Gujarati Whatsapp Status | Hindi Whatsapp Status
Raa

mere khud lagaye ped ke amble khane chalo

Kavyasharma

ठिक से दीदार भी न कर पाए उनका ‚ जिन्हें दिन भर निहरा करते थे ।।

Alfha production house

ch 9 (BEYOND CODE AND LIFE) WILL BE LIVE SOON WITH IN FEW DAYS. ​"To my readers and followers, I want to sincerely apologize for the lack of updates and new book chapters lately. Alfha Production House has been facing some significant financial and professional hurdles recently. Navigating these rejections and setbacks has taken a lot of time and energy to resolve. Thank you for your patience and understanding while I work through this—I can’t wait to get back to sharing more stories with you soon."

Siboniso BoyBoy Dlamini

Guys, I'm still pinching myself! 😮 My book is blowing up on Matrubharti with tons of downloads, ratings, and amazing reviews! 😱 I can't believe people are connecting with this almost true African story! 🌟 If you haven't checked it out yet, what are you waiting for? 👉 Go read it for FREE on Matrubharti and let me know what you think! Trust me, you won't regret it! 💥 #MustRead #AfricanStory #BookLovers https://www.matrubharti.com/kingmaboy35gmail.com255193

Dada Bhagwan

व्यावहारिक जीवन में ऐसा कहा जाता है कि हम भगवान के बच्चे हैं और आत्मा भगवान का एक अंश है। यदि सचमुच में हम भगवान के अंश हैं तो फिर आत्मा क्या है? आत्मा की अवस्थाएँ क्या हैं? आइए, जानते हैं आत्मा के बारे में पूज्यश्री दीपकभाई से। Watch here: https://youtu.be/diWyr3agnYU #spirituality #spiritualvideo #spiritualfacts #SOUl #DadaBhagwanFoundation

archana

“इल्ज़ाम सारे हम पर ही आए, और चालें वो चलते रहे…” 😌

Dimple Das

hello everyone what's up I hope you all are doing good ❣️❣️❣️❣️❣️❣️ Do show your support by subscribing to my YouTube channel . And soon I will be posting motivational quotes here as well 🌟🌟 https://youtube.com/@authordimple?si=HbE5kfLK86ZY4fx0

Raju kumar Chaudhary

स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ, हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ। कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान, हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान। अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो, तो Follow करिए… यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨https://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kz

shree

એક અણધાર્યા મોડ પર, ભૂતકાળ સામે આવી ગયો, તેના હાથમાં અન્યનો સંગાથ ને હોઠે મધુર સ્મિત હતું, જાણે મારી જિંદગીનો જૂનો અધ્યાય, નવો અર્થ પામી ગયો. હૃદયના ધબકાર વધ્યા ને નજર સ્થિર થઈ ગઈ પળવાર, આચનક મળેલો એ આઘાત, મન ને મગજ હલાવી ગયો. એનો ઉમંગ, મારા એકાંત પર સવાલો અનેક મૂકી ગયો.🥺

shree

એક વળાંક પર એ જૂનો ચહેરો દેખાયો, જાણે મારો આખો ભૂતકાળ સામે આયો. ​સાથે એની મંગેતર ને હાથમાં એનો હાથ હતો, બંને બહુ ખુશ હતા, ​જોઈને એને આમ, મારું હૈયું થોડું હારી ગયું, કાલે પરીક્ષા છે ને મન મારું ક્યાંક ભટકી ગયું. ​વર્ષો પછી જોયો તો પણ એ જ જૂનો અંદાજ, પણ હવે એની ખુશીમાં મારો ક્યાં કોઈ સાદ? ​હવે આંસુ લૂછીને મારે પુસ્તકોમાં ખોવાવું છે, ભૂતકાળ ભૂલીને મારે મારા ભવિષ્યને સજાવવું છે.(2)

jihan

"તારી મજબૂરી " મારી એક ભૂલ ની સજા બની તારી મજબૂરી, આંખોને મારી હંમેશા માટે નમ બનાવી તારી મજબૂરી તારી સાથે ના મારો છીનવી જાય સમય તારી મજબૂરી , સારો એક પળ વીતવા માટે તરસાવે છે તારીમજબૂરી , મન ભરીને એક નજર માટે તડપાવે તારી મજબૂરી સ્મિતમાં પણ તારા વિરહ નું દરદુઃખ આંખમાં આંસુ આપે તારી મજબૂરી જાન ના સમજ છે તારા હેતને અણસમજ કેમકે તે સમજે છે તારે મજબૂરી એટલું જ માંગુ છું કે બસ ધીમે ધીમે પણ દૂર થઈ જાય તારી મજબૂરી ✍️ - jihan✍️

Sonam Brijwasi

Sangeeta si ho tum, suron ki pehchaan ho, Dil ke har kone mein basi ek muskaan ho, Tumse hi mehfil roshan ho jaati hai, Tum ho to har pal ek naya armaan ho… 🌸

Anup Gajare

"धपाक" ____________________________________________________ ढूंढते हुए पहुंचे थे अनंत की दीवारों में बनी सुरंग के रास्ते। एक गली जिसकी लंबी सड़क पर हर शाम कोई अपने पद के चाप पीछे छोड़ जाता। मंदिर में ठीक सात बजे गूंज उठती आरती की लय। घंटी के अनुवाद करना मुश्किल था सूक्ष्म कण सिमटे हुए थे हवाओं में। गरज़ते बादल तूफान बस थोड़ी देर पर रुका हुआ कोई मुसाफ़िर था। किसी देवता की आरती में खडे वह बस तालिया पीटते हुए कर रहा था प्रसाद का इंतजार। मंदिर चौंकानी हिस्से में प्रदक्षिणा करते हुए हर अणु घूम रहा था। इलेक्ट्रॉन हाथ ऊपर उठाते हुए प्रोटॉन को छूने की लगातार कोशिश करते रहे। आरती के मंत्र कानों में घूमते हुए अपनी लकीर खींच रहे थे। तभी वह विस्तृत विस्फोट हुआ पहले रौशनी दिखी थी या आवाज आई। न मालूम के बिच में फंसी भिड़ के किनारे वह अज्ञात खड़ा था। उसे पैदल ही अपना रास्ता प्राप्त करना था। अगली सुबह बारिश के चिन्ह प्रूफ के भीतर बसे थे। सड़क गिली हो चुकी थी और मंदिर का हर कोना अब खंडहर में तब्दील हो चुका था। कोई बोला बम फूटा लेकिन मैं जानता हु ये धमाका वही था जिससे विश्व का निरन्तर निर्माण हुआ। दुनिया सिकुड़ गई थी या फ़ैल रही थी बचे हुए हिस्से लेकर। वह धमाका सच था या वह रौशनी या आवाज। कोई ठीक से बोल न सका बस वजूद को उभरते हुए राख के नीचे दबी अस्थियों में जले शरीर उठाये जा रहे थे। बारिश के कुंद मौसम में ये क्या हुआ था इसका पता अबतक नहीं हुआ। राख अभी पूरी तरह ठंडी नहीं हुई थी उसमें कुछ अंगारे जैसे यादें धीरे-धीरे सांस ले रही थीं। वह अज्ञात भीड़ के छूटते किनारों से अंदर की ओर बढ़ा— जहाँ आवाजें अब नहीं थीं पर उनकी लहरें दीवारों से टकराकर वापस आ रही थीं। एक टूटी हुई घंटी मिट्टी में आधी दबी हुई अब भी हिल रही थी— किसी अंतिम स्पर्श की तरह। उसने हाथ बढ़ाया पर छुआ नहीं, जैसे उसे डर हो कि कंपन फिर शुरू हो जाएगा। हवा में तैरते कण अब भी गोल-गोल घूम रहे थे जैसे प्रदक्षिणा अधूरी रह गई हो और समय उसी चक्र में अटका हो। उसने ऊपर देखा— आसमान वैसा ही था या शायद थोड़ा और खाली। बादल जा चुके थे पर उनकी गूंज अब भी पसरी हुई थी हर उस जगह जहाँ कुछ था… और अब नहीं था। एक बच्चा राख के ढेर के पास बैठा अपनी उंगलियों से कुछ बना रहा था— शायद घर या शायद वही मंदिर। वह अज्ञात उसे देखता रहा काफी देर तक, जैसे पहली बार निर्माण को विनाश के बाद समझ रहा हो। “धपाक” फिर से कहीं भीतर हुआ— इस बार बिना आवाज के। उसे लगा कि इलेक्ट्रॉन अब भी प्रोटॉन तक पहुँचने की कोशिश में हैं पर दूरी पहले से थोड़ी और बढ़ गई है। या शायद वे मिल चुके हैं और वही मिलन यह सब बना रहा है। उसने कदम आगे बढ़ाया गीली सड़क पर अपना एक निशान छोड़ा— जो तुरंत ही पानी में घुल गया। जैसे कोई कभी था ही नहीं। पर फिर भी— कहीं किसी अदृश्य रजिस्टर में वह दर्ज हो चुका था। मंदिर अब नहीं था पर उसकी परिक्रमा अब भी चल रही थी हर उस कण में जो हवा में बचा रह गया था। वह अज्ञात अब भी चल रहा था— बिना किसी दिशा के पर शायद पहली बार किसी अर्थ की ओर। और पीछे राख के नीचे कुछ हड्डियाँ धीरे-धीरे धूल में बदल रही थीं— जैसे सृष्टि फिर से अपने पहले अक्षर लिख रही हो। _____________________________________________

Wow Mission successful

Eid Mubarak 😍🌺

Harsh Bhatt

On Yesterday night, I just realised why I'm so borring? I feel every time I leave every thing what I love and I wish for somebody's happiness and somebody's wish! " why I don't fight for that things?" That question hurt me every time and increase anger on myself that turned into self harming like portrait myself like joker. From now I just do what I want to do and what I wish to do and it's for only myself....

rakesh

: *नव संवत्सर* सावन बीता भादौ बीता, बीती रातें मावठ की, कण- कण में मस्ती छाई ,चली हवा बहारों की || उषा की लालिमा बनकर,आई भोर मतवाली, पंथी अपनी राहें भूले, फुल खिले हैं डाली -डाली || शान्त सरोवर लहरें शीतल,चहुँदिशि सुगंध बढ़ाए। साँझ ढली हंसों का जोड़ा, खुशियों की सौगात बढ़ाए || नहीं यहाँ घर-बार मेरा, न चाहत मेरी, हजारों की बुनियाद है | धरती पर लाया नव जीवन, किसने की फरियाद है || देख चुका मन कितने पतझर, अब छाई हरियाली है | मस्त मगन पौधे लहराये, जैसे बजी कहीं शहनाई है || मधुर - मधुर भौरों का गुंजन,खिला -खिला आकाश। इन्द्रधनुष सा नभ पर छाया, माधव बना प्रकाश।। फूलों की माला लेकर,चाँद आया धरती पर | उड़ते पंखेरू पनघट देखे,बादल या अंबर पर|| फूलों की दुनिया मे , झूमें पंछी कोयल गाये। सूरज की किरणे भी, हँसती धरा नहलाये।। टिमटिमाते ख़ुशी से तारे,रिमझिम-रिमझिम बूंदें आई | पेड़ों के पत्तों ने मिलकर झूम-झूमकर तालियांँ बजाईं || महक उठी चहके चिड़िया, भंवरे मतवाले मंडरा रहे हैं। फूलों से है सजी क्यारियाँ, मधुरस पीने को आ रहे हैं। *राकेश कुमार पंवार*

swarnima varshney

Words written from the heart, now reaching many hearts ❤️ Feeling blessed to be featured again in Dainik Jagran 📰✨

rakesh

*नव संवत्सर* सावन बीता भादौ बीता, बीती रातें मावठ की, कण- कण में मस्ती छाई ,चली हवा बहारों की || उषा की लालिमा बनकर,आई भोर मतवाली, पंथी अपनी राहें भूले, फुल खिले हैं डाली -डाली || शान्त सरोवर लहरें शीतल,चहुँदिशि सुगंध बढ़ाए। साँझ ढली हंसों का जोड़ा, खुशियों की सौगात बढ़ाए || नहीं यहाँ घर-बार मेरा, न चाहत मेरी, हजारों की बुनियाद है | धरती पर लाया नव जीवन, किसने की फरियाद है || देख चुका मन कितने पतझर, अब छाई हरियाली है | मस्त मगन पौधे लहराये, जैसे बजी कहीं शहनाई है || मधुर - मधुर भौरों का गुंजन,खिला -खिला आकाश। इन्द्रधनुष सा नभ पर छाया, माधव बना प्रकाश।। फूलों की माला लेकर,चाँद आया धरती पर | उड़ते पंखेरू पनघट देखे,बादल या अंबर पर|| फूलों की दुनिया मे , झूमें पंछी कोयल गाये। सूरज की किरणे भी, हँसती धरा नहलाये।। टिमटिमाते ख़ुशी से तारे,रिमझिम-रिमझिम बूंदें आई | पेड़ों के पत्तों ने मिलकर झूम-झूमकर तालियांँ बजाईं || महक उठी चहके चिड़िया, भंवरे मतवाले मंडरा रहे हैं। फूलों से है सजी क्यारियाँ, मधुरस पीने को आ रहे हैं। *राकेश कुमार पंवार*

archana

**“कुछ महीने पहले… मेरे बाल लगभग चले गए थे। आज छोटे-छोटे बाल वापस आए हैं… शायद किसी के लिए ये छोटी बात हो, पर मेरे लिए ये बहुत बड़ी जीत है। ❤️ हाँ, मेरा ट्रीटमेंट अभी भी चल रहा है… जैसे ही दवाई छोड़ती हूँ, वही परेशानी फिर लौट आती है— खुजली, बाल झड़ना, दर्द… डॉक्टर भी अभी पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं, पर मैं हार नहीं मानी हूँ। महंगी दवाइयाँ भी चल रही हैं, और साथ में लोगों के ताने भी— पर अब मैंने सीख लिया है, दर्द से लड़ना… चुप रहकर भी मजबूत रहना। मेरे बाल अभी थोड़े-थोड़े हैं, टूटते भी हैं… लेकिन हर नया बाल मुझे ये याद दिलाता है— मैं हार नहीं रही, मैं ठीक हो रही हूँ। ✨ एक दिन सब ठीक होगा… और मैं फिर से मुस्कुराऊँगी, पूरे आत्मविश्वास के साथ।”** ❤️

Shailesh Joshi

बर्फ जैसी सर्दि हो, आग जैसी गर्मी हो, या फिर हो जड़ से उखाड़ दे ऐसी हवाओं के साथ गिरती बारिश, ये सब कई सालों तक सहेने के बाद फिर कहीं जाकर, पेड़ पर फल फूल लगते हैं, क्योंकि...अच्छी फसल ऐसे ही नहीं खिलती, ठीक उसी तरह हर बुरे दिन, बुरे वक़्त से लड़ने के लिए खुद को तैयार रखना पड़ता है, पसंदीदा जिंदगी ऐसे ही नहीं मिलती. डटे रहेंना पड़ता है. - Shailesh Joshi

Narayan

भुलाना चाहूँ भी तो कैसे भुलाऊँ तुझे, तू वो याद है जो हर सांस के साथ आती है। - नारायण

Soni shakya

हमने तो पूरी शिद्दत से निभाई थी मोहब्बत, पर किस्मत को मंजूर नहीं था संग.. वह अधूरी सी कहानी आज भी जिंदा है, जिसमें मैं थी, तुम थे मगर नहीं था.. उस कहानी का कोई अंत..🍁 - Soni shakya

kajal jha

तेरी खामोशी में भी एक अजीब सा शोर है, जैसे हर लफ़्ज़ में छुपा कोई राज़ गहरा और है। तू पास होकर भी क्यों इतना दूर लगता है, शायद ये मोहब्बत नहीं… कोई अधूरा सा दौर है। - kajal jha

Sanjay Sheth

શબ્દોમાં રહે દિલ, દિલમાં રહે પ્રેમ, નાની નાની વાતોમાં છુપાયેલું છે હેમ। સવાર કહે ધીમે થી, “આજ નવું કંઈ કર”, ગઈકાલ ભૂલીને તું, ખુશીથી આગળ વધ। રસ્તો જો કઠિન હોય, તો ડરતો નહિ યાર, હિંમત રાખી આગળ વધ, જીત તારી તૈયાર। પ્રેમ સૌથી મીઠી વાત, ગુસ્સાથી દૂર રહેજે, હસીને બધાને મળજે, આનંદથી જીવતો રહેજે। કવિતા એટલે ભાવ, સરળ શબ્દોનો સંગ, ઓછા શબ્દોમાં કહી જાય, જીવનનો સારો રંગ। વિશ્વ કવિતા દિવસ ની હાર્દિક શુભકામના.

Narayan

बेवजह नहीं रोता कोई इश्क में ऐ दोस्त, जिसे खुद से बढ़कर चाहा हो, वो रुलाता ज़रूर है। - नारायण

MASHAALLHA KHAN

आप सभी को तहे दिल से ईद मुबारक . -MASHAALLHA

Riddhi Gori

जिंदगी के सफर में थकान बहुत हैं, अपनों के अपनों पर यहां इल्जाम बहुत है, शिकायतों का दौर देखता हूं तो थम सा जाता हूं, लगता है उम्र कम है और इम्तिहान बहुत है.! - Riddhi Gori💙🤍

archana

**"मेरी आवाज़ शायद इतनी अच्छी नहीं है, मेरी एडिटिंग भी परफेक्ट नहीं है… कैमरा भी साधारण है, इसलिए फिल्टर का सहारा लेना पड़ा। लेकिन… मेरे भाव सच्चे हैं ❤️ मैंने ये वीडियो दिल से बनाई है, अपनी मन की आवाज़, अपने एहसासों के साथ… ये मेरी पहली कोशिश है, तो अगर कहीं कमी रह जाए तो माफ़ कर देना 🙏 बस एक ही चाहत है… कि आप सबका प्यार और आशीर्वाद मिले, ताकि मैं और बेहतर बनती जाऊँ।"** ✨

Vrishali Gotkhindikar

. कविता .हल्ली..हे काय होवुन बसलय बघ... माझ्या आयुष्यातल्या..प्रत्येक..क्षणावर... तुझा कबजा झालाय....!!! सकाळी ऊठल्यापासुन...अगदी रात्री..झोपेपर्यंत... फक्त... तुझ्याच...आठवणी..... ..तु काय करत असशील...... ....तु काय बोलत असशील.. ....तु कोणत्या रुपात. कशी दिसत असशील.. ..तुझं रुप..तुझं वागणं..तुझं दिसणं..तुझे विचार.. ..पुरत..झपाटलय मला...या गोष्टीनी...!! तुझ्या विचारात..दिवस ..रात्रीचा..पत्ताच लागेना झालाय बघ..!! लोक म्हणतात..मी सार काही विसरतोय..हल्ली.. पण तुझे विचार..मात्र.. विसरतच... नाहीत ना...!!!! उद्या...आस्तित्वच..तुझं जर वजा झाल... माझ्या आयुष्यातुन....... तर काय होईल ग माझं..!!!!! .................व्रुषाली.. ******१२/१२/११

Vrishali Gotkhindikar

तुझ्या ..डोळ्यात... ...जगताना..तेच तेच जीवनाचे" गाणे..." ..कीती अडचणी..किती संकटांचे.".बहाणे..'. ...हरघडी तर अडवतात..नवे नवे" तराणे.." सारे,,सारे ..सहन करता करता..मन होते ग केविलवाणे.! ................................तरी पण तुला सांगु... ......................................खुशहाल मी रहातो. ................................जेव्हा" राणी" तुझ्या डोळ्यात मी पहातो..!! ,,काहीच होत नाही ग आपल्या,, मनासारख.. ..सदा वागायच..दुसर्याच्या..मनासारख.. हा काय म्हणेल..?याला काय वाटेल??..विचार कर करुन ..सगळी,..सगऴी..धडपड यातच जाते संपुन.. .....................................तरी पण तुला सांगु.. ...................................मनपसंत वागायला पहातो ..................................जेव्हा" राणी" तुझ्या डोळ्यात मी पहातो..!!! .पाहीलेली सुंदर ..सुंदर..स्वप्ने..डोळ्या समोर विरुन जातात.. ..भेटलेली...आणी ...आपलीशी वाटलेली माणस.. ..क्षणार्धात..परकी होवुन जातात..! .......................................तरी पण तुला सांगु.. ..................................पुन्हा पुन्हा नव्या जोमाने उभा रहातो ...................................जेव्हा" राणी" तुझ्या डोळ्यात मी पहातो!!! वृषाली **

Saliil Upadhyay

આ‌ વીકેન્ડ સારો જાય એટલે મેં મારી પત્નિને આજે સવારે ચા પીતાં થોડાક રોમેન્ટિક થતાં કહ્યું... ચા ખૂબ જ સરસ બની છે..આખા શરીરમાં તાજગી આવી ગઈ... માય ડાર્લિગ તું તો હજારમાં એક છે...એમ કહી એક ફ્લાઇંગ કીસ આપી...! તો કહે બાકીની ૯૯૯ કોણ છે એ કહો...! તાજગી અને રોમાંસની એક સાથે હવા નીકળી ગઈ...! તમને કહેવાય નહીં તમે તો તાળી પાડી ખડખડાટ હસવાના છો મને ખબર છે... હસતા રહો અને મસ્ત રહો

Vrishali Gotkhindikar

“सबब माझ्या वर खूप “जीव ..आहे तुझा माहीत आहे मला पण तुझ्या सबबी तर संपत च नाहीयेत सकाळी फोन केला तुला “वाजत च राहतो .. मग मेसेज येतो अग कीती गडबड सकाळची वेळ च नाही झाला फोन उचलायला दुपारी निवांत वेळी बोलावे वाट्ते पण .. तुझ्या त्या मिटींग्स तुझ्या ऑफिसचे प्रोब्लेम तुला तर डबा पण खायला वेळ नसतो संध्याकाळी मात्र उचलतोस तु फोन पण तुझा चिडलेला आवाज . अग कीती ट्राफिक आहे कसे बोलणार तुझ्याशी आतां . रात्रीचा वेळ तर फक्त तुझ्या “कुटुंबां साठीच असतो ना ..! रविवार असतो तसा निवांत .. पण सकाळ पासून तुझे मेसेज वर मेसेज असतात फक्त भाजी आणायला जातोय् . मुलांना क्लास ला सोडायचे आहे ........ दुपार तर माझ्याच हातून निसटून जाते संध्याकाळी .. आता पाहुणे आहेत मुलांना बाहेर घेवून जातोय आता वगैरे वगैरे मेसेज ..च फोन वर धडकत असतात असेच कीती तरी दिवस संपत असतात .. तुझ्या वर रागावत नाही मी कधीच .. पण आता मीच शोधतेय “सबब ..तुला फोन न करण्याची !! वृषाली

GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)

मनुज अपयशी है अगर, मिले न उसको मान। वह जीवित है जगत में, पर वह मृतक समान।। दोहा --456 (नैश के दोहे से उद्धृत) -------गणेश तिवारी 'नैश'

N¡k¡t@

Rashtriya bhojan...just for knowledge..

SAYRI K I N G

एक बात तो अब तक समझ नहीं आई ये आयोडेक्स वाले लड़की की कमर क्यों दिखाते है हम लड़कों की कमर क्या सीमेंट से बनी है

Raju kumar Chaudhary

स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ, हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ। कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान, हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान। अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो, तो Follow करिए… यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨https://chat.whatsapp.com/FOiOFZ11VTS7B1PIAe66kz

aakanksha

अधूरी मोहब्बत राहुल का जीवन हमेशा शांत और अलग था। स्कूल के गलियारों में लोग उसे देखते, लेकिन कोई उसके दिल की गहराई तक नहीं पहुँच पाता। वह बातों में कम और नजरों में गहरी होती थी। उसके दोस्तों की संख्या कम थी, पर वह जिसे जानता था, उसे समझता था—गहरी समझ, बिना कहे। लोग कहते—“उसका दिल सख्त है, कोई पास नहीं आने देता।” आकांक्षा पहली बार उसे बारिश के दिन मिली। लाइब्रेरी की खिड़की पर बूंदें गिर रही थीं, और राहुल अपनी किताब में खोया हुआ था। उसकी आँखों में हल्की उदासी थी, जो किसी से साझा नहीं की गई थी। आकांक्षा ने महसूस किया कि उसके भीतर भी कुछ नर्म बचा है, जो किसी को दिखाई नहीं देता। शुरुआत में, आकांक्षा सिर्फ उसे दूर से देखती। कभी लाइब्रेरी में, कभी बाग़ में। राहुल हमेशा अकेला रहता, पर आकांक्षा की नजरें धीरे-धीरे उसे महसूस करने लगीं। एक दिन बारिश के बाद, बाग़ की चट्टानों पर हरी घास चमक रही थी। आकांक्षा ने कहा, “तुम कहते हो दिल सख्त हो गया है, पर मैंने देखा है—बरसात के बाद चट्टानों पर भी हरी ज़िद उग आती है।” राहुल ने पहली बार उसकी बातों में रुचि दिखाई। उसने पूछा, “तुम हमेशा इतनी गंभीर बातें क्यों करती हो?” “क्योंकि मैं देख सकती हूँ कि जो तुम कहते हो, उससे कहीं ज़्यादा कुछ है जो तुम छुपाते हो।” समय के साथ, आकांक्षा ने राहुल की दुनिया में धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई। कभी उसकी पसंदीदा चाय लेकर, कभी उसकी किताबों पर हल्की हँसी छोड़कर। राहुल ने महसूस किया कि उसकी चुप्पियाँ अब अकेली नहीं थीं। एक शाम, बगीचे की छाया में, आकांक्षा ने कहा— “अगर इजाज़त हो, तो मैं तुम्हारे दिल में पूरी नहीं, बस अधूरी-सी मोहब्बत बनकर ठहर जाऊँ।” राहुल ने उसकी आँखों में देखा। कोई दबाव नहीं, कोई मांग नहीं। बस शांति और अपनापन। पहली बार उसने महसूस किया कि किसी के लिए उसका सख्त दिल भी मुलायम हो सकता है। उनकी मोहब्बत अधूरी थी। कोई वादा नहीं, कोई पूरा होने का दबाव नहीं। सिर्फ थोड़ी-सी नर्मी, थोड़ी-सी उम्मीद, और अधूरी मोहब्बत का सौंदर्य। आकांक्षा और राहुल की दिनचर्या में छोटी-छोटी बातें शामिल हो गईं। बारिश में भीगकर किताबें पढ़ना, चाय के कप के पास बैठकर खामोशी में बातें करना, और बस एक-दूसरे की उपस्थिति महसूस करना। कभी-कभी वे झगड़ते भी—राहुल की चुप्पियों और आकांक्षा की उत्सुकता के कारण। पर हर झगड़े के बाद उनकी नज़दीकियाँ और बढ़ती। समय बीतता गया। राहुल ने समझा कि आकांक्षा की मौजूदगी ने उसकी जिंदगी को बदल दिया है। वह अब अकेला नहीं था। उसकी चुप्पियाँ अब खाली नहीं थीं। और आकांक्षा ने समझा कि कभी-कभी मोहब्बत को पूरा करने की ज़रूरत नहीं होती—बस महसूस करने की होती है। उनकी अधूरी मोहब्बत, उनकी छोटी-छोटी आदतें, उनकी खामोशियाँ, और उनके साझा पल—सबकुछ उनकी जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गए। कभी-कभी, वे बस बगीचे में बैठते और बारिश के बाद की नमी को महसूस करते। राहुल कहता, “तुम्हारी नमी मेरे भीतर पहुँच जाती है।” और आकांक्षा मुस्कुराकर जवाब देती, “बस यहीं, अधूरी मोहब्बत बनकर, ठहर जाओ।” कभी-कभी अधूरा होना ही सबसे पूरा महसूस होता है। और उनके लिए, यही अधूरी मोहब्बत—सदा के लिए, पर हमेशा अधूरी—सबसे खूबसूरत एहसास बन गई

SAYRI K I N G

उन महिलाओं को भी नवरात्रि की शुभकामनाएं जो हमेशा काली के अवतार में रहती हैं..!!

Chaitanya Joshi

હૃદયના તાર ઝણઝણે અને લખાય કવિતા. ઉરથી આવે એ આંગણે અને લખાય કવિતા. ખાટા મીઠા અનુભવો જીવનને ઘડનારા હોય, જેને બસ પોતાના ગણે અને લખાય કવિતા. ક્યારેક ફફડે તો ક્યારેક તો થઈને આનંદિત, અંતર જ્યાં ગણગણે અને લખાય કવિતા. થાય અનુસંધાન ઈશથી અલ્પ સમય માટે, એક એક પંક્તિને ચણે અને લખાય કવિતા. પ્રેરણા પરમેશની પ્રેમથી પેપરે પાંગરતી પૂરી, સંદેશો એ પ્રભુનો ગણે અને લખાય કવિતા. -ચૈતન્ય જોષી 'દિપક'પોરબંદર.

Irfan Khan

दोस्तो आज अयान एक नफरत की आग या वजूद की तलाश की दूसरा पार्ट आने वाला है-- अगर आप एक सस्पेंस थिल्रर पढ़ना की शोख रखते है तो आप हमारी प्रोफाइल को फॉलो करे। एक पार्ट के पीछे हमारी 3 दिन की मेहनत होती है दोस्तो! अगर आप को हमारी कहानी पसन्द आए तो अच्छे रेटिंग दे कर हमारी जोश को और बढ़ाए ताकि हम अयान की जिंदगी के हिस्से को ऐसे ही आगे बढ़ाते रहे। धन्यवाद।

Irfan Khan

तमाम गिले-शिकवे भुला कर गले मिल जाओ आज, मोहब्बतों का पैगाम है ईद, इसे खुशी से मनाओ आज।" आप अभी को हमारी तरफ से ईद की ढेर सारी शुभकामनाएं।

Mara Bachaaaaa

हकीकत और सपनों में यही तो अंतर है, आंख खुलते ही ओझल हो जाते हैं सपने। - Mara Bachaaaaa

Imaran

aap sabhi dosto ko mere tarf se id mubarak pure sal mere se jane anjane se koi bhol hogai ho to mafi chahta hu 🩵💛❤️🤎imran🩵💛❤️🤎

SAYRI K I N G

जब भावनायें "शुद्ध " हो और मन "पवित्र " हो तो " प्रेम "कभी भटक ही नहीं सकता

Dr Darshita Babubhai Shah

मैं और मेरे अह्सास सुकून के पल सुकून के पल छीन लिये यादों ने l बहुत इंतजार करवाया है वादों ने ll मुस्किल से आँख बंध की थी ओ l नीद उड़ा दी ख्वाबों के जालों ने ll हुस्न की मल्लिका को देखकर ही l नशीली महफ़िल सज़ाई साजो ने ll "सखी" डो. दर्शिता बाबूभाई शाह

Sapna

❤️✨

Sapna

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Rashmi .k

“When You Came Like Rain” You came into my life like silent rain, Soft, unexpected, yet washing away pain. No thunder warned me, no storm in sight, Just gentle drops falling in quiet night. I didn’t know a heart could feel this way, Until your words chose my soul to stay. Like clouds that travel miles apart, You slowly gathered inside my heart. Every moment with you feels so new, Like morning skies touched with dew. Even silence speaks when you are near, In every pause, I still hear you clear. Are you a dream or something true? A passing breeze… or my forever view? Because in your presence, I lose all fear, And find a world where you are here. Like rain that kisses the waiting earth, You gave my lonely world new birth. And if someday you fade away, Like clouds that never choose to stay… I’ll still remember every drop, every line, Because for a moment… you were mine. ❤️

Sonu Kumar

चुनाव आयोग कितना निष्पक्ष है? . मेरा मानना है कि यदि कोई व्यक्ति भारत के 3 सबसे भ्रष्ट आदमियों की सूची बनाता है तो वह बिना आगे पीछे देखे सीधे सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश, चुनाव आयुक्त एवं रिजर्व बैंक गवर्नर का नाम नाम क्रमश: 1, 2, 3 नंबर पर लिख सकता है। पीएम वगेरह जैसे पदों का नाम बहुत बाद में आता है। . केंचुआ का मुख्य टारगेट भारत में EVM को जारी रखना एवं छोटी पार्टियों के रास्ते में पत्थर फेंकना है, ताकि उन्हें आगे बढ़ने से रोका जा सके। इसके लिए केंचुआ ने कितने और किस किस तरह के क़ानून छापे हुए है, ये आपको सिर्फ तब ही पता चलता है, जब आप चुनाव लड़ने जाते हो। फिलहाल मैंने निचे केंचुआ की एक हरकत का ब्यौरा दिया है, जिससे आप अंदाजा लगा सकते हो केंचुआ किस तरह काम करता है। . PMP02* के नेता मोदी साहेब ने 2018 में गेजेट में फाइनेंस बिल का लेबल लगाकर एक इबारत छापी। यह इबारत कहती है कि – कोई भी भारतीय या विदेशी व्यक्ति बैंक में पैसा जमा करके एवज में इलेक्टोरल बांड ले सकता है, और ये बांड किसी भी राजनैतिक पार्टी को दे सकता है। राजनैतिक पार्टी ये बांड अपने बैंक खाते में जमा करेगी और नियत राशि अमुक पार्टी के खाते में जमा हो जाएगी !! . स्पष्टीकरण : मान लीजिये कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी X वालमार्ट या जिंदाल से 50 करोड़ का चंदा लेना चाहती है, और यह भी चाहती है कि वालमार्ट का नाम सामने नहीं आये। तो वालमार्ट बैंक में जाकर 50 करोड़ के इलेक्टोरल बांड खरीदेगा और X को दे देगा। चुनावी बांड प्रोमेसरी नोट की तरह होता है, और इस पर दाता का नाम नहीं लिखा होता। फिर X अपने बैंक को ये बांड देगा और बैंक X के खाते में 50 करोड़ ट्रांसफर कर देगा। . अब X को अपनी लॉग बुक में सिर्फ यह लिखना है कि उसने 50 करोड़ इलेक्टोरल बांड से प्राप्त किये। X को यह नहीं बताना है कि उसे ये बांड किसने दिए थे !! और न ही केंचुआ उससे पूछेगा कि X को ये बांड किसने दिए थे !! Now, foreign poll funding won’t be scrutinised . साफ़ है कि मोदी साहेब एवं संघ के स्वयंसेवको ने इस क़ानून को सिर्फ इसीलिए लागू किया, ताकि बड़ी पार्टियाँ विदेशियों से गुमनाम पैसा ले सके !! और अब वे विदेशियों से पैसा ले भी रहे है। . सबूत ? . माफ़ कीजिये, लेकिन उन्होंने क़ानून ही इस तरह से बनाया है कि इसका कभी कोई सबूत नहीं जुटाया जा सकता !! . मोदी साहेब ने जब यह क़ानून छापा तो PMP01* की नेता सोनिया जी एवं PMP03* के नेता अरविन्द केजरीवाल जी ने भी इस क़ानून का पूरा समर्थन किया था !! यह बिल बिना किसी चर्चा के सीधे पास हुआ। जब यह क़ानून छपा तो पेड मीडिया ने रिपोर्ट किया था कि, इस क़ानून के आने के बाद राजनैतिक पार्टियों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता आएगी !!! ( PMP01* = में PMP से आशय पेड मीडिया पार्टी है, और 01 कोंग्रेस का कोड है। बीजेपी=संघ का कोड 02 एवं आम आदमी पार्टी का कोड 03 है। पेड मीडिया पार्टी से आशय ऐसी पार्टी से होता है, जो पेड मीडिया के प्रायोजको के एजेंडे के समर्थन में रहती है। पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा क्या है, इस बारे में फिर किसी जवाब में। ). पेड मीडिया से फीडिंग लेने वाले किसी भी बुद्धिजीवी या जीनियस से आप इस बारे में पूछेंगे कि फाइनेंस बिल क्या है, तो वह आपको आज भी यही बतायेगा कि इस बिल से चुनावी भ्रष्टाचार कम होगा, और चंदे में पारदर्शिता आएगी !! पारदर्शिता कैसे आएगी, इस बारे में ये बुद्धिजीवी आपको कुछ नहीं बताएँगे। क्योंकि पेड मीडिया ने भी इन्हें इस बारे में कुछ नहीं बताया है। पेड मीडिया ने इन्हें सिर्फ इतना ही बताया है कि, इससे पारदर्शिता आती है !! बस !! . कांग्रेस एवं बीजेपी को 2010 में हाई कोर्ट ने विदेशियों से चंदा लेने का दोषी ठहराया था। तब से इस मामले पर कार्यवाही लंबित थी। अत: मोदी साहेब ने इस क़ानून को भूतलक्षी प्रभाव ( Retrospectively ) के साथ छापा। यदि मोदी साहेब इस क़ानून को 10 साल पीछे जाकर यानी 2008 से भी लागू करते तो कांग्रेस एवं बीजेपी दोनों ही इस भ्रष्टाचार की चपेट में आने से बच जाते। किन्तु कांग्रेस को उनके अन्य पुराने पापो से बचाने के लिए मोदी साहेब और भी पीछे गए !! . कितना पीछे ? . मोदी साहेब ने इस बिल को 42 साल पीछे जाकर यानी 1976 से लागू किया !! मतलब 2010 में कांग्रेस-बीजेपी ने जो अपराध किया था और जो मामला अभी चल रहा है , वह अपराध अब गैर कानूनी नहीं रह गया है , बल्कि कानूनी हो गया है !! और 1976 के बाद में किये गए ऐसे सभी अपराध भी अब अपराध नहीं रहे !! बताइये !! . जब मोदी साहेब ने यह क़ानून छापा था तो राईट टू रिकॉल पार्टी ने इस क़ानून का विरोध किया था और उनके कार्यकर्ताओ ने पीएम को ट्विट भेजे थे कि इस बकवास क़ानून को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। किन्तु उन्होंने इस क़ानून को जारी रखा। . —————— . अब 2020 में केंचुआ एवं पेड मीडिया की हरकत देखिये : . आज से 4 दिन पहले यानी 10 फरवरी 2020 को पेड नेशनल हेराल्ड एवं Paid The Print ने यह खबर लगाईं कि – चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में इलेक्टोरल बांड से पैसा जुटाने वाली जिन पार्टियों की सूची का एफिडेविट दिया है उनमे राईट टू रिकॉल पार्टी का नाम भी है !! Unrecognised parties receive funds via electoral bond scheme . These parties don't have a fixed symbol but still got cash through electoral bonds . They include Sabse Badi Party, Rashtriya Peace Party, Hindustan Action Party, Nagarik Ekta Party, Bharat Ki Lok Jimmedar Party, Vikas India Party and Right to Recall Party, according to a submission made by the Election Commission (EC) in the Supreme Court this week. A registered but unrecognised political party cannot contest elections on a fixed symbol of its own. It chooses from a list of symbols the Election Commission provides. This makes it difficult to track the electoral history of such parties. सुप्रीम कोर्ट में केंचुआ (EC) द्वारा प्रस्तुत एफिडेविट के अनुसार, इसमें सबसे बड़ी पार्टी, राष्ट्रीय शांति पार्टी, हिंदुस्तान एक्शन पार्टी, नगरिक एकता पार्टी, भारत की लोक जिम्मेदार पार्टी, विकास इंडिया पार्टी और राइट टू रिकॉल पार्टी शामिल है। . पेड नेशनल हेरल्ड एवं पेड द प्रिंट ने हवाला दिया है कि, केंचुआ ने सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दाखिल किया है। अब या तो केंचुआ का यह शपथपत्र पूरी तरह से झूठा है, या फिर पेड नेशनल हेरल्ड एवं पेड द प्रिंट को झूठी खबर लगाने के लिए भुगतान किया गया है। . सबूत ? . क्योंकि राईट टू रिकॉल पार्टी के पास कोई बैंक खाता नहीं है। और पार्टी के पास पहले भी कोई खाता नहीं रहा है। RRP ने आज तक कभी भी कोई बैंक एकाउंट नहीं खुलवाया। यह पार्टी पैसो का कोई लेनदेन करती ही नहीं है। जब से पार्टी बनी है, तब से पार्टी के पास शून्य रूपये है। कोई बैंक खाता नहीं, कोई एनजीओ नहीं, कोई ट्रस्ट नही, कोई चंदा नहीं , कोई कैश नहीं। राईट टू रिकॉल पार्टी ने आज तक कभी किसी भी रूप में कोई चंदा भी नहीं लिया है !! . और यह बात केंचुआ को भी मालूम है कि, राईट टू रिकॉल पार्टी के पास न तो कोई खाता है, और न ही इनके पास पैसा है। कैसे ? . यदि पार्टी किसी चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारती है तो उन्हें ऑडिट करके चुनावी खर्चे का हिसाब केंचुआ को भेजना पड़ता है। तो हर विधानसभा में चुनाव में RRP पार्टी के उम्मीदवार चुनाव लड़ते है, और फिर केंचुआ को हिसाब भी भेजा जाता है। अभी तक जितनी भी बार उन्हें हिसाब भेजा गया है, उसमे राईट टू रिकॉल पार्टी की सभी एंट्रियाँ शून्य, शून्य, शून्य या Nil, Nil Nil होती है। और हिसाब की लॉग बुक में लिखा जाता है कि – कोई बैंक खाता नहीं, कोई अनुदान नहीं, कोई चंदा नहीं, कोई नकदी नहीं !! . और RRP अभी तक इस तरह 4 चुनावों का हिसाब भेज चुकी है। RRP के उम्मीदवारों को चुनाव खुद के खर्चे पर लड़ना होता है, और उन्होंने जितना खर्चा किया उसका हिसाब एक उम्मीदवार के रूप में वे सीधे केंचुआ को भेजते है। . इलेक्टोरल बांड को भुनाने के लिए इसे एकाउंट में जमा करना होता है। जब पार्टी के पास बैंक खाता ही नहीं है तो फिर पार्टी इलेक्टोरल बांड को कहाँ जमा करेगी, और कहाँ से पैसा लेगी !! बताइये !!! . यह खबर क्यों लगवायी गयी ? . इसके पीछे 2 वजहें है : 1. छवि ख़राब करना : कुछ 40 से 50 लाख पाठको तक उन्होंने यह जानकारी पहुंचा दी है कि इन लोगो को गुमनाम पैसा मिल रहा है। और पाठको की खोपड़ी में यह कील भी ठोक दी है कि, बड़ी पार्टियों को इलेक्टोरल बांड से पैसा मिले तो कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि उन्हें तो ट्रेक किया जा सकता है। पर जिन पार्टियों को परमानेंट सिम्बल नहीं मिला है उन्हें ट्रेक नहीं किया जा सकता, अत: यदि छोटी पार्टियों को इलेक्टोरल बांड से पैसा मिले तो यह खतरनाक है !! . खबर को फिर से पढ़ें कि इसे किस तरह ड्राफ्ट किया गया है -- A registered but unrecognised political party cannot contest elections on a fixed symbol of its own. It chooses from a list of symbols the Election Commission provides. This makes it difficult to track the electoral history of such parties. एक पंजीकृत लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल अपने स्वयं के निर्धारित प्रतीक पर चुनाव नहीं लड़ सकता है। यह केंचुआ द्वारा प्रदान किए गए प्रतीकों की एक सूची चिन्ह चुनता है। इससे ऐसी पार्टियों के चुनावी इतिहास को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। . ( स्थायी चुनाव चिन्ह हासिल करने के लिए किसी राज्य या लोकसभा चुनाव में कुल मतों के 5% वोट लाने होते है !! ) . मतलब, न्यूज पाठक के दिमाग में यह बात डालती है कि यदि मान्यता प्राप्त पार्टी को इलेक्टोरल बांड से पैसा मिलता है तो कोई भ्रष्टाचार नहीं होता है, किन्तु छोटी पार्टियों को यदि बांड से पैसा मिले तो यह दुरूपयोग है !! क्यों ? क्योंकि स्थायी चिन्ह नहीं होने के कारण इनके इतिहास को ट्रेक नहीं किया जा सकता !! मतलब क्या है इस बात का !! . सभी रजिस्टर्ड पार्टियों की पूरी कुंडली केंचुआ के पास रहती है। 800 पेज का एप्लीकेशन जमा करना पड़ता है, तब जाकर वे साल भर में पार्टी को रजिस्टर्ड करते है। कौन पार्टी कितने उम्मीदवार उतार रही है, कहाँ से उतार रही है, सब की सूचना देनी होती है। हर उम्मीदवार को 28 पेज का एफिडेविट देना पड़ता है। चुनाव के दौरान दिन में 2 बार केंचुए को रिपोर्ट करना पड़ता है। . क्या पेम्पलेट छपवा रहे हो, किधर प्रचार कर रहे हो इत्यादि प्रकार की सभी सूचनाएं देनी होती है। इन सब से वो ट्रेक नहीं कर सकते !! लेकिन स्थायी सिम्बल मिलने के बाद वे ट्रेक कर लेंगे !! तो ठीक है, 5% वोट लाने का क़ानून निकाल दो और रजिस्टर्ड पार्टियों को परमानेंट सिम्बल दे दो, ताकि छोटी पार्टियों को भी ट्रेक कर सको। पर ऐसा तो उनने करना नहीं है !! क्योंकि इससे बड़ी पार्टियों की ताकत कम हो जायेगी। . और PMP02 एवं PMP01 के पास तो परमानेंट सिम्बल है न, तो बताओ PMP02 को पिछले साल जो 950 करोड़ और PMP01 को जो 150 करोड़ का चंदा इलेक्टोरल बांड से मिला है, उसका सोर्स क्या है ? कौनसा अखबार या केंचुआ बतायेगा कि PMP01 एवं PMP02 ये 1100 करोड़ किधर से लेकर आई है !! ट्रेक करो और बता दो !! है हिम्मत ? . 2. टाइम ख़राब करना : अभी एक लेटर केंचुआ को लिखना पड़ेगा और एक-एक लेटर पेड नेशनल हेरल्ड एवं Paid The Print को भी लिखना पड़ेगा। मतलब 12 से 14 घंटें तो इसमें ही फुंक जायेंगे। केंचुआ की यह सबसे मुख्य नीति है, छोटी पार्टियों के प्राण पीने की। वो हर महीने किसी न किसी टाइप का एक पटाका फेंकता रहता है, ताकि टाइम चूसा जा सके। वे जानते है कि, छोटी पार्टियों के पास स्टाफ वगेरह नहीं होता, तो वे उन्हें इस तरह के क्लर्की वर्क में उलझाकर रखते है। अब केंचुआ तो इस तरह के पुरजो का कोई जवाब भेजता नहीं है। सुप्रीम कोर्ट जायेंगे तो वहां इनके भी बाप बैठे हुए है। . इसके बाद राईट टू रिकॉल पार्टी के कार्यकर्ताओं को आगे भी हमेशा के लिए यह स्पष्टीकरण देते रहना पड़ेगा कि, RRP को इलेक्टोरल बांड से कोई पैसा नहीं मिला। लेकिन ज्यादातर लोग RRP की बात का विश्वास नहीं करेंगे। वे केंचुआ, नेशनल हेरल्ड की बात को ही विश्वसनीय मानेंगे। तो RRP के कार्यकर्ताओ को अब आने वाले कई सालों तक भी लगातार यह स्पष्टीकरण देते रहना पड़ेगा !! और इसमें RRP के कार्यकर्ताओ के लाखों घंटे बर्बाद होते रहने वाले है !! . बुद्धिजीवी यह तर्क देंगे कि आप लोग केंचुआ एवं मीडिया हाउस के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट क्यों नही गए, मानहानि का दावा क्यों नहीं किया आदि। पर बुद्धिजीवियों को इस बात से कोई मतलब नहीं होता कि सुप्रीम कोर्ट में पाँव रखने में भी 25 हजार का खर्चा हो जाता है, जो कि छोटी पार्टियों के लिए एक बड़ी राशि होती है। . —————- . भारत में 3 संस्थाएं ऐसी है जो 1950 से ही अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के कंट्रोल में रही। 2002 तक यह नियंत्रण बढ़ता-घटता रहा, किन्तु पेड मीडिया की शक्ति बढ़ने के कारण आज यह निर्णायक स्तर तक बढ़ गया है। इन तीनो संस्थाओ के मुखिया की नियुक्ति अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों यानी कि पेड मीडिया के प्रयोजको से कंसल्ट करने के बाद की जाती है। यदि पीएम इन 3 संस्थाओ को कंट्रोल करने की कोशिश करेगा तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों एवं पीएम के बीच तनाव बढ़ जाएगा, और वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करके पीएम को गिराने की कार्यवाही करना शुरू कर देंगे। ये तीन संस्थाएं है : सुप्रीम कोर्ट का मुख्य न्यायधीश चुनाव आयुक्त रिजर्व बैंक गवर्नर इन तीनो संस्थाओ के पास पीएम को डिस्टर्ब करने और यहाँ तक की गिराने की ताकत भी है। . अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने पेड मीडिया के माध्यम से इन तीनो संस्थाओ का ऐसा हव्वा खड़ा किया हुआ है कि न तो इन संस्थाओ के मुखिया पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया जा सकता है, न ही इनके खिलाफ कभी कोई जांच खोली जा सकती है, न ही इन्हें दण्डित किया जा सकता है। . यदि पीएम इनसे पंगा लेने जाता है तो अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों द्वारा नियंत्रित पेड मीडिया इन 3 संस्थाओ के साथ खड़ा हो जायेगा और पूरे देश में इस तरह का ड्रामा स्टेज किया जाएगा कि पीएम इन “निष्पक्ष एवं संवैधानिक” संस्थाओ को दबाने या नियंत्रित करने के प्रयास कर रहा है, और पीएम की यह हरकत लोकतंत्र की हत्या है, असंवैधानिक, है आदि आदि !! . और उन्होंने पेड मीडिया के माध्यम से नागरिको के दिमाग में भी यह बात बहुत अच्छी तरह से डाली हुई है कि ये संवैधानिक संस्थाएं लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षक है, इन पर हमला करना मतलब संविधान पर हमला है, आदि आदि, और इसी टाइप की फालतू बातें। तो जब भी पीएम एवं इन संस्थाओं के बीच आपस में टकराव आएगा तो पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित सभी बुद्धिजीवी इन संस्थाओ के समर्थन में चले जाते है। केंचुआ एवं भ्रष्ट जजों का इस्तेमाल करके पीएम को गिराने का एक अच्छा उदाहरण आप इस जवाब में पढ़ सकते है – क्या इंदिरा गांधी वाक़ई सबसे ताक़तवर भारतीय प्रधानमंत्री थीं? . केंचुआ किस तरह पीएम एवं अन्य राजनैतिक दलों को कंट्रोल करता है ? . पहली बात तो अकेला केंचुआ अपने बूते पर पीएम का कुछ उखाड़ नहीं सकता। किन्तु पेड मीडिया के प्रायोजक केंचुआ+सुप्रीम कोर्ट+पेड मीडिया की सहायता से पीएम को 3 दिन में जमा कर सकते है। वे ऐसा कैसे करते है और कैसे कर सकते है, इसका जवाब बहुत लम्बा हो जाएगा। अत: निचे मैंने इसे संक्षेप में बताया है। . EVM पर कंट्रोल : पेड मीडिया द्वारा EVM के बारे में नागरिको को काफी अफीम पिलाई गयी है। पेड मीडिया द्वारा इसमें से एक सबसे बड़ा झूठ यह है कि PMP02 पार्टी EVM को हैक करके चुनाव जीतती है !! यह एकदम बकवास आरोप है । . (a) असल में पीएम कभी भी EVM को कंट्रोल नहीं कर सकता। चुनावों की घोषणा होने के बाद पीएम केंचुआ के दफ्तर में न तो कदम रख सकता है, न ही उन्हें कोई निर्देश दे सकता है !! केंचुआ पूरी तरह से पीएम के कंट्रोल से बाहर होता है। निम्नलिखित फैसले सिर्फ केंचुआ लेता है और पीएम का इसमें शून्य दखल होता है : EVM का डिजाइन केंचुआ तय करता है EVM कहाँ बनेगी केंचुआ तय करता है EVM कहाँ स्टोर होगी केंचुआ तय करता है इसके ट्रांसपोर्टेशन का ठेका किस कम्पनी को जाएगा, केंचुआ तय करता है यदि EVM में वोटो की हेराफेरी का कोई आरोप है, तो खुद की जांच भी केंचुआ खुद ही करता है, और खुद को क्लीन चिट भी जारी करता है !! EVM के बारे में पीएम कोई जांच नहीं खोल सकता। यदि पीएम केंचुआ से EVM का डिजाइन मांगे तो केंचुआ नहीं देगा पीएम के पास केंचुआ का सिर्फ यह इलाज है कि, पीएम सुप्रीम कोर्ट के पास जा सकता है। किन्तु यदि सुप्रीम कोर्ट और केंचुआ एक ही पाले में है तो पीएम के हाथ में कुछ नहीं है। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट केंचुआ से भी आगे की आयटम है, और पीएम के काबू से बाहर है। कैसे ? सुप्रीम कोर्ट अपनी नियुक्ति खुद ही करता है। और खुद की नियुक्ति खुद करने की इस प्रक्रिया पर आपको आपत्ति है तो इसकी अपील भी खुद सुप्रीम कोर्ट में ही होती है। मतलब वे खुद के मुकदमे खुद ही सुनते है और खुद ही खुद को बरी कर देते है !! यदि पीएम कोई क़ानून छापता है तो सुप्रीम कोर्ट के पास अमुक क़ानून को केंसल करने की संवैधानिक शक्ति है सुप्रीम कोर्ट पीएम के खिलाफ कोई भी जाँच खुलवा सकता है, और पीएम के खिलाफ जांच करने वाली एजेंसी यानी सीबीआई को सीधे अपनी निगरानी में ले सकता है। सुप्रीम कोर्ट पीएम के खिलाफ कोई भी मुकदमा स्वीकार करके पीएम को दोषी ठहरा सकता है, और पीएम को जेल भी भेज सकता है !! सुप्रीम कोर्ट पर कोई आरोप भी नहीं लगाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट पर आरोप लगाना भी गैर कानूनी है !! मतलब वे अवमानना के मामले में आपको जेल में डाल देते है !! सार यह है कि, पीएम केंचुआ से इसीलिए नहीं भिड़ सकता क्योंकि केंचुआ के पीछे एनाकोंडा खड़ा है । और जैसे ही पीएम केंचुआ एवं सुप्रीम कोर्ट से टकराव लेगा वैसे ही पेड मीडिया के प्रायोजको से इशारा मिलने के बाद देश के सभी पेड पत्रकार, पेड संपादक, पेड बुद्धिजीवी, सभी राजनैतिक पार्टियो के नेता पीएम पर आरोप लगाना शुरू कर देंगे, कि पीएम संवैधानिक संस्थाओ को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है !! . दुसरे शब्दों, में पेड मीडिया के प्रायोजक भारत में EVM को जारी रखना चाहते है, ताकि EVM के माध्यम से पीएम एवं अन्य राजनैतिक पार्टियों के नेताओ की घड़ी दबाकर रखी जा सके। केंचुआ एवं सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से वे EVM को कंट्रोल करते है और EVM के माध्यम से नेताओं को। और पेड मीडिया के माध्यम से ही वे आपको यह पुड़िया देते है कि, पीएम EVM को कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है !! जबकि सच यह है कि पीएम तो खुद EVM का विक्टिम है !! . वे अपनी सभी प्रायोजित पार्टियों को समय समय पर साँसे देकर एक संतुलन बनाकर रखते है। यदि PMP02 कंट्रोल से बाहर जाने लगेगी तो वे EVM का इस्तेमाल करके PMP03 का वोट शेयरिंग बढाने लगेंगे, और PMP03 उनके एजंडे से बाहर जायेगी तो फिर से PMP01 का वोटिंग काउंट बढ़ने लगेगा। 2023 तक पेड मीडिया का इस्तेमाल करके वे PMP03 को राष्ट्रिय स्तर पर स्थापित कर देंगे और तब PMP03 2024 के चुनावों में PMP02 के नेताओं के लिए किल स्विच का काम करेगी। . (b) EVM को हैक किया जा सकता है। यह दूसरी बकवास है जिसे पेड मीडिया द्वारा EVM मुद्दे की बैंड बजाने के लिए फैलाया गया है। सच्चाई यह है कि, EVM एक इलेक्ट्रोनिक डिवाइस है, और यह उसी के इशारों पर काम करती है, जिसने इसे प्रोग्राम किया हो। मतलब EVM को प्रोग्राम किया जा सकता है, किन्तु इसे हैक नहीं किया जा सकता . EVM की प्रोग्रामिंग केंचुआ करता है, अत: EVM ठीक उसी तरह से काम करेगी जिस तरह केंचुआ चाहेगा। उन्होंने प्रोग्रामिंग शब्द को साइड में करने के लिए हैकिंग शब्द को इस तरह से फैलाया जिससे लगे कि जिस तरह इंटरनेट में हैकिंग होती है, उसी तरह से EVM भी हैक हो सकती है। जो कि एक झूठी बात है। यह थ्योरी इसीलिए गढ़ी गयी ताकि इस तथ्य को चर्चा से बाहर रखा जा सके कि केंचुआ खुद ही EVM में वोटो की हेरा फेरी करता है, और केंचुआ के अलावा यह हेरा फेरी और कोई कर भी नहीं सकता। . (c) केंचुआ जब बुलाता है तो कोई EVM का कोई हैकर नहीं जाता। . केंचुआ न तो EVM खोलने देता है, और न ही इसका डिजाइन देता है। केंचुआ का स्टेंड रहता है कि EVM में प्रोग्राम मेरा रहेगा और तुम EVM को हैक करके दिखाओ !! चूंकि केंचुआ EVM को खोलने नहीं देता, अत: कोई भी इंजीनियर उसके चेलेंज में नहीं जाता है। और इंजीनियर्स को जादू आता नहीं है !! . इस वीडियो में सोफ्टवेयर इंजीनियर राहुल मेहता जी ने जन्तर मंतर पर पब्लिक डेमो में बताया है कि, EVM में केंचुआ कैसे धांधली करता है। कृपया वीडियो देखें - https://www.youtube.com/watch?v=jnazWH5715Q&fbclid=IwAR3odKoAuVCl7B1-lfSa0pjvMkxO7c5ew8ddS2rNY-wnHO3dxp5WP8YD08o . केंचुआ किस तरह EVM में वोटो की हेराफेरी करता है इस बारे में यह जवाब पढ़ें – Pawan Kumar Sharma का जवाब - ईवीएम मशीन के साथ वीवीपैट क्यों लगाई जाती है? . समाधान ? . (1) पेड मीडिया द्वारा इस तरह की फर्जी ख़बरें छापने एवं केंचुआ द्वारा इस तरह के झूठे एफिडेविट देने जैसी हरकतें रोकने के लिए जूरी कोर्ट की जरूरत है। अभी पेड मीडिया कुछ भी उल्टा पुल्टा छाप सकता है, क्योंकि उन्हें पता है कि कोई सजा तो होने वाली नहीं है। जूरी कोर्ट आने के बाद इस तरह के मामलो की सुनवाई नागरिको की जूरी करने लगेगी, अत: पेड मीडिया एवं केंचुआ इस तरह की हरकत करने का जोखिम नहीं उठाएंगे। . (2) हमें EVM केंसल करके बेलेट पेपर की तरफ लौट आना चाहिए। जब तक भारत में EVM शुरू रहेगी तब तक पीएम एवं सभी राजनैतिक पार्टियाँ पेड मीडिया के एजेंडे को आगे बढाने के लिए बाध्य है। यदि वे पेड मीडिया के एजेंडे को आगे नहीं बढ़ाएंगे तो पेड मीडिया EVM का इस्तेमाल करके उन्हें चुनाव हर देगा। . पेड मीडिया के प्रयोजको का एजेंडा क्या है, और कैसे वो भारत के पीएम को कंट्रोल करते है इस बारे में विस्तृत रूप से मैं फिर किसी जवाब में लिखूंगा। ————-

aakanksha

देखा उसे जब पहली बार, गुस्से का पारा चढ़ा हुआ था, चेहरे पर सख्ती ऐसी थी, जैसे हर लम्हा अड़ा हुआ था। आंखों में उसकी अजीब सी, एक चुभन सी झलक रही थी, पर जाने क्यों उस चुभन में भी, एक कहानी छुप रही थी। भौंहें तनी, लब खामोश थे, पर दिल कुछ कह जाता था, उसका हर एक अंदाज़ मुझे, अपनी ओर खींच जाता था। ना हंसी, ना कोई बात, बस खामोशी का साया था, फिर भी उस अनजाने चेहरे में, कुछ अपना सा पाया था। शायद वो गुस्सा झूठा था, या दिल कहीं टूटा होगा, उसकी उस खामोशी के पीछे, कोई दर्द जरूर छुपा होगा। अजीब सा रिश्ता बन गया, पहली ही उस मुलाकात में, गुस्से वाला वो चेहरा बस, बस गया मेरी हर बात में। कभी सोचा ना था ऐसा भी, कोई दिल को भा जाएगा, गुस्से में भी कोई इतना, खास नजर आ जाएगा। आज भी याद है वो पल, जब पहली बार देखा था, उसके गुस्से में ही मैंने, अपना सुकून लिखा था। ✨

ziya

बदलते हुए मौसम और बदलता हुआ इंन्सान बहुत कुछ सीखा देता है 💯💯💯💯💯💯

ziya

अकेले चलना सिख लो क्योंकि सहारा कितना भी सच्चा हो एक दिन साथ छोड़ ही देता है

Bhavna Bhatt

મારું મણિનગર

Beyondwords

દુખમાં માણસ એકલો જ હોય છે, પણ નિર્ણય લે ત્યારે ભીડ ઊભી થઈ જાય છે. સલાહ આપનારા બહુ હોય છે, પણ દુખ વહેંચનારા બહુ ઓછા. આથી જીવન પોતાના વિચારથી જીવવું પડે, કારણ કે રસ્તો પણ આપણો છે અને સંઘર્ષ પણ આપણો જ છે. @શબ્દો_ની_પાર

Beyondwords

पानी में रहो, मगर ग़म को छूने न दो, कमल-सा खिलो, कीचड़ को छूने न दो। दुनिया की हवाओं में झोंके तो लाख हों, दिल की रौशनी को कभी बुझने न दो। रिश्तों के समंदर में डूबे रहो सदा, मगर नफ़रत की लहरों को छूने न दो। गंदगी जहाँ भर गई उस जहाँ में भी, ख़ुद की ख़ुशबू को फीका होने न दो। @beyond_word

Vartikareena

प्रेम शाश्वतं, मृत्यु शाश्वतः — एक झलक

mohansharma

इश्क़ में मोहन जिसने भी चोट खाई है.. शायरी बस उसी के समझ में आई है..

N¡k¡t@

ye sach he....yaa nhi...??🤔..me confusion me hu....

Raju kumar Chaudhary

स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ, हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ। कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान, हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान। अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो, तो Follow करिए… यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨Follow the Raju Kumar Chaudhary official channel on WhatsApp: https://whatsapp.com/channel/0029Vb6nSzoDOQIXdQiMVl1U

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Raju kumar Chaudhary

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ek archana arpan tane

માણસ પોતાની નજર માં સાચો હોવો જોઇએ નહીંતર દુનિયા તો ભગવાન થી પણ દુખી જ છે. - ek archana arpan tane

बिट्टू श्री दार्शनिक

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kattupaya s

Goodnight friends .. sweet dreams

Jyoti Gupta

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SAYRI K I N G

आंटी को अपने से आधी उम्र का लड़का चाहिए और लड़की को पैसे वाला अंकल चाहिए... आज कल ऐसे ही केस में उलझा हुं अब उलझू या सुलझू

Tr. Mrs. Snehal Jani

નાની અમસ્તી હું, કરતી ચીં ચીં આખો દિ'. જોઈએ મને જરા અમસ્તી જગ્યા, રહી લઉં નાનકડાં માળામાં. જોખમમાં છે અસ્તિત્વ આજે, મારા આખાય સમાજનું. કરું વિનંતિ ઓ માનવી તને, બચાવી વૃક્ષો અને પર્યાવરણ, અટકાવી દે અમને લુપ્ત થતાં! વિશ્વ ચકલી દિવસે એક ચકલીની માનવી સમક્ષ વ્યથા.

Awantika Palewale

नज़र तो यूँ आए कि कभी दिखाई न दिए, जैसे साँस रुके पल-भर… और आवाज़ भी न दिए। वो पास था, मगर एहसास से बाहर ही रहा, हाथ छुआ, पर दिल को कोई लम्हा न दिए। हमने चाहत को भी चुपचाप सहेजा दिल में, डर ये था कहीं ये मोहब्बत सिसकियाँ न दिए। रात की गोद में रख दी थी थकी हुई यादें, सुबह आई तो कोई एक भी किस्सा न दिए। उसकी ख़ामोशी में इतना सा दर्द था छुपा, कि टूट जाए दिल… पर वो रोने की इजाज़त न दिए।

Chaitanya Joshi

ઘરના દરવાજે આવીને ઉભો રહ્યો એક ભિક્ષુક આવી યાચનાનો એણે શબ્દ કહ્યો એક ભિક્ષુક દરિદ્રતા નખશિખ જાણે વરી ચૂકી હતી એને, રખેને દીનતાએ કોઈ વેશ ધર્યો એક ભિક્ષુક. ચિંથરેહાલ કપડામાંથી ડોકિયું કરતી રંકતા ને, કૈંક પામવાને વારેવારે પ્રાર્થી રહ્યો એક ભિક્ષુક. હતી વેશભૂષા એવી ભલભલાને દ્રવિત કરતી, ને આદ્રતાથી શબ્દોને ઉચ્ચારતો એક ભિક્ષુક. મૂકીને ભરોસો ઈશ્વર પર એ યાચી રહ્યો હતો, કંઈ ના મળતા બીજે ડગ ભરતો એક ભિક્ષુક. ખુલ્લા પગે ગ્રીષ્મના એ દાઝી રહ્યો હતો કેટલો, એથી જ એટલે વારંવાર કરગરતો એક ભિક્ષુક. -ચૈતન્ય જોષી ' દિપક‌' પોરબંદર.

Falguni Dost

રાધે કૃષ્ણ 🙏🏻

Abha Dave

आज विश्व गौरैया दिवस है । हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य शहरीकरण के कारण लुप्त हो रही गौरैया और अन्य छोटे पक्षियों के प्रति जागरूकता फैलाना है। भारत की 'नेचर फॉरएवर सोसाइटी' और फ्रांस के इको-सिस एक्शन फाउंडेशन के संयुक्त प्रयासों से 2010 में पहली बार विश्व गौरैया दिवस की शुरुआत की गई। इस दिन को मनाने का मुख्य कारण लोगों को लुप्त हो रही गौरैया के प्रति सचेत करना है। गौरैया हमारी सबसे प्यारी घरों की साथी है और पर्यावरण की हितैषी भी। गौरैया पर प्रस्तुत है मेरी कुछ पंक्तियां 🙏 गौरैया ---------- घरों की रौनक है गौरैया हिल मिलकर रहती गौरैया कद छोटा लगती प्यारी चीं चीं कर प्रीत जगाती गौरैया। चिड़िया ----------------- चीं -चीं करती चिड़िया दाना चुगती चिड़िया फुदक -फुदक कर उड़ती सबको भाती चिड़िया। सब के घरों में जाती है सबको अपना पाती है तिनका चुन - चुन कर अपना घर बनाती है। भेदभाव वो जाने न शत्रु किसी को माने न हर आँगन उसका घर बनती किसी की अनजाने न। आभा दवे मुंबई

Narayan

वो जो शब्दों में बयां हो जाए, वो दस्तूर है दुनिया का, जो रूह में उतर जाए, वो जादू है सिर्फ तेरे और मेरे दरम्यान अहसास का।

Kamini Shah

આવી ગયું આજ ચકલીઓનું ધાડું ડાળે ડાળે ઊજવાય અવસરનું ટાણું… -કામિની

Narayan

प्रेम, इश्क़, प्यार मोहब्बत... ये तो सब दुनिया के लिए हैं, जो एहसास तेरे मेरे बीच में है, उसकी कोई परिभाषा ही नहीं.....!💕🌹

softrebel

तुमसे प्रेम..। तुमसे प्रेम करना, मेरे जीवन में आई तमाम नाकारात्मकताओं के बाद भी बची हुई ईश्वर की आरती-सी शुद्धता है जिसकी तपिश न सही राख भी मेरे लिए घर ले जाना सोना है। हृदय के किसी कोने में मेरा अस्तित्व बनकर बस गया है तुम मुझमें। ये ठीक वैसा ही है— जैसे जीवन की भागदौड़ से थका व्यक्ति अचानक अपने भीतर का जज़्बा फिर से पा ले। ये वैसा ही है— जब कोई तेज़ हवा सब कुछ उजाड़ कर चली जाए, फिर भी मन में पुनः बसाने, संवारने की चाह छोड़ जाए। ये वैसा ही है जहाँ पीड़ा, वैराग्य, विरह, वेदना जैसे सब शब्द हार मान लेते हैं, क्योंकि मेरे हृदय में तुम्हारे नाम का प्रेम हर बार जीत जाता है। उस क्षण से जब शायद पहली बार तुम्हारा ख्याल सहेजा होगा मैंने अपने किसी बाल्यकाल में, या उस पल से जब खिलाया होगा पत्तों का पहला निवाला तुम्हे खेल खेल में। या उस समय से— जब मिलन का कोई अनकहा संयोग रचा होगा हमने। हाँ, उस पल से भी— जब तुम्हारी कमियाँ, खामियाँ देखीं होगी मैंने, और फिर भी उन्हें दुनिया से छुपाकर अपने भीतर ही सहेज लिया होगा। और एक बार फिर, पूरे सहृदय से तुम्हें अपनाया मैंने। मैं हर बार इसी तरह अपनाऊँगी तुम्हें— सदैव अपनाती रहूँगी, तुममें छुपे “हम” को। क्योंकि तुम्हें अपनाना कोई बदलाव नहीं— ये मेरा चुनाव है, मेरे भीतर छुपे “मैं” का चुनाव। मै हर बार हार जाती हूं, तुम्हारी इस निष्ठुरता से तुम मेरे भीतर सदैव जीत जाते हो हमारे भीतर छुपी कोमलता से। ये कहना यक़ीनन अतिश्योक्ति होगी की मुझे तुम से प्रेम है शिव ये मानवीय उपकरणों से वशीभूत नहीं होता जरूर कुछ दैवीय है शिव। इसलिए मुझे तुमसे प्रेम नहीं है कदापि नहीं यह तो केवल छलावा है मेरा,मुझसे किया गया सबसे बड़ा छल। @softrebel #poetry #matrubharti

Sonu Kumar

क्या भारत में पहले की तुलना में सांप्रदायिक तनाव ज्यादा बढ़ गए हैं और इसके क्या कारण हैं? . पेड मीडिया के प्रायोजक यानी अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार कम्पनियों के मालिक भारत में हिन्दू-मुस्लिम सिविल वॉर को ट्रिगर करना चाहते है, ताकि निम्नलिखित लक्ष्य पूरे किये जा सके : हिन्दुओ को ईरान में भारतीय सेना भेजने के लिए तैयार करना भारतीय मुस्लिमों को एक बार फिर अलग देश की मांग करने के लिए तैयार करना भारत में बड़े पैमाने पर कन्वर्जन करना . अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक उपरोक्त लक्ष्यों की पूर्ती के लिए पेड मीडिया पार्टियो, पेड मीडिया नेताओं, पेड बुद्धिजीवियों, पेड बॉलीवुड कलाकारों, पेड साहित्यकारों एवं पेड मीडिया कर्मियों का इस्तेमाल कर रहे है। निचे मैंने बताया है कि पेड मीडिया के प्रायोजक ऐसा कैसे कर रहे है, और किन कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करके इस प्रक्रिया को रोका जा सकता है। . [टिप्पणी : इस जवाब में 2 खंड है पहला खंड राजनैतिक घटनाओं एवं उनके आकलन पर निकाले गए निष्कर्ष पर आधारित है। दुसरे शब्दों में, खंड (अ ) में मेरे पूर्वाग्रहो, अनुभवो, अनुमानों एवं मेरी राय आदि का घालमेल है। खंड (ब ) औचित्यपूर्ण समाधान के बारे में बताता है।] . खंड : अ . (1) भारत में आजादी से पहले हिन्दू-मुस्लिम तनाव : . ब्रिटिश के आने से पहले भारत में हिन्दू-मुस्लिम के बीच सामुदायिक स्तर पर तनाव काफी कम था। औरंगजेब के प्रारम्भिक काल में यह तनाव बढ़ा, लेकिन औरंगजेब के बाद तनाव फिर से कम हो गया था। . प्रत्येक समाज में भाषा, क्षेत्र, परम्पराएं, नस्ल, जाति, धर्म आदि के आधार पर कई छोटी मोटी दरारे होती है। जैसे जैसे दरारे चौड़ी होगी आपसी संघर्ष एवं अलगाव बढ़ता जाएगा। गोरो ने भारतीय समाज में जितनी भी दरारें थी, उन्हें चिन्हित किया और फिर इन दरारो को चौड़ा एवं गहरा करने के लिए गेजेट में क़ानून छापने शुरू किये। इसी में से एक दरार हिन्दू-मुस्लिम तनाव था। इसके लिए उन्होंने गाय, मुस्लिम प्रतिनिधित्व, एवं पेड मीडिया द्वारा प्रायोजित नेताओं आदि का इस्तेमाल किया। . जिन्ना मुसलमानों का नेता नहीं था, और मुस्लिम उसे अपने पास भी नहीं बैठाते थे। गोरो ने पेड मीडिया का इस्तेमाल करके उसे मुस्लिम नेता के तौर पर स्थापित किया। उसका काम मुस्लिमों को अलग देश की मांग करने के लिए तैयार करना था। . संतुलन बनाने के लिए यही काम उस समय गोरो द्वारा समर्थित कट्टर हिन्दू नेता भी कर रहे थे। 25 साल तक चली एक्सरसाइज के बाद गोरे भारतीय उपमहाद्वीप को 3 हिस्सों में विभाजित करने में सफल रहे। जब गोरे भारत से गए तो यह सुनिश्चित करके गए थे जवाहर लाल जनसँख्या नियंत्रण का क़ानून नहीं छापेंगे, ताकि धार्मिक जनसँख्या का अनुपात असंतुलित हो सके। . (2) 1989 से साम्प्रदायिक राजनीती फिर से शुरू हुई : . 1947 से 1985 तक हिन्दू-मुस्लिम तनाव में मामूली घटत-बढ़त के बावजूद यह मुद्दा राजनीती से दूर रहा। लेकिन 1988 से जब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिको ने भारत को टेकओवर करना शुरू किया तो पेड मीडिया का इस्तेमाल करके उन्होंने इसमें फिर से इंधन डालना शुरू किया। . अफगान-सोवियत वॉर के दौरान अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक पाकिस्तान के साथ मिलकर इस्लामिस्ट कट्टरपंथीयों को सोवियत रूस के खिलाफ बेकिंग दे रहे थे। 89 में वॉर ख़त्म होने के बाद इस्लामिक कट्टरपंथियों की कुछ तंजीमो को कश्मीर में रोजगार दे दिया गया। . सोवियत के उखड़ने से भारत में दूसरा ध्रुव ख़त्म हो गया था, अत: भारत के भी ज्यादातर नेताओं एवं पार्टियों ने अपने आप को टिकाए रखने और बढ़ाने के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों को जॉइन कर लिया था। अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने जब भारत में घुसना शुरू किया तो धार्मिक एजेंडे के तौर पर उन्हें भारत में हिन्दू-मुस्लिम अलगाव खड़ा करना था। इसके लिए उन्होंने ऐसे नेताओं को आगे बढ़ाना शुरू किया, जो इसमें ईंधन डाल सके। . (2.1) कश्मीरी पंडितो का पलायन : कश्मीर में आजादी की तहरीक पहले से ही चल रही थी, लेकिन इस पर इस्लामिक कट्टरपंथियों का कब्ज़ा नहीं था। 1987 में अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों एवं पकिस्तान की बेकिंग से इस मूवमेंट को इस्लामिक कट्टरपंथियों ने हाईजेक कर लिया था। यह बात खुली हुयी थी कि हथियारबंद दस्तो द्वारा कश्मीरी पंडितो पर बड़े पैमाने पर हिंसक हमला होना तय है। लेकिन अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के निर्देश पर केंद्र सरकार ने ये सब कुछ होने दिया और जानबूझकर मिलिट्री नहीं भेजी। . इस समय केंद्र सरकार बीजेपी=संघ के समर्थन से चल रही थी। लेकिन न तो बीजेपी=संघ ने मिलिट्री भेजने की मांग रखी, और न ही कश्मीरी पंडितो के पलायन के बाद उन्होंने सरकार से अपना समर्थन वापिस लिया !! (?) . कश्मीरी पंडितो के पलायन ने पूरे देश को हिला दिया था। बीजेपी=संघ के नेताओं ने इस घटना का पूरे देश में व्यापक प्रचार किया ताकि पार्टी का विस्तार किया जा सके। और उन्होंने विस्तार किया भी। मैंने खुद भी संघ उन्ही दिनों जॉइन किया था और संघ की सभाओं में 1998 तक इस घटना को काफी हौलनाक तरीके से डिसकस किया जाता था। . (2.2) बांग्लादेशी घुसपैठ : 89 से सऊदी अरब के धनिकों ने बांग्लादेशीयों को असम में घुसने के लिए फाइनेंस करना शुरू किया। पहली आवक 71 के युद्ध में हुयी थी। 86 से फिर आवक शुरू हुयी और 90 से इसमें निरंतरता आने लगी। आई बी रिपोर्ट के अनुसार 2001 तक देश में 1.5 करोड़ अवैध बांग्लादेशी आ चुके थे। . (2.3) विवादित ढांचे को गिराना : 90 से 92 तक मंदिर आन्दोलन चला। यहाँ शुरू से ही यह लक्ष्य था कि ढाँचे=मस्जिद को गिराना है, ताकि अन्तराष्ट्रीय स्तर पर इसे उछाला जा सके। बीजेपी=संघ के नेताओं ने मस्जिद गिराने की प्लानिंग की और कोंग्रेस एवं अन्य पेड मीडिया पार्टियों ने इसके लिए रास्ता तैयार किया। . बीजेपी=संघ से लेकर केंद्र सरकार और सभी नेताओं को 6 महीने पहले से पता था कि एक सामूहिक भीड़ द्वारा ढाँचे=मस्जिद को गिराया जाएगा। वाजपेयी ने इसे अपनी सार्वजनिक सभाओं में इशारतन व्यक्त किया था। . वाजपेयी का एक वीडियो यह देखिये – https://www.youtube.com/watch?v=-EhMmJEwbTg . राव के पास कई सारे विकल्प थे जिनका इस्तेमाल करके वे शांतिपूर्ण तरीके से ढाँचे को गिराए जाने से रोक सकते थे। लेकिन अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों द्वारा उन्हें हस्तक्षेप न करने के निर्देश थे, अत: उन्होंने ठीक उसी तरह से टाइम पास किया, जैसे कश्मीरी पंडितो के समय वीपी सिंह सरकार ने किया था !! जिस दिन ढांचा गिराया गया उस दिन CRPF की टुकड़ी कुछ ही दूरी पर मौजूद थी और प्रधानमंत्री कार्यालय को लगातार मेसेज भेजे जा रहे थे, लेकिन उन्हें हर बार “इंतजार करने” के आदेश दिए गए। . Replug: How PM P.V. Narasimha Rao picked up the pieces after Babri demolition . As kar sevaks milled into Ayodhya and mocked at the massed but immobilised Central troops in Faizabad next door, half a dozen leftist MPs drove up to the Prime Minister's office in Delhi. In the gathering dusk, they made a last-minute appeal to P.V. Narasimha Rao to take control of Ayodhya because they suspected the real intentions of the sangh parivar. "Avert a disaster," pleaded the CPI(M)'s Somnath Chatterjee.The glum-visaged head of government listened patiently and explained what he had done and also the assurances the Kalyan Singh government gave the Supreme Court. The Sanskrit scholar narrated a sloka, which the delegation did not comprehend. For their benefit he translated: "For doing any work, seven steps have to be taken. One takes the first six steps and leaves the seventh to God. I have taken the six steps." Next day, the insensitive God to whom Rao left the seventh step did not oblige the devout believer in karma. जैसे ही कारसेवकों ने अयोध्या में घुसना शुरू किया तो कुछ ही दूरी पर सैन्य टुकड़ी मौजूद थी। आधा दर्जन कम्युनिस्ट सांसद प्रधानमंत्री के पास पहुंचे और उन्होंने आशंका व्यक्त की कि अनहोनी होने वाली है। राव ने धैर्य से उनकी बात सुनी और फिर उन्हें संस्कृत का एक श्लोक सुनाया। चूंकि सांसद इसका अर्थ नहीं समझ सके इसीलिए संस्कृत के विद्वान पीवी नरसिम्हा राव ने उसका सार समझाते हए कहा कि - किसी भी काम को करने के लिए सात कदम उठाने पड़ते है। आदमी 6 कदम उठाता है, और सातवें को भगवान पर छोड़ देता है। मैंने 6 कदम उठा लिए है !!" और अगले दिन, असंवेदनशील ईश्वर ने वह सातवां कदम उठाया जिसे उठाने का दायित्व राव ने कर्म में विश्वास करने वालो पर छोड़ दिया था। . रिटायर होने के बाद एक साक्षात्कार में यह पूछे जाने पर कि, क्या वे मानते है कि उनके अनिर्णय की वजह से बाबरी मस्जिद गिरायी गयी, राव ने जवाब दिया था कि – फैसला न लेना भी एक फैसला होता है !! . 7 दिसम्बर को अन्तराष्ट्रीय मीडिया एवं अंग्रेजी अखबारों में “बाबरी मस्जिद गिरायी गयी” रिपोर्ट किया गया था, जबकि ज्यादातर हिन्दी अखबारों ने “विवादित ढांचा ध्वस्त” नाम से हेडलाइन बनायी थी। मैंने उस समय हिन्दी के जो भी अख़बार पढ़े थे उनमे "विवादित ढाँचे" का ही इस्तेमाल किया गया था। किन्तु अंतराष्ट्रीय सनसनी बनाने के लिए अंग्रेजी अखबारों ने मस्जिद रिपोर्ट किया !! इन्डियन एक्सप्रेस ने भी “Disputed Site” का इस्तेमाल किया। लेकिन बाद में इसे सभी जगह पर मस्जिद लिखा जाने लगा। . न्यूयार्क टाइम्स ने खबर लगाईं – हिन्दू उग्रवादियों ने मस्जिद गिरायी Hindu Militants Destroy Mosque, Setting Off a New Crisis in India . The Hindu - Babri Masjid destroyed . Times of India - Kar sevaks destroy Babri Masjid . Hindustan Times - Babri Masjid demolished . Indian Express - Disputed structure pulled down . इस तरह की घटनाएँ सिर्फ तब अंजाम दी जा सकती है, जब अदालतें आपके हाथ में हो। भारत की अदालतें 47 से ही ब्रिटिश धनिकों के नियंत्रण में थी, लेकिन 91 में कॉल्जियम लाकर उन्होंने अदालतों को अपनी फौलादी पकड़ में ले लिया था। वस्तुत: इस आयोजन के किसी भी शिल्पकार को सजा नहीं हुयी। वाजपेयी को तो आरोपी तक नहीं बनाया गया। . ढांचा=मस्जिद ध्वस्त होने के बाद ISI ने दाउद को धमाके करने के लिए आवश्यक सहयोग दिया, और मुंबई में धमाके हुए। ( ISI अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के खिलाफ जाकर दाउद को सहयोग नहीं कर सकता था ) . वाजपेयी जनसँख्या नियंत्रण एवं बंगलादेशियो को निष्कासित करने का वादा करके सत्ता में आये थे। 1999 से 2004 तक वाजपेयी ने सरकार चलायी लेकिन उन्होंने ये 2 क़ानून गेजेट में नहीं छापे, और न ही इनका ड्राफ्ट सामने रखा !! . 2002 के गुजरात दंगो में मोदी साहेब की कोई नकारत्मक भूमिका नहीं थी। लेकिन अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने पेड मीडिया के माध्यम से उन्हें “हीरो” बना दिया। मतलब इस बात को स्थापित किया गया कि दंगो के दौरान मोदी ने मुस्लिम विरोधी फैसले लिए थे !! (जो कि एक गलत आरोप था, एवं पेड मीडिया द्वारा उनकी छवि चमकाने के लिए बनाया गया था।) . 2004 से 2014 तक मनमोहन सिंह जी ने सरकार चलायी और उन्हें यह निर्देश थे कि, वे जनसँख्या नियंत्रण एवं बांग्लादेशियों को निष्कासित करने का क़ानून नहीं छापेंगे। अत: उन्होंने भी साइलेंटली 10 साल निकाल दिए ताकि समस्या पनपती रहे। . पेड मीडिया का समर्थन मिलने से 2014 में मोदी साहेब पीएम बने और फिर उन्होंने उपरोक्त 2 कानूनों को टालने के लिए 6 साल का टाइम पास किया। टाइम पास के अलावा उन्होंने भारत में सम्पूर्ण ध्रुवीकरण की प्रक्रिया भी शुरू की ताकि हिंसा की जमीन बनायी जा सके। . आज आप साफ़ तौर पर देख सकते है कि पूरे देश को पेड मीडिया के प्रायोजक 2 खेमो में बाँट चुके है। वो भी खुले तौर पर। एक झुण्ड में छद्म हिंदूवादी एवं छद्म राष्ट्रवादी है, दुसरे झुण्ड में छद्म सेकुलर, कथित टुकड़े टुकड़े गैंग, कथित अर्बन नक्सल, कथित वामपंथी आदि। और सभी "खुले तौर" पर खेमे खड़े करने का काम कर रहे है। . (3) कैसे अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत में हिन्दू-मुस्लिम गृह युद्ध शुरू कर सकते है ? . वे उसी ट्रेक का इस्तेमाल कर रहे है जिस ट्रेक का इस्तेमाल उन्होंने 47 में और 90 में कश्मीर पंडितो के निष्कासन में किया था। उनकी योजना दिए गये चरणों में काम कर रही है – . (3.1) पहले पेड मीडिया पार्टियों एवं नेताओं का इस्तेमाल करके वे तनाव भड़काएंगे . (3.2) फिर पेड मीडिया पार्टियों एवं पेड मीडिया नेताओं का इस्तेमाल करके दंगे करवाएंगे . (3.3) फिर आई टी सेल का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर भड़काऊ एवं फेक न्यूज फैलायेंगे इन सभी मामलो में न तो पुलिस कार्यवाही करेगी, न ही जज किसी को दंड देगा। उलटे पेड मीडिया एवं सोशल मीडिया पर उकसाने वाले इन लोगो को कवरेज दिया जाएगा, ताकि इससे ज्यादा से ज्यादा लोगो तक पहुँचाया जा सके। यदि पुलिस एवं अदालतें सुधार दी गयी तो यह तीनो चरण रूक जायेंगे। अत: ये सब होता रहे इसके लिए वे पुलिस एवं अदालतें सुधारने का कानून नहीं छापेंगे। . (3.4) 2 करोड़ अवैध बंगलादेशीयों को देश में बनाये रखना, और कथित NRC की चाबी देकर हड़काना ताकि उन्हें हथियार उठाने के लिए तैयार किया जा सके। यह एक वास्तविक वजह है, जो भारत में हिन्दू-मुस्लिम गृह युद्ध को शुरू कर सकती है। अभी जो CAA को NRC से मिक्स करने का ड्रामा हुआ है उसका एक बड़ा उद्देश्य यह था कि असम NRC से बाहर रह गए अवैध बंगलादेशीयों को हथियार पकड़ने के लिए तैयार किया जा सके। इसीलिए असम के NRC में यह प्रावधान नहीं रखा गया कि जो अवैध बंगलादेशी NRC से बाहर रह जायेंगे, उन्हें भारत से कैसे निष्कासित किया जायेगा। तो NRC एवं CAA ने इन्हें भारत से निष्कासित नहीं किया है। दुसरे शब्दों में सरकार ने भारत के अंदर हथियार पकड़ने वालो की एक फ़ौज तैयार कर ली है। . (3.5) साम्प्रदायिक तनाव की इन सभी घटनाओं को अन्तराष्ट्रीय स्तर पर इस तरह रिपोर्ट किया जायेगा, जिससे यह स्थापित किया जा सके कि भारत में हिन्दू-मुस्लिम तनाव लगातार बढ़ रहा है, और भारत में हिन्दू-मुस्लिम साथ नहीं रह सकते। वे पिछले 2-3 साल में इतना बारूद बिछा चुके है कि अब यदि वे असम में इस्लामिक कट्टरपंथियों को हथियार ( AK-47, ग्रेनेड आदि ) भेजना शुरु करे तो असम में बड़े पैमाने पर कत्ले आम होने लगेगा, और लाखो हिन्दू उसी तरह भारत की और पलायन करेंगे जैसे कश्मीरी पंडितो ने किया था। इस दौरान हजारो लोगो की जाने जा सकती है। इसके बाद वे भारत के अन्य राज्यों में भी हथियार भेजना शुरू करेंगे और पूरा देश चपेट में आ जाएगा। एक बार यह सब शुरू होने के बाद यह कई सालों तक रुकने वाला नहीं है। वे अलग अलग गुटों को हथियार भेजते रहेंगे और पेड मीडिया का इस्तेमाल करके दंगा भड़काते रहेंगे। . (4) क्या मोदी साहेब, आडवानी या योगी जी हिन्दू-मुस्लिम तनाव के लिए जिम्मेदार है ? . दरअसल, भारतीय उपमहाद्वीप में हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ाने का मसला अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के वैश्विक राजनैतिक लक्ष्यों एवं अपने कारोबारी हितो से जुड़ा हुआ है। पेड मीडिया के प्रायोजको की शक्ति का मूल स्त्रोत ऐसे निर्णायक हथियार है, जिन पर भारत की सेना बुरी तरह से निर्भर करती है। न्यायपालिका से लेकर सभी मुख्य संस्थाओं एवं प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रोनिक मीडिया, सोशल मीडिया तक में उनका अब निर्णायक दखल है। इसके अलावा सभी पेड मीडिया पार्टियाँ एवं नेता अपने को टिकाये रखने के लिए अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों पर बुरी तरह से निर्भर करते है। . संघ=बीजेपी के नेता यदि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के एजेंडे से बाहर जायेंगे तो वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करके उन्हें रिप्लेस कर देंगे। यह सब कुछ इस तरह से चलता है कि सभी पेड मीडिया पार्टियों एवं नेताओं में अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों का सहयोग लेने का एक तरह का कम्पीटीशन शुरू हो जाता है। जो नेता उनके एजेंडे को अच्छे तरीके से आगे धकेलेगा उसका मीडिया कवरेज बढ़ता जाएगा। . संघ 1925 से ही काम कर रहा है और उन्होंने 1951 में ही अपनी पार्टी का गठन कर लिया था। लेकिन संघ=बीजेपी को जब अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने पेड मीडिया का सपोर्ट देना शुरू किया सिर्फ तब उन्होंने तेजी से विस्तार करना शुरू किया। और वे नेता आगे निकल गए जो पेड मीडिया के प्रायोजको के एजेंडे को ज्यादा तेजी से आगे बढ़ा रहे थे। . यदि आडवाणी रथयात्रा नहीं निकालते तो वे मुरली मनोहर जी जोशी का कवरेज बढ़ा देते, और तब जोशी जी रथ यात्रा निकाल कर हीरो बन जाते। यदि मोदी साहेब गुजरात में अपने जेस्चर एंटी-मुस्लिम नहीं बनाकर रखते तो वे पेड मीडिया का इस्तेमाल करके तोगड़िया जी / या संजीव जी जोशी से उन्हें रिप्लेस कर देते। . और आज भी यदि मोदी साहेब तनाव को भड़काने में कमतर प्रदर्शन करने लगते है तो अमित शाह एवं योगी का कवरेज बढ़ता जाएगा, और हिंदूवादी कार्यकर्ताओ को यह शुबहा होने लगेगा कि पीएम तो अमित शाह या योगी जैसे आदमी को होना चाहिए। और इसी तरह यदि औवेसी बंधू अपने बयानों में इंधन नहीं डालेंगे तो टीवी पर उनके इंटरव्यू आने बंद हो जायेंगे। . मतलब, 1990 के बाद से सभी पेड मीडिया पार्टियों के नेताओं के कद वगेरह को सबसे ज्यादा पेड मीडिया के प्रायोजक प्रभावित करते है। नेताओ की स्थिति टायरो की तरह है, और पेड मीडिया हवा भरने वाला पम्प है। पेड मीडिया प्रायोजको द्वारा लांच की गयी आम आदमी पार्टी इसका एक बढ़िया उदाहरण है। . मेरा बिंदु यह है कि, मोदी साहेब, अमित शाह, योगी जी, ओवेसी, वारिस पठान, ममता, मुलायम आदि निर्णायक रूप से भारत में हिन्दू-मुस्लिम तनाव भड़काने के लिए जिम्मेदार नहीं है। वे एक तरह से WWE के पहलवान है जो अपना पार्ट अदा कर रहे है। . यदि उन्हें रिंग में रहना है तो रिंग के नियमों का पालन करना होता है। टीवी-अख़बार एवं सोशल मीडिया आई टी सेल आदि वो रिंग है जिसके माध्यम से नागरिको को राजनीती दिखायी जाती है। यदि पहलवान नियमों से बाहर जाएगा तो पेड मीडिया के प्रायोजक उसे रिंग से आउट कर देंगे, और नया पहलवान उतार देंगे !! . कुछ उदाहरण जिनसे आप समझ सकते है कि, पेड मीडिया के प्रायोजक किस तरह से नेताओं का कद बढ़ाने में सहयोग करते है : मुख्यमंत्री पद : भारत के नागरिक सिर्फ विधायक को चुनते है, किन्तु उनके पास ऐसी कोई प्रक्रिया नहीं है जिससे वे यह बता सके कि किस व्यक्ति को वे मुख्यमंत्री बनाना चाहते है। तो चुनाव होने के बाद पेड मीडिया के प्रायोजक विधायको को खरीद लेते है, और अपने आदमी को मुख्यमंत्री बनवा देते है। चूंकि मुख्यमंत्री के सभी दावेदार जानते है कि पेड मीडिया के प्रायोजको का सहयोग मिलने से उनके सीएम बनने की सम्भावना बढ़ जायेगी अत: उनमे पेड मीडिया के प्रायोजको को खुश करने की होड़ शुरू हो जाती है। एक उदाहरण आप योगी जी का देख सकते है। यूपी के चुनावी नतीजे आने के बाद मोदी साहेब ने योगी जी को रोकने की काफी कोशिश की थी। वे किसी और को यूपी का सीएम बनाना चाहते थे, ताकि उन्हें आगे कम्पीटीशन की सामना नहीं करना पड़े। किन्तु अंतिम समय पर पेड मीडिया के प्रायोजको ने योगी का समर्थन किया और योगी जी सीएम बने। मंत्री पद : पेड मीडिया के प्रायोजक विधायको को मीडिया कवरेज देकर उनका कद बढ़ा देते है। जैसे टीवी पर उनके बार बार इंटरव्यू आदि। मीडिया कवरेज बढ़ने से आम विधायक / सांसद का कद शेष विधायको से ज्यादा हो जाता है, और उन्हें मंत्री बना दिया जाता है। मतलब जनता किसी व्यक्ति को सिर्फ विधायक एवं सांसद बना सकती है, किन्तु मंत्री या मुख्यमंत्री नहीं बना सकती। अत: विधायक एवं सांसद चुनाव जीतने के अगले दिन से ही पेड मीडिया के प्रायोजको यानी अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के प्रति अपनी निष्ठा प्रदर्शित करने लगते है। ठीक वैसे ही जैसे गोरो के शासन काल में भारत के देशी राजाओं एवं बुद्धिजीवियों में वायसराय की निगाहों में आने के लिए प्रतिस्पर्धा रहती थी। उदाहरण के लिए, स्मृति जी ईरानी लगातार चुनाव हारती रही, किन्तु चूंकि उन्हें पेड मीडिया लगातार कवरेज दे रहा था अत: उनका कद बढ़ता गया और उन्हें राज्य सभा से भेजकर सीधे मंत्री पद दिए गए। और इसी तरह उन्होंने मनमोहन सिंह को सीधे पीएम के पद पर इंस्टाल किया !! टिकेट वितरण : भारत की सभी पार्टियों के स्ट्रक्चर ऐसा है कि स्थानीय कार्यकर्ताओ के पास उम्मीदवारों को तय करने के लिए वोटिंग राइट्स नहीं है। इस वजह से विधायक / सांसद टिकेट लेने के लिए पेड मीडिया के प्रायोजको के दफ्तरों में चक्कर लगाते रहते है। उन्हें भय रहता है कि यदि अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक नाराज हो गए तो वे आलाकमान से कहकर उनका टिकेट काट देंगे। प्रधानमंत्री पद : प्रधानमन्त्री जैसे पद पर जाने के लिए पेड मीडिया की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। सिर्फ साल भर में वे किसी मुख्यमंत्री या मंत्री स्तर के नेता में पेड मीडिया के पम्प द्वारा इतनी हवा भर सकते है कि उसका कद पीएम के बराबर हो जाएगा। 2012 तक शिवराज सिंह एवं मोदी साहेब दोनों पीएम की रेस में बराबरी पर थे। किन्तु मोदी साहेब को पेड मीडिया ने बेतहाशा कवरेज देना शुरू किया और सिर्फ 6 महीने में मोदी साहेब के पक्ष में देश व्यापी लहर खड़ी हो गयी। इसी तरह अभी पिछले 1 वर्ष से उन्होंने अमित शाह को विस्फोटक मीडिया कवरेज देना शुरू किया है, जिससे उनका कद प्रधानमंत्री के बराबर हो गया है। . कृपया इस बात पर ध्यान दें, मेरा बिंदु यह नहीं है कि भारत के नेता वगेरह अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों के एजेंट या गुलाम है। दरअसल, पेड मीडिया के प्रायोजक किसी नेता वगेरह को बाध्य नहीं करते कि वे उनके निर्देशों का पालन करें। किन्तु जो नेता उनके एजेंडे के खिलाफ काम करता है, वे उसे मीडिया कवरेज नहीं देते, लेकिन उस नेता को ज्यादा कवरेज देते है जो उनके एजेंडे को आगे बढाने के लिए संजीदगी से काम कर रहा है। . चूंकि पेड मीडिया के पास भारत का सबसे बड़ा वोट बैंक है, अत: जिन नेताओं को आगे बढ़ना होता है वे पेड मीडिया का सहयोग लेने के लिए खुद ही उनकी तरफ जाना शुरू कर देते है। और बदले में पेड मीडिया द्वारा इस तरह दर्शाया जाता है कि नेताजी कंट्रोल कर रहे है !! . यहाँ इस बात को समझना जरुरी है कि, इस बात से कोई मतलब नहीं होता कि किसी नेता या व्यक्ति को नकारत्मक कवरेज दिया जा रहा है या सकारात्मक। असल में जो रिंग के नियमो का पालन नहीं करता उसे रिंग में उतारा ही नहीं जाता है। मतलब पेड मीडिया उनका फोटो तक नहीं दिखाएगा, इंटरव्यू तो बहुत आगे की बात है। . असल में पेड मीडिया पार्टियों के नेता उकसाऊ बयान इसीलिए दे रहे है क्योंकि उन्हें अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों ने आश्वस्त किया है कि जज उन्हें सजा नहीं देगा, और वे जो मर्जी सार्वजनिक रूप से बोल सकते है। टीवी चेनलो का इस्तेमाल भी वे इसी तरीके से कर रहे है। जो आदमी तमीज की बात करेगा ये लोग उसे टीवी पर नहीं लायेंगे। ये उस आदमी को टीवी पर लाते है जो इंधन डाले। और नेताओं को भी यह निर्देश दिए गए है कि यदि वे इंधन डालने वाले बयान देंगे तो उन्हें कवरेज दिया जाएगा। तो अब यह एक सिलसिला चल रहा है, जिस पर कोई नियंत्रण नहीं है। . एक उदाहरण अजमेर शरीफ के सदर दीवान सैयद जेनुल हुसैन चिश्ती का देखिये : . (a) जब धारा 370 ख़त्म की गयी तो इन्होने इसका समर्थन किया और मोदी-शाह को बधाई भेजी थी - Ajmer Sharif Dargah Dewan Hails Scrapping of Article 370, Congratulates Modi, Amit Shah . (b) उन्होंने इंस्टेंट ट्रिपल तलाक को केंसल करने के मोदी साहेब के फैसले का भी समर्थन किया और कहा कि ट्रिपल तलाक शरियत के खिलाफ है – Triple talaq against Sharia, Muslims should refrain from eating cow meat: Dewan Ajmer Syed Zainul Abedin Ali Khan - Shafaqna India | Indian Shia News Agency . (c) उन्होंने मुस्लिमो से अपील की कि उन्हें हिन्दुओ की आस्था का सम्मान करते हुए गौ-मांस खाना छोड़ देना चाहिए। दीवान ने सार्वजनिक सभा में यह शपथ भी ली कि, अब से वे एवं उनका परिवार गौ-मांस का भक्षण नहीं करेंगे - Imam of Ajmer Dargah urges Muslims to give up beef to end ‘communal hatred’ in India . (d) उन्होंने प्रेस रिलीज जारी की कि, CAA से भारतीय मुस्लिमों को डरने की जरूरत नहीं है, और उन्हें इसका विरोध नहीं करना चाहिए - CAA, NRC not against Muslims: Ajmer dargah dewan | Jaipur News - Times of India . ( ओवेसी ने प्रतिक्रिया दी कि, अजमेर दरगाह का दीवान मुस्लिमो की आवाज नहीं है, और उनके बयान का कोई मतलब नहीं !! उन पर बयान बदलने का दबाव डाला गया और 5 दिन बाद सभी तरफ से प्रेशर बनने पर दरगाह के दीवान को अपना स्टेंड बदल दिया - Dargah Dewan takes U-turn on CAA | Ajmer News - Times of India) . मैं यहाँ ये रेखांकित कर रहा हूँ कि, चूंकि यह इमाम विष वमन नहीं कर रहा है, और हमेशा तनाव कम करने की बात करता है अत: आपने अब तक टीवी चेनल पर इस आदमी के इंटरव्यू नहीं देखें है। . यदि ये अपनी लाइन बदल देते है तो आप इन्हें भी पेड मीडिया में देखने लगेंगे, और या जब इन्हें पेड मीडिया कवरेज देने लगेगा तो ये भी अपनी लाइन बदल लेंगे !! . और इस बात पर ध्यान दें कि पेड रविश कुमार भी पेड मीडिया का अंग है, अत: वे भी ऐसे लोगो को ही टीवी पर लायेंगे जो इसमें इंधन डाल सके। फर्क यह है कि पेड रविश कुमार हिन्दू-मुस्लिम तनाव भड़काने का काम इतनी सफाई और सौम्यता से करते है कि आपको इसका एहसास नहीं होता। . और हिन्दू-मुस्लिम में ऐसे सैंकड़ो धार्मिक-राजनैतिक प्रतिनिधि है जो पेड मीडिया के एजेंडे को आगे नहीं बढ़ा रहे है, अत: आप उन्हें पेड मीडिया में नहीं देखते। इस तरह ज्यादातर नागरिको के पास हमेशा एक तरफ़ा सूचनाए होती है, और तब पेड मीडिया करोड़ो लोगो में यह कॉमन नोलेज बना पाता है कि, भारत के सभी मुसलमान CAA, NRC का विरोध कर रहे है !! और फिर अपने चारो तरफ आप इसी नेरेटिव की जुगाली देखते है !! . दरअसल वे पेड मीडिया के माध्यम से कुछ 500-700 राजनेताओं, अभिनेताओं, इमामों, धर्म गुरुओ, बुद्धिजीवियों का इस्तेमाल करके 135 करोड़ के प्रतिनिधित्व का शोशा खड़ा कर देते है। पूरा देश इन्हें देखता है, और पेड मीडिया से फीडिंग लेने वाले लोग इसी लाइन को पकड़ कर सोशल मीडिया पर भी यही सब लिखते है। . इस तरह पेड मीडिया पर बनाये गए माहौल का रिफ्लेक्शन सोशल मीडिया पर भी आ जाता है। क्योंकि जो लोग सोशल मीडिया पर लिखते-बोलते है वे भी “अपनी राय” बनाने के लिए पेड मीडिया द्वारा दी गयी सूचनाओं पर निर्भर है। . (4) अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक भारत में सिविल वॉर क्यों शुरू करना चाहते है ? . अमेरिकी-ब्रिटिश धनिक ईरान को ख़त्म करने में भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल करना चाहते है। यदि आज ईरान एवं अमेरिका में युद्ध होता है तो ऐसी कोई वजह नहीं कि हम अमेरिका को अपनी सैनिक एवं जमीन का इस्तेमाल करने दे। ज्यादातर नागरिक कहेंगे कि हमारी ईरान से कोई दुश्मनी नहीं है, अत: ईरान Vs अमेरिका के युद्ध से हमें कोई लेना देना भी नहीं है। . किन्तु यदि भारत में हिन्दू-मुस्लिम सिविल वॉर शुरू हो जाता है तो अमेरिका भारत को आसानी से युद्ध में घसीट सकता है। वैसी हालत में अमेरिका के फेवर में दो स्थितियां उत्पन्न होगी : जब भारत में हिन्दू-मुस्लिम वॉर शुरू होगा तो अमेरिका ईरान पर हमला करेगा और तब भारतीय हिन्दू ईरान के खिलाफ अपनी सेना भेजने को तैयार हो जायेंगे। तब अमेरिका भारत का इस्तेमाल करके ईरान+चीन को ख़तम कर सकता है। गृह युद्ध शुरू होने पर सभी इस्लामिक मुल्क एंटी-इंडिया हो जायेंगे और ज्यादातर सम्भावना है कि इस्लामिक देश भारत पर हमला करें। भारत इस स्थिति से अकेले निपट नहीं सकता। अत: अब अमेरिका भारत को “बचाने” आयेगा। और फिर भारत की सेना एवं संसाधनों का इस्तेमाल करके पहले इस्लामिक देशो को ख़तम करेगा और फिर भारत का अधिग्रहण कर लेगा। . 2013 में रिकालिस्ट राहुल चिमनभाई मेहता ने अपने एक लेख में यह सम्भावना व्यक्त की थी कि जब अमेरिका ईरान पर हमला करेगा तो उसके ठीक 6 महीने पहले मोदी साहेब एक के बाद एक एंटी-इस्लामिस्ट क़ानून छापना शुरू करेंगे। Narendra Modi vs the Dynasty: Contrasting Ideas of India 2013 में लिखे गए पोस्ट का स्क्रीन शॉट : . हिन्दी अनुवाद : अब बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक मोदी साहेब के सामने 3 शर्तें रखेंगे : बीजेपी में छद्म सेकुलर, एंटी नेशनल, एंटी हिन्दू, एंटी स्वदेशी, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के समर्थक एवं मिशनरीज के समर्थको को टिकेट देना जब अमेरिका ईरान पर हमला करना तय करे तो हमले के 6 महीने पहले एंटी-इस्लामिस्ट आयटम जैसे – धारा 370, यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड (TTT etc), राम जन्म भूमि देवालय आदि को लागू करना, अन्यथा नहीं। भारत में मिशनरीज को विस्तार करने देना यदि मोदी साहेब ये शर्ते मान लेते है तो बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के मालिक आम आदमी पार्टी के कवरेज में कटौती कर देंगे, वरना नहीं। . खंड अ का सार : इस खंड में मैंने हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ने का कारण बताया है, जो कि मेरे अनुमान पर आधारित है। किसी अन्य व्यक्ति का अनुमान इस बारे में अलग हो सकता है। मेरा मानना है कि, भारत में हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ना अमेरिकी-ब्रिटिश हितों के अनुकूल है। और यदि यह उनके हितो के अनुकूल है तो उनके पास ये वास्तविक ताकत है कि वे भारत में हिन्दू-मुस्लिम तनाव घटा बढ़ा सके और अपनी जरूरत के अनुसार भारत के 3–4 टुकड़े कर सके। . भारत सरकार की ख़ुफ़िया एजेंसिया एवं असम के मुख्यमंत्री 2014 से यह रिपोर्ट कर रहे है कि अल कायदा+आईएसआई असम में अपने कैम्प चला रहे है और पाकिस्तान बांग्लादेशियों एवं रोहिंग्यो को बंदूक बनाना सिखाने के लिए मदद कर रहा है। . ISI, Al Qaeda plan to repeat 1990s Kashmir in Assam - The Sunday Guardian Live . Al Qaeda trying to set up base in Assam: Chief Minister Tarun Gogoi . मतलब मेरे मानने में यदि वे ऐसा चाहते है तो उनके पास यह करने की क्षमता है, और पेड मीडिया में नजर आने वाला भारत का कोई नेता एवं कोई भी पार्टी उन्हें ऐसा करने से रोक नहीं सकती। दरअसल वे उनके हितो की दिशा में ही काम करेंगे !! . अगले खंड में मैंने समाधान बताया है, जिसका ऊपर दिए गए खंड से कोई लेना देना नहीं है। इस समस्या की वजह जो भी हो निचे दी गयी इबारतें समाधान कर देगी। मतलब, यदि आपको लगता है कि - यह सारा तनाव पेड रविश कुमार, वारिस पठान, ओवेसी आदि फैला रहे है तो भी इसका समाधान हो जाएगा, और यदि आपको लगता है कि मोदी-योगी-शाह इसके लिए जिम्मेदार है, तो भी इस समस्या का समाधान हो जाएगा। . खंड ब ; समाधान . (1) कौनसी इबारते गेजेट में छापकर हिन्दू-मुस्लिम तनाव को कम किया जा सकता है ? . ऊपर मैंने जो भी विवरण दिए है उनमें कुछ तथ्य एवं कुछ मेरी धारणाएं शामिल है। अत: आप इसे खारिज कर सकते है। कारण जो भी रहे हो किन्तु यह एक सच्चाई है कि भारत में हिन्दू-मुस्लिम तनाव लगातार बढ़ रहा है, और यदि इसे रोका नहीं गया तो भारत में हालात हिंसक हो सकते है। निचे मैंने 4 क़ानून बताए है, जिन्हें गेजेट में छापने से हिन्दू-मुस्लिम तनाव को रोका जा सकता है। . (1.1) जूरी कोर्ट : जजों की भूमिका यहाँ सबसे महत्त्वपूर्ण है। पिछले 30 साल में आप नोटिस करें कि भ्रष्ट जजों ने हिन्दू-मुस्लिम तनाव भड़काने के लिए उकसाऊ बयान देने वाले कितने नेताओं को सजा दी है — शून्य !! और पिछले 30 साल में हुए किसी भी प्रकार के दंगे में कितने लोगो को सजा हुयी है – लगभग शून्य !! . इसके अलावा हर आदमी को भी यह छूट दे दी है कि वह जो मर्जी हो वैसे अलगाव वादी, उकसाने वाले, हिंसा भडकाने वाले वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल सकता है। तो इधर से भी उन्होंने दड़बा खोल दिया है। मतलब हम एक ज्वालामुखी के मुहाने पर बैठे है, सिर्फ एक ट्रिगर से यह विस्फोट होने शुरू हो जायेंगे। और इसमें निर्णायक मोड़ तब आएगा जब वे हथियार भेजना शुरू करेंगे। . मेरे विचार में अदालतें सुधारने का क़ानून सबसे ज्यादा जरुरी है, और यह क़ानून हमें तत्काल चाहिए। अदालतें सुधारने के लिए मेरे 2 प्रस्ताव है : जूरी कोर्ट की स्थापना और जजों पर वोट वापसी। . जूरी कोर्ट के गेजेट में आने से अगले दिन ही उकसाने और इंधन डालने के इस पूरे सर्कस का अंत हो जाएगा। यदि हमें हिन्दू-मुस्लिम तनाव को तत्काल कम करना है तो यह सबसे जरुरी क़ानून है। जूरी कोर्ट के प्रस्तावित क़ानून के गेजेट में आने कैसे एकदम से हिन्दू-मुस्लिम तनाव बढ़ना रुक जाएगा इस बारे में अधिक जानकारी के लिए यह जवाब पढ़ें – . विशेष आग्रह : जिन लोगो के पास पुलिस एवं अदालतें सुधारने के लिए बेहतर क़ानून है वे कृपया मुझे सूचित करें। यदि उनके प्रस्ताव बेहतर हुए तो मैं उनके प्रस्तावों का समर्थन

Imaran

मोहब्बत की है तुझसे, कोई मज़ाक नहीं, हर बात में तेरा जिक्र, ये इत्तेफाक नहीं। तेरे लिए तो जान भी हाजिर है मेरी, ये इश्क है मेरा, कोई ख्वाब नहीं। 💞imran 💞

Pravin Bhalagama

|| અંતિમ ફરિયાદ || જેમ હુ યાદ કરુ છું એને, એમ એ પણ કોઈક ને રોજ યાદ કરે છે, હુ ખુશી માંગુ છું એની, તો બીજાને યાદ કરી દુઃખમાં જીવ્યા કરે છે લખજે એને નસીબમાં તુ મારા, હુ ખુશ રાખીશ એને જીવનભર ! માધવ બનીશ હુ— એ વ્યક્તિ એના માટે જેના ગુમાવ્યાની રોજ તને એ ફરિયાદ કરે છે. જેના માટે રાતોના હુ ઉજાગરા કરુ છું, મારા પોતાના આત્મ સન્માનના, હુ મારી જાતે ધજાગરા કરુ છું, કરુ છું યાદ પળ પળ એને હુ, બસ એક ઝલક અમથી જોવા એની બસ— કદાચ આ એક છેલ્લી અરજ ભગવાન જે હુ, તારા મંદિરીયે કરુ છું. સાથે હસ્યા 'તા, સાથે રડ્યા 'તા મને એકધારે યાદ છે, જો ગુમાવ્યું એ વ્યક્તિને, તો જાણે જીવન આખુ બરબાદ છે, કમોતે મરુ કે મરુ છેલ્લા શ્વાસ ભરીને બાકી તને જેમ ઠીક લાગે એમ, મને તારા પર પૂરો વિશ્વાસ છે. -> પ્રવીણ ભલગામા ( માધવની કલમ )

kattupaya s

Good evening friends.. have a nice time.

kattupaya s

என்னுடைய சிறுகதை "அந்தி மாலை" matrubharti யில் வருகிற 24/3/26 அன்று வெளியாக உள்ளது. அனைவரும் தவறாமல் வாசிக்க வேண்டுகிறேன். தங்கள் அன்புக்கும் ஆதரவுக்கும் நன்றி.

kattupaya s

One of my short story "anthimaalai" will going to be published on matrubharti by 24/3/26.please read the same and expecting your support and love.

SAYRI K I N G

Ishq hai to zahir kar, bana ke chai haazir kar... SAYRI King Adrak daal ya daal ilaychi, kutkar apni 'Mohabbat' bhi shamil kar..!!

Ritik

अभी का सिचुएशन देख लगता है इंसान की जिंदगी का कोई मूल्य नहीं है इसलिए अच्छे से एक एक दिन को एन्जॉय करें किसी से कोई दुश्मन है तो खत्म करे कोई लाइफ में आगे बढ़ रहा है उसे सपोर्ट करे और आखिरी हो सके नॉन वेज से त्याग दे

Ajit

😭😭😭😭🙏🙏🙏🙏

Kiran Kumar

Khali Ghar Baithe Rehne se accha hai ki iss tarah ki jobs try kare taki Experience mile aur logo se baat kare isse Communication skill badhane me madad milti hai

RM

कोई पूछे तो भी तेरे किस्से बयाँ नहीं करते.. हम अपने दिल की बातें यहाँ-वहाँ नहीं करते…

Ajit

🙏🙏🙏😭😭😭

RM

ना समझ हो जाती हूँ उसके सामने मैं, इस उम्मीद से कि बात लंबी चलेगी!!

RM

जो बंधन का आदी हो जाए उसे आजादी भी सजा सी लगती है.....

Mona Ghelani

સાચું ને.....

Raju kumar Chaudhary

मन की चमक video link https://youtube.com/@rajufilmyjunction?si=cCmXX87Yn7XPtluE

Chaitanya Joshi

મારા હાથમાંથી દાણા લૈ જતી એ ચકલી હતી. મારી નજીક‌ આવી ચીં ચીં કરતી એ ચકલી હતી એનું આગમન રોજરોજ મને ‌હરખાવતુ હંમેશા, જમતીવેળા મારી નજીક‌ ફરકતી એ ચકલી ‌હતી. દાણા વેરુ મારી ફળીમાં તો‌ સૌથી પહેલાં આવતી, રખેને મને ‌હોય એ‌ ઓળખતી એ ચકલી ‌હતી. રાશન કાર્ડમાં નામ‌ નથી એટલું જ બાકી ‌છેને, ઘરના સભ્યની જેમ જ‌ વર્તતી એ ચકલી હતી. આવી ક્યારેક સમૂહમાં ઘરને‌ ગજાવી મૂકનારી પક્ષી માનવનું ઐક્ય જે સાધતી એ ચકલી હતી. -ચૈતન્ય જોષી 'દિપક 'પોરબંદર.

Anup Gajare

"धकेली गई बूंद" ____________________________________________________ हल्की गिरती बूंदे थामती है, हाथ बारिश का मौसम ठंड से भरा हल्की गर्मी में एक बूंद की तरह गुम हुआ जमीन की सतह पर। नीचे गंदगी से भरी नाली में बूंद काली गुड़िया की तरह लिखती है बारिश को खत। पहले धूल गैस के कण फिर ऑक्सीजन के पीछे हाइड्रोजन में घुलती हुई वे पहुंची थी कोठे पर। कितने कस्टमर देखे उसने कम उम्र में बूंद काली मिर्च की तरह सिकुड़ती गई दिन ब दिन। रात के बादल को घूरते हुए कमरे की खिड़की से चांद बेरुखा ही नजर आता रहा घायल बूंद उसके कफ़न को जानती थी। काले आसमान में सियाह चांद पर ओढ़े सफेद धब्बे से कफ़न को बूंद ही जानती थी। तारों के अनंत सृजन को उसने घटित होते हुए अपनी कोमल नजरों से देखा था। निर्माण का गीत लिखने से पहले बूंद का हिस्सा बनाया गया था। उसने अपने जन्मदाता को पैनी मासूम भरी आंखों से आखरी बार कब देखा वह भूल गई। वे बूढ़े इंसान को प्यासे कुएं के पास मंडराते हुए जानती रही। नाली के बाद मरघट के सन्नाटे में उसे मुर्दे के मुख में डाला गया। डुबकी लगाने से पहले मंत्र के हर अक्षर को उसने सुना था। अपने वजूद को इस तरह नीलाम होते हुए भी कोई अपराध उससे न बना। एक सहमी नदी में मछुवारों ने किसी मछली के पेट से बूंद को निकाला। बाहर आते ही उसने डूबते सूरज को गालियां नहीं दी। उसकी बाहों में दम तोड़ते पंछी की आखरी पुकार उसने भी सुनी थी। भाप बनते हुए उसने पीछे मुड़कर देखा था एक ही प्रार्थना उसने गाई की फिर कभी वह नीले ग्रह का कोई हिस्सा नहीं होना चाहती उसे मिटाया जाए किसी पेंसिल से बने वृत्ताकार चित्र की तरह। भाप की हल्की देह में घुलते हुए भी उसने अपने पुराने घावों को पूरी तरह छोड़ा नहीं था। आसमान की ऊँचाई में वह फिर से शुद्ध कही गई जैसे पाप का कोई इतिहास ऊपर चढ़ते ही मिट जाता हो। लेकिन उसे याद था— नाली की सड़ांध, कोठे की सीलन, और मरघट का ठंडा मौन। बादलों की भीड़ में वह अकेली ही रही हर सफेद फाहे में उसे किसी कफ़न की सिलवट दिखती थी। हवा ने उसे सहलाया नहीं बस धकेला एक और जन्म की ओर। फिर से गिरना था उसे— किसी खेत में किसी शहर में या फिर किसी और बंद कमरे में जहाँ खिड़की से दिखता चाँद फिर वही बेरुखा चेहरा लिए खड़ा हो। उसने एक क्षण को खुद को रोकना चाहा बिखर जाना चाहा बादल के भीतर ही किसी अधूरी स्मृति की तरह। पर नियमों के आगे प्रार्थनाएँ अक्सर छोटी पड़ जाती हैं। गिरते हुए उसने पहली बार आसमान को गाली दी— धीरे, बिना आवाज़ के। नीचे एक बच्चा अपनी हथेली फैलाए बारिश को पकड़ने की कोशिश में था वह उसकी त्वचा पर गिरी और कुछ पल के लिए उसे लगा शायद इस बार वह गंदी नहीं होगी। पर हथेली भी आखिरकार उसी दुनिया का हिस्सा थी। वह लुढ़की रेखाओं के बीच से जीवन रेखा, भाग्य रेखा, सबको पार करती हुई फिर जमीन पर आ मिली। इस बार नाली तक पहुँचने से पहले उसने खुद को धूल में रगड़ लिया जैसे कोई स्मृति जानबूझकर खुद को मिटाती हो। सूरज ऊपर से हँस रहा था उसे पता था अंत क्या होगा। और जब वह फिर से भाप बनकर उठी तो इस बार उसने कोई प्रार्थना नहीं की। सिर्फ एक खालीपन था— इतना गहरा कि उसमें न तो जन्म बचा था न मृत्यु। बस एक वृत्त था जिसे कोई मिटा नहीं रहा था और वह बार-बार उसी पर खींची जा रही थी। _____________________________________________

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Dada Bhagwan

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Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

जिन्दगी मे हम जितना परेशनियो से भागते है । परेशानी उतना ज्यादा पीछा करती है।। - Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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शादी के बीस साल बाद ' शादी वाला ब्लाउज देखकर लगता है ये फिर से मेरे फिट आ जाये - Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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मुझे मेरा स्वाभिमान झुकने नही देता। - Nandini Agarwal Apne Kalam Sein

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