Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
Narayan
तुमसे जो मिले थे हम, वो साल ना भूले हैं............💕
धड़कन का हुआ था जो, वो हाल ना भूले हैं!........💕
रंग उतर गया कबका, तुमने जो लगाया था..........💕
हाथों की छुअन लेकिन, मेरे गाल ना भूले हैं!!......💕
Vishakha Mothiya
Stepwell | વાવ
માનવ સભ્યતાના જન્મ - વિકાસમાં કુદરતી સંસાધનનો અમૂલ્ય સ્ત્રોત એવા જળ એટલે કે પાણીએ બહુ જ મહત્ત્વનો ભાગ ભજવ્યો છે. દરેક સભ્યતાઓ નદીને કિનારેથી જ જન્મી,વિકસી છે,એટલા માટે જ જળને જીવન તેમજ માનવીઓની જીવાદોરી કહેવામાં આવી છે. પ્રાચીન સભ્યતાથી લઈને અત્યાર સુધી જેટલા પણ રાજવંશજો થયા એમાં જળ વ્યવસ્થાપન હંમેશાં મોખરે રહ્યું છે. જળ સંગ્રહ સ્થાપત્યોમાં વાવનું નામ આગળ પડતું લેવામાં આવે છે એનું કારણ એની દીવાલો પર કરવામાં આવેલ મંત્રમુગ્ધ કરી દે એવું કોતરણીકામ. તો ચાલો જાણીએ વાવ વિશે સરળતાથી, સાથે જાણીશું તેની સંરચના, અમુક પ્રખ્યાત વાવ તેમજ વિશેષ બાબતો વિશે.
વાંચવા અહીં ક્લિક કરો - https://vishakhainfo.wordpress.com/2026/03/02/stepwell/
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Dhamak
ફાગુન કા યે રંગ હૈ, મન મેં પ્રેમ કા ઉજાસ,
બૈર-ઝહેર કો હોમ કર, મનાઓ સ્નેહ કા આભાસ;
કેસૂડે કે કૈફ મેં, ભીગે હૈં સબ ખુશહાલ,
હોલી કે ઇસ પર્વ મેં, ઉડ રહા પ્રેમ કા ગુલાલ."
ઢમક
Shailesh Joshi
જાણો કોઈપણ વ્યક્તિની
30 વર્ષ પછીની બાકીની જીંદગી કેવી હશે ? કે પછી કેવી જશે ? નો અંદાજ લગાવવાની સરળ રીત.
આનો જવાબ જાણવાનો
મોટામાંમોટો, અતિ મહત્વનો,
અને મુખ્ય આધાર એ જ કે,
કોઈપણ વ્યક્તિની ઉંમર
30 વર્ષની થાય,
ત્યાં સુધીની જીંદગી,
એ કેવી રીતે જીવ્યા છે ?
એની ઉપર હોય છે.
પછી એ વ્યક્તિ સ્ત્રી હોય, કે પુરુષ, એનાથી ઝાઝો ફરક નથી પડતો.
jighnasa solanki
होली की भांग पीने के बाद की
हमारी कन्फ्यूजन।
चाहे कितना भी सर खूजा लो,
ऐसा ही दिखता है।
🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣
Rameshvar Gadiya
तेरी मुस्कान से शुरू, तेरी हंसी पे खत्म,
मेरी हर सुबह तेरे नाम, मेरी हर शाम तेरे संग।
Raju kumar Chaudhary
अंधी परी और भिखारी का रहस्य

एक पिता अपनी अंधी बेटी को बोझ समझकर एक भिखारी से उसका विवाह कर देता है।
लेकिन उस अंधी लड़की को नहीं पता कि उसकी किस्मत जल्द ही एक अद्भुत मोड़ लेने वाली है।
आयशा ने कभी दुनिया को देखा नहीं था,
लेकिन उसकी कठोरता वह हर साँस के साथ महसूस करती थी।
वह जन्म से अंधी थी, एक ऐसे परिवार में जहाँ सुंदरता को ही सब कुछ माना जाता था। उसकी दो बहनें अपनी बड़ी-बड़ी आँखों और सलीकेदार रूप के लिए सराही जाती थीं, जबकि आयशा एक बोझ थी घर के पीछे के कमरों में छिपा दी गई एक शर्मनाक सच्चाई।
जब वह सिर्फ पाँच साल की थी, उसकी माँ का इंतकाल हो गया। उसके बाद उसके पिता बदल गए। वे कड़वे, रूखे और बेरहम हो गए खासकर उसके साथ। वे कभी उसे नाम से नहीं बुलाते थे; बस कहते, “वह चीज़।”
खाने के समय उसे मेज़ पर बैठने की इजाज़त नहीं थी, और मेहमान आते तो उसे घर के अंदर बंद कर दिया जाता। उनका मानना था कि वह अपशकुन है।
जब आयशा इक्कीस साल की हुई, उसके पिता ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने उसके पहले से टूटे दिल को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया।
एक सुबह वह उसके छोटे से कमरे में आए, जहाँ आयशा चुपचाप ब्रेल में लिखी एक पुरानी किताब पर उँगलियाँ फेर रही थी। उन्होंने उसके घुटनों पर कपड़े का एक मुड़ा हुआ टुकड़ा फेंक दिया।
कल तुम्हारी शादी है उन्होंने ठंडे स्वर में कहा।
आयशा सन्न रह गई। शब्द समझ में ही नहीं आए। शादी? किससे?
मंदिर के पास रहने वाला एक भिखारी है पिता बोले। तुम अंधी हो, वह गरीब है। बिल्कुल सही जोड़ी।
उसका चेहरा सुन्न पड़ गया। वह चीखना चाहती थी, लेकिन आवाज़ गले में ही मर गई।
उसके पास कभी कोई विकल्प नहीं रहा था।
अगले दिन जल्दी-जल्दी एक सादी सी शादी कर दी गई।
उसने अपने पति का चेहरा कभी नहीं देखा और किसी ने उसे बताने की हिम्मत भी नहीं की। पिता ने उसे उस आदमी की ओर धकेला और आदेश दिया कि वह उसका हाथ पकड़ ले। आयशा ने आज्ञाकारी परछाईं की तरह ऐसा कर लिया।
लोग आपस में हँस रहे थे।
अंधी लड़की और भिखारी।
शादी के बाद पिता ने उसके हाथ में कपड़ों की एक छोटी सी पोटली दी और फिर उसे उसी आदमी की ओर धकेल दिया।
अब यह तुम्हारी ज़िम्मेदारी है कहकर वे बिना पीछे देखे चले गए।
भिखारी का नाम इरफ़ान था। वह उसे चुपचाप कच्चे रास्ते से ले गया। काफी देर तक उसने कुछ नहीं कहा।
वे गाँव के किनारे बनी एक जर्जर सी झोपड़ी में पहुँचे। वहाँ मिट्टी और लकड़ी के धुएँ की गंध थी।
यह कोई खास जगह नहीं है इरफ़ान ने नरम आवाज़ में कहा लेकिन यहाँ तुम सुरक्षित रहोगी।
आयशा फटे हुए चटाई पर बैठ गई, आँसू रोकते हुए।
यही अब उसकी ज़िंदगी थी: एक अंधी लड़की, एक भिखारी की पत्नी, मिट्टी की झोपड़ी में कैद।
लेकिन उसी रात कुछ अजीब हुआ।
इरफ़ान ने अपने हाथों से उसके लिए चाय बनाई बहुत सावधानी से। अपनी इकलौती रज़ाई उसे दे दी और खुद दरवाज़े के पास लेट गया, जैसे कोई पहरेदार अपनी रानी की रखवाली कर रहा हो।
वह उससे ऐसे बात करता था जैसे उसकी कोई कीमत हो उससे पूछता कि उसे कौन-सी कहानियाँ पसंद हैं, उसके सपने क्या हैं, कौन-सा खाना उसे खुश करता है।
किसी ने उससे पहले कभी ये सवाल नहीं पूछे थे।
दिन हफ्तों में बदल गए।
हर सुबह इरफ़ान उसे नदी के घाट तक छोड़ता, रास्ते में सूरज, पक्षियों और पेड़ों का ऐसा वर्णन करता कि आयशा को लगता, जैसे वह उन्हें देख पा रही हो।
वह गुनगुनाता रहता जब वह कपड़े धोती, और रात को तारों और दूर-दराज़ की जगहों की कहानियाँ सुनाता।
कई सालों बाद आयशा हँसी।
धीरे-धीरे उसका दिल खुलने लगा।
और उस अजीब सी छोटी झोपड़ी में, कुछ अनहोनी हुई
आयशा को उससे प्यार हो गया।
एक शाम उसने उसका हाथ ढूँढते हुए धीमे से पूछा:
क्या तुम हमेशा से भिखारी थे?
वह कुछ पल चुप रहा।
नहीं उसने नरमी से कहा हमेशा नहीं।
और फिर कुछ नहीं बोला।
आयशा ने भी ज़ोर नहीं दिया।
लेकिन एक दिन…
वह अकेली सब्ज़ी खरीदने बाज़ार गई। इरफ़ान ने उसे रास्ता बहुत ध्यान से समझाया था, और उसने हर मोड़ याद कर लिया था।
लेकिन आधे रास्ते में किसी ने उसका हाथ ज़ोर से पकड़ लिया।
अंधी चूहिया! एक ज़हरीली आवाज़ फुफकारी।
यह उसकी बहन समीरा थी।
अभी तक ज़िंदा हो?
अब भी भिखारी की बीवी बनने का नाटक कर रही हो?
आयशा की आँखों से आँसू छलकने को थे, लेकिन उसने खुद को सँभाला।
मैं खुश हूँ उसने कहा।
समीरा हँस पड़ी कठोर, निर्दयी हँसी।
तुम्हें पता ही नहीं कि वह असल में क्या है।
वह कुछ भी नहीं है।
बिल्कुल तुम्हारी तरह।
फिर उसने कुछ ऐसा फुसफुसाया जिसने आयशा को अंदर तक तोड़ दिया:
वह भिखारी नहीं है, आयशा।
तुमसे सच छुपाया गया है।
आयशा लड़खड़ाते कदमों से घर लौटी घबराई हुई, उलझी हुई।
रात होने तक इंतज़ार किया। जब इरफ़ान लौटा, उसने इस बार दृढ़ स्वर में पूछा:
मुझे सच बताओ।
तुम असल में कौन हो?
इरफ़ान उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया, उसके हाथ थाम लिए।
तुम्हें यह अभी नहीं जानना चाहिए था उसने कहा लेकिन अब मैं तुमसे झूठ नहीं बोल सकता।
आयशा का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
इरफ़ान ने गहरी साँस ली…

PRASANG
નારી – શક્તિ અને સ્વાભિમાન
કોણ કહે એને અબળા,
શક્તિરૂપે એ નારી;
સહન, સાહસ, સ્વાભિમાન,
જગ પર ભારી એ નારી.
મૌનમાં પણ અર્થ ગુંજે,
નેત્રોમાં વિશ્વાસ ભરી;
ભય સામે અડગ ઊભી,
શૌર્ય ધારી એ નારી.
માતૃરૂપે જગત પોષે,
યોધ્ધા બની લડે નારી;
કરુણા ને ક્રાંતિ બન્ને,
હૈયે ધારિ એ નારી.
બંધન તોડી માર્ગ ઘડે,
પગલે પગલે ચેતના ભરી;
સમય બદલે પોતાના બળે,
હક્કદારી એ નારી.
ગર્વ છે આ ઓળખ પર આજે,
માનવતાની આ ભારી;
નમન તેને જે જગ ઉજાળે,
પ્રકાશમયી એ નારી.
પ્રસંગ
પ્રણયરાજ રણવીર
Raju kumar Chaudhary
“चोरी के आरोप में नौकरानी अकेली अदालत में पहुँची — तभी करोड़पति का बेटा खड़ा हुआ और बोला...”
दस साल से भी ज़्यादा समय तक सीमा हर सुबह सूरज उगने से पहले उठ जाती थी ताकि राजगोपाल परिवार के आलीशान बंगले की सफ़ाई कर सके।
वह संगमरमर के फ़र्श चमकाती, नाश्ता बनाती, और हर कमरे को दर्पण जैसा साफ़ रखती — इससे पहले कि कोई और जागे।
वह कभी शिकायत नहीं करती, कभी ज़्यादा नहीं माँगती — वह उस घर की मौन धड़कन थी।
सिर्फ़ छोटा आरव, परिवार का आठ साल का बेटा, उसे सच में देखता था।
वह उसके पीछे-पीछे घूमता, अपने सपनों और चित्रों की बातें करता, और उसकी कोमल कहानियों पर हँसता।
आरव के लिए, सीमा “नौकरानी” नहीं थी — वह ममता थी, सांत्वना थी — उसकी माँ जैसी जो अब नहीं थी।
लेकिन एक सुबह सब कुछ टूट गया।
परिवार का कीमती हीरे का ब्रोच गायब हो गया।
और किसी के कुछ कहने से पहले ही, दादी सविता देवी की ठंडी आवाज़ गूँजी —
“यही थी... नौकरानी!”
सीमा जम गई। “कृपया, सविता जी, मैं कभी ऐसा नहीं कर सकती…”
लेकिन उसके शब्दों का कोई असर नहीं हुआ।
कुछ ही घंटों में उसे निकाल दिया गया, उसका नाम बदनामी में डूब गया।
यहाँ तक कि राजेश, वो मालिक जिसके लिए वह वर्षों से वफ़ादारी से काम कर रही थी, अपनी माँ के दबाव में चुप रहा।
जब पुलिस उसे लेकर गई, तो पड़ोसी खिड़कियों से झाँकते रहे।
वही औरत जिसने इतने सालों तक उस घर को सँभाला — अब उसी पर चोरी का इल्ज़ाम।
कुछ दिन बाद, उसे अदालत का समन मिला।
न कोई वकील।
न पैसे।
न कोई सहारा।
लेकिन जब उसे लगा कि दुनिया उसे भूल गई है, दरवाज़े पर हल्की दस्तक हुई।
जब उसने दरवाज़ा खोला — वहाँ आरव खड़ा था, अपनी नन्ही हथेली में उनकी साथ की एक तस्वीर लिए हुए।
“दादी कहती हैं तुम बुरी हो,” उसने धीरे से कहा, “लेकिन मैं उन पर विश्वास नहीं करता।”
सीमा की आँखों में आँसू भर आए — उम्मीद की एक हल्की किरण चमकी।
लेकिन मुक़दमे की तारीख़ आ चुकी थी।
अदालत में प्रभावशाली लोग, चमकदार वकील, और ठंडी निगाहें होंगी।
सीमा के पास बस उसकी सच्चाई थी।
और तभी…
एक नन्ही आवाज़ ने अदालत की खामोशी तोड़ दी —
“रुको! उसने ऐसा नहीं किया!”
सबकी नज़रें मुड़ गईं।
एक छोटा लड़का खड़ा था, आँखों में आँसू लिए —
वो था आरव।
और जो अगला हुआ, उसने सबको हिला दिया…
👉 पूरी कहानी पढ़ने के लिए नीचे कमेंट में दिए गए लिंक पर क्लिक करें! 👇👇अदालत की खामोशी कुछ सेकंड के लिए जैसे ठहर गई। सबकी निगाहें उस छोटे लड़के आरव पर टिक गई थीं। उसने अपनी छोटी हथेली में वह तस्वीर पकड़ी हुई थी—जिसमें सीमा और वो दोनों मुस्कुरा रहे थे।
“सच यही है, जज साहब,” आरव ने हिम्मत करके कहा। “सीमा आंटी कभी चोरी नहीं करेंगी। वो हमारी मदद करती थीं, हमें प्यार करती थीं… और वो हमारे घर की रक्षक थीं। मैं वादा करता हूँ, जो सच है, वही कह रहा हूँ।”
कुछ वकील मुस्कराए, कुछ लोग अचंभित थे, लेकिन जज की आंखों में गंभीरता बनी रही।
सीमा ने कांपती आवाज़ में कहा, “महोदय, मैं बस अपना काम करती थी। मैंने कभी किसी की चीज़ नहीं ली। ये आरोप मेरे लिए बहुत भारी हैं…”
जज ने कोर्टरूम की खामोशी तोड़ते हुए कहा,
“सच्चाई सामने आनी ही चाहिए। अगर कोई झूठ बोलता है, उसे उसका परिणाम भुगतना होगा। हमें सबूत चाहिए।”
तभी, अदालत में एक वकील खड़ा हुआ—जो पहले सीमा के खिलाफ था। उसने धीरे से कहा,
“सचाई की ओर इशारा करने वाला सबूत सामने आ गया है। सीसीटीवी फुटेज और घर के स्टाफ के बयान ने साबित कर दिया है कि सीमा ने कभी चोरी नहीं की।”
सब लोग हल्का साँस छोड़ने लगे। सीमा की आँखों में आँसू थे, लेकिन इस बार ये राहत के थे।
आरव की छोटी मुस्कान ने उसकी दुनिया बदल दी।
जज ने निष्कर्ष सुनाते हुए कहा,
“सीमा जी, आप निर्दोष हैं। इस झूठे आरोप के लिए जिम्मेदार लोगों पर कानूनी कार्रवाई होगी। अदालत आपकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करेगी।”
सीमा ने थिरकते कदमों से आरव को गले लगाया। वह अपने दिल की थकान और डर को भूलकर रो पड़ी, लेकिन इस बार उसके आँसू खुशी के थे।
आरव ने कहा, “मैं जानता था आप सच्चाई बताएँगी… और सब ठीक हो जाएगा।”
सीमा ने हल्की हँसी के साथ कहा, “हाँ, आरव… सच हमेशा जीतता है।”
उस दिन अदालत में सिर्फ़ न्याय नहीं हुआ, बल्कि विश्वास, सच्चाई और निस्वार्थ प्यार की जीत भी हुई
Raju kumar Chaudhary
पति ने मुझे प्रमोशन पार्टी में नौकरानी बनाकर अपमानित किया… उसे क्या पता था कि उसी कंपनी की असली मालिक मैं हूँ!
महँगी शराब की तीखी खुशबू, आयातित इत्र की महक, और झूमरों की सुनहरी रोशनी से नहाया हुआ वह ग्रैंड बॉलरूम—हर चीज़ चीख-चीखकर बता रही थी कि आज रात किसी बहुत “खास” इंसान की है। दीवारों पर सजे क्रिस्टल ऐसे चमक रहे थे जैसे सितारे ज़मीन पर उतर आए हों। लाइव बैंड धीमी धुन बजा रहा था, और मेहमानों के हाथों में शैंपेन के गिलास जगमगा रहे थे।
यह रात थी राहुल की।
उसे अभी-अभी देश की प्रतिष्ठित कंपनी Apex Global Holdings में वाइस प्रेसिडेंट के पद पर प्रमोशन मिला था। बिज़नेस सर्कल में यह किसी ताजपोशी से कम नहीं था। उसके सहकर्मी, सीनियर मैनेजर्स, डायरेक्टर्स—सब उसे बधाई देने आए थे। हर कोई उसके कंधे थपथपा रहा था, जैसे उसने दुनिया जीत ली हो।
और मैं?
मैं उसी बॉलरूम के एक कोने में खड़ी थी… काली-सफेद मेड की वर्दी पहने।
मेरे हाथ में शैंपेन की ट्रे थी। एप्रन के कोने पर सॉस का दाग लगा था। पैरों में सस्ते जूते थे, जिनमें हील भी ठीक से नहीं थी। कोई मुझे देखकर अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता था कि मैं इस पार्टी से जुड़ी हूँ—सिवाय एक बात के।
मैं उसकी पत्नी हूँ।
पाँच साल से।
सुबह जब राहुल ने वह वर्दी मेरे हाथ में थमाई थी, उसकी आवाज़ में बनावटी नरमी थी।
“डियर, कैटरिंग स्टाफ कम पड़ गया है। बस आज रात के लिए मदद कर दो। मेरे बॉस बहुत स्ट्रिक्ट हैं। मैं इम्प्रेस करना चाहता हूँ। हमारे फ्यूचर के लिए है।”
हमारे फ्यूचर के लिए।
ये शब्द मैं पहले भी सुन चुकी थी। हर बार जब उसने मुझे अपने दोस्तों से “इंट्रोड्यूस” नहीं किया। हर बार जब उसने कहा, “तुम्हें इन हाई-प्रोफाइल पार्टियों में कम्फर्टेबल नहीं लगेगा।” हर बार जब उसने मेरे कपड़ों, मेरे बोलने के तरीके, मेरे साधारण परिवार का मज़ाक उड़ाया।
लेकिन मैंने हमेशा समझौता किया।
क्योंकि मैं उसे प्यार करती थी।
या शायद मैं उस इंसान को प्यार करती थी, जो मुझे लगा था कि वह है।
पार्टी शुरू हुई। मेहमानों की हँसी, ग्लासों की टकराहट, फ्लैशिंग कैमरे—सब कुछ परफेक्ट था। मैं ट्रे लेकर इधर-उधर घूम रही थी। कई लोगों ने मुझे ऐसे देखा जैसे मैं हवा हूँ। कुछ ने आदेश देने के अंदाज़ में उँगलियाँ चटकाईं।
“ए, शैंपेन।”
“यहाँ नैपकिन गिर गया है।”
“जल्दी करो।”
मैंने सिर झुकाकर सब किया।
फिर अचानक, बॉलरूम के बड़े दरवाज़े खुले।
सभी की नज़र उधर घूमी। और वहाँ… राहुल खड़ा था।
डार्क ब्लू टेलर्ड सूट में, बाल पीछे सेट किए हुए, चेहरे पर विजेता की मुस्कान। लेकिन वह अकेला नहीं था।
उसकी बाँह में हाथ डाले खड़ी थी एक औरत—लाल गाउन में, आत्मविश्वास से भरी, कैमरों की फ्लैश को एन्जॉय करती हुई। उसकी चाल में अधिकार था, उसकी मुस्कान में दावा।
प्रिया।
वह नाम जो मेरे मन में कई महीनों से ज़हर की तरह घुल रहा था। वह “कोलीग” जिसके साथ देर रात तक मीटिंग्स होती थीं। वह “प्रोजेक्ट पार्टनर” जिसके मैसेज आते ही राहुल का चेहरा बदल जाता था।
राहुल ने माइक उठाया।
“लेडीज़ एंड जेंटलमैन!” उसकी आवाज़ पूरे हॉल में गूँजी। “आज की रात सिर्फ प्रमोशन की नहीं है… मैं आपको अपनी सफलता की असली वजह से मिलवाना चाहता हूँ। मेरी इंस्पिरेशन। मेरी म्यूज़… प्रिया।”
तालियाँ गूँज उठीं।
मेरे कानों में शोर धुँधला पड़ गया।
मैंने ट्रे कसकर पकड़ी। साँस भीतर ही अटक गई। वह मुझे देख भी नहीं रहा था। जैसे मैं अस्तित्व में ही नहीं हूँ।
कुछ ही देर में वे दोनों मेहमानों के बीच से होते हुए मेरे सामने आ खड़े हुए। प्रिया ने मुझे सिर से पाँव तक देखा—एक तिरछी मुस्कान के साथ। उसने ट्रे से शैंपेन उठाई।
और “गलती से” आधी शैंपेन मेरे जूतों पर गिरा दी।
“ओह, सॉरी!” उसने नकली अफसोस जताया। “ट्रे ठीक से पकड़ा करो ना। साफ़ करो, कहीं राहुल फिसल न जाएँ।”
पास खड़े कुछ लोगों की हल्की हँसी मेरे कानों में चुभ गई।
राहुल ने बस इतना कहा, “छोड़ो ना बेबी, ये स्टाफ ऐसे ही होते हैं।”
स्टाफ।
मेरे अंदर कुछ टूट रहा था। लेकिन मैं झुकी रही।
“सॉरी, मैम,” मैंने धीमी आवाज़ में कहा।
और तभी—अचानक—संगीत धीमा पड़ गया।
हॉल में सन्नाटा छा गया।
किसी ने फुसफुसाया, “चेयरमैन आ गए…”
देश की बिज़नेस दुनिया का सबसे प्रभावशाली नाम। Vikram Sharma। वह शख्स जिसकी एक नज़र से लोगों के करियर बनते और बिगड़ते हैं।
राहुल तुरंत सीधा होकर उनकी ओर बढ़ा। उसके चेहरे पर चापलूसी की चमक लौट आई।
लेकिन चेयरमैन की नज़र… कहीं और टिकी थी।
सीधे… मेरी ओर।
👇👇पूरी कहानी नीचे कमेंट्स में है।👇�
Dr.Namrata Dharaviya
ખાલી ભારત માં જ હોલી છે
બાકી ન્યૂઝ જોવો
બધે દિવાળી જ છે
😜😜
- Dr.Namrata Dharaviya
Ashish jain
शीर्षक: वतन का रखवाला
"वतन की गोद में हम सब ने पायी एक जन्नत है,
शहादत और इबादत की ये पावन सी विरासत है।
लहू देकर जो सींचें गुलसिताँ को वो ही 'आशीष' हैं,
तिरंगे की बुलंदी ही हमारी सबसे बड़ी चाहत है।"
"जहाँ की गोद में हमने सुनहरी शाम देखी है,
जहाँ की मिट्टी में अपनी सुबह की शान देखी है।
वो जिसके ज़र्रे-ज़र्रे में वफ़ा का नूर बहता है,
उसी आग़ोश में हमने अपनी पहचान देखी है।
हिमालय सर उठा कर जिसके पहरे को खड़ा रहता,
समंदर पाँव धोने को जिसे बेताब है रहता।
जहाँ की सरज़मीं हर हाल में सरसब्ज़ रहती है,
वहाँ का बच्चा-बच्चा बस यही पैगाम है कहता।
लहू का आख़िरी कतरा वतन के नाम कर देंगे,
सजा कर सर पे खुशियों का नया ईनाम कर देंगे।
खड़ा हूँ सरहदों पर मैं दुआ का एक 'आशीष' बनकर,
तिरंगे की हिफाज़त में हम अपनी जान कर देंगे।"
क्या आप इस नज़्म में शहीदों की गाथा जोड़ना चाहेंगे या इसे नौजवानों के जोश पर ही केंद्रित रखना चाहेंगे?
"शहीदों की इबादत से ये हिंदुस्तान ज़िंदा है,
हवाओं में वफ़ा का आज भी अरमान ज़िंदा है।
गए जो खेल कर जानों पे वो लौटे नहीं लेकिन,
उन्हीं के दम से अपनी कौम का सम्मान ज़िंदा है।
वो जब निकले थे घर से, सर पे बांधा था कफ़न अपना,
वतन की आबरू पर वार दिया खिलता चमन अपना।
किसी की मांग का सिंदूर, किसी की गोद सूनी थी,
मगर आँच आने न दी, माँ का बचा रखा बदन अपना।
लिखा इतिहास को जिसने अपने सुर्ख लहू से ही,
बचाया मुल्क को जिसने हर एक दुश्मन और डूह से ही।
खड़ा है आज भी सरहद पे जो इक 'आशीष' बनकर,
निकाली जां है जिसने आज़ादी की रूह से ही।
सलामत है अगर ये मुल्क तो उन जांबाज़ वीरों से,
जिन्होंने जंग जीती मौत की तीखी लकीरों से।
झुकेंगे हम न तब तक, जब तलक है जोश बाक़ी,
आज़ाद हैं हम और रहेंगे आज़ाद जंजीरों से।"
उबलता खून रग में हो, तो फिर तूफ़ान आता है,
वतन के वास्ते मरना, बड़ा अहसान आता है।
न पूछो हाल वीरों का, कि जब वो जंग लड़ते हैं,
तो काँपे थर-थर दुश्मन, मौत का सामान आता है।
हिमालय की बुलंदी सा, इरादा ठोस रखते हैं,
उजाले के लिए हम, जुगनुओं का रोष रखते हैं।
सियाचीन की बर्फ़ों में, जहाँ सांसें भी जम जाएं,
वहाँ भी हम वतन की भक्ति का मदहोश रखते हैं।
ललकारें जब गूँजती हैं, गगन भी काँप जाता है,
शहीदों के लहू से ही, चमन ये मुस्कुराता है।
खड़ा है सरहदों पर जो बन कर एक 'आशीष',
उसी की जाँ-निसारी से तिरंगा जगमगाता है।
चढ़ा दो शीश चरणों में, ये मिट्टी मान माँगती है,
पिला दो खून दुश्मन को, ये धरती दान माँगती है।
उठा लो हाथ में परचम, दिखा दो अपनी ताक़त को,
हुकूमत हिन्द की अब, विश्व में पहचान माँगती है।
Adv. आशीष जैन
7055301422
Ashish jain
शनि निंदा स्तुति
रे निर्दयी, रे क्रूर दृष्टि, तू न्याय का कैसा ढोंग रचाए?
दीन-हीन को कुचल रहा, और पापियों को मौज दिखाए।
कौए जैसा रूप तेरा, और मन में कालिख छाई है,
मेरी हँसती-खेलती दुनिया, तूने नरक बनाई है।
चलता तू कछुए की चाल, पर दुख देने में बड़ा तेज है,
मेरे पसीने की कमाई पर, बिछाता काँटों की सेज है।
क्या बिगाड़ा था तेरा मैंने, जो इतनी कठोर सजा दी?
मेरे सपनों की अर्थी तूने, अपनों के हाथों सजवा दी।
ले दे ले भर-भर गालियाँ, जो तेरे मुख पर मैं मारूँ,
तेरी टेढ़ी नज़र के आगे, अब मैं कभी न हारूँ।
उच्च का होकर बैठा है, पर कर्म तेरे सब नीच हैं,
इंसानियत और पत्थर में, बस तू ही खड़ा बीच है।
अब छोड़ पीछा मेरा, या फिर काल बनकर आ जा,
या तो मेरा भाग्य बदल, या मेरा अस्तित्व खा जा।
थक गया हूँ मैं लड़ते-लड़ते, अब धैर्य मेरा टूटा है,
तुझ जैसे निर्दयी देव से, अब मेरा नाता छूटा है।
Adv. आशीष जैन
7055301422
इसके लाभ बहुत है शनि की निंदा जरूर करें जब शनि आपको परेशान करता है तब
Deepti Gurjar
हेडलाइन: क्या नफ़रत भी कभी प्यार का रास्ता बन सकती है? ❤️🔥
पोस्ट कंटेंट:
एक रूड और पत्थर दिल बॉस— विराज मल्होत्रा, जिसे सिर्फ जीतना आता है।
एक स्वाभिमानी और जज्बाती लड़की— काव्या, जिसके लिए उसका आत्म-सम्मान ही सब कुछ है।
जब काव्या ने अपना इस्तीफा विराज की मेज पर पटका, तो उसे लगा कि वह आज़ाद हो गई। पर उसे क्या पता था कि असली खेल तो अब शुरू होने वाला है!
"15 दिन मेरे घर पर, मेरी नज़रों के सामने... क्या काव्या विराज के छिपे हुए दर्द को पहचान पाएगी?"
👉 अभी पढ़िए मेरा नया उपन्यास: "इश्क़ और इस्तीफ़ा"
लेखक: दिप्ती गुर्जर
A singh
"ज़हर तो आपने पिया था नीलकंठ बनकर,
पर ये इश्क का ज़हर हमें धीरे-धीरे मार रहा है।
ऐ महादेव, थाम लीजिए हाथ मेरा,
क्योंकि अब ये दिल बार-बार हार रहा है।"
_ A Singh
Shailesh Joshi
આપણે માત્ર એક જીવ છીએ, ને સર્વે જીવોનો રખેવાળ શિવ છે.
અને આપણને સૌને પ્રભુનું કહેવું માત્ર એટલું જ છે કે,
જ્યારે તું તારી ચિંતા કરતો હોઈશ,
ત્યારે હું અન્યોની ચિંતા હણતો હોઈશ,
ને જેવી તું અન્યોની ચિંતા કરવાનું શરૂ કરીશ,
એજ ક્ષણથી
હું તારી ચિંતાઓને હણવાનું શરૂ કરીશ.
- Shailesh Joshi
A singh
"इश्क की राह में जब-जब दिल टूटा है,
दुनिया ने छोड़ा, पर महादेव ने हाथ पकड़ा है।"
"तड़प ही तो है जो इंसान को बदल देती है,
वो मौत ही क्या जो एक बार में आए,
सच्चा इश्क तो वो है जो हर पल महादेव की याद दिलाए।"
"जब दुनिया के धोखे से दम घुटने लगे,
तो बस एक बार 'महाकाल' पुकार लेना,
वो ज़हर पीने वाले ही जानते हैं,
कि तड़पते दिल को सुकून कैसे देना है।"
_ A Singh
A singh
जिसने इश्क़ में टूटना सीखा,
वही एक दिन सबसे ज्यादा संभलता है,
महादेव देर जरूर करते हैं,
पर इंसाफ़ हमेशा पूरा करते हैं। 🌸
_ A Singh
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
ઈચ્છાઓનું પહેલાં હૈયામાં સ્મશાન બને છે,
ત્યાર પછી જ કોઈ શાયર મહાન બને છે....
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
Dada Bhagwan
Do you know that if you do not react in a clash then the path to rise higher spiritually and in the relative world opens up?
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InkImagination
“वो मुझे मारना चाहता था…
पर किस्मत ने मुझे उसकी दीवानगी बना दिया।
‘Jo Mujhe Marna Chahata Tha’ — एक खतरनाक माफिया लव स्टोरी।
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Bhavesh Tejani
આંખોની પાંપણ થી પડતું ટપકું પોહંચે છે તમારા હૃદય સુધી,
તમને ક્યાં ખબર છે આ પ્રેમ સાચો છે તમારા માટે અનંત સુધી.
RM
मेहनत का रास्ता लंबा है,
लेकिन उसकी मंजिल बेहद खूबसूरत है,
इसलिए चलते रहो...
રોનક જોષી. રાહગીર
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હોળી પર્વ પર હ્રદયસ્પર્શી વાર્તા વાંચો મારા ફેસબુક પેજ પર લિંક ઉપર આપેલી છે.
Jyoti Gupta
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Imaran
दायरे से वो निकलता क्यों नहीं
ज़िंदगी के साथ चलता क्यों नहीं
बोझ-सी लगने लगी है ज़िदगी
ख्व़ाब एक आखों में पलता क्यों नहीं
कब तलक भागा फिरेगा खुद से वो
साथ आखिर अपने मिलता क्यों नहीं
👌imran 👌
AVTAAR
बेरोजगारी की महामारी
बैठे हैनिकंमे, बिना काम के
इज्जत तो मिलती नही,आश्वासन हैं नाम के सरकार भी क्या करे आवादी इतनी जादी है
अवादी के मुकाबलते नौकरी तो आधी है।
फसल होने वाली जमीन पर घर बनाऐंगे
अनाज के कमी का दोष सरकार पर लगाऐंगे।
आस-पड़ोस के तनों से
लड़को का जीवन हो जाता भारी
भारत की समस्या है बेरोजगारी
बेरोजगारी को भगाने के लिए
बढती अवादी को कमाना होगा
बेरोजगारी अगर कम नहीं हो रहीं भविष्य में
तो इसका कारण सरकार नही जमाना होगा
जब युवको को ताना देना बंद होगा
तभी तो उनका का हौसला बुलंद होगा
बुलंद हौसले के साथ बुलंद इरादे होंगे
न जाने फिर कौन क्या इतिहास रचेंगे।
जिंदगी में दुख भरे है, जिन्हें जिना भारी है
भारत की समस्या बेरोजगारी है।
RM
https://www.matrubharti.com/book/19989583/shri-radha-ji
Rameshvar Gadiya
मंडप सजा हुआ था। शहनाई की आवाज़ पूरे घर में गूंज रही थी। सबके चेहरों पर खुशी थी… सिवाय मेरे।
मैं लाल जोड़े में सजी थी, लेकिन दिल अंदर से टूटा हुआ था। आज मेरी शादी थी… लेकिन उस लड़के से नहीं, जिससे मैंने बचपन से प्यार किया था।
“दुल्हन जी, ज़रा मुस्कुरा दीजिए…” फोटोग्राफर ने कहा।
मैंने हल्की-सी मुस्कान देने की कोशिश की, मगर आँसू आँखों से ज़िद कर रहे थे।
सामने मंडप में बैठा था — अर्जुन सिंह राठौड़।
शहर का सबसे रौबदार, घमंडी और अमीर बिज़नेसमैन।
जिसके नाम से लोग डरते थे… और आज वो मेरा पति बनने वाला था।
लेकिन यह शादी मेरी मर्ज़ी से नहीं हो रही थी।
तीन महीने पहले…
पापा का बिज़नेस बुरी तरह डूब गया था। कर्ज़ इतना बढ़ गया कि घर तक बिकने की नौबत आ गई। उसी वक्त अर्जुन ने मदद का हाथ बढ़ाया… मगर एक शर्त पर।
“आपकी बेटी की शादी मुझसे होगी,” उसने ठंडे स्वर में कहा था।
उसकी आँखों में कोई भावना नहीं थी। बस एक अजीब-सी ठंडक थी… जैसे उसे किसी की परवाह नहीं।
पापा मजबूर थे।
और मैं… मैं खामोश।
क्योंकि जिस लड़के से मैं प्यार करती थी, वह मुझे छोड़कर जा चुका था।
उसने आखिरी बार कहा था, “मीरा, मैं तुम्हारे लायक नहीं हूँ… तुम्हें भूल जाओ।”
उस दिन के बाद मेरा दिल खाली हो गया था।
और आज… उसी खाली दिल के साथ मैं किसी और की दुल्हन बनने जा रही थी।
“फेरे शुरू कीजिए,” पंडित जी की आवाज़ आई।
मैं और अर्जुन अग्नि के सामने खड़े थे। उसका हाथ मेरे हाथ को छू रहा था… लेकिन उसमें अपनापन नहीं, बस औपचारिकता थी।
सात फेरे… सात वचन…
हर फेरे के साथ मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मेरी ज़िंदगी मुझसे दूर जा रही हो।
फेरे खत्म हुए।
अब मैं मीरा नहीं रही… मीरा अर्जुन सिंह राठौड़ बन गई थी।
शादी के बाद जब मैं उसके घर पहुँची, तो उसकी हवेली देखकर मैं दंग रह गई।
बड़ी-बड़ी दीवारें, सन्नाटा और अजीब-सी ठंडक।
“यह तुम्हारा कमरा है,” उसने दरवाज़ा खोलते हुए कहा।
मैं अंदर गई। कमरा बहुत सुंदर था… मगर उसमें भी वही सन्नाटा था।
मैंने धीरे से पूछा, “क्या मैं आपसे कुछ पूछ सकती हूँ?”
वह रुका।
“जल्दी बोलो।”
“आपने… मुझसे शादी क्यों की?”
उसने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं था… लेकिन दर्द जरूर था।
“क्योंकि मुझे किसी पर भरोसा नहीं है,” उसने सख्त आवाज़ में कहा।
“और मुझे एक ऐसी पत्नी चाहिए थी… जो सवाल कम करे।”
मेरे दिल में चुभन हुई।
“और प्यार?” मैंने धीमे से पूछा।
वह हल्का-सा हंसा।
“प्यार…?”
“वो शब्द मेरी ज़िंदगी में नहीं है, मीरा।”
यह सुनकर मेरे अंदर कुछ टूट गया।
वह दरवाज़े की तरफ बढ़ा और जाते-जाते बोला,
“मेरे कमरे में आने की कोशिश मत करना। हमारी शादी सिर्फ नाम की है।”
दरवाज़ा बंद।
मैं अकेली।
उस रात मैंने बहुत रोया।
शायद किस्मत को मुझसे यही मंज़ूर था।
अगली सुबह…
मैं नीचे आई तो नौकर-चाकर सब मुझे “मालकिन” कहकर बुला रहे थे।
लेकिन अर्जुन वहाँ नहीं था।
“साहब सुबह ही ऑफिस चले गए,” एक नौकरानी ने बताया।
मैंने सोचा, शायद यही अच्छा है।
दिन गुजरने लगे।
अर्जुन मुझसे कम ही बात करता।
घर में रहता, तो भी अपने कमरे में बंद रहता।
लेकिन एक बात अजीब थी…
हर रात 2 बजे के करीब वह किसी से फोन पर बहुत धीमे स्वर में बात करता था।
कभी-कभी उसकी आवाज़ ऊँची भी हो जाती।
एक रात मैं पानी लेने उठी, तो उसके कमरे का दरवाज़ा थोड़ा खुला था।
अंदर से आवाज़ आ रही थी—
“नहीं! मैंने कहा ना, वह लड़की इस सब में शामिल नहीं होनी चाहिए!”
मैं चौंक गई।
वह किस बारे में बात कर रहा था?
कौन-सी लड़की?
तभी अचानक दरवाज़ा पूरी तरह खुला।
हमारी आँखें टकराईं।
उसकी नज़रें सख्त हो गईं।
“तुम यहाँ क्या कर रही हो?” उसने गुस्से में पूछा।
मैं घबरा गई।
“मैं… वो… पानी लेने आई थी।”
वह कुछ पल तक मुझे देखता रहा… जैसे मेरे चेहरे पर कोई सच पढ़ने की कोशिश कर रहा हो।
फिर उसने धीरे से कहा—
“मीरा, मेरी ज़िंदगी में बहुत अंधेरा है। उससे दूर ही रहो… वरना पछताओगी।”
यह कहकर उसने दरवाज़ा बंद कर दिया।
मैं वहीं खड़ी रह गई।
उसकी बातों में डर था… लेकिन साथ ही एक अजीब-सी चिंता भी।
क्या वह सच में मुझसे नफरत करता था?
या मुझे किसी खतरे से बचा रहा था?
उस रात नींद नहीं आई।
मेरे मन में सवाल ही सवाल थे।
अगली सुबह जब मैं नीचे आई, तो टीवी पर न्यूज़ चल रही थी—
“शहर के बड़े बिज़नेस घराने पर गैर-कानूनी डीलिंग का शक…”
स्क्रीन पर अर्जुन की कंपनी का नाम फ्लैश हो रहा था।
मेरे हाथ से कप गिर गया।
क्या मेरा पति किसी गैर-कानूनी काम में शामिल है?
उसी वक्त दरवाज़ा खुला।
अर्जुन अंदर आया।
उसके चेहरे पर तनाव साफ दिख रहा था।
हमारी नज़रें मिलीं।
मैंने हिम्मत करके पूछा—
“यह सब क्या है?”
वह कुछ पल चुप रहा।
फिर धीरे-धीरे मेरी तरफ बढ़ा।
इतना करीब… कि मैं उसकी धड़कन महसूस कर सकती थी।
उसने मेरी ठुड्डी हल्के से ऊपर उठाई और कहा—
“तुम्हें जितना दिख रहा है… सच उससे कहीं ज़्यादा खतरनाक है, मीरा।”
मेरी साँसें तेज़ हो गईं।
“और अगर तुमने मेरे बारे में सच्चाई जानने की कोशिश की…”
वह रुका…
“तो शायद तुम्हारी ज़िंदगी बदल जाएगी।”
मैंने डर और जिज्ञासा के बीच काँपते हुए पूछा—
“कैसी सच्चाई?”
उसने मेरी आँखों में सीधे देखते हुए कहा—
“मैं वो इंसान नहीं हूँ… जो तुम समझ रही हो।”
उसी वक्त बाहर से गोलियों की आवाज़ गूँजी।
धड़ाम!!!
घर के गेट पर हमला हो चुका था।
अर्जुन ने तुरंत मेरा हाथ पकड़ा और कहा—
“अब तुम्हें सच जानना ही पड़ेगा…”
और अगले ही पल, उसने अलमारी के अंदर से एक बंदूक निकाली।
मैं स्तब्ध खड़ी थी।
मेरा पति…
एक बिज़नेसमैन नहीं…
कुछ और था।
और शायद मेरी शादी…
सिर्फ एक सौदा नहीं…
बल्कि किसी बड़ी साजिश का हिस्सा थी।
(जारी रहेगा…
A singh
**"किसी को मिलने की बेचैनी थी,
तो किसी को बिछड़ने का मलाल,
मैंने हर अपने को देखा है
रेलवे स्टेशन की भीड़ में बेहाल।
कहीं हँसी थी गले लगकर,
कहीं आँखों में ठहरा सवाल,
ये रेलवे स्टेशन ही तो है,
जहाँ मिलन भी है… और जुदाई का कमाल।"**
_ A Singh
Ashish
🌈🏗 “રંગો અને મજબૂતાઈ” 🏗🌈
હોળીનો રંગ છે પ્રેમનો આધાર,
બિલ્ડિંગનો આધાર છે સિમેન્ટ મજબૂત આધાર।
જેમ ઈંટ પર ઈંટ ગોઠવાય વિશ્વાસથી,
તેમ સંબંધો રંગાય ખુશીના ઉલ્લાસથી।
રેતી અને સિમેન્ટ મળે ને બને મકાન,
પ્રેમ અને વિશ્વાસથી બને જીવનનો મહાન સ્થાન।
લાલ ગુલાલ જેવી દિવાલની ચમક,
પાણીથી બચાવે Waterproofing ની ઝલક।
રંગો ઉડાડીએ આનંદથી આજે,
મજબૂત foundation જેવી મિત્રતા સદા રાજે।
હોળી શીખવે — રંગો ભલે અલગ હોય,
પણ મિક્સ થાય તો સુંદર નજારો જ બને હોય।
ચાલો આ હોળી પર પ્રતિજ્ઞા કરીએ ખાસ,
મકાન પણ મજબૂત અને સંબંધો પણ વિશ્વાસ।
🌈 “રંગો જેમ જોડાય છે દીવાલ પર,
તેમ દિલો જોડાય પ્રેમના તહેવાર પર.” 🏗✨
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
रंग
प्यार का रंग उतरने में वक्त तो लगता हैं ll
खुदा हाफिस कहने में वक्त तो लगता हैं ll
लौटकर कोई वापिस नहीं आता जानकर l
समय के साथ बहने में वक्त तो लगता हैं ll
दिल टूटे और आवाज़ भी ना हो तो सखी l
खामोशी से दर्द सहने में वक्त तो लगता हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Raju kumar Chaudhary
होली की कहानी
“रंगों में छिपा सच”
गाँव प्रसौनी में होली का दिन था। सुबह की हल्की धूप में पूरा गाँव जैसे रंगों की चादर ओढ़े खड़ा था। ढोल की थाप, बच्चों की हँसी, और हवा में उड़ता गुलाल हर तरफ बस उत्सव ही उत्सव था।
लेकिन इस बार होली सिर्फ रंगों की नहीं थी… यह सच और रिश्तों की भी होली थी।
1. अधूरा रिश्ता
आरव और राधा बचपन के दोस्त थे। हर साल होली पर दोनों सबसे पहले एक-दूसरे को रंग लगाते थे। लेकिन इस बार दो साल बाद आरव शहर से लौटा था। वह अब बदल चुका था कपड़ों में स्टाइल, बातों में आत्मविश्वास, और आँखों में एक अनजाना फासला।
राधा ने जब उसे देखा, तो मन में पुरानी यादें ताजा हो गईं। पर आरव ने बस हल्की-सी मुस्कान दी और आगे बढ़ गया।
राधा के हाथ में गुलाल था… पर उसका मन सूना था।
2. छुपी हुई बात
दोपहर तक पूरा गाँव रंगों में डूब चुका था। तभी चौपाल पर ढोलक बजने लगी। सब लोग इकट्ठा हुए। आरव भी आया। अचानक उसने सबके सामने बोलना शुरू किया—
“आज मैं एक सच कहना चाहता हूँ…”
गाँव में सन्नाटा छा गया।
“मैं दो साल पहले शहर इसलिए गया था क्योंकि मुझे लगा कि मैं यहाँ रहकर कुछ नहीं कर पाऊँगा। मैं अपने सपनों के पीछे भागा… लेकिन मैंने एक गलती की।”
राधा की धड़कन तेज हो गई।
“मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्त को बिना बताए छोड़ दिया।”
सबकी नजरें राधा पर टिक गईं।
3. रंगों की सच्चाई
आरव आगे बढ़ा। उसके हाथ में गुलाल था।
“राधा, क्या तुम मुझे माफ करोगी?”
राधा की आँखों में आँसू थे, लेकिन वह मुस्कुरा दी।
“होली माफ करने और गले लगाने का त्योहार है, आरव। अगर रंग मिटा सकते हैं नाराज़गी, तो मैं क्यों नहीं?”
इतना कहते ही उसने आरव के गाल पर गुलाल लगा दिया।
पूरा गाँव तालियों से गूंज उठा। ढोल फिर से बजने लगा। दोनों की दोस्ती फिर से रंगों में खिल उठी।
4. असली होली
शाम को होलिका दहन के समय आरव ने कहा—
“आज मैंने समझा कि होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं है। यह रिश्तों की आग में अहंकार को जलाने और नए सिरे से शुरुआत करने का दिन है।”
राधा मुस्कुराई।
“और जो सच दिल में छुपा हो, उसे कह देने का भी।”
आग की लपटों में जैसे उनके पुराने गिले-शिकवे जल गए।
🌈 संदेश
होली सिर्फ चेहरे पर रंग लगाने का नाम नहीं, बल्कि दिल के रंगों को साफ करने का अवसर है।
कभी-कभी एक सच्ची माफी और एक छोटा सा गुलाल का टीका… रिश्तों को फिर से जीवित कर देता है।
Hemant pandya
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એમેઝોન એપ પર ઉપલબ્ધ
kajal jha
अबीर उड़ता है तो अहंकार भी उड़ जाना चाहिए,
गुलाल लगे तो दिल भी मिल जाना चाहिए।
होली सिर्फ त्योहार नहीं,
रिश्तों को फिर से जीने का बहाना है।
रंग तो एक दिन में धुल जाते हैं,
पर शब्दों के दाग सालों तक रहते हैं।
इस होली सिर्फ चेहरा नहीं,
अपना व्यवहार भी रंगीन कर लेना।
A singh
ट्रेन के सफर में कोई अपना नहीं होता,
हर चेहरा बस मुसाफ़िर सा लगता है।
मगर जैसे ही गाड़ी छूटने लगती है,
वही अजनबी भी अपना सा लगने लगता है।
कुछ रिश्ते बस पलों के होते हैं,
पर यादों में उम्र भर साथ चलते हैं।
_ A Singh
संजय कुमार दवे
હર હર મહાદેવ 🙏🚩
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
दुख विपत्ति में जो पुरुष, करे न अनुचित काम। सद्पुरुषौं में उसी का, बढ़ जाता है नाम।।
दोहा --४३८
(नैश के दोहे से उद्धृत)
----गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (२७) की व्याख्या
मन्त्र —
“मा प्रगाम पथोवयम्”
ऋग्वेद_ १०.५७.१
भावार्थ --
हम वैदिक मार्ग से पृथक न हों।
पदच्छेद
मा — नहीं
प्रगाम — आगे बढ़ें / जाएँ
पथः — मार्ग से
वयम् — हम
भावार्थ--
“हम (सत्य) मार्ग से विचलित न हों।”
यहाँ “पथः” का अर्थ सामान्य मार्ग नहीं, बल्कि ऋत, धर्म और सत्य का मार्ग है — वही जिसे वैदिक परम्परा में वेदमार्ग कहा गया है।
दार्शनिक अर्थ--
यह मन्त्र एक प्रार्थना है —
हम अधर्म, अज्ञान या विपरीत आचरण की ओर न जाएँ।
हम सत्य, ऋत और देवमार्ग पर स्थिर रहें।
हमारा जीवन वेद-विहित मर्यादा से पृथक न हो।
वेदों में प्रमाण--
१. ऋग्वेद १.१८९.१
अग्ने नय सुपथा राये अस्मान्
विश्वानि देव वयुनानि विद्वान् ।
युयोध्यस्मज्जुहुराणम् एनः
भूयिष्ठां ते नमउक्तिं विदेम ॥
भावार्थ —
हे अग्ने! आप हमें शुभ (सत्य) मार्ग से ले चलें। हमारे पापों को दूर करें और हमें धर्ममार्ग पर स्थापित करें।
यहाँ “सुपथा” (श्रेष्ठ मार्ग) से चलाने की प्रार्थना है।
२. यजुर्वेद ४०.८ (ईशावास्योपनिषद् मन्त्र ८)
स पर्यगाच्छुक्रमकायमव्रणम्...
(अर्थ-संदर्भ में)
भावार्थ — परमात्मा शुद्ध, निष्पाप और सर्वव्यापक है; उसका मार्ग भी शुद्ध है। मनुष्य को उसी शुद्ध मार्ग का अनुसरण करना चाहिए।
३. अथर्ववेद १२.१.१
सत्यं बृहद् ऋतमुग्रं दीक्षा तपो ब्रह्म यज्ञः पृथिवीं धारयन्ति ।
भावार्थ —
सत्य, ऋत (धर्म), तप और यज्ञ — ये ही पृथ्वी को धारण करते हैं।
अर्थात् संसार की स्थिरता धर्ममार्ग पर निर्भर है।
४. सामवेद (ऋग्वैदिक मन्त्र १.१८९.१ का सामरूप)
सामवेद में भी वही प्रार्थना दोहराई गई है —
“अग्ने नय सुपथा...”
यह दर्शाता है कि वेदमार्ग पर स्थिर रहने की भावना समस्त वेदों में समान है।
५. ऋग्वेद ५.५१.१५
ऋतस्य पन्थां न तरन्ति दुष्कृतः।
भावार्थ —
दुष्कर्मी लोग ऋत (सत्य) के मार्ग को पार नहीं कर सकते।
उपनिषदों में प्रमाण --
१. कठोपनिषद् १.२.२
ऋषि प्रेयश्च मनुष्यमेतः इक,
तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः।
श्रेयो हि धीरः अभि प्रेयसो वृणीते
प्रेयो मन्दो योगक्षेमाद् वृणीते॥
भावार्थ —
मनुष्य के सामने श्रेय (कल्याण का मार्ग) और प्रेय (इन्द्रिय-सुख का मार्ग) दोनों आते हैं। विवेकी पुरुष श्रेय मार्ग को चुनता है, जबकि मूर्ख प्रेय को अपनाता है।
यहाँ स्पष्ट है कि साधक को श्रेष्ठ मार्ग से विचलित नहीं होना चाहिए।
२. मुण्डकोपनिषद् ३.१.६
सत्येन पन्था विततो देवयानः
येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामाः।
भावार्थ —
सत्य का ही मार्ग देवयान (मोक्षमार्ग) के रूप में विस्तृत है, जिस पर चलकर ऋषि परम अवस्था को प्राप्त होते हैं।
यहाँ “सत्य-पन्था” ही मुक्ति का मार्ग कहा गया है।
३. बृहदारण्यकोपनिषद् १.३.२८
असतो मा सद्गमय।
तमसो मा ज्योतिर्गमय।
मृत्योर्मा अमृतं गमय॥
भावार्थ —
हे प्रभो! हमें असत्य से सत्य की ओर, अज्ञान से ज्ञान की ओर, मृत्यु से अमृत की ओर ले चलें।
यह भी धर्ममार्ग से न भटकने की ही प्रार्थना है।
४. तैत्तिरीयोपनिषद् १.११.१
सत्यं वद। धर्मं चर।
भावार्थ —
सत्य बोलो, धर्म का आचरण करो।
यह स्पष्ट निर्देश है कि जीवन धर्ममार्ग पर ही स्थापित रहे।
५. छान्दोग्योपनिषद् ७.१६.१
सत्यं हि एव जयते नानृतम्।
भावार्थ —
सत्य ही विजय प्राप्त करता है, असत्य नहीं।
सत्य-पथ ही स्थायी और विजयी मार्ग है।
६. श्वेताश्वतरोपनिषद् ६.२३
यस्य देवे परा भक्तिः यथा देवे तथा गुरौ।
तस्यैते कथिता ह्यर्थाः प्रकाशन्ते महात्मनः॥
भावार्थ —
जिस साधक की परमात्मा तथा गुरु में परम भक्ति होती है, उसी के लिए उपनिषदों के सत्यार्थ प्रकाशित होते हैं।
अर्थात् श्रद्धा और गुरु-मार्ग का अनुसरण ही सही मार्ग पर स्थिर रखता है।
७- महानारायण उपनिषद् ७८.१२ (पाठभेदानुसार)
ऋतं वदिष्यामि। सत्यं वदिष्यामि।
भावार्थ —
मैं ऋत (धर्म) का वचन कहूँगा, सत्य का ही आचरण करूँगा।
यह सत्य-पथ पर दृढ़ रहने का संकल्प है।
८. कैवल्योपनिषद् ३
न कर्मणा न प्रजया धनेन
त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः।
भावार्थ —
न कर्म, न संतान, न धन — केवल त्याग के द्वारा ही अमृतत्व (मोक्ष) प्राप्त होता है।
यहाँ स्पष्ट है कि सांसारिक प्रेय मार्ग से हटकर त्याग और आत्मज्ञान का मार्ग अपनाना चाहिए।
९. प्रश्नोपनिषद् १.१०
तपसा ब्रह्मचर्येण श्रद्धया विद्यया च।
भावार्थ —
तप, ब्रह्मचर्य, श्रद्धा और विद्या के द्वारा ही परम सत्य की प्राप्ति होती है।
यह अनुशासित साधना-पथ से विचलित न होने की शिक्षा है।
१०. मैत्रायणी उपनिषद् ६.३०
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
भावार्थ —
मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण मन ही है।
यदि मन धर्ममार्ग पर स्थिर है तो मोक्ष, अन्यथा पतन।
सार--
इन उपनिषदों में यह सिद्ध होता है कि —
सत्य, ऋत और धर्म का मार्ग ही श्रेयस्कर है।
गुरु-भक्ति, त्याग, तप और श्रद्धा से साधक मार्ग पर स्थिर रहता है।
मन को संयमित कर धर्ममार्ग से विचलित न होना ही मोक्ष का साधन है।
पुराणों में प्रमाण--
१. विष्णु पुराण-- ३.१२.४५
धर्मेण पापमपनुदति धर्मो रक्षति रक्षितः।
तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्॥
भावार्थ —
धर्म से पाप दूर होता है; धर्म की रक्षा करने पर वही धर्म हमारी रक्षा करता है।
इसलिए धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि धर्म का नाश हमें ही नष्ट कर दे।
यहाँ स्पष्ट निर्देश है कि धर्ममार्ग से विचलित न हों।
२. भागवत पुराण- १.२.६
स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे।
अहैतुकीऽप्रतिहता ययात्मा सुप्रसीदति॥
भावार्थ —
मनुष्यों का परम धर्म वही है जिससे भगवान् में निष्काम और अखण्ड भक्ति उत्पन्न हो।
धर्म का सही मार्ग ही आत्मशान्ति और कल्याण देता है।
३. पद्म पुराण (उत्तरखण्ड)
धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः।
भावार्थ —
धर्म का नाश करने वाला स्वयं नष्ट होता है; धर्म की रक्षा करने वाला धर्म से ही संरक्षित होता है।
धर्ममार्ग से विचलन विनाश का कारण है।
४. शिव पुराण (विद्येश्वरसंहिता)
सत्यं शिवं सुन्दरम्।
भावार्थ —
सत्य ही शिव (कल्याण) है और वही सुन्दर है।
सत्य-पथ ही शिवत्व (कल्याण) का मार्ग है।
५. मार्कण्डेय पुराण--
नास्ति धर्मात्परं नाथ सत्यं धर्मस्य लक्षणम्।
भावार्थ —
धर्म से बढ़कर कुछ नहीं है; सत्य ही धर्म का लक्षण है।
सत्य और भक्ति का मार्ग ही श्रेष्ठ है।
धर्म से विचलित होना पतन का कारण है।
६. अग्नि पुराण--
धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः।
भावार्थ —
जो मनुष्य धर्म से रहित है, वह पशु के समान है।
अर्थात् धर्ममार्ग का त्याग मनुष्यत्व का पतन है।
७. स्कन्द पुराण--
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः॥
भावार्थ —
सत्य बोलो, प्रिय बोलो; अप्रिय सत्य न कहो; और प्रिय असत्य भी न कहो — यही सनातन धर्म है।
यह धर्ममार्ग पर संयमित आचरण का निर्देश है।
८. लिङ्ग पुराण--
धर्मो मूलं जगत्सर्वं धर्मे सर्वं प्रतिष्ठितम्।
भावार्थ —
यह सम्पूर्ण जगत् धर्म पर आधारित है; सब कुछ धर्म में ही स्थित है।
धर्म ही जीवन और जगत् का आधार है।
९. ब्रह्मवैवर्त पुराण--
सत्यं परं धर्मः।
भावार्थ —
सत्य ही परम धर्म है।
सत्य-पथ ही सर्वोच्च आचरण है।
१०. नारद पुराण--
धर्ममार्गे स्थितो नित्यं न च्यवेत कदाचन।
भावार्थ —
मनुष्य को सदा धर्ममार्ग में स्थित रहना चाहिए, कभी उससे च्युत न हो।
यह सीधे-सीधे वेदभाव “मा प्रगाम पथो वयम्” की ही पुनरुक्ति है।
सार--
इन पुराणों में यह स्पष्ट है कि —
धर्म ही मनुष्यत्व का आधार है।
सत्य और संयम धर्म का मूल है।
धर्ममार्ग से विचलित होना पतन का कारण है।
भगवत् गीता में प्रमाण --
१. अध्याय १६, श्लोक २३
यः शास्त्रविधिमुत्सृज्य वर्तते कामकारतः।
न स सिद्धिमवाप्नोति न सुखं न परां गतिम्॥
भावार्थ —
जो मनुष्य शास्त्र-विधि का त्याग करके मनमाने आचरण करता है, वह न सिद्धि पाता है, न सुख और न परमगति।
स्पष्ट है कि शास्त्रमार्ग (धर्ममार्ग) से विचलन पतन का कारण है।
२. अध्याय ३, श्लोक ३५
श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।
स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः॥
भावार्थ —
अपने धर्म का पालन दोषयुक्त होने पर भी श्रेष्ठ है; दूसरे के धर्म का पालन भय उत्पन्न करता है।
अपने कर्तव्य-पथ पर स्थिर रहना ही कल्याणकारी है।
३. अध्याय ४, श्लोक ७–८
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्॥
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे॥
भावार्थ —
जब-जब धर्म की हानि और अधर्म की वृद्धि होती है, तब मैं धर्म की स्थापना के लिए अवतार लेता हूँ।
धर्ममार्ग की रक्षा स्वयं भगवान् करते हैं।
४. अध्याय १८, श्लोक ६६
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज।
अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
भावार्थ —
सब कर्तव्य-भ्रमों को छोड़कर मेरी शरण में आओ; मैं तुम्हें पापों से मुक्त कर दूँगा।
यहाँ परम धर्म (ईश्वर-शरणागति) का मार्ग बताया गया है।
५. अध्याय २, श्लोक ४७
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
भावार्थ —
तुझे केवल कर्म करने का अधिकार है, फल की चिंता मत कर।
कर्तव्य-पथ पर स्थित रहना ही गीता का मूल संदेश है।
निष्कर्ष--
गीता का स्पष्ट संदेश है —
शास्त्र-विहित धर्ममार्ग का त्याग न करें। अपने स्वधर्म में स्थित रहें।
ईश्वर-शरणागति ही परम पथ है।
महाभारत में प्रमाण --
१. शान्ति पर्व--
धर्मो रक्षति रक्षितः।
तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्॥
भावार्थ —
धर्म की रक्षा करने पर धर्म हमारी रक्षा करता है।
अतः धर्म का त्याग नहीं करना चाहिए, कहीं ऐसा न हो कि धर्म का नाश हमें ही नष्ट कर दे।
स्पष्ट शिक्षा — धर्ममार्ग से विचलन विनाश का कारण है।
२. वनपर्व--
न हि धर्मादपेतस्य लोकोऽस्ति सुखमेधितम्।
भावार्थ —
जो धर्म से विमुख हो जाता है, उसे इस लोक में स्थायी सुख प्राप्त नहीं होता।
धर्मत्याग से सुख का अभाव होता है।
३. उद्योगपर्व--
सत्यं हि परमं ब्रह्म सत्ये धर्मः प्रतिष्ठितः।
भावार्थ —
सत्य ही परम ब्रह्म है और धर्म सत्य में ही प्रतिष्ठित है।
सत्य-पथ ही धर्म का आधार है।
४. शान्ति पर्व--
एष धर्मः सनातनः।
भावार्थ —
यह सनातन धर्म है — अर्थात् शाश्वत आचरण-पथ।
सनातन धर्म का पालन ही श्रेष्ठ मार्ग है।
५. अनुशासन पर्व--
अहिंसा परमो धर्मः।
भावार्थ —
अहिंसा ही परम धर्म है।
धर्ममार्ग का मूल अहिंसा और करुणा है।
सार--
महाभारत का समग्र संदेश यही है -- धर्म की रक्षा करो, वही तुम्हारी रक्षा करेगा।
सत्य और अहिंसा धर्म का मूल हैं।
धर्म से विचलित होना पतन का कारण है।
स्मृतियों से प्रमाण --
१. मनुस्मृति ८.१५
धर्मो रक्षति रक्षितः।
तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्॥
भावार्थ —
धर्म की रक्षा करने पर धर्म हमारी रक्षा करता है।
अतः धर्म का नाश नहीं करना चाहिए; धर्म का त्याग करने से वही हमें नष्ट कर देता है।
स्पष्ट शिक्षा — धर्ममार्ग से विचलन विनाशकारी है।
२. मनुस्मृति ४.१३८
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयान्न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः॥
भावार्थ —
सत्य बोलो, प्रिय बोलो; अप्रिय सत्य न कहो; और प्रिय असत्य भी न कहो — यही सनातन धर्म है।
सत्य और संयम धर्म का आधार हैं।
३. याज्ञवल्क्य स्मृति १.३
वेदोऽखिलो धर्ममूलं स्मृतिशीले च तद्विदाम्।
आचारश्चैव साधूनामात्मनस्तुष्टिरेव च॥
भावार्थ —
वेद सम्पूर्ण धर्म का मूल हैं; स्मृति, सदाचार और आत्मसन्तोष भी धर्म के आधार हैं।
वेदमार्ग से विचलित न होना ही धर्म की जड़ है।
४. नारद स्मृति
धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः।
भावार्थ —
धर्म का नाश करने वाला स्वयं नष्ट होता है; धर्म की रक्षा करने वाला सुरक्षित रहता है।
धर्मत्याग का परिणाम पतन है।
५. पराशर स्मृति १.२४
श्रुतिस्मृत्योर्ममाज्ञायां यस्तां उल्लंघ्य वर्तते।
आज्ञाछेदी मम द्वेषी मद्भक्तोऽपि न वैष्णवः॥
भावार्थ —
जो मेरी आज्ञा रूप श्रुति और स्मृति का उल्लंघन करता है, वह आज्ञा-भंग करने वाला और मेरा विरोधी है, चाहे वह भक्त ही क्यों न कहलाए।
श्रुति-स्मृति के धर्ममार्ग से विचलन अनुचित है।
निष्कर्ष
स्मृति-ग्रन्थों में स्पष्ट कहा गया है —वेद ही धर्म का मूल हैं।
धर्म की रक्षा करना आवश्यक है।
सत्य, संयम और सदाचार धर्ममार्ग की नींव हैं।
श्रुति-स्मृति के मार्ग से विचलन पतन का कारण है।
नीति ग्रन्थों में प्रमाण --
१. चाणक्य नीति--
धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः।
भावार्थ —
जो मनुष्य धर्म से रहित है, वह पशु के समान है।
धर्ममार्ग का त्याग मनुष्यत्व का पतन है।
२. हितोपदेश--
सत्यं ब्रूयात् प्रियं ब्रूयात् न ब्रूयात् सत्यमप्रियम्।
प्रियं च नानृतं ब्रूयादेष धर्मः सनातनः॥
भावार्थ —
सत्य और प्रिय वचन बोलो; अप्रिय सत्य तथा प्रिय असत्य से बचो — यही सनातन धर्म है।
सत्य और संयम धर्ममार्ग की आधारशिला हैं।
३. पंचतंत्र--
न धर्मात्परमं मित्रं न धर्मात्परमं बलम्।
भावार्थ —
धर्म से बढ़कर न कोई मित्र है, न कोई बल।
धर्म ही जीवन की वास्तविक शक्ति है।
४. विदुर नीति--
सत्यं हि परमं नास्ति धर्मः सत्ये प्रतिष्ठितः।
भावार्थ —
सत्य से बढ़कर कुछ नहीं; धर्म सत्य में ही प्रतिष्ठित है।
सत्य-पथ ही धर्म का आधार है।
५. शुक्रनीति-
धर्ममार्गे स्थितो नित्यं न च्यवेत कदाचन।
भावार्थ —
मनुष्य को सदैव धर्ममार्ग में स्थित रहना चाहिए और उससे कभी विचलित नहीं होना चाहिए।
सार--
नीति-ग्रन्थों में स्पष्ट शिक्षा दी गई है —
धर्म ही मनुष्य का वास्तविक बल और मित्र है। सत्य और संयम धर्म का मूल हैं। धर्ममार्ग से विचलित होना पतन का
योगवासिष्ठ से प्रमाण --
१. वैराग्य प्रकरण--
संसार एव दुःखानां मूलमित्यवधारय।
विवेकमार्गमास्थाय तरेद्भवसागरम्॥
भावार्थ —
यह संसार ही दुःखों का मूल है; अतः विवेक-मार्ग का आश्रय लेकर भवसागर को पार करो।
यहाँ “विवेक-मार्ग” से विचलित न होने की शिक्षा है।
२. मुमुक्षु प्रकरण--
नास्ति बुद्धिरयुक्तस्य न चायुक्तस्य भावना।
न चाभावयतः शान्तिः शान्तस्य कुतः सुखम्॥
(अर्थ-संदर्भ में उद्धृत)
भावार्थ —
जिसका मन संयमित नहीं, उसकी बुद्धि स्थिर नहीं होती; और अशान्त व्यक्ति को सुख नहीं मिलता।
मन को धर्ममार्ग में स्थिर रखना आवश्यक है।
३. उत्पत्ति प्रकरण--
मन एव मनुष्याणां कारणं बन्धमोक्षयोः।
बन्धाय विषयासक्तं मुक्त्यै निर्विषयं स्मृतम्॥
भावार्थ —
मनुष्य के बन्धन और मोक्ष का कारण मन ही है; विषयासक्त मन बन्धन का कारण है और निर्विषय (विवेकयुक्त) मन मोक्ष का साधन है।
मन को सत्य-मार्ग में स्थिर रखना ही मुक्ति का पथ है।
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Raju kumar Chaudhary
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MASHAALLHA KHAN
लोग नजर अन्दाज करने लगे हमे देखकर,
ये हमारा किरदार नही हमारी हेसियत है .
-Mashaallha
Sonu Kumar
भारत को अगर किसी एक से सहयोग लेना पड़े रूस और अमेरिका के बीच, तब उसे किसे चुनना चाहिए और क्यों?
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[A] इस समय भारत 2 देशो के निशाने पर है :
चीन (+/रूस)
अमेरिका (+ब्रिटेन-फ़्रांस)
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(1) यदि हम अमेरिका से बचने के लिए रूस की शरण में जाते है तो रूस एवं चीन अमेरिका को रोक देंगे, किन्तु इसके एवज में रूस एवं चीन हमारा आर्थिक-सामरिक अधिग्रहण कर लेंगे !! (किन्तु धार्मिक नहीं)
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(2) यदि हम अमेरिका की शरण में जाते है (जो कि 30 साल पहले ही जा चुके है) तो आर्थिक-सामरिक के साथ साथ अमेरिका हमारा धार्मिक अधिग्रहण भी करेगा। यानी अमेरिका पूरे भारत को ईसाई देश में भी कन्वर्ट कर देगा।
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(3) यदि अमेरिका, चीन एवं रूस में भारत को लेकर समझौता हो जाता है तो भारत को एक दुसरे से बचाने के एवज में ये तीनो देश भारत का बाजार एवं प्राकृतिक संसाधन आपस में बाँट लेंगे।
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आर्थिक-सामरिक अधिग्रहण से मायने है कि अमुक देश (अमेरिका-ब्रिटेन-फ़्रांस+रूस+चीन) :
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हमारी स्थानीय इकाइयों को तबाह कर देंगे ताकि अमुक देश की कम्पनियां हमारे बाजार पर कब्ज़ा कर सके।
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वे हमारी गणित-विज्ञान के स्तर को तोड़ देंगे, ताकि तकनिकी वस्तुओं के उत्पादन में आवश्यक मानव संसाधन में कमी आये।
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वे जमीन की कीमतों को बढ़ाते जायेंगे ताकि स्थानीय इकाइयों की स्थापना करना मुश्किल हो जाए।
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और सबसे महत्त्वपूर्ण - वे सरकारी विभागों, अदालतों एवं पुलिस का डिजाइन इस तरह का बनाकर रखेंगे कि यदि रसूखदार / अमीर आदमी क़ानून तोड़ता है तो वह पैसा फेंककर क़ानून को बुत्ता दे सके, और जजों-नेताओं का इस्तेमाल करके छोटी इकाइयों को बंद करवा सके।
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वे भारत की स्वदेशी हथियार निर्माण इकाइयों का बचा खुचा बेस तोड़ देंगे और यहाँ पर हथियार निर्माण इकाईयां लगायेंगे, ताकि भारत सैन्य रूप से अमुक देश पर पूरी तरह से निर्भर हो जाए।
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तो हम चाहे चीन से बचने के लिए अमेरिका की शरण में जाए या अमेरिका से बचने के लिए रूस+चीन की शरण में जाए, दोनों ही स्थितियों में अमुक देश हमें बचाने के एवज में हमारा आर्थिक-सामरिक अधिग्रहण करेगा। मतलब कोई देश हमें मुफ्त में नहीं बचाएगा, हमें बचने के एवज में यह कीमत चुकानी ही होगी।
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इन देशो का जो इतिहास रहा है उस आधार पर हम कह सकते है कि यदि हम रूस+चीन की शरण में जाते है तो वे हमारा धार्मिक अधिग्रहण नहीं करेंगे। अमेरिका या रूस+चीन जब किसी देश का अधिग्रहण करते है तो इससे निम्नलिखित अंतर आता है :
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धर्म : रूस एवं चीन जिस देश का अधिग्रहण करते है उनके धर्म के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करते, किन्तु अमेरिकी जिस देश पर आर्थिक-सामरिक नियंत्रण बना लेते है, वहां पर धार्मिक नियंत्रण भी अवश्य बनाते है। मतलब वे स्थानीय धर्म को ख़त्म करके ईसाई धर्म थोप देते है।
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जातीय, वर्गीय, धार्मिक, लैंगिक अलगाव : अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार कम्पनियां समाज को बांटने में माहिर है, और वे इस तरीके का इस्तेमाल पिछले 200 सालों से कर रहे है। अत: अमेरिकी कम्पनियों का प्रभुत्व बढ़ने से भारत में जातीय, वर्गीय, साम्प्रदायिक अलगाव में वृद्धि होगी। इसके अलावा नारीवाद आदि के नाम पर लैंगिक संघर्ष भी बढ़ेगा। रूस एवं चीन समाज / परिवार को काटने की दिशा में काम नहीं करते।
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संस्कृति : अमरीकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार निर्माता जिस भी देश में जाते है वहां की संस्कृति का रूपांतरण करने में काफी निवेश करते है, ताकि कन्वर्जन की जमीन तैयार की जा सके। तो पेड मीडिया द्वारा अपसंस्कृति को सार्वजनिक बढ़ावा मिलेगा, और इसे “सामाजिक स्वीकार्यता” भी मिलेगी। AIB , बिग बॉस, सेकेर्ड गेम्स आदि इसी कड़ी के हिस्से है। पारिवारिक धारावारिको में भी अश्लीलता, नग्नता, फूहड़ता, समलैंगिकता, गाली गलौज का स्तर बढ़ेगा और इन्हें “सामाजिक स्वीकार्यता” मिलेगी। किन्तु रूस एवं चीन संस्कृति को नष्ट करने के लिए व्यवस्थित रूप से काम नहीं करते।
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अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच हथियार निर्माताओ के एजेंडे के बारे में अन्य विवरण के लिए ये जवाब पढ़ें – https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1074199619619781/
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[B] वैसे यह प्रश्न 67 वर्ष पुराना है, और यह प्रश्न लगातार सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण एवं सबसे ज्यादा प्रासंगिक बना रहा है।
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(1) जब भारत आजाद हुआ तो जवाहर लाल के पास 2 विकल्प थे :
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भारत पूर्णतया स्वदेशी तकनिक पर आधारित (Made by India & Made by Indians) हथियारों का उत्पादन करे ताकि हम अमेरिका एवं चीन को रोक सके।
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हम खुद को बचाने के लिए ऐसे किसी देश की शरण में जाए जो निर्णायक हथियारों ले उत्पादन में आत्मनिर्भर हो। (यानी या तो रूस या अमेरिका)
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यदि जवाहर लाल ने बिंदु (1) की नीति पर काम करते तो रूस एवं अमेरिका से उनका संघर्ष बढ़ जाता और वे उन्हें अपदस्थ कर देते। अत: उन्होंने पेड मीडिया के माध्यम से “गुट निरपेक्षता, पंचशील, समाजवाद” आदि के रैपर लगाकर चिंगमें लांच की और अगले 15 वर्षो तक भारत के कार्यकर्ताओ / नागरिको / बुद्धिजीवियों को ये चिंगमें चबाने के काम में उलझाए रखा।
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1962 तक चीन भारत की तुलना में काफी ज्यादा हथियार बनाना सीख चुका था अत: उन्होंने भारत पर हमला कर दिया। तब अगले 24 घंटे में ही भारत को अमेरिका के सामने अपने घुटने तोड़ कर बैठना पड़ा। अमेरिका की शरण में जाने के कारण चीन ने बढ़ना रोक दिया और हम बच गए -- Pawan Kumar Sharma का जवाब - सन 1962 के भारत चीन युद्ध में चीन ने युद्ध विराम क्यों मान लिया था?
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(2) बाद में इंदिरा जी ने सैन्य दृष्टी से भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर स्वदेशी तकनीक आधारित हथियारों का उत्पादन करने के प्रयास किये, और इसमें उन्हें आंशिक सफलता भी मिली। इंदिरा जी और पेड मीडिया के प्रायोजको से टकराव के बारे में विवरण आप इस जवाब में पढ़ सकते है -https://www.facebook.com/groups/JuryCourt/permalink/1047932098913200/
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परमाणु बम एवं मिसाइले बनाने में हम सफल हुए किन्तु टैंक एवं फाइटर प्लेन का इंजन बनाने में हम फ़ैल हो गए। प्लेन एवं टैंक के इंजन बनाने में हम क्यों असफल रहे, इस बारे में मैंने अन्य जवाब में बताया है।
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(3) 1990 में सोवियत रूस के टूटने के बाद भारत की सभी मुख्यधारा पार्टियों एवं शीर्ष नेताओ ने अपनी खाल बचाने एवं राजनैतिक कैरियर बनाए रखने के लिए अमेरिका की शरण में जाने का फैसला कर लिया था। 1991 से अमेरिका ने भारत का अधिग्रहण करना शुरू किया और कारगिल के बाद 2001 के बाद से इसमें बेहद तेजी से इजाफा हुआ।
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आज हमारा पूरा देश अमेरिकी ही चला रहे है। यदि हमें रूस की तरफ जाना है तो हमें पहले संवेदनशील क्षेत्रो में काम कर रही अमेरिकी कम्पनियों को भारत से निकालना पड़ेगा। भारत की मुख्यधारा की सभी पार्टियाँ अमेरिकियों द्वारा पोषित है, और भारत की किसी भी राजनैतिक पार्टी के किसी नेता में इतना साहस नहीं है कि वह इस बारे में सोच भी सके। यदि हम अमेरिकी धनिकों से प्रतिरोध लेने जायेंगे तो अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच भारत में इतने ज्यादा ताकतवर हो चुके है कि वे बिना युद्ध लड़े ही हमें हरा देंगे।
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यहाँ तक कि कम्युनिस्ट पार्टी के नेता भी पिछले 20 वर्षो से उन सभी कानूनों का समर्थन कर रहे है जिससे अमेरिकी कम्पनियों का नियंत्रण भारत में बढ़े। कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओ ने 2004 में अमेरिकियों के पाले में जाना शुरू कर दिया था, और 2014 आते आते वे पूरी तरह अमेरिकियों के हाथो बिक चुके थे।
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जहाँ कार्यकर्ताओ की बात है, चूंकि भारत का पेड मीडिया पूरी तरह अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियों के नियंत्रण में है अत: पेड मीडिया द्वारा दी गयी फीडिंग पर निर्भर भारत के ज्यादातर में से ज्यादातर कार्यकर्ता / नागरिक अब पूरी तरह इस बात पर सहमत है कि हमें अपना देश अमेरिकियों के हवाले कर देना चाहिए।
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[C] समाधान ?
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(1) यदि भारत को अमेरिका / चीन से बचना है तो हमारे पास सिर्फ 1 रास्ता है --
भारत पूर्णतया स्वदेशी तकनिक पर आधारित (Made by India & Made by Indians) हथियारों का उत्पादन करने की क्षमता जुटाने के लिए आवश्यक कानूनों को गेजेट में प्रकाशित करें।
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मेरा सुझाव इन 4 कानूनों को गेजेट में छपवाने का है :
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धनवापसी पासबुक
रिक्त भूमि कर
जूरी कोर्ट
वोइक
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यदि उपरोक्त क़ानून गेजेट में आ जाते है तो मेरा आकलन है कि हम अगले 5-6 वर्षो में इतने ताकतवर हथियार बना सकते है कि अमेरिका एवं चीन की सेनाओं को अपने बूते पर रोक सकेंगे और हमें किसी की शरण में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इन कानूनों के गेजेट में आने से कैसे हम अमेरिका की सेना से लड़ने की सैन्य क्षमता जुटा लेंगे इस बारे में विस्तृत विवरण मैंने अन्य जवाबो में लिखा है, उन्हें पढ़ें।
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यदि हम ऊपर दिए गए क़ानून देश में लागू करते है तो एक संभावना यह है कि अमेरिका/चीन/रूस आदि देश मिलकर हम पर सीधा हमला कर दें या पाकिस्तान / बांग्लादेश का इस्तेमाल करके हमें युद्ध में घसीटे।
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उस स्थिति से निपटने के लिए हमें एक क़ानून की और जरूरत होगी – सज्जन नागरिको को बंदूक रखने का अधिकार देने के लिए जनमत संग्रह। तब सिर्फ यह क़ानून ही हमें बचा सकेगा। और यदि हम यह क़ानून भी लागू कर देते है तो ज्यादातर से भी ज्यादातर सम्भावना है कि अमेरिका-चीन-पाकिस्तान आदि हम पर हमला करने का जोखिम नहीं उठाएंगे।
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(2) भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियाँ (बीजेपी-कोंग्रेस-आपा-सपा-बसपा-कम्युनिस्ट) एवं इनके सभी शीर्ष नेताओ (सोनिया जी, केजरीवाल जी एवं मोदी साहेब) का स्टेंड :
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पेड मीडिया पर निर्भर ये सभी नेता उपरोक्त कानूनों के खिलाफ है
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साथ ही वे अपनी तरफ से भी इस बिंदु पर हमेशा खामोश रहते है कि, भारत को स्वदेशी पूर्णतया स्वदेशी तकनिक पर आधारित (Made by India & Made by Indians) हथियारों का उत्पादन करने में सक्षम बनाने के लिए वे किन कानूनों का सुझाव देते है।
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और अमुक बिंदु पर खामोश रहते हुए वे लगातार ऐसे क़ानून छाप रहे है जिससे भारत की निर्भरता लगातार अमेरिकी कंपनियों पर बढती जाए।
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उदाहरण के लिए अभी महीने भर पहले मोदी साहेब ने रक्षा में विदेशी निवेश की सीमा को 49% से बढ़ाकर 74% किया था, और अब रास्ता साफ़ होने के बाद बड़े पैमाने पर अमेरिकी-ब्रिटिश-कम्पनियां भारत में हथियार निर्माण के कारखाने लगाएगी। और सोनिया जी एवं केजरीवाल ने मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन किया !! और यहाँ तक कि कोंग्रेस-आपा के कार्यकर्ताओ ने भी मोदी साहेब के इस फैसले का समर्थन किया। इससे हमें निम्नलिखित नुकसान होंगे :
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74% स्टेक के बाद अब हथियार निर्माण कम्पनियों पर विदेशियों का स्वामित्व निर्णायक हो जाएगा। अत: भारत में स्थापित होने वाले हथियार कारखानों पर उनका उनका नियंत्रण होगा।
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वे नेताओं को धमका कर / उन्हें ब्राइब / म्राइब देकर सरकारी हथियार कम्पनियों का बचा खुचा बेस भी तोड़ देंगे। हथियार निर्माण की सरकारी कम्पनियों को अब धीरे धीरे या तो बंद कर दिया जाएगा या विदेशी इनका अधिग्रहण कर लेंगे।
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हथियार कंपनियों के भारत में सीधे घुस आने के बाद पेड मीडिया की शक्ति विस्फोटक रूप से बढ़ेगी, जिससे भारत के नेताओ की निर्भरता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों पर और भी बुरी तरह से बढ़ जायेगी।
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हथियार कम्पनियों का मुख्य धंधा खनिज लूटना है। अत: अब वे भारत के नेताओं से ऐसे क़ानून छपवाएंगे जिससे वे लगभग मुफ्त में भारत के मिनरल्स लूट सके। तो अभी भारत के प्राकृतिक संसाधन की बहुत बड़े पैमाने पर लूट होने वाली है। और यह लूट पूरी तरह से कानूनी होगी।
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ये कम्पनियां जितना मुनाफा बनाएगी उसके बदले हमें डॉलर चुकाने होंगे। पहले हम हथियार लेने के लिए सीधे डॉलर चुका रहे थे, और अब रिपेट्रीएशन के रूप में डॉलर चुकायेंगे। मतलब हमारा डॉलर संकट में इजाफा होगा।
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अब पेड मीडिया के प्रायोजक भारत के खनिज, संसाधन, जमीन का इस्तेमाल करके भारत में हथियार बनायेंगे। दरअसल, वे बनायेंगे नहीं, बल्कि असेम्बल करेंगे। उसके बाद 5 गुना दाम में वे ये हथियार भारत की सेना को बेचेंगे। इसके बाद वे भारत के पीएम (उस समय जो भी पीएम होगा) को धमकाएंगे कि वे चीन / पाकिस्तान पर हमला करें, और पेड मीडिया का इस्तेमाल करके नागरिको को चीन / पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में जाने के लिए तैयार किया जाएगा।
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भारत की सेना एवं जमीन का इस्तेमाल करके वे चीन / ईरान को ख़त्म करेंगे और फिर उनकी सेनाएं भारत में तब तक रहेगी जब तक वे भारत के मिनरल्स नहीं लूट लेते। जब भारत के मिनरल्स ख़त्म हो जायेंगे तो वे भारत के 5-7 टुकड़े करके हमें एक अफ़्रीकी देश से बदतर देश बनाकर निकल जायेंगे।
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यदि युद्ध टल जाता है तो पेड मीडिया के प्रायोजक हमारे मिनरल्स लूटते हुए भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में बदल देंगे। पिछले 200 साल में पेड मीडिया के प्रायोजक ऐसा पचासों देशो के साथ कर चुके है। यही उनका बिजनेस मॉडल है।
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Raju kumar Chaudhary
hello namaste friends
Deeps Gadhvi
હૃદયમાંથી નીકળતું સ્મિત એક જાદુઈ ચમક ધરાવે છે જેને કોઈ ઓલવી શકતું નથી...
- Deeps Gadhvi
Deeps Gadhvi
હૃદયમાંથી નીકળતું સ્મિત એક જાદુઈ ચમક ધરાવે છે જેને કોઈ ઓલવી શકતું નથી...
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Dr. Damyanti H. Bhatt
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Balkrishna patel
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Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
प्रमुख शहरों के ग्रहण का समय- चंद्रग्रहण - 3 मार्च 2026
●शहर का नाम ●प्रारम्भ ● समाप्त ● ग्रहण का समय●
१) जम्मू (जम्मू और कश्मीर) शाम 6-34 से 6-46 तक - 10 मिनट
२) शिमला (हिमाचल प्रदेश) शाम 6-25 से शाम 6-46 तक 21 मिनट
३) अमृतसर (पंजाब) शाम 6-34 से शाम 6-46 तक 10 मिनट
४) गुरुग्राम (हरियाणा) शाम 6-27 से शाम 6-46 तक 19 मिनट
५) चंडीगढ़ शाम 6-27 से शाम 6-46 तक 19 मिनट
६) नई दिल्ली (दिल्ली) शाम 6-26 से शाम 6-46 तक 20 मिनट
७) जोधपुर (राजस्थान) शाम 6-45 से शाम 6-46 तक 1 मिनट
८) जयपुर (राजस्थान) शाम 6-33 से शाम 6-46 तक 13 मिनट
९) हरिद्वार (उत्तराखंड) शाम 6-21 से शाम 6-46 तक 25 मिनट
१०) कानपुर (उत्तर प्रदेश) शाम 6-14 से शाम 6-46 तक 32 मिनट
११) वाराणसी (उत्तर प्रदेश) शाम 6-04 से शाम 6-46 तक 42 मिनट
१२) पटना (बिहार) शाम 5-55 से शाम 6-46 तक 51 मिनट
१३) रांची (झारखंड) शाम 5-55 से शाम 6-46 तक 51 मिनट
१४) रायपुर (छत्तीसगढ़) शाम 6-11 से शाम 6-46 तक 35 मिनट
१५) उज्जैन (मध्य प्रदेश) शाम 6-35 से शाम 6-46 तक 11 मिनट
१६) जबलपुर (मध्य प्रदेश) शाम 6-17 से शाम 6-46 तक 29
१७) अहमदाबाद (गुजरात) ग्रहण नही हैं ग्रहण नही हैं
१८) द्वारका (गुजरात) ग्रहण नही हैं ग्रहण नही हैं ।
१९) मुम्बई (महाराष्ट्र) ग्रहण नही हैं ग्रहण नही हैं।
२०) नागपुर (महाराष्ट्र) शाम 6-22 से शाम 6-46 तक 24 मिनट
२१) बेंगलुरु (कर्नाटक) शाम 6-32 से शाम 6-46 तक 14 मिनट
२२) थिरुवनंतपुरम (केरल) शाम 6-37 से शाम 6-46 तक 9 मिनट
२३) कावारत्ती (लक्षद्वीप) ग्रहण नही हैं ग्रहण नही हैं ।
२४) पोर्ट ब्लेयर (अंडमान और निकोबार) शाम 5-30 से शाम 6-46 तक 16 मिनट
२५) पुडुचेरी शाम 6-23 से शाम 6-46 तक 23 मिनट
२६) चेन्नई (तमिलनाडु) शाम 6-21 से शाम 6-46 तक 25 मिनट
२७) विशाखापत्त्तनम (आंध्र प्रदेश) शाम 6-07 से शाम 6-46 तक 29 मिनट
२८) हैदराबाद (तेलंगाना) शाम 6-26 से शाम 6-46 तक 20 मिनट
२९) भुवनेश्वर (ओड़िशा) शाम 5-54 से शाम 6-46 तक 52 मिनट
३०) कोलकाता (पश्चिम बंगाल) शाम 5-43 से शाम 6-46 तक 1 घंटा 03 मिनट
३१) गंगटोक (सिक्किम) शाम 5-39 से शाम 6-46 तक 1 घंटा 07 मिनट
३२) गुवाहटी (असम) शाम 5-27 से शाम 6-46 तक 1 घंटा 19 मिनट
३३) इटानगर (अरुणाचल प्रदेश) शाम 5-19 से शाम 6-46 तक 1 घंटा 27 मिनट
३४) कोहिमा (नागालैंड) शाम 5-17 से शाम 6-46 तक 1 घंटा 29 मिनट
३५) इंफाल (मणिपुर) शाम 5-18 से शाम 6-46 तक 1 घंटा 28 मिनट
३६) आइजोल (मिजोरम) शाम 5-24 से शाम 6-46 तक 1 घंटा 22 मिनट
३७) अगरतला (त्रिपुरा) शाम 5-30 से शाम 6-46 तक 1 घंटा 16 मिनट
३८) शिलांग (मेघालय) शाम 5-27 से शाम 6-46 तक 1 घंटा 19 मिनट
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
PRASANG
નારી.!!!!?
કોણ છે અબળા? સૌ પર ભારી એ નારી,
શૌર્ય, સહન અને શાનની અવતારી એ નારી.
આંધી આવે તો છાતી તાનીને ઊભી રહે,
ભયને હરખાવી દે એવી લડનારી એ નારી.
માતૃછાયામાં વિશ્વને જીવવાની રીત શીખવે,
કઠોર સમયે પણ રહે કરુણાધારી એ નારી.
ચુપ રહીને પણ બદલે કિસ્મતના પાનાં,
શબ્દ વિના બોલે એવી અસરકારી એ નારી.
બંધન તોડી આગળ વધે પોતાના જ બળે,
નિયમોને પડકારે એવી હક્કદારી એ નારી.
'પ્રસંગ' કહે, ગર્વ છે મને આ ઓળખ પર આજે,
સમયથી પણ ઊંચી ઊભી સ્વાભિમાની એ નારી.
પ્રસંગ
પ્રણયરાજ રણવીર
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
खग्रास(ग्रस्तोदय) चंद्रग्रहण
03 मार्च 2026, मंगलवार
सूतक काल प्रात: 06:20 बजे से सायं 06:40 बजे तक
ग्रहण काल दोपहर 03:20 बजे से सायं 06:40 बजे तक
ग्रहण समाप्त सायं 06:40 बजे तक
यह ग्रहण फाल्गुनी पूर्णिमा 3 मार्च 2026 दिन मंगलवार को संपूर्ण भारत में ग्रस्तोदय रूप में दिखाई देगा। अर्थात भारत के किसी भी शहर में जब तक चन्द्रोदय होगा उस से पहले ही यह खग्रास चंद्रग्रहण प्रारंभ हो चुका होगा।भारत के किसी भी नगर में इस ग्रहण का प्रारंभ तथा ग्रहण मध्य नहीं देखा जा सकेगा।
भारत के केवल पूर्वी राज्यों में इस ग्रहण की खग्रास समाप्ति देखी जा सकेगी।
ग्रहण के सूतक तथा ग्रहणकाल में स्नान, दान, जप, पाठ, मंत्र, स्त्रोत–पाठ, मंत्र सिद्धि, तीर्थ स्नान, ध्यान, आदि शुभ कृत्य करना कल्याणकारी होता है।
सूतक एवं ग्रहण काल में मूर्ति स्पर्श करना, अनावश्यक खाना पीना, निद्रा, नाखून काटना, तैलाभ्यंग वर्जित है।
सूतक काल में वृद्ध, रोगी, बालक एवं गर्भवती महिलाओं को यथानुकुल भोजन या दवाई लेने में कोई दोष नहीं।
परंतु ग्रहण काल यानी दोपहर 03:20 बजे से 06:40 बजे तक कुछ भी खाना पीना नहीं चाहिए।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
चंद्रग्रहण के दौरान कुछ ज्योतिष उपाय करने से नकारात्मक प्रभावों से बचा जा सकता है और शुभता प्राप्त की जा सकती है।
चंद्रग्रहण के कुछ उपाय
मंत्र जाप
चंद्रग्रहण के दौरान कुछ विशिष्ट मंत्रों का जाप करना लाभकारी होता है, जैसे कि:—
ॐ सों सोमाय नमः।
ॐ चं चंद्रमसे नम:।
ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः।
ॐ शीतांशु विभांशु अमृतांशु नम:।
ॐ ऐं क्लीं सौमाय नामाय नमः
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दान और पूजा
ग्रहण के बाद दान करना और भगवान शिव की पूजा करना शुभ होता है।
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सावधानियां
ग्रहण के दौरान कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए जैसे कि:—
१.खाना बनाने और खाने से बचना
२.सोने से बचना
३.नकारात्मक जगहों पर न जाना
४.धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल न करना
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
PRASANG
नारी।
टूटकर भी जो बिखरती नहीं, वही अडिग नारी,
दर्द सहकर भी जो आगे बढ़े, वही सजग नारी।
सदियों की चुप्पी में पली, सब्र की मिट्टी में ढली,
बिन शोर किए बदल दे, ऐसी गहरी नारी।
देह नहीं, वह दृष्टि है, सोच का उजला विस्तार,
नर्म शब्दों में भी रखती, ठोस अर्थ नारी।
घर की देहरी लाँघ आई, समय से आँख मिला,
क़लम थामे भविष्य रचे, सच की साथी नारी।
न दया माँगे ज़माने से, न रहम की आस रखे,
अपने ही उसूलों पर चलने की आदी नारी।
जो उसे कमज़ोर समझे, वह भ्रम में जीता है,
रेशम-सी लगती बाहर, भीतर से दृढ़ नारी।
"प्रसंग" कहे, यह शोर नहीं, चेतना की रेखा है,
जहाँ नज़ाकत ही शक्ति बने, वही सच्ची नारी।
"प्रसंग"
प्रणयराज रणवीर
Kaushik Dave
दिखने में भले ही वो भी, मेरी ज़मीं सा लगता है,
पर कहाँ वहाँ अपनों का, कोई भी चेहरा मिलता है।
कहते हैं सितारे दूर के, सब पृथ्वी जैसे दिखते हैं,
बिना साँस के उस पत्थर पे, बोलो कौन ठहरता है?
समंदर नीले होंगे वहाँ, और पर्वत भी ऊँचे होंगे,
पर क्या कोई परिंदा वहाँ, चहक के पर फैलाता है?
खोज रहे हैं सब दुनिया, एक 'प्लान-बी' की चाहत में,
पर माँ जैसी इस धरती का, विकल्प किसे सूझता है?
करोड़ों मील की दूरी है, और अनजानी वो राहें हैं,
घर की मिट्टी का इक ज़र्रा, ही बस सुकून देता है।
SAYRI K I N G
सब्र की घड़ी में भी सुकून नहीं मिलता, मेरा वक़्त हर रोज़ कुछ अपना छीन लेता है..!!
SAYRI K I N G
चीटियां लग गई नमक के डब्बे पर भी...
मैंने तुमसे कहा था कुछ भी छूना मत।।
SAYRI K I N G
होली की सबको हार्दिक शुभकामनाएं, कृपया रंग लगाए दिखाए नहीं.!!
SAYRI K I N G
मोहब्बत छोड़ दी जनाब...
अब में मोटू पतलू देखता हूं...
Saroj Prajapati
तू और कितने रंग दिखाएगी ऐ जिंदगी!
क्या होली के रंगों को भी फीका करवाएगी ऐ जिंदगी!
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
ek archana arpan tane
બે ચાર પંક્તિઓ કે એક દિવસ માં શું વાંચી લેશો મને ? મેં વરસો વિતાવ્યા છે મારી લાગણીઓ ને લખવા માટે.
- ek archana arpan tane
PK with beautiful life
मैंने आज देखा ।
टूटता तारा नही ..टूटता ख्वाब देखा ,
मैंने आज देखा ।
अश्को से भरी एक आख देखा,
खामोश लवजो की आवाज देखा।
मैंने आज देखा ।
खुद के अन्दर दबा एक राज देखा,
उम्मीद से भरी आख देखा,
सवालो से भरा एक मन देखा।
मैंने आज देखा।
सोता जगता एक लाश देखा,
उलझनो भरा एक ऐहसास देखा,
एक लड़की ने आईने मे आज देखा,
पहले से खुद को खराब देखा,
ऐ सब देखा ?
जब अपनी आखो मे मैने आज देखा।
- PK with beautiful life
Vipul Borisa
इतने रंग दिखा चूकी हे,जींदगी
हमारे होली नयी बात थोड़ी है।
विपूल प्रीत
- Vipul Borisa
બદનામ રાજા
વધામણી હોય વસંતની અને રમત હોય રંગોની, જૂના વેરઝેર ભૂલીને ચાલો માણીએ મજા સંગાથની...
ઉજાસનાં આ પાવન પર્વ હોળીની આપણે તથા આપણા પરીવાર ને રંગબેરંગી શુભેચ્છાઓ 🌸
PRASANG
यह रंग नहीं, तमाशा है
बलात्कार के मौसम में त्योहार का यह शोर,
औरत जले बीच चौराहे, सबको तमाशा है।
जिस आग से काँप उठे आसमान तक रोए,
उसी आग पर हँसना समाज का तमाशा है।
कपड़े उछाल दिए, चरित्र नाप डाला,
दरिंदे बरी घूमे, इंसाफ़ तमाशा है।
कानून किताबों में, सड़कों पर खामोशी,
चीख़ें दम तोड़ें और व्यवस्था तमाशा है।
माँ-बहन के नारे होंठों पर चिपके हैं,
रात उतरते ही वही हवस का तमाशा है।
चिता पर गुलाल फेंक, उत्सव मना लिया,
शर्म को जलते देखना संस्कृति तमाशा है।
जो बोले, उसे कुचल दो, जो जले, वही दोषी,
यह भीड़ का न्याय नहीं, बस सस्ता तमाशा है।
इतिहास पूछेगा इस रंगीन शहर से,
क्यों जलती नारी पर भी आँखों में तमाशा है।
'प्रसंग' कहे, यह होली नहीं, अपराध है,
जहाँ औरत की राख पर हँसना तमाशा है।
"प्रसंग"
प्रणयराज रणवीर
mohansharma
अब किसकी कैसी मोहन होली..
जब वो किसी और की हो ली..
Shefali
#shabdone_sarname__
Niya
તું ભલે નથી મારી પાસે પણ પંક્તિમાં ઉલ્લેખ તારો થાય છે,
હોય મોગરાની સુવાસને જોઉં આયનો હાજરી તારી વર્તાય છે….
Armin Dutia Motashaw
WHY???
When we don't get it we crave for it; but after we get it, we take it for granted....
why???
Why don't we appreciate what we got after asking ???
Anar
Shefali
#shabdone_sarname__
Raju kumar Chaudhary
प्रिय Subscribers और Followers,
रंगों का पावन पर्व Holi आप सभी के जीवन में
नई ऊर्जा, नई प्रेरणा और नई सफलताओं के रंग भर दे।
जैसे हर रंग की अपनी पहचान होती है,
वैसे ही आप सभी मेरी रचनात्मक यात्रा के अनमोल रंग हैं।
आपका प्रेम, समर्थन और विश्वास ही मेरी लेखनी की ताकत है।
ईश्वर करे
🌸 आपके जीवन में खुशियों का गुलाल उड़े
🌿 सफलता की हरियाली छाए
🔥 संघर्ष की अग्नि आपको और मजबूत बनाए
💖 रिश्तों में प्रेम और विश्वास बना रहे
इस पावन अवसर पर मैं दिल से धन्यवाद देता हूँ
कि आप मेरी हर कहानी, हर शब्द और हर प्रयास के साथी बने।
आप सभी को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
रंगों की तरह मुस्कुराते रहिए, चमकते रहिए।
स्नेह सहित,
Raju Kumar Chaudhary
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
બાગમાં ન તો કોઈ કુંપળ ફુટી છે,
ન તો કોઈ કળી ખીલી છે,
ખબર નહીં બાગના ક્યાં ખૂણેથી સુગંધ આવી રહી છે?
જાણે તારા આવવાથી આ ખુશ્બો મ્યાનમાંથી આઝાદ થઈ લાગે છે.
- સ્પંદન
Ajit
ફફડે છે જેમ પર્ણ ડાળી એ એમ જ યાદ પણ તારી હૈયે આવતી હોય છે...
મન પાછું મને જ સવાલ કરતું હોય છે, એ તારા ન હોવાથી ખુશ છે તું શું કામ પજવતો હોઈશ એમને......
જિંદગી ની "યાદ"
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
इस दिल का दर्द ...
Nilesh Rajput
रमजान - होली
रमजान के साथ होली के रंगों का आता देख वो मुस्कुराई तो जरूर होगी। आखिरकार तीस सालों में ऐसा दिन आया है जब इबादत के बीच वो अपने प्रेमी के साथ होली का उत्सव मनाएगी। अपने बेरंग जिंदगी में वो कुरान के आयते पढ़ेगी। अपने रोजेदार के गालों पर होली के रंगों से जश्न मनाएगी। और अंत में अपनी महोब्बत को वो इन दोनो मजहबों से ऊपर दिखाते हुए, वह अपने प्रेमी के आलिंगन में इफ्तार करेगी- शायद इसलिए कि हर रंग अंततः धुलकर काले में ही समा जाता है।”
Narendra Parmar
चार बहनों के बाद एक भाई आया है
ईश्वर का दिल से शुक्रगुजार हैं हम की 🙏
काफी सालों के बाद हमारे घर पर
खुशीयों का माहौल आया है 🎉
और सच कहूं तो मैं,मंगलवार के दिन एक वारिश आया है ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Sonu Kumar
जो-जो सरकारें अपने देश के नागरिकों को— PM, CM, SP, जजों पर Recall Power एवं जनमत संग्रह अधिकार, Jury right, Gun right की पावर एवं खनिजों का पूरा हिस्सा केवल नागरिकों एवं सेना को नहीं देते हैं—
वहां के नागरिक हमेशा अपनी- सरकारों से एवं विदेशी तानाशाहों से अपने देश के— खनिज संसाधनों की लूटने से बचाने में एवं अपनी खुद की समस्याओं को समाधान कराने में हमेशा हार जातें हैं या उनके लिए यह अधिकार हासिल करना अत्यंत कठिन हो जाता है!!
.
इसीलिए भारत के नागरिकों को अपने देश की समस्याओं को बढ़ाने से और अपने देश के खनिज संसाधनों को लूटने से रोकने के लिए-
(01) जल्द से जल्द- वोट वापसी प्रधानमंत्री, वोट वापसी मुख्यमंत्री, वोट वापसी जज, वोट वापसी जिला पुलिस अधिकारी SP, पर— वोट वापसी पासबुक कानून लागू करवाना चाहिए।
(02) जूरी कोर्ट न्याय व्यवस्था कानून लागू करवाना चाहिए।
(03) जनमत संग्रह कानून लागू करवाना चाहिए।
(04) खनिज मुनाफा बंटवारा कानून लागू करवाना चाहिए।
(05) सभी सज्जन नागरिकों को केवल रजिस्ट्रेशन करवाकर बंदूक रखने का कानून का अधिकार दिलाने का कानून लागू करवाना चाहिए।
याद रक्खो!!
ईरान की बर्बादी की बारी आ जाने के बाद— अगला नंबर भारत का हो सकता है!!
और इसका जिम्मेवार आप सभी होंगे!!
--------------
जैसे आज ईरान अकेला लड़ रहा है ठीक वैसे हीं हमे बचाने वाला भी कोई नहीं मिलेगा!!
Komal Arora
जिंदगी तब अच्छी नहीं लगती जब कोई ना हो .......
मन के सवालों का जवाब देने वाला कोई ना हो......
अपने से पहले कोई रखने वाला ना हो.......
मन के तूफान का खोया हुआ रास्ता हो.......
ब्लकि तब लगती है जब सब खोने के बाद शांत मन हो और बोलने का मन भी ना हो........
और कोई आकर ढेर सारी बातों के साथ हमें समझना चाहता हो........
और मन भी बस शांत होकर सब सुनना चाह रहा हो.........
चुप होकर भी सब समझा जा रहा हो........
मन के किसी कोने में खोने का डर हो..........
और फिर वहीं बहुत कुछ खो कर कुछ पाना हो
...............
Komal Arora
A wrong timing and a right person........
no expectations with full of blessed person.......
no hopes with full of dreamy person.......
a fear of losing and full of gaining person.......
no life and full of life person.......
without dreams and full of expectations person.......
Don't know but two different personalities meet at a point when one being hopeless and other being hopefull for everything ...........
Alok Mishra
तरंगों से सराबोर हो जिंदगी
उमंगों से सराबोर हो जिंदगी
अबकी होली जी भर खेलो
कि रंगों से सराबोर हो जिंदगी
- Alok Mishra
jighnasa solanki
बचपन मे हम सब जब दोस्तो के
साथ होली खेलते थे, तो हमारी शकल
कुछ कुछ ऐसी ही दिखती थी।😜😜😜😁😁😁
🥳 🍭बुरा ना मानो होली है। 🥳🍭
🍭🍭🥳🥳 HAPPY HOLI 🍭🍭🥳🥳
Yogesh verma
"बाज़ार में बिकने नहीं, बस अपना दर्द सुनाने आया हूँ,
टूटे हुए दिलों की, मैं एक नई कहानी लाया हूँ।"
"पढ़ सको तो पढ़ लो 'वर्मा' के इन कागज़ों को,
मैं अपनी रूह के हर एक ज़ख्म को दिखाने आया हूँ।"
Yogesh verma
"दुनिया ने तो सिर्फ तमाशा देखा था,
दर्द क्या होता है, ये मेरी डायरी बताएगी।"
"भले ही कोई न सुने मेरी चीखें 'वर्मा',
पर मेरी कलम अब हर ज़ख्म की गवाही देगी।"
Rahul Raaj
मेरे भूतकाल और उसके भविष्य को भी होली की बहुत बहुत शुभकामनाएं...
भगवान उनको जीवन में बहुत खुशियां दे..
❤️❤️❤️😊😊😊😊😊🥰🥰🥰🥰
Kaushik Dave
વક્તનો આ માર છે, જિંદગી બદલાય છે,
કસોટી કરે છે ઈશ્વર, શું નૈયા પાર થશે?
બદલાવ આવે જીવનમાં, સુખશાંતિ ક્યાં છે?
ગુમાવી દીધેલાની યાદોમાં જ, જિંદગી જ જાશે?
- કૌશિક દવે
Kaushik Dave
વક્તનો આ માર છે, જિંદગી બદલાય છે,
કસોટી કરે છે ઈશ્વર, શું નૈયા પાર થશે?
બદલાવ આવે જીવનમાં, સુખશાંતિ ક્યાં છે?
ગુમાવી દીધેલાની યાદોમાં જ, જિંદગી જ જાશે?
- કૌશિક દવે
Arun
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A singh
"भांग का नशा तो बस कुछ देर का है,
मगर तेरे Ishq का नशा उम्र भर का है।
पिचकारी की धार तो बस एक बहाना है,
असली मकसद तो तुझे करीब लाकर सताना है!"
— A Singh
A singh
"इश्क की Holi हम कुछ इस तरह खेलेंगे,
तुझे अपनी बाहों में भर कर,
दुनिया के सारे रंग तेरे नाम कर देंगे।"
— A Singh
Bhatt Bhavin
અમને.... ગઝલ
જરૂરતથી કરે છે યાદ બધા અમને,
લડાવી લાડ સમજે છે ગધા અમને.
જુની વાતો જણાવી જાય છે થોડી,
પછી એ સંભળાવે છે કથા અમને.
નશાની આમ ધીરે ઘૂંટ મારું છું,
એ પણ લાગે હવે તારા સગા અમને.
જવાની તો બગાડી છે અમારી પણ,
લઈને આપવા આવે દયા અમને.
જઉં છું મંદિરે કોઈક ટાઈમે,
મળે સાહેબ તારી પણ ધજા અમને.
ભટ્ટસાહેબ.
A singh
नीला, गुलाबी, लाल ये सारा जहाँ,
सब फीका लगे तेरे बिना यहाँ।
इस होली तुझे दिल का रंग लगा दूँ,
जो कभी न उतरे, रहे उम्र भर वहाँ।
— A Singh
A singh
रंगों की बरसात हो, तेरी मेरी बात हो,
इस होली बस तू मेरे साथ हो।
हर रंग में बस तेरा ही नाम लिखूँ,
मेरी हर सुबह तेरे एहसास के साथ हो।
— A Singh
A singh
तेरे गालों पर जो गुलाल लगा दूँ,
अपनी मोहब्बत का रंग चढ़ा दूँ।
इस होली बस इतना सा अरमान है,
तुझे बाहों में भरकर दुनिया भुला दूँ।
— A Singh
A singh
हे शंभू,
या तो इस दर्द को ही मेरी इबादत बना दे,
या फिर कोई ऐसी मिरेकल वाली लहर चला...
कि उसकी नफ़रत भी, मेरे लिए मोहब्बत बना दे। 🌸
- A singh
Shailesh Joshi
સાચો પ્રેમ
સાચી લાગણી
અને સાચી વઢ
જે લોકોને એકવાર
આ ત્રણને સમજતા આવડી જાય,
તો એવા લોકોને એમના જીવનમાં ક્યારેય અફસોસ કરવા જેવું કંઈ ન થાય.
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