Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
kajal jha

नज़र ने नज़रों से मिला तो यह ख्याल आया, ये मेरा दिल कहाँ से कहाँ आ गया। एक पल में अजनबी से रिश्ता बन गया, और मुझे खुद से ही प्यार हो गया। ❤️ - kajal jha

Shailesh Joshi

એક વારમાં આપણું ધાર્યું ન થાય, એ સ્વાભાવિક છે બે વારમાં પણ જો આપણું કામ ન થાય, કોઈ વાર એવું પણ બની શકે, ને જો એજ કામમાં, આપણને ત્રણ કે ચાર પ્રયત્ને સફળતા મળે, તો એ આપણું નસીબ. પણ જ્યારે કોઈ કામની સફળતા માટે આપણા અસંખ્ય પ્રયત્નો નિષ્ફળ જવા લાગે..... તો આપણે સમજી લેવું જોઈએ કે, કાંતો આપણે ખોટા રસ્તે પ્રયત્ન કરી રહ્યા છીએ, કાંતો આપણી માંગણી ખોટી છે.

Radhika Lakshmi

దేనికైనా సమాధానం చిరునవ్వు.... ఎంతటి అలసటకైనా సమాధానం చిరునవ్వు... ఎన్ని ప్రశ్నలకైనా సమాధానం చిరునవ్వు... ఎంత చులకనకైనా సమాధానం చిరునవ్వు... ఎన్ని కోరికలైనా సమాధానం చిరునవ్వు... ఎన్ని సమస్యల పరిష్కారానికైనా సమాధానం చిరునవ్వు..... కన్నవారి ప్రేమకైనా,కోపానికైనా....మెట్టినింటి బంధానికైనా బాధ్యతకైనా..... పేగుబంధాలకైనా.... తోడబుట్టిన వారి పలకరింపుకైనా...... ఆడపడుచు అలకకైనా....బావామరుదుల సరదా మాటలకైనా....సమాధానం చిరునవ్వు.... అత్త తానూ అతివనని మరిచి మాట అన్నా కన్నీరు దాచేసి చెప్పే సమాధానం చిరునవ్వు... తన కుటుంబాన్ని నడిపిస్తూ తండ్రిలా తనని గౌరవిస్తున్నా కోడలు కూతురులాంటిదని మరిచి అవమానించినా ఉబికి వచ్చే కన్నీటిని దాచేసి చెప్పే సమాధానం చిరునవ్వు.... పగలంతా తన కోసం తానే బాధ్యతల్ని పంచుకుని కాదు తనవి కూడా తాళి కట్టిన కారణంగా అన్నీ తానే అయి నడుచుకుంటున్నా ఇంకా ఏదో చేయలేదని తనకేదో తక్కువయిందని నిందించి తూలనాడే మాటకైనా మనసు పడితే రోదన లోపల నొక్కేసి కన్ళీళ్ళతో కూడా చెప్పే సమాధానం చిరునవ్వు..... ఆడదానిగా జన్మించడం ఒక గొప్ప వరం అని పురాణాలు ఘోషిస్తున్నాయి.... అందరూ ఆడది ఆడది అంటూ గొప్పలు చెప్పేస్తారు.... కానీ భ్రూణముగా ఉండగానే ఉసురు తీసేస్తారు... పోనీ బ్రతకనిచ్చినా చిన్నచూపు తో చూస్తారు.... పది రోజుల ప్రాయం నుంచి ఎనభై ఏళ్ళ వరకు ఎవరినీ వదలని కామంతో కళ్ళు మూసుకుపోయి కాటేస్తారు.... ఏదీ మా బ్రతుకు....ఎక్కడ ఉంది మా బ్రతుకు.... ఎన్నాళ్ళు మాకు ఈ బ్రతుకు అని మగువ అడిగితే సమాధానం చెప్పే మగవాడు ఏడి? అందరూ అలా కాదు ఉన్నారని చెప్పడం లేదు కానీ అండగా నిలబడే వారు లేరే అని.... ఏది ఏమైనా ఇలాంటి పరిస్థితుల్లో కూడా ఎదురొడ్డి అడుగు ముందుకు వేస్తూ తనకంటూ ఒక గుర్తింపును తెచ్చుకుని గెలుపు వైపు పయనిస్తోన్న పడతికి మా వందనం... అభినందనలు......మహిళా దినోత్సవ శుభాకాంక్షలు.....

Raju kumar Chaudhary

मेरे बेटे को गए अभी सिर्फ़ तीन महीने ही हुए हैं। मेरी बहू भड़कीले कपड़े पहन रही है। हर रात मुझे उसके कमरे से किसी मर्द की आवाज़ सुनाई देती है, जिससे मैं सुन्न हो जाती हूँ। जब से मेरे बेटे की एक सड़क दुर्घटना में मौत हुई है, नई दिल्ली वाले छोटे से घर की सारी गर्माहट गायब हो गई है। तीन महीने बीत चुके हैं, और मैं - सावित्री देवी - अभी भी आरव की अनुपस्थिति के एहसास की आदी नहीं हुई हूँ। हर दोपहर, मैं पूजा के कोने के सामने बैठती हूँ, अपने बेटे की गेंदे की माला वाली तस्वीर को देखती हूँ, और उसके द्वारा छुई गई हर चीज़ पर हाथ फेरती हूँ। जबकि मैं अभी भी दर्द में हूँ, निशा - मेरी बहू - मुझे उलझन में डाल देती है। पहले, वह साधारण कपड़े पहनती थी, बस थोड़ा सा काजल और हल्की लिपस्टिक लगाकर, फिर काम पर चली जाती थी। अब वह खूब सारा मेकअप करती है, शरीर से चिपकी हुई ऑफिस ड्रेस/कुर्ता पहनती है, और हर सुबह टाइल वाले फर्श पर ऊँची एड़ी के जूते खड़खड़ाते हैं। वह जल्दी काम पर जाती है और देर से घर आती है। कुछ दिन तो वह लगभग आधी रात को घर आती है। जब मैंने पूछा, तो उसने बस अस्पष्ट रूप से कहा: कंपनी एक प्रोजेक्ट जल्दी में कर रही है, मुझे माफ़ करना। मैंने सिर हिलाया, लेकिन मेरा मन शंकाओं से भरा था। एक सप्ताहांत की रात चरमोत्कर्ष पर पहुँची। रात के लगभग एक बजे, मैं बाथरूम जाने के लिए उठी, अपनी बहू के कमरे के पास से गुज़रते हुए मुझे बाहर से किसी आदमी की आवाज़ सुनाई दी, जो निशा की फुसफुसाहट के साथ मिली हुई थी। मैं रुक गई, मेरा दिल मानो ज़ोर से दबा जा रहा था: इस घर में हम सिर्फ़ दो ही हैं, माँ और बेटी, तो उसके कमरे में कौन था? अगली सुबह, मैंने सोच-समझकर अपने शब्द चुने: — निशा, कल रात मैंने... तुम्हारे कमरे में किसी आदमी की आवाज़ सुनीhttps://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kz

Nilesh Rajput

क्यों हमें महिला दिवस और पुरुष दिवस मनाना पड़ता है? क्या हम सिर्फ मानव दिवस नहीं मना सकते? एक तरफ हम बराबरी की बात तो करते हैं, लेकिन फिर किसी एक जात या वर्ग के नाम पर दिन क्यों मनाते हैं? अगर सच में बराबरी चाहिए, तो शायद हमें सबसे पहले खुद को सिर्फ इंसान मानना सीखना होगा।

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास मीठे बोल आज प्यारे मीठे बोल में एक अफ़साना था l अपनों को प्यार की भाषा को समझाना था ll खुदा ने भेजा है तो वक्त जाया नहीं करना था l कायनात में आए थे कुछ करके जाना था ll इस जन्म में अच्छे कर्मों को जमा करके सखी l पिछले जनमों का भी हिसाब निपटाना था ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Raju kumar Chaudhary

“गर्भवती पत्नी को धक्का देकर बोला—‘मैं वकील हूँ, तुम कुछ नहीं कर सकती!’… उसे नहीं पता था कि वह भारत के चीफ जस्टिस की बेटी है।” मैं अनन्या हूँ। उम्र अट्ठाईस साल। और उस रात, जब मेरी दुनिया टूट रही थी… मैं सात महीने की गर्भवती थी। तीन साल पहले जब मेरी शादी रोहित से हुई थी, मुझे सच में लगा था कि मुझे वो इंसान मिल गया है जिसके साथ मैं पूरी जिंदगी सुरक्षित और खुश रहूँगी। रोहित दिल्ली की एक बड़ी कॉर्पोरेट लॉ फर्म में काम करने वाला तेज़-तर्रार और महत्वाकांक्षी वकील था। आत्मविश्वासी, स्मार्ट, और हमेशा अपने करियर के बारे में बड़े सपने देखने वाला। जब हम मिले थे, उसने मुझे एक साधारण लड़की के रूप में जाना था—एक फ्रीलांस लेखिका और कभी-कभी ट्यूशन पढ़ाने वाली। सादा जीवन जीने वाली, बिना किसी खास बैकग्राउंड के। और सच कहूँ तो… यही मैं चाहती भी थी। मैं नहीं चाहती थी कि कोई मुझे मेरे परिवार की वजह से जाने। मैं चाहती थी कि रोहित मुझे इसलिए चुने क्योंकि मैं मैं हूँ, न कि इसलिए कि मैं किस घर से आती हूँ। इसलिए मैंने अपनी पहचान छिपा ली। मैंने अपना असली सरनेम नहीं बताया। मैंने अपने परिवार के बारे में ज्यादा कुछ नहीं बताया। क्योंकि मैं देखना चाहती थी कि बिना किसी ताकत, बिना किसी नाम और बिना किसी प्रभाव के—क्या कोई मुझे सच में प्यार कर सकता है। लेकिन शायद… यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी। शादी के बाद धीरे-धीरे सब बदलने लगा। शुरू में छोटी-छोटी बातें थीं। रोहित का देर से घर आना, मेरे काम को गंभीरता से न लेना, या उसकी माँ का मुझे ताना मारना कि मैं “किसी काम की नहीं” हूँ। मैं चुप रही। मैंने सोचा हर शादी में थोड़ा समय लगता है। लेकिन रोहित की माँ—सुशीला देवी—मुझे कभी अपनी बहू मान ही नहीं पाईं। उनकी नजरों में मैं हमेशा “गरीब घर की लड़की” थी जिसने उनके सफल बेटे से शादी करके किस्मत बना ली। धीरे-धीरे उनकी बातें तानों से आदेशों में बदल गईं। और रोहित… वह कभी मेरा साथ नहीं देता था। हर बार वही एक जवाब— “माँ का दिल मत दुखाओ, अनन्या।” जब मैं गर्भवती हुई, मुझे लगा शायद सब बदल जाएगा। शायद एक बच्चे की खबर परिवार को करीब ला देगी। शायद रोहित मुझे थोड़ा और समझेगा। शायद उसकी माँ का दिल भी पिघल जाएगा। लेकिन हुआ इसका उल्टा। जैसे-जैसे मेरा पेट बड़ा होता गया, घर में मेरी इज्जत छोटी होती गई। और फिर आई वो रात… क्रिसमस ईव की रात। रोहित के माता-पिता के बड़े घर में फैमिली डिनर रखा गया था। लगभग पंद्रह मेहमान आने वाले थे—रोहित के ऑफिस के लोग, कुछ रिश्तेदार, और कुछ खास लोग जिन्हें प्रभावित करना जरूरी था। मैं उस समय सात महीने की गर्भवती थी। मेरे पैर सूज जाते थे, कमर में लगातार दर्द रहता था, और डॉक्टर ने ज्यादा खड़े रहने से मना किया था। लेकिन उस रात… मुझे आराम करने के लिए नहीं कहा गया। मुझे किचन में भेज दिया गया। सुशीला देवी ने बड़ी सहजता से कहा, “इतने मेहमान आ रहे हैं। बहू हो, खाना तो बनाओगी ही।” और फिर उन्होंने एक लंबी सूची मेरे हाथ में थमा दी। बटर चिकन। मटन बिरयानी। चार तरह की सब्जियाँ। नान। रायता। सलाद। और तीन तरह की मिठाइयाँ। मैं अकेली किचन में खड़ी थी। ओवन की गर्मी, गैस की लपटें, और मेरे शरीर की थकान—सब मिलकर मुझे तोड़ रहे थे। लेकिन मैं चुप रही। क्योंकि मुझे उम्मीद थी कि जब रोहित आएगा… वह समझेगा। वह कहेगा— “माँ, अनन्या प्रेग्नेंट है। उसे आराम करने दो।” जब रोहित घर आया, वह सच में किचन में आया भी। उसने मुझे देखा—पसीने से भीगी हुई, थकी हुई, पेट पकड़कर खड़ी। एक पल के लिए मुझे लगा… अब वह कुछ कहेगा। लेकिन उसने बस हँसते हुए कहा— “डियर, जल्दी करो। माँ कह रही हैं मेहमान भूखे हैं। और हाँ… स्वाद अच्छा होना चाहिए। मेरी लॉ फर्म के पार्टनर्स आए हैं।” और फिर वह वाइन का गिलास लेकर लिविंग रूम में चला गया। उस पल… मेरे दिल के अंदर कुछ टूट गया। दो घंटे बाद खाना तैयार था। शानदार डाइनिंग टेबल सजी हुई थी। महँगी प्लेटें, चमकते गिलास, और हँसते हुए मेहमान। मैंने चुपचाप एक प्लेट ली। मैं बस टेबल के कोने में बैठकर थोड़ा खाना चाहती थी। पूरे दिन मैंने कुछ ठीक से खाया भी नहीं था। लेकिन जैसे ही मैं बैठने लगी… अचानक मेरी कुर्सी खींच ली गई। मैंने ऊपर देखा। सुशीला देवी मुझे घूर रही थीं। उनकी आवाज में व्यंग्य था— “ये कुर्सी कहाँ से उठा ली, अनन्या?” मैंने थकी हुई आवाज में कहा, “माँ जी… मैं भी थोड़ा खाना खाना चाहती हूँ। सुबह से किचन में हूँ। चक्कर आ रहे हैं…” उन्होंने हल्की हँसी हँसी। और जो उन्होंने अगला वाक्य कहा… उसने पूरी टेबल को चुप करा दिया। “यहाँ नहीं बैठ सकती। ये सीटें VIP मेहमानों के लिए हैं।” और फिर उन्होंने धीरे से जोड़ा— “किचन में जाकर खा लो। खड़े होकर।” उस पल… कमरे की हवा जैसे अचानक भारी हो गई। और मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं था कि अगले कुछ मिनटों में… मेरी जिंदगी हमेशा के लिए बदलने वाली है। 👉 पूरी कहानी कमेंट्स सेक्शन में देखें। ?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu

Raju kumar Chaudhary

बारिश की ठंडी रात थी। शहर की अदालत लगभग खाली हो चुकी थी। लेकिन एक कोर्टरूम के अंदर… आज एक ऐसा मुकदमा चल रहा था जिसे देखकर हर किसी की साँसें थम गई थीं। जज की कुर्सी पर बैठी थी एक सख्त और घमंडी महिला जज। उसका चेहरा बिल्कुल शांत था। आँखों में ज़रा भी दया नहीं थी। उसके सामने खड़ा था एक आदमी… फटे कपड़े… बिखरे बाल… और हाथों में भारी जंजीरें। उसकी आँखों में आँसू थे। चेहरा दर्द से भरा हुआ था। कोर्ट में मौजूद लोग उसे देख कर फुसफुसा रहे थे। किसी ने कहा — “ये तो कोई अपराधी लगता है…” दूसरे ने कहा — “लगता है बहुत बड़ा केस है…” लेकिन तभी अचानक कोर्ट में मौजूद एक बुज़ुर्ग वकील ने धीमी आवाज़ में कहा— “तुम लोगों को पता भी है… ये आदमी कौन है?” सबकी नज़रें उसकी तरफ मुड़ गईं। वकील ने गहरी साँस ली… और कहा— “ये… उसी जज का पति है।” पूरा कोर्टरूम एकदम सन्न रह गया। लोगों को अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ। जज की कुर्सी पर बैठी महिला और जंजीरों में जकड़ा आदमी… कभी पति-पत्नी थे। लेकिन आज दोनों एक-दूसरे के सबसे बड़े दुश्मन बन चुके थे। आख़िर ऐसा क्या हुआ था कि एक गरीब पति अपनी ही जज पत्नी से बदला लेने की कसम खा चुका था? और वह कौन सा राज़ था जो अगर अदालत में खुल जाता… तो सबकी ज़िंदगी बदल जाती? कहानी यहीं से शुरू होती है… और आगे जो हुआ वह किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था…https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

Imaran

कशिश हो शायरी की तुम, गजल की जान लगती हो, खुदा के नूर जैसी हो, नजर की शान लगती हो, मेरे अल्फाज में तुम हो, मेरे अंदाज में तुम हो, मेरे हर खूबसूरत नज्म की, पहचान लगती हो 👰‍♀️imran 👰‍♀️

Fazal Esaf

भारत संघर्षाच्या छायेखाली अमेरिका–इराण संघर्ष आणि त्याचे दूरगामी परिणाम अमेरिका आणि इराणमधील वाढती तणावाची परिस्थिती आता केवळ मध्यपूर्वेतील संघर्षापुरती मर्यादित नाही. या संघर्षाच्या लहरी भारतापर्यंत पोहोचल्या आहेत — एक देश जो मध्यपूर्वेच्या ऊर्जा, व्यापार आणि कामगार बाजारपेठांशी खोलवर जोडलेला आहे. घरे, उद्योग, शेतकरी ते निर्यातदार — सर्व स्तरावर परिणाम होत आहेत. हा लेख भारतावर आणि त्याच्या नागरिकांवर होणाऱ्या संभाव्य परिणामांचा, सर्वात संवेदनशील क्षेत्रांचा आणि परिस्थितीशी सामना करण्यासाठी उपायांचा आढावा घेईल. १. ऊर्जा धक्का: तातडीचा दबाव भारत आपल्या कच्च्या तेलाचा ८०–९०% आणि मोठ्या प्रमाणावर LNG मध्यपूर्वेतून आयात करतो, ज्या मार्गांमध्ये स्ट्रेट ऑफ होर्मुजचा समावेश आहे, जो सध्या भौगोलिकदृष्ट्या अस्थिर आहे. तेलाची किंमत वाढ: ब्रेंट क्रूड $120–$150 प्रति बॅरल ओलांडू शकते, ज्यामुळे पेट्रोल, डिझेल आणि LPGच्या किंमती वाढतात. घरेलू परिणाम: लाखो भारतीय कुटुंबांना वाहतूक आणि इंधन खर्च वाढल्यामुळे आर्थिक ताण येईल. उद्योग परिणाम: उत्पादन, लॉजिस्टिक्स, रसायने आणि उर्जासंबंधी उद्योगांवर परिणाम होईल. चलन अस्थिरता: जागतिक जोखीमामुळे भारतीय रुपया डॉलरसाठी कमकुवत होऊ शकतो, ज्यामुळे आयात आणि परकीय कर्जावर दबाव येईल. उपाय: ऊर्जा आयात विविध स्रोतांकडून (रशिया, आफ्रिका, अमेरिका) करणे; नवीकरणीय ऊर्जा प्रकल्प वाढवणे. तात्पुरती धक्केसाठी धोरणात्मक तेल व गॅस साठे मजबूत करणे. देशांतर्गत तेल, गॅस आणि नवीकरणीय ऊर्जा प्रकल्प जलद गतीने सुरू करणे. २. व्यापार आणि निर्यात संवेदनशीलता भारताची अर्थव्यवस्था फक्त ऊर्जा पुरवठ्यापुरती मर्यादित नाही; मध्यपूर्वेतील व्यापार जास्त व्यापक आहे. कृषी निर्यात: बासमती तांदूळ, मसाले, चहा — जहाज मार्गांच्या अस्थिरतेमुळे विलंब होऊ शकतो. उद्योग आणि हिरे: गुजरातमधील हिरे प्रक्रिया केंद्रांसाठी दुबईमार्गे कच्च्या हिर्यांचा आयात विलंबित होतो. शिपिंग आणि विमा खर्च: समुद्री जोखीम वाढल्याने निर्यात महागड्या होऊ शकते. उपाय: निर्यात बाजारपेठा आफ्रिका, आग्नेय आशिया, युरोप व अमेरिका यांच्याकडे विविध करणे. क्रेडिट हमी आणि निर्यात विमा उपाययोजना करणे. पर्यायी वाहतूक मार्ग तयार करणे (उदा. आंतरराष्ट्रीय उत्तर–दक्षिण वाहतूक मार्ग). ३. नोकऱ्या आणि भारतीय वस्तीवर परिणाम ८–१० मिलियन भारतीय कामगार खाडी देशांमध्ये कार्यरत आहेत, ज्यांचे रेमिटन्स आर्थिक गतिशीलतेसाठी महत्त्वाचे आहेत. बाहेरील आर्थिक मंदीमुळे नोकऱ्या गमावल्या तर घरगुती खरेदीवर परिणाम होईल. परत येणाऱ्या कामगारांमुळे शहरातील इन्फ्रास्ट्रक्चर, घरबांधणी आणि सामाजिक सेवा ताणाखाली येऊ शकतात. उपाय: परदेशी कामगारांच्या हक्कांचे रक्षण करण्यासाठी कूटनीतिक प्रयत्न वाढवणे. घरगुती रोजगारासाठी कौशल्य विकास कार्यक्रम वाढवणे. ४. क्षेत्र-विशिष्ट परिणाम कृषी: खत व डिझेलच्या कमतरतेमुळे पीक उत्पादन कमी होऊ शकते; अन्नधान्य किंमती वाढतील. ऊर्जा व नवीकरणीय: LNG पुरवठा मंद झाल्यास घरगुती व औद्योगिक उर्जा संकट निर्माण होऊ शकते. IT आणि सेवा: अमेरिका व युरोपमधील ग्राहक प्रकल्पांमध्ये विलंब करतात; महसूलावर परिणाम. सुरक्षा व रणनीतिक सामग्री: महत्त्वाच्या आयातांमध्ये विलंब; संरक्षण आणि उत्पादनावर परिणाम. उपाय: खत, इंधन व कच्च्या मालाचे धोरणात्मक साठे तयार करणे. महत्त्वाच्या घटकांचे स्थानिक उत्पादन प्रोत्साहित करणे. आयात कमी करण्यासाठी नवीकरणीय ऊर्जा प्रकल्पांमध्ये गुंतवणूक करणे. ५. वित्तीय बाजार आणि आर्थिक धोके स्टॉक मार्केटची अस्थिरता भांडवल बाहेर जाण्यास कारणीभूत ठरू शकते; गुंतवणूकदारांचा विश्वास कमी होऊ शकतो. बँकिंग आणि विमा: जहाज व वस्तूंच्या जोखमीमुळे प्रीमियम व कर्जाचे दर वाढतील. चलन संरक्षण: रुपया कमकुवत झाल्यास कंपन्यांना डेरिव्हेटिव्हसद्वारे संरक्षण करावे लागेल. उपाय: वस्तू व चलन जोखमीसाठी वित्तीय साधने वापरणे. चलनवाढ नियंत्रित करण्यासाठी कर आणि मौद्रिक धोरण समन्वयित करणे. ६. सामाजिक आणि मानवीय चिंता इंधन व अन्नधान्य किंमती वाढल्याने गरीब व उपभोगक वर्गावर परिणाम होईल. परत येणाऱ्या कामगारांमुळे शहरी भागांमध्ये ताण निर्माण होऊ शकतो. सार्वजनिक भीती व अनिश्चिततेमुळे मानसिक आरोग्यावर परिणाम होईल. उपाय: गरजूंना थेट आर्थिक सहाय्य व सबसिडी देणे. अफवा व भीती टाळण्यासाठी जनजागृती मोहीम. उच्च-प्रभाव क्षेत्रात सामाजिक सुरक्षा जाळे मजबूत करणे. ७. भौगोलिक आणि रणनीतिक विचार भारताला अमेरिका, इराण, खाडी देश व इजरायल यांच्यात संतुलन राखावे लागेल. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जवळील समुद्री सुरक्षा अनिवार्य आहे. प्रादेशिक अस्थिरता अफगाणिस्तान, पाकिस्तान व खाडी देशांवर परिणाम करू शकते. उपाय: मुख्य व्यापार मार्गांवर नौदल व समुद्री सुरक्षा वाढवणे. सर्व पक्षांसोबत कूटनीतिक संवाद व रणनीतिक योजना ठेवल्या पाहिजेत. रणनीतिक सामग्री व संरक्षण पुरवठ्यासाठी contingency plan तयार करणे. ८. तंत्रज्ञान आणि पुरवठा साखळी सुधारणा डिजिटल ट्रॅकिंग व लॉजिस्टिक्स प्रणाली वापरून पुरवठा साखळीमध्ये अडथळा कमी करणे. रशिया व मध्य आशियामार्गे पर्यायी वाहतूक मार्ग शोधणे. वस्तूंच्या कमतरतेसाठी predictive analytics वापरणे. उपाय: स्मार्ट लॉजिस्टिक्स व पुरवठा साखळीमध्ये गुंतवणूक. महत्त्वाच्या आयातांसाठी प्रादेशिक स्टोरेज हब्स तयार करणे. ऊर्जा, कृषी व व्यापारासाठी AI-आधारित अंदाज प्रणाली प्रोत्साहित करणे. ९. परिस्थिती योजना हलके तणाव: तात्पुरती तेल किंमत वाढ व निर्यात विलंब. मध्यम तणाव: ऊर्जा खर्च वाढ, रेमिटन्स कमी, क्षेत्र-विशिष्ट अडचणी. पूर्ण संघर्ष: दीर्घकालीन ऊर्जा संकट, मोठा निर्यात अडथळा, परदेशी कामगार परत येणे, प्रादेशिक अस्थिरता. उपाय: प्रत्येक परिस्थितीसाठी contingency plan तयार करणे, आर्थिक, ऊर्जा व सामाजिक उपायांसह. आपत्कालीन वित्तीय व अन्न साठे राखणे. आंतरराष्ट्रीय संस्थांशी संवाद साधून मध्यस्थी करणे. १०. दीर्घकालीन संधी नवीकरणीय ऊर्जा, LNG व अणुऊर्जेद्वारे ऊर्जा स्वावलंबन जलद करणे. आयातावर अवलंबित्व कमी करण्यासाठी स्थानिक उत्पादन वाढवणे. अन्नधान्य, औषधे व संरक्षण यांसाठी रणनीतिक देशांतर्गत व प्रादेशिक पुरवठा साखळी तयार करणे. भारताची जागतिक आर्थिक व कूटनीतिक स्थिती बळकट करणे. निष्कर्ष अमेरिका–इराण संघर्ष फक्त प्रादेशिक युद्ध नाही; तो भारतात आर्थिक, सामाजिक आणि रणनीतिक आव्हाने निर्माण करणारा घटक आहे. ऊर्जा खर्च वाढ, व्यापार अडथळे, कामगार संवेदनशीलता आणि भौगोलिक दबाव हे सर्व भारताची प्रतिकारशक्ती तपासतील. परंतु, दूरदृष्टी, विविध उपाय, मजबूत contingency plan व तंत्रज्ञानाच्या वापरामुळे भारत या संकटातून सुरक्षित राहू शकतो आणि दीर्घकालीन रणनीतिक लाभ मिळवू शकतो. आजची तयारी, उद्याच्या अनिश्चिततेसाठी भारताचे विमा कवच आह

Meghna Sanghvi

Happy women's Day 🎀

Bhavesh Tejani

તારા અવગુણો સાથે પણ મને પ્રેમ છે, ગુણો ને તું હું આમેય ગણકારતો નથી.

Raju kumar Chaudhary

देर रात की शिफ्ट के बाद घर लौटते हुए, पत्नी यह देखकर हैरान रह गई कि उसका पति अपनी मालकिन के बगल में गहरी नींद में सो रहा है। वह चुपचाप बैठी रही, किसी संतोषजनक नतीजे का इंतज़ार कर रही थी… देर रात की शिफ्ट के बाद जब मारिया अपने घर लौटी, तो उसे अंदाज़ा भी नहीं था कि उसकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा सच उसी घर के अंदर उसका इंतज़ार कर रहा है। नई दिल्ली के लुटियंस इलाके में बने उनके बड़े और खूबसूरत घर के बाहर सब कुछ हमेशा की तरह शांत था। रात के लगभग दस बज रहे थे। सर्द हवा में पेड़ों की पत्तियाँ हल्के-हल्के सरसराती थीं। मारिया ने कार पार्क की, अपने कंधे पर बैग ठीक किया और धीरे-धीरे मुख्य दरवाज़े की ओर बढ़ी। आज का दिन उसके लिए खास था। AIIMS अस्पताल में लगातार कई घंटे की नाइट शिफ्ट करने के बाद भी उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। थकान थी, लेकिन दिल में एक छोटी-सी खुशी भी थी। आखिर आज उसकी और अर्जुन की शादी की दसवीं सालगिरह थी। उसने अपने बैग में रखा छोटा सा गिफ्ट बॉक्स हल्के से छुआ। उस बॉक्स में एक बेहद महँगी पाटेक फिलिप घड़ी थी—जिसके पीछे खुदा हुआ था: “Maria & Arjun – Forever.” मारिया ने सोचा था कि वह घर जाकर अर्जुन को सरप्राइज़ देगी। शायद वह जाग रहा होगा… शायद उसने भी कुछ प्लान किया होगा। लेकिन जैसे ही उसने दरवाज़ा खोला, उसे कुछ अजीब लगा। घर में असामान्य सन्नाटा था। ना टीवी चल रहा था। ना किचन से कोई आवाज़। ना अर्जुन की हँसी। बस दीवार पर लगी पेंडुलम घड़ी की टिक-टिक… टिक-टिक… मारिया ने जूते उतारे, अपना बैग सोफे पर रखा और धीरे-धीरे सीढ़ियाँ चढ़ने लगी। हर कदम के साथ उसके दिल में एक अनजानी बेचैनी बढ़ रही थी। ऊपर पहुँचकर उसने देखा—बेडरूम का दरवाज़ा पूरी तरह बंद नहीं था। हल्की पीली रोशनी बाहर आ रही थी। मारिया ने दरवाज़े को हल्का सा धक्का दिया। और उसी पल उसकी दुनिया रुक गई। बिस्तर पर अर्जुन सो रहा था। लेकिन वह अकेला नहीं था। उसकी बाँहों में एक औरत थी—जिसे मारिया ने पहले कभी नहीं देखा था। दोनों गहरी नींद में थे। पतली चादर नीचे खिसक चुकी थी, जिससे उस औरत का कंधा साफ दिखाई दे रहा था। कमरे में दो लोगों की शांत साँसों की आवाज़ थी—जैसे वे किसी मीठे सपने में खोए हों। कुछ सेकंड तक मारिया दरवाज़े पर ही खड़ी रह गई। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। किसी औरत के लिए यह पल शायद तूफ़ान बन जाता—चीख, आँसू, गुस्सा। लेकिन मारिया ने कुछ भी नहीं किया। उसकी आँखों में अचानक एक अजीब सी ठंडक उतर आई। वह बिना आवाज़ किए मुड़ी… और नीचे लिविंग रूम में चली गई। वहाँ से उसने एक भारी नक्काशीदार कुर्सी उठाई। धीरे-धीरे वापस बेडरूम में आई। और वह कुर्सी बिस्तर के सामने रख दी। फिर वह चुपचाप उस पर बैठ गई। उसकी बाहें सीने पर क्रॉस थीं। आँखें सीधे बिस्तर पर टिकी थीं। कमरे में सिर्फ पेंडुलम घड़ी की आवाज़ गूँज रही थी। टिक… टिक… टिक… समय गुजरता रहा। एक घंटा। दो लोग अब भी सो रहे थे। और उनके सामने बैठी एक औरत—अपनी ज़िंदगी का सबसे बड़ा फैसला सोच रही थी। लेकिन उन्हें अभी तक इसका अंदाज़ा भी नहीं था। और जब अर्जुन की आँख खुलने वाली थी… तो वह दृश्य ऐसा था जिसे वह जिंदगी भर नहीं भूल पाएगा। 👉👉कृपया पूरी कहानी कमेंट सेक्शन में पढ़ें।👇?https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtlu

SAYRI K I N G

इश्क अगर इबादत, न बने.. तो इश्क से बड़ा फरेब, कुछ भी नहीं..

PRASANG

નારીનો લલકાર.!!! સદીઓના અન્યાય સામે બગાવતી લલકાર ઉઠી છે, દેવદાસી  દાહક  વ્યથામાંથી  કરુણ પોકાર ઉઠી છે. સતીચિતાની  રાખમાંથી  માનવ ગૌરવ જાગ્યું આજે, ભસ્મકણમાંથી  તેજસ્વી  ચમકતી તલવાર ઉઠી છે. આડંબર  ધાર્મિક   પ્રથાઓના  ઘેરા  અંધકાર  સામે, સત્યજ્યોતિના  સંકલ્પોથી  કઠોર  પ્રહાર   ઉઠી છે. સંવિધાનના   શબ્દોમાં   સમતાનો  પ્રકાશ  પ્રગટ્યો, હિન્દુ કોડના માર્ગોથી નવો ન્યાયી વ્યવહાર ઉઠી છે. વિધાનગૃહ પ્રાંગણમાં ગુંજે અધિકાર ઘોષણા આજે, અસમતા  સિંહાસન  સામે  જનનો ધિક્કાર ઉઠી છે. વિજ્ઞાન  ગગનપંથે  દીકરી  સ્વપ્નપંખે  ચડી  ઉડે  છે, ઈસરોના  પરિશ્રમથી  વિશ્વવ્યાપી  વિસ્તાર ઉઠી છે. “પ્રસંગ”  કલમે   લખી   દીધી  બદલાતી  કાળગાથા, ભારતનારી   અંતરમાંથી   ક્રાંતિનો  હુંકાર  ઉઠી  છે. "પ્રસંગ" પ્રણયરાજ રણવીર

Chaitanya Joshi

બ્રહ્માએ હાથ ધોયા હશે, સર્જન કરીને નારીનું. એના જેવા ના જોયા હશે, સર્જન કરીને નારીનું. ના બની શકયું કોઈ કે જે એનું સ્થાન લઈ શકે, ભારોભાર ત્યાગ ભર્યા હશે, સર્જન કરીને નારીનું. રૂપની સાથે સેવા,સમર્પણને સહનશીલતા દીધાં, ધરાને કોઈ સૌગાત ધર્યા હશે, સર્જન કરીને નારીનું. સ્નેહ, સૌંદર્યને લાગણી રગેરગે વણી દીધા પછી, ગુણ માતૃત્વના એણે ગાયા હશે, સર્જન કરીને નારીનું. અનેકરુપધારી વ્યક્તિ સમય સમય પર દેખાતું ને, કીધી પરોપકારી એની કાયા હશે, સર્જન કરીને નારીનું. - ચૈતન્ય જોષી 'દિપક' પોરબંદર.

Raju kumar Chaudhary

“जब अरबपति CEO ने डिलीवरी बॉय बनकर गर्लफ्रेंड का टेस्ट लिया… और उसने उसके मुंह पर पैसे फेंक दिए!” केनज़ो… अब अर्जुन बन चुका था। सिर्फ 27 साल की उम्र में वह अग्रवाल एम्पायर का CEO था — एशिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक का मालिक। युवा। आकर्षक। और इतना अमीर कि उसके पास जितना पैसा था, उतना कई देशों के बजट से ज्यादा था। लेकिन एक चीज़ थी जो उसके पास नहीं थी… सच्चा प्यार। उसकी जिंदगी में जितनी भी महिलाएं आईं, सभी का एक ही मकसद था — उसका पैसा। किसी को उसकी मुस्कान से मतलब नहीं था… किसी को उसकी मेहनत से नहीं… किसी को उसके अकेलेपन से नहीं। सबको चाहिए था बस उसका बैंक बैलेंस। इसीलिए जब अर्जुन की मुलाकात वैशाली से हुई… उसने एक फैसला लिया। उसने अपनी असली पहचान छिपा ली। उसने खुद को एक साधारण कर्मचारी के रूप में पेश किया। न कोई लग्जरी कार… न कोई बॉडीगार्ड… न कोई करोड़ों की घड़ी। बस एक सामान्य लड़का… जो नौकरी करता है। छह महीनों में अर्जुन और वैशाली की नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं। वे डेट पर जाते, बातें करते, हँसते। वैशाली को ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था कि उसका “साधारण” बॉयफ्रेंड असल में शहर के आधे हिस्से का मालिक है। लेकिन समय के साथ अर्जुन ने एक बदलाव नोटिस किया। वैशाली धीरे-धीरे बदल रही थी। वह अक्सर महंगे ब्रांड्स की बातें करने लगी… लक्ज़री बैग… महंगे रेस्टोरेंट… करोड़पति लाइफस्टाइल। और सबसे अजीब बात… कभी-कभी वह अर्जुन को देखकर कहती— “तुम्हें और मेहनत करनी चाहिए… मुझे बड़ा लाइफ चाहिए।” अर्जुन मुस्कुराता… लेकिन अंदर से सोचता रहता। एक रात उसने खुद से कहा— “अगर मैं इसे पूरी दुनिया देने वाला हूँ… तो पहले मुझे ये जानना होगा कि क्या ये मुझे तब भी स्वीकार करेगी… जब मेरे पास कुछ भी नहीं होगा।” और फिर उसने एक योजना बनाई। एक आखिरी टेस्ट। उस शाम वैशाली का जन्मदिन था। वह अपने सोशल फ्रेंड्स के साथ शहर के एक हाई-एंड कैफे में पार्टी कर रही थी। उसी समय अर्जुन ने एक अजीब फैसला लिया। उसने एक फूड डिलीवरी राइडर की यूनिफॉर्म पहन ली। पुराने जूते… थोड़े गंदे कपड़े… और जानबूझकर वह दौड़कर आया ताकि वह पसीने से तर दिखे। उसके हाथ में था… एक छोटा सा सस्ता केक और फूलों का एक साधारण गुलदस्ता। जब वह कैफे के अंदर गया… सबकी नज़रें उस पर टिक गईं। और फिर उसने मुस्कुराते हुए कहा— “हैप्पी बर्थडे, बेब!” अचानक पूरे टेबल पर सन्नाटा छा गया। वैशाली के दोस्त अर्जुन को ऊपर से नीचे तक घूरने लगे। फिर एक लड़की धीरे से बोली— “ओह माय गॉड… वैशाली… ये तेरा बॉयफ्रेंड है? एक डिलीवरी बॉय?” और अगले ही पल… जो हुआ, उसने अर्जुन की जिंदगी बदल दी। 👇👇**पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।**👇👇https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

Raju kumar Chaudhary

गरीब चाय वाले ने भरी लड़की की फीस… सालों बाद डॉक्टर बनकर उसने जो किया, इंसानियत रो पड़ी बिहार के दरभंगा जिले के एक छोटे से कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास एक तंग सी गली थी। उस गली के मुहाने पर हर सुबह एक छोटी सी लकड़ी की ठेली लगती थी। उस ठेली से उठती उबलती चाय की भाप पूरे माहौल में खुशबू फैला देती थी। उस ठेली को चलाने वाला लड़का था राहुल। राहुल की उम्र मुश्किल से 22–23 साल होगी। दुबला-पतला शरीर, चेहरे पर हल्की दाढ़ी, साधारण कपड़े और आंखों में एक अजीब सी शांति। उसकी मुस्कान इतनी सच्ची थी कि जो भी उससे चाय लेने आता, बिना मुस्कुराए वापस नहीं जाता। लेकिन राहुल की जिंदगी आसान नहीं थी। जब राहुल सिर्फ 15 साल का था, तभी उसके पिता का देहांत हो गया था। उसके पिता स्टेशन पर कुली का काम करते थे। घर में कमाने वाला वही एक इंसान था। पिता के जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी राहुल के कंधों पर आ गई। उसकी मां पहले से ही बीमार रहती थी और उसकी छोटी बहन स्कूल में पढ़ती थी। मजबूरी में राहुल को अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। उसने स्टेशन के बाहर चाय की छोटी सी ठेली लगा ली। हर सुबह 4 बजे उठना, दूध लाना, चाय पत्ती खरीदना, ठेली लगाना और देर रात तक काम करना — यही उसकी जिंदगी बन गई। लेकिन इन सबके बावजूद राहुल ने कभी शिकायत नहीं की। वह हर ग्राहक से आदर से बात करता। कई बार गरीब मजदूरों को उधार में भी चाय दे देता। स्टेशन के आसपास काम करने वाले लोग उसे बहुत पसंद करते थे। और देखें 👉👉 https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

Jyoti Gupta

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GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

सबको अपना मानते, सभी हमारे यार। किन्तु छिपे थे शत्रु जो, किए वक्त पर वार। दोहा --४४३ (नैश के दोहे से उद्धृत) -----गणेश तिवारी 'नैश'

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

स्तोतुर्मघवन काममा पृण। ऋगुवेद सूक्ति-- (३२) की व्याख्या १/५७/५ भावार्थ --हे प्रभु! भक्त की कामनाओं को पूर्ण करो। मंत्र : “स्तोतुर्मघवन् काममापृण।” — ऋगुवेद --1.57.5 पदच्छेद-- स्तोतुः / स्तोतुर् — स्तुति करने वाले, भक्त या उपासक का मघवन् — दानी, कृपालु (इन्द्र अथवा परम दाता ईश्वर के लिए प्रयुक्त) कामम् — इच्छा, अभिलाषा आ पृण — पूर्ण करो, भर दो, संतुष्ट करो। भावार्थ- हे मघवन (दानी प्रभु)! जो भक्त आपकी स्तुति करता है, उसकी उचित और धर्मसम्मत कामनाओं को पूर्ण करो। इस मंत्र में वेद यह शिक्षा देता है कि ईश्वर दानी और कृपालु है। जो व्यक्ति श्रद्धा, स्तुति और सत्कर्म के साथ ईश्वर की उपासना करता है, उसकी आवश्यक और धर्मयुक्त इच्छाओं को ईश्वर पूर्ण करता है। यहाँ “मघवन्” शब्द विशेष रूप से उस परम शक्ति के लिए है जो दया, दान और कृपा से जीवों का पालन करती है। भक्त जब ईश्वर का गुणगान करता है, तो उसका मन शुद्ध होता है और उसकी इच्छाएँ भी स्वार्थ से हटकर कल्याणकारी बन जाती हैं। ऐसी शुद्ध कामनाओं की पूर्ति ईश्वर की कृपा से होती है। सारांश-- यह मंत्र सिखाता है कि भक्तिपूर्वक ईश्वर की स्तुति करने वाला व्यक्ति अपनी धर्मयुक्त कामनाओं की पूर्ति ईश्वर की कृपा से प्राप्त करता है। 1.ऋगुवेद से प्रमाण-- “यं यं युजं कृणुते ब्रह्मणस्पतिः।” (ऋग्वेद 2.23.1) अर्थ : ब्रह्मणस्पति (ईश्वर) जिस भक्त को अपना बना लेता है, उसकी इच्छाओं और कार्यों को सिद्ध करता है। 2. ऋगुवेद-- “स नः पितेव सूनवे अग्ने सुपायनो भव।” (ऋग्वेद 1.1.9) अर्थ : हे अग्ने! जैसे पिता पुत्र की इच्छाओं को पूरा करता है, वैसे ही हमारे लिए कल्याणकारी बनो। 3. यजुर्वेद से प्रमाण-- “तेजोऽसि तेजो मयि धेहि। वीर्यमसि वीर्यं मयि धेहि।” (यजुर्वेद 19.9) अर्थ : हे प्रभु! आप तेजस्वी हैं, हमें भी तेज प्रदान करें; आप वीर्यस्वरूप हैं, हमें भी शक्ति दें। अर्थात् ईश्वर से अपनी आवश्यक शक्तियों और इच्छित गुणों की प्राप्ति की प्रार्थना। 4. अथर्ववेद से प्रमाण “भद्रं नो अपि वातय मनः।” (अथर्ववेद 7.52) अर्थ : हे प्रभु! हमारे मन में शुभ और कल्याणकारी इच्छाएँ उत्पन्न करें और उन्हें पूर्ण करें। उपनिषदों से प्रमाण — 1. कठ उपनिषद-- “एष सर्वेषु भूतेषु गूढोऽत्मा न प्रकाशते। दृश्यते त्वग्रया बुद्ध्या सूक्ष्मया सूक्ष्मदर्शिभिः॥” (कठोपनिषद् 1.3.12) अर्थ : यह परमात्मा सब प्राणियों में स्थित है, परन्तु सूक्ष्म बुद्धि और भक्ति से उसका अनुभव होता है और वही भक्त को परम फल देता है। 2. मुण्डक उपनिषद -- “यं यं लोकं मनसा संविभाति विशुद्धसत्त्वः कामयते यांश्च कामान्। तं तं लोकं जयते तांश्च कामान्।” (3.1.10) अर्थ : जिसका अन्तःकरण शुद्ध हो जाता है, वह जिस लोक और जिन कामनाओं की इच्छा करता है, उन्हें प्राप्त कर लेता है। 3. तैत्तिरीय उपनिषद् -- “स यो ह वै तत्परं ब्रह्म वेद ब्रह्मैव भवति।” (तैत्तिरीयोपनिषद् 2.1) अर्थ : जो मनुष्य परम ब्रह्म को जान लेता है, वह ब्रह्मरूप होकर सभी इच्छाओं की तृप्ति प्राप्त करता है। 4. छान्दोग्य उपनिषद -- “सर्वे कामा: समश्नन्ति।” (छान्दोग्य उपनिषद् 8.1) अर्थ : जो आत्मा और ब्रह्म का ज्ञान प्राप्त कर लेता है, उसकी सभी कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं। ५: श्वेताश्वतर उपनिषद्_. “यो ब्रह्माणं विदधाति पूर्वं यो वै वेदांश्च प्रहिणोति तस्मै। तं ह देवमात्मबुद्धिप्रकाशं मुमुक्षुर्वै शरणमहं प्रपद्ये॥” (6.18) अर्थ : जो परमात्मा ब्रह्मा को उत्पन्न करता है और वेदों का ज्ञान देता है, उसी देव की शरण में जाने से साधक को अपनी अभिलाषित सिद्धि प्राप्त होती है। ६-ईश उपनिषद-- “विद्यां चाविद्यां च यस्तद्वेदोभयं सह। अविद्यया मृत्युं तीर्त्वा विद्ययाऽमृतमश्नुते॥” (मंत्र 11) अर्थ : जो मनुष्य ज्ञान और कर्म दोनों को समझता है, वह मृत्यु के बंधन से पार होकर अमृत पद को प्राप्त करता है—अर्थात् उसकी सर्वोच्च अभिलाषा पूर्ण होती है। ७-प्रश्न उपनिषद_ “स यो ह वै तत्परं ब्रह्म वेद ब्रह्मैव भवति।” (प्रश्नोपनिषद् 6.5) अर्थ : जो मनुष्य परम ब्रह्म को जान लेता है, वह ब्रह्मस्वरूप होकर अपनी सर्वोच्च इच्छाओं की सिद्धि प्राप्त करता है। ८-बृहदारण्यक उपनिषद-- “आत्मा वा अरे द्रष्टव्यः श्रोतव्यो मन्तव्यो निदिध्यासितव्यः।” (2.4.5) अर्थ : आत्मा का दर्शन, श्रवण, मनन और ध्यान करना चाहिए; इससे मनुष्य को परम सत्य और जीवन की पूर्णता प्राप्त होती है। निष्कर्ष : उपनिषद यह बताते हैं कि जो व्यक्ति ईश्वर या ब्रह्म की शरण लेकर ज्ञान और भक्ति करता है, उसकी सर्वोच्च कामनाएँ पूर्ण होती हैं और वह परम आनन्द को प्राप्त करता है। पुराणों से प्रमाण— 1.विष्णु पुराण -- “ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्।” अर्थ : जो भक्त जिस भाव से भगवान की शरण में आता है, भगवान उसी प्रकार उसकी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं और उसे फल देते हैं। 2.शिव पुराण -- “भक्तानामभयं दाता सर्वकामफलप्रदः।” अर्थ : भगवान शिव अपने भक्तों को भय से मुक्त करते हैं और उनकी सभी उचित कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। 3. भागवत पुराण-- “सत्यं दिशत्यर्थितमर्थितो नृणां नैवार्थदो यत्पुनरर्थिता यतः।” (10.88.8) अर्थ : भगवान भक्तों की प्रार्थना सुनकर उन्हें उनकी याचना के अनुसार फल देते हैं। 4. पद्म पुराण -- “भक्तवत्सल भगवान् सर्वाभीष्टफलप्रदः।” अर्थ : भगवान भक्तवत्सल हैं और भक्तों की सभी अभिलाषित कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। ५-स्कंद पुराण -- “भक्तानां कामदं देवं भक्तवत्सलमव्ययम्।” अर्थ : भगवान भक्तवत्सल हैं और अपने भक्तों की कामनाओं को पूर्ण करने वाले हैं। ६. गरुड़ पूराण- “भक्त्या सम्पूजितो विष्णुः ददाति मनसेप्सितम्।” अर्थ : भगवान विष्णु भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तों को उनके मन की अभिलाषा प्रदान करते हैं। ७- ब्रह्म पुराण -- “आराधितो हि भगवान् भक्तानां फलदो हरिः।” अर्थ : भगवान हरि की आराधना करने पर वे भक्तों को इच्छित फल प्रदान करते हैं। ८-- अग्नि पुराण -- “भक्तानुग्रहकर्ता हि सर्वकामफलप्रदः।” अर्थ : भगवान भक्तों पर अनुग्रह करने वाले और उनकी कामनाओं को फल देने वाले हैं। निष्कर्ष : पुराणों में भी स्पष्ट बताया गया है कि भगवान भक्तवत्सल हैं और भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तों की धर्मयुक्त कामनाओं को पूर्ण करते है। गीता से प्रमाण-- (4.11) “ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम्। मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः॥” अर्थ : हे अर्जुन! जो भक्त जिस प्रकार मेरी शरण में आता है, मैं भी उसे उसी प्रकार फल देता हूँ; सभी मनुष्य मेरे मार्ग का ही अनुसरण करते हैं। 2. (9.22) “अनन्याश्चिन्तयन्तो मां ये जनाः पर्युपासते। तेषां नित्याभियुक्तानां योगक्षेमं वहाम्यहम्॥” अर्थ : जो भक्त निरन्तर मेरा स्मरण और उपासना करते हैं, उनके योग (जो नहीं है उसे प्राप्त कराना) और क्षेम (जो है उसकी रक्षा करना) का भार मैं स्वयं उठाता हूँ। 3. (7.21–22) “यो यो यां यां तनुं भक्तः श्रद्धयार्चितुमिच्छति। तस्य तस्याचलां श्रद्धां तामेव विदधाम्यहम्॥ स तया श्रद्धया युक्तस्तस्याराधनमीहते। लभते च ततः कामान्मयैव विहितान् हि तान्॥” अर्थ : भक्त जिस देवता की श्रद्धा से पूजा करना चाहता है, मैं उसकी श्रद्धा को दृढ़ करता हूँ और उसी के द्वारा वह अपनी इच्छित कामनाओं को प्राप्त करता है। गीता में स्पष्ट कहा गया है कि जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से भगवान की शरण में जाता है, भगवान उसकी आवश्यकताओं और धर्मयुक्त कामनाओं की पूर्ति करते महाभारत से प्रमाण १ --(शान्ति पर्व) “भक्तानामनुग्रहकर्ता दाता सर्वाभिलषितफलः।” अर्थ : भगवान अपने भक्तों पर अनुग्रह करने वाले और उनकी अभिलाषित कामनाओं को फल देने वाले हैं। 2-- (अनुशासन पर्व) “यथा यथा हि पुरुषः श्रद्धया परमेश्वरम्। तथा तथा लभते सिद्धिं भक्त्या परमया युतः॥” अर्थ : मनुष्य जितनी श्रद्धा और भक्ति से परमेश्वर की उपासना करता है, उसी के अनुसार वह सिद्धि और इच्छित फल प्राप्त करता है। 3.--(शान्ति पर्व) “न हि भक्तः प्रणश्यति।” अर्थ : भगवान के भक्त का कभी नाश नहीं होता; उसकी रक्षा और कल्याण स्वयं भगवान करते हैं। निष्कर्ष-- महाभारत में भी यह सिद्ध किया गया है कि भगवान भक्तों पर कृपा करके उनकी धर्मयुक्त इच्छाओं को पूर्ण करते हैं। स्मृति ग्रन्थों से प्रमाण— १. मनु स्मृति -- “यः श्रद्धया देवताः नित्यं यजते भक्तिसंयुतः। तस्य तुष्यन्ति देवाश्च प्रयच्छन्ति च वाञ्छितम्॥” अर्थ : जो मनुष्य श्रद्धा और भक्ति से देवताओं की उपासना करता है, देवता उससे प्रसन्न होकर उसकी इच्छित कामनाओं को पूर्ण करते हैं। २. याज्ञवल्क्य स्मृति -- “श्रद्धया परया युक्तो यः कुर्यात् परमेश्वरम्। तस्य सिद्धिर्भवेत् शीघ्रं सर्वकामफलप्रदा॥” अर्थ : जो मनुष्य परम श्रद्धा से परमेश्वर की उपासना करता है, उसे शीघ्र ही सिद्धि और कामनाओं का फल प्राप्त करते हैं। ३--पराशर स्मृति-- “भक्त्या तुष्टो हरिर्नित्यं ददाति मनसेप्सितम्।” अर्थ : भगवान हरि भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तों को उनके मन की अभिलाषा प्रदान करते हैं। निष्कर्ष : स्मृति ग्रन्थों में भी यह बताया गया है कि भक्ति और श्रद्धा से ईश्वर प्रसन्न होकर भक्तों की उचित कामनाओं को पूर्ण करते हैं। . नीति ग्रन्थों से प्रमाण-- १-चाणक्य नीति-- “यथा बीजं तथा फलम्।” अर्थ : मनुष्य जैसा कर्म और भावना करता है, उसे उसी प्रकार का फल प्राप्त होता है। अर्थात् भक्ति और सद्भाव से ईश्वर की कृपा तथा इच्छित फल प्राप्त २-(क)भृतहरि नीति शतक से प्रमाण-- “फलानि कर्मानुगुणानि देहिनां बुद्धिर्कर्मानुसारिणी।” अर्थ : मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार ही फल प्राप्त होता है और उसी के अनुसार उसकी बुद्धि भी चलती है। अर्थात् सत्कर्म और भक्ति से मनुष्य को इच्छित फल प्राप्त होता है। २(ख) भृतुहरि नीति शतक-- “दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या।” अर्थ : मनुष्य को अपने पुरुषार्थ से कार्य करना चाहिए, क्योंकि पुरुषार्थ और ईश्वर की कृपा से ही सफलता और इच्छित फल प्राप्त होते हैं। 3.(क) विदुर नीति से प्रमाण-- “यथा हि एकेन चक्रेण न रथस्य गतिर्भवेत्। एवं पुरुषकारेण विना दैवं न सिद्ध्यति॥” अर्थ : जिस प्रकार एक पहिये से रथ नहीं चलता, उसी प्रकार केवल दैव से कार्य सिद्ध नहीं होता; उसमें पुरुषार्थ भी आवश्यक है। ३(ख). विदुर नीति,-- “दैवं पुरुषकारेण यत्नेन विनियोजयेत्।” अर्थ : मनुष्य को अपने प्रयास और पुरुषार्थ के साथ ईश्वर की कृपा का सहारा लेना चाहिए; तभी इच्छित फल प्राप्त होते हैं। निष्कर्ष :_ चाणक्य नीति, भृतुहरि नीति शतक और विदुर नीति में यह बताया गया है कि ईश्वर की कृपा और मनुष्य का पुरुषार्थ मिलकर ही इच्छाओं और कार्यों की सिद्धि कराते हैं, जो ऋग्वेद के इस मंत्र के भाव के अनुरूप है। २-पंचतंत्र से प्रमाण “देवतानां प्रसादेन सर्वकार्याणि सिद्ध्यन्ति।” अर्थ : देवताओं की कृपा से मनुष्य के कार्य और अभिलाषाएँ सिद्ध हो जाती हैं। 3. योग वशिष्ठ से प्रमाण “ईश्वरानुग्रहादेव पुंसामद्वैतवासना।” अर्थ : ईश्वर की कृपा से ही मनुष्य को उच्च ज्ञान और जीवन की अभिलाषित सिद्धि प्राप्त होती है। ४--गर्ग संहिता से प्रमाण “भक्तवत्सल भगवान् भक्तानां कामदः सदा।” अर्थ : भगवान अपने भक्तों पर सदा कृपा करते हैं और उनकी कामनाओं को पूर्ण करते हैं। निष्कर्ष : नीति ग्रन्थों और आर्ष ग्रन्थों में भी यह सिद्ध किया गया है कि भक्ति, श्रद्धा और सद्कर्म से ईश्वर की कृपा प्राप्त होती है और भक्त की धर्मयुक्त कामनाएँ पूर्ण होती हैं। हितोपदेश से प्रमाण— देवतानां प्रसादेन सिद्ध्यन्ति सर्वसंपदः।” अर्थ : देवताओं (ईश्वर) की कृपा से मनुष्य की सभी संपत्तियाँ और इच्छित कार्य सिद्ध हो जाते हैं। “दैवं च पुरुषकारं च कर्मसिद्धेः कारणम्।” अर्थ : किसी कार्य की सिद्धि के लिए ईश्वर की कृपा (दैव) और मनुष्य का पुरुषार्थ दोनों आवश्यक हैं। निष्कर्ष : में भी बताया गया है कि मनुष्य के पुरुषार्थ के साथ जब ईश्वर की कृपा मिलती है, तब उसकी इच्छाएँ और कार्य सिद्ध होते हैं। -----+-------+-------+-------+----

kattupaya s

be real and believe in reality. whatever your imagination in online world is not true.

Rashmi Dwivedi

अगर कुछ बदल रहा है तो कुछ नया होने वाला है अगर हाथ से कुछ छूट रहा है तो उससे बेहतर आने वाला है।हर हर महादेव ❤️ - Rashmi Dwivedi

kattupaya s

when you enjoy the friendship with fake identity it will lead into various troubles like money loss, blackmail like etc. be aware of it.

Soni shakya

सुप्रभात 🙏🙏

kattupaya s

I dont know it is right or wrong stay away from unknown online friends. I have the bad experience over it. it's not safe

kattupaya s

All the game plan depends on this man #jaspritbumrah

kattupaya s

We wish our Indian cricket team will hold the T20 world Cup and spread happiness, positivity everywhere.

kattupaya s

living in past and worrying about future is waste of time. enjoy the moment with family and friends.

kattupaya s

Good morning friends... have a great Sunday

MASHAALLHA KHAN

छिन लिया सब कुछ मेरा, और मुझसे दुआए मगवाने लगे, गरदीश मे है सितारे और मुझे अब नजर आने लगे, बेचेन है मन और उलझा हुआ है मेरा जहां ये किस तरह मुझको सताने लगे, मै क्या करु ऐ खुदा कि तू मान जाये, अब तो आंखो मे भी आंसू आने लगे . -MASHAALLHA...

S Sinha

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मातृभारती पर सभी महिलाओं को सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं . Happy Women’s Day Today is a reminder of the incredible impact women have on the world .

Tapan Oza

🌅 Good Morning! Every sunrise brings a new opportunity to rise, work with determination, and move one step closer to your dreams. Believe in yourself and start the day with confidence. ✨ - Tapan Oza

Maulik Patel

પ્રેમમાં હું શું લખું? બસ એટલું કે હું એને સ્વપ્નમાં મળું, અઢી અક્ષરના શબ્દ માટે સાહિત્યને જોડું, પણ પ્રેમ માટે શબ્દોના વ્યાકરણને કેમ તોડું?

SARWAT FATMI

कुछ अनसुलझी पहेलियाँ उन्होंने कभी नहीं रोका न टोका किसी राह पर पर क्यों? एक अदृश्य डोर खिंची रही मैं खुल कर कभी चल न पाई एक चिरस्थायी भय मन के किसी कोने में दुबका रहा चीजें खरीदने की छूट थी पसंद चुनने की आज़ादी भी थी पर बाज़ार की भीड़ में मेरी उँगलियाँ जम सी जाती थीं पसंद मेरी ठहर जाती थी हर जगह मुझे आगे किया गया मेरी छोटी से छोटी बात पर पलकों का बिछौना बिछाया गया बच्चों जैसी हर ज़िद पूरी हुई फिर भी क्यों? खुशी का वह रंग दिल तक पहुँच ही नहीं पाया वे कहते थे अक्सर तुम्हारा मन जो चाहे करो तुम बढ़ो आगे मैं तुम्हारी परछाई बनकर साथ हूँ तुम्हें कभी गिरने न दूँगा बस जी लो अपनी ज़िंदगी खुलकर वे कहते रहे शब्दों के झरने बहाते रहे पर मेरी उड़ान धीमी ही रही उफ्फ ये कैसी उलझन है कितना सोचा मैंने खुद के बारे में कितनी रातें जाग कर बिताईं फिर एक धीमी सी आवाज़ आई रोकने वाला कोई नहीं था बाहर से तो कोई बंधन न था शायद इजाज़त मैंने खुद को ही कभी दी नहीं यह कैद बाहर की नहीं थी यह दीवारें मेरे भीतर थीं जहाँ मेरी मर्ज़ी मेरी ही आवाज़ से दब गई अनकही अनसुनी सी बस एक सवाल बनकर रह गई यह मौन स्वीकृति किस डर की देन थी मैं आज तक समझ न पाई। 🥰sarwat fatmi 🥰

Nitesh pratap singh

मुझे तुझसे मोहब्बत है लेकिन जताना नहीं आता II यूहीं समझ जाओ तुम कि यूहीं समझ जाओ तुम II ऐसी यह कमबख्त किस्मत कहा हमारी I

SARWAT FATMI

कुछ ऐसी बातें,जो मैंने कभी समझ नह पाई उन्होंने मुझे कभी किसी चीज के लिए रोका नहीं,टोका नहीं पर न जाने क्यों? खुल कर कभी चल नहीं पाई एक डर सा बना ही रह गया मुझे किसी भी चीज को खरीदने या अपनी पसंद के लिए मनाही नहीं पर पता नहीं क्यों?? बाजार में कुछ खरीद नहीं पाई पसंद नहीं कर पाई हर जगह उन्होंने मुझे ही आगे रखा मेरी हर बातो को पलकों पर रखा गया मेरी हर ज़िद को, बच्चों की तरह पूरी की गई पर पता नहीं क्यों?? खुशी महसूस ही नहीं हुई वो अकसर कहते हैं तेरा जो मन करें वो किया करो तुम आगे बढ़ो मैं तेरे पीछे ही हूं तुम्हें कभी गिरने नहीं दूंगा बस तू खुल कर अपनी जिंदगी जिया करो वो कहते रहे मुझसे, पर मैंने किया नहीं उफ्फ्फ.... ये उलझने बहुत सोचा मैंने अपने बारे में फिर एक आवाज आई रोक तो किसी चीज की नहीं पर शायद इजाजत मैं खुद को कभी दी नहीं 🥰sarwat Fatmi🥰

Radha Rani

महिला शब्द तीन अक्षर से मिल कर बना है म,हि और ला इसी से इनकी ताकत को हम पहचान सकते है कि वो मैं ही हूँ जो सबको हिलाने की शक्ति रखती हूँ हैप्पी वीमेंस डे 💐💐

Bhavna Bhatt

#મારા દાદા

Radha Rani

शायद ही ऐसा कोई घर हो ,जहां बेटियों के जन्म पर खुशियां मनायी जाती हों,पर जैसे जैसे वो बड़ी होती है उसकी मुस्कान घर आंगन में बिखरती है उस सुने से अंगना में शहनाई सी बज जाती है, घर में जब माँ का हाथ बटाती है,जन्म के समय वो दर्द के आशु भी पोंछ जाती है,पापा की सिर मालिश से वो दिनभर का टेंशन दूर भागती है ,जन्म के समय मिले वो जीवनभर की मानसिक तनाव को वो कम कर जाती है, एक दिन ऐसे ही वो मेरे कुल का भी नाम बनायेगी, नहीं खलेगी कमी बेटे की मेरी बेटी ही कुछ ऐसा कर जाएगी

kashish

aaj last din tha class 10th ka ... khush thi ki last exam hai lekin udas bhi kyuki kya pata kon kha hoge vo log ... socha tha maze karege lekin sab udas ho gye the last time haato mai gola aur kuch baate yaad aaye gi ... vo jagre ,mazak ,aur ham sath ka ek sath gumna ,tution ka bingo chup chap khelna aaj sab alag ho gye chehe vo school ke ho ya tution ke yaade achchi thi ... by kashish

Bindiya

" આગમન " હવાની લહેરખી આવે ને કોઈનું આગમન લાગે, ધ્વનિનો રણકાર થાય ને કોઈનું આગમન લાગે, આમતેમ પતંગિયું ઉડે ને કોઈનું આગમન લાગે, ફૂલોની ફોરમ આવે ને કોઈનું આગમન લાગે, દિલની ધડકન વધે ને કોઈનું આગમન લાગે. બિંદિયા જાની (તેજબિંદુ) 8/3/26

Neha kariyaal

आज मैंने एक फिल्म देखी जिसमें दो इंसान एक लड़का और एक लड़की जो एक दूसरे को बहुत अच्छे से जानते थे। क्योंकि रात को सपने में जाने पर उनकी आत्मा एक दूसरे से बदल जाती थी। उस दौरान वे एक दूसरे की जिंदगी जीते थे उनके हिस्से का काम करते थे। पर अफ़सोस आंख खुल जाने पर वे एक दूसरे का नाम भूल जाते। फ़िर उन्हों एक दूसरे के लिए डायरी लिखनी शुरु की जिससे उन्हें पता हो आज क्या किया। और एक दिन उस लड़की ने लिखा आज रात आसमान में धूमकेतु दिखाई देगा जो कई सालों बाद नज़र आएगा तुम भी देखना... लड़के ने उसका छोड़ा msg पढ़ा और बोला आज रात जब वो वापस उस लड़की के शरीर में जायेगा तो उससे उसका नाम पूछेगा? लेकिन उस रात के बाद उसकी आत्मा कभी भी बदली! क्योंकि उस रात धूमकेतू का एक हिस्सा गिरने से उस लड़की का पूरा गांव ख़त्म हो गया था। तो कितना दुखद होता जिसक बारे में हम सबसे ज्यादा जानते है और अंत में उसी का नाम याद न रहे!!!

kapila padhiyar

મૌન સંબધોની આ તુટેલી જંજાળ.     સારી નીવડી કઈક અંશે તુટેલી જંજાળ.     વેરવિખેર કરીને આ સંબધો ગયા દુર ,     સાથે હતા ક્યારેક તો હતી તુટેલી જંજાળ.      હવે, કલ્પી રહી છે ખાલી આ તુટેલી જંજાળ      મનમાં ભાર હતો , તે હવે ઓછો થયો છે.      હવે આ અમસ્તી જંજાળ રહી નથી,      બસ સુકુન છે જીવનમાં મારા હવે ઘણો.      હવે તો ખુશીઓ પણ દરવાજે દસ્તક દે છે.      રોજ મળવાનું પણ થાય છે  હવે ખુદથી ,       પેલા તો બસ મળતી આ બાંધેલી જંજાળ.      હવે તો છે મલકતું મુખ મારુ ને હસતી તસવીર...       બસ આ જ તો છે  કલ્પી જીવનની  મોજ         મૌન સંબધોની આ તુટેલી જંજાળ.         સારી નીવડી કઈક અંશે તુટેલી જંજાળ.                                     કપિલા પઢીયાર (કલ્પી)

mohansharma

ग़लत कहते हैँ लोग मोहन कि दूर रहने से प्यार होता नहीं कम.. मगर जो दूर हो जाए उस प्यार में बताओे कहीं होता है दम..

Mare DoAlfaz

जो मुकम्मल नहीं मिलते, वो मुकम्मल बिछड़ते भी नहीं। - Mare DoAlfaz

ArUu

नहीं तो मुझे कहाँ है शिकायत…🫣 मुझे तो गर्व है। गर्व है इस बात का कि I’m the best creature created by God ❤️ कौन सा प्राणी होगा भला औरत से ज्यादा महान? शायद जब भगवान सबसे सुखद मनःस्थिति में होंगे, तभी उन्होंने एक स्त्री का सृजन किया होगा… क्योंकि स्त्री से अधिक सरल, सौम्य, संवेदनशील, समझदार, साहसी, सहनशील, स्नेहमयी, सजग, समर्थ, सृजनशील, संस्कारवान और सशक्त प्राणी इस जगत में और कहाँ होगा? सच है न कि स्त्री सिर्फ़ एक शब्द नहीं, समर्पण, शक्ति और सृष्टि का सुंदर संगम है। So proud to be a woman 😌 हर उस स्त्री को सलाम जो संघर्ष में भी संभलना जानती है, संवेदना में भी शक्ति बनना जानती है, और अपने साहस से संसार को संवारना जानती है। Happy International Women’s Day my all strong, stunning womaniyaaaas ❤️ ArUu ✍️

jassu

आखिरी चिठ्ठी जो कभी भेजी हीं नहीं गई..? एक लड़का आरव हर रात किसी अजनबी लड़की को चिट्ठियाँ लिखता है… लेकिन वो चिट्ठियाँ कभी भेजता नहीं। शहर में एक लड़की आयरा है जिसे हर महीने एक रहस्यमयी चिट्ठी मिलती है… जिसमें उसकी ज़िंदगी की वो बातें लिखी होती हैं जो उसने किसी को नहीं बताई। दोनों कभी मिले नहीं… लेकिन दोनों की ज़िंदगी एक-दूसरे से जुड़ी है। और असली रहस्य यह है — जिस लड़के की चिट्ठियाँ हैं… वो 3 साल पहले मर चुका है। like & share thank you...

बिट्टू श्री दार्शनिक

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Chaitanya Joshi

પ્રકૃતિને મળવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે. તરંગો નિહાળવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે. સામ્રાજ્ય રજનીનું ને સાગર શાંત બની ટહેલે , ઉતંગરવ સાંભળવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે. દીસે છે નાવ ક્યાંક ક્યાંક સમંદર શોભા વનારી, પ્રફુલ્લતા પામવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે. હરખે હૈયું નિસર્ગને નિહાળીને નિજ નયનને સહજ, ઉરધબકારે સાંકળવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે. દેવ વરુણ રખેને શાંતિ સુત્રો ભણી રહ્યા હોય ને, મનને મહેકાવવાને આવ્યા અમે સાગર કિનારે. ચૈતન્ય જોષી 'દિપક 'પોરબંદર.

kattupaya s

That's all for now. see u later

Nandani

સ્ત્રી... અઢી અક્ષરનો આ શબ્દ દુનિયાનું સર્જન અને સંરક્ષણ બંને કરવાની ગજબની શક્તિ ધરાવે છે... બેડીમાં બંધાયેલી સ્ત્રીથી શરૂ કરીને માથા ઉપર તાજ પહેરતી સ્ત્રી સુધીની સફરનો સાક્ષી આપણો આ સમાજ  રહ્યો છે. અત્યારના સમયમાં આ તાજ માત્ર સ્ત્રીઓના માથામાં જ નહીં પરંતુ... તેની નિર્ણય શક્તિમાં, તેની વિચાર શક્તિમાં, તેના અવાજમાં, તેના આત્મવિશ્વાસમાં નિખરતો જોવા મળે છે. એક શિક્ષિત અને સશક્ત મહિલા માત્ર તેના પરિવારને જ નહીં પરંતુ સમાજને પણ આગળ વધારવામાં મહત્વની ભૂમિકા ભજવે છે. સમય બદલાયો છે,, પાંજરામાં પુરાયેલી સ્ત્રી હવે આકાશમાં ઉડીને પોતાની પ્રતિભા સાબિત કરી રહી છે. તો આવો સ્ત્રીમાં રહેલી આવી પ્રતિભાઓ ને સલામ કરીએ... 8 માર્ચ એટલે કે વિશ્વ મહિલા દિવસના દિવસે સમાજમાં રહેલી તમામ સ્ત્રીઓને અને તેના દરેક સ્વરૂપને વંદન કરીએ.. અને સાથે તેમને આદર, સન્માન અને સમાનતાનો હક  આપીએ... સ્ત્રી હોવાનો ગર્વ રાખો કારણ કે.. તમે દુનિયાથી નથી,, દુનિયા તમારાથી છે..!! Happy Women's Day..                                            --Nandani

kattupaya s

Hiding your love with someone you care not easy. it's like a fragile glass. hold it nicely

kattupaya s

She may angry with me. I just pass it. it will be good for her future.

kattupaya s

happiness outside sadness inside. let's hope tomorrow will it change Or not

kattupaya s

sleeping peacefully is like a dream nowadays. I try to sleep on time. but all kind of memories come together like a ocean waves.

kattupaya s

I like her aggressiveness. don't search answers outside. it's all in with you

kattupaya s

Frankly speaking I don't need attention for my quotes.iam so conservative.if u like .read the quotes and leave me alone.. just saying

kattupaya s

Sometimes I don't want to go argument with people who were spending their valuable time with me. I admire them and hope they will understand me and forgive me for my mistakes

kattupaya s

Goodnight friends sweet dreams

PRASANG

“ख़ामोशी में विद्रोह” भूखों की भीड़ देखो, कैसा तमाशा चल रहा है, सत्ता के घर में लेकिन जश्न निराला चल रहा है। डिग्रियों का ढेर लेकर फिर रहा हर युवा अब, सपनों के शहर में बस दर्द का धुआँ चल रहा है। खेतों में सूखी मिट्टी, कारख़ाने सब हैं वीरान, फिर भी मंचों पर विकासों का नज़ारा चल रहा है। रोटियों की जंग में सड़कों पे उतरा हर इंसाँ, और कुर्सियों का खेल वैसे ही सारा चल रहा है। झूठे वादों से यहाँ हर रोज़ बहलाया गया है, सच पूछो तो देश में कैसा गुज़ारा चल रहा है। टूटते सपनों को आखिर कौन देगा अब सहारा, हर तरफ़ बेरोज़गारी का अँधेरा चल रहा है। एक दिन बदलेगी तस्वीर ये सियासत की ‘प्रसंग’, आज खामोशी सही- दिल में विद्रोह चल रहा है। -प्रसंग प्रणयराज रणवीर

kattupaya s

I want to be with you whatever you name it in a relationship or friendship. even anonymous.

kattupaya s

I forgive others easily but not myself for making again a mistake

kattupaya s

it's a bitter experience

kattupaya s

it's quite different

kattupaya s

believe in love.. This quote deals the reality

kattupaya s

fear of losing you...

kattupaya s

when love peaks at you possessiveness also grows with it. without that love circle cannot complete

kattupaya s

iam too possesive

kattupaya s

it's going to be great Sunday of the year. Cheers for India to win the T20 world cup

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/18GohwrHeg/ સુંદર વાર્તા માણો મારા ફેસબુક પેજ પર.

Raju kumar Chaudhary

स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ, हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ। कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान, हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान। अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो, तो Follow करिए… यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨

kattupaya s

Indian cricket team has some solid batting. but poor fielding skills. Newzealand may look like over confident on their spin dept. that's their weakness.

kattupaya s

let s go to sports topic.. I support Indian team. but they have really prepared?for worst conditions. I feel no. Newzealand attacking with rachin ravindra. he is the key man going to be reason for their world Cup.

kattupaya s

stories were motivating me more than 15 years. we have to identify the good writers and encourage them.

રોનક જોષી. રાહગીર

https://www.facebook.com/share/p/15acpswqQon/ સુંદર મજાની બોધ વાર્તા માણો મારા ફેસબુક પેજ પર.

kattupaya s

it's Tea time..

kattupaya s

best stories came from travel ✈️️. from origin to various origins. try to travel a lot.

Gautam Patel

जय महाकाल

kattupaya s

story structure is must. for love stories it's not necessary. social stories I want to write but audience like sex oriented social stories. a male dominated society and he fall in love for a girl. finally the girl will use all her power for to release him from pressure. I just hate it.

kattupaya s

stories are like a ocean. sometimes big whales 🐳 will swallow you. be careful. famous writers are so simple in thinking but their expression is amazing. iam thinking amazing but in writing not even closer to their imagination.

RM

ફરી મને !! "મને તારા સિવાય બીજું કોઈ નથી જોઈતું, તારા જેવું, તારા જેમ, તારી જગ્યાએ. મને નથી જોઈતું કે કોઈ મને તારા જેવું નામથી બોલાવે, મને તારી જગ્યાએ બીજું કોઈ નથી જોઈતું જે મને પોતાનો હક આપે. મને ફક્ત તું જ જોઈએ છે... ફક્ત તું જ અને બીજું કોઈ નહીં. મને ફક્ત તારો પ્રેમ, તારી સુગંધ, તારી લાગણીઓ, તારું હાસ્ય, તારા બધા આનંદ, તારા દુ:ખ, તારા આંસુ, તારા બધા દુ:ખ જોઈએ છે. અને આ સિવાય, મને તારા સિવાય બીજું કંઈ નથી જોઈતું, તારા જેવું, તારી જગ્યાએ, તારા વગર.".....!! ❤️❤️

kattupaya s

it is easy to start writing a story but the process of finishing it takes time. This time I have a schedule for that so that it will teach you on time.

kattupaya s

Thinking about writing new story. but my laptop has become too old. any new model laptop suggestions under 30K? dell or HP

kattupaya s

Good evening friends.. have a great evening

Narayan Mahor

ठहराव की छाया कभी-कभी दुनिया बहुत तेज़ भागती है, जैसे किसी अदृश्य मेले में सबको जल्दी पहुँचना हो। सड़कें थक जाती हैं, पैर धूल से भर जाते हैं, पर लोग फिर भी चलते रहते हैं— मानो रुकना कोई भूल हो। ऐसे ही एक मोड़ पर एक बूढ़ा पेड़ खड़ा है। वह किसी से कुछ नहीं कहता, बस छाया बिखेरता रहता है। जो भी थोड़ी देर रुकता है, उसे हवा धीरे से समझाती है— कि सफ़र केवल चलना नहीं होता, कभी-कभी ठहरना भी रास्ता होता है। और तब लगता है कि जीवन कोई दौड़ नहीं, बल्कि एक लंबी पगडंडी है जहाँ हर कदम के साथ मन भी थोड़ा-सा घर लौटता है।

Aachaarya Deepak Sikka

ॐ नमः शिवाय। मन की चिकित्सा ग्रहों के माध्यम से (तत्व-आधारित नवग्रह उपायों का मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण) वैदिक ज्योतिष में नवग्रह — सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु — हमारे आंतरिक और बाहरी संसार को प्रभावित करते हैं। जल, अग्नि, पृथ्वी, वायु और अन्न/शरीर से जुड़े पारंपरिक उपाय केवल अंधविश्वास नहीं हैं, बल्कि गहरे मनोवैज्ञानिक प्रभाव रखते हैं। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से ये उपाय अवचेतन प्रतीकों को सक्रिय करते हैं, सजगता बढ़ाते हैं और भावनात्मक संतुलन के लिए मस्तिष्क की न्यूरल संरचनाओं को पुनः प्रशिक्षित करते हैं। प्रत्येक तत्व एक मानसिक कार्य से जुड़ा है: जल – भावना और प्रवाह अग्नि – इच्छा शक्ति और दिशा पृथ्वी – स्थिरता और ग्राउंडिंग वायु – विचार और श्वास अन्न/शरीर – पोषण और आत्म-मूल्य इनके साथ कार्य करने से ज्योतिष अमूर्त विचार न रहकर एक जीवंत, उपचारात्मक अनुष्ठान बन जाता है। --- 🌞 सूर्य: प्राणशक्ति, अहं, उद्देश्य जल उपाय: प्रतिदिन प्रातः उगते सूर्य को अर्घ्य देना केवल कर्मकांड नहीं है; यह आत्मविश्वास और उद्देश्य की भावना को मन में स्थापित करता है। पूर्व दिशा की ओर मुख करके तांबे के लोटे से जल अर्पित करना अहं के समर्पण का प्रतीक है। प्रातः सूर्य प्रकाश से सेरोटोनिन बढ़ता है और यह अभ्यास आत्म-विश्वास को मजबूत करता है। अग्नि उपाय: सूर्योदय पर घी का दीपक जलाकर उसमें शांत दृष्टि से देखना संकल्प-शक्ति को मजबूत करता है। यह मस्तिष्क को दिशा चुनने का अभ्यास कराता है। पृथ्वी उपाय: नंगे पांव धरती पर खड़े होकर सूर्य की ओर देखना शरीर को स्थिरता देता है। यह तनाव घटाता है और आत्मविश्वास की देहगत स्मृति बनाता है। वायु उपाय: 5 मिनट सूर्यभेदी प्राणायाम तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करता है और आलस्य दूर करता है। अन्न/शरीर उपाय: सूर्य अर्घ्य के बाद हल्का, सात्त्विक और गरम नाश्ता आत्म-सम्मान और अनुशासन का भाव बढ़ाता है। --- 🌙 चंद्र: भावना, अंतर्ज्ञान, सुरक्षा जल उपाय: शिवलिंग पर दूध मिश्रित जल से अभिषेक मन को शांत करता है और भावनात्मक तनाव को बाहर निकालता है। अग्नि उपाय: पूर्णिमा की रात जल पात्र में दीपक का प्रतिबिंब देखना भावना और स्पष्टता का संतुलन बनाता है। पृथ्वी उपाय: चंद्र दर्शन करते हुए धरती को स्पर्श करना शरीर को सुरक्षा का अनुभव कराता है। वायु उपाय: सोने से पहले 4 गिनती में श्वास और 6 गिनती में श्वास-त्याग चिंता कम करता है। अन्न/शरीर उपाय: हल्का रात्रि भोजन और कम उत्तेजना भावनात्मक स्वच्छता का अनुष्ठान बन जाता है। --- 🔴 मंगल: कर्म, क्रोध, साहस जल उपाय: श्रमिकों को जल देना आक्रोश को सेवा में बदलता है। अग्नि उपाय: कार्य से पहले लाल दीपक जलाना लक्ष्य पर एकाग्रता बढ़ाता है। पृथ्वी उपाय: नंगे पांव चलना या व्यायाम करना क्रोध को सुरक्षित रूप से बाहर निकालता है। वायु उपाय: कपालभाति प्राणायाम मानसिक अशांति को शुद्ध करता है। अन्न/शरीर उपाय: अदरक, काली मिर्च जैसे हल्के मसाले संतुलित रूप से मंगल ऊर्जा को नियंत्रित करते हैं। --- 🟢 बुध: बुद्धि, संवाद, अनुकूलन जल उपाय: प्रतिदिन पौधों को पानी देना मन को स्थिर करता है। अग्नि उपाय: पढ़ाई से पहले दीपक जलाना ध्यान को प्रशिक्षित करता है। पृथ्वी उपाय: एक ही स्थान पर बैठकर हाथ से लिखना एकाग्रता बढ़ाता है। वायु उपाय: नाड़ी शोधन प्राणायाम विचारों को संतुलित करता है। अन्न/शरीर उपाय: हल्का और रेशा युक्त भोजन मानसिक स्पष्टता देता है। --- 🟡 गुरु: ज्ञान, आस्था, विस्तार जल उपाय: मंदिर में जल दान कृतज्ञता और उदारता का भाव बढ़ाता है। अग्नि उपाय: गुरुवार को दीपक जलाकर शास्त्र पढ़ना मन को स्थिर करता है। पृथ्वी उपाय: धरती पर बैठकर चिंतन करना विचारों को जीवन में उतारता है। वायु उपाय: मंत्रोच्चार या सकारात्मक वाक्य बोलना तंत्रिका तंत्र को शांत करता है। अन्न/शरीर उपाय: प्रसाद ग्रहण करना भोजन को पवित्र अनुभव बनाता है। --- 💕 शुक्र: प्रेम, सौंदर्य, सुख जल उपाय: मीठा शरबत बांटना संबंधों में मिठास लाता है। अग्नि उपाय: सुगंधित दीपक या अगरबत्ती सौंदर्य बोध जगाती है। पृथ्वी उपाय: फूलों और पौधों के साथ काम करना आत्म-मूल्य बढ़ाता है। वायु उपाय: संगीत के साथ श्वास-प्रश्वास सामंजस्य बढ़ाता है। अन्न/शरीर उपाय: सुंदर ढंग से भोजन बनाकर साझा करना संबंध चिकित्सा है। --- ⚫ शनि: अनुशासन, समय, कर्म जल उपाय: वृद्धों को जल सेवा करुणा जगाती है। अग्नि उपाय: शनिवार को तिल के तेल का दीपक धैर्य का प्रतीक है। पृथ्वी उपाय: रोज थोड़ा सफाई कार्य आदत निर्माण करता है। वायु उपाय: प्रतीक्षा करते समय मोबाइल न देखना सहनशीलता सिखाता है। अन्न/शरीर उपाय: सप्ताह में एक दिन सरल भोजन संयम सिखाता है। --- 🌪 राहु: आसक्ति, भ्रम, लालसा जल उपाय: पक्षियों के लिए जल रखना अनासक्ति सिखाता है। अग्नि उपाय: दीपक देखकर विचारों को केवल “विचार” मानकर जाने देना माइंडफुलनेस है। पृथ्वी उपाय: पेड़ या दीवार से पीठ लगाकर बैठना भ्रम को तोड़ता है। वायु उपाय: विचार लिखकर फिर गहरी श्वास लेना चिंता कम करता है। अन्न/शरीर उपाय: निर्णय के दिनों में अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन से बचना मन को सुरक्षित रखता है। --- 🌑 केतु: वैराग्य, आध्यात्म, पूर्व कर्म जल उपाय: आवारा पशुओं को जल देना करुणा और मुक्ति का अभ्यास है। अग्नि उपाय: मंद प्रकाश में दीपक के साथ आत्म-प्रश्न (“यह कौन अनुभव कर रहा है?”) अवचेतन को उजागर करता है। पृथ्वी उपाय: प्रतिदिन कुछ मिनट मौन में धरती पर बैठना आंतरिक शांति देता है। वायु उपाय: विचारों को बादलों की तरह आते-जाते देखना साक्षी भाव सिखाता है। अन्न/शरीर उपाय: कभी-कभी सादा भोजन आत्म-नियंत्रण सिखाता है। --- प्लेसबो और अर्थ प्रभाव ये उपाय इसलिए भी काम करते हैं क्योंकि मन उन्हें अर्थ देता है। “प्लेसबो” नकली नहीं, बल्कि मस्तिष्क की उपचार शक्ति का सक्रिय होना है। सुरक्षा और नैतिकता उपाय अहिंसक हों। भय नहीं, सशक्तिकरण का भाव रखें। यह चिकित्सा या मनोचिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक अभ्यास हैं। व्यक्तिगत चयन 1–2 उपाय चुनें जो भावनात्मक रूप से आपको सच्चे लगें। 21–43 दिन तक स्वयं पर प्रयोग करें और बदलाव देखें। सांस्कृतिक व प्रतीकात्मक स्तर ये उपाय तीन स्तरों पर काम करते हैं — प्रतीकात्मक (archetype) मनोवैज्ञानिक (व्यवहार, भावना, विचार) ऊर्जात्मक/आध्यात्मिक (जो इसमें विश्वास करते हैं) आधुनिक चिकित्सा से एकीकरण जल = भावनात्मक संतुलन अग्नि = प्रेरणा और लक्ष्य पृथ्वी = ग्राउंडिंग और आदत निर्माण वायु = श्वास और विचार नियंत्रण अन्न = आत्म-देखभाल और सीमाएं अशांत संसार में ये देह-आधारित उपाय हमें याद दिलाते हैं: सच्चा उपचार तब होता है जब संकल्प और कर्म जीवन के हर स्तर पर एक हो जाते हैं। आपका अपना आचार्य दीपक सिक्का संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी

Aachaarya Deepak Sikka

ॐ नमः शिवाय। पीड़ा और समस्याओं के पीछे का विज्ञान, साधना के गुप्त प्रभाव जो सामान्य धारणा से भिन्न होते हैं, ज्योतिषीय नियम जो पुस्तकों के अनुसार काम नहीं करते। हम में से अधिकांश जो आध्यात्मिक क्षेत्रों में गहराई से उतरते हैं, उन्होंने अनगिनत स्तर की पीड़ा और आघात का अनुभव किया है। यह सार्वभौमिक नहीं है, लेकिन बड़े पैमाने पर ऐसा होता है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह घटनाएं लगातार होती रहती हैं, जो हमारे भीतर की अच्छाई को चुनौती देती हैं। अक्सर पूछा जाता है कि ऐसा क्यों होता है और इतनी क्रूरता से क्यों होता है, और सबसे महत्वपूर्ण, इतनी बार क्यों होता है? चलिए जानते हैं:- 🦜 सबसे पहले, यह केवल सच्चे साधक के साथ होता है। यह जीवन में नकारात्मक तत्वों द्वारा उत्पन्न प्रभावों के समान भी है। इसलिए, इन दोनों के बीच अंतर करना आवश्यक है और जाहिर है कि जो व्यक्ति पीड़ित है, वह इसका कारण नहीं समझ सकता क्योंकि उसका मन उस स्तर पर नहीं होता है कि वह मूल कारण को समझ सके। 🦜 नियमित परीक्षण होते रहेंगे। आपको धन अर्जित करने के अवसर मिलेंगे जिसमें दूसरों को धोखा देना, कामुक लालच से मार्ग से भटकना, विरोधियों को नुकसान पहुँचाने के मौके, और जब आप गरीबी के चरम पर होंगे, तब गलत तरीके से धन का आगमन। जब आपकी आत्मा बुराइयों की ओर गिरती है, तो ब्राह्मण उसी क्षण आपको छोड़ देता है। आप अमीर, धनी और भ्रष्ट साधक बन जाते हैं। 🦜 जब आप साधना करते हैं या जब आप किसी आध्यात्मिक रूप से उन्नत व्यक्ति से मिलते हैं या जब आप किसी देवता की नजरों में महत्वपूर्ण हो जाते हैं, तो आपके द्वारा किए गए कर्मों के परिणाम तीव्र हो जाते हैं। यह केतु और राहु दोनों के कारण होता है क्योंकि परब्रह्मण हमें बंधनों से मुक्त करना चाहता है। सबसे पहले वह हमारे कर्म बंधनों को कम करता है, और इसी के परिणामस्वरूप जीवन में सबसे खराब घटनाओं की बाढ़ आ जाती है। 🦜 पीड़ा की तीव्रता और लगातार होने वाली घटनाएं यह दर्शाती हैं कि भगवान हम पर किस प्रकार कार्य कर रहे हैं। यह हमारे कर्म ऋणों के स्तर को भी इंगित करता है। इसलिए जब यह सब हो रहा हो, तो धैर्य बनाए रखना आवश्यक है। 🦜 साधक कभी मरता नहीं है, वह हमेशा अंतिम क्षण में बच जाता है, उसे हमेशा दिव्य सहायता मिलती है, और हमेशा एक अदृश्य सहायता होती है। इष्ट देवता से जुड़े किसी भी ग्रह द्वारा यह प्रभाव उत्पन्न होता है। जो ग्रह अत्यधिक शुभ, उच्च अवस्था में हो, वह सामान्य रूप से (केवल साधक के लिए) बुरा दशा देता है। यह ठीक उसके विपरीत होता है जो ग्रंथों में लिखा होता है। भौतिक लाभ की कमी और आध्यात्मिक अनुभवों की प्रचुरता होती है। हालांकि, आपको धन तब मिलेगा जब जरूरत होगी। 🦜 जब आप आध्यात्मिक रूप से ऊँचे हो जाते हैं, तो बुरे प्रभाव समाप्त हो जाते हैं। हालांकि, भगवान यह सुनिश्चित करते हैं कि आपको किसी भी प्रकार के आनंद से वंचित रखा जाए। आप ध्यानमग्न हो जाते हैं, और भले ही आपको जीवन में हर भौतिक या अन्य रूप में सब कुछ मिल जाए, आप उसका आनंद नहीं ले पाएंगे। यह आपके लिए अर्थहीन हो जाएगा। 🦜 कुछ शारीरिक लक्षणों में साधना के दौरान झटके आना, सम्मोहन की स्थिति, दूसरों के बारे में सब कुछ जानना, हर पल में खुश रहना, शत्रुता की कमी, अभिमान, ईर्ष्या, काम व अन्य पापों की कमी शामिल है। आप भगवान को हर जगह देखते हैं और वही करते हैं जो वे आपसे कहते हैं। आप वास्तव में कोई नहीं बन जाते हैं। 🦜 उच्च ग्रह, आत्मकारक और अमात्यकारक अच्छे होने के बावजूद बुरे परिणाम देंगे। कोई भी भौतिक लाभ गायब हो जाएगा। राहु पंचम और केतु एकादश में या इसके विपरीत होने पर स्थिति तीव्रतम हो जाती है ताकि ऋणों को कम किया जा सके। केतु इसे बहुत बुरे तरीके से करता है। राहु भ्रम और जाल तैयार करता है। 🦜 मजबूत षष्ठमेश (छठे घर का स्वामी) वर्षों की तपस्या और पीड़ा का कारण बनेगा क्योंकि हमें संसार को बहुत कुछ लौटाना है। व्यक्ति पर उपाय काम नहीं करेंगे क्योंकि वह भगवान का है। आपका अपना आचार्य दीपक सिक्का संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी

A singh

अगर एक तोता 1 घंटे में 1 गाना गाता है, तो 3 तोते 3 घंटे में कितने गाने गाएंगे? विकल्प: A) 3 B) 9 C) 6 D) तोते बहस करेंगे 😜 sahi jabab de😆😆

Aachaarya Deepak Sikka

ॐ नमः शिवाय भारत के संन्यासी (समयरेखा और योगदान) वयम् अमृतस्य पुत्राः (श्वेताश्वतरोपनिषद्) अमृतस्य पुत्रा वयं, सबलं सदयं नो हृदयम्। गतमितिहासं पुनरुन्नेतुं, युवसङ्घटनं नवमिह कर्तुम्॥ भारतकीर्तिं दिशि दिशि नेतुं, दृढसंकल्पा विपदि विजेतुम्। ऋषिसन्देशं जगति नयेम, सत्त्वशालिनो मनसि भवेम॥ कष्टसमुद्रं सपदि तरेम, स्वीकृतकार्यं न हि त्यजेम। दीनजनानां दुःखविमुक्तिं, महतां विषये निर्मलभक्तिम्॥ सेवाकार्ये सन्ततशक्तिं, सदा भजेम भगवति रक्तिम्। सर्वे अमृतस्य पुत्राः शृण्वन्तु ये दिव्यानि धामानि आतस्थुः॥ युजे वां ब्रह्म पूर्व्यं नमोभिर्विश्लोक एतु पथ्येव सूरेः। शृण्वन्तु विश्वे अमृतस्य पुत्रा आ ये धामानि दिव्यानि तस्थुः॥ (श्वेताश्वतरोपनिषद् – द्वितीय अध्याय) --- भारत की आध्यात्मिक धरोहर उसके संतों, ऋषियों और रहस्यवादी साधकों के जीवन से सदैव प्रकाशित होती रही है। हम अमरत्व की संतान हैं, इसलिए हमारे हृदय बलवान और करुणामय हों। आओ, हम भूले हुए इतिहास को पुनर्जीवित करें और एक नवीन युवा संगठन का निर्माण करें। भारत की कीर्ति चारों दिशाओं में फैले और विपत्ति में भी दृढ़ संकल्प के साथ हम विजयी बनें। ऋषियों के संदेश को विश्व तक पहुँचाएँ और अपने चरित्र को उत्तम विचारों से समृद्ध करें। कष्टों के सागर को शीघ्र पार करें और जो कार्य हमने स्वीकार किया है उसे कभी न छोड़ें। दीन-दुखियों की पीड़ा दूर करने का प्रयास करें और महान आत्माओं के प्रति निर्मल भक्ति रखें। सेवा कार्य में निरंतर शक्ति बनी रहे और हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम सदा जाग्रत रहे। अमृत के पुत्र—जो दिव्य लोकों को प्राप्त हुए हैं—उनके वचनों को सुनें और अनुसरण करें। --- वेद कहते हैं कि समस्त प्राणी अमर और अविनाशी परमात्मा की संतान हैं। जैसे संतान अपने पिता के गुणों को धारण करती है, वैसे ही वेद के अनुसार हम भी अमर स्वरूप हैं। परिवर्तन प्रकृति का नियम है—संसार की प्रत्येक वस्तु निरंतर बदलती रहती है। संपूर्ण ब्रह्मांड में जन्म, मृत्यु, निर्माण और विनाश की प्रक्रिया हर क्षण चलती रहती है। शरीर माता-पिता से जन्म लेता है, पर प्रकृति के नियम के अनुसार जड़ या चेतन कोई भी वस्तु सदा एक-सी नहीं रहती। अतीत की ऐतिहासिक विरासत को पुनः जाग्रत करने के लिए युवाओं को संगठित होकर नए भारत का निर्माण करना चाहिए। वे महान संत स्मरणीय हैं जिन्होंने धर्म, संस्कृति और समाज के कल्याण के लिए दिव्य जीवन जिया। भारत की महिमा को चारों दिशाओं में फैलाएँ और दृढ़ निश्चय के साथ संकटों में विजयी हों। ऋषियों के संदेश को विश्व में प्रचारित करें और अपने व्यक्तित्व को उत्तम विचारों से अलंकृत करें। भक्ति के साथ सेवा करें और ईश्वर के प्रति आध्यात्मिक उत्साह को विकसित करें। अमृत के पुत्र—दिव्य संस्थानों, तीर्थों, संतों और महापुरुषों के पदचिह्नों का अनुसरण करें और उनके उपदेश आत्मसात करें। नीचे दिए गए महान व्यक्तित्व “अमृतपुत्र” कहे जाते हैं, जिनकी शिक्षाओं और कर्मों ने पीढ़ियों को प्रभावित किया है: (संक्षिप्त हिंदी रूपांतरण) 1. बुद्ध (563–483 ई.पू.) – करुणा, अहिंसा और चार आर्य सत्यों का उपदेश; एशिया में शांति का मार्ग। 2. महावीर (599–527 ई.पू.) – अहिंसा, सत्य और तपस्या; जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर। 3. आदि शंकराचार्य (502 ई.पू.) – अद्वैत वेदांत के आचार्य; चार मठों की स्थापना। 4. रामानुजाचार्य (1017–1137) – विशिष्टाद्वैत वेदांत; भक्ति और समरसता। 5. गुरु नानक (1469–1539) – सिख धर्म के प्रवर्तक; समानता और सेवा का संदेश। 6. कबीर (1440–1510) – निर्गुण भक्ति; जाति-पंथ का विरोध। 7. तुलसीदास (1532–1623) – रामचरितमानस के रचयिता। 8. चैतन्य महाप्रभु (1486–1534) – संकीर्तन और कृष्ण प्रेम का प्रचार। 9. गोरखनाथ (10–11वीं शताब्दी) – नाथ योग परंपरा के प्रवर्तक। 10. लाहिड़ी महाशय (1828–1895) – क्रिया योग का प्रचार। 11. रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) – धर्म समन्वय और रामकृष्ण मिशन की प्रेरणा। 12. स्वामी विवेकानंद (1863–1902) – वेदांत और योग का विश्व प्रचार। 13. श्री अरविंद (1872–1950) – समग्र योग और आध्यात्मिक उत्क्रांति। 14. तोतापुरी (18वीं शताब्दी) – अद्वैत साधक; रामकृष्ण के गुरु। 15. देवरहा बाबा (20वीं शताब्दी) – दीर्घायु और सेवा। 16. जलाराम बापा (1799–1881) – दया और सेवा के प्रतीक। 17. विशुद्धानंद परमहंस (1853–1937) – तंत्र, योग और भक्ति का समन्वय। 18. त्रैलंग स्वामी (1607–1887) – महान योगी, दीर्घायु। 19. पद्मपादाचार्य – शंकराचार्य के प्रमुख शिष्य। 20. नित्यानंद प्रभु – चैतन्य आंदोलन के सहचर। 21. भक्त हरिदास – मीरा बाई के गुरु। 22. सनतदासजी – समाज सुधारक संत। 23. मधुसूदन सरस्वती – अद्वैत सिद्धि के रचयिता। 24. विजयकृष्ण गोस्वामी – भक्ति मार्ग के संत। 25. स्वामी प्रणवानंद – भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक। 26. स्वामी गंभीरा नंद – वेदों के अनुवादक। 27. बालनाथजी – नाथ योगी। 28. रामप्रसाद सेन – काली भक्ति के कवि। 29. साधक रामदेव – योग साधक। 30. खथिया बाबा – तपस्वी योगी। 31. रमण महर्षि (1879–1950) – “मैं कौन हूँ?” आत्मविचार। 32. भोला गिरी – करुणा और सेवा। ए 33. महावतार बाबाजी – क्रिया योग के प्रवर्तक। 34. समर्थ रामदास (1608–1681) – दासबोध के रचयिता। 35. श्री भोलनाथ – योग और सेवा। 36. लोकनाथ ब्रह्मचारी (1730–1890) – तपस्या और चमत्कार। 37. जगतबंधु प्रभु (1871–1921) – भक्ति और समाज सेवा। ये संत अद्वैत, भक्ति, तंत्र, योग और समाज सुधार—भारत की आध्यात्मिक विविधता के प्रतीक हैं। इन संतों ने मानव के भीतर छिपे चेतना-रस (अमृत) को जाग्रत किया और धर्म, करुणा, साहस, सत्य और भक्ति का संदेश दिया। हम अमृत के पुत्र हैं—अर्थात शरीर नश्वर है, पर आत्मा अमर है। श्वेताश्वतर उपनिषद, भगवद्गीता और अष्टावक्र गीता कहते हैं—बंधन से मुक्त हो, जागरूकता, आनंद और शांति में स्थित हो। धर्मपूर्वक कर्म करते हुए दिव्य चेतना का अमृत पान करते रहो। पृथ्वी के संतों का मूल सिद्धांत: दुखियों की पीड़ा दूर करो और समाज कल्याण में दृढ़ रहो। मन, वाणी और कर्म को प्रेम, सेवा, संस्कृति और भारतीय धरोहर के संरक्षण में समर्पित करो। “अमृतस्य पुत्र” को शरीर से नहीं, आत्मा की दृष्टि से समझो और संतों के मार्ग का अनुसरण करो। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं: “जातस्य हि ध्रुवं मृत्यु:” – जो जन्मा है, उसकी मृत्यु निश्चित है। अतः शरीर अमर नहीं हो सकता, पर आत्मा जन्म-मरण से परे है। वेद का महान मंत्र “वयम् अमृतस्य पुत्राः” शरीर नहीं, आत्मा को संबोधित करता है। अष्टावक्र गीता में कहा गया है: यदि देह से स्वयं को अलग जानकर आत्मा में स्थित हो जाओ, तो उसी क्षण तुम सुखी, शांत और बंधनमुक्त हो जाते हो। आत्म-अमृत के अनुभव के बाद क्या करना चाहिए? शास्त्र कहते हैं: यावत जीवेत – सुखं जीवेत, धर्मकार्यं कृत्वा अमृतं पिबेत। जब तक जियो, सुखपूर्वक जियो; धर्म के अनुसार कर्म करो, परोपकार में लगे रहो और ज्ञान रूपी अमृत का पान करते रहो। आपका अपना आचार्य दीपक सिक्का संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी

A singh

एक आदमी 1 घंटे में 1 कप चाय पीता है। अगर 3 आदमी 2 घंटे में कितने कप चाय पीते हैं? विकल्प: A) 2 B) 6 C) 10 D) चाय खत्म हो जाएगी 😂 sahi jabab de 😆😆

A singh

एक मुर्गा 1 दिन में 1 अंडा देता है। अगर आप उसके अंडे को रोज़ खा लें, तो 5 दिन बाद कितने अंडे बचे होंगे? विकल्प: A) 0 B) 5 C) 1 D) 10 😆 जल्दी जवाब देना!

A singh

एक आदमी रोज़ नदी पार करता है, मगर कभी भी गीला नहीं होता। कैसे? 🌊 उत्तर सोचकर कमेंट करें!😆

Aachaarya Deepak Sikka

ॐ नमः शिवाय भारत के बयालीस संन्यासी (समयरेखा और योगदान) वयम् अमृतस्य पुत्राः (श्वेताश्वतरोपनिषद्) अमृतस्य पुत्रा वयं, सबलं सदयं नो हृदयम्। गतमितिहासं पुनरुन्नेतुं, युवसङ्घटनं नवमिह कर्तुम्॥ भारतकीर्तिं दिशि दिशि नेतुं, दृढसंकल्पा विपदि विजेतुम्। ऋषिसन्देशं जगति नयेम, सत्त्वशालिनो मनसि भवेम॥ कष्टसमुद्रं सपदि तरेम, स्वीकृतकार्यं न हि त्यजेम। दीनजनानां दुःखविमुक्तिं, महतां विषये निर्मलभक्तिम्॥ सेवाकार्ये सन्ततशक्तिं, सदा भजेम भगवति रक्तिम्। सर्वे अमृतस्य पुत्राः शृण्वन्तु ये दिव्यानि धामानि आतस्थुः॥ युजे वां ब्रह्म पूर्व्यं नमोभिर्विश्लोक एतु पथ्येव सूरेः। शृण्वन्तु विश्वे अमृतस्य पुत्रा आ ये धामानि दिव्यानि तस्थुः॥ (श्वेताश्वतरोपनिषद् – द्वितीय अध्याय) --- भारत की आध्यात्मिक धरोहर उसके संतों, ऋषियों और रहस्यवादी साधकों के जीवन से सदैव प्रकाशित होती रही है। हम अमरत्व की संतान हैं, इसलिए हमारे हृदय बलवान और करुणामय हों। आओ, हम भूले हुए इतिहास को पुनर्जीवित करें और एक नवीन युवा संगठन का निर्माण करें। भारत की कीर्ति चारों दिशाओं में फैले और विपत्ति में भी दृढ़ संकल्प के साथ हम विजयी बनें। ऋषियों के संदेश को विश्व तक पहुँचाएँ और अपने चरित्र को उत्तम विचारों से समृद्ध करें। कष्टों के सागर को शीघ्र पार करें और जो कार्य हमने स्वीकार किया है उसे कभी न छोड़ें। दीन-दुखियों की पीड़ा दूर करने का प्रयास करें और महान आत्माओं के प्रति निर्मल भक्ति रखें। सेवा कार्य में निरंतर शक्ति बनी रहे और हृदय में ईश्वर के प्रति प्रेम सदा जाग्रत रहे। अमृत के पुत्र—जो दिव्य लोकों को प्राप्त हुए हैं—उनके वचनों को सुनें और अनुसरण करें। --- वेद कहते हैं कि समस्त प्राणी अमर और अविनाशी परमात्मा की संतान हैं। जैसे संतान अपने पिता के गुणों को धारण करती है, वैसे ही वेद के अनुसार हम भी अमर स्वरूप हैं। परिवर्तन प्रकृति का नियम है—संसार की प्रत्येक वस्तु निरंतर बदलती रहती है। संपूर्ण ब्रह्मांड में जन्म, मृत्यु, निर्माण और विनाश की प्रक्रिया हर क्षण चलती रहती है। शरीर माता-पिता से जन्म लेता है, पर प्रकृति के नियम के अनुसार जड़ या चेतन कोई भी वस्तु सदा एक-सी नहीं रहती। अतीत की ऐतिहासिक विरासत को पुनः जाग्रत करने के लिए युवाओं को संगठित होकर नए भारत का निर्माण करना चाहिए। वे महान संत स्मरणीय हैं जिन्होंने धर्म, संस्कृति और समाज के कल्याण के लिए दिव्य जीवन जिया। भारत की महिमा को चारों दिशाओं में फैलाएँ और दृढ़ निश्चय के साथ संकटों में विजयी हों। ऋषियों के संदेश को विश्व में प्रचारित करें और अपने व्यक्तित्व को उत्तम विचारों से अलंकृत करें। भक्ति के साथ सेवा करें और ईश्वर के प्रति आध्यात्मिक उत्साह को विकसित करें। अमृत के पुत्र—दिव्य संस्थानों, तीर्थों, संतों और महापुरुषों के पदचिह्नों का अनुसरण करें और उनके उपदेश आत्मसात करें। नीचे दिए गए बयालीस महान व्यक्तित्व “अमृतपुत्र” कहे जाते हैं, जिनकी शिक्षाओं और कर्मों ने पीढ़ियों को प्रभावित किया है: (संक्षिप्त हिंदी रूपांतरण) 1. बुद्ध (563–483 ई.पू.) – करुणा, अहिंसा और चार आर्य सत्यों का उपदेश; एशिया में शांति का मार्ग। 2. महावीर (599–527 ई.पू.) – अहिंसा, सत्य और तपस्या; जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर। 3. आदि शंकराचार्य (502 ई.पू.) – अद्वैत वेदांत के आचार्य; चार मठों की स्थापना। 4. रामानुजाचार्य (1017–1137) – विशिष्टाद्वैत वेदांत; भक्ति और समरसता। 5. गुरु नानक (1469–1539) – सिख धर्म के प्रवर्तक; समानता और सेवा का संदेश। 6. कबीर (1440–1510) – निर्गुण भक्ति; जाति-पंथ का विरोध। 7. तुलसीदास (1532–1623) – रामचरितमानस के रचयिता। 8. चैतन्य महाप्रभु (1486–1534) – संकीर्तन और कृष्ण प्रेम का प्रचार। 9. गोरखनाथ (10–11वीं शताब्दी) – नाथ योग परंपरा के प्रवर्तक। 10. लाहिड़ी महाशय (1828–1895) – क्रिया योग का प्रचार। 11. रामकृष्ण परमहंस (1836–1886) – धर्म समन्वय और रामकृष्ण मिशन की प्रेरणा। 12. स्वामी विवेकानंद (1863–1902) – वेदांत और योग का विश्व प्रचार। 13. श्री अरविंद (1872–1950) – समग्र योग और आध्यात्मिक उत्क्रांति। 14. तोतापुरी (18वीं शताब्दी) – अद्वैत साधक; रामकृष्ण के गुरु। 15. देवरहा बाबा (20वीं शताब्दी) – दीर्घायु और सेवा। 16. जलाराम बापा (1799–1881) – दया और सेवा के प्रतीक। 17. विशुद्धानंद परमहंस (1853–1937) – तंत्र, योग और भक्ति का समन्वय। 18. त्रैलंग स्वामी (1607–1887) – महान योगी, दीर्घायु। 19. पद्मपादाचार्य – शंकराचार्य के प्रमुख शिष्य। 20. नित्यानंद प्रभु – चैतन्य आंदोलन के सहचर। 21. भक्त हरिदास – मीरा बाई के गुरु। 22. सनतदासजी – समाज सुधारक संत। 23. मधुसूदन सरस्वती – अद्वैत सिद्धि के रचयिता। 24. विजयकृष्ण गोस्वामी – भक्ति मार्ग के संत। 25. स्वामी प्रणवानंद – भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक। 26. स्वामी गंभीरा नंद – वेदों के अनुवादक। 27. बालनाथजी – नाथ योगी। 28. रामप्रसाद सेन – काली भक्ति के कवि। 29. साधक रामदेव – योग साधक। 30. खथिया बाबा – तपस्वी योगी। 31. रमण महर्षि (1879–1950) – “मैं कौन हूँ?” आत्मविचार। 32. भोला गिरी – करुणा और सेवा। ए 33. महावतार बाबाजी – क्रिया योग के प्रवर्तक। 34. समर्थ रामदास (1608–1681) – दासबोध के रचयिता। 35. श्री भोलनाथ – योग और सेवा। 36. लोकनाथ ब्रह्मचारी (1730–1890) – तपस्या और चमत्कार। 37. जगतबंधु प्रभु (1871–1921) – भक्ति और समाज सेवा। ये संत अद्वैत, भक्ति, तंत्र, योग और समाज सुधार—भारत की आध्यात्मिक विविधता के प्रतीक हैं। इन संतों ने मानव के भीतर छिपे चेतना-रस (अमृत) को जाग्रत किया और धर्म, करुणा, साहस, सत्य और भक्ति का संदेश दिया। हम अमृत के पुत्र हैं—अर्थात शरीर नश्वर है, पर आत्मा अमर है। श्वेताश्वतर उपनिषद, भगवद्गीता और अष्टावक्र गीता कहते हैं—बंधन से मुक्त हो, जागरूकता, आनंद और शांति में स्थित हो। धर्मपूर्वक कर्म करते हुए दिव्य चेतना का अमृत पान करते रहो। पृथ्वी के संतों का मूल सिद्धांत: दुखियों की पीड़ा दूर करो और समाज कल्याण में दृढ़ रहो। मन, वाणी और कर्म को प्रेम, सेवा, संस्कृति और भारतीय धरोहर के संरक्षण में समर्पित करो। “अमृतस्य पुत्र” को शरीर से नहीं, आत्मा की दृष्टि से समझो और संतों के मार्ग का अनुसरण करो। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं: “जातस्य हि ध्रुवं मृत्यु:” – जो जन्मा है, उसकी मृत्यु निश्चित है। अतः शरीर अमर नहीं हो सकता, पर आत्मा जन्म-मरण से परे है। वेद का महान मंत्र “वयम् अमृतस्य पुत्राः” शरीर नहीं, आत्मा को संबोधित करता है। अष्टावक्र गीता में कहा गया है: यदि देह से स्वयं को अलग जानकर आत्मा में स्थित हो जाओ, तो उसी क्षण तुम सुखी, शांत और बंधनमुक्त हो जाते हो। आत्म-अमृत के अनुभव के बाद क्या करना चाहिए? शास्त्र कहते हैं: यावत जीवेत – सुखं जीवेत, धर्मकार्यं कृत्वा अमृतं पिबेत। जब तक जियो, सुखपूर्वक जियो; धर्म के अनुसार कर्म करो, परोपकार में लगे रहो और ज्ञान रूपी अमृत का पान करते रहो। आपका अपना आचार्य दीपक सिक्का संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी

SAYRI K I N G

उसे गुरूर है उसे बहुत मिलेंगे मुझे सब्र है मेरे जैसा एक ना होगा

MASHAALLHA KHAN

कल भी कितना खुबसुरत होता है ना जिसके लिए हम आज का गला घोट देते, फिर जब वह कल आता है ना तो फिर हम आज को कौसते है . -MASHAALLHA

Raju kumar Chaudhary

20 साल की एक युवती को 40 से अधिक उम्र के एक पुरुष से प्रेम हो गया — लेकिन जब वह उसे अपनी माँ से मिलवाने ले गई, तो माँ उसे गले लगाकर रोने लगी… क्योंकि वह उसके लिए कोई बहुत ही ख़ास व्यक्ति था… मेरा नाम सिया है। मैं 20 साल की हूँ और दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी में डिज़ाइन की पढ़ाई के अंतिम वर्ष में हूँ। लोग अक्सर कहते हैं कि मैं अपनी उम्र से बड़ी लगती हूँ — शायद इसलिए क्योंकि मेरा पालन-पोषण सिर्फ मेरी माँ श्रीमती राधा मेहता ने किया। मेरे पिता का देहांत तब हो गया था जब मैं बहुत छोटी थी। उसके बाद माँ ने कभी दोबारा शादी नहीं की। उन्होंने अकेले ही मुझे बड़ा किया — बिना थके, बिना शिकायत किए। वह एक मज़बूत, मेहनती महिला हैं और हमेशा मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा रही हैं। मेरी ज़िंदगी उस दिन बदल गई, जब मैं एक स्वयंसेवी प्रोजेक्ट में शामिल हुई। वहीं मेरी मुलाक़ात अमित मल्होत्रा से हुई — जो तकनीकी टीम के समन्वयक थे। उनकी उम्र 40 से कुछ ज़्यादा थी। वह शांत स्वभाव के थे, सभ्य थे, और उनकी बात करने के अंदाज़ में एक हल्की-सी उदासी थी — जो मेरे भीतर जिज्ञासा और सहानुभूति जगा गई। शुरुआत में मैं बस उनका सम्मान करती थी। लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास होने लगा कि जब भी वह पास होते हैं, मेरा दिल तेज़ धड़कने लगता है। अमित की नौकरी अच्छी थी। वह अकेले रहते थे और कई साल पहले उनका तलाक़ हो चुका था — कोई संतान नहीं थी। वह अपने अतीत के बारे में ज़्यादा बात नहीं करते थे। बस एक बार उन्होंने कहा था: “मैं अपनी ज़िंदगी में कुछ बहुत कीमती खो चुका हूँ… अब बस शांति से जीना चाहता हूँ।” हमारे बीच सब कुछ स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ा — ना कोई जल्दबाज़ी, ना बड़े वादे — बस सम्मान और सच्चा अपनापन। लोग बातें करते थे: “वह इतनी छोटी है… उसे इस उम्र के आदमी में क्या दिखता है?” लेकिन मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता था। उनके साथ मुझे सुकून मिलता था — ऐसा सुकून जो मैंने पहले कभी महसूस नहीं किया था। एक दिन अमित ने मुझसे कहा: “सिया, मैं तुम्हारी माँ से मिलना चाहता हूँ। अब मैं हमारे रिश्ते को छुपाना नहीं चाहता।” मैं घबरा गई। मेरी माँ हमेशा से सतर्क और बहुत ज़्यादा संरक्षण करने वाली रही हैं। लेकिन अगर हमारा रिश्ता सच्चा था, तो डरने की कोई वजह नहीं थी। अगले रविवार, अमित हमारे घर आए — हाथ में गुलदाउदी के फूलों का गुलदस्ता था, जो मेरी माँ के पसंदीदा फूल थे — मैंने कभी यूँ ही ज़िक्र किया था, और उन्हें याद रह गया। हम हाथों में हाथ डाले घर के अंदर गए। अमित शांत दिख रहे थे… लेकिन जैसे ही घर का दरवाज़ा खुला, सब कुछ बदल गया। माँ आँगन में पौधों को पानी दे रही थीं। जैसे ही उन्होंने मुड़कर हमें देखा — वह एकदम से ठिठक गईं। उनके हाथ से पानी का कैन गिर गया। उन्होंने मुँह पर हाथ रखा… और फिर अचानक अमित की ओर दौड़ीं। उन्होंने उन्हें ज़ोर से गले लगा लिया — और ऐसे रोने लगीं जैसे उन्होंने कोई भूत देख लिया हो। “हे भगवान… अमित?! क्या तुम सच में हो?!” मैं सन्न रह गई। अमित भी हिल नहीं पाए। उनकी आवाज़ काँप रही थी: “राधा?… यह कैसे हो सकता है…” मैं दोनों को देखती रह गई — कुछ भी समझ नहीं पा रही थी। मेरी माँ सिसकते हुए बोलीं, उनके हाथ काँप रहे थे: “बीस साल, अमित… पूरे बीस साल मैंने यही समझा कि तुम मर चुके हो…” मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उनके आँसू… उनके चेहरे का दर्द… और वह भारी, बोझिल ख़ामोशी… और उसी पल मुझे समझ आ गया— जिस आदमी से मैं प्रेम करती थी, वह मेरी माँ के अतीत का ऐसा हिस्सा था जिसकी गहराई की मैं कभी कल्पना भी नहीं कर सकती थी। 👉 पूरी कहानी पढ़ने के लिए नीचे कमेंट में दिए गए लिंक पर क्लिक करें! 👇�

Nandani

तुम मेरा सबसे महंगा शौक हो तुम पर वक्त नहीं एहसास खर्च होते हैं।। ❤️

kattupaya s

Good afternoon friends.. going for short 😴

Lalit Kishor Aka Shitiz

dream come true......

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