Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Aastha Rawat

क्या है सिकुड़ता शहर? अरे क्या है सिकुड़ता शहर? एक कमरा है एक मेज है एक फोन है हाथ में दुनिया है, दुनिया की खबर है खुद से बेखबर ,ये खबर की दुनिया है है एक सुंदर शहर जिसमें दीवारें है रंगीन पर्दे है ढेर भर किताबें है चार फूलों का फूलदान पूरा शहर महकता है मधुर आवाजों भरा रेडियो दिन भर चहकता है। कभी पन्ने उलटते दिन कभी रात हो जाती हैं मगर कमबख्त धूप कभी शहर तक न आती है। तिरछी बरसती बूंदे कभी खिड़की से टकराती है।पर शहर और उसके लोगों को कहां भीगाती है । भीड़ बहुत है, लेकिन शहर में कोई आते नहीं। रेडियो चालू है पर लोग कुछ कह पाते नहीं अखबार है पर किसी को सुना पाते नहीं कदमों की आहटें गलियों में, पर कोई ठहर जाते नहीं। दरवाज़े रोज़ खुलते हैं, पर लोग अंदर आते नहीं हां यही तो है सिकुड़ता शहर जहां आशना कभी टकराते नहीं।।

Komal Arora

ल़डकियों की तकलीफ तो तब पता चलती है जब पैदा होने वाले घर से निकलने के खयाल सताने लगते हैं..... मन के भावों को समझना नामुमकिन सा लगता है.. सब फिजूल सा भी कुछ खास लगने लगता है....... कि हुई कोशिशें कामयाब होने की खत्म होती नजर आती है.....

Bk swan and lotus translators

ఫిబ్రవరి 18, 2026న జరిగిన టీ20 వరల్డ్ కప్ గ్రూప్-A మ్యాచ్‌లో నెదర్లాండ్స్ జట్టు టీమిండియాకు గట్టి పోటీనిచ్చింది. ఈ మ్యాచ్ అహ్మదాబాద్‌లోని నరేంద్ర మోదీ స్టేడియంలో జరిగింది. చివరి వరకు పోరాడిన డచ్ జట్టు, భారత్ నిర్దేశించిన భారీ లక్ష్యానికి చేరువగా వచ్చి 17 పరుగుల తేడాతో ఓటమి పాలైంది. IND vs NED - మ్యాచ్ స్కోర్లు | జట్టు | స్కోరు | కీలక ప్రదర్శనలు | |---|---|---| | భారత్ (IND) | 193/6 (20 ఓవర్లు) | శివమ్ దూబే: 66 (31 బంతులు) సూర్యకుమార్ యాదవ్: 34 (28) | | నెదర్లాండ్స్ (NED) | 176/7 (20 ఓవర్లు) | బాస్ డి లీడే: 33 (24) జాక్ లయన్-కాచెట్: 26* (16) | విశ్లేషణ: నెదర్లాండ్స్ ఇచ్చిన పోరాటం 1. డచ్ బౌలర్ల ఆరంభ ధాటి: టాస్ గెలిచి బ్యాటింగ్ ఎంచుకున్న భారత్‌కు నెదర్లాండ్స్ షాక్ ఇచ్చింది. ఓపెనర్ అభిషేక్ శర్మ (0) ఈ టోర్నీలో వరుసగా మూడోసారి డకౌట్ అయ్యాడు. ఆర్యన్ దత్ తన స్పిన్‌తో భారత టాప్ ఆర్డర్‌ను కట్టడి చేశాడు. 10 ఓవర్లకు భారత్ 74/3 తో ఇబ్బందుల్లో ఉన్న సమయంలో నెదర్లాండ్స్ పట్టు బిగించింది. 2. శివమ్ దూబే మెరుపులు: ఒక దశలో 160 పరుగులు దాటడం కష్టమనుకున్న భారత్‌ను శివమ్ దూబే ఆదుకున్నాడు. కేవలం 31 బంతుల్లో 4 ఫోర్లు, 6 సిక్సర్లతో 66 పరుగులు చేసి స్కోరును 193కి చేర్చాడు. హార్దిక్ పాండ్య (30) అతనికి మంచి సహకారం అందించాడు. చివరి 5 ఓవర్లలో భారత్ ఏకంగా 75 పరుగులు రాబట్టింది. 3. నెదర్లాండ్స్ ఛేదన: 194 పరుగుల భారీ లక్ష్యంతో బరిలోకి దిగిన నెదర్లాండ్స్ ఎక్కడా తగ్గలేదు. పవర్‌ప్లేలో వికెట్లు కోల్పోయినా, మిడిల్ ఓవర్లలో బాస్ డి లీడే మరియు కొలిన్ అకెర్‌మన్ భారత బౌలర్లపై ఒత్తిడి పెంచారు. ముఖ్యంగా చివరి ఓవర్లలో నోహ్ క్రోస్ (25*) మరియు లయన్-కాచెట్ మెరుపు దాడి చేయడంతో మ్యాచ్ ఉత్కంఠగా మారింది. 4. భారత్‌ను గట్టెక్కించిన వరుణ్: నెదర్లాండ్స్ విజయం దిశగా సాగుతున్న వేళ, మిస్టరీ స్పిన్నర్ వరుణ్ చక్రవర్తి తన స్పెల్‌తో మ్యాచ్‌ను మలుపు తిప్పాడు. అతను 3 వికెట్లు తీసి నెదర్లాండ్స్ వేగానికి బ్రేకులు వేశాడు. చివరి ఓవర్‌లో నెదర్లాండ్స్‌కు 28 పరుగులు అవసరం కాగా, శివమ్ దూబే బంతితోనూ రాణించి కేవలం 10 పరుగులే ఇచ్చి భారత్‌కు విజయాన్ని అందించాడు. > ముగింపు: ఈ విజయంతో భారత్ గ్రూప్-A లో ఆడిన 4 మ్యాచ్‌ల్లోనూ గెలిచి అజేయంగా సూపర్-8కు చేరుకుంది. డచ్ జట్టు ఓడిపోయినా, ప్రపంచ నంబర్ 1 జట్టును వణికించిన తీరు ప్రశంసనీయం.

Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz

🦋...𝕊𝕦ℕ𝕠 न┤_★__ तुम अक्सर पूछती हो न कि क्या        अहमियत है तुम्हारी.? तो सुनो मैं एक सूखा हुआ शजर था, जिसे  अपनी  ही छाँव से डर                 लगता था, मेरी जड़ों में खारापन था और रूह    में सिर्फ़ एक ख़ामोश पतझड़, फिर तुमने छुआ  और मेरी रगों में      लहू नहीं, वसंत दौड़ने लगी, तुम मेरी अहमियत मत पूछो, तुम बस  ये  देखो  कि,  तुम्हारी   एक                  छुअन ने, मेरे  अंदर के  उस  मरे हुए इंसान   को फिर से ज़िंदा कर दिया है, तुम वो नमी हो, जिसके  बिना मैं               रेत हो जाता, तुम वो  रोशनी हो, जिसके बिना      मेरा हर रास्ता अँधेरा था, जब तुम पूछती हो कि मैं कौन हूँ         तो मुझे लगता है कि, तुम अपनी  ही दी हुई  साँसों का          हिसाब माँग रही हो, तुम सिर्फ़ मोहब्बत नहीं हो, तुम वो वजह हो जिसने मुझे ख़ुद से               मिलवाया है, अब  कभी  मत  पूछना  अपनी जगह, क्योंकि आइना चेहरा तो            दिखा सकता है, पर वो रूह नहीं जो तुम्हारी रूह     में घुल चुकी है...😌🫶❤️ ╭─❀💔༻  ╨──────────━❥ #Zakhmi-E-Zubani..✍🏼 #LoVeAaShiQ_SinGh☜ ╨──────────━❥

SAYRI K I N G

चाय में गोलगप्पा डाल के खायें.... बिछड़ा प्यार वापस मिलेगा झूठ है या सच मैकू भी पता नहीं है

SAYRI K I N G

तेरी हरकतों से नफ़रत है मुझे तुझ जैसा गिरा हुआ इंसान कहीं नहीं मिला मुझे

Vipul Borisa

एक अरसा हुआ मरे हुये। एक वक़्त था जीना चाहते थे। विपूल प्रीत - Vipul Borisa

kajal jha

चोटें भी ज़रूरी हैं, ये सिखा जाती हैं पहचान, कौन अपना, कौन पराया — दिखा जाती हैं पहचान। अच्छे लोग फँस भी जाएँ तो ग़म न करना ऐ दोस्त, सच का रास्ता देर से सही, पर देता है नई उड़ान। - kajal jha

bhagwat singh naruka

कैसा समय आ गया है केशव अब तो लोग अपने खून के रिश्तों को भी जलील करने में जरा भी नहीं हिचकते। #writer_bhagwatsingh_naruka

bhagwat singh naruka

जिम्मेदारियों का बोझ इतना है साहब, कि मुस्कुराना भी कभी-कभी काम सा लगता है। ख्वाहिशें रख दी हैं हमने किनारे, अब हर सपना किसी और के नाम सा लगता है। थक जाते हैं कदम, पर रुकना मुमकिन नहीं होता, क्योंकि घर की उम्मीदों का वजन कंधों पर हर शाम सा लगता है। #writer_bhagwat_singhnaruka ✍️

bhagwat singh naruka

लबों पर मीठी बातें हैं, दिल में क्या है कोई नहीं जानता, हर शख़्स यहाँ अपने मतलब का सच छुपाए फिरता है। मुस्कुराहटें भी अब सौदे जैसी लगती हैं, रिश्ते भी जैसे जरूरत से बनते हैं, इस भीड़ में असली चेहरा ढूँढना आईने से लड़ने जैसा हो गया है। फिर भी दिल कहता है — नकाबों के इस शहर में कहीं तो कोई बिना मुखौटे के भी रहता है। #writer_bhagwat_singhnaruka ✍️

ek archana arpan tane

તારાં પ્રેમ થી ભરેલી છે મારી જિંદગી ની તિજોરી કોઈ કોહિનૂર આપે ને? તો પણ હું સોદો ન કરું? - ek archana arpan tane

Suresh sondhiya

🚨 मातृभारती के सभी पाठकों के लिए एक बहुत ज़रूरी और धमाकेदार सूचना! 🚨 मैंने देखा है कि यहाँ मातृभारती पर कुछ लोग अपना खुद का 'यूनिवर्स' या आईडिया बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ईमानदारी से कहूँ तो... मुझे दूसरों के यूनिवर्स से कोई फर्क नहीं पड़ता! 😎 क्योंकि अब मैं मातृभारती के इतिहास में अपना खुद का एक ऐसा महा-ब्रह्मांड प्रोड्यूस करने जा रहा हूँ, जो आपने पहले कभी नहीं पढ़ा होगा — पेश है [ S C U ] यानी Suresh Cinematic Universe! 🎬🌌 अब तक आपने मेरी जितनी भी कहानियाँ पढ़ी हैं, सच बताऊँ तो वो सिर्फ मेरा एक 'वॉर्म-अप' (Warm-up) या वीक पॉइंट था। मैं बस अपनी कलम को आज़मा रहा था। लेकिन असली खेल तो अब शुरू होने वाला है! अपनी सीटबेल्ट बाँध लीजिए, क्योंकि बहुत जल्द [ S C U ] के तहत 3 नई 'ब्लॉकबस्टर' और खूंखार कहानियाँ एक साथ आ रही हैं। (और हाँ, इन कहानियों के तार एक-दूसरे से ऐसे जुड़े होंगे कि आपका दिमाग चकरा जाएगा!) 🤯💥 इंतज़ार कीजिये... क्योंकि ब्रह्मांड को बचाने का खेल अब शुरू होता है! — आपका अपना लेखक और डायरेक्टर, सुरेश सौंधिया [ S C U ]

Jyoti Gupta

#GaneshJi #GanpatiBappaMorya #GaneshUtsav #AnandDham #GaneshBhakti #BhaktiVibes #GanpatiFestival #DivineDarshan #SanatanDharma #IndianCulture #TrendingReels #YouTubeShorts #InstagramReels #ViralBhakti #GanpatiBlessings #DevotionalVideo #DailyBhakti

Awantika Palewale

थोड़ी देर के लिए ही सही, मेरे पास बैठ ये लम्हा उधार ले ले, मेरे पास बैठ शब्द थक गए हैं चलकर, ख़ामोशी बोल उठे दिल को ज़रा सुला दे, मेरे पास बैठ तू आए तो मौसम भी अपना रंग बदल ले ये शाम सँवार दे, मेरे पास बैठ ना वादों की ज़िद रख, ना कल की बात कर आज को ही जीने दे, मेरे पास बैठ आँखों में जो बचा है, वो सच कह जाए झूठ से थोड़ी दूरी रख, मेरे पास बैठ मैं दर्द कहूँ या हँसी—तू सुन ले बस इतना मेरी हर बात समझ, मेरे पास बैठ

Rinal Patel

ક્યારેક તો આ સતરંગી સપનાઓ જોવા અને પછી એ પૂરા ન કરી શકવાનું કારણજ આ અતરંગી વિચારો જવાબદાર હોય છે. અંતરની દ્રષ્ટિએ. Rinall.

Chaitanya Joshi

શિવનું શરણ મારે એક આધાર. શિવનું શરણ મારે ભવજળપાર. સંકટો ટળતાં શિવકૃપાથી, આશિષ મળતા શિવકૃપાથી. શિવનું શરણ મારે જીવનસાર...1 રીઝે ભોળાનાથ ભયહારી, સ્તુતિ પ્રાર્થના મુખે ઉચ્ચારી. શિવનું શરણ મારે સફળ અવતાર...2 અંતરવેદના શિવજી સમજતા. મૂક વરદાન શિવજીના મળતા. શિવનું શરણ મારે હરપળ વિચાર...3. ભૂલીને દોષો હરજી સ્વીકારે. જીવમાત્રને એ સહેજે આવકારે. શિવનું શરણ મારે હરખ અપાર....4 આશુતોષ અવિનાશી પ્રભુ પ્રેમથી રીઝતા શિવશંકર શંભુ. શિવનું શરણ મારે સફળ સંસાર...5 - ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.

Ajit

તને ફાવે ત્યારે તું મોઢું ફેરવી દે એને તું પ્યાર કહે છે...... તને યાદ મારી આવે ત્યારે તું આંસુ ખેરવી દે એને તું પ્યાર કહે છે.... આ વચ્ચેના સમયમાં મને સાચવી લે એને યાર કહે છે...... જિંદગી ની "યાદ"

Neha kariyaal

Dark Blue 🖤 ( मोह ही दुःख का कारण है) आज फ़िर मैंने एक ग़लती कर दी, हर रोज़ सोचती हूँ कुछ गलत नहीं करूंगी। पर रोज़ कुछ न कुछ कर देती हूं। आज जो हुआ वो अच्छा नहीं था और शायद कोई मुझे माफ़ न करें क्योंकि मैं ख़ुद को दोषी समझती हूं। पर हम कुछ भी जानबूझ कर नहीं करते, बस हो जाता है। मैंने किसी को हानि नहीं पहुंचाई लेकिन लगता है सब मेरी गलती है। मेरा मोह मुझे ये करने पर मजबूर कर रहा था, ना चाहते हुए भी मैंने फ़िर से खुद को ठेस पहुंचाई। अपनी ही नज़रों में मैंने ख़ुद को छोटा बना दिया। अब मैं फिर से सब ठीक करूंगी, प्रकृति की चीजें उसे वापस कर दूंगी। मैं जानती हूँ कुछ भी पहले जैसा नहीं होगा। लेकिन मुझे अपने हिस्से का काम करना होगा जो मेरा नहीं है मैं उसे नहीं ले सकती! मेरे अंदर का दुःख मुझे तोड़ रहा है एक बोझ है सीने पर, जो शायद कभी कम न हो, पर मैं कोशिश करूंगी कुछ भी ठीक करने की। और मुझे समझ आ चुका है कि मोह केवल दुःख का कारण बनता है। वो एक पल की खुशी तो दे सकता है लेकिन साथ ही दुखों का तूफ़ान लाता है। हम चाहे कितनी भी कोशिश कर लें लेकिन गलतियों से नहीं बच सकते। और सच्चाई है कि गलतियों से ही हम कुछ नया सीखते हैं। Nk✍️

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/18L5WvkZ8H/

Imaran

मोहब्बत की शमा जला कर तो देखो, ये दिलो की दुनिया सज़ा कर तो देखो, तुझे हो न जाए मोहब्बत तो कहना, ज़रा हमसे नजरे मिला कर देखो. 🫶imran 🫶

prit tembhe

सिर्फ तुम....❣️✍️ तुम्हे कहूँ तो लब्ज़ हो तुम, तुम्हें पढ़ूँ तो किताब हो तुम। तुम्हें सुनूँ तो दिल की धड़कन, तुम्हें लिखूँ तो मेरी कलम हो तुम। लोगों की होंगी अपनी-अपनी प्रेम कहानियाँ हज़ार, मेरे जीवन की हर साँस में बस एक ही इंतज़ार हो तुम। ख़ुदा भी तुम, दुआ भी तुम, मेरे हर ख़्वाब का आधार हो तुम। सबसे अच्छा मेरा यार हो तुम, फिर भी अधूरी-सी एक बात हो तुम। ख़ुदा भी तुम, जीवन भी तुम, सबसे प्यारा मेरा यार हो तुम। दुनिया पढ़े चाहे लाख किताबें, मेरी तो ख़ुद की शायरी हो तुम। जो दूर रहकर भी पास लगे, वो यादों की वो बेकरारी हो तुम। मुस्कान में छुपा दर्द और आँखों की नमी हो तुम। सब कुछ होकर भी जो ना मिले, मेरी सबसे बड़ी कमी हो तुम…

kavitha

నదిలా పారుతున్న కన్నీటి చుక్కను ప్రశ్నించాలని ఉంది, నీ కదలికకు కారణమేమిటని. అగ్నిపర్వతం లాంటి నా గుండెను, ప్రశ్నించాలని ఉంది, నీ అలజడికి మూలం ఎవరని.

Saroj Prajapati

खूब इम्तिहान ले रही है तू जिंदगी! अब एक आध नतीजा मेरे हक में भी निकाल दे इतना भी मैं नाकाबिल ना था जितना कि लोग अब मुझे समझने लगे। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati - Saroj Prajapati

Kaushalyaba Gohil

જયારે કોઈ ઘર માં એક પરણિત પુરુષ ( કે જે કોઈ નો દીકરો કે ભાઈ છે) અમુક નિર્ણયો પોતાની જાતે લેવાં માંડે છે પોતાનાં વડીલો ને પૂછ્યા વગર પોતાની બુદ્ધિ થી ત્યારે લાગતા વળગતા ની સલાહ આવવાં માંડે છે કે બાયું ( તેની પત્ની)ની ભુદ્ધી થી કામ લેશો તો આગળ નહી આવો.વળી આવી સલાહ આપવા વાળા બાયું જ હોય 😂. અને આ બાબત નો ખ્યાલ આવતા એ સ્રી ઘર ના કોઈ પણ નિર્ણયો માં બોલવાનું બંધ કરે અને તે ફકત પોતાનાં બાળકો અને પતિ માટે વિચારવાનું શરૂ કરે ત્યારે એ જ સલાહ આપવા વાળા ને માંઠું લાગે કે તારી બાય એ પૂછ્યું નહી કે કીધું નહી. જ્યારે તમારાં નબળાં સમય માં એ સ્રી એ સાથ આપ્યો હોઈ અને એ કોઈ ખોટી વાત નો વિરોધ કરવા જાય ત્યારે જો તમને બાયું ની બુદ્ધિ યોગ્ય ના લાગતી હોય તો તમને અમુક અમુક બાબત મા એ ડહાપણ બતાવે એવો આગ્રહ હોવો યોગ્ય છે? એની કદર નથી કરતા કાઈ વાંધો નહીં પણ એના કારણે જ બઘું થયું એમ કહેવા પછી એની પાસે થી ડહાપણ ભર્યા વ્યવહાર ની અપેક્ષા રાખવી કેટલી યોગ્ય??

महेश रौतेला

मरने के बाद तीता(कड़ुआ) भी मीठा लगने लगता है, चुप्पी में प्यार आने लगता है मन मुटाव हँसाने लगता है, अधैर्य, धैर्य बन जाता है। मरने के बाद तीर्थ एकान्त लगता है काँटे फूल से दिखते हैं, अँधेरे में दिखने लगता है सूनापन आजाद हो जाता है। *** महेश रौतेला

RM

सच्चा प्यार जुनून नहीं.. ❤️❤️ सुकून है.... 🤗🤗

kashish

Baad mai... baad mai kya hi ho jye gaa baad mai khile hoi fhool murjha jye gaa baad mai reste or bigar jye gaa baad mai log apne rang dikhne lage ge baad mai chai tandi ho jye gi baad mai kya kuch nhi ho jye gaa ...

Gautam Patel

જય શ્રીરામ

वात्सल्य

મારે માત્ર તુ જ જોઈએ.બીજું હું જાતે મેળવી લઈશ.અગર તારો સાથ હશે તો જીવનમાં કોઈ કમી નહીં રહે,બસ તુ મારી સાથે હશે.... - वात्सल्य

Vedanta Life Agyat Agyani

यह जीवन का गहरा अनुभव है, जो आत्मा की आवाज़ को व्यक्त करता है। मैं इसे कविता, दोहा, गीत, गज़ल और काव्य के रूप में प्रस्तुत करता हूँ, ताकि इसकी गहराई और सुंदरता और भी निखर सके। **अध्याय 1: जीवन का अनुभव** जी रहा हूँ मैं, अज्ञानी सा, कल का पता नहीं, जीवन है आज का धागा। बोध का प्रकाश है, यही ईश्वर का मार्ग, यह पल है सत्य, यही है सच्चा भाग। **दोहा** जीवन का रंग अनमोल, ना धन से कोई मोल, बोध की रीत में है सुख, यही है जीवन का कुल। **अध्याय 2: आत्मा का विश्वास** कोई गुरु नहीं, कोई धर्म नहीं, बस भीतर का प्रकाश है, यही मेरे लिए सच्चाई। सिख रहा हूँ, सीख रहा हूँ, आनंद में जी रहा हूँ, यह पल है मेरा, यही जीवन की रीत है। **गजल** मन की बात सुन ले, भीतर की आवाज़ को, सुख-दुख दोनों का संग, यही जीवन का राज़ है। मुक्ति का रास्ता खुलता है, जब हम जागरूक हो जाते हैं, जीवन का संगीत है, यही सही सच्चाई का रास्ता। **अध्याय 3: मृत्यु और जीवन का सच** मृत्यु का देख लेंगे चित्र, जन्म का नहीं देखा, यह पल ही है सत्य, जो कभी ना मिटे, यह देखा। दुख आए तो जीवन का नया रंग देखेंगे, सुख आए तो जीवन का अनमोल संग देखेंगे। **दोहा** मृत्यु का भय नहीं, यह तो जीवन का सार है, सुख-दुख दोनों में ही जीवन का उपहार है। **अध्याय 4: विश्वास और कर्म** विश्वास नहीं, पर भीतर है सब कुछ, कर्म की गति से है जीवन की यात्रा। सुख-दुख दोनों को अपनाकर चलना, यह है जीवन का सबसे बड़ा उपहार। **गीत** आओ चलें इस जीवन के सफर पर, सुख-दुख का संग है सच्चे पर, भीतर की आग में जलते रहो, यही कर्म का संगीत है, यही जीवन का प्यार। **अध्याय 5: अस्तित्व का नियम** सुख और दुख दोनों आते हैं, यह तो जीवन का स्वाभाव है, आगे बढ़ते रहो, रुकना नहीं, यही है जीवन का सबसे बड़ा रहस्य। **कविता** चलते रहो, बिना डर के, सुख-दुख दोनों का स्वागत कर, आत्मा की शांति में तैरते रहो, यही है जीवन का असली सार। ᐯEᗪᗩᑎTᗩ 2.0 ᒪIᖴE — ᑌᒪTIᗰᗩTE ᒪIᖴE, IᑎᗪEᑭEᑎᗪEᑎT ᒪIᖴE.

mohansharma

आँखों से दूर हुआ पर दिल से ना हुआ दूर.. कोई काम तो मोहन तूने ढंग से किया होता..

Falguni Dost

कतरा कतरा टूट कर बिखर जाने के बाद पता चला कि चाहत क्या होती है। - फाल्गुनी दोस्त

Shraddha Panchal

જીવન માં આવવા વાળા , દરેક વ્યક્તિ “હોળી” ના તહેવાર જેવા હોય છે , કોઈ રંગ બદલી નાખે છે , તો કોઈ રંગ ભરી ને જીવન રંગીન બનાવી દે છે 🎨🧡🩵🩶🩷💙💚💛💜

Ruchi Dixit

हज़ारों की भी में भी संवाद होता है लगाव हमेशा भारी पड़ता है व्यस्तता पर । - Ruchi Dixit

archana

हम पुरानी सोच के हैं आजकल प्रेम को आज़ादी का नाम दिया जाता है। प्रेमी बनना, फिर प्रेम छोड़ देना, और बाद में किसी और का पति या पत्नी बन जाना — इसे ही आधुनिक सोच कहा जाता है। पर हम पुरानी सोच के हैं। और इस पर हमें कोई शर्म नहीं। हमने प्रेम के नाम पर कभी अपने शरीर को किसी की वस्तु नहीं बनने दिया। न किसी को अधिकार दिया, न किसी को छूने दिया — सिवाय उस इंसान के जो हमारा होने वाला पति होगा। प्रेम करना गलत नहीं है, लेकिन प्रेम के नाम पर मर्यादा खो देना हमें स्वीकार नहीं। आज कहा जाता है — “पहले प्रेमी बनो, फिर पति या पत्नी बन जाना।” लेकिन किसी का हक़ मारकर अपना सुख बनाना हमारी संस्कारों में नहीं। हम अपने धर्म के मार्ग से नहीं हटेंगे अगर हमारा होने वाला पति या हम, उसकी होने वाली पत्नी— कभी प्रेम के नाम पर किसी और से जुड़ाव रख चुके हों, तो वह उनका कर्म है। उसे वे स्वयं सँभालेंगे, या उसी का फल झेलेंगे। हम किसी के अतीत पर फैसला सुनाने नहीं बैठे। हर इंसान अपने कर्मों का खुद उत्तरदायी होता है। लेकिन एक बात बिल्कुल साफ़ है— हम अपने धर्म के मार्ग से नहीं हटेंगे। प्रेम के नाम पर गलत कदम उठाना हमारी सोच नहीं। किसी का अधिकार छीनकर अपना घर बसाना हमें स्वीकार नहीं। आज अगर इसे “पुरानी सोच” कहा जाता है, तो कहते रहो। कम से कम इतना सुकून तो है कि हमने अपनी मर्यादा, अपना आत्मसम्मान और अपना धर्म कभी नहीं छोड़ा। अच्छा जीवनसाथी न लव मैरिज से तय होता है, न अरेंज मैरिज से। सब कुछ परिस्थितियों, कर्मों और भाग्य का खेल है। हम अपने हिस्से का धर्म पूरी निष्ठा से निभाएँगे। बाक़ी, हर किसी को अपने कर्मों का उत्तर खुद देना होगा।

Little Angle

कृष्ण कहते है, यदि लोग समझाने से समझ जाते तो मैं महाभारत होने ही ना देता - Little Angle

Ruchi Dixit

प्रेम लगाव अपनापन उम्मीद अपेक्षा एक साथ मिलकर शिकायत का रुप ले लेती है किन्तु बेवजह विवाद बहस और आदर न होने पर बीच से उम्मीद अपेक्षा पीछे हटने लगती है और सब संतुलन में आ जाता है-Ruchi Dixit

Soni shakya

लाख शिकायतों के बावजूद, आज भी रूह तक सुकून दे जाती है-- "तेरी आवाज" - Soni shaky

ArUu

जो लिखते हैं कड़वा सा, कभी तो उनका हृदय भी नाज़ुक रहा होगा, किसी अधूरी उम्मीद ने शायद उन्हें यूँ सख़्त बनाया होगा। शब्दों में भले चुभन हो उनकी, पर भीतर कहीं कोई कोमल कोना होगा, जिसने हर बार टूटकर भी ख़ामोशी से खुद को जोड़ा होगा। हर तीखी बात के पीछे एक अनकहा सा डर छुपा होगा और हर कठोर मुस्कान में कोई पुराना दर्द सोया होगा शायद वो भी कभी मासूम सपनों में खोए होंगे, किसी की बातों पर हँसे होंगे, किसी के लिए रोए होंगे। उसने भी चाहा होगा कभी बिना डर के मुस्कुराना, पर वक़्त ने सिखा दिया होगा हर एहसास को दिल में छुपाना। कड़वाहट अक्सर सच नहीं होती, वो तो बस एक परत होती है, अंदर कहीं गहराई में एक नर्म सी चाहत सोती है।

Imaran

एहसास के दामन में आंसू गिरा कर देखो, प्यार कितना है कभी हमे आज़मा कर देखो, बिछड़ कर तुमसे क्या होगी दिल की हालत, कभी किसी आईने पर पत्थर गिरा कर देखो. 🩵imran 🩵

ArUu

ये जो लिखते है कड़वा सा कभी तो किसी के लिए उनका हृदय भी नाजुक रहा होगा ArUu ✍️

S Sinha

रिश्तों की नाज़ुक डोर न टूटे कहीं इसके लिए बहुत कुछ सहना पड़ा था खता न थी फिर भी सिर झुकाना पड़ा था

Saliil Upadhyay

पति पत्नि का जन्मो जन्म का नाता  एक मित्र ने पूछा : अगर पति-पत्नी का रिश्ता सात जन्मों का है तो अभी कौन सा जन्म चल रहा है और कितने जन्म बाकी हैं? ये कैसे पता चलेगा? उत्तर भी एक अनुभवी से प्राप्त हुआ... जब पत्नी कहती है, कि मैं तो तुम्हें समझ ही नहीं पा रही हुं? तुम क्या चीज हो? तो समझो पहला जन्म चल रहा है...! और यदि वह कहे, मैं तुम्हारी रग रग से परिचित हूं, तो समझ लो यह सातवां जन्म है.... !!! 😀😀😀

Dada Bhagwan

Do you know that you do not have to forget, you just have to remain in the present? Forgetting is a burden. You cannot forget even if you want to, and besides, the more you try to forget something, the more you will remember it. Read more on: https://dbf.adalaj.org/seKgL9WE #liveinpresent #facts #trending #DadaBhagwan

SAYRI K I N G

प्रेम कहिए तो राधा कृष्ण इश्क़ मोहब्बत प्यार कहिए तो कलयुग के लोग जो अपनो के भी नहीं होते है

Thakor Pushpaben Sorabji

જય શ્રી કૃષ્ણ

SAYRI K I N G

ताउम्र जलते रहे धीमी आँच पर, इसलिए "इश्क़" और "चाय" दोनों मशहूर हुए ।

Parag gandhi

*जिन्दंगी को समझना बहुत मुशकिल हैं कोई सपनों की खातिर अपनों से दूर रहता हैं, और ...* *कोई अपनों के खातिर सपनों से दूर*....!!! *🙏नमस्कार 🍆🌹🙂☕*

SAYRI K I N G

सुना है कि तुम मुस्कुराने लगे हो हार की खुशी पहले मनाने लगे हो

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

दुख ही दुख है जगत में, सुख का यहाँ अभाव। सुख का फिर संसार में, क्यो रखता तू भाव ?। दोहा --४२६ (नैश के दोहे से उद्धृत) -----गणेश तिवारी 'नैश'

Ravinder Sharma

har har mahadev

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या-- "मान्तः स्थूर्नो अरातयः" — १०/५७/१ भावार्थ -- हमारे अन्दर कंजूसी न हो। पद विच्छेद -- मान्तः — भीतर, अन्तर में स्थूः/स्थुर्नः — स्थिर न रहें, ठहरें नहीं अरातयः — अराति = दान न करने की वृत्ति, कृपणता, शत्रुता, संकुचित भाव शब्दार्थ-- हे देव! हमारे अन्तःकरण में अराति (कंजूसी, दान न करने की वृत्ति, संकीर्णता) स्थिर न हो। अर्थात — मेरे भीतर कृपणता न रहे। वेदों से प्रमाण-- १. ऋगुवेद (क)--१०/११७/४ “केवलाघो भवति केवलादी।” भावार्थ — जो अकेला खाता है (साझा नहीं करता), वह पाप का भागी होता है। यहाँ कृपणता और स्वार्थ की निन्दा है। (ख) ५/६१/५ "अदातारं परित्यजैत" भावार्थ --जो दान न दे, उसका त्याग करो। वेद में दानी पुरुष की प्रशंसा है और कृपण की निन्दा की गई है। समाज में कंजूस का सम्मान नही। आपके मन्त्र “मान्तः स्थूर्नो अरातयः” (Rigveda १०.५७.१) — हमारे भीतर अराति (कृपणता/अदानशीलता) स्थिर न हो। इसके समर्थन में ऋग्वेद से ही दस श्लोक (मन्त्र) सहित प्रमाण हेतु प्रस्तुत हैं-- (१) ऋग्वेद १०.११७.१ न स सखा यो न ददाति सख्ये सचाभुवे सचमानाय पित्रे। अपास्मात् प्रेयान् न तदोक आस्ते पृणन्तमन्यमरणं चिदिच्छेत्॥ अर्थ: जो मित्र होकर भी मित्र को नहीं देता, वह सच्चा मित्र नहीं। ऐसे अदाता से दूर रहना चाहिए। (२) ऋग्वेद १०.११७.२ न वा उ देवा क्षुधमिद्वधं ददुः उताशितम् उप गच्छन्ति मृत्यवः। उतो रयिः पृणतो नोपदस्यति उतापृणन् मरदितारं न विन्दते॥ अर्थ: देवताओं ने भूख को मृत्यु नहीं बनाया; दानी का धन घटता नहीं, परन्तु अदाता को कोई सहायक नहीं मिलता। (३) ऋग्वेद १०.११७.४ केवलाघो भवति केवलादी केवलादी पाप एव भवति। न स मित्रं कृणुते केवलादी अश्नन्नन्यं स ददाति नृभ्यः॥ अर्थ: जो अकेला खाता है, वह पापी होता है; वह सच्चा मित्र नहीं। (४) ऋग्वेद १०.११७.५ अन्नं बहु कुर्वीत तद्व्रतम्। (भावानुसार उद्धरण) अर्थ: अन्न अधिक बनाओ और बाँटो — यही श्रेष्ठ व्रत है। (५) ऋग्वेद १.१२५.५ यो नो दाता स नः पिता। अर्थ: जो हमें देता है वही हमारा पिता समान है। दाता की सर्वोच्च प्रतिष्ठा। (६) ऋग्वेद ५.६१.५ अदातारं परि त्यजेत्। (भावानुसार) अर्थ: जो दान न दे, उसका संग त्याज्य है। (७) ऋग्वेद ८.१.५ महे च न त्वामद्विवः परा शुक्लाय देयाम्। अर्थ: श्रेष्ठ और योग्य को ही दान देना चाहिए। (८) ऋग्वेद १.८९.१ आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः। अर्थ: हमारे पास सब ओर से कल्याणकारी संकल्प आएँ। संकीर्णता नहीं, उदार-बुद्धि। (९) ऋग्वेद ६.२८.१ गावो भगा गाव इन्द्रा मघोनः। अर्थ: गौ (समृद्धि) सबके पोषण का साधन है। धन लोक-पोषण के लिए। (१०) ऋग्वेद ३.३२.१० (भावानुसार) इन्द्र संकीर्णता और शत्रुता का नाश करते हैं। निष्कर्ष-- ऋग्वेद बार-बार कहता है— (क) जो बाँटता है वही धर्मी है। (ख) जो अकेला भोग करता है, वह पापी है। (ग) दानी का धन घटता नहीं। (घ) उदारता ही वैदिक धर्म है। इस प्रकार “मान्तः स्थूर्नो अरातयः” — मेरे भीतर कृपणता न हो । इसका भाव स्वयं ऋग्वेद के ही अनेक मन्त्रों में स्पष्ट प्रतिध्वनित है। अन्य वेदों से प्रमाण-- यजुर्वैद-- ४०/२ (ईशावास्य उपनिषद् मन्त्र) “कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः” भावार्थ — कर्तव्यपूर्वक कर्म करते हुए जीना चाहिए। वेद का कर्ममार्ग यज्ञ और दान से जुड़ा है, न कि संचय से। ४. अथर्ववेद --३/२४/५ (भावार्थ) वेद प्रार्थना करता है — “हम दानी बनें, उदार बनें, और धन का सदुपयोग करें।” धन समाज के कल्याण के लिए है। निष्कर्ष-- वेदों का स्पष्ट संदेश है — १- धन का संग्रह केवल अपने लिए न हो। २- यज्ञ, दान, और साझेदारी ही श्रेष्ठ मार्ग है। ३- कृपणता (अराति) आन्तरिक शत्रु है। इस प्रकार “मान्तः स्थूर्नो अरातयः” का भाव पूरे वैदिक साहित्य में प्रतिध्वनित होता है।— उपनिषदों से प्रमाण-- १-ईश उपनिषद-- मन्त्र १ “ईशावास्यमिदं सर्वं… तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्।” अर्थ — त्यागपूर्वक भोग करो, किसी के धन में लोभ मत करो। यहाँ लोभ और संचय-वृत्ति का निषेध है; त्याग और उदारता का उपदेश। २- तैत्तिरीय उपनिषद् -- ‌ १/११ “श्रद्धया देयम्, अश्रद्धया अदेयम्… श्रीयै देयम्, ह्रियै देयम्।” अर्थ — श्रद्धा से दान करो, सम्मानपूर्वक दान करो। यहाँ स्पष्ट आदेश है कि दानशीलता ही श्रेष्ठ आचरण है। ३. छान्दोग्य उपनिषद--३/१७/४ “दानमेव तपः।” अर्थ — दान ही तप है। यहाँ दान को तपस्वी जीवन का अंग माना गया। ४. बृहदारण्यक उपनिषद् -५/२/३ “दत्त, दयध्वं, दम्यत।” (देवों के लिए ‘दम’, मनुष्यों के लिए ‘दान’, असुरों के लिए ‘दया’) ‘दत्त’ — दान करो; यह मानवधर्म बताया गया है। निष्कर्ष= उपनिषदों का संदेश स्पष्ट है — लोभ और कंजूसी आत्मिक प्रगति में बाधा हैं। त्याग, दान और उदारता ही ब्रह्मविद्या का आधार हैं। “मा गृधः” (लोभ मत करो) — यही “अराति” का निषेध है। अतः “मेरे भीतर कृपणता न हो” यह प्रार्थना उपनिषदों के सिद्धान्तों से पूर्णतः संगत है। गीता से प्रमाण= १. अध्याय ३, श्लोक १२ “इष्टान्भोगान्हि वो देवा दास्यन्ते यज्ञभाविताः। तैर्दत्तानप्रदायैभ्यो यो भुङ्क्ते स्तेन एव सः॥” अर्थ — जो मनुष्य देवताओं द्वारा दिए गए पदार्थों को उन्हें (अर्थात् यज्ञ/साझा भाव से) लौटाए बिना स्वयं भोगता है, वह चोर है। केवल अपने लिए उपभोग करना (कृपणता) (2) अध्याय ३, श्लोक १३ “यज्ञशिष्टाशिनः सन्तो मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषैः। भुञ्जते ते त्वघं पापा ये पचन्त्यात्मकारणात्॥” अर्थ — जो केवल अपने लिए पकाते और खाते हैं, वे पाप भोगते हैं। “केवलाघो भवति” की ही गीता में पुनरुक्ति है। ३. अध्याय १६, श्लोक १३–१५ असुरी प्रवृत्ति वाले कहते हैं — “इदमद्य मया लब्धम्… इदं अस्तीदमपि मे भविष्यति…” अर्थ — यह सब मेरा है, और भी मेरा होगा। यह संचय और लोभ की वृत्ति (अराति) का वर्णन है, जिसकी गीता निन्दा करती है। ४. अध्याय १७, श्लोक २० “दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे… तद्दानं सात्त्विकं स्मृतम्।” अर्थ — कर्तव्य समझकर, योग्य स्थान पर, बिना प्रत्युपकार की अपेक्षा से दिया गया दान सात्त्विक है। उदारता को सात्त्विक धर्म कहा गया है। ५. अध्याय १८, श्लोक ५ “यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्।” अर्थ — यज्ञ, दान और तप त्याज्य नहीं हैं; इन्हें करना ही चाहिए। दान जीवन का अनिवार्य कर्तव्य है। निष्कर्ष-- गीता का स्पष्ट सिद्धान्त है — (1) केवल अपने लिए जीना और संचय करना पाप है। (2) यज्ञभाव, दान और उदारता ही सात्त्विक मार्ग है। (३) लोभ और कृपणता असुरी वृत्ति है। अतः “मेरे भीतर कंजूसी न हो” — यह प्रार्थना गीता के सिद्धान्तों से पूर्णतः संगत है। महाभारत से प्रमाण -- १. अनुशासन पर्व (दानधर्म) “दानं धर्मस्य लक्षणम्।” अर्थ — दान धर्म का लक्षण है। जहाँ दान है, वहीं धर्म है; कृपणता अधर्म है। २. अनुशासन पर्व “अदत्तं नोपभुञ्जीत।” अर्थ — जो बाँटा न गया हो, उसे अकेले न भोगे। केवल अपने लिए संचय व भोग निन्दनीय है। ३. शान्ति पर्व “त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।” अर्थ — त्याग से ही अमृतत्व की प्राप्ति होती है। संचय नहीं, त्याग श्रेष्ठ है। ४. अनुशासन पर्व- “यज्ञदानतपःकर्म न त्याज्यं कार्यमेव तत्।” (यह सिद्धान्त महाभारत में भी प्रतिपादित है।) दान अनिवार्य कर्तव्य है। ५. अनुशासन पर्व (भीष्म-युधिष्ठिर संवाद) भीष्म कहते हैं — दान से धन शुद्ध होता है, कृपणता से पाप बढ़ता है। दानशील पुरुष लोक में यश और परलोक में सुख प्राप्त करता है। महाभारत का यह स्पष्ट संदेश है कि-- १-- दान धर्म का मुख्य अंग है। २-- कृपणता पाप और अधर्म है। ३-- त्याग और उदारता से ही कीर्ति और मोक्ष का मार्ग खुलता है। इस प्रकार ऋग्वेद का भाव — “मेरे भीतर कंजूसी न हो” — महाभारत से पूर्णतः समर्थित है। पुराणों में प्रमाण -- “मान्तः स्थूर्नो अरातयः” — मेरे भीतर कृपणता (अराति) न हो — इस भाव के समर्थन में पुराणों से श्लोक तथा अर्थ सहित प्रमाण प्रस्तुत हैं: १-भागवत महापुराण (क) १०.८४.३८ यावद् भ्रियेत जठरं तावत् स्वत्वं हि देहिनाम्। अधिकं योऽभिमन्येत स स्तेनो दण्डमर्हति॥ अर्थ: जितने से पेट भर जाए उतना ही मनुष्य का अधिकार है; जो उससे अधिक को अपना मानता है वह चोर है। संचय और लोभ की स्पष्ट निन्दा। (ख) ११.१९.३३ दानं तपश्च यज्ञश्च पावनानि मनीषिणाम्। अर्थ: दान, तप और यज्ञ ज्ञानी पुरुषों को पवित्र करने वाले हैं। दान को आत्मशुद्धि का साधन कहा गया। (२) विष्णु पुराण -- ३.१२ (दानप्रशंसा) धनं भोगो नाशस्तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य। यो न ददाति न भुङ्क्ते तस्य तृतीया गतिर्भवति॥ अर्थ: धन की तीन गतियाँ हैं — भोग, दान या नाश। जो न दान देता है, न भोग करता है, उसका धन नष्ट होता है। कृपणता व्यर्थ है। (३) पद्य पुराण -- (दानमाहात्म्य) अन्नदानं परं दानं विद्यानानमतः परम्। अन्नेन क्षणिका तृप्तिर्विद्यया अमृतं भवेत्॥ अर्थ: अन्नदान श्रेष्ठ है, और विद्या-दान उससे भी श्रेष्ठ; अन्न से क्षणिक तृप्ति, विद्या से अमृतत्व। दान को सर्वोच्च पुण्य बताया गया। (४) गरुड़ पुराण --(प्रेतकल्प) अदत्तदानो यो नित्यं कृपणो धर्मवर्जितः। स याति नरकं घोरं दुःखभोगाय मानवः॥ अर्थ: जो दान नहीं देता और कृपण है, वह घोर दुःख को प्राप्त होता है , कंजूसी का दुष्परिणाम। (५) स्कंद पुराण -- (दानखण्ड) दानं भोगो नाशो वा वित्तस्य त्रिविधा गतिः। दानं श्रेष्ठं ततो नाशः पश्चाद् भोगः प्रकीर्तितः॥ अर्थ: धन की तीन गतियाँ हैं — दान, भोग या नाश; इनमें दान श्रेष्ठ है। उदारता को सर्वोपरि बताया। निष्कर्ष-- पुराणों का एकमत संदेश है — (१) लोभ और संचय (अराति) आत्मिक पतन का कारण हैं। (२) दान, त्याग और परोपकार ही धर्म का सार हैं। (३) जो बाँटता है वही यश, पुण्य और शान्ति पाता है। इस प्रकार ऋग्वेद की प्रार्थना — “मेरे भीतर कंजूसी न हो” — पुराणों द्वारा पूर्णतः समर्थित है। (१) चाणक्य नीति- (क) “त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्। ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥” अर्थ — बड़े हित के लिए छोटे का त्याग करो। यहाँ त्याग और व्यापक हित की भावना है, न कि स्वार्थपूर्ण संचय। (ख) “धनं भोगो नाशस्तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य।” अर्थ — धन की तीन गतियाँ हैं — भोग, दान या नाश। यदि दान नहीं, तो अंततः नाश ही है। २. भर्तृहरि-- (क)“दानं भोगो नाशस्तिस्रो गतयो भवन्ति वित्तस्य। यो न ददाति न भुङ्क्ते तस्य तृतीया गतिर्भवति॥” (वैराग्य शतक) अर्थ — जो न दान देता है, न भोग करता है, उसके धन की तीसरी गति (नाश) होती है। कृपणता व्यर्थ है। (ख)“क्षीणं न वित्तं परितोषहेतोः…” (भावार्थ) सन्तोष और दान से ही जीवन सार्थक है। (ग)“संतोषामृततृप्तानां यत्सुखं शान्तचेतसाम्। कुतस्तद्धनलुब्धानां इतश्चेतश्च धावताम्॥” अर्थ — संतोषी और शांतचित्त मनुष्यों को जो सुख है, वह धन के लोभियों को कहाँ? लोभ (अराति) दुःख का कारण है। (घ)“न ददाति न भुङ्क्ते स जीवति न जीवति।” अर्थ — जो न दान देता है, न भोग करता है, उसका जीवन व्यर्थ है। कृपणता जीवन को निष्फल बना देती है। सार-- आर्ष नीतिग्रन्थों का स्पष्ट संदेश है (१) धन का संचय ही लक्ष्य नहीं; दान और लोकहित सर्वोपरि है। (२) लोभ और कृपणता दुःख तथा अपयश का कारण है। (३)त्याग, संतोष और उदारता ही श्रेष्ठ जीवनमार्ग हैं। इस प्रकार ऋग्वैदिक प्रार्थना — “मेरे भीतर कंजूसी न हो” — चाण्क्य, भर्तृहरि आदि सभी आर्ष ग्रन्थों में पूर्ण समर्थन पाती है। ------+--------+--------+-------+---

softrebel

आसमान भी नसीब नहीं इन अंधेरी रातों को ताकने के लिए, हम तो जगे हैं यूँ ही, बेसुध-से, पर इन आँखों को कौन बोला हमारे साथ जागने के लिए?! - softrebel

softrebel

आसमान भी नसीब नहीं इन अंधेरी रातों को ताकने के लिए, हम तो जगे हैं यूँ ही, बेसुध-से, पर इन आँखों को कौन बोला हमारे साथ जागने के लिए?! - softrebel

Chaitanya Joshi

ખાટીમીઠી પળો જીવનની બસ માણી લઈએ. ને એકમેકને રુચે એવી મધમીઠી વાણી કહીએ. નથી હોતું સમાંતર માનવજીવન કદી ક્યારેય, વળી વળાંક લેતા ટ્રેકમાં જીવનને ગોઠવી દઈએ. મતભેદને મનભેદ લગી ભૂલેચૂકે ના પહોંચાડીએ, જ્યાં હો ઘર્ષણ ત્યાં સ્નેહનું ઊંજણ પૂરાવીએ. હારીને જીતવુંને વળી જીતીને હારવાની જિંદગી, પહેલ કરી મેલી અહમ્ રૂઠેલાંને સત્વરે મનાવીએ. તો વરસવાના આશિષ ચોક્કસ વિનસના મનમૂકી, ઊભયના દામ્પત્યને સમજશક્તિથી વિકસાવીએ. સંપ, સ્નેહ, સહકાર, સત્ય, સામાધાન સીડી એની, પડકારીને નહિ કિન્તુ સ્વીકારીને જીવન દીપાવીએ. બની જાય જિંદગી મઘમઘતી પ્રેમપ્રાબલ્ય પરિબળે, લક્ષ્મીનારાયણ સમું વીતે જીવન એવું સૌ ઉચ્ચારીએ - ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.

Bhavna Bhatt

મહાદેવની પાલખી યાત્રા

ibusamee

love is everything everything is you - ibusamee

ibusamee

Always keep silent telling about a truth about a love and jelous because no one is encouraged any one

Jyoti Prajapati

मातृभारती वाले लेखकों से कमाई तो करते हैं लेकिन लेखकों को क्या देते हैं बदले में? उनकी मेहनत का थोड़ा फल तो उन्हें भी मिलना चाहिए।

AKHILABALARAJ

whenever I feel isolated.I imagine more and I think more. that didn't happened and that won't be done tooo.My imaginary world is different to this world.yep good night guysssss.

sonika bhawsar

khawaish kehti hai chalo sath rahe kismat kehti hai duriya achi hai irada kehta hai mar jaye chalo pyar me padh gaye

kashish

Mai bharat hu ... ha vhi jise sone ki chidiya kha jata tha ha vhi jispe kayi mhaveero ne janam liya jaise rani Lakshmi bayi ,dr bhimrao ambedkar ji, bhagat singh, rajgru or na jane kon kon mai ek dharmnipeksh vala desh hu jha sab ek hai kon hindu kon muslim lekin fir aaye kuch aise log jihno ne ye bol kar jagra kiya ki teri cast to choti alag hai to tu muslim hai tu hindu lekin khu ?? jha yumuna ko ma bola jiye usi mai kachra phekh kar nala bana diya jye khu ?? jha ladkiyo ko devi mana jye lekin vhi rep bana asan chahye vo choti bachchi ho ya ek dr. lekin khu?? jha ke log bukhmari se logo ki jye Zaan jye ilaz karne ke paise na ho vhi sharbh milna aasan kise ?? mai ye vala bharat nhi hu .

વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા

બાગ તો આ રહ્યો આખો ફૂલોનો, પણ ગમતું ફૂલ એમાં એક જ તું. - સ્પંદન

Saroj Prajapati

लगी हल्के सी ठोकर और तू घबर गया अभी तो है मीलों  लंबा सफर और तू हवा के एक झोंके से ही लड़खड़ा गया। बातों से भी क्या कभी हालात बदलते हैं अपनी धुन के पक्के ही किस्मत के लेख पलटते हैं। मत छोड़ना उम्मीद ,मत होना तू हताश जो नहीं मिला उसे सोच होता तू क्यों उदास! सब्र को बना साथी और खुद पर रख तू विश्वास जो होगा तेरा वह एक दिन खुद आएगा तेरे पास । एक राह बंद हुई तो क्या दस राहें नई खुलेंगी तेरी जिद के आगे हार भी एक दिन हार मानकर झुकेगी।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

InkImagination

Good night 🌃🌌

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/19kft9mz8k/

kajal jha

"जो चीज़ आपको तोड़ती है, वही आपको बनाती है। दर्द छुपा लेना आसान है, समझना मुश्किल। लेकिन वही समझ ही आपको सच में जीना सिखाती है। हर चोट, हर आघात, हर अधूरी ख्वाहिश आपकी रूह को मजबूत बनाती है। जो आपको गिरा सकती है, वही आपको ऊँचाई भी दिखाती है। इसलिए डरना मत, सहना मत छोड़ो— क्योंकि हर अँधेरा, एक नई रोशनी का पैग़ाम रखता है।" - kajal jha

Ashish jain

॥ भगवान बाहुबली स्तुति ॥ दोहा प्रथम तीर्थंकर आदिप्रभु, ऋषभदेव के लाल। त्याग मूर्ति बाहुबली, नमो-नमो हर काल॥ अडिग खड़े गोमटेश्वर, पर्वत शिखर विशाल। शांत सौम्य मुखमुद्रा, आशीष झुकाए भाल॥ स्तुति (लयबद्ध गायन हेतु) अचल खड़े तुम वन के भीतर, वर्ष बीत गए भारी, तन पर लिपटी बेलें अद्भुत, महिमा तुम्हारी न्यारी। पैर जमे हैं पृथ्वी के भीतर, मन है अम्बर पार, वंदन बारम्बार प्रभुवर, वंदन बारम्बार ॥ १ ॥ काम-क्रोध और मान-मोह को, क्षण में तुमने त्यागा, चक्रवर्ती का सुख तज करके, संयम पथ पर जागा। भरत चक्र के द्वंद्व को जीता, फिर भी मन वैराग्य, धन्य हुआ वह स्वर्ण-कलश, और धन्य हुआ सौभाग्य ॥ २ ॥ सर्प लपेटे देह खड़ी है, पक्षी नीड़ बनाते, मौन तपस्या देख तुम्हारी, देव सुमन बरसाते। ना हिलते ना डुलते स्वामी, योग-अग्नि उजियारी, बाहुबली तुम संकट-भंजन, मंगल-रूप अविकारी ॥ ३ ॥ केवलज्ञान की ज्योति जली जब, मिटा तिमिर का साया, सिद्ध-शिला पर जा विराजे, छोड़ मोह की माया। हम भी आए शरण तुम्हारी, दे दो विमल स्वभाव,आशीष मांगे मुक्ति पद, कर दो प्रभु निस्तार ॥ ४ ॥ दोहा विंध्यगिरि की गोद में, खड्गासन भगवान। बाहुबली के चरणों में, आशीष करे प्रणाम॥

Archana Singh

" काश ... ! इन आंसुओं की तरह याद आने वाले भी आ जाते "...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

ek archana arpan tane

હિંમત કયારેય હારવી ન જોઈએ સુરજ ભલે ધગધગતો તપે પણ સમંદર ને સુકવી શકતો જ નથી. - ek archana arpan tane

Dewy Rose

NFAK🙌

Imaran

जिक्र करता है ये दिल सुबह शाम तेरा, बहते हैं आँसू और बनता है नाम तेरा, किसी और को क्यों देखे ये आँखे मेरी, जब दिल पर लिखा है मेरे नाम तेरा. 🫶imran 🫶

Arun Mishra

प्रिय मित्र अच्छा यह बताए अगर किसी भी रिश्ते में अगर 4 साल हो गए हो , ओर लड़की शादी के लिए अपने घर वालों को नहीं बता पा रही हो तो क्या उस रिश्ते से उम्मीद रखनी चाहिए या खत्म कर देना चाहिए , लड़के को आगे दूसरी जगह कर लेना चाहिए या इंतजार करना चाहिए 🙏🙏🙏🙏

Shraddha Panchal

कौन जाने किसके अंदर क्या है? इंसान एक गहरे समंदर सा है किनारे पर तो बस लहरो का शोर है पर भीतर गहराई का इंसान कोई और है 🌋

उषा जरवाल

क्रोध को कभी क्रोध समाप्त नहीं कर पाया । शक्ति को भी शिव ने सदैव झुककर मनाया । उषा जरवाल ‘एक उन्मुक्त पंछी’

Aachaarya Deepak Sikka

Reciting Hanumanji’s 12 names brings an end to all sorrows and problems. Let’s explore the 12 names of Hanumanji. Why observe a Tuesday fast and the method of worship. How to get relief from Shani Sade Sati and Dhaiya. Rules and precautions to keep in mind while reciting on a rosary. How to recite Hanumanji’s 12 names. Why is a flag offered to Hanumanji. How to recite Bajrang Baan. Hanuman Pingaksha Anjanisut Amitvikrama Vayuputra Uddhikraman Mahabala Rameshta Sitashokavinashana Dashagrivadarpana Phalgunsakha Lakshmanapranadata *How to recite the names?* Recite these 12 names of Hanumanji in the morning, evening, and before sleeping at night. As soon as you wake up in the morning, sitting on your bed, recite these names 11 times without stopping. Benefits of recitation: A person who regularly recites Hanumanji’s names attains their desired goals. Reciting these 12 names 11 times after waking up gives the person longevity. Reciting Hanumanji’s name in the afternoon brings wealth. Reciting in the evening brings family happiness. Reciting at night brings victory over enemies. *Rules and precautions while reciting on a rosary:* 1. Ensure that the rosary has at least 27 and a maximum of 108 beads, with a knot between each bead. 2. The rosary should be covered with a cloth while reciting the mantra. 3. Before starting the mantra recitation, offer a prayer for its success. 4. Do not wear the rosary used for mantra recitation. 5. After the recitation, store the rosary in a temple. 6. Always use your own rosary and do not share it with others. *Benefits of Bajrang Baan recitation:* Reciting Bajrang Baan protects from enemies' conspiracies. Recite with a pure heart for 21 days, sitting in one place, and resolve to follow the path of truth as Hanumanji only supports the virtuous. When to start the Tuesday fast? You can begin the fast on the first Tuesday of any Shukla Paksha (waxing phase of the moon). Along with starting the fast, resolve to observe it for 21 or 45 Tuesdays. Method of worship during the Tuesday fast: After completing your morning duties, set up an idol or picture of Hanumanji in the northeast corner of your home. Offer red flowers, a garland, and sindoor to Hanumanji. Then offer a sweet like boondi laddoo or a mixture of chickpeas and jaggery. Light incense and a ghee lamp, and recite the Sundarkand or Hanuman Chalisa. After the recitation, perform the aarti and ask for forgiveness for any mistakes. Break the fast after sunset with a meal. *Methods to please Hanumanji:* Offering sindoor and jasmine oil to Hanumanji is beneficial. Offering a red flag at a Hanuman temple on Tuesday brings prosperity and success in legal matters. Offering Tulsi garlands to Hanumanji ensures continued prosperity. Reciting Ram’s name brings great joy to Hanumanji. Shani’s Sade Sati and Dhaiya: Shani stays in each zodiac sign for about 2.5 years, affecting that sign, the one before, and the one after, known as Sade Sati. Shani's slow movement brings challenges like illness, fear, loss, and other difficulties. To mitigate the effects of Shani’s Sade Sati and Dhaiya, perform japa (recitation), havan (fire ritual), and charity. Reciting Shani mantra or Hanuman Chalisa, wearing a ring made of iron from a horse’s nail, and offering water and lighting a lamp at the base of a Peepal tree on Saturdays can bring relief. Apka Apna Aachaarya Deepak Sikka Founder of Graha Chaal Consultancy

Paagla

https://youtube.com/shorts/mGsmI_Pqrb0?si=ADeZOJZu4FTOIqg7

Paagla

https://youtube.com/shorts/Ok3cf-whqfs?si=5bmNPUc5SYm-8mqk

Ruchi Dixit

जिसे धीरे - धीरे पता चल रहा हो वह क्या है वह दूसरों के मूल्यांकन का मोहताज नही होता ।- Ruchi Dixit

Soni shakya

दिल में जो दफन है, उसका शोर मत पूछो ..! हम खामोश है--इसका मतलब ये नहीं कि खाली है..!! - Soni shakya

Nirali patel

हम वो हैं जो क़िस्मत के चाँटों के शोर पे नाचते हैं जितनी ज़ोर का चाँटा, हम उतनी ज़ोर से नाचते हैं... -Nirali

prit tembhe

🗒️✍️❣️

prit tembhe

रॉंह.... राह पर चलते चलते कुछ अजनबी हसीन मिल गए...... ठोकर खाकर भी आगे थे ऐसे भी कुछ नकाब मिल गए.... सोचा,की खैर अब आया ही हूँ तो आगे निकल जाऊ..... तरह तरह के लोग होते है दुनिया में.. उनसे थोड़ा अब मुकर ही जाऊ.... सवाल उठा था मन में, मैं तो आगे जाने वाल था.....? तभी कोई फंदा गले में आके फंसा.. वरना जवाब को छूकर बस लौटने ही वाल था..... कुदरत ने भी क्या खेल रचा, जैसे मौत के कुएं से लौट बचा.... मंजिल की तलाश में थे हम, रास्ता तो हमारे लिए अपने आप सजा......!

Miss Chhoti

#રમકડું અને લાગણી આજના સમયમાં માણસના સંબંધો પણ 'ટેડી બિયર' જેવા થઈ ગયા છે. જ્યારે કોઈ એકલું હોય, મન ભરાઈ આવ્યું હોય ત્યારે એ આપણને ગળે લગાવે છે. એ સમયે આપણે એમના માટે દુનિયાની સૌથી વહાલી વ્યક્તિ હોઈએ છીએ. પણ જેવું એમનું મન ભરાઈ જાય અથવા જિંદગીમાં કોઈ નવું આકર્ષણ આવે, એટલે એ જ ગળે લગાવનાર હાથ આપણને એક ખૂણામાં ધકેલી દે છે. આ લેખનો સાર એટલો જ છે: બીજા માટે નરમ અને પ્રેમાળ જરૂર બનો, પણ એટલા 'સોફ્ટ' ન બનો કે લોકો તમને પોતાની મરજી મુજબ વાપરીને મૂકી દે. યાદ રાખો, તમે કોઈના મન બહેલાવવાનું સાધન નથી, પણ એક જીવતું-જાગતું વ્યક્તિત્વ છો. https://www.matrubharti.com _Miss chhoti ✍️

MASHAALLHA KHAN

तू आया तो मुझको सूकं है मिला दिल की धड़कन बड़ी और दिल को जनूं है मिला, तेरी रहमत के हम हमेशा कर्जदार है हमे आज भी तुमसे उतना ही प्यार है, कोई वजाह ही होगी जो जुदा थे हम वरना हम आज भी वफादार है, और बस तुझसे मोहब्बत थी और कभी ना था गिला बस तुझको बताने का वक्त ही ना मिला .

Priya kashyap

हमसे नफरत भी जरा ध्यान से करना जरा सी चूक हुई तो मोहब्बत हो जायेगी...

yeash shah

નવ ગ્રહોના ગુણો અને સુખી જીવનના ઉપાયો * સૂર્ય - સ્વાસ્થ્ય: (યોગ અને કસરત) * ચંદ્ર - શાંતિ અને પ્રસન્નતા: (ધ્યાન અને પ્રાણાયામ) * મંગળ - સાહસ: (રમતગમત) * બુધ - વાકચાતુર્ય: (સંવાદમાં નિખાર/વાતચીતની કળા) * ગુરુ - જ્ઞાન: (પુસ્તકો અને કોર્સ) * શુક્ર - પ્રેમ અને આકર્ષણ: (સારી રીતે તૈયાર થવું/સુવ્યવસ્થિત રહેવું) * શનિ - ધૈર્ય અને સંતોષ: (જે કાર્યો આંતરિક ખુશી અને શાંતિ આપે તેવા કર્મો કરવા) * રાહુ/કેતુ - ભય અને વ્યસન મુક્તિ / પીડા મુક્તિ અને સહજતા: (પ્રસન્નતા અને ખુશી આપનારા વ્યક્તિઓ તથા વિચારોની સંગત કરવી) > જે વ્યક્તિ નિત્ય આ નવ ગ્રહોના નવ ગુણોને નિખારે છે, તે હંમેશા સુખી રહે છે.

Kamini Shah

એક વાત કહું તને મા તું મને બહુ ગમે… -કામિની

Simple__girls__9894

🌸🎀🦩💕🌷 नज़र को नज़र से नज़र ना लगे, कोई अच्छा भी इस कदर ना लगे तुझे देखा है इस नज़र से, जिस नज़र से तुझे मेरी नज़र ना लगे𓏧🤍᪲᪲᪲ᥫ᭡⃝🧚🏻‍♀️ 🩰˚˖𓍢 🦢✧˚.🎀

shree

ase to muje gehno ka boj lagta hai, pr tumhare payar me me sajna chahti hu... tham kar hath tumhara tumhare nam ki chudiya pehna chahti hu.. shokh nahi hai sringar ka muje pr tumhare payr me me 16 sringar chahti hu lagakar sindur tumhare nam ka me tumhare rang rangna chahti hu ase to boj lagte hai gehne muje pr tumhare pyar me me sajna chahti hu... ♥️

Hetu P

"લોકો કહે છે મીરાં પાગલ છે, પણ એને ક્યાં ભાન છે, એના ઝેરના પ્યાલામાં પણ છુપાયેલો એનો કાન છે. નથી જોઈતું રાજપાટ કે નથી જોઈતી કોઈ માયા, મીરાં તો બસ શ્યામની મૂર્તિમાં ખોવાયેલી એક કાયા છે."

Shailesh Joshi

આપણું ઘર હોય, કે પછી આપણું મન, બહારની દુનિયાની ઝાકમઝોળ કરતા, આપણા ઘરની, અને આપણા મનની શાંતિ, એ આપણી સૌથી પહેલી અને સૌથી મોટી જવાબદારી છે. - Shailesh Joshi

Narendra Parmar

✔️💯

Imaran

सच्चा प्यार वही है जो… आँखों से काजल बहने न दे…. और होठो पर लिपस्टिक रहने न दे….. कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है, कोई कहता है प्यार सज़ा बन जाता है, पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से, तो प्यार जीने की वजह बन जाता है 💞imran 💞

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/1AfcbHrnvF/

SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

मूर्ख और शंख दूसरों के फूंक मारने से ही बजते हैं - SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》

Manjibhai Bavaliya મનરવ

ગીત મંજરી,પ્રેમ ની યાદ લય મેળ કાવ્ય ગીત રચના વહે વેળા ને એમ વહી વાશુ, ફરતા રહે જોબનને જરી જાશું. યૌવન ભરી જેહ મલકે છે સોણલાં. નભ ઘેરાય મેઘ ને ટહુકે છે મોરલા. મળે જો મેળ તો મન મોહી જાશું... ભરાયે ઉમંગ ને યાદો ના ઓણલા. રુપ ઘેલા રંગ માં હેત ના હોરલા. પરમ ની પ્રિત ને પાંગરી ગાશું...... હળતા હૈયા માં ગમ્મત ગુલાલ ના. ઉઘડે સવાર અને મોતી ધુમ્મસના. શીતળતા ની સુવાસે પ્રસરી પાશુ..... ઘરી ધીર એ નરમાઈ નીરવની. પુરણ પ્રિત પાંગરે છે પ્રણયની. અંજવાળી રાત ને રંગ ભરી જાશું. મનરવ ના મેળ મુલ મલકના. તનરવ ના તંગ તંગ ચલકના. ખગ કલરવ નાદે ખંખોળી ખાવું....‌ મનજીભાઈ કાળુભાઇ મનરવ

Thakor Pushpaben Sorabji

ગામડાની સવાર ગામડું તો ગામડું જ છે...... વાત જ એની કંઈક નોખી છે!............ સવારની સોહામણી સળવળ છે  મંદિરની ઝાલરને પંખીના સાદ છે!........ ખેતરે ઝાકળ કેરી રૂપેરી ચાદર છે"પુષ્પ" તેમાં સૂરજના કિરણોના રૂડા તે નૂર છે!..... દોહવાતા દૂધણા‌ના મીઠા એ સૂર છે  ભાંભરતા વાછડાના કેવા મીઠેરા નાદ છે!.... ઝાડવે કેવા પેલા પંખીઓના ગાન છે જુદા એ સૂરોમાં અનોખો આનંદ છે!......... ખળ ખળ વહેતાં પાણીડાની ધાર છે  ઊડતી વરાળનો નજારો નયનરમ્ય છે!....... ખેતરેને વગડે શબનમ કેરી ઓઢી ચાદર છે  તુષારની એ બૂંદોમાં રવિના તેજનો પ્રકાશ છે!... ખીલતી ઉષાની શોભા પળ બે પળની છે  માણો પ્રકૃતિ તો ધરતી પર જ સ્વર્ગ છે!....... જય શ્રી કૃષ્ણ:પુષ્પા.એસ.ઠાકોર

Dada Bhagwan

हम बचपन से ही स्वर्ग और नर्क के बारे में सुनते आए हैं। लेकिन हम नहीं जानते कि हमें स्वर्ग या नर्क कैसे मिलता है और वास्तव में स्वर्ग और नर्क कहाँ हैं। आइए, इन गूढ़ प्रश्नों के उत्तर पूज्यश्री दीपकभाई से विस्तार से जानते हैं। https://youtu.be/i3TIHbAOoic #Spirituality #video #trending #DadaBhagwanFoundation

Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status