Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
mohanmurarisharma
फूल समझ के मिलोगे मोहन तो तुम्हारे दिल में खिलूंगा..
अगर जो खार समझोगे तो तुम्हें कदम कदम पर मिलूँगा..
Awantika Palewale
ભીની આંખે સ્મરણોની આ વણઝાર લઈએ,
તમારા દિલમાં થોડો અમારો અધિકાર લઈએ.
સાથે વિતાવેલી એ ક્ષણોની મહેક સાથે રાખી,
જીવનના નવા પથ પર થોડો વિસ્તાર લઈએ.
હતું જે કંઈ પણ સારું-નરસું અહીં છોડીને,
માત્ર સ્નેહનો મીઠો અહીંથી સાર લઈએ.
મળ્યા'તા મુસાફર બનીને આ સુંદર પડાવે,
હવે છૂટા પડીને યાદોનો ઉપહાર લઈએ.
ફરી મળીશું ક્યારેક કોઈ વળાંક પર ‘દોસ્ત’,
ત્યાં સુધી આ મૌનનો હળવો સત્કાર લઈએ.
Kamini Shah
અભરખા જાગ્યાં નાવને
પણ દરિયો ખેડવાનાં
એંધાણ વરતાય કાશ!
કોઈકનાં આગમનનાં…
-કામિની
Dada Bhagwan
The upcoming Satsang and Gnanvidhi is happening in Rajkot, India.
For detailed information, visit here: https://dbf.adalaj.org/QcKgGKce
#spiritualawakening #spirituality #SpiritualKnowledge #DadaBhagwanFoundation #rajkot
Falguni Dost
શબ્દો જો ગોઠવીને બોલવા પડે તો સમજી જવું સબંધમાં ઉણપ છે,
દોસ્ત! રૂડાં દેખાતા સબંધમાં પ્રેમની અતિ ઓછપ છે.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
Saliil Upadhyay
जब मैं स्कूल में था...
एक बहुत ही सुंदर लड़की मुझसे अपना HOME WORK करवाती थी...!
मैं खुशी खुशी कर देता था...!
सब लड़के मुझसे जलते ..!
किस्मत से उसी लड़की से मेरी शादी हो गई...।
पर उसकी पुरानी आदत नही छूटी ...!
वो अब भी मुझसे ही अपना HOME WORK करवाती है..!
अब उसकी सब सहेलियां उससे जलती हैं !!
ठोको ताली...!
Chaitanya Joshi
કર્મપ્રધાન છે જગત આખું.
એથી વિશેષ કોને હું સ્થાપું?
છે કર્મની તો સત્તા વિશાળ,
કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ.
ચારે જુગમાં છે એનો પ્રભાવ.
કરોને પામો એ એનો સ્વભાવ.
ક્યારેક કર્મ નાનું , કદી વિકરાળ,
કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ.
એની આગળ ઈશ પણ હારે.
નાવ ડૂબાડે કે લાવે એ કિનારે.
કુકર્મો કરવાનું મનવા તું ટાળ,
કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ.
તારું કિસ્મત છે તારે જ હાથ,
એમાં કૈં ના કરે જગતનો નાથ.
તજવી ઘટે માયાની મધલાળ,
કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ.
સર્વોપરી સત્તા એની જ ગણાય,
ના હસ્તક્ષેપ ઈશનો ત્યાં જણાય.
મનવા પાણી પહેલાં બાંધવી પાળ,
કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ.
ભોગવ્યાવિણ ના થાય છૂટકારો,
સિદ્ધાંત કર્મનો હોય સૌથી ન્યારો.
ખડકાતા જાય માળ ઉપર માળ,
કર્મ ના ટળતું કોઈ પણ કાળ.
- ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.
Kaushik Dave
जय राधे श्याम 🙏
Shailesh Joshi
વર્તમાન એક એવો મોકો છે, જે
આપણને આપણી
ભૂતકાળની ભૂલો સુધારવાનો,
અને આપણા સારા ભવિષ્યનું
માળખું તૈયાર કરવાનો સમય આપે છે.
- Shailesh Joshi
Neha kariyaal
आने वाला कल कितना भी बुरा हो सकता
लेकिन वो मेरे बीते कल से तो अच्छा ही होगा। 🌼💜
Bhavesh Tejani
ઝાંખી ઝાંખીને જોયુ છે મેં એમની આંખોમાં
મુઠ્ઠીભર જગ્યા પણ મારી ના શોધી શક્યો.
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
अपनी सुनाई दिवानगी
जब अपनी सुनाई दिवानगी तो जान से भी गया l
आगे बढ़ने की ख्वाइशों में उड़ान से भी
गया ll
बोझ समझकर एक के बाद एक छोड़ता ही
गया l
कारवाँ के साथ साथ चलते सामान से भी
गया ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
DrAnamika
वक्त को हाराकर जो जग जीता
उसे ही मिला तख्तोताज़--
विकट परिस्थितियों में छीपा था
उनके जीवन का राज---
--#डॉ_अनामिका---
#हिंदी_काव्य #हिंदी_का_विस्तार
#हिंदी_पंक्तियाँ
Imaran
मैंने खुदा से पूछा वो क्यों छोड़ गया मुझे,
उसकी क्या मजबूरी थी,
खुदा ने कहा न कसूर तेरा था
न गलती उसकी थी,
मैंने ये कहानी लिखी ही अधूरी थी
✍️imran ✍️
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
न स सखा यो न ददाति सख्ये।
ऋगुवेद --10/117/4
भाव--जो मित्र सहायता नहीं करता, वह मित्र नहीं है।
Roshan baiplawat
new emotional shayari 💔🥀
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
तिरस्कार कर पिता को, जब सुत करता तंग। शाप निकलता हृदय से, देख पुत्र का रंग।।
दोहा--407
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
संजय कुमार दवे
હર હર મહાદેવ 🙏🚩
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
Radha Rani
हम सोचते हैं कि क्या है मुझमें जिससे मेरी पहचान बने, नहीं है कोई ऐसा हुनर दिखावे का जो मेरी पहचान बने, कभी कभी कुछ हुनर दिखावे के मोहताज नहीं होते जिनकी की पहचान बने,वक़्त आने पर हम भी चमकने की ताकत रखते हैं पर चुप है सही वक़्त पर मेरी पहचान बने
Bhavesh Tejani
શબ્દ નહિ, સંકેત નહિ, તે પૂછવું કઈ રીત થી ?
આંસુ જે કદી આવ્યું જ નહિ તે લુછવું કઈ રીત થી ?
Abhishek Chaturvedi
परिवर्तन ख़ुद से शुरू होता है....
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
भाइयों और बहनों,
कल से गणेश तिवारी 'नैश' द्वारा लिखी हुयी पुस्तक 'वेदों की सूक्तियों' से नित्य एक सूक्ति का प्रसारण नैशपीठ आध्यात्मिक ऊर्जा केन्द्र नरायनपुर जयसिंह के ॐ चो कु रे ध्वज से होने जा रहा है। आप नैश के दोहे के साथ इसे भी हृदय से स्वीकार कीजिए।-
---नैशपीठ
Saroj Prajapati
मोहब्बत पर हमारी यूं उंगली ना उठाओ
बेवफाई का हम पर यूं झूठा इल्जाम लगाओ
इश्क करते हैं तुमसे बेइंतहा ये मालूम है तुम्हें
फिर भी ना हो यकीं तो अपने दिल से पूछ लो जाओ।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Rima
बिना दाँतों वाला प्यार
मेरे दादाजी…
आज आप इस दुनिया में नहीं हो,
पर मेरी हर थकी हुई साँस
आज भी आपको ढूँढती है।
आपके मुँह में एक भी दाँत नहीं था,
फिर भी चाय आपको बहुत पसंद थी—
गरम प्याली हाथों में लेकर
आप ज़िंदगी को
धीरे-धीरे जीते थे।
मैं जब भी आपके पास जाती,
आप बिना कुछ कहे
मेरे गाल को प्यार से काट लेते थे।
वो दर्द नहीं होता था,
वो प्यार होता था—
बिल्कुल वैसा
जैसे पाँच-छह महीने का बच्चा
अपनी माँ से लिपटकर
अपना सारा प्यार जता देता है।
मैं आपकी सबसे प्यारी थी,
और आप मेरे सबसे अपने।
आपका प्यार शब्दों में नहीं था,
वो चुपचाप
मेरी पूरी ज़िंदगी सँभाल लेता था।
जब आप प्यार से
मेरा नाम लेकर पुकारते थे,
वो आवाज़
आज भी कानों में गूँज जाती है।
लगता है जैसे अभी कहेंगे—
“आ जा बेटा…”
जब आप
अपने हाथों से मुझे खिलाते थे,
तो लगता था
जैसे ज़िंदगी
मुझे दोनों हाथों से थाम रही हो।
आपकी कहानियाँ,
आपका चुपचाप बैठने का तरीक़ा,
वो नज़र
जो बिना बोले सब कह जाती थी—
सब कुछ याद आता है दादाजी,
एक-एक पल।
फिर वो वक़्त आया
जब आप धीरे-धीरे
सबको भूलने लगे।
दुनिया आपसे फिसलती चली गई,
पर आपने मुझे नहीं भूला।
और मैं खुद को
बेहद ख़ुशनसीब मानती हूँ
कि मैं आपकी सेवा कर पाई,
आपको अपने बच्चे की तरह
सँभाल पाई।
वो दिन…
जब मैं आपकी बेटी भी थी,
माँ भी,
और आपकी पूरी दुनिया भी।
आज आप नहीं हो,
और आपके साथ
मेरा मायका भी नहीं रहा।
घर वही है,
पर वो सुकून,
वो प्यार,
वो छाया—
सब आपके साथ चला गया।
लोग कहते हैं
वक़्त सब भुला देता है,
पर कोई ये नहीं कहता
कि कुछ प्यार
याद बनकर नहीं,
दुआ बनकर
ज़िंदगी भर साथ रहते हैं।
आज भी जब चाय की ख़ुशबू आती है,
तो आँखें भर आती हैं—
शायद आप कहीं दूर नहीं,
आज भी
बिना दाँतों के
अपनी प्यारी-सी बच्ची को
प्यार जता रहे हों।
दादाजी…
आपका वो
बिना दाँतों वाला प्यार
आज भी
मेरी सबसे बड़ी ताक़त है।
Mrugzal
કેટલું બેઈમાન છે આ દિલ પણ,
ધબકે છે મારા માટે
અને
તડપે છે ચાય માટે....
#TeaLover
#ચાયના_સથવારે
#Mrugzal
#મરુભુમીના_માનવી
Sudhir Srivastava
संत रविदास जयंती (०१ फरवरी) पर विशेष
चौपाई
माघ मास पूनम को जन्में।
भक्ति भाव था खासा जिनमें।।
पितु संतोष मातु हैं कर्मा।
रविदास ईश प्रभु धर्मा।।
कर्मशील प्राणी रविदासा।
रखता सदा ईश विश्वासा।।
समाजिक सुधार थे लाए।
संत शिरोमणि आप कहाए।।
सामाजिक सद्भाव दिखाया ।
जाति पाति का भेद मिटाया॥
निश्चल धारा भक्ति बहाया।
जीवन का फिर सार बताया॥
कर्म निरंतर करते रहते।
ध्यान मगन रह सदा विचरते।।
गंगा मैय्या आप थीं आईं।
लाज भक्त की मातु बचाईं।।
कभी नहीं मन मैला राखा।
ईश कृपा का फल था चाखा।।
धर्म कर्म की ज्योति जगाए।
योगी संत सुजान कहाए।।
छोटा-बड़ा कर्म नहीं माना।
ईश कृपा को सबमें माना।।
भटक रहा क्यों प्राणी जग में।
ईश्वर तो है तेरे मन में।।
मीराबाई गुरु रैदासा।
सतपथ पर उनका विश्वासा।।
गुरु ग्रंथ में जगह हैं पाए।
भक्ति भजन रसधार बहाए।
सत्य मार्ग दर्शाए ज्ञानी।
दुनिया कहती आप कहानी।।
मीरा के गुरु पद अनुरागी।
अद्भुत संत दास बैरागी।।
जन्म जयंती आज मनाऊँ।
श्रद्धा से नित पुष्प चढ़ाऊँ।
नमन आपको शत-शत बारा।
शीश झुकाए सब संसारा।।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
चौपाई - हनुमंत लाल
धर्म आड़ जो पाप हैं करते।
जहर बीज का बोते रहते।।
कब उनका उपचार करोगे।
पापमुक्त कब धरा करोगे।।
सुनहु बात अंजनि के लाला।
मुख उनका अब करिए काला।।
आप नहीं अब देर लगाओ।
पापी सारे मार भगाओ।।
हनुमत की मिलकर जय बोलो।
केवल मीठा-मीठा बोलो।।
राम भक्त बजरंगी प्यारे।
हर मुश्किल से सदा उबारे।।
सीता जी की खोज किया था।
तांडव लंका दहन किया था।।
संजीवनी शैल थे लाये।
लक्ष्मण मुर्छा मुक्त कराए।।
प्रभु राम के सबसे प्यारे।
सीता माँ के बड़े दुलारे।।
बोले भाले हनुमत लाला।
धाम अवध में डेरा डाला।।
उनको जो भी शीश झुकाता।
रोग शोक उसका भी जाता।।
सेवक बन जो जोड़े नाता।
कृपा राम जी की वो पाता।।
प्रभु भक्त की लज्जा रखिए।
रोग शोक संकट सब हरिए।।
आप चरण हम शीश झुकाएं।
कृपा करो नहिं कष्ट उठाएं।।
*******
चौपाई- शनिदेव
******
शनीदेव जी किरपा कीजै।
भक्तों के सब दुख हर लीजै।।
भक्त आपके डरे हुए हैं।
रोग शोक से घिरे हुए हैं।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
शहीद दिवस (३० जनवरी) पर विशेष
अहिंसा परमो धर्म
***********
राष्ट्र पिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर
आज देश शहीद दिवस मना रहा है,
शहीदों को याद कर नमन कर रहा है,
सच मानिए! सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है।
विचार कीजिए! कि जिस बापू की पुण्यतिथि पर
देश आज शहीद दिवस मना रहा है,
उस बापू के सर्व-धर्म समभाव और
सत्य-अहिंसा के संदेश का
भला कितना अनुसरण कर रहा है?
अहिंसा परमो धर्म: की राह पर चल रहा है?
अन्याय का कितना नैतिक प्रतिकार कर रहा है?
स्वच्छता, नैतिकता, सादगी, स्वालंबन का
कितना अनुसरण कर रहा है?
दीन-दुखियों की सेवा को
कितना मानव धर्म समझ रहा है?
श्रम को पूजा मान कितना परिश्रम कर रहा है?
निज राष्ट्र को जाति-धर्म, भाषा-क्षेत्र,
ऊँच- नीच, भेदभाव से ऊपर कहां मान रहा है?
गाँधी जी के आदर्शो पर भला कितने कदम चल रहा है?
आजादी और शहीदों को सचमुच सम्मान दे रहा है?
आज जनमानस के लिए प्रश्न बड़ा गंभीर है,
जिसका उत्तर हम सबको तलाशने की जरूरत है,
मगर उससे पहले खुद में झाँकने की जरूरत है।
अपवादों का उदाहरण देकर पीठ मत थपथपाइए,
भ्रष्टाचार, अत्याचार, विविध संघर्ष
राजनीति विद्वेष, निजी स्वार्थ और
नैतिक मूल्यों के अवमूल्यन पर भी जरा नजर दौड़ाइए।
शहीद दिवस की आड़ में बापू की गरिमा को
अब और नीचे तो न गिराइए,
शहीदों की आत्माओं को तो न रुलाइए,
यही समय है, सही समय है, अब तो संभल जाइए
दिखावे की परिपाटी पर विराम लगाइए,
राष्ट्र पिता और शहीदों को भले ही भूल जाइए
राष्ट्र भक्त बनिए न बनिए
कम से कम आज शहीद दिवस पर
राष्ट्र भक्त इंसान बनकर तो दिखाइए
तब जाकर शहीदों को श्रद्धा से शीश झुकाइए
बापू की आत्मा को भी गर्व का अहसास कराइए।
वंदेमातरम् और रामधुन साथ -साथ गाइए,
और तब ही आप शहीद दिवस पर मनाइए,
औपचारिकता निभाने से अब बाज आ जाइए
अहिंसा परमो धर्म: का संदेश फैलाइए।
सुधीर श्रीवास्तव
Jyoti Gupta
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Zarnaba
Sometimes - When you're tired, aggressive and alone but you have your MOTHER and she is calling you at same time and say you are angry so take care of yourself ....so you forget everything and feeling some different 🤌🏻
- Zarnaba
Paagla
https://youtube.com/shorts/BJwA0OvfNYY?si=R6WIAMyLved98DX0
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1RfLK745n6/
Suraj Prakash
https://youtube.com/shorts/nR5RQDlSoOs?si=hzc2j3ZhzZjYXYV6
“छाया युद्ध | 7वीं सदी का रहस्यमयी खेल | Hindi Mystery Story”
Falguni Dost
ચાના દરેક ઘૂંટડે તારી યાદ રગે રગમાં હજુ પણ પ્રસરે છે,
ક્ષણભરનો એ પ્રેમાળ સાથ યાદરૂપે જીવનને રોજ સ્પર્શે છે,
તારીખ, મહિના, વર્ષો બધું જ બદલ્યું
દોસ્ત! એજ રહી ચા અને ચાહ જે હજુ હૃદયની ભીતરે છે.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
ek archana arpan tane
રેતી પર હોડી ચલાવો કે પાણી પર મારે શું?હું જ મારી રાખ ઓઢીને સુઇ જઈશ તમે ગમે તેટલો શોર મચાવો મારે શું?
- ek archana arpan tane
Gori
वो बहुत बोलने वाली लड़की
अब शांत सी हो गई है...
सबको खुश रखने वाली लड़की
खुद उदास सी हो गई है.....
वो जो रिश्ते निभाती थी पूरे दिल से कभी,
अब वो रिश्तो से हट गई हैं...
शायद दिल दुखा होगा बहुत उसका
यूं ही तो पत्थर दिल नहीं हो गई है...
वो बहुत हसने वाली लड़की जो
सिर्फ मुस्कुराने पर आ गई है...
उसने खाए होंगे धोखे जमीन वालो से
तभी तो चांद की बातों में आ गई है...
वो अल्लड़ बेबाक सी लड़की
अब खुद को बहलाने में आ गई है...
वो खुशमिजाज वाली लड़की
खुद को समझने पर आ गई...
वो बहुत बोलने वाली लड़की
अब शांत सी हो गई है...
सबको खुश रखने वाली लड़की
खुद उदास सी हो गई है..
वो जो रिश्ते निभाती थी पूरे दिल से कभी,
अब वो रिश्तो से हट गई हैं...
शायद दिल दुखा होगा बहुत उसका
यूं ही तो पत्थर दिल नहीं हो गई है...
वो बहुत हसने वाली लड़की जो सिर्फ
मुस्कुराने पर आ गई है...
उसने खाए होंगे धोखे जमीं वालो से
तभी तो चांद की बातों में आ गई है...
वो अल्लड़ बेबाक सी लड़की
अब खुद को बहलाने में आ गई है...
वो खुशमिजाज वाली लड़की
खुद को समझने पर आ गई...!!
- Gori💙🤍
Bhavna Bhatt
પૌરાણિક પાણી સંગ્રહ
MASHAALLHA KHAN
मै उस कहानी का मैन किरदार हूं
जिस कहानी को कोई समझ पाया नही
लोग आते है पन्ने पटल जाते है
कहानी कोई पूरी पढ़ पाया नही.
M......
MASHAALLHA KHAN
हम उनके लिए कभी कुछ ना थे
फिर भी हम उनके कदरदान थे
कभी अश्क आये ना आंखो मे थे
जब भी आये वो वजह हर बार थे .
M.....
Anup Gajare
"भीड़ बनाम…"
____________________________________________________
गुजरती हैं भेड़
कि तरह हड्डियां भी।
अस्थिया नहीं चाहती
उनके बीच किसी
नाम अनंत,अनाम सत्ता को।
जिसकी भीड़ खाई में कूदी
उनकी आबादी ज्यादा थी या
कम से कम
गठरियों को कोई फर्क नहीं पडा
किस भेड़िए की जुबान क्या
मांग करती है वे जानते हैं
जानते हैं कि खाई से भी बड़ा है
लकड़बग्घों का पेट।
चीखती भेड़ें,
दौड़ती भेड़ें,
निर्मम भेड़े,
प्यासी भेड़े,
कितना छोटा समूह
अलाव में जलता है
कितनों की खाल
बिक्री नहीं हो पाती
वासना अनंत है
हड्डियां मर्यादित।
क्या हो सकता है
से ज्यादा क्या होना चाहिए
इसपर कोई माइक नहीं बोलता
स्टेज के ढांचे पर मुर्दा वही प्रश्न पूछता है
जो उसने कभी न देखे हो।
कुपोषित भेड़ों के बारे में
न तो किसीको खबर है
न ही दरिद्रता से भरी भेड़ों को
कोई जानता है।
सबका अपना अलग विकास है
सपने सा विकास।
झूठ बोलने वाला डिस्क्रिप्शन में
लिखा ही नहीं जाता
भेड़ों को सब पता है
वे जानती हैं
किसकी जेब में कितनी हरी घास हैं।
सुझाव कोई नहीं देता
ये भ्रम है
खाई से उपजा भ्रम
जिसे कोई भूख मिटा नहीं सकी।
दुनिया चलती है
क्या फर्क पड़ता है
उनको पलाना है
इसी जगह में
जिसकी हड्डियां तूती
उसको भी दवा नसीब नहीं होती
सब भेड़े जागते हुए
बेहोशी कि नींद में
भेड़ियों का इंतजार करती है।
और इसी तरह
गुजर जाते है पांच साल
जैसे गुजरती है भेड़े।
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Akanksha srivastava
शब्द
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शब्द बहुत खास होते है।
दिल से निकले तो जज्बात बन जाते है।
मन से निकले तो कहानियाँ रच जाते है।
दुआओं के रूप में निकले तो आशीर्वाद बन जाते है।
भावनाओं का रूप ले तो प्रेम गढ़ जाते है।
संवेदना बनकर किसी का हित कर जाते है।
प्रेरणा का दीप बने तो जीवन सँवार जाते है।
भक्ति बने तो भजन का स्वर बन जाते है।
और शक्ति बनकर हथियार का रूप ले लेते है।
सच ही है की शब्द दुनिया बदलने की ताकत रखते है।
mohanmurarisharma
कोई आजकल ब्रेकअप के लिए नही रोता है..
क्योंकि आजकल विकल्प सुलभ होता है..
Akanksha srivastava
समझदारी की दस्तक
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बचपन की वो शाम शायद उस दिन खत्म हो गयी,
जब हमारे शौक जिम्मेदारियों में तब्दील हो गए।
जिस दिन हमने गिरने से ज्यादा खुद को
संभालना सीख लिया।
बोलने से पहले सोचना सीख लिया।
जिद करने से पहले मान जाना सीख लिया।
पैर फैलाने से पहले चादर मापना सीख लिया।
रिश्तें निभाने से पहले उन्हें परखना सीख लिया।
और शायद तभी से हम बड़े कहलाने लगे।
Kamini Shah
સહનશક્તિની પણ
એક હદ હોય ને
પછી
વાંસળી ની જગ્યાએ
સુદર્શનચક્ર હોય…
-કામિની
Meera Singh
यादों का बोझ बहुत लेकर चले
क्यों न अब थोड़ी देर ठहर लिया जाए।
बहुत जी लिए अब तुम बिन हम
क्यों न अब मर लिया जाए। ।
मीरा सिंह
Bhavesh Tejani
સન્નાટો તારા વિખૂટા પડ્યા પછીનો,
અતીશય વ્હાલ કરે છે મને,
અહીં બસ હું છું, તારા સ્મરણો છે,
ત્રીજા કોઈને મનાઈ છે આવવાની અહીં...
Soni shakya
कभी-कभी सोचती हूं,
मैं भी उसके जैसी बन जाऊं..!
पर दिल कहता है नहीं,
तुम 'वो' नहीं हो..!!
- Soni shakya
Shailesh Joshi
મિત્રો બે પાંચ મિનિટનો સમય કાઢીને પણ એકવાર આપણી પોતાની આસપાસના લોકો, કે પછી કોઈપણ રીતે આપણે જે જે લોકોને ઓળખતા હોઈએ એમની ઉપર, થોડો ઊંડો અભ્યાસ કરી જોજો કે એમાંથી,
ગમે તે કરીને પણ મોજશોખ કરવાવાળા લોકોની ટકાવારી કેટલી ? અને પોતાના જોરે મોજશોખ પૂરા કરવાવાળા લોકોની ટકાવારી કેટલી ? પછી આપણને ખ્યાલ આવી જશે કે, આપણા બધાના જીવનમાં જરૂરી સુખ, શાંતિ અને આનંદ ક્યારે, કેટલો અને કેવી રીતે આવે ?
જુઓ ટૂંકમાં સફળ જીવનનો સાર બતાવતો Motivation youtubeshorts gujarati #quotes 👇 આભાર
https://youtube.com/shorts/hNLevJPxeUA?si=0_mi7MNsJ0Cc_jiX
Pragna Ruparel
આપણી દીકરી
ટીનએજ ની દીકરીઓને પ્રેમ થઈ જાય છે.તે નવી વાત નથી પણ એને સામે નું પાત્ર
કેવું છે.એ જોવાનું કહેવું.અને આ દોરમાંથી સેફ( યાને કે સલામતી) નીકળે એવી તમારે એને હિંમત આપવી.અને સમજાવવું ને જરૂર પડે તો મેન્ટોર ની મદદ લઈ .અને કાઉન્સેલિંગ કરાવવું પણ એને તમારે કેર પણ ખુબજ કરવી.
જય સ્વામીનારાયણ
Mrugzal
હે....મૃગજળ
હર એક ઘૂંટ સુકુન સે ભરી હૈ,
મેં કૈસે કહ દુ કી ચાય બૂરી હૈ…
Dada Bhagwan
પ્રસ્તુત પદ "વર્તમાને જિનેશ્વર સીમંધર સ્વામી" દ્વારા વર્તમાન જિનેશ્વર શ્રી સીમંધર સ્વામી કે જે કેવળજ્ઞાન સહિત છે અને આપણને મોક્ષ પ્રાપ્ત કરવા માટે માર્ગદર્શન પૂરું પાડે એ માટે પ્રાર્થના કરીએ.
Watch here: https://youtu.be/r99jMP9z1U0
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Arth Shah
Once, before memory began, the world was not yet a name. It was a breathing field of possibilities, a restless sea of forms waiting to awaken. Out of that darkness, came a whisper — and the whisper became wind, and the wind began shaping faces. From single cells to scales and feathers, from coral to the first cry of a newborn — the Earth became a vast asylum of creation, a fever dream of variation. It bore everything: beasts with teeth like mountains, trees that spoke in seasons, civilizations that reached for the sun and burned their own wings. Billions of voices bloomed — and just as swiftly, fell silent. Species came and vanished like sparks struck from eternity’s stone. The oceans rose and swallowed empires. The stars watched — patient, cold, indifferent. And yet in that constant vanishing, something miraculous occurred: the awareness of loss. Somewhere among the ruins and pollen, a creature began to remember. It built altars, wrote songs, buried its dead. It called itself human. It looked at the passing clouds and felt sorrow — and named that sorrow beauty. It saw youth fade, flowers wilt, and dreams dissolve — and called that meaning. It wept at what it could not keep — and thought, perhaps, that love was real. But everything it clung to — its gods, empires, and names — slipped quietly into dust. For nothing the world makes lasts longer than the breath that makes it. Each child is a comet — burning only long enough to illuminate the night of its own creation. And still, they come — these fragile sparks — laughing, building, touching, hoping. They paint the world with their fleeting colors, forgetting that even the hand that paints will fade. Yet maybe that’s the secret: that only what dies can be beautiful. The eternal cannot shimmer — it merely is. But the transient — the breaking wave, the falling leaf, the human life trembling between birth and disappearance — carries a light no infinity can hold. Because to know that you are temporary, and still to smile — that is the rarest grace. And so, this vast garden blooms and withers endlessly. Everything that ever lived, lives still — as memory, as dust, as warmth in the unseen air. Each form returns to silence, not in tragedy, but in rhythm. The story was never about survival. It was always about the momentary glimmer — that fragile awareness in the dark. The world is not beautiful despite its impermanence. It is beautiful because of it.
वात्सल्य
*જે ક્ષુપ,છોડ,વૃક્ષ પર પર્ણ,ફૂલ,ફળ લાગે છે,તે હંમેશાઁ ઝૂકેલા જોવા મળશે.*
🌺
*તે છોડ,ક્ષુપ,છોડ પર કાંટા હોય તો તે સખત,વાંકા અને સીધા આકારે જોવા મળે છે.*
*છતાં પર્ણ,ફૂલ,ફળ સાવચેત રહી જીવે છે.*
- વાત્સલ્ય
Jyoti Gupta
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kajal jha
तेरी यादों का साया हर पल साथ रहता है,
दिल की धड़कनों में बस तेरा ही नाम रहता है।
चाँदनी रातों में तेरा चेहरा नज़र आता है,
ख़्वाबों की दुनिया में तू ही तू समा जाता है।
तेरी हँसी से रोशन है मेरी ज़िंदगी का जहाँ,
तेरे बिना लगता है सब कुछ वीरान।
मोहब्बत की राहों में तेरा ही सहारा है,
दिल कहता है तू ही मेरी दुनिया सारा है।
- kajal jha
Imaran
मौत का Kuch पता Nahi✖ है इसलिए बात कर लिया करो,
Kiya पता फिर Yaad😓 करो Aur तब Ham न रहे
😂imran 😂
Pandya Rimple
अपनी दुनिया को चुनिंदा लोगों तक सीमित रखिए, क्यूंकि अत्यधिक कुछ भी हो वो हानिकारक ही होता है।
-Pandya Rimple
@shabdo_ni_suvas_
mohanmurarisharma
कितने ही अच्छे बन लो लेकिन कभी तुम्हारी कोई एक बात तुम्हारी निन्यानवे अच्छाइयों पर भारी पड़ जायेगी.. और तुम बुरे लगने लगोगे..
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
सुहाना मौसम
सुहाने मौसम की रवानी चित को बहका गई l
पहचानी सी आहट धड़कनों को धड़का गई ll
दिखने में तो बड़ा दिवाना लगता है नखराला l
जब चाहे बदल जाने की अदाएं भड़का गई ll
इश्क़ की फितरत तो देखो भरी महफिल में l
हुस्न मालिका के रूख से नकाब सरका गई ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
वात्सल्य
*જલસા કરો તેનો કોઇ વિરોધ નથી,પરંતુ આવકની મર્યાદામાં કરો,કોઈને બોજ ના બનો.કોઈના ઓશિયાળા બની ના જીવો.પૂર્વજની કે પપ્પાની પુંજી પર પાગલપણ એ સમય જતાં પોતાના પગ પર કુહાડી મારવા સમાન છે.પોતાની વીસ-બાવીસ વર્ષની ઉમર પછી સંતાને કોઈના પર બોજ ના બનતાં મનમાં માનેલાં સોણલાં સાકાર કરવાની ઉંમરે ઊંઘી રહેશો તો વૃદ્ધત્વ વહેલું નક્કી સમજો.શુભ સવાર.*
. - વાત્સલ્ય
Parag gandhi
*માણસ ને ભરપૂર માત્રા માં જો કંઇ મળ્યું હોય તો એ છે બુદ્ધિ.....*
*કારણકે આજ દિવસ સુધી કોઈએ ફરિયાદ નથી કરી કે મારામાં ઓછી છે...*🆖💘🌹💫
*💥શુભ સવાર💥*
sachit karmi
जिवन मे प्रेम कि सच्चाई
Std Maurya
शीर्षक -"विदाई"
फूलों की महक मिल रही, उम्र धीरे-धीरे गुजर रही,
वह पुराना समय अब कहाँ से आएगा?
हम थे बागों की चहल-पहल, मगर वो पुराने बाग कहाँ से आएंगे?
चिड़ियों की आवाज़ में हम मगन थे, मगर वो चिड़िया अब कहाँ से आएगी?
कुछ फूलों से मिले, कुछ फूलों से दूर हो गए,
मगर वह पुराना समय अब कहाँ पर आएगा?
अब सुनो मेरी इन नन्हीं कलियों,
हम तो बागों में रहने वाले फूल थे,
अब हम खिल गए हैं, इसलिए बागों में जगह कहाँ?
दस्तूर है हर बाग का, खिल कर महकना पड़ता बागों के आँगन में,
न महको तो फिर तुम फूल कहाँ?
सुनिए मेरे बागों के माली,
हम आपको कोटि-कोटि करते हैं प्रणाम,
आपने ही सींचा है हमें अपनी ममता से,
अब महक कर दुनिया में रोशन करेंगे आपका नाम।
कुछ हसीन शब्दों से
कुछ सुनहरे रंगों से आपका
किताबों के हऱ पन्नों में लिख दूँगा नाम
कलम नहीं मेरी जादू है
मगर दिया हुआ तों आप लोगो वरदान हैं
-सत्येंद्र कुमार "एसटीडी "✍️
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Std Maurya
"इश्क की किताब हम भी लिखेंगे,
अभी अपने रक्त से इंकलाब लिख रहा हूँ।
रक्त बच जाने दो, फिर हम भी
अपनी अधूरी मोहब्बत का हिसाब लिखेंगे।"
- Std Maurya
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
पिता कार्य में पुत्र भल, सदा बँटाए हाथ। काम बढ़ाए पिता का, और निभाए साथ।।
दोहा --407
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
મનોજ નાવડીયા
મને કઈ નહિં આપતા,
આ શ્વાસ પર ઉધારના ચાલે છે,
તું આવ્યો ખાલી હાથે,
આ તન પર ભાર લાગે છે,
તારી સઘળી અનંત ઈચ્છાઓ,
આ મન પણ ભાગ માગે છે,
તું શુન્યવત બની જાય તો,
આ બધું નહીવત લાગે છે.
મનોજ નાવડીયા
संजय कुमार दवे
હર હર મહાદેવ 🙏🚩
smita
तेरी सांवली सूरत पर जब मुस्कान आती है,😊
मेरी धड़कन तेरा नाम गुनगुना जाती है।💖
Sonu Kumar
क्या भारत में सैन्य विद्रोह द्वारा तख्तापलट हो सकता है ?
बिलकुल हो सकता है। पुलिस के अलावा भारत के किसी भी सरकारी या गैर सरकारी संगठन के पास या नागरिको के पास सेना को रोकने के लिए हथियार नहीं है !!
वास्तविक अर्थो में भारत में सबसे ताकतवर संस्था सेना है। सेना के पास हथियार है, हथियार चलाने का प्रशिक्षण है, आदेशो का पालन करवाने और आदेश देने के लिए पद सोपान प्रक्रिया है और वांछित अनुशासन है। दुसरे नंबर पर सबसे शक्तिशाली संस्था पुलिस है। किन्तु भारत की पुलिस के पास सेना की तुलना में नगण्य हथियार है, अतः यदि सेना टेक ओवर करती है, और पुलिस सेना का विरोध करती है तो पुलिस सेना के सामने कुछ घंटें भी नहीं टिकेगी।
भारत की सेना जनरल के कंट्रोल में है, और जनरल पीएम से आदेश लेता है। यदि सेना के कनिष्ठ अधिकारी यह मानने लगते है कि भारत का प्रधानमन्त्री भ्रष्ट या निकम्मा है और देश को गड्ढे में धकेल रहा है. या फिर उन्हें यह लगने लगता है कि पीएम को हटा दिया जाना चाहिए, और यदि ऐसे में जनरल अपने कुछ बरिष्ठ अधिकारियो के साथ मिलकर तख्ता पलट की योजना बनाता है तो जनरल भारत में तख्ता पलट करने में सफल हो सकता है। या मान लो कि जनरल का मूड बन जाता है और यदि जनरल अपने अधीनस्थ अधिकारियो के साथ तख्ता पलट की कोशिश करता है तो उसे रोकने वाला कोई नहीं है है !!
ऐसी स्थिति में सेना को सिर्फ भारत के नागरिक ही रोक सकते है, किन्तु भारत के नागरिक हथियार विहीन है, अतः यदि भारत की सेना विद्रोह कर देती है, तो भारत के नागरिको को फौजी शासन स्वीकार करना होगा। यदि नागरिक सेना के खिलाफ छुट पुट प्रदर्शन करते है तो सेना फायरिंग खोल कर उन्हें आसानी से दबा सकती है। 100-200 नागरिको के गोलियां लगने के बाद नागरिक समझ लेंगे कि प्रदर्शन करने से कोई फायदा नहीं है। और तब सेना खुद को राष्ट्रवादी और प्रदर्शनकारियों को राष्ट्र विरोधी बता कर मामला रफा दफा कर सकता है।
भारत में निरंतर चुनाव होने, जनता का लोकतंत्र में विश्वास होने और सैनिको का सरकार पर भरोसा होने के कारण अब तक कभी तख्ता पलट नहीं हुआ है। क्योंकि जनरल को यह संदेह रहता है कि तख्ता पलट में कनिष्ठ अधिकारी एवं सैनिक जनरल का साथ देंगे या नहीं। किन्तु यदि कोई विदेशी ताकत जैसे अमेरिका आदि भारत में तख्ता पलट करवाना चाहते है तो वे कुछ ही महीनो में गृह युद्ध छिडवाकर, बड़े पैमाने पर आतंकवादी हमले करवाकर, असुरक्षा का भाव उत्पन्न करके एवं राजनैतिक विकल्प हीनता दर्शा कर ऐसे हालात पैदा कर सकते है कि जनरल आसानी से तख्ता पलट कर सकेगा।
जिस देश में राजनेता बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिको के नियंत्रण से बाहर होने लगते है और वे नेताओं को काबू नहीं कर पाते तो ऐसे हालात में विदेशी ताकतें (विशेष तौर पर अमेरिका) देश को कंट्रोल में लेने के लिए सेना का इस्तेमाल करती है। भारत में फिलहाल ऐसा कोई खतरा मौजूद नहीं है क्योंकि भारत की सभी राजनैतिक पार्टियों के सभी नेता पूरी तरह से बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के हाथो बिके हुए है अतः उन्हें अपना एजेंडा भारत में लागू करने के लिए सेना की जरूरत नहीं है।
हालांकि भारत में दो बार ऐसे हालात बने थे जब सेना द्वारा तख्ता पलट की कमजोर सम्भावना होने के संकेत मिलते है।
1) जब श्रीमती इंदिरा गांधी ने बड़े पैमाने पर हथियारों का उत्पादन शुरू किया, बैंको का राष्ट्रीयकरण कर दिया, पाकिस्तान के दो टुकड़े किये और अमेरिका के आगे झुकने से इनकार कर दिया तो अमेरिका ने पहले उन्हें भ्रष्ट जजों (इलाहाबाद का हाई कोर्ट जज जगमोहन लाल सिन्हा) के माध्यम से गिराने की कोशिश की। जब इंदिरा जी ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट पर ताले लगवा दिए तो उन्होंने इंदिरा जी का तख्ता पलटने के लिए सेना को एप्रोच करना शुरू किया था। तब जेपी ने दो बार सार्वजनिक रूप से ऐसी अपील की थी कि यदि इंदिरा गांधी सेना को कोई गलत आदेश देती है तो सेना को उसका पालन करने से मना कर देना चाहिए। और जब पानी सर से ऊपर निकल गया तो इंदिरा जी ने आपातकाल लगाकर पूरा नियंत्रण हासिल कर लिया था।
2) जब देश मनमोहन सिंह से उकताया हुआ था तब. 2012 में जनरल वी के सिंह के कार्यकाल के दौरान हिसार में तैनात "33 आई रेजिमेंट" एवं आगरा की "50 पैरा ब्रिगेड" ने दिल्ली की और कूच किया था। इंडियन एक्सप्रेस ने इसे रिपोर्ट किया था. घटना उस दिन से एक दिन पहले की है जब वी के सिंह को अपने जन्म प्रमाण पत्र से सम्बन्धित मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होना था। सरकार को, रक्षा मंत्रालय को और गृह मंत्री को इस मोबिलाईजेशन की कोई जानकारी नहीं थी। लगभग 18 घंटे तक सरकार असमंजस में बनी रही। प्रोटोकोल के अनुसार बिना रक्षा मंत्री की अनुमति के सेना की कोई भी टुकड़ी दिल्ली की और नहीं बढ़ सकती। बाद में सेना ने स्पष्टीकरण दिया कि यह एक रूटीन एवं औचक प्रोसीजर था। सरकार ने यह बात मानी कि उन्हें नोटिफाईड नहीं किया गया था. किन्तु सरकार ने किसी भी प्रकार के कू (coup) की सम्भावना को सिरे से नकारा।
https://zeenews.india.com/news/nation/army-moved-two-units-towards-delhi-report 768126.html
लोकतंत्र की जननी हथियारबंद नागरिक समाज है। जिस देश के नागरिको की शक्ति उस देश की सेना से अधिक बढ़ जाती है. वहां किसी भी स्थिति में लोकतंत्र का निलम्बन नहीं किया जा सकता। भारत के नागरिक हथियार विहीन है, और यदि सेना विद्रोह कर देती है तो नागरिको के पास उन्हें रोकने के लिए चाकू और नेल क़टर ही है। ब्रिटिश ने सिर्फ । लाख बन्दुक धारियों के माध्यम से भारत के 40 करोड़ नागरिको को 200 सालो तक अपने कंट्रोल में रखा। भारत में 17 लाख की सेना है और सभी हथियारों से लेस है। तो मुकाबले की बात तो भूल ही जाइए। अतः भारत में यदि सेना तख्ता पलट नहीं कर रही है, तो यह केवल चांस की बात है। यदि सेना तख्ता पलट कर देती है तो हम नागरिक "लोकतंत्र वापिस लाओ" के नारे लगाने के सिवा कुछ नहीं कर सकते।
https://www.facebook.com/share/p/1C1XiG4uRM/
#वोट_वापसी_पासबुक
Abhishek Chaturvedi
शिवशक्ति:— तपस्या से प्रेम तक.....
Bhavna Bhatt
વાહેગુરુ જી...
Nadwika
"कल का गौरव आज रद्दी की ढेरी है... हम उस पीढ़ी के अवशेष हैं जिसकी किस्मत अंधेरी है।"
mohanmurarisharma
मिलने पर अब वो नजरेे तो चुराने लगा है..
कैसे कह दें मोहन कि वो हमें भूल गया है..
Heena Ramkabir Hariyani
एक शिक्षा भगवानने दी मुझे "स्त्री" बनाके,
एक शिक्षा मेरी माँ ने दी अहमियत समझाके
हीना रामकबीर हरीयाणी
ArUu
मैं कभी जिक्र नहीं करती या शायद कह नहीं पाती।
पर मेरे पास एक नायाब हीरा है।
बेशकीमती या यू कहूँ अमूल्य
जब सारी दुनियां मेरे खिलाफ हो जाएगी न
मुझे यकीन है
उस वक्त भी वो मेरे साथ खड़ी होगी
भले ही मैं गलत हूं
वो मेरा साथ देगी।
उसके सामने मुझे किसी चीज का डर नहीं रहता।
मैं उसके लिए हर हाल में सही हूं।
❤️
S K I N G
वो मुझे कभी नहीं मिलेगी ये जानकार भी मुझे सिर्फ उसी से प्यार है।
Soni shakya
कोई गिला ना होता अगर ,
ये सिलसिला ही ना होता..!
या तो तु ..मिल गया होता,
या फिर.. मिला ही ना होता..!!
- Soni shakya
pink lotus
aghor subidha me nhi
sunya tame mile 🙏❣️
Narendra Parmar
मुझसे एक गुस्ताखी हों गई है
तुझे बगैर पहेचाने
मोहब्बत जो मुझे हों गई है ।।
नरेन्द्र परमार " तन्हा "
Saroj Prajapati
दुख अपना...खुद ही सहना
फिर क्यों किसी से कहना !
रोकर सुनेंगे, हंसकर उड़ाएंगे
दुख का तेरे तमाशा बनाएंगे।
दुख भी एक मियाद लेकर आता है
एक सीमा के बाद खुद ही कम हो जाता है।
तूफान के बाद हो जाता है सब शांत
दुख लोगों की करा जाता है पहचान।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
स्वच्छतेचं वेड मला
santosh Mishra
एक रात ऐसी आएगी,
जब मैं एक-एक बात लिखूँगा—
न जज़्बात की कोई चाशनी होगी,
न झूठ का कोई सहारा लूँगा।
मैं कागज़ पर तेरे गुनाहों को,
पूरे सबूतों के साथ लिखूँगा।
उस रात अदालत मेरी होगी और गवाह मेरी तन्हाई,
हर फ़ैसला... सिर्फ और सिर्फ मेरे हक़ में होगा।
और तब...
बिना किसी नकाब के, बिना किसी पर्दे के,
तुझे, तेरे नाम के साथ...
ज़माने भर के लिए ‘बेवफ़ा’ लिख दूँगा।
sonika bhawsar
What do you really know of my love,
My Romeo?
What you’ve heard about me—
How much was truth, how much was a lie, who really knows?
Oh, you stole my heart away,
And the thief of my heart became my killer.
Try to understand the depth of my love,
Your words—only you know what they mean.
I understood only you,
Romeo…
Romeo…
If I share your happiness with a smile,
I whisper every secret of your heart.
I speak of love with all my devotion,
And you fall apart when I tell the story.
In your story, my name will always remain,
I salute your love—
Oh my beloved…
Oh my beloved.
Jitin Tyagi
चिढ़ाना तेरा अब मुझे भाने लगा हैं।
कही मुझे तुझसे प्यार तो नहीं होने लगा हैं।
बेमतलब छेड़ना मुझे तेरा अब परेशान नहीं करता
क्या प्यार यहीं होता हैं। जो मुझे तुझसे होने लगा हैं।
गलतियों पर तेरी अब हँसी आती हैं।
ये वही सच्चा वाला प्यार तो नहीं जो अब मुझे तुझसे होने लगा हैं।
Rajiv Jangid
शहर में रात नहीं होती
बिजली के गोले,
समूह में इकट्ठा होकर
सूरज बन जाते हैं
और रात को छिपा लेते हैं।
गाँव में रात और दिन
दोनों होते है समय पर,
वहाँ तारे सूरज का
विकल्प बन जाते हैं।
अब धरती भी बट गई है
दो-दो हिस्सों में,
एक धरती प्रकृति के साथ
और एक प्रकृति के विरुद्ध।
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
मैंने आपके प्यार में...
Shraddha Panchal
शिकायते भी उसीसे
और
भगवान से प्रार्थना में भी ,
जब एक ही शख़्स हो,
समज लो प्रेम करने
की अदा आ गई है हममे ❤️
Archana Singh
चकाचौंध की दुनिया
वो गहरी खाई हैं ,
जिसमें एक बार
पांव रख दिया तो ,
निकलना असंभव हैं...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
पैसें का
"अभाव "
सही हैं , पर ...
पैसें का
" प्रभाव "
घातक हैं ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Jyoti Gupta
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Ankit K Trivedi - મેઘ
વિચાર્યું હશે કે પડ્યા-પડ્યા કાટ લાગી જશે,
અને મૂલ્ય ભંગારનું બની જશે;
પણ આતો વરખ જ કાટ નો હતો ,
એમને ક્યાં ખબર હતી કે ઘસાઈ ને આતો સોનું થઈ જશે.
વિચાર્યું હશે કે શબ્દોની ક્યાં સ્ટોરેજ હોય છે,
એ વાત વાત માં ભૂલી જશે;
એમને ક્યાં ખબર છે કે શબ્દોના વાક્યો બની ,
આખી પુસ્તકાલય ભરાઈ જશે.
©- અંકિત કે ત્રિવેદી 'મેઘ'
ek archana arpan tane
કેટલાક સંબંધો દેવદુતો સાચવે છે તોડેલા તુટતાં નથી પણ વધારે મજબૂત બને છે.
- ek archana arpan tane
Thakor Pushpaben Sorabji
જીતી ગઈ આજે હું
હારી ને પણ"કાના"
હારમાં પણ જીત મળી મુજને
બસ છે જ્યાં તારો મારો
સથવારો વ્હાલા!
જય શ્રી કૃષ્ણ:પુષ્પા.એસ.ઠાકોર
- Thakor Pushpaben Sorabji
Shefali
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Bk swan and lotus translators
The concept of Bharat Mata (Mother India) wasn’t created by a single person at one specific moment; rather, it evolved through literature and art during the late 19th and early 20th centuries as a symbol of Indian nationalism.
Here is the timeline of how the "Mother" came to life:
1. The Literary Origins (Late 1800s)
* 1866: One of the earliest mentions of a mother-nation figure appeared in Bhudeb Mukhopadhyay’s satirical work Unabimsa Purana (The Nineteenth Purana).
* 1873: A play titled Bharat Mata by Kiran Chandra Bandyopadhyay was performed in Bengal. It depicted the motherland as a woman suffering under colonial rule, inspiring rebels to fight for her.
* 1882: The concept truly took hold in the public imagination with Bankim Chandra Chattopadhyay’s famous novel, Anandamath. It contained the hymn "Vande Mataram" (I bow to thee, Mother), which personified the nation as a goddess and became the anthem of the freedom struggle.
2. The Visual Birth (1905)
While the idea was in books, the first famous visual depiction was created in 1905 by the artist Abanindranath Tagore (nephew of Rabindranath Tagore).
* The Context: It was painted during the Swadeshi Movement, a protest against the British partition of Bengal.
* The Transformation: Tagore originally titled the painting Banga Mata (Mother Bengal) but later renamed it Bharat Mata to give it a pan-Indian appeal.
* The Image: He depicted her as a saffron-clad, four-armed ascetic (Sadhvi) holding:
* A book (Knowledge)
* Sheaves of paddy (Food)
* A white cloth (Clothing)
* A rosary/mala (Spiritual strength)
3. Religious and Political Evolution (1930s)
The concept shifted from a purely nationalist symbol to a semi-religious one.
* 1936: The first Bharat Mata Temple was inaugurated by Mahatma Gandhi in Varanasi. Notably, this temple contains no traditional idol but a large marble relief map of undivided India, emphasizing that the "Mother" is the land itself.
Summary Table
| Year | Key Contributor | Form |
|---|---|---|
| 1873 | Kiran Chandra Bandyopadhyay | Play titled Bharat Mata |
| 1882 | Bankim Chandra Chattopadhyay | Novel Anandamath ("Vande Mataram") |
| 1905 | Abanindranath Tagore | First iconic painting of Bharat Mata |
| 1936 | Shiv Prasad Gupta | First Bharat Mata Temple (Varanasi) |
Priya
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