Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Pandya Rimple

यदि कोई खड्डे में गिरने के लिए तय करके आगे बढ़ रहा हो, तो तुम उसे कितना भी रोकने की कोशिश कर लो वह गिर कर ही मानेगा, और बाद में यकीन मानो खूब पछताएगा। -Pandya Rimple @shabdo_ni_suvas_

સુરજબા ચૌહાણ આર્ય

અમારું વતન 🥰😊

Soni shakya

सजी नहीं बारात तो क्या.. आई ना मिलन की रात तो क्या.. बिन फेरे हम तेरे.. बिन फेरे हम तेरे.. - Soni shakya

Prithvi Nokwal

कुछ इसलिए भी खास था नानी का घर क्योंकि वहां, मेरी मां को भी मां का प्यार मिलता था...❤️

Komal Arora

हमेशा हम ठीक हो जरूरी नहीं कई बार दूसरे की परिस्थिति हम से भी अधिक असहनीय होती है....... पर कहते हैं ना कुछ गम की नुमाइश करके खुश हो जाते है........ और कुछ सह कर........... worse but true always respect others prospectives also........

Desai Pragati

कोमलताविहीन है जैसे कोई पेड़ बिना हरी पतिया और डाली के, जैसे कोई बाप अपने पुनर्जन्म की दादीअम्मा बनके डांटने वाली कै..!🌻🫂

Raushan kumar

#12. मोहब्बत में दिल की खामोशी समझने वाले को,कुछ दिन बाद चीखें तक सुनाई नहीं देती। रौशन कुमार केसरी 29.12.2025

Raushan kumar

#11. आज उसने मुझे अपनी नजरों से उतारा है, जिसे मैंने कभी अपनी निगाहों में छुपाया था, आज उसे मेरे नाम से भी नफरत हैं जिसके नाम को मैंने रेत पर लिखकर कभी फूलों से सजाया था गलती उसकी नहीं शायद मेरा हीं हैं, मैंने हकीकत छोड़ ख्वाबों की दुनियाँ मे आशियाना बनाया था :- रौशन कुमार केसरी 18.01.2026

Raushan kumar

#10. इस साल भी सावन आया था हवा के साथ कुछ बुँदे साथ लाया था, पंछियो की चहक, फूलों की महक, तितलियों से भरा पुरा अकाश था, मेरे पास तेरा होने का एहसास था फिर भी मुझे बस तेरा तलाश था, मुझे लगा तु कहीं से दौड़ कर आयेगा और मेरे सीने से लग जायेगा, पर अब ऐसा कहाँ हो पाता हैं तु जो एक बार जाता हैं बरसों लौटकर न आता हैं, तु तो कहता था हर सावन में आऊँगा पर्व-त्योहार, हर मांगलिक पावन (शुभ कार्य) में आऊँगा, क्या तुम्हें माँ की याद नहीं आती या फिर तेरे शहर में पर्व-त्योहार या बरसात नही आती, तेरे बिना...... चहकती गालियाँ विरान, अपना घर सुनसान, घर का आंगन लगता हैं मुझे अंजान, आखिर कब तु चहकता हुआ आयेगा, कब मेरी ममता तुझपर फूलों की तरह छायेगा, तेरे इंतेजार मे दिन-रात रस्ते देखें हैं, मैंने बरसो मौसम बदलते देखें हैं, मैं जानती हूँ तु दुनियाँ की भीड़ मे खोया होगा हर रात माँ की याद में सोया होगा, तुझपर जिम्मेदारियों का बोझ हैं, अब तु दौड़ता-भागता हर रोज हैं, आख़िर क्यों इतना बड़ा हुआ माँ की गोद छोड़ अपने पैरों पर खड़ा हुआ, कल तक था तु दुनियाँ में अंजान, आज तेरा खुद का हैं एक पहचान, मेरी दुआएं हमेशा तेरे साथ रहे,तेरे चेहरे की मुस्कान हमेशा आबाद रहें, कल तेरे याद में सोयी थी, तेरे ख्यालों में कहीं खोयी थी, एक पल ऐसा लगा, जैसे तु घर को आया था बाहर जाकर देखी तो वहाँ बस पेड़ का छाया था... इस साल भी सावन आया था हवा के साथ बस तेरी यादें साथ लाया था..... :- रौशन कुमार केसरी 05.01.2026

Raushan kumar

#9. कभी सोचा न था कि तु मुझे इतना जलील करेगी किसी गैर के लिए मुझसे दलील करेगी, तेरी याद में पागल न हो जाऊँ इस हद तक मुझे, तूने मजबूर किया, भरी महफ़िल में उसे हार पहनाकर मेरी भावनाओं को तूने चकनाचूर किया, मैंने....देखा हैं तेरी आँखों में... 2 वो गैर नही शायद तेरा कोई अपना हैं तु अब उसपे मरती हैं ये मुझे अब भी लगता कोई सपना हैं, करके उससे ब्याह तूने बेवफाई की सारी हदें पार कर दी, लाँघकर उसके दहलीज को तूने मेरे दिल की शरहदें पार कर दी। :- रौशन कुमार केसरी 25.12.2025

Raushan kumar

#8. दिल ऐसे तोड़ के गयी हैं जैसे कभी अपना था हीं नहीं, अब मुझे लगता हैं कभी तुमसे हाल-ए-दिल बयां करना था हीं नहीं, कुछ दिन पहले तु मुझपे मरती थी मेरे एक दीदार को तरसती थी, कल तूने मुझसे नजरे ऐसे चुराई जैसे मैं कभी अपना था हीं नहीं, क्या तुम वही हो जिसके ख्यालों में आता था जिसके सपनों को मैं सजाता था, कैसे अकिं कर लूँ कि तुम बदली नहीं हो कल जो मैंने तुम्हें उसके साथ देखा वो कोई सपना था हीं नहीं । :- रौशन कुमार केसरी 15.12.2025

Soni shakya

मन संतुष्ट हैं ये जानकर कि, कुछ पल ही सही.. "वो पूरी तरह हमारे थे" - Soni shakya

Raushan kumar

#7. हाल ए दिल जहाँ बयां कर सकूँ ऐसी कोई जगह नही, बहती नदियों का कोई एक सतह नहीं, तुम कहती हो तुम्हें मुझपर अब ऐतबार नहीं, मैं तुमपे आज भी मरता हूँ इसकी कोई एक वजह नहीं । :- रौशन कुमार केसरी 11.12.2025

Raushan kumar

#6. बात बात पर आंसू क्यूँ आ रहा हैं आँखे कमजोर हो गयी हैं या दिल, ये हवाएं इतनी शिथिल क्यों हैं कोई इनसे कहता क्यों नहीं कि मेरे महबूब से जाके मिल, तुम कहती हो तुम्हें अब किसी से मोहब्बत नहीं होगा, अगर मैंने तुम्हें गलत शाबित न किया तो कहना एक बार मुझसे आके तो मिल, मुझसे आके मिल मेरे पास बैठ पूछ मुझसे मेरा हाल-ए-दिल, मिला मुझसे आँखें सांसें गरम धड़कने तेज न हुआ तो कहना, लगा मुझे गले अगर रुक न जाए इन हवाओं का बहना तो मुझसे कहना, तेरे चेहरे का नूर, तेरे बदन का शुरूर, तेरे कान की बाली, तेरे होठों की लाली, तेरे चूड़ियों की खनक, तेरे पायल की झनक, तेरे पैरों की नूपुर इन सब को होगा तुझपे गुरुर, जो तेरे आँखों में हों काजल तो फीके पड़ेंगे ये आसमां के बादल, मेरे दिल की धड़कने मेरे प्यार का गवाही देगा तेरे दिल में एक अजब सा तबाही होगा , तुझे फिर भी प्यार न हुआ तो कहना...बस एक कदम मेरी ओर बढ़ाकर देख, मुझे अपना गले लगाकर देख........! :- रौशन कुमार केसरी 11.12.2025

Raushan kumar

#5. हमको आदत लग चुकी हैं महफ़िलों की अब अकेले रहने में घुटन होता हैं, अकिं करो मैं वही हूँ जो बरसों गुजारा हैं अकेले बंद कमरे में, और आज अंधेरे से भी मुझे चुभन होता हैं, इसमें उसकी क्या गलती हैं ..? ये तो वक्त का एक चलन होता हैं, कि अपने दिल पर मेरा नाम लिखने वाली उस लड़की को आज मेरे नाम से भी जलन होता हैं। :- रौशन कुमार केसरी 05.12.2025

Raushan kumar

#4. मैं नजर नही आऊँगा फिर भी तुम छुपा नहीं पाओगी, अपने मन के शीशे से मेरा चेहरा हटा नहीं पाओगी, जो तुझपे बीतेगी वो हाल-ए-दिल किसी को बता भी नही पाओगी तुम्हें लगता हैं मुझे छोड़कर खुश रह लोगी तुम, मैं वो हकीकत हूँ जिसे जीते-जी तुम भुला नहीं पाओगी। :- रौशन कुमार केसरी 05.12.2025

Raushan kumar

#3. इस रात का कोई सवेरा तो होगा, उसकी यादों के समंदर में कोई बसेरा तो होगा, मेरे बिस्तर ने समंदर जितनी बेचैनियाँ समेटें हैं खुद में, हजारों सवाल, हजारों ख्वाहिशें हर रोज डूबता हैं इसमें, बस एक सवाल जो हर पल कुढता हैं मेरे मन में, कि यहाँ परिंदों का भी एक हीं आशियाना होता है तेरा कोई एक निश्चित बसेरा तो होगा, इस रात का कोई सुनहरा सवेरा तो होगा.......? :- रौशन कुमार केसरी 10.11.2025

Raushan kumar

#2. एक वक्त था जब मेरे हाथों मे तेरा हाथ था, मेरे नजरों मे तेरे सपनों की एक औकात था, मेरा औरों से भी बातचित में तेरा एक बात था, और आज तन्हाई में अकेला खड़ा ना मेरे हाथों मे तेरा हाथ हैं, ना मेरे नजरों में तेरे सपनों की कोई औकात हैं, ना हीं मेरे बातों में तेरा कोई बात हैं, हाँ अगर कुछ है तो मेरे मन में हर रोज उमड़ते हजारों सवाल हैं, इस शहर में चारों तरफ फैला मेरा हजारों काल (उसके आशिक़) है, मैंने जो की थी तुमसे मोहब्बत वो आज एक मिसाल हैं, आखिर क्यु तुम्हें मेरे जज्बातों की कदर नहीं, तेरे दिल में मेरे लिए सबर नहीं, तुम्हें मेरे प्यार पर फ़कर नहीं, तेरे बातचित में मेरा जिकर नहीं, आखि़र क्या हैं इन सवालों का जवाब? तेरा वो शाम को रूठ जाना या सुबह की बहानेबाज़ी या दिन का मेरा खुली आँखों का ख्वाब, बता मेरे इन सवालों का क्या हैं जवाब....? :- रौशन कुमार केसरी 01.11.2025

Soni shakya

मन संतुष्ट है ये जानकर कि , कुछ पल ही सही पर.. "वो पूरी तरह हमारे थे" - Soni shakya

Raushan kumar

#1. पहले सोया करता था जल्दी मैं रातों को अब तो बस याद करता हूँ तेरी बीती बातों को, तू मिलेगी नहीं मुझे ये अकिं हैं फिर भी न जाने इस दिल को एक आश हैं तेरे वादों की... :- रौशन कुमार केसरी 01.08.2025

Soni shakya

प्रेम का मतलब पाना नहीं राधा होना है, और जहां स्वार्थ खत्म राधा शुरू..!! - Soni shakya

Archana Singh

जरूरी नहीं कि... हर बार ये आंखें ही रोएं ...! कभी-कभी ये दिल भी रोता हैं ...!! अर्चना सिंह ✍🏻 - Archana Singh

archana

कलयुग में कहा जाता है कि राक्षस बाहर नहीं होंगे, वे इंसान के भीतर जन्म लेंगे। मन में बैठा राक्षस ही सबसे बड़ा शत्रु होगा, वही अधर्म बनेगा, वही अत्याचार करेगा। और युद्ध भी होगा… पर तलवारों से नहीं, सच्चे लोगों के चरित्र से। जो भगवान की भक्ति करेंगे, सत्य के रास्ते चलेंगे, उन्हीं को सबसे पहले निशाना बनाया जाएगा। क्योंकि कलयुग में बुराई की पहचान चेहरे से नहीं, सोच से होती है। - archana

Saroj Prajapati

कुछ लोग खास होते हैं, हमेशा दिल के पास होते हैं दूरियां नहीं रखती मायने, जब जुड़े जज़्बात होते हैं।। सरोज प्रजापति ✍️ - Saroj Prajapati

Dada Bhagwan

Do You Know that everything is simply an interplay of scientific circumstantial evidences? No one has even the slightest authority or power in this world, so who is going to get away with anything? Find out more on: https://dbf.adalaj.org/TEyb0tfw #doyouknow #facts #spirituality #spiritualfacts #DadaBhagwanFoundation

DEVGAN Ak

हडळ... नविन भयकथा... लवकरच आपल्या भेटीला येत आहे... फक्त घाबरविण्याचा एक हलका प्रयत्न करण्यासाठी... - DEVGAN Ak

Nithya Reddy

7 RULES OF LIFE: 1. Make peace with your past so it won't screw up the present 2. What others think of you is none of your business 3. Time heals almost everything, give it time. 4. Don't compare your life to others and don't judge them. You have no idea what their journey is all about. 5. Stop thinking too much. It's alright not to know the answers. They will come when you least expect it. 6. No one is in charge of your happiness, except you. 7. Smile. You don't own all the problems in the world. - Nithya Reddy

Nithya Reddy

7 RULES OF LIFE: 1. Make peace with your past so it won't screw up the present 2. What others think of you is none of your business 3. Time heals almost everything, give it time. 4. Don't compare your life to others and don't judge them. You have no idea what their journey is all about. 5. Stop thinking too much. It's alright not to know the answers. They will come when you least expect it. 6. No one is in charge of your happiness, except you. 7. Smile. You don't own all the problems in the world. - Nithya Reddy

Annu jangra

aaj ka new blog aa gya hai ek baar link per visit jarur krna or agar aapko finance and trading se related koi information chaiye hon to massage krna http://indiansauthor.blogspot.com/2026/01/best-credit-cards-for-students-in-usa.html

Nithya Reddy

"The goal of education is the advancement of knowledge and the dissemination of truth." - Nithya Reddy

Kartik Kule

लपवता दुःख चेहऱ्याच्या मागे सहजच असे लपत नाही मांडताना कविता जोडुनी अक्षर सहजच शब्द असे जुळून येत नाही मनातल्या भावना मात्र शब्दात लपउनी सारे दुःख कवितेत उतरले तरीही डोळ्यांना ते जगाला दाखउसे वाटले काहींनी समजून घेतलं काहीना समजून न घेऊ स वाटल आयुष्याचा पुस्तकाच आयुष तिथे हरपल शोधता माणसे आपुलीच हरवलो मी नात्यांच्या गर्दीत वेळ पडता माणसांची आपलेच लपले गर्दीत - Kartik Kule - Kartik Kule

Kartik Kule

की संवर जाये वो जिंदगी जो तेरे बिना अधुरी ही वक्त वक्त पे जो मिले ना वो यादे भी अधुरी है की ख्वाईशे भी तेरी यादोमे मुजसे समजोता कारण चाहती हे और तुम कहती हो की मेरे बिना तुम्हारी यादे भी पुरी हे - Kartik Kule

Ashish jain

उसको खुद खुशी की आदत है उसे बस खुशी की चाहत है, सुबह निकलता है घर से ताने सुन सुन के दर दर भटकता फाइल के ढेर के साथ हर जगह निराशा पाकर शाम को उसी पिंजड़े में वापस वो ऐसा काठ का पुतला है जो अभी तक उसी पिंजड़े से बंधा हुआ हताश हो लौटे दो रोटी की आशा में थाली तो परोसी सब्जी दाल से पर एक थाली कानों में भी खनखनाती सुनी पेट भरकर वापस कमरे में सुबह निकलने की तैयारी फिर एक मुस्कान और हताशा की नींद अगले दिन फिर वही खुद खुशी की राह ये वो आदमी है जो खुद ही खुद जिम्मेदारी से बांधे हुए है चाह कर खुद को आजाद नहीं कर पाता किसी बंधन से कैसे करे खुद खुशी जो रोज कर रहा अब उसी से खुद को खुश रखें हुए है जय जिनेन्द्र

Shailesh Joshi

પ્રભુએ સૌને આ બે શક્તિ આપી છે, એક - "ચિંતાઓને મુક્ત કરવાની" અને બે જેટલા રહેવું હોય એટલા "ચિંતા ગ્રસ્ત રહેવાની" હવે આમાંથી આપણે કઈ શક્તિ વાપરવી ? એ આપણે નક્કી કરવાનું છે. - Shailesh Joshi

Imaran

क्या अजीब था उनका मुझे छोड़ के जाना, सुना कुछ नहीं और कहा भी कुछ नहीं, कुछ इस तरह बर्बाद हुए उनकी मोहब्बत में, लुटा भी कुछ नहीं और बचा भी कुछ नहीं 💔imran 💔

Raa

PSI ke liye kahase saru karu bataye class online ho to batana plz 9541113158 par bahut jaruri he

Miska

My experience 😉

VIRENDER VEER MEHTA

#दूसरों_द्वारा_डाली_गई_मिट्टी_से_दफ़न_नहीं_होना_है। . . . ओशो की कलम से। एक बार किसी गाँव में एक किसान का बैल एक सूखे कुएँ में गिर गया। बहुत देर तक वह बैल वहाँ पड़ा चिल्लाता रहा, लेकिन किसान ने कोई कदम नहीं उठाया। किसान उसकी चिल्लाहट सुनता रहा और सोचता रहा कि वह क्या करे और क्या नहीं ? अंततः किसान ने विचार किया कि चूंकि बैल काफी बूढा हो चुका है और वह उसके लिए अनुपयोगी है, अतः उसे बचाने से कोई लाभ होने वाला नहीं है इसलिए बैल को इसी सुखे कुएँ में दफ़न कर देना चाहिए। किसान ने अपने कुछ परिचितों को बुलाया और उन सब के साथ मिलकर एक-एक फावड़ा मिट्टी कुएं में डालनी शुरू कर दी। बैल का रूदन अभी तक जारी था, लेकिन जल्दी ही उसे स्थिति का आभास हो गया। और उसके बाद वह अचानक आश्चर्यजनक रुप से शांत हो गया। कुछ देर उसकी आवाज न सुनाई देने पर जब उन लोगों ने कुएँ में झाँका तो वह आश्चर्य से सन्न रह गए।. . . अपनी पीठ पर पड़ने वाले हर फावड़े की मिट्टी के साथ वह बैल एक आश्चर्यजनक हरकत कर रहा था, वह हिल-हिल कर उस मिट्टी को नीचे गिरा देता था और फिर नीचे गिरी मिट्टी पर चढ़ कर उस पर खड़ा हो जाता था। बरहाल जैसे-जैसे वे लोग उस बैल पर फावड़ों से मिट्टी गिराते गए, वैसे-वैसे वह हिलहिल कर उस मिट्टी को गिरा कर; उसकी एक सीढी सी बनाकर ऊपर चढ़ता गया और जल्दी ही आश्चर्यजनक ढंग से वह ऊपर तक पहुंच गया और अंततः बाहर कूदकर भाग गया। ●●● दरअसल हमारे जीवन का सच भी यही है; जिनके लिए हम उपयोगी नहीं होते, वे हमारे जीवन में बहुत तरह की मिट्टी फेंकतें हैं। हमें आगे बढ़ने से रोकने के लिए कोई बेकार में हमारी आलोचना करता है, कोई हमारी सफलताओं से ईर्ष्या के कारण बेकार में ही भला बुरा कहता है, कोई हमसे आगे निकलने के लिए ऐसे रास्ते अपनाता है जो हमारे आदर्शों के विरुद्ध होते हैं। ये सब एक तरह से फेंकी हुई मिट्टी ही है। ध्यान रहे. . . ऐसे में हमें हतोत्साहित हो कर कुएँ में ही नहीं पड़े रहना है बल्कि साहस के साथ हर तरह की मिट्टी को गिराकर उससे सीख ले कर; उसे सीढ़ी बनाकर बिना अपने आदर्शों का त्याग किए आगे बढ़ना है। . . . V€€R 💝

Sarika Sangani

તમારી ધારણા થી વિપરીત પરિસ્થિતિ માં મન ના ભાવોને ચાહે તે અત્યાનંદ હોય કે ક્રોધ હોય કે પછી વિષાદ હોય સભાનતા જાળવી રાખી બધા સાથે સમતુલન સાધવું એજ ખરી રીતે "સ્વભાવ વિજયો ભવેત" કહેવાય. ઉત્તમ માનવીનું ઘડતર આ રીતે પ્રારંભ થાય. - Sarika Sangani

Chaitanya Joshi

તને યાદ કરું છું હરિ, તને હિચકી આવતી હશે. નૈને નીર ભરું છું હરિ, તને હિચકી આવતી હશે. થાકી ગયો છું માયાવળગણથી છૂટવામાં જાતે, તારી મદદ માગું છું હરિ, તને હિચકી આવતી હશે. ખૂબખૂબ ભટક્યો છું જેની સઘળી તનેય ખબર છે ને ? શ્વાસેશ્વાસે તને ભરું છું, તને હિચકી આવતી હશે. કરીને પ્રતિક્ષા પારાવાર તુજ આગમનની હે દયાનિધિ..! રોજ નવેસરથી હું ગણું છું, તને હિચકી આવતી હશે. જન્મોજન્મની યાત્રામાં પરિઘે ભમતો કેન્દ્રના ઈશારે, જો તું મળે વસંતેય ખરું છું, તને હિચકી આવતી હશે. - ચૈતન્ય જોષી. " દીપક " પોરબંદર.

Parmar Mayur

कुछ शब्दों, विचारों या व्यक्ति, सुर्य के भांति होते हैं। जैसे सुर्य के उजाले से पुरी धरती पर, प्रकाश फैलता है। नवजीवन का संचार होता है। बस उसी तरह कुछ शब्द, विचार या व्यक्ति, मन भीतर के अंधकार को दूर करके नवचेतना का संचार करते हैं।

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास प्यार प्यार है तो बताते क्यूँ नहीं? गले लगाके जताते क्यूँ नहीं? मोहब्बत भरे प्यारे नशीले से l होठों पे गीत सजाते क्यूँ नहीं? "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Neha kariyaal

दर्द के बीच भी ज़िंदगी रुकती नहीं... चलती है, Life goes on 🌈

kattupaya s

Good morning friends... have a nice week

Mahesh Patel

અહીં ફક્ત એ માણસના ઓળખની વાત છે,જે તમારી સમીપ છે. જીવનમાં ઘણા લોકો આપણી નજીક હોય છે,પણ તેમાંથી સાચા અને જૂઠા લોકોને ઓળખવા kayi રીતે તેના વિશે કાવ્યમાં જણાવ્યું છે.

Shahda

I watched him from afar. The way his lips curved into a smile made me the happiest. I don’t even stand a chance, for he belongs to someone else. I know he will never love me, but that has never stopped me from loving him. It is indeed the most beautiful feeling in the world. I don’t know if I will ever be loved by someone else who cherishes me as much as I do. There can be millions for you to love, but to be loved by him is something I have always longed for. I hope I find someone who loves me the way I loved him— someone who cherishes me, protects me, and stands up for me. Someone who gets me flowers, writes letters explaining why I am special. They say these are all fantasies. Is it too much to ask for? To be loved, right? Don’t I deserve to be loved? They say one-sided love hurts, but it hurts the most when the waiting ends, when the hope ends— trying not to care, when deep inside you wished to be loved by him alone. I hope someone comes into my life who makes me forget all this ache.

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

करे प्रगति जो लक्ष्य पर, रखता दृष्टि महीन। लक्ष्यभेद में कंक ज्यों, होता बहुत प्रवीन।। दोहा-- ३९१ (नैश के दोहे से उद्धृत) ‌-----गणेश तिवारी 'नैश'

Saliil Upadhyay

जिनका व्यवहार अच्छा और दिल को छू लेने वाला होता है उनके लिए दुआएं अपने आप निकल आती है...!

Raa

meri jan chalijaye muje manjur he. but bhawani ki kasham teri puri nasal hi khatam kardunga

kajal jha

हम हँसते रहे सबको खुश रखने के लिए, दिल में दर्द छुपाते रहे जमाने के लिए, जिसे अपना समझा वही बेगाना निकला, अब खामोशी ही काफी है बताने के लिए। - kajal jha

Dinesh

🙏*જય બાબા સ્વામી*🙏 *આજનો સુવિચાર* ઓળખાણ થી મળેલુ કામ ઓછા સમય માટે ટકે છે. પણ કામ થી મળેલી ઓળખ જીંદગીભર ટકે છે...... *શુભ સવાર*

Thakor Pushpaben Sorabji

જય શ્રી કૃષ્ણ,સુપ્રભાત

softrebel

हुए हैं इश्क़ से खफ़ा खफ़ा हम तुमसे तो नहीं, तुम्हारी जिंदादिली हो तुम दोनों को मुबारक हमारे पास तुम्हारे सिवा कुछ नहीं इंतज़ार की घड़ी टिक टिक करके चल रही है यहीं कहीं शायद तुम जहां से निकल आए या शायद जहां मै खड़ी रह गई वहीं। - softrebel

Bitu

जनवरी की ये लंबी लंबी ठंडी रात ओर लंबी हो जाती हैं जब नहीं होते तुम साथ, सोने पहले और उठने के बाद सबसे पहले तुम आते हो याद जनाब। - Bitu

Anita Shah

https://www.instagram.com/reel/DTXOAb-iWuo/?igsh=MTAxcDhqb2c5anU4cg==

Bitu

एक आपकी जॉब जरूरी दूसरा ये ठंडी जनवरी, दिलों को ओर नजदीक ला रही हैं जनाब हमारे बीच ये मिलो की दूरी... - Bitu....

બદનામ રાજા

મેવાડ મુકુટ મણી, હિંદવો સુર્ય, એકલિંગજી દિવાન, ભારત ગૌરવ, સિસોદિયા કુળ શિરોમણી, પ્રખર પ્રતાપી પરાક્રમી એવાં મહારાણા પ્રતાપસિંહજી ઉદયસિંહજી સિસોદિયા ની પુણ્ય તિથીએ શત્ શત્ નમન 🙏 મેવાડ હજુ ગાય છે તારા ગાણાં, તને ધન્ય છે મહારાણા 🙏 જય હો મારા રાણાની 🙏🚩 મારો રાણો મને રુદિયે 🌸❤️

swati

कैसे कह दूं ,बैचेन हूं मैं। कैसे कह दूं,बेकार हूं मैं। कैसे कह दूं,लाचार हूं मैं। कैसे कह दूं,खाली जिस्म हूं मैं। कैसे कह दूं, तुम ही बताओ? कैसे कह दूं, कि तुम्हारे बिना क्या हूं मैं? -स्वाति

MOU DUTTA

যে নেই তাকে ভেবে কষ্ট কিসের? আর যে আছে—তাকে দেখেও না দেখার অজুহাত কিসের? দুর্বলতা যদি ভালোবাসা হয়, তবে বহিঃপ্রকাশ হলো জীবনের আয়না। সে আয়নায় এত ধুলো জমে থাকার কারণ কী? নিজের মুখ যদি দেখাই না, তবে সে আয়না রাখার অর্থই বা কী? অর্থ, টাকা, পয়সা—এ কি শুধু সুখের চাবিকাঠি? নাকি তোমার সঙ্গে একটি সন্ধ্যা কাটানোই বেশি সুখের? এক হাতে দায়িত্ব—ভারি কষ্টের, না কি তোমার হাত ধরে সে দায়িত্বের পথ পার হওয়াই সহজ? উত্তর যদি প্রশ্ন হয়, তবে প্রতিটা প্রশ্নের উত্তর তুমি নও কেন? চোখ যদি ভাষা হয়, তবে মন কেন সে ব্যথার ভাষা বোঝে না? যদি তুমি আমার নও, তবে হৃদয়ে তোমার নাম কেন? আমি জানি না গোধূলির লগ্ন, আমি জানি কালবৈশাখীর ঝড়। আমি জানি, ওগো, শুধু তোমাকেই— যা আমি দেখি না, তবু অনুভবে জানি। মনে হয়, তুমি গেঁথে গেছো হৃদয়ের মালায়— তুমি আমার পরিকাঠামো প্রিয়। মৌ 🖋️

Aarushi Singh Rajput

आज फिर समझ नहीं आया कि क्या करूँ, क्या छोड़ दूँ। ज़िंदगी बस चल रही है कभी पाँव साथ नहीं देते, कभी दिल आगे निकल जाता है। अपने बारे में लिखूँ तो क्या लिखूँ? मुझे ख़ुद नहीं पता मैं कौन-सा हिस्सा जी रही हूँ, और कौन-सा बस निभा रही हूँ। किस बात पर रोना है, किस बात पर हँसना है ये भी अब दिल तय नहीं कर पाता। कभी हँसी बिना वजह आ जाती है, कभी आँखें बिना इजाज़त भर जाती हैं। लोग कहते हैं, “सब संभाल लेते हैं,” पर मैं… मैं सब थोड़ा-थोड़ा संभाल रही हूँ। थोड़ा ख़ुद को, थोड़ा ख़्वाबों को, थोड़ा टूटे हुए हौसलों को। पर सच ये है, Dear me थोड़ा-थोड़ा काफी नहीं होता, और पूरा होने की हिम्मत अभी मुझमें बाकी है। 🥲☹️

kattupaya s

virat out. match over

kattupaya s

virat kohli on fire.. cricket Newzealand fighting hardly

archana

अगर मेरी मृत्यु के अंतिम क्षणों में मुझसे कोई इच्छा पूछी जाए… तो बस इतना कहना चाहूँगी — हे ईश्वर, अब मुझे इस धरती पर दोबारा मत भेजना। - archana

S A Y R I K I N G

दुआ ये है कि वो शख्स हमे किसी सूरत ना मिले मिले पता हमें उसका मगर उसे हमारा ना मिले

S A Y R I K I N G

मैंने भी देखने की हद कर दी वो भी तस्वीर से निकल आया

वात्सल्य

*દૂર ના રહો નજીક રહો,ઍટલા નજીક ન રહો કે તદ્રુપ થવું પડે. અને ઍટલા દૂર ન રહો કે એકલા રહેવું પડે.*

MOU DUTTA

জীবন কোনো গল্প নয় আর নয় কোনো আশা, তোমায় পেয়ে হারিয়ে গেছে ওগো আমার ভালোবাসা। হয়তো আমি শূন্য জানি হয়তো তুমি পরিপূর্ণ। এই জীবনে নেই কোনো আজ জানি শূন্যতা। জীবন যদি শূন্য হয় তবু নেই কষ্ট এই হৃদয় জানে এসব কিছুই নষ্ট। তবু যদি তোমায় পেতাম রাখতাম অতি যত্নে, তুমি আমার না পাওয়া চাওয়া তাই রাখি অতি সযত্নে। তোমায় পড়েছে মনে আবার ও শ্রাবণ ও দিনে, একলা বসে নিরালায়। মৌ 🖋️❤️

MOU DUTTA

জীবন টা তখনি সুন্দর ছিল যখন জীবনের মানে ছিল মূলত তোমায় খোঁজা। আজ জীবনের মানে ভিন্ন যখন নিজেকে খুজতে শুরু করলাম তখন আমার আমি অবাক হয়ে তাকিয়ে রইলো আমার দিকে। যেনো সে আমায় চেনে না দেখেও না দেখার মত করে পাশ কাটিয়ে সে তোমার মনের দরজায় কড়া নাড়ল তখন আবার বুঝলাম এই মন তোমার ভালবাসায় নিজেকে হারিয়ে বসে আছে। আজও তোমায় এই হৃদয় অনেক ভালবাসে। যদি তুমি বুঝতে তাহলে এই হৃদয়ের ডাক তুমি খুজতে। মৌ 🖋️❤️

वात्सल्य

દૂર ના રહો નજીક રહો,ઍટલા નજીક ન રહો કે તદ્રુપ થવું પડે.અને ઍટલા દૂર ન રહો કે એકલા રહેવું પડે. - वात्सल्य

Miska

The duty of being a doctor earns me both prayers and curses my destiny will be shaped by my own karma.

kattupaya s

Goodnight friends.. it's going to be Monday again. Sleep well

Rushi Joshi

My heart like ocean version 1 is out now. https://youtu.be/7KjKC2YBPXI?si=39Uq8sWHEOvLRL5V

Abantika

"यह फोटो मेरी Botany Lab के बाहर बने उस छोटे से तालाब की है। एग्जाम के दिनों में जब भी मैं कॉलेज जाती, यह तालाब मेरा स्वागत एक नए खिले हुए कमल के साथ करता था। रोज़ एक नया फूल, एक नई उम्मीद और एक प्यारी सी मुस्कान। 🌸 बस उसे निहारना, उसकी फोटो क्लिक करना और एक सुकून के साथ घर लौट जाना। क्या आपके कॉलेज में भी ऐसी कोई जगह थी जो आपको सुकून देती थी? कमेंट्स में ज़रूर बताएं!"

N¡k¡t@

good night..

kattupaya s

energy for living

kattupaya s

Story behind everyone

Imaran

अगर दुनिया में जीने की चाहत न होती, तो खुदा ने मोहब्बत बनायी न होती, इस तरह लोग मरने की आरजू न करते, अगर मोहब्बत में किसी की बेवफाई न होती 💔imran 💔

kattupaya s

Thanks to music.. still iam alive

kattupaya s

Music a beautiful concept

kattupaya s

Thinking about music

Ashish jain

आते हुए रस्ते से मैंने पुछा घर कब आएगा यह सुन रास्ता मंद सी मुस्कान छोड़ कर यह बोला हे नव राही तूने की है शुरुआत अभी ही थक गया तू इतनी जल्दी मै जाने कब से बढ़ता ही जा रहा हूँ चलता ही जा रहा हूँ कितने ही रहगुजर करते है साथ चलने का वादा फिर जाने कहाँ हो जाते ग़ुम और मै ग़ुम सुम जान न सका अभी तक "घर कब आएगा " जब आ जायेगा तब थम कर कह दूंगा ऐ राही तेरा आ गया कोई दूसरा मिलेगा तब शायद मेरा भी आ जायेगा आशीष जैन.

Anup Gajare

संक्रमण _______________ पहचान टूट रही है, पर नई बनी नहीं— मैं मलबे पर खड़ा हूँ, जहाँ नाम गिर चुके हैं और आईने अभी चुप हैं। नास्तिक नहीं हूँ, बस पुराने ईश्वर से थक गया हूँ— वही ईश्वर जो हर बार मेरे सवालों पर मौन की मोहर लगा देता था। प्रार्थनाएँ अब भी आती हैं, पर हाथ जोड़ते हुए मन बैठ जाता है। अकेला हूँ, पर यह अकेलापन सादा नहीं— यह भीड़ से उपजा है। लोगों के बीच खुद को खोने का डर जंगल से भी घना होता है। भीड़ में खड़ा हूँ और भीतर से गुमशुदा। चुप हूँ— क्योंकि शब्द अब भरोसेमंद नहीं रहे। हर बोला गया वाक्य मुझे आधा कर देता है। पर भीतर एक रेलगाड़ी दौड़ती रहती है— यादें, प्रश्न, पश्चाताप, और वे सारे “काश” जो कभी प्लेटफ़ॉर्म पर नहीं उतरे। मैं न टूट रहा हूँ, न बन पा रहा हूँ— मैं बस बीच में हूँ। और शायद सबसे कठिन जगह यही होती है। जहाँ आदमी न पीछे लौट सकता है, न आगे दौड़ सकता है— सिर्फ़ खुद के साथ ठहरना सीखता है। ________________________

Ashish jain

मै केवल पढता हूँ कविता को कविता जो मेरे जीवन का सच कहती है मै डरता था जो भी कहने में वो अव केवल मेरी कविता कहती है रजनी कान्त आशीष जैन और अंत में (श्रीचंद)

Ashish jain

काश हमे कोई अपना बोले ऐ काश कोई मेरे दिल को छूले कोई काश कर शैतानी कोई मेरी पलकों में झुला झूले मेरे सपने भी किसी के बनके काश की कोई थोड़ा नैनों को धोले मेरी भी यादे किसी को कर्जा बनके रात का अपना चैन भी खो दे काश कभी जब थक के लौटूं मेरे सर से पसीना कोई पोछे काश हमे कोई अपना बोले काश कोई मेरे दिल को छूले आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

कोई खूबसूरती नहीं इन टूटे शब्दों में खूबसूरत हे ये एहसास जो बनकर दिलो में छाप बना जाते जेसे हो कोई बजाता साज इसी साज को मै बना देता हूँ केवल ऐ दोस्त बेदर्द दिल के दर्द की आवाज़ आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

पानी और जीवन जाने कितने ही आकार बदलता है जब ये आसमान से आता है तो कई प्यासे मन को खुशियाँ दे कर जाता है कभी ये पिघल कर बह जाता हे जब यह फुब्बारे में सजता है तो छोटी बूंदों सा चमकता है और जब जाता है तो भाप सा सूरज की किरणों जा खोता है गम गिन माहौल पे यह तड़प सा काला बदल बन मंडराता है पर जब ये बरसता है तो खुशहाली की खुसबूदार लता सी बन कर फ़ैल जाता जीवन और पानी यही कहानी कितनो को तरसाता हा कितनो को तडपता पर दुःख और खुशियाँ सच ये हमे बरस के दिखता है आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

जिस भी ने जीवन मे कभी भी कोई भी गलती नहीं की समझ लेना चाहिए वो इंसान नहीं भेड़ है क्यों की उसने खुद कुछ नया नहीं किया बस भेड़ की तरह लाइन में पीछे ही चलता चला इंसा तो वो है जो खुद कुछ करे और जिस के पीछे ये भेड़ रुपी इंसा चले आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

कर लो चाहे पूजा एक हज़ार कहता यही मै बार बार माँ बाप को जो ठुकराया बुढ़ापे में चोट खायेगा दिन में सौ सौ बार माँ बाप तो गहना है जिसे बचपन में तूने पहना है पत्नी के आते ही ये गहना तू निकल पड़ा बेचने थोड़ी दौलत पाते ही, क्या करेगा इस सब का जब तेरे माँ बाप के आखों से टपक कर निकली है बद्दुआ कहीं का नहीं रहेगा तू कोई नहीं पूछेगा.... जय जिनेन्द्र आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

बेटा मेरा जब लिपटता है बांहों में जीवन पूरा जी लेता हूँ अब कोई तमन्ना नहीं है मेरी उसे देख आँखों से खुशियों की शराब पी लेता हूँ उसकी किलकारी ताकत है मेरी इस प्यारी चित्कार को समझ पूरा जीवन पी लेता हूँ रोता है जब तो आँखे भर आती है उसको ख़ुशी देने को खुद ख़ुशी भी कर लेता हूँ सोता है रात जब साथ मेरे साथ ही सांसे लेता हूँ बन कर ठंडी हवा का झोका सा उसे बहो में भर लेता हूँ आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

उसकी आँखों में खौफ -सा बिखरा पड़ा है उसके हाथो में खिलोने है बच्चो के पर पसीना कहानी कहता है के किसी के जाने का उसके कांपते होठो पर एक अजीब सी दहशत है इस बेकार की महंगाई ने तोड़ दी है उसकी कमर बेटा तो अब रहा नहीं उपर से सता रही चिंता बेटी के जाने की वो पड़ी हुई है अस्पताल में दवा का खर्चा नहीं है देने को लगता है ये जेसे अभी देगा रो बेचता है खुशियाँ बच्चो को पर खुद की खुशी न जुटा पाया शाम को घर लौटा वापस तो देखा बेटा रहा नहीं अब घर में बेटी को भी न ये बचा पाया आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

अब्ज ज्यू बजता है नभ मे अधर धरा का लगता सिन्दूरी खग की उत्पत्ति से नभ मे बहती अचल समीर जिसके उत्तर से अब्धि की धरा लेती मधु हिलोर खग खग की चीत्कार से उत्पन्न राग से गता कण कण अमृत गीतक उत्सर्ग धरा का गाती सारंग ज्यो ज्यो अर्क ताप बरसाता दहकती भू माँ की सुगंध से भर जाता ज्यो ज्यो अर्क ताप बरसाता आशीष जैन (श्रीचंद जी)

Ashish jain

शब्दों की लड़ जब लड़ लड़ की आवाज़ के साथ तड तदाती है बड़े तूफ़ान खड़े हो जाते है आपस मे लड़ते लड़ रुपी पटाखे बड़ी आवाज़ से कानो में तड तडातेहै शब्दों की फटन से कान भी फट जाते है पर जब यही शब्द जब फुलझड़ी की तरह चमकते है तो खुशनुमा इस फिजा मे झिलमिलाते है जय जिनेन्द्र आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

मेरे देश का कानून है कमजोर पर फिर भी मुझे भरोसा है सरकारों में नहीं देश चलने का दम फिर भी मुझे भरोसा है दरोगा बन बैठा है आज डकैत फिर भी मुझे भरोसा है सन्यासी जो सबसे बड़ा है चोर फिर भी मुझे भरोसा है छींटे है दामन पर मंदिर के पुजारी के फिर भी मुझे भरोसा है कभी न कभी आयेगा राम राज इसी का मुझे भरोसा है आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

मै समय हूँ हाँ हाँ मै ही समय हूँ यह बात और है की आज कोई भी आज मेरी ही खाट कड़ी कर देता है फिर भी मै ही समय हूँ जद हंस मत यह जो फटीचर से हालत है मेरी वो कुछ नेता और सरकारी नौकरों जेसे नामुरादों ने है कर दी है फिर भी मै ही समय हूँ ओह आप मुझे भिखारी न समझे मुझे रूपये थमा के यही तो मेरी जिलालत है पर क्या करूँ मै समय हूँ तो भीख लेनी पड़ेगी क्योकि मै समय हूँ मै ही समय हूँ ये बात और है की आज मेरा ही समय है खराब फिर भी मै ही समय हूँ आशीष जैन (श्रीचंद)

Ashish jain

बेटी पापा से बोली शाम को घर आ के मुझे कहीं घुमाने ले चलो ना पापा झुला झुलना है गोद में लेके झुलाओ न पापा थक गयी हूँ कंधे पर बिठा लो न पापा डर लग रहा अँधेरे में सीने से लगाओ न पापा मम्मी तो थक के सो गयी आप ही लोरी सुना के सुलाओ न पापा स्कूल पूरी हो गी अब दादी कॉलेज नहीं जाने दे रही कॉलेज जाने दो न पापा कॉलेज जाने दो न पापा कॉलेज में गलती हो गी माफ़ी दे दो ना पापा छोटी सी भूल की इत्ती बड़ी सजा दी डोली में ही बिठा दिया पापा तो आप आंसूं न बहाओ पापा आप की मुस्कराहट अच्छी लगती है पापा एक बार मुस्कुराओ तो पापा मेने आपकी हर बात मानी आप भी एक मेरी बात मान जाओ तो पापा प्लीज पापा मान जाओ तो पापा में नहीं धरा पर बोझ पापा प्लीज पापा बेटी बचाओ पापा बेटी बचाओ पापा जय जिनेन्द्र (बेटी बचाओ पापा) आशीष जैन

Ashish jain

कलम आज फिर हुयी शांत किसी शब्द के लिखने पर स्याही हुयी फिर आज ख़तम के कुछ शब्दों को हमने मोड़ना चाहा पर कलम हुयी आज फिर शांत के मंजर आज जुबान पर था वो मंजर जो तड़पाता था हमको हरपल जिसकी याद हमको है रुला जाती गला है हमारा रुंधा पड़ा हाथ में कम्पन भरा पड़ा कुछ और अगर हम याद करे दिल शीशे सा बिखर गया के काश हमे तुम मिल जाते तो ये रात की बेचेनी न होती के काश तुम जो मिल जाते तो यूँ हम शायद करवटे न लेते हाँ तेरी ही यादो ने हमको बहुत बहुत तडपाया है हाँ तेरी ही सूरत ने हमको कितना हमे रुलाया है आजा के जीवन है छोटा है दुनिया तेरी भी छोटी आजा के याद है आती याद से आँखों में मोती आशीष जैन (श्रीचंद्रजी)

Ashish jain

वो लंकेश भी क्या रावण था जेसको धेनु मां का अभिमान था वो दशानन भी क्या रावण था जिसे अव्धि मां का ज्ञान था वो दैत्येन्द्र भी क्या रावण था जेसको सहोदर से अनुराग था वो दशशीश भी क्या रावण था जे अग्रजा की भक्ति में अवलेप था वो दशकंध भी क्या रावण था जेसकी निगाह नै मां सीता का सम्मान किया वो लंकापति भी क्या रावण था अपने अरि राम को ही मुक्ति मार्ग का सोम गीत माना वो रावण ही था पर उसने भी प्रभु राम सा ही काम किया बस ऐक अहं ने उसे समर भूमी पर ला खडा किया हां वो दनुज रावण ही था जिसने सर्वप्रथम अपनी शवयात्रा पर राम का नाम सत्य सभी दनुज व मनुज से कहलवाया जो आज परंपरा है आशीष जैन (श्रीचंद्र जी)

kattupaya s

Will India chase the target against newzeland 338? cricket

Kartik Kule

सावलो में आपसे हम जबाब क्या मांगेंगे जख्म एसा दिया ही जो दिखा भी ना पायेंगे आपके लफजोकी वो शिहादते हमे एसा घाव दे गई अगर चहेभी दिल हमार आपको फिरभी नजरे अपनेअप फेर लेंगी - Kartik Kule

Narendra Parmar

लोगों की तारीफे बटोरना आदत नहीं है मेरी क्योंकी में जैसा हूं वैसा ही दिखना पसंद करता हूं ! नकाब पहन कर झूठी शान और शौकत दिखाना फितरत नहीं है मेरी ।। नरेन्द्र परमार ✍️

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