Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Thakor Pushpaben Sorabji

"દૂર રહીને પણ તું સમીપ હોય છે હું થોડું બોલુ ને તું બધું સમજી જાય છે તેથી જ જોને ઓ કાના આવા એ મિત્ર ભાગ્ય હોય છે" - Thakor Pushpaben Sorabji

Thakor Pushpaben Sorabji

"અજાણતા પણ કોઈ જાણીતું થઈ જાય છે દૂર રહીને પણ એ કંઈક ખાસ બની જાય છે" જય શ્રી કૃષ્ણ "પુષ્પ" - Thakor Pushpaben Sorabji

Sudhir Srivastava

सरसी छंद - पद का मद पद के मद में चूर हुआ जो, उससे रहिए दूर। भूल गया वो कल तक क्या था, आज हुआ मगरूर।। खुद को खुदा समझ बैठा है, हुआ बहुत अभिमान। तनिक नहीं अब शेष बचा है, उसके भीतर ज्ञान।। कल को जब ठोकर खायेगा, संग पीटेगा माथ। कहाँ समझता आज भला वो, नहीं मिलेगा साथ।। बँधी हुई आँखों पर पट्टी, उड़ता है आकाश। अपने हाथों स्वयं लिख रहा, खुद के आप विनाश।। शिकवा और शिकायत सबकी, चढ़े शीश बन पाप।। अपने पैरों मार कुल्हाड़ी, लेता है अभिशाप।। ईर्ष्या द्वेष दंभ में प्राणी, कहाँ कभी खुशहाल। अपनी स्वयं प्रशंसा कर ले, चलकर टेढ़ी चाल।। हाल-चाल कोई जब पूछे, मुँह बिचकाता जोर। नहीं किसी की वो है सुनता है, लगे व्यर्थ का शोर।। ऐसे लोगों का नहीं भरोसा, करें मित्र हम आप। ईश भरोसे आगे बढ़िए, मिटे सभी संताप।। अपने पथ से आप भटककर, नहीं बदलिए रंग। मानव जीवन की मर्यादा, मत करना तुम भंग।। जब तक इनको समझ में आता, खट्टे हैं अंगूर। हालत इनकी ऐसी होती, खुद कहते लंगूर।। सत्य आइना दिखा ही देता, होता जब मजबूर। कल तक जितना पास था इनके, आज वो उतना दूर।। सुधीर श्रीवास्तव

Sudhir Srivastava

व्यंग्य - बुजुर्गों की अहमियत ********* आज बड़े बुजुर्गो को वो अहमियत नहीं मिलती जिसके वास्तव में वो हकदार हैं, शायद ये कलयुग का ही प्रभाव है। पर ऐसा केवल हम आप ही सोच सकते हैं क्योंकि हम आधुनिकता के रंग में रंगे जा रहे हैं, पर शायद हम यह भूल रहे हैं कि अपने लिए गड्ढे और खाईं खोद रहे हैं। जिस माँ बाप ने हमें पाल पोस कर बड़ा किया बड़े बुजुर्गों ने प्यार दुलार दिया, पढ़ाया, लिखाया, आज सफलता के इस मुकाम तक पहुँचाया। हमारी खुशी के अपनी खुशियों का गला घोंट दिया जाने कितने कष्ट झेले, खून पसीना सब एक कर दिया, पर हमारे लिए सब कुछ हँसकर सह लिया। आज जब हमारी, आपकी बारी है तब हम उन्हें अपमानित उपेक्षित करते हैं, उनके पास बैठकर दो चार बात तक भी नहीं करते हैं उनकी भावनाओं का गला घोंट देते हैं, उनकी बात सुनने के बजाय उन पर चिल्लाते हैं तीखे व्यंग्य बाण से उनका सीना छलनी कर देते हैं, अपनी आजादी की आड़ में उन्हें अकेला छोड़ देते हैं और तो और वृद्धाश्रम में भेजकर हाथ झाड़ लेते हैं, ऊपर से बुजुर्गों की अहमियत का बड़ा ज्ञान बघारते हैं शायद इसी तरह हम सब भारत रत्न का खिताब अपने नाम करना चाहते हैं, क्योंकि हम अपने बुजुर्गों को अहमियत छोड़िए भगवान से भी ज्यादा मान-सम्मान देकर सुबह शाम पूजा पाठ करते हैं, उनके नाम का जाप करते हैं। सुधीर श्रीवास्तव

Mare Do Alfaz

मोहब्बत में हमने क्या कुछ नहीं लुटा दिया उन्हें पसंद थी रौशनी और हम ने खुदको जला दिया.. मेरे दो @ल्फ़ाz - Mare Do Alfaz

Sudhir Srivastava

काम तो राम ही आयेंगै काम तो राम ही आयेंगे यह तो हम सबको पता है, पर ज्यादा भरोसा नहीं है। क्योंकि हम खुद को राम समझते हैं, राम से ज्यादा खुद पर विश्वास करते हैं यह और बात है कि रोते भी उन्हीं से हैं रो गाकर उनकी कृपा पा लेते हैं और धन्यवाद तक कहने में अपना अपमान समझते हैं, क्योंकि हम स्वार्थी और कंगाल होते हैं। अब राम जी तो ठहरे भोले-भाले जो इतना ध्यान भी तो नहीं देते हमारी गुस्ताखियाँ भी बिसार देते, अपने तो दोनों हाथ में लड्डू संग खूब मजे हैं अपना स्वार्थ भी सिद्ध कर लेते हैं और राम जी श्रेय भी नहीं देते हैं। वैसे भी राम जी तो अपने हैं ऊपर से बेचारे मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, ऐसे में उन्हें काम तो आना ही पड़ता है। अब आप ही बताओ कि रामजी मेरे काम आते हैं तो भला कौन सा अहसान करते हैं? फिर हम भी तो राम जी के ही पास जाते हैं, क्योंकि वे ही हमें सबसे पहले नजर आते हैं जब वे हमारे काम आते हैं तो हम भी राम नाम का थोड़ा गुण गा लेते हैं अब राम जी को कोई शिकायत नहीं है तो फिर आप क्यों फटे में टाँग अड़ाते हैं ये हमारे और राम जी के बीच का मसला है हम और राम जी आपस में कैसे रिश्ता निभाते हैं, इस पर आप क्यों इतना खार खाते हैं, या आपको राम जी समझ नहीं आते हैं। सुधीर श्रीवास्तव

उषा जरवाल

उपवन होने का गुमान हो गया है तुम्हें लेकिन सच तो ये है कि एक फूल भी नहीं हो तुम । कल्पवृक्ष होने का वहम पाले बैठे हो तो ठीक से पहचान लो कि बबूल भी नहीं हो तुम । स्वयं को शिखर कलश मानते हो पर धर्म की धरोहर का मूल भी नहीं हो तुम । मुझमें दोष निकालने वालो ख़ुद को भी परख लो तुम क्योंकि मुझे आँक सको इतने भी मुकम्मल नहीं हो तुम। 😎 - उषा जरवाल

Rishav raj

नींद टूटी तो सपना भूल गया, तेरे बिना ज़िंदगी में ना कोई है अपना भूल गय, दोस्ती में तेरी ऐसा सुकून मिला मुझे, कि दोस्ती के इस समुंदर को नापना मैं भूल गया… - Rishav raj

PRASANG

तन्हाई का सच। दिल ना लगाना कभी दिलदार  सारे झूठे हैं, कसमें वादे किया था मुझे वो सारे  झूठे हैं। चेहरों की सादगी में छुपे वो इरादों का ज़हर, मुस्कान ओढ़े हुए सबके सब  नज़ारे झूठे हैं। जो हमारे अपने ही थे साँसों के करीब कभी, मुश्किल वक़्त में वो नदी के किनारे झूठे हैं। रिश्तों के नाम पर जो मिले थे  हमको कभी, वक़्त ने दिखा ही  दिया सारे  सहारे झूठे हैं। इश्क़ की राह में जितने  भी  मिले हमसफ़र, जो साथ चलने के सब के सब इशारे झूठे हैं। अब तो “प्रसंग” समझा  तन्हाई के शहर  में, रूह से जो भी करीब  आए वो सारे झूठे हैं। - प्रसंग प्रणयराज रणवीर

AbhiNisha

बस में होता अगर मेरी कविता बस में होता अगर मेरे तो उतार लाता जमीन पर चांद को और रोशन तुम्हारे अंधेरी रातों को करता बस में होता अगर मेरे तो तेरे होठों की हंसी जो कभी भी फीकी पड़ती उसके लिए मैं सागर की आखिरी छोर से लाली लाता और लाली से तेरी होठों की मुस्कान भर देता बस में होता अगर मेरे तो तेरी आंखों में यूं कभी आंसू ना आने देता समुद्र के बीच से वह लहेर उठा लाता जो लहेर तेरी आंखों को ठंडक देती बस में होता अगर मेरे तो कभी तुम्हें विचलित न होने देता धरती से दूर स्वर्ग से वे फूलों वाली बादीयां लता जो तुम्हें शगुन देता बस में होता अगर मेरे तुम्हें अकेला कभी महसूस न होने देता तीनों लोको की हर एक प्राणी को तुम्हारे महरून बनाता जो तुम्हारी कहानी सुनता बस में होता। अगर मेरे आगर ऐ कविता अच्छे लगे तो आगे तक करें मैं आपके प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯

Chaitanya Joshi

મળ્યું કેટલું? આજતક મને ખબર નથી. ફળ્યું કેટલું? આજતક મને ખબર નથી. નિતનવા વિચારો ઠલવાય છે મગજમાં, કળ્યુ કેટલું? આજતક મને ખબર નથી. ફિલોસોફી પ્રવચનમાં સારી લાગે ભલા, જીવ્યુ કેટલું? આજતક મને ખબર નથી. ગુમાવ્યા ના હિસાબો રોજ રોજ થાય છે, સાંપડ્યું કેટલું? આજતક મને ખબર નથી. કાં લડી લેવું કે રડી લેવું બે જ રસ્તાઓ, ઉકાળ્યું કેટલું? આજતક મને ખબર નથી. -ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.

Jyoti Gupta

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Imaran

औरों की तरह हम नहीं लिखते हैं डायरियाँ.. बस याद तुम्हारी आती है और बन जाती है शायरियाँ ✍️imran ✍️

महेश रौतेला

तुम्हारे जाने के बाद- सारी दुनिया बन्द हो गयी इतना प्यार कहाँ छुपा था! श्रवण में शब्द नहीं इतना अहसास कहाँ बन्द था! ** महेश रौतेला

GIRLy Quotes

https://www.instagram.com/reel/DWs4xrHkfAt/?igsh=MW5rcDUyYjM5ODdlaA==

Anish

"लड़कियां हमेशा बेहतर की तलाश में रहती है पी लेती है पानी फिर भी प्यास में रहती है जितना मिल जाता है उससे ज्यादा की आस मे रहती है. पैसे कमाओ लड़को अगर प्यार बचाना है तो क्योकि, लड़कियां हमेशा बेहतर की तलाश में रहती है..!!

Anish

एक लड़की अपने सर पे लाइट लगा के घूम रही थी मेने पूछा ये क्या है वो बोली मेरे सर में जुए है ना आज उनका बर्थडे है इसलिए

Piyu soul

**“इबादत ही मोहब्बत है… मोहब्बत ही इबादत है… 💫 मुझे तेरी ज़रूरत है… तुझे मेरी ज़रूरत है…” ❤️

antima

मैं पहली बार कह सकती हूं इनका काल्पनिक घटनाओं से कोई लेना देना नहीं है...... खोल क्यों नहीं देते न्याय देवी के आंखों से पटी बचपन से सुना था वर्दी धारी करते अपनी हिफाजत थाने की चौखट पर बिकता सच ईमान बेच कर लोग करते मर्यादा की बाते मैने देखा ऐसा सच जहां महिला पुलिस कर्मी कह रही "बुलाओ उस रंडी को" एक मिनट किसने कानून के रखवालों को रंडी कहने का हक है दिया उसी क्षण मेरे मन में आया क्या इन मैडम को पता है जिसको अपमानजनक शब्द से बुला रही है उसने सच में जुर्म किया है या नहीं अगर किया भी है तो उसके लिए न्यायलय बैठा है हा मैं यहां भूल गई न्याय देवी के आंखों में पटी जो बंधी है.... मैने देखा ऐसा सच न्याय के द्वार पर खड़े होकर हाथ फैलाए हुए कह रहा एक नौजवान " मैने शादी करके गुनाह थोड़े कर दिया" एक मिनट उसका गुनाह देखेगा कौन... मैं फिर से भूल गई न्याय देवी की आंखों में पटी बंधी है। मैने देखा ऐसा सच जहां जन्म मरण है चलता भगवान का दूसरा रूप कहने वाले ने कि ऐसी बात " पहले पैसे जमा करवाओ फिर ही इलाज होगा" एक मिनट रुको डॉक्टर साहब आप जिस अस्पताल में खड़े हो वहां की सरकार ने निःशुल्क इलाज है किया मैं फिर भूल गई न्याय देवी की आंखों में पटी बंधी है।। ✍️ अंतिमा 😊

Siddarth

कौन कहता हैं आंखों का खौफ नहीं होता वो घूरते है हमे और हम अपना फेसला बदल लेते हैं ।।।

PRASANG

"खामोश लहरों की दास्तां" अब टूटे दिलों को मरम्मत नया नहीं चाहिए, इस बहती नदी को कोई किनारा नहीं चाहिए। खामोशियों में दबी हर एक धड़कन कहती हैं, अब किसी के सहारे की परछाई नहीं चाहिए। राहें बदल गईं, अब तो मौसम भी बदल गए, फिर भी ठहराव हैं, किसी नज़ारा नहीं चाहिए। दर्द भी अब साथी है, खुशी भी अब साथी है, तन्हा सफ़र हैं, दूजा कोई सहारा नहीं चाहिए। जख्मों की परतें खोलती रहीं हैं वो हर यादें, इस वीराने में अब कोई हमारा नहीं चाहिए। अब इन लहरों के संग बहता ए दर्दे दास्तां, 'सोनी' दिल हैं मेरा, कोई पराया नहीं चाहिए। - सोनी शाक्य मेरे दोस्त भीड़ू ने लिखा पसंद आया तो मैंने भी अपने page पर रखने से रोक नहीं पाया।

Narendra Parmar

✔️💯

santhoshi Vadlamani

అర్ధానికి అపార్ధానికి తేడా కేవలం ఒకే ఒక అక్షరం కానీ ఆ ఒక్క అక్షరానికి రెండు జీవితాలను బలి తీసుకునే శక్తి ఉంది అనవసరం అనుకుంటే ఆ పని ఎంత సులువైన చేయకు అవసరం అనుకుంటే ఆ పని ఎంత కష్టమైన వదలకు ఇతరులతో పోల్చుకోవడం అనే వ్యాధి మన ఆనందాన్ని హరించేస్తుంది.. మనకున్నది చూసి అనదించటం చూసి నేర్చుకుంటేనే నిజమైన సంతోషం దొరుకుతుంది

Piyu soul

💫“बचपन के सवाल… और विश्वास”💫 “आज मेरे भतीजे ने मुझसे कहा— ‘बुआ, मुझे Rama की कहानी सुनाओ… फिर Krishna की… फिर Hanuman और Shiva की भी…’” 💫 मैं सुनाती रही… और वो हर कहानी के बाद एक नया सवाल लेकर खड़ा हो जाता… 😄 “हनुमान जी ने सूरज को निगलना चाहा… तो उन्हें सज़ा क्यों मिली?” उसके सवाल सुनकर… 👉 मेरे अंदर भी कई सवाल जाग गए… सोचा— आज ये इतना छोटा होकर इतना सोचता है… कल जब मेरी लड्डू उसकी उम्र की होगी… तो वो कितनी दुनिया अपने सवालों से बना देगी… 💙 फिर उसने मुस्कुराकर कहा— “बुआ, मैं बड़ा होकर तीरंदाजी में मेडल लाऊंगा… राम जी से सीखकर!” 🏹✨ और अगले ही पल— “राम जी मुझे डाँटेंगे तो नहीं ना?” मैंने कहा— “नहीं…” 😌 अब जनाब… सुबह से खुद को धनुषधारी समझ रहे हैं… 👉 बस डर यही है… शाम तक चक्रधारी ना बन जाएँ 😄😂 “बचपन सवाल नहीं करता… वो विश्वास सिखाता है…” 💫

Shailesh Joshi

इश्वर ने हमें वर्तमान सिर्फ भविश्य के बारे में सोचने के लिए नहीं दिया है, लेकिन भविष्य के बारे में सोचने के साथ-साथ, पहेले अभी का, और उसके बाद, यदि "समय बचें तो" भविष्य के लिए कुछ न कुछ... "अभी" हमसे जितना हो सके, वह करने के लिए दिया है. - Shailesh Joshi

Narayan

कुछ लम्हों के लिए ही सही, ज़िंदगी ठहर सी जाती है, जब तेरी यादों की खुशबू दिल के आंगन में उतर आती है।💗🌹

Komal Mehta

માનસીક શાંતિ એટલે માત્ર શબ્દ પણ નથી, પણ આપણે ઘણીવાર આ માનસીક શાંતિ ને અવગણી નાખીએ છીએ. માનસીક શાંતિ ને અવગણી ને જ્યારે પણ આપણે દુ:ખ નો અનુભવ કરીએ છીએ, ત્યારે આપણે ઇચ્છીયે છે કે, મારા નસીબ ખરાબ છે. બીજાના લીધે હોય આપણે કોઈ વ્યક્તિ ઉપર અથવા તો પરિસ્થિતિ ઉપર નાખી ને આપણે આપણા હાથ ખંખેરી લઈએ છીએ. માનસીક શાંતિ આપણને જીવન માં ક્યારે પણ મફતમાં નથી મળતી. એને માટે આપણે ઘણું બધું વસ્તુ નો ત્યાગ કરવો પડે છે. માનસીક શાંતિ માટે હર એક દુઃખી થવાના કારણો ને ધ્યાન રાખવા પડે છે, એ ઓછું પડે તો જે વ્યક્તિ વિષેશ ના વ્યવહાર થી દિલ દુભાય એના થી ડીટેચ થવું પડે છે એટલે આ માનસીક શાંતિ ત્યારે પણ મફત માં નથી મળતી. આપણ હાથ માં છે કે આપણને કયા રસ્તે જવું છે, એક કાંટાળો રસ્તો છે તો બીજો સાધારણ પથ્થર વાળી રસ્તો છે, સીધા રસ્તા ઉપર ચાલતા માનસીક શાંતિ મળશે અને જીવન માં આગળ વધી શકાશે. પણ જ્યારે તમે કાંટાળી રસ્તો લો છો ત્યારે જીવન માં માત્ર ને માત્ર તકલીફો માં અટવાયા કરીશું અને આગળ વધવાનું ભૂલી જશો કારણ કે આ દુ:ખ આગળ વધવા નઈ દે તમારે, સત્ય ને આપણે સ્વીકારી જાણીએ છીએ, અને સમજીએ પણ છે, તેમ છતા જ્યારે આપણે સાચો રસ્તો પોતાના માટે ચોઈસ નથી કરી શકતા, ત્યારે આપણે માનસીક શાંતિ ની અવગણના કરી એમ કહેવાય. સાવ સરળ છે જીવન માં કયો રસ્તો અપનાવો, કાંટાળો કે પછી સાધારણ આપણે આપણી ચોઈસ એટલી ખોટી કરી નાખીએ છીએ અને પછી નહિ જે ભાન સમજાય છે એટલે કે કાંટાળા રસ્તા ઉપર ચાલી ને પગ લોહી લુહાણ થઈ જાય છે. આગળ એક ડગલું ભરવાની ક્ષમતા રહેતી નથી ત્યારે સમજાય છે ખોટો આ રસ્તો લીધો, ક્યારે એટલું મોડું ના કરવું જોઈએ. સાચો રસ્તો ચોઈસ કરવામાં, ભગવાન આપણને હંમેશા ચોઈસ આપે છે પણ આપણે માનસીક શાંતિ ને અવગણી ને દુઃખી થવાના રસ્તા ઉપર ચાલવા માંડીએ છીએ. અને વર્ષો ના વર્ષ અને ક્યારેક એક આખું આયુષ્ય વેર-વિખેર કરીને સમજાય છે જીવન તો કયાંક પાછળ રહી ગયું જીવવાનું હતું સાલું એવું ના જીવી શક્યા એટલે બધું આપણા હાથ માં છે શું ચોઈસ કરવું.

Satveer Singh

सत्यवीर सिंह जेतुंग

Divya

અચાનક એક અંધારી રાતે, એના મોંમાંથી સર્યા એ બોલ, કે તને મારાથી કેમ છે પ્રેમ બોલ? મેં કહ્યું... તું સાથ છે, તું સંગાથ છે, સુખ-દુઃખમાં મેં પકડેલો હાથ છે. તું સ્નેહ છે, તું સુકૂન છે, મારા પરના વિશ્વાસનું જુનૂન છે. તું ગુસ્સો છે, તું વ્હાલ છે, મારા પ્રેમને કાયમ ઝીલતો ગાલ છે. તું આજ છે, તું આવતીકાલ છે, મારા સપના માટે દુનિયા સામી ઢાલ છે. તું સર્વસ્વ છે, તું સ્વામી છે, મારા જીવનની પૂરી કરતો તું ખામી છે. તું પ્રેમ છે અને તું જ પ્રેમ છે, છતાંય તું પૂછે છે, મને કેમ પ્રેમ છે? તો બસ આમ જ પ્રેમ છે મને... -વિચારોને વાચા

Falguni Dost

જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻

Mara Bachaaaaa

हां, देखता हूं राह आज भी, लौटे नहीं वो जो चांद देखने गए उनकी। - Mara Bachaaaaa

Dada Bhagwan

સ્વરૂપની માત્ર શ્રદ્ધા જ બેસે, તો જગતમાં કોઈ જગ્યાએ ડર લાગે જ નહીં, ભય જતો રહે. - દાદા ભગવાન વધુ માહિતી માટે અહીં ક્લિક કરો: https://dbf.adalaj.org/IujxbTC5 #quoteoftheday #quotes #spirituality #spiritualquotes #DadaBhagwanFoundation

Shailesh Joshi

समझदार होना अच्छी बात है समझदारी दिखाना भी अच्छी बात है मगर हमें हमारी समझदारी, कब दिखानी है ? कहां दिखानी है ? और कितनी दिखानी है ? यदि इतनी समझदारी हमारे अंदर नहीं है, तो फिर हमारे जीवन में, कभी ना कभी निसंदेह वो दिन आकर ही रहेगा, जब हमारी समझदारी ही हमें सबसे बड़ा नुकशान पहुंचाएगी, क्योंकि समझदारी एक ऐसा हथियार हैं, जो हमें हमारे जीवन में सफलता प्राप्त करने की, खुशिया हांसिल करने की जंग में, हमें कामयाबी भी दिला सकती हैं, और कभी-कभी हमारी समझदारी हमारी नाकामयाबी का सबसे बड़ा कारण भी बन सकती हैं, इसलिए हम हमारी समझदारीयों का उपयोग बहुत ही समझदारी से करे, क्योंकि हमारे लिए वहीं सबसे बड़ी समझदारी है.

Anish

कोरे कागज़ की दावत हसरतों के लिए है वैसे कई अरमाँ किताबों में दफ़्न है -

Gulshan

पानी नहीं गम हैं जिसे पिए जा रहा हुं इसी का नाम ज़िंदगी हैं जिसे जिए जा रहा हुं यहां खुसिया बनानी पढ़ती हैं खुद से एक मैं हुं जो सबके दूर किए जा रहा हुं

Bhavna Bhatt

તારાં વાઘને

Anish

हे देवी जी ये भक्त आप के ऊपर लाइन मारते मारते थक चुका है अब आप क्या चाहती है नारियल चुनरी चढ़ाऊं

Nirali patel

"કબીરા તેરી દુનિયા મેં ઉલ્ટી દેખી રીત, અનપઢ-ઢોંગી રાજ કરેં, શિક્ષિત માંગેં ભીખ!!"

SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

मसला तो एक शख़्स का है , दुनिया किसे चाहिए ..!! - SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

"જિંદગી" સપનાઓના વાવેતરમાં જિંદગી ખોવાઈ ગઈ, રૂંધાતા શ્વાસમાં જિંદગી ઓલવાઈ ગઈ. ​હતું ન હતું એ વિચારમાં જિંદગી ભેળવાઈ ગઈ, યાદોની વાતોને રંગવામાં જિંદગી ઊજળાઈ ગઈ. ​નાનકડા બીજ ને કુમળા વળાંકમાં જિંદગી લહેરાઈ ગઈ, વહાલના એક મીઠા સ્પર્શમાં જિંદગી મલકાઈ ગઈ. ​સમયના વહેતા પ્રવાહમાં જિંદગી વહેંચાઈ ગઈ, અંતે "સ્વયમ્'ભૂ"ના શરણમાં જિંદગી સમાઈ ગઈ. અશ્વિન રાઠોડ ​— "સ્વયમ્'ભૂ"

Sonu Kumar

मैं अगर "जय श्री राम" या "भारत माता की जय" बोलता हूँ तो लोग मुझे भाजपा से क्यों जोड़ते हैं? . यदि किसी राष्ट्रीय-धार्मिक प्रतीक या विषय जिस से देश का एक बहुत बड़ा समुदाय सहमत हो, पर कोई झुंड कब्ज़ा कर ले तो अमुक प्रतीक से सम्बद्ध सभी नागरिको को अमुक विषय का समर्थन करने के लिए उस झुण्ड में शामिल होने के लिए बाध्य होना पड़ता है। . तब अमुक झुण्ड इस प्रतीक को अपना लेबल बनाकर आपको उनके झंडे के निचे आने के लिए कहेगा। यदि आप उनके झुण्ड में शामिल होने से इंकार करते हो तो वे कहेंगे कि आपमें अमुक राष्ट्रिय-धार्मिक प्रतीक के प्रति निष्ठा नहीं है। अब आपके पास सिर्फ 2 रास्ते बचते है - या तो आप खुद को अमुक राष्ट्रिय-धार्मिक प्रतीक से अलग कर लो, या उस झुण्ड में शामिल हो जाओ। . और इस तरह कोई राष्ट्रीय-धार्मिक प्रतीक किसी झुण्ड के हवाले होकर अपनी आदर्श स्थिति से गिरकर विभाजनकारी एवं विवाद का विषय बन जाता है !! और यदि ये झुण्ड कोई राजनैतिक झुण्ड है तो विभाजन की प्रक्रिया में तेजी आती है, और स्थिति और भी बदतर हो जाती है !! . संघ=बीजेपी के नेताओं ने अपना आधार बढ़ाने के लिए भारत माता की जय, जय श्री राम, हिन्दू, हिंदुत्व जैसे जोड़ने वाले प्रतीकों का इसी तर्ज पर इस्तेमाल किया है। . —————- . स्पष्टीकरण : . (1) भारत माता की जय !! . कुछ 2-3 साल पहले तक भारत के ज्यादातर (लगभग 80%) नागरिक 'भारत माता की जय' बोलने पर सहमत थे, या उन्हें 'भारत माता की जय' बोलने में कोई आपत्ति नहीं थी, तथा शेष (20%) लोगो का भी यह स्टेण्ड नहीं था कि — हम भारत माता की जय नहीं बोलेंगे !! . लेकिन भारत में लगभग 25 से 30% नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनैतिक समूह के नेता अचानक इस प्रकार के बयान देने लगते है कि -- 'तुम्हें भारत माता की जय बोलना पड़ेगा', 'तुम नहीं बोलोगे तो हम तुम्हें सिखाएंगे', 'जो भारत माता की जय नहीं बोलते उन्हें पाकिस्तान चले जाना चाहिए' या 'भारत माता की जय नहीं बोलने वाले गद्दार है' आदि आदि। . कृपया इस बात पर ध्यान दें कि बीजेपी=संघ के नेता यदि भारत माता की जय के नारे लगाते है तो इससे किसी को कोई आपत्ति नहीं है, और यह विभाजन पैदा नहीं करता। किन्तु वे प्रत्येक भारतीय को बाध्य करने लगते है कि उन्हें भी भारत माता की जय बोलना चाहिए !! . मतलब, आप किसी दुसरे व्यक्ति के बारे में यह बलात रूप से तय करना चाहते हो, कि तुम्हे भारत माता की जय का नारा लगाना पड़ेगा। . लेकिन आप इसके लिए क़ानून बनाने की हिम्मत नहीं दिखाना चाहते !! भारत का राष्ट्र गान जन गण मन है, और यह कानूनी रूप से राष्ट्र गान है। और यदि कोई व्यक्ति जन गण मन का अपमान करता है तो उस पर संदेह करने की हमारे पास वाजिब वजह होती है। . लेकिन यदि किसी राजनैतिक पार्टी का नेता मुझ पर धौंस जमाता है कि, मुझे भारत माता की जय बोलना पड़ेगा, और यदि मैं किसी अन्य राजनैतिक पार्टी का समर्थक हूँ तो मैं उनसे यही कहूंगा कि — तुम क़ानून पास करके इसे राष्ट्रिय नारा बना दो, और सिर्फ तब ही मैं यह नारा लगाउंगा। और जब तक आप ऐसा क़ानून नहीं बनाते मेरा मानना है कि, आपकी मंशा सिर्फ राजनैतिक विभाजन करने की है। . मामला भारत माता की जय बोलने का नहीं है। मामला यह है कि कोई राजनैतिक समूह 'देश की एकता से सम्बंधित' नारे या कवित्त या सूक्ति को अपनाता है तो बात समझ आती है, लेकिन फिर वह इस पर "एकाधिकार बनाने के लिए नागरिकों को अमुक नारा लगाने के लिए ललकारता है या धमकाता है" तो देश को एकता में पिरोने वाले ऐसे उद्घोष का राजनैतिक करण हो जाता है, और शेष 70% में से कुछ या ज्यादा लोग यह उद्घोष करने से इंकार कर देते है, या इससे दूर छिटक जाते है !! . यदि किसी राजनैतिक दल की देश के महिमा गान से सम्बंधित और पहले से प्रचलित किसी नारे में आस्था है तो बेशक उन्हें ऐसा नारा लगाना चाहिए। जब आप इसे बार बार दोहराएंगे तो स्वत: ही अमुक दल की पहचान ऐसे नारे से बन जायेगी और अमुक पार्टी के अलावा अन्य दलों के नेता/कार्यकर्ता/नागरिक भी अनायास इसका अनुसरण करेंगे। लेकिन जब आप अन्य राजनैतिक दलों को भी यह नारा लगाने के लिए ललकारने लगते है तो यह साफ़ है कि आप इसका इस्तेमाल अपना झुण्ड बढ़ाने के लिए कर रहे है। और इसीलिए इसे एक बड़े वर्ग द्वारा खारिज कर दिया जायेगा !! . उदाहरण के लिए हो सकता है कि किन्ही व्यक्तियों को 'जय भीम' कहने से इंकार न हो, लेकिन यदि माया मेडम उन्हें ललकारे कि 'तुम्हे जय भीम कहना पड़ेगा', तो स्वाभाविक रूप से मुलायम या बीजेपी समर्थक जय भीम कहने से इंकार कर देंगे। तब मायावती यह कह सकती है कि तुम जय भीम कहने से इनकार कर रहे हो अत: तुम दलित विरोधी हो। और इस तरह मायावती का वोट बैंक तो बढ़ेगा, लेकिन वो लोग इस नारे से दूरी बना लेंगे जो डॉ भीम राव अम्बेडकर में तो मानते है लेकिन मायावती में नहीं मानते। . तो बीजेपी के नेता जानते थे कि 'भारत माता की जय' बोलने के लिए ललकारने से इस उद्घोष को करने वाले नागरिकों की संख्या घटेगी, किन्तु हमारे झुण्ड में संख्या बढ़ेगी। . (2) जय श्री राम !! . अपने अंतिम वर्षो में अशोक सिंघल ने बयान दिया था — मैंने आडवाणी जी से कहा था कि, राम मंदिर मुद्दे का राजनैतिकरण हो जाने से भारतीय हिन्दू राजनैतिक पार्टियों के अनुसार विभाजित हो जायेंगे, और मंदिर आन्दोलन को नुकसान होगा !! . (टिप्पणी : हालांकि वे यह बात पहले से जानते थे, लेकिन पूरे 25 वर्षो तक इसमें भागीदार रहकर खामोश बने रहे, और अपने अंतिम वर्षो में खुद को क्लीन चिट देने के लिए उन्होंने यह बयान दिया ) . जय श्री राम हिन्दू धर्म के सभी अनुयायियों का नारा है, और 1990 से पहले तक प्रत्येक धार्मिक जुलुस वगेरह में इसका उदघोष किया जाता था। मतलब कोंग्रेस के मतदाताओ द्वारा भी और अन्य पार्टियों के मतदाताओ द्वारा भी। राम मंदिर आन्दोलन ( 1989 - 1999 ) के दौरान जुलूसो, रैलियों आदि में हिन्दुओ द्वारा यह नारा लगाया जाता था। बाद में राम मंदिर आन्दोलन के अलावा भी बीजेपी=संघ के नेताओं में इस नारे को अपना मुखड़ा बना लिया, और फिर उन्होंने इसका इस्तेमाल कोंग्रेस को चिड़ाने में किया। नतीजतन, अन्य पार्टियों के हिन्दू कार्यकर्ता इस नारे से कतराने लगे और यह नारा एक राजनैतिक हिन्दू* की पहचान बनने लगा। . *1990 से पहले तक भारत में सिर्फ हिन्दु होते थे। बाद में एक नयी वैचारिक नस्ल का उत्पादन शुरू हुआ - राजनैतिक हिन्दू। जब हिन्दू धर्म एवं अपनी राजनैतिक पार्टी के हितो में से किसी एक को चुनने की बारी आये और ऐसे में यदि कोई हिन्दू हमेशा धर्म की जगह अपनी पार्टी के हितो को तरजीह दे तो उसे राजनैतिक हिन्दू कहा जाता है। . (3) गर्व से कहो मैं हिन्दू हूँ !! . जब बीजेपी के शीर्ष नेता मोहन भागवत कहते है कि - "भारत में निवास करने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है।" तो यह बयान हिन्दुओ को विभाजित कर देता है। किंतु यही कथन यदि किसी धार्मिक संगठन या आम हिन्दू नागरिक द्वारा कहा जाएगा तो यह हिन्दुओ को विभाजित नहीं करता !! . कैसे ? . जब यह बयान कोई राजनैतिक संगठन देता है तो यह बयान हिन्दुओ का धार्मिक नहीं बल्कि राजनैतिक रूपांतरण करने की मंशा बताता है। . फर्स्ट राउंड में संघ=बीजेपी के नेता बार-बार कहते है कि तुम हिन्दू हो, वो भी हिन्दू है, ये भी हिंदू है, और भारत में रहने वाला हर एक व्यक्ति हिन्दू है। . सेकेण्ड राउंड में फिर वे बार बार कहते है कि - हिन्दू खतरे में है। . थर्ड राउंड में फिर वे दावा करते है कि - हम हिन्दूवादी पार्टी है। . तो चूंकि हिन्दू खतरे में है, और हम हिंदूवादी पार्टी है, और अगर तुम सच्चे हिन्दू हो या तुम्हे हिन्दुओ की फ़िक्र हो तुम हमें वोट देकर हिन्दूओ और हिन्दू धर्म की रक्षा करो !! यदि तुम हमें वोट नहीं दोगे तो हिन्दू नष्ट हो जाएगा, और इसके जिम्मेदार तुम होओगे !! . और फिर अगले राउंड में वे उन हिन्दुओ को हिन्दू धर्म का दुश्मन बताने लगते है जो उन्हें वोट नहीं कर रहे है !!! . इस पूरी राउंड ट्रिपिंग का घूम फिर कर सार यही निकलता है कि - यदि तुम खुद को हिन्दू कहलाना चाहते तो हमें वोट कर दो, और यदि तुम हमें वोट नहीं कर रहे हो तो इसका मतलब है कि तुम फर्जी हिन्दू हो, और इसीलिए या तो वामपंथी हो या कोंग्रेसी हो, और चूंकि हम राष्ट्रवादी भी है और तुम हमारी साईड नहीं हो इसीलिए तुम गद्दार भी हो !! और एक बार यदि आप किसी को गद्दार "ठहरा" देते हो तो आपको उसे सड़क पर खींच कर मारने तक का राइट भी मिल जाता है। . ( इसी तरह की राउंड ट्रिपिंग वे वामपंथी एवं सेकुलर शब्द के साथ भी करते है। तब आप किसी भी व्यक्ति को यदि मार देते हो तो आपको बस इतना कहना होता है कि, वह वामपंथी था। और उसके बाद कोई भी आपसे सवाल नहीं कर सकता। क्योंकि वामपंथी का समर्थन करने वाला भी वामपंथी होता है, और इसीलिए अब उसे भी मार देना राष्ट्रिय कर्तव्य बन जाता है !! अब ये बात बिलकुल अप्रासंगिक है, कि जिसे मारा गया है, वह वामपंथी था, या किन्ही अन्य वजहों से उसे मारना जरुरी था, अत: हमले को जस्टिफाई करने के लिए उसे वामपंथी "ठहरा" दिया गया !!) . बहरहाल, जब राजनैतिक समूह हिन्दू होने के नाम पर मतदाताओं का आवाहन करने लगता है तो विपक्षी पार्टियों को हिंदुत्व से दिक्कत शुरू हो जाती है। उन्हें दिक्कत यह है कि जब संघ यह बात बोलता है तो हिन्दू उनकी और दौड़ लगाते है, एवं उनके वोट कम होने लगते है। तो यदि यह सिलसिला जारी रहा तो आने वाले समय में हम ऐसे कई समुदायों एवं व्यक्तियों को जो संघ को वोट नहीं करना चाहते, यह कहते देख सकते है कि -- "हम हिन्दू नहीं है" !!! और यह उनकी बाध्यता होगी, चुनाव नहीं !! . इसके लिए आप लिंगायतों की नजीर ले सकते है। कर्णाटक में कोंग्रेस ने हिन्दू धर्म से अलग होने की लिंगायतो की मांग को राजनैतिक रूप से सपोर्ट करना शुरू कर दिया है। ऐसा क्यों !! लिंगायतो में एक वर्ग का मानना है कि, हम हिन्दू नहीं है, और हमें हिन्दुओ से अलग धर्म का स्टेटस दिया जाना चाहिए। . और कोंग्रेस भी चाहती है कि लिंगायतो को हिन्दू धर्म से अलग कर दिया जाए। क्योंकि यदि लिंगायत गैर हिन्दू हो जाते है तो संघ=बीजेपी का लिंगायतो पर क्लेम कमजोर हो जायेगा !! हालांकि इस मांग को कोंग्रेस मिशनरीज के कहने से आगे बढ़ा रही है, क्योंकि अल्टीमेटली जितने भी समुदाय हिन्दू धर्म से अलग होंगे वे सभी के सभी (100%) अल्टीमेटली मिशनरीज की गोद में चले जायेंगे। दुसरे शब्दों, में नारे बाजी का यह ड्रामा कन्वर्जन की एक वजह बनने का काम करता है। . क्योंकि अब हिन्दू होना सिर्फ धार्मिक हिन्दू होना नहीं है। आपने इसे राजनैतिक पैकेज बना दिया है। और विभिन्न दलित, सेकुलर एवं अन्य सभी ऐसे हिन्दू जो अन्य राजनैतिक पार्टियों के समर्थक है, और हिन्दू होने एवं न होने के बोर्डर पर खड़े है, फर्स्ट राउंड में इस पैकेज को लेने से इनकार करेंगे और बाद में आपका राजनैतिक विरोध करने के लिए हिन्दुनेस का भी विरोध करना शुरू कर देंगे !! . बहरहाल, यदि यही बात बात कोई गैर राजनैतिक व्यक्ति या संगठन कहेगा तो टकराव टल जाएगा। बीजेपी=संघ के शीर्ष नेता यह बात जानते है। लेकिन वे वोट लेने के लिए एकता के नाम पर हिन्दुओ में विभाजन का जोखिम उठाने के लिए तैयार है। जहाँ तक बीजेपी=संघ के कार्यकर्ताओ की बात है वे इस विभाजनकारी निति के दीर्घकालिक असर से भिज्ञ नहीं है। किन्तु इससे कोई फर्क भी नहीं पड़ता। क्योंकि संघ=बीजेपी के कार्यकर्ताओ ऐसे मामलो में संघ=बीजेपी के शीर्ष नेताओ द्वारा ली गयी लाइन का ही पालन करना होता है। . दरअसल एकता का आव्हान दुनिया में सबसे अधिक विभाजन कारी सिद्धांत है। सभी एकतावादी नेता बुनियादी तौर पर विभाजनकारी होते है। इसीलिए संघ=बीजेपी की गोष्ठियों में बार बार इस बात को दोहराया जाता है कि हिन्दुओ में एकता नहीं है, और यदि हिन्दुओ को बचना है तो उन्हें "एक" हो जाना चाहिए। यहाँ "एक" होने से आशय होता है कि, सभी हिन्दुओ को संघ=बीजेपी के झंडे के निचे एक हो जाना चाहिए। और इसी वजह से संघ=बीजेपी के कार्यकर्ता उन हिन्दुओ को हिन्दु धर्म के लिए दुश्मन के रूप में देखते है जो बीजेपी=संघ को वोट नहीं कर रहे है। . मेरा बिंदु यह है कि, यदि किसी राष्ट्रिय-धार्मिक विषय को इस तरह से उठाया जाए कि उससे समुदाय में टूटन हो, खेमे बन जाए तो यह अलगाववाद है। राजनीति में अपना वोट बैंक बनाने के लिए इस निति का अनिवार्य रूप से पालन किया जाता है, और सभी पार्टिया वोट बटोरने के लिए ऐसा करती है। . ———— . समाधान ? . सबसे पहले तो हमें यह समझना चाहिए कि इससे समस्या क्या है ? (1) मेरे हिसाब से इस पूरी कवायद से बीजेपी=संघ के वोट बढ़ते है, और इससे कम से कम मुझे कोई समस्या नहीं है। यदि इससे कोंग्रेस या आम आदमी को समस्या है तो यह उनकी समस्या है। मैं राजनैतिक पार्टियों पर नैतिकता, ईमानदारी आदि का पालन करने का भार डालने में नहीं मानता हूँ। एक राजनैतिक पार्टी हर वो काम करती है, जिससे उसे वोट मिलते है। राजनैतिक पार्टी इसी के लिए बनायी जाती है। अत: इस मामले में मुझे बीजेपी=संघ के शीर्ष नेताओं से कुछ नहीं कहना है। . (2) हिन्दू इसीलिए सिकुड़ रहा है, क्योंकि हिन्दू धर्म की संस्थाओ एवं मंदिरों का प्रशासन कमजोर है। अत: मेरा मानना है कि, जिन कार्यकर्ताओ को हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने में रुचि है उन्हें उन कानूनों को गेजेट में छापने की मांग करनी चाहिए जिससे हिन्दू धर्म की संस्थाओ के प्रशासन में सुधार आये। . अब समस्या यह है कि, इस तरह के ड्रामे के चक्कर में हिन्दू कार्यकर्ताओ का बड़े पैमाने पर समय इस पर बहस करने में बर्बाद हो जाता है, और वे समझते है कि इस तरह की नारेबाजी करके वे हिन्दू धर्म को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे है !! और कार्यकर्ताओ के इस तरह की फालतू बहस में उलझ जाने के कारण वे उन कानूनों की मांग आगे बढ़ाने के लिए काम नहीं कर पाते जिससे वास्तव में हिन्दू धर्म मबजूत होगा। . मेरा प्रस्ताव है कि, हिन्दू धर्म के प्रशासन को मजबूत बनाने के लिए हमें "हिन्दू बोर्ड" के प्रस्तावित क़ानून को गेजेट में छपवाने के लिए प्रयास करने चाहिए। यदि हिन्दू बोर्ड गेजेट में छाप दिया जाता है तो हिन्दू धर्म का क्षरण रुक जाएगा, और जल्दी हिन्दू इतनी ताकत जुटा लेंगे कि वे विस्तार करना शुरू कर देंगे। . यह एक तथ्य है कि, हिन्दू धर्म लगातार सिकुड़ रहा है, और पिछले 600 साल से इसके सिकुड़ने में और भी तेजी आयी है। हिन्दू धर्म इतने लम्बे अरसे से इसीलिए सिकुड़ रहा है क्योंकि इसका प्रशासन प्रतिद्वंदी धर्मो ( इस्लाम एवं ईसाई ) की तुलना में बेहद कमजोर है। प्रशासन को सुधारने के लिए हमें क़ानून प्रक्रियाएं चाहिए, लेकिन धार्मिक व्यवस्था सुधारने के क़ानून लाने की जगह पर हिन्दूवादी कार्यकर्ताओ ने राजनैतिक दलों की और दौड़ लगानी शुरू कर दी। यदि आप धर्म को बचाने के लिए राजनेताओ की शरण में जाओगे तो वे आपका इस्तेमाल सिर्फ वोट बटोरने के लिए ही करेंगे। . हिन्दू बोर्ड क्या है और कैसे यह हिन्दू धर्म को विस्तार करने की शक्ति प्रदान करेगा, इस बारे में विस्तृत विवरण मैंने इस जवाब में दिया है -- Pawan Jury का जवाब - हिन्दूओं को अपने धर्म के विस्तार के लिए इस समय क्या कदम उठाना चाहिए?

Saliil Upadhyay

*१ एप्रिल के दिन सुबह पत्नि को April Fool बनाने के चक्कर में बोल दिया कि आज कामवाली बाई नहीं आएगी.. और वो सचमुच नहीं आई....! आजतक Narco Test चल रहा है... तुम को कैसे पता था की वो नहीं आनेवाली...! आपको तो मजे लेनी है... हंसते रहो और मस्त रहो🤣

Mamta Trivedi

ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं 🌹https://www.instagram.com/reel/DWwfCzENbIZ/?igsh=YWM3aXJnZW1jaGx4

MASHAALLHA KHAN

नजरे मेरी आज तुझसे मिलाने दे, दिल मे मेरे है क्या मुझको बताने दे,, ख्वाबों में तुझसे रोज होती है मुलाकात, कुछ वक्त तेरे साथ मुझको बिताने दे,, मैने सुना है मोहब्बत एक इबादत है, मुझको भी चल आज, आजमाने दे,, मै इश्क मे भटकती राह का फकीर, मुझको तेरे दिल मे बस एक ठिकाना दे,, -MASHAALLHA

વિનોદ. મો. સોલંકી .વ્યોમ.

" લાગણી થઈ ઠંડી" આજકાલ સબંધોમાં મંદી લાગી ગઈ છે. એમ કહો કે લાગણીમાં ઠંડી લાગી ગઈ છે. નથી રહ્યું કોઈ-કોઈનું પણ આજકાલ તો, બે ભાઈઓ વચ્ચે જુવો વંડી લાગી ગઈ છે. પાશ્ચાત્ય સંસ્કૃતિ પાછળ ઘેલા યુવાનોને, પણ, આદતોય કેવી ગંદી લાગી ગઈ છે? વેચાય છે ખુલ્લે આમ એ જ જગ્યાએ, જ્યાં કહેવાય કે દારૂબંધી લાગી ગઈ છે. મોક્ષનો માર્ગ બસ એમને મળશે "વ્યોમ " હાથમાં જેના ઈશ્વરની કંઠી લાગી ગઈ છે ✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ" જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

વિનોદ. મો. સોલંકી .વ્યોમ.

" વલોપાત " જીવનભર કરતાં જ રહ્યાં વલોપાત એ. છતાં સુધારી ના શક્યાં ખુદની જાત એ. પાશ્ચાત્ય સંસ્કૃતિ પાછળ મૂકી એવી દોટ, કે, સમજી ના શક્યાં એના પ્રત્યાઘાત એ. મોહ માયા ને લોભ લાલચમાં ફસાતાં, નોતરતાં રહ્યાં રોજેરોજ નવી ઘાત એ. દેખા દેખીમાં જ અપનાવી ખોટી પરંપરા, ને, ગુમાવી બેઠાં ખુદની જ રીતભાત એ. છોડ્યાં ધરમ ને સંસ્કૃતિ જેમણે "વ્યોમ" ઈતિહાસ છે સાક્ષી કે ખોવાઈ નાત એ. ✍...© વિનોદ. મો. સોલંકી "વ્યોમ" જેટકો (જીઈબી), મુ. રાપર

Imaran

सर्दियों की धूप सी राहत हो तुम, मेरे लिए चाय के कप सी चाहत हो तुम.. गुजरते हैं यूँ तो लम्हें तमाम लेकिन, सुकून भरे लम्हों की हसरत हो तुम ☕imran ☕

Jyoti Gupta

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Piyu soul

“जब कृष्ण हमें चुनते हैं…” “कहते हैं… जब Krishna किसी को चुनते हैं, तो पहले उसे दुनिया से नहीं… खुद से मिलवाते हैं…” वो हमें तोड़ते हैं… 💔 हमारे अहंकार को, हमारी झूठी उम्मीदों को, उन रिश्तों को… जो सिर्फ नाम के होते हैं। वो हमें अकेला करते हैं… ताकि हम भीड़ में खोने की बजाय, अपने अंदर की आवाज़ सुन सकें। कई लोग छोड़कर चले जाते हैं… कुछ रिश्ते बिखर जाते हैं… और आखिर में बस 1–2 सच्चे लोग ही बचते हैं… जो सच में हमारे होते हैं। उस वक़्त लगता है सब खत्म हो गया… पर सच में… 👉 वहीं से शुरुआत होती है ✨ क्योंकि जब सब छूट जाता है… तब कान्हा खुद साथ पकड़ते हैं 💙 📿 श्लोक “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥” (तुम्हारा अधिकार सिर्फ कर्म करने में है, फल की चिंता मत करो…) 🌼 संदेश जब कृष्ण तुम्हें तोड़ते हैं… तो सज़ा देने के लिए नहीं… 👉 तुम्हें तुम्हारी असली ऊँचाई तक पहुँचाने के लिए 🚀 तुम्हें क्या करना है? 👉 विश्वास रखना 👉 धैर्य रखना 👉 अपने कर्म करते रहना क्योंकि… 👉 “कृष्ण देर करते हैं… पर अंधेर नहीं” 👑 अंत “जब दुनिया छोड़ देती है… तब कृष्ण थाम लेते हैं… और जिसे कृष्ण थाम लें… उसे कोई गिरा नहीं सकता।” 💫

antima

लड़कियों का सशक्त होना कितना जरूरी है...... यह उन लड़कियों से पूछिए जिनके घर में मर्द ना हो। हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ...... मैं खुशनसीब हूं मेरे पापा ने मेरे हाथों से झाड़ू, बेलन को कलम में स्थानांतरित कर दिया। हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ...... मैं खुशनसीब हूं पापा में नहीं सीख पाऊंगी अरे कैसे नहीं सीखेगी लड़किया हवाईजहाज उड़ा लेती है यह कह कर पीछे की सीट से आगे स्थानांतरित कर दिया। हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ..... लोग कहते थे बेटी है घर संभालेगी पापा ने कहा बेटी दुनिया संभलेगी पापा ने घर को दुनिया में स्थानांतरित कर दिया। हा में बहुत खुशनसीब हूँ...... मेरी पहचान पापा से अपनी पहचान को पापा ने मेरी पहचान में स्थानांतरित कर दिया। हा मैं बहुत खुशनसीब हूँ ।। ✍️ अंतिमा 😊

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास प्यार सीतमगर से प्यार किया l दिल को यू बेकरार किया ll नया बहाना सुनाता फिर भी l हर बात पे एतबार किया ll झूठी उम्मीदे दे संगदिल ने l अश्क़ देके खुशगवार किया ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Anish

तो बताइए कौनसी चाय पीनी है अदरक वाली इलाइची वाली बिना शक्कर लेमन वाली या काली चाय आपको कौनसी सी सूट करती हैं छिपकली

Anand

I am delighted to share that the first book written by my wife will soon be published by Clever Fox Publishing. This is a very special milestone in her journey as an author. Stay tuned for more updates!

PRASANG

अनकही पीड़ा। तुम न समझ सके कभी मेरी बेचैन निगाह, मेरी तन्हाई की गहराई, ना जाने कोई नज़र। मैं देखूँ तुम्हारी आँखों में मुस्कान की रौनक, पर समझ न सके मेरे उदास मन की नज़र। मेरी खामोशी पर तुम मुस्कुराती हो सदा, पर न समझ न सके मेरे टूटे मन की नज़र। मैंने जताई कितनी बातें तुमसे चुपके से, फिर रह गईं अनसुनी मेरी आहों की नज़र। तुम चाहो कि मैं हमेशा तुम्हारे पास रहूँ, पर न समझ न सके मेरे जज़्बातों की नज़र। मैंने सहा हर दर्द, हर तन्हाई अपनी, ‘प्रसंग’ न देख सके कोई गहराई की नज़र। - प्रसंग प्रणयराज रणवीर

kattupaya s

Good morning friends.. have a great day

वात्सल्य

કોક દિવસ તો મારી જોડે વાત કરો અને મારા મનમાં શું ચાલે છે,તે તો સાંભળો.! જગતમાં આવાગમન કુદરતી ઘટના છે.સાથ આપો તો સારું બાકી કોણ કોનું સાંભળે છે!! - वात्सल्य

Soni shakya

पता ही नहीं चला सबको समय देते- देते, हम कब अकेले रह गए..!! - Soni shakya

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

काल ग्रास नहिं बन सकूँ, जब तक वाणी शैष। मरण नहीं हो सकैगा, साँस अभी अवशैष।। दोहा --474 (नैश के दोहे ‌से उद्धृत) ----गणेश तिवारी 'नैश'

vrinda

"रामायण - महाभारत क्षणिका", को मातृभारती पर पढ़ें :, https://www.matrubharti.com भारतीय भाषाओमें अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और सुनें, बिलकुल निःशुल्क! - vrinda

Shailesh Joshi

हर वक़्त, हर बार, हर बात में "मैं सही हूं" साबित करने की हमारी आदत, या कोशिश, कभी-कभी हमको "मैं सही था" वाले हालत तक ले जाने का कारण बन सकती है. और तब हमें जो नुकसान, या फिर दर्द महसूस होता है, वह दुःख, या नुकशान, जीवन में दो चार बार, दो चार जगह, या फिर दो चार लोगों के सामने सही होने के बावजूद खुद को गलत साबित होना पड़े, इससे तो बड़ा ही होता है. - Shailesh Joshi

Sonam Brijwasi

radhe shyam guys

Narayan

गर मसला ये है कि तुम सिर्फ़ ख़्वाबों में मिलोगे, तो मैं आँखें मूँद कर यूँ ही सारी उम्र गुज़ार दूँ

Piyu soul

**“कभी किसी के लिए इतना भी मत रुकना… कि वो तुम्हें ही हल्के में लेने लगे। अपनी जगह खुद तय करो… क्योंकि जो तुम्हें समझेगा, वो खुद तुम्हारे पास आएगा।”**

Vipul Vaghela 33

(વળામણાં' પન્નાલાલ પટેલની પ્રથમ નવલકથા છે. 'વળામણાં'ને નવલકથા, લઘુનવલ, લાંબી-ટૂંકી વાર્તા વગેરે સંજ્ઞાઓથી ઓળખાવાઈ છે. આ નવલકથામાં માનવહૃદયના અકળ ભાવોને પાત્રોની ક્રિયાઓ દ્વારા પ્રગટ કરવાની લેખકની કળા નોંધપાત્ર છે. નવલકથાની નાયિકા ઝમકુ સાસરીમાંથી તિરસ્કારનો ભોગ બનીને પિયરમાં આવે છે પછી સરકારી કામ માટે આવતો તલાટી તેને ભોળવીને લઈ જાય છે. ત્યાંથી પણ ઝમકુ નાસીપાસ થઈને પોતાના પિયરઘરમાં રહેવા માટે અંધારી રાત્રે આવે છે. ત્યારે ઝમકુનો ભાઈ બેચર અને ભાભી તેને ઘરમાં રાખવાની સાફ ના પાડી દે છે. મનોર મુખી આ અસહાય છોકરીને શહેરમાં વેચી આવીને આર્થિક ફાયદો મેળવવા માગે છે. ગામની અંબા સુથારણ પોતાના પિયરપક્ષમાં ઝમકુનું લગ્ન થયેલું હોવાના કારણે પોતાના દીકરા મોતી દ્વારા ઝમકુના ઘરમાં ઝમકુની પાછા ફર્યાની તપાસ કરાવે છે, પણ કંઈ હાથ લાગતું નથી. એ જ રાતે મનોર મુખી ઝમકુને સીમથી દૂર વગડામાં વગડામાં આવેલા એક મહાદેવના મંદિરમાં પૂજારીના આશરે મૂકી આવે છે. ત્રણ ચાર દિવસ સુધી ગામમાં ઝમકુ પાછી ફર્યાની ચર્ચાઓ શમી જાય છે પછી સરકારી કામે જવાનું બહાનું કાઢીને મનોર મુખી ઝમકુને લઈને અમદાવાદ તરફ પ્રયાણ કરે છે. અમદાવાદ જતા પૂર્વે પોતાની મૃત પુત્રી નાથીનાં કપડાં ઝમકુને પહેરાવે છે. એ કપડાંમાં ઝમકુને જોઈને જ મનોર મુખીમાં પિતૃભાવનાં બીજ રોપાય છે. ટ્રેનમાં લોકો પૂછે છે ત્યારે પણ મનોર મુખી ઝમકુને પોતાની દીકરી તરીકે ઓળખાવે છે. અમદાવાદની ધર્મશાળામાં મનોર મુખી સાથે રોકાયેલી ઝમકુ સતત ઘરે જવાની હઠ કરે છે અને રડ્યા કરે છે. મનોર મુખી પોતાના વિસ્તારના પણ અમદાવાદમાં રહેતા અમરસંગની મુલાકાત કરીને તેના દ્વારા ઝમકુને ઠેકાણે પાડી દેવાનું આયોજન કરે છે. કોઈ મુસ્લિમ વ્યક્તિ તેને ખરીદવાના છસો રૂપિયા આપવાનું કહે છે, પરંતુ મનોર મુખીનું મન ઝમકુને એક મુસ્લિમના હાથમાં સોંપતાં પાછું પડે છે. આખરે કોઈ પટેલ સાથે ત્રણસો રૂપિયામાં લગ્ન કરાવી દેવાનું નક્કી થાય છે, પરંતુ અમરસંગ એક રાત માટે ઝમકુને પોતાને ત્યાં મોકલી આપવાનું કહે છે ત્યારે મનોર મુખી અમરસંગ પ્રત્યે નફરતનો ભાવ અનુભવે છે. અમરસંગને લાભ ન મળતાં તે નિરાશ થઈને ચાલ્યો જાય છે. આ તરફઝમકુ પોતાના ગામ જવાની હઠ પકડે છે. મનોર મુખી માટે પાણી લાવે છે, તેમને ફાળિયું બાંધવા કહે છે. આમ, જાણે કે ઝમકુ તેમની દીકરી હોય એવા વર્તનો કરે છે. આ નાની નાની ક્રિયાઓથી મનોર મુખીને આત્મહત્યા દ્વારા મૃત્યુ પામેલી પોતાની દીકરી નાળી માદ આવે છે, અને નાથી પ્રત્યેનો તેમનો ભાવ ઝમકુ તરફ ઢળવા લાગે છે. મનોમન નિર્ણમ કરીને મનોર મુખી ઝમકુને લઈને રેલવે સ્ટેશન જાય છે. રસ્તામાં ઝમકુ માટે નવો સાડલો ખરીદે છે અને ઝમકુ પણ મનોર મુખીના દીકરા કાળુના બાળકો માટે રમકડાં ખરીદે છે. આમ, બંને વચ્ચેનો પિતા-પુત્રી ભાવ સર્જક ક્રિયાત્મક રીતે સઘન કરતા જાય છે. ગામમાં પ્રવેશતી વખતે તો પોતાની દીકરીને જ ઘરે લઈ આવતા હોય એમ ઝમકુને પાછી એની માને સોંપે છે. એટલું જ નહીં પણ કશાક આર્થિક ફાયદાની રાહ જોતી પોતાની પત્નીના મનમાં પણ નાથીની વાત કરીને ઝમકુ પ્રત્યે વાત્સલ્યભાવ જગાડે છે. એ રાત્રે જ અંબા સુથારણને મળીને મોતી સાથે ઝમકુનું લગ્ન નક્કી કરી દે છે અને વહેલી સવારે લગ્ન લેવાઈ પણ જાય છે. તે દિવસે ભેગા મળેલા સુધારશેના પંગને પણ પોતાની મુખીશાહી જબાનમાં ઠંડું પાડીને પોતાના ખર્ચે જમાડીને વિદાય કરે છે. આમ, નિરાધાર એવી ઝમકુને વેચીને પૈસા કમાવા નીકળેલા મનોર મુખી ઝમકુને પોતાની દીકરીની જેમ પરણાવે એ હૃદય પરિવર્તન લાવે આવી કથા છે.

Vipul Vaghela 33

('વળામણાં' પન્નાલાલ પટેલની પ્રથમ નવલકથા છે. 'વળામણાં'ને નવલકથા, લઘુનવલ, લાંબી-ટૂંકી વાર્તા વગેરે સંજ્ઞાઓથી ઓળખાવાઈ છે. આ નવલકથામાં માનવહૃદયના અકળ ભાવોને પાત્રોની ક્રિયાઓ દ્વારા પ્રગટ કરવાની લેખકની કળા નોંધપાત્ર છે. નવલકથાની નાયિકા ઝમકુ સાસરીમાંથી તિરસ્કારનો ભોગ બનીને પિયરમાં આવે છે પછી સરકારી કામ માટે આવતો તલાટી તેને ભોળવીને લઈ જાય છે. ત્યાંથી પણ ઝમકુ નાસીપાસ થઈને પોતાના પિયરઘરમાં રહેવા માટે અંધારી રાત્રે આવે છે. ત્યારે ઝમકુનો ભાઈ બેચર અને ભાભી તેને ઘરમાં રાખવાની સાફ ના પાડી દે છે. મનોર મુખી આ અસહાય છોકરીને શહેરમાં વેચી આવીને આર્થિક ફાયદો મેળવવા માગે છે. ગામની અંબા સુથારણ પોતાના પિયરપક્ષમાં ઝમકુનું લગ્ન થયેલું હોવાના કારણે પોતાના દીકરા મોતી દ્વારા ઝમકુના ઘરમાં ઝમકુની પાછા ફર્યાની તપાસ કરાવે છે, પણ કંઈ હાથ લાગતું નથી. એ જ રાતે મનોર મુખી ઝમકુને સીમથી દૂર વગડામાં આવેલા એક મહાદેવના મંદિરમાં પૂજારીના આશરે મૂકી આવે છે. ત્રણ ચાર દિવસ સુધી ગામમાં ઝમકુ પાછી ફર્યાની ચર્ચાઓ શમી જાય છે પછી સરકારી કામે જવાનું બહાનું કાઢીને મનોર મુખી ઝમકુને લઈને અમદાવાદ તરફ પ્રયાણ કરે છે. છે. અમદાવાદ જતા પૂર્વે પોતાની મૃત પુત્રી નાથીનાં કપડાં ઝમકુને પહેરાવે છે. એ કપડાંમાં ઝમકુને જોઈને જ મનોર મુખીમાં પિતૃભાવનાં બીજ રોપાય છે. ટ્રેનમાં લોકો પૂછે છે ત્યારે પણ મનોર મુખી ઝમકુને પોતાની દીકરી તરીકે ઓળખાવે છે. અમદાવાદની ધર્મશાળામાં મનોર મુખી સાથે રોકાયેલી ઝમકુ સતત ઘરે જવાની હઠ કરે છે અને રડયા કરે છે. મનોર મુખી પોતાના વિસ્તારના પણ અમદાવાદમાં રહેતા અમરસંગની મુલાકાત કરીને તેના દ્વારા ઝમકુને ઠેકાણે પાડી દેવાનું આયોજન કરે છે. કોઈ મુસ્લિમ વ્યક્તિ તેને ખરીદવાના છસો રૂપિયા આપવાનું કહે છે, પરંતુ મનોર મુખીનું મન ઝમકુને એક મુસ્લિમના હાથમાં સોંપતાં પાછું પડે છે. આખરે કોઈ પટેલ સાથે ત્રણસો રૂપિયામાં લગ્ન કરાવી દેવાનું નક્કી થાય છે, પરંતુ અમરસંગ એક રાત માટે ઝમકુને પોતાને ત્યાં મોકલી આપવાનું કહે છે ત્યારે મનોર મુખી અમરસંગ પ્રત્યે નફરતનો ભાવ અનુભવે છે. અમરસંગને લાભ ન મળતાં તે નિરાશ થઈને ચાલ્યો જાય છે. આ તરફ ઝમકુ પોતાના ગામ જવાની હઠ પકડે છે. મનોર મુખી માટે પાણી લાવે છે, તેમને ફાળિયું બાંધવા કહે છે. આમ, જાણે કે ઝમકુ તેમની દીકરી હોય એવાં વર્તનો કરે છે. આ નાની નાની ક્રિયાઓથી મનોર મુખીને આત્મહત્યા દ્વારા મૃત્યુ પામેલી પોતાની દીકરી નાથી માદ આવે છે, અને નાથી પ્રત્યેનો તેમનો ભાવ ઝમકુ તરફ ઢળવા લાગે છે. મનોમન નિર્ણમ કરીને મનોર મુખી ઝમકુને લઈને રેલવે સ્ટેશન જાય છે. રસ્તામાં ઝમકુ માટે નવો સાડલો ખરીદે છે અને ઝમકુ પણ મનોર મુખીના દીકરા કાળુના બાળકો માટે રમકડાં ખરીદે છે. આમ, બંને વચ્ચેનો પિતા-પુત્રી ભાવ રાર્જક ક્રિયાત્મક રીતે સઘન કરતા જાય છે. ગામમાં પ્રવેશતી વખતે તો પોતાની દીકરીને જ ઘરે લઈ આવતા હોમ એમ ઝમકુને પાછી એની માને સોંપે છે. એટલું જ નહીં પણ કશાક આર્થિક ફાયદાની રાહ જોતી પોતાની પત્નીના મનમાં પણ નાથીની વાત કરીને ઝમકુ પ્રત્યે વાત્સલ્યભાવ જગાડે છે. એ રાત્રે જ અંબા સુથારણને મળીને મોતી સાથે ઝમકુનું લગ્ન નક્કી કરી દે છે અને વહેલી સવારે લગ્ન લેવાઈ પણ જાય છે. તે દિવસે ભેગા મળેલા સુખાશેના પંચને પણ પોતાની મુખીશાહી જબાનમાં ઠંડું પાડીને પોતાના ખર્ચે જમાડીને વિદાય કરે છે. આમ, નિરાધાર એવી ઝમકુને વેચીને પૈસા કમાવા નીકળેલા મનીર મુખી ઝમકુને પોતાની દીકરીની જેમ પરણાવે એ હૃદયપરિવર્તન ની આ કથા છે.

Anup Gajare

|| बचा हुआ — विस्तार || ____________________________________________________ हम गहरे नीले रंग के उस कमरे में रहते हैं जहाँ दीवारें सिर्फ दीवारें नहीं, अंतर की नमी से भीगी हुई स्मृतियाँ हैं— और छत पर टंगा सन्नाटा धीरे-धीरे श्वास लेता है। पुंज-पुंज आलोक सरस्वती की ध्वनि की तरह नहीं, बल्कि उस अधूरे उच्चार की तरह है जो जन्म लेने से पहले ही मन की शिराओं में बहने लगता है— एक ऐसा संगीत जिसे कोई सुनता नहीं, फिर भी सब उसी में डूबे हैं। बाहरी दुनिया और भीतरी दुनिया के बीच अब कोई रेखा नहीं बची— रेखाएँ थीं भी तो हमने उन्हें छू-छूकर मिटा दिया, या शायद वे खुद ही हमारी उपस्थिति से लुप्त हो गईं। सब अपने हैं— पर यह अपनापन भीड़ का नहीं, एक गहरे अकेलेपन का विस्तार है, जहाँ हर चेहरा हमारी ही छाया का दूसरा रूप बन जाता है। रोग, शोक, मृत्यु— क्या वे सच में हमें छूते नहीं? या हमने ही अपने स्पर्श को इतना भीतर खींच लिया है कि बाहरी आघात अब सतह तक पहुँच ही नहीं पाते? गुलाब की पंखुड़ियाँ अब रंग नहीं छोड़तीं, रजनीगंधा की खुशबू सिर्फ एक स्मृति बनकर रह गई है— जैसे किसी पुराने जन्म की भूली हुई भाषा। दर्द और खुशी— ये दो नहीं, एक ही वृत्त के अलग-अलग बिंदु हैं जो निरंतर घूमते हुए हमारे भीतर एक ही केंद्र की ओर लौटते रहते हैं। हमारा मर्म— कोई स्थिर सत्य नहीं, बल्कि एक शिल्प है जिसे हम हर क्षण थोड़ा-थोड़ा काटते, घिसते, तराशते हैं— और अंत में वही हमें गढ़ देता है। हमने यह तय किया था— बिना किसी संवाद के, बिना किसी साक्षी के— कि जीवन को ऐसे ही बहने देंगे, जैसे एक नदी अपना मार्ग खुद ही भूल जाए और फिर भी समुद्र तक पहुँच जाए। किसी से पूछा नहीं— क्योंकि प्रश्नों में हमेशा एक बाहरी दृष्टि होती है, और हमने अपने भीतर की दृष्टि को ही एकमात्र सत्य मान लिया। यह सब लेकर बीत जाएगा हमारा जीवन— धीरे-धीरे, बिना किसी उद्घोष के, जैसे समय अपने ही पदचिन्हों को मिटाता हुआ चलता है। गहरा नीला रंग— अब एक रंग नहीं, एक अवस्था है, जहाँ प्रकाश भी अंधकार के भीतर जन्म लेता है। और सरस्वती का वह संगीत— अब शब्दों में नहीं, बल्कि उस मौन में बसता है जहाँ कुछ भी कहा नहीं जाता, पर सब कुछ सदैव कहा जा चुका होता है। ____________________________________________________ Anup Ashok Gajare

priyanka katiyar

kdrama name -crash landing on you

AbhiNisha

उम्मीद रखना मना है कविता जिंदगी बेमानी लगता है हमें तेरी कहानी अनजाने लगता है आज सुबह उठे हम पर होस में हम थे ही नहीं खो दिया खुद को कई उन कहानियों में जो सुनी सुनाई लगी बहुत शोर शोराबा सुन के उठा था पर जागी सुबह तो अपना कोई नहीं लगा एक डरावनी सपने का अंत हुआ पर जो सामने था वह दर्दनाक सच्चाई था जिसे देखकर अपना होस संभालना मुश्किल लगा जिंदा दिली बन कर रहना मुश्किल लगा और हमने खुद को खुद ही दफना दिया वही जहां जिंदा होकर मुर्दा चल रहे थे वो कब्रगाह लाशों की नहीं थी वह कब्रगाह रहा उम्मीदो की थी जहां बड़ी बड़ी अक्षर में लिखा गया था उम्मीद रखना मना है यहां आप जिंदा तो हो पर जिन मना है 🥀🫀🖤 यह कविता आप सबको अच्छे लगे तो आगे पढ़ते रहिए मैं आपकी प्रिय लेखक अभिनिशा❤️🦋💯

priyanka katiyar

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वात्सल्य

મારે અને તારે શું હવે? વરસોના સંબંધનો તાંતણો હતો મજબૂત!! આમ એકાએક વાવાઝોડા જેમ બધું વેરવિખેર કરી નાખતાં નુકસાન અંતે તારું જ થયું ને! હું તો તોફાન ઝીલતો,દાવાનળ કે વડવાનલનો સામનો કરતો એજ જગ્યાએ સ્થિર છું. જ્યાં તુ મને કાંટો વાગે તો પણ ચીસ પાડી ઉઠતી !! - વાત્સલ્ય - वात्सल्य

mohansharma

ऐसा भी क्या तुम्हारा नजदीक आना हुआ .. तुम तो कवरेज एरिया के ही बाहर हो गए..

Piyu soul

“प्यार सिर्फ़ साथ रहने का नाम नहीं होता, यह वो एहसास है जो दूर रहकर भी दिलों को जोड़कर रखता है। जहाँ सच्चा प्यार होता है, वहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं और खामोशी भी सब कुछ कह जाती है।”

મનોજ નાવડીયા

હંમેશાં શાંત બન, થોડો શબ્દોમાં સંયમ બન, થોડો સ્વભાવમાં મીઠાસ બન, થોડો દોડવામાં વિરામ બન, થોડો વિચારોમાં ઊંડાણ બન, થોડો સંબંધોમાં વિશ્વાસ બન, થોડો પોતાનામાં સમજ બન, થોડો જીવનમાં સમતોલન બન મનોજ નાવડીયા

priyanka katiyar

“The Quiet Architecture of Her Mind” She is not what you see — not the smile rehearsed in crowded rooms, nor the silence she wears like discipline. She is a map of unsent thoughts, folded carefully between duty and desire, where every “I’m fine” translates into a paragraph of restraint. She remembers everything. Not dates — but tones, pauses, the way a sentence broke halfway and still expected her to understand. Her mind is a library of unfinished conversations, where she is both the question and the answer no one waited to hear. She negotiates with herself daily— between what she feels and what she is allowed to feel. Strength, for her, is not loud. It is choosing not to collapse in places where no one would notice if she did. She loves like she’s building something no one can see— laying bricks of patience, cemented with quiet hope. And when it cracks, she does not scream— she studies the ruins, trying to understand where she trusted too deeply. There are storms in her— but they are disciplined storms. They do not flood the world, they rain inward, watering wounds that never got sunlight. And still— she wakes up, ties her thoughts into neat conclusions, and walks into the day as if her mind was never a battlefield. Because she has learned— not how to avoid breaking, but how to rebuild silently without asking who broke her in the first place.

kattupaya s

Goodnight friends.. sleep well

Piyu soul

“एक लड़की अगर रो भी दे तो लोग उसे कमजोर कह देते हैं… लेकिन वही लड़की जब माँ बन जाती है, तो उसका हर आँसू ताकत बन जाता है। क्योंकि माँ वो नहीं जो कभी गिरती नहीं, माँ वो है जो गिरकर भी अपने बच्चों को कभी गिरने नहीं देती।”

Saroj Prajapati

सपनों की उड़ान मजबूरियों के पंख धीरज धर हौसलों में रख तू दमखम गिरने से मत घबरा ऊंची छलांग लगा स्वागत में खड़ा तेरे हिस्से का आसमान। सरोज प्रजापति ✍🏻 - Saroj Prajapati

Anish

"But how could you live and have no story to tell?" - Dostoevsky

Anish

आप क्या आज़ाद करोगे हमें हमे खुद पिंजरे में रहने की आदत नहीं।

Jyoti Gupta

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Anish

सुना है इश्क करने जा रहे हो ये कच्चे आशिकों सुना है इश्क करने जा रहे हैं जिंदा तो लौट आओगे पर जी नहीं पाओगे

Vartikareena

माई_डियर_प्रोफेसर का भाग 11 आ चुका है। आप लोग पढकर कमेंट कर दो।

Anish

ये ले बकरी के दूध की चाय एक कप भर के

રોનક જોષી. રાહગીર

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Imaran

तुम्हें याद रखने का मेरा अंदाज थोड़ा निराला है, मैंने तुम्हें तस्वीरों में नहीं, शब्दों में सम्भाला है.. कभी लिख दी दो लाइन की शायरी तुम पर, तो कभी तुम्हारी यादों में पूरा खाली पन्ना ही भर डाला है ✍️imran ✍️

Imaran

तुम्हें याद रखने का मेरा अंदाज थोड़ा निराला है, मैंने तुम्हें तस्वीरों में नहीं, शब्दों में सम्भाला है.. कभी लिख दी दो लाइन की शायरी तुम पर, तो कभी तुम्हारी यादों में पूरा खाली पन्ना ही भर डाला है ✍️imran ✍️

Ruchi Dixit

जिसने समय बनाया वह भला समय के आधीन कैसे हो सकता है संतान के पुकारने पर अवसर उसे कैसे बाँध सकता है ? वह निरंतर , निर्बाध,एकसार है बस आर्द हमें होना है भीगना हैं एक क्षण को है वही चाहे स्वांस का अंतिम प्रयास ही क्यों न हो । - Ruchi Dixit

N¡k¡t@

🤣🤣🤣

Hardik Boricha

❛અંત નો પણ અંત હોય છે..! કોઈયે ક્યાં અનંત હોય છે..!! પાનખર પણ એક ઘટના છે..! બારેમાસ ક્યાં વસંત હોય છે..!! એમ તો બધા લાગે એક સરખા..! ભગવાં પહેરેલ ક્યાં સંત હોય છે..!! બધુંય એમ સહજ મળતું નથી..! નાહક માણસ નો તંત હોય છે..!! અહીં અવતરવાની શરત હોય છે..! સ્વીકારો, સઘળું નાશવંત હોય છે...!❜

N¡k¡t@

🤣🤣🤣 ચૂડેલે બન્નેની ઈચ્છા પૂર્ણ કરી....

Rishav raj

नींद टूटी तो सपना भूल गया, तेरे बिना जीने का मतलब भी भूल गया… 🌙💔 - Rishav raj

Hardik Boricha

સ્પર્શ દઈ પાણી વહી જાતું હશે ત્યારે આ પત્થરોને પણ કંઈક તો થાતું હશે.

Hardik Boricha

તરસુ છું હવે તો એ રાત માટે જયારે સપને આવી ને તુ હળવેકથી કહે.... આજ સપનું છું પણ કાલ તારી જ પાસે હકીકત બનીને આવીશ

Hardik Boricha

और पुरानी बातें याद नही,.... हां उसकी कमर के नीचे एक तिल था,!!

Hardik Boricha

તારા પ્રેમ ની એવી અસર થઈ.. દવા ને દુવા બંન્ને બેઅસર થઈ........

Hardik Boricha

*ભગવાને જિંદગી આપી છે તો જલસાથી જીવી લેવી, એક દિવસ તમારા જ પ્રસંગમાં તમારી ગેરહાજરી હશે !!*

Hardik Boricha

*વરસાદ દર ચોમાસે પડે છે પણ એક સરખો નથી પડતો, એમ જ જીવનમાં ખુશીઓ ઘણીવાર આવે છે પણ એક સરખી નથી આવતી !!*

Hardik Boricha

*જિંદગી ના અમુક વળાંક એવા હોય છે જ્યાં*, *સમજણ અને સત્ય હોવા છતાં* *નિર્ણય લઈ શકાતો નથી* ....

Mara Bachaaaaa

क्या सिर्फ़ कहने भर का रिश्ता रह जाएगा। आंख में सवालों की नमी छोड़ जाएगा। - Mara Bachaaaaa

सीमा कपूर

हम वफा कर के भी तन्हा रह गए.. - सीमा कपूर

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