Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
kattupaya s

Two of my short stories will going to be published on matrubharti on 22/3/26 and 23/3/26.please read the stories and expecting your support and love.

Anjali Singh

हाथ में दीया लेकर बॉयफ्रेंड ढूंढने निकली हूँ मैं, किस्मत भी कमाल करती है। हवा इतनी तेज़ चलती है कि हर बार दीया ही बुझा देती है! 🕯️💨😂 – A Singh

Saliil Upadhyay

હિન્દુ નવવર્ષ ની ખૂબ ખૂબ શુભેચ્છાઓ 💐💐 અને આજ થી શરૂ થતા ચૈત્રી નવરાત્રી ની ખૂબ ખૂબ શુભેચ્છાઓ અને માતાજી તમારી બધી મનોકામનાઓ પુરી કરે 💐 જય માતાજી 🙏🏻💐

SAYRI K I N G

हम तो कर्ण जैसे है स्वयं नारायण हमको हराने पर अड़े है

Chaitanya Joshi

માં શૈલતનયા. શરણાગત છીએ માં શૈલતનયા. ભજનરત છીએ માં શૈલતનયા. દુ:ખહર્તા સુખદાયની માતા; સ્મરણ સેવકને સુખદાતા. વંદન શતશત માં શૈલતનયા. આદ્યશક્તિ માં કરુણાકારી, કરોને દયા તમે હેત પ્રસારી. તમે રાખોને પત માં શૈલતનયા. શિવા સ્વરૂપ માં અંતરયામી, વિનવું માં તમને શીશ નમામી. પ્રનવઉ શરણાગત માં શૈલતનયા. બુદ્ધિ દેજો શક્તિ દેજો માં તમે, ભક્તિ દેજો અનુરક્તિ દેજો તમે. રહે મસ્તક ઉન્નત માં શૈલતનયા. -ચૈતન્ય જોષી દિપક, પોરબંદર.

Sonu Kumar

धनवापसी पासबूक क्या है? इससे कैसे देश की गरीबी खत्म हो जाएगी? . धन वापसी पासबुक एक प्रस्तावित क़ानून है जो भारत के खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोकने के लिए लिखा गया है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य खनिजो का राष्ट्रीयकरण करके इसे भारतीय नागरिको की संपत्ति घोषित करना है, ताकि भारत की रीढ़ की हड्डी टूटने से बचाया जा सके। इसका एक स्वत: प्रभाव यह भी होगा कि भुखमरी दूर होगी, और एक सीमा तक गरीबी में भी कमी आएगी। . ( गरीबी दूर करने के लिए धनवापसी के अलावा हमें पुलिस-अदालतें एवं टेक्स के क़ानून दुरुस्त करने के लिए जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर लागू करने की भी जरूरत है, ताकि बड़े पैमाने पर छोटे एवं मझौले स्तर के कारखाने लगने का रास्ता साफ़ हो सके। ) . (1) खनिजो की लूट से क्या आशय है ? . पिछले 400 वर्षो से खनिज ऐसा क्षेत्र में जिसमें भ्रष्टाचार कम और सीधी लूट ज्यादा है। खनिजो को लूटने वाला वर्ग इतना ज्यादा ताकतवर है कि इस लूट में छोटी मछलियों के आने की कोई गुंजाईश ही नहीं है। यहाँ लड़ाई सीधी शार्को के बीच है। उदारहण के लिए ईस्ट इण्डिया कम्पनी खनिज लूटने के धंधे में थी। . पेड मीडिया के प्रायोजक यानी अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार निर्माता पिछले 400 सालों से यह कारोबार कर रहे है। पहले उन्होंने निर्णायक हथियार बनाए और फिर उन्होंने माइनिंग कंपनियां भी खोली। आज भी खनन के बहुत सारे ऐसे क्षेत्र में जिसमें काफी आधुनिक मशीनरी का इस्तेमाल होता है। और ये मशीने सिर्फ कुछ गिनी चुनी कंपनियों को ही बनानी आती है। माइनिंग से बड़े पैमाने पैसा वही बना सकता है, या खनिज वही लूट सकता है जिसके पास ये मशीनरी हो। . उदाहरण के लिए, तेल निकालने की तकनीक दुनिया में सिर्फ 25-30 कंपनियों के पास ही है। तो जिस कम्पनी को इन कम्पनियों के मालिक ये मशीनरी देते है, वही कम्पनी खनिज निकाल पाती है। प्रथम एवं द्वितीय विश्व युद्ध कोयले, कच्चा तेल और स्टील के लिए लड़ा गया। खाड़ी युद्ध भी कच्चे तेल के लिए हुआ था। ब्रिटिश-फ्रांसिस संघर्ष का कारण भी खनिज थे। अभी ईरान पर भी जो युद्ध आने वाला है, वह भी खनिज (तेल) के लिए है। . डेमोक्रेसी आने से पहले तक पेड मीडिया की प्रायोजक (हथियार निर्माता) किसी देश के खनिज लूटने के लिए सीधे सेना का इस्तेमाल करते थे। डेमोक्रेसी आने के बाद वे पेड मीडिया एवं युद्ध की धमकी देकर पहले पीएम को कंट्रोल करते है और फिर कानूनी रूप से खनिज लूटते है। और जो पीएम खनिज बचाने के लिए जाएगा उसे अंततोगत्वा युद्ध में जाना पड़ेगा। कोई दया नहीं, कोई अपवाद नहीं !! दुसरे शब्दों में, खनिज को लेकर जो संघर्ष होता है, उसका निर्णय युद्ध से ही होता है। . तो पेड मीडिया के प्रयोजको से सारा टकराव खनिजो की लूट को लेकर ही है। उन्हें खनिज लूटने है सिर्फ इसीलिए वे इतने बड़े मीडिया का खर्चा उठाते है, और उठा पाते है। यदि वे मुफ्त के खनिज नहीं लूट पाएंगे तो पेड मीडिया का घाटा भी नहीं उठा पायेंगे। . उन्हें खनिज लूटने है इसीलिए वे राजनैतिक पार्टियों का खर्चा उठाते है, और उन्हें स्पोंसर करते है। उन्हें खनिज लूटने है इसीलिए उन्हें पीएम पर कंट्रोल चाहिए, जजों पर कंट्रोल चाहिए, पुलिस पर कंट्रोल चाहिए। उन्हें खनिज लूटने है, इसीलिए वे नागरिको को हथियार विहीन रखना चाहते है, और यह भी चाहते है कि अमुक देश अपने हथियारों का उत्पादन स्वयं न कर पाए। सार यह है कि सारी वैश्विक लड़ाई सिर्फ मुफ्त के खनिज एवं प्राकृतिक संसाधनों को लेकर है। . स्टेंडर्ड ऑइल का उदाहरण देखिये। यह कम्पनी खनिज लूटने में अग्रणी कम्पनी रही है। ऑइल रिफायनिंग की इस कम्पनी को 1870 में रोकेफेलर ने बनाया था, और 1911 में इसे कई हिस्सों में विभाजित करके भंग कर दिया गया। 1910 तक दुनिया का 70% तेल यही कम्पनी खोद रही थी। आज भी दुनिया का 40% तेल इसी के कब्जे में है। हालांकि अब इस कम्पनी की सभी सबसिडरी कम्पनीयों को ट्रेक करने में आपको 2-3 घंटे गूगल करना पड़ेगा !! अम्बानी की रिफायनिंग स्टेंडर्ड ऑइल की सबसिड़री कम्पनी की मशीनों पर ही चलती है। और इसी तरह से ये कोयला, लोहा, ताम्बा से लेकर सभी महत्त्वपूर्ण खनिज खोदते है। Standard Oil - Wikipedia . और मझौले स्तर पर मित्तल, वेदांता, टाटा, जिंदल से लेकर अम्बानी, बिरला अडानी तक ऐसे कई कारोबारी है तो खनिजो की लूट के धंधे में है। . खनिजो की लूट इतने खुले तौर पर और इतनी सफाई से की जाती है, कि पूरे देश को मालूम ही नहीं होता कि किस पैमाने पर खनिज लूटे जा रहे है। पेड मीडिया इस बिंदु को टच ही नहीं करता। ज्यादा से ज्यादा वे स्थानीय स्तर पर हो रहे बजरी, पत्थर आदि चिल्लर किस्म के खनिजो का मुद्दा उठाते रहते है, ताकि बड़ी लूट को चर्चा से बाहर रखा जा सके। . 2019 में आवंटित की गयी कुछ कोयला खदानों का उदाहरण देखिये। निचे दिए गए आंकड़े भारत सरकार की अधिकृत वेबसाईट से लिए गए है — Coal Mine Allocation . 154 रू प्रति टन 156 रू प्रति टन 185 रू टन 230 रू प्रति टन 715 रू प्रति टन 755 रू प्रति टन 1100 रू प्रति टन 1230 रू प्रति टन 1674 रू प्रति टन . दरों में इस तरह की भिन्नता क्यों ? 154 रुपये से 1674 रुपये !! लगभग 11 बार !! एक वैध कारण यह है कि -- कोयले की गुणवत्ता में संभावित भिन्नता है। लेकिन यह एक मात्र कारण नहीं है। दूसरा और वास्तविक कारण यह है कि - कई मामलों में गठजोड़ बनाकर नीलामी की शर्तों को इस तरह से ड्राफ्ट किया जाता है ताकि लक्षित कम्पनी को चिल्लर दामों में माइनिंग राइट्स दिए जा सके। . इस कारण को समझने के लिए सलंग्न तस्वीर देखें — कोयला मंत्रालय की वेबसाईट बताती है कि, कोई भी बोली लगा सकता है, लेकिन साथ में उन्होंने यह शर्त भी जोड़ी है कि अंत में उनके पास स्टील या सीमेंट का संयंत्र होना चाहिए। . तो प्रत्येक "खुली नीलामी" में इन शर्तों के अलावा भी वे ऐसी कई शर्तें जोड़ते है, जो कहती है कि यदि आपके पास संयंत्र हो तो इसे अमुक खदान से अमुक दूरी पर ही होना चाहिए !! और अमुक संयंत्र को इतनी उतनी क्षमता का होना चाहिए। तो अंत में सिर्फ वे कुछ बड़े खिलाड़ी ही बोली लगा सकेंगे जिन्हें लाभ देने के लिए यह शर्त जोड़ी गयी थी !! तो इस तरह वे कार्टेल बनाते हैं और कीमतों को कम बनाए रखते है। इसके अलावा, माइनिंग ब्लॉक का आकार इतना बड़ा रखा जाता है कि छोटे खिलाड़ी इसमें प्रतिभागी न बन सके। . यदि हम क़ानून छापकर इस कार्टेल को तोड़ देते है तो ज्यादा प्रतिष्ठान बोली लगाने आयेंगे और हमें सभी खदानों के लिए 1600 रुपये प्रति टन के हिसाब से रॉयल्टी मिलेगी। धनवापसी पासबुक का क़ानून इसी तरह के गठजोड़ एवं कार्टेल बनाने की प्रक्रिया को तोड़ने के लिए लिखा गया है। . अभी यहाँ से भ्रष्टाचार शुरू हुआ है। अगले स्तर का भ्रष्टाचार और भी व्यापक है। वे जितना खनिज निकालते है, उसका सिर्फ 10-20% ही रॉयल्टी चुकाते है। राइट्स लेने के बाद ज्यादातर खनिज अवैध रूप से निकाल लिया जाता है। इसकी कहीं एंट्री नहीं होती, और इसीलिए उन्हें रॉयल्टी भी नहीं चुकानी पड़ती !! वे सीधे मंत्रियो / जजों आदि को हफ्ता पहुंचा देते है, और मंत्रियो का आदेश आने के बाद कोई खनिज अधिकारी उनकी माइंस को सुपरवाइज करने कभी नहीं जाता !! तो उन्हें जितने इलाके की माइंस मिलती है वे उससे 5 गुना ज्यादा अतिक्रमण करके खनिज निकालते है। . उदाहरण के लिए जिंदल को 2010 में भीलवाड़ा में माइंस आवंटित हुयी थी। और जिंदल ने सभी नियमों की धज्जियाँ उड़ा कर खनिज निकाले। माइंस से लगे हुए कस्बे (पुर) की हालत यह है कि वहां के नागरिको को कस्बे से पलायन करना पड़ा। लगभग 300-400 मकान इस हद तक क्षतिग्रस्त हो चुके है कि उन्हें अपने मकान छोड़कर अन्य जगहों पर किराए पर रहना पड़ रहा है। NGT takes Jindal Saw's Bhilwara unit to task for non-compliance | Jaipur News - Times of India . पिछले 7 साल से भीलवाड़ा में जिंदल को भगाने का अभियान चल रहा है। बार बार धरने, प्रदर्शन, जुलुस, ज्ञापन वगेरह होते है, किन्तु खनन जारी रहता है। सभी पेड मीडिया पार्टियों के नेता समय समय पर जिंदल के खिलाफ प्रदर्शन का ड्रामा करते रहते है। . ड्रामा इसीलिए क्योंकि पेड मीडिया पार्टियो के ये सभी नेता खनिजो की इस लूट को रोकने के लिए आवश्यक क़ानून का विरोध करते है। यदि पेड मीडिया पार्टियों के नेता धन वापसी पासबुक क़ानून को गेजेट में छापने की मांग करेंगे तो पहला नुकसान यह होगा कि पेड मीडिया इन्हें कवरेज देना बंद कर देगा, और दूसरा नुकसान यह होगा कि, जिंदल उन्हें चंदा / घूस देना बंद कर देगा। तो ड्राफ्ट विहीन मांग को लेकर जनहित याचिकाओ एवं हवाई विरोध प्रदर्शन के ड्रामें चलते रहते है। और भीलवाड़ा में समाधान को टालने के लिए समस्या उठाने का यह ड्रामा पिछले 7 वर्षो से चल रहा है !! . और भारत में इस तरह की हजारो ( हाँ, सैकड़ो नहीं हजारो) माइंस है, जहाँ इसी तरह की लूट चल रही है। इस लूट का कोई हिसाब-किताब लेखा जोखा नहीं। औसतन 100 रू के खनिज 20 रू में खोद लिए जाते है। तो यहाँ भ्रष्टाचार नहीं है, सीधी लूट है। . उदाहरण के लिए जब ब्रिटिश भारत से गए तो टाटा को कई सारे माइनिंग राइट्स फ्री में देकर गए थे, और उनमें से एक माइंस की खबर सामने आने में 70 साल लग गए। टाटा के पास झारखण्ड में 25 पैसे एकड़ के हिसाब से कोयला खोदने के राइट्स है !! मतलब वह साल का 1 रूपया चुकाता है, और मर्जी पड़े जितना कोयला निकालता है। आज तक भारत में एक भी प्रधानमंत्री की हिम्मत नहीं हुई कि वह टाटा को नोटिस भेजकर 25 पैसे की जगह 50 पैसे कर सके !! बाजार भाव की तो बात ही भूल जाइए !! ( बाजार भाव 1500 से 2000 रू टन है ) . सारी निर्माण इकाइयां, कारखाने, औद्योगिक विकास आदि कच्चे माल की सस्ती उपलब्धता पर निर्भर करता है। दुर्भाग्य से भारत में खनिजो की पहले से कमी है। इसी खनिज को लूटने के लिए ब्रिटिश-फ़्रांसिस साम्राज्य भारत में आये। जब भारत आजाद हुआ तो नागरिको ने यह मांग की थी कि भारत के प्राकृतिक संसाधनों को भारत के समस्त नागरिको की संपत्ति घोषित करो। किन्तु जिन लोगो के हाथ में सत्ता आयी थी वे नागरिको की इस संयुक्त संपत्ति को खुद के कब्जे में रखना चाहते थे। अत: उन्होंने इन संसाधनों को सरकारी अधिकार में ले लिया। . और आज सरकारे जो खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन लुटा रही है, वह भारत के समस्त नागरिक की संपत्ति है। यदि हमारे पूर्वजो ने अंग्रेजो से लोहा लेकर उन्हें यहाँ से नहीं भगाया होता तो यह संपत्ति बचती नहीं थी। . यदि भारत के नागरिक यह क़ानून लाने में सफल नहीं होते है तो जल्दी ही भारत के खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन (प्राकृतिक संसाधन में जमीन स्पेक्ट्रम आदि भी शामिल है) लूट लिए जायेंगे। और यदि एक बार हमने प्राकृतिक संसाधन गँवा दिए तो भारत औद्योगिक विकास के लिए हमेशा के लिए परजीवी हो जाएगा। क्योंकि जो देश कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हो जाता है उसकी रीढ़ हमेशा के लिए टूट जाती है। धनवापसी क़ानून इस लूट को रोक देगा। . ———— . (2) समाधान - प्रस्तावित धनवापसी पासबुक . इस क़ानून का सार : इस प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में छपने के तुरंत बाद भारत सरकार के नियंत्रण में मौजूद सभी खनिज एवं प्राकृतिक संसाधन देश के नागरिको की संपत्ति घोषित हो जायेंगे, और देश के समस्त खनिज+स्पेक्ट्रम+सरकारी भूमि से प्राप्त होने वाली रॉयल्टी एवं किराया 135 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाता नामक बैंक एकाउंट में जमा होगा। इकट्ठा हुयी इस राशि का 65% हिस्सा हर महीने सभी भारतीयों में बराबर बांटा जाएगा और 35% हिस्सा सेना के खाते में जाएगा। . खनिजो की नीलामी करके पैसा इकठ्ठा करने वाला राष्ट्रिय खनिज रॉयल्टी अधिकारी धन वापसी पासबुक में दायरे में होगा और नागरिक पटवारी कार्यालय में जाकर उसे नौकरी से निकालने के लिए अपनी स्वीकृति दे सकेंगे। यदि खनिज अधिकारी या उसके स्टाफ के खिलाफ घपला करने की या अन्य कोई शिकायत आती है तो सुनवाई करने और दंड देने की शक्ति जज के पास न होकर आम नागरिको की जूरी के पास रहेगी। यह क़ानून देश की सभी खदानों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाता है। . इस क़ानून को संसद से पास करने की जरूरत नही है। प्रधानमंत्री इसे सीधे गेजेट में छाप सकते है। . (1) इस क़ानून के गेजेट में छपने के 30 दिनों के भीतर प्रत्येक मतदाता को एक धनवापसी पासबुक मिलेगी। तब भारत की केंद्र सरकार को होने वाली खनिज रॉयल्टी, स्पेक्ट्रम रॉयल्टी और केंद्र सरकार द्वारा अधिगृहीत जमीनों के किराये से प्राप्त राशि का 65% हिस्सा भारत के नागरिकों में समान रूप से बांटा जायेगा, और हर महीने यह धनराशि सीधे आपके बैंक खाते में जमा होगी। शेष 35% हिस्से का उपयोग सिर्फ सेना में सुधार के लिए खर्च होगा। जब आप राशि प्राप्त करेंगे तो इसकी एंट्री धन वापसी पासबुक में आएगी। . (2) यह कानून ऐसा कोई वादा नहीं करता कि आपको प्रति महीने 500 रू या 1000 रू या कोई स्थिर राशि प्राप्त होगी। यदि खनिजों / स्पेक्ट्रम का या जमीनों का बाजार मूल्य बढ़ता है तो आमदनी और किराया बढ़ सकता है। लेकिन यदि खनिज आमदनी और किराया घटता है तो नागरिकों को हर महीने मिलने वाली यह राशि भी घटेगी। स्पष्टीकरण : खनिज रॉयल्टी के रूप में मिलने वाली यह राशि सरकार की तरफ से दिया गया अनुदान या सहायता नहीं है। चूंकि, देश के खनिज संसाधनों पर देश के सभी नागरिको का बराबर हक़ है अत: यह राशि सभी भारतीयों को बराबर मिलेगी, और सरकार गरीब-अमीर के आधार पर इसके वितरण पर ऐसा कोई नियम नहीं लगाएगी, जिससे गरीब आदमी को ज्यादा हिस्सा एवं अमीर आदमी कम पैसा मिले। किन्तु यदि प्रधानमंत्री प्रस्तावित टू चाइल्ड पालिसी क़ानून गेजेट में छाप देते है तो टू चाइल्ड पालिसी के ड्राफ्ट में दिए गए निर्देशों के अनुसार संतानों की संख्या के आधार पर नागरिको को प्रति माह प्राप्त होने वाली खनिज रोयल्टी में कटौती / बढ़ोतरी होगी। . (3) राष्ट्रीय सम्पत्तियों पर नागरिको के स्वामित्व की घोषणा : भारत के नागरिक देश की सभी खदानों, स्पेक्ट्रम, IIM अहमदाबाद को शामिल करते हुए सभी IIM के भू-खंडो, जेएनयू के भू-खंडो, यूजीसी द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों जिनका स्वामित्व निजी कंपनियों या ट्रस्टो के पास नहीं है, के भू-खंडो को संयुक्त और समान रूप से भारतीय नागरिकों के स्वामित्व की संपत्ति घोषित करते है। अब से ये भू-खंड भारत की राज्य सरकार या भारत की केंद्र सरकार या किसी अन्य सरकारी पक्ष या निजी पक्ष की संपत्ति नहीं है। भारत के सभी अधिकारीयों, प्रधानमंत्री, हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के न्यायधीशो से विनती की जाती है कि, भारत के नागरिको के उपरोक्त फैसले के विरुद्ध कोई भी याचिका स्वीकार ना करे। . निम्नलिखित मंत्रालयों और विभागों के सभी भू-खंड राष्ट्रीय खनिज अधिकारी के क्षेत्राधिकार में आयेंगे : विज्ञान-चिकित्सा-गणित-इंजीनियरिंग को छोड़कर IIM, UGC द्वारा पोषित सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय एयरपोर्ट, एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइन्स के स्वामित्व वाले सभी भवन पर्यटन एवं संस्कृति मंत्रालय उपभोक्ता मामलें एवं लोक वितरण मंत्रालय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय लघु उद्योग एवं कृषि एवं ग्राम उद्योग मंत्रालय कपड़ा उद्योग मंत्रालय युवा मामलें और खेल मंत्रालय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय मानव संसाधन विकास मंत्रालय ग्रामीण विकास मंत्रालय सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण मंत्रालय शहरी विकास एवं गरीबी उपशमन मंत्रालय राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग एवं नीति आयोग . (4) राष्ट्रीय खनिज रॉयल्टी अधिकारी का निजी व्यक्तियों, कंपनियों, ट्रस्टों, राज्य सरकारो एवं नगर/ जिला शासन के स्वामित्व वाले भू-खण्डों, सेना, न्यायालयों, जेलों, रेलवे, बस स्टेशनों, कक्षा 12 तक के सरकारी विद्यालयों और कर संग्रहण कार्यालयों द्वारा उपयोग में लिए जा रहे भू-खण्डों पर कोई अधिकार नहीं होगा। . (5) खनिज रॉयल्टी अधिकारी 1947 से पहले एवं बाद में लीज पर दी गयी सभी लीज शुदा खदानों की लीज का बाजार भाव से पुनर्मूल्यांकन करके तय करेगा कि क्या अमुक खदान की रॉयल्टी राशि बढ़ाई जानी चाहिए या नहीं। देश की अन्य सभी खदानों, कच्चे तेल के कुओ आदि से होने वाली आय भी NMRO प्राप्त करेगा। . #DhanVapsiPassbook का सारांश समाप्त . धनवापसी पासबुक का पूरा क़ानून यहाँ देखें - Facebook.com/pawan.jury/posts/2212549868863237

Jyoti Gupta

#MaaKali #KaliMata #AnandDham #MaaKaliBhakt #SanatanDharm #BhaktiShorts #DevotionalShorts #TempleVibes #MaaKaliBlessings #ViralShorts #TrendingShorts #HinduDevotion #BhaktiStatus #ShortsViral #JaiMaaKali

VIRENDER VEER MEHTA

विक्रम संवत 2083. . . चैत्र नवरात्रि पर्व। प्रथम दिवस "माँ शैलपुत्री" ऊर्जा, स्थिरता, आधार और नए शुभारंभ का प्रतीक। || ●⃝जय ●⃝माता ●⃝शैलपुत्री || वैदिक पंचांग के अनुसार विक्रम संवत 𝟮𝟬𝟴𝟯 का आरंभ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 𝟭𝟵/03/26 प्रातः 𝟲.𝟱𝟮 से। मंगल कामनाओं की शुभ इच्छाओं के साथ, 💝 🔶🔷 शुभ दिन 🔷🔶 💝 . . . . वीर।

Ritik

taken from the October junction book

SAYRI K I N G

मांगी हुई चीज लौटना पड़ती हैं इसलिए मांगना छोड़िए कामना सीखिए फिर चाहे वो इज्जत हो या दौलत हो

Gauri Katiyar

हिन्दू नव वर्ष और चैत्र नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं बचपन में थोड़ी बागी रही हर बात में तर्क ढूंढती मैने दादी से पूछा ज़रा बताओ एक बात नवरात्रि का व्रत क्यों है ख़ास विद्रोही पोती की बात सुन दादी बोली गणित में तू अव्व्ल तो बात दशमलव का आख़िरी अंक मैंने कहा नौ,सतयुग के कितनेबसाल और उनका जोड़ मैने कहा नौ , कलियुग के कितने साल और उनका जोड़ मैने कहा नौ एक जान पनपे कोख में महीने लगे कितने मैने कहा नौ,माता के कितने रूप मैने कहा नौ मैंने बोला इनमें से कौन सा रूप है ख़ास ,तो दादी बोली सुन मेरी बात- सती सी स्वाभिमानी , शैलपुत्री सी शिव दीवानी , ब्रह्मचारिणी के जैसा तप,चंद्रघंटा के जैसा हट , कूष्मांडा के जैसा जप, स्कंदमाता सी ममता , कात्यायनी सी प्रचंडता,निडर जैसे कालरात्रि,निर्मम जैसे महागौरी,कोमल जैसे सिद्धिदात्री

kattupaya s

Good morning friends.. have a great day

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास रूह का रिश्ता हसीन निगाहों में नज़र दे के जाऊँगा l नज़र मिलाने का हुनर दे के जाऊँगा ll नासमझ बन रहे हो या अनजान हो l रूह के रिश्ते की खबर दे के जाऊँगा ll दिल से कभी भी भूला न सकोगे ऐसी l एक नशीली प्यारी प्रहर दे के जाऊँगा ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

रहे समय पर क्लिष्ट जो, और समय पर नम्र। उसका सब आदर करें, उससे रहें विनम्र।। दोहा --४५४ (नैश के दोहे से उद्धृत) -----गणेश तिवारी 'नैश'

Avinash

Happy Gudhipadhva ✨❤️ Everyone.

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

ऋगुवेद सूक्ति-- (४१) की व्याख्या ऋगुवेद सूक्ति-- "आर्य ज्योतिरग्रा:" ऋगुवेद-७/३३/७ भावार्थ --आर्य ज्योति को प्राप्त करने वाला होता है। मंत्र “आर्य ज्योतिरग्राः …” — ७/३३/७ भावार्थ-- यह मन्त्र बताता है कि आर्य (श्रेष्ठ, सदाचारी, सत्य और धर्म का अनुसरण करने वाला मनुष्य) अंततः ज्योति (ज्ञान, सत्य और दिव्य प्रकाश) को प्राप्त करता है। अर्थात— जो मनुष्य सत्कर्म, सत्य, तप और धर्म के मार्ग पर चलता है, वही अज्ञान के अंधकार से निकलकर ज्ञान के प्रकाश को प्राप्त करता है। इसलिए यहाँ “आर्य” शब्द जाति के अर्थ में नहीं, बल्कि श्रेष्ठ आचरण वाले मनुष्य के अर्थ में प्रयुक्त हुआ है। सामान्य अर्थ-- आर्य = श्रेष्ठ आचरण वाला मनुष्य ज्योति = ज्ञान, सत्य और आध्यात्मिक प्रकाश तात्पर्य = सज्जन और धर्मात्मा व्यक्ति ही ज्ञानरूपी प्रकाश को प्राप्त करता है। “आर्य ज्योतिरग्रा:” (आर्य ज्ञान-ज्योति को प्राप्त करता है) वेदों में प्रमाण-- १. ऋगुवेद -१/५०/१० उद्वयं तमसस्परि ज्योतिष्पश्यन्त उत्तरे। देवं देवत्रा सूर्यमगन्म ज्योतिरुत्तमम्॥ भावार्थ: हम अंधकार से ऊपर उठकर उत्तम ज्योति को देखते हैं और देवताओं में श्रेष्ठ सूर्यरूप परम ज्योति को प्राप्त होते हैं। २. ऋगुवेद -१/११३/१६ उषा ज्योतिषा तमो अपावृणोत्। भावार्थ: उषा (प्रभात) अपने प्रकाश से अंधकार को दूर कर देती है। ३. यजुर्वेद --३६/२४ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय॥ भावार्थ: हे प्रभु! हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से ज्योति (ज्ञान) की ओर, और मृत्यु से अमृत की ओर ले चल। ४. अथर्ववेद-१९/६७/१ ज्योतिरसि ज्योतिर् मे देहि। भावार्थ: तू ज्योति स्वरूप है, मुझे भी ज्योति (ज्ञान-प्रकाश) प्रदान कर। निष्कर्ष: वेदों में बार-बार यह शिक्षा दी गई है कि मनुष्य अज्ञान के अंधकार से उठकर ज्योति (ज्ञान, सत्य और दिव्य प्रकाश) को प्राप्त करे। उपनिषदों में प्रमाण-- १. बृहदारण्यक उपनिषद् --१.३.२८ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्माऽमृतं गमय॥ भावार्थ: हे परमात्मा! हमें असत्य से सत्य की ओर, अंधकार से ज्योति (ज्ञान) की ओर, और मृत्यु से अमरत्व की ओर ले चल। २. कठ उपनिषद-- २.२.१५ न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः। तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥ भावार्थ: जहाँ परम ज्योति है वहाँ सूर्य, चन्द्र, तारे भी प्रकाश नहीं देते। उसी परम ज्योति से सब कुछ प्रकाशित होता है। ३. मुण्डक उपनिषद-२.२.१० ब्रह्मैवेदममृतं पुरस्ताद् ब्रह्म पश्चाद् ब्रह्म दक्षिणतश्चोत्तरेण। अधश्चोर्ध्वं च प्रसृतं ब्रह्मैवेदं विश्वमिदं वरिष्ठम्॥ भावार्थ: यह सम्पूर्ण जगत् ब्रह्मरूप ज्योति से व्याप्त है; वही सर्वोच्च सत्य है। ४-छान्दोग्य उपनिषद् -३.१३.७ अथ यदिदमस्मिन्नन्तः पुरुषो ज्योतिः। भावार्थ: इस शरीर के भीतर जो पुरुष है वह ज्योति-स्वरूप आत्मा है। ५. श्वेताश्वतर उपनिषद- ३.८ वेदाहमेतं पुरुषं महान्तम् आदित्यवर्णं तमसः परस्तात्। तमेव विदित्वाऽतिमृत्युमेति नान्यः पन्था विद्यतेऽयनाय॥ भावार्थ: मैं उस महान पुरुष को जानता हूँ जो सूर्य के समान प्रकाशस्वरूप और अंधकार से परे है। उसी को जानकर मनुष्य मृत्यु से पार होता है। ६- मैत्री उपनिषद-- ६.३४ आत्मा वा इदमेक एवाग्र आसीत् स ज्योतिः। भावार्थ: आदि में केवल आत्मा ही था और वह ज्योति-स्वरूप था। ३. कैवल्य उपनिषद- २१ न तत्र सूर्यो भाति न चन्द्रतारकं नेमा विद्युतो भान्ति कुतोऽयमग्निः। तमेव भान्तमनुभाति सर्वं तस्य भासा सर्वमिदं विभाति॥ भावार्थ: वहाँ सूर्य, चन्द्र या अग्नि का प्रकाश नहीं है; उसी परम ज्योति से सब कुछ प्रकाशित होता है। ४. तेजो बिन्दु उपनिषद्- १.५ ज्ञानदीपेन भास्वता आत्मतत्त्वं प्रकाशते। भावार्थ: जब ज्ञान का दीपक प्रज्वलित होता है तब आत्मतत्त्व प्रकाशित हो जाता है। निष्कर्ष: उपनिषदों में भी बार-बार यह कहा गया है कि परमात्मा और आत्मा ज्योति-स्वरूप हैं तथा उन्हें जानने से अज्ञान का अंधकार समाप्त हो जाता है। पुराणों में प्रमाण-- १. विष्णु पुराण-१.२२.५३ ज्ञानं यदा तदा नाशमुपैति तमसः। तदा प्रकाशते नित्यं परमं ब्रह्म सनातनम्॥ भावार्थ: जब ज्ञान उत्पन्न होता है तब अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है और सनातन परम ब्रह्म का प्रकाश प्रकट होता है। २. भागवत पुराण-- ११.२.३७ भयं द्वितीयाभिनिवेशतः स्यात् ईशादपेतस्य विपर्ययोऽस्मृतिः। तन्माययाऽतो बुध आभजेत तं भक्त्यैकयेशं गुरुदेवतात्मा॥ भावार्थ: जब मनुष्य ईश्वर से विमुख होता है तो अज्ञान और भय उत्पन्न होता है; ज्ञानी पुरुष ईश्वर की भक्ति से उस अज्ञान से मुक्त होकर सत्य को प्राप्त करता ३-पद्म पुराण -६.२२.५८ ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः। भावार्थ: ज्ञान के दीपक के प्रकाश से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। ४. स्कंद पुराण -- ३.२.३५ ज्ञानं हि परमं ज्योतिः तमोऽज्ञानं प्रकीर्तितम्। भावार्थ: ज्ञान को ही परम ज्योति कहा गया है और अज्ञान को अन्धकार। ५-लिंग पुराण-१.७०.३२ ज्ञानं हि परमं ज्योतिरज्ञानं तम उच्यते। ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः॥ भावार्थ: ज्ञान ही परम ज्योति है और अज्ञान अंधकार कहा गया है। ज्ञान के दीपक से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। ६-वायु पुराण- २३.५४ ज्ञानाग्निना दहत्याशु पापं तम इवांशुमान्। भावार्थ: जैसे सूर्य का प्रकाश अंधकार को नष्ट कर देता है, वैसे ही ज्ञान अग्नि पाप और अज्ञान को नष्ट कर देती है। ७-ब्रह्म पुराण --२३५.१२ ज्ञानदीपप्रकाशेन हृदयस्थं तमो हरेत्। भावार्थ: ज्ञान के दीपक के प्रकाश से हृदय में स्थित अज्ञान का अंधकार दूर हो जाता है। ८- अग्नि पुराण --३८०.१० ज्ञानं परमकं ज्योतिः सर्वपापप्रणाशनम्। भावार्थ: ज्ञान परम ज्योति है और वह समस्त पाप तथा अज्ञान का नाश करने वाला है। निष्कर्ष: पुराणों में भी स्पष्ट कहा गया है कि ज्ञान ही ज्योति है और अज्ञान अंधकार है। जो मनुष्य ज्ञान को प्राप्त करता है वही वास्तविक अर्थ में ज्योति को प्राप्त करने वाला आर्य होता है। है। भगवद्गीता में प्रमाण-- १-भगवद्गीता- ५.१६ ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः। तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम्॥ भावार्थ: जिनका अज्ञान ज्ञान द्वारा नष्ट हो गया है, उनका ज्ञान सूर्य के समान प्रकाश करके परम सत्य को प्रकट करता है। २. भगवद्गीता -१०.११ तेषामेवानुकम्पार्थमहमज्ञानजं तमः। नाशयाम्यात्मभावस्थो ज्ञानदीपेन भास्वता॥ भावार्थ: उन पर कृपा करने के लिए मैं उनके हृदय में स्थित होकर ज्ञान के प्रकाश से अज्ञान रूपी अंधकार का नाश करता हूँ। ३-भगवद्गीता- ४.३७ यथैधांसि समिद्धोऽग्निर्भस्मसात्कुरुतेऽर्जुन। ज्ञानाग्निः सर्वकर्माणि भस्मसात्कुरुते तथा॥ भावार्थ: जैसे प्रज्वलित अग्नि लकड़ियों को भस्म कर देती है, वैसे ही ज्ञान की अग्नि सभी कर्मों और अज्ञान को नष्ट कर देती है। ४-भगवद्गीता-१३.१७ ज्योतिषामपि तज्ज्योतिस्तमसः परमुच्यते। ज्ञानं ज्ञेयं ज्ञानगम्यं हृदि सर्वस्य विष्ठितम्॥ भावार्थ: वह परमात्मा ज्योतियों का भी ज्योति है और अंधकार से परे है; वही ज्ञान, जानने योग्य और ज्ञान से प्राप्त होने वाला है। निष्कर्ष: गीता में स्पष्ट कहा गया है कि ज्ञान सूर्य के समान प्रकाश है जो अज्ञान के अंधकार कोदूर कर‌ देता‌ है। महाभारत में प्रमाण-- १. महाभारत (शान्ति पर्व)- २३८.११ ज्ञानं हि परमं ज्योतिरज्ञानं तम उच्यते। ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः॥ भावार्थ: ज्ञान परम ज्योति है और अज्ञान अंधकार कहा गया है। ज्ञान के दीपक के प्रकाश से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। २. महाभारत (शान्ति पर्व) २९४.१४ यथा दीपो निवातस्थो नेङ्गते सोपमा स्मृता। योगिनो यतचित्तस्य युञ्जतो योगमात्मनः॥ भावार्थ: जैसे वायु रहित स्थान में दीपक स्थिर रहता है, वैसे ही संयमित चित्त वाला योगी आत्मज्ञान में स्थिर रहता है। ३. महाभारत(अनुशासन पर्व) -१४५.५४ ज्ञानं परममित्याहुस्तमोऽज्ञानं प्रकीर्तितम्। भावार्थ: ज्ञान को परम कहा गया है और अज्ञान को अंधकार बताया गया है। ४. महाभारत (शान्ति पर्व) ३३९.२४ ज्ञानदीपेन विद्वांसो नाशयन्ति तमो हृदि। भावार्थ: विद्वान पुरुष ज्ञान के दीपक से हृदय में स्थित अज्ञान के अंधकार का नाश कर देते हैं। निष्कर्ष: महाभारत में भी स्पष्ट बताया गया है कि ज्ञान ही ज्योति है और अज्ञान अंधकार है। जो मनुष्य ज्ञान प्राप्त करता है वही वास्तविक अर्थ में ज्योति को प्राप्त करने वाला आर्य होता है। स्मृतियों में प्रमाण-- १. मनु स्मृति -i ४.२३८ अज्ञानं तम इत्याहुर्ज्ञानं तु परमं स्मृतम्। ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः॥ भावार्थ: अज्ञान को अंधकार कहा गया है और ज्ञान को परम प्रकाश। ज्ञान के दीपक के प्रकाश से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। २. याज्ञवल्क्य स्मृति-- १.३ ज्ञानं हि परमं श्रेयः पावनं परमं स्मृतम्। भावार्थ: ज्ञान को ही परम कल्याण और परम पवित्र माना गया है। ३-पराशर स्मृति- १.४० ज्ञानदीपेन विद्वांसो नाशयन्ति तमो हृदि। भावार्थ: विद्वान लोग ज्ञान के दीपक से हृदय के अज्ञान रूपी अंधकार को नष्ट कर देते हैं। ४-नारद स्मृति -१.१० ज्ञानं परमकं ज्योतिः धर्मस्य परमं पदम्। भावार्थ: ज्ञान परम ज्योति है और वही धर्म का सर्वोच्च स्थान है। ५- दक्ष स्मृति - २.१२ ज्ञानं हि परमं ज्योतिरज्ञानं तम उच्यते। भावार्थ: ज्ञान को परम ज्योति कहा गया है और अज्ञान को अंधकार। ६- बृहस्पति स्मृति -१.१५ ज्ञानदीपप्रकाशेन नश्यत्यज्ञानजं तमः। भावार्थ: ज्ञान के दीपक के प्रकाश से अज्ञान का अंधकार नष्ट हो जाता है। ७- अत्रि स्मृति -५७ विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः॥ भावार्थ: विद्या मनुष्य का श्रेष्ठ रूप है; यह छिपा हुआ धन है। विद्या ही यश, सुख और सम्मान देने वाली है। ८-व्यास स्मृति -i १.८ ज्ञानं परममित्याहुस्तमोऽज्ञानं प्रकीर्तितम्। भावार्थ: ज्ञान को परम कहा गया है और अज्ञान को अंधकार बताया गया है। निष्कर्ष: स्मृतियों में भी यह स्पष्ट किया गया है कि ज्ञान ही ज्योति है और अज्ञान अंधकार। इसलिए जो मनुष्य ज्ञान को प्राप्त करता है वही वास्तविक अर्थ में ज्योति को प्राप्त करने वाला आर्य होता है। १. चाणक्य नीति -१.३ न चोरहार्यं न च राजहार्यं न भ्रातृभाज्यं न च भारकारी। व्यये कृते वर्धते एव नित्यं विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्॥ भावार्थ: विद्या रूपी धन ऐसा है जिसे न चोर ले सकता है, न राजा छीन सकता है; यह सदैव बढ़ता है — अर्थात् ज्ञान ही श्रेष्ठ प्रकाश है। २. चाणक्य- २.११ विद्या मित्रं प्रवासे च भार्या मित्रं गृहेषु च। व्याधितस्यौषधं मित्रं धर्मो मित्रं मृतस्य च॥ भावार्थ: विद्या (ज्ञान) मनुष्य का सच्चा मित्र है — अर्थात् जीवन में मार्गदर्शक प्रकाश है। ३-विदुर नीति(महाभारत, उद्योग पर्व)- ३३.७२ नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति सत्यसमं तपः। नास्ति रागसमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्॥ भावार्थ: विद्या के समान कोई आँख (प्रकाश) नहीं है — अर्थात् ज्ञान ही देखने का वास्तविक साधन है। ४-भृतहरि नीति शतक-७ अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जनशलाकया। चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः॥ भावार्थ: जो गुरु अज्ञान रूपी अंधकार को ज्ञान रूपी अंजन से दूर कर आँखें खोल देता है, उसे प्रणाम — अर्थात् ज्ञान अंधकार को मिटाने वाली ज्योति है। “आर्य ज्योतिरग्रा:” — श्रेष्ठ मनुष्य ज्ञान-ज्योति को प्राप्त करता है — हितोपदेश में प्रमाण-- १. मित्रलाभ- १.७ अनेकसंशयोच्छेदि परोक्षार्थस्य दर्शकम्। सर्वस्य लोचनं शास्त्रं यस्य नास्त्यन्ध एव सः॥ भावार्थ: शास्त्र (ज्ञान) अनेक संदेहों को दूर करता है और अदृश्य सत्य को दिखाता है; यह सबके लिए आँख (प्रकाश) के समान है — जिसके पास यह नहीं, वह अंधे के समान है। २. मित्र लाभ-१.२५ विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्। विद्या भोगकरी यशः सुखकरी विद्या गुरूणां गुरुः॥ भावार्थ: विद्या मनुष्य का श्रेष्ठ रूप है; यह छिपा हुआ धन है और सुख, यश तथा मार्गदर्शन देने वाली है — अर्थात् ज्ञान ही जीवन का प्रकाश है। पंचतंत्र में प्रमाण- १. तन्त्र १ (मित्रभेद) -१.३३ नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति सत्यसमं तपः। भावार्थ: विद्या के समान कोई नेत्र (प्रकाश) नहीं है — अर्थात् ज्ञान ही वास्तविक दृष्टि है। २. तन्त्र २ (मित्रलाभ)- २.१० विद्या मित्रं प्रवासे च। भावार्थ: विद्या मनुष्य की सच्ची मित्र है — अर्थात् जीवन में मार्गदर्शक प्रकाश है। निष्कर्ष: हितोपदेश और पंचतंत्र में भी स्पष्ट रूप से बताया गया है कि विद्या (ज्ञान) ही मनुष्य की आँख और प्रकाश है, जो जीवन का मार्ग दिखाती है। अतः जो व्यक्ति इस ज्ञान-ज्योति को प्राप्त करता है, वही वास्तविक अर्थ में आर्य है। निष्कर्ष: नीति ग्रन्थों में भी बार-बार यह बताया गया है कि विद्या (ज्ञान) ही वास्तविक प्रकाश है जो जीवन का मार्ग दिखाता है। अतः जो व्यक्ति इस ज्ञान-ज्योति को प्राप्त करता है वही आर्य है। वाल्मीकि रामायण में प्रमाण-- १. अयोध्या काण्ड- २.१०९.३४ नास्ति विद्यासमं चक्षुर्नास्ति सत्यसमं तपः। भावार्थ: विद्या के समान कोई नेत्र (प्रकाश) नहीं है — अर्थात् ज्ञान ही जीवन का वास्तविक प्रकाश है। २. अरण्य काण्ड- ३.७२.८ धर्मो हि परमं लोके धर्मे सत्यं प्रतिष्ठितम्। भावार्थ: धर्म ही संसार में सर्वोच्च है, और सत्य उसमें स्थित है — अर्थात् धर्म और सत्य ही जीवन का प्रकाश हैं। गर्ग संहिता में प्रमाण- १. गोलोक खण्ड- १.२३ ज्ञानदीपप्रकाशेन हृदयग्रन्थयो विदुः। भावार्थ: ज्ञान के दीपक के प्रकाश से हृदय के बन्धन (अज्ञान) कट जाते हैं। २. वृन्दावन खण्ड- १२.४५ अज्ञानतिमिरान्धानां ज्ञानं दिव्यं प्रदीपवत्। भावार्थ: अज्ञान के अंधकार में पड़े लोगों के लिए ज्ञान दिव्य दीपक के समान है। योग वशिष्ठ में प्रमाण- १. निर्वाण प्रकरण- २.१८.१२ अज्ञानतिमिरान्धस्य ज्ञानं सूर्य इवोदितम्। भावार्थ: अज्ञान के अंधकार से अंधे हुए मनुष्य के लिए ज्ञान सूर्य के समान उदित होकर प्रकाश देता है। २. उपशम प्रकरण- ५.१० ज्ञानं हि परमं ज्योतिः आत्मा प्रकाशकः स्वयम्। भावार्थ: ज्ञान ही परम ज्योति है और आत्मा स्वयं प्रकाश करने वाला है। ३. निर्वाण प्रकरण १.२८.३१ यथा दीपप्रभा नाशयति तमः क्षणेन वै। तथा ज्ञानप्रभा नाशयत्यज्ञानमाशु हि॥ भावार्थ: जैसे दीपक का प्रकाश क्षणभर में अन्धकार को दूर कर देता है वैसे ही ज्ञान शीघ्र ही अज्ञान को नष्ट कर देता है। --------++-------++------++---

ASHISH KUMAR

​"Tere badalne ka dukh nahi hai mujhe, Main toh apne yakeen par sharminda hoon."

ASHISH KUMAR

​"Ek hi chaukat pe sar rakha toh sukoon mil gaya, Bhatak rahe thay dar-ba-dar, ab ghar mil gaya."

ASHISH KUMAR

​"Tumhare baad kahan milti hai fursat humein, Ki hum khud se milein aur apna haal poochein." ​(After you, where do I find the leisure to meet myself and ask how I am doing?)

ASHISH KUMAR

​“Khuda naseeb kare unko khushiyan tamaam, Humein toh bas unka thoda sa waqt chahiye tha.” ​(May God grant them all the happiness in the world; all I ever wanted was a little bit of their time.)

ASHISH KUMAR

“Bas ek mizaaj-e-shahar badla tha unka, Humne toh pura shehar hi chhor diya.” ​(Their mood simply changed towards me, so I left the entire city behind.)

ASHISH KUMAR

​“Hum na badlenge waqt ki raftar ke saath, Jab bhi milenge andaaz purana hoga.” ​(I will not change with the speed of time; whenever we meet, my essence will remain the same.)

Mara Bachaaaaa

कभी नहीं वापस आएंगे वो पल, गुनाह जो ऐसा हमने किया है। में वो और हमारे वो दिन, आंसू, यादें, मेरी की हुई गलतियां। - Mara Bachaaaaa

Rashmi Dwivedi

रिश्ते खून के नहीं होते रिश्ते विश्वास के होते हैं अगर विश्वास हो तो पराए भी अपने हो जाते हैं अगर विश्वास ना हो तो अपने भी पराए हो जाते हैं इसलिए विश्वास न तोड़े कभी किसी का अगर कोई आप पर अंधा विश्वास करता है तो उसका अंधा होने का दर्द न देके विश्वास को पूरा करें। हिन्दू नव वर्ष की शुभकामनाएं ।हर हर महादेव ❤️ - Rashmi Dwivedi

Imaran

हम वो कश्ती हैं जिसका कोई किनारा ना हुआ, हम सबके हुए मगर कोई हमारा ना हुआ 🥲imran 🥲

MASHAALLHA KHAN

जख्मो का क्या वह तो आज नही कल भर जायेंगे, आंसुओ का क्या ये कल फिर से आयेंगे, बस खुश रहना हो जिन्दगी का एक ही मकसद, इस बात को, इस दिल को कैसे समझायेंगे . -MASHAALLHA

Mou Biswas

"The Bokul girl" --- Mou Whenever I sat beside the one I loved, the air seemed filled with the fragrance of earth freshly touched by rain. Yet for that scent to awaken, the rain itself must come. But the rain, offended by the bakul blossoms, stayed away for many long days. And I, longing for that familiar smell of damp soil, sat by the open window, waiting. One day I called out to the bakul— “Go, soothe the anger of your beloved rain. How long must we gasp beneath this relentless heat?” Afternoons of waiting slipped quietly away, the earth burning, dust rising restlessly in the wind. Then one evening the bakul and the rain made peace at last. Slowly the sky broke open, and the rain descended in generous torrents. Babla, Shirisha, Sal, and Shimul breathed again in sweet relief. And I too felt a quiet joy— once more the fragrance of rain-soaked earth returned to me. Yet the bakul flowers had wished only for a little rain. When the storm passed, they lay scattered across the road— fallen, wounded first by the sudden fury of the wind. And so the bakul maiden, who had waited for the rain, never truly felt the rain upon her petals.

Mou Biswas

মৃত পাণ্ডুলিপি কলমে : মৌ জীবন যেনো আজ মৃত পাণ্ডুলিপি বসে থাকি কবরের অপেক্ষায় গায়ে আছে বাসি পচা গন্ধ তাই সকলে আতর মাখায় শেষতম খাট সাজানো চলছে খুব দাম দিচ্ছে ওরা আমার অথচ শেষ রাতে একান্ত আপনকে শুভ রাত্রি এসএমএস দিলাম কোনো উত্তর পেলাম না সারারাত আজ ওরা ছুটে এসেছে উত্তর দিতে।

Avinash

Belive in god's plan. Everything is alright written. So, don't chase anything for too log... Take a little break. if it is yours it'll came back to you. ✨💓

Ritik

October junction

Mrs Farida Desar foram

उनसे बात किए बिना, हमारी रात न गुज़रती हे, नींद भी आँखों से, दूर हो जाती हैं फिर... - Mrs Farida Desar foram

Jainish Dudhat JD

जिंदगी बहुत थका देती है

Chaitanya Joshi

તને મળવાની તલાવેલી રોજ રોજ મારે. ને સાંભળવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે. જાય દિવસ ખાલી પ્રતીક્ષા કરી કરીને તારી, ને ઓળખવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે. ચક્ર સમયનું નિત્ય કાર્યરત રહે વણથંભ્યુ, તને ભેટવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે. રોજ નવલી આશા ધરીને દિવસ ઉગતોને, સુકૃત ફળવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે. હરિ આટલી ના અટકતી રાહ સ્વીકારજે , વિયોગ ટાળવાની તાલાવેલી રોજ રોજ મારે. --ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.

Rashmi .k

“Whispers of an Unseen Heart” Sometimes, my heart speaks in silence, In languages no one ever taught me, In rhythms that echo through sleepless nights, And dreams that never find their dawn. I smile in crowded rooms, But my soul often sits alone, Tracing the shadows of memories That refuse to fade with time. There are feelings I’ve hidden in corners, Folded like old letters never sent, Words soaked in unshed tears, And confessions buried beneath courage. I wanted to say so much— To tell you how your presence Was once the calm in my chaos, The pause in my racing thoughts. But fear wrapped around my voice, And silence became my only reply. Do you know what it feels like To carry a storm inside your chest? To laugh while breaking quietly, To stand strong while falling apart within? It’s like holding fire in bare hands— Beautiful, painful, and impossible to let go. Every night, I rewrite the same story, Changing endings that never change, Imagining conversations that never happened, And holding onto hope that slowly slips away. The truth is, I was never good at letting go. I collect moments like fragile glass, Even the ones that cut me deeply, Because they remind me I once felt alive. I remember the way your name Felt like poetry on my lips, How your laughter became my favorite song, And your absence… my longest silence. Sometimes, I wonder— Was I just a passing chapter in your life? While you became an entire book in mine, Every page filled with you. People say time heals everything, But they never tell you how slow it moves When your heart is stuck in yesterday, And your mind refuses to move forward. I tried to forget you— I really did. But how do you erase someone Who became a part of your existence? How do you unlearn a love That felt like breathing? So instead, I learned to live with it. With the quiet ache, With the unspoken words, With the echoes of “what if” and “maybe.” And somewhere along the way, I realized something strange— Not all love stories are meant to last, Some are meant to teach. You taught me how deeply I could feel, How much I could care, How strong I could pretend to be, Even when I was breaking inside. Now, I walk forward— Not completely healed, But stronger than before, Carrying pieces of my past Like lessons, not regrets. And though a part of me Will always whisper your name In the quiet corners of my heart, I no longer wait for you to return. Because I’ve learned— Some feelings are not meant to be spoken, Some stories are not meant to be finished, And some love… Is simply meant to be felt, Deeply, silently, and forever.

Vlog potli

ये नुस्ख़ा उस मर्ज का सटीक हो जाता वो मुस्कुरा देती और मैं ठीक हो जाता। - सुनील कुमार माटोलिया

kattupaya s

Goodnight friends.. sleep well

Sapna

kashh..❤️🌷

Sapna

kuch alfaz..🥺🥀

SAZ

ये देश महान ये देश महान। जिसके करते हम गुनगान।। ये देश वीर शहीदों की शान। जिसके करते हम गुणगान।। सभी धर्म है एक समान। ये देश महान ये देश महान।। बड़ो का करते हम सम्मान। ऐसा भारत देश महान।। यहाँ महमानो को माना जाता है भगवान। सहयोग की प्रथा इस देश की शान।। ऐसा भारत देश महान। जिसके करते हम गुनगान।। तिरंगा झंडा इस देश की शान। ये देश महान ये देश महान।। दया धर्म है इस देश की शान। ऐसा भारत देश महान।। ये देश महान ये देश महान। जिसके करते हम गुनगान।। देश विदेश में भारत का नाम। जिसके करते हम गुनगान।। ये देश महान ये देश महान। जिसके करते हम गुनगान।।

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/1Dm4xXUj8t/ અબોલ પ્રીતનું ઋણ સુંદર વાર્તા વાંચો મારા ફેસબુક પેજ પર.

Aruna N Oza

🕛🕛

Narayan

किसी के साथ बरसों रहा तब ये समझ आया, भलें बदनाम हैं काँटे, असल में फूल चूभते हैं। 🦋🌻

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/1C49GqKqMm/ મા બાપનું ઋણ 🙏

Sudhir Srivastava

नवरात्रि से पहले ********* पहले तो स्वीकारिए मैया मेरा प्रणाम और ध्यान से तब सुनो बात मेरी अविराम फिर जो करना कीजिए आगे कोई काम। यह मेरी शिकायत नहीं मेरे मन की पीड़ा है जिसे कहने में डर भी लगता है, पर उठाया मैंने बीड़ा है। बात इतनी सी है कि आप कहाँ विचरण कर रही हो देश-दुनिया में क्या हो रहा है, इस पर भी कुछ ध्यान दे रही हो? मुझे तो नहीं लगता कि इस पर विचार भी कर रही हो, बस नवरात्रि में अपने पूजा पाठ की तैयारियों का घूम-घूमकर सिर्फ इंतजाम देख रही हो। अब आप मेरा कहना मानो, मानव-मन की पीड़ा जानो। मुझे लगता है कि आपको शायद ध्यान ही नहीं है कि रुस-यूक्रेन युद्ध अभी तक चल रहा है इजरायल-फिलीस्तीन में भी वार-पलटवार हो रहा है, भारत पाकिस्तान की बात छोड़िए कम से कम अफगानिस्तान -पाकिस्तान के मध्य आये दिन संघर्ष के बारे में ही सोचिए। ऊपर से अमेरिका इजरायल गठजोड़ के साथ ईरान के युद्ध का नया वर्जन विनाशक हो रहा है, विश्व युद्ध का डर दुनिया को सोने नहीं दे रहा है, निरीह, असहाय निर्दोष मारे जा रहे हैं, जगह-जगह खंडहर के ढेर डरा रहे हैं, नित नये श्मशान आबाद होते जा रहे हैं। अब ये मत कहना माते! कि मैं आपको ये समाचार क्यों सुना रहा हूँ? तो आप भी जान लो मैं तो सिर्फ अनुरोध कर रहा हूँ, डरता भी हूँ, मगर अपनी माँ से ही तो बक-बक रहा हूँ। अब आप कुछ कीजिए माते चण्डी-काली-दुर्गा रुप दिखाइए युद्ध के रावणों-राक्षसों को मारिए, आम जन-मानस को अपने होने का अहसास कराइए। सिर्फ भारत ही नहीं अखिल विश्व में शांति स्थापित करने की राह दिखाइए, शक्ति से, शांति से, प्यार या प्रहार से जैसे भी हो हर युद्ध की आग अब बुझाइए, विराम लगाने के लिए अपने प्रभाव का दर्शन कराइए। अपने भक्तों, अभक्तों के मन से विश्व युद्ध का डर अबिलंब दूर भगाइए, हे आदशक्ति मैया! नवरात्रि से पहले बस इतना कर धरती के हर प्राणी को भयमुक्त होने का आभास कराइए, इस नादान की फरियाद पर नाराज़ होने के पहले अट्टहास कीजिए या मुस्कराइए, पर जैसे भी हो सारे युद्ध पर अब तो लगाम लगाइए, संदेह के बादल हटाइए। और फिर निश्चिंत होकर आइए नवरात्रि में अपनी पूजा, आरती, जप, साधना कराइए, अपने भक्तों के दिलों में आसन जमाइए अपनी जय-जयकार खूब कराइए सबके साथ मुझ पर भी अपनी कृपा बरसाइए। सुधीर श्रीवास्तव

Sudhir Srivastava

स्मृतियों में शेष ************* आना-जाना प्रकृति का नियम है जिस पर हमारे नियम-कानून, सुख-दुख, मान-मर्यादा, अच्छे-बुरे, अनुकूल -प्रतिकूल, स्थिति-परिस्थिति कद-पद, प्रतिष्ठा, आभामंडल का रंचमात्र भी प्रभाव नहीं पड़ता है। जाने वाला चला गया फिर भी हमें जीना ही पड़ता है, इस जीने के पीछे भी सबके बहाने कुछ तीखे तो कुछ मीठे तराने हैं। सबका अपना नजरिया है मगर जाने वाले का जीवन जीने का भी तो अपना अलग पहिया था। आचार्य पंडित तिलक धारी मिश्र 'शास्त्री' जी जब आज हमारे बीच नहीं हैं, तब उनके परिजनों का उन्हें याद करने का अपना अंदाज है, उनके अंदाज, नजरिए, रहन- सहन, चिंतन, पांडित्य को आत्मसात करने का विविध आयाम है। हमारे अपने जो आज स्मृति शेष हैं कुछ के लिए अशेष, कुछ के लिए विशेष तो कुछ के लिए महज अवशेष हैं। अब यह हमें सोचना है कि कल हमें भी जाना ही है, तब भी हमारे परिजनों का नजरिया ठीक वैसा ही होगा, जैसा अपने स्मृति शेष परिजनों के लिए आज हमारा है, कौन प्यारा, न्यारा, दुलारा, हमारा है या हमने ही उसे मारा है। जीवन का ये चक्र चलता ही रहेगा, समय के साथ हमारे सोचने समझने में बुनियादी अंतर भी नहीं होगा। जरुरत आज ही नहीं आने वाले कल में भी होगी कि हम स्मृति शेष परिजनों की आत्मा को कितना सुकून दे पाते हैं? अथवा औपचारिकताओं के भंवर जाल मे उलझकर खुद हँसते और उन्हें रुलाते हैं। जो भी है, हम आपको ये क्यों बताकर सताते हैं आपके जीवन में दखल देने का दुस्साहस करते हैं। माफ़ कीजिए! हम तो सिर्फ स्मृतिशेष विभूतियों को नमन करते हैं अपनी भूल-चूक माफ करने का अनुरोध करते हैं, मधुब्रत जी के साथ अपनी संवेदनाओं के साथ खड़े हैं उनके पिता नहीं, पिता के उच्च आदर्श श्रेष्ठ व्यक्तित्व, पाण्डित्य, आचार्य, छंदाचार्य और उनकी कलम का गान करते हैं, बारंबार नमन वंदन, प्रणाम करते हैं अपने श्रद्धा पुष्प अर्पित करते हैं उनकी स्मृतियों को जीवंत रखने का एक अल्प, अंकिचन प्रयास करते हैं, उनको याद करते और शीश झुकाते हैं, उनके सूक्ष्म संरक्षण का भाव संजोते हैं, एक विभूति सदृश उनकी स्मृतियों को सहेजने का हम भी आपके साथ प्रयास करते हैं। सुधीर श्रीवास्तव

Sudhir Srivastava

अहम का संघर्ष : विनाश का द्योतक ***** आज समूचा विश्व अहम के संघर्ष में फँसता जा रहा है विश्व आशंकाओं के बीच डर-डर कर जी रहा है, निरपराध, निर्दोष मारे जा रहे हैं, मूलभूत सुविधाएं गर्त में जा रही हैं, संसाधन बर्बाद हो रहे हैं, प्रकृति के साथ विनाश का खेल खेला जा रहा है। बम, गोला, बारुद से मौत का ताँडव किया जा रहा है लाशों के ढेर लगते जा रहे हैं जहाँ जीवन की खुशहाली थी घर, दुकान, मकान, संस्थान, बड़ी - इमारतें वर्षों की साधना से तैयार जन जीवन को सुविधा देने वाली खोजें, लाखों करोड़ों, अरबों खर्च कर विकास की गंगा में बारुद रुपी जहर घोला जा रहा है, रोजी, रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा को आदिम युग की ओर ढकेला जा रहा है। विचारणीय प्रश्न है कि इसका परिणाम क्या होगा? अहम का यह संघर्ष कब और कहां जाकर रुकेगा? कुछ सनकी और विकृत मानसिकता का शिकार क्या समूची मानवता और धरा के विनाश का द्योतक बनेगा? और इस धरती से मानव ही नहीं जीव-जंतु, कीड़े-मकोड़े, पशु-पक्षी, पेड़-पौधे और खरपतवारों के नामोनिशान के साथ ही खत्म होगा? क्या अहम के संघर्ष का इस तरह ही अंत होगा? क्या धरती पर भूत-प्रेतों का डेरा होगा, मंदिर, मस्जिद, गिरिजा, गुरुद्वारों में भक्त नहीं सिर्फ, ईश्वर, अल्लाह, ईशामसीह और गुरुग्रंथ साहिब के सिवा परिंदा भी नहीं होगा? तब इस संघर्ष का लाभ आखिर किसको मिलेगा? जब धरा पर कुछ भी नहीं होगा, अपना तो छोड़िए जब कोई दुश्मन भी हमारे सामने ही नहीं होगा। सुधीर श्रीवास्तव

Imaran

क्यों डरता है राहों के सन्नाटे से, रोशन होगी मंज़िल तेरे इरादे से। मेहनत तेरी रंग लाएगी एक दिन, तूफ़ाँ भी रुक जाएंगे तेरे जज़्बातों के आगे से 🩵❤️imran 🩵❤️

kattupaya s

Good evening friends.. have a nice time

Vedanta Life Agyat Agyani

✧ बीज से ब्रह्मांड तक — जीवन का विज्ञान ✧ ईश्वर जीवन का सीधा विज्ञान है— बीज से वृक्ष और फिर बीज। यही ब्रह्मांड का खेल है। बीज यात्रा में उतरता है, वह रुकता नहीं— वह सदैव गतिमान रहता है। जीवन स्वयं एक यात्री है। बीज अपने आप गति नहीं करता, भले ही वह भूमि में पड़ा हो, बारिश हो जाए— पर जब तक उचित अवस्था न मिले, उसमें गति नहीं आती। जब धरती, जल, वायु और अग्नि— पंचतत्व एक साथ संतुलित होते हैं, तभी बीज अंकुरित होता है। अग्नि केवल ताप नहीं है— वह जीवन की छिपी हुई ऊर्जा है। हर बीज में पंचतत्व और तीन गुण मौजूद हैं, और उनके साथ चेतना भी विद्यमान है। जब तत्व और गुण मिलते हैं, तो चेतना एक जीव के रूप में प्रकट होती है। फिर वही जीव पुनः विभाजित होता है, और अंततः फिर से बीज बन जाता है। अर्थात— चेतना, गति और कार्य पंचतत्व और त्रिगुण के माध्यम से रूपांतरण करते हैं। और अंत में— सब कुछ फिर एक सूक्ष्म बीज में सिमट जाता है। जब बीज के भीतर फिर पंचतत्व जुड़ते हैं, तो गति पुनः आरंभ होती है। बीज से बीज— यही अस्तित्व की निरंतर गति है। अस्तित्व स्वयं को विकसित करता है। मनुष्य का बीज भी पुनः बीज बनता है, जिसमें कुछ प्रयास मनुष्य का होता है, और कुछ प्रकृति का। दोनों के मिलन से नया जीवन उत्पन्न होता है। यह मिलन ही प्रकृति का चुंबक है— यही “काम” है। शरीर अपनी शक्ति स्वयं पाता है, अपना भोजन स्वयं ग्रहण करता है। उसमें “मैं”, “तुम”, “वह”— कुछ भी नहीं है। यही जीवन का खेल है— यही लीला है। इसे समझना ही दर्शन है। यह अद्भुत, अलौकिक और रहस्यपूर्ण खेल है, जिसे देखने और समझने में आनंद बरसता है। जो देख रहा है— वह भी उसी की व्यवस्था है। और जो दिख रहा है— वह भी वही है। “मैं” बीच में आकर अहंकार बन जाता है, और एक दीवार खड़ी कर देता है। यही सबसे बड़ी रुकावट है। इस खेल को समझना ही धर्म है। स्वभाव को देखना और समझना ही धर्म है। जीवन का यह खेल— अद्भुत, रहस्यमय और रसपूर्ण है। यही जीवन है, यही आनंद है, यही प्रेम है। जब “कर्ता” हट जाता है, तो देखने वाला ही आनंद बन जाता है। और फिर वही ऊर्जा— तुम्हारे माध्यम से कार्य करती है। धर्म का अर्थ है— “मैं” को हटा देना। “मैं” हटते ही— सब कुछ एक खेल बन जाता है। धर्म का कार्य है— आंख खोलना, और अज्ञान का संकट समाप्त करना। लेकिन समाज के लिए— धर्म एक व्यवस्था भी है। भीड़ को संभालने के लिए नियमों की आवश्यकता होती है। यदि केवल एक व्यक्ति होता, तो धर्म की कोई आवश्यकता नहीं थी। धर्म भीड़ को नियंत्रित करता है, ताकि “मैं-मैं” और “तू-तू” का संघर्ष न हो, और एक प्रकार की शांति बनी रहे। परंतु— जो शांति बनाए रखने वाले हैं, वही कभी-कभी अशांति के कारण भी बन जाते हैं। धर्म भय भी पैदा करता है— अच्छा-बुरा, सही-गलत के नाम पर। और यहीं से विभाजन शुरू होता है: मैं हिंदू, तू मुस्लिम। पर यह विभाजन भी भौगोलिक और परिस्थितिजन्य है। अलग-अलग स्थानों, अलग-अलग जलवायु और परिस्थितियों के कारण अलग-अलग धर्म और व्यवस्थाएँ उत्पन्न हुईं। जहाँ जैसी आवश्यकता थी, वैसा धर्म बना। यदि पूरी पृथ्वी की परिस्थितियाँ एक जैसी होतीं, तो शायद धर्म भी एक ही होता। पर विविधता है— इसलिए धर्म भी अनेक हैं। आज जब सब मिल गए हैं, तो पुराने भौगोलिक नियमों को पकड़ना ही संघर्ष का कारण बन रहा है। फिर भी— समाज के लिए कुछ नियम आवश्यक हैं। पर सत्य नियमों में नहीं है। सत्य— उस जीवन में है जो हर क्षण स्वयं को जन्म देता है

Urmi Sonagara

એક સપનું એવું છે કે , એના બધા સપના ને હું મારા બનાવી ને પુરા કરું એક સપનું એવું છે કે , તે પોતાની જિંદગી ની દરેક પળ ખુશી થી જીવે એક સપનું એવું છે કે , તેના બોલ્યા વગર એની બધી વાતો સમજી જાવ એક સપનું એવું છે કે , તેના હસતા ચેહરા પર ખુશી ના આંસુ હોય જેનું કારણ હું બનું એક સપનું એવું છે કે , મારા દરેક સપના માં રોજ મને મળવા આવે એક સપનું એવું છે કે , કોઈક દિવસ હું પણ એના સપના માં જાવ અને એને મળું એક સપનું એવું છે કે , એની પ્રાર્થના માં કયારેક મને યાદ કરે ભગવાન પાસે આને મને માગે એક સપનું એવું છે કે , એના બધા સપના ને હું મારા બનાવી ને પુરા કરું....

ek archana arpan tane

ભગવાન કહે છે કે કોઈ ને તકલીફ આપી મારી પાસે તારી ખુશી ના માંગીશ પણ કોઈ ને એક પળ ની ખુશી આપીશ તો તારી ખુશી ની ફીકર ન કરીશ. - ek archana arpan tane

Narendra Parmar

बीवी तो सांवली अच्छी है ताकि कोई उसे देखें नहीं 😏 और हम किसी और को देखें तो ?? वो कभी हमसे रुठे नहीं है इसीलिए तो मैं कहेता हूं कि बिवी तो सांवली अच्छी है ✔️💯 नरेन्द्र परमार ✍️

SAYRI K I N G

फोटो के हिसाब से शायरी हो जाए , देखता हूं आज यहां कितने शायर है...!

Sonu Kumar

अमेरिका ने 1999 के कारगिल युद्ध में भारत को हराने के बाद, सभी भारतीय प्रधानमंत्रियों ने “परमिशन मिनिस्टर” बनने पर सहमति दे दी। और सभी भारतीय विपक्षी दलों (कांग्रेस, भाजपा, सीपीएम, आप) के शीर्ष नेताओं ने भी “परमिशन मांगने वाले सदस्य” बनने को स्वीकार कर लिया। . इस सच्चाई को छिपाने के लिए बिकाऊ लोगों को पैसे दिए गए थे। लेकिन सोशल मीडिया के कारण यह बात अब सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं तक पहुंच गई है। ---------------

वात्सल्य

બધાં જ જતાં રહ્યાં કોઇ ફરક ન્હોતો પડ્યો મને - જ્યારથી તું ગઈ ત્યારથી એકલું લાગે છે,મને. - વાત્સલ્ય - वात्सल्य

swarnima varshney

ek dil hai jo teri taraf bhagta hai .. aur ek hakikat hai jo tere pass aane nhi deti..❤️

kattupaya s

if you don't like my attitude I request once again to block me. I don't want to be a disturbance in anybody's interest

kattupaya s

I felt bad when iam alone. but now feeling worst after meeting you

kattupaya s

it's over

kattupaya s

Time for short nap.. see u all soon

kattupaya s

it's the hardest decision once again iam taking. iam going block her again

kattupaya s

people who are confused with my posts,i request them to read my stories. everything is fun. don't compare me with my posts. iam different from my posts.

kattupaya s

I am unable to hate her she is something beyond my iq level.

Anup Gajare

"भंग" ____________________________________________________ मैं तबतक निश्चित नहीं हु जबतक कोई मुझे देख नहीं लेता। ब्रह्मांड में फैली मटमैली हवाओं की धूल में बिखरा कोई बादल उसने अपनी खोज खुद ही की हैं। बदलाव में बदलते रहना ही नियति थी उन सबकी जिनकी धारणा में कोई निवारण नहीं रहा। शरद ऋतु हर साल भड़कती है उसने अपनी कहानी किसी को नहीं बताई कौन बेखबर सुने किसी और की पीड़ाओं से भरी कविता। मैं बदलता नहीं हु ये भी तो संभावना है स्थिरता अपने आप में सबकुछ बदल देती है। सौरमंडल में घूमता अजीब कण सिमटकर बिखरता है उसकी कोई प्यास या भूख भी होगी या होगा उसके पास पीला राशनकार्ड कतार में खड़े कणों में ऊबता हुआ मैं। अभी मुझे पता नहीं है कि बढ़ती हुई आंखे नीली गहरी गहरी सांस छोड़ते हुए देखती है ढकते सूरज को। अनंत में किसी एक ने कहा था कि उसने जान लिया लेकिन जानकारी किसी के साथ साझा करने में उसकी हिचक बीमारी की तरह उसके सीने में बैठी रही। अनिश्चित काल से सियाह शून्य के अंधकार में हिलता हुआ खुद को ही देखता रहा कभी अरबों साल पहले ही मैंने डायरी लिखना क्यों बंद कर दिया। चींटी निर्बुद्ध प्राणी है ब्रह्मांड के कण सा उसका अपना कोई स्वत्त्व नहीं ये भी अलग तरह की भावना में डूबना नहीं तो क्या है। उसके साथ होते हुए भी मैं अलिप्त रहता हु किसी परमाणु की तरह फिसलना मेरी उम्र रही। वहां क्या था जहां सबने देखा किसको दुखी कण नजर आया। शायद देखना भी एक भ्रम था और देखे जाना उससे भी गहरी साज़िश— जहाँ आंखें नहीं सिर्फ़ प्रकाश का संदेह था और मैं उस संदेह के किनारे बैठा अपना चेहरा टटोलता रहा। किसी ने पुकारा नहीं फिर भी ध्वनि की एक आदत मेरे भीतर गूंजती रही जैसे कोई पुराना नाम जिसे अब कोई नहीं जानता। समय ने अपने ही वृत्त को काटकर एक सीधी रेखा बनने की कोशिश की और वहीं टूट गया— वहीं मैंने पहली बार “पहले” और “बाद” के बीच कोई अंतर नहीं पाया। एक कण था जो मुझसे छूटकर किसी और की स्मृति में चला गया वहां उसने खुद को इतिहास कहा— और मैं वर्तमान की तरह हर क्षण मिटता रहा। नींद शायद सबसे पुरानी भाषा थी जिसमें बिना बोले सब कुछ कहा जा सकता था पर मैं जागता रहा जैसे कोई अधूरी पंक्ति जिसे लिखने वाला कभी लौटा ही नहीं। तुमने कहा था— “जानना” एक अंत है लेकिन मैंने देखा हर उत्तर के भीतर एक और प्रश्न की हड्डी छिपी होती है जिसे चबाते-चबाते विचार खून में बदल जाते हैं। अब जब कोई नहीं देख रहा मैं थोड़ा-सा निश्चित हूँ— या शायद यह भी वही क्षण है जब कोई कहीं से मुझे देख रहा है। और यदि देखे जाने और न देखे जाने के बीच कोई तीसरी जगह है— तो मैं वहीं हूँ एक अधूरी उपस्थिति की तरह जो होने और न होने के बीच धीरे-धीरे अपना अर्थ खोती जा रही है। भंग होते हुए अपनी अभंग छाया को मैं पूछता हु किसने देखा है उसे जिसका कोई वजूद ही नहीं। वजूद में न होना ही यहां धूल पर लिखना है कि कोई नहीं है वापस लौट जाओ। _________________________________________

Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

नारी रचना का ' वर्णन ' पुरुष वर्णन के बिना अधूरा है। - Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

Dada Bhagwan

યાદ કરતાં 'મા'ને, પ્રગટે ખુમારી, 'પ્રેમથી રહીશું', પ્રતિજ્ઞા અમારી!  પૂજ્ય નીરુમાનાં જીવનનો વધુ પરિચય અહીં મેળવો: https://dbf.adalaj.org/LCmQ6MDO #spirituality #spiritualjourney #deathanniversery #punyatithi #DadaBhagwanFoundation

Narendra Parmar

मुझमें और तुझमें एक ही फ़र्क है तुम चहरे से खूबसूरत हो और मैं दिल से खूबसूरत हूं ।। नरेन्द्र परमार " तन्हा "

DrAnamika

जब मैं कहीं ना मिलूं समझना मैं शब्दों खो गयी हूँ दबे पाँव जाकर ... दराजों से किताबें बटोर लायी हूँ.. #डॉ_रीना_अनामिका #हिंदी_काव्य

Pankaj Goswamy

ક્યારેક જીવનમાં ઘણું બોલવા કરતા થોડું મૌન રાખવું સારું લાગે છે. કારણ કે, શબ્દો હંમેશા મનની ઊંડાઈ સમજાવી શકતા નથી. દિવસ દરમિયાન માણસ ઘણી બાબતોમાં વ્યસ્ત રહે છે; કામ, જવાબદારીઓ, અને પોતાના લોકો માટેના પ્રયત્નોમાં. પણ જ્યારે રાત શાંત બને છે, અને આસપાસ બધું નિઃશબ્દ થઈ જાય છે, ત્યારે મન ધીમેથી કહે છે; “થોડો વિરામ લઈએ, કાલે ફરીથી નવી શરૂઆત કરવી છે.” કારણ કે, જીવન દરેક દિવસે કંઈક શીખવે છે, અને દરેક સવાર ફરીથી આગળ વધવાની તક આપે છે. એટલા માટે મનને શાંત રાખવું અને વિશ્વાસ સાથે ચાલતા રહેવું એ જ જીવનની સાચી સમજ છે. - પંકજ ગોસ્વામી 'કલ્પ'

Shailesh Joshi

આપણા જીવનની બધીજ પરીક્ષાઓ ઈશ્વરના હાથમાં હોય છે, એ આપણે સૌ જાણીએ છીએ, પરંતુ આપણે એ કેમ ભૂલી જઈએ છીએ કે, ઈશ્વરે લીધેલી પરીક્ષામાં પાસ થવા માટે, સમયની અને એમાં સફળ થવા માટે કરવા પડતાં પ્રયત્નોની કોઈ મર્યાદા નથી હોતી, ઈશ્વરે આપણને સૌને ભરપૂર સમય આપ્યો જ છે, છતાંય આપણે ખોટી ઉતાવળ કરી, ખોટી રીતે, કે ખોટા રસ્તે કેમ વળી જઈએ છીએ ? તમે જ વિચારો કે, આમાં નુકશાન કોને ? માટે જીવનમાં સુખનો સમય ચાલતો હોય, કે દુ:ખનો શાંતિ અને ધીરજ રાખ્યા વિના સારા સમયની પ્રાપ્તિ કે, જીવનમાં કાયમી આનંદની અનુભૂતિ આપણે ક્યારે, કેટલી અને કેવી રીતે કરી શકીશું ?

archana

कौन कहता है चरित्र कॉपी नहीं होता, यहां लोग चेहरों के साथ किरदार भी बदल लेते हैं… बातों और व्यवहार की नकल करके, अच्छाई का दिखावा कर लेते हैं… इंस्टाग्राम की रीलों से सीखकर, संस्कारों का नकाब पहन लेते हैं… पर सच तो ये है — चेहरा बदल जाता है, पर दिल कभी कॉपी नहीं होता… 💔

ડો. માધવી ઠાકર

દોડ્યા એટલાને ઠોકર લાગી ઉંમરની એટલી સમજાણ લાગી. - ડો. માધવી ઠાકર ✍️

ડો. માધવી ઠાકર

ગજરો શોભતો શૃંગારની હરોળમાં અંજાતી આખોએ પ્રેમની ગલીમાં - ડો. માધવી ઠાકર ✍️

Shailesh Joshi

તારીખ, વાર, ગામ, નામ અને સરનામા બદલાય છે, ઘટનાઓ ને વારદાતો તો બધી એક જેવી જ થાય છે, પાછું જાણે છે તો સૌ કે, ખોટા કર્મોની સજા અતિ આકરી હોય છે, તોયે નીત નવા નવા દુ:ખદ કિસ્સાઓ સતત ઉમેરાતાં જાય છે, ઉપર ઈશ્વર પણ આજકાલ અવઢવમાં હશે, કે મારા બનાવેલા, મને માનતા, અને પૂજતા મારા જ લોકો, આ કઈ દિશામાં જાય છે ❓️ - Shailesh Joshi

Kishor Sagathiya

ना डीजल से ना पेट्रोल से चलती है, ना डीजल से ना पेट्रोल से चलती है ये दुनिया है साहब , अपने मतलब से चलती है। - Kishor Sagathiya

Kishor Sagathiya

जिंदगी में एक बात तो समझ आ गई ,कि मेरा सबके लिए अच्छा होना मेरे ही लिए अच्छा नहीं है। - kalpana Sagathiya

Chaitanya Joshi

મારી શ્વાસ સરગમે તમે આવજો હરિ. મારી ખુશી કે ગમે તમે આવજો હરિ. આમંત્રણ અંતરથી આપ્યું અવિનાશીને, શિર તો વારંવાર નમે તમે આવજો હરિ. એક આશા રહી તમારી અબ્ધિવાસીની, આગમન તમારું ગમે તમે આવજો હરિ. પ્રતીક્ષા પરમેશની પ્રતિ દિન પ્રગટતીને, મનના સંશયો તો શમે તમે આવજો હરિ. વિનંતી કરી કરીને વહાણા વાયા વખતના, આખરે માનવ જાત અમે તમે આવજો હરિ. __ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.

Kishor Sagathiya

आंखों में आंसू लिए मुझे घूर रहा था, पता नहीं वो आईने में खड़ा सख्श कौन था। - Kishor Sagathiya

Shailesh Joshi

જીવનમાં સુખ અને દુઃખ આવવાના, કે જવાના મુખ્ય આધાર બેજ છે, એક આપણા વિચારો, અને બે, એના પર આપણે કરેલ અમલ. - Shailesh Joshi

Mrs Farida Desar foram

खिल उठती हैं, चेहरे की रंगत, जब तुमसे बात हो जाती हैं, दिल की दिल से, मुलाकात हो जाती हैं.... luv u jindagi ❤️ - Mrs Farida Desar foram

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

૧. મહેનત અને નસીબ નસીબની રેખાઓ પર ભરોસો ન કર "સ્વયમ્'ભૂ" એટલો, પરસેવાની સ્યાહીથી જ લખાય છે તારો "સ્વયમ્'ભૂ"ફેંસલો. ૨. હિંમત અને સંઘર્ષ રાતના અંધકારથી ડરીને ક્યાં સુધી"સ્વયમ્'ભૂ"બેસીશ? સૂરજ બનીને ખુદ તું જ તારો રસ્તો કંડાર "સ્વયમ્'ભૂ" ૩. પડકારોનો સામનો તોફાનોથી ડરીને કિનારે બેસવું મને મંજૂર નથી, લહેરો સામે લડીને જીતવું "સ્વયમ્'ભૂ"હવે બહુ દૂર નથી. ૪. સફળતાનો શોર તારી મહેનતની શાંતિ ભલે કોઈ ના સમજે, તારી સફળતાનો શોર આખી દુનિયા"સ્વયમ્'ભૂ"સાંભળશે. ૫. ખુદ પર વિશ્વાસ ખુદ પર વિશ્વાસ હોય તો પહાડ પણ ઝૂકી જાય છે, મંઝિલની શું ઓકાત, એ પણ સામેથી"સ્વયમ્'ભૂ"મળી જાય છે. ૬. અલગ રસ્તો ભીડની પાછળ ચાલવાની મારી કોઈ આદત નથી, મારો રસ્તો હું"સ્વયમ્'ભૂ"ખુદ બનાવું, કોઈ સહારાની જરૂરત નથી. ૭. નિષ્ફળતાથી શીખ પડ્યા પછી પણ ફરીથી ઊભા થવાની જે મજા છે, એમાં જ તો છુપાયેલી અસલી જીતની સાચી"સ્વયમ્'ભૂ"મજા છે. ૮. ધીરજ ધીરજ રાખજે દોસ્ત, આ કઠિન સમય પણ વીતી જશે, કાંટાઓ વચ્ચે સંઘર્ષ કરતું તારું ફૂલ"સ્વયમ્'ભૂ"જરૂર ખીલી જશે. ૯. લક્ષ્ય પર ધ્યાન લોકોના મેણાં-ટોણાંથી તું તારી મંઝિલ ના બદલ, તારા સપનાંઓને સાકાર કરવાની"સ્વયમ્'ભૂ"તું જિદ્દ ના બદલ. ૧૦. અંદરની આગ તારી અંદરની આગને ક્યારેય તું"સ્વયમ્'ભૂ"બુઝાવા ના દેતો, હારીને બેસવાનો વિચાર મનમાં કદી લાવવા ના દેતો. અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ

"ઘૂંટાતું પ્રેમનું રહસ્ય" ​ઘૂંટાતું પ્રેમનું રહસ્ય... કોઈ જૂની સ્યાહીની જેમ, રોજ થોડું-થોડું મારા અસ્તિત્વના કોરા કાગળ પર વધુ ઘેરા રંગે ઊપસી રહ્યું છે. ​આંખોમાં સ્પષ્ટ વંચાતો છતાં, હોઠોથી કદી ન બોલી શકાતો એક એવો જાદુઈ મંત્ર છે આ... જેના કોઈ નિશ્ચિત અર્થ નથી હોતા, ફક્ત અહેસાસ હોય છે. ​જેટલો આ ભેદ ઉકેલવા જાઉં છું, એટલો જ તારા વિચારોમાં વધુ ગૂંચવાઉં છું. આ એક એવી મીઠી મૂંઝવણ છે, જેમાંથી હવે ક્યારેય છૂટવાનું મન નથી થતું. ​બંધ આંખે જોયેલું કોઈ સપનું છે, કે પછી ખુલ્લી આંખે અનુભવાતું અંતિમ સત્ય? શ્વાસની હરએક આવન-જાવનમાં બસ, છાનામાના તારા જ નામનો પડઘો પડે છે. ​કંઈ જ ન કહીને પણ મારા મૌનને બધું જ કહી જતું, આ જ તો છે... મારા ભીતર સતત ઘૂંટાતું "સ્વયમ્'ભૂ" પ્રેમનું રહસ્ય. અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"

Jyoti Gupta

#MaaKali #JaiMaaKali #KaliMata #MaaKaliBhakt #SanatanDharm #HinduDevotion #BhaktiShorts #DevotionalShorts #TempleVibes #MaaKaliBlessings #ViralShorts #TrendingShorts #BhaktiStatus #ShortsViral #JaiMataDi

Mara Bachaaaaa

दर्द में बना उनके लिए, उन्होंने मुड़कर देखा भी नहीं। यादों में सिमट गए वो पल, भूलना मुनासिब समझा ही नहीं। - Mara Bachaaaaa

Nandani

तुम तो दिल हो मेरा,, तुम से दिल थोड़ी ना भर सकता है।। ❤️

Chaitanya Joshi

કૃપા થાય પરમેશની તો સારી મતિ મળે. કૃપા થાય પરમેશની તો ઉર્ધ્વગતિમળે. સઘળું કાંઈ આપણા હાથમાં નથી હોતું, કૃપા થાય પરમેશની તો નિજ ક્ષતિ મળે. સુખ દુઃખ ખ્યાલો આખરે મનના માનવા, કૃપા થાય પરમેશની તો હરિભક્તિ મળે. આવાગમનના ફેરા ટાળવાનું લક્ષ્ય સૌનું, કૃપા થાય પરમેશની તો રામ રતિ મળે. રોજ રોજ અટવાયા કરવાનું વિષયોમાં, કૃપા થાય પરમેશની તો એથી મુક્તિ મળે. --ચૈતન્ય ચંદુલાલ જોષી 'દિપક 'પોરબંદર.

सनातनी_जितेंद्र मन

सीने में सजाकर के, जगता मैं सोता हूं, आती हैं जब यादें ,घुट-घुट के रोता हूँ...... जब सामने आती है, मैं उसमें खोता हूं। वो मुझमें होती है, मैं उसमें होता हूं।। दूऽर हुए जब वोऽऽ, मशगूऽल रहेऽ थे हम। कुछ वक्त रहे सोखे, फिर मन के साथी गम़।। अहसासों कि माला, सांसों में पिरोता हूं। मिलने कि चाहत में, तेरी राह जोहता हूं...आतीं हैं जब यादें....... सीने में सजाकर के, जगता मैं सोता हूं, आती हैं जब यादें ,घुट-घुट के रोता हूँ...... हैं वादे सारे तेरे, "मन" दिल दुनिया घेरे। खुद के रहे ना हम, मुंह जो हमसे फेरे।। जीने कि तमन्ना थी, सदियों का इरादा था। इक ऐसा वादा था, गफलत का तकादा था।। गर शौक़ अधूरे थे, पहले न बताया क्यों। मंजूर किया रिश्ता, कैसी मजबूरी थी।। सभी बीते यादों को, रख दिल में ढोता हूं...आतीं हैं जब यादें..... सीने में सजाकर के, जगता मैं सोता हूं, आती हैं जब यादें ,घुट-घुट के रोता हूँ...... सनातनी_जितेंद्र मन #sanatani_jitendra_mann

Soni shakya

अगर आप डर के आगे झुकते हो तो.. आप अपने दिल की बात कभी नहीं सुन पाओगे.. - Soni shakya

Chaitanya Joshi

દીપકના અજવાળામાં સમાઈ ગઈ છે જ્યોતિ. તેથી જ એ તો સર્વસ્વ ગણાઈ ગઈ છે જ્યોતિ દૂર રહેજો પતંગા આ તમને નહીં ફાવે માહોલ, એવું કહીને જીવનમાં વણાઈ ગઈ છે જ્યોતિ. પ્રકાશ પાથરતા દીપકની સન્મુખ રહી ને સતત, સ્વયં દીપકનો ખુદ પર્યાય બની ગઈ છે જ્યોતિ રાખી દૂર કાજલને સતવારો સતત આપનારી, ને પ્રક્ષેપ દીપકનો જાણે કે થઈ ગઈ છે જ્યોતિ એક જ મફત પ્રકાશ પાથરવાનું ઉભયનો હેતુ હંમેશા સૌના માનસ માં વસી ગઈ છે જ્યોતિ. --ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास बंजर भूमि बाग की बंजर भूमि पर गुल खिला ने चला हूँ l गुलशन की दुनिया में प्यार पिला ने चला हूँ ll खूबसूरती हुस्न की आशिकों बहका रही है l तिराडो की कायनात को हिला ने चला हूँ ll प्यार की नदियों की जल धारा को बहाकर l प्यासी भूमि की प्यास को बुझा ने चला हूँ ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Wow Mission successful

जैसे गिरगिट अपना रंग बदलती है, वैसे ही हालात जिंदगी बदलती है।

kattupaya s

when she said you are handsome my reaction. many reasons behind one meme

kattupaya s

she is smarter than u. she makes you cry and laugh at the same time . it's true

kattupaya s

she is ready to cry over your shoulders at any moment . but nobody wants that ice cream in rainy season

kattupaya s

That's my situation when I meet every single woman

kattupaya s

if you don't want to hurt anyone die peacefully u are not eligible to live in 🌎

Nayana Viradiya

"આપણો સંબંધ" શબ્દ માત્ર નથી આપણો સંબંધ, માત્ર નામની ડોર નથી આપણો સંબંધ. શ્વાસ જેવી નાજુક વસ્તુ આપણો સંબંધ, લાગણીનો શોર નથી વિશ્વાસ નો દોર આપણો સંબંધ. ક્યારેક આંખોમાં બોલે છે આપણો સંબંધ, ક્યારેક મૌનમાં મહેંકે આપણો સંબંધ. ક્યારેક હાથ પકડીને ચાલે આપણો સંબંધ, સદાય  અંતરમાં વસતો આપણો સંબંધ. એકમેકના જીવનનો સાચો સહારો આપણો સંબંધ, થાકેલા મનનો છાંયો  આપણો સંબંધ. બોલ્યા વગર સમજાઈ એ આપણો સંબંધ, દૂર રહીને પણ નજીક લાગે એ આપણો સંબંધ. ક્યારેક રિસાવું, ક્યારેક હાસ્યથી મહેંકે આપણો સંબંધ, ક્યારેક આંસુ વહેતા પણ ટકી રહેતો  આપણો સંબંધ જેમાં “હું” નહીં," તું " નથી “આપણુ ” રહેતું તે જ આપણો સંબંધ .

kattupaya s

yesterday we got into conversation finally it ended as usual. she is always right. I accepted I made a mistake.

Nayana Viradiya

Good morning

kattupaya s

funniest part of life is we doesn't know we are the main joker that everyone looking to use for

Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status