Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Shefali
#shandone_sarname__
#shabdone_sarname_
Niya
હવે પાનખર હું એકલી સહું છું,
પણ પીડાને હેત બનાવી,
મારી પ્રીતને બાંધતી નથી,
એને મુક્ત છોડું છું…
કારણ કે અનોખી પ્રીત
ફાંસામાં નહીં,
સ્વતંત્ર શ્વાસોમાં જ
અમર બને છે…
Dhamak
FIR vahi subah Hai
Nency R. Solanki
काम करने से निखरता हूँ,
बिखरता था कभी, अब जुडता हूँ!
- Nency R. Solanki
Mr joy x
20/09/2025
“अनजान प्रेम”
मैं तुमसे क्यों मिला ?
और तुम्हें गलती से कहा खो बैठा ?
ये अनजान और संगदिल प्यार
मैं कभी भुला नहीं सकता ।
तुम्हारे बिना मेरा दिल
टूटा हुआ शीशा है,
और जिसके टुकड़े भी है
तुम्हारी यादों से सजे हुए ।
मैं इसे कैसे बया करू?
मेरा दिल भी सिर्फ
तुम्हारे लिए धड़कता है !
मेरी आंखें हर पल तुम्हें ही ढूँढे
मैं बेसहारा हु और कही सो गया हूँ।
मेरा प्यार सच्चा है, मगर
उसका अहसास होने से पहले ही
गलती से तुम्हें कही खो बैठ ।
— jyotimoy choudhary
@mr joy x
Shraddha Panchal
ठहरे से लोग
इधर -उधर
दौड़ना और छोड़ना
नहीं जानते
वो ठहर जाते है
वक्त, चीजों और
ज़िन्दगी में आये
उन लोगो के साथ
उम्र भर के लिए 😇💕
Mohit Nath
~अगर जिंदगी में खुशी रहना है!
!! तो अकेले हो जाओ क्योंकि अकेलेपन~
(: से अच्छा कुछ भी नहीं है !!!
- Mohit Nath
Paagla
https://youtube.com/shorts/pblv7fgvHZg?si=9aPz3qS5ENxzPIQP
Annu jangra
agar aap me se koi Trading karna chata hai to aap meri video jrur dekhna
agar aapke pass jyada money nhi hai to aap sirf 1000rs.se start kar ke daily ka 300rs. normally kma skte ho
https://youtube.com/shorts/jypBom0hisQ?si=4XgjmKPoyyB_wyPJ
Parmar Mayur
कोई एक व्यक्ति से हमें बुरा अनुभव होता है,
फिर हम सभी इंसानों को बूरा समझने लगे,
तो फिर गलतियां हमसे ही होगी।
हर एक इंसान में अच्छाई या बुराई ही पनपतीं है,
वह ग़लत बात है।
किसी में अच्छाई भी पनपतीं है तो किसी में बुराई।
अच्छे इंसानों पर भी आप भी बूरे होगे,
वह प्रश्न कब पैदा होता है।
मालूम है?
जब बुराई अच्छाई का नक़ाब पहनकर पहले पास आती है,
फिर वह अपने वास्तविक रूप में आकर असली रूप दिखलातीं है।
तब वह पीड़ित इंसान,
सभी अच्छे इंसानों को भी बूरा समझने लगता है।
किन्तु कुछ विवेक शक्ति भी होनी चाहिए,
अच्छाई और बुराई को समझने की।
एक बार धोखा खाए हुए इंसान में वह समझ अच्छी तरह आ जानी चाहिए।
रावण ने सीतामाता का हरण,
साधु वेश धारण करके किया,
वह रावण की नियत और सोच खराब थी,
साधु और साधुत्व नही।
इसलिए जिंदगी में नक़ाब पहनें मिलते रहते हैं चहेरे,
आज़मा लेना चाहिए जरुर, असलियत के दिख जाते है चहेरे।
Dhamak
फिर वही...(छोटी सी परी के नाम)
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...
हूँ... हूँ... हा... हा...
इस खूबसूरत सी... सुबह में...
तेरा मेरा यूँ... मिलना...
मुस्कुराते चेहरों के साथ...
एक दूजे में यूँ... खो जाना...
(खो जाना... आ... आ... आ...)
मासूम सा है... चेहरा तेरा...
देखूँ तो धड़कन... ठहर जाए...
(ठहर जाए... ए... ए... हे...)
पानी से नाज़ुक... ये सपने...
पलकों के किनारों पे... थम जाएँ...
(थम जाएँ... ए... ए... हे...)
तू इन्हें अपनी... आँखों में...
ज़रा धीरे से... थामे रखना...
दुनिया का कोई... साया भी...
इन तक पहुँच... न पाए...
फिर वही...
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...
हूँ... हूँ... हा... हा...
DHAMAK
Maulik Patel
પાણિયારા પાસે હું ઊભો રહીને એ પનિહારી ને હું જોવું છું,
પ્રેમથી અતિ વ્યાકુળ આ મનને હું અનાયાસે તૃપ્ત કરી ખાઉં છું,
આવું છું એવું કહીને હું ક્યાંક જઈને આવું છું,
પણ હું તો પ્રેમના સરનામાં પર કઈંક મૂકીને આવું છું."
Raju kumar Chaudhary
🎬 नायक: द रियल हीरो – अनिल कपूर की राजनीतिक थ्रिलर फिल्म की पूरी कहानी और समीक्षा
✨ छोटा विवरण
अनिल कपूर की फिल्म “नायक: द रियल हीरो” की पूरी कहानी और समीक्षा। जानिए कैसे एक आम आदमी सिर्फ़ एक दिन में भ्रष्ट राजनीति से लड़कर बदलाव ला सकता है। राजनीतिक थ्रिलर और सामाजिक संदेश से भरपूर फिल्म।
📝 फिल्म परिचय
नायक: द रियल हीरो 2001 में रिलीज़ हुई एक हिंदी राजनीतिक एक्शन‑ड्रामा फिल्म है।
निर्देशक: एस. शंकर
मुख्य कलाकार: अनिल कपूर, रानी मुखर्जी, अमरीश पुरी, परेश रावल, जॉनी लीवर
यह फिल्म तमिल सुपरहिट Mudhalvan की हिंदी रीमेक है।
📖 कहानी (Plot Summary)
शिवाजी राव (अनिल कपूर) एक ईमानदार टीवी रिपोर्टर हैं। वह आम लोगों की समस्याएँ दिखाते हैं और भ्रष्ट राजनीति की आलोचना करते हैं।
एक दिन महाराष्ट्र में हुए दंगों की रिपोर्टिंग के दौरान, मुख्यमंत्री (अमरीश पुरी) की लापरवाही सामने आती है। शिवाजी मुख्यमंत्री का लाइव इंटरव्यू लेते हैं और सरकार की उदासीनता को जनता के सामने उजागर करते हैं।
गुस्से में मुख्यमंत्री उन्हें चुनौती देते हैं कि वह एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनकर दिखाएँ कि वह जनता के लिए क्या कर सकते हैं।
शिवाजी इस चुनौती को स्वीकार कर लेते हैं। इस एक दिन में वह:
✅ भ्रष्ट अधिकारियों को हटाते हैं
✅ जनता की समस्याओं को तुरंत हल करते हैं
✅ दिखाते हैं कि अगर सही इंसान सत्ता में हो तो कितना बदलाव संभव है
बीच में शिवाजी को मनजरी (रानी मुखर्जी) से प्यार हो जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री और उनके समर्थक शिवाजी को रोकने के लिए साज़िश रचते हैं।
कहानी बताती है कि कैसे एक आम आदमी बड़े सिस्टम के खिलाफ़ खड़ा होकर भ्रष्टाचार से लड़ सकता है।
🌟 फिल्म समीक्षा (Review)
👍 अच्छी बातें:
सामाजिक संदेश: भ्रष्टाचार और जनता की समस्याओं को उजागर करती है।
अभिनय: अनिल कपूर ने आम आदमी की भावनाओं को असरदार ढंग से पर्दे पर उतारा।
कहानी और संवाद: इंटरव्यू और संघर्ष के दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
👎 कमजोरियाँ:
फिल्म लंबी है (लगभग 3 घंटे) और कुछ दृश्यों में अतिरंजित क्रियाएँ हैं।
हास्य दृश्य कहानी के गंभीर मुद्दे को थोड़ा कमजोर कर देते हैं।
🏆 निष्कर्ष
नायक सिर्फ़ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एक ईमानदार और समर्पित इंसान सत्ता में आकर बदलाव ला सकता है।
यह फिल्म राजनीति, भ्रष्टाचार और जनता के अधिकार पर सोचने के लिए प्रेरित करती है।
यदि आप सामाजिक संदेश और राजनीतिक थ्रिलर पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए जरूर है।
Raju kumar Chaudhary
NAYAK ( THE REAL HERO )अनिल कपूर की फिल्म “नायक: द रियल हीरो” की पूरी कहानी और समीक्षा। जानिए कैसे एक आम आदमी सिर्फ़ एक दिन में भ्रष्ट राजनीति से लड़कर बदलाव ला सकता है। राजनीतिक थ्रिलर और सामाजिक संदेश से भरपूर फिल्म।
🔹 मुख्य कंटेंट (Story + Review)
फिल्म परिचय:
नायक: द रियल हीरो 2001 में रिलीज़ हुई एक हिंदी राजनीतिक एक्शन‑ड्रामा फिल्म है। इसका निर्देशन एस. शंकर ने किया और इसमें मुख्य भूमिका निभाई अनिल कपूर ने। यह फिल्म तमिल सुपरहिट Mudhalvan की हिंदी रीमेक है।
कहानी (Plot Summary)
शिवाजी राव (अनिल कपूर) एक ईमानदार टीवी रिपोर्टर हैं। वह आम लोगों की समस्याएँ दिखाते हैं और भ्रष्ट राजनीति की आलोचना करते हैं। एक दिन महाराष्ट्र में हुए दंगों की रिपोर्टिंग के दौरान, मुख्यमंत्री (अमरीश पुरी) की लापरवाही सामने आती है।
शिवाजी मुख्यमंत्री का लाइव इंटरव्यू लेते हैं और सरकार की उदासीनता को जनता के सामने उजागर करते हैं। गुस्से में मुख्यमंत्री उन्हें चुनौती देते हैं कि वह एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनकर दिखाएँ कि वह जनता के लिए क्या कर सकते हैं।
शिवाजी इस चुनौती को स्वीकार कर लेते हैं। इस एक दिन में वह भ्रष्ट अधिकारियों को हटाते हैं, जनता की समस्याओं को तुरंत हल करते हैं और दिखाते हैं कि अगर सही इंसान सत्ता में हो तो कितना बदलाव संभव है।
बीच में शिवाजी को मनजरी (रानी मुखर्जी) से प्यार हो जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री और उनके समर्थक शिवाजी को रोकने के लिए साज़िश रचते हैं। कहानी बताती है कि कैसे एक आम आदमी बड़े सिस्टम के खिलाफ़ खड़ा होकर भ्रष्टाचार से लड़ सकता है।
फिल्म समीक्षा (Review)
अच्छी बातें:
सामाजिक संदेश: भ्रष्टाचार और जनता की समस्याओं को उजागर करती है।
अभिनय: अनिल कपूर ने आम आदमी की भावनाओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।
कहानी और संवाद: इंटरव्यू और संघर्ष के दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
कमजोरियाँ:
फिल्म लंबी है (लगभग 3 घंटे) और कुछ दृश्यों में अतिरंजित क्रियाएँ हैं।
हास्य दृश्य कहानी के गंभीर मुद्दे को थोड़ा कमजोर कर देते हैं।
निष्कर्ष:
नायक सिर्फ़ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एक ईमानदार और समर्पित इंसान सत्ता में आकर किस तरह बदलाव ला सकता है। यह फिल्म राजनीति, भ्रष्टाचार और जनता के अधिकार के विषय पर सोचने पर मजबूर करती है।
यदि आप सामाजिक संदेश और राजनीतिक थ्रिलर पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए जरूर है।
Raju kumar Chaudhary
NAYAK ( THE REAL HERO )अनिल कपूर की फिल्म “नायक: द रियल हीरो” की पूरी कहानी और समीक्षा। जानिए कैसे एक आम आदमी सिर्फ़ एक दिन में भ्रष्ट राजनीति से लड़कर बदलाव ला सकता है। राजनीतिक थ्रिलर और सामाजिक संदेश से भरपूर फिल्म।
🔹 मुख्य कंटेंट (Story + Review)
फिल्म परिचय:
नायक: द रियल हीरो 2001 में रिलीज़ हुई एक हिंदी राजनीतिक एक्शन‑ड्रामा फिल्म है। इसका निर्देशन एस. शंकर ने किया और इसमें मुख्य भूमिका निभाई अनिल कपूर ने। यह फिल्म तमिल सुपरहिट Mudhalvan की हिंदी रीमेक है।
कहानी (Plot Summary)
शिवाजी राव (अनिल कपूर) एक ईमानदार टीवी रिपोर्टर हैं। वह आम लोगों की समस्याएँ दिखाते हैं और भ्रष्ट राजनीति की आलोचना करते हैं। एक दिन महाराष्ट्र में हुए दंगों की रिपोर्टिंग के दौरान, मुख्यमंत्री (अमरीश पुरी) की लापरवाही सामने आती है।
शिवाजी मुख्यमंत्री का लाइव इंटरव्यू लेते हैं और सरकार की उदासीनता को जनता के सामने उजागर करते हैं। गुस्से में मुख्यमंत्री उन्हें चुनौती देते हैं कि वह एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनकर दिखाएँ कि वह जनता के लिए क्या कर सकते हैं।
शिवाजी इस चुनौती को स्वीकार कर लेते हैं। इस एक दिन में वह भ्रष्ट अधिकारियों को हटाते हैं, जनता की समस्याओं को तुरंत हल करते हैं और दिखाते हैं कि अगर सही इंसान सत्ता में हो तो कितना बदलाव संभव है।
बीच में शिवाजी को मनजरी (रानी मुखर्जी) से प्यार हो जाता है। लेकिन मुख्यमंत्री और उनके समर्थक शिवाजी को रोकने के लिए साज़िश रचते हैं। कहानी बताती है कि कैसे एक आम आदमी बड़े सिस्टम के खिलाफ़ खड़ा होकर भ्रष्टाचार से लड़ सकता है।
फिल्म समीक्षा (Review)
अच्छी बातें:
सामाजिक संदेश: भ्रष्टाचार और जनता की समस्याओं को उजागर करती है।
अभिनय: अनिल कपूर ने आम आदमी की भावनाओं को बेहद प्रभावशाली ढंग से पर्दे पर उतारा।
कहानी और संवाद: इंटरव्यू और संघर्ष के दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर करते हैं।
कमजोरियाँ:
फिल्म लंबी है (लगभग 3 घंटे) और कुछ दृश्यों में अतिरंजित क्रियाएँ हैं।
हास्य दृश्य कहानी के गंभीर मुद्दे को थोड़ा कमजोर कर देते हैं।
निष्कर्ष:
नायक सिर्फ़ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि एक ईमानदार और समर्पित इंसान सत्ता में आकर किस तरह बदलाव ला सकता है। यह फिल्म राजनीति, भ्रष्टाचार और जनता के अधिकार के विषय पर सोचने पर मजबूर करती है।
यदि आप सामाजिक संदेश और राजनीतिक थ्रिलर पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए जरूर है।
Maulik Patel
કઈંક લખું હું હૃદયના અંતરમાં,
પછી પાના ફેરવું હું મારી સ્મૃતિમાં,
હૃદયના ધબકારાઓ થકી હું મોકલું સંદેશો એને હું શિરા અને ધમનીમાં,
કારણ ગમે તે હોય પણ હું તો મળતો રહીશ એને Time Travel માં.
Kamini Shah
શમણાં પણ જોને આભમાં
વિખરાયાં
કાટમાળ થઈ ધરતી પર
પથરાયાં…
-કામિની
Shailesh Joshi
જો તમારે તમારો સમય, મગજ અને
તમારી મહેનત વધારે ન બગાડવી હોય તો
શક્ય હોય ત્યાં સુધી બસ આટલું જ કરજો,
કે કર્મથી લઈને પરિણામ સુધી
તમે એકલા જાતે જ જજો,
સલાહ સૂચન લેજો પરંતુ મદદ...
એતો ક્યારેય ન લેતા.
- Shailesh Joshi
Gautam Patel
बालाजी महाराज
Pragna Ruparel
સુખ
જો માણસ કેવળ સુખી થવા ઈચ્છે તો તેની ઈચ્છા પૂર્ણ થઈ શકે છે.પરંતુ જો માણસ અન્ય લોકો કરતાં વધુ સુખી થવા ઈચ્છે તો એમાં મુશ્કેલી ઉત્પન્ન થાય છે.કારણકે આપણે અન્યને વાસ્તવિકતા થી પણ અધિક સુખી સમજીએ છીએ.
ઇમર્સન.
Anup Gajare
"अनाम सा"
___________________________________________________
क्या बात कहूं उससे
जो मुझसे परे होकर भी
देखता है कि कुछ भी नहीं देखता।
उसका होना मेरे लिए महज एक संयोग है,
या सच में किसी आईने की तरह
वह मुझे रोज़ खिचड़ी बालों में
कंघी घुमाते हुए देखता है।
उसका कोई नाम नहीं,
पर क्या बस नाम ही
किसी चीज़ को वजूद देता है?
अस्तित्व होने से नहीं होता।
वह तो बस मेरी कल्पना से भी परे कुछ है,
जिसकी उम्मीद भी नहीं की जा सकती,
जिसके बिना साँस छोड़ते हुए
मैं बुदबुदाता हूँ हवा को।
और उसकी झलक न दिखते हुए भी
महसूस होने की भावना से भी ऊपर का
कुछ मुझे छू जाता है।
लेकिन यह स्पर्श ज्ञान नहीं है।
उसे तो किसी भी मानवी संवेदना में
बाँधा नहीं जा सकता।
अंधकार में हिलता हुआ वह
हिल भी नहीं रहा होता।
मुझे मालूम है—
उसका यही न होना
मुझे उससे जोड़े रखता है।
जैसे बारिश की पहली मिट्टी की गंध में
नहाया हुआ मेढक
किसे देखता है?
उसकी डरावनी ध्वनि में
छुपा तत्व मुझे क्यों नहीं बोध होता।
क्या बस बंधन में बंधे
मांझे को पतंग के होने की
भावना महसूस नहीं होती?
किसी विलुप्त अवकाश में
उसका छुपा रहना क्या है,
या शायद मुझे ठीक एड्रेस पता नहीं है।
उसे ढूंढा नहीं जा सकता,
क्योंकि छुपना, खोजना—
यह सब इंसानी साज़िशें हैं।
मानवीय नियम वगैरा
झूठे नहीं हैं,
पर वह मेरे आयाम का हिस्सा होते हुए भी नहीं है।
या यूँ कहा जा सकता है
कि मनुष्य बस है—
जिसने अभिजीत को नहीं छुआ है।
बस किसी कोने में बसी हुई
अपनी सभ्यता उसे ढूंढती है।
उनके साथ भी यही होता होगा,
जिन्हें वह कभी दिखा
या शायद दिखा नहीं होगा।
एक बात कहूं—
वह कोई ईश्वर
या महबूब नहीं है।
______________________________________________
Yuvraj Chouhan
always believe in your self #support
Raju kumar Chaudhary
सफलता की खोज
(एक लेखक बनने का सपना)🌟 शीर्षक: हार मानने से पहले
रमेश एक छोटे से गाँव का लड़का था। उसके पिता मजदूरी करते थे और माँ दूसरों के घरों में काम। घर की हालत ऐसी थी कि कई बार रात का खाना भी पूरा नहीं होता था।
स्कूल में रमेश को कोई खास नहीं समझता था। उसके कपड़े पुराने थे, जूते फटे हुए। कुछ बच्चे हँसते हुए कहते—
“इससे कुछ नहीं होगा।”
हर बार ये शब्द उसके दिल में तीर की तरह चुभ जाते।
एक दिन परीक्षा का रिज़ल्ट आया। रमेश फिर फेल हो गया। वह स्कूल के पीछे अकेला बैठकर रो रहा था। उसे लगा जैसे उसकी ज़िंदगी भी उसी रिज़ल्ट की तरह “फेल” हो चुकी है।
घर आकर उसने माँ से कहा,
“अम्मा, मुझसे पढ़ाई नहीं होती। मैं काम करने चला जाऊँगा।”
माँ ने उसके सिर पर हाथ रखा और धीरे से बोली—
“बेटा, हार वो नहीं जो गिर जाए, हार वो है जो उठना छोड़ दे।”
वही एक वाक्य रमेश की ज़िंदगी का मोड़ बन गया।
अगले दिन से रमेश ने एक नियम बना लिया—
रोज़ सुबह जल्दी उठना, दो घंटे पढ़ाई, और दिन में जो भी समझ न आए, दोबारा कोशिश।
कई बार वह थक जाता, कई बार मन करता छोड़ देने का। लेकिन माँ का वो वाक्य उसे हर बार रोक लेता।
समय बीतता गया। साल बदले।
और वही रमेश, जिसे कभी “बेकार” कहा गया था, आज सरकारी नौकरी में चयनित हो गया।
जिस दिन उसने माँ को सफलता की खबर दी, माँ की आँखों में आँसू थे—खुशी के।
✨ सीख
हालात चाहे जैसे हों, अगर इंसान हार मानने से पहले एक बार और कोशिश कर ले—तो किस्मत भी रास्ता बदल देती है।🌟 सफलता की खोज
(एक लेखक बनने का सपना)
राजु एक साधारण से गाँव में रहने वाला लड़का था। उसके घर में न ज़्यादा पैसे थे, न बड़ी सुविधाएँ। लेकिन उसके पास एक चीज़ बहुत खास थी — सपने देखने की आदत।
जब दूसरे बच्चे खेलते थे, तब राजु पुरानी कॉपियों के खाली पन्नों पर कहानियाँ लिखा करता था।
वह लिखता था—
कभी किसान की पीड़ा,
कभी माँ की ममता,
तो कभी अपने ही संघर्ष की कहानी।
उसका सपना था—
“एक दिन मैं बड़ा लेखक बनूँगा, मेरी कहानियाँ लोगों के दिल तक पहुँचेंगी।”
लेकिन राह आसान नहीं थी।
स्कूल में लोग उसका मज़ाक उड़ाते थे—
“कहानी लिखने से कोई बड़ा आदमी बनता है क्या?”
घरवाले कहते—
“पहले नौकरी सोचो, ये लिखना-पढ़ना बेकार है।”
कई बार राजु का हौसला टूट जाता।
एक दिन उसने अपनी डायरी बंद करते हुए सोचा—
“शायद वे सही हैं… मुझसे नहीं होगा।”
उसी रात उसने एक किताब पढ़ी, जिसमें लिखा था—
“सपने वो नहीं जो सोते वक्त आएँ, सपने वो हैं जो सोने न दें।”
ये पंक्ति राजु के दिल में उतर गई।
अगले दिन से उसने तय किया—
रोज़ लिखेगा, चाहे कोई पढ़े या नहीं।
रोज़ सीखेगा, चाहे कोई सराहे या नहीं।
वह सुबह जल्दी उठकर लिखता,
दिन में काम करता,
और रात को फिर शब्दों से दोस्ती करता।
उसकी कहानियाँ पहले मोबाइल पर पढ़ी गईं,
फिर सोशल मीडिया पर,
और एक दिन…
एक प्रकाशक की नज़र राजु की लेखनी पर पड़ी।
कुछ समय बाद राजु की पहली किताब छपी।
जब उसने किताब पर अपना नाम देखा —
“लेखक : राजु”
तो उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन वो आँसू हार के नहीं, सफलता के थे।
आज राजु एक जाना-माना लेखक है।
लेकिन वह आज भी वही बात कहता है—
✨ सीख
अगर सपना सच्चा हो और मेहनत ईमानदार,
तो हालात चाहे जैसे हों,
सफलता रास्ता खुद बना लेती हैFollow the PRB STORY CLUB channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Vb80wc69MF92VvNWbp1
Urvashi Oza
Do You know how it feels ?
खुद को कोसना & at the same time खुदको बेचारा फील करना..
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1CqxkMr8XY/
નવી ગઝલ
Sujda Fatima
It’s time to find my soul again in my search for Allah.
It’s time to rejoice in the name of the One.
It’s time to reclaim the self that knew happiness.
It’s time to rebuild with the strength He provides.
Rinki Singh
दादी जब परेशान होती थीं, किसी बात से दुखी या किसी उलझन से चिढ़ी हुई, तो अक्सर ईश्वर से शिकायत करती थीं। कहती थीं कि मन ऊब गया है, अब जीने का मन नहीं करता, भगवान कब पूछेंगे और कब बुलाएँगे। तब उनकी बातों में हमें बस झुँझलाहट दिखती थी, थकान का मज़ाक उड़ाना आसान लगता था। जब वे खुश होतीं, तो हम जानबूझकर उन्हें चिढ़ाते थे कि आज भगवान से नहीं कहोगी क्या दादी कि बुला लें। तब दादी हँसकर कहती थीं कि अभी कहाँ, अभी तो सारे पोते-पोतियों की शादी देखनी है, इतनी जल्दी थोड़े ही मरना है। उस समय यह सब बहुत साधारण लगता था, जैसे बुज़ुर्गों की आदतें होती हैं।
आज वही बातें भीतर उतरकर अर्थ बनाती हैं। अब जब मैं धीरे-धीरे दादी की उम्र की तरफ़ बढ़ रही हूँ, तो उनकी उलझनें, उनका दुःख और उनकी चुप पीड़ा समझ आने लगी है। अब पता चलता है कि वे शब्द शिकायत नहीं थे, थकान की स्वीकृति थे। कितनी ही बार मैं भी सब छोड़ देने का ख़याल लेकर बिस्तर तक पहुँची हूँ। लगता है कि अब और नहीं, अब बस थम जाना चाहिए। पर हर सुबह कुछ न कुछ मुझे वापस खींच लाता है- बच्चे की टिफ़िन, बड़ों की चाय, घर की ज़िम्मेदारियाँ, रसोई के तेल और मसालों में उलझा हुआ जीवन और उस क्षण मरने का ख़याल टल जाता है, स्थगित हो जाता है, जैसे किसी ने भीतर से कह दिया हो..आज नहीं।
जीवन से ऊब जाना शायद मनुष्य के जीवन का एक निश्चित पड़ाव है। मरने का ख़याल भी शायद कभी न कभी सबके मन में दस्तक देता है । पर उससे भी पहले हर दिन थोड़ा-थोड़ा मरते चले जाना, ऊब में फँस जाना और वहाँ से बाहर निकलने की इच्छा खो देना..यह सबसे पीड़ादायक है। अब मैं समझती हूँ कि दादी क्यों हर दिन जीवन से समझौता करती थीं। उन्होंने जीना नहीं छोड़ा था, उन्होंने बस मरना टाल दिया था।
आज मैं भी वही कर रही हूँ। न जीवन से प्रेम पूरी तरह बचा है, न उसे छोड़ने का साहस। बस रोज़मर्रा के छोटे-छोटे कारणों में उलझकर मरना स्थगित कर देती हूँ। शायद यही जीवन है जहाँ पूरी तरह जीना नहीं, पूरी तरह मरना भी नहीं, बल्कि हर दिन अपने ही मन से चुपचाप समझौता करते हुए आगे बढ़ते रहना।
यह जीवन मोह पर टिका है,इस भरोसे पर कि सब अच्छा हो जाएगा।
और शायद यही भरोसा है, जो बना रहना चाहिए।
राजेश रेड्डी साहब ने कितनी सधी हुई बात कही है...
अजब ये ज़िन्दगी की क़ैद है दुनिया का हर इंसां
रिहाई माँगता है और रिहा होने से डरता है
~ रिंकी सिंह
#matrubharti
yeash shah
નારી શું ઈચ્છે છે? અને નર શું વિચારે છે? આ પ્રશ્ન જો બન્ને માંથી એક ને વારંવાર થયા કરે તો સમજવું સંબંધ રિબોન્ડિંગ માંગે છે.
Shailesh Joshi
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એક - નોકરી ધંધા, અને લગ્નની ઉંમરે પહોંચતા, કલ્પનાઓની દુનિયામાંથી બહાર આવી જવું.
અને બે - દર વખતે પ્રયત્નો કરવાથી ધાર્યું પરિણામ
નથી મળતું, પરંતુ કોઈકવાર પ્રયત્નો કરીને પૂરેપૂરી રીતે થાકી હારી જઈએ, છતાં પણ જો આપણે આપણા
પ્રયત્નો ચાલુ રાખીએ તો ભલે ધાર્યું નહીં,
પરંતુ સારું પરિણામ તો ચોક્કસથી
મળે મળે અને મળે જ છે.
- Shailesh Joshi
महेश रौतेला
शब्दों तक पहुँचना भी
तपस्या है,
शब्दों को इकट्ठा करना और कठिन है
"उसने प्यार करता हूँ" कहने में
सालों लगा दिये।
** महेश रौतेला
Suraj Prakash
https://youtube.com/shorts/cb-771yxHxc?si=WfoI2aZFEgLrr8BC
गरीब लड़के ने अमीर व्यापारी को सिखाया जीवन का सबसे बड़ा सबक | Heart Touching Moral Story | Baccho Ki Kahani"**
ziya
इंसान न उम्मीद किस से
ज्यादा होता है
कमेंट में बताइये
Lakshmanarao Kasarapu
A HEART CENTERED GUIDE TO INNER PEACE
A heart-centered life is a life guided from within, not controlled by noise from the outside world. In a fast, competitive, and often restless world, inner peace is not something found somewhere else; it is something awakened inside you when your mind, heart, and actions move in the same direction. A heart-centered guide to inner peace is not about running away from problems, but about meeting them with awareness, compassion, and trust in your true self.stories.
Introduction
Inner peace begins when you stop fighting with yourself and start listening to your heart’s quiet wisdom. Most people chase peace in achievements, relationships, money, or recognition, but still feel an emptiness inside because they have not learned to sit with their own feelings. A heart-centered guide invites you to slow down, breathe, and reconnect with the part of you that is already whole, already enough, and already lovable.
When you live from the head alone, life becomes a calculation; when you live from the heart, life becomes a creation. Heart-centered inner peace means:-
• You accept your emotions instead of suppressing them.
• You choose kindness over ego in daily situations.
• You respond to life with clarity instead of reacting with anger or fear.
This path does not demand perfection; it asks for honesty with yourself, courage to feel, and willingness to grow every single day.
Example: A Day in a Heart-Centered Life
Imagine a person named Arjun. On the surface, Arjun’s life looks normal: a job, a family, responsibilities, and the usual pressures of modern life. He often wakes up with worry about money, career growth, and what others think of him. Small triggers make him angry—a traffic jam, a rude message, or a minor mistake at work.
One day, after a night of heavy overthinking, Arjun decides to try a heart-centered approach to his day. He wakes up, sits quietly for five minutes, and places his hand on his chest, just noticing his breath. Instead of checking his phone first, he asks himself a simple question: “What do I truly need today?” The answer that arises from inside is not “more success” or “more speed,” but “more calm and more kindness.”
Throughout the day, he practices three small heart-centered shifts:
• When someone speaks harshly, he pauses, takes a breath, and chooses not to answer from anger. He silently tells himself, “Their words do not define my worth.”
• When stress builds up, he closes his eyes for one minute, feels his heartbeat, and repeats, “I am safe in this moment. I can handle this step by step.”
• When he makes a mistake, instead of attacking himself with blame, he talks to himself like a friend: “It’s okay. Learn, correct, and move forward.”
By evening, his life situation is the same, but his experience is different. The outside world has not changed much, but his inner world feels lighter, softer, and more stable. This is the power of a heart-centered approach: it turns an ordinary day into a peaceful day by changing the way you relate to yourself and to life.
Conclusion
Inner peace is not an escape from life; it is a new way of walking through life—with a calm mind and an open heart. A heart-centered guide to inner peace reminds you that you do not control everything that happens around you, but you always have a choice in how you meet it from within. When you choose awareness over autopilot, compassion over criticism, and presence over constant worry, your heart slowly becomes your true home.
The message of “Speed of Thoughts” is simple: your thoughts may be fast, but your heart is deep. When you allow your thoughts to be guided by the wisdom of your heart, you create a life where peace is not a rare visitor, but a constant companion walking beside you.
- Lakshmanarao Kasarapu
smita
बुद्धि जब हड़ताल पर होती है,
तो जुबान overtime करती है।🤣
ziya
लोग अपनी ख़ुशी को भूल कर
दुसरो को ख़ुश रखने की कोसिस बहुत करता है
फिर भी लास्ट में उसे दुख ही मिलता है
ऐसा क्यों होता है 😔😔😔
कमेंट में बताइये
ziya
इंसान दुसरो को ख़ुश करने के चक्कर में
खुद की ख़ुशी को भूल जाता है
ziya
इंसान अपने लिए ही सही सुनना चाहता है
उसके अल्फाज़ से सामने वाले को क्या तख़लीफ़
होती हैं उससे उसको फर्क नहीं पड़ता है
srishti tiwari
महफ़िल में तेरे सोंग न चलेंगे ,
ग़म तो यही है , ग़म तो यही है ।
किस्से अरिजीत के फिल्म इंडस्ट्री में,
कम तो नहीं है, कम तो नहीं है ।
कितनी दफा गानों को तेरे सुनके ,
दिल ने मेरे आराम किया ।
चन्ना मेरेया
Srishti Tiwari Shaan
- srishti tiwari
Shailesh Joshi
આ સંસાર ક્યાં જઈને ઊભો રહેશે ?
ખબર નથી,
સારો માણસ સતત
લોકો શું કહેશે ? ની ચિંતામાં રહેશે,
ને ખોટા ને એવી કંઈ પડી નથી,
આ સંસાર ક્યાં જઈને ઊભો રહેશે ?
ખબર નથી
પૈસાવાળા લોકો કરકસર, ને અમુક તો એમાં ચિંગુસાઈ પણ કરે છે
ને જેની પાસે લગભગ કંઈ નથી તોયે એ હોય એટલો દેખાડો કરે છે,
આ સંસાર ક્યાં જઈને ઊભો રહેશે ?
ખબર નથી
થોડા ઘણા પૈસા પણ
જો ક્યાંક અવળા વપરાઈ જાય,
તો પૈસાવાળાને રાત્રે ઊંઘ પણ નથી આવતી,
અને જેની પાસે કંઈ નથી, એની પાસે જો થોડો ઘણો પણ વધારે પૈસો આવી જાય, તો એ હવામાં ઊડે છે,
આ સંસાર ક્યાં જઈને ઊભો રહેશે ?
ખબર નથી
Jyoti Gupta
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Dada Bhagwan
થાણેની હવામાં અનેરો ઉમંગ,
ભવ્ય ત્રિમંદિર પ્રતિષ્ઠાનો રંગ!
ત્રિમંદિર એટલે આધ્યાત્મિક પ્રગતિ માટેનું નિષ્પક્ષપાતી મંદિર! ત્રિમંદિર વિશે વધુ વાંચો અહીં: https://dbf.adalaj.org/haKDYYCK
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Falguni Dost
જય શ્રી રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻
Manish Patel
अच्छी भूमिका, अच्छे लक्ष्य और अच्छे विचारों वाले लोगों को हमेशा याद किया जाता है मन में भी, शब्दों में भी और जीवन में भी
good morning
- Manish Patel
Shweta pandey
कभी-कभी कुछ किताबें केवल पढ़ी नहीं जातीं, बल्कि महसूस की जाती हैं, और “अंतर्मन” ऐसी ही एक संवेदनशील कृति है जो पाठक को उसके अपने भावों से जोड़ देती है। यह पुस्तक शब्दों से अधिक एहसासों की अभिव्यक्ति है, जहाँ हर कविता आत्मसंवाद बन जाती है और हर पंक्ति दिल की गहराइयों को छूती है। छत्तीसगढ़ की संवेदनशील लेखिका श्वेता पांडेय ने इस काव्य-संग्रह में प्रेम, विरह, माँ-पिता का स्नेह, रिश्तों की जटिलताएँ, समाज की सच्चाइयाँ और आत्मचिंतन जैसे जीवन के विविध रंगों को बड़ी सादगी और गहराई से उकेरा है। “वो पहला इश्क मेरा”, “माँ का प्यार” और “अब खुद से मिलने चली हूँ” जैसी रचनाएँ पाठक को अपने भीतर झाँकने पर मजबूर करती हैं। इससे पूर्व प्रकाशित उनका कविता-संग्रह “सफर कोरे पन्नों की” पाठकों द्वारा सराहा जा चुका है और सोशल मीडिया साहित्यिक मंचों पर उनकी लेखनी को व्यापक पहचान मिली है। Top National Writer Of India 2024 के अंतर्गत Top Epic Pen Star Award सहित अनेक सम्मान प्राप्त कर चुकी श्वेता पांडेय ने 40 से अधिक पुस्तकों में सह-लेखिका के रूप में योगदान दिया है। “अंतर्मन” उन सभी पाठकों के लिए है जो कविता में शोर नहीं, बल्कि संवेदना, सच्चाई और आत्मा की आवाज़ तलाशते हैं - एक ऐसी पुस्तक जो पढ़ते-पढ़ते पाठक को उसके अपने अंतर्मन से जोड़ देती है।
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ziya
इंसान न उम्मीद भी
उसी से होता है
जिससे उसे उम्मीद
ज्यादा होती है
ziya
हम तो फ़ना हो गए ग़ालिब
उनकी आँखे देख कर
पता नहीं वो
आईना कैसे देखते होंगे
ziya
अर्ज़ किया है
मोहब्बते में कभी कभी
वादे टूट जाते है
इश्क़ के कच्चे धागे
टूट जाते है
कभी न कभी तो
झूठ बोलता होगा चाँद भी
शायद इसलिए रूठ कर
तारे टूट जाते है
Deepak Bundela Arymoulik
ये मोहब्बत थी
या किसी तन्हा शाम की आदत,
जो धीरे-धीरे
मेरे कमरे में फैल गई।
तुम आईं
और शब्दों को कम बोलना सिखा गईं,
मैंने ख़ामोशी को
तुम्हारा जवाब समझ लिया।
मैं हर रोज़
अपने हिस्से का सच
तुम्हारे नाम लिखता रहा,
तुम हर बार
उसे पढ़े बिना
मोड़कर रख देती रहीं।
कभी-कभी सोचता हूँ—
इश्क़ वो नहीं होता
जो मिल जाए,
इश्क़ शायद वो होता है
जो आदमी को
थोड़ा और अकेला कर दे।
आज भी
तुम्हारी याद
किसी पुराने खत की तरह है—
ना फाड़ सकता हूँ,
ना दोबारा पढ़ने की हिम्मत है।
आर्यमौलिक
Soni shakya
दुनिया समझेगी ये सिर्फ लफ्जों का खेल है..
पर ये सिर्फ तुम जानोगे कि..
मेरी हर पंक्ति में सिर्फ तुम ही तुम हो..
- Soni shakya
ziya
मीठी मीठी बाते करने वाले ही
अक्सर जख्म गहेरा दे जाते है
Parmar Mayur
जिंदगी में मुश्किल समय एक Puzzle की तरह होता है।
समाधान भी मिलता है,
शांत दिमाग और स्थिर ह्रदय से
सोचने पर कोई भी विपरीत परिस्थितियों में
भी रास्ता मिलता हैं।
Urvashi Oza
क्यों हर रिश्ता खराब जाता है मुझसे
खुद को पूरा पूरा झोंक देने के बाद भी
why....
Urvashi Oza
सो काम होते हुए भी मैं ही क्यों एक बेकार हु
क्यों भटकती रहती हु किसी की तलाश में
અનિકેત ટાંક
યુદ્ધ તો ઘણા થયા છે,
પણ અહીં લડાઈ તલવારની નહીં,
વિચાર અને જ્ઞાનની છે.
“તક્ષશિલા – સિટી ઓફ નૉલેજ”
27 ભાગ સુધી આવી પહોંચી છે,
પણ મૂળ પ્રશ્ન હજી પણ ખુલ્લો છે:જો જ્ઞાનને જ સળગાવી દઈએ,
તો બચેલા લોકો ખરેખર જીત્યા ગણાય?જો તમને history + mystery + વિચાર એમ ત્રણેયનો mix ગમતો હોય, તો આ series તમારી માટે છે.
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Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
ठंडी हवा
भीतर से नशीली यादों की ठंडी हवा आती हैं l
तभी सर्द रातें तन मन को भड़का जाती हैं ll
मुलाकात बहुत छोटी ही सही पर हसीन सी l
मुस्कुराहट की लहरे दिल से टकराती हैं ll
तेज बयारो ने इस तरह घेरा डाला हुआ कि l
रात कंबल के गर्माहट से लिपटकर बीती हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Kartik Kule
की सूखे पत्तोसा में बदल जाऊंगा
बातोंसे नहीं में हवाओसेभी टूट जाऊंगा
अगर साथ मेरा पाना चाहती हो तो याद रखना में इसेहि बिखर जाऊंगा
- Kartik Kule
Kartik Kule
इतनाही रूठे हो हमसे कभी तो हमे रुलाया करो
जलती चीतापार हमको लिटाकर फ़िरसे न बुलाया करो
- Kartik Kule
Sonu Kumar
#14 भारतीय राष्ट्रिय नागरिकता रजिस्टर
NRCI - National Register for Citizenship of India
विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अनुसार भारत में 2 करोड़ के लगभग अवैध आर्थिक विदेशी (illegal economic imigrant) रह रहे है। असम, बंगाल, पूर्वोत्तर के अलावा ये पूरे भारत में फैले हुए है। इन अवैध विदेशियों में प्रताड़ित शरणार्थी भी है, और आर्थिक अवसरों की तलाश में आये विदेशी (illegal economic migrant) भी है। इनकी वजह से भारत के संसाधनों पर भार बढ़ रहा है, और ये हमारी आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा है। इन अवैध विदेशी निवासीयों में से कई समूह हिंसक अपराधो एवं तस्करी आदि में भी लिप्त है। यदि पाकिस्तान एवं चीन इन्हें बंगलादेशी सीमा के माध्यम से हथियार भेजना शुरु कर देते है तो ये अवैध विदेशी निवासी भारत में एक हिंसक गृह युद्ध शुरू कर सकते है।
गृह मंत्री श्री अमित शाह ने सन 2019 में संसद में भरोसा दिलाया था कि जल्दी ही वे देश व्यापी NRC का ड्राफ्ट लायेंगे। किन्तु सरकार ने अभी तक NRC का ड्राफ्ट तक सामने नहीं रखा है। असम में NRC का जो ड्राफ्ट लागू किया गया था, उसमें गंभीर विसंगितियों एवं कमियां थी। उदाहरण के लिए असम का NRC न तो अवैध रूप से रह रहे आर्थिक विदेशियों को चिन्हित करता है, और न ही उन्हें डिपोर्ट करने की कोई व्यवस्था देता है। दुसरे शब्दों में, CAA एवं असम में किये गए NRC ने इस समस्या का समाधान नहीं किया है, बल्कि इस तरह की प्रोपेगेंडा खड़ा कर दिया है कि इस समस्या को सुलझा लिया गया है। हमारे द्वारा प्रस्तावित NRCI में इस तरह के प्रावधान किये गए है कि यह कानून आने के 1 वर्ष के भीतर सभी अवैध आर्थिक विदेशी या तो डिपोर्ट कर दिए जायेंगे या फिर स्वयं ही अपने मुल्कों में लौट जायेंगे।
प्रस्तावित NRCI क़ानून में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (National Register for Citizens of India) बनाने की प्रक्रिया दी गयी है। गेजेट में प्रकाशित होने के साथ ही नागरिकता रजिस्टर बनने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी। इस क़ानून को मनी बिल / धन विधेयक के रूप में लोकसभा से पास करके गेजेट में छापा जा सकता है। नागरिकता रजिस्टर बनाने की पूरी प्रक्रिया देखने के लिए पूरा ड्राफ्ट इस लिंक पर देखें Tinyurl.com/Nrcindia
1. यह क़ानून निम्नलिखित कार्य करेगा :
a. अवैध विदेशीयों को (illegal immigrant) भारत से निष्कासित करेगा।
b. प्रताड़ित शर्णार्थियो (persecuted refugee) को शरण देगा।
c. नागरिकता रजिस्टर (national citizenship register) बनाएगा।
2. प्रस्तावित NRCI क़ानून के अनुसार, ऐसे विवाद की स्थिति में कि कौन अवैध आर्थिक विदेशी है और कौन प्रताड़ित शरणार्थी है, का अंतिम फैसला नागरिको की जूरी करेगी, जज नहीं।
3. प्रधानमंत्री एक राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्ट्रार (NCRO) की नियुक्ति करेंगे। राष्ट्रीय रजिस्ट्रार सभी राज्यों में राज्य नागरिकता रजिस्ट्रारों एवं जिला रजिस्ट्रारो की नियुक्ति करेगा। राष्ट्रिय रजिस्ट्रार प्रधानमंत्री की अनुमति से जिला कलेक्टरों को जिला रजिस्ट्रार के रूप में नियुक्त कर सकता है, या इच्छित जिलो में अलग से जिला रजिस्ट्रारो की नियुक्ति भी कर सकता है।
4. राष्ट्रीय रजिस्ट्रार एवं उसका स्टाफ वोट वापसी पासबुक एवं जूरी मंडल के दायरे में रहेगा। ताकि यदि राष्ट्रिय रजिस्ट्रार अपना काम त्वरित एवं निष्पक्ष ढंग से नहीं कर रहा है तो नागरिक वोट वापसी पासबुक का इस्तेमाल करके उसे बदल सके।
राजवर्ग प्रजा के अधीन रहना चाहिए, वर्ना वो प्रजा को लूट लेगा और राज्य का विनाश होग
Urvashi Oza
अल्काजी की आवाज पर झूमने वाली मैं ,
जगजीतजी को सुनकर रिलेट करती रहती हूं
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹 आपका दिन मंगलमय हो 🌹
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
सदा दूसरे भाग्य पर, जो करता निर्वाह। सदैव रहता दुखी वह, रखता मन में डाह।।
दोहा ---४०१
(नैश के दोहे से उद्धृत)
-----गणेश तिवारी 'नैश'
Abantika
"कंधों पर बस्ते का बोझ था, तब मन स्थिर था...
अब कंधों पर ज़िम्मेदारियां हैं, तो मन विचलित है।
ये एडल्टहुड भी अजीब है दोस्त,
आज़ादी तो मिली, पर सुकून कहीं खो गया है।"
"बचपन में माँ की उँगली पकड़ कर चलते थे तो गिरने का डर नहीं था। आज एडल्टहुड में अकेले चल रहे हैं और डर ये नहीं कि हम गिरेंगे, डर ये है कि अगर हम गिर गए तो माँ-बाप का भरोसा टूट जाएगा। ये ज़िम्मेदारी का बोझ ही सबसे बड़ा 'विचलन' पैदा करता है।"
"एडल्टहुड एक ऐसी फिल्म है जिसका 'ट्रेलर' तो हमें बड़ा फैंसी दिखाया गया था, लेकिन 'मूवी' शुरू होते ही पता चला कि यहाँ तो हर सीन में सस्पेंस और स्ट्रगल है। पर याद रखना, विचलित वही होता है जो चल रहा है। जो बैठा है, वो तो जड़ है।"
"अजीब कशमकश है न? कल तक हम अपनी मर्ज़ी के मालिक बनना चाहते थे, और आज जब अपनी मर्ज़ी चलाने का वक्त आया, तो ज़िम्मेदारियों के बोझ ने मन को विचलित कर दिया है। कभी-कभी रात को छत की तरफ देखते हुए ये खयाल आता है कि क्या हम वाकई वही बन रहे हैं जो हम बनना चाहते थे? या फिर सिर्फ 'बड़े' होने की इस भीड़ में शामिल होकर अपनी पहचान कहीं खो दी है। एडल्टहुड की इस दौड़ में हम अक्सर दूसरों को खुश करने के चक्कर में खुद से ही विचलित हो जाते हैं। पर शायद, यही भटकाव हमें ये सिखाने आता है कि दुनिया की भीड़ में सबसे ज़रूरी इंसान, जिसे हमें ढूंढना है, वो हम खुद हैं।"
"दोस्त, क्या आपको भी कभी लगता है कि एडल्टहुड एक ट्रैप है? अपनी बात कमेंट्स में बताओ।"
softrebel
जीवन: ज़िंदगी का रंगमंच
और फिर दीवारों की कैद में
रह जाती हैं निशानियाँ सभी,
आदमी उड़कर पाताल हो जाता है।
जब बनती हैं आपातकालीन स्थितियाँ,
साँसें थमते ही
धरती आकाश हो जाता है।
न प्रेम जीवित रहता है,
न प्रेमिका —
बस आँखों में आने वाले कल के लिए
उजास रह जाता है।
टिक-टिक करती
निरंतर बजती
घड़ियों की सुइयाँ,
और देखो — साथ बैठा इंसान
कैसे ज़िंदगी के रंगमंच से
पास हो जाता है।
रोने-बिलखने की आवाज़ें भी
उसे सुनाई नहीं देतीं ,
वह तो बस
एक बीता हुआ एहसास
हो जाता है।
जिंदगी के रंगमंच से मिलती हार भैया–
कई बार चलता फिरता इंसान भी
जिंदा लाश हो जाता है।
_softrebel_
#path #life #journey
Nadwika
विस्मृति......
विस्मृत हुए वे दिन, जब स्वप्न देखना निर्भय था,
अब स्मृतियाँ केवल पीड़ा का विस्तार करती हैं।
इसलिए, लोगों ने अब स्वप्नों से अधिक,
विस्मरण को अपना लिया है।
aakanksha
मैंने कभी प्रेम को शब्दों में ढालना नहीं सीखा,
बस जब तुम सामने आते हो, दिल खुद बोलने लगता है।
न वादों की ज़रूरत लगी, न कसमें याद रहीं,
तुम साथ हो… बस यही सच सबसे ख़ास लगता है।
Jayvant Bagadia
🙏 *એ મા - બાપ છે* 🙏
____________________
વાચા વિના પણ જે ચહેરાથી શબ્દો સમજી શકાય એ *' મા '* છે.
ભર બપોરે ચંદ્રમાનો અહેસાસ કરાવે એ શીતળતા *' મા '* છે,
જીવનભર ગણતા ગણતા પણ, જે દાખલાનો હિસાબ ન મળે, જવાબ ન મળે તો સમજી લેજો કે એ *' બાપ '* છે,
થપ્પડ મારીને પણ છાને ખૂણે રડીલે એ *' મા - બાપ '* છે,
ખવડાવીને ખાય, ને સુવડાવીને સુવે એ *' મા - બાપ '* છે.
સતયુગ હોય કે કળયુગ, કોઇપણ યુગમાં ના બદલાય ,
વરસતા વાદળની ભીનાશ, એ *' મા - બાપ '* છે,
હજારો દંશ પછી પણ જેના તનથી નીકળે દૂધની ધારા, એ બીજુ કોઇ નહીં *'મા - બાપ'* છે, *' મા - બાપ '* છે.
*- જયવંત બગડીયા / કવિરાજ*
Jayvant Bagadia
પુ.પ્રસન્નકિર્તિ મ.સા., ભવ્યકિર્તિ મ.સા. નો ધર્મ રસથાળ
__________________________________________
પુ.પ્રસન્ન્ કિર્તિ મ.સા..ભવ્યકિર્તિ મ.સા.નો ઘરુ ધર્મ રસથાળ.
બુદ્ધિ સાગર સૂરી , સુબીધ સાગર સૂરી ના છે ધર્મ વારસદાર,
સાગર ના એ પાત્ર માં , ગાગર માં ભર્યા મીઠા જળ ભંડાર,
સુખ સંપતિ ત્યાગી બધી, પ્રભુ , ફકત માર્ગ એક કરવા ભવ પાર,
પુર્વ જન્મ ની સુવાસ , સાથે આ જન્મ ના પુણ્ય નો ભરેલો થાળ ,
સતાવધાનિ જ્ઞાન ભરી , શિષ્યો ને રાહ ધરનાર........
બાળ સાથે બાળ બની , ધર્મ જ્ઞાન ભંડાર પીરસનાર,
મીઠો ટહુકો સૌને ગમે, ન આવે જરીક પણ કંટાળા નો ભાવ.
જુગ , જુગ જીવો , ભવો ભવ જીવો જૈન ધર્મ ના અવતાર ,
પુ. પ્રસન્ન કિર્તિ મ.સા., ભવ્યકિર્તિ મહારાજ સાહેબ..
જયવંતભાઇ બગડીયા / કવિરાજ
,,
Jayvant Bagadia
વર્ષ ૨૦૨૫ ની વિદાય સાથે ૨૦૨૬ નુ આગમન.
_____________________________________
વૃક્ષ ના મીઠા ફળો ને , ૨૦૨૫ ની ડાળી થી તોડી લઇએ હવે,
શ્વાસ મા ગમતી સુગંધ લઇ , હૃદય નો દરીયો ભરી લઇએ હવે,
મીઠા સપના આંખો માં ભરી, ખારા પાણી ને તજી દઇએ હવે,
દર્દ બધા ,૨૦૨૫ સાલની વિદાય સાથે ચાલો ભુલી જઇએ હવે,
ખારા પાણીની લહેરો ને , સમંદર નાકિનારા ને ધરી દ ઇએ હવે,
આવતી પવન ની લહેરખી સાથે,જીવન ની મજા લઇ લઇએ હવે,
નવુ આવે ને જૂનૂ જાય એ કુદરત ના ક્રમ ને સ્વીકારી લઇએ હવે,
ચાલો ને ૨૦૨૬ના વર્ષ ને , હૈયાના હર્ષ થી વધાવી લઇએ હવે,
જયવંતભાઇ બગડીયા / કવિરાજ
Jayvant Bagadia
કાગળ ની હોડી જે આસમાન પર પહોંચી છે્
__________________________________
ગાંધી.,સુભાષ , નહેરૂ , તિલક, જેની બલિદાનો ની ગાથા છે,
આજ પ્રજાસતાક દિન નો તિરંગો, જે 'આશિયાના' ની માથે છે,
કાગળ ની હોડી માં નીકળી , આજ આસમાન પર પહોચે છે,
ચાંદ મંગલ ની ધરતી પર , આજ આપણો તિરંગો ફરકે છે.
આત્મા આંબેડકર નો જે આપણા બંધારણ માં બેઠો છે ,
નરેન્દ્ર શાસન માં આજ , મોદી તણો એ પહેરો છે ,
નજરો થી નજર મિલાવી છે , ના મસ્તક કદી ઝુકાવ્યુ છે
ટ્રમ્પ , U.S.A .ને કહી દેજો , આ સાર્વભોમત્વ અમારૂ છે.
જય હિદ - જય હિંદ જય ભારત ્્્્્
જયવંતભાઇ બગડીયા / કવિરાજ
Nisha ankahi
कुछ लोग शोर छोड़ते हैं,
कुछ लोग शो छोड़ते हैं,
और कुछ…
पूरे देश को चुप करा कर चले जाते हैं।
समय किसी से ताली नहीं माँगता,
बस पर्दा गिरा देता है
बिना एनकोर, बिना सवाल।
- Nisha ankahi
Niya
હવે મેસેજ કરવો પણ અઘરો લાગે છે,
કારણ કે તું ‘મારો’ નથી…
પણ મન તો આજે પણ તને જ શોધે છે…
M K
बड़े प्यार से संभाल कर रखी थी मैं
उस रिश्ते को,
आज उसी के वजह से आंखों में कहानी है..।।😢
- M K
Shraddha Panchal
जब आप किसी की फितरत
नहीं बदल सकते तो ,
बेहतर है की आप ,
अपना रास्ता बदल ले 🙏🧡🩶
Apurv Adarsh
डूबते देश की कहानी
राजा गंवार, मंत्री लुटेरे , प्रजा नपुंसक ।
Shivam Kumar Pandey
उद्भवस्थितिसंहारकारिणीं
क्लेशहारिणीम् ।
सर्वश्रेयस्करीं सीतां
नतोऽहं रामवल्लभाम् ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
उद्भव – सृष्टि / उत्पत्ति
स्थिति – पालन / स्थिति बनाए रखना
संहार – संहार / विनाश
कारिणीं – करने वाली / क्रियान्वित करने वाली
क्लेश – दुःख / पीड़ा
हारिणीम् – हरने वाली / समाप्त करने वाली
सर्व – सभी / सम्पूर्ण
श्रेयः – कल्याण / श्रेष्ठ फल
करीं – करने वाली / प्रदान करने वाली
सीतां – सीता को / माता सीता
नतः – नतमस्तक / झुका हुआ
अहम् – मैं
रामवल्लभाम् – श्रीराम की प्रिय / श्रीराम की पत्नी
---
सरल हिंदी अनुवाद:
मैं श्रीराम की प्रिय पत्नी, माता सीता को नमन करता हूँ,
जो सृष्टि, पालन और संहार की अधिष्ठात्री हैं,
जो समस्त क्लेशों को हरने वाली हैं,
और जो सभी प्रकार के कल्याण को प्रदान करने वाली हैं।
M K
लोगों को दर्द देने में मजा आता है...
और हमें उस दर्द को जीने में,,,,
मुस्कुराहट मेरी छिन कर तुम कब तक खुश रहोगे
एक दिन... बेतहाशा आंसू तुम्हारे आंखों से भी गिरेंगे,,,
- M K
Bhavna Bhatt
કોઈને ડફોળ નાં સમજવા
InkImagination
good night
bhavesh
પૈસા તો કમાઈ લેવાય, પણ સાચા માણસો મેળવવા અઘરા છે. જેણે તમને શૂન્યમાંથી બેઠા કર્યા હોય એને ક્યારેય ભૂલતા નહીં. ❤️
તે વ્યક્તિને ટેગ કરો અથવા આ રીલ તેમને મોકલો! 📩
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
जहां आग लगी हो...
Mohit Nath
!बहुज खुश नसीब है हम
जो तुम्हारा साथ मिला है !!
- Mohit Nath
રોનક જોષી. રાહગીર
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Akanksha srivastava
फूटपाथ पर बिकती जिदंगी
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फूटपाथ में ना सिर्फ सामानें बिकती है,
बल्कि यहाँ पर बिकती है, किसी की उम्मीदें,
किसी के सपनें, किसी बेबस, लाचार पिता के अधूरे ख्वाइशें को पूरा कर पाने की चाहतें।
ये उन चेहरे पर खुशियाँ सजाते है, जिनके कदम शायद उन महंगे शोरूमों को कभी पार कर पाते।
यहाँ ना सिर्फ हर रोज दुकानें सजती है,
हर एक दुकान के साथ सजते हैं कितने सारे ख्वाब
वो ख्वाब जिन्हें हकीकत की जमीन मिलना शायद मुकद्दर में ही नहीं।
वो जो कांच के ऊँचे ऊँचे दीवारों के पीछे जो ब्रांडेड कपड़ों के पीछे जो मुस्कुराते हुए टैग है,
उन्हें निहारती वो बेबस, पथरायी आँखों में चमक दे जाती है वो फूटपाथ पर करीने से सजी दुकानें।
जेब में खनकते सिक्के और वो चंद नोटें से भी पूरी हो जाती है वो सारी हसरतें, वो सारे अधूरे ख़्वाब।
सड़क पर बिकती वो सारी चीजें ना सिर्फ सामानें है,
बल्कि इनसे जुड़ी है किसी का सकून किसी का सम्मान।
ये सिर्फ बाजार की रौनक नहीं, उम्मीदों के चमकते सितारे है।
ये दुकानें ही तो उन लाचारों के फरिश्तें प्यारे है।
Shivam Kumar Pandey
सीतारामगुणग्रामपुण्यारण्यविहारिणौ ।
वन्दे विशुद्धविज्ञानौ
कवीश्वरकपीश्वरौ ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
सीताराम – सीता और राम (भगवान राम और माता सीता)
गुणग्राम – गुणों का समूह / सद्गुणों की भीड़
पुण्यारण्य – पुण्य से पवित्र हुआ वन / पावन वन
विहारिणौ – विचरण करने वाले (द्विवचन – दो व्यक्तियों के लिए)
वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
विशुद्ध – पूर्णतः शुद्ध / निर्मल
विज्ञानौ – ज्ञानस्वरूप दोनों / दिव्य ज्ञान से युक्त (द्विवचन)
कवीश्वर – श्रेष्ठ कवियों के ईश्वर / वाणी के अधिपति
कपीश्वरौ – वानरों के स्वामी (श्रीराम और हनुमान के रूप में) / वानरराज
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सरल हिंदी अनुवाद:
मैं उन सीता और राम की वंदना करता हूँ, जो गुणों के समूह से युक्त हैं, पुण्य से पवित्र वनों में विचरण करते हैं,
जो पूर्णतः शुद्ध ज्ञानस्वरूप हैं, श्रेष्ठ कवियों के अधिपति और वानरों के स्वामी हैं।
Saroj Prajapati
जब तक चुपचाप सब सहते रहे
दुनिया वाले हमें अच्छा इंसान कहते रहे
जब उठाई हमने अपने हक में आवाज़
तबसे दुनिया कहने लगी हमें बुरा इंसान ।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Suraj Prakash
https://youtube.com/shorts/KidfuDKctw4?si=5-aM-KbVTylB17Qp
"गरीब लड़के ने जादुई कुएं से माँगी एक इच्छा, आखिर में जो हुआ... 😱🔥 | Heart Touching Story"
Suraj Prakash
https://youtu.be/v6KSp6cwZ0w?si=BDQTIM12ufnxwQjF
ek archana arpan tane
હું શું કહું કે તારો સાથ કેવો છે આ એક માણસ મારી પુરી કાયનાત જવો છે.
- ek archana arpan tane
Imaran
Ek tu teri aawaz yaad aayegi,
Teri kahi huwi har baat yaad aayegi,
Din dhal jayega raat yaad aayegi,
Har lamha pahli mulakat yaad aayegi.
🫶imran 🫶
Zakhmi Dil AashiQ Sulagte Alfaz
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Shivam Kumar Pandey
वन्दे बोधमयं नित्यं
गुरुं शङ्कररूपिणम् ।
यमाश्रितो हि वक्रोऽपि
चन्द्रः सर्वत्र वन्द्यते ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
बोधमयं – ज्ञानस्वरूप / पूर्णतः चेतना से युक्त
नित्यं – सदा / हमेशा
गुरुं – गुरु को / आध्यात्मिक शिक्षक को
शङ्कररूपिणम् – शंकर (भगवान शिव) के स्वरूप वाले
यम् – जिसको / जिसे
आश्रितः – आश्रय लिया / शरण लिया
हि – निश्चय ही / वास्तव में
वक्रः – टेढ़ा / टेढ़े स्वभाव वाला
अपि – भी
चन्द्रः – चंद्रमा
सर्वत्र – हर जगह / सर्वत्र
वन्द्यते – पूजित होता है / सम्मानित होता है
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सरल हिंदी अनुवाद:
मैं उस गुरु की वंदना करता हूँ, जो ज्ञानस्वरूप हैं, सदा विद्यमान हैं, और शंकर (भगवान शिव) के समान हैं।
जिनका आश्रय लेकर टेढ़ा (दाग वाला) चंद्रमा भी सर्वत्र पूजनीय बन गया।
Dhamak
मेरा मोबाइल (मेरे लिए खास)
मैं और मेरा मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं
इस भागती-दौड़ती दुनिया में, वक्त कहाँ अब किसी के पास
ये बेजान सा एक खिलौना ही, अब लगता है सबसे खास
मैं और मेरा मोबाइल
जिंदगी के भंवर में उलझकर, जीना ही हम भूल गए
रिश्तों की उस मीठी धूप को, सीना ही हम भूल गए
घर में कितने लोग हैं रहते, कौन कहाँ क्या करता है
सब याद दिलाना पड़ता है, अब दिल कहाँ कुछ पढ़ता है
कभी खेलता हूँ मैं इसके संग, कभी इस पर झुंझलाता हूँ
हूँ तन्हा मगर इस महफिल में, अपना हर हाल सुनाता हूँ
मशीन नहीं अब ये जैसे, घर का इक सदस्य बन गया
मेरे सूनेपन की यादों का, ये पक्का हमदर्द बन गया
ढमक और उसका मोबाइल, अक्सर बातें करते हैं
जो कह न पाए अपनों से, वो बातें इससे करते हैं
Shivam Kumar Pandey
भवानिशङ्करौ वन्दे
श्रद्धाविश्वासरूपिणौ ।
याभ्यां विना न पश्यन्ति
सिद्धाः स्वान्तःस्थमीश्वरम् ।।
शब्दार्थ (एक-एक शब्द का अर्थ):
भवानि – पार्वती देवी का नाम
शङ्करौ – शिव और पार्वती (द्विवचन में)
वन्दे – मैं वंदना करता हूँ / प्रणाम करता हूँ
श्रद्धा – आस्था, समर्पण
विश्वास – भरोसा, निष्ठा
रूपिणौ – जिनका स्वरूप है / जो रूपधारी हैं (द्विवचन)
याभ्यां – जिन दोनों के द्वारा
विना – बिना
न – नहीं
पश्यन्ति – देखते / अनुभव करते
सिद्धाः – सिद्ध पुरुष / आत्मसाक्षात्कार प्राप्त योगी
स्वान्तःस्थम् – अपने अंतःकरण में स्थित
ईश्वरम् – परमात्मा / भगवान
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सरल हिंदी अनुवाद:
मैं शिव और पार्वती की वंदना करता हूँ, जो श्रद्धा और विश्वास के रूप में प्रकट होते हैं।
जिनके बिना सिद्ध पुरुष भी अपने हृदय में स्थित ईश्वर का दर्शन नहीं कर सकते।
રોનક જોષી. રાહગીર
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Shivam Kumar Pandey
संपूर्ण श्रीरामचरितमानस,भाग 1
वर्णानामर्थसंघानां
रसानां छन्दसामपि ।
मङ्गलानां च कर्त्तारौ
वन्दे वाणीविनायकौ ॥
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एक-एक शब्द का अर्थ (सरल भाषा में)
वर्णानाम — वर्णों का, अर्थात् अक्षरों का।
अर्थसंघानाम — अर्थों के समूहों का, या अर्थ की रचना का।
रसानाम — रसों का, जैसे काव्य के भाव: श्रृंगार, वीर, करुण आदि।
छन्दसामपि — छंदों का भी; 'अपि' का अर्थ है 'भी'।
मङ्गलानां — शुभ कार्यों का, मंगलमय बातों का।
च — और।
कर्त्तारौ — कर्ता (रचयिता), यहाँ द्विवचन है — दो रचयिता।
वन्दे — मैं वंदना करता हूँ, नमन करता हूँ।
वाणीविनायकौ — वाणी अर्थात् देवी सरस्वती, और विनायक अर्थात् भगवान गणेश।
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सरल हिंदी अनुवाद
जो अक्षरों, अर्थों, रसों, छंदों और शुभ कार्यों के रचयिता हैं — ऐसे वाणी (सरस्वती) और विनायक (गणेश) को मैं नमस्कार करता हूँ।
Paagla
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Shivam Kumar Pandey
[पृष्ठ 4]
भूमिका
श्रीरामचरितमानस केवल काव्य रचना नहीं,
अपितु मानव जीवन को मर्यादा, भक्ति और धर्म के पथ पर
आगे बढ़ाने वाला एक जीवन-दर्शन है।
इस महान ग्रंथ में वर्णित आदर्श —
मर्यादा, करुणा, संयम, भक्ति और धर्म —
मानव के आचरण, विचार और दृष्टि को
संतुलित और पवित्र बनाते हैं।
इस हिन्दी प्रस्तुति में मूल अवधी पाठ के
भाव, आशय और अंतर्निहित संदेश को
सरल, सहज और प्रवाहपूर्ण हिन्दी भाषा में
यथासंभव स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है,
ताकि पाठक ग्रंथ के भाव से
आंतरिक रूप से जुड़ सके।
यह प्रयास विशेष रूप से उन पाठकों के लिए है
जो अवधी भाषा से पूर्णतः परिचित नहीं हैं,
परंतु श्रीरामचरितमानस के
आध्यात्मिक, नैतिक और जीवनोपयोगी संदेश को
समझना और आत्मसात करना चाहते हैं।
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Shivam Kumar Pandey
[पृष्ठ 3]
समर्पण
यह ग्रंथ
श्रीराम के चरणों में
तथा
सभी रामभक्तों को
सादर समर्पित है।
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Shivam Kumar Pandey
[पृष्ठ 2]
॥ श्रीरामचरितमानस ॥
मूल पाठ : गोस्वामी तुलसीदास जी
सरल हिन्दी अनुवाद : शिवम कुमार पाण्डेय
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यह ग्रंथ श्रीरामचरितमानस के मूल अवधी पाठ के साथ
सरल, स्पष्ट एवं भावानुकूल हिन्दी अनुवाद प्रस्तुत करता है।
इस अनुवाद का उद्देश्य —
• मूल भाव को अक्षुण्ण रखना
• आधुनिक पाठक के लिए सरल भाषा देना
• अध्यात्म को जनसुलभ बनाना
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