Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
PRASANG
“मजबूरी के साए”
होके मजबूर उसने बुलाया होगा,
छुपा दर्द जो दिल में दबाया होगा।
आँखों में नमी, लबों पे खामोशी,
कुछ अधूरा सा कहीं सुनाया होगा।
रास्तों की भीड़ में खोया हर पैग़ाम,
कहीं गहरा राज़ उसने छुपाया होगा।
रिश्तों की कसक में छुपा हर फसाना,
किसी ने कभी महसूस करवाया होगा।
हर जुबां से छिपा, हर दिल से दूर,
होके मजबूर, ए सब कहलाया होगा।
चलते-चलते रास्तों में यादें बुनता,
'प्रसंग' यही सोच में डूबाया होगा।
प्रसंग
प्रणयराज रणवीर
Prashant Singh
Marne ke bad agar dikha main kabhi
To thoda pila Dena
Jyada nahin mahine Mein ek bar
Mujhe mera ek purane shauk Chadha dena
Agar Ho Gaya pagal mein
Tum mujhe thoda samjha dena
Hunar Hai Tere pass
Apna waqt mat gaba dena
Agar Ho Gaya barbad mein
Mujhe gale se laga lena
Agar Main Bach Gaya marne ke bad bhi
Jyada nahi bus thoda pila Dena
Raste per dikha agar mangte khairat
Mujhe Tum samjha dena
Kya kar raha hun main
Mujhe Jara Bata dena
Agar Mar Gaya Main
To mujhe Aag Laga Dena
Bus Aag Laga Dena
PRASANG
મૌનના સાક્ષી
મૌનના સાક્ષી બધાં, પણ સત્યને કોણ માને?
હું જ દોષી ઠર્યો અહીં, મારી વેદનાને કોણ માને?
વિશ્વાસના પંજરમાં બંધાયા, ઘણા હાથ ખાલી થયા,
એ ગુમ થયેલા વચનોના ભારને આજે કોણ માને?
હસતા ચહેરા પાછળ છુપાવું, હું દુઃખ અંદર લઈને,
આ અંતરના ઘાવને, કોઇ આંસુ જોઈ કોણ માને?
હું તૂટ્યો, છતાં અવાજ અંદર જ રહ્યો,
આ ચીસ, આ તોડને, અંતે કોણ માને?
અલ્યા ત્યાં આવ્યો, મારા દુઃખની સાક્ષી બની,
પ્રત્યેક વેદનાને, એ પ્રસંગની આંખ કોણ માને?
પ્રસંગ
પ્રણયરાજ રણવીર
Sudhir Srivastava
दोहा - कहें सुधीर कविराय
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महाशिवरात्रि
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शिव महिमा को जानिए, या फिर शव लो मान।
बस इतना इस नाम का, मंत्र लीजिए जान।।
शिव ही शास्वत सत्य है, प्राणि मात्र का सार।
फिर चाहे जितना करो, निज कल्पित विस्तार।।
भोलेनाथ की आड़ में, नशा करें कुछ लोग।
लीला अद्भुत शिव प्रभो, मत कहिए संयोग।।
भूखे हैं शिव भाव के, और नहीं की चाह।
औघड़ दानी ने किया, माँ गौरा से ब्याह।।
जिसका आदि न अंत है, उसका है शिव नाम।
निर्मल मन जन पूजते, आप बनाते काम।।
शिव जी के दरबार में, भारी भीड़ अपार।
नीलकंठ से सब कहें, हमको भी दो तार।।
सुबह-सुबह यमराज जी, पहुँचे शिव दरबार।
शीश झुका कहने लगे, दर्शन दो सरकार।।
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नशा/सिगरेट
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बड़ी प्रिए जो आपकी, चिता बनी सिगरेट।
रोने से क्या फायदा, अंतिम है यह भेंट।।
सोच समझकर पीजिए, दारु शराब सिगरेट।
चाहे जितना पीजिए, नहीं भरेगा पेट।।
नशा किसी भी चीज का, देता दु:ख हजार।
सुख-समृद्धि से दूर कर, बिखराए परिवार।।
जो पीते सिगरेट हैं, बड़े मजे से नित्य।
डुबो रहे हैं आप ही, निज जीवन आदित्य।।
नशा किसी भी चीज का, होता नहीं विकल्प।
जितना जल्दी हो सके, ढ़ूँढों मित्र प्रकल्प।।
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तंग
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भाई बहनों में सदा, होती रहती जंग।
अपनों से जब दूर हों, तब रहते हैं तंग।।
मर्यादा का हो रहा, बुरा बहुत अब हाल।
उससे ज्यादा तंग है, मनुज हृदय का जाल।।
तंगहाल तो हैं मगर, उनका हृदय विशाल।
खाते हैं मिल-बाँटकर, दिखें सदा खुशहाल।।
कपड़े छोटे हो रहे, और संग में तंग।
फैशन के इस दौर के, अजब-गजब के रंग।।
अंग प्रदर्शन के लिए, कपड़े होते तंग।
और शिकायत आप से, कर्म पिता सब भंग।।
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होली
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बच्चों के हुड़दंग से, बूढ़े होते तंग।
मारपीट जब वो करें, देख-देखकर दंग।।
होली में अब वो कहाँ, पहले वाला रंग।
महँगाई से तंग है, संग मिलावट भंग।।
ननद भाभियों का नहीं, प्रेम प्यार का संग।
दोनों दिल से तंग हैं, लक्ष्मण रेखा भंग।।
होली का त्योहार है, डालो प्यारा रंग।
बूढ़े, बच्चे, बीमार को, पर मत करना तंग।।
होली के अब आड़ में, दुष्ट ढ़ूँढ़ते दाँव।
नारी होती तंग है, वो करते हैं काँव।।
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विविध
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सतगुरु सुमिरन कीजिए, हो कोई भी वार।
वही करेगा आपका, जीवन बाधा पार।।
सतगुरु सुमिरन नाम का, इतना सा है सार।
द्वंद्व छोड़ निश्चिंत हो, रखकर दूर विकार।।
सचमुच मैं पागल हुआ, समझा मैंने आज।
फिक्र किसी की क्यों करूँ, समझ गया जब राज।।
नाहक इतना ज्ञान क्यों, व्यर्थ बाँटते आप।
कलयुग का इक सार है, करो स्वार्थ का जाप।।
चलो न ऐसे मार्ग पर, जिसका ओर न छोर।
मन की वाणी भी सुनो, व्यर्थ करो मत शोर।।
कांटे पर चलिए मगर, बड़े ध्यान से आप।
चलो न ऐसे मार्ग पर, घात लगाए पाप।।
मन दुविधा में हो तनिक, चलो न ऐसी राह।
पहले खूब विचारिए, रोको मन की चाह।।
बड़ा अनूठा जन्म से, देता स्वयं प्रमाण।
हँसता है वो प्रेम से, सहत जीवन त्राण।।
गाँव भूल हम फँस गए, यहाँ बहुत है शोर।
समय हमारे पास है, चलें गाँव की ओर।।
धन वैभव यूँ ही नहीं, मिलता ये लो जान।
व्यर्थ बैठकर आप भी, नहीं खुजाओ कान।।
बिना कर्म कुछ कब मिले, मुफ्त दे रहा ज्ञान।
जानबूझ मूरख बने, या फिर हो अंंजान।।
खुशियाँ देकर वो गई, था उसका अधिकार।
आँखों में आसूँ लिए, सौंपा प्यार दुलार।।
मेरी वो है लाड़ली, मेरा जीवन सार।
ऐसा मुझको लग रहा, देगी मुझको तार।।
जिसकी मुझे तलाश थी, ईश कृपा के साथ।
आकर पीछे से रखा, मम कंधे पर हाथ।।
पहले आप उधार दो, पीछे करो तलाश।
या फिर घर बैठिए, होते रहो निराश।।
आप मदद जाकर करो, होना है बेकार।
और एक दिन आप से, वहीं करें तकरार।।
भला धरा पर कौन है, जिसको कहें अशोक।
किस माई के लाल में, सके शोक को रोक।।
कभी -कभी सच मौन हो, कहता दर्पण बात।
मानो मेरी बात या, चाहे मारो लात।।
आज जान पहचान का, होता है नुकसान।
बुद्धिमान यदि आप हैं, तभी बनेगा काम।।
आज स्वयंभू बन करें, खुद का खूब बखान।
भले शून्य से अधिक का, उन्हें नहीं है ज्ञान।।
आप कलम को दीजिए, सदा उचित सम्मान।
माँ शारद की हो कृपा, नित्य बढ़ेगा ज्ञान।।
अपना कहना सरल है, मगर कठिन अपनत्व।
काम पड़े तब गुम रहें, बक-बककारी तत्व।।
धोखों का संसार है , माथा-पच्ची व्यर्थ।
जिसे समझ इतनी नहीं, निश्चित लिखा अनर्थ।।
समय पड़े तब पूछते, वही हमारे मित्र।
बिना स्वार्थ जो खींचते, मम जीवन का चित्र।।
संत वेश धारण किए, करते ऐसे काम।
कलयुग के ये हैं सभी, कालिनेम के राम।।
शांत सौम्य स्वभाव ही, रखते संत सुजान।
व्यर्थ तमाशा मत करें, पाते अतुलित मान।।
मुखिया केवल नाम के, नहीं रहा अब भाव।
नीरस जीवन हो गया, छुपा रहे निज घाव।।
फैल रहा है जगत में, उन्मादी उत्पात।
ज्वालाएं प्रतिशोध की, चलता जूता लात।।
ज्वाला शीतल कीजिए, क्यों कर व्यर्थ विवाद।
सब मिल ऐसा कीजिए, सुखदा जिसका याद।
सतरंगी परिधान में, बच्चों का अंदाज।
अकड़ दिखाते इस तरह, जैसे हों महराज।।
भला चाहते देश का, बंद करो खैरात।
कुछ सोचो सरकार अब, नहीं खिलाओ भात।।
बेमतलब की रेवड़ी, बढ़ा रही है भार।
चाह रहा है देश भी, बाँटो मत उपहार।।
बिना शर्त के कीजिए, आप सभी व्यवहार।
बढ़े प्रेम सद्भाव भी, दूर रहे तकरार।।
शर्त सदा ही जीत की, देती हमको राह।
ऐसी शर्त से क्या भला, पैदा करती आह।।
दाना-पानी के लिए, करना पड़ता कर्म।
हर प्राणी का यही है, सबसे पहला धर्म।।
अभिमानी जन नित करें, निज का ही गुणगान।
समझ नहीं वे पा रहे, सिमट रहा है मान।।
मुखिया बनने के लिए, मची देखिए होड़।
अपने भी इस द्वंद्व में, देते रिश्ता तोड़।।
आये खाली हाथ थे, जाना खाली हाथ।
फिर भी गाना गा रहे, जन्म-जन्म का साथ।।
उस रास्ते पर मत चलो, जिसका ना हो बोध।
निश्चित ही उस राह में, आना है अवरोध।।
क्यों जाना उस राह पर, जिसका ओर न छोर।
नहीं पकड़ में आ रही, हाथ किसी के डोर।।
ज्ञान नहीं यदि आपको, चलो न ऐसी राह।
इच्छा अपने आपकी, करो दबाकर आह ।।
ऐसा रस्ता मन चुनो, जो दे तुमको घाव।
जानबूझकर व्यर्थ में, आप गिराओ भाव।।
अपने भी लगने लगे, अब तो आज सूदूर।
कलयुग का यह रंग है, या बनते मजबूर।।
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कौन निकट है आपके, बड़ा प्रश्न है आज।
सोच समझ अब लीजिए, तभी बचेगा लाज।।
बच्चे अब सुनते नहीं, मातु-पिता की बात।
अपने मन की कर रहे, रुला रहे दिन रात।।
हमने माना आपको, सदैव अपना ज्येष्ठ।
मगर कभी क्या आप भी, बनकर आए श्रेष्ठ।।
ताना हमको मारते, सब अपने ही लोग।
भला फिक्र मैं क्यों करूँ, यह सामाजिक रोग।।
अब दुनिया में दिख रहे, कैसे - कैसे लोग।
जैसे नित अब बढ़ रहे, भाँति-भाँति के रोग।।
चिंता अपनी कीजिए, करते रहिए योग।
इस चक्कर में बिन पड़े, कैसे-कैसे लोग।।
चिंता अपनी कीजिए, करते रहिए योग।
इस चक्कर में बिन पड़े, कैसे-कैसे लोग।।
कैसे -कैसे लोग अब, दूषित रखें विचार।
नीति-नियम सिद्धांत का, भूल रहे आधार।।
आप नहीं क्या जानते, राजनीति का खेल।
कैसे -कैसे लोग भी, बेंच रहे हैं तेल।।
ताना हमको मारते, सब अपने ही लोग।
भला फिक्र मैं क्यों करूँ, यह सामाजिक रोग।।
समय आड़ में कूदकर,आ जाता संयोग।
आप सोचिए ईश का, है बेवजह प्रयोग।।
मत कहिए संयोग से, बिगड़े सारे काम।
इसके पीछे आप हैं, टकराते थे जाम।।
यह कैसा संयोग है, दुनिया में उत्पात।
दुश्मन चाहें इन दिनों, कैसे हो प्रतिघात।।
कवि-लेखक के साथ में, यह कैसा संयोग।
निर्धनता अरु बेबसी, आया चला प्रयोग।।
आया समय मशीन का, यही समय की माँग।
चूक हुई तो एक दिन,सब कुछ होगा राँग।।
ए आई की शरण में, गिरे जा रहे लोग।
बहती गंगा में सभी, करें दिखावा योग।।
तकनीकों के जाल में, उलझ रहें हैं लोग।
लोग हुए बेकार अब, क्यों मानें संयोग।।
रोजगार गायब सभी, बढ़ा मशीनी जाल।
मानव नित अब हो रहा, दिनों -रात बेहाल।।
सुधीर श्रीवास्त
Vrishali Gotkhindikar
पत्र सुमने 3
प्रिय सोना
आज पाणीपुरी खायला गेले आपल्या नेहेमीच्या माणसा कडे
पूर्वी आपण दर पंधरा दिवसाला जाऊन पाणीपुरी खात असू
आधी रगडा पॅटीस मागवायचे हा माझा शिरस्ता
तू मात्र दही शेव पुरीला पसंती द्यायचा
ते एक प्लेट खाऊन झाले की
आपल्या हातात पाणी पुरी साठी बशी दिली जात असे
तुला पाणीपुरी मध्ये कांदा हवा असे
हे नेहेमीचे असल्याने त्या माणसाला सांगायला लागत नसे
त्याचे पाण्याचे कॉम्बिनेशन इतके परफेक्ट असे की वेगळे काही सांगावे लागत नसे
एवढ्या दोन प्लेट झाल्या की आपले मन
तृप्त होत असे
खरेतर काही दिवसापूर्वी जायचे चालले होते आपले पाणीपुरी खायला ..
पण या ना त्या कारणाने राहून गेले
आणि मग तुझे आजारपण सुरू झाले
आणि मग कुठली पाणी पुरी..
त्या आठवणीत काल गेले होते तिकडे
खुप गर्दी होती लोकांची त्यामुळे
गाडीवाला जाम बिझी होता
लवकर द्या की आम्हाला असे म्हणल्या वर म्हणाला
सहा सहा महिने येत नाही आणि आला की गडबड करता होय
त्याला काय माहित या मागील सहा महिन्यात काय काय रामायण घडले आहे
पाणी पुरी तशी बरी होती
पण आपली पूर्वीची मजा मात्र नाही आली
ती सगळी मजा तुझ्या बरोबर निघून गेली रे...
Sudhir Srivastava
चौपई - होलिका
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दहन होलिका छाया रंग।
नाच रहे हैं पीकर भंग।।
बच्चे बूढ़े सब हैं मस्त।
सभी आज लगते हैं व्यस्त।।
आगे बढ़कर आओ आप।
प्रेम प्यार का करिए जाप।।
दहन होलिका होगा शाम।
जल्दी से निपटा लो काम।।
प्रेम प्यार से खेलो रंग।
खुशियों में मत घोलो भंग।।
दहन होलिका का संदेश।
समझो मानवता परिवेश।।
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सुधीर श्रीवास्तव
Sudhir Srivastava
चौपाई - जन्मभूमि
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जन्मभूमि होती अति प्यारी।
हो अमीर गरीब दुखियारी।।
जन्मभूमि की अजब कहानी।
खट्टी-मीठी बोली बानी।।
जन्मभूमि को भूल न जाना।
इसकी मिट्टी माथ सजाना।।
सदा गर्व इस पर नित करना।
वैसे भी इक दिन है मरना ।।
जन्मभूमि का समय नहीं है।
आज यहाँ कर और कहीं हैं।।
जन्मभूमि हम छोड़ रहे हैं।
इससे नाता तोड़ रहे हैं।।
जन्मभूमि की पीड़ा सुनिए।
बंशी इसके सुरों की बनिए।।
नाहक में रिश्ता मत तोड़ो।
अरे बेशरम मुँह ना मोड़ो।।
सुधीर श्रीवास्तव
Chaitanya Joshi
મારી તમારાથી કોઈ ઓળખાણ નથી.
તોય તમે મારાથી સાવ અજાણ નથી.
આપણી યારી અરસપરસની અખંડ,
છતાં એની આપણને કોઈ જાણ નથી.
તરવો છે સમંદર છોને ઉતંગ અકળાવે,
જાતમહેનતથી બાકી કોઈ વહાણ નથી.
ભરાઈ એટલી ભરી છે બુદ્ધિ માનવમાં,
આપવામાં રાખી કોઈ એણે તાણ નથી.
ભાઈબંધીની આશાએ ભેળા કીધા એણે,
અહીં કરવાનું કોઈએ કદી રમખાણ નથી.
-ચૈતન્ય જોષી. " દીપક" પોરબંદર.
Sonam Brijwasi
read now ज़ख्मों की शादी
on pratilipi and mratubharti....
Sudhir Srivastava
चौपाई
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उसने शीश हाथ जब फेरा।
मुखमंडल मुस्कान बिखेरा।।
छोटी को इससे क्या लेना।
माँ बन खिला रही जब छेना।।
आओ मिलकर शोर मचाएं।
हंँसे हँसाएँ और रुलाएँ।।
नव जीवन सौगातें बाँटें।
भूल ही जाएँ चुभते काँटे।।
इतना तो नादान नहीं हो।
वही गलत या आप सही हो।।
व्यर्थ नहीं तकरार कीजिए।
स्वागत कर सम्मान दीजिए।।
ममता देती माँ के जैसी।
जब-तब बिल्कुल दिखती वैसी।।
फिर भी भूल नहीं तुम जाना।
हिटलर लगते उसके नाना।।
सुधीर श्रीवास्तव
Ruchi Dixit
एक क्षण में बिना तर्क वितर्क अन्त:स्वीकार कर लें उससे गहरा नाता कभी किसी का नहीं होता ।
- Ruchi Dixit
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1HJ9267UPC/
Armin Dutia Motashaw
AS OUR WORLD FACES A CRISIS....
Lord,
My Lord, O dear Lord, please listen to my humble plea,
Grant this world peace before the devil breaks it into many a piece.
Anar
PRASANG
“नारी की क्रांति”
क्रांति होगी, शांति होगी, हर नारी जीती जागती होगी,
अँधेरों के साये में भी उसका उजाला चमकती होगी।
सपनों की ऊँचाई तक वह उड़ान भरती होगी,
हौसले, साहस की मिसाल हर दिल में चमकती होगी।
ज्ञान की मशाल थामे, पथ-पथ रोशन करती होगी,
भय और डर की दीवारें अब टूटती दिखाई देती होगी।
आँखों में विश्वास, मन में शक्ति, हर कदम बढ़ती होगी,
संघर्ष की हर राह को नारी सफलता से सजाती होगी।
विश्व महिला दिवस पर गूंजती उसकी कीर्ति होगी,
आत्मसम्मान की ज्योति हर दिशा में जगमगाती होगी।
कहता है प्रसंग, वक़्त बदलेगा, तस्वीर बदलती होगी,
जब नारी अपने सच की पहचान खुद गढ़ती होगी।
प्रसंग
प्रणयराज रणवीर
Std Maurya
तेरी नित्य नयन की रंगत से,
फूलों सी महक महकती है।
पैरों में चोट लगे फिर भी,
हम हँस कर उसे विषर जाते हैं।
चली गई तू कहाँ कि मैं,
तुझे अब कहाँ तराशूँ मैं ?
एक ज़ख्म अभी भरता नहीं,
कि दूजा चोट बन जाता है।
अब तू ही बता कि ऐ सनम,
मैं तुझे कहाँ तराशूँ?
जब थी तू मेरे पास तो,
यूँ ही सब कुछ दिख जाता था।
जब से चली गई तू दूर कहीं,
हर जगह अंधकार ही दिखता है।
अब तू ही बता कि मैं,
तुझे अब कहाँ तराशूँ मैं ?
आईने में ढूँढा, तराशा बागों में,
कहीं भी न दिखी तू मुझको।
अब तू ही बता कि मैं,
तुझे और कहाँ तराशूँ मैं ?
तेरे शब्दों में लीन होकर,
तेरी बातें सबको सुनाता हूँ।
अब तू ही बता ऐ हमदम,
तेरे रंगीन शब्द कहाँ तराशूँ मैं?
कवि -एसटीडी मौर्य ✍️
दूरभाष 7648959825
#stdmaurya #std
Abantika
गुड आफ्टरनून फैमिली! ☀️नमस्ते सबको! आज मार्च की पहली तारीख है और ऊपर से सुहावना रविवार। महीने की इतनी शानदार शुरुआत और क्या चाहिए? 🌸✨
...आज तो सबकी छुट्टी होगी! तो बताइए, आज का दिन कैसा बीत रहा है? घर के काम, ढेर सारी नींद या आपकी फेवरेट कहानियाँ? 📖☕
खुश रहिए और इस नए महीने का स्वागत मुस्कुराहट के साथ कीजिए! 😊✨आप की Lavanya 🎀✨️
Narendra Parmar
तुम्हारी जुल्फों की तारीफ में
में एक शेर पेश करता हूं !
जूएं तो बहुत है तुम्हारे बालों में
फिर भी मैं तुम्हें शिकायत नहीं करता हूं !
कहीं तुम मुझे छोड़ कर न चली जाए इसलिए ???
में तुम्हारे कंधे पर अपना सर रख कर
तुम्हारे शर की एक एक जूएं अपने शर पर ट्रांसफर करता हूं ।
नरेन्द्र परमार ✍️
Narendra Parmar
रुखा सुखा ग़ुलाब लेकर आ गए हैं हमें इज़हार करने !
जेब में तो फूटी कौड़ी नहीं है और आ गए हैं हमें दीदार करने ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Gautam Patel
દુર્લભ ફળ કોકો-દ-મેર
અઢારમી સદીમાં કોકો દ મેરના અસ્તિત્વ
વિશે માનવજાતને પહેલી વાર જાણ થઇ
હતી--અને છતાં લગભગ અઢીસો વર્ષે
આજે પણ તે ફળનું નામ
સાંભળતાવેંત આશ્ચર્ય
અનુભવતા લોકોની સંખ્યા
બહુ મોટી છે. કારણ દેખીતું
છે. કોકો દ મેર હિંદી
મહાસાગરમાં આવેલા
સેશલ્સ ટાપુ સિવાય જગતમાં
બીજે ક્યાંય થતું નથી. વળી
સેશલ્સ ટાપુ પર પણ તે દુર્લભ
હોવાથી સ્થાનિક સરકારે
કોકો દ મેરની નિકાસ પર
પ્રતિબંધ મૂક્યો છે. પરિણામે સેશલ્સની મુલાકાત લેનારા
પ્રવાસીઓ સિવાય કોઇને
કોકો દ મેર નજરોનજર જોવા
મળી શકતું નથી.
https://www.facebook.com/share/p/1WgtzC527H/
DrAnamika
वैचारिक मतभेद, मनभेद,व,संघर्ष नए विचारों के जन्मदाता होते हैं "
#डॉ_अनामिका #हिंदी_गद्य #हिंदी_साहित्य #गद्य_कृति #हिंदी_का_विस्तार
#हिंदी_का_विकास
Kiran Kumar
Agar kisiko loan ki jarurat hai aur unko bas jald se jald loan chahiye to ek Certified Partner se hi loan lena chahiye naki kisi fraud loan Apps se to
abhi message kare :-
Dhamak
तुम हो तो लगता है, ज़िंदा हूँ मैं मुझमें कहीं
तुम हो तो लगता है, हाँ प्यार के लायक हूँ मैं
तुम हो तो लगता है, मेरा घर भी अब 'घर' है
वरना इन चार दीवारों में, क्या रखा है मेरी जाँ...
तुम हो तो जीने की इक नई उम्मीद है,
जब भी मैं तुम्हें देखती हूँ,
लगता है थोड़ा और जियूँ, बस सिर्फ तुम्हारे लिए!
जब से तुम मेरी ज़िंदगी में आई हो,
लगता है जैसे दो परियाँ मेरा ख्याल रखने,
उस ऊपर वाले ने ज़मीन पर भेज दी हैं...
(बेटियां बहुत प्यारी होती है
जितना हो सके उतना उन्हें प्यार दे)
DHAMAK
Narayan
💞💞 "कोई पूछे मुझसे
#इश्क़ की ख़ासियत__🌹
तो बस, #बेहिसाब लिख दूँ..💞💞
"तू मेरी #नज़रों में
एक बार देख तो सही_🌹
मैं तेरी नज़रों पर,#किताब लिख दूँ..💕
SAYRI K I N G
लिपिस्टिक भी क्या चीज़ हैं
होठों पे लग जाए तो दांत खिल जाते है
अगर
शर्ट में लग जाए तो
दांत हिल जाते हैं
Priya kashyap
Happy Holi to all ☀️🕉🎨
Yogesh verma
भले ही छत मेरी गिर गई, अब खुले आसमान में उड़ूँगा मैं,
उसकी गली से गुज़रूँगा पर, अब पीछे कभी न मुड़ूँगा मैं।"
"भले ही मकां मेरा उजड़ गया, उसे फिर से खड़ा करूँगा मैं,
वो दिल तोड़ दे लाख बार 'वर्मा', प्यार तो उसी से करूँगा मैं।"
- Yogesh verma
Std Maurya
"आजकल यह सवाल हर किसी के मन में उठता है कि लड़के बेवफा होते हैं या लड़कियां? असल में सच्चाई क्या है, यह कोई नहीं जानता, क्योंकि सब एक-दूसरे पर दोष मढ़ने में लगे हैं। कोई भी जड़ तक जाकर असलियत जानने की कोशिश नहीं कर रहा।
मैंने बहुत से लोगों से मुलाकात की और उनकी बातों को समझने का प्रयास किया। समाज में भी यह साफ दिख रहा है कि शादी के कुछ ही सालों बाद विवाद शुरू हो जाते हैं और बात कोर्ट-कचहरी या मुकदमों तक पहुँच जाती है। लेकिन इसके पीछे के असली राज को जानने की कोशिश कोई नहीं करता कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
आजकल के बच्चे महज 14-15 साल की उम्र में ही रिश्तों (Relationships) में पड़ जाते हैं और शारीरिक संबंध तक बना लेते हैं। इस कच्ची उम्र में वे केवल चेहरे के आकर्षण को ही सच्चा प्यार समझ बैठते हैं। साथ ही, छोटे बच्चे सोशल मीडिया पर अश्लील विज्ञापन और वीडियो देखते हैं, जिससे उनके मन में समय से पहले ही कामुक भावनाएं और प्रेम-प्रसंग के विचार उत्पन्न होने लगते हैं।
हमें इन गंभीर विषयों पर ध्यान देना चाहिए। जो चेहरा कल तक हमेशा हँसता-मुस्कुराता रहता था, आखिर उस पर इतनी निराशा और उदासी कैसे आ गई? हमें दोष देने के बजाय सुधार की दिशा में सोचना होगा।"
Yogesh verma
वो हाथ जो कभी मेरे हाथ में थे, आज दूर हो गए,
जिस छत के नीचे सोता था मैं, वो मकां चूर हो गए।
जी तो रहा हूँ 'वर्मा', मगर अब मरना ही लिखा है,
मोहब्बत के बाज़ार में हम इस कदर मजबूर हो गए।"
Yogesh verma
जिस रास्ते पर जाने की मेरी गुज़ारिश थी,
वो रास्ता अब मेरे लिए हमेशा को बंद हो गया।
ज़ख्मों का चेहरा ढंक लिया है मैंने इस कदर,
कि उस तरफ जाने का हर वो इरादा मंद हो गया।"
Tr. Mrs. Snehal Jani
લગ્ન મા ભૂરો જમતો હતો..
યજમાન: તમે કોના તરફથી આવ્યા છો?
ભૂરો:કોઈ ના તરફથી નહી.પણ મારા બાપા કહેતા કે તુ કોઇક ના પ્રસંગ મા જઇશ તો કોક તારે ત્યા આવશે....
એટલે જમવા આવ્યો છું..
😀😀😀
Happy Sunday
.
SAYRI K I N G
मरते समय लिखूंगा तेरा नाम अपने हथेली पर ।
मुझे दुनिया की तरह खाली हाथ नहीं जाना।
A singh
"हर बार ज़ोर-ज़ोर से टूटना, अब मेरी आदत है,
बिखरकर फिर से जुड़ना, एक बुरी सी इबादत है,
मौत तो बस एक दफा आती है सुकून लेकर,
रोज़-रोज़ ये किश्तों में मरना, कैसी कयामत है।"
_ A Singh
Kaushik Dave
સ્વપ્ન તૂટ્યું ને આંખ ઉઘડી, થયો પક્ષીઓનો કલરવ,
ચારે બાજુ રેલાયો જાણે, તારો જ મધુર રવ.
કહેતી હતી દુનિયા આખી કે 'છેલ્લો દિવસ છે આજ',
પણ મારે મન તો ખુલ્યા હતા, તારા મિલનના દ્વાર.
અફાટ આ દરિયા જેવાં દુઃખમાં, તું કિનારો થઈને આવ્યો,
મારા હૈયાના કોડિયામાં, તું અખંડ દીવો થઈને છાયો.
વિશાળ આકાશ જેવી તારી કૃપા, મુજ પર સદાય વરસે,
હવે મારો આત્મા તારા ચરણોમાં, પળ-પળ હરખે.
મેં તો માગી હતી તારી હાજરી, હર પળ મારી પાસ,
તેં સ્મિત આપીને કરી દીધો, પૂરો મારો આશ.
નથી ડર હવે ડૂબવાનો, કે નથી ડર આ અંતનો,
કારણ કે મારી ભીતર વસે છે, સાથ તારા અનંતનો.
મનોજ નાવડીયા
રોજ રોજ હળવું સ્મિત લઈને આવે છે
આંખના રુદનથી મને છૈતરવા આવે છે.
-મનોજ નાવડિયા
#love #literature #suvichar #morning #shayari
https://www.instagram.com/reel/DVU39tIDE1u/?igsh=eTFkeWMzMXlpNTR1
Nency R. Solanki
જેટલા તમે ઉપલબ્ધ છો,
એટલા જ મૂલ્યવિહીન છો!
- Nency R. Solanki
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
શીર્ષક: રસ્તે રઝળતા વિચારો
પ્રકાર: અછાંદસ કાવ્ય
શહેરના ઘોંઘાટ વચ્ચે એક પ્રશ્ન મનમાં અટકી જાય છે,
કે આ રીક્ષા ક્યાં હાલતી હશે?
કોઈની રાહ જોવાતી હશે કે કોઈને છોડવા જતી હશે?
કે પછી માત્ર નસીબના પૈડાંની જેમ,
એ પણ કોઈ અજાણ્યા રસ્તે વિના કારણ ફરતી હશે?
ને વળી, પવનની એક લહેરખી આવે છે,
સાથે લઈ આવે છે કોઈ વઘારની સોડમ,
ત્યારે તર્ક બાજુએ રહી જાય છે અને,
ક્યારેક એમ થાય કે આ ચટપટી વાનગી ક્યાં પીરસાતી હશે?
કયા ખૂણે, કયા ચૂલા પર આ સ્વાદ ચડતો હશે?
બસ, એ વિચાર માત્રથી જ સંયમ તૂટી જાય છે,
ભૂખ અને લાલચ વચ્ચેની ભેદરેખા ભૂંસાઈ જાય છે,
ત્યારે સમજાય છે કે આ દેહ પણ ગુલામ છે સ્વાદનો,
નહીંતર, માત્ર કલ્પનાથી જ...
મોઢામાં આવતું પાણી "સ્વયમ્' લાર બની ટપકતું કેમ હશે?
કદાચ, આ રિક્ષાની ગતિ અને જીભની તૃપ્તિ,
એ બે વચ્ચે જ તો આખું જીવન "સ્વયમ્'ભૂ" દોડતું હશે!
અશ્વિન રાઠોડ સ્વયમ્'ભૂ
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
શિર્ષક: "ભાગીદારી અને જતું કરવું"
પ્રકાર: અછાંદસ કાવ્ય
ભાગીદારી એટલે શું?
માત્ર ત્રાજવે તોલેલો સમાન હિસ્સો?
અડધું તારું ને અડધું મારું, એવો કોઈ વ્યાપારી કિસ્સો?
ના...
સંબંધોના સરવાળા ક્યારેય ગણિતના ચોપડે નથી લખાતા.
સાચી ભાગીદારી તો ત્યાં છે,
જ્યાં 'હું' ની હદ પૂરી થાય અને 'આપણે' નો વિસ્તાર શરૂ થાય.
જ્યાં ક્યારેક તારી જીદ સામે,
મારું મૌન એક મલકાટ બનીને નમી પડે...
અને ક્યારેક મારી ક્ષતિઓને,
તારો ખભો એક હૂંફાળો ટેકો બનીને સહી લે.
જતું કરવું એ કોઈ હારની નિશાની નથી,
એ તો સંબંધને જીતાડવાની સૌથી સુંદર અને મૌન ઉજવણી છે.
જેમ નદીને ખળખળ વહેવા દેવા,
કિનારો પોતાની હદમાંથી થોડી જગ્યા ખાલી કરી આપે છે...
અને વૃક્ષને ખુલ્લા આકાશમાં મ્હોરવા,
મૂળિયાં કાયમ માટે અંધકારને સ્વીકારી લે છે.
એમ જ... એકબીજાના અસ્તિત્વને વધુ નિખારવા,
થોડુંક સંકોચાઈ જવું, થોડુંક હસીને જતું કરવું,
એ જ તો છે સાચા સ્નેહની ઓળખ.
કારણ કે...
જ્યાં પોતાના કરતાં સામા પાત્રની ખુશી પ્યારી છે,
અને જ્યાં હસીને 'જતું કરવાની' તૈયારી છે,
બસ, ત્યાં જ તો "સ્વયમ્'ભૂ" જિંદગીભરની અકબંધ ભાગીદારી છે!
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
માનવતા: એક જીવંત ધબકાર
પ્રકાર: અછાંદસ કાવ્ય
શબ્દકોશના પાનાઓ વચ્ચે
દબાઈ ગયેલો કોઈ અક્ષર નથી માનવતા,
એ તો ભીડમાં અટવાયેલા
કોઈ અજાણ્યા શ્વાસનો ધબકાર છે.
જ્યારે કોઈ ધર્મ કે જાતિના ચશ્મા વિના,
ખાલી એક માણસ થઈને
બીજા માણસના આંસુ લૂછવા હાથ લંબાય,
ત્યારે એ આંગળીઓના ટેરવે માનવતા શ્વાસ લે છે.
રસ્તા વચ્ચે ઠોકર ખાઈને પડી ગયેલાને
ઊભો કરવા માટે,
જોડાયેલા એ બે હાથમાં
કોઈ મંદિરમાં ન હોય એવો ઈશ્વર વસે છે.
યંત્રોની માફક દોડતી આ દુનિયામાં,
ભૂખ્યાને વહેંચીને ખાધેલો અડધો રોટલો,
કે કોઈ નિરાશ ચહેરા પર લાવેલી એક મુસ્કાન,
એ જ તો છે આપણા 'માણસ' હોવાની સૌથી મોટી સાબિતી.
માણસાઈ કોઈ પુસ્તકમાંથી શીખવવાની વસ્તુ નથી,
એ તો ભીતર પ્રગટેલો એક અખંડ દીવો છે,
બસ, કોઈની જિંદગીના અંધારામાં
જરાક અજવાળું કરવાની "સ્વયમ્'ભૂ" દાનત જોઈએ.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
વિષય: હોળી ધૂળેટી
શિર્ષક: ફાગણનો રંગ
પ્રકાર: અછાંદસ કાવ્ય
ફાગણનો રંગ
ને ફાગણનો આ આકરો તડકો,
અને ડાળે ડાળે મહોરી ઉઠેલો કેસૂડો,
જાણે વસંતે પૃથ્વીને
રંગોનું આમંત્રણ મોકલ્યું છે.
ચોકમાં પ્રગટેલી હોળીની જાળ,
ફક્ત લાકડાં કે છાણાં જ ક્યાં બાળે છે?
એ તો બાળે છે મનમાં પડેલી ખટાશ,
અહંકારના જૂના જાળાં,
અને ઉગારે છે આપણા ભીતરના પ્રહલાદને.
ને પછી સવાર પડે છે ધૂળેટીની...
હવાના દરેક શ્વાસમાં ઊડે છે ગુલાલ,
પીચકારીમાંથી છૂટતા રંગીન પાણીની ધાર,
શરીરને તો ખાલી અડે છે,
પણ એ સીધી જઈને હૈયાને ભીંજવે છે.
લાલ, લીલો, પીળો કે ગુલાબી...
ચહેરા પર લાગ્યા પછી ક્યાં કોઈનો હોદ્દો કે ભેદ રહે છે?
બધા જ રંગો એકબીજામાં ભળીને
અંતે તો બસ એક જ રંગ બનાવે છે -
સ્નેહનો અને માણસાઈનો રંગ.
આવો,
આજે કોરા ન રહીએ.
વર્ષભરની દોડધામમાં ક્યાંક ઝાંખા પડેલા
આ જિંદગીના કોરા કેનવાસને,
ફાગણના આ અલ્લડ રંગોથી છલકાવી દઈએ.
થોડા તમે "સ્વયમ્'ભૂ" રંગાઓ, થોડા અમે "સ્વયમ્'ભૂ" રંગાઈએ!
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
महेश रौतेला
बहुत समय से टिकी है पवन
पृथ्वी पर,
बहुत समय से टिके हैं वृक्ष
पृथ्वी पर,
बहुत समय से टिकी हैं नदियां
पृथ्वी पर,
बहुत समय से टिके हैं पहाड़
पृथ्वी पर,
बहुत समय से टिका है समुद्र
पृथ्वी पर,
महाभारत से पहले और महाभारत के बाद
बहुत समय से टिका है मनुष्य
पृथ्वी पर।
*** महेश रौतेला
Imaran
सोचा ही नहीं था, जिंदगी में ऐसे भी फसाने होंगे,
रोना भी ज़रूरी होगा, और आंसू भी छिपाने होंगे
💔imran 💔
SAYRI K I N G
एक रंग रिश्तों पर ऐसा लगाएं की शब्द भीग जाएं पर अर्थ बहने न पाए ..
- SAYRI K I N G
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
साथ हो तो बात हो
साथ हो तो बात हो सकती हैं ना l
जिंदगी आसानी से कटती हैं ना ll
जिस तरह से भी रखो रहती है l
पालने के साथ ही पलती हैं ना ll
रुकती है ना वो ठहरती है सखी l
तेज धारा संग जो सरती हैं ना ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Chintansinh Jadav
https://www.matrubharti.com/book/19989481/hindi
શુભ સવાર 🙏
પ્રેમ કોને કહેવાય
પ્રેમ શું છે !
શું પામવાથી જ પ્રેમ છે?
ક્યારેક દુર રહીને તો
ક્યારેક નિભાવીને પણ પ્રેમ થાય
ક્યારેક સંભાળ રાખીને તો
ક્યારેક પ્રેમનું ભવિષ્ય નથી છતાં પણ પાસે રાખીને
આવી જ કાંઈક નાની અમથી સ્ટોરી નો પ્રયત્ન આપ સમક્ષ રજુ કર્યો છે , "" खामोशी से जन्मा प्रेम "" આશા રાખું કે આપ સૌને ગમશે
ધન્યવાદ
Saliil Upadhyay
તેલ લેવા જા હવે એ પણ કોઈ ને નથી કહેવાતું...
સામેથી કહે:2750 નો ડબ્બો મોંઘો પડે...!
બોલો હવે..ઠોકો તાળી અને રવિવારે મોજ કરો...🤣
Shefali
#shabdone_sarname__
kajal jha
कभी-कभी इंसान इसलिए नहीं टूटता कि उसके पास कोई नहीं होता,
बल्कि इसलिए टूटता है कि जिस पर भरोसा होता है, वही बदल जाता है।
सच तो ये है कि दर्द आवाज़ नहीं करता,
वो बस चुपचाप दिल में घर बना लेता है। 💔
- kajal jha
બદનામ રાજા
अगर कोई तुम्हारी प्रतिक्षा में नहीं है,
तो तुम्हारा उस जगह लौटना व्यर्थ है...
🌸
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
अभिमानी इस जगत में, कभी न पाता मान। सहनशील है जौ पुरुष, वह पाता सम्मान।।
दोहा -436
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
Bk swan and lotus translators
The spotlight is yours! Whether you're hosting a wedding, a corporate gala, or a local talent show, a great emcee (Master of Ceremonies) is the "glue" that keeps the event from falling apart.
To give you exactly what you need, I’ve broken down the essentials of the role.
1. The Emcee’s Core Responsibilities
* Pacing: Keeping the event on schedule (the "timekeeper").
* Energy: Setting the mood and keeping the audience engaged.
* Transitions: Bridging the gap between speakers or segments smoothly.
* Housekeeping: Announcements regarding exits, bathrooms, and social media hashtags.
2. A Standard Script Framework
If you’re staring at a blank page, use this flow:
| Segment | Purpose | Key Phrase Example |
|---|---|---|
| The Hook | Grab attention immediately. | "Good evening, everyone! Are we ready to celebrate?" |
| The Welcome | Acknowledge the occasion/hosts. | "On behalf of [Organization], welcome to the 10th Annual..." |
| The Roadmap | Tell them what to expect. | "Tonight, we have a packed lineup featuring [Guest A] and [Activity B]." |
| The Intro | Build up the next speaker. | "Our next guest needs no introduction, but I’ll give her one anyway..." |
| The Handover | Create a seamless physical transition. | "Please join me in welcoming to the stage..." |
3. Pro-Tips for Success
* The "Clap-In": Always start the applause for a speaker and don't stop until they reach the microphone. Never leave a stage empty.
* Research Pronunciation: Nothing kills the vibe faster than butchering a keynote speaker’s name. Ask them beforehand.
* The "Wait for Silence" Trick: If the room is loud, don't shout. Stand at the mic, smile, and wait. The silence will spread.
* Have a "Safety" Joke: Keep a 30-second story or observation ready in case of technical difficulties (the "mic fail" buffer).
How can I help you right now?
To give you a tailored script or advice, let me know:
* What is the event? (e.g., tech conference, birthday, awards night)
* What is the tone? (e.g., formal and prestigious, or high-energy and funny)
* Do you have a specific problem? (e.g., "I'm nervous" or "The schedule is way too long")
Soni shakya
तेरी यादों का हिसाब नहीं होता..मुझसे
ये वो कर्ज है जो अदा नहीं होता..मुझसे
- Soni shakya
Bk swan and lotus translators
This image contains a mix of extraordinary facts and pseudoscientific claims. While the bottle and its price are real, the health benefits mentioned are highly exaggerated.
Here is the breakdown of what is true and what is misleading:
1. The Water and Price: TRUE
The water is called Acqua di Cristallo Tributo a Modigliani. It holds the Guinness World Record (set in 2010) for the most expensive bottle of water ever sold.
* Price: It was sold at an auction for $60,000, which is approximately ₹50 Lakh (depending on the exchange rate).
* The Bottle: The extreme price is not for the water itself, but for the packaging. The 750ml bottle is made of 24-carat solid gold and was designed by Fernando Altamirano as a tribute to the artist Amedeo Modigliani.
* The Source: The water is a blend of natural springs from Fiji and France, and glacier water from Iceland.
2. The Gold Ash: PARTIALLY TRUE
* The Claim: It is true that this specific luxury water contains 5 grams of 23-carat gold flakes/ash dissolved in it.
* The Purpose: This is done purely for exclusivity and aesthetics to justify the "luxury" tag. Gold is chemically inert, meaning it does not react with the body or get absorbed into the bloodstream.
3. Health Benefits & "Amazing Energy": MISLEADING
* The Claim: The image claims it gives the body "amazing energy" (adbhut oorja).
* The Reality: There is no scientific evidence that drinking gold flakes provides a burst of energy or any significant health benefit. While Swarna Bhasma is used in traditional Ayurveda, its effects in a bottle of luxury water are purely decorative.
* Alkalinity: Some sources claim the gold makes the water more alkaline, but you can achieve the same effect with much cheaper alkaline water or even a pinch of baking soda.
Summary Table
| Feature | Status | Explanation |
|---|---|---|
| Name | ✅ Real | Acqua di Cristallo Tributo a Modigliani. |
| Price (~₹50 Lakh) | ✅ Real | Sold at auction for $60,000 in 2010. |
| Gold in Water | ✅ Real | Contains 5g of gold flakes for luxury. |
| Amazing Energy | ❌ False | Purely marketing; gold is not a fuel for the body. |
The Verdict: You are paying for a gold sculpture, not a miracle drink. Most of the "facts" in the image are technically correct regarding the price and bottle, but the health claims are typical "luxury marketing" fluff.
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
श्री महादेव ध्यान मंत्र (रावण द्वारा रचित)
यह परंपरागत रूप से रावण को समर्पित माना जाता है। इसमें शिव के उग्र, करुणामय और सौम्य—तीनों रूपों का अत्यंत लयात्मक और ध्वन्यात्मक वर्णन है। यह मंत्र साधारण स्तुति नहीं अपितु नाद-योग और तांडव-तत्व से जुड़ा ध्यान स्तोत्र है।
अब इसका गूढ़ अर्थ और साधना-दृष्टि से विश्लेषण समझिए:
१. प्रथम भाग – नाद और तांडव का रहस्य
“डिं डिं डमरु”
यह डमरु की ध्वनि है। डमरु से सृष्टि का आदि-नाद उत्पन्न होता है।
डिं = बीज नाद
फुं = सर्प (कुण्डलिनी) की प्राणशक्ति
धं = घंटा (आकाश तत्व)
वं = वायु/जीवन प्रवाह
भं = अग्नि/तेज
यहाँ पंचतत्व और पंचनाद का वर्णन है।
यह ध्यान साधक के भीतर सुप्त ऊर्जा को जाग्रत करता है।
२. द्वितीय भाग – “यावत” वाला श्लोक – कालातीत शिव
जब तक पर्वत, जल, पृथ्वी, चामर, स्वर्ण और रामायण का कीर्तन रहेगा,
तब तक इस स्तोत्र का गान करने वाले को अतुल भोग और वैभव प्राप्त होगा।
यहाँ राम और रामायण का उल्लेख यह दर्शाता है कि शिव स्वयं काल से परे हैं।
रावण यहाँ स्वीकार करता है कि रामकथा भी शिव की महिमा से ही संभव है।
३. तृतीय भाग – उग्र नाद
“द्राट् द्राट्… टंट टंट…”
ये शब्द तांत्रिक ध्वनियाँ हैं।
इनका सीधा अर्थ नहीं, बल्कि स्पंदनात्मक प्रभाव है।
यह भाग मानसिक विकार, भय, बाधा और अदृश्य अवरोधों को काटने वाला माना जाता है।
चन्द्रचूड़ शिव की कृपा से रक्षा का विधान है।
४. अंतिम भाग – श्वेत (शुद्ध) शिव
* भस्म से आच्छादित शरीर
* कपाल, खट्वांग, वृषभ
* जटाओं में गंगा
* मस्तक पर चंद्र
यहाँ शिव का पूर्ण विरक्त, तुरीय और निर्विकार स्वरूप दर्शाया गया है।
“सर्वसित” — पूर्ण शुद्ध चेतना।
फल : पापक्षय और वैभव की प्राप्ति।
साधना में इसका प्रयोग यदि आप इसे ध्यान में प्रयोग करना चाहें:
१. ब्रह्ममुहूर्त या मध्यरात्रि उपयुक्त।
२. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर बैठें।
३. रुद्राक्ष धारण हो तो उत्तम।
४. पहले 11 बार “ॐ नमः शिवाय” जप।
५. फिर इस स्तोत्र का १, ३ या ११ बार पाठ।
६. अंत में मौन ध्यान — डमरु की कल्पना करें।
गूढ़ लाभ
* नाद योग की जागृति
* कुण्डलिनी स्पंदन
* भय नाश
* आध्यात्मिक तेज
* वाक्-सिद्धि (दीर्घकालिक अभ्यास से)
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
शुभ स्वप्न संकेत
आदमी आमतौर पर सपने देखता है। साथ ही कुछ सपने देखकर वह खुशी का अनुभव करता है तो कुछ सपने देखकर वह भय का अनुभव करता है। वहीं स्वप्न शास्त्र के अनुसार सपने सिर्फ मन की कल्पना नहीं होते, बल्कि कई बार वे भविष्य में होने वाली घटनाओं के संकेत भी देते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक कुछ खास चीजों का सपना देखना बेहद शुभ माना जाता है। खासकर अगर सपने में बारिश, घोड़ा या कुछ विशेष प्रतीक दिखाई दें, तो आने वाले दिनों में शुभ समाचार, आर्थिक उन्नति और सफलता के योग बन सकते हैं। साथ ही धन में वृद्धि के संकेत मिलते हैं।
आइए जानते हैं इन सपनों के बारे में।
1. सपने में बारिश देखना
स्वप्नशास्त्र शास्त्र के मुताबिक सपने में बारिश देखना सकारात्मक माना जाता है। इसका मतलब है कि आपके अटके हुए कार्य बन सकते हैं। साथ ही नौकरी और कारोबार में तरक्की मिल सकती है। अचानक धन लाभ के योग बनते हैं। यदि बारिश के साथ इंद्रधनुष भी दिखे, तो यह और भी ज्यादा शुभ संकेत माना जाता है।
2. सपने में घोड़े को देखना
स्वप्न शास्त्र अनुसार सपने में घोड़ा देखना शक्ति, ऊर्जा और प्रगति का प्रतीक है। वहीं सपने में सफेद घोड़ा दिखना सफलता और सम्मान का संकेत माना जाता है। साथ ही सपने में दौड़ता हुआ घोड़ा करियर ग्रोथ की ओर इशारा करता है। वहीं अगर सपने में आप खुद को घोड़े की सवारी करते हुए देखते हैं तो कार्य स्थल पर आपकी पद- प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी हो सकती है।
3. सपने में मंदिर का दिखना
सपने में मंदिर देखना ईश्वरीय कृपा का संकेत माना जाता है। साथ ही आपके रुके हुए काम बन सकते हैं। वहीं परिवार में सुख-शांति रहेगी। आने वाले दिनों में आपको शुभ समाचार मिल सकता है। साथ ही अगर आप खुद को मंदिर में पूजा करते देखें, तो यह विशेष रूप से शुभ फलदायी माना जाता है।
4. सोना या आभूषण देखना
सपने में सोना, आभूषण या खजाना देखना समृद्धि का प्रतीक है। साथ ही आने वाले दिनों में आपको अचानक धन लाभ हो सकता है। वहीं अगर आपका पैसा फंसा हुआ था तो वो मिल सकता है। वहीं सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है।
5. पेड़ पर चढ़ते हुए देखना
सपने में अगर आप खुद को पेड़ पर चढ़ते हुए देखते हैं तो यह एक शुभ संकेत है। इसका मतलब है कि आपको करियर और कारोबार में कोई शुभ सूचना मिल सकती है। तरक्की हो सकती है। वहीं कहीं घूमने का प्लान बना सकते हैं।
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
Aachaarya Deepak Sikka
ॐ नमः शिवाय
महाभारत का सार — नौ अनमोल जीवन सूत्र
महाभारत केवल एक युद्ध कथा नहीं, बल्कि जीवन, धर्म, कर्तव्य और नीति का महासागर है। पाँच लाख से अधिक श्लोकों में समाहित इस महाग्रंथ का सार इन नौ सूत्रों में समझिए —
आप किसी भी धर्म के हों, चाहे स्त्री हों या पुरुष, गरीब हों या अमीर, देश में हों या विदेश में —
यदि आप इंसान हैं, तो ये 9 जीवन सूत्र आपके लिए हैं।
1️⃣
यदि आप समय रहते अपने बच्चों की अनुचित इच्छाओं पर नियंत्रण नहीं करेंगे, तो अंततः असहाय हो जाएंगे —
कौरव
2️⃣
आप कितने भी शक्तिशाली क्यों न हों, यदि अधर्म का साथ देंगे तो आपकी शक्ति व्यर्थ हो जाएगी —
कर्ण
3️⃣
अपने बच्चों को इतना अहंकारी न बनने दें कि उनका ज्ञान विनाश का कारण बन जाए —
अश्वत्थामा
4️⃣
ऐसे वचन कभी न दें, जो आपको अधर्मियों के आगे झुकने पर मजबूर कर दें —
भीष्म
5️⃣
धन, शक्ति और अधिकार का दुरुपयोग अंततः विनाश की ओर ले जाता है —
दुर्योधन
6️⃣
सत्ता कभी ऐसे व्यक्ति को न दें जो स्वार्थ, मोह या अहंकार में अंधा हो —
धृतराष्ट्र
7️⃣
ज्ञान के साथ विवेक हो तो विजय निश्चित है —
अर्जुन
8️⃣
छल और धोखा स्थायी सफलता नहीं दे सकते —
शकुनि
9️⃣
यदि आप धर्म, कर्तव्य और नैतिकता का पालन करते हैं, तो कोई भी शक्ति आपको पराजित नहीं कर सकती —
युधिष्ठिर
आपका अपना
आचार्य दीपक सिक्का
संस्थापक ग्रह चाल कंसल्टेंसी
smita
रंग लगाने वालों से नहीं,
रंग बदलने वालों से बचने की जरूरत है।
बाकी तो HAPPY HOLI🎭
SAYRI K I N G
जाने देना उसे वो बसंत होगा तो फिर एक बार ज़रूर लौटेगा।
SAYRI K I N G
मेरे नाम का लाल रंग थोड़ा अपने गालों पर लगा लेना
तेरे मांग में लाल रंग लगाने का हक मेरे नसीब में नहीं आया
- SAYRI K I N G
Kiran Kumar
Aajkal loans milna jitna asan ho gya hai bas google playstore se ek app download karlo aur apko loan mil jata hai Parrrrrrrr yahi to ek aam Aadmi phas jata hai ek Fraud Loan App ke jaal me ab toh bas jabtak aap uss fraud loan app ka paise nhi doge penalty charges plus khudka cibil kharab hota jaega
to kya iska koi solution nhi hai ?
Bilkool hai ek Certified Partner se loan ke liye apply karna hi ek smart move hai jo apse loan process karane ke fees nahi lega na loan milne ke pahle na baad me .
mssg karein abhi
Kiran Kumar
Aajkal Khudka Ghar lena Har kisi ka sapna hota hai aise me agar hum banks ke approval ke liye chakkar lagane ki soche to hamara sapne ki niv kamjor hone lagti hai
par aisa bilkool sambhav hai aur bahut asani se sambhav hai bas ek message karna hai aur 7.75%PA ki roi start se apna khudka ghar khareedna aur bhi asan hoga abhi sampark kar sakte hai
Jyoti Gupta
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SAYRI K I N G
अच्छा है खूबसूरत होने का बिल नहीं आता..
वरना आप तो कर्ज में डूब जाते..
Narayan
अंदर तबाही मचा देते हैं
वे जज़्बात…
जिन्हें हम किसी के नाम से जोड़ देते हैं।
जब प्रेम अधूरा रह जाता है,
तो वह खत्म नहीं होता…
वह और गहरा हो जाता है।
अकेले कमरे की खामोशी में
वही चेहरा दीवारों पर उभरता है,
वही आवाज़ कानों में गूंजती है,
और दिल पूछता है —
“क्यों नहीं मिला मुझे पूरा?”
लेकिन सुनो…
प्रेम कभी अधूरा नहीं होता,
अधूरी होती है हमारी चाह —
किसी को पाने की,
किसी पर अधिकार की।
जिसे तुम विरह समझती हो,
वह भी प्रेम का ही दूसरा रूप है।
मिलन में प्रेम बाहर बहता है,
विरह में प्रेम भीतर उतरता है।
अकेलापन शत्रु नहीं है,
वह तुम्हें तुम्हारे पास लाने आया है।
तुम जिसे खोने से डरती हो,
वह तो पहले ही तुम्हारे भीतर बस चुका है।
वह तुम्हारी सुगंध बन जाएगा। 🌸
Priya kashyap
सवाल---> प्यार क्या हैं।
जो बस हो जाए बगैर जाने किस के पास क्या हैं,कौन कहाँ से हैं किस देश से हैं।किस रंग किस मजहब का हैं,जब किसी चीज से कोई फर्क ही ना पड़े, और बस उस एक शख्स की फिक्र रहने लगे,जिसके लिए आप सबकुछ खोने के लिए एक पल भी ना सोचे,जिसके होने भर से सबकुछ ठीक लगने लगे,और जब वो ना हो तो दुनिया वीरान हो जाए, तब समझ लीजिए की आपको सच में प्यार हो गया हैं।
Priya_
Ruchi Dixit
मैंने माँगा कुछ नहीं सिवाय इसके
कि जो मेरा नहीं वो मुझमे हो-Ruchi Dixit
મનોજ નાવડીયા
कैसी जिंदगी, वो मुझे देखे, मैं उसको देखु..
मनोज नावडीया
Arun
“the habit of the cocktail hybrid”
Falguni Dost
શબ્દો જ્યારે મૌન થાય છે...
દોસ્ત! ભીતરનો ખાલીપો ખળભળાટ મચાવે છે.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
Narayan
“जिसे तुम प्रतिदिन स्मरण करते हो, धीरे-धीरे वैसे ही बन जाते हो।”
मन एक रिकॉर्डिंग मशीन की तरह है। जिस विचार को हम रोज़ दोहराते हैं, वही हमारी सोच, भावनाओं और फिर व्यवहार का हिस्सा बन जाता है।
अगर हम बार-बार कमी, शिकायत या दुख को याद करते हैं, तो हमारा व्यक्तित्व भी वैसा ही बनता जाता है।
और यदि हम शांति, प्रेम, शक्ति और ईश्वर के गुणों का स्मरण करते हैं, तो वही गुण हमारे अंदर प्रकट होने लगते हैं।
स्वयं का आत्मा-स्वरूप का स्मरण करते ही भीतर शांति का अनुभव होने लगता है — क्योंकि स्मरण से ही चेतना की दिशा तय होती है।
“भय को थामोगे तो भीतर सिमट जाओगे…”
भय का स्वभाव है संकुचित करना।
जब मन डर में रहता है, तो व्यक्ति निर्णय लेने से डरता है, अपने गुणों को व्यक्त नहीं कर पाता, और ऊर्जा सिकुड़ जाती है।
भय हमें रक्षात्मक बना देता है — जैसे कोई खोल में छिप जाए।
“ईश्वर को याद रखोगे तो चेतना ऊँची उठेगी।”
ईश्वर का स्मरण आत्मा को उसकी मूल पहचान से जोड़ देता है।
जब हम परमशक्ति को याद करते हैं, तो हमें सुरक्षा, शक्ति और पवित्रता का अनुभव होता है।
चेतना ऊपर उठने का अर्थ है — परिस्थितियों से ऊपर उठकर देखना, प्रतिक्रियाओं से मुक्त होना, और व्यापक दृष्टि रखना।
याद की दिशा बदलते ही अनुभव की गुणवत्ता बदल जाती है।
स्मरण से विचार बनता है
विचार से संस्कार बनता है
संस्कार से व्यक्तित्व बनता है
इसलिए प्रश्न यह नहीं कि हम क्या बनना चाहते हैं,
प्रश्न यह है कि हम रोज़ किसे याद कर रहे हैं।
ओम शांति।
Nency R. Solanki
જેટલા તમે ઉપલબ્ધ છો,
એટલા જ મુખ્યવિહીન છો!
- Nency R. Solanki
Dhara K Bhalsod
ભીતરમાં ભરેલા ઊંડાણ વાંચો...
શબ્દો તો માત્ર બંધબેસતી ગોઠવણી છે...
- Dhara K Bhalsod
Paagla
https://youtube.com/shorts/tJbOVtqxbgc?si=PAOhyAZoV1JXAXEK
kashish
mene use utnato nhi lekin ek nazar hi
shai dekha dekhne ke baad kuch achcha laga hi nhi vo tha hi itna achcha hai kya hi bolu apne use nazar se
mai use fhool nhi khugi
kyuki vo bhi ek din murjha jata hai...
mai use chand khu gi ager mai rhu raat ...
mai use shiv ka jta khu gi agar mai khud ganga bnu ...
mai use shiv ka vasuki (saanp) khu gi agar mai ruderrksh bnu...
vo krishna bane aur mai uski Radha banu...
vo ravivaar bane aur mai somvaar banu ...
kya karu mai apne use nazar ka zisme mai use apna hi maanu...
by kashish
वात्सल्य
તમને શું શું ગમે,ભાવે, તે કહો તો ખબર પડે !
વગર ભાવતું પીરસાય તો એંઠ અને જૂઠ પડે
- वात्सल्य
A singh
कफ़न भी हल्का लगता है उस दर्द के आगे,
जो तेरी खामोशी ने सीने में उतारा है।
मर कर भी सुकून न मिला इस दिल को,
क्योंकि हर धड़कन ने तेरा नाम पुकारा है।
_ A singh
khwahishh
"मेरी आदतों के हबाले से तूने अपने मनसूबे तमाम पुरे किये है।
तू सोबत ही सरीफ रहा ज़माने के सामने।
हम थे की तेरे खातिर दुनिया भर मैं बदनाम हुए है।
फिर भी हर दफा तेरे नापाक इरादों के शिकार हम ही किये गए है।"
- khwahishh
A singh
खामोश रहकर भी हम अपनी बात कह देंगे,
जुदाई का ये ज़हर भी हंसकर पी लेंगे।
जब मान लिया है कि तुम हमारे नहीं हो,
तो अब हम भी अपनी तन्हाई में जी लेंगे।
_ A Singh
khwahishh
"अकशर चाहे न चाहे तेरी याद से, मुलाक़ात हो जाती है मेरी।
मसलन मैं उलझन मैं रहती हूं, की बो आई क्यों है।"
- khwahishh
khwahishh
"ना सांस आती मैं ना सांस जाती मैं, तेरी खुशबु अब है समाती।
खाली सा धड़के है सीने मैं दिल मेरा, धड़कन की आवाज ना अब है आती।
तेरी खुदाई का ये केसा कहर है,याद है तेरी या कोई जहर है।"
- khwahishh
A singh
🥀 आख़िरी ख़त: विदाई के नाम 🥀
"ये खत नहीं, मेरे दिल के टुकड़े हैं जो तुझे लिख रही हूँ, ✍️
अपनी खुशियों की विदाई का मंजर खुद देख रही हूँ। 🥺
बहुत कोशिश की मैंने, अपनों को मनाने की बहुत मिन्नतें
कीं, 🙏
पर माँ-बाप की ज़िद और भाई की लाज के आगे घुटने टेक रही हूँ।" 💔
"वो नहीं मान रहे, उन्हें मेरी पसंद की परवाह नहीं, 🚫
उनके फैसले के आगे अब मेरा कोई बस नहीं। 😔
मजबूरी में बंध रही हूँ किसी और के अटूट बंधन में, ⛓️
पर इस रूह पर किसी और का कभी अधिकार नहीं।" 💍❌
"इस जनम में तो साथ मुकद्दर में नहीं लिखा था हमारे, ⛈️
पर वादा है मेरा, हर सांस अब भी कटेगी नाम पर तुम्हारे। 💓
अगले जनम में खुदा से सिर्फ तुझे ही मांग कर आऊंगी,
✨
तब तक के लिए विदा, ओ मेरे दिल के सबसे प्यारे।" 👋😭
🥀 अंतिम विदाई का दर्द 🥀
"बिछड़ रही हूँ तुझसे, पर धड़कन तेरे पास छोड़ जाऊंगी, ❤️🩹
अपनी हर अधूरी ख्वाहिश का हिसाब अगले जन्म पर छोड़ जाऊंगी। ⏳
लोग कहेंगे कि मैं किसी और की दुल्हन बनकर चली गई, 👰♀️
पर मैं अपनी रूह की वफ़ा, सिर्फ़ तेरे नाम पर छोड़ जाऊंगी।" 🕊️🌹
khwahishh
"शीशे और दर्पण मैं एक ही फर्क होता है।
शीशे से पूरी दुनिया की हकीकत दिखती है।
और दर्पण मैं खुद की।"
- khwahishh
khwahishh
“ जाने किन गलियों मैं बसर कर रहा है।
ये दिल आज कल कश्तीयों मैं सफर कर रहा है।
मंजिल की फ़िक्र छोड़ राहों की कद्र होने लगी है इसे।
अब थकने की सूरत ही कहाँ है,
इस्पे लहरों का असर चढ़ गया है।“️
- khwahishh
khwahishh
एक लम्हा ठहरा आके मेरे दर पे ..
मेने पूंछा उससे... ऐ लम्हे!
मुद्दतों बाद तुझे ये लम्हा मिला है,
फुर्सत से बिताने को,तू क्यों आके मेरे दर पे ठहरा है।
लम्हे ने कहा... सुनो!
कितनी उम्रो की दुआओ का असर आजमाया है,
बड़ी मुद्दतों के बाद मेने मेरे महबूब के दर पे बसर पाया है।
क्यों पूंछा तूने ये सबाल,मे समझ नहीं पाया,
एक तू ही तो है।
जिसने मुझ फुर्सत – ऐ – बक्त को याद फ़रमाया है।
- khwahishh
khwahishh
" दफा-ए-इश्क के तहत हम तेरे गुलाम करार किये गये है जुरम ये था... की तुझको अपने दिल का आईना बना बैठे थे। दिल तूने चुराया और गुन्हेगार हमें ठहराया गया ।“
- khwahishh
SAYRI K I N G
रक़ीब जो फेंकेगा तुझपर, वो रंगों की धार मुबारक, मुझको मेरा हाल मुबारक, तुझको ये त्योहार मुबारक।
archana
✨ “आख़िर बहू ही बुरी क्यों?” ✨
बहू बुरी नहीं होती…
बस वो सबकी उम्मीदों का जोड़ नहीं बन पाती।
ससुराल में हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है,
अपना नजरिया, अपनी कल्पना—
किसी को संस्कारी बहू चाहिए,
किसी को कम बोलने वाली,
किसी को कमाने वाली,
किसी को सेवा करने वाली,
और किसी को बस चुप रहने वाली…
पर एक इंसान
सबके दिमाग की बनाई तस्वीर कैसे बन सकता है?
जब बहू उन सब “अलग-अलग दिमागों” से मेल नहीं खाती,
तो उसे नाम दे दिया जाता है—
“बुरी बहू”।
सच तो ये है—
बहू सिर्फ ससुराल में बुरी कहलाती है।
मायके में वही बेटी अच्छी होती है।
दोस्तों में वही सच्ची होती है।
मोहल्ले में वही मुस्कुराती हुई दिखती है।
लेकिन घर के अंदर…
छोटी सी बात को बड़ा बना दिया जाता है,
आधी बात को पूरा कर दिया जाता है,
और फिर मोहल्ले में कहानी सुनाई जाती है—
“बहू बहुत बुरी है…”
इतना झूठ,
इतनी सजावट,
इतना बढ़ा-चढ़ा कर बयान—
कि सच कहीं कोने में चुप बैठ जाता है।
क्योंकि सच बोलने के लिए हिम्मत चाहिए…
और कहानी बनाने के लिए बस ज़ुबान
“बहू बुरी नहीं होती,
वो बस सबकी अलग-अलग उम्मीदों में फिट नहीं बैठ पाती।”
- archana
Falguni Dost
અહીં તહી હવે સુખ શોધતી નથી
શાંતિની આશમાં ભીતર બાળતી નથી
કરશે એ કસોટી શકય એટલી
દોસ્ત! કર્મથી ઈશને બાંધી..ભીખ હવે માંગતી નથી.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
PRASANG
અપૂર્ણ જીવન.!!!
મૃત્યુ નાશ નથી,
તે તો પરિવર્તન છે.
નાશ તો ત્યાં છે
જ્યાં ચેતના હોવા છતાં
જાગૃતિ નથી.
શરીર શ્વાસ લે,
પણ “હું” સૂતું રહે,
એ જીવન નથી, માત્ર ગતિ છે.
જે ક્ષણે
કામના જીવતી રહે
અને અનુભૂતિ મરી જાય,
ત્યાં જીવન અપૂર્ણ બને છે.
મરણ એક ક્ષણનું વિસર્જન છે,
પણ અજાગૃત જીવન
દીર્ઘ બંધન છે.
જે જીવ્યો નથી,
તે મરતો પણ નથી,
તે માત્ર અટકેલો રહે છે.
આત્મા ન મરે,
પણ અજાગૃત આત્મા
જીવનને અધૂરો છોડી દે છે.
પ્રસંગ
પ્રણયરાજ રણવીર
Shailesh Joshi
"સાંખી લેવું"
એ સારા સમય સુધી
ઝડપથી પહોંચવા માટેનો
"ટૂંકો રસ્તો છે"
જ્યારે સામો જવાબ આપવો,
કે ખોટું લગાડી બેસી જવું,
એ મુખ્ય માર્ગ છોડી, "વારંવાર"
"અવડો રસ્તો પકડવા જેવું છે"
- Shailesh Joshi
Narayan
आना किसी रोज ख्वाबों से निकल कर
हकीकत में बैठना मेरे पास
मैं सुनाऊँगा तमाम नज्में
जिनको मैं लिखता हूँ
सिर्फ तुम्हारे लिए,
सुनना
हर अहसास को ताकी देख सकूँ
उस वक्त तेरे चेहरे को सुन सकूँ तेरी धड़कनों को
महसूस कर सकूँ
उस प्रेम को संग तेरे..!!
Kaushik Dave
વક્તનો આ માર છે, જિંદગી બદલાય છે,
કસોટી કરે છે ઈશ્વર, શું નૈયા પાર થશે?
બદલાવ આવે જીવનમાં, સુખ શાંતિ ક્યાં છે?
ગુમાવી દીધેલાની યાદીમાં જ, જિંદગી જ જાશે?
અંધારાની આ ઓથમાં, આશાનું કિરણ ક્યાંક હશે,
પડકારોના આ પથ પર, હિંમત જ સાથ દેશે.
-કૌશિક દવે
Narayan
तुम्हारा स्पर्श साधारण नहीं था।
वह जैसे आत्मा तक उतर जाने वाली कोई
मौन स्वीकृति थी ।
महसूस करते हुए उसी क्षण जान लिया कि यह मात्र स्पर्श नहीं, प्रेम का उच्चार है
कुछ स्पर्श क्षण भर में विलीन नहीं होते,
वे हृदय के उस कोने में अपना स्थायी घर बना लेते हैं,
जहाँ उदासी के समय
सबसे अधिक सहारे की आवयश्कता होती है..!!
Narayan
एक स्त्री चाहिए
जिसके समक्ष
मैं सिर्फ तन से नहीं
मन से भी नग्न हो सकूँ
उतार फेंकूँ सारे मुखौटे
भूला सकूँ पुरुष होने का दम्भ
रो सकूँ जार जार
जिसे कह सकूँ
पुरुष हूँ मगर
पीड़ा अनुभव करता हूँ
चाहता हूँ बिल्कुल माँ की तरह
तुम फेर दो हांथ बालों पर गालों पर
पुरूष होते हुए भी
कांधा चाहिए कभी कभी मुझे भी,
सिर्फ चमकता
दमकता बदन ही नहीं
एक स्त्री चाहिए
जिसे प्रेम करते हुए
पूजा भी कर सकूं
वासना से नहीं श्रद्धा से
जिसके चरणों को चूम सकूँ
जिसके स्पर्श मात्र से
पुलकित हो उठे रोम रोम मेरा
कर दूं पूर्ण समर्पण
विगलित हो अस्तित्व मेरा
मैं नारी बन जाऊं
वो पुरुष बन जाएं
उसमें मैं नजर आऊँ
वो मुझमें नजर आएं
हम शंकर का अद्वैत हो जाएं,
एक स्त्री चाहिए
जिसे मैं उस तरह प्रेम कर सकूँ
जिस तरह एक स्त्री प्रेम करती है..!!
Narendra Parmar
जरुरत से ज्यादा मोहब्बत करना
यानी कि पागल होने का खतरा !
जरुरत से ज्यादा मिठा खाना
यानी कि डायाबिटीस का खतरा !
इसीलिए लिमीट में रहिए
शुकुन से जिंदगी जाएगी !
और मौत भी आपकों कम तड़पाएगी ।।
नरेन्द्र परमार ✍️
Sicret super Star
"જ્યારે મનમાં 'મારું-તારું' અને 'સ્વાર્થ' ના વાયરસ ઘૂસી જાય ને, ત્યારે સમજવું કે અંદર મહાભારત શરૂ થવાની તૈયારી છે."
Ruchi Dixit
शब्दों के पहाड़ पर चढ़ने के क्या मतलब
जब एक शब्द बनाने और मिटाने को काफी हो ।
- Ruchi Dixit
PRASANG
हम काटने लगे हैं।
हम अब रोते नहीं साहब,
हम काटने लगे हैं-
शब्दों से,
नज़रों से,
सीधे सच से।
क्योंकि
बहुत देर तक सहने वाला
एक दिन
पूछना सीख लेता है।
किसान जब खामोश होता है,
तो समझो-
तूफ़ान खेत में नहीं,
सीने में उग रहा है।
धरती धैर्य रखती है-
पर अपमान नहीं।
मज़दूर की हथेली
अब सिर्फ़ छाली नहीं,
सबूत है-
कि ये देश
उसकी मेहनत से चलता है,
और फिर भी
उसे चलने नहीं देता।
औरत अब डर से नहीं काँपती,
वो ग़ुस्से से स्थिर होती है।
जिस दिन उसकी आँख
सीधी हो गई,
उस दिन
किसी की मर्दानगी
काम नहीं आएगी।
कर्मचारी अब
फ़ाइल नहीं पलटता,
वो अपने भीतर का
ज़मीर पलटता है।
और ज़मीर
जब भारी हो जाए,
तो कुर्सियाँ
हल्की पड़ जाती हैं।
विद्यार्थी अब
भविष्य नहीं पूछता-
वो वर्तमान को
कटघरे में खड़ा करता है।
और सवाल
जब ठीक से खड़े हो जाएँ,
तो झूठ
बैठ जाता है।
हमें समझाया गया-
शांत रहो।
लेकिन किसी ने नहीं बताया
कि शांति की भी एक हद होती है,
उसके बाद
वो कायरता कहलाती है।
हम अब
डर को पहचानते हैं।
वो ऊपर नहीं रहता-
वो भीतर डाला जाता है।
और जो भीतर डाला जाए,
उसे बाहर फेंका
जा सकता है।
हम भीड़ नहीं हैं।
हम वो लोग हैं
जो बहुत देर तक
चुप रहे-
और अब
हर शब्द
वजनदार बोलते हैं।
हमारी आवाज़
अब चीख नहीं,
फ़ैसला है।
हमारी चाल
अब हिचक नहीं,
इरादा है।
हमें रोकने की कोशिश मत करना।
हम भाग नहीं रहे-
हम आ रहे हैं।
क्योंकि
जिस समाज ने
अपने आम आदमी को
खुद पर गर्व करना सिखा दिया,
उसे कोई सत्ता
लंबे समय तक
झुका नहीं सकती।
आज हम कहते हैं-
शांति हमारी पसंद है,
कमज़ोरी नहीं।
और अगर
इंसान होना
अपराध है,
तो हाँ-
हम अपराधी हैं।
हम कटेंगे नहीं।
हम बिकेंगे नहीं।
और अब
हम मिटेंगे नहीं।
क्योंकि
अब हमारे भीतर
डर नहीं-
टकराव है।
"प्रसंग"
प्रणयराज रणवीर
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