Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
ArUu
मुझे गांव का कोई काश्तकार अपने घर खाने पर इनवाइट करता है
वो मेरी थाली में दो रोटी परोसता है
एक मैं वहां खा लेती हूं
एक टिफिन में पैक कर के ले आती हूं...(क्या करूं ittu सा पेट है एक साथ इतना नहीं खा सकती)
गांव वाले कह रहे थे ये रोटी नहीं खा सकती पैसे क्या खायेगी😭
क्या मतलब है मैं कभी घूसखोर पटवारी नहीं बन सकती 😭😭😭
- ArUu
S A Y R I K I N G
सतलो जितना सताना है
मुझे कौन सा दुनिया में दुबारा आना है
Meena Parmar
દંશા ઓ એમ સુધરતી નથી ઈશ્વર ને બદલવાથી સવાલો કયાં કદી બદલાય છે જવાબો ના બદલવાથી નથી નિષ્ઠા વિષે જરાપણ શંકા પરતું રીત ખોટી છે નહી પામી શકે તુ ફુલ ને અતર બદલવાથી જરૂરી છે એજ લય ને તાલ જે લોહી માં છે નથી કોઈ ફાયદો ઓ નતૅકી ઓ ઝાઝંર બદલવાથી મને મારા વિતેલા ચંદ દિવસો પાછા આપો થવાયું છે ખૂબ એકલવાયું જુનુ ઘર બદલવાથી નહી આવી શકે તે તારા ઘરે સબંધો એમ બધાતા નથી અવસંર બદલવાથી...
- Meena Parmar
ArUu
मुश्किल है उन्मुक्त स्त्री बन जाना
- ArUu
Yogi Krishnadev Nath
ডায়াবেটিস কোনো রোগ নয়। এটা শরীরের বিপাকীয় অসামঞ্জস্য। যখন ইনসুলিন বেশি থাকে তখন কোষ ইনসুলিনের কথা শোনে না; তখনই সুগার বেড়ে যায়।
যত বেশি ইনসুলিন, ততই বেশি ইনসুলিন রেজিস্ট্যান্স। সেজন্যই ওষুধ/ইনসুলিন নিয়েও শরীর কখনো ঠিক হয় না।
“মিষ্টি নামের তিক্ত রোগ” বইতে আমি দেখিয়েছি, কিভাবে এই চক্র ভেঙে শরীরকে আবার স্বাভাবিক অবস্থায় ফিরিয়ে আনা যায়।
সুগার কোনো আজীবনের রোগ নয়। সুগার হচ্ছে দৈনন্দিন জীবনযাত্রার ভুলের কারণে তৈরি একটি শারীরিক অবস্থা - যা পুরোপুরিই ঠিক করা যায়।
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Shraddha Panchal
મન ની મન માં જ થયેલી વાતો:
તને ખબર છે!
મને ક્યારેય અમથું અમથું
તારા થી દૂર જવાનું મન થઈ આવે ,
માત્ર ને માત્ર એવું જાણવા કે
તમે ગમશે મારા વગર ?
પછી યાદ આવે કે
તારો જવાબ hmmmm આવશે
અને હું પહોંચી જાઉં અવઢવમાં
પછી અમથું અમથું
“એને નહીં જ ગમે “ એવું
હું જાતે જ માની લઉં બોલો !😄🩶🤍🤎
JIGAR RAMAVAT
🌟 લયબદ્ધ ગઝલ — એકલા હોઈએ તો શું?
એકલા હોઈએ તો શું, હિંમત અમારી છે,
રસ્તા બધા ખુદે જ, પગલે ઉજાળી છે.
ભીડની સાથ વગર, સપના નથી મરતા,
એકલાં દિલે જ ઘણી, જીતો ઉગાડી છે.
દુનિયાની વાત શું? મનની જ સાંભળો,
અંદર જ આકાશે, પાંખો ફફડાવી છે.
તૂટ્યો સમય તો શું? તૂટ્યાં નથી આપણે,
આંસુ વહાવવા કરતાં, હિંમત વધારી છે.
એકલા ચાલ્યા તો શું? મંજિલ મળે છે જ,
જંગલમાં પણ નદીએ, દિશા બનાવાડી છે.
–J.A.RAMAVAT
JIGAR RAMAVAT
🎵 લયબદ્ધ ગઝલ — બેવફાઈ
નયનમાં નમક ભરીને, હસી ગયા બેવફા,
દિલને દગો આપી ને, છળી ગયા બેવફા.
વચનોના દીવા બધા, પવનમાં બુઝાવી,
રાહોમાં ધૂળ બાંધી, વળી ગયા બેવફા.
સપનામાં જે રહેતા, હકીકતમાં ખૂટ્યા,
સમયની સાથે રંગ બદલિ, છૂટી ગયા બેવફા.
હૃદયના ઘર સુધી જે, ઓળખાતા હતા,
છાતીમાં ખંજરો ઘાળી, ફસી ગયા બેવફા.
આંસુને આકાશ કહી, અમે જ વિશ્વાસ કરાયો,
હવે સમજાય છે કેમ, કેમ લાગી ગયા બેવફા.
–J.A.RAMAVAT
Yashvi
Loving poetry or loving art itself is such a pure feeling, no matter how skilled one is, you could never capture it fully in words, in art.it is something that feel like it is fake to others like someone is saying it is just metaphoric but one who feel it, embody it knows it is more real than reality.
They call it poem,I call it love,
The call it hobby,I call it nessicity,
They call it words,I call it world,
They call it life,I call it poem,
They call it poem,I Call it love.
શબ્દોમાં કહેવાય નહીં એવી એ પ્રીત,
જગતની જાણે નહીં એ કોઈ રીત,
વસે છે હૈયામાં બની એ મનમીત,
હું કાવ્ય કે કાવ્ય મારામાં નહીં જાણું,
પણ સપૂર્ણ છે એની હર ભાવ ભીંત,
શબ્દોમાં કહેવાય નહીં એવી એ પ્રીત.
- Yashvi
pink lotus
समय से पहले की जाने वाली चीज़े
कभी पूरी नही होती बस दर्द देने का
और सिख देने का काम करती है।
चाहे वोह प्यार हो या कुछ और भविष्य
को ऐसा बना देता है जहा हम उसका
आनंद नही ले पाते। 🌸❣️
shama parveen
बहुत जल्द
शोहरत का घमंड सीज़न 2 आने वाला है
- shama parveen
Agyat Agyani Vedanta philosophy
(“मैं हूँ + भगवान अज्ञात” — तुम्हारा सत्य)
आत्मा साक्षात्कार की विज्ञानी
मैं हूँ — यह निश्चित सत्य है।
भगवान है — इसका मुझे पता नहीं है।
यह प्रश्न ईमानदारी का है।
यह प्रश्न मौलिक है —
जिसके साथ हमारा जन्म हुआ है।
मैं हूँ — यह किसी ने मुझे समझाया,
कहा कि “तू है”,
लेकिन मेरा अपना पता अभी नहीं है।
मैंने खुद को अब तक पूर्ण नहीं जाना है।
मैं अभी इस निर्णय पर खड़ा हूँ:
मैं हूँ।
लेकिन भगवान कहाँ है?
कौन है?
मैं और भगवान — दो अलग नहीं हो सकते।
एक सिक्के के दो पहलू होते हैं —
अगर एक दिख रहा हो,
दूसरा भी कहीं है,
बस अभी मेरी दृष्टि में नहीं।
जैसे मैं कहता हूँ —
“यह मेरा शरीर है”,
तो शरीर और मैं — अलग दो नहीं।
अगर शरीर गिर जाए तो मैं भी गिर जाता हूँ।
तो क्या मैं शरीर हूँ?
अगर मैं शरीर हूँ — तो मेरी आत्मा कहाँ है?
अगर मैं आत्मा हूँ — तो शरीर क्या है?
अभी तक मैं दोनों के बीच का सेतु हूँ —
अधूरा परिचय।
एक पहलू दृश्य — शरीर।
दूसरा अदृश्य — चेतना।
यानी आधा ज्ञान — आधा अज्ञान।
अस्तित्व में सृजन एक से संभव नहीं।
माँ और पिता मिलकर ही मैं जन्मा हूँ।
माँ दिखाई देती है —
इसलिए शरीर दिखाई देता है।
पिता अदृश्य हैं —
इसीलिए आत्मा अदृश्य है।
पर पिता के बिना जन्म संभव नहीं —
इसी तरह आत्मा/भगवान के बिना “मैं” संभव नहीं।
मैं दो का फल हूँ —
जड़ और चेतना का मिलन।
जहाँ से जड़ मिली → माँ
जहाँ से चेतना मिली → पिता
और मैं दोनों के मध्य प्रकट हुआ।
लेकिन पिता गर्भ से पहले मेरे सामने नहीं थे —
फिर भी वे सत्य थे।
माँ उनके अस्तित्व की साक्षी है।
उसी तरह यह शरीर
चेतना का प्रमाण है कि —
कोई अदृश्य मूल स्रोत है।
तो भगवान क्या बाहर है?
नहीं।
भगवान मेरे भीतर बैठा है —
वैसे ही जैसे पिता गर्भ के भीतर उपस्थित थे।
बाहर गुरू, शास्त्र, मंदिर —
ये सब उधार की जानकारी हैं।
सत्य अनुभव —
भीतर है।
भीतर कैसे जाएँ?
देखो।
सिर्फ देखो।
बिना निर्णय।
न अच्छा,
न बुरा।
न मित्र,
न शत्रु।
न पाप,
न पुण्य।
जो भीतर घटता है —
वही दर्शन है।
वही भगवान путь है।
भीतर की यात्रा — सबसे सूक्ष्म तीर्थ है।
भीतर 100% भगवान मौजूद है।
कोई विश्वास नहीं चाहिए।
कोई धारणा नहीं चाहिए।
कोई भय नहीं चाहिए।
सिर्फ देखना है।
रास्ते में —
फूल मिलेंगे,
काँटे मिलेंगे,
ज़हर भी,
अमृत भी।
पर किसी से चिपकना नहीं,
किसी से लड़ना नहीं।
बस चलना है।
यही मार्ग शिव का है,
उसी मार्ग से बुद्ध जागे,
महावीर, कबीर, नानक, मीरा —
सब इसी भीतर गए।
जो ब्रह्मांड को खोजता रहा —
वह भीतर मिला।
यह सूक्ष्मतम है —
पर सर्वशक्तिमान है।
सब पंचतत्व, तीन गुण,
सब कुछ — उसी का परिणाम है।
हम — उसके फल हैं।
और यह विज्ञान
मुझे अनुभव से मिला है।
25 वर्षों की खोज —
एक जीवन की पीएचडी।
अब मैं उसे बिना मूल्य,
बिना सौदे,
बिना शर्त
तुम तक पहुँचा रहा हूँ।
क्योंकि सत्य
कभी बिकता नहीं।
सत्य — स्वयं को बाँटता है।
अब राह तुम्हारे हाथ में है।
नाक बंद कर लोगे —
तो हवा भी भीतर नहीं जाएगी।
पर अगर तुमने भीतर उतरना शुरू किया —
तो वही मिलेगा
जिसकी आज तक कल्पना भी नहीं की।
मैं हूँ —
और भगवान मेरी जड़ में है।
बस यही यात्रा है।
यही प्रमाण है।
यही विज्ञान है —
100%।
Vedānta Life — From Energy to Awareness”
(वेदान्त जीवन — ऊर्जा से चेतना तक)
©Vedānta 2.0 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲 —
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Rahul Raaj
किसी को माफ़ करना इतना मुश्किल नहीं होता जितना किसी के दो चेहरे जान लेने के बाद अन्जान बन कर रहना मुश्किल होता है...
Shailendra
जो गलत थे
वो सही हो गए ।।
और जो सही थे
वो गलत हो गए।।
जिनकी मिसाल दिया करते हैं लोग
उनकी वफादारी का
वो भी ऐन मौके पे
पलट गए ।।
Soni shakya
"सादगी ही मेरी पहचान है और...
तुम्हारा प्रेम--मेरा गहना"💞💞
- Soni shakya
Nirali patel
“ज़िंदगी आसान नहीं होती,
पर हर रात के बाद सुबह ज़रूर होती है।”
Nirali patel
“जीतने का मज़ा तभी है,
जब हार मानने का दिल करे
और आप फिर भी
आगे बढ़ो।”
Shailesh Joshi
લગ્નજીવન કેવી રીતે સચવાય ? અને
ઘરસંસાર ચલાવવા માટે શું શું કરવું જોઈએ ?
ટૂંકમાં પ્રેમ, લાગણી અને સંઘર્ષ એટલે શું ?
અને એ કેવો હોવો જોઈએ ?
આ બધુંજ જાણવા માટે આપણે
ક્યાય વધારે દૂર જવાની જરૂર નથી ?
બસ ખાલી આપણે
"આપણા માતા-પિતાના જીવનને અનુસરીશું"
તો આપણાં જીવનમાં આવવાવાળી
"બધીજ સમસ્યાઓને આપણે પહોંચી વળીશું"
- Shailesh Joshi
Yogi Krishnadev Nath
ডায়াবেটিস সম্পর্কে পরিপূর্ণ নলেজ থাকলে কোনো সুস্থ মানুষের কখনোই ডায়াবেটিস হবে না। এজন্যই "মিষ্টি নামের তিক্ত রোগ" বইটি সকলের পড়া দরকার।
https://notionpress.com/in/read/mishti-naam-er-tikto-rog?utm_source=share_publish_email&utm_medium=whatsapp
Archana Singh
किसी ने मुझसे पूछा :
" जिंदगी में क्या खोया , क्या पाया "..?
मैंने कहा : " जो खोया ,
वो मेरी क़िस्मत में नहीं थीं ,
जो पाया , मुझे उसकी आरजू नहीं थी " ।
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
जिंदगी के कुछ मसले ,
जिंदगी भर खत्म नहीं होते ,
कल कुछ और थे , आज कुछ और हैं
कल कुछ और होंगें , इसलिए ...
👇🏻👇🏻👇🏻 अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Imaran
चाँद भी शरमा जाए तेरे नूर के सामने,
तेरी एक मुस्कान से सवेरा हो जाए|
तू जब सामने आए,
तो हवा भी ठहर जाए,
तेरे रूप में खुदा की तस्वीर नज़र आए
💘 imran 💘
Awantika Palewale
वही दीवार-ए-गिला फिर से खड़ी हो गई,
मोहब्बत हार गई फिर से लड़ाई हो गई।
ये कैसी रस्म है, कैसी रिवायत है अपनी,
के बात-बात पे इक जंग छिड़ी हो गई।
वो पहले प्यार का मौसम, वो हँसी याद करो,
अदावत अपनी तो क्या कम बड़ी हो गई।
जला के राख किया हमने हर इक ख़्वाब-ए-वफ़ा,
के दिल की बस्ती हमारी उजड़ी हो गई।
न कोई जीत हुई इसमें, न कोई हारा है,
बस इक उम्मीद जो थी वो मरी हो गई।
सफ़र तमाम हुआ और कहीं ठहराव नहीं,
के ज़िंदगी अपनी तो इक घड़ी हो गई।
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
Priya
तुमने समझा मुझें एक टाइमपास
मेरे प्यार को माना हमेशा थर्ड क्लास
मेरी फिक्र थी तुम्हारे लिए बस एक बकवास
क्योंकी था तुम्हारे मन में कोई और खास
क्यों झूठ बोला तुमने मुझसे ये हर बार
करते हो तुम मुझसे बहुत प्यार
अरे! झूठे इंसान, सच बोल देते तो
आती ना मैं तुम्हारे कभी भी पास
पड़े रहते हमेशा तुम अपनी उस खास के पास
चाहे बन जाते तुम एक जिंदा लाश
तुम्हें हील करने को, मैं कोई दवाई नहीं हूँ
मेरे पास भी दिल हैं, मैं कोई सिपाही नहीं हूँ
तुम मुसाफ़िर हो तो मैं कोई राही नहीं हूँ
हर किसी से जो दिल जोड़ लू मैं तुम्हारे
इतनी माहिर नहीं हूँ.......
Priya kashyap....✍️
Dipika
प्रेम जानता है
स्वतंत्रता देना..
किसी को पाने से ज्यादा
उसका अच्छा चाह लेना प्रेम है..
और यही प्रेम तब परिपूर्ण हो जाता है..
जब तुम उसके सामने और वो
तुम्हारे सामने सहज हो जाता है...
जब तुम उसके सामने वही रहते हो
जो तुम असल में हो...
तुम्हें किसी भी प्रकार का दिखावा
नहीं करना पड़ता है..
अगर तुम किसी के जीवन का हकदार बन कर
तुम उसे प्रेम कह रहे हो?
तो ये प्रेम हो ही नहीं सकता...
Manoj kumar shukla
सजल
समांत----
पदांत-आना
मात्रा भार-16
(चौपाई छंद)
सोते को है सरल जगाना।
पर जगते को कठिन उठाना।।
जीवन दाँव लगाया फिर भी।
मात-पिता का लुटा खजाना।।
बरगद बनकर छाँव बनाई।
चिड़िया उड़ती सुना बहाना।।
उँगली थामे बड़े हुए पर।
सबल पैर का नहीं ठिकाना।।
उमड़-घुमड़ कर आँसू सूखे।
पर मुखड़े को है हर्षाना ।।
प्रश्न चिन्ह तब लगा हुआ है।
कैसा आया नया जमाना।।
संस्कृति और सभ्यता रूठी।
जागो मानव क्यों पछताना।।
मनोजकुमार शुक्ल 'मनोज'
Jyoti Gupta
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Komal Arora
इंतजार करना और करवाना क्या अच्छा लगता है तुम्हें.......
नहीं था वक़्त तो यू मुस्कुराना अच्छा लगता है तुम्हें.......
ना जाने कैसे पर यू पास आकर दूर चले जाना अच्छा लगता है तुम्हें........
यू किसी को ख़यालों में डालना अच्छा लगता है तुम्हें........
पर थोड़ा सोचो अगर इंतजार करने वाले ने इंतजार करना ही छोड़ दिया तो क्या अच्छा लगेगा तुम्हें.........
यू तुम्हारा वापिस आना अगर अच्छा ना लगा उसे तो क्या करोगे..........
वक़्त रहते सम्भल जाए नहीं तो उसके चले जाने के बाद यू बाते याद करते अच्छे नहीं लगोगे|
Shikha
ভালোমানুষি
বড্ড তুমি ভালোমানুষির
বড়াই করো গা,
আমি তো জানি
আদতে তুমি সেটা না।
আমি খারাপ, সেটা জানি—
তুমি তবে কেমন করে
আমার ভাঙা মনটার ওপর
এত সহজে দোষ চাপলে?
তোমার চোখে যে ঝড় ওঠে,
তার শব্দ আমি শুনি—
কিন্তু তুমি তো মুখ বুজে
সবকিছুই সাজিয়ে বলো।
আমি ভুল হলে মানি,
তুমি কি কখনও মন থেকে মানো?
তাহলে এতদিনের গল্পগুলো
কোথায় যাবে বলো?
যে বিশ্বাসগুলো গড়েছিলাম—
সব কি তবে শুধুই ছিল অভিনয় ?
- কলমে শিক্ষা
Komal Mehta
✨ મારી નવી પુસ્તક “RAW TO RADIANT” ડિસેમ્બરમાં આવી રહી છે! ✨💎
મારા પ્રિય વાચકો,
ખૂબ જ આનંદ સાથે જણાવું છું કે
મારું новое પુસ્તક “RAW TO RADIANT”
આવતા ડિસેમ્બર મહિનામાં Matrubharti પર પ્રકાશિત થવાનું છે.
જીવનની ઘસારાઓ,
સમજણો,
દુખ,
ચમક,
અને પોતાને ઓળખવાની સફર—
આ બધું આ પુસ્તકમાં ખૂબ જ દિલથી લખ્યું છે.
Rough Diamond થી લઈને
The Shine સુધીની આ યાત્રા,
શાયદ તમારા હૃદયને પણ ક્યાંક સ્પર્શી જશે…
જરૂર વાંચજો.
તમારો પ્રેમ, સપોર્ટ અને આશીર્વાદ હંમેશા જેવી સાથે રાખજો.
– Komal Mehta 💛✨
#RawToRadiant #KomalMehtaWrites #NewBookComing
Deepak Bundela Arymoulik
सुकून छीन कर इस मोहब्बत ने जीना सिखाया,
हर टूटी साँस में नया हौसला जगाया।
जो ख्वाब आँखों में दीप बन कर जले थे,
उन्हें आँसुओं की बारिश ने राख बनाया।
कभी सोचा न था दर्द भी कोई भाषा होगी,
जो चुप्पियों में दिल से दिल तक जाएगी।
मुस्कान जो लबों की मेहमान थी कभी,
वो अब यादों के शहर में धुंध बन जाएगी।
तुम जो चले गए तो ये दुनिया बदल गई,
रातों ने दोस्ती की, नींद दुश्मन हो गई।
हर सुबह आई तो बोझिल नज़र लेकर,
हर शाम मेरे जिस्म पर स्याही बन गई।
मैंने मोहब्बत में खुद को यूँ खो दिया,
कि आईने भी मुझसे सवाल करने लगे।
तेरी तस्वीरें तक नम आँखों से कहती रहीं,
“हम थे जो तेरे हर दर्द के गवाह बने।”
कभी तुम्हारी हँसी में खुद को खोजा,
कभी तुम्हारी ख़ामोशी में अपना नाम पढ़ा।
तुम्हारी हर एक बेवफाई की इबारत ने,
मेरे सब्र के पन्नों पर सबक लिख डाला।
हाँ, टूटा हूँ पर बिखरा नहीं हूँ अभी,
दर्द ने मुझे पत्थर नहीं, फौलाद किया है।
जो आग थी तेरी जुदाई के सीने में,
उसी आग ने मेरे ख्वाबों को आबाद किया है।
अब सुकून की आदत नहीं रही मुझे,
मैंने अश्कों को ही अपना तकिया बनाया।
जो तन्हाई थी कभी सबसे बड़ी सज़ा,
उसी तन्हाई ने मेरा घर सजाया।
सीख लिया है मैंने अंधेरों में चलना,
परछाइयों से रोशनी उधार लेना।
तेरे जाने के बाद जो खालीपन था,
उसे खुद से भरना, खुद को सहलाना।
मोहब्बत ने छीन लिया मेरा बेफ़िक्र बचपन,
पर मुझे जिम्मेदार दिल का हुनर दे दिया।
जो टूटकर भी धड़कता रहा सीने में,
ऐसा दिल इसने मुझे अमर कर दिया।
अब तुम नहीं, पर तुम्हारी यादें हैं,
कभी ज़हर, कभी मरहम बन जाती हैं।
और मैं हर रात एक नई कविता बनकर,
अपने ही दर्द से दोस्ती निभा जाता हूँ।
सुकून छीन कर इस मोहब्बत ने जीना सिखाया,
ये बात अब शिकवा नहीं, सच बन गई है।
जो दर्द था कभी मेरी हार का पैग़ाम,
आज वही मेरी सबसे बड़ी पहचान बन गई है।
आर्यमौलिक
Parag gandhi
જિંદગીમાં કંઈક આવડે કે ન આવડે
પરંતુ માણસો ઓળખતા આવડવું જોઈએ
કારણ કે જે દેખાય છે તે હોતું નથી..
*🔱જય કુબેર🔱*
*📿 ૐ નમઃ શિવાય📿*
*🦚 Զเधे Զเधे 🦚*
*┅━❀શુભ🦚સવાર❀━┅*
Paagla
PAAGLA – A heart that speaks through words. 💭✨ Sharing emotions, shayari, quotes, and stories that touch your soul. From love to pain, from motivation to dreams – here, every line is written to connect with your heart. ❤️📖
Yogi Krishnadev Nath
প্রকাশিত হলো ডায়াবেটিস থেকে মুক্তির উপায় "মিষ্টি নামের তিক্ত রোগ" আগ্রহী বন্ধুরা অনলাইন থেকে বইটি সংগ্রহ করতে পারেন।
https://notionpress.com/in/read/mishti-naam-er-tikto-rog?book=published&utm_source=share_publish_email&utm_medium=email
S A Y R I K I N G
मैने कहा था उससे
अगर में पलट गया तो फिर मूड के नहीं देखूंगा
हसने लगी वो
मोहब्बत पे
प्यार पे
इज्जत पे
भरोसे पे
पैसे पे
हक हलाली के पैसे पे
सब कुछ
टूटना जरूरी है
S A Y R I K I N G
मोहब्बत को तो लोगो ने यूंही बदनाम कर रखा है
लोग तो निकाह के बाद भी धोखा दे जाते है
kattupaya s
Good morning friends heavy rainfall here. be safe. have a nice day
Deepak Bundela Arymoulik
दिल की मोहब्बत
अब तो सिर्फ़ मोहब्बत जिस्म की है, दिल की नहीं,
रूहें प्यास से जलती हैं, पर किसी को शर्म की नहीं।
लोगों ने इश्क़ को अब सौदों में तौलना सीख लिया,
मुस्कान बिकती है सस्ती, कोई कीमत दर्द की नहीं।
जिन्होंने चाहा बिना शर्त, बिना दिखावे के साथ,
उन्हें भीड़ ने सिखा दिया—ये दुनिया उनके हक़ की नहीं।
दिल की मोहब्बत करने वाले अक्सर अकेले रहते हैं,
क्योंकि भीड़ को आदत है सिर्फ़ रौनक, सन्नाटे की नहीं।
आज हर वादे पर शक का साया भारी रहता है,
सच्चे लफ्ज़ ढूँढ़ते हैं ठिकाना—किसी की जेब की नहीं।
जिसने निभाया रिश्ता रूह से, वो कहानी बन गया,
और जो खेल गया जज़्बात से, वही हस्ती कमीने की नहीं।
कहीं कोई आज भी चुपचाप दुआओं में बसाता है,
वो नाम जो आता है आँखों में—किसी तस्वीर की नहीं।
अगर दिल की मोहब्बत मर गई होती सच में,
तो ये शायरी पैदा ही क्यों होती, किसी तकलीफ़ की नहीं।
आर्यमौलिक
Soni shakya
🙏🙏सुप्रभात 🙏🙏
🌹आपका दिन मंगलमय हो 🌹
Riddhi Mistry
મન થી કહેવાય તેવુ હોઠ થી ના કહેવાય, દિલ થી અપાય તેવુ હાથ થી ના અપાય, વાતો થી તો બધા સમજે પરંતુ જે વગર કહે સમજી જાય એજ સાચુ અંગત કહેવાય.... good morning.
Kuldeep Singh
kuldip Singh ✍️
Archana Singh
कोई प्रशंसा करें या निंदा ...
दोनों ही अच्छे हैं , क्योंकि ...
प्रशंसा प्रेरणा देती हैं और ...
निंदा सावधान होने का अवसर ..!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
महादेव कहते हैं ...
सत्य को सिद्ध करने के लिए
किसी से भी जिद्द करने की
जरूरत नहीं हैं क्योंकि ...
सत्य खुद ही समय पर
स्वयं सिद्ध हो जाता हैं ...!!
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
Archana Singh
क्रोध तेज हवा की तरह हैं ,
जो कुछ देर बाद ठंडा हो जाता हैं ..
लेकिन तब तक कई शाखाएं और
पत्ते टूट चुके होते हैं ,
जिन्हें दोबारा जोड़ा नहीं जा सकता !
अर्चना सिंह ✍🏻
- Archana Singh
ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત
किताब के कुछ पन्ने इतने हसीन होते है कि
बस, पूरी किताब वैसी ही हो,
और हमारी जिंदगी के चंद लम्हे ही हसीन होते है
लगता है वही पूरी जिंदगी हो।।
- ભૂપેન પટેલ અજ્ઞાત
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
परिंदा
मन परिंदा उड़ने को बेकरार हैं l
संगी साथी चलने को बेकरार हैं ll
मदमस्त फिझाओ में मस्ती से l
बयार संग बहने को बेकरार हैं ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Dinesh
*🙏જય બાબા સ્વામી*🙏
*આજનો સુવિચાર*
જરૂરી નથી કે બધાં બધે કામ આવે. આસોપાલવ નીચે વિસામો ભલે ના મળે, પણ સ્વાગત તો બધાંનું એ જ કરે છે, તોરણ બનીને.
*શુભ સવાર*
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
अमन चैन की खोज में, किया बहुत उद्योग । मिली शांति अब तक नहीं. अतिशय किया प्रयोग।।
दोहा--331
(नैश के दोहे से उद्धृत)
~~~गणेश तिवारी 'नैश'
Saroj Bhagat
યાદે:~
કહેવાતી આ જીંદગી આપની !
પણ એ પણ પરછાઇ બની !
હાથતાળી દઉં સરકીજ જાયછે
તો પછી યાદો તે પણ કોઇ બીજાની !
જેને માની બેઠા આપણી તો તેમાં
બીચારી યાદોનો શુ કસુર !!!
Kuldeep Singh
https://www.matrubharti.com/book/19984709/zindagi-sangharsh-se-sukun-tak-3
chapter -3 "जिंदगी संघर्ष से सुकून तक कविताएं"
please give me your valuable rating and review 🙏🙏🙏😊
Kuldeep Singh
kuldip Singh ✍️
Sweta Pandey
ऐसा क्यूँ है?
साधारण-सी घटना वाला कोई पल भी,
अन्तर्मन के गहरे भावों, का अनुमोदन कर जाता है ।
- Sweta Pandey
Agyat Agyani Vedanta philosophy
आज का इंसान — एक जिंदा शव
• सफलता = दिखावा + पैसा + फॉलोअर्स
• फैशन = पहचान
• धन = सुरक्षा
• चेयर/पद = सम्मान
पर भीतर?
एक मशीन जैसा भागता हुआ डर।
जैसे किसी पराए लोक से आया हो—
“जल्दी कमा, जल्दी भोग, जल्दी भाग…”
भविष्य का डर →
वर्तमान की हत्या।
💔 ऊर्जा गलत जगह बिक रही है
प्रेम की ऊर्जा?
शांति की ऊर्जा?
आनंद की ऊर्जा?
संतोष की ऊर्जा?
सब “पैसे में बदल दो” वाली भट्टी में झोंक दी गई है।
और लोग प्लास्टिक को पूज रहे —
जैसे वह सोना हो।
> गोबर पड़ा रहे तो कचरा,
खेत में जाए तो अन्न बन जाता है।
जीवन ऊर्जा रूपांतरण ही जीवन है।
भीतर जो ऊर्जा उसका रूपांतरण ईश्वर बोध हैं।
अद्भुत का खर्च कर हीरा फेंक कार जांच इक्कठा करना की आधुनिक कहते सुख कहते है।
अंदर की कमाई → खजाना
लोग उसे कचरा समझ
बाहर का कबाड़ जमा कर रहे।
💠 हीरा vs काँच
हीरा छोटा — पर चमक अपनी।
ऊर्जा भीतर की।
काँच बड़ा — पर चमक उधार।
दूसरी रोशनी चुरा कर जीता।
आज का इंसान →
एक बड़ा काँच।
भीतरी प्रकाश शून्य,
बाहरी रोशनी पर निर्भर।
🌱 असली जीवन क्या है?
जहाँ:
• ऊर्जा प्रेम बने
• ऊर्जा शांति बने
• ऊर्जा आनंद बने
• ऊर्जा संतोष बने
यही समृद्धि।
यही ईश्वर का स्वाद।
यही बोध की खुशबू।
यही असली “जीना”।
“इंसान काँच को हीरा मान बेच रहा,
और हीरे को काँच समझकर फेंक रहा है।”
ही आधुनिक नर्क।
यही गुमराह सभ्यता।
यही जीवित मौत।
........
Vedānta Life — From Energy to Awareness”
(वेदान्त जीवन — ऊर्जा से चेतना तक)
©Vedānta 2.0 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓣 𝓐𝓰𝓎𝓪𝓷𝓲 —
Abhishek Chaturvedi
हम कभी ख़ास थे ,
अभि ये उनके अल्फ़ाज़ थे....💔
- Abhishek Chaturvedi
Bhavna Bhatt
હેડ પંપ... જુની પધ્ધતિ
Ashish
*જિન્સ માં પાલવ ક્યાં થી લાવશો* 🤔
શાળામાં ગુરુજીએ કહ્યું કે
*માં ના પાલવ* પર
નિબંધ લખો..!
તો લખવા વાળા વિદ્યાર્થીએ
*માં ના પાલવ* પર
શું સરસ લખ્યું
*પૂરું વાંચશો તો હૃદય*
*ભરાઈ જશે...😭*
*આદરણીય ગુરુજી*
*માં નો પાલવ* માં ને ગરિમામય છબી
પ્રદાન કરવા માટે હતો
*માં નો પાલવ* ચૂલા ઉપરથી ગરમ વાસણો ને
ઉતારવામાં કામ આવતો હતો
*માં નો પાલવ* બાળકોના પરસેવા અને આંસુ લૂછવા
ગંદા કાન, કે મોઢું સાફ કરવા માટે
પણ પ્રયોગ માં લેવાતો
બાળકો ને જમ્યા પછી *માં ના પાલવ* થી
મોઢું લૂછવાનો અનેરો આનંદ
આવતો હતો
*માં નો પાલવ* ક્યારેક આંખ માં કંઈ ખૂંચતું તો *માં* ગોળ ગૂંચણું બનાવી ફૂંક મારી ગરમ કરી આંખ પર લગાવતી ત્યારે દુ:ખાવો એની મેળે બંધ થઈ જતો.
માં ના ખોળા માં સુવા વાળા બાળકો માટે માં નો ખોળો ગાદી અને *માં નો પાલવ* ચાદર નું કામ કરી જતો
જ્યારે પણ કોઈ અજાણ્યું આંગતુક ઘરે આવતું ત્યારે તો બાળક *માં ના પાલવ* ની પાછળ સંતાવા તેનો ઉપયોગ કરતો
તેવીજ રીતે બાળક જ્યારે જ્યારે શરમાઈ જાય ત્યારે પોતાનું મોઢું *માં ના પાલવ* થી ઢાંકી દેતો
જયારે બાળકને બહાર જવું હોય ત્યારે *માં નો પાલવ* પકડી લેતો અને તે *પાલવ* જ તેનો એક માર્ગદર્શક બની જતો
જ્યાં સુધી બાળક પોતાની *માં નો પાલવ* પકડ્યો હોય, ત્યાં સુધી આખું બ્રહ્માંડ તેની મુઠ્ઠી માં હોય તેવો તેને આભાસ થતો
*માં નો પાલવ* જ્યારે શિયાળા ની ઋતુ હોય ત્યારે માતા પોતાના બાળકને ચારો કોરથી વીંટાળી ઠંડીથી બચાવવા ના પ્રયત્ન કરતી
અને...
જયારે ખૂબ વરસાદ પડે તો *માં નો પાલવ* છત્રી બની મોઢું ઢાંકવા કામ આવતું
*માં નો પાલવ* નો હાથ લૂંછણીયા તરીકે પણ ઉપયોગ કરી લેવાતો
*માં નો પાલવ* ઝાડ પર થી
પડેલા જાબું અને સુગંધિત ફૂલો ને ભેગા કરવા અને લાવવા ઉપયોગમાં લેવાતો
કયારેક...
અનાજ, દાન, પ્રસાદ ના સંકલન માટે *માં ના પાલવ* વપરાતો
*માં નો પાલવ* ઘરમાં રાખેલ સામાન ઉપરથી ધૂળ સાફ કરવામાં પણ સહાયક થતો
કયારેક કોઈ વસ્તુ ખોવાય જાય તો *માં ના પાલવ* ને ગાંઠ બાંધી નિશ્ચિન્ત થઈ જતા કે જલ્દી મળી જશે અને મળી પણ જતી
*માં ના પાલવ* ની ગાંઠ લગાવી એક હાલતી-ચાલતી બેન્ક કે તિજોરી બની જતી અને જો બાળક નું નસીબ જોર કરે તો ક્યારેક બેંકમાંથી થોડા પૈસા પણ મળી જતાં
*માં નો પાલવ* બીજું કાંઈ નહીં, પણ એક જાદુઈ અનુભવ છે
જે આજ ની પેઢી
તો નહીં જ સમજી શકે
*હવે જીન્સ પહેરવા વાળી Mom*
*પાલવ લાવશે*
*ક્યાંથી...?*
*સાડલા પહેરેલ માંના પાલવનો આસ્વાદ આપવા વાળી દરેક માતાઓ ને સમર્પિત..*🙏
Rahul Raaj
हम अपने हालतों के स्वयं ही ज़िम्मेदार होते है. ये अलग बात है कि उसका ज़िम्मेदार परिस्थितियों को बना देते है. परिस्थिति चाहे जो भी हो लेकिन निर्णय तो हमारे होते है. मैंने ग़लत निर्णय लिया. ग़लत रास्तों पर चले तो भुगतना भी पड़ेगा कुछ निर्णय होते है जो ग़लत हो जाए तो उनका भुगतान जीवन भर करना होता है. और इस बार मैं मानसिक रूप से प्रताड़ित हूँ लेकिन सिर्फ़ अपने ही ग़लत निर्णय के कारण. कभी सोचा नहीं था कि मेरी एक गलती इतनी भयावह हो जाएगी..!!
Praveen Kumrawat
मेरी प्यारी अंशु
कैसी हो? मम्मी पापा कैसे है? उम्मीद है सब ठीक होंगे।
कभी अपना हाल-चाल बता देने के लिए ही मैसेज कर दिया करो। मैं तुम्हारे बिना अधूरा सा महसूस करता हूँ। अब तो तुमने इतना पराया कर दिया है कि मुझसे अपनी परेशानियां, अपने दुख भी शेयर नहीं करती। अभी तक मैं अपनी समस्याओं पर ही बात करता रहा, तुमसे पूछा ही नहीं कि तुम पर वहां क्या बीत रही है तुम ठीक हो या नहीं? पूछता भी कैसे? तुम मुझसे बात करना ही नहीं चाहती। लेकिन सच यह है कि मुझे हमेशा तुम्हारी चिंता रहती है। तुम्हें मुझसे तो कभी कोई शिकायत नहीं थी, फिर मुझसे ऐसी कौन सी भूल हो गई कि तुम मुझसे बात करना भी पसंद नहीं कर रही? तुम्हारी खामोशी मुझे मार रही है, अंशु।
मुझे लगता है कि मैं तुम्हे खो रहा हूँ। तुम्हारा मुझसे बात न करना एक सजा बन गई है। कम से कम मुझे अपनी भूल जानने का तो हक है। अरे, अभी तो हमारा रिश्ता कायम है। मुझे अपनी भूल बता दो, ताकि मैं उसे सुधार सकूं।
मैं क्या समझू? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। मुझसे बात करो और मुझसे अपनी बाते शेयर करो। मैं तुम्हे सुनने के लिए हमेशा तैयार हूँ।
[ तुम्हारा खडूस, तुम्हारा प्रवीण ]
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Praveen Kumrawat
मेरी प्यारी अंशु
कैसी हो? मम्मी पापा कैसे है? उम्मीद है सब ठीक होंगे।
कभी अपना हाल-चाल बता देने के लिए ही मैसेज कर दिया करो। मैं तुम्हारे बिना अधूरा सा महसूस करता हूँ। अब तो तुमने इतना पराया कर दिया है कि मुझसे अपनी परेशानियां, अपने दुख भी शेयर नहीं करती। अभी तक मैं अपनी समस्याओं पर ही बात करता रहा, तुमसे पूछा ही नहीं कि तुम पर वहां क्या बीत रही है तुम ठीक हो या नहीं? पूछता भी कैसे? तुम मुझसे बात करना ही नहीं चाहती। लेकिन सच यह है कि मुझे हमेशा तुम्हारी चिंता रहती है। तुम्हें मुझसे तो कभी कोई शिकायत नहीं थी, फिर मुझसे ऐसी कौन सी भूल हो गई कि तुम मुझसे बात करना भी पसंद नहीं कर रही? तुम्हारी खामोशी मुझे मार रही है, अंशु।
मुझे लगता है कि मैं तुम्हे खो रहा हूँ। तुम्हारा मुझसे बात न करना एक सजा बन गई है। कम से कम मुझे अपनी भूल जानने का तो हक है। अरे, अभी तो हमारा रिश्ता कायम है। मुझे अपनी भूल बता दो, ताकि मैं उसे सुधार सकूं।
मैं क्या समझू? मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा। मुझसे बात करो और मुझसे अपनी बाते शेयर करो। मैं तुम्हे सुनने के लिए हमेशा तैयार हूँ।
[ तुम्हारा खडूस, तुम्हारा प्रवीण ]
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Rahul Raaj
जब हम किसी से प्रेम करते हैं उस के प्रेम में हम सोचते हैं की हमे सुकून मिलेगा, वो हमारे लिए दुनिया की सारी खुशी हैं पर वो तो हमारी आत्मा तक को बिखेर के रख देता हैं जैसे हम प्रेम में हैं हम उनके लिए सोचते हैं वो तो शायद प्रेम में हैं ही नहीं उसके लिए ना हमारे आँसू मायने रखते है ना ये मायने रखता हैं की हमे उनकी बातो से दुख होता हैं..
Anil Rabari
જય દ્વારકાધીશ 💙
kattupaya s
Goodnight friends sweet dreams
Komal Arora
मन की बेचैनी का कोई इलाज नहीं है........
तुम हो साथ पर मन शांत नहीं है........
हो सके तो समझ जाना खुद ही.......
क्योंकि यू बता कर मनवाना अच्छा नहीं है.........
यू थोड़ा समय लग जाए.......
कोई बात नहीं.....
पर जब आना पूरे मन से आना.....
और बहुत सारे सवालों का जवाब लेते आना.........
Abhishek Chaturvedi
तुम्हें अगर सुकून से रहना है तो......
Nisha ankahi
कभी किसी की एक आह भी,
किसी ग़ज़ल से ज़्यादा भारी पड़ती है,
और कभी किसी की ख़ामोशी,
पुरानी यादों की तरह
दिल में देर तक उतरती है।
- Nisha ankahi
S A Y R I K I N G
कांग्रेस जैसा था उसका प्यार
सब सुपड़ा साफ़
2% बचा है ये ही एक उम्मीद है
Akshita
A Prayer to the Universe 🌙
Hey Universe, I stand tonight, Not to beg from people—only your light.
I ask for strength, I ask for power, Guide my steps in every hour.
Money, support, a little care— Things I need but never get anywhere. The world feels heavy, my heart feels small, So I come to you, Universe, I give you my all.
Hey Universe, it’s me—Akshita, your girl, Trying to survive in a complicated world. No one to help, no one to show the way, So I’m asking you to hold me today.
Lift my spirit when I fall, Give me courage to stand tall. Help me study, help me fight, Turn my darkness into light.
Make my dreams strong and clear, Erase my doubt, remove my fear. If you guide me and help me through, I’ll forever be grateful to you.
Hey Universe, hear my plea— Make me the best version of me. Give me strength and let me rise, Let success come before my eyes.
Thank you !
- ✍🏻 AKSHITA〽️
GRUHIT
Human Invented Mirrors
Then started Using Filter
Why??
Cause Mirror Is Too 'Honest'
માણસ એ પેલા અરીસો શોધ્યો,
પછી ફિલ્ટર લગાવાનું ચાલુ કર્યું,
આવું કેમ?
કેમ કે અરીસો બોવ સાચું બોલી દેતો હતો. .
Rahul Raaj
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं?
तुम कह देना कोई खास नहीं...
एक दोस्त है पक्का कच्चा सा,
एक झूठ है आधा सच्चा सा,
जज़्बात से ढका एक पर्दा है,
एक बहाना कोई अच्छा सा !
Anup Gajare
"बीज"
_____________________________
हम सोचते हैं
समस्या कहीं बाहर से आती है—
किसी दूसरे की गलती,
किसी और समय की मार,
किसी अनजानी हवा की दिशा से।
पर सच यह है
कि सबसे घातक समस्याएँ
हम स्वयं बोते हैं
अपनी ही अनदेखी भूमि में,
जहाँ मन थोड़ा भी खाली पड़ा मिले
वहाँ डर
आकर ठहर जाता है।
डर—
एक छोटा-सा बीज,
पर इतना चालाक
कि मिट्टी को पता भी नहीं चलता
कब उसने उसे
अपनी गरमाहट दे दी।
फिर वही बीज
रात के अँधेरे में
हमारी छाती की गुफाओं में
धीरे-धीरे धड़कनें चूसते हुए
जड़ें फैलाता है।
पहले नरम,
फिर सख़्त,
फिर पत्थर-सी बेलें
हमारे पूरे भीतर की मिट्टी
अपनी पकड़ में ले लेती हैं।
हम कोशिश करते हैं
उन्हें उखाड़ फेंकने की—
पर हर जड़ के सिरे पर
हमारी ही किसी भूली हुई
कंपकंपी की छाप मिलती है;
हर पत्ती पर
हमारी ही किसी पुरानी
बेआवाज़ घबराहट की गंध।
और तब समझ आता है,
समस्या कभी बाहर की नहीं थी।
वह तो वही बीज था—
जिसे हम ही
अपने भीतर फेंककर भूल गए थे।
______________________________________________
S A Y R I K I N G
सब कुछ नहीं मिलता इस जिंदगी में
कुछ चीजें मुस्कुरा के छोड़ देना चाहिए
S A Y R I K I N G
मलाल है लेकिन इतना मलाल थोड़ी है
ये आंख सिर्फ रोने से लाल थोड़ी है
बस अपने ही वास्ते फिक्र मंद है लोग
यहां किसी को किसी परवाह थोड़ी है
M K
चल लिया मैने अब उन रास्तों पर बहुत
जो मुझसे जुड़ी थी पर मेरे हिस्से का नहीं था....
कागज़ का खिला गुलाब आखिर कब तक
मेरी जिंदगी को खुशियों की महक दे ...!!
- M K
M K
लोगों का रवैया बता देता है,
उसके दिल में आपकी जगह कोई और ले लिया है..!!
_M K
Nabiya Khan
---
🌤️ एक ख़ूबसूरत सुबह की महक
रात की ख़ामोशी जब अपने परों को समेट कर लौटती है, तब सबेह-फ़रोज़ की हल्की-हल्की रौशनी दिल के दरवाज़े पर दस्तक देती है। सुबह की यह नर्मसी रौशनी मानो मेहरबानी की तरह फैलती है, और हर तरफ़ एक नई ताज़गी बिखेर देती है।
हवा में घुली रवानी, पत्तों पर ठहरी शबनमी बूंदें, और आसमान का नीलम सा रंग—सब मिलकर दिल को एक अजीब सी क़ुदरती राहत देते हैं। ऐसा लगता है जैसे सुबह हमें फिर से नई शुरुआत का मौका देती है, पुराने बोझ उतारकर मुस्कुराने की दावत देती है।
इस ख़ूबसूरत सुबह में जब सूरज अपनी पहली नूरानी किरण ज़मीन पर बिखेरता है, तो दिल भी अपने अंदर की उम्मीदों को रोशन करता है। यह वक़्त सिर्फ़ जागने का नहीं, बल्कि जीने का एहसास दिलाता है।
सुबह की ये नर्मी यूं ही नहीं आती; ये हमें सिखाती है कि चाहे रात कितनी भी तारीक़ क्यों न हो, हर सुबह अपने साथ नई रोशनियाँ लेकर आती है।
तो चलिए, आज की इस खूबसूरत सुबह को दिल में उतारते हैं—
नए इरादों के साथ, नई दुआओं के साथ,
और ज़िंदगी को उसके सबसे मासूम रंग में महसूस करते हुए।
Imaran
औरत मोहताज नहीं किसी गुलाब की...
वो खुद बाग़बान है इस कायनात की
👰 imran 👰
M K
तेरे बदलाव को देखकर मैं भी बदल गई
तो मोहब्बत कैसा ??
मेरी खामोशी ही तुम्हे मार डालेगी,,,
- M K
archana
कहते हैं स्त्रियाँ पैसों की भूखी होती हैं—ठीक है, मान लिया।
लेकिन क्या पुरुषों की इच्छाएँ कम होती हैं?
वे भी तो दूसरी स्त्रियों को निहारकर कहते हैं—
“देखो उसका स्टाइल… उसका ड्रेसिंग सेंस…
वह कितनी सुंदर लगती है… उसका मेकअप, उसकी साड़ी, उसके बाल!”
तो क्या यह सब बिना पैसों के होता है?
खूबसूरत दिखने के लिए मेहनत भी चाहिए और पैसा भी।
सोचिए—
एक तरफ एक सीधी-सादी औरत,
सर पर पल्लू, साधारण सस्ती साड़ी,
20 रुपये की बिंदी, 20–30 रुपये की चूड़ियाँ,
हल्का-सा साधारण मेकअप—बस जितना जरूरी हो।
और दूसरी तरफ—
एक हाई-क्लास तैयार औरत,
6000–8000 की महंगी साड़ी,
महंगे प्रोडक्ट वाला मेकअप,
स्टाइलिश हेयरस्टाइल, चमकदार जूलरी—
सबकुछ पैसे से सजा हुआ।
अब बताइए—
पुरुष किस ओर आकर्षित होता है?
सीधी-सादी स्त्री की ओर…
या उस ओर, जिसे चमक-दमक के लिए पैसे लगाए गए हों?
हम स्त्रियों को तो शौक नहीं कि फिजूल खर्च करें।
अगर पुरुष हमें सिंपल, साधारण रूप में स्वीकार कर ले,
तो हमें भी कोई आपत्ति नहीं—हम वैसे ही खुश हैं।
लेकिन अगर उन्हें “बेहतरीन सुंदरता”,
महंगे प्रोडक्ट, महंगे कपड़े, और परफेक्ट स्टाइल चाहिए—
तो फिर खर्च भी वही करवाएंगे।
क्योंकि हम पर पैसा खर्च करने की इच्छा भी उन्हीं की होती है,
और अपेक्षा भी उन्हीं की होती है।
स्त्री को पैसों की भूखी कहने से पहले
पुरुषों की इच्छाओं की कीमत भी समझनी चाहिए
तो सभी स्त्रियों से निवेदन है
कि पुरुष की पसंद कौन सी होगी ?
कमेंट में बताएं।
Soni shakya
बारीस हो रही थी पर..
वो भीग रहा था-- मुझमें
- Soni shakya
Agyat Agyani Vedanta philosophy
हरी मिले — तो मोती भी कंकड़
वेदान्त 2.0
मनुष्य सोचता है—
आध्यात्मिक जीवन मतलब
कुछ नया बनना।
कुछ विशेष शक्ति पाना।
कोई देवत्व सिद्ध कर लेना।
लेकिन बनना क्या?
जहाँ “पाना” शुरू होता है—
वहाँ मक्खी जन्म लेती है।
पाने की भूख, नीचे ले जाती है।
गंदगी भी
खजाना लगने लगती है।
जब पाना और बनना छोड़ दिया—
तभी सामने आती है
अनंत का खुला आकाश।
जहाँ न रेखा,
न दीवार,
न लक्ष्य—
केवल असीम संभावना।
> बाहर साधु, भीतर भूख —
यही मनुष्य का पाखंड है।
---
सीता माता ने
हनुमानजी को
मोती की माला भेंट दी।
हनुमान ने क्या किया?
मोती तोड़ दिए।
क्योंकि
वे पाना नहीं चाहते थे,
वे राम को पहचानते थे।
> जहाँ राम नहीं — वहाँ मूल्य नहीं।
मोती
कचरा है
जब तक उसमें
राम की झलक न मिले।
---
योग
यदि जो भीतर है
वही प्रकट हो जाए—
तो उसे मुक्ति कहते हैं।
> तुम्हारे भीतर का अमृत —
पहले से मौजूद है।
पर मनुष्य ने
योग को भी
बाज़ार बना दिया—
सिद्धि
शक्ति
सम्मान
चमत्कार
गुरु-पद
भीड़
भाव वही नीच
बस पोशाक साधु की।
और मक्खी सोचती है—
“अब मैं आध्यात्मिक मक्खी हूँ!”
पर उड़ती वही गंदगी पर है।
---
✧ हनुमान का संदेश ✧
> जहाँ प्रेम — वहाँ ईश्वर।
जहाँ अहंकार — वहाँ मक्खी।
हनुमान खोजते हैं—
राम
सत्य
प्रेम
समर्पण
शरीर नहीं बदलता —
पहचान बदलती है।
जब हनुमान बचपन में सूर्य को फल समझ उड़ पड़े—
वह संभावना का विज्ञान था।
जब पवन रुका—
वह ऊर्जा का विज्ञान था।
रोक में भी संकेत
उड़ान में भी संकेत
सब राम का खेल
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🧠 अंतिम सूत्र
> योग = भीतर छिपे राम को ढूँढ लेना
बाकी सब — बाहरी मोती हैं।
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🔥 सार —
> जो मिले सो हरि —
यदि भीतर राम हो।
जो मिले सो नरक —
यदि भीतर मक्खी हो।
अज्ञात अज्ञानी
S A Y R I K I N G
तरस जाओगे हमारे लबों से एक एक लफ्ज़
प्यार की बात तो क्या अब तो हम शिकायत भी नहीं करेंगे आप से
archana
चेहरे पर चेहरे लिए फिरते हैं,
मीठा-मीठा बोलकर दोहरे चेहरे रखते हैं।
इतना मीठा बोलते हैं कि लगें फ़रिश्ते जैसे,
पर अपने फायदे के लिए
पीठ में खंजर घोपते हैं।
M K
जरूरत से ज्यादा किसी पर भरोसा
और जरूरत से ज्यादा किसी से प्यार
भूल कर भी नहीं करना चाहिए,,,,
- M K
Abhishek Sharma - Instant ABS
We believe in Literary Commendation with Brilliance!
- Abhishek Sharma - Instant ABS
Miss writer
तुम कहो तो सती सा इंतेज़ार करने के लिए तैयार हुं,
तुम शिव सा तप करो तो सही!
तुम कहो तो मैं राधा सा त्याग करने के लिए तैयार हुं,
तुम कृष्ण सा प्रेम करो तो सही!
तुम कहो तो जीवन भर तुम्हारी बन रहूं,
तुम राम सा बनो तो सही!
Nensi Vithalani
वो कहते हैं— मिलने आओगे मुझसे…?
हम कहते हैं— क्या सच में वक़्त निकाल पाओगे मेरे लिए…?
वो कहते हैं— आख़िरी दफ़ा आऊँगी क्या…?
हम कहते हैं— पहली दफ़ा आए ही कब थे आप, जो आख़िरी की बात करते हो…?
वो कहते हैं— याद रखोगी मुझे…?
हम कहते हैं— भुलाया ही कब है आपको… दिल से उतरे ही कब थे…?
वो कहते हैं— इस बार दिल से मिलोगे…?
हम कहते हैं— दिल तो पहले दिन से आपका ही था, बस आपने देखा नहीं…
वो कहते हैं— शायद देर हो गई आने में…?
हम कहते हैं— देर तो तब होती है जब कोई इंतज़ार छोड़ दे… हमने तो आज भी वही जगह संभालकर रखी है…
और अब… जब आख़िरी दफ़ा आ ही गई हूँ—
तो क्या हमेशा साथ रख पाओगे हमें… अपने…?
Nensi Vithalani
“માગીને મળે તે તો વસ્તુઓ હોય છે,
સંબંધો નહીં…
સાચો સંબંધ તો એ જ છે,
જે વગર કહ્યાં, વગર માંગ્યાં
આપણી ખાલી જગ્યાઓ ભરતો રહે.”
- Nensi Vithalani
Agyat Agyani Vedanta philosophy
यह नहीं लिखना चाहिए लेकिन समझ बढ़ती तो लिखना चाहिए
जब कोई व्यक्ति
मेरी आध्यात्मिक खोज,
मेरे लिखे हुए अनुभव,
मेरी बातों को झूठा कहकर
वैज्ञानिक नहीं, पाखंड, अंधविश्वास कह देता है —
तो असल में दो ही बातें होती हैं:
1️⃣ वह खुद को बहुत बुद्धिमान साबित करना चाहता है
और कहता है —
“ऐसा कहीं लिखा नहीं है, विज्ञान ने माना नहीं है, तो ये सब बेकार है।”
2️⃣ पर उसी समय
वह खुद यह भी साबित कर देता है
कि उसकी बुद्धिमानी अधूरी है।
क्योंकि जो सवाल उठाता है
वह जवाब खोजने की विनम्रता भी रखे तो ही
वह सच में बुद्धिमान कहलाता है।
असली पागल कौन?
यदि तुम मुझे “पागल” कहते हो —
तो ठीक है!
मैं मान लेता हूँ कि मैं पागल हूँ।
पर फिर तुम कहाँ साबित करते हो कि तुम बुद्धिमान हो?
जो सिर्फ नकारता है,
कहता है “झूठ, बकवास!”
पर खुद कुछ न दिखाए,
न कोई अनुभव, न समझ दे —
तो वह किस बुद्धि का मालिक?
पागलपन वह नहीं
जो खोज रहा है।
पागलपन वह है
जो खोजने से मना कर देता है।
आध्यात्मिकता का नियम
आध्यात्मिक मार्ग में:
जो आगे समझदार है —
वह पीछे वाले को हाथ पकड़कर उठाता है।
यही सृजन है।
यही करुणा है।
यही धर्म है।
लेकिन जो कहता है: “मैं समझदार और तू मूर्ख” —
वह खुद बच्चे की तरह है
और कभी बड़ा नहीं बन पाता।
प्रेम से सीखने–सिखाने का मार्ग
यदि तुम आमने-सामने विरोध में खड़े रहो —
तो दोनों हारते हैं।
लेकिन यदि तुम मुझे प्रेम से सुधारो —
तो मैं भी बढ़ूँगा
और तुम भी और ऊँचे हो जाओगे।
यही आध्यात्मिकता है:
दोनों का उत्कर्ष।
अंतिम वाक्य
प्रश्न करना — मानसिक रोग नहीं है।
प्रश्न से भागना — मानसिक रोग है।
M K
देना हो तो दर्द देना ,
जिनकी औकात नहीं धोखा वही देते हैं”
- M K
Nensi Vithalani
✨ NEW CHAPTER ALERT! ✨
“Niyati: The Girl Who Waited – Part 21” is OUT NOW!
The journey of Niyati is getting deeper, emotional and more beautiful than ever. ❤️✨
If you’re already following her story — go read the new part now!
If you’re new — start from Part 1 and experience the entire magical journey from the beginning.
📖 Read Part 21:
https://www.matrubharti.com/book/19984697/niyati-the-girl-who-waited-21-by-nensi-vithalani
📖 Start from Part 1:
https://www.matrubharti.com/book/19979576/niyati-the-girl-who-waited-1
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Your support means everything! 🤍✨
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divya
हा अब खुश हुं मैं ,,
क्योंकि अब खुशियों की, तलाश नहीं करती।
सब खो चुकी हूं शायद,,
अब कुछ भी पाने की ,आस नहीं करती ।
शायद बिखरी हुई हूं
अब जुड़ने की, कोशिश नहीं करती ।
जो भी है आज
जी लेती हूं उस आज में कल की तलाश नहीं करती।
सब्र रखती हु अब,
बेवजह ख्वाहिशों की, आस नहीं रखती ।
हा शायद इसलिए खुश हूं मै,
क्योंकि अब खुशियों की, तलाश नहीं करती।
Mrs Farida Desar foram
jumma mubarak ✨️
kajal jha
मैंने एक दिन बैठे बैठे दिल से पूछा कि प्यार में इंसान की जिंदगी आबाद होती है कि बर्बाद तो मेरे दिल ने कहा अगर प्यार सही इंसान से हो जाए तो जिंदगी आबाद हो जाती है और अगर गलत इंसान से प्यार हो जाए तो जिदगी बर्बाद हो जाती है अब यह तुम पर है कि तुम्हें आवाद होना है या बर्बाद
- kajal jha
Mamta Trivedi
ममता गिरीश त्रिवेदी की कविताएं
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