिपण्णी : कलेक्टर ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता अपनी ‘हाँ’ SMS, ATM, मोबाईल एप द्वारा दर्ज कर सके।
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रेंज वोटिंग – प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री ऐसा सिस्टम बना सकते है कि मतदाता किसी प्रत्याशी को -100 से 100 के बीच अंक दे सके। यदि मतदाता सिर्फ हाँ दर्ज करता है तो इसे 100 अंको के बराबर माना जाएगा। यदि मतदाता अपनी स्वीकृति दर्ज नही करता तो इसे शून्य अंक माना जाएगा । किन्तु यदि मतदाता अंक देता है तब उसके द्वारा दिए अंक ही मान्य होंगे। रेंज वोटिंग की ये प्रक्रिया स्वीकृति प्रणाली से बेहतर है, और ऐरो की व्यर्थ असम्भाव्यता प्रमेय (Arrow’s Useless Impossibility Theorem ) से प्रतिरक्षा प्रदान करती है। ]
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——-ड्राफ्ट का समापन——
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(*) उपरोक्त क़ानून के राज्य एवं जिला स्तर के ड्राफ्ट भी प्रस्तावित किये है। अत: पीएम या सीएम चाहे तो यह क़ानून किसी एक राज्य या किसी जिले में भी लागू कर सकते है।
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खंड (स)
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ऊपर दिए गए क़ानून के बारे में कुछ स्पष्टीकरण
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(1) यह क़ानून भारत में कैसे लागू होगा ?
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इस क़ानून की धारा (1) में जनमत संग्रह का प्रावधान दिया गया है। प्रधानमंत्री इस क़ानून पर हस्ताक्षर करके इसे गेजेट में निकालेंगे और गेजेट में आने के साथ ही इस पर जनमत संग्रह शुरू हो जाएगा। तब भारत का कोई भी नागरिक चाहे तो पटवारी कार्यालय में जाकर या अपने रजिस्टर्ड मोबाइल द्वारा SMS भेजकर इस कानून पर अपनी हाँ दर्ज करवा सकता।
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यदि देश के कुल मतदाताओं के 55% नागरिक इस पर अपनी सहमती दर्ज करवा देते है, तब सिर्फ तब ही यह क़ानून देश में लागू होगा। जब तक 55% मतदाता इस पर अपनी सहमती दर्ज नहीं करते है, तब तक जनमत संग्रह जारी रहेगा। यदि किसी मतदाता ने इस क़ानून पर अपनी सहमती दर्ज करवा दी है, और वह अपनी सहमती रद्द करना चाहता है तो वह किसी भी दिन अपनी स्वीकृति को रद्द भी कर सकता है। इस तरह यह क़ानून नागरिको का स्पष्ट बहुमत प्राप्त करने के बाद ही देश में लागू होगा अन्यथा नहीं।
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(2) क्या प्रधानमंत्री यह क़ानून बिना जनमत संग्रह के लागू कर सकते है ?
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यदि प्रधानमंत्री चाहे तो इस कानून की धारा 1 में से जनमत संग्रह का प्रावधान निकाल कर इसे सीधे देश में लागू कर सकते है। प्रधानमंत्री चाहे तो बिना जनमत संग्रह के इस क़ानून को देश के किसी राज्य या किसी जिले में भी लागू कर सकते है। किन्तु इस क़ानून ड्राफ्ट के लेखको का मानना है कि, यह क़ानून 55% नागरिको की स्पष्ट सहमती प्राप्त करने के बाद ही लागू किया जाना चाहिए अन्यथा नहीं।
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(3) हमें इस क़ानून की जरूरत क्यों है ?
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3.1. बाह्य आक्रमण : हथियारबंद नागरिक समाज लोकतंत्र की जननी है। प्रत्येक नागरिक का शस्त्रधारी होना राज्य को इतनी शक्ति प्रदान कर देता है कि सेना के हारने के बावजूद वे खुद की एवं अपने राज्य की रक्षा कर पाते है।
हिटलर ने स्विट्जर्लेंड पर हमला करने की योजना को इसीलिए स्थगित कर दिया था, क्योंकि तब सभी स्विस नागरिको के पास बंदूक थी। जब प्रत्येक नागरिक के पास बंदूक होती है तो इसे सेना द्वारा हराया नहीं जा सकता, और न ही राज्य पर पूरी तरह से कंट्रोल लिया जा सकता है।
प्रत्येक अफगान के पास बंदूक होने के कारण अमेरिका, ब्रिटेन और रूस भी कई वर्षो तक चली लड़ाइयो के बावजूद अफगानिस्तान पर कभी भी पूरी तरह से नियंत्रण नहीं बना सके।
विएतनाम अमेरिका से 20 वर्षो तक लड़ने में इसीलिए कामयाब रहा क्योंकि सेना के हारने के बाद यह युद्ध वहां के नागरिक लड़ रहे थे। सोवियत रूस ने नागरिको को हथियार भेजे और वे अपने देश की रक्षा कर पाए।
ब्रिटिश भारत पर 200 वर्षो तक इसीलिए शासन कर पाए क्योंकि भारत के नागरिक हथियार विहीन थे। गोरो के पास सिर्फ 1 लाख बंदूके थे, और इन 1 लाख बन्दूको के माध्यम से उन्होंने 60 करोड़ नागरिको पर शासन किया। यदि सिर्फ 1% यानी 60 लाख भारतीयों के पास बंदूक होती तो ब्रिटिश भारत को नियंत्रित नहीं कर पाते थे।
यदि आज भारत का चीन से युद्ध हो जाता है, और अमेरिका हमें हथियारों की मदद देने से इनकार कर देता, या हमें देरी से हथियार भेजता है, तो हथियारो के अभाव में ज्यादातर से भी ज्यादा सम्भावना है कि हमारी सेना रूपी दीवार दीवार टूट जायेगी। और एक बाद यदि हमारी सीमाओं में सेना घुस आती है तो नागरिको के पास प्रतिरोध करने के लिए कोई हथियार नहीं है। तब हमारी अवस्था ईराक जैसी हो जायेगी। ऐसे संभावित संकट से बचने के लिए यह क़ानून जरुरी है।
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3.2. आंतरिक आक्रमण : प्रत्येक नागरिक के पास बंदूक होने से आन्तरिक स्तर पर भी देश काफी हद तक सुरक्षित हो जाता है, और विभिन्न अपराधो में कमी आती है।
कसाब दर्जनों नागरिको को इसीलिए मार सका था क्योंकि नागरिको के पास हथियार नहीं थे। यदि मुम्बई वासियों के पास बंदूक होती तो कसाब आता नहीं था, और आ भी जाता तो 5-7 लोगो से ज्यादा को नहीं मार पाता। और आगे भी यदि इस तरह के हमले बड़े पैमाने पर होने लगते है तो हमारे पास कोई उपाय नहीं है।
सिर्फ 2000 हथियारबंद इस्लामिक आतंकियों के दस्ते ने 2 लाख कश्मीरी पंडितो को घाटी से खदेड़ दिया था। यदि कश्मीरी पंडितो के पास बंदूके होती थी, तो उन्हें कभी पलायन नहीं करना पड़ता था।
2012 में असम के कोकराझार में सिर्फ 4000 हथियारबंद मुस्लिम बांग्लादेशी घुसपेठियो ने हमला करके 2 लाख हिन्दु नागरिको को अपनी जमीन, संपत्ति आदि छोड़कर पलायन करने पर मजबूर कर दिया था। यदि सभी नागरिको के पास बंदूक होती तो उन्हें अपना घर बार छोड़कर भागना नहीं पड़ता।2012 Assam violence - Wikipedia
1947 में विभाजन के दौरान भी 20 लाख हथियार विहीन नागरिको को अपनी जान-माल गंवाना पड़ा था। वजह यह थी कि सीधी कार्यवाही करने वाले पक्ष के पास हथियार थे, जबकि दूसरे पक्ष के नागरिक हथियार विहीन थे। चूंकि सिक्खों के पास हथियार थे, अत: वे कुछ हद तक इसका प्रतिरोध कर पाए।
भारत में निरंतर चुनाव होने, जनता का लोकतंत्र में विश्वास होने और सैनिको का सरकार पर भरोसा होने के कारण अब तक कभी तख्ता पलट नहीं हुआ है। किन्तु कोई विदेशी ताकत जैसे अमेरिका आदि भारत में तख्ता पलट करवाना चाहे तो वे कुछ ही महीनो में गृह युद्ध छिडवाकर, आतंकवादी हमले करवाकर, असुरक्षा का भाव उत्पन्न करके एवं राजनैतिक विकल्प हीनता दर्शा कर ऐसे हालात पैदा कर सकते है कि जनरल तख्ता पलट कर सकता है।
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(4) इस क़ानून के गेजेट में आने से क्या परिवर्तन आयेंगे ?
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4.1. नकारात्मक प्रभाव : प्रथम चरण में गन क्राइम जैसे क्रोध जनित हमले आदि में वृद्धि होगी और बन्दुक से होने वाली मौतों में इजाफा होगा। लेकिन जैसे जैसे प्रत्येक नागरिक के पास बन्दुक पहुंचेगी वैसे वैसे दुसरे चरण में इस हिंसा में थोड़ी कमी आने लगेगी। इस क़ानून में किसी व्यक्ति को बंदूक रखने की अनुमति देने का अधिकार नागरिको की जूरी को दिया गया है। अत: जूरी मंडल गन क्राइम करने वाले नागरिको को हथियारों से वंचित कर देगा, और अपराध में गिरावट आने लगेगी। यदि पुलिस प्रमुख को वोट वापसी पा
CHANCHAL CJ
“Woh Aurat, Jo Khud Bhi Hai”
Woh aurat,
jo sabka khayal rakhti hai,
ab dheere dheere yeh samajhne lagi hai
ki uska khud ka khayal rakhna bhi zaroori hai.
Woh ab bhi deti hai—
apna waqt, apni mohabbat, apni mehnat,
par ab woh khud ko khaali karke nahi,
apne dil ko bhar ke deti hai.
Usne seekh liya hai
ki “na” kehna bhi ek pyaar hai,
aur apni hadon ko banana
koi gunaah nahi.
Ab woh raat ko sirf dusron ke liye nahi jagti,
kabhi kabhi apne khwabon ke liye bhi jaagti hai,
un sapno ke liye
jo kabhi usne chup-chaap daba diye the.
Woh samajh gayi hai—
ki agar woh khud toot jaayegi,
toh kisi aur ko sambhal nahi paayegi,
isliye ab woh khud ko bhi
utni hi ahmiyat deti hai
jitni duniya ko deti thi.
Woh aurat,
ab bhi utni hi pyaari hai, utni hi gehri,
par ab uski mohabbat mein ek nayi baat hai—
ab usmein woh khud bhi shaamil hai.
Aur shayad yahi uski asli taqat hai…
ki woh sirf dusron ke liye nahi,
ab khud ke liye bhi jeena seekh rahi hai.
CHANCHAL CJ
Rinal Patel
સંબંઘોમા મુલાકાત ના માપદંડ થવા માંડે ત્યારે સમજી જવું કે સબંધો હવે ઓક્સિજન પર ટકેલા છે.
અંતરની દ્રષ્ટિએ.
- Rinall.
Bk swan and lotus translators
The idea of using AI-generated videos to "train" an animal to change its fundamental nature is a fascinating concept that touches on behavioral conditioning and evolutionary biology.
While animals can certainly learn from visual stimuli, changing a deer’s attitude toward a lion through a video is highly unlikely for several scientific reasons.
1. Visual Perception and "The Uncanny Valley"
Animals do not perceive screens the same way humans do.
* Refresh Rates: Many animals see at a higher "frame rate" than humans. A video that looks smooth to us might look like a flickering series of still images to a deer, making the content less convincing.
* Depth and Realism: While AI can create realistic textures, animals rely heavily on binocular vision and movement cues to identify threats. If the AI video doesn't perfectly mimic the physics of a real lion, the deer may not even recognize the "lion" as a living creature.
2. The Role of Instinct (Innate Fear)
A deer’s fear of predators isn't just learned; it is genetically hardwired.
* The Amygdala: The part of the brain responsible for the "fight or flight" response is triggered by specific "releasers"—like the scent of a predator or the silhouette of a large cat.
* Evolutionary Pressure: For millions of years, deer that ran away survived, while those that tried to fight lions died. A few hours of video cannot override millions of years of biological programming.
3. The Sensory Gap
For a deer, "seeing" is only a small part of "believing."
* Olfaction (Smell): A deer's world is defined by scent. If they see a "killing" on screen but don't smell the blood, the musk of the lion, or the pheromones of fear, the experience feels "hollow" and is unlikely to trigger a permanent shift in temperament.
* Audio: Unless the AI also generates perfect 3D spatial audio of a lion’s growl and the snapping of twigs, the deer will likely remain unreactive.
4. Observational Learning vs. Direct Experience
Some animals (like primates or crows) are excellent at observational learning. Deer have limited capacity for this. Even if a deer understood the video, it would likely view the "Hero Deer" as an anomaly rather than a blueprint for its own behavior.
In psychology, this is related to Classical Conditioning. To truly change the behavior, the deer would need a "reward" or a "success" in the real world. Without the physical strength to actually kill a lion, any "attitude change" would likely result in the deer's immediate death in a real encounter.
Comparison of Learning Types
| Feature | Observational Learning (Video) | Operant Conditioning (Real Life) |
|---|---|---|
| Input | Visual/Auditory only | All five senses |
| Feedback | No physical consequence | Immediate reward or pain |
| Effect | High chance of "habituation" (ignoring the screen) | Strong change in behavior |
| Biology | Tries to bypass instinct | Works with or against instinct
Renu Jindal
अपनों के लिए खुद को भूल जाना अच्छी बात है लेकिन जब तन्हाई मिलती है फिर खुद की याद आ ही जाती है .
- Renu .....
Gauri Katiyar
जो भी बुरे विचार होते है उनकी चटनी बनाकर तुरंत खा जाओ , अच्छे विचारों का आचार बनाओ और सालों तक चलाओ
वात्सल्य
प्रत्येक व्यक्ति से कुछ न कुछ नया ज्ञान मिलता है ll
ज्ञान पाने की हमारी दृष्टी ठीक औऱ दूरंदेशी होनी चाहिए ll
- वात्सल्य
Narendra Parmar
तुम हमें मिलो न मिलो
हम तो आपसे मिलेंगे !
आमने-सामने नहीं तो क्या हुआ
हम ख्यालों में आपसे मिलेंगे ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
वात्सल्य
रात आधी रात तरफ ढलने लगी,अपने,अपने बिस्तर पर जाने लगे ll
मै बड़ा अभागी हुँ ! किसी ने अबतक गुड नाईट कहे बिना सो जाने लगे ll
- वात्सल्य
Beyondwords
“कर्म एक ऐसी होटल है,
जहाँ ऑर्डर देने की ज़रूरत नहीं पड़ती;
वक़्त आने पर थाली में
वही सजकर आता है,
जो हम ख़ुद अपने हाथों से
पका कर रख चुके होते हैं।”
- Beyondwords
Beyondwords
राख ओढ़कर जो सच को जीता है,
वो हर झूठे रिश्ते से रीता है।
यहाँ ना सुंदर, ना कुरूप का भेद है,
हर चेहरा अंत में बस भस्म का खेद है।
जिसे दुनिया अपवित्र कहकर ठुकराती है,
अघोरी उसी में शिव को पाता है।
मांस, मरण, और मौन का संग है,
यहीं असली जीवन का प्रसंग है।
जहाँ डर खत्म, वहीं दरवाज़ा खुलता है,
जो भागे श्मशान से, वो जीवन भर जलता है।
अघोरी कहता—ना कुछ तेरा, ना मेरा अधिकार है,
जो है, बस इस क्षण का उधार है।
ना पाप यहाँ, ना पुण्य का हिसाब है,
हर कर्म बस एक अधूरा जवाब है।
जब टूटे हर धारणा, हर विचार है,
तभी दिखे—तू ही शिव, तू ही अंधकार है। 🔱
@beyond_word✍️
GIRLy Quotes
अब तुमसे मिलने का कोई अर्थ नहीं
मुझे समझ सके ऐसा तेरा दिल नहीं
तू बर्बाद बदनाम दुख देता रहे
और में फिर भी तुझे चाहती रहु
ये बात मुझे कबूल नहीं
और इतना नसीबदार तो तू भी नहीं
क्योंकी तेरे नसीब में मैं जो नहीं हु।।
Rahul Raaj
मेरे मुताबिक़ मेरे हक़ में सब चलता रहे, तो मैं झूठी कसमें भी खा सकता हूँ,
मैं जिस्मों का दीवाना, गंदा अफ़साना हूँ, झूठी मोहब्बत भी दिखा सकता हूँ।
'काबिल' बेवफ़ाओं से भी बुरा हैं- फ़क़त ये राज़ मुझे ही मालूम है,
अपनी वफ़ादारी साबित करने पर आऊँ, तो मैं खून के आँसू भी रो सकता हूँ।
Akash Gupta
तेरे मिलने की खुशी एक तरफ,
तुझे खोने का गम एक तरफ,
तुझे पाकर भी खो दिया, ये सवाल एक तरफ।
मुझे पता है कि तू वापस नहीं आएगा,
तेरा प्यार और गुस्सा एक तरफ…
मेरी गलतियाँ भी कम नहीं थीं,
मेरी खामोशियाँ भी गुनाह बन गईं,
तुझे संभाल न सका, ये अफसोस एक तरफ।
तू दूर होकर भी दिल के पास है,
तेरी यादों का एहसास एक तरफ,
तुझे भूलने की हर कोशिश…
और तेरा हर बार याद आ जाना एक तरफ।
अब ना कोई शिकायत है, ना कोई हक़ बाकी,
बस तेरी खुशियों की दुआ है एक तरफ,
और मेरी अधूरी मोहब्बत की कहानी एक तरफ।
kattupaya s
Goodnight friends.. sweet dreams
aakanksha
हर सुबह की तरह सूरज वही था,हवा भी वही थी, आसमान भी वही था,पर पंछी आज कुछ उदास थे,क्योंकि एक बेटी का सपना आज टूटने वाला था।
पापा की इज्जत रखने कोउसने हाथों में मेहंदी सजा ली,जिस बाप ने उम्र भर जोड़ा खजाना,वो भी बेटी के ब्याह में लुटा दी।
सोचा था खुशियों का घर मिलेगा,कोई हमसफर साथ निभाएगा,पर किस्मत ने ऐसा मोड़ दियाजहाँ हर दिन दर्द ही आएगा।
पहला थप्पड़ पड़ा तो चुप रह गई,सोचा गुस्से में होगा, मान लिया,धीरे-धीरे वो जुल्म बढ़ता गयाऔर उसने सब कुछ सहना जान लिया।
दुल्हन बनने का शौक था उसका,पर पल भर में सब बिखर गया,जिसे हमसफर कहने चली थी,वही उसका सबसे बड़ा दर्द बन गया।
यकीन मानो, हर चुना हुआ रिश्ताहमेशा खुशियाँ नहीं लाता,कभी-कभी माँ-बाप का भरोसा भीबेटी की खामोशी में दर्द बन जाता।
Piyu soul
कितनी बार रुकी हूँ, ये हिसाब नहीं रखा,
कितनी बार टूटी हूँ, ये जवाब नहीं रखा।
बस एक जिद है दिल में — खुद को साबित करने की,
और इसी जिद ने मुझे कभी कमजोर नहीं रखा। 👑✨
by piyu 7soul
Dhruv gamit
જેલનો કેદી
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બાલ્કનીમાં બેઠો બેઠો જોઉં આભમાં ફટાકડા, ને મનમાં આવ્યું પ્રિન્સિપાલને ગાળોના તડાકા!
રજા ના આપી એ ‘હિટલરે’ પૂરી દીધો અંદર, દસમા ધોરણના ભરમાં હું બની ગઈ છું બંદર.
મિત્રો સાથે મસ્તી છે ને મેગીની છે પાર્ટી, પણ સાચું કહું તો પ્રિન્સિપાલની બુદ્ધિ છે નાઠી.
ભેરુ કહે ‘ભૂલી જા’, અહીં જ ધમાલ કરીશું, પણ ઘરના આંગણાના દીવા આપણે ક્યાંથી લાવીશું?
યાદ આવે નીન્જા હથોડીની મસ્તી ને ડોરેમોનનું ગેજેટ, ને ભાઈ સાથે મળીને ફોડેલા રોકેટ.
હવે, સમજાય છે કે સાહેબે આ રાજા કાપી છે મારા ઉજ્જવળ ભવિષ્ય માટે આ સજા આપી
Dhruv gamit
બાલ્કનીમાં બેઠો બેઠો જોઉં આભમાં ઘટાડા,
ને મનમાં આવ્યું પ્રિન્સિપાલને ગાળોના તડાડા !
રજા ના આપી એ ‘હિટલરે’ પૂરી દીધો અંદર,
દસમા ધોરણના ભરમાં હું બની ગઈ છું બંદર.
મિત્રો સાથે મસ્તી છે ને મેગીની છે પાર્ટી,
પણ સાચું કહું તો પ્રિન્સિપાલની બુદ્ધિ છે નાઠી.
ભેરુ કહે ‘ભૂલી જા’, અહીં જ ધમાલ કરીશું,
પણ ઘરના આંગણાના દીવા આપણે ક્યાંથી લાવીશું?
યાદ આવે નીન્જા હથોડીની મસ્તી ને ડોરેમોનનું ગેજેટ,
ને ભાઈ સાથે મળીને ફોડેલા રોકેટ.
હવે, સમજાય છે કે સાહેબે આ રાજા કાપી છે
મારા ઉજ્જવળ ભવિષ્ય માટે આ સજા આપી છે
Manali
घर बनते-बनते बस एक मकाँ बनकर रह गया,
दिल जो था सुकूँ का, वो वीराँ बनकर रह गया।
एक ख़्वाब था जो आँखों में रौशन-सा ठहरा था,
वक़्त की सियाही में वो गुमाँ बनकर रह गया।
एक आरज़ू ने साँसों से उम्र उधार माँगी थी,
छूते ही हक़ीक़त को, बे-जाँ बनकर रह गया।
लबों पे जो तबस्सुम था, क़र्ज़-ए-लम्हा निकला,
हर इक हँसी अब एक इम्तिहाँ बनकर रह गया।
नज़र में जिसकी तलाश थी, वो भी खो गई कहीं,
दिल से तेरा नाम भी निहाँ बनकर रह गया।
उँगलियाँ जो थामें थीं कभी किसी की हथेली,
आज हर वो रिश्ता बे-निशाँ बनकर रह गया।
कलाई पे लिखा वो धुँधला-सा इश्क़ का हरफ़,
वक़्त की स्याही में वो कहाँ बनकर रह गया।
हमसफ़र जो छूटा तो सफ़र रूठ-सा गया,
रास्ता भी अब बस एक गुमाँ बनकर रह गया।
मंज़िल का क्या गिला हो, जब दिल ही न रहा साथ,
हर इक सफ़र भी दरमियाँ बनकर रह गया।
मनाली, तेरा दर्द भी अब सादा-सा हो चला,
घर बनते-बनते बस एक मकाँ बनकर रह गया।.....
Soni shakya
रस्मों के बंधन तो हर कोई निभा देता है..
असली बंधन वो जो बिना रस्मों के निभाया जाए..
- Soni shakya
Sonam Brijwasi
तुझे किसी और के करीब देखना गवारा नहीं,
मेरी मोहब्बत में कोई ‘शेयर’ का इशारा नहीं…
तू मेरी है, बस मेरी ही रहेगी,
इस दिल को तुझ पर कोई दूसरा हक़ प्यारा नहीं…”
महेश रौतेला
मैं छोटी सी कविता
पलभर चली,
क्षणभर खिली
हर परिचय में मिली।
सुगन्ध सी फैली
धरा में मिली,
टूटे सपनों की धात्री
देशों में घुली मिली।
चेहरा दैदीप्यमान
साथी संग हँसी,
छुआ जब मन को
सिहर कर मुस्करायी।
मैं छोटी सी कविता
वसंत संग लौटी,
गरज के बरसी
क्षणभर में बिखर गयी।
पता बताने लौटी
खर-पतवार उखाड़,
प्रिय संग बैठी
नित नये रूप में खड़ी,
छोटी सी कविता हूँ।
***
** महेश रौतेला
vbbnnnnmmmm
বসন্ত
মালতী ফুটিল সেউতি উঠিল
কেতকী গা ঝাড়া দিল,
সুরেলা কোকিলে গলা কাঁপাইয়া
বনের বারতা দিল।
বকুল ছড়াল তারা একঝাঁক
মাদার ফাগুয়া খেলে,
❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀ ❀
ফুলঝাড় রেখে রাত চলে যায়
পদ্ম চক্ষু মেলে।
করবীর কলি মৌ-কণা গড়ে
ভূমি ফুটাইল চাঁপা,
হলদে চড়াই মধুতে মাতাল
নর্তনে করে কৃপা।
vbbnnnnmmmm
বসন্ত নয় অবহেলার
Radhika
ओह नील गगन"
ओह नील गगन, तेरी बरखा आई
लहराके इतराके सावन लाई।
मैं एक बंजर धरती हूं,
रूखी हूं, प्यासी हूं,
तुझ बिन जैसे अधूरी हूं,
हां मैं बंजर धरती हूं।
तुम बरसें कहीं किसी वन के ऊपर,
कभी शहरों में, कभी गलियारों में।
कभी यूं ही बह जाती हों,
नदियों में मिल जाती हों।
कभी ठहरें तो झीलों में,
वरना सागर में मिल जाती हों।
एक मेहरबानी करना,
बरस जाना कभी मुझ पर इतना।
न वन जितना,
पर उग जाए थोड़े पौधें कि मैं बंजर ना कहलाऊ,
हरियाली मुझ पर छाएं,
मैं लताओं के जैसे लहराऊं।
ओह नील गगन, हैं फ़रियाद तुमसे,
आओ भी कभी मिलने हमसे।
मेरा दामन हरियाली से भर दो,
लेकर अपने बरखा को साथ।
ताकि मुझे भी लगें इस बार,
हां आई है बरसात।
By- Radhika
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय।
आसक्ति मानसिक क्रिया है। इसका अभिप्राय यह है कि मन बार-बार अपनी आसक्ति के विषयों की ओर भागता है जो किसी व्यक्ति, इन्द्रिय विषय, प्रतिष्ठा, शारीरिक सुख त्यादि में हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति या इन्द्रिय विषय का विचार हमारे मन में बार-बार उठता है तब निश्चय ही यह मन का उसमें आसक्त होने का संकेत है। यदि यह मन ही आसक्त हो जाता है तब भगवान इस आसक्ति के विषय के बीच बुद्धि को क्यों लाना चाहते हैं। क्या आसक्ति का उन्मूलन करने में बुद्धि की कोई भूमिका होती है? हमारे शरीर में सूक्ष्म अंत:करण होता है जिसे हम बोलचाल की भाषा में हृदय भी कहते हैं। यह मन, बुद्धि और अहंकार से निर्मित होता है। इस सूक्ष्म शरीर में बुद्धि मन से श्रेष्ठ है जो निर्णय लेती है जबकि मन में इच्छाएँ उत्पन्न होती है और यह बुद्धि द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार मोह के विषयों में अनुरक्त हो जाता है।
उदाहरणार्थ यदि मनुष्य की बुद्धि यह निर्णय करती है कि धन सम्पत्ति ही सुख का साधन है तब मन में धन प्राप्त करने की लालसा उत्पन्न हो जाती है। यदि बुद्धि यह निश्चय करती है कि जीवन में प्रतिष्ठा ही सबसे महत्त्वपूर्ण है तब मन में प्रतिष्ठा और ख्याति पाने की अभिलाषा उत्पन्न होती है। दूसरे शब्दों में, मन में बुद्धि के बोध के अनुसार इच्छाएँ विकसित होती हैं।
पूरे दिन हम अपने मन को बुद्धि द्वारा नियंत्रित करते हैं। जब हम अपने घर में होते है तब हम अनौपचारिक मुद्रा में रहते हैं जिसमें मन भी सहजता का अनुभव करता है जबकि अपने कार्यालय में रहते हुए हम औपचारिक मुद्रा में रहना सही समझते हैं। ऐसा नहीं है कि मन कार्यालय की औपचारिकताओं में प्रसन्न रहता है, अपितु वह अवसर मिलते ही अपेक्षाकृत घर जैसी अनौपचारिकताओं को अंगीकार करना चाहता है। इस प्रकार हमारी बुद्धि निश्चय करती है कि कार्यालय में औपचारिक आचरण का पालन करना अनिवार्य है। इसलिए बुद्धि मन को नियंत्रित करती है और हम पूरे दिन अपने कार्यालय में औपचारिक मुद्रा में रहते हैं और हमें मन की प्रकृति के विपरीत औपचारिक शिष्टाचार का पालन करना पड़ता है। इसी प्रकार मन कार्यालय के कार्यों में सुख अनुभव नहीं करता। यदि उसे स्वतंत्र छोड़ दिया जाए तब वह कार्यालय में कार्य करने की अपेक्षा घर में बैठकर टेलीविजन देखना चाहेगा किन्तु बुद्धि उसे यह आदेश देती है कि जीवन निर्वाह हेतु कार्यालय में बैठकर कार्य करना अनिवार्य है। इसलिए बुद्धि पुनः मन की स्वाभाविक प्रवृत्ति पर अंकुश लगाती है और लोग आठ घंटे या अधिक समय तक कार्य करते हैं।
उपर्युक्त उदाहरण से हमें यह ज्ञात होता है कि हमारी बुद्धि मन को नियंत्रित करने में सक्षम है। इसलिए हमें अपनी बुद्धि को उचित ज्ञान के साथ पोषित करना चाहिए और उसका प्रयोग मन को उचित दिशा की ओर ले जाने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करने में करना चाहिए।
बुद्धियोग मन को कर्म फलों से विरक्त रखने का विज्ञान है जो बुद्धि में यह दृढ़ निश्चय विकसित करता है कि सभी कार्य भगवान के सुख के निमित्त हैं। ऐसी स्थिर बुद्धि वाला मनुष्य एकाग्रता से अपने लक्ष्य पर ध्यान रखता है और निर्बाध गति से धनुष से छोड़े गए बाण के समान अपने मार्ग को पार कर लेता है। ऐसा साधक यह संकल्प लेता है-"यदि मेरे मार्ग में लाख बाधाएँ उत्पन्न हो जाएँ और यदि सारा संसार मेरी निंदा करे और यदि मुझे अपने जीवन का भी बलिदान क्यों न करना पड़े तब भी मैं अपनी साधना नहीं छोडूंगा।
" साधना की उच्च अवस्था में यह संकल्प इतना अधिक दृढ़ हो जाता है कि साधक को अपने मार्ग पर चलने से कोई डिगा नहीं सकता किन्तु वे लोग जिनकी बुद्धि अनेक शाखाओं में विभक्त है, अपने मन को विभिन्न दिशाओं की ओर भटकते हुए पाते हैं। वे मन की एकाग्रता को विकसित करने में समर्थ नहीं होते जो भगवान की ओर जाने वाले मार्ग के लिए आवश्यक होती है।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Piyu soul
🔥 आज कहानी ने नया मोड़ लिया है…
“झांसी: The Price of a Bride”
Episode 2 अब LIVE है 👑
792 लोग इस कहानी का हिस्सा बन चुके हैं…
228 लोगों ने इसे अपने पास संभाल कर रखा है ❤️
और 16 लोगों ने इसे 5⭐ दिया 😳
अब असली खेल शुरू होगा…
क्या भार्गवी सच में बेबस है?
या वो कुछ ऐसा छुपा रही है जो सब बदल देगा?
👉 अभी पढ़ो और बताओ—
Team मजबूरी ❤️
या
Team चाल 😏
– piyu 7soul
Anjana A Kulkarni
Don't change yourself to fit into someone else's expectations. First, learn to love yourself- because when you truly value who you are, you won't need anyone else's approval to feel loved.
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय।
कौन सा ग्रह क्या अशुभ फल देता है:-
सूर्य
सरकारी नौकरी या सरकारी कार्यों में परेशानी, सिर दर्द, नेत्र रोग, हृदय रोग, अस्थि रोग, चर्म रोग, पिता से अनबन आदि।
चंद्र
मानसिक परेशानियां, अनिद्रा, दमा, कफ, सर्दी, जुकाम, मूत्र रोग, स्त्रियों को मासिक धर्म, निमोनिया।
मंगल
अधिक क्रोध आना, दुर्घटना, रक्त विकार, कुष्ठ रोग, बवासीर, भाइयों से अनबन आदि।
बुध
ज्योतिष आचार्य आनन्द जालान के अनुसार गले, नाक और कान के रोग, स्मृति रोग, व्यवसाय में हानि, मामा से अनबन आदि।
गुरु
धन व्यय, आय में कमी, विवाह में देरी, संतान में देरी, उदर विकार, गठिया, कब्ज, गुरु व देवता में अविश्वास आदि।
शुक्र
जीवन साथी के सुख में बाधा, प्रेम में असफलता, भौतिक सुखों में कमी व अरुचि, नपुंसकता, मधुमेह, धातु व मूत्र रोग आदि।
शनि
वायु विकार, लकवा, कैंसर, कुष्ठ रोग, मिर्गी, पैरों में दर्द, नौकरी में परेशानी आदि।
राहु
त्वचा रोग, कुष्ठ, मस्तिष्क रोग, भूत प्रेत वाधा, दादा से परेशानी आदि।
केतु
नाना से परेशानी, भूत-प्रेत, जादू टोने से परेशानी, रक्त विकार, चेचक आदिल
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
Aum Namah Shivay.
Can We Do Puja Without Maintaining Hygiene?
Well, here is what different scriptures mention about this. Read it completely and you will get all kind of answers related to this question:
Vishnu Smrti - Chapter 64, Verse 9:
न चाशौचवता कार्यं देवतार्चनकर्म वै ।
यस्तत्करोति मोहेन तस्य तन्निष्फलं भवेत् ॥
Meaning - A person who is in a state of impurity must indeed not perform the act of worshipping the deity. He/she who performs it out of delusion, that act of his shall become fruitless.
According to Kularnava Tantra - Chapter 9, Verse 88-
न वारिणा शुध्यते देही नान्तःशौचेन शुध्यति । अन्तःशौचेन शुध्यन्ति तस्मादन्तः शुचिर्भवेत् ॥
The embodied atma is not purified by water, nor is it purified without internal purity. It is by internal purity that beings are purified; therefore, one should be pure within.
According to Garuḍa Puraṇ - Parva Khaṇḍa, Chapter 222 -
अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा ।
यः स्मरेत्पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः ॥
Whether a person is impure or pure, or even if he/she has passed through all possible states (of impurity), he/she who remembers the Lotus-eyed god (Vishnu) becomes pure both externally and internally.
Manusmrti - Chapter 2, Verse 60-
अद्भिः गात्राणि शुध्यन्ति मनः सत्येन शुध्यति ।
विद्यातपोभ्यां भूतात्मा बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति ॥
The limbs of the body are purified by water, the mind is purified by truth; the individual atma is purified by learning and austerity; and the intellect is purified by knowledge.
Aapka Apna
Aachaarya Deepak Sikka
Founder Graha Chaal Consultancy
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय।
वेदों में प्रयुक्त काम शब्द या वासना केवल यौन इच्छाएँ नहीं हैं बल्कि इसमें सभी प्रकार के भौतिक सुख भी सम्मिलित हैं।
इस प्रकार वासना कई रूप दर्शाती है। जैसे:-
धन की इच्छा,
शारीरिक लालसाएँ,
प्रतिष्ठा की अभिलाषा,
सत्ता की भूख इत्यादि।
वासना केवल भगवान के प्रति प्रेम का विकृत प्रतिबिंब है जो कि प्रत्येक जीवित प्राणी का अंतर्निहित स्वभाव है।
जब आत्मा शरीर से संयुक्त होकर माया शक्ति के सम्पर्क में आती है तब तमोगुण के संयोग से इसका दिव्य प्रेम वासना में परिवर्तित हो जाता है।
दिव्य प्रेम भगवान की सर्वोच्च शक्ति है। अतः भौतिक क्षेत्र में इसका विकृत स्वरूप जो कि काम वासना है, वह भी अति प्रबल शक्ति है।
श्रीकृष्ण ने सांसारिक सुखों के भोग की लालसा को पाप के रूप में चिह्नित किया है क्योंकि यह प्रलोभन हमारे भीतर छिपा रहता है।
रजोगुण आत्मा को यह विश्वास दिलाता है कि सांसारिक विषय भोगों से ही तृप्ति प्राप्त होगी। इसलिए किसी भी मनुष्य में इन्हें प्राप्त करने की कामना उत्पन्न होती है।
जब कामना की पूर्ति होती है तब इससे लोभ उत्पन्न होता है और इसकी संतुष्टि न होने पर क्रोध उत्पन्न होता है।
कामना, लोभ और क्रोध इन तीनों विकारों से ग्रस्त होकर मनुष्य पाप करता है।
लोभ कामनाओं का प्राबल्य है जबकि क्रोध कुण्ठित इच्छा है। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने वासना या कामना को सभी बुराइयों की जड़ के रूप में चिह्नित किया है।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
Aum Namah Shivay.
There are many great sages and devotees in Hindu tradition whose lives teach powerful spiritual lessons, Here are a few important ones with key points:
1️⃣ Valmiki
• Originally a forest robber named Ratnakara.
• Transformed into a great sage through devotion and meditation.
• Author of the sacred epic Ramayana.
• Known as the Adi Kavi (first poet) in Sanskrit literature.
Lesson: Anyone can transform through devotion and sincere repentance.
2️⃣ Ved Vyasa
• Compiler of the Vedas and author of the Mahabharata.
• Also composed the Bhagavata Purana and many other Puranas.
• Known as one of the greatest sages in Hindu tradition.
Lesson: Knowledge and wisdom guide humanity toward dharma.
3️⃣ Prahlada
• A great devotee of Lord Vishnu even as a child.
• Son of the demon king Hiranyakashipu.
• Protected by Lord Vishnu in the form of Narasimha.
Lesson: True devotion protects a devotee in every situation.
4️⃣ Dhruva
• A young prince who performed intense meditation to see Lord Vishnu.
• Blessed by Vishnu and became the Dhruva Star (Pole Star) in the sky.
Lesson: Determination and devotion bring divine blessings.
5️⃣ Shabari
• A humble devotee who waited many years to see Lord Rama.
• Offered fruits to Rama with pure love and devotion.
Lesson: God values pure devotion more than wealth or status.
Common Message from all these stories:
• Faith in God
• Devotion (Bhakti)
• Righteous living (Dharma)
• Transformation through sincerity
These teachings appear in sacred texts like the Ramayana, Mahabharata, and the Bhagavata Purana.
Aapka Apna
Aachaarya Deepak Sikka
Founder of Graha Chaal Consultancy
Radhika
"तुम मिलें"
तुम मिले तो हर ख़ुशी मिली,
तुम मिलें तो मैं खुद से मिली।
खो चुकी थी गुमनाम जिंदगी में मैं,
मगर तुम मिले तो मुझे नई जिंदगी मिलीं।
Shailesh Joshi
પુસ્તક વાંચવામાં જેટલો સમય લાગે છે, એનાથી વધારે સમય એને લખવામાં લાગે છે, અને પુસ્તકમાં જે લખાણ હોય એ જીવવામાં તો વર્ષોના વર્ષો, કે પછી પૂરું જીવન લાગતું હોય છે, આપણું મન પણ એક વણ લખાયેલ પુસ્તક જેવું હોય છે, માટે જો આપણે આપણા સમયની રાહ જોતા હોઈએ કે, આપણો સમય ક્યારે આવે, તો એના માટે એક કામ તો આપણે કરવું જ રહ્યું, કે આપણો સમય ન આવે ત્યાં સુધી આપણે ધીરજ અને શાંતિ સાથે આપણને સાચવવા પડશે.
- Shailesh Joshi
Falguni Dost
આ મારી આજની પોસ્ટ એ લોકો માટે કે જેઓજીવનથી કંટાળી જાય છે, બીજાના જીવનને જરા જોઈ પોઝિટિવ વિચારો અને ભગવાનનો આભાર માનો કે તમને ઘણું સુખ આપ્યું છ.
જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻
Shraddha Panchal
छूटी हुई ट्रेन की टिकट को ,
जेब में संभालना बेकार है .🚃🎫❌
DrAnamika
तेरी आँखों में जब भी अपना अक्स देखा
महसूस हुआ कि इश्क़ भी साँस लेती है.
डॉअनामिका
Mara Bachaaaaa
अहमियत
उनकी जिंदगी में
ना सी रही होगी
तभी तो वो
दूर रहकर रह पाए
हमे मायूसी दे कर।
- Mara Bachaaaaa
Kaushik Dave
ख्वाब हमने बहुत देखे,
पढ़-लिखकर बाबू बने।
जोब मिलीं महानगर में,
सीखने को बहुत मिला।
बस हमें दूसरों से क्या वास्ता,
अपना काम और अपना भाग्य।
बढ़ते रहे हम अपने पथ पर,
अकेलापन महसूस नहीं हुआ।
हमने अपनी खुशी के साथ साथ,
परिवार को खुशी में जोड़ दिया।
अकेलापन महसूस करने वालों,
अपने परिवार से प्यार करों।
खुशियां बांटते रहे और जिंदगी बढ़ती गई,
आज सखी, मुने रंग लाग्यो महानगर को,
छोड़ कर हम तो नहीं जियो।
अब गांव कहा तक रह गया है? गांव ख़ाली ख़ाली है,
कमाई के चक्कर में सब महानगर की और दौड़ पड़े।
यहां फुर्सत कहां है हम सबको, अपने आप में खोये है,
जरुरत आन पड़ी तो, दोस्तों की भीड़ उमड़ पड़ी।
बस बाग बगिया खिलता रहा, परिवार खुशहाल हैं,
महानगर की भीड़ में अकेलापन कहां मेहसूस किया?
- कौशिक दवे
Ajit
મારા જન્મ દિવસે હું દિલથી માતૃભારતી પરથી વિદાય લઉં છું.........bye bye Aju mane support karnar matrubharti na tamam mitrono khub khub abhar.......😭😭😭😭😭😭🙏🙏🙏🙏🙏🙏
Chaitanya Joshi
દિલમાં વાત સંઘરી રાખી તે બોલો.
ને દિશા સાવ નવી ઝાંખી તે બોલો.
યાદ છે હજી વચનોની લ્હાણી કેટલી,
કિંમત અમારી કેટલી આંકી તે બોલો.
હિસાબ સરભર કરવો છે ને આકરો ,
માગ્યો ત્યાં તો થયા તુમાખી તે બોલો.
વધતા વૃક્ષને પણ વસંત આવે છે કદી,
શું મિષ્ટ ફળો લીધાં છે ચાખી તે બોલો.
મગજ પર બરફની હાજરી હોવી જરૂરી ,
શું રહેશો સન્મુખ તીર તાકી તે બોલો.
ચૈતન્ય જોષી.' દિપક 'પોરબંદર.
Mara Bachaaaaa
यकीनन उन्हें
अपनी जिंदगी से इश्क़ है,
तभी तो
हमसे बेवफाई हो गई।
- Mara Bachaaaaa
Narendra Parmar
छोटू 🧑🦲
में चाहूं तो आसमान की परी पटा सकता हूं 🧚
मोटू 👶
इसीलिए अभी तक करिश्मा तुमसे पटी नहीं है
कम-से-कम दो साल से कोशिश कर रहा है तूं !
😀🤪🤣🤣
छोटू 🧑🦲
अरे मोटू करिश्मा आसमान की परी थोड़ी है 😀😀🤣🤣🤣
में आसमान की परी की बात कर रहा हूं ।। 🤪🤣🤣
मोटू 👶
हां यार 😀😀😀🤣🤣🤣
नरेन्द्र परमार ✍️
Gautam Patel
શું ગળી ચીજોથી ડાયાબિટિસની શક્યતા વધે છે ?
ડાયાબિટિસ એ વખતે થાય કે જ્યારે શુગરને પચાવવા માટે
શરીર જરૂરી ઇન્સ્યુલિન
પેદા કરી શકતું નથી
અથવા તો પેદા થતું
ઇન્સ્યુલિન શુગરને ન્યાય
આપી શકતું નથી. એકંદરે
જોતાં રોગ આનુવંશિક છે, માટે એ
રોગના વારસાગત જિન્સ
ન ધરાવતી વ્યક્તિ પુષ્કળ
ગળી ચીજો ખાય પણ
વજન સપ્રમાણ જાળવે
તો એને ડાયાબિટિસ થાય
નહિ. જિન્સ હોય તો
એ રોગ થવાનું જોખમ
ખાસ્સું વધી જાય છે.
ડાયાબિટિસની કારક ગણાતી ખાંડને બદલે મેંદો વઘારે દોષિત છે. ઘઉંના અત્યંત બારીક દળેલા અને સફેદી માટે હાનિકારક રસાયણો વડે બ્લીચ કરેલા લોટનો ડાયાબિટિસ જોડેનો સીધો નાતો જોતાં તેના વપરાશ પર ચીને ૨૦૧૧માં કાનૂની પ્રતિબંધ મૂકી દીધો.
યુરોપિયન યુનિઅનના ઘણા ખરા દેશો તો લોટના બ્લીચિંગને
ક્યારના ગેરકાયદે ઠરાવી ચૂક્યા છે. આની સામે ભારતમાં
ઘઉંનો પ૦% કરતાં વધુ પુરવઠો wheat flourને બદલે white flour એટલે કે મેંદા તરીકે વપરાય છે. પિઝા, બિસ્કિટ, બ્રેડ, નાન, કુલચા, મીસી રોટી, પાસ્તા, નૂડલ્સ વગેરેના સ્વરૂપે મેંદો ખાવામાં ભારતીયોને કશી મર્યાદા નડતી નથી.
બ્લીચિંગ કરેલો મેંદો પોતે ડાયાબિટિસના મામલે નડી
જાય એવો પદાર્થ છે. પેન્ક્રિઆસના ઇન્સ્યુલિન પેદા કરતા
બિટા સેલ્સ નામના કોષો માટે ઝેરી નીવડતું alloxan કેમિકલ તેમાં મોજૂદ હોય છે. તબીબી પ્રયોગો દરમ્યાન ઉંદર જેવા કેટલાક સજીવોને તે રસાયણે Type-1 ડાયાબિટિસના રોગી બનાવ્યા છે. બ્લીચિંગવાળા સફેદ મેંદામાં એલોક્ઝેન ઉપરાંત કેન્સરકારક બ્રોમેટ. ક્લોરાઇડ, બેન્ઝોલિન પેરોક્સાઇડ વગેરે જેવાં નઠારાં કેમિકલ્સ પણ હોય છે.
https://www.facebook.com/share/p/1GM4gmrm1T/
Narendra Parmar
टूटे दिल का हाल,में तूझे क्या बताऊं
फ़ालतू में पत्थर आगे
में अपना किमती वक्त क्यूं गंवाऊं ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Shailesh Joshi
રસ્તાઓ બદલવાથી નહીં, પરંતુ
કઠિન રસ્તાઓ પાર કરવાથી જ
જીવન સાર્થક થાય છે, માટે જો
ખરેખર સારા ભવિષ્યની
સાચી ચિંતા હોય તો
એટલું યાદ રાખવું કે, ગમે તેવા
વિપરીત, કે પ્રતિકૂળ સંજોગો વખતે,
નિરર્થક ખોટા, કે અવળા રસ્તાઓ શોધવા
એ આપણા સમય, શક્તિ
અને ભવિષ્ય ત્રણે માટે
નુકશાનકારક છે.
- Shailesh Joshi
वात्सल्य
હું પણ દરરોજ એની પથારી પાથરું છું,ઉઠાવું છું.
પરંતુ એ દરરોજ મારી પથારી ફેરવે છે,(સફાઈ માટે).!!!
😄😄😄😄😄😄😄😄
- वात्सल्य
वात्सल्य
વાયદા કર્યા ઘણા પણ નિભાવવામાં કાચા પડ્યા ll
એથી તો વાયદા કરવા ન્હોતા તોડવા મજબૂર થવા પડ્યા.
- वात्सल्य
Anup Gajare
"एक दोपहर"
____________________________________________________
दोपहर के भीतर
बसी लू हवाएं
बहते हुए
बादल की तरफ देख रही थी।
बरगद की घनी
छांव में दो भेड़े
आपस में बहस में
जूझी थी।
ग्राउंड की धूल
भरी सतह पर
चलता हुआ एक तारा
ताक रहा था
सायकल पर जा रही
चांदनी को।
पेड़ो की झुरमुट में
पंछी छोड़ रहे थे
अपने पुराने घोंसलों को।
चाय के ठेले पर
हर रोज की तरह
ही भीड़ उमड़ आई थी।
बंद पड़े जीर्ण
थियेटर में ऊब
चुके थे पोस्टर।
कही लकड़हारे
कांट रहे थे जिंदा
वृक्ष से भरी छांव को।
तो कही भरे बाजार
में प्याज, लहसुन बिक
रहे थे चांदी के भाव।
पेट्रोल पंप पर
लाइन में खड़ा
कोई आम इंसान
दूसरे इंसान से
देश के भविष्य पर
बातों में उलझा था।
किसी अज्ञात मकान
कि दीवार पर आलस दे रही थी
बिल्ली,
कुत्ता इंतजार में था
बिल्ली फर्श पर कब उतरेगी
उसके दांतों की कटकट
मुंह से रीसती लार में
असंख्य सूक्ष्म जीव
अपने ब्रह्मांड को
नष्ट होते देख रहे थे।
दोपहर अपने गर्भ में
बहुत कुछ समेटे हुए
सूरज को दोष दे रही थी।
एक स्थान रिक्त था
जहां अवकाश में
किसी का न होना ही
उसका होना भी था।
बच्चे स्कूल जा रहे थे
बोझ को ढोते हुए
उनकी झुकी पीठ पर
प्रश्न ही सवार था,
गर्मी की छुट्टियों
में उन्हें नाना के घर
कोई ट्रेन नहीं ले जानेवाली थीं
मामा के घर
जानेवाली बंद पड़ी
रेल के आखरी डिब्बे में
कोई सिगरेट फूंक रहा था।
उसने आह भरी
और दोपहर की
गोद में सिर रखते हुए
आंखे भींच ली।
बूढ़ा अखबार के
अक्षरों को पढ़ रहा था
पढ़ रहा था
ये गर्मी अच्छी नहीं होती
युद्ध आखिरी समाधान नहीं
शायद
इस जाड़े के बाद युद्ध खत्म हो।
उसने चश्मा उतारा
और हथेली से
पसीने को पोंछते हुए
कुछ देर तक
अक्षरों के बिना
दुनिया को देखने लगा।
अक्षर अब भी
कागज पर थे
पर अर्थ
धीरे-धीरे
पिघलकर
दोपहर में घुल रहे थे।
पास ही
एक छाया
अपनी लंबाई मापते-मापते
थक चुकी थी,
वह सिकुड़कर
पांव के नीचे
आ बैठी—
जैसे किसी का
अधूरा विचार।
दूर कहीं
एक खिड़की
आधी खुली थी
आधी बंद,
उसके भीतर
एक स्त्री
नींद और जाग के बीच
फंसी हुई
अपने ही सपने का
दरवाजा खटखटा रही थी।
सपने के भीतर
कोई आवाज़ नहीं थी,
सिर्फ
एक सूखा हुआ पेड़
अपनी जड़ों से
आकाश को
खींचने की कोशिश कर रहा था।
और आकाश—
धीरे-धीरे
नीचे झुकता हुआ
धरती के कान में
कुछ कहना चाहता था,
पर शब्द
गर्मी में जलकर
राख हो चुके थे।
एक बच्चा
किताब के पन्नों के बीच
उंगली फंसाकर
सो गया था,
पन्ने हिल रहे थे—
जैसे हवा नहीं,
समय
उन्हें पलट रहा हो।
उसके सपने में
न कोई स्कूल था
न कोई सवाल,
सिर्फ एक खाली मैदान था
जहां
कोई उसे बुला नहीं रहा था।
दोपहर अब
धीरे-धीरे
अपने ही भार से
झुकने लगी थी,
सूरज
थोड़ा थककर
पीछे हट रहा था,
जैसे उसने भी
मान लिया हो
कि हर चीज़ को
जलाकर
समझा नहीं जा सकता।
एक अनदेखा क्षण
हवा में टंगा था—
जहां
न अतीत था
न भविष्य,
सिर्फ
एक हल्की-सी कंपन थी
जो बता रही थी
कि कुछ भी
स्थिर नहीं है।
और उसी कंपन में
कहीं बहुत भीतर
कोई
चुपचाप
दोपहर को छोड़कर
शाम की तरफ
चल पड़ा था।
______________________________________________
Chaitanya Joshi
વાત એની મુદ્દાની હતી.
પણ વાત ખુદાની હતી.
પુસ્તક લખ્યું એકલતાનું,
અનુભૂતિ શાદીસુદા ની હતી.
એકતાનું બળ માપવા,
માપપટ્ટી એની જુદાની હતી.
હતો અફસોસ ઘણો,
વીતેલી આવરદાની હતી.
અક્ષરો ભલે નિરક્ષર,
પણ વાત એના રૂદાની હતી.
ચૈતન્ય જોષી દિપક, પોરબંદર.
kajal jha
टूट कर चाहा था जिसे, वो मेरा कभी हुआ ही नहीं,
जिसे अपना समझा था, उसने मुझे समझा ही नहीं।
अब दर्द ही साथी है, और खामोशी हमसफ़र,
दिल तो आज भी धड़कता है, पर जीने का मन ही नहीं
- kajal jha
Piyu soul
🦚मेरे सखा कृष्णा 🦚💛
मैं सखी हूँ तेरी, तुम मेरे सखा हो,
ये रिश्ता ना दुनिया समझे, ना कोई लिखा है।
जब भी दिल मेरा चुपके से रोता है,
तू बंसी की धुन बनकर मुझे हँसा जाता है।
ना कोई डर है, ना कोई दूरी,
तेरे साथ हर पल लगता है पूरी।
मैं अपनी हर बात तुझसे कह जाती हूँ,
तू बिना बोले ही सब समझ जाता है।
कभी मैं रूठ जाऊँ, तो तू मनाने आ जाता है,
कभी मैं खो जाऊँ, तो राह दिखा जाता है।
ना तुझसे कुछ छुपा है, ना कुछ कहना बाकी,
तुम ही मेरे सखा, तुम ही मेरे साथी।
इस दुनिया की भीड़ में जब कोई अपना नहीं लगता,
तब तू ही मेरे दिल को सुकून सा देता है।
हे कान्हा…
बस इतना सा रिश्ता बना रहे हमेशा,
मैं तुम्हारी सखी रहूँ… और तुम मेरे सखा। 💛🦚
by piyu 7soul ❤️
jighnasa solanki
તસ્વીરો બોલતી નથી,
પણ એનુ મૌન
આખા જીવનનો પડધો પાડે છે.
- jighnasa solanki
Dada Bhagwan
Do you know that at the root of a negative viewpoint lies a negative ego? When the ego is nurtured, one feels positive, but when the ego is hurt, one feels negative.
Read more on: https://dbf.adalaj.org/M4Tepcqv
#selfhelp #selfimprovement #spirituality #DadaBhagwanFoundation
Mrs Farida Desar foram
बिना गलती की सजा मिली है,
मरते दम तक,
अब चेहरा नहीं दिख पाऊँगी
अपने ही प्यार का....
- Mrs Farida Desar foram
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
સફાળું જાગી જવાયું,
મને વ્હેમ થયો તારા પાલવ અડવાનો,
કે ખરે તું જ હતી.
- સ્પંદન
Imaran
काबू में ना रहा ये अनजान हो गया,
दिल हमारा ना जाने कब तुम्हारा हो गया,
हम सोचते बस सोचते रह गए,
और तुमसे प्यार हो गया
🫶imran 🫶
Vartikareena
माई_डियर_प्रोफेसर ( नेक्स्ट पार्ट की झलक । )
mohansharma
हममें तो खूब हौसला था तेरे हर सितम सहने का मोहन..
मगर शायद तुम ही थक गए होंगे हम पर यूँ सितम ढाते ढाते..
PRASANG
बाज़ार में धर्म।
समस्या ए नहीं कि धर्म अब बाज़ार में है,
पीड़ा यह कि चेतना भी अंधे विचार में है।
अक्षरों के देवालय में सत्य की पूजा कम,
मिथ्या का दीप हर इक बड़े समाचार में है।
बोध के तरु बंजर, रस में अब माधुर्य नहीं,
जन-जन उपाधि के सब दंभ-प्रचार में है।
ग्रंथों को पढ़कर भी जो न समझे करुणा,
ऐसी शिक्षा तो केवल काग़ज़ी श्रृंगार में है।
आस्था का नाम लेकर जो सौदा रचता है,
वो साधु नहीं, ए अभिनय के व्यापार में है।
सत्य कहो तो कड़वाहट सी लगे जग को,
विष ही आजकल सारे मधुर व्यवहार में है।
“प्रसंग” ए कलम क्या लिखे इस दौर में,
सच जहाँ भी लिखा, वो दीवार में है।
- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर
Dhara K Bhalsod
વાત નાની છે પણ સમજવા જેવી
આપણી જિંદગી આપણાં વિચાર પર
Depend કરે છે...
માની લ્યો તો મસ્ત નઈ તો
કસ્ટ જ કસ્ટ છે...
🍁🍁🍁
- Dhara K Bhalsod
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
કિરદાર એવું મજબૂત હોવું જોઈએ
કે આખી કહાની વાચ્યા પછી પણ
કિરદાર સમજવા પાછી વાચવી પડે....
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
Vartikareena
माई_डियर_प्रोफेसर पधार चुकी है। आप लोग पढ हकते हो।
Ajit
"अकेला"
यह अकेला शब्द
कभी अकेला रहा ही नहीं
बल्कि इसके सानिध्य में रहे दुख,
वेदना,साहस और थोड़ी सी नीरसता
Piyu soul
👑🐍 कल आ रही है एक ऐसी कहानी… जो आपको हिला कर रख देगी!
वो एक साधारण लड़की नहीं…
बल्कि एक रहस्य है…
एक ऐसा श्राप…
जो उसकी पहचान छीन चुका है…
और एक ऐसा इंसान—
जो कभी प्यार नहीं करना चाहता…
❤️ जब ये दोनों मिलेंगे…
तो क्या होगा?
🔥 नागमणि की श्रापित रानी 🔥
⚡ कल LIVE होगी ⚡
👉 तैयार रहना…
क्योंकि ये कहानी आपको शुरुआत से ही बांध लेगी…
Kaustubhi V Joshi KVJ
આ હૃદય હવે દચકા ખાઈ રહીયુ છે
કેમ કે એક પછી એક એની સપોર્ટ સિસ્ટમ દૂર થૈ રહી છે
- Kaustubhi V Joshi KVJ
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
तुमसा नहीं देखा
दूर जरूर है पर ये ना समझना तुम पर नज़र नहीं l
तुम्हारी किसी भी हरकतों से बिल्कुल बेखबर नहीं ll
ज़माने भर में घूमकर देखा कोई तुमसा नहीं देखा l
दिलों जान लुटाई फ़िर भी तुम्हें कोई क़दर नहीं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
निन्दा करे परोक्ष में, सम्मुख करे बखान। मित्र नहीं है शत्रु वह, सदा करे नुकसान।।
दोहा --४६३
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
वात्सल्य
આ તે કેવો પ્યાર!
નથી ક'દી આપણે મળ્યાં!નથી ફૉટો કે ચહેરો જોયો!
નથી ક'દી કૉલ કર્યો!નથી ક'દી તમારા તરફથી રિસ્પોન્સ મળ્યો!એક રીતથી તમને ચાહવા લાગ્યો! જે એ કે,"તમારા શબ્દોમાં તાકાત છે.અને એ શબ્દો ઝીલવા-સમજવાની મારામાં તાકાત છે."
- વાત્સલ્ય
Piyu soul
कमज़ोर नहीं हूँ, बस वक्त मेरा खामोश है,
मेहनत मेरी जारी है, बस मुकाम थोड़ा दूर है।
जो आज नजरअंदाज करते हैं मेरी कहानी को,
कल वही कहेंगे — ये लड़की कुछ खास जरूर है। 😏💛#motivational sayari#struggle#
by piyu 7soul 📝📘📘
kattupaya s
Good morning friends..have a great weekend
Sonu Kumar
ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है?
आपने लोकसभा चुनावों में जब वोट किया तो VVPAT को पर्ची छापते और काटते देखा ?
क्या आपको याद है ?
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याद कीजिये, जब आपने Evm पर केले का बटन दबाया तो क्या आपने देखा कि — वीवीपेट ने केले की पर्ची छापी है, या वीवीपेट ने लाईट जला कर आपको पहले से पर्ची छपी हुयी पर्ची दिखाई और लाईट बुझा दी ? यदि आपने वीवीपेट को पर्ची छापते एवं काटते नहीं देखा तो क्या आप विश्वासपूर्वक कह सकते है कि वीवीपेट ने आपको पहले से छपी हुयी पर्ची नहीं दिखा दी है ?
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VVPAT वोट चुराने में इस मनोवैज्ञानिक हेक का इस्तेमाल करता है -- अक्सर लोग उन चीजो को नहीं देख पाते या उनकी अवहेलना कर देते है जो उनकी आँखों के ठीक सामने रख दी जाती है !!
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( यह जवाब प्रायोगिक किस्म का है, अत: इसे पूरी तरह से समझने के लिए आपको थोड़े तर्क एवं पूर्व स्मृति का इस्तेमाल करना पड़ेगा। हो सकता है आपको कॉपी पेन उठाना पड़े। किन्तु यदि आप इसे समझने की कोशिश करते है तो आपके द्वारा किया गया श्रम व्यर्थ नहीं जाएगा। क्योंकि आप तब वीवीपेट का एक बेहद आसान हेक पकड़ लेंगे, जिसे वीवीपेट को सामने रखे बिना समझना और समझाना काफी मुश्किल है !! जवाब में कुछ विवरण ऐसे भी है जिनकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। अत: पुष्टि के लिए पाठक स्वतंत्र स्त्रोतों से इनकी पुष्टि करने के लिए प्रयास करें, या अपने विवेक का इस्तेमाल करे। )
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सेक्शन - A
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1. 2013 से अब तक VVPAT में क्या बदलाव आये ?
2013 में जब वीवीपेट आया था तो वीवीपेट की बॉडी पेक न होकर खुली हुयी थी। पर्ची छपने के बाद मतदाता खुद अपने हाथ से पर्ची लेकर डिब्बे में डालता था। कृपया इस वीडियो के शुरूआती 30 सेकेण्ड का हिस्सा देखें -
Hari Krishna Prasad Vemuru@vhkprasad#ElectionCommissionOfIndia i remember you planned this📷 during first VVPAT trial in Delhi, and I am also one of your invitees to witness, why the present model changed? Does 3sec & 7sec has a link to this con..iracy? You seem to be totally dumb for such questions
684:13 pm - 1 मई 2019
लिंक -
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2018 में केंचुआ ने वीवीपेट में एक और बहुत ही शानदार बदलाव किया। केंचुआ ने वीवीपेट के पारदर्शी कांच को अंधे कांच से बदल दिया !! यह One Way कांच है, और इस पर बाहर से कितनी भी रौशनी डाली जाए अंदर का कुछ भी दिखाई नहीं देता।
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बाद में केंचुआ ने लाखों Evm को कलेक्टर ऑफिस से ट्रको में लादकर मंगवाया और इनमे अंधे कांच लगवाकर इन्हें फिर से कलेक्टर कार्यालय भिजवा दिया !!
कृपया इस वीडियो में 30 से 60 सेकेण्ड तक का हिस्सा देखिये। क्या आप इसमें पर्ची छपते हुए देख पा रहे है या आपने सिर्फ छपी हुयी पर्ची देखी ? इसे ध्यान से देखने के लिए आपको इसे रिवाइंड करके ध्यान से देखना पड़ सकता है।
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लिंक --
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2. अहमदाबाद के राहुल मेहता जी जब 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले वीवीपेट का पब्लिक डेमोंस्ट्रेशन देखने गए तो उन्हें यह बात खटक गयी कि जब मतदाता वोट कर रहा है तो वह वीवीपेट पर्ची को छपते एवं कटते हुए नहीं देख पा रहा है। जो कुछ हो रहा था वह यूँ था :
वोटर Evm पर कुकर का बटन दबाता है।
वीवीपेट लाईट जलाता है।
वोटर कुकर की पर्ची देखता है।
वीवीपेट लाईट बुझा देता है।
राहुल मेहता जी सोफ्टवेयर लिखते है और उन्होंने IIT दिल्ली से 1990 में कम्प्यूटर साइंस शाखा से इंजीनियरिंग की डिग्री ली थी। बाद में उन्होंने अमेरिका से मास्टर ऑफ़ कम्प्यूटर साइंस किया। चूंकि वे पिछले 30 वर्षो से Evm पर काम कर रहे है, और इंजीनियरिंग में समझते है अत: उन्हें यह प्रक्रिया कुछ ठीक नहीं लग रही थी। उन्हें समझ नहीं आ रहा था जैसा कि वे पहले देखते थे वैसे वे इस बार पर्ची को छपते और कटते क्यों नहीं देख पा रहे है। और तब उन्होंने नोटिस किया कि वीवीपेट का कांच जो कि पारदर्शी होता था, अब पारदर्शी नहीं रह गया है । इसे अंधे कांच से बदल दिया गया है। वीवीपेट पर्ची "छापने के बाद" लाईट जलाता है, और "पर्ची काटने से पहले" बुझा देता है !!!
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मेहता जी ने निर्वाचन अधिकारी से कहा कि — क्या यह मशीन ख़राब है, क्योंकि जैसे कि मैं पहले देखता था वैसे मैं पर्ची छपते और कटते नहीं देख पा रहा हूँ ?
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निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि नहीं मशीन एकदम ठीक है। लेकिन अब इसका कांच बदल दिया गया है। मेहता जी ने कहा कि, क्या मैं इसका वीडियो बना सकता हूँ ? अधिकारी ने इंकार कर दिया !! तब मेहता जी कई दिनों तक एक के बाद एक 8 डेमोंस्ट्रेशन स्टेशनों पर पहुंचे और पाया कि सभी मशीनों के कांच बदल दिए गए है।
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[ तब मैं भी चुनाव लड़ रहा था और चुनाव आयोग की नामांकन प्रक्रिया में काफी उलझा हुआ था। मैंने दो बार वीवीपेट का डेमो देखने के लिए 2 दिन तक 2-2 घंटे जाया किये किन्तु मुझे इसका डेमो देखने नहीं मिला। बाद में जब मैंने इसका डेमो देखा तो पाया कि ग्लास बदल दिया गया है, और टोर्च डालने से भी अंदर कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है।
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तब कार्यकर्ताओं ने अन्य शहरो एवं राज्यों के एक्टिविस्ट्स को भी सूचित किया कि वे वीवीपेट का डेमो देखें और वीडियो बनाए। कई शहरो में कार्यकर्ताओ ने जाकर डेमो देखा, और सब ने पाया कि ग्लास बदल दिया गया है। किन्तु किसी भी व्यक्ति को चुनाव अधिकारियो ने वीडियो नहीं बनाने दिया !! इसी दौरान जुंझुनू ( राजस्थान ) से जूरी सिस्टम के प्रत्याशी डॉ तेजपाल कटेवा जी ने डेमो देखा और वे इसका वीडियो भी लेने में सफल रहे। उन्होंने यह वीडियों सोशल मीडिया पर डाल दिया। ]
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तब मेहता जी ने निर्वाचन अधिकारी से कहा कि – यदि मुझे वीवीपेट का बिट मैप कोड लिखने दिया जाए तो मैं ऐसा कोड लिख सकता हूँ कि इच्छित उम्मीदवार को मनचाहे वोट मिलेंगे लेकिन प्रत्येक मतदाता को उसी निशान की पर्ची दिखाई देगी जिसे उसने वोट दिया है। और पर्चियों को गिनने से भी पर्चियां बराबर निकलेगी। निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि वीवीपेट का बिट मेप कोड वोटिंग के 15 दिन पहले डाला जाता है, और यह हमें आगे से आता है । हम ये कोड खुद से नहीं डालते।
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3. VVPAT का बिट मेप कोड क्या है ?
Evm में 3 हिस्से होते है :
बेलेट यूनिट : जिस पर आप बटन दबाते है।
वीवीपेट : जो पर्ची छापता है।
कंट्रोल यूनिट : जहाँ अंतिम रूप में वोटिंग काउंट जाता है।
कृपया इस बात को नोट करें कि बेलेट यूनिट, वीवीपेट और कंट्रोल यूनिट तीनो अलग अलग डिवाइस है, और इन्हें आपस में कनेक्ट किया जाता है। ये एक ही डिवाइस नहीं है।
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दूसरा बिंदु यह है कि , ये पहले से तय नहीं होता कि कितने उम्मीदवार चुनाव लड़ने वाले है और उनमे से किस उम्मीदवार को कौनसा चिन्ह एवं Evm पर कौनसा क्रम मिलने वाला है। यह सब आवंटन तो वोटिंग के 15 दिन पहले होता है।
उदाहरण के लिए मेरे संसदीय क्षेत्र में 28 मई को वोटिंग थी, और मुझे चिन्ह ( प्रेशर कुकर ) का आवंटन 15 तारीख को हुआ था। 15 तारीख से पहले तब Evm को पता नहीं है कि मुझे प्रेशर कुकर मिलने वाला है, और इसीलिए Evm मशीन के पास मेरे नाम एवं चिन्ह का डेटा नहीं है। और इसीलिए Evm मशीन वीवीपेट को यह संकेत नहीं भेज सकती कि 5 नंबर का बटन दबाने पर वीवीपेट पर्ची पर प्रेशर कुकर और मेरा नाम छापेगा।
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अब मान लीजिये किसी सीट पर 4 उम्मीदवारो नरेंद्र गाँधी, राहुल मोदी , अरविन्द यादव, और पिंटू सिंह ने नामांकन किया है, और जिला निर्वाचन अधिकारी ने उन्हें निम्नलिखित चिन्ह आवंटित किये है :
नरेंद्र गाँधी – केला
राहुल मोदी – संतरा
अरविन्द यादव – अंगूर
पिंटू सिंह – जामुन
तो अब अंतिम सूची जारी होने के बाद जिला निर्वाचन अधिकारी उम्मीदवारों का Evm पर क्रम, उनका नाम, उनके चिन्ह आदि की सूचना निर्वाचन आयोग को भेजेगा। निर्वाचन आयोग अब उन्हें इसका बिट मेप भेजेगा। बिट मेप की कमांड वीवीपेट में डाली जायेगी ताकि बेलेट यूनिट पर जब आप पिंटू सिंह का बटन दबाए तो वीवीपेट पिंटू सिंह का नाम एवं उसके चिन्ह जामुन की पर्ची छापे।
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4. कैसे VVPAT का बिट मेप लिखकर वोटो में बड़े पैमाने पर हेरा फेरी की जा सकती है ?
कृपया निचे दिए गए विवरण को ध्यान से पढ़ें :
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यदि वीवीपेट में बिट मैप लिखने वाला कोडर संतरा छाप उम्मीदवार को जितवाना चाहता है तो वह बिट मेप इस तरह से लिख सकता है कि, जब मतदाता A1 केले का बटन दबाएगा तो Vvpat केले की पर्ची छापेगा → लाईट जलाएगा → मतदाता A1 केले की पर्ची देखेगा → और लाईट बुझ जायेगी।
इसके बाद वीवीपेट कंट्रोल यूनिट को केले का 1 वोट भेज देगा।
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अब यदि अगला मतदाता A2 भी केले का बटन दबाता है तो इस बार वीवीपेट केले की पर्ची नहीं छापेगा !! हाँ, वो फिर से केले की पर्ची नहीं छापेगा !! क्योंकि उसने केले की पुरानी वाली पर्ची काटी नहीं है। उसके पास केले की वह पर्ची रोल के बाहर मौजूद है, जो उसने मतदाता A1 के लिए छापी थी , और लाईट जला कर दिखाई थी।
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अत: यदि दूसरा मतदाता A2 भी केले का बटन दबाता है तो वीवीपेट लाईट जलाएगा → A2 को वही पर्ची फिर से दिखा देगा जो पर्ची उसने A1 को दिखाई थी → अब वीवीपेट लाईट फिर से बुझा देगा !!
और वीवीपेट कंट्रोल यूनिट को कमांड भेजेगा कि संतरे का एक वोट बढ़ा दिया जाए !! कृपया इस बात पर ध्यान दें कि वीवीपेट ने A2 को केले की पर्ची दिखायी है, किन्तु कंट्रोल यूनिट को कमांड भेजा है कि संतरे का एक वोट बढ़ा दिया जाए।
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अब यदि तीसरा वोटर A3 भी केले का बटन दबाता है तो वीवीपेट फिर से उसे वही छपी हुयी पर्ची दिखा देगा जो उसने A1 एवं A2 को दिखाई थी, और कंट्रोल यूनिट को कमांड भेजेगा कि संतरे का वोट बढ़ा दिया जाए !!!
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और अब यदि मतदाता B1 आता है और संतरे का बटन दबाता है तो वीवीपेट केले वाली पर्ची काट कर गिरा देगा और संतरे की पर्ची छाप कर B1 को दिखाएगा। और अब वीवीपेट बिना लाईट जलाए 2 अतिरिक्त पर्चिया संतरे की छापेगा और डब्बे में गिरा देगा !! ( ताकि डिब्बे में पर्चियों की काउंटिंग का साम्य बनाया जा सके )
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तो VVPAT को बिट मेप के कोड में यदि कमांड दी जाए तो वह इस तरह बर्ताव करेगा।
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(1) जितनी बार संतरे का बटन दबाया जाएगा उतनी बार वह संतरे की ही पर्ची छापेगा और काट कर डब्बे में गिराता जाएगा।
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(2) यदि पहला वोटर केले का बटन दबाता है तो वीवीपेट केले की पर्ची छापकर दिखाएगा।
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(3) यदि अगला ( यानी दुसरे नंबर का ) वोटर भी फिर से केले का बटन दबाता है तो वीवीपेट केले की पर्ची नहीं छापेगा बल्कि लाईट जलाकर पहले से छपी हुयी पर्ची ही दिखा देगा, और बिना पर्ची काटे लाईट बुझा देगा।
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(4) यदि तीसरा वोटर फिर से केले का बटन दबाता है तो फिर से लाईट जलाकर उसे वही पर्ची दिखा देगा, जो उसने पहले और दुसरे वोटर को दिखाई थी।
(4.1) यदि चौथा वोटर संतरे का बटन दबाता है तो वीवीपेट केले की वह एक पर्ची काटकर डिब्बे में गिरा देगा जो उसने पहले, दुसरे और तीसरे वोटर को दिखाई थी।
(4.2) अब वह संतरे की पर्ची छापकर चौथे वोटर को दिखायेगा और लाईट बुझा देगा ।
(4.3) लाईट बुझाने के बाद पर्चियों की काउंटिंग पूरी करने के लिए वीवीपेट दो अतिरिक्त संतरे की पर्चियां छापेगा, और डिब्बे में गिरा देगा ।
(5) लेकिन यदि चौथा वोटर भी फिर से केला दबाता है तो अबकी बार वीवीपेट वोट नहीं चुराएगा। क्योंकि उसे सिर्फ दूसरा एवं तीसरा वोट चुराने की कमांड दी गयी है। तो इस बार वह केले की पर्ची छापेगा और साथ में 2 पर्चियां और भी केले की छाप कर 4 पर्चियां केले की डिब्बे में गिरा देगा। मतलब वीवीपेट सिर्फ दूसरा एवं तीसरा वोट ही चुराएगा। यदि निरंतर केले का बटन दबाया जा रहा है तो वह वोट चुराना बंद कर देगा और एक भी वोट नहीं चुराएगा।
तो VVPAT की कोडिंग की सिक्वेंस इस तरह होगी :
A1केला → A2केला → A3केला → B1संतरा के क्रम में वोटिंग होती है तो पहला वोट केले को जाएगा, किन्तु बाद के दो वोट संतरे को जायेंगे। लेकिन A2 एवं A3 पर्ची केले की ही देखेंगे। और चूंकि वीवीपेट दो अतिरिक्त पर्ची संतरे की छाप कर डिब्बे भी गिराता है अत: पर्चियां भी बराबर निकेलेगी। मतलब कंट्रोल यूनिट में भी 1 केला एवं 3 संतरा का काउंट आएगा और वीवीपेट के डिब्बे में भी 1 पर्ची केले की और 3 पर्चियां संतरे की निकलेगी। और कमाल की बात यह है कि जब आप वोटर से पूछेंगे तो 3 वोटर कहेंगे कि हाँ हमने केला दबाया था और हमने केले की ही पर्ची देखी थी !!!
A1केला, B1संतरा, A2 केला, B2संतरा....... केला, संतरा, जामुन, अंगूर, संतरा, केला, जामुन के क्रम में वोटिंग होगी तो वीवीपेट कोई वोट नहीं चुरा सकेगा। क्योंकि वीवीपेट को हर बार नयी पर्ची छापनी होगी।
यदि केला1 , केला2 , केला3 , केला4 ....... केला7 या जामुन1 , जामुन2 , जामुन3 , जामुन4, ..... जामुन7 के क्रम में वोटिंग होगी तो भी वीवीपेट कोई वोट नहीं चुराएगा। क्योंकि वीवीपेट सिर्फ दूसरा एवं तीसरा वोट ही चुराएगा। यदि किसी उम्मीदवार के पक्ष में भारी एवं निरंतर मतदान हो रहा है तो वीवीपेट वोट नही चुराएगा. क्योंकि इससे अस्वभाविक परिणाम आ सकते है।
यदि संतरे को 50% से अधिक वोट मिल जाते है तो वीवीपेट वोट चुराना बंद कर देगा, और स्वभाविक वोटिंग होने देगा।
दुसरे शब्दों में जो 6 आदमी दिल्ली के मुख्य निर्वाचन आयोग के दफ्तर में बैठकर सभी सीटो के बिट मेप लिखकर भेज रहे है, चुनाव के नतीजे वे ही तय करेंगे। अलबत्ता वे आपको वे पर्चियां दिखाते रहेंगे जो बटन आपने दबाया है !!! कृपया इस बात को भी नोट करें कि कोडर यह कमांड भी दे सकता है कि वीवीपेट का यह कोड तब एक्टिव होगा जब किसी मशीन पर 50 वोट डाले जा चुके होंगे। मलतब जब वोटिंग से पहले मशीन चेक करने के लिए सेम्पल वोटिंग की जायेगी तो कंट्रोल यूनिट सही पर्ची काटेगी और सही संकेत ही कंट्रोल यूनिट को भेजेगी !!!
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सार यह है कि -- वीवीपेट का कोड केंचुआ के दिल्ली के दफ्तर में बैठे 4 इंजीनियर्स लिखते है, और ये लोग जैसा कोड लिखेंगे नतीजे वैसे ही आयेंगे !! और इस गड़बड़ी को कभी भी साबित नहीं किया जा सकेगा !!!
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5. तो मेहता जी ने निर्वाचन अधिकारी से कहा कि, यदि वीवीपेट का बिट मेप मुझे लिखने दिया जाए तो मैं ऐसा बिट मेप लिख सकता हूँ कि आप अगर केले का बटन दबायेंगे तो वीवीपेट पर भी आप केले की पर्ची देखेंगे, किन्तु कंट्रोल यूनिट में वोट संतरे को जाएगा , और यदि आप पर्चियां गिनेंगे तो वे भी बराबर निकलेगी !! मतलब उसी हिसाब से निकलेगी जितने वोट कंट्रोल यूनिट में है !!
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चुनाव आयोग ने उन्हें वीवीपेट दिखाने से इंकार कर दिया। मेहता जी ने उनसे कहा कि यदि मुझे 12 घंटे के लिए एक वीवीपेट दे दी जाए तो मैं आपको इसका डेमो देकर दिखा सकता हूँ । निर्वाचन अधिकारी ने इनकार कर दिया। निर्वाचन अधिकारी का कहना था कि वीवीपेट पूरी तरह से सुरक्षित है, और जो भी आप कह रहे हो वह बकवास है !! मेहता जी ने लिखित में उन्हें अर्जी दी कि मुझे एक वीवीपेट दी जाए ताकि मैं यह करके दिखा सकू। निर्वाचन अधिकारी ने इनकार कर दिया !!
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तब मेहता जी ने तारीख 7 अप्रेल 2019 को गुजरात के लीडिंग गुजराती दैनिक “गुजरात समाचार” के मुख्य पृष्ठ पर एक विज्ञापन दिया , जिसमे उन्होंने लिखा कि — " जो भी व्यक्ति VVPAT का कोड लिखेगा, वह चुनावी नतीजे तय करेगा। और यदि मुझे VVPAT दी जाए तो मैं ऐसा कर के दिखा सकता हूँ !! "
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विज्ञापन का लिंक :
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बदले में केंचुआ ने उन्हें नोटिस जारी किया कि आप एक संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाकर मतदाताओं को भ्रमित कर रहे हो, अत: अपने खर्चे पर फिर से एक विज्ञापन लगाओ कि – आपका दावा मनगड़ंत है..
नोटिस का हिन्दी अनुवाद :
“गुजरात समाचार” समाचार पत्र में, ता. 07/04/2019 को, “ राइट टू रिकॉल पार्टी ” नाम के तहत “शीर्ष के 4-5 प्रोग्रामर के लिए लाखों ईवीएम में वोट बदलना संभव !! कैसे ? और उपाय ?” इस हैडलाइन से मनमानी चीज़े बताए हुए पर्याप्त सबूत के बिना प्रथम नजर से ही जाली (भ्रामक) विज्ञापन दिया गया है, उस संबंध में आपको निम्नलिखित नोटिस दिया जाता है :
यह कि, आप अच्छी तरह से जानते है कि यानी चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 से प्राप्त हुए अधिकारों और संसद द्वारा निर्मित R.P.Act-1951 और चुनाव प्रबंधन नियमों के अधीन काम करने वाला संगठन है। दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के चुनाव स्वतंत्र और न्यायिक तरीके से हो, इस तरह से चुनाव आयोग काम करता है। वर्ष 1999 से ई.वी.एम द्वारा चुनाव प्रक्रिया हो रही है, और इस तरह चुनाव आयोग के अधीन EVM द्वारा हो रही चुनाव प्रक्रिया में अविश्वश्नियता का एक भी किस्सा साबित नहीं हुआ है, और इस वजह से EVM का नि-संदेह बेहतरीन ट्रेक रिकॉर्ड रहा है।
आपकी पार्टी और नाम का उल्लेख सहित दिनांक 07.04.2019 को “गुजरात समाचार” दैनिक समाचार पत्र में चुनावी विज्ञापन ऊपर वर्णित शीर्षक से प्रसिद्ध किया गया है और इसमें चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर मनगडंत आरोप लगाया गया है। जिसके कारण साधारण मतदाता का निरर्थक भ्रमित होना संभव है, और आपकी इस कोशिश से अब तक के निष्कलंक चुनाव प्रक्रिया को बिना प्रमाण दूषित करने की कोशिश की जा रही है।
लोकसभा की आम चुनाव प्रक्रिया वर्तमान में जारी है। चुनाव आयोग की देखरेख में हमारा तंत्र चुनाव का संचालन कर रहा है। आपने 06-गांधीनगर संसदीय मत विस्तार से खुद को प्रत्याशी घोषित किया है, और नामांकन के समय आपने भारत के बंधारण का ''अनुच्छेद -84- (ए)'' के अनुसार भारत का संविधान और संविधान से स्थापित भारत की एकता और सप्रभुता की विश्वास की सौगंध उठायी है। फिर भी भारत की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था भारत के चुनाव आयोग द्वारा स्थापित कार्यप्रणाली के प्रति आधार विहीन टिप्पणी और भ्रामक विज्ञापन देकर चुनाव आयोग को कोई भी प्रमाण ( proof ) दिए बिना दुषित करने का प्रयत्न किया है। इस परिस्थिति में आपके द्वारा वर्तमान पत्र में प्रसिद्ध किया गया विज्ञापन निराधार आरोप चुनाव प्रक्रिया को आशंकित और विषयुक्त बना सकता है, ऐसा हमारा मानना है।
इसलिए आपके द्वारा प्रसिद्ध हुए “चुनाव विज्ञापन” के संदर्भ में आप प्रसिद्ध किये हुए विज्ञापन को प्रमाणित करे, ऐसा आधारशील पुरावा (proof) सहित 3-दिन में खुलासा दो या अपने दिए हुए EVM विज्ञापन के गलत होने का खुद के खर्चे से विज्ञापन देकर लोगो का संदेह दूर करने के लिए नोंध लीजिए।
अन्यथा आपके सामने उचित जोग्वाई में कानूनी कार्यवाही करने की हमे मजबूरी एवं शक्ति हो उसकी नोंध लीजिये।
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सेक्शन - B
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1. भारत में VVPAT क्यों लायी गयी थी ?
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भारत के नेताओं को पंजे में लेने के लिए बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत में Evm लेकर आये है, और इसे हैक किया जा सकता है --- यह जानकारी पहली बार मुझे सबसे पहले संघ=बीजेपी के नेताओं से 2009 में मिली थी। तब मैं संघ=बीजेपी में काम करता था, और मैंने जितना इसे समझा, मेरा Evm से भरोसा उठ गया था। यह उस दौर की बात है तब बीजेपी=संघ के नेता 2009 के चुनावी नतीजो के बाद पूरे देश में धरने दे रहे थे, और देश के नागरिको को यह बता रहे थे, कि Evm में रिमोट से वोट बदले जा सकते है और कोंग्रेस ने Evm का इस्तेमाल करके चुनाव जीता है। तब संघ की शाखाओ एवं बीजेपी की बैठको में वरिष्ठ नेताओ द्वारा हम कार्यकर्ताओ को हमेशा यही कहा जाता था कि, कोंग्रेस ने यदि Evm में हेराफेरी नहीं की होती तो हम सरकार बना लेते !!
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उस समय कोंग्रेस को 210 सीट मिली थी, और इस बात को मैंने भी नोट किया था कि देश के लोगो की एनर्जी 210 सीटो के साथ मैच नहीं हो रही थी। मेरा मतलब है नतीजो के बाद माहौल देखकर लग नहीं रहा था कि कोंग्रेस को 210 सीटो के लिए लोगो ने वोट किया है !! उस समय की खबरे एवं बीजेपी=संघ के नेताओं का तब का स्टेंड आप निचे दिए गए लिंक्स पर देख सकते है :
EC rejects BJP charge about EVM malfunction
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BJP to show EC how EVMs can be tampered
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तब लाल कृष्ण आडवाणी भारत में लगातार Evm को हटाकर बैलेट पेपर लाने की मुहीम चला रहे थे। इसी दौरान संघ=बीजेपी के सांसद GVL नरसिम्हा राव ने डेमोक्रेसी एट रिस्क नाम से एक पुस्तक लिखी जिसमे उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया कि Evm के रहते लोकतंत्र एक फ्रोड है !! इस पुस्तक का आमुख आडवाणी जी ने लिखा था। हालांकि संघ=बीजेपी के अन्य नेताओं की तरह ही आजकल ये भी Evm के समर्थन में है !!
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तब मेहता जी और इंजीनियर श्री हरि प्रसाद जी भी Evm को कैसे हैक किया जा सकता है, दर्शाने को लेकर काम कर रहे थे। किंतु सबसे बड़ी समस्या थी कि केंचुआ अवलोकन के लिए Evm देने को राजी नहीं था। और जब तक इंजीनियर्स के हाथ में मशीन नहीं लगे तब तक मतदाताओ को यह बात समझायी नहीं जा सकती कि Evm में रिमोट से वोट बदले जा सकते है !! इन लोगो ने केंचुआ से कई बार आग्रह किया कि यदि घंटे भर के लिए Evm दी जाए तो आपके सामने ही हम इसके वोट रिमोट से चेंज करके दिखा देंगे। हम इंजीनियर है, जादूगर नहीं है। किन्तु केंचुआ ने Evm देने से इंकार कर दिया।
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इसी समय मेहता जी ने इन्डियन एक्सप्रेस के मुख्य पृष्ठ पर इस आशय का विज्ञापन देने की कोशिस की कि, कैसे रिमोट से Evm के वोट बदले जा सकते है। किन्तु इंडियन एक्सप्रेस ने पहले पेज पर यह विज्ञापन लगाने से इंकार कर दिया। तब उन्होंने यह विज्ञापन तीसरे पृष्ठ पर दिया। यह विज्ञापन 31 जुलाई 2009 को दिया गया था। विज्ञापन दिल्ली, मुंबई समेत कई महानगरो के एडिशन में प्रकाशित हुआ।
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विज्ञापन का लिंक :
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इसी समय इंजिनियर श्री हरि प्रसाद जी ने 2010 में जिला कलेक्टर कार्यालय से एक इवीएम चुराई एवं इसका डिस्प्ले बदल कर इसके वोटो को रिमोट से बदल कर दिखाया। हरि प्रसाद जी का यह वीडियो उन्होंने यू ट्यूब पर अपलोड किया था। बदले में चुनाव आयोग ने श्री हरि प्रसाद पर काफी मुकदमे डलवाकर उन्हें फिट कर दिया। उनकी कम्पनी के कर्मचारियों का उत्पीड़न किया गया और उन पर भी मुकदमे डाले गए !!
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श्री हरि प्रसाद जी द्वारा बनाया गया वीडियो यहाँ देखें - India's EVMs are Vulnerable to Fraud
( इस वीडियो के क्रेडिट में श्री राहुल मेहता जी एवं GVL नरसिम्हा राव का नाम भी देखा जा सकता है )
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तो इतना सब काण्ड होने के कारण यह बात कॉमन नोलेज में आने लगी थी कि Evm विश्वसनीय नहीं है। लेकिन बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक Evm हटाना नहीं चाहते थे। क्योंकि इसे हटाने के बाद नेताओ की नस दबाकर रखने का एक महत्तव्पूर्ण हथियार उनके हाथ से निकल जाएगा। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक भारत की सभी पार्टियों एवं नेताओं को दो चीजो से कंट्रोल में रखते है - (1) मीडिया व (2) Evm
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मेक ओवर करने के लिए पहले चरण में चुनाव आयोग ने हर साल इवीएम चलेंज आयोजित करना शुरू किया जिसमे वह कहता है कि आकर Evm हैक करके दिखाओ। लेकिन चूंकि केंचुआ Evm किसी को भी छूने नहीं देता इसीलिए चुनाव आयोग के चेलेंज में कोई इंजिनियर नहीं जाता। और यह बात स्पष्ट है कि बिना खोले इसे हेक नहीं किया जा सकता।
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कृपया पाठक इस बात को नोट करे कि किसी भी व्यक्ति को इवीएम के साथ छेड़खानी करने का अवसर नहीं मिले तो इसे हेक नहीं किया जा सकता। इसे सिर्फ एक ही शर्त पर किया जा सकता है कि हेकर को इसे खोलने का अवसर मिले। तो केंचुआ किसी भी व्यक्ति को Evm छूने नहीं देता और अगले दिन सभी अखबारों में बड़े बड़े अक्षरों में खबर लगवा देता है कि कोई भी इंजीनियर Evm को हैक करके नहीं दिखा सका !!!
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मेरा पाठक से आग्रह है कि कृपया ऊपर दिए गए पेरेग्राफ को दुबारा पढ़े और ध्यान से पढ़ें। इससे आपको पेड मीडिया की ताकत का अंदाजा होगा। केंचुआ और पेड मीडिया ने पिछले 20 साल से सिर्फ एक गलत वाक्य का इस्तेमाल करके देश के 90 करोड़ मतदाताओ को बेवकूफ बना के रखा है। और केंचुआ यह अधुरा वाक्य हजारों बार दोहराता है।
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उसका अधुरा और गलत वाक्य है — Evm को हैक नहीं किया जा सकता !! ( यह झूठी बात है )
जबकि सही वाक्य है — Evm को बिना छुए हैक नहीं किया जा सकता !!! ( यह सही बात है )
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केंचुआ इतना भ्रष्ट और चालाक है कि वह हर साल Evm चेलेंज आयोजित करता है, किन्तु इंजीनियर्स को Evm छूने नहीं देता। लेकिन केंचुआ और पेड मीडिया अगले दिन यह बात छापते है कि कोई भी इंजीनियर इसे हैक करके नहीं दिखा सका !! जबकि कोई इंजीनियर वहां जाता ही नहीं है !!
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ऊपर मैंने दो कार्यकर्ताओ के विवरण दिए है। ये पिछले 15 साल से केंचुआ से Evm मांग रहे है। इनका कहना है कि हमें आप 2 घंटे के लिए लाइव Evm / Vvpat दे दो। हम इसे लाइव ही हैक करके दिखा देंगे !! और जब केंचुआ इन्हें Evm नहीं देता तो ये इसे चुराते है, और बदले में केंचुआ इन्हें खामोश कर देता है !! और ये लोग कोई परचून की दूकान नहीं चलाते है !! इंजीनियर्स है। और मेहता जी ने IIT दिल्ली से कम्प्यूटर साइंस से तब इंजीनियरिंग की थी, जब भारत में कम्प्यूटर इक्का दुक्का हुआ करते थे। केंचुआ जानता है कि इन लोगो के हाथ में Evm दे दी गयी तो ये इसे हैक कर देंगे।
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मेरा बिंदु है कि, जो इंसान Evm / Vvpat का कोड लिखेगा Evm / Vvpat उसी के हिसाब से नतीजे देगी। Evm / Vvpat का कोड केंचुआ लिखता है !! मतलब यदि केंचुआ और उसके सभी अधिकारी 100% ईमानदार है तो Evm सेफ है वर्ना नहीं है !!
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और फिर आप सोशल मीडिया में आप ऐसे लोगो को बेहद बुद्धिमता पूर्ण डिबेट करते देखते है कि Evm सुरक्षित है !! कैसे सुरक्षित है ? क्योंकि उन्होंने यह अख़बार में पढ़ा है !!!
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Anti-Evm एक्टिविस्ट्स ने मतदाताओं तक यह जानकारी पहुंचानी जारी रखी कि केंचुआ मतदाताओ को अखबारों-टीवी के माध्यम से भ्रमित कर रहा है कि Evm को हैक नहीं किया जा सकता। सोशल मीडिया के ताकतवर हो जाने के कारण कार्यकर्ताओ की बात ज्यादा तेजी से मतदाताओं तक जा रही थी। चूंकि केंचुआ मतदाताओं को भ्रमित करने के लिए मीडिया का इस्तेमाल कर रहा था, इसीलिए अखबारों में भी यह बात आना जरुरी था कि केंचुआ का Evm चेलेंज एक ढकोसला है।
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नवम्बर 2012 में मेहता जी ने Anti-Evm पर फिर से विज्ञापन दिया। यह विज्ञापन गुजरात समाचार के मुख्य पृष्ठ पर दिया गया था। विज्ञापनो का जिक्र इसीलिए किया जा रहा है, क्योंकि कोरा-फेसबुक पर लिखने का पैसा नहीं लगता, किन्तु इस स्तर के एक विज्ञापन पर लाखों का खर्च आता है। और विज्ञापन सिर्फ तब ही लगाए जाते है जब सूचना की गंभीरता एवं विश्वसनीयता का स्तर इतना उच्च हो कि लाखों रूपये इस पर खर्च किये जा सके।
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तो 12 साल की इतनी सब उठा पटक के बाद छोटे छोटे कार्यकर्ता नागरिको के सामने यह स्थापित करने में कामयाब रहे कि केंचुआ पूरे देश को Evm के माध्यम से पूरे देश के मतदाताओं से झूठ बोल रहा है। कृपया पाठक इस बात को नोट करें कि सरकार जब भी कोई सांकेतिक सकारात्मक बदलाव लाती है तो इसके पीछे हमेशा कई सारे छोटे छोटे कार्यकर्ताओ के प्रयास होते है। ऐसे कार्यकर्ता जो मीडिया के चपेट में नहीं रहते और इस बात को जानते है कि असली लड़ाई मीडिया के साथ ही है, और ब्रांडेड नेता, सरकारे आदि मीडिया की कठपुतली एवं प्रोडक्ट से ज्यादा कुछ नहीं है ।
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तब मतदाताओ को और भी बुत्ता देने के लिए केंचुआ 2012 में VVPAT लेकर आया। केंचुआ को यह बात पता थी कि देश के काफी सारे एक्टिविस्ट्स Evm के पीछे लगे हुए है, अत: उसने प्राथमिक डिजाइन में कांच नहीं लगाया। फिर 3 साल बाद इसमें कांच लगाया। लेकिन तब भी मतदाता पर्ची कटते और और छपते देखता था। फिर इसे ब्लेक कांच से बदला। इस ब्लेक कांच में टोर्च की लाईट डालने से अंदर का कुछ कुछ दिखाई देता था। और फिर लोकसभा चुनावों के पहले केंचुआ ने ब्लेक कांच को अंधे कांच से बदल दिया !!! one way कांच लगाने का क्या प्रभाव हुआ है यह ऊपर लिखा जा चुका है।
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तो वीवीपेट की यह लड़ाई अब शुरू हुयी है, और अगले चुनावों तक anti-evm कार्यकर्ताओ को यह प्रयास करने चाहिए कि वे वीवीपेट के फ्रोड की सूचना ज्यादा से ज्यादा मतदाताओ तक पहुंचाए। पेड मीडिया की चपेट में होने के कारण किसी मतदाता को यह बात लिखकर या बोलकर समझाना काफी मुश्किल है, अत: कार्यकर्ताओ को सभी मतदाताओ को यह सूचना देनी चाहिए कि आगामी चुनावों में जब भी वे वोट करने जाए तो इस बात को नोटिस करें कि उन्होंने वीवीपेट में पर्ची छपते या कटते देखी है या नहीं । जब वोटर खुद अपनी आँखों से इसे देखेगा तो स्वयं ही समझ जायेगा। वर्ना पेड मीडिया की गिरफ्त में रहने वाले किसी व्यक्ति को 1000 पेज लिखकर भी यह बात समझाई नहीं जा सकती।
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Evm के कारण बूथ स्तर के आंकड़े सामने आने लगे जिससे तुष्टिकरण एवं बदला भंजाने की राजनीती शुरू हुयी !!
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भारत में EVM का प्रयोग 1988 में उपचुनाव के दौरान प्रायोगिक तौर पे शुरू किया गया ,1996 के लोकसभा चुनावों में 12 सीट पर EVM के माध्यम से चुनाव हुए । ये वाजपेयी थे जिन्होंने बड़े पैमाने पर EVM के इस्तेमाल की वकालत की, फलस्वरूप 1998 के आम चुनाव में सभी 543 लोकसभा सीट पर EVM के माध्यम से मतदान हुआ ।
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1998 से पहले मतपत्रो के माध्यम से वोटिंग होती थी। गणना के दौरान अक्रमत: ढंग से किन्ही 3 मत पेटियों के मतपत्रो को मिलाने के उपरांत गणना की जाती थी । इस विधि से की गयी गणना से बूथ वाईज़ वोटिंग को चिन्हित करना मुमकिन नहीं था । लेकिन EVM के आने से स्थिति पलट गयी ।
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अब चूंकि हर बूथ पर एक EVM रखी जाती है अत: हर बूथ की वोटिंग के आंकड़े चिन्हित EVM में दर्ज़ रहते है। 2010 तक चुनाव आयोग बूथ वाइज़ आँकड़े अधिकृत रूप से ज़ाहिर नहीं करता था, किन्तु अनाधिकृत रूप से सभी पार्टियों और उम्मीदवारों के पास यह आंकड़े उपलब्ध हो जाते थे। वर्ष 2010 से RTI के अधीन चुनाव आयोग ने बूथ वाइज़ आंकड़ो का खुलासा करना शुरू किया, और आंकड़े सहज उपलब्ध होने लगे।
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बूथ वाइज़ आंकड़ो से अमुक पार्टी को यह सुनिश्चित जानकारी मिल जाती है कि अमुक क्षेत्र के नागरिको ने मुझे पर्याप्त मात्रा में वोट नही किया है, अत: तुष्टि करण और दमन के लिए इस पैमाने को आधार बनाया जाने लगा और राजनेतिक दलों ने कम वोट देने वाले क्षेत्रो के नागरिको से बदला भंजाना शुरू किया।
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सेक्शन - C
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1. कोंग्रेस-बीजेपी-सपा-बसपा-आपा का Evm पर स्टेंड क्या है ?
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1998 से ही सभी बड़ी पार्टियों एवं ब्रांडेड नेताओं का एक ही स्टेंड है --- जब चुनाव हार जाओ तो मजमा बनाने के लिए Evm को कोसना शुरू करो !! और जब सत्ता में आ जाओ तो Evm का समर्थन करने लगो !!
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सबूत ?
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भारत में पिछले 20 साल में आज तक किसी भी बड़ी पार्टी के किसी भी सांसद ने संसद में Evm को रद्द करके बेलेट पेपर लाने के लिए बिल नहीं रखा है। केजरीवाल जी और मायावती भी Evm के खिलाफ रहे है। मायावती के पास लोकसभा में दर्जनों सांसद रहे है। और आम आदमी पार्टी के पास भी पिछली लोकसभा में 4 सांसद थे। किन्तु इनमे से किसी भी पार्टी के किसी भी सांसद ने संसद में कोई बिल नहीं रखा !! और कोंग्रेस ने भी नहीं रखा !!
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2. सोनिया जी, मोदी साहेब, केजरीवाल जी, मुलायम सिंह जी, मायावती आदि के समर्थको एवं अंध भगतो का Evm पर क्या स्टेंड है ?
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नेताओं के समर्थको एवं अंध भगतो का सेपरेट कोई स्टेंड नहीं होता। जो उनके नेता का स्टेंड होता है, वही उनका स्टेंड हो जाता है। मतलब इस समय यदि आप सोनिया जी के भगतो से पूछेंगे तो वे कहेंगे कि Evm को हैक किया जा सकता है, किन्तु यही भगत 2014 से पहले तक नागरिको को यह विश्वास दिलाने में लगे रहते थे कि Evm एकदम सुरक्षित है !! अन्य नेताओं के भगतो का भी यही हिसाब है।
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3. सुप्रीम कोर्ट का Evm पर क्या स्टेंड है ?
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मेरी मान्यता में भारत की सबसे भ्रष्ट संस्था सुप्रीम कोर्ट है। जजों को मैं भारत के सभी स्तर के सभी प्रकार के भ्रष्टाचार की गंगोत्री मानता हूँ। Evm पर सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज Evm के मुद्दे पर लगातार आती हुयी आपत्तियों की सुनवाई करके पिछले 20 साल से टाइम पास कर रहे है, ताकि Evm को शुरू रखा जा सके। जब भी कोई PIL दायर होती है केंचुआ सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जजों को जाकर कहता है कि, Evm एकदम सुरक्षित है, और सुप्रीम कोर्ट के भ्रष्ट जज मान लेते है।
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उन्होंने कभी भी केंचुआ को नहीं कहा कि -- आपकी Evm को अवलोकन के लिए सार्वजनिक करो और इंजीनियर्स को इसे हेक करने का अवसर दो !! भ्रष्ट केंचुआ भ्रष्ट सुप्रीम कोर्ट दोनों ही संवेधानिक
Arun
बातो बातो मे
सीधी बात करूंगा तो
बात को समझ पाओगे,
घुमा फिरा के कह दूंगा तो
बात को छोड जाओगे।
बात जो ना हो पाएगी तो
बातों पर शक आएगा,
बात जो हा हो पाएगी तो
बातों पर नाता जोडेगा।
पुकार दिल की बात
बातो की गहन सच्चाई,
हुंकार बातों का शोर
बातो की बेबस लाचारी।
..................................अरुण राऊत
Arun
प्रलयांस
म्हणे युद्धाचे सावट आहे
भीतीचे अवडंबर आहे
व्याकुळ मनाचा शोक आहे
मनातील खुसपाट आहे
आजचे उद्यावर ढकलत
ऐरणीचा प्रश्न तोंडावर
राजकारणाची माजुरडी
थिट्या कायद्याच्या जोरावर
म्हणे लोकशाही महत्त्वाची
म्हणे रिपब्लिक डेमोक्रॅटिक
युद्ध विलंबात गारठलाय
अन उत्तराचा प्रश्नच पावलाय
.....................................अरुण राऊत
Bhavna Bhatt
ચેટીચંદ નો વરઘોડો
સુરજબા ચૌહાણ આર્ય
મિત્રો હાલ મને લખવાનો ટાઈમ નથી મળતો કારણ મારા જેઠાણીને ફેક્ચર થઇ ગયું છે. એટલે બે ઘરનું કામ મારે કરવાનું હોય છે. બે ફેમિલી માં 11 જણ છીએ એટલે આખો દિવસ કામ ચાલે. મને કોઈ તકલીફ માં હોય એની મદદ સેવા કરવી બહુ ગમે બે ઘરના કચરા, પોંછા, વાસણ, કપડાં, રસોઈ બધું હું એકલી કરું, સવારે 6 વાગ્યાં થી 3 અને સાંજે 5 થી 10:30 સુધી કામ ચાલે ફોન તો મારા હાથમાં દરોજ રાતે 11:47 આવે મેં સ્ટેટ્સ માં પણ એ જ રાખ્યું છે કે અત્યારે હું જીવતાં ભગવાન ની સેવામાં વ્યસ્ત છું એટલે પથ્થર પૂજવાનો ટાઈમ નથી. શુભરાત્રી 🙏🏼
સુરજબા ચૌહાણ આર્ય
મારા બે સાવજ 🦁🦁 આર્યવર્ધનસિંહ અને અધ્યયનસિંહ
Meena Parmar
પીડા એ નિશાની છે કે તમે જીવંત છો સમસ્યા એ સકેત છે તમે મજબૂત છો પ્રાથૅના એ નિશાની છે કે તમે એકલા નથી ...
- Meena Parmar
aakanksha
बारिश और यादें
पहली बारिश अक्सर बीमार कर देती है,
दूसरी में वो पहली सी महक नहीं रहती।
कुछ एहसास भी मौसम जैसे बदल जाते हैं,
दिल वही रहता है, मगर धड़कन वही नहीं रहती।
Meena Parmar
છલકાય નહી લાગંણી એમ ચાલ મળીએ નયંનો માં અનરાધાર પલળીએ મોસંમ નથી વરસાદ ની તો શુ થયું ધુમ્મસ ની છે વાત ચાલ ને ઓગળીએ...
- Meena Parmar
Narendra Parmar
मतलबी इंसान से मतलब ही रखिए
उसे अपना बनाकर
ख़ुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मत मारिए ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Abha Dave
विश्व रंगमंच दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏
अभिनय
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विशाल धरा पर अपने -अपने किरदार सभी निभा रहे हैं
पर रंगमंच पर आकर कलाकार अपना अभिनय दिखा रहे हैं
रंगमंच पर हर एक भाव को बड़ी ही खूबी से पेश करते हैं
अपने हावभावों से सभी को वो अपना बना रहें हैं।
इतना आसान नहीं होता है रंगमंच पर अभिनय करना
अपने आप को भूलकर किरदारों को आत्मसात करना
तन -मन में कितना ही दुख दर्द छुपा हो करते हैं ये अभिनय में कमाल
ये ठान लेते हैं अपने आप को भूलकर शानदार अभिनय है करना।
विश्व रंगमंच दिवस समर्पित है सभी कलाकारों को
जो नयी शक्ति भरता है नये अभिनय के जानकारों को
सभी बधाई के पात्र हैं अपने अभिनय के जो साथ हैं
इसी तरह आगे बढ़ते हुए आकषिर्त करतें रहें सभागारों को।
आभा दवे
मुंबई
રોનક જોષી. રાહગીર
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સુંદર ભાવનાત્મક વાર્તા વાંચો મારા ફેસબુક પેજ પર.
Nilesh Rajput
अगर मैं न कह सकूँ कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूँ
तो देखना मेरी गैलरी में छुपे उन फोटो को जिन्हें मैं दिन में कितनी दफ़ा देखता हूँ..
पढ़ना मेरे WhatsApp के वो हर मैसेज जहाँ हमने एक साथ मिलकर सपने साकार करने के वादे किए थे..
scroll करना मेरे हर वो reels जो मैंने save करके रखे है पर तुम्हें send करने की कभी हिम्मत नहीं कर पाया...
सुनना वो हर गाने जो मुझे तेरा होने का अब तक एहसास कराती है....
अगर फिर भी न जान सको मेरा प्यार को तुम,
तो मिलना अगले जन्म में जहाँ मैं बताऊँगा कि आखिर प्यार क्या होता है?
Jyoti Gupta
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Irfan Khan
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nafrat ki aag ya whood ki talash matrubharti 32 chepter maujood hai sare chepter padne ke liye wha jaye
S King
That old city, those old friends, those old dreams—I lived them all once again today.
In the span of just a few fleeting moments of reunion, I relived my entire childhood.
Just like the sound of my mother's slippers calling me home, the phones began to ring—and I had to leave the gathering behind.
Not knowing when we would ever meet again, I nonetheless left with a promise to see them very soon
S King
I want to let how I feel, you know but I am scared how the talks might grow, what the world might say, when they see flamingo flying with a crow.
I might be really stupid, to ever think about me with you, but still it feels great to see dreams, that might never come true.
S King
जिस रात फ़लक पर चाँद का चेहरा नहीं होता,
मेरा दिल तेरी याद में एक पल नहीं सोता।
बस वही तो एक ज़रिया है तुझसे रोज़ मिलने का,
वरना इस अंधेरी रात में सुकून कहीं नहीं होता।
✅✅✅✅🥰🥰🥰
SARWAT FATMI
माँ ❤️
आज एक बात समझ आई…
माँ एक शब्द नहीं, सिर्फ एक रिश्ता नहीं,
वह हमारे लिए पूरी दुनिया है… बल्कि यूँ कहें, हमारी दूसरी दुनिया है।
वह हमें सिर्फ जन्म नहीं देती,
हर रोज खुद को मिटाकर हमें बनाती है।
उसकी नींद अधूरी रहती है,
पर उसकी दुआएँ कभी अधूरी नहीं होतीं।
माँ हमारी पहली आवाज, पहला सहारा
और आख़िरी उम्मीद होती है।
जब दुनिया हम पर उंगलियाँ उठाती है,
तो माँ ढाल बनकर खड़ी हो जाती है।
जब हर रिश्ता साथ छोड़ देता है,
तो माँ खामोशी से हमारा हाथ थाम लेती है।
वह टूटती तो है, पर बिखरती नहीं,
रोती भी है, पर अपने आँसू छुपा लेती है।
माँ कोई शब्द नहीं…
वह हमारी पूरी कायनात है।
खुद अधूरी रहकर भी हमें पूरा कर देती है।
❤️ Love you Maa ❤️
🥰 Sarwat Fatmi 🥰
Nandani
प्रेम ऐसा हो,,
मेरी चंचल सी नादानियों में,
तुम्हारी गहरी सी समझ हो,,
यूं घूरने वालों की कगार में,
तुम्हारी निहारने वाली नज़र हो।।
❤️ 👀
SARWAT FATMI
माँ
आज एक बात समझ आई
मां एक शब्द नहीं, या सिर्फ एक रिश्ता नहीं
वह हमारे लिए पूरी दुनिया है
यही कह सकते हैं या यह कह सकते है की दूसरी दुनिया है
वह हमें सिर्फ जन्म नहीं देती है
हर रोज खुद को मिटा कर बच्चों को बनाती है
उसकी नींद अधूरी रहती है
पर दुआएं कभी अधूरी नहीं होती
माँ पहली आवाज, पहली सहारा
और आखिरी उम्मीद होती है
जब कभी दुनिया हम पर उंगलियां उठाने लगती है
तब माँ ढाल बनकर खड़ी हो जाती है
जब हर कोई रिश्ता छोड़ दे तो वह बड़े ही खामोशी से हमारे हाथ थाम लेती है
हालांकि वह टूट जाती है पर बिखरती नहीं
रोंती तो है पर आंसुओं को छुपा लेती है
माँ शब्द नहीं वह हमारी पूरी कायनात है
खुद अधूरा रह कर भी हमें पूरा कर देती है
❤️love you MAA❤️
🥰Sarwat Fatmi🥰
Kiran
दुनिया सूरत देखे मेरी ,
मुझे सीरत देखने वाला चाहिए।
kattupaya s
Goodnight friends.. sleep well
ek archana arpan tane
જો ઉઠી જાઉં મારી જ ઠાઠડી પર તો મારાં મોત પર પોક મૂકીને રડનારાં જ જીવવાં નહીં દે.
- ek archana arpan tane
Falguni Dost
મારા ચહેરા પરથી હૃદયના ભાવ કળી શકો તો જાણું,
દોસ્ત! હસતી આંખની પાંપણે રહેલ કોરા આંસુ જોઈ શકો તો માનું.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
વિશ્વ રંગમંચ દિવસની ખૂબ ખૂબ શુભેરછા 🙏🏻
Shefali
#shabdone_sarname__
Sneha Gupta
✨जीवन के सच्चे शिक्षक✨
बरसाती बूंदों ने अनुशासन सिखाया,
बहती नदियों ने व्यवहार और शीतलता।
समय ने अपनी कीमत समझाई,
और कठिनाइयों ने दी हमें हिम्मत की ताकत।
written by Sneha Gupta
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