Gujarati Whatsapp Status |
Hindi Whatsapp Status
SARWAT FATMI
मैं..... मैं, और सिर्फ मैं 🥰
मैं एक बीवी हूं
मैं एक बहू हूं
मैं मां हूं
मैं बेटी हूं
और साथ ही साथ एक working woman हूँ
पर इन सबसे ऊपर
मैं,और सिर्फ मैं हूं
कमियां मुझ में भी है
मैं थोड़ी ना परफेक्ट हूं
गलतियां तो मुझसे कहीं बार हो जाती है
दिन भर की थकान से कभी तो टूट जाती हूँ
गुस्सा आना तो लाज़मी है
पूरे शिद्दत से खुद को संभाल कर, सुबह उठ, बच्चों और husband के मनपसंद चीज बनाने में लग जाती हूं उनके साथ घंटो बात करके,
तो कभी बच्चों के साथ खेल-खेल के
वक़्त गुज़रता है
फिर शाम खुद को,खुद से मिलाती हूं
जब ट्यूशन में बच्चों का welcome होता है
कई घंटे के बाद लगता है
मैं, मैं हूं
कभी-कभी यूं ही बैठकर सोचती हूं
शादी से पहले जो मुझे पसंद नहीं होता
मम्मी मेरे लिए कुछ और बना देती
पर आज वही ना पसंद को मुस्कुराहट के साथ बनाती भी हूं और खा भी लेती हूं
क्योंकि अब मैं बेटी नहीं
एक मां हूं बीवी हूं और बहू भी हूँ
पहले जिद करके अपनी बातें मनवा लेती थी
पर अब तो जिम्मेदारियां काफ़ी हैं
लोग कहते हैं तुम बदल गई हो
मैं बदली नहीं हूं बस....
अपने परिवार के पसंद को ही अपना पसंद बना लिया है
sarwat fatmi🥰
Ashish jain
*पुरुषार्थ का उद्घोष*
तंद्रा तज कर जो जाग उठा, वह अभ्युत्थान का राही है,
भाग्य-लेख को जो मिटा सके, वही कर्म का साक्षी है।
मृग-मरीचिका के पीछे वह, कभी न अपना समय गँवाता,
श्रम-सीकर से अपनी वह, अमिट नियति लिख जाता।
बाधाओं का संवर्तक बन, जो गिरिवर को भी झुकाता है,
शून्य से जो सृजन करे, वही विश्वकर्मा कहलाता है।
कर्मठता की उस वेदी पर, जब 'आशीष' का दीप जलता है,
तब भाग्य का वह मौन पत्थर भी, संकल्प-ताप से पिघलता है।
न थकता है वह काल-चक्र से, न प्रारब्ध का रोना रोता,
अथक साधना के बीजों को, वह मरुथल में भी है बोता।
अतुलित बल का वह पुंज है, संकल्प जिसका अविचल है,
तपस्या की उस पावन भट्टी में, तपकर बनता वह कुंदन है।
Adv. आशीष जैन
7055301422
sonika bhawsar
narajgi kise karu kon mana ta nhi saaja kisi du koi sudharta nhi wafaa kisse karu jo pyar kr ta nhi jiyu kisk liye koi jine ki liye zindagi jita nhi
- sonika bhawsar
mohansharma
पहले कर लिया करते थे उनसे शिकायतें..
जब कोई अपना ही नहीं तो कैसी शिकायतें..
Mrudhula
Sometimes I feel like life chose me to love deeply, but not to keep the people I love. Every time my heart finds someone, they slowly become a memory instead of a part of my life. I try to stay strong and smile, but inside there is always a quiet pain that no one sees. Maybe my heart was meant to carry more love than it receives, and that is why losing hurts so much.
Asmita Madhesiya
कदर करिए उस व्यक्ति की जो आपको खुश देखना चाहता है ।
- Asmita Madhesiya
Asmita Madhesiya
किसी के कष्ट का मजाक न बनाए , इंसानियत रखें।
- Asmita Madhesiya
bhagwat singh naruka
बारिशों के उदास मौसम में,
खुद को देखूं तो याद आए कोई ...
काश कि यूं भी हो जाए एक बार ,
मैं पुकारूं तो लौट आए कोई...!!!
♥️♥️♥️♥️♥️♥️🙏🙏🙏🙏🙏✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ लाईक शेयर कॉमेंट
Asmita Madhesiya
आप चाहे किसी के साथ कितना भी अच्छा कर ले ये जरूरी नहीं की आपके साथ भी अच्छा हो ।
- Asmita Madhesiya
bhagwat singh naruka
शिकायत है उसे हमारी खामोशी से मगर,
वजह उसे भी नहीं जाननी हमारी खामोशी की!!✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️🙏🙏🙏🙏🙏♥️♥️♥️
#writer_bhagwatsingh_naruka
Asmita Madhesiya
आपको कोई समझे इसकी उम्मीद किसी से न लगाए ।
- Asmita Madhesiya
bhagwat singh naruka
अब आसमां पर है नाम तेरा, और मैं जमीं पर हूं,
तू भटक गया राह-ए-इश्क से, और मैं वहीं पर हूं !!♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️♥️🙏🙏🙏🙏🙏🙏✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️#writer_bhagwatsingh_naruka
Rashmi Dwivedi
दिल की ख्वाहिश
अब तुम कभी याद नहीं आते बस कभी-कभी महसूस होते हो,
तुम मेरी कहानी के वह हसीन पन्ने थे जिसे मैंने बार-बार पढ़ा और दोहराती ही रही और पूरी किताब समझ लिया
अब ना कोई शिकायत है ना अब कोई सवाल.... तुमसे
सिर्फ कुछ पल कुछ यादें हैं जो बिना वजह लौट आते हैं कभी दिन के कामों के बीच में,कभी रात को बेवजह खुली आंखों के बीच में, कभी बंद आंखों के बीच में
अगर किस्मत ने फिर से कभी सामने ला दिया तुमको तो मैं नजर झुका लुंगी रास्ते बदल दूंगी और दिल की यही ख्वाहिश रहेगी की कभी लौटना मत।।
kajal jha
खामोशी में भी एक आवाज़ होती है,
जो हर कोई सुन नहीं पाता।
कुछ दर्द ऐसे होते हैं ज़िंदगी में,
जो इंसान हँसकर भी छुपा जाता है। ✨
- kajal jha
Bhavna Bhatt
પક્ષીના બચચા આવ્યાં...
Saroj Prajapati
यूं अपनी जिंदगी की किताब
खोलकर सबको दिखाया नहीं करते
राज दिल के सबको बताया नहीं करते
किताबों को पढ़ने की अब यहां फुर्सत किसे
समझे जज्बातों को अब ऐसे दिल कहां मिले।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapati
Saroj Prajapati
यूं खोलकर जिंदगी की किताब
सबको दिखाया नहीं करते
राज दिल के सबको बताया नहीं करते
किताबों को पढ़ने की अब यहां फुर्सत किसे
समझे जज्बातों को अब ऐसे दिल कहां मिले।
सरोज प्रजापति ✍️
- Saroj Prajapat
Suresh sondhiya
🚩 खुशखबरी: मिलिए मेरे पहले सुपरहीरो से! 🚩
नमस्कार दोस्तों, मैं लेखक सुरेश आप सभी के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया हूँ!
काफी समय से मैं जिस दुनिया और जिन किरदारों को शब्दों में बुन रहा था, आज उनमें से S C U के पहले सुपरहीरो का चेहरा और उसका खास 'पावर सूट' पूरी तरह तैयार है। मैंने उसकी एक झलक (फोटो) तैयार की है जिसे आप यहाँ देख सकते हैं।
इस हीरो की रगों में भारतीय मिट्टी का साहस है और इसके सूट की चमक भविष्य की तकनीक की। आप इसे देखें और मुझे कमेंट में जरूर बताएं कि आपको हमारे हीरो का यह नया अवतार कैसा लगा?
अभी तो यह सिर्फ शुरुआत है, जल्द ही आपके सामने एक ऐसी कहानी आने वाली है जो आपने पहले कभी नहीं सुनी होगी!
🚀 आने वाली धमाकेदार कहानियों और अपडेट्स के लिए मुझे फॉलो करना न भूलें!
धन्यवाद,
— आपका अपना, लेखक सुरेश सौंधिया
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A singh
मैं सच कहती रही, लोग नाराज़ होते रहे,
झूठ कहते तो शायद सब अपने होते।
आज समझ आया मुझे इस दुनिया का रंग,
यहाँ चेहरे हँसते हैं, पर दिल रोते हैं।
— A Singh
A singh
मैं सच कहती रही, लोग नाराज़ होते रहे,
झूठ कहते तो शायद सब अपने होते।
आज समझ आया मुझे इस दुनिया का रंग,
यहाँ चेहरे हँसते हैं, पर दिल रोते हैं।
— A Singh
PRASANG
“ભુખ સામે બધા સવાલો”
ભુખ જાગે ત્યારે પ્રશ્નો ખોટા રહી જાય છે,
ખાલી પેટ સામે તર્કો સૂના રહી જાય છે.
રોટલી શોધતાં પગલાં રસ્તે થાકી પડે,
નેત્રોમાં ઉગેલા સ્વપ્નો અધૂરા રહી જાય છે.
મંચ ઉપરથી ધર્મની વાણી ગાજી ઊઠે ઘણી,
અંતરમાં દબાયેલી આહો મૌન રહી જાય છે.
દિનભર પરસેવાની આગે દેહ સળગતો રહે,
સાંજ પડે હથેળીમાં ફક્ત છાળા રહી જાય છે.
ન્યાય, કરુણા, વચનો ગાજે સભાઓ વચ્ચે,
ઝૂંપડામાં નિર્દોષોના આંસુ રહી જાય છે.
સત્ય લખવા બેઠી કલમ થરથરી ઊઠે ઘણી,
અંતે શબ્દોમાં ‘પ્રસંગ’ રહી જાય છે.
પ્રસંગ
પ્રણયરાજ રણવીર
kashish
mere ghar ke nazdik hai ghar uska
khair kbhi dikhta hi nhi
naam ka pehla akshr same hai
khair dusra bhi hai
dosto ko bina bole pata chal gya
khair usko nhii
kapre tak same ho jate hai
khair vo colur saide nhi
mai usko dekh khush ho jao
khair vo utna dur hota jye jise kismat mai ho hi nhi
lekin ab
yaad ayega vo saam 5 baje
khair kyuki kal aakhri baar jo deeko gi
Pata nhi kha hugi mai kha hoga vo
by kashish
Narayan
आओ इस चांदनी रात में खो दें होश हम..!
पी लें एक दूजे को यूँ कि....
हो जाएँ मदहोश हम..!🍂🍁💞💕
Jyoti Gupta
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રોનક જોષી. રાહગીર
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એક નવી સુંદર વાર્તા માણો મારા ફેસબુક પેજ પર.
Narayan
ठहरना जाना, समा जाना मुझ में इस बार कि अब फिर
बिछड़ जाने की
मुझमें हिम्मत नहीं...❤🔥
Std Maurya
“नियम की कीमत नियम होना चाहिए
एक को सजा, दूसरे से लेकर कुछ,
यह भी रिश्वत हैं "
- Std Maurya
રોનક જોષી. રાહગીર
https://www.facebook.com/share/p/1KCqtjw5W3/
manshi
अब जरूरत नहीं कुछ जानने की,
बस इतना बता दे,
जब छोड़ना ही था,
तो अपनाया क्यों?
मेरे अश्कों को बढ़ाया क्यों??
અશ્વિન રાઠોડ - સ્વયમભુ
"એ મુલાકાત યાદ છે"
(મતલા)
મિલનની એ મધુર તારીખ ને પહેલો કરાર યાદ છે,
મને આંખો થકી આપેલો એ મીઠો આવકાર યાદ છે.
(શેર)
વસંતો કેટલીયે આવી ને ચાલી ગઈ આ જીવનમાં,
છતાં પણ એ મુલાકાતની મને સુંદર બહાર યાદ છે.
(શેર)
હતી ક્યાં શબ્દની કોઈ જરૂરત એ રૂડી પળમાં?
ફક્ત એક સ્પર્શથી જાગેલો હૈયાનો ઝંકાર યાદ છે.
(શેર)
બનીને શ્વાસ તું આ દેહમાં એવો તો શ્વસિયો છે,
મને તારા જ પ્રેમનો ચડેલો એ ખુમાર યાદ છે.
(મક્તા)
રહેશે "સ્વયમ્'ભૂ"જીવંત ગઝલમાં આપણો એ લમ્હો હવે,
કર્યો'તો આંખથી જે પ્રેમનો, એ ઇઝહાર યાદ છે.
અશ્વિન રાઠોડ "સ્વયમ્'ભૂ"
Hetu P
અમુક તારીખ એવી હોય છે કે
સુખ પણ આપે છે અને દુઃખી પણ થાય છીયે આપણે
SAYRI K I N G
हम तो उसकी हर ख़्वाहिश पूरी करने का वादा कर बैठे थे, हमें क्या पता
हमको छोड़ना भी उसकी एक ख़्वाहिश थी।
Paagla
https://youtube.com/shorts/1jE9n37Bi2w?si=tyL2qwGfhZnKkWSX
Jyotsana
“જીવન તો હજી પણ હસે છે”
જીવન ક્યારેક તપતા સૂરજ જેવું દઝાડે છે,
તો ક્યારેક ઠંડી છાંયડી બની લાડ લડાવે છે,
ક્યારેક કારણ વગર રડાવે છે,
તો ક્યારેક નાની વાતે હસાવે છે.
રસ્તા સહેલા ક્યાં હોય છે,
દરેક વળાંકે પરીક્ષા હોય છે,
પણ જે પડીને ફરી ઊભું થઈ જાય,
એજ સાચું માનવી હોય છે.
તૂટેલા સપનાઓની કરચીઓમાં પણ,
આશાનો એક તારો ઝગમગે છે,
હૃદય ભલે થાકી જાય ક્યારેક,
અંદર હિંમત હજી ધબકે છે.
અંધકારથી ક્યારેય ડરશો નહીં,
રાત પછી સવાર તો આવે જ છે,
જેને પોત પર વિશ્વાસ હોય,
એજ પોતાનું ભાગ્ય લખે છે.
જીવન કોઈ ભાર નથી, એક વાર્તા છે,
થોડા આંસુ અને થોડી મીઠી વારતા છે,
હસીને જીવો દરેક પળને,
એજ જીવનની સાચી ઓળખ છે.
– શ્યામની લાડલી ✨
Jyotsana
“ज़िंदगी फिर भी मुस्कुराती है”
ज़िंदगी कभी धूप सी जलाती है,
कभी छाँव बनकर सहलाती है,
कभी बिना वजह रुलाती है,
तो कभी छोटी सी बात पर हँसाती है।
रास्ते आसान कहाँ होते हैं,
हर मोड़ पर इम्तिहान होते हैं,
पर जो गिरकर फिर संभल जाए,
वही असली इंसान होते हैं।
टूटे सपनों की किरचों में भी,
उम्मीद का एक तारा रहता है,
दिल चाहे जितना थक जाए,
अंदर कहीं हौसला रहता है।
मत डर अँधेरों की बातों से,
रात के बाद सवेरा आता है,
जो खुद पर यकीन रखे सदा,
वही मुक़द्दर लिख पाता है।
ज़िंदगी बोझ नहीं, एक कहानी है,
थोड़ी सी आँसू, थोड़ी सी रवानी है,
हँसकर जी लो हर एक पल को,
यही तो उसकी असली निशानी है।
– श्याम की लाडली ✨
Narayan
तू मेरी तकदीर के पन्ने में शामिल नहीं शायद,
मगर हर लफ्ज़ में बस तेरा ही जिक्र रहता है।
चाहे फासले कितने भी हों हमारे दरमियाँ,
ये दिल हर धड़कन में बस तुझे ही सुनता है।🍂🍁💞❤🔥
Piyush Goel
https://www.instagram.com/reel/DVfN5nPj-XO/?igsh=czN6b2N3dmNuNjc2
Nirali patel
परिंदों से ऊँची हमारी उड़ान होगी,
वो एक बार नहीं कई बार होगी,
जमाने में चल रहा होगा जब हारने का दौर,
जीत हमारी उसी दौरान होगी।💫
Dada Bhagwan
પૂજ્યશ્રી દીપકભાઈના જ્ઞાન દિવસ નિમિત્તે, જાણીએ વધુ એમના વિશે: https://dbf.adalaj.org/RRmAq3Yu
#gnanday #spirituality #spiritualjourney #DadaBhagwanFoundation #PujyashreeDeepakbhai
Rashmi Dwivedi
आपका अतीत आपकी शिक्षा है,आपका भविष्य आपकी कल्पना,केवल वर्तमान ही आपकी वास्तविकता है। इसलिए अतीत और भविष्य में वर्तमान न बर्बाद करें। हर हर महादेव❤️
- Rashmi Dwivedi
Nandani
कुछ लोग होली की तरह मिलते हैं,,
वो कोई रंग नहीं लगाते मगर जिंदगी रंगीन कर देते हैं।।
❤️
SUNIL ANJARIA
આવને રમીએ સંતાકૂકડી.
આવને રમીએ સંતાકૂકડી.
જેમ રમે દિવસ ને રાત,
દોડું હું તું સંતાવા ભાગ,
હું દોડું તું આવ ઢૂકડી
આવ રમીએ સંતાકૂકડી.
ક્યાં ગયા પ્રિય, હું ગોતું અહીંથી તહીં
અવાજ દો, હું શોધી શકી નહીં.
આવો પ્રિય હું અહી છું સંતાઈ
આ કરો થપ્પો પીઠે મારી ધબ્બો
ચાલો હું આઉટ થઈ,
રમીએ હવે નવું કઈં.
દિવસ ઢળ્યો આ, ખીલી સંધ્યાની લાલી
રંગ ભર્યા સમે આ ખેલ મૂકી ક્યાં ચાલી?
દિલ મારું મચલે રમવાને તલસે
ચાલ રમીએ તો સાતતાળી.
દો તાળી નિરાંતે પ્રિય, હાથ પંપાળી
દોડો હવે તમે હું પકડવા આવી.
સાથ રહેવું પ્રેમના આ મારગે
કોને ખબર કેવું ભાગ્ય જાગે
એટલે જ કહું રમી લઈએ પ્રિયે
સમય મળ્યો છે રહેવા શાંત જીવે
ભાગ્યો હું તું પકડવા આવીશ
પકડયા છોડો પ્રિય, આમ હું થાકીશ.
પાસે ઉભા તમે મારાં દિલમાં છુપાઈ
એની તો મને ધકધક જણાઈ.
પડી ખબર નહીં તું પકડાઈ ક્યારે
જોયું દિલમાં મારા તું જકડાઈ ભારે.
ફરતી હું ફુદડી ખુશીની મારી
ભલે દિન ઢળ્યો રમત રાખો જારી.
તો ચાલ પ્રિયે ફરીએ ફેરફુદરડી
હાથોમાં હાથ લઈ દોડીએ બે ઘડી
હાંફી ગઈ પ્રિય, આ તમ ખભે ઢળી
જીત્યા તમે હવે ચુમો મને લળી
બેસીએ ખૂણે એક કરતાં મીઠી વાતો
વાયે છે સુગંધી સમીર મદમાતો.
ભલે ચાલ પ્રિયે રમત આજની પુરી
ગમે તે હો, જીવીશું સાથે જિંદગી મધુરી
સંસારની રમત જોજે નવા ખેલે ચાલી
સુખ દુઃખમાં સાથે સહશું કે મહાલી
રમીશું સદા સાતતાળી સપ્તપદી સાથે
ફરશું આયખું ફેરફુદરડી ભાગ્ય સંગાથે
સુખદુઃખ ભલે જીવને રમે સંતાકૂકડી
હું હાથ મુકીશ નહીં તું રહેજે ઢૂંકડી.
**
fiza saifi
दिल परेशान है...
थोड़ा नादान है...
आते-आते सुकून आएगा
थोड़ा मासूम है,
थोड़ा अनजान है,
जाने कब ये समझ पाएगा...
इसको समझाना है...
क्यों समझता नहीं,
वक्त ही है गुज़र जाएगा….😔
SAYRI K I N G
मैं इश्क़ लिखूँ और ऊसे हो जाना चाहिए
, मेरी शायरी की कोई ऐसी दीवानी चाहिए...
गिरीश
नदी आणि सागर
https://youtube.com/shorts/ab8qgV6gJio?si=8uY61bUFMpJYRoqV
Deepti Gurjar
पहला चैप्टर पढ़ने के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया! क्या आपको लगता है कि कहानी के किरदारों के बीच आगे कुछ बड़ा होने वाला है? अपने विचार Comments में लिखें और अगर कहानी दिल को छुई हो, तो Rating देना न भूलें। मिलते हैं अगले चैप्टर में!"
Thank you all 🙏
A singh
कभी अकेले बैठकर ज़रा सोचना,
कि असल में किसने किसको खोया है।
हमने तो तुम्हें दिल से चाहा था,
अब वक़्त बताएगा…
आख़िर किसने किसके लिए रोया है।
— A Singh 💔✨
A singh
तुम्हें क्या बताएं कि तुमसे कितना प्यार करते हैं,
ये लफ्ज़ों में कहाँ बयां हो पाता है।
कभी अकेले मिलना हमसे,
तब तुम्हें पता चलेगा
कि बेवफा कौन था… और वफ़ा किसने निभाया है।
— A Singh 💔
A singh
"हर दिन एक नई कहानी लिखी जाती है,
और कलम हमारे अपने हाथ में होती है।
किरदार को अगर संजीदगी से लिखा,
तो कहानी यादगार बन जाएगी,
पर अगर भटक गए अपने ही रास्ते से,
तो हम अपनी ही कहानी का एक अधूरा पन्ना बन जाएंगे।"
— A Singh ✍️✨
K K
यहां राइटर एक भी अच्छा नहीं
कुछ तो बेकार ओर बेगार दोनों है
bat kerne ka मंच है
Kamini Shah
સતરંગી રંગોથી ખેલી હતી
આપણે પહેલી હોળી
પ્રીતને પણ પમરાવી હતી
આપણે પ્રણયમાં ઘોળી…
-કામિની
Imaran
"दिल से किसी का हाथ अपने हाथो में लेकर देखो,
फिर मालूम होगा कि अनकही बातों को कैसे सुना जाता है"
💞imran 💞
SAYRI K I N G
उसने कहा.. केम छे
मैने बोला बस... एम छे
फिर वो गद्देडी बोली... आ तो प्रेम छे
SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
રેતમાં હોત તો ભુસીયે નાખત
સાહેબ તમે તો જીંદગીમાં
સંબંધો ના પગલા પાડી બેઠા...
- SADIKOT MUFADDAL 《Mötäbhäï 》
Narayan
साथ तो ज़िन्दगी भी छोड़ देती है,
तो लोगों से क्या शिकायत करना..
- नारायण
Sonam Brijwasi
guys thankyou so much
mere 1lakh reads Cross kara diye।
thankyou so much jo aapne mujhe support kiya।
or aasha Hai aise hi aage bhi support karte rahenge
or haan yaar ek or baat batani thi ki agar kisi ko message karna hai to comment ke option me Karen kyunki chats me dekh nahi Pati।
VIP nahi hai mere pass yaar.....
Narayan
इत्र की तरह है तू,
तेरी महक से ही मेरी रूह को पनाह मिलती है.🍁🍂💞
Dr Darshita Babubhai Shah
मैं और मेरे अह्सास
सच को सच
खून के आंसूं भी रोया सच को सच कहते हुए l
अपने अपनों को खोया सच को सच कहते हुए ll
कभी भी कोई सच को स्वीकार नहीं कर सकता l
जीवन में कंटक बोया सच को सच कहते हुए ll
"सखी"
डो. दर्शिता बाबूभाई शाह
Gautam Patel
રંગ બદલતો પર્વત ⛰️
ઇ.સ. ૧૮૭૩નું વર્ષ હતું.
ડબલ્યુ. જી. ગોસ નામનો અંગ્રેજ
સંશોધક મધ્ય ઓસ્ટ્રેલિયાનું સર્વેક્ષણ
કરવા નીકળ્યો. પ્રવાસ દરમ્યાન એક
સ્થળે તેણે એવો પર્વત દીઠો કે જેને શિખર
ન હતું. વિરાટ કદના બન બ્રેડ જેવો તેનો
આકાર હતો. આ સંશોધક ભૂસ્તરશાસ્ત્રનો
થોડો ઘણો જાણકાર, એટલે તેને એ પર્વત
કુતૂહલજનક લાગ્યો. દિવસભર ત્યાં
પડાવ નાખી તેનું અવલોકન કર્યું ત્યારે
કૌતુકજનક પણ લાગ્યો. ઘડિયાળમાં
સમય બદલાતો જાય એટલે કે સૂર્યનું
આકાશી સ્થાન બદલાતું જાય તેમ
આકાશી સ્થાન બદલાતું જાય તેમ
પર્વતનો રંગ ક્રમશઃ બદલાતો હતો.
દક્ષિણ ઓસ્ટ્રેલિયાના સિડની શહેરમાં
પાછા આવ્યા બાદ તેણે એ કાચિંડાછાપ
પર્વત અંગે બીજા અંગ્રેજ સંશોધકોને જાણ
કરી. વિષય કુતૂહલનો હતો, એટલે
સંશોધકોની એક ટુકડી નવાઇભર્યા
પર્વતને નજરોનજર જોવા માટે મધ્ય
ઓસ્ટ્રેલિયા પહોંચી. પર્વત નજીક ટુકડીએ
કેટલાક દિવસ પડાવ નાખ્યો અને
રોજેરોજ દિવસના બદલાતા પહોર મુજબ
પર્વતના બદલાતા રંગો તેમણે જોયા.
સંશોધકોની ટીમમાં
શભૂસ્તરશાસ્ત્રીઓ પણ હતા, જેમના મતે
એ પર્વત ન હતો, બલકે રાક્ષસી ખડક
હતો. દક્ષિણ ઓસ્ટ્રેલિયાના વડા પ્રધાન
સર હેન્રી આયર્સના માનમાં તેણે ખડકને
આયર્સ રોક નામ આપ્યું.
આજે તો સર હેન્રી
આયર્સને ખુદ ઓસ્ટ્રેલિયનો
ભૂલી ગયા છે, પણ આયર્સ
રોક કુદરતી અજાયબી
તરીકે જગતભરમાં પ્રખ્યાત
છે. દર થોડા કલાકે નવો
રંગ ધારણ કરતો તે
એકમાત્ર ખડક છે, એટલે
દર વર્ષે દેશપરદેશના
લગભગ ૪,૦૦,૦૦૦
પર્યટકો તેની મુલાકાત
છે. સૂર્યોદય વખતે સૂર્યનાં
પ્રથમ કિરણો આયર્સ રોક
પર ઝીલાય ત્યારે ખડક
ઝાંખો જાંબુડિયો રંગ ધારણ કરે છે. સૂર્ય
મધ્યાહ્ને પહોંચે, એટલે રંગ અમુક
તબક્કે અચાનક જ ભૂરો બને. મધ્યાહ્ન
પછી ગુલાબી, નમતી બપો૨ે કથ્થઇ અને
છેલ્લે સૂર્યાસ્ત વખતે લાલચટ્ટક ! બીજી
સવારે રંગપલટાનો આવો જ ક્રમ ફરી
પાછો શરૂ થાય છે. દિવસમાં ક્યારેક જો
એકાદ વાદળ સૂર્યને ટૂંક સમય પૂરતો
ઢાંકી દે તો
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Meghna Sanghvi
તને જોઈને થોડા ક્ષણ માટે
આટલાં વર્ષોનું અંતર ઓગળી ગયું…
સ્ક્રીન પર દેખાતું તારું સ્મિત
મારા હૃદય સુધી આવીને બેસી ગયું…
meghu
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
हास और परिहास का, होता कटु परिणाम। इसीलिए बचकर रहो, नहीं ठीक यह काम।।
दोहा--440
(नैश के दोहे से उद्धृत)
------गणेश तिवारी 'नैश'
GANESH TEWARI 'NESH' (NASH)
ऋगुवेद सूक्ति-- (२९) की व्याख्या
बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।
ऋगुवेद --१/१६४/३२
भाव--बहुत सन्तान वाले बहुत कष्ट उठाते हैं।
मंत्र:
“बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।”
— ऋग्वेद १/१६४/३२
पदच्छेद--
बहु-प्रजाः निऋर्तिम् आविवेश
शब्दार्थ--
बहुप्रजाः — जिसकी अधिक सन्तान हो
निऋर्ति — दरिद्रता, दुःख, विनाश या क्लेश की अवस्था
आविवेश — प्रवेश करता है / प्राप्त करता है
भावार्थ--
जिस व्यक्ति की सन्तान अत्यधिक होती है, वह प्रायः क्लेश, अभाव या दुःख की स्थिति में प्रवेश करता है।
यहाँ “निऋर्ति” केवल आर्थिक दरिद्रता नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक और शारीरिक कष्टों का भी संकेत देती है।
दार्शनिक संकेत--
ऋग्वेद का १६४वाँ सूक्त गूढ़ दार्शनिक अर्थों से परिपूर्ण है। इसमें जीवन के संतुलन, संयम और मर्यादा का महत्व प्रतिपादित किया गया है।
इस मंत्र का तात्पर्य यह नहीं कि सन्तान होना दुःख का कारण है, बल्कि असंयमित बहुलता जीवन में संतुलन भंग कर सकती है। वैदिक दृष्टि में धर्म, अर्थ और सामर्थ्य के अनुसार जीवन-योजना ही श्रेष्ठ मानी गई है।
वेदों में प्रमाण--
१. ऋग्वेद १/१६४/३२
मंत्र:
बहुप्रजा निऋर्तिमा विवेश।
अर्थ:
जिसकी सन्तान अधिक होती है, वह निऋर्ति (क्लेश, अभाव, विनाश या दुःख की अवस्था) में प्रवेश करता है।
यहाँ “निऋर्ति” दरिद्रता और मानसिक कष्ट दोनों का बोध कराती है।
२. अथर्ववेद-- ७/४७/१
अल्पपुत्रो गृहं श्रेयः, बहुपुत्रो दुःखभाग् भवेत्।
अर्थ:
अल्प सन्तान वाला गृह अधिक कल्याणकारी होता है; अधिक सन्तान वाला प्रायः दुःख का भागी बनता है।
संकेत यह है कि संयम और सामर्थ्य के अनुसार सन्तानोत्पत्ति ही हितकारी है।
३. यजुर्वेद-- २२/२२
सं यच्छस्व तन्वं स्वां, सं प्रजां सं धनं कुरु।
अर्थ:
अपनी शक्ति, सन्तान और धन को संयमपूर्वक व्यवस्थित रखो।
यहाँ “संयम” और “संतुलन” पर बल दिया गया है।
वैदिक दृष्टिकोण++
वेदों में सन्तान को “पुत्रेषणा” (सन्तान की इच्छा) के रूप में जीवन की स्वाभाविक कामना माना गया है, परन्तु साथ ही धर्म, अर्थ और सामर्थ्य के अनुसार जीवन-संतुलन का भी उपदेश है।
उपनिषदों से प्रमाण _
१.बृहदारण्यक उपनिषद्- ३/५/१
न वा अरे पत्युः कामाय पतिः प्रियः भवति, आत्मनस्तु कामाय पतिः प्रियः भवति।
न वा अरे जायायै कामाय जाया प्रिया भवति, आत्मनस्तु कामाय जाया प्रिया भवति।
न वा अरे पुत्राणां कामाय पुत्राः प्रियाः भवन्ति, आत्मनस्तु कामाय पुत्राः प्रियाः भवन्ति॥
अर्थ:
हे मैत्रेयी! पति, पत्नी या पुत्र अपने आप में प्रिय नहीं होते; वे आत्मा के कारण प्रिय होते हैं।
यहाँ संकेत है कि बाह्य सम्बन्ध (सन्तान आदि) परम सुख का स्रोत नहीं हैं; आत्मबोध ही वास्तविक आनन्द का कारण है।
२. बृहदारण्यक उपनिषद्-- ४/४/२२
एतं वै तमात्मानं विदित्वा ब्राह्मणाः पुत्रैषणायाश्च वित्तैषणायाश्च लोकेषणायाश्च व्युत्थाय भिक्षाचर्यां चरन्ति॥
अर्थ:
इस आत्मा को जानकर विद्वान लोग पुत्र की इच्छा, धन की इच्छा और लोक की इच्छा — इन तीनों से निवृत्त हो जाते हैं।
यहाँ “पुत्रैषणा” (अत्यधिक सन्तान की कामना) को त्याज्य आसक्ति बताया गया है।
३. ईशावास्य उपनिषद्-- १
ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम्॥
अर्थ:
इस सम्पूर्ण जगत को ईश्वरमय जानकर त्यागभाव से भोग करो; किसी वस्तु में लोभ मत करो।
यहाँ संयम, मर्यादा और संतुलित जीवन का उपदेश है।
४. कठोपनिषद्-- १/२/१–२
श्रेयश्च प्रेयश्च मनुष्यमेतः तौ सम्परीत्य विविनक्ति धीरः।
श्रेयः हि धीरः अभि प्रेयसो वृणीते, प्रेयो मन्दो योगक्षेमाद् वृणीते॥
अर्थ:
मनुष्य के सामने ‘श्रेय’ (कल्याण) और ‘प्रेय’ (इन्द्रियप्रिय वस्तुएँ) दोनों आते हैं। विवेकी पुरुष श्रेय को चुनता है; परन्तु मोहग्रस्त व्यक्ति योग-क्षेम (संसारिक वृद्धि और सुरक्षा) के लोभ से प्रेय को चुनता है।
यहाँ “योगक्षेम” में परिवार-विस्तार और सांसारिक संग्रह भी निहित हैं। अत्यधिक आसक्ति को ‘प्रेय’ कहा गया है।
५. मुण्डकोपनिषद् १/२/१२
मंत्र:
परीक्ष्य लोकान् कर्मचितान् ब्राह्मणो निर्वेदमायात्।
नास्त्यकृतः कृतनेन॥
अर्थ:
कर्मों से प्राप्त लोकों (फल-विस्तार, वंश-वृद्धि आदि) को भली-भाँति देखकर ज्ञानी पुरुष वैराग्य को प्राप्त होता है; क्योंकि अकृत (अक्षर ब्रह्म) की प्राप्ति कर्मों से नहीं होती।
संकेत है कि केवल कर्म और बाह्य विस्तार (सन्तान-वृद्धि आदि) से परम शान्ति नहीं मिलती।
६. कैवल्योपनिषद् २
मंत्र:
न कर्मणा न प्रजया धनेन त्यागेनैके अमृतत्वमानशुः॥
अर्थ:
न कर्म से, न सन्तान (प्रजा) से, न धन से — केवल त्याग से ही अमृतत्व (मोक्ष) की प्राप्ति होती है।
यहाँ स्पष्ट कहा गया है कि ‘प्रजा’ (सन्तान-विस्तार) परम लक्ष्य नहीं है।
७. छान्दोग्य उपनिषद् ७/२३/१
मंत्र:
यो वै भूमा तत्सुखम्, नाल्पे सुखमस्ति॥
अर्थ:
जो ‘भूमा’ (असीम ब्रह्म) है वही सुख है; अल्प (सीमित वस्तुओं) में सुख नहीं है।
सीमित वस्तुएँ — जैसे केवल परिवार-वृद्धि — अन्ततः सीमित सुख देती हैं; परम आनन्द आत्मज्ञान में है।
निष्कर्ष--
अन्य उपनिषदों का भी यही संकेत है—
सन्तान, धन, कर्म आदि जीवन के साधन हैं, साध्य नहीं।
‘प्रजा-वृद्धि’ यदि आसक्ति और मोह का कारण बने तो वह बन्धन है।
संयम, विवेक और त्याग से ही शाश्वत शान्ति सम्भव है।
पुराणों में प्रमाण--
१. श्रीमद्भागवत महापुराण
५/५)८
पुंसः स्त्रिया मिथुनीभावमेतं
तयोर्मिथो हृदयग्रन्थिमाहुः।
अतो गृह-क्षेत्र-सुताप्त-वित्तैः
जनस्य मोहोऽयमहम् ममेति॥
अर्थ:
स्त्री-पुरुष के परस्पर आकर्षण से हृदय में आसक्ति का ग्रन्थि बनता है। फिर गृह, भूमि, पुत्र, बान्धव और धन के द्वारा “मैं” और “मेरा” का मोह बढ़ता है।
यहाँ “सुत” (पुत्र) को भी मोह-वृद्धि का कारण बताया गया है।
२. श्रीमद्भागवत महापुराण ११/९/२९
श्लोक:
स्नेहपाशैरदृढैर्बद्धो जनो गृहेषु रज्यते।
तत्रापि दुःखसन्तापान् पश्यन्नपि न मुच्यते॥
अर्थ:
मनुष्य स्नेह-पाश से बँधकर गृह में आसक्त हो जाता है; वहाँ दुःख और संताप देखकर भी वह छूट नहीं पाता।
संकेत है कि परिवार-विस्तार में अत्यधिक आसक्ति दुःख का कारण बनती है।
३. विष्णु पुराण १/१९
पुत्रदारगृहादिषु आसक्तस्य नृपात्मनः।
दुःखानि बहुधा स्युः हि संसारे नात्र संशयः॥
अर्थ:
जो मनुष्य पुत्र, पत्नी और गृह आदि में अत्यधिक आसक्त रहता है, उसे संसार में अनेक प्रकार के दुःख प्राप्त होते हैं — इसमें संशय नहीं।
४. मार्कण्डेय पुराण (धर्मोपदेश प्रसंग)
भावार्थ श्लोक:
बहुपुत्रो गृहस्थोऽपि यदि नास्ति विवेकवान्।
स दुःखभाग् भवेत् नित्यं चिन्ताभारसमन्वितः॥
अर्थ:
यदि गृहस्थ विवेकहीन होकर केवल बहुपुत्रता में आसक्त हो, तो वह सदा चिन्ता और दुःख का भागी होता है।
५. गरुड पुराण (पूर्वखण्ड, आचारकाण्ड – भावानुसार)
श्लोक (प्रचलित पाठानुसार):
पुत्रदारगृहासक्तो मोहग्रन्थिविबन्धनः।
दुःखजालं समाविश्य न विमुच्येत कर्हिचित्॥
अर्थ:
जो मनुष्य पुत्र, दार (पत्नी) और गृह में अत्यधिक आसक्त रहता है, वह मोह-ग्रन्थि से बँधकर दुःख-जाल में फँस जाता है और सहज मुक्त नहीं हो पाता।
६. पद्म पुराण (उत्तरखण्ड)
श्लोक:
अतिस्नेहः सुतादिषु दुःखहेतुर्न संशयः।
स्नेहपाशेन बद्धो हि नरो नित्यम् शुचिर्भवेत्॥
अर्थ:
सन्तान आदि में अति-स्नेह निश्चय ही दुःख का कारण है; स्नेह-पाश से बँधा मनुष्य निरन्तर शोकग्रस्त रहता है।
७- लिङ्ग पुराण (धर्मोपदेश प्रसंग – भावानुसार)
श्लोक:
बहुपुत्रगृही लोके चिन्ताभारसमन्वितः।
निद्रां न लभते नित्यं वित्तक्षयभयातुरः॥
अर्थ:
अधिक सन्तान वाला गृहस्थ चिन्ता-भार से युक्त रहता है; धन-क्षय और पालन-पोषण की चिंता से उसे शान्ति नहीं मिलती।
८. स्कन्द पुराण (काशीखण्ड – भावानुसार)
श्लोक:
गृहक्षेत्रसुतादीनां विस्तारो दुःखवर्धनः।
विवेकिनां तु संयमः सुखशान्तिप्रदायकः॥
अर्थ:
गृह, भूमि और सन्तान का अत्यधिक विस्तार दुःख को बढ़ाता है; विवेकी के लिए संयम ही सुख और शान्ति देने वाला है।
समाहार (पुराणमत)
पुराण सन्तान को धर्मसम्मत मानते हैं,
परन्तु अति-स्नेह, अति-आसक्ति और असंयमित विस्तार को दुःख का मूल बताते हैं।
विवेक, मर्यादा और सामर्थ्य के अनुसार गृहस्थ जीवन ही कल्याणकारी होता है।
भगवत् गीता में प्रमाण--
१. अध्याय २, श्लोक ६२–६३
ध्यायतो विषयान्पुंस:
संगस्तेषुपजायते।
सङ्गात्सञ्जायते कामः कामात्क्रोधोऽभिजायते॥
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः।
स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
अर्थ:
विषयों का चिन्तन करने से उनमें आसक्ति उत्पन्न होती है; आसक्ति से कामना, कामना से क्रोध, क्रोध से मोह, मोह से स्मृति-भ्रंश, और अन्ततः बुद्धिनाश होकर मनुष्य पतित हो जाता है।
पुत्र, धन, गृह आदि में अति-आसक्ति इसी श्रृंखला का कारण बनती है।
२. अध्याय १६, श्लोक १३–१५
श्लोक:
इदमद्य मया लब्धमिमं प्राप्स्ये मनोरथम्।
इदमस्तीदमपि मे भविष्यति पुनर्धनम्॥
असौ मया हतः शत्रुर्हनिष्ये चापरानपि।
ईश्वरोऽहमहं भोगी सिद्धोऽहं बलवान्सुखी॥
अर्थ:
(असुर-स्वभाव वाला व्यक्ति सोचता है:) यह आज मैंने पाया है, और भी धन प्राप्त करूँगा; मैं ही भोगी और सुखी हूँ।
यहाँ “मेरा” भाव और संग्रह-वृत्ति को दुःखदायी आसक्ति बताया गया है।
३. अध्याय १२, श्लोक १३–१४
श्लोक:
अद्वेष्टा सर्वभूतानां मैत्रः करुण एव च।
निर्ममो निरहङ्कारः समदुःखसुखः क्षमी॥
अर्थ:
जो मनुष्य ममता और अहंकार से रहित है, वही शान्त और प्रिय भक्त है।
“निर्मम” (ममता-रहित) होना — पुत्रादि में अति-मोह से मुक्त रहना — गीता का आदर्श है।
४. अध्याय ३, श्लोक ३९
श्लोक:
आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा।
कामरूपेण कौन्तेय दुष्पूरेणानलेन च॥
अर्थ:
यह काम (अतृप्त इच्छा) अग्नि के समान है, जो कभी तृप्त नहीं होती और ज्ञान को ढक देती है।
“प्रजा-वृद्धि” यदि अतृप्त कामना से प्रेरित हो, तो वह भी बन्धन का कारण है।
गीता का निष्कर्ष--
गीता सन्तान का विरोध नहीं करती,
परन्तु अत्यधिक आसक्ति, ममता और अहंकार को दुःख का मूल बताती है।
महाभारत से प्रमाण--
१. शान्तिपर्व (भावानुसार)
श्लोक:
स्नेहमूलानि दुःखानि स्नेहमूलं भयम् तथा।
स्नेहात् प्रवर्तते शोकः तस्मात् स्नेहं परित्यजेत्॥
अर्थ:
संसार के दुःखों का मूल स्नेह (अत्यधिक आसक्ति) है; भय भी उसी से उत्पन्न होता है। स्नेह से ही शोक उत्पन्न होता है, इसलिए विवेकी को अति-स्नेह त्याग देना चाहिए।
पुत्रादि में अत्यधिक मोह शोक और भय का कारण बनता है।
२. उद्योगपर्व (विदुरनीति – भावानुसार)
श्लोक:
पुत्रदारगृहासक्तो नृपो वा यदि वा द्विजः।
चिन्ताभारसमायुक्तो न सुखं समवाप्नुयात्॥
अर्थ:
राजा हो या ब्राह्मण — जो पुत्र, पत्नी और गृह में अत्यधिक आसक्त रहता है, वह चिन्ता से घिरा रहता है और सुख नहीं पाता।
३. वनपर्व (ययाति-उपाख्यान का संकेत)
भावार्थ श्लोक:
न जातु कामः कामानामुपभोगेन शाम्यति।
हविषा कृष्णवर्त्मेव भूय एवाभिवर्धते॥
अर्थ:
इच्छाएँ भोग से कभी शांत नहीं होतीं; वे अग्नि में घी डालने से और बढ़ती हैं।
यदि प्रजा-वृद्धि अतृप्त कामना से प्रेरित हो, तो वह शान्ति नहीं देती।
४. शान्तिपर्व (मोक्षधर्म)
भावार्थ:
ममता दुःखहेतुः स्यात्, निर्ममता सुखप्रदा।
अर्थ:
ममता दुःख का कारण है; निर्ममता (अति-मोह से मुक्त होना) सुख देने वाली है।
निष्कर्ष--- (महाभारत मत)
महाभारत गृहस्थ धर्म को स्वीकार करता है,
परन्तु “अति-स्नेह” और “ममता” को शोक और भय का मूल बताता है।
संयम, विवेक और निर्ममता से ही शान्ति सम्भव है।
स्मृतियों में प्रमाण --
१. मनुस्मृति ४/१६०
श्लोक:
स्नेहाद् भयम् भवति स्नेहाद् दुःखं प्रजायते।
स्नेहमूलानि दुःखानि तस्मात् स्नेहं विवर्जयेत्॥
अर्थ:
अत्यधिक स्नेह से भय उत्पन्न होता है, और स्नेह से ही दुःख जन्म लेता है। दुःखों का मूल स्नेह है, इसलिए विवेकी को अति-स्नेह का त्याग करना चाहिए।
पुत्रादि में अति-मोह को दुःख का कारण बताया गया है।
२. याज्ञवल्क्य स्मृति ३/५६–५७ (मोक्षधर्म प्रसंग )
श्लोक:
ममता दुःखहेतुः स्यात्, निर्ममता सुखप्रदा।
त्यक्त्वा ममत्वं संसारे शान्तिं लभते नरः॥
अर्थ:
ममता दुःख का कारण है; निर्ममता सुख देने वाली है। जो संसार में ‘मेरा’ भाव छोड़ देता है, वह शान्ति प्राप्त करता है।
यहाँ ‘ममत्व’ में पुत्र, धन, गृह आदि का अति-आसक्ति भाव सम्मिलित है।
३. नारद स्मृति (आचारप्रकरण)
श्लोक:
बहुपुत्रो गृहस्थोऽपि यदि नास्ति विवेकवान्।
स चिन्तामनुवर्तेत वित्तपालनतत्परः॥
अर्थ:
यदि गृहस्थ विवेकहीन होकर केवल अधिक पुत्रों में आसक्त हो, तो वह पालन-पोषण की चिंता में सदा ग्रस्त रहता है।
४. पाराशर स्मृति १/३
श्लोक:
अतिस्नेहः सुतादिषु क्लेशायैव न संशयः।
धर्मयुक्तः समाचारे सुखं तिष्ठति मानवः॥
अर्थ:
सन्तान आदि में अति-स्नेह निश्चय ही क्लेश का कारण है; जो धर्मयुक्त और संयमित आचरण करता है वही सुखी रहता है।
स्मृतिमत--
स्मृतियाँ गृहस्थाश्रम और सन्तान को धर्म का अंग मानती हैं।
किन्तु अति-स्नेह, ममता और असंयमित विस्तार को दुःख का मूल बताती हैं।
नीति ग्रन्थों में प्रमाण--
नीति-साहित्य में “अति” को सर्वत्र त्याज्य कहा गया है।
१. चाणक्य नीति
श्लोक:
अति सर्वत्र वर्जयेत्॥
अर्थ:
हर प्रकार की “अति” का त्याग करना चाहिए।
सन्तान-वृद्धि भी यदि अति और असंयम से हो, तो वह क्लेश का कारण बन सकती है।
अन्य श्लोक (चाणक्य नीति):
यस्य पुत्रो वशीभूतो भार्या चानुगता सदा।
विभवे यस्य सन्तुष्टिः तस्य स्वर्ग इहैव हि॥
अर्थ:
जिसका पुत्र आज्ञाकारी हो, पत्नी अनुकूल हो और जो अपने साधनों में सन्तुष्ट हो — वही इस लोक में सुखी है।
संकेत है कि “संयम और संतोष” ही सुख का कारण है, केवल बहुपुत्रता नहीं।
२. हितोपदेश
श्लोक:
अतिस्नेहः खलु दोषाय।
अर्थ:
अत्यधिक स्नेह दोष का कारण बनता है।
पुत्रादि में अति-मोह दुःख और भ्रम उत्पन्न करता है।
३. पञ्चतन्त्र
श्लोक (भावार्थ):
अतिस्नेहपराधीनो दुःखमाप्नोति मानवः।
अर्थ:
जो मनुष्य अति-स्नेह के अधीन होता है, वह दुःख को प्राप्त होता है।
४. विदुर नीति
स्नेहमूलानि दुःखानि स्नेहमूलं भयम् तथा।
अर्थ:
दुःख और भय का मूल स्नेह (अत्यधिक आसक्ति) है।
निष्कर्ष (नीतिदृष्टि)
नीति-ग्रन्थों में “अति” और “अति-स्नेह” को सर्वत्र दोष कहा गया है।
सन्तान धर्म का अंग है, परन्तु असंयमित विस्तार और मोह दुःख का कारण बनते हैं।
-------+------+-------+--------+---
Yogesh verma
"न घर रहा, न छत रही, न वो मंज़र पुराना रहा,
मैं तो बस एक 'टूटी खिड़की का मुसाफिर' अनजाना रहा।"
"लोग ढूंढते हैं महलों में सुकून अपनी ज़िंदगी का,
मेरा तो इन दरारों के बीच ही सारा ज़माना रहा।"
- Yogesh verma
MASHAALLHA KHAN
कुछ जंजीरे है जो कभी तुटती नही,
बस उन जंजीरो की चाबी बदलती रहती है .
(जिम्मेदारी) .
-Mashaallha
Mare DoAlfaz
कभी तो आ मिल, फिर से करें गुफ्तगू...
मैं आँखें पढूँ तेरी, तू साँसें सुने मेरी...
- Mare DoAlfaz
Sonu Kumar
क्या सरकार के द्वारा रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 49% से 74% करना राष्ट्रहित में है?
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डिफेन्स में 74% FDI का मतलब है कि हम अपना देश अधिकृत रूप से गंवाने के कगार पर आ चुके है। ज्यादातर सम्भावना है कि, अगले 3-4 वर्ष में यह सीमा 100% बढ़ा दी जायेगी और तब हम घोषित रूप से एक परजीवी / गुलाम देश होंगे।
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(1) 1990 तक भारत में परमिट राज था। हथियारों के निर्माण में न तो निजी कम्पनियों को मुक्त रूप से उत्पादन करने की छूट थी, और न ही विदेशी कम्पनियों को। किन्तु WTO समझौते के बाद जब लाइसेंस राज ख़त्म किया गया तो राष्ट्रिय सुरक्षा का विषय होने के कारण हथियारों के उत्पादन में विदेशी निवेश पर प्रतिबन्ध जारी रखा गया। कारगिल युद्ध में भारत को अमेरिका से हथियारों की मदद चाहिए थी, और तब भारत को हथियार निर्माताओ की काफी शर्तें माननी पड़ी। हथियारो के निर्माण में विदेशी निवेश को खोलना इसमें से एक था।
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2001 में हमें डिफेन्स में 26% एफडीआई की अनुमति देने के लिए बाध्य होना पड़ा।
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2015 में वे फिर से यह सीमा 49% तक बढ़वाने में कामयाब हुए।
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2020 में कोरोना की हड़बोंग में उन्होंने अब इसे 74% तक बढ़वा लिया है।
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FDI in defence limit raised to 74%; FM Sitharaman announces major ‘Make in India’ push for defence
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(2) पेड मीडिया द्वारा ऍफ़डीआई के समर्थन में दिए गए गलत तर्क :
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2.1. डिफेन्स में एफडीआई से भारत में टेक्नोलोजी ट्रांसफर होगा !!
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जटिल तकनीक के मामले में टेक्नोलोजी ट्रांसफर सिर्फ एक थ्योरी है, और व्यवहारिक रूप से जटिल निर्माण की तकनीक ट्रांसफर की ही नहीं जा सकती। और हथियारों के निर्माण में टेक्नोलोजी ट्रांसफर की बात करना एक निर्मम मजाक है। दुनिया के किसी देश ने आज किसी भी देश को हथियारों की तकनीक का हस्तांतरण नहीं किया है, और न ही किया जा सकता है। इस बारे में विस्तृत विवरण के लिए यह जवाब पढ़ें - Pawan Kumar Sharma का जवाब - विश्व स्तरीय अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम होने के बावजूद भी भारत तेजस के लिए जेट इंजन क्यों नहीं बना पाया?
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2.2. भारत पहले से ही विदेशियों से हथियार आयात कर रहा है, अत: विदेशी भारत में आकर हथियार बनाते है तो हमें कोई नुकसान नहीं !!
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पहली बात तो यह है कि, यह तर्क देने वाले इस बिंदु को जानबुझकर गायब कर देते है कि, किन कानूनों को गेजेट में छापने से भारत स्वदेशी तकनीक आधारित जटिल हथियारो का निर्माण कर सकता है। तो पहले वे भारत में हथियार निर्माण संभव बनाने के लिए आवश्यक कानूनों का विरोध करते है, जिससे हमें हथियार आयात करने पड़ते है, और फिर वे कहते है कि भारत को हथियार आयात करने पड़ रहे है, अत: हमें विदेशियों को बुलाकर भारत में हथियार बनाने के कारखाने लगाने के लिए कहना चाहिए !!
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इससे हमें निम्न तरह के नुकसान होंगे
जब तक विदेशी निवेश की सीमा 49% थी तब तक विदेशी किसी हथियार कम्पनी पर अपना स्वामित्व नहीं ले सकते थे। 74% स्टेक के बाद अब हथियार निर्माण कम्पनियों पर विदेशियों का स्वामित्व निर्णायक जाएगा। अत: अब अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियां भारत में बड़े पैमाने पर हथियार निर्माण के कारखाने लगाएगी।
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जब विदेशी भारत में आकर हथियार बनायेंगे तो नेताओं को धमका कर / उन्हें ब्राइब / म्राइब देकर सरकारी हथियार कम्पनियों का बचा खुचा बेस भी तोड़ देंगे। इससे हम हथियारों के निर्माण में विदेशियों पर और भी निर्भर हो जायेंगे । हथियार निर्माण की सरकारी कम्पनियों को अब धीरे धीरे या तो बंद कर दिया जाएगा या विदेशी इनका अधिग्रहण कर लेंगे।
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पेड मीडिया पूरी तरह से हथियार कम्पनियों के नियंत्रण में काम करता है। अत: हथियार कंपनियों के भारत में सीधे घुस आने के बाद मीडिया की शक्ति विस्फोटक रूप से बढ़ेगी, जिससे भारत के नेताओ की निर्भरता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों पर और भी बुरी तरह से बढ़ जायेगी।
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हथियार कम्पनियों का मुख्य धंधा खनिज लूटना है। अत: अब वे भारत के नेताओं से ऐसे क़ानून छपवाएंगे जिससे वे लगभग मुफ्त में भारत के मिनरल्स लूट सके। तो अभी भारत के प्राकृतिक संसाधन की बहुत बड़े पैमाने पर लूट होने वाली है। और यह लूट पूरी तरह से कानूनी होगी।
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ये कम्पनियां जितना मुनाफा बनाएगी उसके बदले हमें डॉलर चुकाने होंगे। पहले हम हथियार लेने के लिए सीधे डॉलर चुका रहे थे, और अब रिपेट्रीएशन के रूप में डॉलर चुकायेंगे। मतलब ऍफ़डीआई डॉलर संकट में कोई कमी नहीं लाता, बल्कि इसमें इजाफा ही करता है।
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ऍफ़डीआई सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण विषय है, और डिफेन्स में यह काफी खतरनाक है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए निचे दिए गए तीनो जवाब पढ़ें।
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(i) Pawan Kumar Sharma का जवाब - प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति क्यों दी जाती है? इससे हमें क्या फायदे और नुकसान होंगे?
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(ii) Pawan Kumar Sharma का जवाब - भारत के मीडिया को नियंत्रित करने वाली शक्तियों का एजेंडा क्या है ?
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(iii) Pawan Kumar Sharma का जवाब - क्या इंदिरा गांधी वाक़ई सबसे ताक़तवर भारतीय प्रधानमंत्री थीं?
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(3) यह अमेरिका की चीन के साथ युद्ध की तैयारी है। युद्ध कब होगा मुझे नहीं पता। लेकिन जैसे जैसे अमेरिका भारत का अधिग्रहण करता जाएगा वैसे वैसे युद्ध करीब आता जाएगा। और इस मामले में डिफेंस में एफडीआई निर्णायक है। दरअसल, अमेरिका भारत पर इतना कंट्रोल ले चुका है कि वह चीन का किला तोड़ने के लिए अब भारत का इस्तेमाल एक ऊंट की तरह कर सकता है। भारत और चीन के बीच इस युद्ध में चीन ख़त्म हो जाएगा और भारत आधे से अधिक बर्बाद होगा, और चीन के ख़त्म होने के बाद अमेरिका भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में बदल देगा।
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तो अगले कुछ वर्षो में निम्नलिखित में से कोई एक या एक से अधिक परिस्थितियों के घटने की सम्भावनाए प्रबल है :
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यदि पहले चरण में भारत एवं चीन का युद्ध शुरू होता है तो भारत के ज्यादातर नागरिक चीन के खिलाफ युद्ध का समर्थन नहीं करेंगे, अत: ज्यादातर सम्भावना है कि अमेरिका भारत के नेताओं का इस्तेमाल करके पाकिस्तान पर हमला करने के हालात खड़े करेगा। भारत की जनता पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में जाने के लिए आसानी से तैयार हो जाएगी। उदाहरण के लिए अमेरिका से चाबी मिलने के बाद भारत POK, गिलगित-बाल्टिस्तान पर हमला कर सकता है।
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पहले भारत पाकिस्तान का युद्ध शुरू होगा, और फिर अपना निवेश बचाने के लिए चीन को बीच में आना पड़ेगा। फर्स्ट राउंड में अमेरिका भारत को सिर्फ सीमित मात्रा में हथियारो की मदद भेजेगा, और जब भारत पिटने लगेगा तो अमेरिका भारत की तरफ से युद्ध की कमान संभाल लेगा, एवं बड़े पैमाने पर हथियार भेजना शुरू कर देगा। और भारत के नागरिक सोचेंगे कि अमेरिका हमें "बचाने" आया है !!
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यदि पाकिस्तान के राजनेता युद्ध को टालने की कोशिश करते है (जो कि वे कर सकते है) तो अमेरिका पाकिस्तान के जनरलों को डॉलर एवं हथियार भेजेगा और कश्मीर पर हमला करने को कहेगा। इस तरह भारत एवं पाकिस्तान का युद्ध शुरू होगा। बाद में अमेरिका भारत को डबल हथियार भेजेगा और भारत की सेना पाकिस्तान में अंदर तक घुस जाएगी। जैसे ही भारत की सेना POK में घुसेगी, CPEC को बचाने के लिए चीन को बीच में आना पड़ेगा।
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यदि चीन पाकिस्तान की सेना को भारत पर हमला करने से रोकने में सफल हो जाता है तो अमेरिका आतंकी समूहों एवं इंटर्नल इंसरजेंसी का सहारा लेगा। अमेरिका कश्मीर में हथियार भेजकर गुह युद्ध शुरु करेगा। साथ ही अमेरिका असम में भी हथियार भेजेगा। इन दोनों हिस्सों में यदि हथियार आने शुरू हो जाते है तो हिन्दुओ का बड़े पैमाने पर कत्ले आम होगा और लाखो नागरिको को पलायन करना पड़ सकता है।
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और तब भारत में State Vs इस्लामिस्ट का एक गृह युद्ध शुरू हो सकता है, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिमों का कत्ले आम हो सकता है। इससे भारतीय मुस्लिमो बचाने के लिए ईरान, तुर्की, पाकिस्तान, अफगानिस्तान साथ में आ सकते है, और भारत में कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों को बड़े पैमाने पर हथियार भेजना शुरू कर देंगे। तब यह जंग भारतीय हिन्दू Vs एशियाई महाद्वीप के मुस्लिम के बीच बन जायेगी। तब अमेरिका भारत को हथियारों की मदद करना शुरु करेगा और जंग शुरू हो जाएगी।
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और इस तरह के दर्जनों पहलू हो सकते है जिनका इस्तेमाल करके अमेरिका भारत, पाकिस्तान, चीन, ईरान, अफगानिस्तान के बीच जंग शुरू कर सकता है। हमारी समस्या यह है कि भारत के पास इससे बचने का कोई उपाय नहीं है। सब कुछ तय करने वाला अमेरिका है। या तय करने वाला है चीन। यदि ये देश भारत को जंग का मैदान बनाना तय करते है तो भारत क्या चाहता है, यह महत्वहीन है। भारत की इच्छा महत्त्वहीन इसलिए है क्योंकि भारत जंग लड़ने और खुद को जंग से बचाने के लिए अमेरिकी हथियारों पर बुरी तरह से निर्भर है।
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(4) तो युद्ध कब होगा ?
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इसका जवाब मेरे पास नहीं है। किसी के पास नहीं है। इतिहास हमें यही बताता है कि इसी तरह की बातें चलती रहती है, और अचानक किसी भी समय किसी न किसी वजह से युद्ध शुरू हो जाता है। हम बस इतना देख सकते है कि युद्ध की तैयारी कहाँ हो रही है । और यह साफ़ तौर पर देखा जा सकता है, कि अमेरिका चीन के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। और जब तक अमेरिका भारत की सेना, जमीन एवं संसाधनों का इस्तेमाल न करें, तब तक अमेरिका किसी भी स्थिति में चीन से लड़ नहीं सकता। चीन को तोड़ने के लिए उसे भारत चाहिए ही चाहिए।
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यदि भारत के नागरिक सरकार पर दबाव बनाकर ऍफ़डीआई को रूकवाने में कामयाब हो जाते है, तो अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार कंपनियों द्वारा भारत का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया रूक जाएगी, और युद्ध कुछ समय के लिए टल जाएगा। सिर्फ कुछ समय के लिए !!
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युद्ध पूरी तरह से इसीलिए नहीं टलेगा, क्योंकि भारत के सेना विदेशी हथियारों पर निर्भर है। अत: तब अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल करके जंग शुरू करेगा। यदि पाकिस्तान को पूरे पूरे अमेरिकी हथियार (मिलिट्री ड्रोन, फाइटर प्लेन, लेसर गाइडेड मिसाइले, लेसर गाईडेड बम, आदि) मिल जाते है, तो पाकिस्तान भारत के काफी अंदर तक घुस आएगा।
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यदि अमेरिका ऐसा नहीं करता है, या नहीं कर पाता है, तो वक्त के साथ चीन की सेना मजबूत होती जायेगी, और फिर चीन भारत के साथ ठीक वही करेगा जो की आज अमेरिका भारत के साथ कर रहा है। मतलब चीन भारत का आर्थिक एवं सैन्य रूप से अधिग्रहण कर लेगा।
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असल में, इन सभी स्थितियों में या इस तरह की किसी भी स्थिति में भारत की स्थिति खुद को बचाने के लिए इधर उधर भागने वाले की रहेगी। और हथियारों की लिस्ट लेकर जाने के लिए हमारे पास सिर्फ 2 ठिकाने है – रूस एवं अमेरिका !!
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रूस अब हमसे काफी दूर हो चुका है, और कोई वजह नहीं कि वह भारत को बचाने के लिए या तो अमेरिका या तो चीन से दुश्मनी मोल ले। क्योंकि भारत की स्थिति एक तरबूज की है, जिसे काटने और काटकर बांटने के लिए चीन एवं अमेरिका चाकू लेकर खड़े है। अभी ऍफ़डीआई के माध्यम से दोनों देश थोड़ी थोड़ी फांके ले रहे है।
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यदि ऐसे ही चलता रहा तो धीरे धीरे अमेरिका एवं चीन भारत को आधा आधा बिना किसी जंग के ही बाँट लेंगे। और यदि जंग हो जाती है, भारत किसके हिस्से में जायेगा इसका फैसला जंग करेगी। मतलब यह उसी तरह की लड़ाई है, जो ब्रिटिश एवं फ्रांसिस आज से 220 साल पहले भारत में लड़ रहे है। ब्रिटिश के पास फ़्रांस से बेहतर हथियार थे अत: तब भारत ईस्ट इण्डिया कम्पनी के हिस्से में चला गया था।
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(5) भारत में आपको ऐसे कई बुद्धिजीवी मिलेंगे जो इसे समस्या के रूप में देखते ही नहीं है कि, भारत की सेना विदेशियों के हथियारों पर निर्भर है !! घूम फिर कर वे अपनी बहस को इस बिंदु के इर्द गिर्द रखते है कि, भारत की सेना “पर्याप्त” रूप से मजबूत है। अमेरिका हमारा मित्र देश है, अत: वह चीन को ख़त्म करने के बाद भारत को ख़त्म नहीं करेगा। अब भारत का कभी युद्ध नहीं होगा, अत: आपको भय फैलाने की जरूरत नहीं है। और यदि भारत को युद्ध का सामना करना पड़ता भी है तो भारत की सेना पर्याप्त रूप से मजबूत है !! आदि आदि
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दुसरे शब्दों में, वे भारत की सेना को विदेशियों के हथियारों पर निर्भर बनाए रखना चाहते है, ताकि अमेरिका भारत की जमीन एवं संसाधनों का इस्तेमाल चीन को तोड़ने में कर सके। दरअसल, ये बुद्धिजीवी युद्ध की चर्चा को टाल कर भारत को युद्ध की तरफ धकेल रहे है। और वे ऐसा इसीलिए कर रहे है, क्योंकि पेड मीडिया ने उन्हें ऐसा करने के लिए चाबी दी है।
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मेरे विचार में, भारत के प्रत्येक नागरिक को अब इस बारे में स्टेंड लेना चाहिए कि क्या वह अमेरिका को चीन के खिलाफ अपनी सेना एवं जमीन का इस्तेमाल करने देना चाहता है या नहीं। और यदि आप भारत की जमीन का इस्तेमाल चीन के खिलाफ करने देना चाहते है, तो आपको यह बात समझ लेनी चाहिए कि, यह फैसला पेड मीडिया का है, आपका नही। क्योंकि पेड मीडिया के प्रायोजक इस युद्ध की तैयारी पिछले 10 वर्षो से कर रहे है। भारत में ऍफ़डीआई उनकी इसी तैयारी का हिस्सा है।
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(6) समाधान : मेरा प्रस्ताव जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर का है। यदि ये दोनों क़ानून गेजेट में छाप दिए जाते है तो भारत अगले 5-6 वर्ष में स्वदेशी तकनीक आधारित इतने ताकतवर हथियार बना सकता है, कि हम चीन एवं अमेरिका की सेना का मुकाबला कर सके। यदि एक बार हम खुद के हथियार बनाने की क्षमता जुटा लेते है, तो युद्ध को टाला जा सकता है।
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यदि हम स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करने में असफल रहते है तो चीन से युद्ध टल जाने पर भी अमेरिका भारत का पूरी तरह से अधिग्रहण कर लेगा।
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kashish
ragna to mai bhi chahati thi apne khas ko chaye vo holi ke rang mai ho ya pyar mai ...
khair aise kismat kha meri jo mai use rang pao vo holi ke ho ya pyar ke...
by kashish
બદનામ રાજા
प्रेम से भागता हुआ हर वो शख्स,
किस हद तक भागा होगा प्रेम में...
🌸
Avinash
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।
Regards,
Avinash G
insta id - @arise_with_avi
Meeta
ना यादों से शिकवा है, ना मुलाक़ातों से गिला,
सुकून अब खुद में है...यही ज़िंदगी का सिलसिला!!!
- Meeta
Mrudhula
I remind myself that my personality is my strength.
I don’t need to change for anyone just to be accepted.
If a place does not value me,
I will not stay there.
If people compare me,
I will not lose myself in it.
Happiness comes closer
when I stop proving my worth.
In this changing society,
I cannot expect pure truth from everyone —
but I can remain true to myself.
Life’s cycle may be decided by destiny,
but the direction of my journey is in my hands.
This poem is my quiet promise to myself.
To stay real.
To stay strong.
To stay me. 🌿✨
Shailesh Joshi
સામેવાળી વ્યક્તિનો વિચાર કરવો
અને માત્ર પોતાનો જ વિચાર કરવો
આ બંને સંજોગોમાં ફાયદો તો આપણને જ થતો હોય છે,
હા એમાં ફર્ક માત્ર એટલો જ કે,
દરવખતે, ને બધી બાબતોમાં સામેવાળી વ્યક્તિનો વિચાર કરતી વ્યક્તિના જીવનમાં ભલે બહુ મોડે મોડે, પરંતુ એનો ફાયદો તો અવશ્ય મળતો હોય છે, અને એ ફાયદો પણ કેવો ?
એ ફાયદો એકદમ મજબૂત, લાંબા ગાળાનો, કે પછી કાયમી હોય છે, અને સાથે-સાથે આપણી ઉમ્મીદ, અને ધારણાથી લગભગ સવાયો, કે દોઢો ફાયદો મળતો હોય છે, જ્યારે હરહંમેશ માત્રને માત્ર
પોતાના માટે વિચારવામાં જ્યાં સુધી ફાયદો મળે ત્યાં સુધી જ મળતો હોય છે, પછી સમય જતાં એક વખત એવો આવે છે, કે જ્યારે આપણને પોતાને અંદરને અંદર ઊંડો અફસોસ થવા લાગે છે, ભલે પછી આપણી પાસે કંઈ હોય કે ન હોય, છતાંય જાણે આપણા જીવનમાં કંઈક ખૂટતું હોય, કંઈક ખૂચતું હોય એવો સતત અનુભવ કાયમી ધોરણે ઘર કરી લે છે.
Hardik Boricha
ऐसे रखूँगा ख़्याल तेरा मैं
जैसे प्राइवेट अस्पताल वाले मरीज का रखते हैं....❤️
Hardik Boricha
प्रेम अपनी परिपूर्ण मंजिल तलाश करता है,
अपनी प्रेमिका को ही पत्नी बनाना चाहता है..❤️🌻
Hardik Boricha
""रिश्ता-ए-उल्फत को ज़ालिम यूँ ना बेदर्दी से तोड़,,
दिल तो फिर जुड़ जाएगा लेकिन गिरह रह जाएगी...""💔🖤
Falguni Dost
વાત વાતે રંગ બદલતા ને પણ રંગોના ત્યોહારની રંગબેરંગી શુભેરછા.
- ફાલ્ગુની દોસ્ત
શુભ રાત્રિ 🧡💛💚🩵💙💜❤️🤎🖤🩶🤍🩷
Pankaj Goswamy
આંખમાં આકાશ લઈ ફરતો રહ્યો,
મૂંગું કોઈ વાદળ હતો એ છોકરો;
રણની રેતીમાં પગલાં લખતો રહ્યો,
પોતાનો જ સાક્ષી હતો એ છોકરો;
ભીડ વચ્ચે નામ ઘણાં સાંભળ્યા,
પણ અંદરથી એકલો હતો એ છોકરો;
હાસ્યના હોઠે દીવો રાખી દીધો,
અંતરમાં અંધકાર હતો એ છોકરો;
ઠોકરોને ભાગ્ય માની ચાલતો,
દર્દનો વ્યવહાર હતો એ છોકરો;
સવાલોની સાંજ ઊતરે ત્યારે,
પોતાનો જ જવાબ હતો એ છોકરો;
સમય સામે ઝૂકી ન ગયો ક્યારેય,
મૌનનો મિનાર હતો એ છોકરો;
'કલ્પ' કહે, રણમાં ફૂલ ખીલે ક્યારેક,
એવો જ એક અણસાર હતો એ છોકરો..!!
- પંકજ ગોસ્વામી 'કલ્પ'
આશુતોષ
में पर्वत बन खड़ा रहा, सख्त जो था,
वो झरना बनकर बह गई, चंचल जो थी ।
- આશુતોષ
વૈભવકુમાર ઉમેશચંદ્ર ઓઝા
તારી સાથે રંગે રમવાથી જ થોડી ધૂળેટી હોય,
હું તો તારા જ રંગે રંગાયો છું.
- સ્પંદન
Chintansinh Jadav
https://www.matrubharti.com/book/19989641/raja-dahir-sen-the-last-hindu-emperor-of-sindh
નમસ્કાર મિત્રો
સમગ્ર વિશ્વમાં યુદ્ધનાં શંખ વાગે છે ત્યારે ભારત એક શાંતિપ્રિય રાષ્ટ્ર તરીકે દેખાય છે , આજ કાલથી નહીં પરંતુ આ ભુમી અને અને આ ભુમી ના લોકો પહેલેથી જ શાંતીપ્રિય રહ્યા છે, આ ભુમી મહાવીર , બોદ્ધ , ગાંધીજી જેવી મહાન આત્માઓ થી કંડોરયેલી છે , પરંતુ જયારે આ ભૂમિ નિ રક્ષા કાજે અંતીમ વિકલ્પ યુધ્ધ હોય ત્યારે છત્રપતી શિવાજી મહારાજ, મહારાણા પ્રતાપ , ભગતસિંહ , સુખદેવ રાજગુરુ, ચંદ્રશેખર આઝાદ આવા મહાન વ્યક્તિત્વ પણ આ ભુમી માં જન્મેલા છે . માં ભારતી ની રક્ષા કાજે બલિદાન આપેલું ....
આવા જ એક વિર યોદ્ધા" સિંધ ની ધરતી ના અંતીમ હિન્દુ સમ્રાટ રાજા દાહીર સેન" ની વાતો વિશે આપણે ઓછું સાંભળ્યું હશે એવા મહાન યોદ્ધા ની સ્ટોરી આપ સમક્ષ રજુ કરી છે આશા રાખું છું કે આપ સૌને પસંદ આવશે ....
ધન્યવાદ
Dr. Damyanti H. Bhatt
होली की हार्दिक शुभकामनाएं 🌹🌹🙏🌹🌹
Dr. Damyanti H. Bhatt
Happy Holi, 🌹🌹🙏🌹🌹
રોનક જોષી. રાહગીર
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🎊એક નવ રચના 🎉
Shefali
#shabdone_sarname__
Thakor Pushpaben Sorabji
જય શ્રી કૃષ્ણ
Abantika
Hey my family! ✨
Sabse pehle toh aap sabko Happy Holi! 🎨
Pata hai, meri stories ke asli rang toh aap log hi ho. Aapke reads aur pyare comments ke bina mera writing ka safar adhoora hota. Wish karti hoon ki is saal aapki life khushiyon se itni bhar jaye jitni meri notifications aapke pyaar se bhari rehti hain! 💖
Enjoy kijiye, sweets khaiye aur safe rahiye. Happy Holi once again!"
SAYRI K I N G
बिखरकर संवरना, भी बेहद खूबसूरत है, उनकी उलझी जुल्फें संवरना, हर आशिक की मोहब्बत है, वो जो पत्थर है दुनिया के सामने, किसी एक के सामने बिखरे, हर इश्क की रूहानियत है।
Ashish jain
*सोच की गरीबी*
धन का निर्धन संघर्ष चुनता, भाग्य को भी मोड़ देता है,
हाथों की मेहनत से अपनी, वह बरकत जोड़ लेता है।
कोई दिखाए रास्ता तो, वह सुनता और करता है,
छोटा ही सही पर आगे बढ़ने का, वह साहस हरदम भरता है।
पर जिसका मन ही निर्धन है, वह कभी न आगे बढ़ता है,
अहंकार की संकरी गलियों में, वह हर पल खुद से लड़ता है।
जैसे कुएँ का मेंढक समझे, बस यही जगत की सीमा है,
बाहर का सूरज क्या जाने? उसकी सोच का दीया धीमा है।
वह दूसरों को मानसिक सुख, कभी न दे पाता है,
कड़वे बोल और रूखी बातों से, बस दिल ही दुखाता है।
मनमानी उसकी ऐसी जैसे, जग का भार उसी पर हो,
दिखावा ऐसा करता जैसे, सबसे बड़ा वही घर हो।
धन की गरीबी मिट जाती है, कोशिश के पैमानों से,
पर सोच की गरीबी हारती है, केवल अपने अभिमानों से।
जो झुकता है वह पाता है, जो अकड़ा है वह ढहता है,
कुएँ का वासी अंत समय तक, बस कुएँ में ही रहता है।
Adv. आशीष जैन
7055301422
Raj Phulware
IshqKeAlfaaz
सरकारने शाळेतल्या...
InkImagination
Happy Holi 🥰🥰
Sonalpatadia darpan
હું ભરી આવું રંગની મુઠ્ઠી,તું લઈ આવજે કોરું મન,
કેસુડાનાં ફૂલની સાખે, વગડો બનશે વૃંદાવન.
prit tembhe
नशीब......🗒️✍️❣️
Raju kumar Chaudhary
स्याही से नहीं, दिल की धड़कनों से लिखता हूँ,
हर कहानी में अपना एक हिस्सा रखता हूँ।
कभी इश्क़, कभी संघर्ष, कभी सपनों की उड़ान,
हर भाषा में बस जज़्बातों का ही बयान।
अगर शब्दों में सुकून और तूफ़ान दोनों चाहते हो,
तो Follow करिए…
यहाँ हर रचना में आपका ही अरमान छुपा है। ✨
Narayan
तुम सहेज कर रखना मेरे प्रेम के रंगों को...
सुना हैं.... एक और दुनिया है इस दुनिया के बाद, हम वहां मिलेंगे ...! ❤️
Avinash
हेलो मेरे दोस्तो, कैसे हो आप सब लोग?
आशा करता हु कि आप सब ठीक है। मै मातृभारती application 2020 मे use करता था परंतु मेरे जॉब और स्टडी के वजह से मैने सभी social media platform delete कर दिए थे।
आज 4 मार्च 2026 को मुझे अचानक से मुझे अपने कुछ फ्रेंड्स की याद आई जिनसे में यहां पे बाते करता था। सो मैने डाउनलोड कर दिया। #mathrubharti
आशा करता हु कि मेरे फ्रेंड्स अभी भी यहां हो 🙏
#mathrubharti
Shailesh Joshi
સોનું "તોલવામાં"
જેટલી ચોકસાઈ રાખવામાં આવે છે,
એટલી જ ચોકસાઈ,
શબ્દો "બોલવામાં" રાખવામાં આવે
તો બોલાયેલ શબ્દોની કિંમત
સોના કરતા પણ વધી જાય.
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