Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Rubina Bagawan
This is my first song in Spotify
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Kiran
संघ बहुत जरूरी तुम्हारा।
संघ बहुत राहत देह तुम्हारा।
संघ आत्मतृप्ति कराता तुम्हारा।
संघ उन्मुख कराता तुम्हारा।
Irfan Khan
इंसान अपनी नफ़रत में किस हद तक गिर सकता है? क्या आपने कभी सोचा है कि एक छोटी सी गलती पूरी ज़िंदगी को तबाह कर सकती है? 💔
'नफ़रत की आग' का सबसे चौंकाने वाला मोड़ अब आपके सामने है! चैप्टर 3 (Chapter 3) अब मातृभारती पर लाइव हो चुका है। 📖✨
इस चैप्टर में वो होने वाला है जिसकी आपने कल्पना भी नहीं की होगी। एक ऐसा सच जो सबको हिला कर रख देगा... और एक ऐसा चेहरा जो अब तक नकाब के पीछे था। 🎭😱
अभी मेरी प्रोफाइल पर जाएं और खुद देखें कि आग कितनी गहरी है!
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लेखक: इरफ़ान अयान खान (Irfan Ayaan Khan)"
Kiran
खेल खेले बचपन में, एक आंगन में
रोए बचपन में, एक आंगन में
सम्मानित हुए बचपन में, एक आंगन में
अपमानित भी हुए, उसी आंगन में
आज वही आंगन तुम्हें पुकारता है
आने को, लौट जाने को
वहीं हँसी, वही यादें, वही छोटी खुशियाँ
एक बार फिर जीने को उसी आंगन में।
- Kiran
Kuldeep Roni
मेरी उड़ान में भी थोड़ा नूर है,
पर तेरी नज़र में सब दूर है।
मेरे लिए एक आसमान है
तुझे अपनी छत पर गुरूर है
मैं राख भी हो जाऊँ तो क्या,
तेरे नाम का धुआँ मशहूर है।
मैं टूट के भी तुझसा रहता हूँ,
ये इश्क़ बड़ा ही मजबूर है।
मैं रातों को चाँद से बोलूँ,
तेरी खिड़की पे पर्दा ही दूर है।
मैं हस्ते हुए भी टूटता हूँ,
तेरे चेहरे पे क्यों इतना नूर है?
मेरे लफ़्ज़ तेरे नाम से भीगे,
तेरे दिल में मेरा क्या कसूर है?
तू चुप है तो बर्छियाँ चलतीं,
मेरी ख़ामोशी में भी सुरूर है।
मैं जज़्बों की आग में पिघला,
तेरे सीने में ठंडा सा हूर है।
तू सोचता है मैं झुक जाऊँ,
मेरी मिट्टी में ख़ुद का दस्तूर है।
तेरी यादों के साये चलते,
मेरी रग–रग में तेरा शोर है।
तू शोहरत की चादर ओढ़े हुए,
मेरे हिस्से में बस धूप–दूर है
मैं चाँद को हाथ में थामकर भी,
कह दूँ कि ये बस एक हूर है।
तू छत पर खड़ा है ऐ ‘रोनी’,
मेरा दिल तो तिरे ही हुज़ूर है।
AKHILABALARAJ
you know what ???I really wanna say something to u hardly...I know it won't reach to you. Whenever I see you, in my eyes... the feeling which I felt was genuine and real.
S Sinha
विश्व जल दिवस के अवसर पर
पानी बचाओ, पर्यावरण के अनुकूल जीवन जियो और जीवन बचाओ
अगर पानी नहीं है, तो कितना भी सोना और हीरा उसे नहीं खरीद सकता
On the eve of WORLD WATER DAY -
Save Blue , Live Green and Save Life
If no water , no amount of gold and silver can buy it
Paagla
https://youtube.com/shorts/_vsO89zS1jg?si=L58Hv_RDKeqQ-iC5
M K
मैं मुस्कुराऊँ तो उसे हैरानी होती है,
जैसे मेरी खुशी उससे अनजानी होती है…
वो समझता है मैं टूट चुकी हूँ शायद,
उसे क्या पता..??
मेरी हँसी भी मेरी कहानी होती है…
हर दर्द को छुपाकर रखती हूँ अपने अंदर,
इसलिए चेहरा थोड़ा रोशनी-सा नजर आता है,
उसे लगता है सब ठीक है मेरे साथ,
पर सच तो ये है.....
मुस्कुराना भी एक तरह की मजबूरी लगती है…
- M K
Prem Solanki
#sadpoetry
#sadshayari
Narendra Parmar
झूठ बोलने से एक फायदा होता है
दुसरो को टेंशन
और हमें आनंद होता है ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
mohansharma
तुम क्यों पसार देते हो दामन हर एक के सामने..
हर हाथ सहारा दे मोहन ये कोई जरुरी तो नहीं..
kattupaya s
My short story "veyil kaalam" is live now in matrubharti.
Imaran
तेरे चेहरे पे जो मासूमियत है, वो हर दिल को छू जाती है,
तू अपनी आँखों से ही तो, ये कायनात बदल देती
👄imran 👄
Piyu soul
प्रेम इक खेल नहीं, ये हक़ीक़त की आवाज़ है,
नम्रता से माँगो तो दिल आएगा ख़ास।
जो मज़ाक में ले ले हमारी चाहत को,
उसको भी समझना पड़ेगा — यह इश्क़ की साज़ है। ⚡️
piyu 7soul
Dhara K Bhalsod
બીજું જોઈએ પણ શું?
એક જીગરજાન બહેનપણી,
બે કપ ચા અને......
"તને ખબર છે આજે શું થયું..!! "
🎊🎊🎊
- Dhara K Bhalsod
kvlsandhyarani
Author :Dr kvl Sandhya Rani
Hindi lecturer, BVK college, Visalakshi Nagar, visakhapatnam.
Introduction:
A Mother's love is one of the purest and most powerful emotions in the world. From the moment a child is born, a mother dedicates her life to caring, protecting and guiding her child. Her sacrifices are endless. And her love is unconditional. ,This story reflects the affection ,patience, and strength of a mother who shapes her son's life with care and devotion.
The beginning of a mother's journey:
In a small village Lived a woman named Lakshmi. she was known for her Kind heart & gentle nature. After many years of marriage she was blessed with a baby boy. The moment she held her child in her arms, tears of joy filled her eyes.
From that day, lakshmis life revolved around her son she wanted him sleep peacefully and prayed everyday for his happines and success. Even she was tied from household work, she never complained .Her son's Smile was enough to remove all worries.
Lakshmi believed that rising a child was not only about feeding & protecting him but also about teaching him good values. She wanted her son to grow into a kind honest and responsible person.
A mother sacrifices:
As the boy Grew older , lakshmi faced many challenges. Her family was not very rich, but she was determined to provide the best education for her son.some times She skipped her own meals so that Her son would never feel hungry. Every morning she work up early, prepared food and sent him with a smile. She encouraged him to studywell & reminder him that education would shape his future.
When ever he felt discouraged, lakshmi would comfort him with gentle Words. She would say, "My son, hard work and patience will always lead you to success". Her words become a guiding light in his life.
The son's Realization;
Years passed and the boy grew into a man with his mother's constant support and encouragement. He completed his education and found a good job in the City.
One day while remembering his childhood, he realized how much his mother had sacrificed for him. He remembered the Sleepless Nights she spent taking care of him when he was sick the sacrifices she made for his educationand and the love she showed every single day tears filled his eyes as he understood the depth of his mother's love .
He returned home and held his mother's hands with gratitude.
" Amma" he said softly, "what ever I am today is because of you".
Lakshmi smiled gently. For her,hers son's happiness was the greatest reward.
The True meaning of Mother's Love:
A mother's love cannot be measured with words.It is a silent strength that supports a child throught out life even when the world turns away,a mother's heart always remains open.
Lakshmi's story remind us that behind every successful person there is often a mother who believed in them, encouraged them,and sacrificied for their dreams.
A mother doesnot expect any thing in return except love and respect.
conclusion:
Motherhood is a sacred gift .mother nurtures her child with patience,kindness,and unconditional love.her sacrifices often go unnoticed,but they shape the future of her children and society.
we should always respect and care for our mother's.,for their love is the foundation of our lives.
As a famous saying goes:
"God could not be everywhere,so he created mother's"
A mother's love is eternal ,pure and everlasting.
Dhara K Bhalsod
મજા તો ગાંડા બનીને રહેવામાં જ છે.
સમજદારી તો જીંદગીના રંગો ઉડાડી નાંખે છે.
- Dhara K Bhalsod
Kavya Sharma
રાત કેટલીય અંધારી હોય,
પ્રભાત તો આવવાનું જ હોય…
આંસુઓની સાથોસાથ,
હાસ્ય પણ ખીલવાનું જ હોય…
હારી જઈએ ક્યારેક રસ્તામાં,
પણ હિંમત ફરી જાગવાની જ હોય…
જીવનના આ ચક્રમાં,
દરેક અંતે શરૂઆત હોવાની જ હોય…
સપનાઓને થોડી રાહ જોવડાવ,
સાચી ક્ષણ તો આવવાની જ હોય…
Narayan
तेरी यादों की खुशबू मेरे वजूद में कुछ यूँ बसी है,
कि आँखें बंद करूँ तो दीदार तेरा, और खोलूँ तो तलाश तेरी है।🍁🍂🌹
- Narayan
वात्सल्य
વચને ક'દી ના વંચિત થાઓ
વંચિત થવા વચન ના ખાઓ.
- વાત્સલ્ય
- वात्सल्य
Narayan Mahor
“मन की हर धड़कन में बसे हो तुम,
हर साँस में नाम तुम्हारा है।
राधे-श्याम की इस प्रेम धारा में,
जीवन सारा हमारा है। 💙”
- Narayan Mahor
M K
झूठ कहते है लोग __अच्छे कर्म करने से अच्छा फल मिलता है ___या आपके साथ अच्छा होता है __अक्सर बुरे कर्म करने वाले ही खुश रहते हैं __अच्छे कर्म वाले रोता हुआ नजर आते हैं __जैसे जो लोग दिल से निभाते हैं रिश्ता___उन्हीं को धोखा मिलता है ___🌻 खुद से प्यार करे , किसी दूसरे से पहले अपनी खुशियों को रखे
- M K
Kuldeep Roni
एक देशभक्त चाहिए ए भगत सिंह तेरे जैसा
मेरे जैसा उसके जैसा या तेरे जैसा
भगत सिंह तेरे खून में एक अलग ही बात थी
आज के नौजवानों में खून नहीं मिलता तेरे जैसा
मैं ढूंढता फिर रहा हूं इस दुनिया में
मुझे कोई नहीं मिला आज तक तेरे जैसा
और क्या ही था जादू इन्कलाब कि बोली में
हर कोई चाहत रखता है बनने को तेरे जैसा
तेरे जैसा बनना चाहते हैं सभी रोनी
पर कौन बन पाया है तेरे जैसा
मैं ढूंढ ढूंढ कर थक गया हूं रोनी
पूरे जहां में कोई नहीं है तेरे जैसा
और मुझे बता मैं क्या करूं
क्योंकि मुझे बनना है तेरे जैसा
मुझे बताया ही नहीं तुमने
और कौन है तेरे जैसा
Raju kumar Chaudhary
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Mara Bachaaaaa
कुछ सांसे
उनके लिए
संभाल रखी थी,
अब वो ना रहे
सांस ना रही।
- Mara Bachaaaaa
Piyu soul
“हर कहानी प्यार से शुरू नहीं होती…
कुछ कहानियाँ सौदे से शुरू होती हैं।
उसे लगा… वो एक लड़की को खरीद रहा है,
उसे क्या पता था—
वो अपनी बर्बादी घर ला रहा है।
जब एक लड़की की ज़िंदगी उसकी खामोशी में तय हो जाए…
तो वो हारती नहीं—
खेल शुरू करती है।
25 तारीख…
कहानी नहीं, हिसाब शुरू होगा।
तैयार रहना।
(वैसे फॉलो करना ना भूले वरना मिस हो जाएगी ये दिलचस्प कहानी )
_piyu 7soul
Shailesh Joshi
જીવનનું તો એવું છે કે,
જે દિવસથી જીવનમાં
ફરિયાદો ઓછી થવા લાગે છે,
એ દિવસથી જ જીવવાની
મજા આવવા લાગે છે,
પરંતુ એની જાણ તો
આપણને ત્યારે જ થાય છે,
કે જ્યારે ધીરજ સાથે
એની શરૂઆત થાય છે.
- Shailesh Joshi
Aaliya khan
hello guys kese hai aap sab Maine Hal hi mai apni ek urdu novel likhi hai agar aap padna chate hai to meri Instagram I'd par DM KRE Our follow krehttps://www.instagram.com/aaliyakhan___80
Nilesh Rajput
“एक होता है प्यार, और एक होता है सिर्फ प्यार,
और मैंने तुमसे सिर्फ प्यार किया था…”
Anup Gajare
"दोनों"
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दोनों घूम रहे थे
शाम के निर्जन स्थल पर
उसके गर्म तलवे पर
उंगलियों को घुमाते हुए
वह चल रहा था।
इतना अंतर
नापने के बाद
दोनों को अंधेरे में
अपने ही सौरमंडल का
आंगन न दिखा।
वे टूटे हुए
बस आगे बढ़ रहे थे
जीवन की नींव रखने के लिए
उन्हें किसी फरिश्ते ने नहीं
भेजा था कही।
सदियों पहले
घटित हुआ था
कि उसने नकार दिया
उसके अस्तित्व को।
आश्वासन देते हुए
उसने शाम बीता दी
रात के दूसरे पहर
उसने दूसरे तारे को
उसके ब्रह्मांड में
रिसीव किया।
आकाशगंगा की खिड़की से
जन्मदाता देख रहा था
दोनों को बिखरते हुए।
फिर
शायद
दोनों कभी न मिलने की शर्त पर
जुदा हुए।
पर शर्तें
समय को याद नहीं रहतीं।
वह
किसी अनजान ग्रह पर
धीरे-धीरे बूढ़ा होता रहा,
जहाँ गुरुत्वाकर्षण
उसके दुख से हल्का था।
और वह—
एक तारे के भीतर
जलती रही,
अपनी ही रोशनी से
अंधी होती हुई।
कभी-कभी
किसी टूटते उल्कापिंड की तरह
उनकी स्मृतियाँ
एक-दूसरे की दिशा में गिरतीं,
पर
मध्य में फैला निर्वात
हर बार
उन्हें निगल लेता।
जन्मदाता अब भी
आकाशगंगा की उसी खिड़की पर था,
पर उसकी आँखों में
अब पहचान नहीं थी—
सिर्फ गणना थी
दूरी की,
और क्षय की।
एक दिन
जब समय ने
अपनी ही परछाईं को पार किया,
दोनों ने
अलग-अलग ब्रह्मांडों में
एक ही सपना देखा—
कि वे फिर मिलेंगे
किसी ऐसे स्थान पर
जहाँ
न सौरमंडल होगा,
न तारे,
न कोई देखने वाला।
सिर्फ
एक अधूरा स्पर्श
जो
कभी हुआ ही नहीं।
और उसी अधूरेपन में
उन्होंने
अपना अस्तित्व
पूरा मान लिया।
बिछड़े हुए तारे
टूटती प्रकाश शलाकों से
अब बात नहीं करते।
इसलिए दो
अलग होने के बाद
एक दूसरे का अक्ष छू न सके कभी।
_____________________________________________
Anup Ashok Gajare
Nisha ankahi
मांग लूँ प्यार… इतनी भी फकीरी नहीं,
और छोड़ दूँ खुद को… इतनी भी लाचारी नहीं,
जो मेरा है वो खुद चलकर आएगा,
मुझे किसी के पीछे भागने की बीमारी नहीं…
- Nisha ankahi
Nisha ankahi
खुद्दारी रखकर ही इश्क़ किया करो,
वरना मोहब्बत अक्सर भीख बन जाती है…
जो बिना कहे तुम्हें समझ न पाए,
उसके सामने हर बात चीख बन जाती है…
- Nisha ankahi
Kiran
दिल में लिए बैठे हैं दु:खों के गुलदस्ते
और वह कहते हैं कि तुम मुस्कुराते क्यों नहीं
- Kiran
Sonalpatadia darpan
જેટલું જાણશો તેટલું માણશો.📖
Kiran
शीर्षक : सुकून से डर
मिले हुए पिछले दुखों से,
मिलने वाले नए सुकून से डर लगता है,
लगता है कि यह सुख अपना रूप बदल कर आया है,
वास्तव में है तो यह वही दुख ही....
Sneha Gupta
🙏🏻“अटूट सहारा”🙏🏻
हमें मुश्किलों से डर नहीं लगता,
क्योंकि साथ माता-पिता का है।
अगर कभी गिर भी जाएँ हम,
तो यकीन है सहारा माता-पिता का है।
क्या लिखें आपकी खिदमत में,
शब्द ही कम पड़ जाते हैं,
जब भी कुछ लिखना चाहें,
तो बस सोचते ही रह जाते हैं।
Created by: Sneha Gupta
Grade : 10th
Soni shakya
हम भी बेफिक्र हुआ करते थे कभी फिर,,
मोहब्बत हो गई..!!
- Soni shakya
Soni shakya
अब तो आदत हो गई है दर्द में रहने की,,
नहीं तो खुश रहना भी कुछ मुश्किल नहीं था..!
- Soni shakya
SAYRI K I N G
Dutty Time Have Nice Day frends
Dada Bhagwan
Do you know that one who expends their life for any kind of help will not come across any hindrance in life?
Read more on: https://dbf.adalaj.org/nhlK0zgJ
#helpothers #humanity #helping #lifelessons #DadaBhagwanFoundation
महेश रौतेला
मैंने चाहा
तृणभर परिचय,
इस धरा का,इस ब्रह्मांड का।
सपना चाहा
तृणभर सुन्दर
इस देश का, इस मनुष्य का।
प्यार चाहा
अतिशय व्यापक
इस लोक का, फिर परलोक का।
*** महेश रौतेला
Vartikareena
आज माई डियर प्रोफेसर के दो भाग आएंगे । आप सब पढ लेना। और समीक्षा नही करते हो। गलत बात है ये।
SAYRI K I N G
And one day you look at yourself and realise... it wasn't all breaking. Something was blooming the whole time.
Piyu soul
💫“साथ का एहसास”💫
हम चुपचाप अपनी ही धुन में चलते थे,
बूढ़े दादा बोले — “कुछ समझ नहीं आया।”
पर हमारी दुनिया में शब्दों की ज़रूरत नहीं थी,
हर कदम में बस एक दूसरे का साथ था।
एडमिशन के हर फॉर्म में उसने राह आसान बनाई,
हर मुश्किल मेरे लिए हल्की कर दी।
और आज भी जब मन में तूफान उठता है,
वो जट से पूछता है — “क्या हुआ?”
हर छोटी‑छोटी बात में उसका एहसास दिखता है,
हर पल उसकी care और प्यार मेरे साथ था।
कभी teasing, कभी silent, लेकिन हमेशा साथ,
ऐसा रिश्ता बस किस्मत में लिखा होता है। 💛
SAYRI K I N G
I love you 😘
i love you too
Main Kitna antar hai
SAYRI K I N G
...मेरी शिद्दत मेरी चाहत का हिसाब क्या दोगे..
@.sayri king
मैं कहूँ तुमसे इश्क़ है' बोलो जवाब क्या दोगे?
Sss
"જવાબદારી ની તાકાત"
Saliil Upadhyay
*बचपन के अनुभव बताते हुए कहा...
मेरा बचपन काफ़ी संघर्ष" पूर्ण*l बीता था...!
स्कूल जाता था तो मास्टर पीटते थे....और नही जाता था तो घरवाले..!!
बेचारा जाये तो कहां जायें...
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
ठिकाना
गर दिल में ठहरने का ठिकाना बन जाए l
दो पल जिंदगी जीने का बहाना बन जाए ll
यू बारहा मुस्कुराया न करो खुले आम l
हस्ते ही दिल्लगी का निशाना बन जाए ll
जरा तमीज में रहकर बात किया करो l
बैठे बिठाएं दुश्मन ज़माना बन जाए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
DrAnamika
जब भी मुझे कोई जख्म़ नया मिला
समझ गई पुराने जख़्मों का मुआवजा़ मिला.
#डॉ_अनामिका #हिंदी_का_विस्तार #हिंदी_काव्य #हिंदी_पंक्तियाँ #शायरी #शेर #मातृभारती
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
पाप पुण्य सब मनुज के, करे संग में वास। जैसे बछड़ा गाय का, जाता माँ के पास।।
दोहा --458
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (44) की व्याख्या
अध: पश्यस्व मोपरि --ऋगुवेद
8/33/19
भाव--
“हे मानव! तू नीचे देख, ऊपर मत देख — अर्थात् विनम्र बन, अहंकारी मत बन।”
मूल वैदिक अर्थ (प्रसंग सहित)
इस मन्त्र का पद— अधः पश्यस्--नीचे देखो। मोपरि-- मा उपरि--ऊपर मत देखो।
आचार्य सायणा ने इस मन्त्र- को
स्त्री-आचरण के रूप में लिया है।
अर्थात—
नीचे देखो ! ऊपर/इधर-उधर मत देखो। संयम और मर्यादा रखो।
पर यहाँ जो अर्थ लिया गया है, वह—
रूपकात्मक है और
आधुनिक नैतिक व्याख्या है
इसमें:
“नीचे देखना” = विनम्रता
“ऊपर देखना” = अहंकार
भाव-विस्तार--
विनम्रता बनाम अहंकार (सभी मनुष्यों के लिए)
इस मन्त्र को आज के संदर्भ में उपयोग करते हैं, तो भाव—
“विनम्र बनो, अहंकारी मत बनो”
अत्यन्त उपयुक्त और उपयोगी है
यह व्याख्यात्मक अर्थ है, न कि शाब्दिक अर्थ।
“मनुष्य में विनम्रता हो, अहंकार न हो”—वेदों की भावना के बिल्कुल अनुरूप है।
1. संगच्छध्वं मन्त्र (ऋग्वेद 10.191.2)
संगच्छध्वं संवदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते॥
अर्थ:
साथ-साथ चलो, मिलकर बोलो, तुम्हारे मन एक हो जाएँ।
जैसे प्राचीन देवता सामंजस्य और एकता से यज्ञ करते थे।
भाव:
अहंकार अलगाव लाता है
विनम्रता और समता एकता लाती है
2. मित्र-दृष्टि मन्त्र (यजुर्वेद 36.18)
मित्रस्य चक्षुषा सर्वाणि भूतानि समीक्षन्ताम्।
अर्थ:
सब प्राणियों को मित्रभाव से देखो।
भाव:
जो अहंकारी है, वह दूसरों को नीचा देखता है
जो विनम्र है, वह सबको मित्र मानता है
3. ईशावास्य उपनिषद् (मन्त्र 1)
ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
अर्थ:
यह सम्पूर्ण जगत ईश्वर से आच्छादित है;
त्यागपूर्वक भोग करो, किसी के प्रति लोभ/अहंकार न रखो।
भाव:
अहंकार = “सब मेरा है”
विनम्रता = “सब ईश्वर का है”
4. न कर्मणा… (कैवल्य/मुण्डक उपनिषद् भाव)
न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।
अर्थ:
न कर्म, न वंश, न धन—
बल्कि त्याग (विनम्रता) से ही अमृतत्व मिलता है।
5. समानी व आकूति (ऋग्वेद 10.191.4)
समानी व आकूति: समाना हृदयानि वः।
समानमस्तु वो मनो यथा वः सुसहासति॥
अर्थ:
तुम्हारे संकल्प, हृदय और मन समान (समभाव) हों।
भाव:
अहंकार भेद पैदा करता है
विनम्रता समभाव लाती है
निष्कर्ष --
वेदों का मूल संदेश यह है कि:
अहंकार से विभाजन, संघर्ष, अज्ञान परन्तु विनम्रता से एकता, समभाव, आध्यात्मिक उन्नति
इसलिए वाक्य—
“मानव में विनम्रता हो, अहंकारिता न हो”
वेदों की मूल भावना के अत्यन्त निकट है।
उपनिषदों में प्रमाण :
1. ईशावास्य उपनिषद् (मन्त्र- 1)
ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
अर्थ:
यह सम्पूर्ण जगत ईश्वर से आच्छादित है;
त्यागपूर्वक भोग करो, किसी के प्रति लोभ (अहंकार) मत करो।
भाव:
अहंकार से अधिकार-बुद्धि (“सब मेरा”)
विनम्रता से त्याग और समर्पण
2. कठोपनिषद् (1.2.24)
नाविरतो दुश्चरितान्नाशान्तो नासमाहितः।
नाशान्तमानसो वापि प्रज्ञानेनैनमाप्नुयात्॥
अर्थ:
जो दुष्कर्मों से नहीं हटता, अशान्त है, असंयमी है—
वह आत्मज्ञान को प्राप्त नहीं कर सकता।
भाव:
अहंकार मन को अशान्त और असंयमी बनाता है
विनम्रता और संयम से ही ज्ञान प्राप्त होता है
3. मुण्डक उपनिषद् (3.1.5)
नायमात्मा प्रवचनेन लभ्यो न मेधया न बहुना श्रुतेन।
यमेवैष वृणुते तेन लभ्यः…॥
अर्थ:
यह आत्मा न वाक्पटुता, न बुद्धि, न अधिक श्रवण से मिलती है;
वह उसी को मिलती है जो उसके योग्य (नम्र) बनता है।
भाव:
अहंकार (ज्ञान का गर्व) बाधक है
विनम्रता ही आत्मप्राप्ति का मार्ग है
4. केनोपनिषद् (2.3)
यस्यामतं तस्य मतं मतं यस्य न वेद सः।
अविज्ञातं विजानतां विज्ञातमविजानताम्॥
अर्थ:
जो सोचता है “मैं जानता हूँ”, वह नहीं जानता;
जो मानता है “मैं नहीं जानता”, वही जानता है।
भाव:
“मैं जानता हूँ” अहंकार है
“मैं नहीं जानता” विनम्रता (सच्चा ज्ञान) है।
5. तैत्तिरीय उपनिषद् (शिक्षावल्ली 1.11)
सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः…
अर्थ:
सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो, स्वाध्याय में लगे रहो।
भाव:
धर्म और स्वाध्याय = विनम्रता का मार्ग
अहंकार धर्म से दूर ले जाता है
निष्कर्ष--
उपनिषदों का स्पष्ट संदेश है—
अहंकार, ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार में बाधा है,
जबकि विनम्रता, संयम और त्याग ही सच्चे ज्ञान का मार्ग हैं।
पुराणों में प्रमाण --
1. श्रीमद्भागवत महापुराण
(5.18.12)
यस्यास्ति भक्तिर्भगवत्यकिञ्चना
सर्वैर्गुणैस्तत्र समासते सुराः।
हरावभक्तस्य कुतो महद्गुणाः
मनोरथेनासति धावतो बहिः॥
अर्थ:
जिसमें अहंकार-रहित भक्ति (अकिञ्चन भाव) होती है, उसमें सभी गुण आ जाते हैं।
अहंकारी (ईश्वर-विमुख) में कोई श्रेष्ठ गुण नहीं टिकता।
2. शिव पुराण
(विद्येश्वर संहिता, अध्याय 16 – भावानुसार)
अहंकारो महान् दोषो विनयः परमं सुखम्।
अर्थ:
अहंकार महान दोष है, और विनम्रता सर्वोत्तम गुण है।
3. विष्णु पुराण
(3.7.20 )
विनयादेव शोभन्ते विद्या कुलं च सम्पदः।
अर्थ:
विद्या, कुल और सम्पत्ति—सब विनम्रता से ही शोभा पाते हैं।
4. पद्म पुराण
(उत्तर खण्ड 72.335 – )
अहंकारविहीनः स्यात् साधुः सर्वत्र पूज्यते।
अर्थ:
जो अहंकार-रहित है, वही साधु और सर्वत्र पूजनीय होता है।
5. गरुड़ पुराण
(आचार काण्ड, 111.12 – )
अहंकारात् विनश्यन्ति विनयाद् यान्ति उन्नतिम्।
अर्थ:
अहंकार से मनुष्य नष्ट होता है, और विनम्रता से उन्नति करता है।
6. स्कन्द पुराण
(काशी खण्ड –)
त्यक्त्वा अहंकारं मनुष्यः पूज्यते सर्वदेहिनाम्।
अर्थ:
जो मनुष्य अहंकार त्याग देता है, वह सबके द्वारा सम्मानित होता है।
7- ब्रह्मवैवर्त पुराण
(कृष्णजन्म खण्ड- 22.12 )
अहंकारविहीनो हि जनो याति परां गतिम्।
अर्थ:
अहंकार से रहित मनुष्य ही परम गति को प्राप्त करता है।
8- लिंग पुराण
(पूर्व भाग 1.70.95 )
अहंकारः परं दुःखं विनयः परमं सुखम्।
अर्थ:
अहंकार दुःख का कारण है, और विनम्रता सर्वोत्तम सुख है।
9-वामन पुराण
(अध्याय 14.8 )
विनयाद् याति पात्रत्वं न तु दर्पेण कर्हिचित्।
अर्थ:
मनुष्य विनम्रता से ही योग्य बनता है, अहंकार से कभी नहीं।
10- कूर्म पुराण
(पूर्व भाग 2.12.34 )
त्यक्त्वा दर्पं च मानं च विनीतः शोभते नरः।
अर्थ:
जो मनुष्य दर्प और मान (अहंकार) त्याग देता है, वही शोभा पाता है।
11-- मत्स्य पुराण-
(अध्याय 153.22 )
अहंकारात् विनश्यन्ति विनयाद् यान्ति संपदः।
अर्थ:
अहंकार से नाश होता है, और विनम्रता से समृद्धि आती है।
12- ब्रह्माण्ड पुराण
(अध्याय 2.3.45 )
विनयेन हि भूष्यन्ते गुणा विद्या कुलं धनम्।
अर्थ:
गुण, विद्या, कुल और धन—सब विनम्रता से ही सुशोभित होते हैं।
निष्कर्ष--
इन पुराणों का भी यही एकमत संदेश है—
अहंकार से दुःख, पतन, विनाश
और विनम्रता से उन्नति, सुख और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भगवद्गीता में विनम्रता (अमानित्व) और अहंकार त्याग का स्पष्ट उपदेश कई स्थानों पर मिलता है।
भगवद्गीतामें प्रमाण--
1. अमानित्व (विनम्रता) का प्रत्यक्ष उल्लेख
अध्याय 13, श्लोक 7–8--
अमानित्वमदम्भित्वमहिंसा क्षान्तिरार्जवम्।
आचार्योपासनं शौचं स्थैर्यमात्मविनिग्रहः॥
भावार्थ:
यहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने "अमानित्व" (अहंकार का अभाव, विनम्रता) को ज्ञान का पहला गुण बताया है।
2. अहंकार त्याग का उपदेश
अध्याय 18, श्लोक 58--
मच्चित्तः सर्वदुर्गाणि मत्प्रसादात्तरिष्यसि।
अथ चेत्त्वमहंकारान्न श्रोष्यसि विनङ्क्ष्यसि॥
भावार्थ:
यदि तुम अहंकार छोड़कर मेरी शरण में रहोगे तो सभी बाधाओं को पार कर जाओगे, परंतु अहंकार से युक्त होकर नहीं सुनोगे तो विनाश होगा।
3. अहंकार को आसुरी गुण बताया गया
अध्याय 16, श्लोक 4--
दम्भो दर्पोऽभिमानश्च क्रोधः पारुष्यमेव च।
अज्ञानं चाभिजातस्य पार्थ सम्पदमासुरीम्॥
भावार्थ:
दम्भ, घमंड (दर्प), अभिमान आदि आसुरी गुण हैं।
4. अहंकार रहित व्यक्ति प्रिय है
अध्याय 12, श्लोक 13–14--
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
निर्ममो निरहंकारः समदुःखसुखः क्षमी॥
भावार्थ:
जो निरहंकारी (अहंकार रहित), सबके प्रति मित्र और करुणा रखने वाला है, वही भगवान को प्रिय है।
5. कर्तापन के अहंकार का निषेध
अध्याय 3, श्लोक 27--
प्रकृतेः क्रियमाणानि गुणैः कर्माणि सर्वशः।
अहंकारविमूढात्मा कर्ताहमिति मन्यते॥
भावार्थ:
अहंकार से मोहित मनुष्य यह सोचता है कि “मैं ही कर्ता हूँ”, जबकि वास्तव में प्रकृति ही सब कार्य कर रही है।
निष्कर्ष:
भगवद्गीता स्पष्ट रूप से सिखाती है कि—
विनम्रता (अमानित्व) ज्ञान का मूल गुण है। अहंकार आध्यात्मिक पतन का कारण है। निरहंकारिता भगवान को प्रिय बनाती है।
महाभारत में भी विनम्रता (निरहंकारिता) की महिमा और अहंकार के दोष अनेक स्थानों पर बताए गए हैं।
महाभारत में प्रमाण--
1. अहंकार पतन का कारण है
उद्योगपर्व (विदुरनीति)
अहंकारः श्रियं हन्ति पुरुषस्याल्पमेधसः।
विनयाद् याति पात्रत्वं ततो लभते धनम्॥
भावार्थ:
अहंकार मनुष्य की लक्ष्मी (समृद्धि) को नष्ट कर देता है, जबकि विनम्रता से मनुष्य योग्य बनता है और फिर धन-वैभव प्राप्त करता है।
2. विनम्रता से ही सम्मान
शान्तिपर्व
न विनीतो न शूरोऽपि न दानी न च पण्डितः।
न चाप्यन्यः कश्चिदस्ति यः प्रियः सर्वदेहिनाम्॥
भावार्थ:
विनम्रता के बिना न वीर, न दानी, न पण्डित—कोई भी सबको प्रिय नहीं हो सकता।
3. अहंकार विनाश का मूल
शान्तिपर्व
अहंकारसमुत्थेन विनाशो जायते नृणाम्।
विनयाद् यशो लोके प्राप्नोति च परां गतिम्॥
भावार्थ:
अहंकार से मनुष्य का विनाश होता है, जबकि विनम्रता से यश और उत्तम गति प्राप्त होती है।
4. विदुरनीति में विनम्रता का उपदेश
उद्योगपर्व (विदुरनीति)
विनयेन हि शोभन्ते विद्या रूपं कुलं धनम्।
विनयाद् याति पात्रत्वं न विनयात् कुतो गुणाः॥
भावार्थ:
विद्या, रूप, कुल और धन—सब विनम्रता से ही शोभा पाते हैं; विनय के बिना गुणों का मूल्य नहीं रहता।
5. भीष्म का उपदेश
शान्तिपर्व (भीष्म-युधिष्ठिर संवाद)
दम्भो दर्पोऽभिमानश्च त्याज्याः सर्वात्मना नरैः।
एते हि नाशनाः सर्वे धर्मस्य च सुखस्य च॥
भावार्थ:
दम्भ, घमंड और अभिमान—इनका पूर्ण त्याग करना चाहिए, क्योंकि ये धर्म और सुख दोनों का नाश करते हैं।
निष्कर्ष:
महाभारत का स्पष्ट संदेश है—
अहंकार = विनाश का कारण
विनम्रता = यश, सम्मान और उन्नति का आधार
सभी गुण विनय से ही शोभित होते हैं
स्मृति (जैसे मनुस्मृति, याज्ञवल्क्य स्मृति आदि) में भी विनम्रता (विनय) और अहंकार त्याग का स्पष्ट उपदेश मिलता है। प्रमुख प्रमाण इस प्रकार हैं—
1. मनुस्मृति में विनय की महिमा
मनुस्मृति 2.121
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥
भावार्थ:
जो विनम्र होकर बड़ों का अभिवादन करता है, उसकी आयु, विद्या, यश और बल—ये चारों बढ़ते हैं।
2. अहंकार का त्याग
मनुस्मृति (अर्थानुसार)
नात्मानमवमन्येत नातिमानं समाचरेत्।
भावार्थ:
मनुष्य न तो स्वयं को तुच्छ समझे और न ही अहंकार (अतिमान) करे—संतुलित विनम्रता अपनाए।
3. विनय से ही विद्या की शोभा
याज्ञवल्क्य स्मृति 1.15 (भावानुसार)
विद्या विनययुक्तेन शोभते नान्यथा क्वचित्।
भावार्थ:
विद्या तभी शोभा पाती है जब वह विनम्रता के साथ हो।
4. विनम्र आचरण का महत्व
याज्ञवल्क्य स्मृति (आचार अध्याय)
विनीतः शीलसम्पन्नः सर्वभूतेषु नित्यदा।
स पूज्यः सर्वलोकस्य न तु दर्पसमन्वितः॥
भावार्थ:
जो मनुष्य विनम्र और शीलवान होता है, वही सबका पूज्य बनता है; अहंकारी व्यक्ति नहीं।
5. अहंकार से पतन
अन्य स्मृतियों का भाव
दर्पो हि मनुष्याणां कारणं सर्वनाशनम्।
भावार्थ:
अहंकार (दर्प) मनुष्य के पतन और विनाश का कारण बनता है।
निष्कर्ष:
स्मृति का संदेश है—
विनम्रता (विनय) से आयु, यश, विद्या और सम्मान बढ़ते हैं
अहंकार (दर्प/अभिमान) पतन और विनाश का कारण है
विद्या और गुण तभी शोभा पाते हैं जब उनमें विनय हो।
स्मृति ग्रन्थों में प्रमाण--
1. मनुस्मृति से प्रमाण
(1) मनुस्मृति 2.121
अभिवादनशीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः।
चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम्॥
भावार्थ:
विनम्र (अभिवादनशील) व्यक्ति की आयु, विद्या, यश और बल बढ़ते हैं।
(2) मनुस्मृति 7.47
नातिमानं समाचरेत्।
भावार्थ:
मनुष्य को अहंकार (अतिमान) का आचरण नहीं करना चाहिए।
(3) मनुस्मृति 4.162
परद्रव्येषु लोभो न परदाराभिमर्शनम्।
स्वात्मनः प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्॥
भावार्थ (संदर्भ सहित):
धर्माचरण में संयम और विनम्रता आवश्यक है; अहंकारी व अनियंत्रित आचरण वर्जित है।
2. याज्ञवल्क्य स्मृति से प्रमाण
(1) याज्ञवल्क्य स्मृति 1.122
विनीतः शीलसम्पन्नः सर्वभूतेषु नित्यदा।
स पूज्यः सर्वलोकस्य न तु दर्पसमन्वितः॥
भावार्थ:
विनम्र और शीलवान व्यक्ति ही सबका पूज्य होता है, अहंकारी नहीं।
(2) याज्ञवल्क्य स्मृति 1.2 (आचार संदर्भ)
शौचाचारस्थितो नित्यं विनीतो जितेन्द्रियः।
भावार्थ:
मनुष्य को सदा शुद्ध आचरण वाला, विनम्र और इन्द्रिय-नियंत्रित होना चाहिए।
3. नारद स्मृति से संकेत
नारद स्मृति में भी आचार और धर्म के संदर्भ में विनम्रता को श्रेष्ठ गुण माना गया है—
(नारद स्मृति, आचार प्रकरण)
दर्पो हि धर्मनाशाय विनयः सर्वसिद्धये॥
भावार्थ:
अहंकार धर्म का नाश करता है, और विनम्रता सभी सिद्धियों को प्रदान करती है।
निष्कर्ष--
स्मृति का स्पष्ट सिद्धान्त है—
विनय (विनम्रता) से आयु, यश, विद्या और सम्मान का कारण है।
नीति ग्रन्थो मेँ प्रमाण--
1. चाणक्य नीति से प्रमाण
(1) चाणक्य नीति, अध्याय 1, श्लोक 15
विनयेन हि शोभन्ते विद्या रूपं कुलं धनम्।
विनयाद् याति पात्रत्वं न विनयात् कुतो गुणाः॥
भावार्थ:
विद्या, रूप, कुल और धन—सब विनम्रता से ही शोभा पाते हैं; विनय के बिना गुणों का कोई मूल्य नहीं।
(2) चाणक्य नीति, अध्याय 7, श्लोक 11
दर्पो नाशाय भूतानां नम्रता सर्वसिद्धये।
भावार्थ:
अहंकार (दर्प) प्राणियों के नाश का कारण है, जबकि नम्रता सभी सिद्धियों को देने वाली है।
2. हितोपदेश से प्रमाण-
(1) हितोपदेश, मित्रलाभ, श्लोक 71 (प्रसिद्ध नीति)
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्।
पात्रत्वात् धनमाप्नोति धनात् धर्मं ततः सुखम्॥
भावार्थ:
विद्या से विनय आता है, विनय से पात्रता, पात्रता से धन, धन से धर्म और धर्म से सुख मिलता है।
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Sss
"આજે હું મોટો થઈ ગયો"
કાલ સવારે માનો ખોળો ખૂંદતો હતો હું, આજે બાપ બનીને મારો ખોળો ખૂંદતા દીકરા ને જોય ગયો.
હા, આજે હું મોટો થઈ ગયો....
કાલે મારી જવાબદારી મા-બાપ રાખતા હતા, આજે હું શ્રવણ બની મા-બાપની જવાબદારી રાખતા શીખી ગયો.
હા, આજે હું મોટો થઈ ગયો.....
કાલે બાપને ઘર ચલાવતા માત્ર જોયા કરતો હું, આજે જાતે આખું ઘર ચલાવતા શીખી ગયો.
હા, આજે હું મોટો થઈ ગયો.....
બાળપણમાં ગીલ્લી-દંડો રમતા રમતા, આજે જિંદગીની બાજી હું હસતા મોંએ હારી ગયો.
હા,આજે હું મોટો થઈ ગયો....
Raa
sayed aapke piyar se mere gharme aayega kus dino me
Raa
hahah jay bharat bhagat singh ka Bharat he ye🤔🤔
Piyu soul
🌸 A New Dawn in My Life 🌸
A new presence walks beside me,
gentle as a river, bright as morning light.
In their eyes, I see echoes of courage,
in their words, whispers of guidance.
A new experience unfolds before me,
strange, thrilling, yet full of promise.
It stirs my heart, awakens my mind,
teaches me the language of growth.
I step into a new phase of being,
where the past rests like soft earth beneath my feet.
Each breath is a sunrise,
each choice a blossom of possibility.
I am alive to the magic of beginnings,
open to the wonder of connection,
ready to meet the life I am becoming.
kattupaya s
Good morning friends have a great day
Rishav raj
follow for follow back ☺️
S Sinha
ज़िंदा हूँ फिर भी ज़िंदगी से बहुत दूर हूँ
न चाह कर भी जीने को बहुत मज़बूर हूँ
Raa
Shahid kranti kari ko koti koti vandan
mere hiro rahe hamesa bhagat singh
🙏🙏
Irfan Khan
आज मचेगा गदर! "नफरत की आग" का सबसे बड़ा खुलासा! 🔥
"आज अयान का खून बहा है, कल आर्यन का गुरूर टूटेगा!"
एक मामूली होटल वेटर, जिसे रईस आर्यन ने ज़मीन पर गिराकर कांच की प्लेट से उसका सिर फोड़ दिया... जो बेबस होकर लहूलुहान हालत में पड़ा था। पूरा होटल सन्न था, लेकिन तभी...
होटल के भारी दरवाजे ऐसे खुले जैसे कोई तूफ़ान आया हो!
एक ऐसी लड़की दाखिल हुई जिसकी एक झलक पाने को शहर के रईस तरसते हैं। वो लड़की अयान के खून से सने कदमों में गिरकर दहाड़ें मारकर रोने लगी और पूरे हॉल को थर्रा देने वाली आवाज़ में पुकारा— "अयान सर!!!"
कौन है यह अयान? एक मामूली वेटर या छिपा हुआ कोई शहज़ादा? और ये 'दिया' कौन है जो अयान के लिए जान देने को तैयार है?
⚠️ सावधान: दिल थाम कर बैठिये, क्योंकि आज का चैप्टर आपकी रूह कँपा देगा! इंतकाम की ये आग अब और भड़कने वाली है। यह धमाका कुछ ही देर में LIVE होने वाला है, कहीं आप पीछे न रह जाएं!
📢 मेरी एक छोटी सी गुज़ारिश:
दोस्तों, अयान की ज़िंदगी का असली खेल अब शुरू हुआ है। अगर आप चाहते हैं कि इस कहानी का हर मोड़ आपको सबसे पहले पता चले और आप एक भी अपडेट मिस न करें, तो अभी मेरे अकाउंट को 'FOLLOW' ज़रूर करें!
आपका साथ और एक छोटा सा 'फॉलो' मुझे इस कहानी को और भी खतरनाक बनाने की हिम्मत देता है। साथ जुड़िये, क्योंकि अब हिसाब बराबर होगा! 👊
Imaran
मन करता है तुम्हें नजर में बसा लूँ,
औरों की नजरों से तुम्हें बचा लूँ..
कहीं चुरा ना ले तुम्हें मुझसे कोई,
आओ तुम्हें मैं अपनी धड़कन में छुपा लूँ
💞imran 💞
Raa
Good morning have a nice day
Sonu Kumar
क्या भारत सुपर पावर बन सकता है ? कैसे ? और नागरिकों की इसमें क्या भूमिका होनी चाहिए ?
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[ इस प्रश्न का अंतिम हिस्सा बेहद व्यावहारिक है। अच्छी बात यह है कि प्रश्न इस तरह नहीं पूछा गया कि - भारत को सुपर पॉवर बनाने के लिए हमें कैसे "नेता" की जरूरत है, या सुपर पॉवर बनने के लिए हमें किस नेता को वोट करना चाहिए !!!
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पेड मीडिया ( जिसमें सभी प्रकार की फ़िल्में और पाठ्यपुस्तके भी शामिल है ) द्वारा लगातार नागरिको को यह विश्वास दिलाया जाता है कि किसी भी तरह के बदलाव के लिए हमें सबसे पहले "एक नेता कम मसीहा" की जरूरत है। और "नेता की जरूरत" की इस गलतफहमी से बाहर आने में ज्यादातर नागरिको के जीवन का अधिकांश निकल जाता है। फिर कई मसीहाओ से नाउम्मीद होने के बाद वे अपना शेष "कुछ नहीं हो सकता" का मन्त्र दोहराते हुए बिताते है।]
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खंड (अ) में संक्षेप में बताया गया है कि भारत को सुपर पॉवर बनाने के लिए किन क़ानून ड्राफ्ट्स की जरुरत है। खंड (ब) में जन आन्दोलन की प्रकृति एवं इसके स्ट्रक्चर के बारे में जानकारी है। खंड (स) में उन कदमो का विवरण है जिन्हें उठाकर आप एक आम नागरिक के तौर पर भारत को सुपर पॉवर बनाने में अपना योगदान दे सकते है।
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खंड – (अ)
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क्या भारत सुपर पॉवर बन सकता है ?
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आज की तारीख में अमेरिका सुपर पॉवर है। मेरा मानना है कि अमेरिका की ताकत की वजह वहां के क़ानून है। उन्होंने गेजेट में ऐसे क़ानून छापे है जिससे वहां के उत्पादक वर्ग को कारोबार करने में सुविधा मिली है, और वे तकनीक जुटा कर बहुराष्ट्रीय कम्पनियां खड़ी कर पाए। इसमें मुख्य रूप से जूरी सिस्टम एवं वोट वापसी क़ानून शामिल है।
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जूरी मंडल ने वहां के छोटे-मझौले कारोबारियों की जज-पुलिस-नेताओं के भ्रष्टाचार से रक्षा की। भारत में जज सिस्टम होने के कारण बड़ी कम्पनियां छोटे कारोबारियों के बाजार से बाहर करने में सफल हो जाती है। यदि हम भारत में करो का ढांचा, अदालतें एवं पुलिस सुधार दें तो भारत की इकाइयां तेजी से तरक्की कर सकती है।
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दूसरा मुख्य बिंदु देश की खनिज संपदाओ एवं प्राकृतिक संसाधनों को 90 करोड़ भारतीयों की संपत्ति घोषित करने का है। यदि हम भारत के प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोक देते है तो भारत अपने पैरो पर खड़ा हो सकता है। क्योंकि जिस गति से पिछले 270 वर्षो से बहुराष्ट्रीय कम्पनियां हमारे खनिज लूट रही है, जल्दी ही हम रीते हो जायेंगे। और एक बार यदि हम कच्चे माल के लिए आयात पर निर्भर हो गए, तो पुलिस-अदालतें-कर प्रणाली सुधारने से भी कोई लाभ नहीं होगा।
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तो जैसे जैसे हम अपने खनिज गँवा रहे है वैसे वैसे भारत के आत्मनिर्भर एवं मजबूत होने की संभावित संभावनाएं कमजोर होती जा रही है। मैं जूरी सिस्टम, वोट वापसी, वेल्थ टेक्स एवं धन वापसी(*) कानूनों के बारे में अन्य जवाबो में लिखता रहा हूँ, अत: इस जवाब में मैं सिर्फ उन कदमो का वर्णन करूँगा जिन्हें उठाकर देश में ये क़ानून लाये जा सकते है, ताकि भारत को अमेरिका के बराबर शक्तिशाली बनाया जा सके।
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(*) धन वापसी : खनिजो एवं प्राकृतिक संसाधनों की लूट रोकने के लिए एक प्रस्तावित क़ानून है। इस क़ानून के आने बाद देश की सभी राष्ट्रीय सम्पत्तियों के मालिक 90 करोड़ भारतीय होंगे, भारत सरकार नहीं। भारत सरकार इसकी ट्रस्टी या न्यासी की स्थिति में रहेगी। तब यदि कोई कम्पनी खनिज निकालना चाहती है, तो उसे इसकी खुली नीलामी लगानी होगी, और रोयल्टी से आने वाला पैसा "90 करोड़ भारतीयों का संयुक्त खाते" नाम के एकाउंट में जाएगा। तब जिंदल 107 रूपये प्रति टन के हिसाब से कोयला नहीं खोद सकेगा, और उसे रोयल्टी के रूप में अन्तराष्ट्रीय दरो के हिसाब से प्रति टन 2000 रूपये चुकाने होंगे। जिंदल को 107 रूपये में कोयले की यह खान 2015 में दी गयी थी !!!
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Jindal Steel and Power bags Gare Palma coal bloc; stock jumps 25 per cent
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जब अंग्रेज भारत से गए थे तो उन्होंने अपने सभी वफादारो को इफरात में जमीने और खाने दी थी। टाटा को 1946 में झारखंड क्षेत्र के माइनिंग राइट्स सिर्फ 1 रुपया प्रति टन में दिए गए थे। हाँ, आपने सही पढ़ा है। यहाँ कोई टाइपिंग मिस्टेक नहीं है। टाटा के पास 1 रूपये प्रति टन के हिसाब से कोयला निकालने के माइनिंग राइट्स है। और टाटा पिछले 70 सालो से 1 रूपये में यह कोयला खोद रहा है !!!
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A Tata Coalgate? 999-yr mine lease at 25p a bigha! - Firstpost
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अख़बार का नाश्ता एवं टीवी का डिनर करने वाले नागरिको को यह समझना चाहिए कि मीडिया ख़बरें छुपाने का कारोबार है। पेड मीडिया सिर्फ भ्रष्टाचार पर बोलता है, लूट पर नहीं। और जिंदल एवं टाटा तो टोकन के रूप में लूट रहे है। भारत के ज्यादातर खनिज संसाधनों पर बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का नियन्त्रण है, और यह बढ़ता जा रहा है। वे लगभग मुफ्त में इनका दोहन करते है। लेकिन इन्हें रिपोर्ट नही किया जाता। और चूंकि विदेशी चिल्लर संसाधन नहीं लूटते इसीलिए बजरी और पत्थर कौन कौन लूट रहा है, इस बारे में पेड मीडिया छापता रहता है !!
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गोदरेज को देखिये। गोदरेज के पास मुंबई में 15 करोड़ वर्ग फुट जमीन खाली पड़ी है, और यह इस पर एक रूपया भी टेक्स नहीं चुकाता !! और कुछ 10 घरानों ने मुंबई की 20% जमीन पर कब्ज़ा किया हुआ है। और ऐसा नहीं है कि ये जमीन इन्होने बनाई है। ये सरकारी जमीने अंग्रेज इन्हें मुफ्त में देकर चले गए थे !! इन लोगो ने ट्रस्ट बनाकर इन जमीनों को दबाकर रखा हुआ है।
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Nine landowners control a fifth of Mumbai's habitable area - Times of India
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यदि देश में वेल्थ टेक्स आ जाता है तो अगले दिन ये लोग इन जमीनों पर फ्लेट बनाकर बेचने लगेंगे, और सप्लाई बढ़ने से जमीनों के दाम गिर जायेंगे। और यह स्थिति सिर्फ मुंबई की नहीं बल्कि पूरे देश की है !! तो वोट वापसी एवं जूरी सिस्टम जैसे क़ानून धन वापसी एवं वेल्थ टेक्स जैसे क़ानूनो का आना सुनिश्चित करते है, जो कि अर्थव्यवस्था, उत्पादन एवं तकनिकी विकास की रीढ़ है।
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देश के अन्य स्वतंत्र कार्यकर्ताओं की तरह मेरा भी मानना है कि जूरी सिस्टम , वोट वापसी, धन वापसी, वेल्थ टेक्स जैसे क़ानून किसी नेता की पूँछ पकड़ कर नहीं लाये जा सकते, बल्कि इसके लिए देश के कार्यकर्ताओ को जन आन्दोलन खड़ा करने के लिए प्रयास करना चाहिए। यदि भारत के कार्यकर्ता जन आन्दोलन खड़ा करने में कामयाब हो जाते है तो इन कानूनों को लाया जा सकता है। इन कानूनों के आने के 3–4 वर्षो के भीतर भारत तेजी से विकास करना शुरू करेगा और 10 वर्षो के भीतर खुद को इतना ताकतवर बना लेगा कि हम अमेरिका का मुकाबला कर सके।
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निचे जूरी सिस्टम, वोट वापसी क़ानूनो के सन्दर्भ में एक सामान्य जन आन्दोलन खड़ा करने की प्रक्रिया बतायी गयी है। ये विवरण बताते है कि एक आम भारतीय नागरिक होने के नाते आप इस तरह का जन आन्दोलन खड़ा करने के लिए क्या कदम उठा सकते है। दी गयी प्रक्रिया सभी प्रकार के विषयों पर जन आन्दोलन खड़ा करने के लिए भी वाजिब खाका बताती है। अगले खंड में जन आन्दोलन की बुनियादी प्रकृति के बारे में जानकारी है, और अंतिम खंड इसे खड़ा करने की प्रक्रिया बताता है।
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खंड - (ब)
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(A) जन आन्दोलन क्या है ?
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आन्दोलन एवं जन आन्दोलन में नेतृत्व का अंतर होता है। आन्दोलन के केंद्र में कोई न कोई नेता होता है, लेकिन जन आन्दोलन नेतृत्व विहीन होता है। यदि आन्दोलन में कोई नेता है तो इसे जन आन्दोलन नहीं कहा जा सकता। किन्तु समस्या यह है कि नेता विहीन आन्दोलन खड़ा नहीं किया जा सकता। नेता के अभाव में आन्दोलनकारी दिशा विहीन होकर विघटित हो जायेंगे। हमारा सुझाव है कि कार्यकर्ताओ को क़ानून ड्राफ्ट को अपना नेता बनाना चाहिए। यदि जूरी सिस्टम, वोट वापसी कानूनों के ड्राफ्ट उपलब्ध है तो इन लिखित ड्राफ्ट्स के नेतृत्व में जन आन्दोलन खड़ा करने के लिए काम शुरू किया जा सकता है।
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तो पहली आवश्यकता है - जूरी सिस्टम, वोट वापसी कानूनों के ड्राफ्ट, जिसके नेतृत्व में जन आन्दोलन खड़ा किया जाएगा। जो इन क़ानून ड्राफ्ट्स का समर्थन करेगा वह इस आन्दोलन में जुड़ता जायेगा और आन्दोलन आगे बढ़ना शुरू करेगा। यदि आप किसी अन्य मुद्दे पर जन आन्दोलन खड़ा करना चाहते है तो आपकोअमुक विषय के क़ानून ड्राफ्ट की जरूरत होगी। यदि आपने किसी व्यक्ति को नेता बनाकर आन्दोलन खड़ा करने की कोशिश की तो आन्दोलन का ट्रिगर नेता के हाथ में आ जायेगा, बाद में आन्दोलन को नष्ट करने के लिए नेता या तो बिक जायेगा, या दबा दिया जाएगा, या मार दिया जाएगा। उदाहरण - राष्ट्रबंधु राजिव भाई दीक्षित
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(B) ड्राफ्ट के नेता, यानी कि जूरी सिस्टम-वोट वापसी के ड्राफ्ट को जन जन तक पहुँचाना, ताकि नागरिक क़ानून ड्राफ्ट का समर्थन करना शुरू करें
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ड्राफ्ट को करोड़ो नागरिको तक पहुँचाने के दो रास्ते है -
(1) पेड मीडिया ,
(2) स्वयंसेवी स्वतंत्र कार्यकर्ता।
यदि आप जूरी सिस्टम, वोट वापसी जैसे कानूनो पर जन आन्दोलन खड़ा करना चाहते है तो पेड मीडिया आपका समर्थन नहीं करेगा। बल्कि आपकी मुख्य प्रतिद्वंदी पेड मीडिया ही रहेगा। अत: पेड मीडिया का रास्ता यहाँ बंद हो जाता है। यदि आपके पास पेड मीडिया नहीं है तो आपको आम नागरिको में से छोटे छोटे लाखों कार्यकर्ताओ(*) की जरूरत होगी, जो इस ड्राफ्ट की जानकारी जन जन तक पहुंचा कर आन्दोलन को आगे बढ़ाएंगे।
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(*) कार्यकर्ता या एक्टिविस्ट कौन है ? और भारत में कितने कार्यकर्ता है ?
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एक कार्यकर्ता वह व्यक्ति है जो भारत को मजबूत बनाने के लिए निस्वार्थ भाव से अपने धन और समय का एक अंश व्यय करने के लिए प्रतिबद्ध है , तथा बदले में उसका प्राथमिक लक्ष्य कोई ख्याति, धन , पद आदि प्राप्त करना नहीं है। मेरे अनुमान में भारत में कई लाख कार्यकर्ता है, लेकिन उनमे से सभी राईट टू रिकॉल, जूरी सिस्टम कानूनो का प्रचार नहीं करेंगे। लेकिन यदि कुछ 2 लाख कार्यकर्ता भी प्रति सप्ताह 4 घंटे का समय इन कानूनो के प्रचार में देते है, तो कुछ ही सप्ताह में पहला चरण पूरा हो जाएगा।
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बहुधा ये कार्यकर्ता राजनैतिक ख़बरों को फॉलो करते है, और देश को सुधारने के लिए अपने स्तर पर छोटे छोटे कदम उठाने के लिए तत्पर रहते है। ये कार्यकर्ता किसी राजनैतिक दल से सम्बद्ध भी हो सकते है, या स्वतंत्र भी हो सकते है। अमूमन सच्चे कार्यकर्ता स्वतंत्र होते है, और किसी नेता वगेरह के नियंत्रण में काम नही करते। हालांकि भारत के अधिकांश कार्यकर्ता ब्रांडेड नेताओं पर निर्भर बने हुए है।
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कार्यकर्ताओ को यह बात समझ लेनी चाहिए कि, आम नागरिको का जन आन्दोलन के शुरूआती चरणों में न्यूनतम सहयोग रहेगा। जैसे जैसे कार्यकर्ता बढ़ेंगे वैसे वैसे नागरिक इन क़ानून ड्राफ्ट्स का समर्थन करेंगे। और अंतिम चरण में वे आन्दोलन में अपनी भूमिका निभायेंगे। मतलब नागरिक इस आन्दोलन को आगे बढाने के लिए अपने श्रम, धन आदि से कोई सहयोग नहीं करेंगे। इसे आगे बढाने का काम कार्यकर्ताओ को ही करना होगा। किसी भी देश में लगभग 98% नागरिक ही होते है, और इनसे कार्यकर्ताओ को बेहद कम उम्मीद रखनी चाहिए। किन्तु ये 2 लाख कार्यकर्ता भारत के 90 करोड़ नागरिको में बिखरे हुए है, अत: इन्हें ढूँढने के लिए कार्यकर्ताओ को सभी 90 करोड़ नागरिको तक पहुंचना होगा।
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तो दूसरी आवश्यकता है - ऐसे लाखों कार्यकर्ता जो जूरी सिस्टम-वोट वापसी क़ानून ड्राफ्ट के नेतृत्व में आन्दोलन खड़ा करने के लिए प्रयास करने को तैयार हो।
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(C) जन आन्दोलन खड़ा करने के लिए तीसरी जरूरत प्रेरणा की है। इसके लिए हमारा सुझाव है कि यदि कार्यकर्ता जूरी सिस्टम, वोट वापसी, धन वापसी और वेल्थ टेक्स आदि कानूनों को लाने के लिए जन आन्दोलन खड़ा करना चाहते है तो उन्हें अनिवार्य रूप से अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी(*) को अपना प्रेरणा स्त्रोत बनाना चाहिए। इस तरह के क़ानून उधम सिंह जी की सहयोग बिना किसी भी तरह से नहीं लाये जा सकते।
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महात्मा उधम सिंह जी लोकतंत्र के रक्षक है। जन आन्दोलन का औचित्य सिर्फ तब पूरा होता है जब कुल नागरिको के 51% नागरिक इस आन्दोलन का समर्थन करे। यदि जन आन्दोलन जूरी सिस्टम, वोट वापसी कानूनों के पक्ष में बहुमत सिद्ध कर देता है, तो आन्दोलन की बाधाओं को दूर करने के लिए अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी सक्रीय हो जायेंगे। यदि आन्दोलन बहुमत साबित नही कर पाता है तो उधम सिंह जी सक्रीय नही होंगे और आन्दोलन असफल हो जाएगा।
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(*) अंहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से क्या आशय है ?
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उधम सिंह जी लोकतंत्र के रक्षक है। जब जब सत्ता बहुमत की अवहेलना करती है, तब तब उधम सिंह जी सक्रीय होकर जनता के प्रतिनिधि बनकर सत्ताधीशो से मुलाकात करके उन्हें जनता की इच्छा से अवगत कराते है। उधम सिंह जी सही-गलत में नहीं मानते। वे सिर्फ बहुमत में मानते है। अहिंसामूर्ती महात्मा भगत सिंह जी, अहिंसा मूर्ती राष्ट्रपिता महात्मा सुभाष चन्द्र बोस आदि उधम सिंह जी के ही अंश है। उधम सिंह जी का अंश किसी भी व्यक्ति में हो सकता है। यदि जनता का बहुमत सत्ता से कोई मांग करता है, किन्तु सत्ता स्पष्ट रूप से इसकी अवहेलना करती है, तो कार्यकर्ताओ में मौजूद उधम सिंह जी का अंश सक्रीय हो जाता है।
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तो तीसरी और आखिरी जरूरत यह है कि - आन्दोलनकारी कार्यकर्ता अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी से प्रेरणा ले।
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पाठक कृपया इस बात को नोट करे कि एक जन आन्दोलन खड़ा होने में दशको एवं सदियाँ भी लग सकती है। ब्रिटिश 1050 में जूरी सिस्टम से इंट्रोड्यूस हुए और वहां के कार्यकर्ताओ को जूरी सिस्टम गेजेट में छपवाने ( मैग्नाकार्टा ) में 200 वर्ष लगे। इसी तरह अमेरिका में जूरी सिस्टम एवं स्वतंत्रता आन्दोलन ने खड़े होने में 3 दशक लिए। आचार्य चाणक्य में निर्देशन में चलाये जाने वाले आन्दोलन को जन आन्दोलन की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। क्योंकि आचार्य इसे लीड कर रहे थे। यदि चाणक्य आन्दोलन से बाहर हो जाते तो ज्यादातर सम्भावना थी कि धनानंद का तख्ता नहीं पलटा जा सकता था।
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मोहन के नेतृत्व में चलाया गया फ्रीडम मूवमेंट न तो आन्दोलन था, और न ही जन आन्दोलन। यह एक ड्रामा था। आन्दोलन का स्विच मोहन के हाथ में था। वे जब चाहते तब आन्दोलन को ट्रिगर करते थे और जब चाहते आन्दोलन को वापिस ले लेते थे !! द अन्ना के नेतृत्व में चलाया गया जनलोकपाल का हाईटेक ड्रामा भी जन आन्दोलन नहीं था। पेड मीडिया का इस पर पूरी तरह से नियंत्रण था। 1857 के विद्रोह की शुरुआत महात्मा मंगल पांडे ने की थी, लेकिन बाद में इस पर उनका कोई नियंत्रण नहीं रह गया था। हालांकि नागरिको के बहुमत का इसे समर्थन हासिल था, लेकिन यह समर्थन निष्क्रिय श्रेणी का था। दरअसल यह आन्दोलन न होकर एक क्रान्ति थी। टेलीग्राम का अविष्कार हो जाने एवं क्रांतिकारियों के कारतूस समाप्त होने जाने के कारण यह असफल रहा।
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1977 में जन आन्दोलन के कारण ही श्रीमति इंदिरा गांधी जी को इमरजेंसी समाप्त करनी पड़ी थी। उन्होंने यह ताड़ लिया था कि जनता का बहुमत आपातकाल को हटाये जाने के पक्ष में है, और यदि उन्होंने चुनाव नहीं करवाए तो किसी भी समय अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह जी सक्रीय होकर संजय गाँधी से मुलाक़ात कर सकते है !! बहरहाल, उनका चुनाव कराने का उनका फैसला सही था और नतीजो में यह बात साबित भी हुयी कि बहुमत उनके साथ नहीं था।
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खंड - (स)
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इस खंड में वे चरण दिए गए है जिन्हें उठाकर " जूरी सिस्टम, वोट वापसी, धन वापसी आदि क़ानून ड्राफ्ट्स के नेतृत्व में अहिंसा मूर्ती महात्मा उधम सिंह केन्द्रित, कार्यकर्ता निर्देशित जन आन्दोलन "खड़ा किया जा सकता है।
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देश के सभी स्वतंत्र कार्यकर्ताओं — भारत को अमेरिका जितना शक्तिशाली बनाने के लिए आपको कौनसे कार्यो को सफलता पूर्वक करना होगा, और इन कार्यो को पूरा करने के दौरान आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा ? और किस तरह से भारत के कार्यकर्ता इन विहंगम कार्यो को पूरा करने के लिए पर्याप्त नागरिक / कार्यकर्ता / इंजीनियर्स और पर्याप्त धन जुटा सकते है ?
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अध्याय, और किये जाने वाले कार्यो कि सूची :
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00. परिचय
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01. पहला काम : कम से कम 543 एक्टिविस्ट्स को लोकसभा, 5000 एक्टिविस्ट्स को विधानसभा और लगभग 200,000 एक्टिविस्ट्स को स्थानीय निकायो के चुनाव लड़ने के लिए तैयार करना।
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02. दूसरा काम : 75 करोड़ नागरिको को ज्यूरी सिस्टम, धन वापसी, वोट वापसी आदि क़ानून ड्राफ्ट के बारे में "सूचित" करना ; कृपया इस बात पर विशेष ध्यान दें कि यह जानकारी अनिवार्य रूप से कार्यकर्ताओं द्वारा ही पहुंचाई जानी चाहिए, पेड मिडिया द्वारा नही। यदि यह जानकारी पेड मीडिया के माध्यम से दी जाती है तो वे आन्दोलन में किसी न किसी नेता को खड़ा कर देंगे, और फिर नेता को गिरा कर आन्दोलन भी गिरा देंगे।
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03. तीसरा काम : 45 करोड़ नागरिको को राजी करना कि वे प्रधानमंत्री को चिट्ठी भेजकर इन कानूनों को गेजेट में छापने का आदेश दें।
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04. चौथा काम : 45 करोड़ नागरिको के संज्ञान में यह बात लेकर आना कि (a) 45 करोड़ नागरिक अपने प्रधानमंत्री को चिट्ठी भेज चुके है , (b) तथा 45 करोड़ नागरिकों को यह भी जानकारी होना कि 45 करोड़ नागरिको द्वारा चिट्ठी भेजी जा चुकी है , (c) दुसरे शब्दों में, वोट वापसी, धन वापसी, जूरी सिस्टम कानून ड्राफ्ट्स और चिट्ठी भेजे जाने कि जानकारी "कॉमन नॉलेज" में लेकर आना !!
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05. पांचवा काम : ( पहले से चौथे तक चरण पूरे होने के बावजूद यदि सांसद और प्रधानमंत्री राईट टू रिकॉल जूरी सिस्टम कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करने से मना कर दे तो ) -- 45 करोड़ नागरिको को तैयार करना कि वे अपने सांसदों को इस्तीफा देने का आदेश देने के लिए चिट्ठी भेजे।
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06. छठा काम : 45 करोड़ नागरिको को उन उम्मीदवारों को वोट देने के लिए तैयार करना जिन्होंने जूरी सिस्टम, धन वापसी के क़ानून ड्राफ्ट को अपने एजेंडे में शामिल किया है।
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07. सातवाँ काम : उस परिस्थिति का सामना करना जब जूरी सिस्टम, वोट वापसी ड्राफ्ट के मुद्दों पर जीतकर जाने वाले सांसद इन कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करने से मना कर दे।
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08. आठवां काम : सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश द्वारा इन कानूनो को खारिज कर दिए जाने के हालात का सामना करना।
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09. नवां काम : उस स्थिति से निपटना, जब प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी , रिजर्व बैंक अधिकारी, सार्वजनिक उपक्रमों के अधिकारी आदि जूरी सिस्टम, वोट वापसी का विरोध करें और इन्हे रोकने के लिए लिए गड़बड़ी फैलाये।
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10. दसंवा अतिरिक्त काम : अमेरिका / चीन द्वारा खुले / छिपे हुए सशस्त्र हमलो, आर्थिक और मौद्रिक प्रतिरोधों का सामना करना।
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11. ग्यारवाँ काम : इन कार्यों को पूरा करने के लिए किस तरह हम लाखों-करोड़ो कार्यकर्ता, नागरिक, इंजीनियर्स और जरुरी कौशल, प्रशिक्षण और योग्यता जुटा सकते है ? और किस तरह हम इन कार्यो को पूरा करने के लिए धन जुटा सकते है।
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12. बारहवां काम : क्यों जहां तक हो सके इनमे से ज्यादातर कार्यो को समानांतर रूप से एक साथ किया जाना चाहिए, न कि क्रमिक रूप से।
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13. तेरहवां काम : क्या भारत को ताकतवर बनाने का अन्य कोई शार्ट कट है ? जिससे इस भारी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया से बचा जान सके ?
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14. सारांश
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00. परिचय
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कई कार्यकर्ता हम रिकालिस्ट्स से पूछते है की -- भारत को अमेरिका जितना ताकतवर बनाने के लिए हमें कौन से कार्य करने होंगे ? इस जवाब में उन सभी कार्यो और चरणो को सूचीबद्ध किया गया है, जिनका पालन भारत के कार्यकर्ता कर सकते है।
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01. पहला काम : कम से कम 543 एक्टिविस्ट्स को लोकसभा, 5000 एक्टिविस्ट्स को विधानसभा और लगभग 200,000 एक्टिविस्ट्स को स्थानीय निकायो के चुनाव लड़ने के लिए तैयार करना।
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हम एक जन आंदोलन खड़ा करने पर काम कर रहे है , ताकि वर्तमान या नए सांसदों को जूरी सिस्टम, धन वापसी कानूनो को लागू करने के लिए बाध्य किया जा सके। इसीलिए हमें 543 लोकसभा और 5000 विधानसभा उम्मीदवारों की आवश्यकता होगी, जो चुनावो में भाग ले सके। तो चुनाव लड़ना क्यों जरुरी है ? आखिर क्यों रिकालिस्ट्स चुनावो में भाग लिए बिना इन कानूनो को लागू करवाने में असफल रहेंगे ?
(a) मान लीजिये कि रिकालिस्ट्स देश के सभी एक्टिविस्ट्स को इन कानूनो के बारे में जानकारियाँ देते है, और 2 लाख एक्टिविस्ट्स को रिकालिस्ट्स में बदल देते है।
(b) मान लीजिये कि ये लाखों एक्टिविस्ट्स 70 करोड़ नागरिको को इन कानूनो के बारे में जानकारी दे देते है।
(c) और मान लीजिये कि उनमे से 45 करोड़ नागरिक अपने सांसदों एवं प्रधानमंत्री को चिट्ठी द्वारा आदेश भेज देते है कि इन कानूनो को गैजेट में प्रकाशित किया जाए।
(d) और 70 करोड़ नागरिको को भी यह जानकारी हो जाती है कि चिट्ठी द्वारा आदेश भेजे जा चुके है।
(e) और मान लीजिये कि सांसद इन कानूनो को गैजेट में प्रकाशित करने से इंकार कर देते है।
तो ऐसी स्थिति में क्या अहिंसा मूर्ती महात्मा ऊधम सिंह जी सांसदों से मुलाक़ात करेंगे ? नही। क्योंकि मतदाताओ ने सांसदों को इस्तीफा देने के लिए चिट्ठी नही भेजी है, और सभी सांसदों ने चुनावों से पहले ही इन कानूनो को लागू करने से इंकार कर दिया था। अत: उन पर इन कानूनो को लागू करने और इस्तीफा देने की कोई नैतिक बाध्यता नही है, और इसीलिए ऊधम सिंह जी सांसदों से मुलाक़ात नही करेंगे !!
(f) अब मान लीजिये कि 45 करोड़ मतदाता अपने सांसदों को 'इस्तीफा' देने के लिए चिट्ठी भेजते है।
(g) और यदि वोट वापसी कार्यकर्ता यह साफ़ कर देते है कि वे चुनावो में 'भाग' नही लेने वाले है। मैं इसे फिर से दोहराता हूँ - यदि रिकालिस्ट्स यह घोषणा करते है कि वे 'चुनावी प्रक्रियाओ में हिस्सा "नही" लेने वाले है'।
तब अहिंसा मूर्ती महात्मा ऊधम सिंह जी यह निष्कर्ष निकालेंगे कि —
सांसदों से मेरी मुलाक़ात का देश को क्या लाभ होगा ? क्योंकि यदि फिर से चुनाव हो भी जाते है, तो भी फिर से वही उम्मीदवार संसद में पहुँच जायेंगे जो इन कानूनो के खिलाफ है, क्योंकि इन कानूनो के समर्थक रिकालिस्ट्स ने चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया है ।
अत: ऊधम सिंह जी सांसदों से न मिलने का फैसला करेंगे !!
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तो इस स्थिति में सांसद यही सोचेंगे कि ऊधम सिंह जी उनसे मिलने नही आने वाले है। वे यह भी सोचेंगे कि एक तो ऊधम सिंह जी हमसे मिलने आने वाले नही है , और दूसरे, कोई भी कार्यकर्ता चुनाव लड़ने को भी तैयार नही है , इसीलिए राईट टू रिकॉल कानूनो को गैजेट में प्रकाशित न करने से हमे कोई नुकसान नही होने वाला, लेकिन यदि हम इन कानूनो को लागू कर देते है तो हमारे प्रायोजक और धनिक वर्ग हमसे नाराज हो जाएगा। इसीलिए इन कानूनो का विरोध करने में ही मेरा फायदा है। और नुकसान तो कोई है ही नही।
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और इसका मतदाताओ पर भी उल्टा असर होगा। मान लीजिये कि 45 करोड़ नागरिक इन कानूनो को लागू करने के लिए चिट्ठी द्वारा आदेश भेज चुके है, लेकिन सांसदों ने इन कानूनो को लागू करने से मना कर दिया है। तब मतदाता इस असमंजस का शिकार हो जाएगा कि, —
क्या मुझे सांसद को इस्तीफा देने के लिए चिट्ठी भेजनी चाहिए कि नही ? चूंकि जूरी सिस्टम का कोई भी कार्यकर्ता चुनाव लड़ने को तैयार नही है, अत: मौजूदा सांसद से इस्तीफा मांगने में कोई लाभ नही है। क्योंकि कोई भी कार्यकर्ता इन मुद्दो पर चुनाव लड़ने को तैयार नही है, अत: यदि सभी सांसद इस्तीफा दे भी देते है, और फिर से चुनाव होते है तो भी फिर से वे ही उम्मीदवार संसद में पहुंचेंगे जो वोट वापसी कानूनो का विरोध कर रहे है। अत: बेहतर यही है कि मौजूदा सांसदों को इस्तीफा देने के लिए आदेश न भेजा जाए !!
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और इस कारण शायद कुछ मतदाता ( कुछ, न कि सभी ) सांसद को इन कानूनो को लागू करवाने का आदेश न भेजने का भी फैसला ले सकते है !!! कई मतदाता यह सोच सकते है कि, मौजूदा सांसदों ने चुनावो से पहले ही यह बात स्पष्ट कर दी थी कि, वे जूरी सिस्टम कानूनो को लागू करने वाले नही है। और सांसद जानते है कि मैं उन्हें इस्तीफा देने के लिए नही कह सकता, क्योंकि कोई भी रिकालिस्ट जूरी सिस्टम कानूनो के समर्थन में चुनाव लड़ने को तैयार नही है। अत: यदि मैं सांसद को चिट्ठी द्वारा आदेश भेज भी देता हूँ, तो सांसद इन कानूनो को लागू करने से साफ़ इंकार कर देंगे। अत: ये मामला अब यहीं ख़त्म हो चुका है।
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तब रिकालिस्ट्स के सामने प्रश्न यह है कि — क्या हमारे पास ऐसे कार्यकर्ता उपलब्ध है जो कि सांसद बन कर वोट वापसी, धन वापसी कानूनों को लागू करने की मंशा रखते हो ?
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यदि कार्यकर्ताओ के पास ऐसे उम्मीदवार नहीं है तो जूरी सिस्टम, वोट वापसी क़ानून ड्राफ्ट्स बिना शरीर की आत्मा की तरह होंगे , तथा ऐसे अमूर्त विचार का राजनीति और वास्तविक जीवन में कोई महत्त्व नहीं होगा।
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कोई क़ानून ड्राफ्ट सिर्फ तभी अच्छा क़ानून ड्राफ्ट कहा जा सकता है जबकि ऐसा ड्राफ्ट 45 करोड़ नागरिको और 2 लाख कार्यकर्ताओ का समर्थन जुटा सके , और साथ ही यह प्रस्तावित ड्राफ्ट इतना प्रभावी हो कि 543 कार्यकर्ता इन कानूनो को लागू करवाने का उद्देश्य लेकर चुनाव लड़े। ताकि संसद में जाकर इन्हे लागू किया जा सके। अन्यथा ऐसे कानून ड्राफ्ट्स का प्रचार करना सिर्फ समय की बर्बादी है।
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इसलिए हमें पूरे देश में चुनाव लड़ने के लिए 543 लोकसभा उम्मीदवारों और 5000 विधानसभा प्रत्याशियों की आवश्यकता होगी। और बाद में हमें लगभग 2 लाख ऐसे कार्यकर्ताओ की भी जरुरत होगी जो कि स्थानीय निकाय के चुनावो में भाग ले सके।
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इसीलिए चुनावो में भाग लेना बेहद जरुरी है , और जल्दी से जल्दी रिकालिस्ट्स को इस दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए।
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हम चुनाव लड़े बिना आगे नहीं बढ़ सकते। क्योंकि ज्यादातर मतदाता हमारी बात सिर्फ तब ही सुनेंगे जब हमारे पास चुनावो में उतरने के लिए पर्याप्त प्रत्याशी हो। वरना हमें मतदाताओ से यह सुनने को मिलेगा कि —
आप लोगो द्वारा प्रस्तावित ड्राफ्ट्स बेशक अच्छे हो सकते है। लेकिन आप के ड्राफ्ट्स यदि 543 कार्यकर्ताओ को भी चुनाव लड़ने और सांसद बनने के लिए प्रेरित नहीं कर सकते तो इन ड्राफ्ट्स की अच्छाई संदेहास्पद है !!!
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तो इस प्रकार 543 रिकालिस्ट्स को लोकसभा और 5000 रिकालिस्ट्स को विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए तैयार करना सबसे पहला काम है। क्योंकि सबसे पहले कार्यकर्ताओ को इन कानूनो पर अपना भरोसा दिखाना होगा , सिर्फ तब ही मतदाता इन क़ानून ड्राफ्ट्स को पढ़ने, समझने और अपने सांसदों एवं पीएम को चिट्ठी, ट्विटर द्वारा आदेश भेजने के लिए राजी होंगे।
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चुनाव न लड़ने के फैसले पर टिके रहना हमें सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचायेगा। क्योंकि जब तक बड़ी संख्या में रिकालिस्ट्स चुनाव नही लड़ेंगे, धन वापसी, वोट वापसी कानूनो के समर्थको की संख्या नही बढ़ेगी। जूरी सिस्टम क़ानून ड्राफ्ट्स को अपने एजेंडे में शामिल करके सबसे पहले 2009 में एक रिकालिस्ट ने चुनाव लड़ा था। 2015 तक इस संख्या में कोई इजाफा नहीं हुआ। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनावों में 15 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा। किन्तु तब भी 545 सीटो के हिसाब से यह संख्या 3% ही है !! कार्यकर्ता इस बात को नोट करें कि उन्हें इसके लिए किसी राजनैतिक पार्टी के भरोसे पर रहने की जरूरत नहीं है। वे निर्दलीय भी चुनाव लड़ सकते है।
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02. दूसरा काम : 75 करोड़ नागरिको को ज्यूरी सिस्टम, वोट वापसी आदि क़ानून ड्राफ्ट के बारे में ‘सूचित’ करना ; यह जानकारी अनिवार्य रूप से कार्यकर्ताओं द्वारा ही पहुंचाई जानी चाहिए, पेड मिडिया द्वारा नही ।
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रिकालिस्ट्स को दूसरा काम यह करना होगा कि वे भारत के 70 करोड़ नागरिको को वोट वापसी, ज्यूरी सिस्टम आदि क़ानून ड्राफ्ट्स की जानकारी दें। इसके लिए हमें 70 करोड़ पेम्फ्लेट, करोडो पुस्तिकाएं और करोड़ो डीवीडी तैयार करके उनका वितरण करना होगा !! या हमें नागरिको को इस बात के लिए तैयार करना होगा कि वे इन पुस्तिकाओं और डीवीडी को दुकानो से ख़रीदकर पढ़ें और देखें। पर्चो की छपाई और डीवीडी के वितरण का अनुमानित व्यय प्रति नागरिक लगभग 400 रू के हिसाब से हमें अनुमानित 28 हजार करोड़ रूपयो की आवश्यकता होगी।
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अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि - किस तरह एक्टिविस्ट्स 70 करोड़ नागरिको को इन पर्चो को पढ़ने और डीवीडी को सुनने के लिए राजी कर पाएंगे ?
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नागरिक इन पर्चो को तब ही पढ़ने में रुचि दिखाएँगे जब ;
(a) पेड मिडिया इन कानूनो की प्रशंषा करे
(b) कार्यकर्ता अपने परिचित नागरिको को इन्हें पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करें।
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पेड मिडिया का विकल्प हमारे लिए हमेशा के बंद है। इसीलिए हमारे पास सिर्फ यही तरीका शेष है कि, कार्यकर्ता अपने परिचित नागरिको से इन कानूनी ड्राफ्ट्स को पढ़ने का आग्रह करे। एक कार्यकर्ता लगभग 1000 नागरिको को ड्राफ्ट्स पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकता है, अत: हमें कम से कम 70 करोड़ / 10 / 1000 = 70 हजार कार्यकर्ताओ को आवश्यकता होगी। चूंकि कई नागरिक एक से अधिक कार्यकर्ताओ के संपर्क में आयेंगे और सूचनाओ का दोहराव होगा, अत: आकलन में सटीकता बनाये रखने के लिए हमें तीन गुना अधिक कार्यकर्ताओ की गणना करनी चाहिए। इस हिसाब से 70 करोड़ नागरिको को इन कानूनी ड्राफ्ट्स की सूचना पहुंचाँने के लिए कम से कम 2 लाख कार्यकर्ताओ की आवश्यकता होगी।
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क़ानून ड्राफ्ट्स की जानकारी अनिवार्य रूप से कार्यकर्ताओ द्वारा ही पहुंचाई जानी चाहिए, न कि पेड मिडिया द्वारा। क्योंकि पेड मिडिया द्वारा सूचित नागरिक एक दायित्व है न कि एक सम्पति, अत: तब कार्यकर्ताओ को नागरिको से जुड़े रहने के लिए हमेशा पेड मिडिया पर निर्भर रहना पड़ेगा। लेकिन यदि नागरिक कार्यकर्ताओ से जुड़े हुए है तो मिडिया को भुगतान किये बिना भी कार्यकर्ता नागरिको से जुड़े हुए रह सकते है। इसीलिए यह बहुत जरूरी है कि, नागरिक यह सूचनाए पेड मिडिया की जगह कार्यकर्ताओ द्वारा प्राप्त करे।
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इस समय कुछ 100-200 कार्यकर्ता है जो कि पूरे देश में फैले हुए है, और इन कानूनो का प्रचार नागरिको में कर रहे है। इसलिए रिकालिस्ट्स को ज्यादा से ज्यादा कार्यकर्ताओ को रिकालिस्ट्स में बदलने के लिए प्रयास करने चाहिए। तो यदि वोट वापसी कार्यकर्ता 2 लाख कार्यकर्ताओ को रिकालिस्ट्स में बदलने में असफल रहते है तो क्या होगा ? ऐसी स्थिति में, रिकालिस्ट्स खेल से बाहर हो जाएंगे।
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कोई यह प्रश्न पूछ सकता है कि - किस आधार पर 2 लाख कार्यकर्ताओ की आवश्यकता बतायी गयी है। असल में यह एक मोटा अनुमान है। मतलब यह है कि, निश्चय ही इसके लिए न तो कुछ हजार कार्यकर्ताओ की आवश्यकता है, न ही करोड़ो कार्यकर्ताओ की। जो बात समझना जरुरी है वह यह है कि - कार्यकर्ताओ की संख्या पर्याप्त रूप से इतनी होनी चाहिए कि, कोई रिकालिस्ट 1% से अधिक रिकालिस्ट्स से परिचित हुए बिना और आपसी संपर्क के अभाव के बावजूद अपना काम जारी रखें और बिना किसी सम्प्रेषण के आंदोलन आगे बढ़ता रहे।
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अध्याय - 2 का सार यह है कि : पहला काम यह है कि कार्यकर्ताओ द्वारा 70 करोड़ नागरिको को इन कानून ड्राफ्ट्स के बारे में सूचित किया जाए तथा ऐसा करने के लिए निम्नलिखित प्रक्रियाओ का पालन किया जाए :
(2a) लाखो कार्यकर्ताओ तक अपनी पहुँच बनायी जाए।
(2b) लगभग 2 लाख कार्यकर्ताओ को रिकालिस्ट्स में बदला जाए - मतलब कार्यकर्ताओ को इस बात के लिए राजी किया जाए कि वे अपने धन से जूरी सिस्टम, धन वापसी, वोट वापसी आदि कानूनो के पर्चे छपवायें, डीवीडी बनाकर वितरण करें और सभाएं आयोजित करके नागरिको को इन कानूनो के बारे में जानकारी दे।
(3c) तथा नागरिको को इन ड्राफ्ट्स को पढ़ने के लिए तैयार क
Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
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Raju kumar Chaudhary
अप्सराहरुको गाथा
नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।
इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।
रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।
इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"
जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।
उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।
दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"
फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।
विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।
उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।
उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।
अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा,
यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्!
अप्सराहरुको गाथा
(महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा)
नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।
इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।
रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।
इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"
जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।
उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।
दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"
फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।
विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।
उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।
उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।
मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्,
जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए।
प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्,
हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि।
दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्,
शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्।
गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ,
अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।"
तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्,
शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्।
आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्,
विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ।
शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्,
सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।
अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।
अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।
रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ।
अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा,
तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग।
"प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ,"
यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ।
स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल,
अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ।
सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्,
नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्।
घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती,
सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं।
समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी,
इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्।
उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर,
आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल।
रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्,
सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा।
इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची,"
तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ।
ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्,
घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ।
गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन,
तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने।
घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा,
वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए।
उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्,
तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता।
द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु,
घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो।
"म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर,
"सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।"
तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा,
देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद।
कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा,
सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया।
तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए,
"तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए।
छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए,
तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो।
पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए,
कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने।
घृताचीको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ।
श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ,
अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो।
घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्।
मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ।
Raju kumar Chaudhary
अप्सराहरुको गाथा
नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।
इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।
रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।
इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"
जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।
उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।
दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"
फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।
विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।
उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।
उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।
अप्सराहरु स्वर्गमा नाच्छन् आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको कथा बाँकी छ,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको गाथा,
यो महाकाव्य तपाईंको कलमबाट पूर्ण होस्!
अप्सराहरुको गाथा
(महाकाव्य अप्सराहरुको दिव्य गाथा र परीक्षा)
नमस्कार सरस्वती मातालाई,
शब्दको जादु दिनुहोस् मलाई।
स्वर्गको नन्दन वनमा फुल्छ फूल,
अप्सराहरु नाच्छन्, गाउँछन् कुल।
इन्द्रको दरबार चम्किलो सुनौलो,
अमृतको धारा बग्छ अनन्त बहुलो।
त्यहाँ रम्भा, मेनका, उर्वशी सुन्दरी,
प्रत्येकको रूपले मोहित तीनै लोक धरी।
रम्भा अप्सराकी रानी, नृत्यकी देवी,
तनमा लहराउँछ अम्लान यौवन लीला।
मेनका बुद्धिमान्, प्रेमकी कला,
उर्वशी दिव्य, उरुबाट जन्मेकी जादुकी बाला।
इन्द्र हाँस्छन्, तर डराउँछन् मनमा,
तपस्वीहरुको तेजले सिंहासन हल्लिन्छ धरना।
"अप्सराहरु पठाऊ, भंग गर तप,"
भन्छन् इन्द्र, "रक्षा गर मेरो पद र तप।"
जङ्गल गहन, विश्वामित्र ध्यानमा लीन,
तपको ज्वाला जल्छ आकाश छुने।
मेनका आइन्, फूलको माला गाँसेर,
वसन्त बोकेर, हावा सुगन्धित बनाएर।
उनको नृत्यमा थिरकिन्छ पात,
आँखामा मोह, ओठमा मिठासको बात।
विश्वामित्र आँखा खोल्छन्, मोहित हुन्छन्,
तप भंग हुन्छ, प्रेमको आगो बल्छन्।
दश वर्ष सँगै, शकुन्तला जन्मिन्,
मेनका स्वर्ग फर्किन्, आँसु बोकेर।
"प्रेम क्षणिक छ, तर सन्तान अमर,"
भन्छिन् मेनका, "यो गाथा बाँकी छ अझै धेर।"
फेरि इन्द्र डराउँछन्, रम्भालाई बोलाउँछन्,
"भंग गर तप, यो पटक सफल बनाऊ।"
रम्भा जाँदै, कोइली गाउँदै साथमा,
नाच्छिन्, गाउँछिन्, मोहित बनाउने बातमा।
विश्वामित्र बुझ्छन्, क्रोध उर्लिन्छ,
"तिमी ढुङ्गा बन, दश हजार वर्षसम्म!"
रम्भा शिला बन्छिन्, आँसु ढुङ्गामा,
तर यो क्रोधले नै विश्वामित्रलाई उच्च बनाउँछ धरना।
उर्वशी आउँछिन् अन्तिम परीक्षामा,
पुरुरवास राजासँग प्रेमको कथा बुन्छिन्।
सर्तहरू राख्छिन्, भेडा रक्षा, नाङ्गो नदेख्ने,
तर प्रेमले सीमा तोड्छ, विरहले जलाउँछ हृदय।
उर्वशी फर्किन्छिन्, पुरुरवास रोइरहन्छन्,
"प्रेम दिव्य छ, तर नियमले बाँध्छ।"
अप्सराहरुको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित, परीक्षाले सिकाउँछ।
मेनकाको गर्भबाट शकुन्तला जन्मिन्,
जङ्गलमा छोडिन्, कान्व ऋषिले पाए।
प्रकृति साथी बनी, फूलले सजाइन्,
हिरण खेल्छन्, चरा गाउँछन् उनको लागि।
दुष्यन्त राजा शिकारमा आउँछन्,
शकुन्तलाको रूपमा मोहित हुन्छन्।
गान्धर्व विवाह, प्रेमको बन्धन बन्छ,
अङ्गूठी दिएर प्रतिज्ञा गर्छन्, "फर्किन्छु म।"
तर दुर्वासाको श्रापले दुष्यन्त भुल्छन्,
शकुन्तला दरबार पुग्छिन्, अपमान भोग्छिन्।
आँसु बहाउँदै, मेनका लगेर स्वर्ग लैजान्छिन्,
विरहको पीडा, अप्सराको गाथा बढाउँछ।
शकुन्तला स्वर्गमा, पुत्र भरत जन्माउँछिन्,
सिंहसँग खेल्ने, वीर बालक बन्छ।
दुष्यन्त इन्द्रको युद्धमा मद्दत गर्छन्,
भरतलाई देखेर, सम्झना फर्किन्छन्।
अङ्गूठी फेला पर्छ, माछाबाट उद्धार,
दुष्यन्त रोइरहन्छन्, पश्चातापमा डुबेर।
मिलन हुन्छ स्वर्गमा, परिवार पूरा हुन्छ,
भरत भारतवर्षको राजा बन्छ, अमर हुन्छ।
अप्सराको प्रेमले सन्तान दिन्छ,
परीक्षाले सिकाउँछ, जीवनको रहस्य खोल्छ।
मेनका, रम्भा, उर्वशीको कथा,
मानव र दिव्य बीचको पुल बन्छ।
रम्भा मुक्त हुन्छिन्, श्वेत ऋषिको कृपाले,
ढुङ्गाबाट फर्किन्, स्वर्गको नृत्यमा।
उर्वशी पुरुरवाससँग छोटो मिलन गर्छिन्,
तर नियमले बाँध्छ, विरहले सिकाउँछ।
अप्सराहरु नाच्छन् इन्द्रको दरबारमा,
तर हृदयमा बोक्छन् प्रेमको दाग।
"प्रेमले मोहित गर्छ, तपले मुक्त गर्छ,"
यो गाथाले सिकाउँछ, जीवनको सत्य खोल्छ।
स्वर्ग र पृथ्वी बीचको यो पुल,
अप्सराहरुको गाथा अमर रहन्छ।
सरस्वतीको कृपाले यो महाकाव्य पूर्ण होस्,
नेपाली साहित्यमा नयाँ ज्योति फैलाओस्।
घृताची नामकी अप्सरा, घिउले भरिएकी जस्ती,
सौन्दर्यको ज्योति, स्वर्गमा चम्किन्छिन् सधैं।
समुद्र मन्थनबाट जन्मेकी, अमृतसँगै उभिएकी,
इन्द्रको दरबारमा नाच्छिन्, देवताहरू मोहित हुन्छन्।
उनको रूपमा लहराउँछ यौवनको लहर,
आँखामा जादु, ओठमा मधुर हाँसोको फूल।
रम्भा रानी भए पनि, घृताची बलियो छिन्,
सयौं सन्तानकी आमा, प्रेमकी अमर कथा।
इन्द्र बोलाउँछन् फेरि, "तप भंग गर घृताची,"
तर यो पटक उनको हृदयमा प्रेमको आगो बल्छ।
ऋषिहरू मोहित हुन्छन्, राजाहरू लठ्ठिन्छन्,
घृताचीको स्पर्शले जीवन फेरिन्छ, भाग्य बदलिन्छ।
गंगा किनारमा भरद्वाज ध्यानमा लीन,
तपको ज्योति जल्छ, आकाश छुने।
घृताची आइन्, स्नान गर्दै सुन्दर रूपमा,
वायुले वस्त्र उडायो, भरद्वाज मोहित भए।
उनको तेजबाट बीज खस्यो, घृताची डराइन्,
तर त्यो बीजबाट द्रोण जन्मिए, शस्त्रास्त्रका ज्ञाता।
द्रोणाचार्य बने, महाभारतको योद्धा गुरु,
घृताचीको प्रेमले इतिहास लेखियो, अमर भयो।
"म मात्र माध्यम हुँ," भन्छिन् घृताची स्वर्ग फर्केर,
"सन्तानले अमरता दिन्छ, प्रेमले जीवन फेरिन्छ।"
तर विरहको पीडा बोकेर, उनी नाच्छिन् दरबारमा,
देवताहरूको लागि, तर हृदयमा सधैं मानवको याद।
कुशनाभ राजा मोहित भए घृताचीको रूपमा,
सयौं छोरी जन्मिए, सुन्दर र बलिया।
तर वायु देवले मोहित भएर छोरीहरूलाई श्राप दिए,
"तिमीहरू विकृत भएर बाँच," भन्दै क्रोधित भए।
छोरीहरू रोए, कुशनाभ दुःखी भए,
तर घृताचीको प्रभावले वंश चल्यो।
पछि ऋषिको कृपाले मुक्ति पाए,
कुशनाभका छोरीहरूबाट गाधि जन्मिए, विश्वामित्रका पिता बने।
घृताचीको गाथा यस्तै छ,
सौन्दर्यले मोहित गर्छ, सन्तानले अमर बनाउँछ।
श्राप आउँछ, तर मुक्ति पनि मिल्छ,
अप्सराको जीवन परीक्षा र प्रेमको पुल हो।
घृताची नाच्छिन् स्वर्गमा आज पनि,
तर पृथ्वीमा उनको सन्तानहरूले इतिहास लेख्छन्।
मेनका, रम्भा, उर्वशी, घृताची सबैको गाथा,
प्रेम, तप, विरह र मुक्तिको महाकाव्य बन्छ।
Mansi Desai Shastri
પીડા
હાઈકુ સઁગ્રહ
લેખિકા
માનસી દેસાઈ શાસ્ત્રી
🌸 ૧
સૂનું નોટિફિકેશન
દિવસભર અવાજો હતા
તું જ નહોતો
🌸 ૨
સેલ્ફી હસે છે
પાછળના રૂમમાં બેઠી
હું રડી રહી
🌸 ૩
દર્પણ સામે હું
વારંવાર વાળ સરખા
મન ગૂંચવાયું
🌸 ૪
લાસ્ટ સીન તારો
સમય અટકી ગયો છે
મારું નહીં કેમ?
🌸 ૫
રસોડું ધૂમે
ચા ઉકાળે સાથે
ગુસ્સો પણ છે
🌸 ૬
ઓનલાઈન દુનિયા
હજારો લોકો વચ્ચે
મારી શોધ ક્યાં?
🌸 ૭
જૂનો મેસેજ
Delete ન કરી શકું
એમાં હું છું
🌸 ૮
ખિડકી પાસે
વરસાદ નહીં પડતો
આંખ ભીંજાય
🌸 ૯
મારા હાથમાં
ઘરની બધી જવાબદારી
મારી જાત ક્યાં?
🌸 ૧૦
શાંતિથી બેસું
કોઈ પૂછતું નથી
હું ઠીક છું?
Bhavna Bhatt
રઘલા નાં લોચા
Sapna
I recently published a story on this platform which is bit fictional and more realistic cuz it's based on real incident. It's kinda love story. I hope u guys will really love it, so pls do read it and pls give ur honest reviews on it so that I can make improvements in my stories..😊❤️
mr swahit words official
जय शिवराय 🙏🏻🚩
Rashmi .k
never end love stories 🫶
Ruchi Dixit
अन्तर ने सदैव
त्याग ही
चुना दावेदारी
की अधिकता में.
- Ruchi Dixit
Raju kumar Chaudhary
बुहारी कामबाट आएर फेरि काममै फर्किन्छिन्…
यही हो धेरै घरको नबोलिएको यथार्थ।
बाहिर दिनभरि पसिना बगाएर थाकेको शरीर लिएर जब बुहारी घरको ढोका खोल्छिन्,
त्यो ढोका आरामको होइन — अर्को जिम्मेवारीको सुरुवात हुन्छ।
अफिसको तनाव, बाटोको थकान, मनको बोझ…
यी सबैलाई थिचेर उनी सिधै भान्सातिर लाग्छिन्।
किनकि उनलाई थाहा छ —
यदि उनी बसेर एकछिन सास फेर्छिन् भने,
कसैले भन्नेछ —
“काम गर्ने बुहारी भएर पनि घरको काम गर्न मन छैन जस्तो छ।”
घरका अरू सदस्यहरूको लागि काम “सहयोग” हुन सक्छ,
तर बुहारीको लागि काम “कर्तव्य” नै मानिन्छ।
उनको थकान देखिँदैन,
उनको चुपचाप सहने बानीलाई “स्वभाव” भनिन्छ,
र उनको संघर्षलाई “नियमित कुरा” भनेर बेवास्ता गरिन्छ।
कहिलेकाहीँ उनी मुस्कुराउँदै खाना पकाउँछिन्,
तर त्यो मुस्कानभित्र
आरामको चाहना, माया खोज्ने मन,
र “आज कसैले मेरो लागि पनि एक कप चिया बनाइदिए हुन्थ्यो” भन्ने सानो इच्छा लुकेको हुन्छ।
तितो सत्य के हो भने —
घरलाई घर बनाउन सबैले साथ दिनुपर्छ,
तर धेरै घरमा अझै पनि
बुहारी मात्र घर बनाउने जिम्मेवारी बोकेर हिँडिरहेकी हुन्छिन्।
सम्मान ठूलो काम गरेर मात्र पाइँदैन,
कहिलेकाहीँ “तिमी थाक्यौ होला, बस म गर्छु” भन्ने एउटा वाक्यले
कसैको मन जित्न सक्छ।
घर त्यही सुन्दर हुन्छ
जहाँ बुहारीलाई सदस्य होइन —
छोरीजस्तै महसुस गराइन्छ। ❤️
Ruchi Dixit
अलक्ष्या ❤️ अभेद्या ❤️अक्लेद्या ❤️ तु ही कर रही है , तु ही हो रही है , तुझमें हो रहा है,,,
तेरे सिवा कौन है माँ.....,,,,
mohansharma
उतरे तो दोनों ही थे मैदाने इश्क़ में मोहन..
वो किनारा कर गए हमें मंझधार में छोड़कर..
Piyu soul
“वर्दी सिर्फ कपड़ा नहीं, जिम्मेदारी की पहचान होती है।” 🚔
वर्दी मेरी पहचान, इंशाफ मेरा मिशन,👮👮
मेरा भी वो दौर जरूर आयेगा ? जब ये सितारे मेरे कंधे पर चमकेगे ।
Preet
life is not a bed of roses everyone faces many problems such as study, career or job related we can tackle these problems with full energy if we believe in our selfs
- Preet
silent Shivani
मन में तूफानों से सवाल लेकर,
शांत मन से जवाब ढूंढना तुम।
कामयाबी को दिल से अपनाना,
जमीं पर रहकर आसमान में उड़ना तुम।
अपने आत्मसम्मान की लड़ाई,
खुद से ही लड़ना तुम।
जब समझ न आए कुछ भी,
ठहरकर खुद से ही पूछना तुम।
स्त्री हो, खुद को कम न समझना तुम।
जब दुनिया खिलाफ हो, खुद को गले लगाना तुम।
समझौते करना, पर खुद को न खोना तुम।
खामोशी में भी अपनी आवाज़ सुनना,
भीड़ में रहकर खुद को चुनना तुम।
सुनो… गहरी नदी सी बहना तुम।
Silent Shivani🖋🖋
રોનક જોષી. રાહગીર
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Piyu soul
💫शायरी 💫
पन्नों की शोर में छुपा है ज्ञान,
हर सवाल में छुपा है जीवन का इम्तहान।
*जो पढ़ता है, जो सोचता है, जो जीता है,
वही बनता है अपने देश का प्रहरी महान।
Chaitanya Joshi
પકડી એકમેકના હાથ જોડાજોડ ચાલીએ.
ના છૂટે કદીએ સંગાથ જોડાજોડ ચાલીએ.
આવી ગઈ અવસ્થાને સમયનો છે તકાજો,
દુઃખ સાથે ભીડી બાથ જોડાજોડ ચાલીએ.
મેલી દઈએ મતભેદો હતા પૂર્વે એને કોરાણે,
નિભાવીએ ઉભય સાથ જોડાજોડ ચાલીએ.
સાથ સહકાર સંપ અને સાવચેતીના મંત્રથી,
સાથે સદૈવ હો દીનાનાથ જોડાજોડ ચાલીએ.
નથી સમયે જાજો હવે વિતાવવાનો આપણે,
હાલતાં ચાલતા હરિને પ્રાર્થ જોડાજોડ ચાલીએ.
-ચૈતન્ય જોષી .'દિપક' પોરબંદર.
Sudhir Srivastava
21 मार्च विश्व कविता दिवस विशेष
कविता क्या है?
**************
आज विश्व कविता दिवस पर मित्र यमराज ने
अपना बधाई संदेश भेजा,
मन प्रसन्न हो गया,
होना ही था, क्योंकि आपका बधाई संदेश तो
जाने कहाँ अटका पड़ा है।
खैर! कोई बात नहीं,आप सब मेरी बधाई स्वीकारिए
और कविता क्या है? इस पर मेरा नहीं
मेरे मित्र यमराज का पावन विचार सुनिए।
कविता भाव है, संवेदना है, सच का आइना है
समाज, राष्ट्र की आवाज, मन की पीड़ा है।
कविता आम जन की सोच, अंतर्द्वंद्व, चेतना, करुणा
जरुरत, अभाव, अधिकार, गरिमा है।
कविता कवि से है, ऐसा सोचना सही नहीं है
कवि ही कविता से है, यही सौ प्रतिशत सही है।
कुछ शब्दों को जैसे-तैसे जोड़ कर
तुकबंदी कर कागज पर उतार देना कविता नहीं है।
वास्तव में कविता के शब्द
जब बदलाव की उम्मीद जगाए,
किसी गरीब, असहाय की आवाज बन जाए
अपनी सार्थकता से पहचान बन जाए,
देश, दुनिया, समाज ही नहीं
प्रकृति, पर्यावरण, प्रदूषण, प्राकृतिक असंतुलन भ्रष्टाचार, अनाचार, अत्याचार से लड़ जाए,
धर्म जाति भाषा की हर दीवार तोड़ दे
युद्ध के बीच शाँति की मीनार बन जाए,
सच्चे अर्थों में तब ही कविता कहलाए।
दुनिया, राष्ट्र, समाज की एकता का सूत्र बन
कविता सिर्फ कविता नहीं, जब इतिहास बन जाए,
कविता सिर्फ कागजों में सिमटकर न रह जाए
अपनी उपस्थिति का भी अहसास कराए,
कविता अपने मौन भावों से छा जाए,
तब ही कविता वास्तव में कविता कहलाए।
कविता कवि की पहचान बन जाए, वो कविता है
कुछ भी कह देने को कविता कह देना ठीक नहीं है,
कवि, कवयित्रियां अपनी जिम्मेदारी निभाएं
सोच-विचार कर अपनी कलम चलाएं
कविता को कविता की वास्तविक पहचान दिलाएं,
तब आज विश्व कविता दिवस मनाएं,
अपनी कविता मुझे न सही मेरे मित्र को तो सुनाएं।
सुधीर श्रीवास्तव
kattupaya s
My Tamil short story "veyil kaalam" will going to be published on matrubharti @4.30pm 23/3/26.please read and expecting your support and love.. goodnight
Piyu soul
✨ हौसलों की रौशनी ✨
अँधेरों में भी वो खुद को जलाती रही,
हर गिरावट से ऊँचाइयाँ बनाती रही,
ना हार में रोई, ना जीत में घमंड किया,
वो तो बस अपने सपनों को सच बनाती रही। 💫
Imaran
तू मेरा सपना, मेरा अरमान है,
पर शायद तू अपनी अहमियत से अनजान है..
मुझसे कभी तू रुठ मत जाना,
क्योंकि मेरी दुनिया तुझ बिन सुनसान है
🫶imran 🫶
Sudhir Srivastava
विश्व कविता दिवस - फायकू
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कविता भावों की अभिव्यंजना
मन की संवेदना
तुम्हारे लिए।
कविता सच का आईना
शब्दों का सागर
तुम्हारे लिए।
कलम की स्याही से
शब्दों की उड़ान
तुम्हारे लिए।
हर शब्द स्वर में
अभिव्यक्ति का संगीत
तुम्हारे लिए।
कविता में समाई दुनिया
अनंत शब्द यात्रा
तुम्हारे लिए।
शब्दों में जन वाणी
खट्टे-मीठे अनुभव
तुम्हारे लिए।
अक्षरों के मेल से
आमजन की आवाज
तुम्हारे लिए।
बहुरंगी महकते पुष्प-हार
जीवन का रंग
तुम्हारे लिए।
प्रेम की भाषा है
मन की उत्कंठा
तुम्हारे लिए।
एहसास जब शब्द बनें
जीवन तब मुस्कराए
तुम्हारे लिए।
कविता हृदय का स्पंदन
खुशी या गम
तुम्हारे लिए।
कविता सिर्फ मेल नहीं
शब्दों का जोड़
तुम्हारे लिए।
कविता हमें जोड़ती है
देश-दुनिया से
तुम्हारे लिए।
बदलाव की बयार है
महसूस करें कोई
तुम्हारे लिए।
सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
फिर आओ राम जी
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हे राम जी! सुना है कि आप आ रहे हो
तो इतनी भी क्या जल्दी है, जो अभी आ रहे हो,
थोड़े दिन बाद नहीं आ सकते क्या?
इतना परेशान होने की जरूरत भी नहीं है।
मगर अफसोस कि लगता है आपको बड़ी जल्दी है।
जो भी हो, अब मेरी बात सुनो प्रभु-
मैं रामराज्य की बात तो नहीं पर इतना जरूर कहूँगा
कि आने से पहले आज के वैश्विक संकट को भी देख लेना
युद्ध की विभीषिका पर भी तनिक ध्यान दे देना।
क्या करना है क्या नहीं ये सब आप जानो,
बस! अब आप सिर्फ और सिर्फ मेरी बात मानो,
जैसे ही हो सारे के सारे युद्ध रोको,
चाहे खुद कुछ करो या अपनी सेना बुला लो
हनुमान, जामवंत, सुग्रीव, अंगद, विभीषण
नल नील और रीछों, भालुओं, वानरों को भी पुकार लो,
या फिर भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न को ही आदेश दे दो।
इसमें भी दिक्कत है तो यह जिम्मेदारी
अपने होनहार पुत्रों लव-कुश को ही सौंप दो।
कुछ भी करो, मगर निर्दोषों को बेमौत मरने से बचा लो
धरती पर जगह-जगह श्मशान बनने पर रोक लगा दो,
दुनिया भर में विश्वयुद्ध का डर फैला रहा है,
मगर कुछ कलयुगिया रावणों की समझ में
इतना भी नहीं आ रहा है।
बस! अब आप मेरी बात मानो
मुझे दंड देने की सोच रहे हो तो आकर दे देना,
मगर आने से पहले आम-जन के डर दहशत का
संपूर्ण समाधान करो, फिर आराम से आओ,
हम कुछ दिन और इंतजार कर लेंगे,
तब आपके आगमन से सिर्फ हम ही नहीं
समूची दुनिया के जन-मानस भी बहुत खुश होंगे,
राम नाम के जयघोष की हुंकार से
अखिल ब्रह्मांड तक गुँजायमान करेंगे।
सुधीर श्रीवास्तव
Meeta
કંઈક ઊંડું લખવું હતું,
તારા અહેસાસ થી વધારે શું લખું....
કંઈક શાંત લખવું હતું,
તારી યાદ થી વધારે શું લખું…
કંઈક અધૂરું લખવું હતું,
મારી રાહ થી વધારે શું લખું…
કંઈક લાંબું લખવું હતું,
રાત થી વધારે શું લખું…
હવે તો જીવન લખવું છે,
"તું "થી વધારે શું લખું…...💞
गिरीश
दर्शन
https://youtube.com/shorts/TgJpi-UzVhE?si=tnMiuhR6-M6p0UK0
Mohini
कोई आहट सी जगे रूह में,
बरस आए मेरे दो नैन…
सावन सा भी न हुआ दिल,
फिर भी बादल गरज उठे कहीं।
जो दस्तक भी दे, तो फर्क पड़े,
मेरे सवाल छुपे हैं खामोशी में…
प्यार की मंज़िल अब भी दूर,
और रास्ते सोए हैं बेहोशी में।
कहीं तो गुज़रता वक्त ठहरे,
नयनों में भरी ये बूंदें कहें—
थोड़ा सा हल्का कर दे दिल को,
जो मेरे चेहरे से चुपचाप बहें…
_Mohiniwrites
Soni shakya
कुछ लोग किस्मत में तो मिलते हैं पर,,
मुकम्मल नहीं..!!
तुम्हारी बात कर रही हूं,,
- Soni shakya
Mamta Trivedi
कविता का शीर्षक है 🌹 लुटेरे
https://youtube.com/shorts/SN0JSWxRWLI?si=v1KH9jg_wkdClzxJ
लुटेरों की नगरी में शोर हुआ
आवाज में बहुत पीड़ा के स्वर थे
पूरी कविता का वीडियो देखिए
यूट्यूब पर ममता गिरीश त्रिवेदी
Avinash
What you guys think about it?
as per me it's a great decision 😊😇🫰🏻❤️✨
Dr. Damyanti H. Bhatt
श्री रामायण नमः।।🌹🌹🙏🌹🌹
Jitendra Singh
प्रतिपल मैं यह रखता मंशा,
प्रतिपल मेरे मन में क्रोध।
मैं अनुयायी अपने मन का,
हृदय और मन में है संगत विरोध।
बिन मतलब के चलती जिह्वा,
पश्चाताप में करे अनुरोध।
हृदय कहे सब भूल जाने को,
पर प्रतिपल मांगे मन प्रतिशोध।
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