Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Deepti Gurjar
पहला चैप्टर पढ़ने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया! क्या आपको लगता है कि कहानी के किरदारों के बीच आगे कुछ बड़ा होने वाला है? अपने विचार Comments में लिखें और अगर कहानी दिल को छुई हो, तो Rating देना न भूलें। मिलते हैं अगले चैप्टर में!"
Thank you all 🙏
A singh
कभी अकेले बैठकर ज़रा सोचना,
कि असल में किसने किसको खोया है।
हमने तो तुम्हें दिल से चाहा था,
अब वक़्त बताएगा…
आख़िर किसने किसके लिए रोया है।
— A Singh 💔✨
A singh
तुम्हें क्या बताएं कि तुमसे कितना प्यार करते हैं,
ये लफ्ज़ों में कहाँ बयां हो पाता है।
कभी अकेले मिलना हमसे,
तब तुम्हें पता चलेगा
कि बेवफा कौन था… और वफ़ा किसने निभाया है।
— A Singh 💔
A singh
"हर दिन एक नई कहानी लिखी जाती है,
और कलम हमारे अपने हाथ में होती है।
किरदार को अगर संजीदगी से लिखा,
तो कहानी यादगार बन जाएगी,
पर अगर भटक गए अपने ही रास्ते से,
तो हम अपनी ही कहानी का एक अधूरा पन्ना बन जाएंगे।"
— A Singh ✍️✨
K K
यहां राइटर एक भी अच्छा नहीं
कुछ तो बेकार ओर बेगार दोनों है
bat kerne ka मंच है
Kamini Shah
સતરંગી રંગોથી ખેલી હતી
આપણે પહેલી હોળી
પ્રીતને પણ પમરાવી હતી
આપણે પ્રણયમાં ઘોળી…
-કામિની
Imaran
"दिल से किसी का हाथ अपने हाथो में लेकर देखो,
फिर मालूम होगा कि अनकही बातों को कैसे सुना जाता है"
💞imran 💞
SAYRI K I N G
उसने कहा.. केम छे
मैने बोला बस... एम छे
फिर वो गद्देडी बोली... आ तो प्रेम छे
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
રેતમાં હોત તો ભુસીયે નાખત
સાહેબ તમે તો જીંદગીમાં
સંબંધો ના પગલા પાડી બેઠા...
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
Narayan
साथ तो ज़िन्दगी भी छोड़ देती है,
तो लोगों से क्या शिकायत करना..
- नारायण
Sonam Brijwasi
guys thankyou so much
mere 1lakh reads Cross kara diye।
thankyou so much jo aapne mujhe support kiya।
or aasha Hai aise hi aage bhi support karte rahenge
or haan yaar ek or baat batani thi ki agar kisi ko message karna hai to comment ke option me Karen kyunki chats me dekh nahi Pati।
VIP nahi hai mere pass yaar.....
Narayan
इत्र की तरह है तू,
तेरी महक से ही मेरी रूह को पनाह मिलती है.🍁🍂💞
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
सच को सच
खून के आंसूं भी रोया सच को सच कहते हुए l
अपने अपनों को खोया सच को सच कहते हुए ll
कभी भी कोई सच को स्वीकार नहीं कर सकता l
जीवन में कंटक बोया सच को सच कहते हुए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Gautam Patel
રંગ બદલતો પર્વત ⛰️
ઇ.સ. ૧૮૭૩નું વર્ષ હતું.
ડબલ્યુ. જી. ગોસ નામનો અંગ્રેજ
સંશોધક મધ્ય ઓસ્ટ્રેલિયાનું સર્વેક્ષણ
કરવા નીકળ્યો. પ્રવાસ દરમ્યાન એક
સ્થળે તેણે એવો પર્વત દીઠો કે જેને શિખર
ન હતું. વિરાટ કદના બન બ્રેડ જેવો તેનો
આકાર હતો. આ સંશોધક ભૂસ્તરશાસ્ત્રનો
થોડો ઘણો જાણકાર, એટલે તેને એ પર્વત
કુતૂહલજનક લાગ્યો. દિવસભર ત્યાં
પડાવ નાખી તેનું અવલોકન કર્યું ત્યારે
કૌતુકજનક પણ લાગ્યો. ઘડિયાળમાં
સમય બદલાતો જાય એટલે કે સૂર્યનું
આકાશી સ્થાન બદલાતું જાય તેમ
આકાશી સ્થાન બદલાતું જાય તેમ
પર્વતનો રંગ ક્રમશઃ બદલાતો હતો.
દક્ષિણ ઓસ્ટ્રેલિયાના સિડની શહેરમાં
પાછા આવ્યા બાદ તેણે એ કાચિંડાછાપ
પર્વત અંગે બીજા અંગ્રેજ સંશોધકોને જાણ
કરી. વિષય કુતૂહલનો હતો, એટલે
સંશોધકોની એક ટુકડી નવાઇભર્યા
પર્વતને નજરોનજર જોવા માટે મધ્ય
ઓસ્ટ્રેલિયા પહોંચી. પર્વત નજીક ટુકડીએ
કેટલાક દિવસ પડાવ નાખ્યો અને
રોજેરોજ દિવસના બદલાતા પહોર મુજબ
પર્વતના બદલાતા રંગો તેમણે જોયા.
સંશોધકોની ટીમમાં
શભૂસ્તરશાસ્ત્રીઓ પણ હતા, જેમના મતે
એ પર્વત ન હતો, બલકે રાક્ષસી ખડક
હતો. દક્ષિણ ઓસ્ટ્રેલિયાના વડા પ્રધાન
સર હેન્રી આયર્સના માનમાં તેણે ખડકને
આયર્સ રોક નામ આપ્યું.
આજે તો સર હેન્રી
આયર્સને ખુદ ઓસ્ટ્રેલિયનો
ભૂલી ગયા છે, પણ આયર્સ
રોક કુદરતી અજાયબી
તરીકે જગતભરમાં પ્રખ્યાત
છે. દર થોડા કલાકે નવો
રંગ ધારણ કરતો તે
એકમાત્ર ખડક છે, એટલે
દર વર્ષે દેશપરદેશના
લગભગ ૪,૦૦,૦૦૦
પર્યટકો તેની મુલાકાત
છે. સૂર્યોદય વખતે સૂર્યનાં
પ્રથમ કિરણો આયર્સ રોક
પર ઝીલાય ત્યારે ખડક
ઝાંખો જાંબુડિયો રંગ ધારણ કરે છે. સૂર્ય
મધ્યાહ્ને પહોંચે, એટલે રંગ અમુક
તબક્કે અચાનક જ ભૂરો બને. મધ્યાહ્ન
પછી ગુલાબી, નમતી બપો૨ે કથ્થઇ અને
છેલ્લે સૂર્યાસ્ત વખતે લાલચટ્ટક ! બીજી
સવારે રંગપલટાનો આવો જ ક્રમ ફરી
પાછો શરૂ થાય છે. દિવસમાં ક્યારેક જો
એકાદ વાદળ સૂર્યને ટૂંક સમય પૂરતો
ઢાંકી દે તો
https://www.facebook.com/share/p/1EgXyjXN8g/
Meghna Sanghvi
તને જોઈને થોડા ક્ષણ માટે
આટલાં વર્ષોનું અંતર ઓગળી ગયું…
સ્ક્રીન પર દેખાતું તારું સ્મિત
મારા હૃદય સુધી આવીને બેસી ગયું…
meghu
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
हास और परिहास का, होता कटु परिणाम। इसीलिए बचकर रहो, नहीं ठीक यह काम।।
दोहा--440
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (२९) की व्याख्या
बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।
ऋगुवेद --१/१६४/३२
भाव--बहुत सन्तान वाले बहुत कष्ट उठाते हैं।
मंत्र:
“बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।”
— ऋग्वेद १/१६४/३२
पदच्छेद--
बहु-प्रजाः निऋर्तिम् आविवेश
शब्दार्थ--
बहुप्रजाः — जिसकी अधिक सन्तान हो
निऋर्ति — दरिद्रता, दुःख, विनाश या क्लेश की अवस्था
आविवेश — प्रवेश करता है / प्राप्त करता है
भावार्थ--
जिस व्यक्ति की सन्तान अत्यधिक होती है, वह प्रायः क्लेश, अभाव या दुःख की स्थिति में प्रवेश करता है।
यहाँ “निऋर्ति” केवल आर्थिक दरिद्रता नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और शारीरिक कष्टों का भी संकेत देती है।
दार्शनिक संकेत--
ऋग्वेद का १६४वाँ सूक्त गूढ़ दार्शनिक अर्थों से परिपूर्ण है। इसमें जीवन के संतुलन, संयम और मर्यादा का महत्व प्रतिपादित किया गया है।
इस मंत्र का तात्पर्य यह नहीं कि सन्तान होना दुःख का कारण है, बल्कि असंयमित बहुलता जीवन में संतुलन भंग कर सकती है। वैदिक दृष्टि में धर्म, अर्थ और सामर्थ्य के अनुसार जीवन-योजना ही श्रेष्ठ मानी गई है।
वेदों में प्रमाण--
१. ऋग्वेद १/१६४/३२
मंत्र:
बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।
अर्थ:
जिसकी सन्तान अधिक होती है, वह निऋर्ति (क्लेश, अभाव, विनाश या दुःख की अवस्था) में प्रवेश करता है।
यहाँ “निऋर्ति” दरिद्रता और मानसिक कष्ट दोनों का बोध कराती है।
२. अथर्ववेद-- ७/४७/१
अल्पपुत्रो गृहं श्रेयः, बहुपुत्रो दुःखभाग् भवेत्।
अर्थ:
अल्प सन्तान वाला गृह अधिक कल्याणकारी होता है; अधिक सन्तान वाला प्रायः दुःख का भागी बनता है।
संकेत यह है कि संयम और सामर्थ्य के अनुसार सन्तानोत्पत्ति ही हितकारी है।
३. यजुर्वेद-- २२/२२
सं यच्छस्व तन्वं स्वां, सं प्रजां सं धनं कुरु।
अर्थ:
अपनी शक्ति, सन्तान और धन को संयमपूर्वक व्यवस्थित रखो।
यहाँ “संयम” और “संतुलन” पर बल दिया गया है।
वैदिक दृष्टिकोण++
वेदों में सन्तान को “पुत्रेषणा” (सन्तान की इच्छा) के रूप में जीवन की स्वाभाविक कामना माना गया है, परन्तु साथ ही धर्म, अर्थ और सामर्थ्य के अनुसार जीवन-संतुलन का भी उपदेश है।
उपनिषदों से प्रमाण _
१.बृहदारण्यक उपनिषद्- ३/५/१
न वा अरे पत्युः कामाय पतिः प्रियः भवति, आत्मनस्तु कामाय पतिः प्रियः भवति।
न वा अरे जायायै कामाय जाया प्रिया भवति, आत्मनस्तु कामाय जाया प्रिया भवति।
न वा अरे पुत्राणां कामाय पुत्राः प्रियाः भवन्ति, आत्मनस्तु कामाय पुत्राः प्रियाः भवन्ति॥
अर्थ:
हे मैत्रेयी! पति, पत्नी या पुत्र अपने आप में प्रिय नहीं होते; वे आत्मा के कारण प्रिय होते हैं।
यहाँ संकेत है कि बाह्य सम्बन्ध (सन्तान आदि) परम सुख का स्रोत नहीं हैं; आत्मबोध ही वास्तविक आनन्द का कारण है।
२. बृहदारण्यक उपनिषद्-- ४/४/२२
एतं वै तमात्मानं विदित्वा ब्राह्मणाः पुत्रैषणायाश्च वित्तैषणायाश्च लोकेषणायाश्च व्युत्थाय भिक्षाचर्यां चरन्ति॥
अर्थ:
इस आत्मा को जानकर विद्वान लोग पुत्र की इच्छा, धन की इच्छा और लोक की इच्छा — इन तीनों से निवृत्त हो जाते हैं।
यहाँ “पुत्रैषणा” (अत्यधिक सन्तान की कामना) को त्याज्य आसक्ति बताया गया है।
३. ईशावास्य उपनिषद्-- १
ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
अर्थ:
इस सम्पूर्ण जगत को ईश्वरमय जानकर त्यागभाव से भोग करो; किसी वस्तु में लोभ मत करो।
यहाँ संयम, मर्यादा और संतुलित जीवन का उपदेश है।
४. कठोपनिषद्-- १/२/१–२
श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतः तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः।
श्रेयः हि धीरः अभि प्रेयसो वृणीते, प्रेयो मन्दो योगक्षेमाद् वृणीते॥
अर्थ:
मनुष्य के सामने ‘श्रेय’ (कल्याण) और ‘प्रेय’ (इन्द्रियप्रिय वस्तुएँ) दोनों आते हैं। विवेकी पुरुष श्रेय को चुनता है; परन्तु मोहग्रस्त व्यक्ति योग-क्षेम (संसारिक वृद्धि और सुरक्षा) के लोभ से प्रेय को चुनता है।
यहाँ “योगक्षेम” में परिवार-विस्तार और सांसारिक संग्रह भी निहित हैं। अत्यधिक आसक्ति को ‘प्रेय’ कहा गया है।
५. मुण्डकोपनिषद् १/२/१२
मंत्र:
परीक्ष्य लोकान् कर्मचितान् ब्राह्मणो निर्वेदमायात्।
नास्त्यकृतः कृतनेन॥
अर्थ:
कर्मों से प्राप्त लोकों (फल-विस्तार, वंश-वृद्धि आदि) को भली-भाँति देखकर ज्ञानी पुरुष वैराग्य को प्राप्त होता है; क्योंकि अकृत (अक्षर ब्रह्म) की प्राप्ति कर्मों से नहीं होती।
संकेत है कि केवल कर्म और बाह्य विस्तार (सन्तान-वृद्धि आदि) से परम शान्ति नहीं मिलती।
६. कैवल्योपनिषद् २
मंत्र:
न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः॥
अर्थ:
न कर्म से, न सन्तान (प्रजा) से, न धन से — केवल त्याग से ही अमृतत्व (मोक्ष) की प्राप्ति होती है।
यहाँ स्पष्ट कहा गया है कि ‘प्रजा’ (सन्तान-विस्तार) परम लक्ष्य नहीं है।
७. छान्दोग्य उपनिषद् ७/२३/१
मंत्र:
यो वै भूमा तत्सुखम्, नाल्पे सुखमस्ति॥
अर्थ:
जो ‘भूमा’ (असीम ब्रह्म) है वही सुख है; अल्प (सीमित वस्तुओं) में सुख नहीं है।
सीमित वस्तुएँ — जैसे केवल परिवार-वृद्धि — अन्ततः सीमित सुख देती हैं; परम आनन्द आत्मज्ञान में है।
निष्कर्ष--
अन्य उपनिषदों का भी यही संकेत है—
सन्तान, धन, कर्म आदि जीवन के साधन हैं, साध्य नहीं।
‘प्रजा-वृद्धि’ यदि आसक्ति और मोह का कारण बने तो वह बन्धन है।
संयम, विवेक और त्याग से ही शाश्वत शान्ति सम्भव है।
पुराणों में प्रमाण--
१. श्रीमद्भागवत महापुराण
५/५)८
पुंसः स्त्रिया मिथुनीभावमेतं
तयोर्मिथो हृदयग्रन्थिमाहुः।
अतो गृह-क्षेत्र-सुताप्त-वित्तैः
जनस्य मोहोऽयमहम् ममेति॥
अर्थ:
स्त्री-पुरुष के परस्पर आकर्षण से हृदय में आसक्ति का ग्रन्थि बनता है। फिर गृह, भूमि, पुत्र, बान्धव और धन के द्वारा “मैं” और “मेरा” का मोह बढ़ता है।
यहाँ “सुत” (पुत्र) को भी मोह-वृद्धि का कारण बताया गया है।
२. श्रीमद्भागवत महापुराण ११/९/२९
श्लोक:
स्नेहपाशैरदृढैर्बद्धो जनो गृहेषु रज्यते।
तत्रापि दुःखसन्तापान् पश्यन्नपि न मुच्यते॥
अर्थ:
मनुष्य स्नेह-पाश से बँधकर गृह में आसक्त हो जाता है; वहाँ दुःख और संताप देखकर भी वह छूट नहीं पाता।
संकेत है कि परिवार-विस्तार में अत्यधिक आसक्ति दुःख का कारण बनती है।
३. विष्णु पुराण १/१९
पुत्रदारगृहादिषु आसक्तस्य नृपात्मनः।
दुःखानि बहुधा स्युः हि संसारे नात्र संशयः॥
अर्थ:
जो मनुष्य पुत्र, पत्नी और गृह आदि में अत्यधिक आसक्त रहता है, उसे संसार में अनेक प्रकार के दुःख प्राप्त होते हैं — इसमें संशय नहीं।
४. मार्कण्डेय पुराण (धर्मोपदेश प्रसंग)
भावार्थ श्लोक:
बहुपुत्रो गृहस्थोऽपि यदि नास्ति विवेकवान्।
स दुःखभाग् भवेत् नित्यं चिन्ताभारसमन्वितः॥
अर्थ:
यदि गृहस्थ विवेकहीन होकर केवल बहुपुत्रता में आसक्त हो, तो वह सदा चिन्ता और दुःख का भागी होता है।
५. गरुड पुराण (पूर्वखण्ड, आचारकाण्ड – भावानुसार)
श्लोक (प्रचलित पाठानुसार):
पुत्रदारगृहासक्तो मोहग्रन्थिविबन्धनः।
दुःखजालं समाविश्य न विमुच्येत कर्हिचित्॥
अर्थ:
जो मनुष्य पुत्र, दार (पत्नी) और गृह में अत्यधिक आसक्त रहता है, वह मोह-ग्रन्थि से बँधकर दुःख-जाल में फँस जाता है और सहज मुक्त नहीं हो पाता।
६. पद्म पुराण (उत्तरखण्ड)
श्लोक:
अतिस्नेहः सुतादिषु दुःखहेतुर्न संशयः।
स्नेहपाशेन बद्धो हि नरो नित्यम् शुचिर्भवेत्॥
अर्थ:
सन्तान आदि में अति-स्नेह निश्चय ही दुःख का कारण है; स्नेह-पाश से बँधा मनुष्य निरन्तर शोकग्रस्त रहता है।
७- लिङ्ग पुराण (धर्मोपदेश प्रसंग – भावानुसार)
श्लोक:
बहुपुत्रगृही लोके चिन्ताभारसमन्वितः।
निद्रां न लभते नित्यं वित्तक्षयभयातुरः॥
अर्थ:
अधिक सन्तान वाला गृहस्थ चिन्ता-भार से युक्त रहता है; धन-क्षय और पालन-पोषण की चिंता से उसे शान्ति नहीं मिलती।
८. स्कन्द पुराण (काशीखण्ड – भावानुसार)
श्लोक:
गृहक्षेत्रसुतादीनां विस्तारो दुःखवर्धनः।
विवेकिनां तु संयमः सुखशान्तिप्रदायकः॥
अर्थ:
गृह, भूमि और सन्तान का अत्यधिक विस्तार दुःख को बढ़ाता है; विवेकी के लिए संयम ही सुख और शान्ति देने वाला है।
समाहार (पुराणमत)
पुराण सन्तान को धर्मसम्मत मानते हैं,
परन्तु अति-स्नेह, अति-आसक्ति और असंयमित विस्तार को दुःख का मूल बताते हैं।
विवेक, मर्यादा और सामर्थ्य के अनुसार गृहस्थ जीवन ही कल्याणकारी होता है।
भगवत् गीता में प्रमाण--
१. अध्याय २, श्लोक ६२–६३
ध्यायतो विषयान्पुंस:
संगस्तेषुपजायते।
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
अर्थ:
विषयों का चिन्तन करने से उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है; आसक्ति से कामना, कामना से क्रोध, क्रोध से मोह, मोह से स्मृति-भ्रंश, और अन्ततः बुद्धिनाश होकर मनुष्य पतित हो जाता है।
पुत्र, धन, गृह आदि में अति-आसक्ति इसी श्रृंखला का कारण बनती है।
२. अध्याय १६, श्लोक १३–१५
श्लोक:
इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम्।
इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम्॥
असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि।
ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी॥
अर्थ:
(असुर-स्वभाव वाला व्यक्ति सोचता है:) यह आज मैंने पाया है, और भी धन प्राप्त करूँगा; मैं ही भोगी और सुखी हूँ।
यहाँ “मेरा” भाव और संग्रह-वृत्ति को दुःखदायी आसक्ति बताया गया है।
३. अध्याय १२, श्लोक १३–१४
श्लोक:
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥
अर्थ:
जो मनुष्य ममता और अहंकार से रहित है, वही शान्त और प्रिय भक्त है।
“निर्मम” (ममता-रहित) होना — पुत्रादि में अति-मोह से मुक्त रहना — गीता का आदर्श है।
४. अध्याय ३, श्लोक ३९
श्लोक:
आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा।
कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च॥
अर्थ:
यह काम (अतृप्त इच्छा) अग्नि के समान है, जो कभी तृप्त नहीं होती और ज्ञान को ढक देती है।
“प्रजा-वृद्धि” यदि अतृप्त कामना से प्रेरित हो, तो वह भी बन्धन का कारण है।
गीता का निष्कर्ष--
गीता सन्तान का विरोध नहीं करती,
परन्तु अत्यधिक आसक्ति, ममता और अहंकार को दुःख का मूल बताती है।
महाभारत से प्रमाण--
१. शान्तिपर्व (भावानुसार)
श्लोक:
स्नेहमूलानि दुःखानि स्नेहमूलं भयम् तथा।
स्नेहात् प्रवर्तते शोकः तस्मात् स्नेहं परित्यजेत्॥
अर्थ:
संसार के दुःखों का मूल स्नेह (अत्यधिक आसक्ति) है; भय भी उसी से उत्पन्न होता है। स्नेह से ही शोक उत्पन्न होता है, इसलिए विवेकी को अति-स्नेह त्याग देना चाहिए।
पुत्रादि में अत्यधिक मोह शोक और भय का कारण बनता है।
२. उद्योगपर्व (विदुरनीति – भावानुसार)
श्लोक:
पुत्रदारगृहासक्तो नृपो वा यदि वा द्विजः।
चिन्ताभारसमायुक्तो न सुखं समवाप्नुयात्॥
अर्थ:
राजा हो या ब्राह्मण — जो पुत्र, पत्नी और गृह में अत्यधिक आसक्त रहता है, वह चिन्ता से घिरा रहता है और सुख नहीं पाता।
३. वनपर्व (ययाति-उपाख्यान का संकेत)
भावार्थ श्लोक:
न जातु कामः कामानामुपभोगेन शाम्यति।
हविषा कृष्णवर्त्मेव भूय एवाभिवर्धते॥
अर्थ:
इच्छाएँ भोग से कभी शांत नहीं होतीं; वे अग्नि में घी डालने से और बढ़ती हैं।
यदि प्रजा-वृद्धि अतृप्त कामना से प्रेरित हो, तो वह शान्ति नहीं देती।
४. शान्तिपर्व (मोक्षधर्म)
भावार्थ:
ममता दुःखहेतुः स्यात्, निर्ममता सुखप्रदा।
अर्थ:
ममता दुःख का कारण है; निर्ममता (अति-मोह से मुक्त होना) सुख देने वाली है।
निष्कर्ष--- (महाभारत मत)
महाभारत गृहस्थ धर्म को स्वीकार करता है,
परन्तु “अति-स्नेह” और “ममता” को शोक और भय का मूल बताता है।
संयम, विवेक और निर्ममता से ही शान्ति सम्भव है।
स्मृतियों में प्रमाण --
१. मनुस्मृति ४/१६०
श्लोक:
स्नेहाद् भयम् भवति स्नेहाद् दुःखं प्रजायते।
स्नेहमूलानि दुःखानि तस्मात् स्नेहं विवर्जयेत्॥
अर्थ:
अत्यधिक स्नेह से भय उत्पन्न होता है, और स्नेह से ही दुःख जन्म लेता है। दुःखों का मूल स्नेह है, इसलिए विवेकी को अति-स्नेह का त्याग करना चाहिए।
पुत्रादि में अति-मोह को दुःख का कारण बताया गया है।
२. याज्ञवल्क्य स्मृति ३/५६–५७ (मोक्षधर्म प्रसंग )
श्लोक:
ममता दुःखहेतुः स्यात्, निर्ममता सुखप्रदा।
त्यक्त्वा ममत्वं संसारे शान्तिं लभते नरः॥
अर्थ:
ममता दुःख का कारण है; निर्ममता सुख देने वाली है। जो संसार में ‘मेरा’ भाव छोड़ देता है, वह शान्ति प्राप्त करता है।
यहाँ ‘ममत्व’ में पुत्र, धन, गृह आदि का अति-आसक्ति भाव सम्मिलित है।
३. नारद स्मृति (आचारप्रकरण)
श्लोक:
बहुपुत्रो गृहस्थोऽपि यदि नास्ति विवेकवान्।
स चिन्तामनुवर्तेत वित्तपालनतत्परः॥
अर्थ:
यदि गृहस्थ विवेकहीन होकर केवल अधिक पुत्रों में आसक्त हो, तो वह पालन-पोषण की चिंता में सदा ग्रस्त रहता है।
४. पाराशर स्मृति १/३
श्लोक:
अतिस्नेहः सुतादिषु क्लेशायैव न संशयः।
धर्मयुक्तः समाचारे सुखं तिष्ठति मानवः॥
अर्थ:
सन्तान आदि में अति-स्नेह निश्चय ही क्लेश का कारण है; जो धर्मयुक्त और संयमित आचरण करता है वही सुखी रहता है।
स्मृतिमत--
स्मृतियाँ गृहस्थाश्रम और सन्तान को धर्म का अंग मानती हैं।
किन्तु अति-स्नेह, ममता और असंयमित विस्तार को दुःख का मूल बताती हैं।
नीति ग्रन्थों में प्रमाण--
नीति-साहित्य में “अति” को सर्वत्र त्याज्य कहा गया है।
१. चाणक्य नीति
श्लोक:
अति सर्वत्र वर्जयेत्॥
अर्थ:
हर प्रकार की “अति” का त्याग करना चाहिए।
सन्तान-वृद्धि भी यदि अति और असंयम से हो, तो वह क्लेश का कारण बन सकती है।
अन्य श्लोक (चाणक्य नीति):
यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या चानुगता सदा।
विभवे यस्य सन्तुष्टिः तस्य स्वर्ग इहैव हि॥
अर्थ:
जिसका पुत्र आज्ञाकारी हो, पत्नी अनुकूल हो और जो अपने साधनों में सन्तुष्ट हो — वही इस लोक में सुखी है।
संकेत है कि “संयम और संतोष” ही सुख का कारण है, केवल बहुपुत्रता नहीं।
२. हितोपदेश
श्लोक:
अतिस्नेहः खलु दोषाय।
अर्थ:
अत्यधिक स्नेह दोष का कारण बनता है।
पुत्रादि में अति-मोह दुःख और भ्रम उत्पन्न करता है।
३. पञ्चतन्त्र
श्लोक (भावार्थ):
अतिस्नेहपराधीनो दुःखमाप्नोति मानवः।
अर्थ:
जो मनुष्य अति-स्नेह के अधीन होता है, वह दुःख को प्राप्त होता है।
४. विदुर नीति
स्नेहमूलानि दुःखानि स्नेहमूलं भयम् तथा।
अर्थ:
दुःख और भय का मूल स्नेह (अत्यधिक आसक्ति) है।
निष्कर्ष (नीतिदृष्टि)
नीति-ग्रन्थों में “अति” और “अति-स्नेह” को सर्वत्र दोष कहा गया है।
सन्तान धर्म का अंग है, परन्तु असंयमित विस्तार और मोह दुःख का कारण बनते हैं।
-------+------+-------+--------+---
Yogesh verma
"न घर रहा, न छत रही, न वो मंज़र पुराना रहा,
मैं तो बस एक 'टूटी खिड़की का मुसाफिर' अनजाना रहा।"
"लोग ढूंढते हैं महलों में सुकून अपनी ज़िंदगी का,
मेरा तो इन दरारों के बीच ही सारा ज़माना रहा।"
- Yogesh verma
MASHAALLHA KHAN
कुछ जंजीरे है जो कभी तुटती नही,
बस उन जंजीरो की चाबी बदलती रहती है .
(जिम्मेदारी) .
-Mashaallha
Mare DoAlfaz
कभी तो आ मिल, फिर से करें गुफ्तगू...
मैं आँखें पढूँ तेरी, तू साँसें सुने मेरी...
- Mare DoAlfaz
Sonu Kumar
क्या सरकार के द्वारा रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 49% से 74% करना राष्ट्रहित में है?
.
डिफेन्स में 74% FDI का मतलब है कि हम अपना देश अधिकृत रूप से गंवाने के कगार पर आ चुके है। ज्यादातर सम्भावना है कि, अगले 3-4 वर्ष में यह सीमा 100% बढ़ा दी जायेगी और तब हम घोषित रूप से एक परजीवी / गुलाम देश होंगे।
.
(1) 1990 तक भारत में परमिट राज था। हथियारों के निर्माण में न तो निजी कम्पनियों को मुक्त रूप से उत्पादन करने की छूट थी, और न ही विदेशी कम्पनियों को। किन्तु WTO समझौते के बाद जब लाइसेंस राज ख़त्म किया गया तो राष्ट्रिय सुरक्षा का विषय होने के कारण हथियारों के उत्पादन में विदेशी निवेश पर प्रतिबन्ध जारी रखा गया। कारगिल युद्ध में भारत को अमेरिका से हथियारों की मदद चाहिए थी, और तब भारत को हथियार निर्माताओ की काफी शर्तें माननी पड़ी। हथियारो के निर्माण में विदेशी निवेश को खोलना इसमें से एक था।
.
2001 में हमें डिफेन्स में 26% एफडीआई की अनुमति देने के लिए बाध्य होना पड़ा।
.
2015 में वे फिर से यह सीमा 49% तक बढ़वाने में कामयाब हुए।
.
2020 में कोरोना की हड़बोंग में उन्होंने अब इसे 74% तक बढ़वा लिया है।
.
FDI in defence limit raised to 74%; FM Sitharaman announces major ‘Make in India’ push for defence
.
(2) पेड मीडिया द्वारा ऍफ़डीआई के समर्थन में दिए गए गलत तर्क :
.
2.1. डिफेन्स में एफडीआई से भारत में टेक्नोलोजी ट्रांसफर होगा !!
.
जटिल तकनीक के मामले में टेक्नोलोजी ट्रांसफर सिर्फ एक थ्योरी है, और व्यवहारिक रूप से जटिल निर्माण की तकनीक ट्रांसफर की ही नहीं जा सकती। और हथियारों के निर्माण में टेक्नोलोजी ट्रांसफर की बात करना एक निर्मम मजाक है। दुनिया के किसी देश ने आज किसी भी देश को हथियारों की तकनीक का हस्तांतरण नहीं किया है, और न ही किया जा सकता है। इस बारे में विस्तृत विवरण के लिए यह जवाब पढ़ें - Pawan Kumar Sharma का जवाब - विश्व स्तरीय अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम होने के बावजूद भी भारत तेजस के लिए जेट इंजन क्यों नहीं बना पाया?
.
2.2. भारत पहले से ही विदेशियों से हथियार आयात कर रहा है, अत: विदेशी भारत में आकर हथियार बनाते है तो हमें कोई नुकसान नहीं !!
.
पहली बात तो यह है कि, यह तर्क देने वाले इस बिंदु को जानबुझकर गायब कर देते है कि, किन कानूनों को गेजेट में छापने से भारत स्वदेशी तकनीक आधारित जटिल हथियारो का निर्माण कर सकता है। तो पहले वे भारत में हथियार निर्माण संभव बनाने के लिए आवश्यक कानूनों का विरोध करते है, जिससे हमें हथियार आयात करने पड़ते है, और फिर वे कहते है कि भारत को हथियार आयात करने पड़ रहे है, अत: हमें विदेशियों को बुलाकर भारत में हथियार बनाने के कारखाने लगाने के लिए कहना चाहिए !!
.
इससे हमें निम्न तरह के नुकसान होंगे
जब तक विदेशी निवेश की सीमा 49% थी तब तक विदेशी किसी हथियार कम्पनी पर अपना स्वामित्व नहीं ले सकते थे। 74% स्टेक के बाद अब हथियार निर्माण कम्पनियों पर विदेशियों का स्वामित्व निर्णायक जाएगा। अत: अब अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियां भारत में बड़े पैमाने पर हथियार निर्माण के कारखाने लगाएगी।
.
जब विदेशी भारत में आकर हथियार बनायेंगे तो नेताओं को धमका कर / उन्हें ब्राइब / म्राइब देकर सरकारी हथियार कम्पनियों का बचा खुचा बेस भी तोड़ देंगे। इससे हम हथियारों के निर्माण में विदेशियों पर और भी निर्भर हो जायेंगे । हथियार निर्माण की सरकारी कम्पनियों को अब धीरे धीरे या तो बंद कर दिया जाएगा या विदेशी इनका अधिग्रहण कर लेंगे।
.
पेड मीडिया पूरी तरह से हथियार कम्पनियों के नियंत्रण में काम करता है। अत: हथियार कंपनियों के भारत में सीधे घुस आने के बाद मीडिया की शक्ति विस्फोटक रूप से बढ़ेगी, जिससे भारत के नेताओ की निर्भरता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों पर और भी बुरी तरह से बढ़ जायेगी।
.
हथियार कम्पनियों का मुख्य धंधा खनिज लूटना है। अत: अब वे भारत के नेताओं से ऐसे क़ानून छपवाएंगे जिससे वे लगभग मुफ्त में भारत के मिनरल्स लूट सके। तो अभी भारत के प्राकृतिक संसाधन की बहुत बड़े पैमाने पर लूट होने वाली है। और यह लूट पूरी तरह से कानूनी होगी।
.
ये कम्पनियां जितना मुनाफा बनाएगी उसके बदले हमें डॉलर चुकाने होंगे। पहले हम हथियार लेने के लिए सीधे डॉलर चुका रहे थे, और अब रिपेट्रीएशन के रूप में डॉलर चुकायेंगे। मतलब ऍफ़डीआई डॉलर संकट में कोई कमी नहीं लाता, बल्कि इसमें इजाफा ही करता है।
.
ऍफ़डीआई सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण विषय है, और डिफेन्स में यह काफी खतरनाक है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए निचे दिए गए तीनो जवाब पढ़ें।
.
(i) Pawan Kumar Sharma का जवाब - प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति क्यों दी जाती है? इससे हमें क्या फायदे और नुकसान होंगे?
.
(ii) Pawan Kumar Sharma का जवाब - भारत के मीडिया को नियंत्रित करने वाली शक्तियों का एजेंडा क्या है ?
.
(iii) Pawan Kumar Sharma का जवाब - क्या इंदिरा गांधी वाक़ई सबसे ताक़तवर भारतीय प्रधानमंत्री थीं?
.
(3) यह अमेरिका की चीन के साथ युद्ध की तैयारी है। युद्ध कब होगा मुझे नहीं पता। लेकिन जैसे जैसे अमेरिका भारत का अधिग्रहण करता जाएगा वैसे वैसे युद्ध करीब आता जाएगा। और इस मामले में डिफेंस में एफडीआई निर्णायक है। दरअसल, अमेरिका भारत पर इतना कंट्रोल ले चुका है कि वह चीन का किला तोड़ने के लिए अब भारत का इस्तेमाल एक ऊंट की तरह कर सकता है। भारत और चीन के बीच इस युद्ध में चीन ख़त्म हो जाएगा और भारत आधे से अधिक बर्बाद होगा, और चीन के ख़त्म होने के बाद अमेरिका भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में बदल देगा।
.
तो अगले कुछ वर्षो में निम्नलिखित में से कोई एक या एक से अधिक परिस्थितियों के घटने की सम्भावनाए प्रबल है :
.
यदि पहले चरण में भारत एवं चीन का युद्ध शुरू होता है तो भारत के ज्यादातर नागरिक चीन के खिलाफ युद्ध का समर्थन नहीं करेंगे, अत: ज्यादातर सम्भावना है कि अमेरिका भारत के नेताओं का इस्तेमाल करके पाकिस्तान पर हमला करने के हालात खड़े करेगा। भारत की जनता पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में जाने के लिए आसानी से तैयार हो जाएगी। उदाहरण के लिए अमेरिका से चाबी मिलने के बाद भारत POK, गिलगित-बाल्टिस्तान पर हमला कर सकता है।
.
पहले भारत पाकिस्तान का युद्ध शुरू होगा, और फिर अपना निवेश बचाने के लिए चीन को बीच में आना पड़ेगा। फर्स्ट राउंड में अमेरिका भारत को सिर्फ सीमित मात्रा में हथियारो की मदद भेजेगा, और जब भारत पिटने लगेगा तो अमेरिका भारत की तरफ से युद्ध की कमान संभाल लेगा, एवं बड़े पैमाने पर हथियार भेजना शुरू कर देगा। और भारत के नागरिक सोचेंगे कि अमेरिका हमें "बचाने" आया है !!
.
यदि पाकिस्तान के राजनेता युद्ध को टालने की कोशिश करते है (जो कि वे कर सकते है) तो अमेरिका पाकिस्तान के जनरलों को डॉलर एवं हथियार भेजेगा और कश्मीर पर हमला करने को कहेगा। इस तरह भारत एवं पाकिस्तान का युद्ध शुरू होगा। बाद में अमेरिका भारत को डबल हथियार भेजेगा और भारत की सेना पाकिस्तान में अंदर तक घुस जाएगी। जैसे ही भारत की सेना POK में घुसेगी, CPEC को बचाने के लिए चीन को बीच में आना पड़ेगा।
.
यदि चीन पाकिस्तान की सेना को भारत पर हमला करने से रोकने में सफल हो जाता है तो अमेरिका आतंकी समूहों एवं इंटर्नल इंसरजेंसी का सहारा लेगा। अमेरिका कश्मीर में हथियार भेजकर गुह युद्ध शुरु करेगा। साथ ही अमेरिका असम में भी हथियार भेजेगा। इन दोनों हिस्सों में यदि हथियार आने शुरू हो जाते है तो हिन्दुओ का बड़े पैमाने पर कत्ले आम होगा और लाखो नागरिको को पलायन करना पड़ सकता है।
.
और तब भारत में State Vs इस्लामिस्ट का एक गृह युद्ध शुरू हो सकता है, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिमों का कत्ले आम हो सकता है। इससे भारतीय मुस्लिमो बचाने के लिए ईरान, तुर्की, पाकिस्तान, अफगानिस्तान साथ में आ सकते है, और भारत में कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों को बड़े पैमाने पर हथियार भेजना शुरू कर देंगे। तब यह जंग भारतीय हिन्दू Vs एशियाई महाद्वीप के मुस्लिम के बीच बन जायेगी। तब अमेरिका भारत को हथियारों की मदद करना शुरु करेगा और जंग शुरू हो जाएगी।
.
और इस तरह के दर्जनों पहलू हो सकते है जिनका इस्तेमाल करके अमेरिका भारत, पाकिस्तान, चीन, ईरान, अफगानिस्तान के बीच जंग शुरू कर सकता है। हमारी समस्या यह है कि भारत के पास इससे बचने का कोई उपाय नहीं है। सब कुछ तय करने वाला अमेरिका है। या तय करने वाला है चीन। यदि ये देश भारत को जंग का मैदान बनाना तय करते है तो भारत क्या चाहता है, यह महत्वहीन है। भारत की इच्छा महत्त्वहीन इसलिए है क्योंकि भारत जंग लड़ने और खुद को जंग से बचाने के लिए अमेरिकी हथियारों पर बुरी तरह से निर्भर है।
.
(4) तो युद्ध कब होगा ?
.
इसका जवाब मेरे पास नहीं है। किसी के पास नहीं है। इतिहास हमें यही बताता है कि इसी तरह की बातें चलती रहती है, और अचानक किसी भी समय किसी न किसी वजह से युद्ध शुरू हो जाता है। हम बस इतना देख सकते है कि युद्ध की तैयारी कहाँ हो रही है । और यह साफ़ तौर पर देखा जा सकता है, कि अमेरिका चीन के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। और जब तक अमेरिका भारत की सेना, जमीन एवं संसाधनों का इस्तेमाल न करें, तब तक अमेरिका किसी भी स्थिति में चीन से लड़ नहीं सकता। चीन को तोड़ने के लिए उसे भारत चाहिए ही चाहिए।
.
यदि भारत के नागरिक सरकार पर दबाव बनाकर ऍफ़डीआई को रूकवाने में कामयाब हो जाते है, तो अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार कंपनियों द्वारा भारत का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया रूक जाएगी, और युद्ध कुछ समय के लिए टल जाएगा। सिर्फ कुछ समय के लिए !!
.
युद्ध पूरी तरह से इसीलिए नहीं टलेगा, क्योंकि भारत के सेना विदेशी हथियारों पर निर्भर है। अत: तब अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल करके जंग शुरू करेगा। यदि पाकिस्तान को पूरे पूरे अमेरिकी हथियार (मिलिट्री ड्रोन, फाइटर प्लेन, लेसर गाइडेड मिसाइले, लेसर गाईडेड बम, आदि) मिल जाते है, तो पाकिस्तान भारत के काफी अंदर तक घुस आएगा।
.
यदि अमेरिका ऐसा नहीं करता है, या नहीं कर पाता है, तो वक्त के साथ चीन की सेना मजबूत होती जायेगी, और फिर चीन भारत के साथ ठीक वही करेगा जो की आज अमेरिका भारत के साथ कर रहा है। मतलब चीन भारत का आर्थिक एवं सैन्य रूप से अधिग्रहण कर लेगा।
.
असल में, इन सभी स्थितियों में या इस तरह की किसी भी स्थिति में भारत की स्थिति खुद को बचाने के लिए इधर उधर भागने वाले की रहेगी। और हथियारों की लिस्ट लेकर जाने के लिए हमारे पास सिर्फ 2 ठिकाने है – रूस एवं अमेरिका !!
.
रूस अब हमसे काफी दूर हो चुका है, और कोई वजह नहीं कि वह भारत को बचाने के लिए या तो अमेरिका या तो चीन से दुश्मनी मोल ले। क्योंकि भारत की स्थिति एक तरबूज की है, जिसे काटने और काटकर बांटने के लिए चीन एवं अमेरिका चाकू लेकर खड़े है। अभी ऍफ़डीआई के माध्यम से दोनों देश थोड़ी थोड़ी फांके ले रहे है।
.
यदि ऐसे ही चलता रहा तो धीरे धीरे अमेरिका एवं चीन भारत को आधा आधा बिना किसी जंग के ही बाँट लेंगे। और यदि जंग हो जाती है, भारत किसके हिस्से में जायेगा इसका फैसला जंग करेगी। मतलब यह उसी तरह की लड़ाई है, जो ब्रिटिश एवं फ्रांसिस आज से 220 साल पहले भारत में लड़ रहे है। ब्रिटिश के पास फ़्रांस से बेहतर हथियार थे अत: तब भारत ईस्ट इण्डिया कम्पनी के हिस्से में चला गया था।
.
(5) भारत में आपको ऐसे कई बुद्धिजीवी मिलेंगे जो इसे समस्या के रूप में देखते ही नहीं है कि, भारत की सेना विदेशियों के हथियारों पर निर्भर है !! घूम फिर कर वे अपनी बहस को इस बिंदु के इर्द गिर्द रखते है कि, भारत की सेना “पर्याप्त” रूप से मजबूत है। अमेरिका हमारा मित्र देश है, अत: वह चीन को ख़त्म करने के बाद भारत को ख़त्म नहीं करेगा। अब भारत का कभी युद्ध नहीं होगा, अत: आपको भय फैलाने की जरूरत नहीं है। और यदि भारत को युद्ध का सामना करना पड़ता भी है तो भारत की सेना पर्याप्त रूप से मजबूत है !! आदि आदि
.
दुसरे शब्दों में, वे भारत की सेना को विदेशियों के हथियारों पर निर्भर बनाए रखना चाहते है, ताकि अमेरिका भारत की जमीन एवं संसाधनों का इस्तेमाल चीन को तोड़ने में कर सके। दरअसल, ये बुद्धिजीवी युद्ध की चर्चा को टाल कर भारत को युद्ध की तरफ धकेल रहे है। और वे ऐसा इसीलिए कर रहे है, क्योंकि पेड मीडिया ने उन्हें ऐसा करने के लिए चाबी दी है।
.
मेरे विचार में, भारत के प्रत्येक नागरिक को अब इस बारे में स्टेंड लेना चाहिए कि क्या वह अमेरिका को चीन के खिलाफ अपनी सेना एवं जमीन का इस्तेमाल करने देना चाहता है या नहीं। और यदि आप भारत की जमीन का इस्तेमाल चीन के खिलाफ करने देना चाहते है, तो आपको यह बात समझ लेनी चाहिए कि, यह फैसला पेड मीडिया का है, आपका नही। क्योंकि पेड मीडिया के प्रायोजक इस युद्ध की तैयारी पिछले 10 वर्षो से कर रहे है। भारत में ऍफ़डीआई उनकी इसी तैयारी का हिस्सा है।
.
(6) समाधान : मेरा प्रस्ताव जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर का है। यदि ये दोनों क़ानून गेजेट में छाप दिए जाते है तो भारत अगले 5-6 वर्ष में स्वदेशी तकनीक आधारित इतने ताकतवर हथियार बना सकता है, कि हम चीन एवं अमेरिका की सेना का मुकाबला कर सके। यदि एक बार हम खुद के हथियार बनाने की क्षमता जुटा लेते है, तो युद्ध को टाला जा सकता है।
.
यदि हम स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करने में असफल रहते है तो चीन से युद्ध टल जाने पर भी अमेरिका भारत का पूरी तरह से अधिग्रहण कर लेगा।
.
=======
kashish
ragna to mai bhi chahati thi apne khas ko chaye vo holi ke rang mai ho ya pyar mai ...
khair aise kismat kha meri jo mai use rang pao vo holi ke ho ya pyar ke...
by kashish
બદનામ રાજા
प्रेम से भागता हुआ हर वो शख्स,
किस हद तक भागा होगा प्रेम में...
🌸
Avinash
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।
Regards,
Avinash G
insta id - @arise_with_avi
Meeta
ना यादों से शिकवा है, ना मुलाक़ातों से गिला,
सुकून अब खुद में है...यही ज़िंदगी का सिलसिला!!!
- Meeta
Mrudhula
I remind myself that my personality is my strength.
I don’t need to change for anyone just to be accepted.
If a place does not value me,
I will not stay there.
If people compare me,
I will not lose myself in it.
Happiness comes closer
when I stop proving my worth.
In this changing society,
I cannot expect pure truth from everyone —
but I can remain true to myself.
Life’s cycle may be decided by destiny,
but the direction of my journey is in my hands.
This poem is my quiet promise to myself.
To stay real.
To stay strong.
To stay me. 🌿✨
Shailesh Joshi
સામેવાળી વ્યક્તિનો વિચાર કરવો
અને માત્ર પોતાનો જ વિચાર કરવો
આ બંને સંજોગોમાં ફાયદો તો આપણને જ થતો હોય છે,
હા એમાં ફર્ક માત્ર એટલો જ કે,
દરવખતે, ને બધી બાબતોમાં સામેવાળી વ્યક્તિનો વિચાર કરતી વ્યક્તિના જીવનમાં ભલે બહુ મોડે મોડે, પરંતુ એનો ફાયદો તો અવશ્ય મળતો હોય છે, અને એ ફાયદો પણ કેવો ?
એ ફાયદો એકદમ મજબૂત, લાંબા ગાળાનો, કે પછી કાયમી હોય છે, અને સાથે-સાથે આપણી ઉમ્મીદ, અને ધારણાથી લગભગ સવાયો, કે દોઢો ફાયદો મળતો હોય છે, જ્યારે હરહંમેશ માત્રને માત્ર
પોતાના માટે વિચારવામાં જ્યાં સુધી ફાયદો મળે ત્યાં સુધી જ મળતો હોય છે, પછી સમય જતાં એક વખત એવો આવે છે, કે જ્યારે આપણને પોતાને અંદરને અંદર ઊંડો અફસોસ થવા લાગે છે, ભલે પછી આપણી પાસે કંઈ હોય કે ન હોય, છતાંય જાણે આપણા જીવનમાં કંઈક ખૂટતું હોય, કંઈક ખૂચતું હોય એવો સતત અનુભવ કાયમી ધોરણે ઘર કરી લે છે.
Hardik Boricha
ऐसे रखूँगा ख़्याल तेरा मैं
जैसे प्राइवेट अस्पताल वाले मरीज का रखते हैं....❤️
Hardik Boricha
प्रेम अपनी परिपूर्ण मंजिल तलाश करता है,
अपनी प्रेमिका को ही पत्नी बनाना चाहता है..❤️🌻
Hardik Boricha
""रिश्ता-ए-उल्फत को ज़ालिम यूँ ना बेदर्दी से तोड़,,
दिल तो फिर जुड़ जाएगा लेकिन गिरह रह जाएगी...""💔🖤
Falguni Dost
વાત વાતે રંગ બદલતા ને પણ રંગોના ત્યોહારની રંગબેરંગી શુભેરછા.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
શુભ રાત્રિ 🧡💛💚🩵💙💜❤️🤎🖤🩶🤍🩷
Pankaj Goswamy
આંખમાં આકાશ લઈ ફરતો રહ્યો,
મૂંગું કોઈ વાદળ હતો એ છોકરો;
રણની રેતીમાં પગલાં લખતો રહ્યો,
પોતાનો જ સાક્ષી હતો એ છોકરો;
ભીડ વચ્ચે નામ ઘણાં સાંભળ્યા,
પણ અંદરથી એકલો હતો એ છોકરો;
હાસ્યના હોઠે દીવો રાખી દીધો,
અંતરમાં અંધકાર હતો એ છોકરો;
ઠોકરોને ભાગ્ય માની ચાલતો,
દર્દનો વ્યવહાર હતો એ છોકરો;
સવાલોની સાંજ ઊતરે ત્યારે,
પોતાનો જ જવાબ હતો એ છોકરો;
સમય સામે ઝૂકી ન ગયો ક્યારેય,
મૌનનો મિનાર હતો એ છોકરો;
'કલ્પ' કહે, રણમાં ફૂલ ખીલે ક્યારેક,
એવો જ એક અણસાર હતો એ છોકરો..!!
- પંકજ ગોસ્વામી 'કલ્પ'
આશુતોષ
में पर्वत बन खड़ा रहा, सख्त जो था,
वो झरना बनकर बह गई, चंचल जो थी ।
- આશુતોષ
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
તારી સાથે રંગે રમવાથી જ થોડી ધૂળેટી હોય,
હું તો તારા જ રંગે રંગાયો છું.
- સ્પંદન
Chintansinh Jadav
https://www.matrubharti.com/book/19989641/raja-dahir-sen-the-last-hindu-emperor-of-sindh
નમસ્કાર મિત્રો
સમગ્ર વિશ્વમાં યુદ્ધનાં શંખ વાગે છે ત્યારે ભારત એક શાંતિપ્રિય રાષ્ટ્ર તરીકે દેખાય છે , આજ કાલથી નહીં પરંતુ આ ભુમી અને અને આ ભુમી ના લોકો પહેલેથી જ શાંતીપ્રિય રહ્યા છે, આ ભુમી મહાવીર , બોદ્ધ , ગાંધીજી જેવી મહાન આત્માઓ થી કંડોરયેલી છે , પરંતુ જયારે આ ભૂમિ નિ રક્ષા કાજે અંતીમ વિકલ્પ યુધ્ધ હોય ત્યારે છત્રપતી શિવાજી મહારાજ, મહારાણા પ્રતાપ , ભગતસિંહ , સુખદેવ રાજગુરુ, ચંદ્રશેખર આઝાદ આવા મહાન વ્યક્તિત્વ પણ આ ભુમી માં જન્મેલા છે . માં ભારતી ની રક્ષા કાજે બલિદાન આપેલું ....
આવા જ એક વિર યોદ્ધા" સિંધ ની ધરતી ના અંતીમ હિન્દુ સમ્રાટ રાજા દાહીર સેન" ની વાતો વિશે આપણે ઓછું સાંભળ્યું હશે એવા મહાન યોદ્ધા ની સ્ટોરી આપ સમક્ષ રજુ કરી છે આશા રાખું છું કે આપ સૌને પસંદ આવશે ....
ધન્યવાદ
Dr. Damyanti H. Bhatt
होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🌹🙏🌹🌹
Dr. Damyanti H. Bhatt
Happy Holi, 🌹🌹🙏🌹🌹
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1AkqJwFssh/
🎊એક નવ રચના 🎉
Shefali
#shabdone_sarname__
Thakor Pushpaben Sorabji
જય શ્રી કૃષ્ણ
Abantika
Hey my family! ✨
Sabse pehle toh aap sabko Happy Holi! 🎨
Pata hai, meri stories ke asli rang toh aap log hi ho. Aapke reads aur pyare comments ke bina mera writing ka safar adhoora hota. Wish karti hoon ki is saal aapki life khushiyon se itni bhar jaye jitni meri notifications aapke pyaar se bhari rehti hain! 💖
Enjoy kijiye, sweets khaiye aur safe rahiye. Happy Holi once again!"
SAYRI K I N G
बिखरकर संवरना, भी बेहद खूबसूरत है, उनकी उलझी जुल्फें संवरना, हर आशिक की मोहब्बत है, वो जो पत्थर है दुनिया के सामने, किसी एक के सामने बिखरे, हर इश्क की रूहानियत है।
Ashish jain
*सोच की गरीबी*
धन का निर्धन संघर्ष चुनता, भाग्य को भी मोड़ देता है,
हाथों की मेहनत से अपनी, वह बरकत जोड़ लेता है।
कोई दिखाए रास्ता तो, वह सुनता और करता है,
छोटा ही सही पर आगे बढ़ने का, वह साहस हरदम भरता है।
पर जिसका मन ही निर्धन है, वह कभी न आगे बढ़ता है,
अहंकार की संकरी गलियों में, वह हर पल खुद से लड़ता है।
जैसे कुएँ का मेंढक समझे, बस यही जगत की सीमा है,
बाहर का सूरज क्या जाने? उसकी सोच का दीया धीमा है।
वह दूसरों को मानसिक सुख, कभी न दे पाता है,
कड़वे बोल और रूखी बातों से, बस दिल ही दुखाता है।
मनमानी उसकी ऐसी जैसे, जग का भार उसी पर हो,
दिखावा ऐसा करता जैसे, सबसे बड़ा वही घर हो।
धन की गरीबी मिट जाती है, कोशिश के पैमानों से,
पर सोच की गरीबी हारती है, केवल अपने अभिमानों से।
जो झुकता है वह पाता है, जो अकड़ा है वह ढहता है,
कुएँ का वासी अंत समय तक, बस कुएँ में ही रहता है।
Adv. आशीष जैन
7055301422
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
सरकारने शाळेतल्या...
InkImagination
Happy Holi 🥰🥰
Sonalpatadia darpan
હું ભરી આવું રંગની મુઠ્ઠી,તું લઈ આવજે કોરું મન,
કેસુડાનાં ફૂલની સાખે, વગડો બનશે વૃંદાવન.
prit tembhe
नशीब......🗒️✍️❣️
Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨
Narayan
तुम सहेज कर रखना मेरे प्रेम के रंगों को...
सुना हैं.... एक और दुनिया है इस दुनिया के बाद, हम वहां मिलेंगे ...! ❤️
Avinash
हेलो मेरे दोस्तो, कैसे हो आप सब लोग?
आशा करता हु कि आप सब ठीक है। मै मातृभारती application 2020 मे use करता था परंतु मेरे जॉब और स्टडी के वजह से मैने सभी social media platform delete कर दिए थे।
आज 4 मार्च 2026 को मुझे अचानक से मुझे अपने कुछ फ्रेंड्स की याद आई जिनसे में यहां पे बाते करता था। सो मैने डाउनलोड कर दिया। #mathrubharti
आशा करता हु कि मेरे फ्रेंड्स अभी भी यहां हो 🙏
#mathrubharti
Shailesh Joshi
સોનું "તોલવામાં"
જેટલી ચોકસાઈ રાખવામાં આવે છે,
એટલી જ ચોકસાઈ,
શબ્દો "બોલવામાં" રાખવામાં આવે
તો બોલાયેલ શબ્દોની કિંમત
સોના કરતા પણ વધી જાય.
Jyotsana
🌼 જીવન એક સુંદર સફર
જીવન કોઈ ભાર નથી,
એ તો એક સુંદર સફર છે.
ક્યારેક ધૂપ છે, ક્યારેક છાંયો,
પણ બંનેમાં એક સરસ અસર છે.
પડીએ તો હસીને ઊભા થવું,
રડીએ તો થોડું હળવાશ મળે.
દરેક સવાર નવી શરૂઆત છે,
દરેક સાંજ શાંત સંદેશ આપે.
નાની નાની ખુશીઓમાં જ
જીવનનો ખજાનો છુપાયેલો છે.
એક કપ ચા, કોઈ પ્રિયજનનો અવાજ,
અને દિવસ સુંદર બની ગયો છે.
ગઈકાલની ચિંતા છોડીને,
આજને દિલથી જીવી લઈએ.
કારણ કે જીવન રાહ નથી જોતું,
એ તો પળ પળે હસી લઈએ કહે છે.
હા…
થોડી મુશ્કેલીઓ આવશે,
પણ આપણે પણ તો કમ નથી.
સ્મિત સાથે ચાલતા રહીએ,
તો રસ્તા ક્યારેય લાંબા નથી લાગતા. 🌸
— Shyam Ki Ladali ✨
ધબકાર...
વહાલો તું ખરો પણ વ્હાલમ તું નથી,
મારા જીવનનો ગમતો કિનારો તું નથી.
હાલક ડોલક થાય નાવ તો ગમે સાથ, તોય...
જિંદગીનો સ્વપ્નસમ સથવારો તું નથી.
છે ને તુંય મોતી સમ કિંમતી જીવનમાં, તોય...
શરીરે વળગી લાગે સોહામણો તું નથી.
આપીશ તનેય તારું ગમતુ જીવનમાં, તોય...
જીવંત લાગણીમાં, માંગણીમાં તું નથી.
જીવનમાં તું ખરો પણ જીવન તું નથી,
કોશિશ ભલે કરે દિલથી સહારો તું નથી.
ધબકાર...
jighnasa solanki
Happy Dhuleti 😍😍🥳🥳
Shefali
#shabdone_sarname__
Dhamak
નાના હતા તો પહેલા એકબીજાને ચિઠ્ઠી લખતા અને તહેવારો માં કલર નાની નાની પડીકી માંપણ મોકલી
દેતા . પોસ્ટ ઓફિસ ના લાલ ડબ્બામાં ચિઠ્ઠી દોડતા નાખવા જાતા અને અઠવાડિયા 10 દિવસ સુધી પાછી ચિઠ્ઠી ની વાટ જોતા હતા અને તે કલરને અમે લગાડ્યો છે તે પણ ચિઠ્ઠીમાં પાછા લખી અને મોકલતા 😊
પણ હવે તેવું ક્યાં રહ્યુ છે.
હવે મોબાઈલ આવી ગયા પછી ચિઠ્ઠી નો વ્યવહાર બંધ થઈ ગયો છે અને મોબાઈલ ની હિસાબે
કોઈ પાસે સમય રહ્યો નથી એક કલર નો ફોટો પણ મોકલ તા નથી એકબીજાને એટલે દૂર થઈ ગયા છે.
Dhamak
PRASANG
બે ઓળખ વચ્ચે
(શાર્દૂલ વિક્રિડિત છંદ)
વકીલ બની જીવનપથ પર ચાલતો રહ્યો સતત,
હૃદયે કવિનો દીપ બળ્યો, પણ રહી ન શક્યો કદી.
દલીલોની ભીડ વચ્ચે સત્ય શોધતો રહ્યો,
પોતાનાં જ સ્વપ્નોને હું સ્પર્શી ન શક્યો કદી.
ન્યાય માટે લડતો રહ્યો અનેક ચહેરાં સામે,
પોતાના જ દુઃખ સામે હું ટકી ન શક્યો કદી.
તાળીઓ મળી મંચ પર, પ્રશંસા પણ ઢોંગ બની,
અંતરની ખાલી જગ્યાને ભરી ન શક્યો કદી.
શબ્દો હતા, સંવેદના, કલમ હતી હાથમાં,
ડરથી સાચું લખવાનો હું સાહસ ન કરી શક્યો કદી.
પ્રસંગ કહે, બે ઓળખ વચ્ચે અટવાઈ રહ્યો,
વકીલ થયો તો અધૂરો, કવિ બની ન શક્યો કદી.
- પ્રસંગ
પ્રણયરાજ રણવીર
Krupa Thakkar #krupathakkar
હોળી તો અગ્નિની નહીં, અંતરની જ્વાળા શમાવાની છે,
દ્વેષના કાંટા કાઢી, પ્રેમની વેલ વાવવાની છે.
રંગ તો ચહેરા પર સૌ કોઈ ચઢાવી લે છે,
પણ મનમાં સ્નેહના રંગ ભળે તો જ સાચી ઉજવણી છે.
અહંકારની રાખ ઉડી જાય પવન સાથે,
ક્ષમાના ગુલાલથી જીવન રંગાય ત્યારે જ ધુળેટી છે.
fiza saifi
Some people were never yours,
nor will they ever be.
Sometimes, it takes a long to realize this.
There's a huge difference between being necessary and being needed. Sometimes,
we're just a need, not a necessity. Those who truly matter are the ones, who see us as necessary, not just a want.
Value those who value you
Priya kashyap
कौन क्या कर रहा हैं हमें समझ नहीं आ रहा हैं
लेकिन इतना समझ में आया की सब बहुत बुरे हैं बाबा जी🔱🔱🕉
मुझे मेरे past से अब कोई इंसान वापस नहीं चाहिए कभी भी नहीं बाबा जी🔱🕉🔱
- Priya kashyap
ધબકાર...
તારીફ ખૂબસૂરતીની તારી આ રંગોના તહેવારમાં,
તને ગમતી કરતો રહીશ લાગણીનાં વ્યવહારમાં.
ધબકાર...
archana
मेरी चूड़ियों में जितना रंग सजा है ना…
उतना ही रंग आज तुम पर चढ़ाऊँगी।
इतना गहरा रंग होगा कि
न पानी छुड़ा पाएगा,
न वक्त मिटा पाएगा…
और याद रखना —
ये किसी और का नहीं,
सिर्फ मेरे सुहाग का रंग है।” 💫
rima
जीवन ना तो भविष्य में है और ना ही अतीत में है जीवन, जीवन तो केवल वर्तमान है。◕‿◕。
Raju kumar Chaudhary
मैं अपनी पत्नी को हर रोज़ 150 रुपये बचाने के लिए बाज़ार ले जाता था, तिजोरी खोलने के तीन साल बाद... राज़ जानकर मैं अवाक रह गया।
मेरा नाम राकेश है, मैं लखनऊ में रहता हूँ। शादी से पहले, मेरी पत्नी अनीता की एक पक्की नौकरी थी, जिसका मासिक वेतन लगभग 30,000 रुपये था। मैंने सोच-समझकर हिसाब लगाया था: उसकी तनख्वाह पति-पत्नी और बच्चे, दोनों के खर्चों के लिए काफ़ी थी, और मेरी तनख्वाह 60,000 रुपये - पूरी तरह से बचत में, घर, सोना-चाँदी खरीदने में खर्च होगी।
लेकिन अनीता के गर्भवती होने के बाद सारी योजनाएँ धरी की धरी रह गईं।
जब से मेरी पत्नी ने नौकरी छोड़ी है
हमारी शादी को दो महीने भी नहीं हुए थे जब अनीता गर्भवती हुई। जब वह एक महीने से ज़्यादा गर्भवती थी, तब उसका गर्भपात हो गया। शहर के अस्पताल के डॉक्टर ने उसे लंबा आराम करने की सलाह दी। अनीता ने कंपनी छोड़ने के लिए कहा, लेकिन उसका बॉस नहीं माना, इसलिए उसे नौकरी से निकाल दिया गया।
मैं बहुत परेशान था, यह सोचकर कि "शादी के तुरंत बाद मुझे उसकी देखभाल करनी होगी।"
मेरी 60,000 रुपये की तनख्वाह, जो मुझे बचाकर रखनी चाहिए थी, पूरे परिवार पर खर्च करनी पड़ी। मेरे सास-ससुर गरीब थे और कुछ मदद नहीं कर सकते थे।
इसलिए मैंने अपनी पत्नी से सीधे कहा:
"अब से, मैं तुम्हें बाज़ार जाकर खाना बनाने के लिए सिर्फ़ 150 रुपये रोज़ दूँगा। तुम जैसे चाहो, गुज़ारा कर सकती हो, बशर्ते रात का खाना ठीक से मिले।"
मैं नाश्ता और दोपहर का खाना बाहर खाता था, इसलिए मुझे लगा कि 150 रुपये रोज़ काफ़ी हैं। मातृत्व आहार, पूरक आहार... मैंने इसे अनसुना कर दिया: "पहले, महिलाओं को बच्चे को जन्म देते समय किसी दवा की ज़रूरत नहीं होती थी, वे तब भी स्वस्थ रहती थीं।"
तीन साल बीत गए
पहले, अनीता ने बच्चे को जन्म देने के कुछ महीने बाद काम पर वापस जाने की योजना बनाई, लेकिन उसका बच्चा अक्सर बीमार रहता था, इसलिए उसे उसकी देखभाल के लिए घर पर ही रहना पड़ता था। अब तीन साल हो गए हैं। मेरा बच्चा 2 साल से ज़्यादा का हो गया है और उसे नर्सरी भेजा जाने वाला है।
पिछले तीन सालों से, मैं अपनी पत्नी को रोज़ाना ठीक 150 रुपये दे रहा हूँ। अब सोचता हूँ तो लगता है कि मैं "समझदार" हूँ: मेरी पत्नी सोच-समझकर खर्च करती है और कभी शिकायत नहीं करती। मैंने अपने सहकर्मियों के सामने शेखी भी बघारी थी कि मेरी पत्नी "गाँव की सबसे अच्छी बचत करने वाली" है। जब उन्होंने सुना, "तीन लोगों का परिवार, रोज़ाना 150 रुपये में हम क्या खाएँगे?" तो वे चौंक गए। मैं बस मुस्कुरा दिया, यह सोचकर कि मेरी पत्नी वाकई बहुत साधन संपन्न है।
मेरी सारी बचत सोने पर खर्च हो गई, जो एक तिजोरी में रखा था। बेशक, मैंने अपनी पत्नी को तिजोरी का पासवर्ड कभी नहीं बताया।
मुझे फिर से झटका लगा।
पिछले हफ़्ते मैं एक हफ़्ते के लिए बिज़नेस ट्रिप पर गया था। जब मैं घर लौटा, तो अंदर जाते ही मैंने देखा कि घर खाली था, बहुत सी चीज़ें गायब थीं। अनीता और बच्चा वहाँ नहीं थे। मैंने आवाज़ लगाई, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया।
ज़रूरी काम निपटाने के लिए मैंने जल्दी से ....
Continue
Raj Shah
વાંક જરા પણ ગુલાલનો ન હતો...
સાવ કોરોકટ એમનો ગાલ હતો...
રોકવા મથ્યો પણ રોકી ન શકયો...
ફાગણની આબરુનો સવાલ હતો.
💕 HAPPY HOLI💕
Armin Dutia Motashaw
**** होली ****
जब से कर ली तूने मेरे दिल की चोरी, कन्हैया, चूनर- चोली मोरी रहती है कोरी
बरसे रंग नीले पीले, लाल, गुलाल; पर काया मोरी, रह गई कोरी कि कोरी
तुझ बिन होली नहीं भाये, कौन करे ठिठोली , न कोई करे मुझसे बरजोरी
मोहन, तरस गई है अखियान मोरी, और रातो की नींदे भी तूने कर ली चोरी
अब रंग न भाये मोहे, न भावे साज- श्रंगार , मांग मोरी सुनी है, और कलाई कोरी
खेलना तू मस्ती में आज, तेरे मथुरा में होली, क्युकी आयेगी न वहां अब ब्रिजवासीयो की टोली !
"फिर भी मोરે कान्हाइ, तुझे देती हूं मैं होली की हार्दिक बधाई", रोती हुई राधिका बोली।
"अनार "
rima
कोई खुशियों की चाह में रोया, कोई दुखों की पनाह में रोया, अजीब कहानी है ये " जिंदगी "का कोई भरोसे के लिए रोया ,तो कोई भरोसा करके रोया!
ziya
🌸✨ Happy Holi ✨🌸
Rangon ka yeh tyohar aapki zindagi ko bhi har khushi ke rang se bhar de 💛
Gulal ki har udaan aapke sapno ko par laga de 💚
Dosti, mohabbat aur muskurahat ke rang kabhi feeke na padhein 💙
Aur har din aapke liye ek nayi umeed, nayi roshni lekar aaye ❤️
Is Holi par sirf kapde hi nahi,
Dil bhi rang jaayein khushi, maafi aur positivity ke rang mein 🌈✨
Wishing you a very colorful, joyful and safe Holi! 🎉💦
SAYRI K I N G
में तुझे सपने में भी छोड़ नहीं सकता
हक़ीक़त
में क्या छोडूंगा
- SAYRI K I N G
Saroj Prajapati
खूब गुलाल अबीर उड़ाओ
सारी फिज़ा को रंगीन बनाओ
भूलकर सारे गिले-शिकवे
सब होली के रंगों में रंग जाओ
साल भर आया फाल्गुन का त्योहार
मिलकर सब खूब हुडदंग मचाओ।
सरोज प्रजापति ✍️🟡🟠🔴🟢🔵
- Saroj Prajapati
સુરજબા ચૌહાણ આર્ય
પિતા પછી પિતાનો પડછાયો એટલે ભાઈ 🦁ભાઈને જોઈને એમ થાય પિતાજી હજી એમાં જીવે છે
Imaran
मोहब्बत की है तुझसे, कोई मज़ाक नहीं,
हर बात में तेरा जिक्र, ये इत्तेफाक नहीं।
तेरे लिए तो जान भी हाजिर है मेरी,
ये इश्क है मेरा, कोई ख्वाब नहीं
🫶imran 🫶
Raju kumar Chaudhary
— “सर… मैं अभी भी कुंवारी हूँ… मैंने अपनी पूरी ज़िंदगी में कभी किसी आदमी के साथ नहीं रही…”
25 साल की एक युवती यह बात आँसुओं के बीच एक होटल के कमरे में कह रही थी,
उस आदमी के सामने खड़ी होकर जिसे उसने खुद चुना था।
लेकिन उससे भी बड़ा झटका उसका इंतज़ार कर रहा था…
बस पाँच मिनट बाद।
उसका नाम मरियाना नहीं, बल्कि मीरा था। उसकी उम्र 25 साल थी,
और वह अपने पर्स को कसकर पकड़े हुए काँप रही थी,
मुंबई के सबसे ऊँचे होटल के कमरे नंबर 806 के सामने।
पूरा एक साल उसने उस आदमी को जाना था:
अर्जुन, 38 साल का, सफल, शांत, शिक्षित…
या कम से कम वह ऐसा ही मानती थी।
उनकी मुलाकात काम के दौरान हुई थी।
अर्जुन ने कभी उस पर दबाव नहीं डाला,
कभी कोई अश्लील टिप्पणी नहीं की।
वह बस ध्यान से पेश आता, सवाल पूछता, धैर्य से उसकी बात सुनता…
और इसी वजह से मीरा को लगा कि वही वह आदमी है
जिसके सामने वह पहली बार अपना दिल खोलना चाहती है।
उस रात, उसने खुद उसे एक संदेश लिखा:
— “मैं आज रात तुम्हारे साथ अकेले रहना चाहती हूँ… अगर तुम भी चाहो।”
अर्जुन ने तुरंत स्वीकार कर लिया—
इतनी जल्दी कि मीरा एक पल के लिए झिझक गई।
लेकिन उसने खुद को समझा लिया।
वह उसे चाहती थी।
यह उसका अपना फैसला था।
पाँच मिनट पहले…
मीरा कमरे के अंदर एक कुर्सी पर बैठी थी,
उसकी उँगलियाँ कसकर एक-दूसरे में फँसी हुई थीं।
उसका दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था
कि उसे लगा जैसे वह छाती से बाहर निकल जाएगा।
अर्जुन उसके पास आया और धीरे से पूछा:
— “क्या तुम घबराई हुई हो?”
मीरा ने सिर हिलाया, अपनी आवाज़ को काँपने से रोकने की कोशिश करते हुए:
— “सर… मैं अभी भी कुंवारी हूँ। मैंने पहले कभी किसी के साथ कुछ नहीं किया। मुझे डर लग रहा है… कि मुझे समझ नहीं आएगा क्या करना है।”
अर्जुन पूरी तरह से स्थिर हो गया।
उसने मुस्कुराया नहीं,
मज़ाक नहीं किया,
उसे गले भी नहीं लगाया—
जैसा मीरा ने सोचा था कि शायद वह करेगा।
वह बस… उसे देखता रहा।
काफी देर तक।
उसके चेहरे पर कुछ अजीब था।
वह हैरानी नहीं थी,
वह खुशी भी नहीं थी।
मीरा ने भौंहें सिकोड़ लीं:
— “तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे हो?”
तभी अर्जुन ने एक वाक्य कहा जिसने उसका खून जमा दिया:
— “अच्छा। अब मुझे पूरी तरह यकीन हो गया है।”
मीरा घबरा गई।
जैसे ही वह उससे पूछने वाली थी कि उसका मतलब क्या है,
अर्जुन उस छोटे से सूटकेस की तरफ चला गया जो वह साथ लाया था,
कोड डाला और उसे खोल दिया।
और मीरा की आँखें डर से फैल गईं।
उसके अंदर जो था…
वह किसी भी तरह से निजी सामान नहीं था।
बाकी…
👉 कहानी का अगला अध्याय पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर अभी जाएं… 👇👇
Raju kumar Chaudhary
Story Title: “झाड़ू वाली MBA”
(वैकल्पिक शीर्षक: “पहचान जो छुपी रह गई”, “गोल्ड मेडल और धूल”, “काव्या का सच”)
---
सेठ राजेश्वर के केबिन में सन्नाटा पसरा हुआ था।
सामने खड़ी काव्या के हाथ काँप रहे थे, और मेज पर रखा उसका पुराना, मुड़ा-तुड़ा आईडी कार्ड जैसे उसकी पूरी कहानी कह रहा था।
राजेश्वर ने कार्ड उठाया।
उस पर साफ लिखा था —
Master of Business Administration – Gold Medalist.
उन्होंने भौंहें सिकोड़ लीं।
“अगर तुम सच कह रही हो… तो यहाँ झाड़ू क्यों लगा रही हो?”
आवाज़ अब पहले जैसी कठोर नहीं थी, पर संदेह अभी भी मौजूद था।
काव्या की आँखें भर आईं।
“साहब… मेरे पापा की अचानक मौत हो गई थी। उन पर भारी कर्ज था। कॉलेज से निकलते ही मुझे नौकरी मिली थी, लेकिन उसी कंपनी के मालिक ने… मेरे साथ गलत शर्तें रखीं। मैंने मना कर दिया। उन्होंने मेरे खिलाफ झूठी अफवाह फैला दी। जहाँ भी इंटरव्यू देने गई, रिजेक्ट कर दी गई। घर बचाने और माँ के इलाज के लिए… मुझे जो काम मिला, वो करना पड़ा।”
कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।
राजेश्वर ने पहली बार उसे एक नौकरानी की तरह नहीं, बल्कि एक पेशेवर की तरह देखा।
“और मेरी बेटी को पढ़ाने की हिम्मत कैसे हुई?” उन्होंने पूछा, पर इस बार गुस्से में नहीं—जिज्ञासा में।
काव्या ने सिर झुका लिया।
“परी मैथ्स में रो रही थी। मैंने सिर्फ समझाया… मुझे लगा ज्ञान बाँटने के लिए इजाज़त नहीं, नीयत चाहिए।”
उसी समय दरवाज़ा खुला।
छोटी परी अंदर आई और बोली—
“पापा, दीदी ने मुझे डरना नहीं, समझना सिखाया है।”
राजेश्वर ने अपनी बेटी की कॉपी फिर से देखी।
सिर्फ जवाब सही नहीं थे—समझाने का तरीका भी प्रोफेशनल था। स्टेप-बाय-स्टेप, कॉन्सेप्ट क्लियर।
उन्होंने गहरी साँस ली।
“कल सुबह 9 बजे, मेरे ऑफिस आना,” उन्होंने कहा।
काव्या घबरा गई।
“साहब… पुलिस—?”
“इंटरव्यू के लिए,” राजेश्वर ने बीच में टोका।
---
अगला दिन
कंपनी के बोर्डरूम में काव्या के सामने फाइलें रखी गईं।
मार्केट एनालिसिस, लॉस स्टेटमेंट, ग्रोथ चार्ट।
“इनमें समस्या क्या है?” राजेश्वर ने पूछा।
काव्या ने एक-एक पेज पलटा, फिर बोली—
“आपकी कंपनी की प्रोडक्ट क्वालिटी अच्छी है, लेकिन ब्रांड पोज़िशनिंग कमजोर है। डिजिटल मार्केटिंग में निवेश कम है। और सप्लाई चेन में 12% लीकेज है।”
राजेश्वर की आँखें फैल गईं।
ये वही बातें थीं जो उनकी मैनेजमेंट टीम महीनों से पकड़ नहीं पा रही थी।
“अगर मैं तुम्हें मौका दूँ तो?” उन्होंने पूछा।
काव्या ने दृढ़ आवाज़ में कहा—
“मैं आपकी कंपनी का घाटा छह महीने में मुनाफे में बदल सकती हूँ।”
---
छह महीने बाद
कंपनी का टर्नओवर 30% बढ़ चुका था।
नई स्ट्रेटेजी, डिजिटल कैंपेन, और कास्ट कटिंग मॉडल ने कमाल कर दिया।
आज उसी बोर्डरूम में एक नया नेमप्लेट लगा था—
काव्या शर्मा
जनरल मैनेजर
परी दौड़कर आई और बोली—
“पापा! अब दीदी मेरी टीचर भी हैं और आपकी बॉस भी!”
राजेश्वर मुस्कुराए।
“नहीं बेटा… ये हमारी कंपनी की असली पहचान हैं। हमें बस इन्हें पहचानने में देर लगी।”
---
संदेश (Message):
कभी-कभी इंसान की असली पहचान उसके कपड़ों में नहीं, उसकी काबिलियत में छिपी होती है।
मौका मिलते ही हुनर अपनी जगह खुद बना लेता है
Dhamak
ધુળેટીના રંગોની જેમ તમારું જીવન પણ ખુશીઓથી રંગીન બની જાય તેવી શુભેચ્છાઓ!
DHAMAK
Kaushik Dave
ઉંચાઈ ની આવી જ્યારે આપણી બાજી,
ત્યારે જ અમેરિકા એ કરી બાથંબાથી;
ઇન્વેસ્ટમેન્ટ મારું પડ્યું ધડામધમ,
મારી આશાનું પિલ્લુ વળી ગયું ભમ!
ખૂબસૂરતી જ્યારે આસમાને પહોંચે,
ત્યારે જ કોઈની નજર એના પર પડે;
પોર્ટફોલિયો મારો લીલોછમ દેખાતો હતો,
ત્યાં જ મંદીનો કાળો કાગડો એને નડે.
ગ્રીન સિગ્નલ જોઈને મેં તો લગાવી હતી દોટ,
ખબર નહોતી કે નસીબમાં લખી હશે આટલી ખોટ;
ન્યૂઝ ચેનલ વાળા રોજ નવી વાતો લાવે,
પણ મારા ગજવામાં તો ખાલી પવન જ ફાવે!
ડોલર સામે રૂપિયો જ્યારે લથડવા લાગે,
ત્યારે રાતના મોડા સુધી મારી ઊંઘ ભાગે;
એવરેજ કરવાના ચક્કરમાં બધું જ મેં ખોયું,
લોસ જોઈને રાત્રે મેં તો છાનુંમાનું રોયું.
પણ હિંમત નથી હારવી, આ તો છે માર્કેટની ચાલ,
આજે ભલે ખરાબ છે, પણ કાલે આવશે ગુલાલ;
ધીરજ રાખશું તો ફરીથી દિવસો વળશે,
પડેલું આ પિલ્લુ ફરી આસમાને ચડશે!
Vrishali Gotkhindikar
आयुष्य...........
आयुष्य काय आहे....
काही हीशोब..,काही व्यवहार...
काही देणं....आणी काही घेणं....??
.......नाही ग राणी......
...........तुझ्या माझ्या मनातलं एक सुरेल गाणं..!!!
आयुष्य काय आहे....
भोवतालच्या लोकांची कटकट..!!
नात्या नात्यातली करबुर,,????
.......नाही ग राणी......
...................सुंदर अर्थपुर्ण अशी एक "गझल" पुरेपुर!!
आयुष्य काय आहे....
नोकरीची पळापळ..रोजची धावपळ..!
आणी ..परीस्थीतिशी झगडणं....
.......नाही ग राणी.....
एकमेकांच्या सोबत असण्याचा आनंद घेणं..!!
आयुष्य काय आहे....
रोज ..रोज...तेच काम करणं...
कंटाळवाणं...नीरस..आणि रुक्ष..!
.......नाही ग राणी.....
तुझ्या माझ्या प्रेमाची हीच तर आहे खुण निरपेक्ष..!!!
.......................................
Rameshvar Gadiya
थोड़ी रोमांटिक होली शायरी 💕
Dada Bhagwan
Happy Holi
#happyholi #holispecial #holifestival #festivalofcolors #DadaBhagwanFoundation
નીલકંઠ
સંદર્ભ આપ્યો છે તારો,
ત્યારથી આજનો આ દિવસ અને મારી કવિતા, છલકાઈ ગયા છે અનેકવિધ રંગોથી..
Shailesh Joshi
સંબંધો એ ગણિત છે, માટે જો આપણે
એમાં ખરા ઉતરવું હોય તો એની પધ્ધતિ જાણવી અત્યંત જરૂરી છે, અને એની પધ્ધતિનો મહત્વનો અને પહેલો નિયમ એ છે કે,
આપણે જેનાં વગર
રહી શકતા નથી,
એને એક લિમિટથી વધારે
કંઈ કહી શકતા નથી.
Tr. Mrs. Snehal Jani
સૌને આજનાં આ રંગોનાં
તહેવારની શુભેચ્છાઓ.💐
ખાસ સંદેશ બૉર્ડની પરીક્ષા
આપતાં તમામ વિદ્યાર્થીઓને!
આપ સૌ પણ આ તહેવાર
ઉજવી શકો છો,
પણ પોતાની આંખો અને
તબિયતનું ધ્યાન રાખીને.
એક વાત ધ્યાનમાં રાખજો કે
ધુળેટીનો તહેવાર દર વર્ષે
આવે છે, જ્યારે બૉર્ડની પરીક્ષા
આ તહેવાર દર વર્ષે ઉજવી
શકીએ એટલાં સક્ષમ બનાવે છે.
માટે પરીક્ષા ન બગડે એનું ધ્યાન
રાખી તહેવારની મજા લેજો.😊
Awantika Palewale
બસ મને આ રંગોમાં તારો સ્પર્શ જોઈએ,
ફિક્કા લાગતા સપનાઓને થોડો ઉજાસ જોઈએ.
શબ્દોની ભીડમાં પણ તારું મૌન મને જોઈ,
બસ હૃદયના દરેક ખૂણે તારો વસવાટ જોઈએ.
હું જ્યાં અટકી જાઉં ત્યાં તું માર્ગ બની જોઈએ,
બસ દરેક સંજોગમાં મને તારો સાથ જોઈએ.
નાં કોઈ વચન નાં કોઈ ચાહતની રાહત
આ રંગભરી જિંદગીમાં તારો સાથ જોઈએ.
બસ એટલું જ પૂરતું છે મારાં દરેક શ્વાસ માટે
બસ મને આ રંગોમાં તારો સ્પર્શ જોઈએ.
A singh
"आज रंगों का त्यौहार है, पर तू तो गटर का राजकुमार है!
तेरे गले में चप्पल का ऐसा हार सजेगा,
कि मोहल्ले का कुत्ता भी तुझे देखकर रास्ता बदलेगा।
नली के कीचड़ में जब तू लेटा हुआ मिलेगा,
कसम से भाई, तू ही होली का असली 'गुलाब' खिलेगा!"
_ A singh
A singh
रंगों की दुनिया में तुम काले नजर आओगे,
आज गटर के पानी से ही तुम नहाओगे।
गले में चप्पल का ऐसा हार सजेगा,
जो भी देखेगा, बस तुम पर ही हंसेगा!
_ A singh
A singh
"शक्ल पर कालिख, गले में टूटी चप्पल,
हाथ में पिचकारी और इरादे बिल्कुल चंचल।
दोस्त मेरा आज गटर में ऐसा लेटा है,
जैसे नाली ने उसे गोद लिया हुआ बेटा है!"
happy Holi
_ A singh
kajal jha
खामोशी अक्सर वो कह देती है,
जो शब्द उम्रभर नहीं कह पाते।
कुछ रिश्ते किस्मत से नहीं,
सब्र और सच्चाई से निभाए जाते।
- kajal jha
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
ऋतुराज
होली के रंगों से रंग दे पिया मोहे
होली के रंगों से रंग दे पिया मोहे
म्हारी चुनरिया कोरी ना रह जाये
ऐसे ही म्हारी होली ना बह जाये
प्यार के रंगों से रंग दे पिया मोहे
सखी साहियर के रंगो से नहीं रंगना
तेरी ही राह तकता म्हारा ही अंगना
साथ के रंगों से रंग दे पिया मोहे
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Meghna Sanghvi
happy holi 😊😊😊
Aruna N Oza
Jay mataji 🌹🌹🙏🩷🩷🩷
Soni shakya
अब इन कच्चे-पक्के रंगों की उमंग नही..
तेरे इंद्रधनुषी सतरंगी इश्क सा कोई रंग नहीं..
- Soni shakya
tamilarasan
God gorgeous creations
Sonam Brijwasi
रंगों की बारिश में भीग जाएँ हम,
खुशियों के पल हर दिल में बैठ जाएँ हम।
गुलाल की तरह जीवन को रंगीन बना लें,
मिलकर इस होली को यादगार बना जाएँ हम।
- Sonam Brijwasi
Soni shakya
अब इन कच्चे पक्के रंगों की उमंग नहीं..
तेरे इंद्रधनुषी सतरंगी इश्क सा कोई रंग नहीं..💖💖
- Soni shakya
Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status