Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Dhamak

बोलती नहीं, फिर भी लफ़्ज़ कहते हैं — वो ढमक है, मेरा मौन भी बहुत सी बातें कहता है — वो ढमक है। मैं टूटकर भी कभी बिखरी नहीं, वक़्त के सामने खड़ी रहने वाली रहती है — वो ढमक है। नज़रें झुकी हैं, मगर हिम्मत अब भी ज़िंदा है, कम शब्दों में गहरा अर्थ बहता है — वो ढमक है। कोई पूछे अगर इस शायरी के पीछे का नाम, हल्की-सी मुस्कान से कह देना — वो ढमक है। DHAMAK😂 (શાયરી)

Shefali

#shabdone_sarname__ #shandone_sarname_

Dada Bhagwan

મંદિરમાં જઈએ ત્યારે દર્શન કેવી રીતે કરવા જોઈએ? શિવ, કૃષ્ણ, સાઈ બાબા ના દર્શન કરીએ ત્યારે મૂર્તિ દેખાય છે. શું આને સાચા દર્શન કર્યા કહેવાશે? આત્મજ્ઞાન પામવા અને ખરા દર્શન કરવા વચ્ચે શું સંબંધ રહેલો છે? https://youtu.be/GZdmp2g6jRw #spirituality #spiritualvideo #trending #trendingvideo #DadaBhagwanFoundation

Jeetendra

शीर्षक: मखमली शिकन शाम की रोशनी कमरे में इस तरह दाखिल हो रही थी जैसे कोई बिन बुलाया मेहमान दबे पाँव अंदर आ गया हो। हवा में मोगरे की महक और पुरानी किताबों की एक मिली-जुली गंध थी। देव ने खिड़की के पर्दे को थोड़ा और सरकाया, जिससे रोशनी की एक पतली लकीर प्रीति के चेहरे पर पड़ने लगी। प्रीति ने अपनी पलकें झुका रखी थीं, जैसे वह रोशनी से नहीं, बल्कि देव की नज़रों से बच रही हो। "तुम यहाँ क्यों हो, प्रीति?" देव की आवाज़ में एक अजीब सी खुरदराहट थी। "शायद इसलिए क्योंकि मुझे कहीं और होने का बहाना नहीं मिला," प्रीति ने अपनी रेशमी साड़ी के पल्लू को उँगलियों में लपेटते हुए कहा। उसकी आवाज़ में एक कंपकंपी थी, जो शब्दों से कहीं ज़्यादा गहरा राज़ खोल रही थी। "बहाने अक्सर सच को छुपाने के लिए बनाए जाते हैं, उसे ओढ़ने के लिए नहीं।" देव उसके करीब आया। उसके जूतों की आवाज़ लकड़ी के फर्श पर एक ताल पैदा कर रही थी। प्रीति ने सिर उठाया। उसकी आँखों में एक ऐसी आग थी जो राख होने से इनकार कर रही थी। "सच तो यह है कि तुम मुझसे डरते हो, देव। तुम्हें डर है कि अगर तुमने मुझे छुआ, तो तुम्हारी यह बनाई हुई संजीदगी बिखर जाएगी।" देव मुस्कुराया, एक ठंडी और जानलेवा मुस्कान। "संजीदगी एक लिबास है, प्रीति। और लिबास उतारे जाने के लिए ही होते हैं।" उसने अपना हाथ प्रीति के कंधे पर रखा। उसकी उँगलियों का स्पर्श प्रीति की त्वचा पर बिजली की तरह दौड़ा। प्रीति की सांसें तेज़ हो गईं, और उसने अपनी आँखें मूँद लीं। "क्या तुम जानती हो कि तुम्हारी खामोशी कितनी शोर मचाती है?" देव ने उसके कान के पास झुककर फुसफुसाया। "तो फिर इसे चुप क्यों नहीं कर देते?" प्रीति ने पलटकर उसे चुनौती दी। उसकी साँसें देव के चेहरे से टकरा रही थीं। देव ने अपनी पकड़ मज़बूत की और उसे दीवार से सटा दिया। "तुम शब्दों के जाल बुनना जानती हो, लेकिन शरीर झूठ नहीं बोलता।" "तो फिर शरीर को ही बात करने दो," प्रीति ने धीरे से कहा, उसका हाथ देव की कमीज़ के बटनों पर ठहर गया था। उस कमरे की शांति अब एक भारी तनाव में बदल चुकी थी। देव ने धीरे-धीरे प्रीति की साड़ी के पिन को ढीला किया। रेशमी कपड़ा सरक कर फर्श पर गिर गया, जैसे कोई रहस्य खुद-ब-खुद उजागर हो गया हो। प्रीति की त्वचा ढलती हुई धूप में सोने की तरह चमक रही थी। "देव..." प्रीति के गले से एक दबी हुई आह निकली। "शशश..." उसने उसकी बात को अपने होंठों से दबा दिया। यह चुंबन लंबा और प्यासा था, जिसमें बरसों की अधूरी इच्छाएं और सामाजिक बेड़ियाँ टूट रही थीं। देव के हाथों ने प्रीति की कमर के घुमावों को इस तरह महसूस किया जैसे वह किसी कीमती नक्शे को पढ़ रहा हो। प्रीति ने अपनी उँगलियाँ देव के बालों में फँसा दीं, उसे और करीब खींचते हुए। कमरे की हवा गर्म हो गई थी, और हर स्पर्श एक नई कहानी लिख रहा था। "तुम्हें लगता है कि यह सिर्फ एक रात की बात है?" प्रीति ने हाँफते हुए पूछा, जबकि देव के होंठ उसकी गर्दन के संवेदनशील हिस्से पर थे। "यह रात की बात नहीं है, प्रीति। यह उस प्यास की बात है जो समंदर पीकर भी नहीं बुझती," देव ने उसे बाहों में भरकर बिस्तर की ओर ले जाते हुए कहा। चादरों की सरसराहट और दोनों की मिली-जुली साँसों के बीच, वक्त जैसे ठहर गया था। देव का हर स्पर्श प्रीति के भीतर एक नया तूफान उठा रहा था। वह कोई साधारण मिलन नहीं था, बल्कि दो रूहों का एक-दूसरे में इस तरह घुल जाना था कि यह पहचानना मुश्किल हो जाए कि कौन कहाँ खत्म हो रहा है और कौन कहाँ से शुरू। देव ने प्रीति के जिस्म पर उन जगहों को ढूँढा जिन्हें उसने खुद भी कभी नहीं छुआ था। प्रीति की सिसकारियां उस कमरे के सन्नाटे को तोड़ रही थीं, जो अब किसी संगीत की तरह लग रहा था। "तुम... तुम बहुत बेरहम हो," प्रीति ने मदहोशी में कहा। "और तुम बहुत खूबसूरत," देव ने उसके चेहरे को चूमते हुए जवाब दिया। जैसे-जैसे रात गहराती गई, उनकी दूरियाँ मिटती गईं। पसीने की बूंदें उनकी त्वचा पर सितारों की तरह चमक रही थीं। हर हलचल में एक गहराई थी, हर हरकत में एक अर्थ। वे दोनों उस चरम सीमा की ओर बढ़ रहे थे जहाँ शब्द अर्थहीन हो जाते हैं और सिर्फ अहसास रह जाता है। जब वह क्षण आया, तो कमरा एक गूँजती हुई खामोशी से भर गया। दोनों एक-दूसरे में लिपटे हुए, तेज़ साँसें लेते रहे, जैसे किसी लंबी दौड़ के बाद सुस्ता रहे हों। अंधेरा अब पूरी तरह छा चुका था। प्रीति ने अपना सिर देव के सीने पर रख दिया। उसके दिल की धड़कन अभी भी तेज़ थी। "अब क्या?" प्रीति ने धीरे से पूछा। देव ने उसके माथे को चूमा और कहा, "अब बस यह शिकन है, प्रीति। जो चादर पर भी रहेगी, और शायद हमारी यादों पर भी।" उसने प्रीति को अपने पास और सिकोड़ लिया। बाहर दुनिया वैसी ही थी, लेकिन उस कमरे के भीतर, एक पूरी कायनात बदल चुकी थी।

Akanksha srivastava

हमारे देश के लाल _______________ कितनी महान होगी वो ममता, जिसने अपने जिगर के टुकड़े को , दुसरो के लिए जीना सिखाया। कितनी दृढ़ होगी पिता की वो सीख, जिसने अपने लाल को तलवार नहीं , दूसरों की ढाल बनना सिखाया। कितना विशाल होगा वह हृदय, जिसने ऐसे दिल को स्वीकार किया, जिसके सीने में हर धड़कन सिर्फ देश के लिए धड़कता है कितना मजबूत होगा उस बहन का मन, जिसे यह भी ज्ञात नहीं की अगली बार उसकी राखी, उसी कलाई पर सजेगी या नहीं। कितनी सौभाग्य शाली होगी वो गलियाँ वो घर, जिसके कण- कण में उस देशभक्त की स्मृतियाँ रची- बसी है। और कितने बिरले है इस माटी के लाल, जिन्होंने अपने सुख चैन का त्याग, हमारी चैन की नींद के लिए कर दिया। ____________आकांक्षा श्रीवास्तव

Jeetendra

प्यार की तड़प शहर की भीड़भाड़ वाली उस शाम में, 'द ओल्ड कैफ़े' की खिड़की वाली मेज पर कबीर बैठा था। सामने वाली कुर्सी खाली थी, लेकिन वहां रखी ठंडी हो चुकी कॉफी बता रही थी कि कोई उम्मीद अभी बाकी है। तभी दरवाज़े की घंटी बजी और मीरा अंदर आई। उसके चेहरे पर एक अजीब सा ठहराव था, जैसे तूफ़ान के थमने के बाद की शांति। "देर हो गई," मीरा ने बैठते हुए कहा। उसकी आवाज़ में कोई माफ़ी नहीं थी, बस एक तथ्य था। कबीर ने उसे गौर से देखा। "देर अक्सर रास्तों की वजह से नहीं, इरादों की वजह से होती है, मीरा।" मीरा ने मुस्कुराने की कोशिश की, पर उसकी आँखें कहीं और थीं। "इरादे तो मौसम की तरह होते हैं, कबीर। बदलते रहते हैं। तुम यहाँ कब से हो?" "शायद पिछले तीन सालों से। बस आज कुर्सी पर बैठकर इंतज़ार कर रहा हूँ।" "इतनी लंबी तड़प सेहत के लिए अच्छी नहीं होती," मीरा ने वेटर को इशारा करते हुए कहा। "तड़प सेहत के लिए नहीं, रूह के लिए होती है। जो सुकून में है, वह ज़िंदा तो है, पर शायद जागृत नहीं।" कबीर के शब्दों में एक धार थी। "तो तुम जाग रहे हो?" "मैं उस आग को महसूस कर रहा हूँ जो बुझने से इनकार कर रही है। तुम्हें क्या लगा? तुम शहर छोड़ दोगी, खत लिखना बंद कर दोगी, और सब खत्म हो जाएगा?" मीरा ने अपनी उंगलियों से मेज पर एक काल्पनिक लकीर खींची। "खत्म तो कुछ भी नहीं होता। बस प्राथमिकताएं बदल जाती हैं। मेरी ज़िम्मेदारी अब किसी और के प्रति है।" "ज़िम्मेदारी या समझौता?" मीरा की आँखों में चमक आई। "क्या दोनों में कोई फर्क है? समाज जिसे समझौता कहता है, उसे निभाने वाला इंसान उसे अपनी जीत समझता है।" "यह तुम्हारी दार्शनिक बातें मुझे बहला नहीं पाएंगी। तुम्हारी आँखों के नीचे जो काले घेरे हैं, वे रातों की नींद की नहीं, उस तड़प की गवाही दे रहे हैं जिसे तुम दबाने की कोशिश कर रही हो।" "तुम बहुत ज़्यादा पढ़ लेते हो, कबीर। कभी-कभी पन्ने सादे रहने देने चाहिए।" "सादे पन्ने ही सबसे ज्यादा शोर करते हैं, मीरा। बताओ, क्या वह तुम्हें वैसे देखता है जैसे मैं देखता था?" मीरा चुप रही। कैफ़े में बज रहा हल्का संगीत अचानक भारी लगने लगा। "वह मुझे 'देखता' है, कबीर। उसे मेरी रूह की परवाह नहीं, उसे बस मेरे साथ की ज़रूरत है। और दुनिया में 'साथ' होना ही काफी माना जाता है।" "तुम्हारे लिए काफी है?" "मेरे पास विकल्प क्या है?" मीरा की आवाज़ थोड़ी लड़खड़ाई। कबीर अपनी जगह से थोड़ा आगे झुका। "विकल्प हमेशा होता है। बस हिम्मत की कमी होती है। तड़प का मतलब यह नहीं कि हम दूर हैं, तड़प का मतलब यह है कि हम पास होकर भी वो नहीं कह पा रहे जो दिल में है।" "कहने से क्या बदल जाएगा? दीवारें नहीं गिरेंगी।" "कम से कम हवा तो अंदर आएगी।" तभी मीरा के फोन की घंटी बजी। उसने स्क्रीन देखी—'घर'। उसने फोन काट दिया। "तुम्हारी चुप्पी का अर्थ गहरा है," कबीर ने तंज किया। "तुम भाग रही हो, लेकिन पैर वहीं जमे हुए हैं।" "कबीर, प्रेम कोई कविता नहीं है जिसे जब चाहे सुधार लिया जाए। यह एक कड़वा सच है जिसे निगलना पड़ता है।" "मैंने तो इसे अमृत समझा था।" "तभी तो आज तुम्हारी प्यास इतनी गहरी है," मीरा ने खड़े होते हुए कहा। "तुम्हें प्यास से प्यार हो गया है, मुझसे नहीं।" कबीर भी खड़ा हो गया। "प्यास ही तो अस्तित्व का प्रमाण है। जिस दिन तड़प खत्म हो जाएगी, उस दिन कबीर भी मर जाएगा।" "तो फिर जलते रहो। शायद इसी में तुम्हारी मुक्ति है।" मीरा मुड़ी और दरवाज़े की तरफ बढ़ गई। कबीर वहीं खड़ा रहा। उसने मीरा को हाथ पकड़कर रोकने की कोशिश नहीं की, क्योंकि उसे पता था कि शरीर को रोकने से रूह की तड़प और बढ़ जाती है। दरवाज़ा बंद हुआ। बाहर बारिश शुरू हो गई थी। कबीर ने खिड़की के बाहर देखा। मीरा छाता खोल चुकी थी, लेकिन उसका एक कंधा बारिश में भीग रहा था—बिल्कुल वैसे ही जैसे उसकी ज़िंदगी का एक हिस्सा हमेशा अधूरा रहने वाला था। कबीर ने वेटर को बुलाया। "एक और कॉफी। इस बार थोड़ी और कड़वी।" वेटर ने हैरान होकर पूछा, "अकेले के लिए सर?" कबीर मुस्कुराया, "नहीं, इस तड़प के साथ पीने के लिए। यह आज रात मेरे साथ ही ठहरेगी।" बाहर की सड़कें अब पानी से लबालब थीं, लेकिन कबीर के अंदर की आग ठंडी होने का नाम नहीं ले रही थी। तड़प का अंत मिलन नहीं, बल्कि उस दर्द को गले लगा लेना था जो अब उसकी पहचान बन चुका था।

ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

🦋... SuNo ┤_★__ {{ प्रेम एक इबादत }} मोह के कच्चे धागों से, जब रूह           ये आजाद होती है, तभी तो सच्चे प्रेम की, असल में           बुनियाद होती है, ये महज़ जज़्बात नहीं, ये तो एक             पावन पूजा है, इस  इबादत के  सिवा, न कोई            मज़हब दूजा है, इस प्रेम में तड़प तो हो, पर पाने          की कोई ज़िद न हो, जहाँ बंदिशें न हों कोई, और न             ही कोई हद हो, ये वो  दरिया है  जिसका, कोई          किनारा नहीं होता, प्रेम में डूबा  हुआ शख्स, कभी           बेचारा नहीं होता, न ये ‘Gender, को  देखे, न ये         अपना-पराया जाने, ये तो बस रूह की भाषा, और      निस्वार्थ होना पहचाने, कभी ये दोस्त की हँसी में, सुकून          बनकर झलकता है, तो कभी ये माँ की ममता में अटूट            बनकर बहता है, पिता के उस भरोसे में भी, ये प्रेम            ही तो शामिल है, भाई-बहन के रिश्तों की ये प्रेम ही               तो मंज़िल है, बड़ा ही  खूबसूरत सा, ये रूहानी                 एहसास है, बिना  स्वार्थ के जो किया जाए     वही सबसे खास है…❤️ 🌹 राधे  राधे 🌹 #Ꮆᴏᴏᴅ_𝕄𝗼𝗥𝗻𝕚𝗡𝕘♦ ╭─❀💔༻  ╨──────────━❥ ♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦ ➛#motivatforself😊°☜ ╨──────────━❥

archana

मुझे समझ नहीं आता… हर बार बदनाम सिर्फ बहू ही क्यों होती है? अगर बहू जवाब दे दे, तो कहा जाता है – बदतमीज़ है, ज़ुबान चलाती है, सेवा नहीं करती। लेकिन कोई ये नहीं सोचता कि एक अकेली लड़की पूरे ससुराल को कैसे परेशान कर सकती है? वो तो पढ़-लिख कर, अपना घर छोड़कर, सिर्फ एक नया घर बसाने आती है… किसी को तोड़ने नहीं। क्या वो अकेली इतनी ताक़तवर होती है कि सबको बिगाड़ दे? या फिर सच ये है कि जब हद से ज़्यादा दबाया जाता है, तो खामोशी टूट जाती है… और उसी टूटन को “बदतमीज़ी” का नाम दे दिया जाता है। - archana

Jeetendra

साहूकार का कर्ज धूल और धूप से सनी दोपहर में विमल का कच्चा आंगन किसी पुरानी अदालत जैसा लग रहा था। लाला जगत नारायण, जिनके कुर्ते की सफेदी उनकी नीयत के बिल्कुल उलट थी, नीम की छांव में बिछी चारपाई पर ऐसे बैठे थे जैसे पूरा गांव उनकी जागीर हो। "विमल, समय रेत की तरह हाथ से फिसलता है। और ब्याज? वह तो हवा की तरह है, जो दिखती नहीं पर दम घोंट देती है," लाला ने अपनी उंगलियों में फंसी सोने की अंगूठी घुमाते हुए कहा। विमल ने अपनी फटी हुई कमीज का कोना मरोड़ा। "लाला, फसल इस बार सिर्फ मिट्टी बनकर रह गई। उम्मीद थी कि..." "उम्मीदें पेट नहीं भरतीं, जवान," लाला ने बीच में ही टोक दिया। "बैंक कागज मांगता है, और मैं? मैं बस भरोसा मांगता हूं। लेकिन भरोसा भी अब कर्ज के नीचे दब गया है।" विमल की पत्नी, सुजाता, दरवाजे की ओट से सुन रही थी। वह बाहर आई, आँखों में डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी चमक थी। "लाला जी, भरोसा तो हमने किया था। उस दिन जब आपने कहा था कि ये पैसे हमारी बेटी की शादी के लिए नहीं, हमारे भविष्य के लिए हैं। क्या कर्ज सिर्फ पैसों का होता है?" लाला ने एक ठंडी मुस्कान बिखेरी। "बेटी, दुनिया गणित पर चलती है, जज्बात पर नहीं। हिसाब बराबर करना ही धर्म है।" तभी विमल का छोटा भाई, आर्यन, जो शहर से लौटा था, आंगन में दाखिल हुआ। उसने अपनी जेब से एक मुड़ा हुआ लिफाफा निकाला। "हिसाब ही करना है न लाला? लीजिए, ये आपके मूल और ब्याज की पहली किस्त।" लाला की भौहें तन गईं। "शहर ने तुम्हें चालाकी सिखा दी है, आर्यन। पर याद रखना, कागजों पर स्याही मेरी है।" "स्याही आपकी हो सकती है, पर पसीना हमारा है," आर्यन ने तीखे स्वर में कहा। "आप कर्ज देते हैं ताकि इंसान कभी खड़ा न हो सके। आप चाहते हैं कि हम आपकी परछाईं में जिएं।" विमल घबरा गया। "आर्यन, तमीज से बात कर। लाला ने हमारी मदद की थी।" "मदद?" आर्यन हंसा, पर उस हंसी में कड़वाहट थी। "भाई, यह मदद नहीं, निवेश था। लाला जानते थे कि बारिश नहीं होगी। वे जानते थे कि आप चुका नहीं पाएंगे, और फिर वे इस जमीन को अपनी हवेली का हिस्सा बना लेंगे। क्या मैं गलत कह रहा हूं, लाला जी?" आंगन में सन्नाटा पसर गया। लाला जगत नारायण ने अपना चश्मा साफ किया और विमल की ओर देखा। "तुम्हारा भाई बहुत बोलता है, विमल। पर क्या यह जानता है कि जिस लिफाफे को यह 'आजादी' समझ रहा है, वह सिर्फ एक नई जंजीर की शुरुआत है?" सुजाता ने हस्तक्षेप किया, "कैसे?" "क्योंकि," लाला उठे और विमल के कंधे पर हाथ रखा, "कर्ज सिर्फ रुपयों का नहीं होता। जो इज्जत मैंने इस गांव में तुम्हें बख्शी, उसका ब्याज कैसे चुकाओगे? लोग कहेंगे कि विमल का भाई चोरी करके लाया या भीख मांगकर। तुम्हारी रीढ़ की हड्डी तो मैंने उसी दिन तोड़ दी थी जब तुमने पहली बार मेरे सामने हाथ फैलाए थे।" विमल का सिर झुक गया। उसे अहसास हुआ कि लाला सही थे। पैसे चुकाए जा सकते थे, पर वह अहसान? वह नजरें जो अब कभी लाला से नहीं मिल पाएंगी? "मैं पैसे वापस ले जाऊंगा," लाला ने लिफाफे को छुए बिना कहा। "कल आना। कागजात तैयार मिलेंगे। लेकिन विमल, याद रखना, जब तुम आजाद हो जाओगे, तो तुम सबसे ज्यादा अकेले होगे। क्योंकि गुलाम को कम से कम मालिक का साथ तो मिलता है, आजाद आदमी को खुद का बोझ खुद उठाना पड़ता है।" लाला अपनी लाठी टेकते हुए बाहर निकल गए। पीछे छोड़ गए एक ऐसा आंगन जहां कर्ज खत्म हो चुका था, पर बोझ पहले से ज्यादा महसूस हो रहा था। आर्यन ने लिफाफा मेज पर पटक दिया। "भाई, हम अब किसी के कर्जदार नहीं हैं।" विमल ने अपनी खाली हथेलियों को देखा और धीमी आवाज में बोला, "पैसे दे दिए आर्यन, पर क्या हम वाकई आजाद हुए? या अब हम उस खालीपन के कर्जदार हो गए जो लाला ने हमारे अंदर छोड़ दिया है?" धूप ढल रही थी, और उस घर की दीवारों पर परछाइयां लंबी होती जा रही थीं—बिल्कुल उस कर्ज की तरह, जो कागज पर तो मिट गया था, पर रूह पर अपनी लिखावट छोड़ गया

Deepak Bundela Arymoulik

*मोहब्बत से बेहतर क्यों हो जाती है शराब* मोहब्बत ने वादे दिए थे उम्र भर के, शराब ने बस एक रात का सहारा दिया। वो हर सवाल पर ख़ामोश रही, इसने हर दर्द को बोलने का हौसला दिया। मोहब्बत ने हमें खुद से दूर किया, कभी शक में, कभी उम्मीद में उलझाया। शराब ने आईना थमाया हाथों में, कहा— टूटे हो, तो हो… कम से कम झूठ नहीं बनाया। मोहब्बत में हर आंसू का हिसाब था, किस दिन रोए, किस बात पर। शराब ने बस इतना कहा— रो लो आज, कल की फ़िक्र छोड़ कर। मोहब्बत ने सिखाया इंतज़ार करना, बिन आवाज़ के तड़पना। शराब ने सिखाया भूल जाना, कम से कम रात भर चैन से सो जाना। वो बदलती रही हालात के साथ, इसका मिज़ाज कभी बदला नहीं। मोहब्बत ने हर बार छोड़ा बीच रास्ते, शराब ने कभी साथ छोड़ा नहीं। इसलिए लोग कहते हैं— मोहब्बत से बेहतर हो जाती है शराब, क्योंकि मोहब्बत ज़ख़्म देती है उम्र भर का, और शराब… बस थोड़ी देर का जवाब। आर्यमौलिक

મોરલો

#રક્ષણ

Raa

Ajadi kese mili ye mat jano Gulami kese huvi ye jano Jati vad ko khatam karo

વિનોદ. મો. સોલંકી .વ્યોમ.

" ઊડી ગયું પંખી ટહુકીને " જનારાં તો ચાલ્યાં ગયાં અમને એકલાં મૂકીને. ને અમે ભોગવ્યો એકાંતવાસ એમનું નામ ઘૂંટીને. સતત મહેસૂસ થયા કરે ટેરવે, સ્પંદન સ્પર્શનાં! અનિમેષ નજરે દેખું છું, બસ એ જ અંગુઠીને. એકલતા શું છે? એ, એ ડાળને જઈને પૂછો! ઊડી ગયું છે પંખી જ્યાંથી, હમણાં ટહુકીને. પ્રેમ, પ્યાર, વ્હાલનો મતલબ એ શું જાણશે? જે, કરે છે દોસ્તી તો પણ કરે છે પૂછી પૂછીને. કાંગરાય ખરવા લાગ્યા આજ એ કિલ્લાના, ઉભો 'તો તવારીખે ક્યારેક જે ગગનચુંબીને. જખમો પ્રણયનાં રૂઝાતાં નથી હવે તો કોઈ, સ્મિત પણ લઈ ગયાં છે જતાં જતાં લૂંટીને. ડામ પ્રણયનાં કંઈક એવા લાગ્યા છે "વ્યોમ" કે લાગણી પણ દર્શાવાય છે હવે ફૂંકી ફૂંકીને. ✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ" જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

Sakshi Sunil Rane

अधूरा... एक अधूरा सपना, एक अधूरी कहानी, जिसे मैं कभी पा नहीं पाई, वो मेरी जिंदगी की बानी। मैं उसे बहुत चाहती थी, पर वो कभी मेरा नहीं हुआ, हम दोनों एक-दूसरे के लिए बने थे, लेकिन किस्मत ने हमें मिलाया नहीं। मेरे मन भी कुछ नहीं माँगा, और वो मुझे नहीं मिला, एक अधूरा पल जिसे मैं हमेशा याद रखूँगी, इसे पूरा करने का ख्याल कभी मेरे मन में नहीं आया, पता नहीं मेरे दिल ने क्या सुना और वो मुझे नहीं मिला। एक अधूरा सपना, एक अधूरी कहानी, जिसे मैं कभी भूल नहीं पाऊँगी, वो मेरी जिंदगी की बानी। ….

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

देश-काल को देखकर, कुशल बढ़ाते पाँव। अवसर अनुचित यदि हुआ, निष्फल होते पाँव।। दोहा--३९२ (नैश के दोहे से उद्धृत) -----गणेश तिवारी 'नैश'

અનિકેત ટાંક

🔥 નવી ગુજરાતી થ્રિલર હવે બહાર છે! 🔥 📘 ચક્રવ્યૂહ – સત્તાનો ખેલ સત્તા અહીં સ્વપ્ન નથી… એ છે એક ખતરનાક જાળ, જ્યાં પ્રવેશ સહેલો છે પણ બહાર નીકળવું અશક્ય! બીઝનેસના અંધારા ખૂણાઓ, છુપાયેલા સોદા, વિશ્વાસ પાછળ છુપાયેલો દગો અને એક પછી એક ચોંકાવનારા વળાંકો… દરેક પાત્ર પોતાની ચાલ ચાલે છે, દરેક શબ્દ પાછળ છે કોઈ રહસ્ય, અને એક નાની ભૂલ બદલી શકે છે આખું સામ્રાજ્ય! આ કથા તમને માત્ર વાંચવા નહીં દે… તમને વિચારવા મજબૂર કરશે— સત્તા માટે માણસ ક્યાં સુધી જઈ શકે? 👉 આજે જ વાંચો ચક્રવ્યૂહ – સત્તાનો ખેલ તમારો રિવ્યૂ અને પ્રતિભાવ જરૂર આપશો 🙏 કારણ કે… આ માત્ર કથા નથી, આ છે સત્તાનો સાચો ખેલ! 🔥 નવલકથા વાંચવા માટે નીચેની લીંક પર ક્લિક કરો : https://www.matrubharti.com/novels/60696/chakravyuh-by-n-a

S A Y R I K I N G

If someone comes to you seeking love, give them love; don't start trying to teach them about love

Parmar Mayur

यदि किसी की जिंदगी से 'दूर जाना' पड़े तो 'अफसोस' होना चाहिए, हमसे ज्यादा उन्हें। - Parmar Mayur

S A Y R I K I N G

नाम नही लेना चाहता मेरे दोस्त लेकिन गद्दारों की महफिल में हंसी की आवाज तेरी भी थी..!! @_.Sayriking

Anghad

મારી લાગણી સભર વાર્તા "લાગણીનો સેતુ" ને પસંદ કરવા માટે દિલ થી આભાર https://www.matrubharti.com/novels/60369/bridge-of-emotions-by-n-a

S A Y R I K I N G

दौड़ती हुई ज़िन्दगी में ठहराव ढूँढते हैं, जब हमारा मन न लगे तो हम चाय ढूँढते हैं. ☕☕☕☕☕☕🤗🤗🤗

Ganesh Kumar

जो हमारे साथ अच्छा करते हैं, उनका शुक्रिया। जो हमारे साथ अच्छा नहीं कर रहे हैं, उनका? उनका भी शुक्रिया करना है। उनका शुक्रिया हम इसलिए करते हैं, क्योंकि उनके हमारे जीवन में आने की वजह से हमारा अहंकार घटता है, आत्मा की शक्ति बढ़ती है। हम उनकी वजह से झुकते हैं, झुकते हैं और झुकते हैं। वो झुकें या नहीं झुकें, उनकी वजह से हमारी शक्ति बहुत बढ़ जाती है। उनकी वजह से हमारे अंदर क्षमा करने की ताकत आती जाती है। उनकी वजह से हमारे अंदर दूसरों के व्यवहार में भी स्टेबल रहने की ताकत आती जाती है। उनका तो सबसे ज्यादा शुक्रिया करना चाहिए। सबसे ज्यादा शुक्रिया करना चाहिए। थैंक यू, थैंक यू। आप करते जाओ, मैं राइट करते जाओ तो मेरी ताकत क्या होती जाएगी? बढ़ती जाएगी। अगर हमारे सब महिमा ही करते रह गए, तो तो पता ही नहीं चलेगा, किसी दिन अहंकार ही न बढ़ जाए।

Rinal Patel

કોઈના કાળજાનો કટકો બની શકો તો બનજો. પણ કોઈના કાળજાના કટકા કરવાના કારણ ન બનતા. Rinall..

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास मंजुनाथ परेशानियों में सारा काफ़िला लगता हैं l मंजुनाथ ने निकाला मुब्तिला लगता हैं ll हर कहीं अफरा-तफरी फेली हुई है कि l सारे शहर में उठा ज़लज़ला लगता हैं ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

મનોજ નાવડીયા

બેઠો છું, કારણ ના પૂછો, મૌન છું, ભારણ ના પૂછો, મૌહ નથી, ત્યાગ ના પૂછો, કાચો છું, તારણ ના પૂછો, વાક નથી, સત્ય ના પૂછો, સાદો છું, પ્રમાણ ના પૂછો, સ્મિત નથી, વાત ના પૂછો, ઉભો છું, ખબર ના પૂછો, બોલું છું, અર્થ ના પૂછો, શબ્દો છું, ઉંડાણ ના પૂછો. મનોજ નાવડીયા

Parag gandhi

• *શબ્દો જ સંબંધો શણગારે* • *શબ્દો જ સંબંધો સળગાવે*

kajal jha

यादों की बारिश में भीगता हूँ अकेला, तेरी कमी ने दिल को चुपके से तोड़ा। रातें कटती हैं आंसुओं की नदी में, काश तू लौट आए, ये ज़ख्म भर जाए। - kajal jha

Soni shakya

🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏 🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹

kattupaya s

Good morning friends.. it's another cloudy day. stay chill

Dinesh

🙏*જય બાબા સ્વામી*🙏 *આજનો સુવિચાર* જીવનમાં આવતી સમસ્યા એક સંકેત છે કે તમે મજબૂત છો. *શુભ સવાર*

ek archana arpan tane

સપના નો એક છોડ રોપ્યો હતો પણ ના જાણે એ કેમ સુકાઈ ગયો એની ગેરહાજરી બહુ જ સાલે છે. - ek archana arpan tane

Raven hart

#kannada #poem #kavite #mywords

Abantika

​"प्रतिघात: दिल्ली की वो शाम"🩷 पढ़िए "सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने के लिए क्या प्यार की बलि देना ज़रूरी है?" पर समय का पहिया घूमता है और हिसाब बराबर करने के लिए वापस आता है।

Abantika

पढ़िए मेरी नयी रचना मायाजाल 🖤 (The Professional Brides) "मीठी बातों का ज़हर और लालच का फंदा—यही है इन शातिर दुल्हनों का गंदा धंधा।" 🐍

Ravi Bhanushali

subscribe kare matru bharti youtube channal ko lakho me views subscriber de aur orignal content ko protsahan de vulgarity bhare content me views aa sakte he to fir fresh aur achhe content par views kyu nai . is liye please subscriber kare youtube par matru bharti youtube channal ko aur bel icon ko jarur dabaiye

MOU DUTTA

জীবন কোনো রূপকথা নয় তবু মনে হয় তুমি থাকলে রূপকথার চেয়েও বেশি সুন্দর হতো। জীবন কোনো পরিপূর্ণ নয় কিন্তু তুমি থাকলে শূন্যস্থান টা পরিপূর্ণ হয়ে যেত। জীবন কোনো অনাকাঙ্খিত ঘটনা নয়,তবু যদি তোমায় পেতাম ঘটনা গুলো সুন্দর স্মৃতি ভেবে বুকে জড়িয়ে ধরে রাখতাম। যদি তুমি আমার হতে দুটো চাঁদ পেয়ে আমার জীবন আলোয় আলোকিত হয়ে যেতো। যদি তুমি আমার হতে একটা হাত হৃদয়ের মাঝে স্থায়ী ভাবে আগলে রাখতাম। যদি তুমি আমার হতে আমার কষ্টের দিনে তোমার কাঁধে মাথা রেখে মুছে ফেলতাম সকল রাগ অভিমান। সত্যি তুমি যদি আমার হয়ে গোধূলি লগ্ন গুলো আরো বেশি সুন্দর হতো। আর যদি তুমি আমার হতে বুকের মাঝে একটা মাথা হয়তো শান্ত ভাবে তার ক্লান্ত চোখে ঘুম আর মাথায় ভালোবাসার পরশ নিয়ে জীবন টা অবলীলায় কেটে যেতো।যদি সত্যি তুমি আমারই হতে তো।❤️‍🩹 মৌ 🖋️

bhagwat singh naruka

लाख कोशिश करके देख लिया तुमने, लेकिन हम गिरे नहीं। आँधियाँ बहुत आईं हमारी राह में, मगर हमारे इरादे कभी झुके नहीं। ताने, साज़िशें, और चालें भी कम न थीं, फिर भी अपने वजूद से हम डिगे नहीं। आज खामोश हैं तो इसे कमज़ोरी मत समझना, वक़्त आने पर साबित करेंगे — हम टूट सकते हैं, पर कभी गिरे नहीं। writer bhagwat singhnaruka

bhagwat singh naruka

कसूर तुम्हारा नहीं, ये तो वक़्त का ही खेल था, शिकायत तुमसे नहीं, अपने आप से है जो सच समझने में देर हो गई। तुम वही थे जो पहले दिन थे, बस मेरी नज़र को पहचानने में थोड़ी देर हो गई। मैं हालात को दोष देता रहा उम्र भर, और भूल गया कि कई बार गलतियाँ ख़ामोशी से खुद से भी हो जाती हैं। आज समझ आया है सब कुछ, पर अफ़सोस यही है कि समझ आने तक कई अपने दूर हो गए। writer bhagwat singhnaruka

bhagwat singh naruka

बदन मेरा मिट्टी का, साँस मेरी उधर है, जहाँ जीवन थमता है और मृत्यु का अर्थ उभरता है। मृत्यु अंत नहीं, एक ठहराव है बस, जहाँ थकी हुई आत्मा अपने बोझ उतारती है। जीवन ने जो सवाल दिए, मृत्यु उन पर विराम लगाती है, ना जीत, ना हार — बस एक पूर्णता सिखाती है। आज जी रहा हूँ तो सीखने के लिए, कल जाऊँगा तो मिट्टी में मिलकर फिर से सृजन बन जाने के लिए। क्योंकि जीवन यात्रा है, और मृत्यु घर वापसी। writer bhagwat singhnaruka

bhagwat singh naruka

मृत्यु घर वापसी है, जहाँ कोई सवाल नहीं, कोई बोझ नहीं। जहाँ नाम, पहचान, हार–जीत सब यहीं छूट जाते हैं। वहाँ न कोई शिकायत रहती है, न किसी से कोई गिला, बस एक गहरी ख़ामोशी होती है जो हर थकान को सुला देती है। जीवन में जो अधूरा रह गया, मृत्यु उसे पूरा नहीं करती, बस स्वीकार करना सिखा देती है कि सब कुछ यहीं समाप्त नहीं होता। मिट्टी से आए थे, मिट्टी में मिल जाएँगे, पर इस बीच जो प्रेम, जो करुणा, जो स्मृति छोड़ जाएँ— वही हमारी सच्ची साँस बनकर ज़िंदा रह जाती है। writer bhagwat singhnaruka

bhagwat singh naruka

अपने दिमाग़ से ये फ़ितूर निकाल देना, तुम साथ ना दो तो हम कदम उठा ना सकेंगे — ये वहम निकाल देना। हमने रास्ते खुद बनाए हैं तन्हाइयों के जंगल में, किसी के सहारे चलना हमारी आदत नहीं। तुम साथ थे तो अच्छा था, नहीं हो तो भी चल लेंगे, हौसला उधार नहीं लिया जाता ये बात समझ लेना। हम रुकते नहीं किसी के इंतज़ार में, बस रिश्तों को ज़बरदस्ती घसीटना छोड़ देना। writer bhagwat singhnaruka

bhagwat singh naruka

बहुत सजाया-सँवारा करता था इस बदन को, कपड़े, ख़ुशबू, आईना — सब अपना लगता था। जब ये राख हुआ तो समझ आया, कि जो अपना समझते थे, वो सब यहीं रह गया। ना साथ गया हुस्न, ना नाम की पहचान, मिट्टी ने बस मिट्टी को अपनाया और हर गुमान यहीं रह गया। ज़िंदगी भर जिस देह को सब कुछ समझते रहे, अंत में वही देह एक मुट्ठी राख बनकर इस संसार में ही रह गया। यही सच है — हम नहीं रहते, बस हमारे निशान कुछ देर तक यहीं रह जाते हैं। writer bhagwatSinghnaruka

Prajapati Pintu

Badu hu tamne bav j love karu chhu તમે મારા જીવ છો દુનિયામાં તમારા સિવાય બીજું કોઈ નથી ભગવાન થી પણ વધારે તમે ચાહુંછું અને પ્રેમ પણ એટલો જ કરું છું આવર્ષે મેં જેટલી પણ ભૂલ કરી હોય અને આજ ની ભૂલ પણ આવી ગઈ હું તમને બેસ્ટ ગિફ્ટ એ આપીશ કે તમને દુઃખ લાગે એવું કોઈજ કામ હું નહી કરું હું Badu really sorry and love 💕 you so much... Misss you tamne bavj yaad karu chhu  Badu hu tamne bav j love karu chhu તમે મારા જીવ છો દુનિયામાં તમારા સિવાય બીજું કોઈ નથી ભગવાન થી પણ વધારે તમે ચાહુંછું અને પ્રેમ પણ એટલો જ કરું છું આવર્ષે મેં જેટલી પણ ભૂલ કરી હોય અને આજ ની ભૂલ પણ આવી ગઈ હું તમને બેસ્ટ ગિફ્ટ એ આપીશ કે તમને દુઃખ લાગે એવું કોઈજ કામ હું નહી કરું હું Badu really sorry and love 💕 you so much... Misss you tamne bavj yaad karu chhu  - Prajapati Pintu

bhagwat singh naruka

आज तेरा मेरे ख़्वाबों में फिर से आना हुआ, ना सोचा था, ना चाहा था, फिर भी तेरा सामना हुआ। क्यों आती हो तब, जब याद भी नहीं करता, जब दिल ने ज़िद छोड़ दी हो और ज़ख़्मों ने सोना सीखा हो। दिन में तो संभाल लेता हूँ खुद को किसी तरह, पर रात की ख़ामोशी में तुम्हारा यूँ लौट आना हर सब्र को तोड़ जाता है। अगर जाना ही था तो ख़्वाबों तक क्यों चली आती हो, या फिर बता दो — क्या सच में कोई रिश्ता कभी पूरी तरह ख़त्म हो पाता है? writer bhagwatSingh naruka

kattupaya s

https://youtube.com/shorts/OoBx62s8h6E?si=foAmLaZx7vZ_dhdj

kattupaya s

https://youtube.com/shorts/UjGPHS4XgFA?si=J9z8kDNPzBNlZ3_q

kattupaya s

https://youtube.com/shorts/ItfO1G-2b68?si=krzj7PVGp8k-A9BN

Prateek

https://www.matrubharti.com/book/19987331/mafia-king-ani-niragas-ti-2

kattupaya s

ok guys today iam little bit emotional. see u later.. goodnight once again

kattupaya s

whatever iam writing is based on my personal experience . it doesn't indicate any individual or group of people. don't get offended..

S A Y R I K I N G

मेरे इश्क़ के आगे मेरे घर के मसले पड़े हैं कोई साथ नहीं देता मेरे मसले बहुत बड़े हैं..!!

kattupaya s

waiting for someone you care is not wasting time. time you spend for them called understanding life together

kattupaya s

feeling lonely is better than in a toxic relationship.

kattupaya s

when you show your love to the wrong ones you have to face tears forever.

kattupaya s

time and love cure many things. I try to forget my past daily. but the wounds remembering them.

ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

ye Jo yaha par meko DM kar rahe hain unko ek jankari Dena chahunga ki aapke messages ka jawab dene ke liye meko membership leni padegi, aur Main is ghatiya se app par paise kharch karne wala hun nahin ittu 🤏🏼 sa bhi nahi, to kahana yah tha ki dusra option bhi hai aap post per comment ke jariye bhi apni baten rakh sakte hain..✍🏼✅

kattupaya s

Goodnight friends.. sweet dreams

Sudhir Srivastava

थल सेना दिवस (15 जनवरी) पर विशेष स्वयं से पहले सेवा  ********** मोहन सिंह के नेतृत्व में उन्नीस सौ बयालीस को  स्थापित भारतीय राष्ट्रीय सेना। जिसे भारतीय सेना दिवस के रूप में  पंद्रह जनवरी को मनाए जाने के पीछे  जनरल करियप्पा कारण हैं, क्योंकि इसी दिन उन्होंने  भारतीय सेना की कमान संभाली थी, तब से यह दिवस खास हो गया। इस दिन देश भर में जगह-जगह  विभिन्न कार्यक्रमों के साथ दिल्ली में  भव्य परेड का आयोजन  करियप्पा परेड ग्राउंड पर किया जाता है, सेना के हथियारों - उपकरणों का प्रदर्शन कर  अपनी सैन्य क्षमता का मौन संदेश समूचे विश्व को दिया जाता है, थल सेना के अदम्य साहस, शौर्य और बलिदान का यशोगान किया जाता है। मगर हमारी सेना का उद्देश्य भी  अत्यंत पावन- निर्मल और साफ है  'स्वयं से पहले सेवा' ही का सूत्र  अपने आप में बड़ा खास है। इस सर्व-स्वयंसेबी बल में सक्रिय रक्षा कर्मियों का  अस्सी फीसद से अधिक का हिस्सा है, हमारी सेना का स्थायी बलों में विश्व में दूसरा स्थान है, जिसमें लगभग बारह लाख सक्रिय  और दस लाख आरक्षित सैनिक का खुला आसमान है। जिस पर हर भारतवासी गर्व करता है  जिसके कारण वह घरों में चैन से होता है। हमें अपने जाँबाज सैनिकों पर नाज है जिनके लिए मातृभूमि ही सिर का ताज है, जो मातृभूमि की रक्षा के लिए  कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं, सिर पर कफ़न बांधे, हथेली पर जान लेकर चलते हैं  प्राणों का आहुति देने से भी पीछे नहीं हटते हैं, अपनी भारत माता की आन-बान-शान के लिए  किसी भी हद तक जाने के लिए  हमेशा तैयार रहते हैं। आज जल सेना दिवस पर हम उनका  बधाइयां शुभकामनाएं देते  सार्वजनिक अभिनंदन करते हैं, जय हिन्द, वंदेमातरम, भारत माता की जय का  जयघोष कर गुणगान करते हैं, अपनी सेना के शौर्य, प्रराक्रम, वीरता पर  हम सब भारतवासी अभिमान करते हैं। हम शांति के पुजारी हैं  मगर दुश्मनों के लिए हम काल बन जाते हैं, पीठ पीछे वार नहीं करते  दुश्मन कोई भी, कैसा भी हो सीना तानकर आगे बढ़ते हैं, क्योंकि हम भारतीय सेना के थल सैनिक जो हैं। सुधीर श्रीवास्तव

Abantika

hello everyone मेरी new रचना प्रकाशित हुए हैं l आप सभी मेरी रचनाओं को पढ़िए और अपना प्यार दे l आपकी Abantika

Saroj Prajapati

मन भारी दिल उदास किससे कहें अब दिल का हाल उमड़ रहा जज्बातों का सैलाब वो भी चल रहे शब्दों से नाराज आईना भी कुछ खफा सा है अक्स दिखाता कुछ जुदा सा है आंसुओ ने समझे सब हालात मनोभावों को मिला नया हमराज़।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

Asha Modi

એકાંત...!! થાક્યો છું, હવે વિસામો શોધું છું, મળે બે ઘડી, તો હવે એકાંત શોધું છું ! હાર્યો છું, હવે નવો રસ્તો શોધું છું, મળે બે ક્ષણ, તો થોડી હિંમત શોધું છું ! ભૂલ્યો છું, હવે જવાબો શોધું છું, મળે બે પળ, તો થોડું સત્ય શોધું છું ! રડ્યો છું, હવે સવાલો શોધું છું, મળે બે ઘડી, તો એ લાગણી શોધું છું ! અચળ છું, હવે રહસ્યો શોધું છું, મળે બે પહોર, તો થોડો સંયમ શોધું છું ! આ ભાગદોડ ભરી દુનિયામાં હવે એકાંત શોધું છું !!

Akanksha srivastava

गठरी में सिमटा अथाह अपनत्व --------------------------------------- मायके से लौटती बेटी, अपने हाथों में, एक छोटी सी गठरी लेकर आती है। पर उस गठरी की कीमत उससे पूछो, वो महज छोटी- छोटी चीजें नहीं, वह तो भावनाओं का अथाह समंदर है। खट्टे - मीठे आचारों की महक, जो हर कौर के साथ, बचपन की गलियों में लौटा ले जाए। छोटी - छोटी निमकियों में गुंथी होती है, माँ की अनगिनत दुआऐं, थक जाये जब जीवन पथ तब राह दिखाये। शकरपारे में घुली वो मिठास , जैसे चुपके से समझा रही हो, रिश्तों में घोलना हर पल मिठास। और उन नन्ही पन्नी में बंधी चटनिया, शायद यही समझाती है, रिश्ते चाहे कितने ही स्वतंत्र क्यों ना हो जाए, उसमे अपनी उपस्थिति चटनी की तरह जरूर रखना। ना जाने कितने अनमोल सबक समेटे होती है, वह छोटी- सी गठरी, माँ की सारी अनकही बातों का सार, बेटी के जीवन के नाम, एक मौन उपहार। -----आकांक्षा श्रीवास्तव

Sudhir Srivastava

यमराज का ट्रंप को श्राप ******* वेनेज़ुएला पर अमेरिकी हमले और वहां के राष्ट्रपति को पत्नी के साथ अपहरण के बाद मित्र यमराज को बड़ा गुस्सा आया। बिना सोचे विचारे वो सीधे व्हाट्स हाउस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जा पहुंचा जो मुँह में आया-जमकर सुनाया, फिर धमकाया ट्रंप तेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई है। शान्ति का नोबेल पुरस्कार भी चाहने की छटपटाहट में तू सारे अलोकतांत्रिक काम करता है। कहने को तो तू शाँति का मसीहा बनता है पर दुनिया जानती है, कि तू हर ओर युद्ध ही चाहता है। अपने हथियारों का बड़ा बाजार बनाये रखने की जुगत में दुनिया के अलग-अलग देशों को आपस में लड़ाते रखना चाहता है। दूसरे देशों में अपरोक्ष अतिक्रमण की आड़ में सबसे बड़ा लंबरदार बनने की चाह में तेल, गैस, खनिज, स्वर्ण भंडार पर एकाधिकार चाहता है। दोहरे मापदंड अपनाकर खुद को महान बताता है, समूचे विश्व का नायक बनना चाहता है, अपना व्यवसाय चमकाना बेटे को स्थापित करना चाहता है। पर तेरा ये सपना कभी पूरा नहीं होगा, अब मैं यमराज! आज तुझे श्राप देता हूँ, क्योंकि तू अपने देश और नागरिकों से भी विश्वासघात के नित नए आयाम गढ़ता है। आखिर तू खुद को क्या समझता है? लगता है कि तू एकदम पागल हो गया है, तू लाख कोशिश कर ले, चाहे जितना हाथ पाँव मार ले, खुद को खुदा ही क्यों न समझ ले, तू निश्चित ही हारेगा और एक दिन सिर पकड़ कर रोयेगा, अपने अधर्म -कर्म के लिए पछताएगा अपनी सोच पर रोएगा, आंसू बहाएगा। आखिर तू भी तो महज एक इंसान हैं आज़ अमेरिका का राष्ट्रपति है, हमेशा तो नहीं रहेगा, तब तू खौलते दूध में आये उबाल बाद शांत हो जाने की तरह जल्दी ही बैठ जायेगा, तब विश्व ही नहीं तेरा देश भी तुझे भाव नहीं देगा, क्योंकि तू तो क्या हर कोई मेरे कोप से डरेगा। वैसे भी सत्ता का घमंड एक दिन उतर ही जायेगा जब तेरा कार्यकाल पूरा हो जाएगा, और तेरे नोबल पुरस्कार का पाने सपना दिवास्वप्न बनकर रह जायेगा, क्योंकि यह यमराज का श्राप है जो कभी खाली भी नहीं जायेगा। और जो मुझे उकसाएगा वो एक जन्म ही नहीं दो-चार जन्मों तक पछताएगा, पर मेरा वो कुछ बिगाड़ नहीं पायेगा, तू भी एक कोशिश करना चाहे, तो जरूर कर ले क्या पता तेरा जलवा यमलोक में भी बढ़ जाए, और तू मेरे श्राप का तोड़ निकाल लें जाए। सुधीर श्रीवास्तव गोण्डा उत्तर प्रदेश

ek archana arpan tane

હજારો લોકો એમની સ્મશાનયાત્રા માં જોડાયા જે એકલતા ના રોગ થી મર્યા. - ek archana arpan tane

ज़ख्मी__दिल…सुलगते अल्फ़ाज़

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 ┤_★__ ये जो  महफ़िल में,  ज़ख्मों  की            नुमाइश कर रहे हैं, यकीनन ये मोहब्बत नहीं साज़िश                 कर रहे हैं, कहाँ मुमकिन है, सच को सिर्फ़            बातों से परखना, लोग  तो  काबे  में  भी  झूठ  की           गुंजाइश कर रहे हैं, खुले मंज़र पे जो  रुमाल रखकर                  रो रहे हैं, वही  पीठ  पीछे  मेरे  कत्ल की            रंजिश कर रहे हैं, वो जिनके अपने दामन पर लहू             के हैं सैकड़ों धब्बे, वही अब मेरे किरदार की पैमाइश                  कर रहे हैं, अदालत चुप, गवाह चुप, मुंसिफों              के होंठ भी चुप, मगर  सब  मिलके  मुजरिम की         सिफारिश कर रहे हैं, चरागों को बचाना, अब हवा के             बस में कहाँ है, कि खुद घर के ही कोने अब तपिश                कर रहे हैं, जिन्हें हक़ की सदाओं से, हमेशा             खौफ़ आता था, वो अब  सरे-आम  सच की ही      नुमाइश कर रहे हैं…🔥 ╭─❀💔༻  ╨──────────━❥ ♦❙❙➛ज़ख़्मी-ऐ-ज़ुबानी•❙❙♦  #LoVeAaShiQ_SinGh☜ ╨──────────━❥

Shefali

#shabdone_sarname__ #shandone_sarname_

sunshine

रहना होगा दूर तुम्हे अनजानों से मेरा कोई ताल्लुक नहीं। _sunsine

InkImagination

Good night friends

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/1GMF1fb74M/

kattupaya s

I need peace..little bit love and humour that's enough for this life

kattupaya s

love all

kattupaya s

distance is the key factor

kattupaya s

a mixed signals from women is dangerous than direct signal from women in love.

kattupaya s

I see people addicted to Instagram . I believe they completely fall on imagination traps of love and they change their relationship status at anytime. it's critical. if anybody have different opinion pls share

kattupaya s

it's not easy

kattupaya s

in Instagram people love you without any reason. for the same reason other people hate you. it's a mind game. I don't like it

kattupaya s

mm quite interesting

kattupaya s

I realized hell and I never go back to relationships

kattupaya s

it happens

kattupaya s

hahaha.. I was too innocent to believe this

kattupaya s

Beginning is easy

kattupaya s

I dont know how to cross this winter season as single. it's hard to explain. being single is sometimes stupid sometimes relief. being in relationship is more comfortable. but choose it wisely.

Imaran

मजबूरी में जब कोई जुदा होता है, ज़रूरी नही के वो बेवफा होता है, देख कर वो आपकी आँखो मे आँसू, अकेले मे आपसे भी ज़्यादा रोता है 😂imran 😂

kattupaya s

Recently I deactivated my Instagram, Twitter and fb accounts.life is quite different now. it's a experience without unnecessary thoughts

Sagar Saini

https://www.instagram.com/reel/DTFu7pYCWMY/?igsh=MXUzemJwOTUxZTExdQ==

kattupaya s

Good evening friends.. have a nice time

Jasmin rehaan

apko kaise lagi story comment kijiye 🦋🦋🦋

Anita Shah

https://www.instagram.com/reel/DTFu7pYCWMY/?igsh=MXUzemJwOTUxZTExdQ==

S A Y R I K I N G

अब मोहब्बत नहीं अब तो मम्मी ने दीदी की शादी में अपनी बहु पसंद कर ली.

Sonu Kumar

#07 सरकारी जमीन किराया बँटवारा (सरकारी जमीन का किराया सीधे नागरिको के खातों में भेजने का प्रस्ताव) इस कानून का उद्देश्य सरकारी स्वामित्व वाले उन सभी भूखंडों को बाजार में लाना है जो सरकार एवं जनता के किसी भी उपयोग में नहीं आ रहे है। निचे इस प्रस्तावित कानून के मुख्य बिंदु दिए गए है। हेश: #SaJaKiBa (1) इस कानून के लागू होने पर केंद्र एवं राज्य सरकार के स्वामित्व वाले ऐसे सभी भूखंड जो आज खाली पड़े है, को 5 से 25 वर्ष की अवधि की लीज पर दिया जाएगा। इस भूमि से प्राप्त किराए से इकट्ठा हुयी राशि सभी भारतीयों में बराबर बटेंगी। प्रत्येक भारतीय को यह राशि हर महीने सीधे बैंक खाते में जमा कर दी जायेगी। > उदाहरण के लिए दिल्ली 1500 करोड़ स्क्वायर फुट में फैली हुई है, और इसमें से 300 करोड़ स्क्वायर फुट जमीन सरकार के पास खाली पड़ी है। और इसी तरह सरकार के पास पूरे भारत में (अहमदाबाद में 50 करोड़ स्क्वायर फुट, जयपुर में 70 करोड़ स्क्वायर फुट) कीमती जमीनें है, जिनका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा। यह सारी जमीन किराए / लीज पर दे दी जायेगी। (2) जमीनों को किराए पर देकर पैसा इकठ्ठा करने वाला राष्ट्रिय किराया अधिकारी वोट वापसी पासबुक के दायरे में होगा। यदि किराया अधिकारी ठीक से काम नहीं कर रहा है तो नागरिक बोट वापसी पासबुक का प्रयोग करके उसे बदलने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। > यदि किराया अधिकारी को वोट वापसी पासबुक के दायरे में नहीं लाया गया तो किराया अधिकारी कीमती जमीनों को किराए पर नहीं देगा और कोई न कोई बहाना बताकर उनके दबा कर बैठा रहेगा, ताकि इच्छित क्षेत्र में कीमतें बढ़ने से स्थानीय बिल्डर एवं भू माफिया को फायदा हो। वोट वापसी पासबुक के दायरे में न होने पर वह किराए / लीज़ आदि की बोली लगाने में भी घपले करेगा। (3) यदि किराया अधिकारी या उसके स्टाफ के खिलाफ घपले आदि की कोई शिकायत आती है तो सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति सरकार के आदमी (जज आदि) के पास न होकर नागरिक समूह (जूरी मंडल) के पास रहेगी। जूरी सिस्टम होने से भू माफिया जजों से गठजोड़ नहीं बना सकेंगे। इस क़ानून के आने ने निम्नलिखित परिवर्तन आयेंगे : a) बाजार में आपूर्ति बढ़ने से जमीन के दाम 50% तक कम हो जायेंगे अतः जन सामान्य कम कीमतों पर घर/दूकान हेतु जमीन खरीद सकेगा। b) जिन व्यक्तियों ने रहने या कारोबार के लिए जमीन किराए पर ले रखी है उन्हें 2000 से 10,000 रू महीना की बचत होगी। c) सरकारी जमीन के किराए से प्राप्त होने वाली राशि नागरिको को मिलने से नागरिको को प्रति माह 400 से 500 रू की आय होगी। इस क़ानून का पूरा ड्राफ्ट दिए गए QR कोड़ से डाउनलोड करें या इस लिंक पर जाएं - Tinyurl.com/Khamba2 राजवर्ग प्रजा के अधीन रहना चाहिए, वर्ना वो प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होगा - अथर्ववेद Pg 17 of 20

Gauri

**“Friends are the calm when life turns loud, the quiet strength that makes us proud. They stay when the world begins to bend, reminding us gently we’re not at the end. In nights of doubt when dreams feel far, they guide our steps like a steady star. When hopes fall down and spirits break, their faith in us helps hearts awake. They hear the cracks behind our smile, they sit beside us and stay awhile. No fancy words, no need to pretend, just silent comfort only friends can send. They walk with us through rising fears, through shaky paths and growing years. They stand like mountains, safe and tall, catching us softly each time we fall. When life goes fast and peace feels slow, they hold our hand and never let go. And when our soul feels lost in the rain, their laughter becomes the cure to our pain. Through every season, harsh or kind, a friend is the lighthouse we always find. Even when distance keeps us apart, their memory stays written in our heart. People may change and time may fly, dreams may fail and tears may dry. But friendship built with truth and care, remains a promise always there.”**

jighnasa solanki

જે વ્યકિત સમય સાથે ચાલે છે, એનો સમય સારો ચાલે છે. જે વ્યકિત આળસમા રાચે છે , એનો સમય ત્યાંજ થંભી જાય છે. ⏰⏳⌛

Pandya Rimple

यदि कोई खड्डे में गिरने के लिए तय करके आगे बढ़ रहा हो, तो तुम उसे कितना भी रोकने की कोशिश कर लो वह गिर कर ही मानेगा, और बाद में यकीन मानो खूब पछताएगा। -Pandya Rimple @shabdo_ni_suvas_

સુરજબા ચૌહાણ આર્ય

અમારું વતન 🥰😊

Soni shakya

सजी नहीं बारात तो क्या.. आई ना मिलन की रात तो क्या.. बिन फेरे हम तेरे.. बिन फेरे हम तेरे.. - Soni shakya

Prithvi Nokwal

कुछ इसलिए भी खास था नानी का घर क्योंकि वहां, मेरी मां को भी मां का प्यार मिलता था...❤️

Komal Arora

हमेशा हम ठीक हो जरूरी नहीं कई बार दूसरे की परिस्थिति हम से भी अधिक असहनीय होती है....... पर कहते हैं ना कुछ गम की नुमाइश करके खुश हो जाते है........ और कुछ सह कर........... worse but true always respect others prospectives also........

Desai Pragati

कोमलताविहीन है जैसे कोई पेड़ बिना हरी पतिया और डाली के, जैसे कोई बाप अपने पुनर्जन्म की दादीअम्मा बनके डांटने वाली कै..!🌻🫂

Raushan kumar

#12. मोहब्बत में दिल की खामोशी समझने वाले को,कुछ दिन बाद चीखें तक सुनाई नहीं देती। रौशन कुमार केसरी 29.12.2025

Raushan kumar

#11. आज उसने मुझे अपनी नजरों से उतारा है, जिसे मैंने कभी अपनी निगाहों में छुपाया था, आज उसे मेरे नाम से भी नफरत हैं जिसके नाम को मैंने रेत पर लिखकर कभी फूलों से सजाया था :- रौशन कुमार केसरी 18.01.2026

Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status