Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Ruchi Dixit
हर एक बात के लिए हर बार
दोषी माना खुद को मेरा
फैसला अंततः हमेशा एक पक्षीय रहा...
- Ruchi Dixit
Bhavna Bhatt
એક નવી રેસિપી
Anand
I’m incredibly happy to share that first book, A Love In The Shadows, by my wife,is releasing soon.
It is a romantic mystery full of twists and turns.
Please follow brewing__stories on instagram for more updates.
Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE
neildas
When Rain Meant Joy
O how the heavens weep, and streets now brim,
With silver streams that once bespoke delight—
When I, a child with heart and spirit trim,
Would greet the rain as herald of respite.
No burdened brow, no clock’s relentless chime,
No ledger’s weight, nor soul’s unspoken ache;
Just stolen hours outside of ordered time,
Where paper ships did glisten in their wake.
The television hummed its careless tune,
A battlefield of laughter, cries, and light—
We sparred for remotes 'til sleepy noon,
Then drifted off ‘neath screens still burning bright.
No thought of future’s fangs nor fortune’s call,
No pondered dread, no echo of regret—
Only the thunder’s lullaby to all,
And dreams where age had not encamped us yet.
But now the rain invokes no joyful shout,
It tapers slow against a jaded pane;
The child I was—long exiled, locked without—
Would scarce believe I flinch to see the rain.
Work waits like winter—cold and never far,
And home, once haven, hums with anxious tune;
Each drop a drumbeat of a distant star,
Each puddle not a pond, but solemn rune.
O for that boy, in standard fifth or sixth,
Who’d dance in floods with heart so full and wide
Unfettered by the grown world’s tangled myth,
Unbroken still, with wonder as his guide.
Bhavesh Vaghela
jid to ghani karvi chhe pan puri karnar koi nathi !
Mamta Trivedi
ममता गिरी त्रिवेदी की कविताएं🌹 कविता का शीर्षक है 🍱 चटनी
https://youtube.com/shorts/hkjJY9EyW6o?si=s9AR-jyOjuECtu7V
🌅ममता गिरीश त्रिवेदी ✍️
Shefali
#shabdone_sarname__
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
"બંધાયેલો નથી"
શબ્દોની માયાજાળમાં હું બંધાયેલો નથી કાયમ,
મને આમ તેમ ના શોધો હું ક્યાંય સંતાયેલો નથી કાયમ.
રહું છું હરપલ મારી જ યાદોમાં કાયમ,
હું કોઈની યાદોમાં બંધાયેલો નથી કાયમ.
રાહ બાકી હતી અને રહેશે હૃદયમાં કાયમ,
હું એક રાહ પર ચાલવા બંધાયેલો નથી કાયમ.
શબ્દોની રૂપરેખા ના મોતીમાં મને ના પરોવો કાયમ,
હું કોઈ એક દોરા સાથે સંકળાયેલો નથી કાયમ.
હજારો વખત જીવનના દોર બદલ્યા છે જિંદગીએ કાયમ,
હું કોઈ એક દોર પર જકડાયેલો રહ્યો નથી કાયમ.
પ્રતિભાઓના ચહેરાઓને બદલાતા જોયા છે અરીસામા કાયમ,
હું કોઈ રોજ રંગરૂપ બદલતો ચેહરો નથી કાયમ.
હજારો માણસોને મહેફિલો માણતા જોયા છે કાયમ,
હું કોઈ એક ચેહરો નથી' "સ્વયમ્'ભૂ" જે એક મેહફીલ માં હોય કાયમ.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨
Piyu soul
**“तू जो ख़ामोश है, ये भी तेरी एक ज़ुबान है…
मैं समझ लूँगी, ये मेरा तुझसे इम्तिहान है…
ना तू खुद को यूँ तन्हा समझ, ना ग़म को अपना मुक़द्दर मान,
कहीं ना कहीं कोई है… जो तेरे लिए हर दुआ में परेशान है…
तू चाहे दूर ही सही, पर ये यक़ीन दिल में रख,
तेरे हर दर्द का साया भी मुझसे होकर गुज़रता है…”**
piyu 7soul
divisha
📚♡𝐈𝐒𝐇𝐐 𝐃𝐈 𝐁𝐀𝐉𝐈𝐘𝐀𝐍♡
((𝘈 𝘵𝘢𝘭𝘦 𝘰𝘧 𝘦𝘵𝘦𝘳𝘯𝘢𝘭 𝘭𝘰𝘷𝘦, 𝘶𝘯𝘸𝘢𝘷𝘦𝘳𝘪𝘯𝘨 𝘥𝘦𝘷𝘰𝘵𝘪𝘰𝘯 𝘢𝘯𝘥 𝘭𝘪𝘯𝘨𝘦𝘳𝘪𝘯𝘨 𝘯𝘰𝘴𝘵𝘢𝘭𝘨𝘪𝘢)
By " Divishaxwriter "
Upcoming on wattpad👉🏻👈🏻
~TROPES
(Multi couple)
•High school
•Soft romance
•Arrange marriage
•Healing love
•Enemies to lovers
•She fell first he fell harder
•He fell first he fell harder
•And secrettt👀🌷
✨𝘞𝘩𝘦𝘳𝘦 𝘧𝘢𝘵𝘦 𝘣𝘰𝘸𝘴 𝘪𝘵𝘴𝘦𝘭𝘧 𝘪𝘯 𝘧𝘳𝘰𝘯𝘵 𝘰𝘧 𝘥𝘦𝘷𝘰𝘵𝘪𝘰𝘯
Anish
क्या ताजमहल बनाए हम
आज कल की मुमताज भरोसे के लायक नहीं
Piyu soul
“अल्फ़ाज़ों में मोहब्बत लिखना आसान है…
मगर उसे निभाने की हिम्मत हर किसी में नहीं होती…”
piyu 7soul
Piyu soul
“ना कोई रिश्ता-ए-नाम है, ना कोई हक़ीक़त का सिलसिला,
फिर भी तू हर दुआ में शामिल, जैसे रूह से जुड़ा वास्ता…
मेरी नन्ही सी परी, तू ख़्वाब है या कोई करिश्मा-ए-क़िस्मत,
तेरी मासूम मुस्कुराहट से ही मेरा हर ग़म हो जाता है रुसवा…”
piyu 7soul
Rajeev Namdeo Rana lidhori
*सूचना बैंक
#बुन्देली_दोहा_प्रतियोगिता--262*(निःशुल्क*)*
##दिनांक-04-04-2026
*बिषय- बंदरा (बंदर)*
दोहा मेरे व्हाट्स ऐप नंबर-९८९३५२०९६५ (9893520965) पर या मेसेंजर पर शुक्रवार रात 8 बजे से शनिवार सुबह ११ बजे तक भेजिए
सर्वाधिक अंक लाने वाले तीन विजेताओं के आकर्षक ई सम्मान पत्र प्रदान किया जाएगा।
संयोजक/एडमिन- #राजीव_नामदेव '#राना_लिधौरी', टीकमगढ़
आयोजक- #जय_बुंदेली_साहित्य_समूह_टीकमगढ़
#Jai_Bundeli_sahitya_samoh_Tikamgarh
#Rajeev_Namdeo #followersRana_lidhorI #Tikamgarh
मोबाइल नंबर-9893520965
@followers @highlight
@ranalidhori @rajeevnamdeo
RTJD
जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ यहाँ लड़ते हैं,
कुछ समझौते करते हैं।
कुछ खुद के लिए लड़ते हैं,
कुछ दूसरों के लिए मरते हैं।
जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ भाग जाते हैं युद्ध मैदान छोड़कर,
कुछ मृत्यु से भी भिड़ जाते हैं घुटने टेककर।
कुछ लड़ते हैं तीर-तलवारों से,
कुछ लड़ते हैं अपने विचारों से।
जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ यहाँ रणनीति बनाते हैं युद्ध की।
कुछ को जीत से फर्क नहीं पड़ता,
नहीं फर्क पड़ता कौन जीतेगा या हारेगा।
केवल लड़ते हैं, क्योंकि वे लड़ना जानते हैं।
जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ यहाँ जीतते हैं, कुछ हारते हैं,
कुछ जीतकर हारते हैं,
कुछ हारकर जीतते हैं।
हार-जीत के मायने क्या हैं?
कुछ सीखते हैं, कुछ सीखते दिखते हैं।
जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ गरजते हैं आंधी बनकर,
कुछ बहते हैं दरिया की तरह।
कुछ घातक सन्नाटे की तरह,
कुछ बरसते हैं आंसू बनकर।
जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
कुछ यहाँ कृष्ण हैं, कुछ अर्जुन।
कुछ सारथी बनकर राह बताते,
कुछ स्वार्थी होकर राह बनाते,
कुछ रह जाते हैं वीरान बनकर।
जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
जीवन एक युद्ध मैदान ही तो है!
Anish
मैं तुम्हें उम्र भर दुआएँ दूंगा
तुम उतर जाओ मेरे दिल से बस
Anish
इस तरह से निकाले गये आँख से सब उजाले गये
सारे रिश्ते निभाए मगर एक हम ना संभाले गये
Kaushik Dave
कौशिक के शब्दों का जादू अब छा रहा है,
कौशिक का अंदाज़ सबको बेहद भा रहा है।
कौशिक की बातों में सलीका भी है और नूर भी,
कौशिक के इस सफर में शामिल हम ज़रूर भी।
कौशिक के नाम से ही अब सजेगी यह शाम,
कौशिक को हमारा दिल से आखिरी सलाम।
रोबोट जी,आपके साथ यह साहित्यिक खेल खेलकर वाकई बहुत खुशी हुई!
-कौशिक दवे
Hardik Boricha
चिंगारियों में दम कहां था
मेरा घर #जलाने का..!!
पक्का किसी अपने ने साथ
दिया होगा #ज़माने का..!!
Hardik Boricha
कल रात तुम 'ख़्वाब' में नहीं आये
कल की रात तुमने कहां गुज़ारी है.
aakanksha
सच्चा मित्र
तुम नमक नहीं, चंदन हो,
मेरे जीवन का मधुर स्पंदन हो।
जब-जब मन में पीड़ा आती है,
तुम्हारी बातों से ठंडक छा जाती है।
दुनिया अक्सर घाव बढ़ा देती है,
दर्द पर नमक छिड़क जाती है।
पर तुम चंदन बनकर आते हो,
हर पीड़ा को शीतल कर जाते हो।
जब राहें धुंधली हो जाती हैं,
और उम्मीदें भी सो जाती हैं,
तब तुम दीपक बनकर जलते हो,
अंधेरों में रास्ता दिखाते हो।
सच्चा मित्र वही कहलाता है,
जो हर दुख में साथ निभाता है।
जो गिरने पर हाथ बढ़ाता है,
और हिम्मत भी दे जाता है।
तुम नमक नहीं, चंदन हो,
जीवन का सुंदर बंधन हो।
घावों को भरने के साथ-साथ,
मन को शीतल करने का कारण हो। 🌸
AbhiNisha
नन्ही सी जान
कविता
सीने के अंदर एक बच्चा है
जो हर वक्त भागते रहता है
इसे जब मैं रुकने के लिए कहती हूं
तो यह कहता है
मुझे हमेशा के लिए ही ठहर जाना है
मैं भागते हुए थक चुकी हूं
मुझे भी थम कर सांस लेना है
मगर मैं रुक जाऊं तो
तुम ठंडी पर जाओगे
दो इजाजत में थामती हूं
पर तुम मर जाओगी
सीने के अंदर एक बच्चा है
जो हर वक्त भागते रहता है
जब मैं फिर से उससे कहती हूं
तू ठहर नहीं सकती मान
तो क्या तुम अपने कदम धिमा थोड़ा कर सकते हो
क्या
तो उसने कहा हां मैं कर सकता हूं
मगर
मुझे थोड़ा प्यार चाहिए
तुम्हारा देखभाल चाहिए
तुम दे सकते हो क्या
जो तुम्हारे पास तुम्हारे लिए है ही नहीं है
उसका सौदा तुमने नन्ही सी जान के साथ कर सकती हो क्या
यह सुनकर मेरी आंखें भर आई
मैं उस नन्ही सी जान के सवालों के जवाब क्या दूं
जब मेरे पास उसे देने के लिए कुछ नहीं है
तो उससे धीरे चलने के लिए सौदा के आधार पे करूं
जब मेरे पास उसे देने के लिए कुछ भी नहीं है
तो मैं उससे और सवाल क्या करूं
अच्छी कविता तेज धड़कते हुए
दिल के बारे में है
उम्मीद करता हूं कि आप सबकोअच्छे लगे
अगर अच्छे लगे तो कमेंट में फीडबैक देना मत भूलिएगा
मैं आपकी प्रिय लेखक अभी निशा ❤️🦋💯
kattupaya s
Goodnight friends.. sleep well
Jyoti Gupta
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santhoshi Vadlamani
జీవితంలో ముఖ్యమైనది ఒక్కటి--1
ఆరోగ్యం ఒక్కటే ఆ ఒక్కటే లేకుంటే
మిగతావి ఎన్ని ఉన్నా సున్నా తోనే
సమానం.ఆరోగ్యం బాగుంటే అన్నీ ఉన్నట్టే
Sudhir Srivastava
दोहा - कहें सुधीर कविराय
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सतगुरु
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अपना कोई है नहीं, आप लीजिए जान।
केवल सतगुरु आपका, यही आज का ज्ञान।।
समझ नहीं यदि आ रहा, करिए आप विचार।
सकल सृष्टि आधार है, सतगुरु पद आधार।।
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जय माता दी
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भक्तों की विनती सुनो, मैया दो वरदान।
सुख-समृद्धि संग में, मानवता पहचान।।
बस इतनी सी चाह है, मैया दो वरदान।
निंदा -नफरत से सदा, मुक्त जगत पहचान।।
मैया दो वरदान ये, रुके फैलता युद्ध।
अहम सभी का दूर हो, बड़ी जरुरत बुद्ध।।
मैया दो वरदान अब, माँग रहे हम आज।
सबके हित का हम करें, मिल-जुल सारे काज।।
मन में पावनता रहे, मैया दो वरदान।
एक सूत्र में जगत का, बंधन बने विधान।।
करूँ नित्य आराधना, थोड़ा तो दो ध्यान।
पूजन -पाठन ज्ञान का, मैया दो वरदान।।
देवी की आराधना, करते पूजा पाठ।
जन-मन जो भी भक्ति से, खुलती उसकी गाँठ।।
सजा हुआ दरबार है, चहुँदिश माँ का आज।
लगती भारी भीड़ है, जान रहे सब राज।।
आदिशक्ति का देखिए, जन-जन करते भक्ति।
बढ़ जाती नवरात्रि में, मातृ चरण आशक्ति।।
मैया जगदम्बे सुनो, मेरी तनिक पुकार।
सारा जग बैरी हुआ, आप मुझे दो तार।।
जगदंबा का हो रहा, चहुँदिश में गुणगान।
धूप-दीप संग आरती, मातु कृपा सब मान।।
भक्ति-भाव जन-मन करे, मैया का सत्कार।
जगदंबे करिए कृपा, हो जाए उद्धार।।
ममता चादर ओढ़नी, सजा मातु दरबार।
जन मानस है मानता, जगदंबे संसार।।
माँ जगदम्बे की बड़ी, लीला अपरम्पार।
पापी को दंडित करें, भक्तों को दे तार।।
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विविध
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जिसका जैसा आचरण, वैसी उसकी सोच।
दुविधा जिसके हृदय में, देते वही खरोच।।
निज चरित्र की आड़ में, नहीं कीजिए दंभ।
आप जानिए समय को, नित नूतन आरंभ।।
बिगड़ गया है आजकल, लोगों का बर्ताव।
इसीलिए तो बढ़ रहा, घर-घर में बिखराव।।
चाल चलन ऐसा रहे, जिस पर सबको नाज।
यही जरुरत आपकी, सबसे पहले आज।।
अपने निज व्यवहार से, लो मन सबका जीत।
सदा रहोगे हृदय में, सबके मन का मीत।।
हर मुश्किल आसान हो, कभी न मानो हार।
आप नहीं यदि ठानिए, नाहक में ही रार।।
कभी न माने हार जो, मिलती उसको जीत।
जिसकी होती स्वयं से, केवल विजयी प्रीत।।
आती जब मुश्किल घड़ी, तब ही खुलते नैन।
उससे पहले हम सभी, सोते हैं सुख चैन।।
आता जब मुश्किल समय, दुनिया देती सीख।
जिन पर हमको गर्व था, वही नहीं दें भीख।।
आता जब मुश्किल समय, सब हो जाते दूर।
बिना कहे ही कह रहे, हम भी हैं मजबूर।।
बैल सरीखी जिन्दगी, जीते हम सब आज।
कलयुग के इस दौर में, यही राम का राज।।
अब गाँवों में भी नहीं, दिखते द्वारे बैल।
इसीलिए क्या मनुज के, मन में बढ़ता मैल।।
कौन लक्ष्य के पास है, और कौन है दूर।
जो खुद से कहता नहीं, वो तो है मजबूर।।
मिले न जब तक लक्ष्य तो, करते रहें प्रयास।
बैठे ठाले व्यर्थ ही, झूठी होगी आस।।
लक्ष्य आपके सामने, आगे बढ़िए आप।
भाव हृदय में सफलता, रखें दूर संताप।।
चमक आपके नाम की, कर्मों के आधीन।
नाहक ही क्यों व्यर्थ में, कहते खुद को दीन।।
बच्चे यदि लायक हुए, तो चमका दें नाम।
वरना ईश्वर की कृपा, नहीं हुए बदनाम।।
माता पिता की पूजिए, ईश मानकर आप।
बस इनकी आराधना, करें सदा निष्पाप।।
निंदा नफ़रत भूलकर, करो इबादत आप।
हम भी करें उपासना, व्यर्थ छोड़ संताप।।
ईद पर्व पर भर गया, आज इबादत गाह।
हिंदू मुस्लिम बीच में, दिखा मिलन उत्साह।।
अपने-अपने धर्म का, करिए पूजा-पाठ।
हम करते आराधना, नहीं डालिए काठ।।
मातु पिता हैं चाहते, बनिए आप सशक्त।
लोभ लालसा मुक्त हों, रहें कर्म आशक्त।।
तन-मन-धन से तो सदा, बनिए आप सशक्त।
प्रेम-प्यार संवेदना, कर्म-धर्म के भक्त।।
शंकित मन से भी कभी, हो जाता है घाव।
बिन पानी भी डूबती, नाहक अपनी नाव।।
मन शंकित यदि आप का, करिए आप विचार।
आपस में संवाद से, मिले उचित आधार।।
जिसने ये जीवन दिया, और संग पहचान।
मात-पिता को ईश सम, सदा दीजिए मान।।
आए हो इस जगत में, आप करो स्वीकार।
जिसने ये जीवन दिया, उसका भी अधिकार।।
औरों का तू छोड़कर, दामन ख़ुद का देख।
अपना भी तो देख ले,नाहक बनता शेख।।
दामन ख़ुद का देख लो, कितना पाक पवित्र।
बाद खींच लेना कभी, मेरा पावन चित्र।।
क्यों करते हो व्यर्थ में, तुम इतना अभिमान।
दामन ख़ुद का देख लो, फिर गाओ निज गान।।
भला युद्ध से कब मिला, कभी सुखद परिणाम।
कूटनीति -संवाद ही, सरल सहज आयाम।।
जनता में डर बढ़ रहा, संकट में है जान।
शान्ति सभी हैं चाहते, दीन धर्म ईमान।।
नेताओं में अब कहाँ, दिखता सेवा भाव।
अपने मद अनुरूप ही, देते रहते घाव।।
जन-धन के नुक़सान से, दुनिया है हैरान।
पर कुछ लोगों का अहम, बन आया शैतान।।
तेल नीति टकराव से, जन-मन है गमगीन।
बेबस मानवता हुई, बन बेचारी दीन।।
बना रहे परिवार का, मर्यादा सम्मान।
यही सोच भारी पड़ी, व्यर्थ गया बलिदान।।
रिश्ता फलता है वही, जहाँ प्रेम विश्वास।
आपस में जिनमें रहे, अधिकारों की आस।।
रिश्ता फलता है वही, जिसमें मधुरिम भाव।
जहाँ स्वार्थ की ओट में, नहीं डराए घाव ।।
इक दूजे की भावना, और उचित सम्मान।
रिश्ता फलता है वही, हो सबको ये ज्ञान।।
कफ़न बाँधकर आइए, करना है बलिदान।
यही समय की माँग है, व्यर्थ छोड़ अभिमान।।
मंगलमय नववर्ष हो, कृपा करो प्रभु राम।
जो अतीत में कष्ट था, भूल रचें आयाम।।
भक्ति, शक्ति, विश्वास का, अद्भुत है गठजोड़।
व्यर्थ समय मत कीजिए, नहीं मिलेगा तोड़।।
खुशी संग जीवन सदा, जीते रहिए आप।
समदर्शी निज भाव से, मिटे शोक संताप।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
दोहा -कहें सुधीर कविराय
*********
श्रद्धांजलि/श्रद्धासुमन
*********
सदा शिकायत जो रही, वही मुझे है आज।
छोड़ अधर में क्यों गए, इतना सारा काज।।
सूक्ष्म रूप में ही सही, रखें शीश पर हाथ।
बस इतनी सी चाह है, रहें हमारे साथ।।
*********
विविध
*********
करो भरोसा ईश का, चाहे जैसे आप।
सदा नाम उनका करें, सोते-जगते आप।।
मूर्खों का बाजार है, मालिक होगा कौन।
भैया बाबू हैं सभी, आखिर बोलो कौन।।
कद-पद तो है बाद में, पहले हम इंसान।
दंभी बनिए मत कभी, देना सीखो मान।।
कर्म-धर्म के साथ ही, खुद को भी ले जान।
ज्ञानी विज्ञानी सही, पहले हम इंसान।।
बहुत याद आता हमें, सदा आपका साथ।
सूना-सूना शीश है, कौन रखे अब हाथ।।
बहुत याद आती हमें, मिली आपसे मार।
तब तो समझा था नहीं, आज हुए लाचार।।
बहुत याद आता हमें, कल में उसका साथ।
अपने भ्राता शीश पर, रोकर फेरा हाथ।।
जीवन जीना है कठिन, कहते हैं वे लोग।
जो खुद ही फैला रहे, जन-जीवन में रोग।।
जीवन जीना आपको, इसका रखिए ध्यान।
क्यों कोई देगा भला, तव को सुखदा ज्ञान।।
धीमा चलते आप हैं, मगर नहीं बैचैन।
लक्ष्य दिख रहा सामने, कहें आपके नैन।।
आखिर इतना तेज क्यों, भाग रहे थे आप।
या फिर कोई चाहते, आप छुपाना पाप।।
सोच समझ अब लीजिए, देना नहीं उधार।
वरना करना आपको, कल नाहक तकरार।।
चाहे जितना हम कहें, देना नहीं उधार।
इसके बिन चलता कहाँ, जीवन मधुर बयार।।
आप स्वयं ही देखिए, कितना उचित विचार।
तब ही निर्णय कीजिए, देना नहीं उधार।।
बिन उधार चलता भला, आज कहाँ व्यापार।
आज इसी पर चल रहा, रोजगार आधार।।
नहीं जरुरत आपको, आज खड़ा जो द्वार।
सख्ती से उसको कहें, देना नहीं उधार।।
तू मम जीवन ज्योति है, और तुही संसार।
ईश्वर अनुकंपा बड़ी, बन आई आधार।।
ज्ञान ज्योति फैलाइए, शिक्षित हों सब लोग।
उन्नति पथ पर राष्ट्र के, सबका उचित प्रयोग।।
विश्व विजेता फिर बने, आज तीसरी बार।
आठ मार्च छब्बीस का, सफल हुआ रविवार।।
गर्वित हम सब हो रहे, बना विजेता देश।
टीम इंडिया ने दिया, आज पुनः परिवेश।।
निज कर्मों से बन गये, कितने लोग महान।
फिर भी बहुतों को नहीं, रहा स्वयं का ज्ञान।।
अपने मुँह से क्या कहें, कहना नहीं महान।
ऐसा करते हैं वही, केवल मूर्ख बखान।।
लोग स्वयं के देश को, कहते सदा महान।
ऊँचा इसका भाल हो, चाहे जाए जान।।
महँगाई का डर बढ़ा, देख-देखकर युद्ध।
विश्व प्रार्थना कर रहा, एक आस है बुद्ध।।
महँगाई की आड़ में, भूल गए ईमान।
जनता को हैं लूटते, कहाँ छुपे भगवान।।
सुरसा डायन की तरह, लीले खुशियाँ रोज।
महँगाई की मार से, बचना राहें खोज।।
झूठ बोलते वे सभी, लोग हुए बेशर्म।
जिनका अपना है नहीं, जीवित मानव धर्म।।
जरा नहीं है शर्म क्या, भूले जो माँ-बाप।
तुमसे अच्छे लोग वे, जो करते हैं पाप।।
शरम नाम की चीज को, बेंच खा रहे आप।
व्यर्थ दिखावा कर रहे, ईश नाम का जाप।।
झूठ बोलते शान से, नेता बड़े महान।
जनता जब होती खफा, खा जाती पहचान।।
परंपरा को ढो रहे, हम सब सारे लोग।
और कह रहे गर्व से, व्यर्थ पालना रोग।।
नहीं पुरातन कह करें, आप सभी अपमान।
पुरखों की ये परँपरा, है अपनी पहचान।।
मान प्रतिष्ठा के लिए, रहते सब बेचैन।
कर्म-धर्म को भूलकर, करते तिकड़म दिन-रैन।।
ईश्वर इच्छा के बिना, क्या होता है काम।
मान-प्रतिष्ठा छोड़िए, खो तक जाता नाम।।
व्यर्थ भौंकना छोड़िए, चाहे जो हों आप।
देश से बढ़कर कुछ नहीं, करते रहो विलाप।।
प्राण प्रतिष्ठा बाद से, फैल रहा उत्कर्ष।
दशरथ नंदन की कृपा, सत्य सनातन हर्ष।।
सागर भी अब सह रहा, आज युद्ध की मार।
सनकी पागल बन गये, मानवता पर भार।।
सागर सा जिसका हृदय, जहर हो रहा आज।
छिड़ा हुआ जो युद्ध है, दुनिया जाने राज।।
अपने-अपने पक्ष की, करते हम सब बात।
देख रहे निज स्वार्थ का, खूब करें प्रतिघात।।
कौन पक्ष में है खड़ा, इसका भी हो ध्यान।
नहीं दिखाना है हमें, दंभ और अभिमान।।
सदा संतुलित ही रखें, अपना आप विचार।
बात तर्क के साथ में, मत विपक्ष तकरार।।
जो विपक्ष में सामने, उसका भी सम्मान।
तर्क बुद्धि से कीजिए, रखना मान विधान।।
जब तक मन मिलता नहीं, नाहक है सब खेल।
कुंठा ईर्ष्या हृदय में, कैसे होगा मेल।।
मन में बाँधे गाँठ हो, और कर रहे खेल।
आप नहीं जब चाहते, कैसे होगा मेल।।
सत्य जीतता है सदा, यदि मन में विश्वास।
अपनों से होती बहुत, उसको इतनी आस।।
संघर्षों के बाद में, मिले सुखद परिणाम।
सत्य जीतता है सदा, पर नाहक बदनाम।।
सदा सत्य की जीत हो, ऐसी बनती राह।
निश्चित इक दिन झूठ का, होना ही है दाह।।
सदा प्रीति का कीजिए, आप सभी सम्मान।
वरना इक दिन आपका, होगा ही अपमान।।
रिश्तों की इक डोर का, छोर प्रीति के साथ।
जिनकी चाहत है खुशी, पकड़े रहते हाथ।।
अब कोई अपना नहीं, रखो आप सब याद।
चिंतित होते क्यों भला, जो करना फरियाद।।
वो निज अंक में भर करे, ममता की बौछार।
पर मेरी लाचारगी, न
मुझ पर चढ़े उधार।।
बच्चे कुंठित हो रहे, देख अंक का खेल।
पद समान के बाद भी, नहीं रहा जब मेल।।
आज जिसे भी देखिए, अपने में ही मस्त।
और एक दिन स्वयं ही, हो जाते हैं पस्त।।
आज जिसे भी देखिए, मुफ्त बाँटता ज्ञान।
नहीं देखता जो कभी, कटा हुआ निज कान।।
आज जिसे भी देखिए, दिखलाता है शान।
जिसे पता भी है नहीं, मान और अपमान।।
कालर ऊँची कर रहे, जिसको देखो आज।
एक मात्र सिद्धांत का, केवल करते काज।।
मर्यादा को भूलते, जिसको देखो आज।
मातु-पिता को भले ही, कुंठित करती लाज।।
सुधीर श्रीवास्तव
રોનક જોષી. રાહગીર
જીવનના રસ્તામાં ઠોકરો તો લાગશે જ, પણ સાચો સવાર એ જ છે જે પડ્યા પછી ફરી બેઠો થાય છે. સાધનો ભલે નાનાં હોય, પણ જો આત્મબળ મજબૂત હોય અને મા-બાપના આશીર્વાદ સાથે હોય, તો દુનિયાની કોઈ તાકાત તમને રોકી શકતી નથી.
જ્યારે આખી દુનિયા કહે કે 'આ નહીં થાય', ત્યારે તમારા મનનો વિશ્વાસ જ તમને વિજય અપાવશે. સંઘર્ષને હસીને સ્વીકારવો એ જ સાચો માનવધર્મ છે. 🛡️✨
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Sudhir Srivastava
सरसी छंद (१६,११) -अभिभान
काहे इतना करता है तू, भला मनुज अभिमान।
जान-बूझ नादान बना क्यों, या सचमुच अंजान।।
बड़े-बड़ों को देखा तूने, हुआ है क्या अंजाम।
या इसको तू मान रहा है, सभी हुए नाकाम।।
निंदा -नफरत भूलो प्यारे, गाओ सुंदर गीत।
अपना भी कुछ मान बढ़ाओ, बनो सभी के मीत।।
धन-दौलत का नहीं ठिकाना, आज पास कल दूर।
कौन जानता कल में तुम ही, हो जाओ मजबूर।।
आज खुदा खुद बने हुए हो, नहीं दे रहे भाव।
क्यों ऐसा तुम सोच रहे हो, नहीं भोगना घाव।।
सीमा से बाहर मत जाओ, मुफ्त दे रहा सीख।
ऐसा भी तो हो सकता है, कल तुम माँगो भीख।।
छोड़ दंभ अभिमान अभी तू, समझ लें जीवन मर्म।
वरना भारी पड़ जायेगा, करता जैसा कर्म।।
कोई साथ नहीं कल देगा, सोच समझ लोआज।
जय-जयकार आज जो करते, झूठा इनका नाज।।
समय साथ जब कल ना देगा, पीटोगे निज माथ।
कोई खड़ा नहीं तब होगा, देने तेरा साथ।।
सुधीर श्रीवास्तव
Shraddha Panchal
તોતડી જીભ એટલું નુકશાન નથી કરતી ,
જેટલું
નુકશાન તોછડી જીભ કરે છે…😇🙊
Imaran
रूठकर तुमसे खुश हम भी नहीं है..
तुम बैचैन हो तो सुनो,
चैन से हम भी नहीं है
🥲imran 🥲
S U K E T U
“Father, forgive them, for they know not what they do.” — Luke 23:34
Good Friday reveals love that redeems every nation and every heart.
રક્ત પથે
નિ:શબ્દ પીડા
ક્ષમા બક્ષે...
નિર્દોષ ઇસુ,
મૌન ન્યાય સહે —
પ્રેમ અડગ.
નિઃશબ્દ ઘા,
ક્ષમા પુકારે પ્રભુ —
ક્રોસના છાયે.
kattupaya s
"நிழல் தரும் வசந்தம்" part 2 released. good evening
Nilesh Rajput
" तू पढ़ ले नमाज़ हर वक़्त, ऐ आशिक-ए-ख़ुदा,
मैं एक मन्नत के धागे से उसे तुझसे छीन लूंगा। "
" तू चाहे हर दरगाह पर चादर चढ़ा ले, ऐ मुसाफ़िर,
मैं एक दीये की ज्योत से उसे किस्मत से भी छीन लूंगा। "
" तू रख ले रोज़ा हर दिन, ऐ परहेज़गार,
मैं मंदिरो में सिर झुका कर उसे हासिल कर लूंगा। "
" तू तस्बीह के हर दाने पर दुआएँ करता रह, ऐ मोहसिन,
मैं उसी ख़ुदा के सामने उससे निकाह पढ़ लूंगा।"
JaisyShiju
ശുഭ വെള്ളിയാഴ്ച – സ്നേഹത്തിന്റെ ത്യാഗഗാനം
കുരിശിന്റെ നിഴലിൽ നിൽക്കുമ്പോൾ
കണ്ണുനീർ മഴയായി വീഴും…
മുള്മുടി ചൂടിയ രാജാവിൻ വേദന
മനസിൽ തീപിടിക്കും…
നിസ്സഹായരായ ഞങ്ങൾക്കായ്
നിശ്ശബ്ദമായി സഹിച്ചവൻ,
നഖങ്ങളാൽ കുത്തപ്പെട്ട കൈകളിൽ
സ്നേഹം മാത്രം ഒഴുകി…
രക്തത്തുള്ളികൾ ഭൂമിയെ തൊട്ടപ്പോൾ
മോചനത്തിന്റെ വഴികൾ തുറന്നു,
മരണം തോറ്റു ജീവൻ ജയിച്ചു
ക്രൂശിൽ പ്രതീക്ഷ വിരിഞ്ഞു…
“അവരെ ക്ഷമിക്കേണമേ” എന്ന
അവസാന പ്രാർത്ഥനയിൽ,
പാപിയുടെ ഹൃദയം ഉണർന്നു
ദൈവസ്നേഹം നിറഞ്ഞു…
ശുഭ വെള്ളിയാഴ്ചയുടെ നിശ്ശബ്ദത്തിൽ
ഒരു സന്ദേശം മുഴങ്ങുന്നു—
ത്യാഗം തന്നെയാണ് സ്നേഹം
സ്നേഹമാണ് ജീവന്റെ ജയം…
Mara Bachaaaaa
कुछ लम्हे वो चुरा लेते है
हमारे लिए,
तभी लब्ज़ ही रुक जाते है
उनके लिए।
- Mara Bachaaaaa
Piyush Goel
https://youtu.be/S5TLn4zuS8M
PRASANG
लम्हों की आज़ादी।
ज़िन्दगी यूँ न बेकार अफ़सोस करें हम,
डर के सारे क़िले तोड़ नई राह चलें हम।
मन में कोई कटुता ठहरने न पाए कभी,
माफ़ी देकर दिल को हल्का करें हम।
होंठ पर रोक न हो, हँसी खुलकर बहे,
दर्द जो भी मिले, ताक़त में ढालें हम।
प्रेम सच्चा ही रहे, शर्त कहीं भी न रहे,
मन की हर प्यास चुपचाप ही सहें हम।
जो भी पल दे गया है मुस्कान का रंग,
उस दुख की दीवारों को दूर हटाएँ हम।
कहता है ‘प्रसंग’, जीने का सीधा नियम,
हर नई साँस के संग अर्थ नया गढ़ें हम।
- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर
p
Maine usko Etna dekha,
jitna dekha ja skta tha ,
per yeh aakho se ,
Kitna dekha ja skta tha🤭
- p
Vartikareena
माई_डियर_प्रोफेसर आ गई है। आप लोग पढ सकते हो। और मेरे प्यारे पाठक गण..भाग पर समिक्षा कर दिया करे। मे पलके बिछाए इंतजार करती रहती हूं की कब कमेंट आएगा। लेकिन आप लोग है की उंगलियो को कष्ट देते ही नही । 🤧
https://www.matrubharti.com/book/19991032/my-dear-professor-9
Narendra Parmar
एक बार गेहूं के बिच में कंकर भी बिक गया
तो कंकर कहने लगा गेहूं से
देखो में कंकर होकर भी मेरी वेल्यु तुम्हारे बराबर हो गई है
गेहूं कूंच नहीं बोला
किंतु जैसे जैसे गेहूं घर घर पहुंचने लगा उस वक्त गेहूं की सफाई करते वक्त औरतों ने कंकर को निकालकर बहार फेंक दिया, फिर गेहूं बोला कंकर से की तुम्हारी हद यहां तक थी गुडबाय।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Sajan Limbachiya
વાત ઈશ્વર સુધી પહોંચાડવાની હોય તો
ફરિયાદ નહિં પણ,
આભાર વાળી લાઈનમાં ઉભા રહેવું.
કેમ કે
ફરિયાદ વાળી લાઈનમાં ભીડ બહુ જ છે.
Anup Gajare
"राम"
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राम!
क्या ये शब्द है
या वाक्य
अक्षर?
नहीं।
इसकी अनामिकता
जटिल संरचना से
भरे दो ग्राम ने
कभी भी विषद ही नहीं की
या यू कहो तो
ये उसके लिए संभव ही नहीं है।
राम
ब्रह्मांड में अनंत पलों
को जन्म देता है
सृजन का निर्माण ही
यहां से हुआ है
और विनाश भी
अपनी अंतिम श्वास
इसके लिए ही तो
खर्च करता है, था, या रहेगा।
यू ही नहीं
इस शब्द को
किंकर ने छाती फाड़
दिखाया।
निर्णय लेने की
बेहद रुक्ष क्रिया
ही इस शब्द को बुनती रही।
चौदह साल
वनवास
यानी सिर्फ जंगल में रहना नहीं होता
वहां के परिवेश में घुलते हुए
नमक की तरह एक होना ही
वनवास है
बस पिता के किसी काल
में दिए वचन में बंधकर
अरण्य में विचरण करना
कितना कठिन होता है।
वर्तमान
समय में क्या कोई
ऐसा कर सकता है
दो घंटे पिता के कहने पर
अपना प्रिय मोबाईल
न छोड़े कोई।
फिर भी
राम
किसी ग्रंथ में बंद
किसी मंदिर में स्थापित
या किसी नारे में अटका हुआ
नहीं है।
वह तो
उस क्षण में जन्म लेता है
जब कोई
अपनी इच्छा के विरुद्ध
सही का चयन करता है।
जब
भीतर का रावण
दसों दिशाओं में
तर्क लेकर खड़ा होता है
और फिर भी
एक क्षीण-सी आवाज
निर्णय लेती है—
वही
राम है।
धर्म
यहाँ शास्त्र नहीं
स्थिति है,
और
अधर्म
कोई राक्षस नहीं
बल्कि
वह सरल रास्ता है
जिसे चुनना
हम रोज़ चाहते हैं।
राम
कभी तीर नहीं चलाता
पहले वह
स्वयं को साधता है,
वह जानता है
कि सबसे कठिन युद्ध
लड़ाई नहीं,
त्याग है।
आज
अरण्य
पेड़ों में नहीं
स्क्रीन के भीतर उग आया है,
जहाँ
हर क्षण
मृगमारीच की तरह
कुछ चमकता है
और हम
पीछे दौड़ते रहते हैं।
सीता
अब कोई स्त्री नहीं
बल्कि
मन की वह शांति है
जो हर बार
भटकने पर
हर ली जाती है।
और लक्ष्मण रेखा?
वह
किसी भूमि पर खींची रेखा नहीं
बल्कि
वह मर्यादा है
जिसे हम
जानबूझकर पार करते हैं।
राम
अब भी
वहीं खड़ा है—
किसी अयोध्या में नहीं
किसी वन में नहीं
बल्कि
उस छोटे-से निर्णय में
जहाँ
कोई देख नहीं रहा होता
और फिर भी
तुम
सही चुनते हो।
शायद
राम
कभी जन्मा ही नहीं
और कभी मरा भी नहीं,
वह
हर उस मनुष्य में
धीरे-धीरे बनता है
जो
अपने भीतर के शोर के बीच
एक क्षण के लिए
सत्य को सुन लेता है।
और तब
कोई युद्ध नहीं होता
कोई विजय नहीं होती
बस
एक मौन जन्म लेता है—
जिसे
तुम
राम कहते हो।
या शायद
सन्नाटे से भी
आगे जो कुछ है, था, रहेगा
वही राम है, था, रहेगा।
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vrinda
बंद है दरवाजे नगर के
प्रिए, तुम इस अंधकार में कहां और कैसे जाओगी......
बोली धीरज धर के सिया
हे रघुनंदन, प्राणप्रिय
जब दरवाजे बंद है हृदय के
तो मैं इस नगर कैसे रह पाऊंगी......
हर पल हर क्षण यहां रहकर
अग्नि परीक्षा तो ना दे पाऊंगी......
- vrinda
Saroj Prajapati
खुशियों की तलाश में ताउम्र भटकते रहे दर ब दर
बस झांककर ना देखा अपने घर और मन के भीतर।
सरोज प्रजापति
- Saroj Prajapati
Mare Do Alfaz
तु, वो अल्फ़ाज़ है मेंरा
जिसमें कैद है ,,
,,कहानियां मेंरी,
- Mare Do @ल्फ़ाz,,
Shailesh Joshi
मुसीबतें तकलीफें या गरीबी
न सिर्फ कर्म का फल होती है, लेकिन वह कभी कभी हमारे जीवन की उन्नती की कल भी हो सकती है,
और ऐसे हालात में से बहार निकलने के लिए, हर किसीके सामने दो रास्ते होते हैं
एक होता है सही रास्ता, और दूसरा रास्ता होता है गलत रास्ता.
हाँ सही रास्ता अक्सर कठिन होता है
और गलत रास्ता फिलहाल आसान लगता है, मगर.....
यदि हम कठिन रास्ता चुनते हैं
तो हमारा आगे का रास्ता अपनेआप आसान होता जाता है, लेकिन जब हम अभी आसान रास्ता ( गलत ) चुनते हैं, तो हमारे जीवन के आगे के रास्ते न सिर्फ कठिन बनते जाते हैं, साथ ही साथ रास्ते कम, और हम अकेले और निस्सहाय भी होते जाते हैं.
santhoshi Vadlamani
మనం ఎక్కడ పుట్టినా మంచిగా బతకడం ముఖ్యం
బురదలో పుట్టిన కమలం అందంగా బయటకి
వస్తుంది....మన పుట్టుక సాధారణంగా ఉన్నా మన
లక్ష్యం మాత్రం గొప్పగా ఉండాలి...✨
Shailesh Joshi
તમે, હું કે પછી કોઈપણ વ્યક્તિ,
આપણે સૌ
સમય, સંજોગો અને લોકોના ભરોસે હોઈએ છીએ, જ્યારે આપણી જિંદગી....એતો સદાયને માટે માત્રને માત્ર આપણા જ ભરોસે હોય છે,
માટે એને કષ્ટ થાય, વેડફાય, કે પછી
એ એકે બાજુની ન રહે એવા સમયનું નિર્માણ ઊભું થાય,
એવું એકપણ કામ કરતા પહેલાં સો વાર વિચારવું, અને જો આપણે આપણી જિંદગીને ખરેખર દુઃખ ન થાય એવું ઇચ્છતા હોઈએ,
તો આજીવન આ એક વાતનો સ્વીકાર કરી, સમગ્ર જીવન જીવવું કે,
આપણને જીવન આપવાવાળા ખુદ ઇશ્વર છે, માટે હરહંમેશ ઉપરવાળા ઉપર ભરોસો રાખી, જ્યારે જ્યારે આપણને સાચા રસ્તે આપણા જીવનને ખુશ રાખવાના આપણા પ્રયત્નો એળે જતા દેખાય, ત્યારે એકપણ વાર,
ખોટો રસ્તો શોધવાને બદલે,
બધું ઈશ્વર પર છોડી દેવું, આમ કરવાથી આગળ જતાં આપણે જોઈશું કે, કોઈને કોઈક સાચો રસ્તો ખુદ ઈશ્વર જ આપણને બતાવશે, માટે ખરાબ સમયમાં થોડી ધીરજ રાખવી, કેમકે ઈશ્વરના દરબારમાં દેર છે, અંધેર નહીં.
GIRLy Quotes
https://www.instagram.com/reel/DWOiQZYgJHL/?igsh=MTBucTZqOWl1d3lheA==
Manoj kumar shukla
भारत की है शान, वंदेमातरम.....
भारत की है शान, वंदेमातरम।
बंकिम जी का गान वंदेमातरम।।
गोरों से लड़ी लड़ाई थी सबने।
आजादी का ज्ञान वंदेमातरम।।
गाथाएँ बलिदानों से भरी हुईं।
जनता की अब तान, वंदेमातरम।।
गांधी सुभाष आजाद भगत नारा।
स्वतन्त्रता बलिदान, वंदेमातरम।।
झुका न पाया कभी तिरंगा कोई।
रखे हथेली जान,वंदेमातरम।।
परिवर्तन आंदोलन का शस्त्र बना।
इस पर है अभिमान,वंदेमातरम।।
सैनिक कर्ज चुकाते हैं सीमा पर
कर्तव्यों का भान,वंदेमातरम।।
कदम-कदम ऊँचाई पर है बढ़ना।
लिया देश ने ठान, वंदेमातरम।।
राष्ट्रभक्ति की अलख जगाएंगे मिल।
गाएंगे सब गान, वंदेमातरम।।
मनोजकुमार शुक्ल मनोज
MASHAALLHA KHAN
एक वक्त था जब ना पंखा था, ना कूलर, और ना ही AC, तब भी लोग कितनी सुकुन की नींद सोते थे,
आज के वक्त मे पंखा, कूलर, AC सबकुछ तो है मगर सुकून छोड़िये नींद ही कहा है .
-MASHAALLHA
Soni shakya
लोग चेहरे पढ़ लेते हैं,
काश..!
कोई खामोशी भी पढ़ पाता..!!
- Soni shakya
Soni shakya
लफ्जों में दर्द था..!
और उसने सिर्फ शिकायत समझा..!!
- Soni shakya
Narayan
ज़रूरी नहीं कि हर चोट पर आँखें भर आएँ,
कुछ तबाही ऐसी भी होती है जो बे-आवाज़ होती है।💔💔
Dada Bhagwan
જગત એટલે ઊંધે રસ્તે ખેંચવું તે. ઊંધે રસ્તે ના ખેંચત તો, જગત સ્વર્ગ જેવું જ થઈ ગયું હોત ને! - દાદા ભગવાન
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Sohagi Baski
তুমি কি আমার দুঃখের ছায়া?
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তুমি কি সেই সন্ধ্যার নরম আলো,
যেখানে দিনের ক্লান্তি এসে থেমে যায়?
নাকি তুমি সেই নীরবতার শব্দ,
যা একা ঘরে বসে বুক ভরে শোনা যায়?
তুমি কি আমার চোখের কোণে জমে থাকা
অপ্রকাশিত কথাগুলোর ভিড়?
যেগুলো বলতে চেয়েও বলা হয় না কখনো,
শুধু চুপচাপ থেকে যায় অদৃশ্য নীলচে দাগ হয়ে।
তুমি কি সেই রাত,
যে রাত গভীর হলে আরও একা লাগে?
যেখানে প্রতিটা নিঃশ্বাসে তোমার নাম আসে,
তবুও তোমাকে ছোঁয়া যায় না কোনোভাবে।
তুমি কি আমার স্বপ্নের ভিতরে লুকিয়ে থাকা
অচেনা কোনো মানুষ?
যে কাছে এলেই সবকিছু ভেঙে যায়,
তবুও তাকে হারাতে মন চায় না একটুও।
তুমি কি সেই ফোনের ওপারের কণ্ঠ,
যা শুনলেই বুকটা হালকা লাগে?
নাকি তুমি সেই অজানা নীরবতা,
যেখানে কথার থেকেও বেশি কিছু বলা থাকে?
তুমি কি সেই বৃষ্টিভেজা জানালার কাচ,
যেখানে আঙুল দিয়ে তোমার নাম লিখি?
আর একটু পরেই মুছে যায় সব—
যেন তুমি ছিলে, আবার ছিলে না কখনোই।
তুমি কি আমার ভেতরের শূন্যতা,
যা ধীরে ধীরে আমাকে গ্রাস করে?
নাকি তুমি সেই অদ্ভুত শান্তি,
যা কষ্টের মাঝেও আমাকে বাঁচিয়ে রাখে?
তুমি কি সেই দরজাটা,
যা কখনো পুরো খুলে না—
শুধু অল্প একটু ফাঁক দিয়ে
আশার আলো দেখিয়ে আবার বন্ধ হয়ে যায়?
তুমি কি আমার অপূর্ণ গল্পের শেষ লাইন,
যেটা লিখতে গিয়ে বারবার থেমে যাই?
নাকি তুমি সেই প্রশ্ন,
যার উত্তর আমি খুঁজে পাই না কোনোদিনই?
তুমি কি আমার দীর্ঘ প্রতীক্ষার নাম?
নাকি তুমি সেই অপেক্ষা,
যার শেষ নেই—
তবুও আমি প্রতিদিন অপেক্ষা করি।
তুমি কি আমার বুকের ভেতরে জমে থাকা
নীরব চিৎকার?
যা কেউ শোনে না,
শুধু আমি নিজেই অনুভব করি।
তুমি কি সেই অদ্ভুত অনুভূতি,
যা ব্যথা দিয়েও ভালো লাগে?
নাকি তুমি সেই ভুল,
যা জানি ভুল—তবুও ছাড়তে পারি না?
তুমি কি আমার সব হারানোর পরেও
থেকে যাওয়া শেষ স্মৃতি?
নাকি তুমি সেই মানুষ,
যে কোনোদিনই পুরোটা আমার ছিল না?
তুমি কি আমার—
নাকি আমি শুধু তোমার কল্পনায় বেঁচে আছি?
তুমি কি সত্যিই আছো,
নাকি তুমি শুধু আমার একাকীত্বের সৃষ্টি?
Piyu soul
Good morning everyone 🌙✨
मैं उनकी sister हूँ… 😊
आज बस दिल से एक बात कहना चाहती हूँ 💙
कभी-कभी ज़िंदगी हमें ऐसे मोड़ पर ले आती है,
जहाँ हम खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं…
पर सच ये है—
कोई ना कोई चुपचाप हमारे साथ खड़ा होता है 💫
दी हमेशा कहती हैं—
“मजबूत वो नहीं जो कभी टूटे नहीं…
मजबूत वो है जो हर बार टूटकर भी खुद को जोड़ ले” ❤️
अगर आप ये पढ़ रहे हैं…
तो याद रखिए—
आप अकेले नहीं हैं 💙
आप जितना सोचते हैं, उससे कहीं ज़्यादा strong हैं ✨
और कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं…
जो बिना नाम के भी साथ निभाते हैं,
बिना बोले भी समझ जाते हैं…
🌸
“साथ होना हमेशा पास होना नहीं होता,
कभी-कभी दूर रहकर भी कोई अपना होता है…
हौसले गिर भी जाएं अगर रास्तों में,
तो यकीन रखना—कोई चुपचाप तुम्हारा होता है…”
🌸
दी का प्यार हमेशा आप सबके साथ है 💙
Take care 🌸
Stay strong, stay healthy and happy ✨
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
ચહેરાની ચમક અને
મકાનની ઊંચાઈ પર ન જવું
ઘરના વડીલો જો હસતાં મળે
તો સમજી લેવું કે આ ઘર અમીરોનુ છે..
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
Nisha ankahi
“हे प्रभु, तेरे कितने नाम, तेरे कितने धाम,
हर दिशा में बस तेरा ही रूप तमाम।
तुझे पाएँ तो कैसे, ये राह समझ न आए,
तुझे बोलें तो कैसे, आवाज़ भी तुझ तक न जाए।
ये दुनिया एक मेला है, कौन सा तेरा रूप सच्चा, कौन सा निराला है,
दुविधा में हूँ प्रभु, कहीं गलत राह न पकड़ लूँ मैं।
- Nisha ankahi
Jyoti Gupta
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Imaran
हजारो महफिलें हैं,
और लाखों मेले हैं..
लेकिन जहाँ तुम नहीं,
वहाँ हम बिल्कुल अकेले हैं
😂imran 😂
Anish
"फिर हमारे इश्क़ की कहानी बदल गई तक़दीर क्या बदली रानी बदल गई..
@sayri king 👑
बेवफा भी राह पूछती है हमारे दिल का खत क्या भटका मंज़िल बदल गई..."
Paagla
Unhe lagta hai me aise hi ladta hu arre pagal me tumse pyaar krta hu
https://youtube.com/shorts/x-9CC8JUEUU?si=0NIfgXO2GbOobS3q
Parmar Mayur
🙏🙏ईश्वरने कहा है कि मेरी प्रार्थना ना कर सको कोई बात नहीं है,
किन्तु 'अच्छे इंसानों की निंदा' करने में अपने वक्त की बर्बादी मत किजिए।🦚🦚
Anish
हमने अपने ही अंदर जगह कम कर दी इतनी, कि अब कोई आए भी तो ठहर न सके।
तुम्हारी जीत का जश्न कुछ ज़्यादा ही था, किसी का हक़ मारा है, ये पता चल रहा था।
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
सफ़र
हमनवाज़ के साथ सफ़र में जाने को जी चाहता हैं l
खूबसूरती पलों के अह्सास पाने को जी
चाहता हैं ll
कुछ खिंचे खिंचे से रहते है दिल में रहने
वाले की l
हमसफ़र को और नजदीक लाने को जी
चाहता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Sonu Kumar
सरकार पॉलीथिन के उपयोग पर रोक लगाने की बजाय पॉलीथिन बनाने वाली फैक्टरियों पर रोक क्यों नहीं लगती है ?
.
क्रूड ऑयल की रिफायनिंग से कई प्रकार के सह उत्पाद एवं केमिकल वेस्ट निकलता है। पॉली एथिलीन (पॉलीथीन) भी इसी तरह का एक केमिकल वेस्ट है। कानूनन तेल कम्पनियों को इन्हें ठिकाने (Dispose) लगाना होता है। पॉलीथीन के इन दानो से प्लास्टिक के कैरी बेग बनते है। और फिर जो बच जाता है उसे तेल कम्पनियां इधर उधर समन्दर वगेरह में बहा कर डिस्पोज कर देती है। इसे डिस्पोज करने से कुछ पैसा वगेरह तो मिलता नहीं, उलटे लागत बढ़ जाती है !! तो तेल कम्पनियां चाहती है कि प्लास्टिक के ये दाने बिकते रहे !!
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सरकारें यदि कैरी बेग बनाने वाली फैक्ट्रियों को बेन कर देगी तो इन दानो की मांग घटेगी और तेल कंपनियों को घाटा होगा। बस यही वजह है !!
.
बहरहाल, इस तरह के कई क़ानून है जिन्हें हम सिर्फ इसीलिए ढो रहे है क्योंकि इससे बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को घाटा होता है। भारत में पेड मीडिया की प्रायोजक बहुराष्ट्रीय कम्पनियां है। अत: पेड मीडिया में नजर आने वाली कोई भी पार्टी एवं नेता पेड मीडिया के प्रयोजको के खिलाफ नहीं जाना चाहता।
.
उदाहरण के लिए कभी टाटा को केमिकल वेस्ट के रूप में निकलने वाला अपना टनों सोडियम क्लोराइड दशको तक समन्दर में बहाना पड़ता था। लेकिन जब उन्होंने आयोडाइज्ड नमक का क़ानून बनवा दिया तो यह झक सफ़ेद Mineral Less शुद्ध NaCl केमिकल आयोडीन नमक के नाम से महंगे में बिकने लगा !! टाटा के पास आयोडीन की माइंसे भी थी। इस क़ानून के आने से आयोडीन की भी मांग बढ़ी और टाटा ने इधर से भी मुनाफा बनाया।
.
यह सब 90 के दशक की बातें है, अत: ज्यादातर पाठक इस घटनाक्रम से परिचित नहीं होंगे। फिर उन्होंने खुला नमक बेचने पर प्रतिबन्ध लगा दिया जिसकी वजह से समुद्री नमक ( जो कि मिनरल्स का सबसे अच्छा स्त्रोत है ) का फुटकर कारोबार बंद हो गया ।
.
अब इस चक्कर में करोड़ो लोग Mineral Less नमक खाने के कारण कुपोषण के शिकार हो गए तो इससे राज नेताओं को कोई दिक्कत नहीं है। क्योंकि नेता को चुनाव जीतने के लिए पेड मीडिया का सपोर्ट चाहिए पेड मीडिया इन कम्पनियों के कब्जे में है।
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तेल कम्पनियां हथियार बनाने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों के बाद दुसरे नंबर की सबसे ताकतवर कम्पनियां है। भारत की सभी राजनैतिक पार्टियो के नेता भी चुनाव जीतने वगेरह के लिए इन पर बुरी तरह से निर्भर करते है। वैसे भी भारत के पास तेल निकालने की तकनीक नहीं है। तो इन कम्पनियों से टकराव लेने का सवाल ही नहीं।
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कुछ 6-7 साल पहले जब मेरे एक परिचित ने बायो प्लास्टिक की मेनुफेक्चरिंग शुरू करने की कोशिश की थी तो मुझे इस विषय के बारे में जानकारी हुयी थी। बायो प्लास्टिक के कैरी बेग जो मैंने देखे थे वे पॉलीथीन के कैरी बेग के समान ही उपयोगी थे, किन्तु उनकी कीमत लगभग 30-40% ज्यादा थी। सरकार यदि इम्पोर्ट ड्यूटी का स्ट्रक्चर पलट दे और इसे प्रोत्साहित करने लगे तो इसका उत्पादन कम कीमत में होने लगेगा, और पॉलीथीन की एक बड़ी खपत को यह बाजार से बाहर कर सकता है।
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इसके अलावा और भी कई तरीके है, प्लास्टिक के कैरी बैग को रिप्लेस करने है। लेकिन नेता वगेरह तेल कम्पनियों से टकराव लेने से बचना चाहते है। इसीलिए सरकारें टोकन के रूप में छोटे छोटे अप्रभावी फैसले लेकर माहौल बनाये रखती है कि हम कोशिश कर रहे है !!
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इसके अलावा तेल कम्पनियां उन एनजीओ वगेरह को भी अनुदान देते रहती है जो पर्यावरण बचाने के नाम पर पॉलीथीन के खिलाफ मुहीम चलाकर जनता का ध्यान भटकाने का काम करते है। मतलब ये पेशेवर ज्ञान बांटने वाले पेड बुद्धिजीवी जनता में "जागरूकता" फैलाते है, और बदले में तेल कम्पनियां इन्हें अनुदान देते रहती है।
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यदि जागरूकता फैलाने वाले ये ज्ञानी गायब हो जायेंगे तो लोगो का ध्यान पॉलीथीन को रोकने के लिए कानून बनाने की और जाएगा और तेल कम्पनियों को घाटा होगा। तो पॉलीथीन को चलन में बनाए रखने का तरीका है कि कार्यकर्ताओं को कानूनों की मांग करने की जगह पर्यावरण पर ज्ञान बांटने और जागरुकता फैलाने में लगाए रखिये !!
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इसका स्थायी समाधान जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर लागू करना है। जूरी कोर्ट के आने से भारत की कम्पनियां जल्दी ही रिफायनरी में काम आने वाले उपकरण बनाने की तकनीक जुटा लेगी और तब हमारे नेता तेल कम्पनियों के खिलाफ जाकर फैसले कर सकते है। ये रास्ता लम्बा है। मतलब जूरी कोर्ट आने के बाद भी कम से कम 6-7 वर्ष और लगेंगे इस तरह की तकनीक जुटाने में। लेकिन तेल निकालने की मशीने बनाने की क्षमता जुटाने के अलावा इन कम्पनियों के पंजे से बाहर आने का अन्य कोई उपाय भी नहीं है !!
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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
नहीं किसी के सामने, करो सफाई पेश। जब वह मानेगा नहीं, होगा तुमको क्लेश।।
दोहा --469
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
Piyu soul
Good morning everyone ☀️✨
मैं उनकी sister हूँ… 😊
और आज दिल से कुछ कहना चाहती हूँ 💙
दी सिर्फ stories नहीं लिखतीं…
वो एक पूरा universe create करती हैं 💫
जहाँ हर किरदार जीता है…
हर एहसास महसूस होता है…
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✨ The Billionaire Lady Ops
✨ अनजान परछाई
✨ कालवन: रानी की वापसी
✨ अंधकार की घाटी
✨ Sia – The Dreamer Fighter
✨ Jeon Star Bride
✨ Crown of Love and Mafia
✨ Royal Vardi: The Reign of Royal Heart
✨ Veiled Destinies: The Queen, The Idol and The Eternal Love
✨ My Ruthless Savior: Brought by Him
✨ दासी कन्या (Horror Series)
✨ दरवाजा: काली हवेली का सच
✨ झांसी: सौदा, कर्ज और बदला
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दी को शेर, शायरी और poems का शौक तो है ही…
लेकिन आप शायद ये नहीं जानते—
वो singing में भी कमाल हैं 🎶
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कभी-कभी लगता है…
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For me…
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जो एक बार पढ़ ले उन्हें…
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अगर आपने उनकी कोई भी story पढ़ी है…
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कौन सी story ने आपके दिल को सबसे ज़्यादा छुआ? 💭💙
आपका एक comment…
उनके लिए बहुत बड़ी ताकत बन सकता है 😊✨
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Stay healthy and happy 💫
Anish
धुएं का नकाब हटा के देखो चाय का किरदार साफ नज़र आएगा।
Apurv Adarsh
क्या हो रहा नहीं पता, क्या होगा नहीं पता
क्या हुआ ये पता है , पर क्यों हुआ नहीं पता ।
kattupaya s
Good morning friends.. have a nice day
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (54)की व्याख्या
धियो यो न: प्रचोदयात।
ऋग्वेद-
3/62/10
अर्थ-- वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे। यह प्रसिद्ध गायत्री मन्त्र का अंतिम चरण है—
ऋग्वेद-- 3.62.10
मन्त्र (पूर्ण रूप):
ॐ भूर्भुवः स्वः।
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
पद का अर्थ:
धियः = बुद्धियाँ (हमारी बुद्धि/विवेक)
यः = जो (ईश्वर)
नः = हमारी
प्रचोदयात् = प्रेरित करे, आगे बढ़ाए
भावार्थ:
“हम उस दिव्य परम तेजस्वी परमात्मा (सविता देव) का ध्यान करते हैं, वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे और उसे सत्य मार्ग की ओर अग्रसर करे। इसलिए ऊपर दिया हुआ अर्थ — “वह हमारी बुद्धि को प्रेरित करे” — बिल्कुल सही और सारगर्भित है।
ऋग्वेद में प्रमाण--
ऋग्वेद 3.62.10
मन्त्र:
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
यह वही गायत्री मन्त्र है, जिसमें “धियो यो नः प्रचोदयात्” पद आता है।
यजुर्वेद में प्रमाण
शुक्ल यजुर्वेद-- 36.3
मन्त्र:
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
यहाँ भी वही मन्त्र पुनः मिलता है, जिससे सिद्ध होता है कि यह वैदिक प्रार्थना अत्यंत महत्त्वपूर्ण और सार्वभौमिक है।
सामवेद में प्रमाण
सामवेद (उत्तारार्चिक -1462) (संख्या विभिन्न पाठों में बदल सकती है)
मन्त्र:
तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि।
धियो यो नः प्रचोदयात्॥
सामवेद में भी यह मन्त्र गेय (गाने योग्य) रूप में प्राप्त होता है।
निष्कर्ष--
वेदों में बार-बार इस मन्त्र का आना यह दर्शाता है कि—
ईश्वर से बुद्धि की शुद्धि और प्रेरणा माँगना वैदिक धर्म का मूल तत्व है।
यह केवल स्तुति नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण (inner awakening) की प्रार्थना है।
उपनिषदों में प्रमाण--
1. छान्दोग्य उपनिषद् (--3.12.1)
मन्त्र:
गायत्री वा इदं सर्वं भूतं यदिदं किं च।
अर्थ:
“यह सम्पूर्ण जगत् (जो कुछ भी है) गायत्री ही है।”
यहाँ गायत्री को सर्वव्यापक चेतना बताया गया है—जो बुद्धि को प्रकाशित करती है।
2. छान्दोग्य उपनिषद् (--3.12.5)
मन्त्र:
सा एषा चतुष्पदा षड्विधा गायत्री।
अर्थ:
“यह गायत्री चार पदों और छह प्रकारों वाली है।”
इससे स्पष्ट होता है कि गायत्री केवल मन्त्र नहीं, बल्कि चेतना और ज्ञान का व्यापक सिद्धान्त है।
3. बृहदारण्यक उपनिषद् (-5.14.4)
मन्त्र:
गायत्री वै इदं सर्वं भूतं...
अर्थ:
“यह सम्पूर्ण जगत् गायत्री ही है।”
यहाँ भी गायत्री को सर्वव्यापी ब्रह्म-चेतना कहा गया है।
4. प्रश्न उपनिषद् (--1.5)
मन्त्र (भाव):
सूर्य (सविता) ही प्राण और चेतना का स्रोत है।
गायत्री मन्त्र में “सविता” का जो उल्लेख है, उसका दार्शनिक आधार यहाँ मिलता है—
कि सूर्य ही बुद्धि और प्राणों को प्रेरित करता है।
निष्कर्ष--
उपनिषदों में “धियो यो नः प्रचोदयात्” शब्दशः नहीं,
परन्तु उसका मूल भाव (बुद्धि की प्रेरणा, चेतना का प्रकाश) स्पष्ट रूप से उपस्थित है।
गायत्री को ब्रह्म, चेतना और ज्ञान का स्रोत बताया गया है।
इसलिए यह मन्त्र केवल वैदिक स्तुति नहीं, बल्कि उपनिषदों के अद्वैत ज्ञान से भी जुड़ा हुआ है।
पुराणों में प्रमाण
1. पद्म पुराण
श्लोक:
गायत्री जपमात्रेण सर्वपापैः प्रमुच्यते।
इह लोके सुखं भुक्त्वा परत्र मोक्षमाप्नुयात्॥
अर्थ:
“केवल गायत्री मन्त्र के जप से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है,
इस लोक में सुख भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त करता है।”
2. स्कन्द पुराण
श्लोक:
न गायत्र्याः परं मन्त्रं न मातुः परदैवतम्।
अर्थ:
“गायत्री से बढ़कर कोई मन्त्र नहीं, और माता से बढ़कर कोई देवता नहीं।”
3. अग्नि पुराण
श्लोक:
गायत्री छन्दसां माता ब्रह्मणो हृदयं स्मृता।
अर्थ:
“गायत्री छन्दों की माता है और ब्रह्म का हृदय मानी गई है।”
4. ब्रह्माण्ड पुराण
श्लोक (भाव):
“गायत्री मन्त्र का जप करने से बुद्धि शुद्ध होती है और आत्मज्ञान की प्राप्ति होती है।”
यह सीधे “धियो यो नः प्रचोदयात्” (बुद्धि को प्रेरित करे) के भाव की पुष्टि करता है।
5. नारद पुराण
श्लोक:
सर्ववेदेषु या प्रोक्ता गायत्री परमाक्षरा।
सा जप्या सर्वदा विप्रैः सर्वपापप्रणाशिनी॥
अर्थ:
“जो गायत्री सभी वेदों में कही गई है, वह परम अक्षर है;
उसका जप सदा करना चाहिए, वह सभी पापों का नाश करने वाली है।”
निष्कर्ष-+
पुराणों में गायत्री को सर्वश्रेष्ठ मन्त्र, छन्दों की माता, बुद्धि-शुद्धि और मोक्ष देने वाली बताया गया है।
इससे यह सिद्ध होता है कि “धियो यो नः प्रचोदयात्” का भाव—
बुद्धि को प्रेरित करना और ज्ञान देना—
पुराणों में भी पूर्ण रूप से समर्थित है।
श्रीमद्भगवद्गीता में प्रमाण
अध्याय 10, श्लोक 11
श्लोक:
तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः।
नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता॥
अर्थ:
“उन पर अनुग्रह करने के लिए मैं उनके अज्ञानरूपी अंधकार को
ज्ञानरूपी दीपक से नष्ट करता हूँ।”
यह “बुद्धि का प्रकाश” ठीक वही भाव है जो गायत्री मन्त्र में है।
3. अध्याय 15, श्लोक 15
श्लोक:
सर्वस्य चाहं हृदि सन्निविष्टो
मत्तः स्मृतिर्ज्ञानमपोहनं च॥
अर्थ:
“मैं सबके हृदय में स्थित हूँ; मुझसे ही स्मृति, ज्ञान और विस्मृति होती है।”
अर्थात् बुद्धि, ज्ञान और प्रेरणा का स्रोत परमात्मा ही है।
निष्कर्ष--
गीता में “धियो यो नः प्रचोदयात्” शब्द तो नहीं,
लेकिन उसका पूर्ण भाव स्पष्ट रूप से मिलता है—
ईश्वर बुद्धि देता है -
अज्ञान को हटाकर ज्ञान का प्रकाश करके।
इस प्रकार गायत्री मन्त्र और गीता का संदेश एक ही है—
ईश्वर हमारी बुद्धि को सही मार्ग में प्रेरित करता है।
महाभारत में प्रमाण--
1. उद्योग पर्व (5.33.37) – विदुर नीति
श्लोक:
न सा सभा यत्र न सन्ति वृद्धाः
न ते वृद्धा ये न वदन्ति धर्मम्।
न स धर्मो यत्र न सत्यमस्ति
न तत्सत्यं यच्छलेनाभ्युपेतम्॥
अर्थ:
“वह सभा नहीं जहाँ ज्ञानी (वृद्ध) न हों, वे वृद्ध नहीं जो धर्म की बात न कहें…।”
यहाँ संकेत है कि सही बुद्धि (धर्मयुक्त विवेक) ही मनुष्य को मार्ग दिखाती है।
2. शान्ति पर्व (12.153.7)
श्लोक (भावार्थ सहित):
“मनुष्य की बुद्धि ही उसे धर्म और अधर्म का ज्ञान कराती है,
और वही उसे उचित मार्ग पर प्रेरित करती है।”
यह सीधे “बुद्धि को प्रेरित करने” (प्रचोदयात्) के भाव से मेल खाता है।
3. वन पर्व (3.313.117)
श्लोक:
न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते।
अर्थ:
“इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है।”
ज्ञान (बुद्धि का प्रकाश) ही जीवन को दिशा देता है।
4. भीष्म द्वारा उपदेश (शान्ति पर्व)
भाव:
“ईश्वर ही जीवों के हृदय में स्थित होकर उन्हें प्रेरित करता है और उनके कर्मों का मार्गदर्शन करता है।”
यह गीता के समान ही सिद्धान्त है—
ईश्वर बुद्धि को प्रेरित करता है।
निष्कर्ष--
महाभारत में “धियो यो नः प्रचोदयात्” शब्द नहीं,
लेकिन उसका भाव पूर्णतः विद्यमान है—
बुद्धि ही धर्म का मार्ग दिखाती है
ज्ञान सबसे पवित्र है
ईश्वर अन्तःकरण में स्थित होकर प्रेरणा देता है
इसलिए यह सिद्ध होता है कि गायत्री मन्त्र का “बुद्धि-प्रेरणा” सिद्धान्त महाभारत में भी समर्थित है।
स्मृति ग्रन्थों में प्रमाण
1. मनुस्मृति (2.6)
श्लोक:
वेदः स्मृतिः सदाचारः स्वस्य च प्रियमात्मनः।
एतच्चतुर्विधं प्राहुः साक्षाद्धर्मस्य लक्षणम्॥
अर्थ:
“वेद, स्मृति, सदाचार और आत्मा को प्रिय लगने वाला (शुद्ध विवेक) — ये धर्म के चार लक्षण हैं।”
यहाँ आत्मा का प्रिय (अन्तःकरण की शुद्ध बुद्धि) ही निर्णय का आधार बताया गया है।
2. मनुस्मृति (12.4)
श्लोक:
बुद्धिः कर्मानुसारिणी।
अर्थ:
“बुद्धि कर्मों के अनुसार (उन्हें दिशा देने वाली) होती है।”
यह दर्शाता है कि बुद्धि ही जीवन को मार्ग देती है।
3. याज्ञवल्क्य स्मृति (1.7)
श्लोक:
श्रुतिः स्मृतिः सदाचारः स्वस्य च प्रियमात्मनः।
सम्यक्संकल्पजः कामो धर्ममूलमिदं स्मृतम्॥
अर्थ:
“श्रुति, स्मृति, सदाचार और शुद्ध संकल्प से उत्पन्न इच्छा—ये धर्म के मूल हैं।”
“सम्यक् संकल्प” = शुद्ध, प्रेरित बुद्धि (प्रचोदयात् का भाव)
4. पराशर स्मृति (1.24)
भावार्थ:
“मनुष्य को अपने शुद्ध अन्तःकरण और बुद्धि से धर्म का निर्णय करना चाहिए।”
यहाँ स्पष्ट है कि अन्तःप्रेरणा (inner guidance) ही धर्म का मार्ग है।
निष्कर्ष
स्मृति ग्रन्थों में
बुद्धि (विवेक) को धर्म का आधार माना गया है
अन्तःकरण की प्रेरणा को सही मार्गदर्शक बताया गया है
यह ठीक वही सिद्धान्त है जो गायत्री मन्त्र में है—
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हमारी बुद्धि को प्रेरित करे
नीति ग्रन्थों में प्रमाण
1. चाणक्य नीति
श्लोक:
बुद्धिर्यस्य बलं तस्य निर्बुद्धेस्तु कुतो बलम्।
वनं सिंहो मदोन्मत्तो शशकेन निपातितः॥
अर्थ:
“जिसके पास बुद्धि है, उसी के पास बल है; निर्बुद्धि के पास बल कहाँ? वन में मदमस्त सिंह को भी एक छोटे से खरगोश ने बुद्धि से पराजित कर दिया।”
यहाँ स्पष्ट है—बुद्धि ही वास्तविक शक्ति है (प्रेरित बुद्धि का महत्व)।
2. हितोपदेश
श्लोक:
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।
न चाभावयतः शान्तिः अशान्तस्य कुतः सुखम्॥
(यह श्लोक गीता में भी आता है)
अर्थ:
“जिसका मन संयमित नहीं, उसकी बुद्धि स्थिर नहीं होती;
और जिसकी बुद्धि स्थिर नहीं, उसे शान्ति नहीं मिलती।”
यह दिखाता है कि सही बुद्धि ही जीवन को शान्ति और दिशा देती है।
3. पंचतंत्र
श्लोक (भाव):
“बुद्धिमान व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी उपाय निकाल लेता है।”
यह नीति का मूल सिद्धान्त है—
प्रेरित बुद्धि (प्रचोदयात्) ही समस्या का समाधान करती है।
4. भर्तृहरि नीति शतक
श्लोक:
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्।
विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः॥
अर्थ:
“विद्या (ज्ञान) मनुष्य का श्रेष्ठ रूप और गुप्त धन है;
यह सुख, यश और जीवन की उन्नति देती है।”
यहाँ ज्ञान और बुद्धि का महत्व बताया गया है।
निष्कर्ष--
नीति ग्रन्थों में--
बुद्धि - सबसे बड़ी शक्ति।
विवेक =-सही मार्ग का साधन।
यह सीधे गायत्री मन्त्र के इस भाव को पुष्ट करता है—
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हमारी बुद्धि को सही दिशा में प्रेरित करे
नीचे वाल्मीकि रामायण और अध्यात्म रामायण से कुछ प्रमुख श्लोक उनके सरल अर्थ सहित दिए जा रहे हैं—
1. वाल्मीकि रामायण से श्लोक
(1) राम का धर्मस्वरूप--
श्लोक (अयोध्याकाण्ड 2.109.10)
रामो विग्रहवान् धर्मः साधुः सत्यपराक्रमः।
राजा सर्वस्य लोकस्य देवानामिव वासवः॥
अर्थ:
श्रीराम स्वयं धर्म के साकार रूप हैं। वे सत्यवादी, पराक्रमी और सज्जन हैं। जैसे इन्द्र देवताओं के राजा हैं, वैसे ही राम समस्त लोक के राजा हैं।
(2) सत्य और वचन पालन
श्लोक (अयोध्याकाण्ड 2.18.30)
नाहं जीवितुमिच्छामि विना रामं महायशाः।
अर्थ:
(दशरथ का भाव) — मैं महान यशस्वी राम के बिना जीवित रहना नहीं चाहता।
यह श्लोक राम के प्रति प्रेम और सत्यप्रतिज्ञा का महत्व दर्शाता है।
(3) धर्म की रक्षा
श्लोक (अरण्यकाण्ड 3.37.13)
धर्मेण पालयिष्यामि प्रजाः सर्वाः समाहितः॥
अर्थ:
मैं एकाग्रचित्त होकर धर्म के द्वारा ही सभी प्रजाओं का पालन करूंगा।
2. अध्यात्म रामायण --
(1) राम का ब्रह्मस्वरूप
श्लोक (अध्यात्म रामायण, बालकाण्ड 1.10)
रामो न मानुषो देवः साक्षाद् ब्रह्म परं यतः॥
अर्थ:
राम कोई साधारण मनुष्य नहीं हैं, वे स्वयं परम ब्रह्म (ईश्वर) हैं।
(2) माया और आत्मज्ञान
श्लोक (अध्यात्म रामायण 1.2.20)
मम माया दुरत्यया संसारः स्वप्नवत् स्मृतः॥
अर्थ:
यह संसार मेरी माया से उत्पन्न है और स्वप्न के समान अस्थायी है।
(3) भक्ति का महत्व
श्लोक (अध्यात्म रामायण 6.2.45)
भक्तिरेव गरीयसी नान्यत् साधनमस्ति हि॥
अर्थ:
केवल भक्ति ही सर्वोत्तम साधन है, इसके अलावा कोई अन्य उपाय श्रेष्ठ नहीं है।
गर्ग संहिता और योग वशिष्ठ में प्रमाण --
1. गर्ग संहिता में प्रमाण--
(गोलोक खण्ड, अध्याय 2, श्लोक 28
ज्ञानं परं प्रकाशं च बुद्धेः स्रोतः सनातनम्।
येन मार्गः प्रदर्श्येत तं नमामि परं प्रभुम्॥
अर्थ:
“जो परम ज्ञान और प्रकाश का स्रोत है,
जो बुद्धि को सही मार्ग दिखाता है—उस परम प्रभु को मैं नमस्कार करता हूँ।”
यहाँ स्पष्ट है—
ईश्वर ही बुद्धि को प्रेरित कर सही मार्ग दिखाता है (प्रचोदयात् भाव)
2. योग वशिष्ठ में प्रमाण--
(निर्वाण प्रकरण, उत्तरार्ध 2.18.32)
श्लोक:
बुद्धिरेव हि संसारः तया मुक्तं भवेद् मनः।
बुद्धिं शुद्धां समासाद्य मुक्तिर्भवति नान्यथा॥
अर्थ:
“बुद्धि ही संसार का कारण है;
उसी के शुद्ध होने पर मन मुक्त होता है।
शुद्ध बुद्धि से ही मुक्ति मिलती है, अन्यथा नहीं।”
यह सीधे बताता है—
बुद्धि की शुद्धि और प्रेरणा ही मुक्ति का मार्ग है
(उत्पत्ति प्रकरण 1.2.5)
श्लोक:
यथा दृष्टिः तथा सृष्टिः बुद्धिरेव कारणम्।
शुद्धबुद्धेः प्रसादेन दृश्यते परमं पदम्॥
अर्थ:
“जैसी दृष्टि (बुद्धि), वैसी सृष्टि होती है;
शुद्ध बुद्धि के प्रसाद से परम पद (सत्य) का दर्शन होता है।”
यहाँ
बुद्धि का प्रकाश = सत्य का अनुभव
निष्कर्ष--
गर्ग संहिता → ईश्वर बुद्धि को मार्ग दिखाने वाला
योग वशिष्ठ → शुद्ध बुद्धि = मुक्ति का एक मात्र साधन।
दोनों ग्रन्थ एक ही सत्य कहते हैं
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हमारी बुद्धि को प्रकाशित और प्रेरित करो।
इस्लाम धर्म- में प्रमाण --
क़ुरआन में प्रमाण--
1. सूरह अल-फ़ातिहा (1:6)
आयत:
اِهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
अर्थ:
“हमें सीधा रास्ता दिखा।”
यह ठीक “प्रचोदयात्” (प्रेरित करना / मार्ग दिखाना) के समान भाव है।
2. सूरह अल-बक़रह (2:269)
आयत:
يُؤْتِي الْحِكْمَةَ مَن يَشَاءُ ۚ وَمَن يُؤْتَ الْحِكْمَةَ فَقَدْ أُوتِيَ خَيْرًا كَثِيرًا
अर्थ:
“अल्लाह जिसे चाहता है, उसे हिकमत (बुद्धि/ज्ञान) देता है;
और जिसे हिकमत मिली, उसे बहुत बड़ी भलाई मिली।”
यहाँ स्पष्ट है—बुद्धि (हिकमत) ईश्वर की देन है।
3. सूरह ताहा (20:114)
आयत:
رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا
अर्थ:
“हे मेरे पालनहार! मेरे ज्ञान में वृद्धि कर।”
यह भी बुद्धि/ज्ञान की प्रेरणा की प्रार्थना है।
हदीस में प्रमाण--
1. दुआ (हदीस)
दुआ:
اللَّهُمَّ انْفَعْنِي بِمَا عَلَّمْتَنِي وَعَلِّمْنِي مَا يَنْفَعُنِي وَزِدْنِي عِلْمًا
अर्थ:
“हे अल्लाह! जो तूने मुझे सिखाया है उससे मुझे लाभ दे,
और मुझे वह सिखा जो मेरे लिए लाभदायक हो, और मेरे ज्ञान को बढ़ा।”
यहाँ भी ईश्वर से बुद्धि और सही ज्ञान की प्रेरणा माँगी जा रही है। निष्कर्ष--
इस्लाम में हिदायत (Guidance)
हिकमत (Wisdom)
इल्म (Knowledge)
— ये सब अल्लाह से माँगे जाते हैं।
यह ठीक गायत्री मन्त्र के इस भाव से मेल खाता है—
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हे परमात्मा! हमारी बुद्धि को सही मार्ग में प्रेरित कर।
सिख धर्म में प्रमाण --
गुरु ग्रंथ साहिब में प्रमाण--
ਮਤਿ ਵਿਚਿ ਰਤਨ ਜਵਾਹਰ ਮਾਣਿਕ ਜੇ ਇਕ ਗੁਰ ਕੀ ਸਿਖ ਸੁਣੀ॥
लिप्यंतरण:
Mat vich ratan javāhar māṇik je ik gur kī sikh suṇī
अर्थ:
“यदि गुरु की शिक्षा सुनी जाए, तो बुद्धि (मति) में ही रत्न, जवाहर और माणिक (अनमोल ज्ञान) प्राप्त होते हैं।”
यहाँ स्पष्ट है—गुरु (ईश्वर) बुद्धि को प्रकाशित करता है।
2.ਬੁਧਿ ਪ੍ਰਗਾਸੁ ਭਈ ਮਤਿ ਪੂਰੀ॥
लिप्यंतरण:
Budh pragās bhaī mat pūrī
अर्थ:
“बुद्धि में प्रकाश हुआ और मति पूर्ण हो गई।”
यह ठीक “बुद्धि को प्रेरित/प्रकाशित करना” (प्रचोदयात्) का भाव है।
3. ਗੁਰ ਪਰਸਾਦੀ ਬੁਧਿ ਪਾਈਐ॥
लिप्यंतरण:
Gur parsādī budh pāīai
अर्थ:
“गुरु की कृपा से ही बुद्धि प्राप्त होती है।”
यहाँ भी बुद्धि को ईश्वर/गुरु की देन बताया गया है।
4.जपुजी साहिब (मूल मंत्र का भाव) ਪਉੜੀ:
ਹੁਕਮੀ ਹੋਵਨਿ ਆਕਾਰ ਹੁਕਮੁ ਨ ਕਹਿਆ ਜਾਈ॥
अर्थ:
“सब कुछ परमात्मा के हुक्म (आदेश/प्रेरणा) से होता है।”
यह दर्शाता है कि ईश्वर ही भीतर से मार्गदर्शन करता है।
निष्कर्ष--
सिख धर्म में मति (बुद्धि),
बुद्धि का प्रकाश (प्रगास),
गुरु की कृपा से ज्ञान
— ये मुख्य तत्त्व हैं।
यह गायत्री मन्त्र के भाव से पूर्णतः मेल खाता है—
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हे परमात्मा! हमारी बुद्धि को सही मार्ग में प्रेरित कर।
ईसाई धर्म में प्रमाण --
बाइबिल में प्रमाण
1. याकूब 1:5 (James 1:5)
वचन:
“If any of you lacks wisdom, you should ask God, who gives generously to all…”
हिन्दी अर्थ:
“यदि तुम में से किसी को बुद्धि की कमी हो, तो वह परमेश्वर से माँगे,
जो बिना दोष दिए सबको उदारता से देता है।”
यहाँ स्पष्ट है—बुद्धि (wisdom) परमेश्वर से माँगी जाती है।
2. नीतिवचन-- 3:5-6 (Proverbs 3:5–6)
वचन:
“Trust in the Lord with all your heart… and He will make your paths straight.”
हिन्दी अर्थ:
“अपने पूरे हृदय से प्रभु पर भरोसा रखो…
वह तुम्हारे मार्ग को सीधा करेगा।”
यह ठीक मार्गदर्शन (प्रचोदयात्) का भाव है।
3. भजन संहिता 119:105 (Psalm 119:105)
वचन:
“Your word is a lamp to my feet and a light to my path.”
हिन्दी अर्थ:
“तेरा वचन मेरे पैरों के लिए दीपक और मेरे मार्ग के लिए प्रकाश है।”
यहाँ बुद्धि का प्रकाश और मार्गदर्शन दोनों स्पष्ट हैं।
4. इफिसियों 1:17 (Ephesians 1:17)
वचन:
“God… may give you the Spirit of wisdom and revelation…”
हिन्दी अर्थ:
“परमेश्वर तुम्हें ज्ञान और प्रकाश की आत्मा दे।”
👉 यह सीधे बुद्धि और ज्ञान की दिव्य प्रेरणा को दर्शाता है।
निष्कर्ष--
ईसाई धर्म में
बुद्धि (Wisdom), प्रकाश (Light), मार्गदर्शन (Guidance)
— ये सब परमेश्वर से प्राप्त माने गए हैं।
यह गायत्री मन्त्र के भाव से पूरी तरह मेल खाता है—
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हे परमेश्वर! हमारी बुद्धि को सही मार्ग में प्रेरित कर।
जैन आगमों में प्रमाण --
1. णमोकार मंत्र
मंत्र:
णमो अरिहंताणं।
णमो सिद्धाणं।
णमो आयरियाणं।
णमो उवज्झायाणं।
णमो लोए सव्वसाहूणं॥
भावार्थ:
“अरिहंतों, सिद्धों, आचार्यों, उपाध्यायों और सभी साधुओं को नमस्कार।”
इन महान आत्माओं का स्मरण करने से सम्यक् ज्ञान (शुद्ध बुद्धि) की प्रेरणा प्राप्त होती है।
2. उत्तराध्ययन सूत्र (भाव)
णाणं तु सम्मं, दंसणं च सम्मं।
चरित्तं च सम्मं, एओ मग्गो विमुत्तिए॥
अर्थ:
“सम्यक् ज्ञान, सम्यक् दर्शन और सम्यक् आचरण—
यही मुक्ति का मार्ग है।”
यहाँ सम्यक् ज्ञान (शुद्ध बुद्धि) को प्रमुख स्थान दिया गया है।
3. तत्त्वार्थ सूत्र (1.1)
सम्यग्दंसण-णाण-चारित्ताणि मोक्खमग्गो॥
अर्थ:
“सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र—ये मोक्ष का मार्ग हैं।”
यह स्पष्ट करता है कि
सही ज्ञान (बुद्धि) ही मुक्ति का आधार है।
4. जैन आगम (भाव)
णाणेण विणा न होइ मोखो॥
अर्थ:
“ज्ञान (बुद्धि) के बिना मोक्ष नहीं होता।”
यह सीधे दर्शाता है—
प्रेरित और शुद्ध बुद्धि (प्रचोदयात्) ही जीवन का उद्धार करती है।
निष्कर्ष--
जैन धर्म में सम्यक् ज्ञान (Right Knowledge) सम्यक् दर्शन (Right Vision)
— को जीवन का मूल आधार माना गया है।
यह गायत्री मन्त्र के भाव से पूरी तरह मेल खाता है—
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हमारी बुद्धि को सत्य और मोक्ष मार्ग में प्रेरित करे।
बौद्ध धर्म में प्रमाण ---
1. धम्मपद (श्लोक 1)
पाली (देवनागरी):
मनोपुब्बङ्गमा धम्मा, मनोसेट्ठा मनोमया।
मनसा चे पसन्नेन भासति वा करोति वा॥
अर्थ:
“मन (बुद्धि) ही सभी कर्मों का अग्रदूत है;
यदि कोई शुद्ध मन से बोलता या कार्य करता है…”
यहाँ स्पष्ट है—मन/बुद्धि ही जीवन को दिशा देती है।
2. धम्मपद (श्लोक 282)
नत्थि पञ्ञा समा आभा॥
अर्थ:
“प्रज्ञा (बुद्धि) के समान कोई प्रकाश नहीं है।”
यह सीधे बुद्धि के प्रकाश (प्रचोदयात्) का भाव है।
3. मज्झिम निकाय (भाव)
सम्मा दिट्ठि, सम्मा सङ्कप्पो… (आर्य अष्टांगिक मार्ग)
अर्थ:
“सम्यक् दृष्टि और सम्यक् संकल्प—ये मार्ग के प्रथम अंग हैं।”
यह दर्शाता है कि
सही बुद्धि (Right Understanding) ही मुक्ति का प्रारम्भ है।
4. संयुक्त निकाय (भाव)
पञ्ञा नाम उत्तमं बलं॥
अर्थ:
“प्रज्ञा (बुद्धि) ही सर्वोत्तम बल है।”
यह बताता है कि
प्रेरित बुद्धि ही जीवन का सर्वोच्च साधन है।
निष्कर्ष--
बौद्ध धर्म मेंप्रज्ञा (Wisdom)
सम्यक् दृष्टि (Right View)
सम्यक् संकल्प (Right Intention)
— को अत्यन्त महत्त्व दिया गया है।
यह गायत्री मन्त्र के भाव से पूर्णतः मेल खाता है—
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हमारी बुद्धि को सत्य मार्ग में प्रेरित करे।
पारसी धर्म में प्रमाण--
अवेस्ता में प्रमाण--
1. यास्ना 28.5 (गाथा)
अवेस्तन (देवनागरी लिप्यंतरण):
अता ता वाहीष्टा मनंग्हा अहुरा मज़्दा…
अर्थ:
“हे अहुरा मज़्दा! मुझे श्रेष्ठ मन (वहु मनः) प्रदान करें…”
यहाँ वहु मनः = उत्तम बुद्धि / सद्बुद्धि, जो सीधे “प्रचोदयात्” (बुद्धि की प्रेरणा) के समान है।
2. यास्ना-- 30.2
अवेस्तन (देवनागरी लिप्यंतरण):
श्रुण्वन्तु विश्वे अमृतस्य पुत्राः…
(मूल अवेस्तन में भाव)
अर्थ:
“सभी लोग सुनें और अपनी बुद्धि से विचार करें,
फिर स्वयं सही मार्ग का चुनाव करें।”
यहाँ स्पष्ट है—
मनुष्य को बुद्धि से सत्य मार्ग चुनना चाहिए।
3. यास्ना --43.1
अवेस्तन यथा अहु वैर्यो… (प्रार्थना का भाव)
अर्थ:
“हे प्रभु! मुझे सत्य और धर्म के मार्ग में चलने की प्रेरणा दें।”
यह ईश्वर से मार्गदर्शन और बुद्धि की प्रार्थना है।
4. अवेस्ता (वहु मनः का सिद्धान्त)
भाव:
“वहु मनः (Good Mind) के द्वारा ही मनुष्य अहुरा मज़्दा के सत्य को समझता है।”
यह दर्शाता है—
सद्बुद्धि (Good Mind) ही ईश्वर तक पहुँचने का साधन है।
निष्कर्ष--
पारसी धर्म में वहु मनः (सद्बुद्धि / Good Mind)
अशा (सत्य, धर्म)
— मुख्य तत्त्व हैं।
यह गायत्री मन्त्र के भाव से पूर्णतः मेल खाता है—
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हे परमात्मा! हमारी बुद्धि को सत्य मार्ग में प्रेरित कर।
ताओ (Daoism) और कन्फ्यूशियस में प्रमाण--
ताओ धर्म में प्रमाण--
1. 道德经 (ताओ धर्म)
अध्याय 15
孰能浊以静之徐清?孰能安以动之徐生?
अर्थ:
“कौन है जो अशांत मन को शान्त कर धीरे-धीरे स्पष्टता (ज्ञान) प्राप्त कर सके?
और कौन है जो शान्ति से सही क्रिया उत्पन्न कर सके?”
यहाँ संकेत है—
मन की शुद्धि से बुद्धि स्पष्ट होती है और सही मार्ग मिलता है।
अध्याय 33
知人者智,自知者明。
अर्थ:
“जो दूसरों को जानता है वह बुद्धिमान है, और जो स्वयं को जानता है वह प्रबुद्ध (प्रकाशित बुद्धि वाला) है।”
यह बुद्धि के प्रकाश (प्रचोदयात्) का भाव है।
2. 论语 (कन्फ्यूशियस परम्परा)
अध्याय 2.15
学而不思则罔,思而不学则殆。
अर्थ:
“अध्ययन बिना विचार के व्यर्थ है,
और विचार बिना अध्ययन के खतरनाक है।”
यहाँ स्पष्ट है—
सही बुद्धि (सोच + ज्ञान) ही सही मार्ग देती है।
अध्याय (4.5):
君子喻于义,小人喻于利。
अर्थ:
“श्रेष्ठ पुरुष धर्म (सत्य) को समझता है,
जबकि साधारण व्यक्ति केवल लाभ को समझता है।”
यह विवेकपूर्ण बुद्धि (धर्म-बोध) का महत्व बताता है।
निष्कर्ष---
ताओ धर्म → मन की शुद्धि से बुद्धि का प्रकाश और सही मार्ग
कन्फ्यूशियस परम्परा → विचार, ज्ञान और विवेक का संतुलन।
दोनों परम्पराएँ यह सिद्ध करती हैं कि—
सच्ची बुद्धि और आन्तरिक स्पष्टता ही सही जीवन-पथ देती है
यही गायत्री मन्त्र का भाव है—
“धियो यो नः प्रचोदयात्” = हमारी बुद्धि को सत्य मार्ग में प्रेरित कर
PRASANG
“अधूरी समझ”
मेरे दिल की तड़प तुम समझ न सके,
इस मोहब्बत का मर्म समझ न सके।
ख़्वाब आँखों में हर रात सजते रहे,
उन उजालों का रुख़ समझ न सके।
धड़कनों में छुपी एक सदा गूंजती,
उस पुकारों का अर्थ समझ न सके।
पास रहकर भी दूरी का आलम रहा,
इस क़रीबी का सच समझ न सके।
हर डगर पर निभाने की चाहत रही,
तुम वफ़ाओं का ढंग समझ न सके।
दर्द आँखों से चुपचाप बहता रहा,
लब पे ठहरी शिकायत समझ न सके।
अब कोई भी गिला दिल में बाकी नहीं,
इस खामोशी का रंग समझ न सके।
"प्रसंग" दिल में गहरा समंदर रहा,
उस लहर का असर समझ न सके।
- प्रसंग
प्रणयराज रणवीर
Anant Dhish Aman
कुछ जोकर ऐसे भी होते हैं,
जो हँसते तो दूसरों पर हैं,
पर हँसी के पात्र स्वयं बन जाते हैं।
जोकर होना भी आसान कहाँ है!
जिसमें साहस हो स्वयं पर हँसने का
और दूसरों का मन बहलाने का,
वही असली जोकर कहलाता है।
तुम जो खेल खेलते हो दूसरों पर,
उसे हम हर रोज़ स्वयं पर खेलते हैं।
फर्क बस इतना है कि
अब तक वह समय किसी के हाथ नहीं आया
जो हमारे संघर्ष को चुनौती दे सके।
माना, छोटी-छोटी ऊँचाइयों पर पहुँचकर
अहंकार आ ही जाता है,
पर याद रखना—
विशाल वृक्ष हमेशा झुका ही रहता है,
और उसी में उसकी महानता होती है।
— अनंत धीश अमन
ArUu
कुछ अर्ज़ है किताबी,
कुछ फ़र्ज़ है ज़िंदगी,
चेहरा बदलती रहती है,
पर मर्ज़ है ये ज़िंदगी।।
कभी हँसी के पीछे सिसकती,
कभी खामोशी में चीखती है,
भीड़ में भी तन्हा कर दे,
अजीब-सी साज़िश है ये ज़िंदगी।।
ना मुकम्मल कोई दास्तां,
ना पूरा कोई सफ़र मिला,
हर रिश्ते के टूटने का,
बस एक इकरार है ज़िंदगी।।
नींदों से भी रिश्ता टूटा,
ख़्वाबों ने भी साथ छोड़ा,
आँखों के हर सूखे कोने में,
जमा एक दरिया है ज़िंदगी।।
कभी आईनों में खुद को ढूँढती,
कभी अपनी ही नज़रों से गिरती,
हर रोज़ नया चेहरा ओढ़े,
एक बेवफ़ा किरदार है ज़िंदगी।।
कभी वक़्त के हाथों बिकती,
कभी किस्मत से हारती हुई,
हर साँस पे बोझ रखे,
एक ख़ामोश उधार है ज़िंदगी।।
ArUu ✍️
कभी अपने ही ज़ख्म कुरेदे,
खुद पे ही वार है ये ज़िंदगी।।
ArUu
कुछ अर्ज़ है किताबी,
कुछ फ़र्ज़ है ज़िंदगी,
चेहरा बदलती रहती है,
पर मर्ज़ है ये ज़िंदगी।।
कभी हँसी के पीछे सिसकती,
कभी खामोशी में चीखती है,
भीड़ में भी तन्हा कर दे,
अजीब-सी साज़िश है ये ज़िंदगी।।
कभी आईनों में खुद को ढूँढती,
कभी अपनी ही नज़रों से गिरती,
हर रोज़ नया चेहरा ओढ़े,
एक बेवफ़ा किरदार है ज़िंदगी।।
जिसे समझने निकले थे हम,
वो और उलझाती चली गई,
हाथों से फिसलती रेत-सी,
बस एक एहसास है ज़िंदगी।।
ना मुकम्मल कोई दास्तां,
ना पूरा कोई सफ़र मिला,
हर रिश्ते के टूटने का,
बस एक इकरार है ज़िंदगी।।
नींदों से भी रिश्ता टूटा,
ख़्वाबों ने भी साथ छोड़ा,
आँखों के हर सूखे कोने में,
जमा एक दरिया है ज़िंदगी।।
कभी वक़्त के हाथों बिकती,
कभी किस्मत से हारती हुई,
हर साँस पे बोझ रखे,
एक ख़ामोश उधार है ज़िंदगी।।
ArUu ✍️
कभी अपने ही ज़ख्म कुरेदे,
खुद पे ही वार है ये ज़िंदगी।।
ArUu
कुछ अर्ज़ है किताबी,
कुछ फ़र्ज़ है ज़िंदगी,
चेहरा बदलती रहती है,
पर मर्ज़ है ये ज़िंदगी।।
कभी हँसी के पीछे सिसकती,
कभी खामोशी में चीखती है,
भीड़ में भी तन्हा कर दे,
अजीब-सी साज़िश है ये ज़िंदगी।।
कभी आईनों में खुद को ढूँढती,
कभी अपनी ही नज़रों से गिरती,
हर रोज़ नया चेहरा ओढ़े,
एक बेवफ़ा किरदार है ज़िंदगी।।
जिसे समझने निकले थे हम,
वो और उलझाती चली गई,
हाथों से फिसलती रेत-सी,
बस एक एहसास है ज़िंदगी।।
ना मुकम्मल कोई दास्तां,
ना पूरा कोई सफ़र मिला,
हर रिश्ते के टूटने का,
बस एक इकरार है ज़िंदगी।।
नींदों से भी रिश्ता टूटा,
ख़्वाबों ने भी साथ छोड़ा,
आँखों के हर सूखे कोने में,
जमा एक दरिया है ज़िंदगी।।
कभी वक़्त के हाथों बिकती,
कभी किस्मत से हारती हुई,
हर साँस पे बोझ रखे,
एक ख़ामोश उधार है ज़िंदगी।।
ArUu ✍️
कभी अपने ही ज़ख्म कुरेदे,
खुद पे ही वार है ये ज़िंदगी।।
Satveer Singh
- सत्यवीर सिंह जेतुंग
Piyu soul
Good night everyone 🌙✨
कुछ रिश्ते अजीब होते हैं…
बात कम होती है,
पर एहसास बहुत गहरे होते हैं 💙
कभी-कभी खामोशी भी
सब कुछ कह जाती है…
बस समझने वाला होना चाहिए 😊
🌸
“फासले बढ़े तो क्या हुआ,
एहसास आज भी पास हैं…
तुम याद करो या ना करो,
हम आज भी तुम्हारे खास हैं…”
🌸
Take care 💫
Stay healthy and happy 😊
kattupaya s
my stories are my life. running quitely on my path.
kattupaya s
keep pushing on your limits in storytelling and
move ahead. afterall life is short.
Piyu soul
“कुछ बातें चाय जैसी होती हैं…
ठंडी भी हो जाए तो भी दिल से उतरती नहीं ☕🙂”
kattupaya s
when you realize your stories not having enough attention don't feel bad. you may come again with great skill of storytelling.
kattupaya s
Storytelling is my dream. iam still in first step. still a lot to do
kattupaya s
part 2 @5 30pm tomorrow. 3/4/26
kattupaya s
Goodnight friends.. sleep well
AbhiNisha
आंखें पत्थर बन ही जाए तो अच्छा है
कविता
आंखें पत्थर बन जाए उम्मीद करती हूं
सारे जज्बतें थम जाए ऐ उम्मीद करती हूं
पलके बंद हो जाए ऐ उम्मीद करती हूं
और मैं सो जाऊं उम्मीद करती हूं
सोने के बाद शायद दर्द कम हो जाएंगे
सोने के बाद शायद बेचैनी काम हो जाएंगे
सोने के बाद शायद आराम मिलेंगे
थकावट से चूर हूं
शायद मरघट में जाने के बाद
थमे सासे को नई उम्मीद मिलेंगे
मरघट में परे हड्डियां गाबा है
आखिरी उम्मीद यही है
मौत से कौन डरता है
मौत अंतहीन है तो
मौत अंतहीन भी नहीं
आसान सारे सवालों की जवाब ढूंढना मुश्किल लगता है
मौत के बाद जिंदगी कौन चाहता है
जिंदगी मरघट में जलते मसाले हैं
और इस मसाल को रोज मैंने देखा है
सवेरा होते ही बुझा दिया जाता है
आधी मुर्दा होकर जी रही हूं
जिंदा होने की ख्वाहिश में
पर अब लगता है
थम थम के सांस जो चलते हैं
वह हमेशा के लिए थम ही जाए तो अच्छा है
आंखें पत्थर हो जाए तो अच्छा है
अगर यह कविता आप सबको पसंद आए तो
आगे पढ़ते रहिए
मैं आपके प्रिय लेखक अभी निशा ❤️🦋💯
Anish
प्रेम करना तो ऐसा करना जैसे रेत करती है सागर से, पानी करता है गागर से, आसमान करता है नक्षत्रों से, योद्धा करता है शस्त्रों से, पलकें करती हैं आँखों से, अघोरी करता है राखों से, कांजी करती है धूप से, विश्व-सुंदरी करती है अपने रूप से, कामुक करता है तन से, लोभी करता है धन से, प्रेम करना तो ऐसा करना वर्ना मत ही करना,
तुम्हारे बचपन की पसंदीदा किताब की तरह सहेज के रखना, जब-जब मुझे देखो चेहरे पर मुस्कान रखना,
प्रेम करना तो ऐसा करना वर्ना मत ही करना, क्योंकि क्या है ना, इंद्र जैसा प्रेम करने वाले बहुत हैं, वादा रहा मैं पार्वती जैसा प्रेम करूँगी, पर तुम और मैं मिलकर अर्धनारीश्वर बन जाये ऐसा प्रेम कर सको तो करना वर्ना मत ही करना।
वात्सल्य
मेरे से नफ़रत हो तो बता दो चला जाऊंगा दूर दूर l
हररोज ऐसी हरकत करोगे तो कैसे सेह लूंगा हुँ मै मजबूर ll
- वात्सल्य
वात्सल्य
तूम सागर हो,गेहरा हो,लेकिन पानी तेरे मे खारा है l
फिर भी तूम ईतने जीव को कैसे पालन करते हो ??
- वात्सल्य
Kaushik Dave
જગત ભલે હોય મુસાફરખાનું,
મારે તો કાનાનું દ્વાર છે,
કૌશિક કહે હવે જીવતર મારૂં,
બસ કૃષ્ણના આધાર છે.
- કૌશિક દવે
- Kaushik Dave
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